Saturday, 17 Oct 2026 | 10:16 PM

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ईरान जंग- 9 एशियाई देशों में तेल संकट:बांग्लादेश में यूनिवर्सिटीज बंद, थाइलैंड में लिफ्ट इस्तेमाल पर रोक; पाकिस्तान में मंत्रियों की सैलरी-विदेश यात्रा रोकी

ईरान जंग- 9 एशियाई देशों में तेल संकट:बांग्लादेश में यूनिवर्सिटीज बंद, थाइलैंड में लिफ्ट इस्तेमाल पर रोक; पाकिस्तान में मंत्रियों की सैलरी-विदेश यात्रा रोकी

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच 11 दिनों से जारी जंग का असर अब एशिया के कई देशों में दिखाई देने लगा है। भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत 9 एशियाई देशों ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए आपात कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पाकिस्तान ने दो हफ्ते के लिए स्कूल बंद करने का फैसला किया है और दफ्तरों में कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने के निर्देश दिए गए हैं। बांग्लादेश ने सभी यूनिवर्सिटी बंद करने का आदेश दिया है और ईद की छुट्टियां पहले कर दी हैं। दक्षिण कोरिया, जापान और इंडोनेशिया जैसे देश भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए सब्सिडी देने जैसे कदम उठा रहे हैं। चीन ने भी ईंधन के निर्यात पर फिलहाल रोक लगा दी है। जंग की वजह से होर्मुज स्ट्रेट बंद है, इसके चलते तेल की सप्लाई ठप्प हो गई है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का बहुत अहम समुद्री रास्ता है। हर साल दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। थाईलैंड- लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों के इस्तेमाल का आदेश थाईलैंड में सरकार ने ऊर्जा बचाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने और दफ्तरों में लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं। सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक जिन अधिकारियों को सीधे जनता की सेवा देनी होती है, उन्हें इस नियम से छूट दी गई है। थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल ने सरकारी कर्मचारियों को ऊर्जा बचाने के लिए जरूरी कदम लागू करने को कहा है। सरकार ने विदेश यात्राओं को अस्थायी रूप से रोक दिया है। ऊर्जा बचत के लिए एयर कंडीशनर का तापमान 26 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रखने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों को सूट-टाई जैसे औपचारिक कपड़ों की जगह शॉर्ट स्लीव शर्ट पहनने की सलाह दी गई है। ऊर्जा मंत्री के अनुसार देश के पास फिलहाल करीब 95 दिन का ऊर्जा भंडार बचा है। सरकार अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका से अतिरिक्त LNG खरीदने की कोशिश कर रही है। सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर संकट और गहरा हुआ तो दुकानों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के विज्ञापन बोर्ड की रोशनी कम करने और पेट्रोल पंपों को रात 10 बजे तक बंद करने जैसे कड़े कदम भी उठाए जा सकते हैं। चीन- कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई, फ्यूल एक्सपोर्ट रोका चीन ने संभावित ऊर्जा संकट को देखते हुए कच्चे तेल की खरीद बढ़ाकर अपने रणनीतिक भंडार मजबूत करना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन ने साल के शुरुआती महीनों में अतिरिक्त कच्चा तेल खरीदा है और इसे रणनीतिक तथा वाणिज्यिक भंडार में रखा जा रहा है। इसके साथ ही सरकार ने रिफाइनरियों को नए फ्यूल एक्सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट साइन न करने और कुछ तय शिपमेंट को रोकने के निर्देश दिए हैं। सरकार का मकसद घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर मध्य-पूर्व में संघर्ष लंबा चला और वैश्विक सप्लाई और प्रभावित हुई, तो चीन अपने रणनीतिक तेल भंडार का उपयोग कर सकता है। पाकिस्तान- मंत्रियों की सैलरी और विदेश दौरों पर रोक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोमवार को बढ़ती तेल कीमतों को देखते हुए खर्चों में कटौती योजना का ऐलान किया है। इसके तहत सरकारी दफ्तर हफ्ते में सिर्फ चार दिन खुलेंगे और आधे कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। इस हफ्ते के अंत से स्कूल दो हफ्तों के लिए बंद रहेंगे। पाकिस्तानी न्यूज चैनल जियो न्यूज के मुताबिक, मंत्रियों और सलाहकारों के विदेश दौरे रोक दिए गए हैं। मंत्री दो महीने तक वेतन नहीं लेंगे और सांसदों की सैलरी में 25% की कटौती होगी। वहीं, पाकिस्तान में अब दो महीने तक सरकारी गाड़ियों को 50% कम ईंधन मिलेगा। 60% सरकारी वाहन नहीं चलेंगे। सभी सरकारी विभाग अपने खर्च में 20% कटौती करेंगे। शरीफ ने कहा कि अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष की वजह से कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गई है। इस वजह से यह निर्णय लिए गए हैं। बांग्लादेश- सभी यूनिवर्सिटीज को बंद किया बांग्लादेश ने बिजली और ईंधन की खपत कम करने के लिए सोमवार से सभी यूनिवर्सिटीज बंद करने का आदेश दिया है और ईद-उल-फितर की छुट्टियां पहले घोषित कर दी हैं। ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक हाल के दिनों में ईंधन की कमी की आशंका के चलते लोगों में घबराहट बढ़ी और कई जगहों पर जमाखोरी शुरू हो गई थी। इसके बाद सरकार ने दैनिक फ्यूल बिक्री पर सीमा लगा दी। गैस की कमी का असर उद्योगों पर भी पड़ा है। देश की कई उर्वरक फैक्ट्रियों में गैस सप्लाई कम होने के कारण उत्पादन रोकना पड़ा है। सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर ऊर्जा बचत के लिए और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। वियतनाम- कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सलाह वियतनाम में सरकार ने ऊर्जा बचाने के लिए कंपनियों से कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देने की अपील की है। वियतनाम के उद्योग और व्यापार मंत्रालय के मुताबिक इससे दफ्तर आने-जाने में होने वाली ईंधन खपत कम होगी और ऊर्जा बचत में मदद मिलेगी। इसके साथ ही सरकार ने घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कुछ फ्यूल आयात पर लगाए गए टैरिफ भी हटा दिए हैं। सरकार का कहना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच ईंधन की सप्लाई बनाए रखना और खपत कम करना दोनों जरूरी हैं। इसी वजह से वियतनाम ऊर्जा बचत और ईंधन उपलब्धता बढ़ाने के लिए एक साथ कई कदम उठा रहा है। साउथ कोरिया- फ्यूल कीमतों पर कैप लगाने की तैयारी वैश्विक तेल सप्लाई पर दबाव बढ़ने के बाद साउथ कोरिया ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकार घरेलू ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने के लिए लगभग तीन दशक बाद पहली बार प्राइस कैप लगाने की तैयारी कर रही है। साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने कहा है कि यह कदम तेल कीमतों में तेजी को रोकने और आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए उठाया जा रहा है। सरकार ने यह भी कहा है कि वह ऐसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत तलाश रही

