UN रिपोर्ट-2025 लाल किला धमाके में अल-कायदा का हाथ था:इसी ने लॉजिस्टिक्स, फाइनेंशियल नेटवर्क बनाया; 10 नवंबर को हुए ब्लास्ट में 11 मौतें हुई थीं

लाल किले के पास हुए धमाके के पीछे अल-कायदा से जुड़े संगठन का हाथ था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 38वीं रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। 10 नवंबर 2025 की शाम लाल किले के पास हुए इस धमाके में 11 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) ने इस धमाके को अंजाम दिया। इसमें कहा गया है कि AQIS अब छोटे-छोटे सेल के जरिए काम कर रहा है और उसने अपना लॉजिस्टिक्स व फाइनेंशियल नेटवर्क भी तैयार कर लिया है। हालांकि, इससे पहले आई UNSC की 37वीं रिपोर्ट में एक सदस्य देश ने इस हमले के पीछे जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का हाथ बताया था। यानी, इस हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की लगातार दो रिपोर्टों में दो अलग-अलग आतंकी संगठनों के नाम सामने आए हैं। 10 नवंबर 2025 की शाम दहल उठी थी दिल्ली दिल्ली के ऐतिहासिक रेड फोर्ट इलाके में 10 नवंबर 2025 की शाम अचानक एक जोरदार धमाका हुआ था। धमाका इतना भीषण था कि आसपास खड़ी गाड़ियों के शीशे टूट गए थे। कई दुकानों और इमारतों को भी नुकसान पहुंचाथा। इस धमाके में 11 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। शुरुआती जांच में ही जांच एजेंसियों को शक हो गया था कि यह कोई साधारण ब्लास्ट नहीं, बल्कि हाई-इंटेंसिटी VBIED हमला था। घटना के बाद पूरे दिल्ली-NCR में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया था। देश की कई सुरक्षा एजेंसियों और फॉरेंसिक टीमें मौके पर पहुंची थी।बाद में इस केस की गंभीरता को देखते हुए जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई थी। NIA की रिपोर्ट में नवंबर 2025 के लाल किला कार ब्लास्ट केस में NIA ने 11 आरोपियों के खिलाफ करीब 7,500 पेज की चार्जशीट दाखिल की है। राउज एवेन्यू कोर्ट इस पर 27 अगस्त को सुनवाई करेगा। चार्जशीट में 580 से ज्यादा गवाहों के बयान भी शामिल हैं। खबर को लगातार अपडेट कर रहे हैं…
UN रिपोर्ट-2025 लाल किला धमाके में अल-कायदा का हाथ था:इसी ने लॉजिस्टिक्स, फाइनेंशियल नेटवर्क बनाया; नवंबर में हुए ब्लास्ट में 11 मौतें हुई थीं

लाल किले के पास हुए धमाके के पीछे अल-कायदा से जुड़े संगठन का हाथ था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 38वीं रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। 10 नवंबर 2025 की शाम लाल किले के पास हुए इस धमाके में 11 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) ने इस धमाके को अंजाम दिया। इसमें कहा गया है कि AQIS अब छोटे-छोटे सेल के जरिए काम कर रहा है और उसने अपना लॉजिस्टिक्स व फाइनेंशियल नेटवर्क भी तैयार कर लिया है। इससे पहले आई UNSC की 37वीं रिपोर्ट में एक सदस्य देश ने इस हमले के पीछे जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का हाथ बताया था। यानी, इस हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की लगातार दो रिपोर्टों में दो अलग-अलग आतंकी संगठनों के नाम सामने आए हैं। हालांकि,NIA की चार्जशीट में दावा किया गया था कि आरोपी AQIS से जुड़े थे। AQIS बांग्लादेश में भी अपने आतंकी सेल बनाने की कोशिश कर रहा UNSC की एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम की यह रिपोर्ट सोमवार को जारी की गई। इसमें कहा गया है कि AQIS अब बिखरे हुए छोटे आतंकी संगठन की बजाय एक क्षेत्रीय आतंकी नेटवर्क के रूप में विकसित हो चुका है। संगठन ने अपना लॉजिस्टिक्स और फाइनेंशियल नेटवर्क तैयार कर लिया है और अब बड़े समूहों के बजाय छोटे-छोटे, अलग-अलग सेल के जरिए काम कर रहा है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि AQIS बांग्लादेश में भी अपने आतंकी सेल बनाने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट में इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया गया है। रासायनिक और जैविक हथियार बनाने की कोशिश में जुटा अलकायदा रिपोर्ट में कहा गया है कि अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट (ISIL/दाएश) लंबे समय से ऐसे जहरीले रासायनिक और जैविक हथियार बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिनसे बड़ी संख्या में लोगों को नुकसान पहुंचाया जा सके। हालांकि, अब तक वे इसमें पूरी तरह सफल नहीं हो पाए हैं, क्योंकि ऐसे हथियार बनाना बेहद मुश्किल काम है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आतंकी संगठनों से जुड़े ऑनलाइन नेटवर्क पर अब भी ऐसे जहरीले पदार्थ बनाने के तरीके और जानकारी साझा की जा रही है। फरवरी में ISIL की अंग्रेजी पत्रिका ‘इनवेड’ में बोटुलिनम टॉक्सिन और साइनाइड जैसे जहरीले पदार्थ तैयार करने से जुड़े निर्देश प्रकाशित किए गए थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ISIL-K ने पिछले 12 महीनों के दौरान अपने नेटवर्क में ‘राइसिन’ नाम के एक बेहद जहरीले विष को तैयार करने से जुड़ी जानकारी भी साझा की है। 