मंदसौर में लहसुन वाहनों को टोकन के बावजूद रोका:पिपलियामंडी में किसानों के विरोध के बाद कांग्रेस नेता के हस्तक्षेप से मिला प्रवेश

एशिया की प्रसिद्ध लहसुन मंडियों में शुमार मन्दसौर जिले की पिपलिया कृषि उपज मंडी में अव्यवस्थाओं के चलते बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात किसानों का आक्रोश फूट पड़ा। मंडी प्रशासन द्वारा टोकन जारी किए जाने के बावजूद लहसुन से भरे वाहनों को मंडी परिसर में प्रवेश नहीं दिए जाने से किसान नाराज हो गए। देर रात लगभग 12:45 बजे कांग्रेस नेता एवं मल्हारगढ़ ब्लॉक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अनिल शर्मा के हस्तक्षेप के बाद किसानों के वाहनों को मंडी में प्रवेश दिया गया। टोकन होने के बावजूद रोके गए वाहन जानकारी के अनुसार इन दिनों लहसुन की बम्पर आवक के कारण मंडी में दूर-दराज क्षेत्रों से किसान अपने वाहन लेकर पहुंच रहे हैं। मंडी प्रशासन द्वारा वाहनों के प्रवेश के लिए किसानों को विधिवत टोकन जारी किए गए थे। इसके बावजूद बुधवार रात कई टोकनधारी वाहनों को मंडी गेट पर रोक दिया गया। किसानों का कहना था कि वे पिछले चार-पांच दिनों से मंडी में अपनी उपज बेचने के लिए परेशान हो रहे हैं। टोकन मिलने के बाद भी मंडी में प्रवेश नहीं दिया जा रहा, जबकि मंडी परिसर में पर्याप्त जगह उपलब्ध है। किसानों के बुलावे पर पहुंचे कांग्रेस नेता आक्रोशित किसानों ने देर रात कांग्रेस नेता अनिल शर्मा को मंडी बुलाया। किसानों ने उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराया कि जितने टोकन जारी किए गए हैं, उतने वाहनों को अंदर प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। अनिल ने मंडी गेट पर तैनात कर्मचारियों से चर्चा की। इस दौरान कुछ समय तक गहमा-गहमी भी रही। शर्मा ने संबंधित अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराते हुए कहा कि जब मंडी परिसर में पर्याप्त जगह है तो टोकनधारी वाहनों को रोका जाना उचित नहीं है और उन्हें तुरंत प्रवेश दिया जाना चाहिए। इसके बाद लहसुन से भरे वाहनों को मंडी परिसर में प्रवेश दिया गया। लहसुन की बम्पर आवक को देखते हुए मंडी में रात्रि के समय भी किसी जिम्मेदार अधिकारी की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए, ताकि गेट पर तैनात कर्मचारी मनमानी न कर सकें और इस तरह के विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो। मनासा मार्ग पर लग रहा जाम कांग्रेस नेता ने मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि लापरवाही के कारण मनासा मार्ग पर लहसुन से भरे वाहन सड़कों के दोनों ओर अव्यवस्थित खड़े रहते हैं, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। कई बार इस जाम में एम्बुलेंस भी फंस जाती है, जिससे मरीजों को परेशानी होती है। मंडी प्रशासन को चाहिए कि कृषि उपज मंडी के पीछे उपलब्ध खाली स्थान पर लहसुन से भरे वाहनों को व्यवस्थित रूप से खड़ा कराया जाए, ताकि सड़क पर जाम की समस्या न बने।
एसटी आयोग के हस्तक्षेप से 24 आदिवासी मजदूर मुक्त:तमिलनाडु से बैतूल पहुंचे, कलेक्टर ने स्टेशन पर किया स्वागत