पवई में होली मनाने घर आए दो स्थाई वारंटी गिरफ्तार:चोरी-मारपीट के मामलों में 7 साल से फरार थे; स्पेशल आपरेशन में पकड़ाए

पवई में होली मनाने घर आए दो स्थाई वारंटी गिरफ्तार:चोरी-मारपीट के मामलों में 7 साल से फरार थे; स्पेशल आपरेशन में पकड़ाए

पन्ना जिले की पवई थाना पुलिस ने मंगलवार को होली का त्योहार मनाने अपने गांव आए दो स्थाई वारंटियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी पिछले सात-आठ वर्षों से पुलिस को चकमा दे रहे थे। दोनों को कोर्ट के आदेश पर पवई उप जेल भेज दिया गया है। लंबे समय से फरार थे पुलिस को सूचना मिली थी कि लंबे समय से फरार चल रहे वारंटी होली का त्योहार मनाने के लिए अपने गांव आए हुए हैं। थाना प्रभारी सुशील कुमार अहिरवार के नेतृत्व में गठित टीम ने तत्काल घेराबंदी की और दोनों आरोपियों को उनके निवास स्थल से हिरासत में लिया। चोरी और मारपीट के मामलों में थे वांछित गिरफ्तार आरोपियों में पटना खम्परिया निवासी पंकज खम्परिया शामिल है, जिस पर वर्ष 2018 से चोरी और घर में घुसने (धारा 457, 380 भादवि) का मामला लंबित था। दूसरा आरोपी ग्राम महेड़ा निवासी दयाराम चौधरी है, जो वर्ष 2019 से मारपीट और गाली-गलौज (धारा 294, 323, 506 भादवि) के मामले में फरार चल रहा था। न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर हुई जेल रवानगी पुलिस ने दोनों स्थाई वारंटियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पवई के समक्ष पेश किया। न्यायालय ने दोनों की फरारी और अपराध की गंभीरता को देखते हुए उन्हें जेल भेजने के आदेश जारी किए। इस कार्रवाई में पवई पुलिस टीम के एएसआई विजय गर्ग और अन्य आरक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

कांग्रेस कार्यालय के लिए प्रमुख भूमि, सेवानिवृत्त सैनिकों के लिए नहीं? कर्नाटक के दावणगेरे में 338 पूर्व सैनिक इंतजार कर रहे हैं | भारत समाचार

Kerala Lottery Result Today: The first prize winner of Sthree Sakthi SS-510 will take home Rs 1 crore. (Image: Shutterstock)

आखरी अपडेट:मार्च 10, 2026, 16:57 IST हालांकि, कर्नाटक के राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि मौजूदा लंबित मामले पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान निष्क्रियता के कारण थे। कर्नाटक सरकार की नीति के तहत, सेवानिवृत्त सशस्त्र बल कर्मी राष्ट्र के प्रति अपनी सेवा की मान्यता में कल्याणकारी उपाय के रूप में मुफ्त भूमि आवंटन के पात्र हैं। फ़ाइल चित्र/पीटीआई सीएनएन-न्यूज18 को मिले दस्तावेजों से पता चला है कि दावणगेरे जिले में सैकड़ों सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी और सैनिकों की विधवाएं करीब तीन साल से सरकारी जमीन का इंतजार कर रही हैं, जिसके बाद कर्नाटक सरकार की भूमि आवंटन प्राथमिकताओं पर सवाल उठ रहे हैं। सीएनएन-न्यूज18 द्वारा प्राप्त आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, अकेले दावणगेरे में 338 सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी और सैनिकों की विधवाएं सरकारी स्थलों के आवंटन का इंतजार कर रही हैं, जबकि इस उद्देश्य के लिए पहले से ही भूमि आरक्षित है। कर्नाटक सरकार की नीति के तहत, सेवानिवृत्त सशस्त्र बल कर्मी राष्ट्र के प्रति अपनी सेवा की मान्यता में कल्याणकारी उपाय के रूप में मुफ्त भूमि आवंटन के पात्र हैं। हालांकि, राजस्व विभाग के सूत्रों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों में जिले में लाभार्थियों को एक भी साइट आवंटित नहीं की गई है, जबकि योजना के लिए लगभग 12 एकड़ जमीन पहले ही निर्धारित की जा चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि लाभार्थियों के आवेदन वर्तमान में एक जिला-स्तरीय समिति द्वारा समीक्षाधीन हैं, जो आवंटन की जांच और अनुमोदन के लिए जिम्मेदार है। इस मुद्दे ने अब राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है, विपक्षी भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर दोहरे मानदंडों का आरोप लगाया है। यह विवाद इस आलोचना के बीच भी आया है कि जहां राजनीतिक संगठन जल्दी से भूमि सुरक्षित करने में सक्षम हैं, वहीं पूर्व सैनिकों के लिए कल्याण आवंटन लंबित हैं। भाजपा विधायक एसआर विश्वनाथ ने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक उद्देश्यों के लिए भूमि आवंटन में तेजी लाते हुए सैनिकों के लिए आवंटन में देरी कर रही है। विश्वनाथ ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया, “यह शर्मनाक है कि वे सैनिकों से भी रिश्वत मांग रहे हैं। एक महीने के भीतर उन्होंने कांग्रेस भवन के लिए जमीन आवंटित कर दी, लेकिन देश के लिए लड़ने वाले सैनिकों के लिए वे देरी कर रहे हैं। जमीन मौजूद है और लाभार्थियों की सूची तैयार है। उन्हें बस आवंटित करना है।” भाजपा ने कांग्रेस पर पाखंड का भी आरोप लगाया है, दावा किया है कि पार्टी ने राज्य में सेवानिवृत्त भारतीय सैनिकों के कल्याण की कथित रूप से उपेक्षा करते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरानी नौसैनिक अधिकारियों की हत्या पर चिंता व्यक्त की है। आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए, कर्नाटक के राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि मौजूदा लंबित मामले पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान निष्क्रियता के कारण थे। मंत्री ने कहा, “भाजपा ने अपने कार्यकाल के दौरान सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों को एक भी साइट आवंटित नहीं की, यही वजह है कि इतना बैकलॉग है।” उन्होंने कहा कि सरकार ने पारदर्शिता और दक्षता में सुधार के लिए भूमि आवंटन प्रक्रिया को डिजिटल कर दिया है। गौड़ा ने कहा, “हमने प्रक्रिया को डिजिटल कर दिया है और हम इस साल के अंत तक लंबित मामलों का निपटारा कर देंगे।” हालांकि, दावणगेरे में सैकड़ों पूर्व सैनिकों और विधवाओं के लिए इंतजार जारी है क्योंकि उनके आवेदन जांच के दायरे में हैं, यहां तक ​​कि भूमि आवंटन में प्राथमिकताओं पर बहस भी तेज हो गई है। पहले प्रकाशित: मार्च 10, 2026, 16:57 IST न्यूज़ इंडिया कांग्रेस कार्यालय के लिए प्रमुख भूमि, सेवानिवृत्त सैनिकों के लिए नहीं? कर्नाटक के दावणगेरे में 338 पूर्व सैनिक इंतजार कर रहे हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

