कांग्रेस कर्नाटक में मुश्किल राह पर चल रही है क्योंकि डीके, सिद्धारमैया कैबिनेट में दबदबा बनाने के लिए आमने-सामने हैं भारत समाचार

आखरी अपडेट:26 मई, 2026, 07:57 IST कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि फेरबदल की चर्चा तेजी से दो कारकों के इर्द-गिर्द घूम रही है- मंत्रियों का प्रदर्शन और सिद्धारमैया और शिवकुमार खेमों के बीच सत्ता का बंटवारा। सिद्धारमैया के समर्थक शिवकुमार को किसी भी बड़ी रियायत को एक संभावित संकेत के रूप में देखते हैं कि दिल्ली भविष्य में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी कर रही है। (एआई-जनरेटेड इमेज) मंगलवार को दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान की नवीनतम कर्नाटक मंत्रणा को अब केवल इस चर्चा के रूप में नहीं देखा जा रहा है कि सिद्धारमैया रहेंगे या डीके शिवकुमार पदभार संभालेंगे। कांग्रेस के शीर्ष सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया है कि अधिक तात्कालिक लड़ाई अब लंबे समय से लंबित कैबिनेट फेरबदल की ओर बढ़ रही है, उन्होंने कहा कि विभागों का वितरण कैसे किया जाता है, यह अंततः कर्नाटक में सत्ता के भविष्य के संतुलन को निर्धारित कर सकता है। सूत्रों का कहना है कि सिद्धारमैया, शिवकुमार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की चर्चा काफी हद तक शासन के प्रदर्शन, गुटीय समायोजन और आगामी राज्यसभा चुनावों की तैयारियों के इर्द-गिर्द घूम सकती है। सूत्रों ने कहा कि समझा जाता है कि केंद्रीय नेतृत्व राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षण में दोनों खेमों के बीच खुले मनमुटाव को रोकने के लिए उत्सुक है। कैबिनेट में फेरबदल क्यों बन गया है अहम? प्रतिनिधित्व और पोर्टफोलियो आवंटन को लेकर दोनों गुटों के विधायकों के बीच असंतोष बढ़ने से कर्नाटक कैबिनेट में फेरबदल महीनों से लंबित है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली अब इस फेरबदल को मुख्यमंत्री के सवाल को तुरंत हल किए बिना सत्ता संघर्ष को अस्थायी रूप से स्थिर करने का सबसे व्यावहारिक तरीका मानती है। यह भी पढ़ें | रिकॉर्ड्स और अनुस्मारक के बीच: कर्नाटक के सीएम पद के लिए शांत लड़ाई कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि फेरबदल की चर्चा तेजी से दो कारकों के इर्द-गिर्द घूम रही है- मंत्रियों का प्रदर्शन और सिद्धारमैया और शिवकुमार खेमों के बीच सत्ता का बंटवारा। इसका मतलब है कि नया मंत्रिमंडल प्रभावी रूप से कर्नाटक कांग्रेस के अंदर एक राजनीतिक स्कोरबोर्ड बन सकता है। यदि सिद्धारमैया के वफादारों को प्रभावशाली मंत्रालयों का बहुमत मिलता है, तो यह संकेत हो सकता है कि आलाकमान निरंतरता की ओर झुक रहा है। यदि शिवकुमार का खेमा मजबूत प्रतिनिधित्व और भारी भरकम विभाग हासिल करता है, तो यह संकेत दे सकता है कि दिल्ली धीरे-धीरे उन्हें बाद के कार्यकाल में बड़ी भूमिका के लिए तैयार कर रही है। डीके शिवकुमार कैंप का जोर कांग्रेस के शीर्ष सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि शिवकुमार के समर्थक न केवल अधिक कैबिनेट पदों के लिए दबाव डाल रहे हैं, बल्कि दृश्यमान प्रशासनिक और राजनीतिक अधिकार वाले “भावपूर्ण” पोर्टफोलियो के लिए भी जोर दे रहे हैं। आंतरिक रूप से जिन मांगों पर चर्चा हो रही है उनमें गृह जैसे विभागों सहित उच्च राजनीतिक प्रभाव वाले विभागों पर मजबूत नियंत्रण शामिल है। सूत्रों का कहना है कि शिवकुमार खेमे का मानना है कि वास्तविक प्रशासनिक शक्ति के बिना प्रतीकात्मक आवास उन विधायकों को संतुष्ट नहीं करेगा जिन्होंने 2023 सरकार गठन वार्ता के दौरान उनका समर्थन किया था। डीके खेमे का तर्क यह है कि शिवकुमार ने 2019 में पार्टी के पतन के बाद कर्नाटक कांग्रेस संगठन का पुनर्निर्माण किया, 2023 विधानसभा जीत में केंद्रीय भूमिका निभाई और भविष्य के चुनावों से पहले वोक्कालिगा एकीकरण के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। इसलिए, एक मजबूत कैबिनेट पदचिह्न को आंतरिक रूप से पुरस्कार और रणनीतिक आवश्यकता दोनों के रूप में पेश किया जा रहा है। सिद्धारमैया का पलटवार इस बीच, सिद्धारमैया से किसी भी फेरबदल की प्रक्रिया में अपने वफादार विधायकों के लिए अधिकतम प्रतिनिधित्व के लिए आक्रामक तरीके से जोर देने की उम्मीद है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री के खेमे का मानना है कि सरकार की कल्याण वास्तुकला और शासन मॉडल सिद्धारमैया के नेतृत्व से निकटता से जुड़ा हुआ है, और प्रमुख मंत्रालयों पर उनकी पकड़ कमजोर होने से प्रशासन अस्थिर हो सकता है। इसलिए उम्मीद की जाती है कि सिद्धारमैया गुट मुख्य शासन विभागों पर नियंत्रण बनाए रखने, अहिंदा सामाजिक गठबंधन के साथ जुड़े विधायकों को पुरस्कृत करने और यह सुनिश्चित करने पर जोर देगा कि किसी भी फेरबदल से यह धारणा पैदा न हो कि सत्ता हस्तांतरण पहले से ही चल रहा है। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि सिद्धारमैया के समर्थक शिवकुमार को किसी भी बड़ी रियायत को एक संभावित संकेत के रूप में देखते हैं कि दिल्ली भविष्य में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, नेतृत्व का मानना है कि पार्टी राज्यसभा की गणना, राष्ट्रीय विपक्ष समन्वय और कर्नाटक की दीर्घकालिक चुनावी स्थिति के साथ अस्थिर आंतरिक संघर्ष को बर्दाश्त नहीं कर सकती है। यह बताता है कि वर्तमान चर्चा उत्तराधिकारी घोषित करने के बारे में कम और एक कैलिब्रेटेड संतुलन इंजीनियरिंग के बारे में अधिक क्यों है। दिल्ली वार्ता से उभरे तीन परिदृश्य 1. यथास्थिति, लेकिन सावधानीपूर्वक संतुलित मंत्रिमंडल के साथ इसे वर्तमान में सबसे संभावित अल्पकालिक परिणाम के रूप में देखा जाता है। इस मॉडल के तहत, सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने रहते हैं, शिवकुमार को विभागों और कैबिनेट प्रतिनिधित्व के माध्यम से प्रभाव का विस्तार मिलता है, और फेरबदल समझौता फार्मूला बन जाता है। यह कांग्रेस को नेतृत्व के सवाल को टालने की अनुमति देगा, साथ ही यह संकेत भी देगा कि शिवकुमार पार्टी के भविष्य के केंद्र में बने रहेंगे। यहां मुख्य संकेतक यह होगा कि किस खेमे को सबसे प्रभावशाली मंत्रालय मिलते हैं। 2. शिवकुमार ने संभाला सीएम पद दूसरी, और राजनीतिक रूप से पेचीदा, संभावना कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन के इर्द-गिर्द घूमती है। इंडिया टुडे ने कांग्रेस सूत्रों के हवाले से कहा कि आंतरिक बातचीत अब एक फॉर्मूला तलाश रही है जिसके तहत सिद्धारमैया को राज्यसभा में स्थानांतरित किया जा सकता है। ऐसा कोई भी बदलाव सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों खेमों के हितों को संतुलित करने के उद्देश्य से एक व्यापक कैबिनेट बदलाव के साथ आने की उम्मीद है। 3. वाइल्ड कार्ड एंट्री? एक तीसरा, यद्यपि बहुत कम संभावित, परिदृश्य पर चर्चा की जा रही है, यदि गुटों के बीच झगड़े को हल करना असंभव हो जाता है तो मल्लिकार्जुन खड़गे का एक समझौतावादी चेहरे के
CNG ₹2 तक महंगी, दिल्ली में कीमत ₹83.09 किलो:इस महीने 3 बार दाम बढ़े, अब तक ₹5 इजाफा

पेट्रोल-डीजल के बाद मंगलवार, 26 मई को CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) की कीमतों में 2 रुपए की बढ़ोतरी की गई। इसके बाद दिल्ली में CNG की कीमत 83.09 रुपए प्रति किलो हो गई है। 23 मई को CNG के दाम 1 रुपए प्रति किलो बढ़े थे। वहीं, 16 मई की रात को कंपनियों ने CNG कीमतें 3 रुपए बढ़ाई थीं, जो अगले दिन की सुबह 6 बजे से लागू हो गई थी। खबर अपडेट हो रही है…
CNG ₹2 तक महंगी, दिल्ली में कीमत ₹83.09 किलो:इस महीने चौथी बार दाम बढ़े, अब तक ₹6 इजाफा

पेट्रोल-डीजल के बाद मंगलवार, 26 मई को CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) की कीमतों में 2 रुपए की बढ़ोतरी की गई। इसके बाद दिल्ली में CNG की कीमत 83.09 रुपए प्रति किलो हो गई है। 23 मई को CNG के दाम 1 रुपए प्रति किलो बढ़े थे। अब तक CNG के 4 बार दाम बढ़ चुके हैं। 15 मई को ₹2, 18 मई को ₹1 और 23 मई को ₹1 की बढ़ोतरी हुई थी। पेट्रोल-डीजल के दाम महीने में चौथी बार बढ़े तेल कंपनियों ने कल पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा कर दिया। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में अब एक लीटर पेट्रोल की कीमत ₹102.12 और डीजल की कीमत ₹95.20 हो गई है। पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रही है तो पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। 50% तक बढ़ी CNG गाड़ियों की बिक्री पिछले तीन साल में भोपाल में सीएनजी गाड़ियों की बिक्री 50% तक बढ़ी है। शोरूम से हर रोज सीएनजी बेस्ड 10 से 15 गाड़ियां बिक रही है। इसकी मुख्य वजह पेट्रोल-डीजल के मुकाबले सीएनजी से एवरेज ज्यादा मिलना है। वहीं, सीएनजी के रेट भी कम है।
भारत में आज क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक:अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के नेता दिल्ली पहुंचे, जयशंकर अध्यक्षता करेंगे