2014 में बना था AQIS AQIS अल-कायदा का दक्षिण एशिया में सक्रिय संगठन है। इसको सितंबर 2014 में अल-कायदा प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी ने बनाया था। इसका मकसद भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में अल-कायदा का नेटवर्क बढ़ाना था। अमेरिकी नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के मुताबिक, AQIS फिलहाल मुख्य रूप से अफगानिस्तान में सक्रिय है, जबकि इसके नेटवर्क की गतिविधियां पाकिस्तान, भारत और बांग्लादेश में भी बताई गई हैं। यह संगठन बड़े हमलों के बजाय छोटे-छोटे सेल के जरिए काम करता है और हत्या, हथियारबंद हमले, घात लगाकर हमला और आत्मघाती हमले जैसी गतिविधियों में शामिल रहा है। अमेरिका ने 2016 में इसे विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया था। NIA ने भी AQIS का हाथ बताया था NIA ने मई में 11 आरोपियों के खिलाफ करीब 7,500 पेज की चार्जशीट दाखिल की है। राउज एवेन्यू कोर्ट इस पर 27 अगस्त को सुनवाई करेगा। चार्जशीट में 580 से ज्यादा गवाहों के बयान भी शामिल हैं। इसमें दावा किया गया था कि सभी आरोपी आतंकी संगठन सार गजवत-उल-हिंद और अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से जुड़े थे। धमाके में इस्तेमाल TATP विस्फोटक आरोपियों ने खुद तैयार किया था NIA की जांच में सामने आया था कि कुछ आरोपी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित मेडिकल प्रोफेशनल थे। 2022 में श्रीनगर में हुई एक गुप्त बैठक में उन्होंने “AGuH Interim” नाम से संगठन को फिर सक्रिय किया और “Operation Heavenly Hind” शुरू किया था। आरोपियों ने नए सदस्यों की भर्ती और बड़े पैमाने पर विस्फोटक तैयार किया था। एजेंसी ने बताया कि धमाके में इस्तेमाल TATP विस्फोटक आरोपियों ने खुद तैयार किया था। इसके लिए केमिकल और उपकरण ऑनलाइन व ऑफलाइन जुटाए गए थे। जांच में यह भी सामने आया था कि आरोपी AK-47, Krinkov राइफल और अन्य हथियार जुटाने के साथ-साथ ड्रोन और रॉकेट ऑपरेटेड IED पर भी प्रयोग कर रहे थे। IA ने अब तक इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। फरार आरोपियों की तलाश जारी है। 10 नवंबर 2025 की शाम दहल उठी थी दिल्ली दिल्ली के ऐतिहासिक रेड फोर्ट इलाके में 10 नवंबर 2025 की शाम अचानक एक जोरदार धमाका हुआ था। धमाका इतना भीषण था कि आसपास खड़ी गाड़ियों के शीशे टूट गए थे। कई दुकानों और इमारतों को भी नुकसान पहुंचाथा। इस धमाके में 11 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। शुरुआती जांच में ही जांच एजेंसियों को शक हो गया था कि यह कोई साधारण ब्लास्ट नहीं, बल्कि हाई-इंटेंसिटी VBIED हमला था। घटना के बाद पूरे दिल्ली-NCR में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया था। देश की कई सुरक्षा एजेंसियों और फॉरेंसिक टीमें मौके पर पहुंची थी।बाद में इस केस की गंभीरता को देखते हुए जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई थी। खबर को लगातार अपडेट कर रहे हैं…
दाऊद की पार्टी में गाने पर बोले कुमार सानू:अनु मलिक लेकर गए, अखबार में फोटो छपी तब डर लगा; अबू सलेम के शो में भी गाया

प्लेबैक सिंगर कुमार सानू ने 90 के दशक में अंडरवर्ल्ड से जुड़े अपने अनुभवों का खुलासा किया है। लल्लनटॉप को दिए एक इंटरव्यू में कुमार सानू ने बताया कि म्यूजिक डायरेक्टर नदीम और अनु मलिक उन्हें दुबई में एक बर्थडे पार्टी में गाने के लिए ले गए थे, जहां अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम भी मौजूद था। बाद में जब अखबारों में तस्वीरें छपीं, तब उन्हें मामले की गंभीरता समझ आई। इसके अलावा उन्होंने गैंगस्टर अबू सलेम के शो में भी गाना गाया था। पुलिस की चेतावनी और गिरफ्तारी की धमकी के बावजूद वे अपनी मजबूरी का हवाला देकर गाने गए थे। दुबई में दाऊद के सामने गाया गाना कुमार सानू ने बताया कि म्यूजिक डायरेक्टर नदीम उन्हें दुबई ले गए थे। उन्हें सिर्फ इतना बताया गया था कि किसी की बर्थडे पार्टी में गाना है। वहां दाऊद इब्राहिम अपने परिवार के साथ सामने बैठा था। उस इवेंट में अनु मलिक भी मौजूद थे। सानू ने बताया कि दाऊद ने उनके स्टेज पर गाए जाने वाले पसंदीदा गानों की रिक्वेस्ट की थी। उस वक्त उन्हें अंदाजा नहीं था कि वे किसके शो में आए हैं। जब भारत लौटने के बाद अखबारों में उनकी फोटो छपी, तब उन्हें डर लगा कि उन्होंने क्या कर दिया है। उस मुलाकात के बाद वे कभी दाऊद से नहीं मिले। अबू सलेम के शो पर पुलिस की चेतावनी, फिर भी गाने गए गैंगस्टर अबू सलेम से जुड़ा एक वाकया शेयर करते हुए सानू ने बताया कि उनसे कुछ लोगों ने पैसों की मांग की थी। सानू ने पैसे देने से मना कर दिया और कहा कि अगर कोई काम या शो हो तो वे गाना गा सकते हैं। इसके बाद वे अबू सलेम के एक शो में गाने के लिए दुबई गए। जाने से पहले पुलिस स्टेशन से फोन आया था और वहां न जाने की सलाह दी गई थी। पुलिस अधिकारियों ने कहा था कि अगर वे गए तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस पर सानू ने कहा कि वे सिंगर हैं और गाना उनकी मजबूरी है, इसलिए पुलिस उन्हें सुरक्षा दे। सुरक्षा न मिलने पर भी वे गए, परफॉर्म किया और सुरक्षित वापस लौट आए। बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड की फंडिंग पर बोले सानू 90 के दशक में बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड के कनेक्शन पर कुमार सानू ने कहा कि उस दौर में फिल्मों की ज्यादातर फंडिंग अंडरवर्ल्ड से आती थी। जो पैसा लगाता था, वही इंडस्ट्री पर राज करता था। सानू ने कहा कि उन्होंने कभी इन चीजों की ज्यादा गहराई में जाने की कोशिश नहीं की और हमेशा खुद को ऐसे मामलों से दूर रखा। वे सिर्फ अपने काम पर ध्यान देते थे, इसी वजह से वे सुरक्षित रहे और किसी का ध्यान उन पर नहीं गया। सानू ने गाए 20 हजार गाने कुमार सानू ने करियर की शुरुआत में बांग्लादेशी फिल्म ‘तीन कन्या’ से की थी। वैसे, सानू को हिंदी फिल्मों में लाने का क्रेडिट जगजीत सिंह को जाता है। उन्होंने कुमार सानू को फिल्म ‘आंधियां’ में गाना गाने का ऑफर दिया था। जगजीत सिंह ने उनकी मुलाकात कल्याणजी आनंद से कराई और उन्हीं के कहने के बाद उन्होंने अपना नाम केदारनाथ भट्टाचार्य से कुमार सानू कर लिया था। सानू ने करीब 20 हजार गाने गाए हैं। उन्होंने ‘दिल का आलम…’ (फिल्म ‘आशिकी’, 1990), ‘दिल का रिश्ता..’ (फिल्म ‘दिल का रिश्ता’, 2003), ‘राजा को रानी से…’ (फिल्म ‘अकेले हम अकेले तुम’, 1995), ‘परदेसी परदेसी…’ (फिल्म ‘राजा हिंदुस्तानी’, 1996) जैसे कई बेहतरीन गाने गाए हैं। सानू ने म्यूजिक डायरेक्टर जोड़ी नदीम-श्रवण के लिए करीब 75 फिल्मों में गाने गाए हैं। इसके अलावा उन्होंने अनु मलिक के लिए 60 फिल्मों, जतिन-ललित के लिए 30 फिल्मों और राजेश रोशन के लिए 25 फिल्मों में गाने गाए हैं।
दाऊद की पार्टी में गाने पर बोले कुमार सानू:अनु मलिक लेकर गए, अखबार में फोटो छपी तब डर लगा; अबू सलेम के शो में भी गाया

प्लेबैक सिंगर कुमार सानू ने 90 के दशक में अंडरवर्ल्ड से जुड़े अपने अनुभवों का खुलासा किया है। लल्लनटॉप को दिए एक इंटरव्यू में कुमार सानू ने बताया कि म्यूजिक डायरेक्टर नदीम और अनु मलिक उन्हें दुबई में एक बर्थडे पार्टी में गाने के लिए ले गए थे, जहां अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम भी मौजूद था। बाद में जब अखबारों में तस्वीरें छपीं, तब उन्हें मामले की गंभीरता समझ आई। इसके अलावा उन्होंने गैंगस्टर अबू सलेम के शो में भी गाना गाया था। पुलिस की चेतावनी और गिरफ्तारी की धमकी के बावजूद वे अपनी मजबूरी का हवाला देकर गाने गए थे। दुबई में दाऊद के सामने गाया गाना कुमार सानू ने बताया कि म्यूजिक डायरेक्टर नदीम उन्हें दुबई ले गए थे। उन्हें सिर्फ इतना बताया गया था कि किसी की बर्थडे पार्टी में गाना है। वहां दाऊद इब्राहिम अपने परिवार के साथ सामने बैठा था। उस इवेंट में अनु मलिक भी मौजूद थे। सानू ने बताया कि दाऊद ने उनके स्टेज पर गाए जाने वाले पसंदीदा गानों की रिक्वेस्ट की थी। उस वक्त उन्हें अंदाजा नहीं था कि वे किसके शो में आए हैं। जब भारत लौटने के बाद अखबारों में उनकी फोटो छपी, तब उन्हें डर लगा कि उन्होंने क्या कर दिया है। उस मुलाकात के बाद वे कभी दाऊद से नहीं मिले। अबू सलेम के शो पर पुलिस की चेतावनी, फिर भी गाने गए गैंगस्टर अबू सलेम से जुड़ा एक वाकया शेयर करते हुए सानू ने बताया कि उनसे कुछ लोगों ने पैसों की मांग की थी। सानू ने पैसे देने से मना कर दिया और कहा कि अगर कोई काम या शो हो तो वे गाना गा सकते हैं। इसके बाद वे अबू सलेम के एक शो में गाने के लिए दुबई गए। जाने से पहले पुलिस स्टेशन से फोन आया था और वहां न जाने की सलाह दी गई थी। पुलिस अधिकारियों ने कहा था कि अगर वे गए तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस पर सानू ने कहा कि वे सिंगर हैं और गाना उनकी मजबूरी है, इसलिए पुलिस उन्हें सुरक्षा दे। सुरक्षा न मिलने पर भी वे गए, परफॉर्म किया और सुरक्षित वापस लौट आए। बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड की फंडिंग पर बोले सानू 90 के दशक में बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड के कनेक्शन पर कुमार सानू ने कहा कि उस दौर में फिल्मों की ज्यादातर फंडिंग अंडरवर्ल्ड से आती थी। जो पैसा लगाता था, वही इंडस्ट्री पर राज करता था। सानू ने कहा कि उन्होंने कभी इन चीजों की ज्यादा गहराई में जाने की कोशिश नहीं की और हमेशा खुद को ऐसे मामलों से दूर रखा। वे सिर्फ अपने काम पर ध्यान देते थे, इसी वजह से वे सुरक्षित रहे और किसी का ध्यान उन पर नहीं गया। सानू ने गाए 20 हजार गाने कुमार सानू ने करियर की शुरुआत में बांग्लादेशी फिल्म ‘तीन कन्या’ से की थी। वैसे, सानू को हिंदी फिल्मों में लाने का क्रेडिट जगजीत सिंह को जाता है। उन्होंने कुमार सानू को फिल्म ‘आंधियां’ में गाना गाने का ऑफर दिया था। जगजीत सिंह ने उनकी मुलाकात कल्याणजी आनंद से कराई और उन्हीं के कहने के बाद उन्होंने अपना नाम केदारनाथ भट्टाचार्य से कुमार सानू कर लिया था। सानू ने करीब 20 हजार गाने गाए हैं। उन्होंने ‘दिल का आलम…’ (फिल्म ‘आशिकी’, 1990), ‘दिल का रिश्ता..’ (फिल्म ‘दिल का रिश्ता’, 2003), ‘राजा को रानी से…’ (फिल्म ‘अकेले हम अकेले तुम’, 1995), ‘परदेसी परदेसी…’ (फिल्म ‘राजा हिंदुस्तानी’, 1996) जैसे कई बेहतरीन गाने गाए हैं। सानू ने म्यूजिक डायरेक्टर जोड़ी नदीम-श्रवण के लिए करीब 75 फिल्मों में गाने गाए हैं। इसके अलावा उन्होंने अनु मलिक के लिए 60 फिल्मों, जतिन-ललित के लिए 30 फिल्मों और राजेश रोशन के लिए 25 फिल्मों में गाने गाए हैं।
कंगना की फिल्म में जूनियर आर्टिस्ट थीं साई पल्लवी:डांस रियलिटी शो से एलिमिनेट किया गया, आज भारत की सबसे बड़ी फिल्म रामायण में सीता बनीं