सतना में सीमेंट प्लांट के लिए जमीन लीज का विरोध:किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकालकर कलेक्ट्रेट घेरा, निर्णय वापस लेने की मांग

सतना में सीमेंट प्लांट के लिए जमीन लीज का विरोध:किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकालकर कलेक्ट्रेट घेरा, निर्णय वापस लेने की मांग

सतना जिले के रामपुर बाघेलान क्षेत्र में प्रस्तावित डालमिया सीमेंट कंपनी के लिए भूमि लीज पर लेने के विरोध में किसानों ने मंगलवार को जिला मुख्यालय में जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकालकर कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव किया और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। दरअसल, रामपुर बघेलान तहसील की करीब 3600 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि को एक डालमिया सीमेंट कंपनी को 40 साल की लीज पर देने की प्रक्रिया चल रही है। इसी निर्णय के विरोध में क्षेत्र के किसान लामबंद हो गए हैं। किसानों का कहना है कि उनकी पुश्तैनी और उपजाऊ जमीन को उद्योग के लिए लीज पर देना उनके भविष्य के साथ अन्याय है। बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर, चारपहिया वाहनों और बाइक के साथ रैली के रूप में शहर पहुंचे। किसानों ने नारेबाजी करते हुए भूमि लीज का विरोध जताया और प्रशासन से इस निर्णय को वापस लेने की मांग की। रैली कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची, जहां किसानों ने प्रदर्शन कर अपना ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा। आंदोलन करने की चेतावनी दी प्रदर्शन का नेतृत्व राष्ट्रीय किसान यूनियन के नेता शैलेन्द्र सिंह चौहान ने किया। उन्होंने कहा कि सरकार यदि जमीन उद्योग को देना ही चाहती है तो लीज की बजाय पूर्ण अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाए और किसानों को बाजार मूल्य से चार गुना मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही प्रभावित प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी भी दी जाए। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसानों का कहना है कि अपनी जमीन बचाने के लिए वे किसी भी स्तर तक संघर्ष करने को तैयार हैं।

MP में कमर्शियल गैस संकट, कई शहरों में बुकिंग बंद:ईरान-इजराइल युद्ध का असर, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में होटल-रेस्टोरेंट बंद होने का खतरा

MP में कमर्शियल गैस संकट, कई शहरों में बुकिंग बंद:ईरान-इजराइल युद्ध का असर, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में होटल-रेस्टोरेंट बंद होने का खतरा