भारत आज नई दिल्ली में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक की मेजबानी करेगा। बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी शामिल होंगे। भारत फिलहाल क्वाड समूह की अध्यक्षता कर रहा है। बैठक में इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका और चीन के रिश्तों में बदलाव देखा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हाल ही में चीन दौरे से लौटे हैं। इसी के साथ क्वाड की रणनीतिक अहमियत को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि नई दिल्ली की बैठक का मकसद यह संदेश देना है कि क्वाड अब भी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग का अहम मंच बना हुआ है। लोवी इंस्टीट्यूट की इंडिया चेयर श्रुति पंडालई ने कहा कि बैठक बदलते अमेरिका-चीन समीकरणों के बावजूद क्वाड की प्रासंगिकता बनाए रखने का संकेत देगी। भारत में 2025 में होनी थी क्वाड समिट पिछले कुछ समय में क्वाड के अंदर तनाव बढ़ा है। 2024 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने डेलावेयर में क्वाड नेताओं की बैठक की मेजबानी की थी। इसके बाद अगली बैठक 2025 में भारत में होनी थी, लेकिन वह नहीं हो सकी। रिपोर्ट के अनुसार इसकी एक बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बढ़ा तनाव रहा। ट्रम्प ने भारतीय सामानों पर टैरिफ और अतिरिक्त शुल्क लगाए, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आया। इसके अलावा ट्रम्प ने यह दावा भी किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा संघर्ष को शांत कराने में मध्यस्थता की थी। भारत इस तरह के दावे को हमेशा संवेदनशील मानता है। ट्रम्प ने भारत द्वारा रूस से हथियार खरीदने की भी आलोचना की थी। इन सब वजहों से नई दिल्ली और वॉशिंगटन के रिश्तों में असहजता बढ़ी। अब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत आए हैं और उन्हें दोनों देशों के रिश्तों को संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक यह उनके लिए आसान काम नहीं होगा, क्योंकि ट्रम्प का ध्यान फिलहाल पश्चिम एशिया और दूसरे वैश्विक संकटों पर हैं। भारत की अहमियत नहीं समझ पाई अमेरिकी सरकार जर्मन वेबसाइट DW के मुताबिक अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया पहले से सुरक्षा सहयोगी थे, लेकिन क्वाड का असली मकसद भारत को साथ जोड़ना था ताकि ग्रुप का प्रभाव बढ़े। लेकिन अमेरिकी सरकार भारत की अहमियत को पूरी तरह नहीं समझ पाई जिससे मोदी सरकार नाराज हुई है। जापान और ऑस्ट्रेलिया लगातार कोशिश कर रहे हैं कि क्वाड टूटने न पाए। कुछ एक्स्पर्ट्स का मानना है कि भारत में ट्रम्प की जगह रुबियो का आना क्वाड के लिए बेहतर हो सकता है। अमेरिकी विशेषज्ञ डेरेक ग्रॉसमैन ने चेतावनी दी कि अगर ट्रम्प अगले क्वाड नेताओं के सम्मेलन में शामिल नहीं होते, तो यह समूह धीरे-धीरे महत्व खो सकता है। अगली नेताओं की बैठक 2026 के अंत में ऑस्ट्रेलिया में होने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर क्वाड कमजोर पड़ता है तो सबसे बड़ा फायदा चीन को होगा। ——————– यह खबर भी पढ़ें… भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी पर अमेरिकी विदेश मंत्री निराश:कहा- हर देश में कुछ बेवकूफ लोग होते हैं, वे अमेरिका के नुमाइंदे नहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने रविवार को अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों और भेदभाव के सवाल पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान पूरे अमेरिकी समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करते। पढ़ें पूरी खबर…
भारत में आज क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक:अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के नेता दिल्ली पहुंचे, जयशंकर अध्यक्षता करेंगे

भारत आज नई दिल्ली में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक की मेजबानी करेगा। बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी शामिल होंगे। भारत फिलहाल क्वाड समूह की अध्यक्षता कर रहा है। बैठक में इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका और चीन के रिश्तों में बदलाव देखा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हाल ही में चीन दौरे से लौटे हैं। इसी के साथ क्वाड की रणनीतिक अहमियत को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि नई दिल्ली की बैठक का मकसद यह संदेश देना है कि क्वाड अब भी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग का अहम मंच बना हुआ है। लोवी इंस्टीट्यूट की इंडिया चेयर श्रुति पंडालई ने कहा कि बैठक बदलते अमेरिका-चीन समीकरणों के बावजूद क्वाड की प्रासंगिकता बनाए रखने का संकेत देगी। भारत में 2025 में होनी थी क्वाड समिट पिछले कुछ समय में क्वाड के अंदर तनाव बढ़ा है। 