गुरुग्राम में योग दिवस पर ग्लैमर का तड़का:एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी और एलनाज नौरोजी ने कराया योग, खेलमंत्री गौरव गौतम सरकारी कार्यक्रम में पहुंचे

गुरुग्राम में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर योग और बॉलीवुड ग्लैमर का संगम देखने को मिला। मशहूर फिटनेस आइकन एवं बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी और जर्मन अभिनेत्री एलनाज नौरोजी ने हजारों लोगों को योग और सेहतमंद जीवनशैली के टिप्स देते हुए योगाभ्यास कराया। इस खास मौके पर जहां साइबर सिटी के मॉल्स में बॉलीवुड हस्तियों ने समां बांधा, वहीं ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित मुख्य सरकारी कार्यक्रम में प्रदेश के खेल मंत्री गौरव गौतम ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने सैकड़ों की संख्या में मौजूद लोगों के साथ योगाभ्यास किया। इसके अलावा सोसाइटियों में भी रेजिडेंट्स द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर योग किया। द्वारका एक्सप्रेसवे, गोल्फ कोर्स रोड, न्यू गुरुग्राम की सोसाइटियों में लोग योग करते नजर आए। साइबर सिटी मॉल में शिल्पा शेट्टी का जलवा गुरुग्राम के सबसे पॉश और लोकप्रिय डीएलएफ साइबर हब सिटी मॉल में सुबह से ही भारी उत्साह का माहौल था। बॉलीवुड की सबसे फिट अभिनेत्रियों में शुमार शिल्पा शेट्टी को अपने बीच पाकर योग प्रेमियों का जोश दोगुना हो गया। शिल्पा ने मंच संभालते ही बेहद सरल और प्रभावी अंदाज में लोगों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर को मोड़ने या कसरत करने का नाम नहीं है, बल्कि यह मन, आत्मा और शरीर को एक सूत्र में पिरोने का विज्ञान है। शिल्पा शेट्टी ने खुद कठिन आसनों को सहजता से करके दिखाया और उपस्थित लोगों से प्राणायाम तथा ध्यान को अपनी दैनिक दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाने की अपील की। उनके साथ सैकड़ों युवाओं और कामकाजी पेशेवरों ने भी सूर्य नमस्कार और अनुलोम-विलोम जैसे महत्वपूर्ण योगासन किए। एलान मिराकल मॉल में एलनाज नौरोजी ने बिखेरी चमक ग्लैमर का दूसरा बड़ा केंद्र सेक्टर-84 स्थित एलान मिराकल मॉल बना, जहां इंडो-जर्मन अभिनेत्री एलनाज नौरोजी ने ‘सनराइज योग सेशन’ किया। सुबह 6:00 बजे से ही मॉल परिसर में योग के दीवाने जुटने लगे थे। एलनाज ने योग सत्र की शुरुआत की और उपस्थित महिलाओं व युवाओं को मानसिक शांति और तनाव मुक्ति के लिए गाइडेड ब्रीदिंग के गुरु सिखाए। एलनाज ने कहा कि भागदौड़ भरी आधुनिक जिंदगी में मानसिक रूप से खुद को शांत रखना सबसे बड़ी चुनौती है, और योग ही इसका एकमात्र और सबसे अचूक समाधान है। सरकारी कार्यक्रम में पहुंचे खेल मंत्री मॉस और कॉर्पोरेट जगत से अलग जिला प्रशासन द्वारा ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में एक विशाल और भव्य जिला स्तरीय योग समारोह का आयोजन किया गया। इस मुख्य सरकारी कार्यक्रम में हरियाणा के युवा अधिकारिता, उद्यमिता और खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौरव गौतम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। स्टेडियम में उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस बल और हजारों नागरिकों के साथ खेल मंत्री ने भी चटाई पर बैठकर पूरे प्रोटोकॉल के साथ योग किया। खेलमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से आज योग को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिली है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे खेलों के साथ-साथ अपनी शारीरिक क्षमता और मानसिक एकाग्रता को बढ़ाने के लिए हर दिन योग को अपनाएं। स्वस्थ जीवन का आधार है योग उन्होंने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन, सकारात्मक सोच और आत्मिक संतुलन का आधार है। सभी से प्रतिदिन योग अपनाने, फिट इंडिया अभियान से जुड़ने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग रहते हुए आत्मनिर्भर हरियाणा और विकसित भारत के निर्माण में सहभागी बनने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री नायब सैनी के नेतृत्व में हरियाणा खेल, स्वास्थ्य, शिक्षा और जनसेवा सहित प्रत्येक क्षेत्र में निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। जिला जेल में योग दिवस मनाया योग दिवस के अवसर पर आज जिला जेल गुरुग्राम में “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग” थीम के अंतर्गत आयुष विभाग एवं आर्ट ऑफ लिविंग, गुरुग्राम के संयुक्त तत्वावधान में योग शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लगभग 2,800 बंदियों सहित जेल अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों को योगासन, प्राणायाम एवं मेडिटेशन का अभ्यास कराया गया तथा स्वस्थ एवं संतुलित जीवन के लिए नियमित योग अपनाने का संदेश दिया गया।