2017 में भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्म रामायण की घोषणा हुई। देशभर के नामी लोग इस प्रोजेक्ट से जुड़े और 2021 में फिल्म की को-प्रोड्यूसर मधु मंटेना ने घोषणा की कि इस फिल्म में भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे बड़ी स्टार कास्ट होगी। रणबीर कपूर और यश, भगवान राम और रावण के रोल के लिए चुने गए। हर किसी को इंतजार था कि आखिर माता सीता के रोल के लिए किस एक्ट्रेस का चुनाव होगा। आलिया भट्ट, दीपिका पादुकोण जैसे कई नाम की चर्चाएं हुईं। मेकर्स को एक ऐसे चेहरे की तलाश थी, जो सादगी और खूबसूरती से भरपूर हो और उस नाम के साथ कोई स्कैंडल या विवाद न हो। और फिर अगस्त 2023 में इस रोल के लिए साउथ एक्ट्रेस साई पल्लवी के नाम की घोषणा हुई। साई पल्लवी, एक ऐसी एक्ट्रेस, जो कुछ सालों पहले तक एक जूनियर आर्टिस्ट हुआ करती थीं। फिल्म में उन्हें छोटे-मोटे रोल दिए जाते थे, जिनके डायलॉग भी कम ही हुआ करते थे। वहीं फिल्मों में आने से पहले साई पल्लवी एक मेडिकल स्टूडेंट थीं और साउथ के एक डांस रियलिटी शो की कंटेस्टेंट थीं। वो शो की फाइनलिस्ट रहीं, लेकिन जीत नहीं सकीं, लेकिन कुछ सालों बाद इन्हीं साई पल्लवी के गाने राउडी बेबी ने 1 बिलियन व्यूज हासिल कर इतिहास रच दिया। आज सक्सेस स्टोरी के 3 चैप्टर्स में जानिए कभी जूनियर आर्टिस्ट रहीं साई पल्लवी की भारत की टॉप एक्ट्रेस बनने की प्रेरणादायक कहानी- 9 मई 1992 तमिलनाडू के कोयम्बटूर में एक्साइज ऑफिसर के घर साई पल्लवी का जन्म हुआ। उनका परिवार तमिलनाडु के कोटागिरी से ताल्लुक रखता है। शुरुआती पढ़ाई अविला कॉन्वेंट स्कूल से हुई। वो बैडमिंटन की भी बेहतरीन प्लेयर रहीं। लव लेटर लिखने पर घर में हुई पिटाई साई पल्लवी स्कूल के दिनों में बेहद शरारती थीं और स्कूल में पॉपुलर थीं। वह दूसरे बच्चों का जमकर मजाक उड़ाती थीं। देखने में बेहद खूबसूरत साई को कई लड़के अप्रोच करते थे। एक बार 7वीं क्लास में एक लड़के ने उनके बैग में लव लेटर रख दिया था। शाम को जब उनके पिता ने उनका बैग चेक किया तो उसमें लेटर निकला। ये देखकर उन्हें पिता की खूब मार पड़ी थी। साई ने खुद नेटफ्लिक्स के शो माय विलेज में ये किस्सा बताया था। कंगना की फिल्म में बनीं जूनियर आर्टिस्ट उनका फिल्म इंडस्ट्री से दूर-दूर तक कोई ताल्लुक नहीं था, इसके बावजूद घर में टीवी देखते हुए उनका झुकाव डांस और एक्टिंग की तरफ था। उन्होंने टीवी शो देखकर डांस सीखा। पहली बार उनका फिल्मी दुनिया से परिचय 2005 की फिल्म कस्तूरी मान से हुआ। वो फिल्म से हीरो-हीरोइन के पीछे डांस करने वालीं बैकग्राउंड डांसर के तौर पर जुड़ीं, लेकिन फिर फिल्म में उन्हें चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर काम करने का मौका मिला। कुछ लोगों से जान-पहचान की मदद से वो टीनएज में फिल्म धाम धूम (2008) में जूनियर आर्टिस्ट रहीं। वह छठी क्लास में थीं। इस फिल्म से बॉलीवुड में नई-नई आईं कंगना रनोट ने तमिल सिनेमा में डेब्यू किया था। साई पल्लवी को फिल्म में कंगना रनोट के पीछे खड़े हुए देखा जा सकता है। इन फिल्मों में छोटे रोल करने के बाद साई पल्लवी ने पढ़ाई पर फोकस किया, हालांकि स्कूल में उन्होंने कल्चरल इवेंट में हिस्सा लेना जारी रखा। वो लोकल डांस कॉम्पिटिशन में भी हिस्सा लिया करती थीं। डांस स्कूल के कुछ साथियों की मदद से साई पल्लवी ने 2008 में साउथ के तमिल डांस रियलिटी शो उंगलिल यार अदुथा प्रभु देवा (कौन बनेगा अगला प्रभु देवा) में हिस्सा लिया। शो का फाइनलिस्ट बनने पर कंटेस्टेंट को प्रभु देवा से मिलने का मौका दिया जाने वाला था। साई इसके लिए बेहद एक्साइटेड थीं, लेकिन फिनाले से ठीक पहले उनका एलिमिनेशन हो गया। दुर्भाग्य से जिस दिन वो एलिमिनेट हुईं, उस दिन उनका बर्थडे था। साई का मानना था कि अगर बर्थडे के दिन रोए, तो पूरे साल रोना पड़ेगा। एलिमिनेशन की घोषणा के बाद साई भावुक हो गईं, लेकिन आंसू रोककर रखे। घर लौटकर साई ने बर्थडे नहीं मनाया और सीधे बिस्तर पर लेट गईं। मां उनकी उदासी समझ गईं और कहा- ‘बेटा जिंदगी में जो होता है, अच्छे के लिए होता है। तुम अभी रोना चाहो, तो रो लो, आज के बाद कभी रोना नहीं पड़ेगा।’ पहले डांस शो से निकलने के बाद साई ने 2009 में धी अल्टीमेट डांस शो (D4) में हिस्सा लिया और फाइनलिस्ट रहीं। शो के एक एपिसोड में डांट पड़ने से साई पल्लवी मंच पर खड़ीं भावुक हो गईं। कैमरा उन्हें रोते हुए कैप्चर न करें, इसलिए वो पलट गईं और देर तक पीछे मुड़कर रोती रहीं। फ्राइज एंज पोटैटो को दिए इंटरव्यू में साई ने कहा था, ‘एक मास्टर ने मुझे डांटा तो मैं पीछे मुड़कर रोने लगी। शो की एंकर राम्या मुझे धीरे से कह रही थीं कि तुम्हें पलटना होगा। लेकिन मैंने कहा, नहीं, मैं नहीं चाहती कि लोग मुझे रोते हुए देखें। मैं दुखी लड़की की तरह नहीं लगना चाहती थी।’ शो न जीतने के बावजूद उनकी बेहतरीन हाई-एनर्जी डांस परफॉर्मेंस की वीडियो क्लिप अक्सर फेसबुक पर वायरल होती थीं। एक एपिसोड में सामंथा बतौर गेस्ट पहुंचीं और साई की जमकर तारीफ की थी। बेहतरीन कैमरा अपीयरेंस के चलते उन्हें कुछ टीवी एड और शॉर्ट फिल्म ‘काची पिजाई’ में काम मिला। शो के बाद साई पल्लवी की मां ने उन्हें मेडिकल स्टडीज के लिए जॉर्जिया भेजने का मन बना लिया। साई जाना नहीं चाहती थीं, लेकिन मां ने कहा कि उनकी कजिन भी बाहर जाकर पढ़ाई कर रही हैं, उन्हें शादी के लिए अच्छे लड़के मिलेंगे, अगर साई नहीं गईं, तो वो कजिन से पीछे रह जाएंगी। मां की बात मानकर साई ने जॉर्जिया जाने का फैसला किया। डांस रियलिटी शो की बदौलत कई फिल्में ऑफर हुईं, हर रोल ठुकराया साउथ फिल्ममेकर शेखर काम्मुला ने साई के डांस रियलिटी शो की एक क्लिप देखकर उन्हें फिल्म हैप्पी डेज ऑफर की। हालांकि साई ने पढ़ाई के लिए फिल्म ठुकरा दी। कुछ दिनों बाद उन्हें फिल्म मद्रास (2014) में लीड रोल ऑफर हुआ, लेकिन साई ने एकेडमिक्स के लिए ये ऑफर भी ठुकरा दिया। साई पल्लवी ने फ्राइज एंड पटेटो को दिए इंटरव्यू में कहा था, ‘जॉर्जिया जाने