ईरान-इजराइल युद्ध के बीच एलपीजी सप्लाई को लेकर मध्यप्रदेश में सतर्कता बढ़ गई है। कई शहरों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई रोक दी गई है, जिससे होटल-रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों पर असर पड़ने की आशंका है। राजधानी भोपाल में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने ऑयल कंपनियों, गैस एजेंसियों और व्यापार संगठनों की बैठक बुलाई। वहीं भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स ने कहा कि कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिलने से शहर के 2000 से ज्यादा होटल-रेस्टोरेंट संकट में आ सकते हैं। ऑयल कंपनियों ने सोमवार से कमर्शियल सिलेंडर की डिलीवरी रोक दी है। हालांकि सरकार का कहना है कि घरेलू गैस और पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति सामान्य है और घबराने की जरूरत नहीं है। पांच बड़े शहरों में घरेलू सिलेंडर की भी वेटिंग, विकल्प तलाश रहे भोपाल: 2000 होटल संकट में, कलेक्टर ने बुलाई बैठक भोपाल में कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई रुकने से होटल-रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष गोविंद गोयल और मंत्री अजय देवनानी ने प्रशासन को बताया कि शहर के 2000 से ज्यादा होटल-रेस्टोरेंट कमर्शियल गैस पर निर्भर हैं। शादियों के सीजन में एक बड़े होटल में एक बार में 10-15 सिलेंडर और छोटे होटल में 2-4 सिलेंडर तक इस्तेमाल होते हैं। अभी कुछ जगह स्टॉक बचा है, लेकिन दो दिन में खत्म होने की आशंका है। सराफा एसोसिएशन के मुताबिक गैस संकट का असर सोना-चांदी के करीब 3 हजार कारीगरों पर भी पड़ सकता है, जिन्हें रोज करीब 300 सिलेंडर की जरूरत होती है। कलेक्टर ने बैठक में जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इंदौर: कमर्शियल सप्लाई बंद, होटल में अभी संकट नहीं इंदौर में भी कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई बंद कर दी गई है। घरेलू गैस सिलेंडर की डिलीवरी 4-5 दिन में हो रही है। इंदौर होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी के अनुसार अभी शहर में होटल इंडस्ट्री को कोई बड़ा संकट नहीं आया है, लेकिन आने वाले दिनों में परेशानी हो सकती है। होटल संचालकों ने इस मुद्दे पर बैठक बुलाई है और मुख्यमंत्री से मुलाकात की तैयारी भी है। उज्जैन: रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर उज्जैन में भी दो दिन से कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। कलेक्टर रोशन सिंह के अनुसार फिलहाल कमर्शियल सिलेंडर सिर्फ अस्पताल और स्कूलों को दिए जा रहे हैं। घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग अब 25 दिन बाद ही हो सकेगी और डिलीवरी में 5-7 दिन लग सकते हैं। एजेंसियों के अनुसार पैनिक में लोग बड़ी संख्या में बुकिंग करा रहे हैं। ग्वालियर: बुकिंग बंद, सिर्फ इमरजेंसी सेवाओं को छूट ग्वालियर में कमर्शियल गैस सिलेंडर की बुकिंग पूरी तरह बंद कर दी गई है। ग्वालियर-चंबल एलपीजी फेडरेशन के अनुसार फिलहाल सिर्फ हॉस्पिटल और इमरजेंसी सेवाओं को ही सिलेंडर दिए जा रहे हैं। घरेलू गैस सिलेंडर की डिलीवरी में 5 से 6 दिन का समय लग रहा है। होटल-रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि गैस नहीं मिलने पर कारोबार प्रभावित होगा। कई संचालक इंडक्शन चूल्हे का विकल्प भी तलाश रहे हैं। जबलपुर: होटल इंडस्ट्री पर असर शुरू जबलपुर में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने गैस सप्लाई कम होने की बात कही है। होटल अरिहंत पैलेस के संचालक राजेश जैन का कहना है कि सरकार ने इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सेक्टर में सप्लाई सीमित कर दी है, जिससे होटल व्यवसाय प्रभावित हो सकता है। होटल संचालक शुभम गुप्ता ने बताया कि एजेंसी से सिलेंडर लेने पहुंचे तो उन्हें सिलेंडर नहीं मिला। प्रदेश के बाकी शहरों में यह स्थिति सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर के दाम ₹60 बढ़ाए सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपए महंगा कर दिया है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम की LPG गैस अब 913 रुपए की मिल रही है। पहले यह 853 रुपए की थी। बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई हैं। वहीं 19 किग्रा वाले कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम 1 फरवरी को 115 रुपए बढ़ाए गए थे। यह अब 1883 रुपए का मिल रहा है। प्रदेश सरकार का दावा सप्लाई सामान्य, घबराने की जरूरत नहीं कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पेट्रोल-डीजल और गैस की उपलब्धता की निगरानी के निर्देश दिए। मंत्री चैतन्य काश्यप ने कहा कि प्रदेश में पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त स्टॉक है और घरेलू गैस की सप्लाई सामान्य है। सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से बचने और अधिकृत जानकारी पर ही भरोसा करने की अपील की है। कालाबाजारी राेकने सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया इधर, केंद्र सरकार ने गैस समेत जरूरी चीजों की जमाखोरी रोक ने लिए देशभर में ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ लागू कर दिया है। अब गैस को 4 कैटेगरी में बांटा जाएगा…. संकट से निपटने सरकार ने 5 जरूरी कदम उठाए 1. हाई-लेवल कमेटी बनाई: संकट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो सप्लाई की समीक्षा करेगी। 2. एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू: गैस की सप्लाई को कंट्रोल करने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ लागू कर दिया है। 3. 25 दिन बाद होगी LPG बुकिंग: घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में बदलाव किया है। उपभोक्ता एक सिलेंडर डिलीवर होने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक होगा। 4. OTP और बायोमेट्रिक अनिवार्य: गैस की जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी एजेंट OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का सख्ती से इस्तेमाल कर रहे हैं। 5. LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश: सरकार ने सभी ऑयल रिफाइनरीज को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है। इस एक्स्ट्रा उत्पादन का इस्तेमाल घरेलू गैस के लिए होगा। सिलेंडर सप्लाई संकट की दो बड़ी वजह 1. ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद होना भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से

टॉक्सिक-धुरंधर के दौर में ट्रेंड फॉलो नहीं करते सुधांशु पांडे:बोले- मेरी हमेशा कोशिश रहती है कि मेरा हर काम नया ट्रेंड शुरू करे

टॉक्सिक-धुरंधर के दौर में ट्रेंड फॉलो नहीं करते सुधांशु पांडे:बोले- मेरी हमेशा कोशिश रहती है कि मेरा हर काम नया ट्रेंड शुरू करे