लेबनान पर हमले से नाराज ईरान ने होर्मुज बंद किया:कहा- इजराइल पर अमेरिका लगाम नहीं लगा पा रहा; आज स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान की बातचीत

लेबनान पर इजराइल के हमले से नाराज होकर ईरान ने एक बार फिर से होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है। ईरान की जॉइंट मिलिट्री कमांड ने सरकारी टीवी पर इसका ऐलान किया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि ईरान ने अपनी सभी जिम्मेदारियां पूरी की हैं, लेकिन अमेरिका, इजराइल पर लगाम नहीं लगा पा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून की रात शांति समझौते पर दस्तखत हुए थे। इसमें होर्मुज को खोलने और लेबनान में हमले बंद करने की शर्तें थीं। पीस डील पर साइन के बाद भी इजराइल ने लेबनान में हमले जारी रखे। इस बीच अमेरिका और ईरान दोनों देश शांति वार्ता पर बातचीत के लिए स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं। अमेरिकी डेलिगेशन में मिडिल ईस्ट के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर हैं। वहीं, ईरानी डेलिगेशन का नेतृत्व विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे हैं। होर्मुज में ईरानी नौसेना की चेतावनी का VIDEO पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान की जहाजों को चेतावनी: ईरान की रिवोल्यूशनरी फोर्स (IRGC) ने जहाजों को होर्मुज के पास से न गुजरने की चेतावनी दी और कहा कि अगर वे ऐसा करते हैं तो उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं होगी। 2. ईरानी टीम स्विट्जरलैंड रवाना: अमेरिका से बातचीत करने ईरान की टीम स्विट्जरलैंड रवाना हो गई। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। 3. भारत से जुड़े 3 तेल टैंकर ने होर्मुज पार किया: भारतीय झंडे वाले तीन तेल टैंकर शनिवार को सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर भारत के लिए रवाना हो गए। इन जहाजों में 8.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चा तेल और 94 भारतीय क्रू मेंबर शामिल हैं। 4. नेतन्याहू बोले- हमले जारी रखेंगे: इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि इजराइल अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा, और दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह पर हमले जारी रखेगा। 5. ट्रम्प बोले- पाकिस्तान ने बहुत मदद की: अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ हुए समझौते (MoU) में पाकिस्तान ने अमेरिका की बहुत मदद की। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
भारत बोला- PAK राष्ट्रपति का बयान नफरत फैलाने वाला:हमारे मामलों में दखल न दें; जरदारी बोले थे- वाराणसी की मस्जिद खतरे में, कार्रवाई रोकी जाए

पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के भारत की मस्जिद को लेकर दिए भड़काऊ बयान पर भारत ने रिएक्शन दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर कमेंट करने का कोई अधिकार नहीं है। विदेश मंत्रालय की तरफ से शनिवार को जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि मानवाधिकारों के मामले में पाकिस्तान का अपना रिकॉर्ड बहुत खराब रहा है, जिस पर दुनिया भर में चर्चा होती है। ऐसे में पाकिस्तान की तरफ से ऐसी बयानबाजी बेतुकी लगती हैं। अलग-अलग धर्मों के अल्पसंख्यकों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाने और उनका उत्पीड़न करने का पाकिस्तान का लंबा इतिहास जगजाहिर है। दरअसल जरदारी ने कहा था कि भारत में कई ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थल खतरे में हैं। उन्होंने खास तौर पर वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद का जिक्र किया। जिसे रेलवे ने अवैध निर्माण का नोटिस जारी किया है। जरदारी बोले थे- भारत में मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई से तनाव बढ़ सकता है पाकिस्तान के राष्ट्रपति कार्यालय ने शनिवार को एक प्रेस नोट जारी किया। जिसमें जरदारी ने कहा कि भारत में कई ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थल खतरे में हैं। उन्होंने खास तौर पर वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद का जिक्र किया, जिसे उन्होंने करीब 1000 साल पुरानी मस्जिद बताया। जरदारी ने भारत से अपील की कि ऐसे धार्मिक स्थलों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई को तुरंत रोका जाए। उनका कहना है कि इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है और देश में अस्थिरता पैदा हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अल्पसंख्यकों के अधिकारों और साझा सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करनी चाहिए। अब जानिए क्या है वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद विवाद… वाराणसी के काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब परियोजना के तहत रेलवे प्रशासन ने स्टेशन के पास स्थित गंज शहीदा मस्जिद को नोटिस जारी कर 20 जून तक परिसर खाली करने को कहा था। रेलवे का कहना है कि मस्जिद रेलवे की जमीन पर बना अवैध ढांचा है और 1991 में दायर एक दीवानी मुकदमे में अगस्त 2024 में आए फैसले के बाद कार्रवाई की जा रही है। रेलवे का कहना है कि 1991 में दायर मुकदमा 28 अगस्त 2024 को खारिज होने के बाद मस्जिद हटाने का रास्ता साफ हो गया। वहीं, मस्जिद प्रबंधन समिति का दावा है कि मामला मस्जिद के अस्तित्व से नहीं, बल्कि उसके पूर्वी हिस्से की जमीन से जुड़ा था और रेलवे अदालत के फैसले की गलत व्याख्या कर रहा है। मस्जिद की 3 तस्वीरें… रेल प्रशासन का क्या कहना है, 4 पॉइंट… मस्जिद कमेटी का पक्ष; बोले- हाईकोर्ट जाएंगे —————————
भारत बोला- PAK राष्ट्रपति का बयान नफरत फैलाने वाला:हमारे मामलों में दखल न दें; जरदारी बोले थे- वाराणसी की मस्जिद खतरे में, कार्रवाई रोकी जाए

पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के भारत की मस्जिद को लेकर दिए भड़काऊ बयान पर भारत ने रिएक्शन दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर कमेंट करने का कोई अधिकार नहीं है। विदेश मंत्रालय की तरफ से शनिवार को जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि मानवाधिकारों के मामले में पाकिस्तान का अपना रिकॉर्ड बहुत खराब रहा है, जिस पर दुनिया भर में चर्चा होती है। ऐसे में पाकिस्तान की तरफ से ऐसी बयानबाजी बेतुकी लगती हैं। अलग-अलग धर्मों के अल्पसंख्यकों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाने और उनका उत्पीड़न करने का पाकिस्तान का लंबा इतिहास जगजाहिर है। दरअसल जरदारी ने कहा था कि भारत में कई ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थल खतरे में हैं। उन्होंने खास तौर पर वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद का जिक्र किया। जिसे रेलवे ने अवैध निर्माण का नोटिस जारी किया है। जरदारी बोले थे- भारत में मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई से तनाव बढ़ सकता है पाकिस्तान के राष्ट्रपति कार्यालय ने शनिवार को एक प्रेस नोट जारी किया। जिसमें जरदारी ने कहा कि भारत में कई ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थल खतरे में हैं। उन्होंने खास तौर पर वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद का जिक्र किया, जिसे उन्होंने करीब 1000 साल पुरानी मस्जिद बताया। जरदारी ने भारत से अपील की कि ऐसे धार्मिक स्थलों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई को तुरंत रोका जाए। उनका कहना है कि इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है और देश में अस्थिरता पैदा हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अल्पसंख्यकों के अधिकारों और साझा सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करनी चाहिए। अब जानिए क्या है वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद विवाद… वाराणसी के काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब परियोजना के तहत रेलवे प्रशासन ने स्टेशन के पास स्थित गंज शहीदा मस्जिद को नोटिस जारी कर 20 जून तक परिसर खाली करने को कहा था। रेलवे का कहना है कि मस्जिद रेलवे की जमीन पर बना अवैध ढांचा है और 1991 में दायर एक दीवानी मुकदमे में अगस्त 2024 में आए फैसले के बाद कार्रवाई की जा रही है। रेलवे का कहना है कि 1991 में दायर मुकदमा 28 अगस्त 2024 को खारिज होने के बाद मस्जिद हटाने का रास्ता साफ हो गया। वहीं, मस्जिद प्रबंधन समिति का दावा है कि मामला मस्जिद के अस्तित्व से नहीं, बल्कि उसके पूर्वी हिस्से की जमीन से जुड़ा था और रेलवे अदालत के फैसले की गलत व्याख्या कर रहा है। मस्जिद की 3 तस्वीरें… रेल प्रशासन का क्या कहना है, 4 पॉइंट… मस्जिद कमेटी का पक्ष; बोले- हाईकोर्ट जाएंगे —————————