'रामायण' की आलोचना पर बोले रणबीर:फोन पर ट्रेलर देखकर AI समझ रहे लोग; एक सीन पूरा करने में 3 साल तक लगे

नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही फिल्म ‘रामायण’ के टीजर और ट्रेलर में दिखाए गए VFX की आलोचना पर रणबीर का बयान सामने आया है। ‘कोलाइडर’ को दिए एक इंटरव्यू में फिल्म के मुख्य अभिनेता रणबीर कपूर, निर्देशक नितेश तिवारी और को-प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ने ट्रोल्स को जवाब दिया है। दरअसल ट्रेलर लॉन्च होने के बाद फिल्म के ग्राफिक्स की आलोचना की जा रही थी। इस पर रणबीर कपूर ने कहा कि स्मार्टफोन और खराब इंटरनेट कनेक्शन पर लोग ट्रेलर देखकर विजुअल इफेक्ट्स को जज कर रहे हैं। मेकर्स ने दर्शकों से फिल्म को IMAX 3D में देखने का आग्रह किया है और बताया कि अभी VFX का काम पूरा होना बाकी है। ‘फोन पर ट्रेलर देखकर AI समझने लगते हैं लोग’ रणबीर कपूर ने कहा कि जिन लोगों को कंप्यूटर ग्राफिक्स की जानकारी नहीं है, उन्हें लगता है कि सब कुछ सिर्फ AI से बना दिया गया है। असलियत में किसी भी सीन को तैयार करने में अनगिनत घंटे और कई सालों की मेहनत लगती है। रणबीर ने बताया कि प्रोजेक्ट की शुरुआत से ही नितेश तिवारी और नमित मल्होत्रा विजुअल इफेक्ट्स की मीटिंग्स में बैठकर आसमान का रंग तक सही करने में लगे रहते हैं। उनका मानना है कि आजकल के दर्शकों को कंप्यूटर ग्राफिक्स से प्रभावित करना काफी मुश्किल काम हो गया है। बड़े पर्दे के अनुभव के लिए लाखों डॉलर खर्च किए फिल्म के को-प्रोड्यूसर और विजुअल इफेक्ट्स एक्सपर्ट नमित मल्होत्रा ने कहा कि लोग सही स्क्रीन और माहौल में विजुअल का अनुभव नहीं कर रहे हैं। जब वही विजुअल IMAX में 3D में देखा जाता है तो लोगों की राय बदल जाती है। नमित के अनुसार, मेकर्स बड़े पर्दे का बेहतरीन अनुभव देने के लिए लाखों डॉलर खर्च कर रहे हैं, लेकिन लोग खराब इंटरनेट कनेक्शन वाले मोबाइल फोन पर देखकर कमियां निकालने लगते हैं। छोटी सी गलती को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा निर्देशक नितेश तिवारी ने बताया कि उनकी टीम अभी भी विजुअल इफेक्ट्स के काम को अंतिम रूप देने में लगी हुई है। फिल्म के कुछ खास सीक्वेंस पूरे करने में ढाई से तीन साल का समय लगा है। नितेश ने कहा कि जब कोई इंसान सिर्फ कमियां ढूंढने की नीयत से काम देखता है, तो पूरी टीम की सालों की कोशिशें नजरअंदाज हो जाती हैं और किसी छोटी सी चूक को भी बहुत बड़ा बनाकर पेश किया जाता है। 8 बार ऑस्कर जीत चुकी है नमित मल्होत्रा की कंपनी DNEG आलोचनाओं के बीच नमित मल्होत्रा की विजुअल इफेक्ट्स कंपनी DNEG का ट्रैक रिकॉर्ड काफी मजबूत रहा है। यह कंपनी नमित की मूल कंपनी ‘प्राइम फोकस’ के तहत आने वाली एक ब्रिटिश विजुअल इफेक्ट्स कंपनी है। DNEG को अब तक बेहतरीन विजुअल इफेक्ट्स कैटेगरी में कुल 8 बार ऑस्कर अवॉर्ड मिल चुका है। इसमें क्रिस्टोफर नोलन की ‘इन्सेप्शन’, ‘इंटरस्टेलर’, ‘टेनेट’ के अलावा ‘ब्लेड रनर 2049’ और ‘ड्यून’ जैसी बड़ी हॉलीवुड फिल्में शामिल हैं। 4,000 करोड़ के बजट में बन रही देश की सबसे बड़ी फिल्म नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही फिल्म ‘रामायण’ भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फिल्मों में से एक है। इसका कुल बजट करीब 4,000 करोड़ रुपए बताया जा रहा है। फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा और साउथ स्टार यश मिलकर कर रहे हैं। फिल्म में रणबीर कपूर और यश के अलावा कई बड़े कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं। टीजर रिलीज के बाद से ही फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच चर्चा बनी हुई है। फिल्म ‘रामायण’ से जुड़ी अहम बातें-
रिया चक्रवर्ती बोलीं- 18 की उम्र में चेहरा सही कराया:तब 3 लाख सैलरी मिलती थी, कमाई से ब्यूटी ट्रीटमेंट कराया

अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती ने अपने करियर के शुरुआती दिनों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। कॉमेडियन तन्मय भट्ट के यूट्यूब चैनल पर बातचीत में रिया ने बताया कि 17-18 साल की उम्र में एमटीवी वीजे के तौर पर उन्हें 3 लाख रुपए सैलरी मिलती थी। रिया के मुताबिक वे खुद को बहुत अमीर मानती थीं और उन्होंने यह सारा पैसा अपने चेहरे का ब्यूटी ट्रीटमेंट कराने में खर्च कर दिया था। इसके साथ ही रिया ने बताया कि उनके करियर का पहला सेलिब्रिटी इंटरव्यू सलमान खान का था, जिनसे उस वक्त सब डरते थे। चेहरे की सर्जरी पर खर्च की सैलरी रिया ने अपनी सैलरी का जिक्र करते हुए कहा कि 17-18 साल की उम्र में 3 लाख रुपए महीना मिलना उनके लिए बहुत बड़ी बात थी। जब तन्मय ने उनसे पूछा कि उन्होंने इस पैसे का क्या किया, तो रिया ने बेबाकी से जवाब दिया कि उन्होंने यह पैसा अपने चेहरे को ठीक कराने यानी ब्यूटी ट्रीटमेंट पर खर्च किया। तन्मय के पूछने पर कि क्या उन्हें भी ऐसा कराना चाहिए, रिया ने सलाह दी कि हर किसी को यह कराना चाहिए क्योंकि अब टेक्नोलॉजी काफी एडवांस हो