एक्टर सुधांशु पांडे इन दिनों कलर्स के नए शो ‘दो दुनिया एक दिल’ को लेकर चर्चा में हैं। इस शो में वे बलदेव नाम के ऐसे किरदार में नजर आ रहे हैं, जिसकी जिंदगी डिजिटल और रियल दुनिया के टकराव के बीच उलझी हुई है। शो में ऑनलाइन स्कैम, डिजिटल धोखाधड़ी और टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रभाव जैसे मुद्दों को ड्रामा के जरिए दिखाया गया है। दैनिक भास्कर से बातचीत में सुधांशु पांडे ने टेक्नोलॉजी के फायदे-नुकसान, डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामलों, बदलती स्टोरीटेलिंग और ‘टॉक्सिक’ और ‘धुरंधर’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर खुलकर बात की। पेश है सुधांशु पांडे से हुई बातचीत के कुछ खास अंश.. सवाल: ‘दो दुनिया एक दिल’ डिजिटल और रियल दुनिया की टकराहट दिखाता है। क्या आपको लगता है कि आज के दौर में टेक्नोलॉजी रिश्तों को मजबूत कर रही है या उन्हें और जटिल बना रही है? जवाब: मेरा हमेशा से मानना रहा है कि डिजिटल टेक्नोलॉजी जितनी हमारे लिए वरदान है, उतनी ही बड़ी अभिशाप भी बन सकती है। यह पूरी तरह हम पर निर्भर करता है कि हम इसका इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करते हैं या नुकसान के लिए। इसलिए यह समझना बहुत जरूरी है कि टेक्नोलॉजी हमारे जीवन में किस काम की है और हमें उस पर कितना निर्भर होना चाहिए। अगर हम बिना सोचे-समझे पूरी तरह उस पर निर्भर हो जाएं, तो यह हमें नुकसान भी पहुंचा सकती है। सवाल: आजकल डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन स्कैम के कई मामले सामने आ रहे हैं। आपके हिसाब से परिवारों को बच्चों को इसके बारे में कैसे जागरूक करना चाहिए? क्या कभी आपके आसपास ऐसा कुछ हुआ है? जवाब: मेरे आसपास मैंने कई ऐसे किस्से सुने हैं, जहां लोगों का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। कुछ लोगों के तो 60-70 लाख रुपये तक उड़ गए। मुझे लगता है कि लोग समझते तो हैं, लेकिन अभी भी जागरूकता उतनी नहीं है जितनी होनी चाहिए। स्कैम लगातार होते रहते हैं। फोन, मैसेज और लिंक के जरिए। आप दस बार सावधान रहेंगे, लेकिन अगर ग्यारहवीं बार भावनाओं में आकर किसी लिंक पर क्लिक कर दिया, तो नुकसान हो सकता है। इसलिए कॉन्शियस अवेयरनेस बहुत जरूरी है। हमारा शो भी इसी मुद्दे को एक ह्यूमन स्टोरी और ड्रामा के जरिए सामने लाता है, जिसमें दिखाया गया है कि लोग कैसे फंसते हैं और कैसे सतर्क रहकर इससे बच सकते हैं। सवाल: आप लंबे समय से इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं। क्या आपको लगता है कि आज की कहानियां पहले से ज्यादा डार्क और रियलिस्टिक हो गई हैं? जवाब: नहीं, मेरा मानना है कि हर दौर में उसी समय के हिसाब से कहानियां कही जाती रही हैं। कुछ कहानियां अपने समय से आगे भी होती थीं। फर्क सिर्फ इतना है कि आज मीडियम्स बहुत बढ़ गए हैं। अलग-अलग प्लेटफॉर्म आ गए हैं। इसलिए कहानियों की डिमांड और विविधता भी बढ़ी है। आज फिल्ममेकर के पास ज्यादा स्कोप है कि वह अलग-अलग तरह की कहानियां कह सके। यही वजह है कि अब ऐसे विषय भी सामने आ रहे हैं, जिन्हें पहले कम एक्सप्लोर किया जाता था। इनमें रियलिस्टिक, फैंटेसी और कई तरह के अलग-अलग सब्जेक्ट शामिल हैं। सवाल: आजकल ‘टॉक्सिक’ और ‘धुरंधर’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स चर्चा में हैं, जिनमें ग्रे शेड्स वाले किरदार दिख रहे हैं। ‘दो दुनिया एक दिल’ में आपका बलदेव का किरदार इस ट्रेंड में कहां फिट होता है? जवाब: देखिए, मैंने पर्सनली कभी भी अपनी लाइफ में ट्रेंड्स को फॉलो नहीं किया। यह कहना कि आज के समय में जब धुरंधर जैसी फिल्में आ रही हैं, जहां नेगेटिव कैरेक्टर्स को काफी ग्लोरिफाई किया जा रहा है, तो ऐसे में बलदेव का किरदार कहां फिट बैठता है। अगर वह इस दौर में नेचुरली फिट हो रहा है, तो यह अच्छी बात है। क्योंकि यह भी एक ग्रे शेड्स वाला कैरेक्टर है। लेकिन मैं सिर्फ इसलिए कोई काम नहीं कर सकता कि वह ट्रेंड में चल रहा है। मैंने अपनी जिंदगी में कभी भी ऐसा कुछ नहीं किया जो सिर्फ ट्रेंड को देखकर किया गया हो। मेरी हमेशा कोशिश रहती है कि मैं जो भी काम करूं, उससे एक नया ट्रेंड शुरू हो।पहले भी मैंने जिन किरदारों को निभाया है, उनसे एक अलग ट्रेंड देखने को मिला था। इसलिए मेरी उम्मीद है कि इस शो में जो किरदार मैं निभा रहा हूं, उससे भी दर्शकों के बीच एक नया ट्रेंड शुरू हो सकता है।

टॉक्सिक-धुरंधर के दौर में ट्रेंड फॉलो नहीं करते सुधांशु पांडे:बोले- मेरी हमेशा कोशिश रहती है कि मेरा हर काम नया ट्रेंड शुरू करे

टॉक्सिक-धुरंधर के दौर में ट्रेंड फॉलो नहीं करते सुधांशु पांडे:बोले- मेरी हमेशा कोशिश रहती है कि मेरा हर काम नया ट्रेंड शुरू करे