मूंग दाल समोसा रेसिपी: आलू नहीं, घर पर बनाएं हाई प्रोटीन मूंग दाल वाला समोसा; एक मिनट में तैयार हो जाएगा

लेख के लिए: 2 कप मैदा, 3 बड़े चम्मच नमक, 3 बड़े चम्मच नमक, आवश्यकतानुसार पानी छवि: फ्रीपिक स्टफिंग: 1 कप बड़ा मूंगदाल, 1 छोटा मोटा जीरा, 1 छोटा मोटा मूंग दाल, 1/2 छोटा मोटा धनिया पाउडर, 1/2 छोटा मोटा धनिया पाउडर, 1/4 छोटा मोटा धनिया पाउडर, 1 छोटा छोटा मोटा गरम मसाला, 1 हरी मिर्च, 1 टुकड़ा अदरक, तेल, नमक छवि: सोशल मीडिया बनाने की विधि: सबसे पहले एक पाइथन में मैदा, नमक और तेल का निर्माण अच्छा तरह से मिला लें। अब थोड़ा-थोड़ा पानी डाले हुए सख्त आटा गूंध लें। 15-20 मिनट के लिए इंटरनेट पर फॉलो करें। छवि: फ्रीपिक अब भीगी हुई मूंग दाल का पानी, उसे दरदरा पीस लें। एक पैन में तेल गर्म करें और इसमें जीरा और सौंफ का मसाला चटकाएं। इसके बाद हरी मिर्च और प्रमुख स्मारक कुछ सेकंड। छवि: सोशल मीडिया इसमें पिसी हुई मूंग दाल डाली और मध्यम आंच पर 4-5 मिनट तक शुरुआती गति पकड़ी। लाल मिर्च, हल्दी, धनिया पाउडर, गर्म मसाला और नमक के टुकड़े अच्छी तरह मिला लें। छवि: सोशल मीडिया इसके बाद अटेच्ट्स की छोटी-छोटी लोएं निकलीं और उन्हें बेल लें। बीच से विखंडित कोन का आकार और इसमें मूंग दाल की स्टफिंग भर शामिल है। विद्यार्थियों को पानी भरने के लिए अच्छी तरह से बंद कर दें। छवि: एआई अब मसाले में तेल गर्म करें और समोसों को मिश्रण पर मसाले तक तल लें। अगर आपको तेल खाना पसंद है, तो एयर फ्रायर या अयाल में भी बेक कर सकते हैं। छवि: एआई गरमा-गरम मूंग दाल समोसे को हरी चटनी, इमली की चटनी या एक कप चाय के साथ बनाएं। इस शाम के लिए एक रॉकेट और टेस्टी विकल्प उपलब्ध है। छवि: फ्रीपिक मूंग दाल प्रोटीन और बेरोज़गार से अधिक होती है, जिससे बाकी हिस्सों से सबसे बड़ा रसायन बन जाता है। अगर आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं या वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, तो यह रेसिपी जरूर आजमाएं। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)मूंग दाल समोसा रेसिपी(टी)मूंग दाल रेसिपी(टी)मूंग दाल समोसा(टी)समोसा रेसिपी(टी)हाई प्रोटीन स्नैक
सपा प्रमुख का पद छोड़ सकते हैं अखिलेश यादव, बीजेपी के संपर्क में हैं नेता: यूपी मंत्री का बड़ा दावा | भारत समाचार

आखरी अपडेट:20 जून, 2026, 22:15 IST बीजेपी मंत्री ओम प्रकाश राजभर का दावा, समाजवादी पार्टी प्रमुख पद छोड़ सकते हैं अखिलेश यादव, बीजेपी के संपर्क में हैं एसपी नेता, एसपी ने नहीं दिया कोई जवाब, उत्तर प्रदेश में बढ़ी बहस समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव. (छवि: पीटीआई) उत्तर प्रदेश में राज्य मंत्री और भाजपा नेता ओम प्रकाश राजभर के इस दावे के बाद राजनीतिक विवाद छिड़ गया है कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ सकते हैं और कई सपा नेता भाजपा के संपर्क में हैं। राजभर ने पत्रकारों से बात करते हुए यह टिप्पणी की और आरोप लगाया कि हालिया राजनीतिक असफलताओं के बाद समाजवादी पार्टी के भीतर आंतरिक असंतोष बढ़ रहा है। बीजेपी मंत्री ने किया बड़ा दावा राजभर के मुताबिक समाजवादी पार्टी के नेताओं का एक वर्ग पार्टी की मौजूदा दिशा और नेतृत्व से नाखुश है. उन्होंने दावा किया कि कुछ सपा पदाधिकारी और नेता भाजपा के साथ संपर्क बनाए हुए हैं और सुझाव दिया कि आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकते हैं। राजभर ने आगे आरोप लगाया कि अखिलेश यादव अंततः पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ सकते हैं, हालांकि उन्होंने दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया। एसपी को अभी तक जवाब नहीं देना है समाजवादी पार्टी ने मंत्री की टिप्पणी पर तुरंत कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। अखिलेश यादव या वरिष्ठ सपा नेताओं की ओर से भी ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि पार्टी के नेतृत्व ढांचे में किसी बदलाव पर विचार किया जा रहा है. राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने कहा कि इसी तरह के दावे उत्तर प्रदेश की राजनीति में समय-समय पर सामने आते रहे हैं, खासकर प्रमुख चुनावों और संगठनात्मक फेरबदल से पहले। यूपी में सियासी पारा चढ़ा! यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश में भाजपा और विपक्ष के बीच तेज होती राजनीतिक लड़ाई के बीच आई है, जहां दोनों पक्ष आगामी चुनावी मुकाबलों के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं। जहां भाजपा ने राज्य में अपनी राजनीतिक स्थिति के बारे में विश्वास जताने की कोशिश की है, वहीं विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ दल के नेताओं पर अटकलबाजी वाले बयानों के माध्यम से भ्रम पैदा करने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। क्या राजभर के दावे वास्तविक राजनीतिक घटनाक्रम का संकेत देते हैं या व्यापक राजनीतिक संदेश का हिस्सा हैं, यह देखा जाना बाकी है, लेकिन टिप्पणियों ने पहले ही उत्तर प्रदेश के राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया सपा प्रमुख का पद छोड़ सकते हैं अखिलेश यादव, बीजेपी के संपर्क में हैं नेता: यूपी के मंत्री का बड़ा दावा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)उत्तर प्रदेश राजनीतिक विवाद(टी)ओम प्रकाश राजभर(टी)अखिलेश यादव का इस्तीफा(टी)समाजवादी पार्टी नेतृत्व(टी)बीजेपी एसपी संबंध(टी)उत्तर प्रदेश की राजनीति(टी)आंतरिक पार्टी असंतोष(टी)राजनीतिक घटनाक्रम यूपी
पंजाब सरकार का दावा, फॉरेंसिक जांच में सीएम भगवंत मान और वायरल वीडियो में कोई मेल नहीं मिला | भारत समाचार

आखरी अपडेट:20 जून, 2026, 20:50 IST पंजाब सरकार का कहना है कि फोरेंसिक जांच में सीएम भगवंत मान और वायरल वीडियो के बीच कोई मेल नहीं पाया गया है, इसे साजिश बताया गया है, विपक्ष के साथ राजनीतिक विवाद जारी रहने पर डीजीपी जांच के आदेश दिए गए हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान. (पीटीआई फाइल फोटो) पंजाब सरकार ने शुक्रवार को दावा किया कि फोरेंसिक जांच में मुख्यमंत्री भगवंत मान और उस वायरल वीडियो के बीच कोई मेल नहीं पाया गया है, जिसने राज्य में राजनीतिक विवाद पैदा कर दिया था। कथित वीडियो में मुख्यमंत्री की तरह दिखने वाले एक व्यक्ति को सिख गुरुओं के चित्रों पर शराब छिड़कते हुए दिखाया गया है। सरकार की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, वीडियो मनगढ़ंत था और मुख्यमंत्री की छवि खराब करने के उद्देश्य से एक बड़ी साजिश का हिस्सा था। सरकार ने दावा किया कि वीडियो के 1,191 फ़्रेमों के फोरेंसिक विश्लेषण से पता चला कि कोई भी भगवंत मान से मेल नहीं खाता है और दावा किया कि फुटेज में देखा गया व्यक्ति मुख्यमंत्री जैसा दिखने वाला एक अभिनेता था। सरकार ने लगाया सीएम को बदनाम करने की साजिश का आरोप पंजाब सरकार के अनुसार, विपक्षी दलों और कुछ राजनीतिक समूहों ने गलत सूचना फैलाने और जनता के बीच भ्रम पैदा करने के लिए वीडियो का इस्तेमाल किया था। बयान में कहा गया है कि मान शुरू से ही कहते रहे थे कि वीडियो फर्जी है और उन्होंने बार-बार मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। सरकार ने दावा किया कि निष्कर्षों ने मुख्यमंत्री की स्थिति की पुष्टि की है कि वीडियो वास्तविक नहीं था। जत्थेदार से मुलाकात को लेकर दावा बयान में आगे दावा किया गया कि मान ने अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज के समक्ष विवाद पर अपना पक्ष रखने का प्रयास किया था। सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान जत्थेदार को सूचित किया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति वह नहीं है और मामले को विस्तार से समझाने का अवसर मांगा। बयान में आरोप लगाया गया कि मान को पूरी तरह से अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया लेकिन पूरी बातचीत के दौरान गरिमा और सम्मान बनाए रखा गया। डीजीपी ने मामले की जांच का निर्देश दिया पंजाब सरकार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को वीडियो