2024 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने डेलावेयर में क्वाड नेताओं की बैठक की मेजबानी की थी। इसके बाद अगली बैठक 2025 में भारत में होनी थी, लेकिन वह नहीं हो सकी। रिपोर्ट के अनुसार इसकी एक बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बढ़ा तनाव रहा। ट्रम्प ने भारतीय सामानों पर टैरिफ और अतिरिक्त शुल्क लगाए, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आया। इसके अलावा ट्रम्प ने यह दावा भी किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा संघर्ष को शांत कराने में मध्यस्थता की थी। भारत इस तरह के दावे को हमेशा संवेदनशील मानता है। ट्रम्प ने भारत द्वारा रूस से हथियार खरीदने की भी आलोचना की थी। इन सब वजहों से नई दिल्ली और वॉशिंगटन के रिश्तों में असहजता बढ़ी। अब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत आए हैं और उन्हें दोनों देशों के रिश्तों को संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक यह उनके लिए आसान काम नहीं होगा, क्योंकि ट्रम्प का ध्यान फिलहाल पश्चिम एशिया और दूसरे वैश्विक संकटों पर हैं। भारत की अहमियत नहीं समझ पाई अमेरिकी सरकार जर्मन वेबसाइट DW के मुताबिक अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया पहले से सुरक्षा सहयोगी थे, लेकिन क्वाड का असली मकसद भारत को साथ जोड़ना था ताकि ग्रुप का प्रभाव बढ़े। लेकिन अमेरिकी सरकार भारत की अहमियत को पूरी तरह नहीं समझ पाई जिससे मोदी सरकार नाराज हुई है। जापान और ऑस्ट्रेलिया लगातार कोशिश कर रहे हैं कि क्वाड टूटने न पाए। कुछ एक्स्पर्ट्स का मानना है कि भारत में ट्रम्प की जगह रुबियो का आना क्वाड के लिए बेहतर हो सकता है। अमेरिकी विशेषज्ञ डेरेक ग्रॉसमैन ने चेतावनी दी कि अगर ट्रम्प अगले क्वाड नेताओं के सम्मेलन में शामिल नहीं होते, तो यह समूह धीरे-धीरे महत्व खो सकता है। अगली नेताओं की बैठक 2026 के अंत में ऑस्ट्रेलिया में होने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर क्वाड कमजोर पड़ता है तो सबसे बड़ा फायदा चीन को होगा। ——————– यह खबर भी पढ़ें… भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी पर अमेरिकी विदेश मंत्री निराश:कहा- हर देश में कुछ बेवकूफ लोग होते हैं, वे अमेरिका के नुमाइंदे नहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने रविवार को अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों और भेदभाव के सवाल पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान पूरे अमेरिकी समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करते। पढ़ें पूरी खबर…
‘बंगाल में सामुदायिक ताकतों का मजबूत होना गहरी चिंता’, बीजेपी सरकार ने दिया बड़ा बयान

रसायन विज्ञान की केंद्रीय समिति (सीसी) ने आंध्र प्रदेश के चुनावी नतीजों को लेकर राजनीतिक, विचारधारा और शैक्षिक सिद्धांतों की प्रारंभिक समीक्षा की है। पार्टी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत और समाज में गरीब सांप्रदायिक ताकतों के मजबूत होने पर गहरी चिंता है। 22 से 24 मई, 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित केन्द्रीय समिति की बैठक के बाद जारी किए गए रोस्टर में कहा गया था कि केरल में राज्य समिति के लिए अलग-अलग गुटों से राय-सशक्तियों के सुझावों पर विचार किया जा रहा है। इन सुझावों पर 5 से 8 जून के बीच तिरुवनंतपुरम में होने वाली राज्य सचिवालय और राज्य समितियों की बैठकों में विस्तार से चर्चा होगी, जिसमें पोलित ब्यूरो के सदस्य भी शामिल होंगे। पार्टी ने कहा कि सुधारात्मक कदम उठाने के लिए ड्राफ्टियों को पहचानना जरूरी है। पार्टी ने बताया कि पश्चिम बंगाल में सभी इकाइयां राय लेंगी और जून के अंत तक राज्य समिति की समीक्षा को अंतिम रूप दिया जाएगा। तमिल और असम में भी इसी तरह की समीक्षा प्रक्रिया अपनाई जाएगी। फैजाबाद ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी की वापसी को सकारात्मक बताया। साथ ही कहा कि पुडुचेरी के माहे से पार्टी में एक प्रतियोगी ने जीत के रूप में एंट्री की है। केंद्रीय समिति ने उत्तर प्रदेश के सभी राज्यों के समर्थकों और उनके सहयोगियों को समर्थन दिया। क्या कर्नाटक में बदलेगा नेतृत्व? कांग्रेस हाईकमान से जुड़ेंगे सिद्धार्थमैया, डीके शिवकुमार बोले- लिख के ले लो… पार्टी ने कहा कि वह जनता की एकजुटता को बढ़ावा देने, अपनी शक्तियों की रक्षा के लिए संघर्ष करने और “सत्तावादियों और अल्पसंख्यक-कॉर्पोरेट दावों” का विरोध करने के लिए अग्रिम पंक्ति में बने रहेंगे। कट्टरपंथी भी जनता के खिलाफ एकजुट होकर सदन में उठेंगे और कथित जनविरोधी पार्टियों का संघर्ष जारी रहेगा। तेलुगू में नवगठित सरकार से भी दैवीय कंपनी। पार्टी ने कहा कि टीवीके की सरकार, जिसका नेतृत्व विजय कर रहे हैं, संविधान, संघीय विश्वविद्यालय, दार्शनिकता और लोकतांत्रिक गणराज्यों के रक्षा एसोसिएटेड अपने वादों के शासन संस्थान हैं। केंद्रीय समिति ने कहा कि चुनावी नतीजों में एक व्यापक क्रांतिकारी समाज में गैरबराबरी सांप्रदायिक ताकतों की बातें शामिल हैं और पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल करना है। पार्टी ने कहा कि भले ही बीजेपी को केरल और तमिल में सीमित छूट मिली हो, लेकिन उनका विस्तार चिंता का विषय है। विधानमंडल ने कहा कि पश्चिम बंगाल में आरएसएस-भाजपा की जीत और असम में उनकी सत्ता में