तमिलनाडु के ईरोड जिले में बंधुआ मजदूरी की स्थिति में फंसे भीमपुर ब्लॉक के 24 आदिवासी मजदूरों को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजातीय आयोग के हस्तक्षेप के बाद मुक्त कराकर मध्यप्रदेश लाया गया। बुधवार को सभी मजदूर बैतूल पहुंचे, जहां प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में उन्हें रिसीव किया गया और देर रात बस से उनके गांव भेज दिया गया। जानकारी के अनुसार भीमपुर क्षेत्र के ये मजदूर पिछले चार-पांच महीनों से तमिलनाडु के मोडाकुरिची क्षेत्र के ओलापालयम में बंधुआ मजदूरी की स्थिति में काम कर रहे थे। मामले की जानकारी सामाजिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से राष्ट्रीय अनुसूचित जनजातीय आयोग तक पहुंची। इसके बाद आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए हस्तक्षेप किया। आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के निर्देश पर आयोग के सलाहकार और पूर्व जिला न्यायाधीश प्रकाश उइके ने तमिलनाडु के डीजीपी, मुख्य सचिव और बैतूल एसपी को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कराई। इसके बाद तमिलनाडु पुलिस सक्रिय हुई और ईरोड जिले में कार्रवाई करते हुए सभी 24 मजदूरों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। रेस्क्यू के बाद मजदूरों को दो दिन तक मोडाकुरिची के कम्युनिटी हॉल में रखा गया, जहां श्रम विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की। इसके बाद 10 मार्च 2026 को शाम 5:15 बजे उन्हें राप्तीसागर एक्सप्रेस (12512) से मध्यप्रदेश के लिए रवाना किया गया। यात्रा के दौरान पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी भी उनके साथ रहे। बुधवार को मजदूर बैतूल रेलवे स्टेशन पहुंचे, जहां कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी, एसपी वीरेंद्र जैन, एएसपी कमला जोशी, एसडीएम अभिजीत सिंह, लेबर ऑफिसर धम्मदीप भगत सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मजदूरों से बातचीत कर उनकी स्थिति की जानकारी ली। मुक्त कराए गए मजदूरों में 4 महिलाएं, 5 नाबालिग लड़कियां, 1 बच्चा और 14 पुरुष शामिल हैं। प्रशासन ने सभी के भोजन और अन्य व्यवस्थाएं कराते हुए देर रात बस के माध्यम से उन्हें उनके गांव रवाना कर दिया। इनमें।चार मजदूर हरदा जिले के भी शामिल है। मजदूर संगीता ने बताया कि उनसे सुबह 7 बजे से रात 12 बजे तक गन्ना कटवाया जाता था। करीब 16 घंटे तक काम कराया जाता था, जबकि खाने में सिर्फ चावल दिए जाते थे। उन्होंने बताया कि वहां किसी से बात करने, फोन पर संपर्क करने या कहीं आने-जाने की मनाही थी। ठेकेदार के लोग पूरे समय उनकी निगरानी करते रहते थे। मजदूर अल्लू ने बताया कि उन्हें पहले महाराष्ट्र के शोलापुर ले जाया गया था और वहां से तमिलनाडु भेज दिया गया। उन्हें पहले दिवाली और फिर होली पर घर भेजने का वादा किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें वापस आने नहीं दिया जा रहा था। इस पूरे रेस्क्यू अभियान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़े कार्यकर्ताओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिनकी पहल से मामला संबंधित अधिकारियों और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजातीय आयोग तक पहुंच सका।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एआर रहमान झुके:‘वीरा राजा वीरा’ में जूनियर डागर ब्रदर्स को क्रेडिट देंगे; कॉपीराइट विवाद पर सुनवाई जारी

मशहूर संगीतकार एआर. रहमान ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने एक अहम फैसले के बाद सहमति जताई। उन्होंने कहा कि फिल्म ‘पोन्नियिन सेलवन-2’ के गीत ‘वीरा राजा वीरा’ में डागर परंपरा के प्रतिष्ठित संगीतज्ञ जूनियर डागर ब्रदर्स का नाम जोड़ा जाएगा। अब गाने की आधिकारिक क्रेडिट सूची में उनका नाम और योगदान शामिल किया जाएगा। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसका नेतृत्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने किया। उन्होंने रहमान और फिल्म निर्माताओं को निर्देश दिया है कि वे इस नए क्रेडिट को पांच सप्ताह के भीतर सभी सोशल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म्स पर दर्ज कराएं। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि इस सहमति का अर्थ यह नहीं है कि मुख्य कॉपीराइट मुकदमे के अन्य पहलुओं पर किसी तरह का प्रभाव पड़ेगा। वह मामला अब भी अपनी प्रक्रिया के तहत जारी रहेगा। रहमान के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंहवी ने बोर्ड को बताया कि यह सहमति बिना पूर्वाग्रह के रूप में दी गई है और इसका अधिकारिक मुकदमें में रहमान के पक्ष को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। अदालत ने माना कि भारत की शास्त्रीय संगीत धरोहर की मान्यता और सम्मान देना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि डागर परंपरा, जिसे डागरवानी ध्रुपद कहा जाता है, भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक अनमोल धारा रही है और इसका योगदान अद्वितीय है। यही वजह है कि अदालत ने क्रेडिट को संशोधित करने की सलाह दी। बता दें कि यह विवाद साल 2023 से चला आ रहा है, जब उस्ताद फैयाज वसीफुद्दीन डागर ने दावा किया था कि ‘वीरा राजा वीरा’ गीत में उनके परिवार की पुरानी ध्रुपद रचना ‘शिवा स्तुति’ का अनुमति के बिना उपयोग किया गया है। डागर ने आरोप लगाया कि गीत की ताल, लय और भाव मूल धुन से मेल खाती है, जो उनके पिता उस्ताद नसीर फैयाजुद्दीन डागर और चाचा उस्ताद नसीर जहीरुद्दीन डागर द्वारा पहले रिकॉर्ड की गई थी। हालांकि रहमान और निर्माताओं का कहना है कि उनकी रचना एक मूल और स्वतंत्र संगीत संरचना है, सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम उठाया है ताकि पारंपरिक संगीत जगत को उचित मान्यता और सम्मान मिल सके। यह फैसला संगीत जगत में कॉपीराइट और सांस्कृतिक परंपरा की पहचान के मामले में एक महत्वपूर्ण मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।