बनाने और प्रसारित करने में कथित रूप से शामिल लोगों की पहचान करने का निर्देश दिया है। बयान के अनुसार, मान ने अधिकारियों से कथित साजिश से जुड़े सभी व्यक्तियों का पता लगाने और उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। सरकार ने विवाद को “सच्चाई और झूठ” के बीच की लड़ाई बताया और कहा कि वीडियो बनाने या वितरित करने के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। राजनीतिक घमासान जारी यह विवाद पंजाब में चल रही राजनीतिक बहस के बीच आया है, जिसमें सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और विपक्षी दल वीडियो की प्रामाणिकता और मामले से निपटने को लेकर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। जहां सरकार ने अपने दावों के समर्थन में फोरेंसिक निष्कर्षों का हवाला दिया है, वहीं विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सवाल उठाना जारी रखा है। यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है और राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में इस पर बहस जारी रहने की संभावना है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें जगह : चंडीगढ़, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया पंजाब सरकार का दावा है कि फॉरेंसिक जांच में सीएम भगवंत मान और वायरल वीडियो के बीच कोई मिलान नहीं पाया गया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)भगवंत मान का वायरल वीडियो(टी)पंजाब सरकार विवाद(टी)फॉरेंसिक जांच वीडियो(टी)मनगढ़ंत राजनीतिक वीडियो(टी)सीएम को बदनाम करने की साजिश(टी)आम आदमी पार्टी पंजाब(टी)विपक्ष गलत सूचना पंजाब(टी)अकाल तख्त जत्थेदार बैठक
एक फैसला, छह ‘लापता’ सांसद और एक सेना में फूट की चर्चा: क्यों महाराष्ट्र की राजनीति ओम राजे निंबालकर पर नजर रख रही है | भारत समाचार

आखरी अपडेट:20 जून, 2026, 19:00 IST निंबालकर उन छह शिव सेना (यूबीटी) सांसदों में से एक हैं, जो रिपोर्टों के मुताबिक, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिव सेना में जाने पर विचार कर रहे हैं। मुंबई की एक सीबीआई अदालत ने शनिवार को 2006 में महाराष्ट्र कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर की हत्या के मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। छवि/एएनआई मुंबई की एक विशेष केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) अदालत ने 2006 के हाई-प्रोफाइल कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी के दोहरे हत्याकांड मामले में महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री पदमसिंह पाटिल और सात अन्य को बरी कर दिया है। विशेष न्यायाधीश एसआर नवांदर ने आरोपी से सरकारी गवाह बने पारसमल जैन के बयानों में पर्याप्त विरोधाभासों को देखते हुए फैसला सुनाया कि अभियोजन पक्ष साजिश की एक निश्चित श्रृंखला स्थापित करने में विफल रहा। ऐतिहासिक न्यायिक निर्णय बीस साल की कानूनी लड़ाई का नाटकीय समापन करता है जिसने धाराशिव जिले के राजनीतिक परिदृश्य को निर्धारित किया है। हालाँकि, कानूनी निष्कर्ष ने तुरंत एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। पवनराजे के बेटे, धाराशिव के सांसद ओमप्रकाश राजे निंबालकर के उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) द्वारा बुलाई गई लोकसभा सदस्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं होने के कुछ ही घंटों बाद यह फैसला आया। 24 घंटे के सख्त अल्टीमेटम और पार्टी व्हिप के बावजूद ओमराजे और पांच अन्य पार्टी सांसदों की अनुपस्थिति ने उद्धव सेना के भीतर एक आसन्न संरचनात्मक विभाजन के बारे में तीव्र अटकलों को हवा दे दी है, विद्रोही विधायक कथित तौर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट के साथ विलय करने की स्थिति में हैं। कानूनी समापन और ऑपरेटिव दलबदल का अंतर्विरोध अदालत के फैसले और पार्टी के आंतरिक विद्रोह के अंतर्संबंध ने महाराष्ट्र की गुटीय राजनीति के ऑप्टिकल ढांचे को पूरी तरह से बदल दिया है। विपक्षी महा विकास अघाड़ी गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं ने पहले दावा किया था कि ओम राजे अपने परिवार के लिए अनुकूल कानूनी परिणाम के वादे के तहत सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में शामिल होने पर विचार कर रहे थे। पदमसिंह