गई है। सब सलमान से डरते थे, इसलिए मुझे इंटरव्यू करने दिया बातचीत में रिया ने बताया कि एमटीवी वीजे के रूप में काम करते समय उन्होंने सबसे पहले सलमान खान का इंटरव्यू लिया था। रिया ने कहा कि बाकी टीम मेंबर्स ने उन्हें आसानी से सलमान का इंटरव्यू करने दिया, क्योंकि बाकी लोग सलमान से डरते थे। रिया ने हंसते हुए कहा कि उस दौर में केवल अच्छे दिखने वाले लोगों को ही बोलने की इजाजत होती थी। सुशांत केस में सीबीआई ने दी क्लीन चिट रिया चक्रवर्ती के पर्सनल लाइफ की बात करें तो जून 2020 में एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद वे विवादों में आ गई थीं। इस मामले में रिया को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने ड्रग्स से जुड़े केस में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उन्हें जमानत मिल गई थी। साल 2025 में सीबीआई ने इस केस में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। सीबीआई ने साफ किया कि सुशांत की हत्या या रिया द्वारा उन्हें खुदकुशी के लिए उकसाने का कोई सबूत नहीं मिला है। मुंबई की अदालत ने सीबीआई की इस क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था। ‘रोडीज’ से की वापसी, नए शो में नजर आएंगी विवादों के बाद रिया को इंडस्ट्री में काम मिलना बंद हो गया था। इसके बाद उन्होंने साल 2023 में ‘रोडीज: कर्म या कांड’ शो में गैंग लीडर बनकर वापसी की। इसके अलावा 2024 में रिया ने अपना क्लॉथिंग ब्रांड ‘चैप्टर 2’ भी लॉन्च किया। अब रिया जल्द ही करण जौहर के रियलिटी शो ‘द ट्रेटर्स 2’ में नजर आने वाली हैं। यह शो 13 अगस्त को प्राइम वीडियो पर रिलीज होगा। इसमें मल्लिका शेरावत, मुनव्वर फारुकी और श्वेता तिवारी समेत 21 सेलिब्रिटीज हिस्सा ले रहे हैं।
रिया चक्रवर्ती बोलीं- 18 की उम्र में चेहरा सही कराया:तब 3 लाख सैलरी मिलती थी, कमाई से ब्यूटी ट्रीटमेंट कराया

अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती ने अपने करियर के शुरुआती दिनों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। कॉमेडियन तन्मय भट्ट के यूट्यूब चैनल पर बातचीत में रिया ने बताया कि 17-18 साल की उम्र में एमटीवी वीजे के तौर पर उन्हें 3 लाख रुपए सैलरी मिलती थी। रिया के मुताबिक वे खुद को बहुत अमीर मानती थीं और उन्होंने यह सारा पैसा अपने चेहरे का ब्यूटी ट्रीटमेंट कराने में खर्च कर दिया था। इसके साथ ही रिया ने बताया कि उनके करियर का पहला सेलिब्रिटी इंटरव्यू सलमान खान का था, जिनसे उस वक्त सब डरते थे। चेहरे की सर्जरी पर खर्च की सैलरी रिया ने अपनी सैलरी का जिक्र करते हुए कहा कि 17-18 साल की उम्र में 3 लाख रुपए महीना मिलना उनके लिए बहुत बड़ी बात थी। जब तन्मय ने उनसे पूछा कि उन्होंने इस पैसे का क्या किया, तो रिया ने बेबाकी से जवाब दिया कि उन्होंने यह पैसा अपने चेहरे को ठीक कराने यानी ब्यूटी ट्रीटमेंट पर खर्च किया। तन्मय के पूछने पर कि क्या उन्हें भी ऐसा कराना चाहिए, रिया ने सलाह दी कि हर किसी को यह कराना चाहिए क्योंकि अब टेक्नोलॉजी काफी एडवांस हो गई है। सब सलमान से डरते थे, इसलिए मुझे इंटरव्यू करने दिया बातचीत में रिया ने बताया कि एमटीवी वीजे के रूप में काम करते समय उन्होंने सबसे पहले सलमान खान का इंटरव्यू लिया था। रिया ने कहा कि बाकी टीम मेंबर्स ने उन्हें आसानी से सलमान का इंटरव्यू करने दिया, क्योंकि बाकी लोग सलमान से डरते थे। रिया ने हंसते हुए कहा कि उस दौर में केवल अच्छे दिखने वाले लोगों को ही बोलने की इजाजत होती थी। सुशांत केस में सीबीआई ने दी क्लीन चिट रिया चक्रवर्ती के पर्सनल लाइफ की बात करें तो जून 2020 में एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद वे विवादों में आ गई थीं। इस मामले में रिया को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने ड्रग्स से जुड़े केस में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उन्हें जमानत मिल गई थी। साल 2025 में सीबीआई ने इस केस में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। सीबीआई ने साफ किया कि सुशांत की हत्या या रिया द्वारा उन्हें खुदकुशी के लिए उकसाने का कोई सबूत नहीं मिला है। मुंबई की अदालत ने सीबीआई की इस क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था। ‘रोडीज’ से की वापसी, नए शो में नजर आएंगी विवादों के बाद रिया को इंडस्ट्री में काम मिलना बंद हो गया था। इसके बाद उन्होंने साल 2023 में ‘रोडीज: कर्म या कांड’ शो में गैंग लीडर बनकर वापसी की। इसके अलावा 2024 में रिया ने अपना क्लॉथिंग ब्रांड ‘चैप्टर 2’ भी लॉन्च किया। अब रिया जल्द ही करण जौहर के रियलिटी शो ‘द ट्रेटर्स 2’ में नजर आने वाली हैं। यह शो 13 अगस्त को प्राइम वीडियो पर रिलीज होगा। इसमें मल्लिका शेरावत, मुनव्वर फारुकी और श्वेता तिवारी समेत 21 सेलिब्रिटीज हिस्सा ले रहे हैं।