सभी लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और लोकतांत्रिक सेनाओं की वापसी गंभीर चिंता का विषय है। पार्टी ने समर्थन किया कि वह सामुदायिक सभा और जनता की शक्तियों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी। पार्टी की केंद्रीय समिति की जुलाई 2026 की दूसरी पखवाड़े में फिर से बैठक हुई, जिसमें राज्यों की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर चुनाव के नतीजों का व्यापक विश्लेषण और शीर्ष से लेकर स्तर निर्धारण तक के मानदंड तय करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। ये भी पढ़ें : दुनिया में खतरा मचाने को तैयार इबोला वायरस! ‘हेल्थ इमर्जेसी’ घोषित होने के बाद जापान के चित्र ने निर्देश निर्देश दिए
फिल्म धुरंधर के प्रोडक्शन डिजाइनर पर रेप की FIR:चंडीगढ़ की युवती बोली- मीटिंग के बहाने 5-स्टार होटल में बुलाया, विरोध करने पर मारपीट की

फिल्म धुरंधर के प्रोडक्शन डिजाइनर सैनी एस. जोहरे के खिलाफ चंडीगढ़ सेक्टर-17 थाना में युवती के साथ रेप का मामला दर्ज हुआ है। शिकायत में युवती ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने फाइव स्टार होटल में बुलाकर उसके साथ रेप किया, मारपीट की और गलत तरीके से बंधक बनाकर रखने जैसी हरकतें कीं। युवती ने आरोप लगाया कि उसकी ड्रिंक में संदिग्ध नशीला पदार्थ मिलाया गया था, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई थी। पुलिस ने जांच के बाद 21 अप्रैल 2026 को FIR दर्ज की थी, लेकिन इसका खुलासा सोमवार देर शाम को हुआ है। जानकारी के अनुसार, FIR के बाद सेक्टर-17 की पुलिस ने आरोपी प्रोडक्शन डिजाइनर को गिरफ्तार भी किया था, लेकिन उसे जिला अदालत से जमानत मिल गई है। चंडीगढ़ की पीड़िता, आरोपी मुंबई का पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, चंडीगढ़ के खुड्डा लाहौरा की रहने वाली युवती ने 20 अप्रैल को सेक्टर-17 थाने में शिकायत दी थी। शिकायत के आधार पर जांच के दौरान भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74, 79, 123 और 126(2) के तहत मामला दर्ज किया गया। पीड़िता वर्तमान में चंडीगढ़ में रह रही है, जबकि उसका स्थायी पता नई दिल्ली का है। शिकायत में आरोपी का पता मुंबई के अंधेरी वेस्ट स्थित ओबेराय स्प्रिंग बिल्डिंग है। प्रोडक्शन डिजाइनर सैनी एस. जोहरे धुरंधर फिल्म के भव्य सेट में थाईलैंड में पाकिस्तान का लियारी टाउन बनाने से चर्चा में आए। युवती ने शिकायत में ये बातें लिखवाईं… शिकायत में युवती ने बताया कि वर्ष 2025 में वह चंडीगढ़ के सेक्टर-10 स्थित गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट में पढ़ाई कर रही थी। इसी दौरान एक टीचर के माध्यम से उसका बायोडाटा फिल्म धुरंधर की टीम तक पहुंचा। इसके बाद सैनी एस. जोहरे ने उसे 2 सितंबर 2025 को फिल्म प्रोजेक्ट में असिस्टेंट आर्ट डायरेक्टर के तौर पर शामिल किया। सैनी ने खुद को उसका मेंटर बताया। शिकायत के अनुसार, प्रोजेक्ट पर काम शुरू होने के 4-5 दिन बाद आरोपी ने उसे काम की चर्चा के नाम पर सेक्टर- 17 स्थित होटल के कमरे में बुलाया। युवती का कहना है कि शुरुआत में उसे लगा कि यह टीम मीटिंग होगी, लेकिन बाद में पता चला कि वहां किसी अन्य टीम सदस्य को नहीं बुलाया गया था। पीड़िता ने शिकायत में कहा कि 10 सितंबर 2025 की रात वह करीब साढ़े 8 बजे होटल के कमरे में पहुंची। वहां आरोपी ने उसे शराब पीने के लिए दबाव बनाया। ड्रिंक पीने के लगभग 5 मिनट बाद उसे चक्कर आने लगे और उसकी हालत बिगड़ने लगी। युवती का आरोप है कि आरोपी ने डांस सिखाने के बहाने उसे गलत तरीके से छूआ। इस दौरान उसकी तबीयत और बिगड़ गई और उसने 10 से 15 बार उल्टियां कीं। इसके बावजूद आरोपी ने उसे कमरे से नहीं जाने दिया और उसके साथ रेप किया। इसका विरोध करने पर आरोपी ने उसके साथ मारपीट की। ॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… धुरंधर फेम सिंगर का राखी सावंत पर तंज, बोले- दिल पे जख्म तो ठीक हैं लेकिन मेरे शो में कपड़े क्या पहनकर आई हो बॉलीवुड आइटम गर्ल राखी सावंत मुंबई में धुरंधर के ‘जान से गुजरते हैं’ सॉन्ग फेम पंजाबी सिंगर खान साब के लाइव कॉन्सर्ट में पहुंचीं। इस दौरान मंच पर दोनों के बीच मस्ती भरे अंदाज में बातचीत हुई। इससे जुड़ा वीडियो राखी सावंत ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है। पढ़ें पूरी खबर…
विनेश फोगाट के एशियन गेम्स खेलने की गारंटी नहीं:लांग लिस्ट में नाम नहीं, ट्रायल जीतीं तो भी OCA करेगा अंतिम फैसला; हाईकोर्ट से राहत मिली