पाटिल – जो उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के जैविक भाई हैं – अब सभी सह-आरोपियों के साथ पूरी तरह दोषमुक्त हो गए हैं, धाराशिव सत्ता गलियारे के अंदर संरचनात्मक उत्तोलन बिंदु रातोंरात बदल गए हैं। ओम राजे निंबालकर की राजनीतिक पहचान पूरी तरह से 2006 में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर उनके पिता की नृशंस हत्या के कारण बनी, जिसने स्थानीय सहानुभूति की एक बड़ी लहर पैदा की और उन्हें 26 साल की उम्र में सार्वजनिक जीवन में प्रेरित किया। दो दशकों तक, पाटिल के मजबूत सहकारी चीनी व्यापारी नेटवर्क के खिलाफ न्याय की खोज ने ओम राजे की जमीनी स्तर की अपील के एकमात्र आधार के रूप में काम किया। बरी होने से लंबे समय से चले आ रहे कानूनी दाग को पवार परिवार के नेटवर्क से दूर कर दिया गया है, साथ ही ओम राजे को विकासात्मक आधार पर अपनी उत्तरजीविता रणनीतियों का सख्ती से मूल्यांकन करने के लिए मजबूर किया गया है। स्थानीय विचार-विमर्श गुटीय संरेखण की कुंजी है फैसले के बाद प्रेस को संबोधित करते हुए, ओम राजे ने न्यायिक परिणाम और अपने रणनीतिक बदलावों के बीच किसी भी सीधे संबंध से इनकार किया, इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान यूबीटी नेतृत्व के साथ उनकी आपत्तियां निर्वाचन क्षेत्र प्रबंधन की तीव्र वास्तविकताओं से उपजी हैं। उन्होंने तर्क दिया कि मतदाताओं का खाली हाथ सामना करना अस्थिर हो गया है, जो सत्तारूढ़ गठबंधन और अलग-थलग विपक्षी ब्लॉक के बीच धन आवंटन में भारी असंतुलन की ओर इशारा करता है। विधायक ने संगठनात्मक उपेक्षा के बारे में भी गंभीर सवाल उठाए, जिसमें शीर्ष पार्टी प्रबंधकों की ओर से जमीनी स्तर पर पहुंच की स्पष्ट कमी देखी गई। विद्रोही सांसद समूह के लिए तत्काल प्राथमिकता शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ कानूनी रूप से सुरक्षित विलय को अंजाम देने के लिए दल-बदल विरोधी कानून की संख्या सीमा को पार करना बनी हुई है। ओम राजे ने पुष्टि की है कि वह अपने अंतिम गठबंधन की घोषणा करने से पहले स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ विस्तृत परामर्श करने के लिए धाराशिव लौटेंगे। जैसा कि राजनीतिक गुट प्रभाव के लिए तैयार हैं, 2006 की हत्या के मुकदमे का पतन साबित करता है कि महाराष्ट्र के अस्थिर पारिस्थितिकी तंत्र में, एक एकल अदालत का फैसला विधायी गणित को पूरी तरह से नया रूप देने की शक्ति रखता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में पथिकृत सेन गुप्ता पथिकृत सेन गुप्ता News18.com के वरिष्ठ एसोसिएट संपादक हैं और लंबी कहानी को छोटा करना पसंद करते हैं। वह राजनीति, खेल, वैश्विक मामलों, अंतरिक्ष, मनोरंजन और भोजन पर छिटपुट रूप से लिखते हैं। वह …और पढ़ें न्यूज़ इंडिया एक फैसला, छह ‘लापता’ सांसद और एक सेना में फूट की चर्चा: क्यों महाराष्ट्र की राजनीति ओम राजे निंबालकर पर नजर रख रही है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)महाराष्ट्र(टी)शिवसेना(टी)उद्धव ठाकरे(टी)एकनाथ शिंदे(टी)बीजेपी(टी)कोर्ट
‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा के बीच, शिवसेना यूबीटी सांसद ओम राजे निंबालकर का कहना है कि वह 2 दिनों में अगला कदम उठाएंगे | भारत समाचार

आखरी अपडेट:20 जून, 2026, 18:41 IST ऑपरेशन टाइगर की अटकलों के बीच, शिवसेना यूबीटी सांसद ओम राजे निंबालकर दो दिनों में अपने राजनीतिक रुख की घोषणा करेंगे, उन्होंने उद्धव या आदित्य ठाकरे की आलोचना नहीं करने की कसम खाई है। महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर की अटकलों के बीच, शिवसेना यूबीटी सांसद ओम राजे निंबालकर दो दिनों में अपने राजनीतिक रुख की घोषणा करेंगे, उन्होंने उद्धव या आदित्य ठाकरे की आलोचना नहीं करने की कसम खाई है। (छवि: एक्स) शिवसेना (यूबीटी) सांसद ओम राजे निंबालकर ने यह घोषणा करके अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों को हवा दे दी है कि वह अगले दो दिनों के भीतर अपना रुख स्पष्ट करेंगे, जबकि कथित “ऑपरेशन टाइगर” के आसपास चर्चा महाराष्ट्र की राजनीति पर हावी है। पुणे में बोलते हुए, निंबालकर ने कहा कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों और समर्थकों से परामर्श करने के बाद ही अंतिम निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा, “मैं