ट्रम्प ने माना- ईरान के डर से प्लेन बदलना पड़ा:हमला होता तो पहले वाले पर होता; ट्रक में छिपकर दूसरे प्लेन तक पहुंचे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मान लिया है कि उन्होंने पिछले महीने तुर्किए में ईरान के डर से प्लेन बदला था। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से NATO समिट में हिस्सा लेने गए थे उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था। ट्रम्प ने यह भी बताया कि उन्हें सुरक्षा कारणों से एयरपोर्ट के कैटरिंग ट्रक में बैठाकर दूसरे विमान तक ले जाया गया। ट्रम्प ने कहा- अगर कोई हमला होता तो उसी प्लेन को निशाना बनाया जाता। मैं वही करता हूं, जो सुरक्षा एजेंसियां कहती हैं। मुझे लगातार धमकियां मिलती रहती हैं। कतर के गिफ्ट किए प्लेन में बैठकर गए, मिलिट्री प्लेन से लौटे इससे पहले वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया था कि 8 जुलाई को अंकारा से रवाना होते समय ट्रम्प कैमरों के सामने बोइंग 747-8 एयर फोर्स वन में सवार हुए थे। यह विमान उन्हें कतर ने गिफ्ट किया था। इसके बाद एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली केटरिंग गाड़ी की मदद से उन्हें चुपचाप अमेरिकी वायुसेना के वीआईपी सैन्य विमान C-32A तक ले जाया गया। मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प दूसरे विमान में हैं अमेरिकी राष्ट्रपति जब भी किसी दौरे पर जाते हैं, तो उनके साथ कुछ पत्रकार भी यात्रा करते हैं। सुरक्षा कारणों से हर जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन इन पत्रकारों को इतना जरूर पता होता है कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं और कहां जा रहे हैं। तुर्किये से उड़ान भरते समय पत्रकारों को लगा कि ट्रम्प भी उसी पुराने एयर फोर्स वन में हैं, लेकिन हकीकत अलग थी। उड़ान के दौरान पत्रकारों को अपनी खिड़कियों के शेड नीचे रखने को कहा गया। यानी उन्हें बाहर देखने की इजाजत नहीं थी। ऐसी सावधानी आमतौर पर तब बरती जाती है, जब विमान किसी खतरे वाले इलाके से गुजर रहा हो। बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने कहा, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे। उनकी सूची में सबसे ऊपर मेरा नाम है। अगर मैं मरूंगा, तो आप भी मरेंगे।” ट्रम्प वाला छोटा विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा ट्रम्प को लेकर छोटा C-32A विमान रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया। इस विमान में पत्रकार सवार थे। इसके बाद उन्हें चुपचाप पुराने एयर फोर्स वन में लाया गया। कुछ देर बाद वे उसी विमान से उतरते दिखे, जिससे पत्रकारों को लगा कि वे पूरी यात्रा उसी में कर रहे थे। हालांकि, यह साफ नहीं है कि C-32A से उतरने के बाद ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। ट्रम्प ने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए उनके असली सफर को छिपाने का तरीका नया नहीं है। साल 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब उन्हें एक ऐसे सरकारी विमान से भेजा गया था, जिस पर राष्ट्रपति के विमान की कोई पहचान नहीं थी। वहीं, उनका असली एयरफोर्स वन दूसरे रास्ते से भेजा गया था, ताकि लोगों को पता न चले कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से मिले विश्वसनीय खतरे के इनपुट के बाद यह पूरा सुरक्षा ऑपरेशन कुछ ही घंटों में तैयार किया गया था। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ समेत कुछ चुनिंदा अधिकारी इसमें शामिल थे। कतर से मिले नए विमान की सुरक्षा पर भी सवाल उठे ट्रम्प जिस बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, वह कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3 हैरिस टेक्नोलॉजीज ने इसे राष्ट्रपति के सफर के लिए तैयार किया है। ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। कुछ दिन बाद वे इसी विमान से अपनी पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचे। इस विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति को हमले से बचाने के लिए कुछ खास सुरक्षा इंतजाम हैं, जो कतर से मिले विमान में नहीं हैं या उनकी क्षमता अलग है। व्हाइट हाउस ने कहा- नए विमान की सुरक्षा में कोई कमी नहीं कतर से मिले वाले विमान की सुरक्षा पर सवालों के जवाब में व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीव चेउंग ने कहा कि इस विमान में ट्रम्प और उनके साथ मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा, अमेरिका के कई दुश्मन ट्रम्प को निशाना बनाना चाहते हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए हम हर जरूरी तरीका अपनाते हैं। यानी व्हाइट हाउस ने यह नहीं माना कि नए विमान में सुरक्षा की कोई कमी थी। उसका कहना है कि ट्रम्प की सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर अलग-अलग तरीके अपनाए जा सकते हैं। पेंटागन यानी अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस मामले पर तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।
अमेरिकी अधिकारी बोले- मोदी-ट्रम्प टैरिफ का मुद्दा सुलझाएंगे:कहा- उनके बीच अच्छे संबंध; पहले अमेरिका में भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल पास हुआ था

