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Aam Panna Side Effects | Aam Panna Benefits And Side Effects | आम पन्ना के नुकसान | आम पन्ना के फायदे और नुकसान |

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Last Updated:March 19, 2026, 12:05 IST Aam Panna Benefits And Side Effects: भीषण गर्मी और ‘लू’ से बचने के लिए ‘आम पन्ना’ उत्तर भारत का सबसे पसंदीदा देसी ड्रिंक है. विटामिन C से भरपूर यह पेय शरीर को अंदरूनी ठंडक तो देता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत तरीके से पिया गया आम पन्ना आपको फायदे की जगह भारी नुकसान पहुंचा सकता है? रामपुर के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद इकबाल के अनुसार, चीनी की अधिक मात्रा और इसे पीने का गलत समय आपकी सेहत बिगाड़ सकता है. आइए जानते हैं आम पन्ना पीते समय किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. गर्मी के मौसम में आम पन्ना पीना शरीर के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. क्योंकि, इसमें विटामिन ‘सी’ अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर को अंदर से ठंडक देता है और लू लगने से भी बचाने में मदद करता है. इसलिए लोग इसे खूब पसंद करते हैं लेकिन इसका सही फायदा तभी मिलता है, जब इसे संतुलित मात्रा में पिया जाए और ज्यादा ठंडा या ज्यादा मीठा बनाने की बजाय सामान्य तरीके से तैयार करके पिया जाए. रामपुर आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इकबाल के मुताबिक कई लोग आम पन्ना बनाते समय उसमें स्वाद के चक्कर में काफी ज्यादा चीनी डाल देते हैं. लेकिन ऐसा करना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है क्योंकि इससे शरीर में शुगर लेवल बढ़ सकता है और वजन बढ़ने की समस्या भी हो सकती है. खासकर डायबिटीज के मरीजों को इससे बचना चाहिए. इसलिए कोशिश करें कि कम चीनी डालें या फिर गुड़ का इस्तेमाल करें और इसे हल्का मीठा रखकर ही पिएं. डॉक्टर के मुताबिक, आम पन्ना कच्चे आम से बनता है जिसकी वजह से इसका स्वाद खट्टा होता है और अगर इसे खाली पेट पी लिया जाए तो कई लोगों को पेट में जलन, गैस या दर्द जैसी समस्या हो सकती है. इसलिए इसे सुबह खाली पेट पीने की बजाय दोपहर में लंच करने के बाद या दिन में कभी भी बीच-बीच में पीना ज्यादा सही माना जाता है. आप इसे खाना खाने के तुरंत बाद पीने से बचे और कम से कम 30 मिनट का गैप रखें, जिससे शरीर को फायदा मिलता है और किसी तरह की परेशानी भी नहीं होती. Add News18 as Preferred Source on Google गर्मी से राहत पाने के लिए लोग आम पन्ना में बर्फ डालकर बहुत ठंडा करके पीते हैं लेकिन यह आदत पाचन तंत्र पर असर डाल सकती है और इससे पेट में ऐंठन, गैस या एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए इसे ज्यादा ठंडा करने की बजाय हल्का ठंडा या सामान्य तापमान पर ही पीना चाहिए. ताकि शरीर को आराम मिले और किसी तरह का नुकसान न हो. कुछ लोगों को कच्चे आम या उसमें डाले जाने वाले मसालों से एलर्जी हो सकती है. ऐसे में आम पन्ना पीने के बाद उन्हें खुजली, सांस लेने में दिक्कत या आंखों में पानी आने जैसी परेशानी हो सकती है. इसलिए अगर पहले कभी ऐसी समस्या हो चुकी है तो इसे पीने से पहले सावधानी जरूर बरतें और जरूरत हो तो डॉक्टर की सलाह लेकर ही इसका सेवन करें. किसी भी चीज की तरह आम पन्ना भी तभी फायदेमंद होता है. जब उसे सही मात्रा में लिया जाए क्योंकि जरूरत से ज्यादा पीने पर यह पेट खराब कर सकता है और कुछ लोगों में दस्त या गैस जैसी समस्या भी हो सकती है. इसलिए पूरे दिन में एक या दो गिलास ही पर्याप्त माना जाता है जिससे शरीर हाइड्रेट भी रहता है और किसी तरह की परेशानी भी नहीं होती. बाजार में मिलने वाला आम पन्ना अक्सर ज्यादा मीठा, ज्यादा ठंडा या रखा हुआ हो सकता है जो सेहत के लिए सही नहीं माना जाता. इसलिए कोशिश करें कि इसे घर पर ही साफ पानी और सही मात्रा में मसाले डालकर ताजा तैयार करें इसमें काला नमक और भुना जीरा डालना अच्छा माना जाता है इस तरह से बना आम पन्ना स्वादिष्ट भी होता है और शरीर के लिए ज्यादा सुरक्षित भी रहता है. First Published : March 19, 2026, 03:00 IST

vishamushti benefits | vishamushti uses | विषामुष्टि के फायदे | विषामुष्टि के फायदे और नुकसान |