जनता से परामर्श करने के बाद अपना राजनीतिक रुख स्पष्ट करूंगा। मैं अगले दो दिनों के भीतर अपने राजनीतिक भविष्य और कार्रवाई के बारे में अंतिम निर्णय लूंगा।” उद्धव, आदित्य ठाकरे की आलोचना से इंकार अपने अगले कदम को लेकर अनिश्चितता के बावजूद, उस्मानाबाद के सांसद ने स्पष्ट किया कि वह शिव सेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे या पार्टी नेता आदित्य ठाकरे के खिलाफ नहीं बोलेंगे। निंबालकर ने कहा, “मेरे राजनीतिक फैसले के बावजूद, मैंने कभी भी उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के खिलाफ नहीं बोला है और न ही कभी बोलूंगा।” उन्होंने कहा कि भविष्य में वह जो भी रास्ता चुनेंगे, वह दोनों नेताओं की आलोचना करने या उनके बारे में नकारात्मक टिप्पणी करने से बचेंगे। संदर्भ 2022 शिवसेना विभाजन निंबालकर ने पार्टी से संभावित निकास की अटकलों का भी जवाब दिया, उन्होंने बताया कि वह 2022 में शिवसेना विभाजन के दौरान उद्धव ठाकरे खेमे के साथ बने रहे। उन्होंने कहा, ”2022 में जब शिवसेना में विभाजन हुआ तो मैं छोड़ सकता था। इसलिए अब मेरे जाने को लेकर मुझ पर आरोप लगाना अनुचित है।” यह टिप्पणी “ऑपरेशन टाइगर” पर तीव्र राजनीतिक चर्चा के बीच आई है, एक शब्द जिसका इस्तेमाल महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों में प्रतिद्वंद्वी शिविरों के नेताओं से जुड़े संभावित दलबदल और पुनर्गठन का वर्णन करने के लिए किया गया है। महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों पर पैनी नजर निंबालकर के बयान से अटकलें तेज होने की संभावना है कि क्या राज्य में आगामी राजनीतिक लड़ाई से पहले शिवसेना (यूबीटी) के और नेता पाला बदल सकते हैं। उनके फैसले पर बारीकी से नजर रखे जाने की उम्मीद है, खासकर तब जब सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और विपक्षी दल महाराष्ट्र के उभरते राजनीतिक परिदृश्य में अपनी रणनीतियों का आकलन करना जारी रख रहे हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा के बीच, शिवसेना यूबीटी सांसद ओम राजे निंबालकर का कहना है कि वह 2 दिनों में अगला कदम उठाएंगे अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)ओम राजे निंबालकर राजनीतिक भविष्य(टी)शिवसेना यूबीटी(टी)ऑपरेशन टाइगर महाराष्ट्र(टी)उद्धव ठाकरे(टी)आदित्य ठाकरे(टी)महाराष्ट्र राजनीति(टी)शिवसेना विभाजन 2022(टी)उस्मानाबाद एमपी
पीएम मोदी पहले बीजेपी नीत पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए | तारकेश्वर में पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की अपनी यात्रा के दौरान हुगली जिले के तारकेश्वर में पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस (पश्चिमबंगा दिवस) समारोह में भाग लिया। यह कार्यक्रम पश्चिम बंगाल में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के तहत पहले स्थापना दिवस समारोह का प्रतीक है। पीएम मोदी ने बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक विरासत और राज्य की पहचान को आकार देने में भूमिका निभाने वाले महान नेताओं के योगदान को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने तारकेश्वर में एक सार्वजनिक सभा को भी संबोधित किया और विकास को आगे बढ़ाते हुए बंगाल की परंपराओं को संरक्षित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। यह यात्रा ऐतिहासिक महत्व रखती है, क्योंकि तारकेश्वर बंगाल के राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास के महत्वपूर्ण क्षणों से निकटता से जुड़ा हुआ है। n18oc_politicsn18oc_breaking-newsn18oc_indiaNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 20 जून, 2026, 17:39 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)बंगाल विरासत(टी)बंगाल राजनीति(टी)बीजेपी सरकार बंगाल(टी)बीजेपी पश्चिम बंगाल(टी)ब्रेकिंग न्यूज(टी)सांस्कृतिक(टी)हुगली(टी)भारत समाचार(टी)भारतीय राजनीति(टी)नरेंद्र मोदी(टी)नरेंद्र मोदी भाषण(टी)पश्चिमबंगा दिवस(टी)पीएम मोदी(टी)पीएम मोदी नवीनतम भाषण(टी)पीएम मोदी रैली(टी)पीएम मोदी तारकेश्वर(टी)पीएम मोदी पश्चिम बंगाल(टी)राजनीतिक समाचार(टी)श्यामा प्रसाद मुखर्जी(टी)तारकेश्वर(टी)पश्चिम बंगाल उत्सव(टी)पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस(टी)पश्चिम बंगाल समाचार