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर ट्रायल में हिस्सा लेने की छूट के बाद भी रेसलर विनेश फोगाट के जापान में एशियन गेम्स-2026 खेलने की गारंटी नहीं है। 19 सितंबर में होने वाले एशियन गेम्स के लिए भेजी गई संभावित खिलाड़ियों (लांग लिस्ट) में विनेश का नाम नहीं है। भारतीय कुश्ती फेडरेशन (WFI) की ओर से इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन (IOC) को भेजी सूची में इस रेसलर का नाम नहीं था। आईओसी ने यही लिस्ट आगे एशियन ओलंपिक परिषद (OCA) और जापान की आयोजन समिति को भेजी। ऐसे में अब OCA के रुख पर बहुत कुछ निर्भर करेगा। बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने विनेश की याचिका पर सुनवाई करते हुए 23 मई को फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि मातृत्व (Motherhood) को किसी महिला खिलाड़ी के खिलाफ हथियार नहीं बनाया जा सकता। इसमें विनेश को ट्रायल में हिस्सा लेने की रियायत दी गई थी। यह ट्रायल 30 और 31 मई को होने हैं। भारतीय कुश्ती महासंघ ने उनके मातृत्व अवकाश और अन्य कारणों का हवाला देते हुए उन्हें शुरुआत में अयोग्य ठहराया था, जिसके कारण उनका नाम लांग लिस्ट में नहीं भेजा। 3 पॉइंट में जानिए नियमों को लेकर टेक्निकल स्थिति… कुश्ती महासंघ ने एंटी-डोपिंग नियमों का हवाला देकर लगाया था बैन डब्ल्यूएफआई ने एंटी-डोपिंग नियमों के तहत संन्यास से वापसी करने वाले एथलीटों के लिए अनिवार्य छह महीने की नोटिस अवधि का हवाला देते हुए फोगाट को 26 जून, 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। कुश्ती महासंघ ने लिखा था कि विनेश ने संन्यास से वापसी के लिए छह महीने पहले सूचना नहीं दी। इससे WFI संविधान, यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) नियमों तथा एंटी-डोपिंग प्रावधानों का उल्लंघन हुआ। बता दें कि करीब 3 साल पहले विनेश ने बृजभूषण पर महिला खिलाड़ियों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसे लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर महिला पहलवानों ने बृजभूषण के खिलाफ धरना भी दिया था। विनेश ने वीडियो जारी बृजभूषण पर साधा था निशाना.. बृजभूषण बोले थे- आरोप सही हुए तो फांसी पर लटक जाऊंगा इन आरोपों पर कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण ने सफाई देते हुए कहा था- किसी भी तरह का उत्पीड़न नहीं हुआ है। अगर हुआ है तो मैं फांसी पर लटक जाऊंगा। उन्होंने धरने को स्पॉन्सर्ड बताते हुए इसके पीछे हरियाणा कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा को बताया था। उन्होंने कहा था कि अब ये खिलाड़ी नेशनल लेवल पर भी खेलने योग्य नहीं रहे। पेरिस ओलिंपिक में डिसक्वालिफाई हुई थीं विनेश विनेश 2024 पेरिस ओलिंपिक में महिलाओं की 50 किलो फ्रीस्टाइल कुश्ती में खेली थीं। उन्होंने फाइनल में जगह बनाई थी। लेकिन फाइनल से पहले उनका वजन तय सीमा से 100 ग्राम ज्यादा पाया गया। नियमों के मुताबिक उन्हें पूरे इवेंट से डिस्क्वालिफाई कर दिया गया। उन्हें कोई मेडल नहीं मिला, जबकि वे फाइनल तक पहुंच चुकी थीं।
ऐसा IPL पहले नहीं देखा:एक सीजन में 61 बार 200 का स्कोर, शुरुआती 9 साल मिलाकर भी इससे कम; पहली बार 1300 छक्के

लीग स्टेज खत्म होते-होते IPL 2026 रनरेट, सिक्सर्स और 200 से ऊपर के स्कोर के मामलों में अब तक का सबसे बड़ा सीजन बन गया है। 70 मैचों में ही 61 बार 200 या इससे ज्यादा का स्कोर बन चुका है। शुरुआती 9 सीजन- 2008 से 2016 तक हुए 538 मैचों में 57 बार ही 200+ का स्कोर बना था। आगे ऐसे ही 8 ट्रेंड्स के बारे में डिटेल में जानिए, जो साबित करते हैं कि ऐसा IPL अब तक नहीं हुआ… 1. सबसे तेज रनरेट वाला सीजन इस सीजन का ओवरऑल रनरेट 9.85 रहा, जो IPL इतिहास में अब तक का सबसे ज्यादा है। इससे पहले 2025 में रनरेट 9.62 और 2024 में 9.56 था। दिलचस्प बात यह है कि 2022 तक किसी भी सीजन का रनरेट 9 तक नहीं पहुंचा था। 2008 में IPL का रनरेट 8.30 था, यानी 18 साल में बल्लेबाजी की गति करीब डेढ़ रन प्रति ओवर बढ़ चुकी है। 2. 61 बार बने 200+ स्कोर, बड़े टारगेट भी अब सुरक्षित नहीं IPL 2025 में 52 बार 200+ स्कोर बने थे, लेकिन 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 61 तक पहुंच गया। यह IPL इतिहास में किसी एक सीजन में सबसे ज्यादा 200+ टोटल हैं। खास बात यह है कि 2022 तक किसी भी सीजन में 20 से ज्यादा बार 200+ स्कोर नहीं बने थे। इस सीजन सिर्फ बड़े स्कोर ही नहीं बने, बल्कि बड़े टारगेट चेज करना भी आम हो गया। IPL 2026 में 16 बार 200+ रनचेज हुए, जो किसी भी सीजन में सबसे ज्यादा हैं। इससे पहले 2025 में 9 और 2023 में 8 बार ऐसा हुआ था। सबसे बड़ा बदलाव 220+ टारगेट चेज में देखने को मिला। इस सीजन 220 या उससे ज्यादा का स्कोर 9 बार चेज हुआ, जबकि IPL के पहले 18 सीजन मिलाकर ऐसा सिर्फ 5 बार हुआ था। इस सीजन सनराइजर्स हैदराबाद और पंजाब किंग्स ने सबसे ज्यादा 9-9 बार 200+ स्कोर बनाए, जो किसी एक टी-20 टूर्नामेंट में किसी टीम द्वारा सबसे ज्यादा हैं। 