एक्टर सुधांशु पांडे इन दिनों कलर्स के नए शो ‘दो दुनिया एक दिल’ को लेकर चर्चा में हैं। इस शो में वे बलदेव नाम के ऐसे किरदार में नजर आ रहे हैं, जिसकी जिंदगी डिजिटल और रियल दुनिया के टकराव के बीच उलझी हुई है। शो में ऑनलाइन स्कैम, डिजिटल धोखाधड़ी और टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रभाव जैसे मुद्दों को ड्रामा के जरिए दिखाया गया है। दैनिक भास्कर से बातचीत में सुधांशु पांडे ने टेक्नोलॉजी के फायदे-नुकसान, डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामलों, बदलती स्टोरीटेलिंग और ‘टॉक्सिक’ और ‘धुरंधर’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर खुलकर बात की। पेश है सुधांशु पांडे से हुई बातचीत के कुछ खास अंश.. सवाल: ‘दो दुनिया एक दिल’ डिजिटल और रियल दुनिया की टकराहट दिखाता है। क्या आपको लगता है कि आज के दौर में टेक्नोलॉजी रिश्तों को मजबूत कर रही है या उन्हें और जटिल बना रही है? जवाब: मेरा हमेशा से मानना रहा है कि डिजिटल टेक्नोलॉजी जितनी हमारे लिए वरदान है, उतनी ही बड़ी अभिशाप भी बन सकती है। यह पूरी तरह हम पर निर्भर करता है कि हम इसका इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करते हैं या नुकसान के लिए। इसलिए यह समझना बहुत जरूरी है कि टेक्नोलॉजी हमारे जीवन में किस काम की है और हमें उस पर कितना निर्भर होना चाहिए। अगर हम बिना सोचे-समझे पूरी तरह उस पर निर्भर हो जाएं, तो यह हमें नुकसान भी पहुंचा सकती है। सवाल: आजकल डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन स्कैम के कई मामले सामने आ रहे हैं। आपके हिसाब से परिवारों को बच्चों को इसके बारे में कैसे जागरूक करना चाहिए? क्या कभी आपके आसपास ऐसा कुछ हुआ है? जवाब: मेरे आसपास मैंने कई ऐसे किस्से सुने हैं, जहां लोगों का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। कुछ लोगों के तो 60-70 लाख रुपये तक उड़ गए। मुझे लगता है कि लोग समझते तो हैं, लेकिन अभी भी जागरूकता उतनी नहीं है जितनी होनी चाहिए। स्कैम लगातार होते रहते हैं। फोन, मैसेज और लिंक के जरिए। आप दस बार सावधान रहेंगे, लेकिन अगर ग्यारहवीं बार भावनाओं में आकर किसी लिंक पर क्लिक कर दिया, तो नुकसान हो सकता है। इसलिए कॉन्शियस अवेयरनेस बहुत जरूरी है। हमारा शो भी इसी मुद्दे को एक ह्यूमन स्टोरी और ड्रामा के जरिए सामने लाता है, जिसमें दिखाया गया है कि लोग कैसे फंसते हैं और कैसे सतर्क रहकर इससे बच सकते हैं। सवाल: आप लंबे समय से इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं। क्या आपको लगता है कि आज की कहानियां पहले से ज्यादा डार्क और रियलिस्टिक हो गई हैं? जवाब: नहीं, मेरा मानना है कि हर दौर में उसी समय के हिसाब से कहानियां कही जाती रही हैं। कुछ कहानियां अपने समय से आगे भी होती थीं। फर्क सिर्फ इतना है कि आज मीडियम्स बहुत बढ़ गए हैं। अलग-अलग प्लेटफॉर्म आ गए हैं। इसलिए कहानियों की डिमांड और विविधता भी बढ़ी है। आज फिल्ममेकर के पास ज्यादा स्कोप है कि वह अलग-अलग तरह की कहानियां कह सके। यही वजह है कि अब ऐसे विषय भी सामने आ रहे हैं, जिन्हें पहले कम एक्सप्लोर किया जाता था। इनमें रियलिस्टिक, फैंटेसी और कई तरह के अलग-अलग सब्जेक्ट शामिल हैं। सवाल: आजकल ‘टॉक्सिक’ और ‘धुरंधर’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स चर्चा में हैं, जिनमें ग्रे शेड्स वाले किरदार दिख रहे हैं। ‘दो दुनिया एक दिल’ में आपका बलदेव का किरदार इस ट्रेंड में कहां फिट होता है? जवाब: देखिए, मैंने पर्सनली कभी भी अपनी लाइफ में ट्रेंड्स को फॉलो नहीं किया। यह कहना कि आज के समय में जब धुरंधर जैसी फिल्में आ रही हैं, जहां नेगेटिव कैरेक्टर्स को काफी ग्लोरिफाई किया जा रहा है, तो ऐसे में बलदेव का किरदार कहां फिट बैठता है। अगर वह इस दौर में नेचुरली फिट हो रहा है, तो यह अच्छी बात है। क्योंकि यह भी एक ग्रे शेड्स वाला कैरेक्टर है। लेकिन मैं सिर्फ इसलिए कोई काम नहीं कर सकता कि वह ट्रेंड में चल रहा है। मैंने अपनी जिंदगी में कभी भी ऐसा कुछ नहीं किया जो सिर्फ ट्रेंड को देखकर किया गया हो। मेरी हमेशा कोशिश रहती है कि मैं जो भी काम करूं, उससे एक नया ट्रेंड शुरू हो।पहले भी मैंने जिन किरदारों को निभाया है, उनसे एक अलग ट्रेंड देखने को मिला था। इसलिए मेरी उम्मीद है कि इस शो में जो किरदार मैं निभा रहा हूं, उससे भी दर्शकों के बीच एक नया ट्रेंड शुरू हो सकता है।

अनूपपुर में पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप:एसपी से की शिकायत, पीड़ित बोला- आपके सिपाही आरोपी को बचा रहे

अनूपपुर में पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप:एसपी से की शिकायत, पीड़ित बोला- आपके सिपाही आरोपी को बचा रहे