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Last Updated:March 18, 2026, 20:29 IST Vishamushti Benefits: अक्सर हम अपने आसपास उगने वाले कई पौधों को खरपतवार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन आयुर्वेद की दुनिया में ये ‘अमृत’ के समान होते हैं. ऐसा ही एक पौधा है ‘विषामुष्टि’. सड़क किनारे, खाली मैदानों या झाड़ियों के बीच आसानी से दिखने वाला यह पौधा अपनी अद्भुत हीलिंग पावर के लिए जाना जाता है. सदियों से ग्रामीण इलाकों में इसे घरेलू उपचार का मुख्य हिस्सा माना गया है. विषामुष्टि की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका जड़ से लेकर पत्ती तक, हर हिस्सा औषधीय गुणों से भरपूर है. आइए, आयुष विशेषज्ञों से जानते हैं कि यह साधारण सा दिखने वाला पौधा गंभीर बीमारियों में कैसे सुरक्षा कवच का काम करता है. विषामुष्टि (विषमुष्टि) एक ऐसा पौधा है, जिसे लोग आमतौर पर इसके नाम से नहीं जानते है. लेकिन ये पौधा आपको अक्सर सड़क किनारे, खाली मैदानों या झाड़ियों के बीच आसानी से देखने को मिल जाता है. यह कई तरह से काम का होता है गांवों में इसे पुराने समय से घरेलू इलाज में इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसकी खास बात यह है कि इसका हर हिस्सा काम आता है ये प्राकृतिक और सस्ते इलाज का अच्छा विकल्प बन रहे हैं. आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इकबाल बताते है कि विषामुष्टि में ऐसे तत्व होते हैं जो शरीर की कोशिकाओं पर अच्छा असर डालते हैं यही वजह है कि इसे कैंसर जैसी बड़ी बीमारियों में भी सहायक माना जाता है हालांकि यह कोई सीधा इलाज नहीं है डॉक्टर की सलाह के बिना इसका इस्तेमाल करना नुकसान भी दे सकता है इसलिए सावधानी बहुत जरूरी है अगर बार-बार सर्दी-जुकाम हो जाता है तो विषामुष्टि की पत्तियों का काढ़ा काफी राहत देता है गांवों में लोग इसे चाय की तरह पीते हैं इससे शरीर को फुर्ती मिलती है और गले की खराश भी कम होती है यह एक आसान घरेलू तरीका है जिसे सही तरीके से अपनाया जाए तो फायदा मिल सकता है Add News18 as Preferred Source on Google आजकल गैस, कब्ज और पेट दर्द की समस्या आम हो गई है ऐसे में विषामुष्टि का इस्तेमाल राहत दे सकता है इसके सेवन से पाचन बेहतर होता है और पेट हल्का महसूस होता है कई लोग इसे घरेलू नुस्खे के तौर पर अपनाते हैं लेकिन मात्रा का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है वरना उल्टा असर भी हो सकता है इसलिए डॉक्टर की सलाह के बाद ही लें अगर शरीर पर कोई पुराना घाव या फोड़ा-फुंसी हो जाए तो इसकी पत्तियों का लेप लगाया जाता है इससे घाव जल्दी भरने में मदद मिलती है आप इसे धोकर सीधे पीसकर लगा लेते हैं यह एक सस्ता और आसान तरीका है लेकिन साफ-सफाई का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी होता है ताकि संक्रमण न फैले पुराने समय से मिर्गी के इलाज में भी विषामुष्टि का इस्तेमाल होता रहा है माना जाता है कि इसके पत्तों का रस नाक में डालने से दौरे को नियंत्रित करने में मदद मिलती है हालांकि यह तरीका हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं होता इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के इसे अपनाना सही नहीं है विषामुष्टि की पत्तियों को मुहं की सफाई के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है इसके लिए पहले पत्तो को धो ले फिर उबालकर उसका पानी से कुल्ला करें इससे मुंह की बदबू, मसूड़ों की सूजन और दांत दर्द जैसी समस्याओं में राहत मिलती है कई लोग इसे प्राकृतिक माउथवॉश की तरह इस्तेमाल करते हैं यह आसान तरीका है आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इकबाल बताते है विषामुष्टि जितना फायदेमंद है उतना ही गलत इस्तेमाल पर नुकसान भी दे सकता है इसकी सही मात्रा और सही तरीका जानना बहुत जरूरी है हर बीमारी में इसका उपयोग अलग-अलग तरीके से होता है इसलिए बेहतर यही है कि किसी आयुर्वेद डॉक्टर से सलाह लेकर ही इसका इस्तेमाल करें ताकि फायदे के बजाय कोई परेशानी न हो First Published : March 18, 2026, 20:29 IST

ghee consumption benefits | ayurvedic health tips | खाली पेट गरम पानी और घी पीने के फायदे | वजन कंट्रोल रखने के लिए घी |