अमेरिकी राष्ट्रपति के वरिष्ठ सलाहकार नवारो ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और पीएम मोदी के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। दोनों नेता रूसी तेल से जुड़े 100% टैरिफ के मुद्दे को आपस में सुलझा लेंगे। दरअसल, शुक्रवार को अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के बहुमत से भारत समेत 5 देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने वाला बिल पास कर किया था। हालांकि, अभी ये कानून नहीं बना है। अभी इसे अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भेजा जाएगा। बिल के मुताबिक भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है। इसका मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर हो सके। पहले 500%टैरिफ का प्रस्ताव था 23 जुलाई को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन बिल के शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया। ईरान के साथ ट्रेड करने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध बढ़ेगा अगर यह कानून बन जाता है तो 1996 का ‘ईरान प्रतिबंध कानून’ 2031 तक बढ़ जाएगा। यह कानून उन गैर-अमेरिकी कंपनियों पर पाबंदी लगाता है जो ईरान के साथ व्यापार करती हैं। यह कानून इसी साल खत्म होने वाला था। इस बिल से अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार भी मिल जाएगा कि वे अमेरिका में आने वाले रूसी सामान पर 500% तक टैरिफ लगा सकें। राष्ट्रपति का यह अधिकार 5 साल तक लागू रहेगा। व्हाइट हाउस ने पहले भी रूस पर पाबंदियां लगाने की कोशिश की थी। लेकिन ईरान युद्ध के दौरान जब होर्मुज बंद हुआ, तो तेल का संकट आ गया। इस वजह से अमेरिकी प्रशासन को तेल की बिक्री पर कुछ समय के लिए छूट देनी पड़ी थी। भारत ने जून में आधे से ज्यादा तेल रूस से खरीदा भारत ने जून 2026 में रूस से रिकॉर्ड 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जो देश के कुल तेल आयात का 52.4% था। यानी पिछले महीने भारत में आयात होने वाले हर दो बैरल तेल में एक से ज्यादा बैरल रूस से आया। रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। मई के मुकाबले जून में रूस से तेल आयात में करीब 39% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह बिल कानून बना तो भारत पर असर पहली स्थिति: भारत रूस से तेल खरीदता रहे अमेरिका के 100% टैरिफ का सीधा असर भारत के निर्यात बिल पर पड़ सकता है। इससे भारतीय सामान अमेरिका में दोगुना महंगा हो जाएगा। अमेरिकी खरीदार सस्ता विकल्प ढूंढेंगे जैसे बांग्लादेश, वियतनाम, मैक्सिको, चीन। नतीजतन भारत के टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, लेदर, समुद्री उत्पाद, केमिकल्स आदि के ऑर्डर घट जाएंगे। दूसरी स्थिति: भारत रूस को छोड़कर दूसरे देशों से तेल खरीदे तो रूस से आने वाले तेल पर प्रतिबंध या टैरिफ का दबाव बढ़ता है, तो भारत को दूसरे देशों से तेल खरीदना पड़ेगा। यह महंगा पड़ सकता है, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। अमेरिका के प्रतिबंध पूरे असरदार नहीं अमेरिका के प्रतिबंध और टैरिफ से कई देशों की अर्थव्यवस्था और कारोबार पर असर पड़ा, लेकिन राजनीतिक मकसद हमेशा पूरे नहीं हुए। 1. क्यूबा: 1960 से अमेरिका ने 1960 में क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए। छह दशक से ज्यादा समय बीतने के बाद भी ये प्रतिबंध क्यूबा की सरकार को बदलने में सफल नहीं हुए। क्यूबा ने 2023 में संयुक्त राष्ट्र में कहा कि इन प्रतिबंधों से उसे अब तक 159 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ है। 2. इराक: 1990 से इराक पर 1990 में आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए। इनका उसकी अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर बड़ा असर पड़ा। तेल से होने वाली कमाई और जरूरी सामान के आयात पर असर पड़ा। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों में प्रतिबंधों के दौरान भूख, बीमारी और गरीबी बढ़ने की बात कही गई। 3. ईरान: 2012 से 2012 में कड़े प्रतिबंध लगाए जाने के बाद ईरान का तेल निर्यात करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन घट गया। उसकी अर्थव्यवस्था लगातार दो साल तक मंदी में रही। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, 2012-14 के दौरान प्रतिबंधों से ईरान के निर्यात को 17.1 अरब डॉलर, यानी उसकी GDP के करीब 4.5% का नुकसान हुआ। 4. चीन: 2018 से अमेरिका ने 2018 में चीन से आने वाले करीब 250 अरब डॉलर के सामान पर अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) लगाया। 2019 में चीन से अमेरिका आने वाला सामान 16.2% घटकर 452.2 अरब डॉलर रह गया और दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा 17.6% कम हुआ। लेकिन अमेरिकी व्यापार आयोग के मुताबिक, इन टैरिफ का ज्यादातर खर्च अमेरिकी कंपनियों और खरीदारों ने उठाया। 5. रूस: 2022 से यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और दूसरे देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए। इससे रूस के लिए विदेशों से पैसा जुटाना, कारोबार करना और जरूरी तकनीक हासिल करना मुश्किल हुआ। IMF ने अप्रैल 2022 में अनुमान लगाया था कि उस साल रूस की अर्थव्यवस्था 8.5% घट सकती है। लेकिन रूस ने तेल समेत अपना सामान दूसरे देशों में बेचकर नुकसान को कुछ कम कर लिया। —————————– ये खबर भी पढ़ें… UK की व्हिस्की, कारें और ब्यूटी प्रोडक्ट्स सस्ते मिलेंगे:भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आज से लागू, जानें किन चीजों के दाम बदलेंगे भारत में UK की कारें, व्हिस्की, कपड़े और फुटवियर आज से सस्ते मिलेंगे। आज से भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू हो गया है। यानी अब भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। वहीं UK के 99% सामान 3% एवरेज टैरिफ पर आयात होंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…