अनूपपुर के ताराडांड निवासी चैतू सिंह ने पुलिस पर जानलेवा हमले के बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। मंगलवार को उन्होंने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें पुलिस पर सरकारी पद के दुरुपयोग और अपराध छिपाने का गंभीर आरोप लगाया गया है। पीड़ित ने भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी भी तय करने की गुहार लगाई है। चैतू सिंह, जो अनुसूचित जनजाति वर्ग से हैं और अपनी भूमि पर खेती करते हैं, 26 दिसंबर 2025 को दोपहर 3-4 बजे के बीच वे अपने खेत के पास बिजली के खंभे पर सुधार कार्य कर रहे थे। उसी दौरान मंजू गौतम ने उन्हें जातिसूचक व अपमानजनक गालियां दीं। इसके बाद लल्लू गौतम और उनके पुत्र प्रशांत गौतम भी वहां आए और तीनों ने मिलकर उन पर जानलेवा हमला किया तथा जान से मारने की धमकी दी। मारपीट के कारण चैतू सिंह बेहोश हो गए। पुलिस ने नहीं की मदद पीड़ित के अनुसार, लल्लू गौतम ने 112 पर कॉल किया। मौके पर पहुंचे 112 वाहन में प्रदीप गौतम (चालक) और एक अन्य आरक्षक मौजूद थे। चैतू सिंह ने आरोप लगाया कि इन पुलिसकर्मियों ने आरोपियों से मिलीभगत कर उन्हें उपचार दिलाने के बजाय मरा हुआ समझकर वहीं छोड़ दिया। प्रत्यक्षदर्शी ज़ेहर सिंह ने पूरी घटना देखी और बाद में चैतू सिंह को होश में लाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। पसली टूटी जिला अस्पताल अनूपपुर में कराई गई जांच में चैतू सिंह की पसली टूटने और गंभीर अंदरूनी चोटें पाई गईं। पीड़ित ने बताया कि वे भय, पीड़ा और मानसिक तनाव में हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पूर्व में आरोपियों के खिलाफ अजाक थाने में शिकायत दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे उनके हौसले बढ़े हैं। अप्रिय घटना की दी चेतावनी चैतू सिंह ने अपनी शिकायत में दर्ज कराया है कि यदि भविष्य में उनके या उनके परिवार के किसी सदस्य के साथ कोई भी अप्रिय या जानलेवा घटना घटित होती है, तो उसके लिए लल्लू गौतम, प्रशांत गौतम, मंजू गौतम, प्रदीप गौतम (112 वाहन चालक) और 112 वाहन में उपस्थित अज्ञात आरक्षक जिम्मेदार होंगे। उन्होंने सभी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धाराओं और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई करने, गवाह ज़ेहर सिंह को प्रकरण में दर्ज करने तथा उन्हें व उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।

नर्मदापुरम में दिन का पारा 38 डिग्री के करीब:अचानक तापमान बढ़ने से गेहूं की फसल को नुकसान की आशंका; दोपहर में सड़कें सूनी

नर्मदापुरम में दिन का पारा 38 डिग्री के करीब:अचानक तापमान बढ़ने से गेहूं की फसल को नुकसान की आशंका; दोपहर में सड़कें सूनी

नर्मदापुरम जिले में 4 मार्च के बाद से गर्मी का असर तेज हो गया है। दिन का तापमान 37 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है, जिसके कारण दोपहर के समय सड़कों पर आवाजाही कम नजर आ रही है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। अचानक बढ़ रही इस गर्मी से गेहूं की फसल के 10 से 12 दिन पहले पकने और किसानों को नुकसान होने की आशंका है। मंगलवार को नर्मदापुरम में तेज धूप खिली रही। दिन के साथ-साथ रात के तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मंगलवार को रात का न्यूनतम तापमान 19.8 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं, प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में भी गर्मी का असर दिखाई दे रहा है। पचमढ़ी में दोपहर का तापमान 31 डिग्री के पार पहुंच गया है, जबकि रात का न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस के ऊपर दर्ज किया जा रहा है। अगले 4 दिन में 2 से 3 डिग्री और बढ़ेगा तापमान मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, जिले के मौसम में अगले चार दिनों तक कोई बड़े बदलाव की संभावना नहीं है, लेकिन अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री तक की वृद्धि हो सकती है। ऐसे में मार्च के पहले पखवाड़े में ही पारा 39 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। गेहूं की फसल को नुकसान का अंदेशा मार्च महीने में अचानक बढ़ रहे तापमान का सीधा असर कृषि पर पड़ने की आशंका है। कृषि उपसंचालक डॉ. रविकांत सिंह ने बताया कि वर्तमान में गेहूं की बालियों में दाना भर चुका है और यह इसके पोषित होने का समय है। यदि गर्मी इसी तरह अधिक रही, तो पौधे की नमी खत्म हो जाएगी और वह सूखने लगेगा। इससे दाना पर्याप्त मात्रा में पोषित नहीं हो पाएगा। जिले में आमतौर पर मार्च के अंत तक गेहूं की कटाई शुरू होती है, लेकिन तापमान ऐसा ही बना रहा तो फसल के 10-12 दिन पहले ही पकने की संभावना है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। पिछले 5 दिनों का अधिकतम तापमान (डिग्री सेल्सियस में) तारीख नर्मदापुरम पचमढ़ी 5 मार्च 39.4 29.8 6 मार्च 38.1 30.2 7 मार्च 37.6 31.8 8 मार्च 38.1 31.4 9 मार्च 37.9 31.2

किसने कहा कि कर्नाटक का मुख्यमंत्री बदला जाएगा? कांग्रेस आलाकमान को दबाव में नहीं आना चाहिए: मोइली | राजनीति समाचार

Kerala Lottery Result Today: The first prize winner of Sthree Sakthi SS-510 will take home Rs 1 crore. (Image: Shutterstock)