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Last Updated:March 17, 2026, 20:21 IST Benefits of Ghee with Warm Water: आयुर्वेद में घी को अमृत के समान माना गया है, और जब इसे सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ लिया जाता है, तो इसके फायदे कई गुना बढ़ जाते हैं. आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. शालिनी जुगरान के अनुसार, यह मिश्रण न केवल याददाश्त बढ़ाता है और कब्ज जैसी पुरानी बीमारी को जड़ से खत्म करता है, बल्कि जोड़ों के दर्द और वजन घटाने में भी रामबाण है. शरीर को अंदर से डिटॉक्स करने और त्वचा पर कुदरती चमक लाने का यह सबसे आसान और असरदार तरीका है. मॉडर्न लाइफस्टाइल में जहां हम अक्सर प्रोसेस्ड फैट की ओर भागते हैं, वहीं सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ घी का सेवन मुफीद साबित हो सकता है. यहमिक्सचर न सिर्फ शरीर को अंदर से साफ करता है, बल्कि मेंटल और फिजिकल हेल्थ के लिए एक टॉनिक की तरह काम करता है. आयुर्वेदिक चिकित्सक शालिनी जुगरान ने बताया कि आयुर्वेद में घी को ‘मेध्य रसायन’कहा गया है, जिसका मतलब है वह तत्व जो बुद्धि और स्मरण शक्ति को बढ़ाता है. उन्होंने कहा कि जब हम सुबह खाली पेट इसका सेवन करते हैं, तो यह सीधे हमारे नर्वस सिस्टम यानी तंत्रिका तंत्र को पोषण प्रदान करता है. यह मस्तिष्क की कोशिकाओं को सक्रिय करने और एकाग्रता बढ़ाने में मददगार होता है. घी पाचन अग्नि को प्रज्वलित करने का काम भी करता है. इसका सेवन सुबह खाली पेट करने से आंतों की कार्यक्षमता बढ़ती है. यह कब्ज जैसी पुरानी समस्याओं को दूर करने में रामबाण है क्योंकि यह मल त्याग की प्रक्रिया को सुचारू और आसान बनाता है, जिससे दिन भर पेट साफ और स्वस्थ रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google डॉ जुगरान बताती हैं कि घी सिर्फ गुड फैट नहीं है, बल्कि इसमें विटामिन A, D, E और K जैसे वसा में घुलनशील विटामिन मौजूद होते हैं जो हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं. जब इसे गर्म पानी के साथ लिया जाता है, तो शरीर इन पोषक तत्वों को जाता अवशोषित कर पाता हैं. हमारा शरीर रोजाना कई तरह के टॉक्सिन्स बनाता है. सुबह खाली पेट घी और पानी का मेल शरीर की आंतरिक सफाई या ‘डिटॉक्स’ करने में मदद करता है. यह पाचन तंत्र की दीवारों पर जमे अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का काम करता है, जिससे मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है और शरीर हल्का महसूस करता है. आजकल जोड़ों का दर्द एक आम परेशानी बन गई है. घी में ब्यूट्रिक एसिड एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है. गुनगुने पानी के साथ इसका इस्तेमाल हड्डियों के जोड़ों में ‘लुब्रिकेशन’ यानी चिकनाई बढ़ाता है, जिससे जोड़ों की अकड़न कम होती है और चलने-फिरने में आसानी होती है. जब शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं, तो उसका सीधा असर स्किन पर दिखता है. घी में मौजूद विटामिन ए और ई स्किन को अंदर से हाइड्रेट करते हैं. सर्दियों के मौसम में, यह ट्रिक स्किन को रूखेपन से बचाकर उसे एक कुदरती चमक और नमी देता है. वहीं घी में मौजूद ओमेगा-3 और ओमेगा-9 फैटी एसिड बॉडी के जिद्दी फैट को कम करने में मदद करते हैं. गुनगुने पानी के साथ घी पीने से पेट लंबे वक्त तक भरा हुआ महसूस होता है, जिससे आप ओवरईटिंग से बच जाते हैं और वजन कंट्रोल में रहता है. First Published : March 17, 2026, 20:21 IST

woolly blue curls plant benefits | medicinal plants in uttarakhand | वूली ब्लू कर्ल्स पौधे के फायदे | पहाड़ों में मिलने वाले औषधीय पौधे |