3. पहली पारी का औसत स्कोर और विनिंग टोटल रिकॉर्ड स्तर पर IPL 2026 सिर्फ रनरेट और 200+ स्कोर के मामले में ही नहीं, बल्कि औसत स्कोरिंग में भी सबसे आगे निकल गया। इस सीजन में पहली पारी का औसत स्कोर 192 रहा, जो IPL इतिहास में सबसे ज्यादा है। इससे पहले 2025 में यह 191 और 2024 में 190 था। सबसे बड़ा बदलाव विनिंग टोटल में देखने को मिला। IPL 2026 में जीतने वाली टीम का औसत स्कोर 217 रहा, जो IPL इतिहास में पहली बार 215 के पार पहुंचा। इससे पहले 2025 में यह 211 और 2024 में 211 था। दिलचस्प बात यह है कि 2022 तक किसी भी सीजन में औसत विनिंग स्कोर 200 तक नहीं पहुंचा था। इस सीजन का सबसे बड़ा टोटल पंजाब किंग्स के नाम हैं टीम ने दिल्ली के खिलाफ 265/4 का स्कोर बनाया था। यह IPL का सबसे बड़ा रनचेज भी है। 4. शतकों में रिकॉर्ड की बराबरी, अभी 4 मैच बाकी इस सीजन के लीग मैचों में ही अब तक 14 शतक लग चुके हैं। यह किसी एक सीजन में सबसे ज्यादा शतकों के रिकॉर्ड की बराबरी है। इससे पहले 2024 में भी 14 सेंचुरी बनी थीं। अभी IPL 2026 में प्लेऑफ के मैच होने हैं। ऐसे में उम्मीद हैं कि यह रिकॉर्ड भी टूट जाए। 2022 तक किसी भी सीजन में 10 से ज्यादा शतक नहीं लगे थे। 5. हर 12वीं गेंद पर सिक्स 2025 में 1294 और 2024 में 1260 सिक्स लगे थे, लेकिन 2026 ने इन दोनों रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ दिया। इस सीजन अब तक 1349 छक्के लग चुके हैं। सबसे बड़ा बदलाव सिक्स लगाने की फ्रीक्वेंसी में देखने को मिला। इस सीजन करीब हर 12 गेंद पर एक छक्का लगा, जो IPL इतिहास में सबसे तेज है। 2009 में जहां एक सिक्स के लिए औसतन 26 गेंद लगती थीं, वहीं अब बल्लेबाज लगभग हर दो ओवर में एक सिक्स लगा रहे हैं। इस सीजन पंजाब किंग्स ने लीग स्टेज में सबसे ज्यादा 163 सिक्स लगाए, जबकि सनराइजर्स हैदराबाद ने 162 सिक्स जड़े। IPL इतिहास में एक सीजन में सबसे ज्यादा 178 छक्कों का रिकॉर्ड हैदराबाद के नाम है, जिसे टीम प्लेऑफ में तोड़ सकती है। 6. पहली बार पावरप्ले में रनरेट 10 से ऊपर पहुंचा IPL इतिहास में पहली बार पावरप्ले (1-6 ओवर) का रनरेट 10 के पार पहुंच गया। इससे पहले 2025 में यह 9.60 और 2024 में 9.47 था। 2022 तक किसी भी सीजन में पावरप्ले रनरेट 9 तक नहीं पहुंचा था। इस सीजन का हाईएस्ट पावरप्ले टोटल पंजाब किंग्स के नाम है। टीम ने दिल्ली के खिलाफ शुरुआती 6 ओवर में 116 रन बनाए थे। 7. गेंदबाजों की शामत, पेसर्स-स्पिनर्स दोनों पिटे IPL 2026 का हाई स्कोरिंग ट्रेंड गेंदबाजों पर सबसे भारी पड़ा। यह सीजन स्पिनर्स और पेसर्स, दोनों के लिए सबसे महंगा साबित हुआ। स्पिन गेंदबाजों ने 9.26 की इकोनॉमी से रन दिए, जो IPL इतिहास में सबसे ज्यादा है। इससे पहले 2025 में यह आंकड़ा 8.86 और 2024 में 8.68 था। तेज गेंदबाजों की स्थिति भी ज्यादा अलग नहीं रही। IPL 2026 में पेसर्स की और इकोनॉमी 9.94 रही। यह IPL इतिहास में सबसे खराब हैं। इससे पहले 2025 में पेसर्स की इकॉनमी 9.90 और 2024 में 9.78 थी। इस सीजन लीग स्टेज के टॉप-10 विकेट टेकरों में सिर्फ दो स्पिनर्स शामिल हैं- राशिद खान (19 विकेट) और सुनील नरेन (15 विकेट)। गुजरात के प्लेऑफ में पहुंचने के कारण संभावना है कि सीजन खत्म होने तक राशिद ही टॉप-10 में अकेले स्पिनर बचें। इससे पहले ऐसा सिर्फ 2016 में हुआ था, जब युजवेंद्र चहल टॉप-10 में शामिल अकेले स्पिनर थे। 8. फील्डिंग प्रेशर में, 169 कैच छूटे हाई-स्कोरिंग क्रिकेट का असर सिर्फ गेंदबाजों पर नहीं, बल्कि फील्डिंग पर भी साफ दिखाई दिया। IPL 2025 में रिकॉर्ड 188 कैच छोड़े गए थे, जबकि 2026 में यह संख्या 169 रही। 2022 के बाद लगातार हर सीजन में 148 से ज्यादा कैच छूटे हैं। टीमों के हिसाब से देखें तो इस सीजन सबसे खराब फील्डिंग रिकॉर्ड हैदराबाद का रहा। टीम ने सबसे ज्यादा 26 कैच छोड़े। इसके बाद पंजाब और चेन्नई ने 20-20 कैच ड्रॉप किए।
ऐसा IPL पहले नहीं देखा:एक सीजन में 61 बार 200 का स्कोर, शुरुआती 9 साल मिलाकर भी इससे कम; पहली बार 1300 छक्के

लीग स्टेज खत्म होते-होते IPL 2026 रनरेट, सिक्सर्स और 200 से ऊपर के स्कोर के मामलों में अब तक का सबसे बड़ा सीजन बन गया है। 70 मैचों में ही 61 बार 200 या इससे ज्यादा का स्कोर बन चुका है। शुरुआती 9 सीजन- 2008 से 2016 तक हुए 538 मैचों में 57 बार ही 200+ का स्कोर बना था। आगे ऐसे ही 8 ट्रेंड्स के बारे में डिटेल में जानिए, जो साबित करते हैं कि ऐसा IPL अब तक नहीं हुआ… 1. सबसे तेज रनरेट वाला सीजन इस सीजन का ओवरऑल रनरेट 9.85 रहा, जो IPL इतिहास में अब तक का सबसे ज्यादा है। इससे पहले 2025 में रनरेट 9.62 और 2024 में 9.56 था। दिलचस्प बात यह है कि 2022 तक किसी भी सीजन का रनरेट 9 तक नहीं पहुंचा था। 2008 में IPL का रनरेट 8.30 था, यानी 18 साल में बल्लेबाजी की गति करीब डेढ़ रन प्रति ओवर बढ़ चुकी है। 2. 