आखरी अपडेट:मार्च 10, 2026, 16:09 IST वीरप्पा मोइली ने न्यूज18 से कहा, “हममें से कोई भी इसके बारे में नहीं जानता. इसलिए हमें यह मान लेना चाहिए कि ऐसा कोई आश्वासन नहीं था.” (बाएं से) वीरप्पा मोइली, डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया। (पीटीआई फ़ाइल) ऐसे समय में जब कर्नाटक में सत्ता को लेकर खींचतान जारी है, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक बयान देते हुए कहा कि अगर कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें मौका दिया, तो वह दो और बजट पेश करेंगे, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहेंगे और शेष कार्यकाल तक बने रहेंगे। उन्होंने कहा, “मैंने अपना 17वां बजट पेश किया है। कर्नाटक राज्य में, मेरे पास सबसे ज्यादा बजट पेश करने का रिकॉर्ड है।” इस टिप्पणी ने इस बात पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या मुख्यमंत्री पूरे कार्यकाल के लिए पद पर बने रहने की अपनी उम्मीद का संकेत दे रहे हैं। CNN-News18 के साथ एक विशेष साक्षात्कार में, वरिष्ठ कांग्रेसी और पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि नेतृत्व पर सार्वजनिक बयान, दावे और प्रतिदावे “कांग्रेस पार्टी की स्थिरता और शासन के लिए वांछनीय नहीं थे” और कांग्रेस आलाकमान को दबाव की रणनीति के आगे नहीं झुकना चाहिए। कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा, “हम सभी को आलाकमान पर भरोसा करना चाहिए जब वे मंत्रिमंडल में फेरबदल या मुख्यमंत्री पद में बदलाव के लिए अपना मन खोलेंगे। आज तक इनमें से कुछ भी नहीं हुआ है।” मोइली का बयान डीके शिवकुमार के समर्थकों के साथ-साथ खुद शिवकुमार द्वारा बार-बार दिए गए बयानों के मद्देनजर आया है, जिससे अटकलों को जगह मिल रही है कि मुख्यमंत्री पद में बदलाव आसन्न है। संपादित अंश: यह रस्साकशी, यह सत्ता संघर्ष जो हम देख रहे हैं कि मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि वह पांच साल तक बने रहेंगे और डीके शिवकुमार पर्याप्त संकेत दे रहे हैं कि सत्ता उन्हें सौंपी जानी चाहिए – क्या इससे कांग्रेस प्रभावित हो रही है? सड़कों पर आना और खुले तौर पर ये दावे और प्रतिदावे करना कांग्रेस पार्टी की स्थिरता और शासन के लिए वांछनीय नहीं है। इससे विपक्ष को अपना खेल खेलने का मौका मिल जाएगा. यह सभी स्तर के कांग्रेसियों को एक साथ आने का समय है और यदि कोई बदलाव करना है तो उसके लिए एक उचित प्रक्रिया है। केवल बातें करके, दावे-प्रतिदावे करके घूमना-फिरना और प्रशासन को भूल जाना वांछनीय नहीं है। मैं दृढ़ता से कहता हूं कि जिस तरह से दावे किए जा रहे हैं वह कांग्रेस के लिए या राज्य में कांग्रेस सरकार के शासन या स्थिरता के लिए वांछनीय नहीं है। मुझे लगता है कि इन मुद्दों को उठाने वाले सभी संबंधित पक्षों को ऐसी गतिविधियों को रोकना चाहिए और प्रशासन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यदि कोई परिवर्तन होता है – कभी-कभी परिवर्तन किए जाते हैं, कभी-कभी नहीं – अंततः, परिवर्तन बेहतर शासन और स्थिरता के लिए होते हैं। एक प्रक्रिया है. हम देख रहे हैं कि रात्रिभोज बैठकें हो रही हैं, जहां सतीश जारकीहोली ने बैठकें की हैं और डीके शिवकुमार के समर्थक भी बैठकें कर रहे हैं। क्या इस तरह की गुटबाजी का मकसद हाईकमान पर फैसला लेने का दबाव बनाना है? मुझे लगता है कि इन दबावों में आलाकमान को कार्रवाई नहीं करनी चाहिए. उन्हें इन दबावों, इस कलह, इन बैठकों को कम करने में बहुत सख्त होना चाहिए। कितने लोगों को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है? केवल एक। अगर इतने सारे दावे होंगे तो इससे अस्थिरता ही पैदा होगी। उस बारे में बात करते हुए, हमने कई पहली बार विधायकों को आलाकमान को पत्र लिखते हुए देखा है, जिसमें कहा गया है कि उन्हें एक मौका दिया जाना चाहिए और युवा और अनुभवी नेताओं का एक अच्छा मिश्रण होना चाहिए। लेकिन श्री सिद्धारमैया ने कहा है कि अगर कैबिनेट विस्तार होता है तो पहली बार के विधायकों के लिए कोई जगह नहीं है? मुझे नहीं पता कि जगह है या नहीं. उसी समय, मैं पहली बार था जब मुझे देवराज उर्स के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। सवाल ये है कि मंत्रालय में फेरबदल के लिए आलाकमान अपने हिसाब से समय लेगा. जब मंत्रालय में फेरबदल होगा तभी यह तय होगा. मुझे नहीं लगता कि अब कोई संभावना खुली है. नये और पुराने दोनों विधायकों को प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार करना होगा. मुझे नहीं लगता कि आलाकमान ने ऐसी कोई प्रक्रिया शुरू की है. इन विधायकों, चाहे नए हों या पुराने, को प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार करना चाहिए और ऐसे मुद्दे नहीं खोलने चाहिए। मुझे नहीं लगता कि आलाकमान ने ऐसी कोई प्रक्रिया शुरू की है. ऐसे मुद्दे खोलकर वे भानुमती का पिटारा खोल रहे हैं, जो बिल्कुल भी वांछनीय नहीं है। उन्हें इंतजार करने दीजिए. मैं यह नहीं कह रहा कि वे मंत्री नहीं बन सकते। हम सभी मंत्री बने हैं, यहां तक ​​कि पहली बार मंत्री बने हैं। लेकिन प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है. हम सभी को कैबिनेट फेरबदल या मुख्यमंत्री पद में बदलाव के लिए अपना मन खोलने के लिए आलाकमान पर भरोसा रखना चाहिए। आज तक इनमें से कुछ भी नहीं हुआ. क्या ऐसा होने वाला है? मुझें नहीं पता। अनुमान लगाना हमारा काम नहीं है. सभी अटकलें शरारतपूर्ण हैं और इससे अस्थिरता पैदा होगी और यह सुशासन के हित में नहीं है। मुख्यमंत्री पद के लिए कई योग्य उम्मीदवार हो सकते हैं, लेकिन इस समय पर विचार करने का समय हमेशा होता है। मुझे नहीं लगता कि इस समय ऐसे प्रस्तावों या दावों के लिए कार्रवाई की कोई मांग है। लोगों को अपनी बारी का इंतजार करना होगा. 1980 में, मुझे सीएम बनना चाहिए था – मेरे पास बहुमत था। मैंने कोई दावा नहीं किया. मैं पूरी निष्ठा और निष्ठा के साथ सरकार की सेवा करता रहा। मुझे भी एक ब्रेक मिला था जिस पर हाईकमान ने गंभीरता से विचार किया था। लेकिन मैंने अपनी बारी का इंतजार किया. जब मेरी बारी आई तो मैं सीएम बन गया. आलाकमान ने एक तरीका अपनाया है. मुझे नहीं लगता कि आलाकमान को मानक पद्धति छोड़ देनी चाहिए. आलाकमान को निर्णय लेने या इस बारे में बोलने में इतना समय क्यों लग रहा है? ये खींचतान काफी लंबी चल चुकी