61 बार बने 200+ स्कोर, बड़े टारगेट भी अब सुरक्षित नहीं IPL 2025 में 52 बार 200+ स्कोर बने थे, लेकिन 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 61 तक पहुंच गया। यह IPL इतिहास में किसी एक सीजन में सबसे ज्यादा 200+ टोटल हैं। खास बात यह है कि 2022 तक किसी भी सीजन में 20 से ज्यादा बार 200+ स्कोर नहीं बने थे। इस सीजन सिर्फ बड़े स्कोर ही नहीं बने, बल्कि बड़े टारगेट चेज करना भी आम हो गया। IPL 2026 में 16 बार 200+ रनचेज हुए, जो किसी भी सीजन में सबसे ज्यादा हैं। इससे पहले 2025 में 9 और 2023 में 8 बार ऐसा हुआ था। सबसे बड़ा बदलाव 220+ टारगेट चेज में देखने को मिला। इस सीजन 220 या उससे ज्यादा का स्कोर 9 बार चेज हुआ, जबकि IPL के पहले 18 सीजन मिलाकर ऐसा सिर्फ 5 बार हुआ था। इस सीजन सनराइजर्स हैदराबाद और पंजाब किंग्स ने सबसे ज्यादा 9-9 बार 200+ स्कोर बनाए, जो किसी एक टी-20 टूर्नामेंट में किसी टीम द्वारा सबसे ज्यादा हैं। 3. पहली पारी का औसत स्कोर और विनिंग टोटल रिकॉर्ड स्तर पर IPL 2026 सिर्फ रनरेट और 200+ स्कोर के मामले में ही नहीं, बल्कि औसत स्कोरिंग में भी सबसे आगे निकल गया। इस सीजन में पहली पारी का औसत स्कोर 192 रहा, जो IPL इतिहास में सबसे ज्यादा है। इससे पहले 2025 में यह 191 और 2024 में 190 था। सबसे बड़ा बदलाव विनिंग टोटल में देखने को मिला। IPL 2026 में जीतने वाली टीम का औसत स्कोर 217 रहा, जो IPL इतिहास में पहली बार 215 के पार पहुंचा। इससे पहले 2025 में यह 211 और 2024 में 211 था। दिलचस्प बात यह है कि 2022 तक किसी भी सीजन में औसत विनिंग स्कोर 200 तक नहीं पहुंचा था। इस सीजन का सबसे बड़ा टोटल पंजाब किंग्स के नाम हैं टीम ने दिल्ली के खिलाफ 265/4 का स्कोर बनाया था। यह IPL का सबसे बड़ा रनचेज भी है। 4. शतकों में रिकॉर्ड की बराबरी, अभी 4 मैच बाकी इस सीजन के लीग मैचों में ही अब तक 14 शतक लग चुके हैं। यह किसी एक सीजन में सबसे ज्यादा शतकों के रिकॉर्ड की बराबरी है। इससे पहले 2024 में भी 14 सेंचुरी बनी थीं। अभी IPL 2026 में प्लेऑफ के मैच होने हैं। ऐसे में उम्मीद हैं कि यह रिकॉर्ड भी टूट जाए। 2022 तक किसी भी सीजन में 10 से ज्यादा शतक नहीं लगे थे। 5. हर 12वीं गेंद पर सिक्स 2025 में 1294 और 2024 में 1260 सिक्स लगे थे, लेकिन 2026 ने इन दोनों रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ दिया। इस सीजन अब तक 1349 छक्के लग चुके हैं। सबसे बड़ा बदलाव सिक्स लगाने की फ्रीक्वेंसी में देखने को मिला। इस सीजन करीब हर 12 गेंद पर एक छक्का लगा, जो IPL इतिहास में सबसे तेज है। 2009 में जहां एक सिक्स के लिए औसतन 26 गेंद लगती थीं, वहीं अब बल्लेबाज लगभग हर दो ओवर में एक सिक्स लगा रहे हैं। इस सीजन पंजाब किंग्स ने लीग स्टेज में सबसे ज्यादा 163 सिक्स लगाए, जबकि सनराइजर्स हैदराबाद ने 162 सिक्स जड़े। IPL इतिहास में एक सीजन में सबसे ज्यादा 178 छक्कों का रिकॉर्ड हैदराबाद के नाम है, जिसे टीम प्लेऑफ में तोड़ सकती है। 6. पहली बार पावरप्ले में रनरेट 10 से ऊपर पहुंचा IPL इतिहास में पहली बार पावरप्ले (1-6 ओवर) का रनरेट 10 के पार पहुंच गया। इससे पहले 2025 में यह 9.60 और 2024 में 9.47 था। 2022 तक किसी भी सीजन में पावरप्ले रनरेट 9 तक नहीं पहुंचा था। इस सीजन का हाईएस्ट पावरप्ले टोटल पंजाब किंग्स के नाम है। टीम ने दिल्ली के खिलाफ शुरुआती 6 ओवर में 116 रन बनाए थे। 7. गेंदबाजों की शामत, पेसर्स-स्पिनर्स दोनों पिटे IPL 2026 का हाई स्कोरिंग ट्रेंड गेंदबाजों पर सबसे भारी पड़ा। यह सीजन स्पिनर्स और पेसर्स, दोनों के लिए सबसे महंगा साबित हुआ। स्पिन गेंदबाजों ने 9.26 की इकोनॉमी से रन दिए, जो IPL इतिहास में सबसे ज्यादा है। इससे पहले 2025 में यह आंकड़ा 8.86 और 2024 में 8.68 था। तेज गेंदबाजों की स्थिति भी ज्यादा अलग नहीं रही। IPL 2026 में पेसर्स की और इकोनॉमी 9.94 रही। यह IPL इतिहास में सबसे खराब हैं। इससे पहले 2025 में पेसर्स की इकॉनमी 9.90 और 2024 में 9.78 थी। इस सीजन लीग स्टेज के टॉप-10 विकेट टेकरों में सिर्फ दो स्पिनर्स शामिल हैं- राशिद खान (19 विकेट) और सुनील नरेन (15 विकेट)। गुजरात के प्लेऑफ में पहुंचने के कारण संभावना है कि सीजन खत्म होने तक राशिद ही टॉप-10 में अकेले स्पिनर बचें। इससे पहले ऐसा सिर्फ 2016 में हुआ था, जब युजवेंद्र चहल टॉप-10 में शामिल अकेले स्पिनर थे। 8. फील्डिंग प्रेशर में, 169 कैच छूटे हाई-स्कोरिंग क्रिकेट का असर सिर्फ गेंदबाजों पर नहीं, बल्कि फील्डिंग पर भी साफ दिखाई दिया। IPL 2025 में रिकॉर्ड 188 कैच छोड़े गए थे, जबकि 2026 में यह संख्या 169 रही। 2022 के बाद लगातार हर सीजन में 148 से ज्यादा कैच छूटे हैं। टीमों के हिसाब से देखें तो इस सीजन सबसे खराब फील्डिंग रिकॉर्ड हैदराबाद का रहा। टीम ने सबसे ज्यादा 26 कैच छोड़े। इसके बाद पंजाब और चेन्नई ने 20-20 कैच ड्रॉप किए।