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Last Updated:March 16, 2026, 19:35 IST Woolly Blue Curls Plant Benefits: उत्तराखंड के बागेश्वर जैसे पहाड़ी इलाकों में कई अनोखी जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं. इन्हीं में से एक खास पौधा वूली ब्लू कर्ल्स है, जो अपने बैंगनी रंग के मुलायम फूलों और औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है. स्थानीय लोग इसके पत्तों और फूलों से काढ़ा बनाकर बदन दर्द, सिरदर्द, गठिया और सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं में राहत पाने के लिए उपयोग करते हैं. कम देखभाल में उगने वाला यह पौधा बगीचों की सुंदरता बढ़ाने के साथ स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी माना जाता है. उत्तराखंड के बागेश्वर जैसे पहाड़ी इलाकों में कई अनोखी जड़ी-बूटियां पाई जाती है. इन्हीं में से एक खास पौधा वूली ब्लू कर्ल्स है. जो अपनी सुंदरता और औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है. इस पौधे की पहचान इसके बैंगनी रंग के घने और मुलायम फूलों से होती है, जो देखने में बेहद खूबसूरत लगते हैं. पारंपरिक रूप से स्थानीय लोग इस पौधे का उपयोग घरेलू उपचार के रूप में करते हैं. खास बात यह है कि यह पौधा कम देखभाल में भी आसानी से उग जाता है, बगीचों की शोभा बढ़ाने के साथ-साथ सेहत के लिए भी उपयोगी माना जाता है. डॉ. ऐजल पटेल ने लोकल 18 को बताया कि इस पौधे की पत्तियों और फूलों से तैयार काढ़ा बदन दर्द, सिरदर्द और गठिया जैसी समस्याओं में राहत देता है. ठंड के मौसम में इसके काढ़े का सेवन शरीर को गर्माहट देता है, जोड़ों की जकड़न कम करने में मदद करता है. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग इसे प्राकृतिक दर्द निवारक के तौर पर अपनाते हैं, इसे सुरक्षित घरेलू नुस्खों में शामिल करते हैं. इस पौधे में सूजन-रोधी गुण होने की बात भी पारंपरिक ज्ञान में कही जाती है. शरीर के किसी हिस्से में सूजन या अंदरूनी इंफ्लेमेशन की समस्या होने पर लोग इसके पत्तों का लेप या काढ़ा उपयोग में लाते हैं. नियमित और सीमित यूज से शरीर का सूजन निमंत्रित रहता है. पहाड़ों में लंबे समय तक मेहनत करने वाले लोग इसे थकान और सूजन कम करने के लिए भी अपनाते हैं. प्राकृतिक उपचारों की बढ़ती लोकप्रियता के कारण अब युवा पीढ़ी भी ऐसे पौधों के बारे में जानकारी लेने में रुचि दिखा रही है. Add News18 as Preferred Source on Google ग्रामीण क्षेत्रों में इस पौधे का उपयोग पाचन सुधारने के लिए भी किया जाता रहा है. पुराने समय में भारी भोजन या पेट में गैस-अपच की समस्या होने पर इसके पत्तों से बना हल्का काढ़ा पिया जाता था. इससे पेट को आराम मिलता है, भूख भी बेहतर लगती है. आजकल आयुर्वेद और प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने वाले लोग भी ऐसे पौधों के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं. ताकि भविष्य में इनका इस्तेमाल किया जा सके. ठंड के मौसम में सर्दी-जुकाम और खांसी आम समस्या बन जाती है। ऐसे में इस पौधे की पत्तियों से बनी चाय पीने की परंपरा कई इलाकों में रही है. इससे गले को आराम मिलता है, सांस संबंधी परेशानी में राहत महसूस होती है. कुछ लोग इसकी सूखी पत्तियों का पाउडर बनाकर सूंघते हैं, जिससे नाक खुलने में मदद मिलती है. लोक उपचारों में इसकी खास जगह बनी हुई है, लोग इसे प्राकृतिक विकल्प के रूप में देखते हैं. औषधीय गुणों के अलावा यह पौधा सजावटी पौधे के रूप में भी काफी लोकप्रिय है. इसके चमकीले बैंगनी फूल और मुलायम बनावट बगीचे को बेहद आकर्षक बना देते हैं. कम पानी और धूप में भी यह अच्छी तरह बढ़ता है, इसलिए इसे घरों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों में लगाया जाता है. कई लोग अपने किचन गार्डन में भी इसे जगह दे रहे हैं. प्राकृतिक सुंदरता पसंद करने वाले लोगों के लिए यह पौधा एक बेहतरीन विकल्प है, जो स्वास्थ्य और सौंदर्य दोनों का ख्याल रखता है. पर्यावरण के लिहाज से भी यह पौधा महत्वपूर्ण माना जाता है. इसके फूलों की खुशबू और रंग मधुमक्खियों, तितलियों और हमिंगबर्ड जैसे परागण करने वाले जीवों को अपनी ओर खींचते हैं. इससे बगीचे का इकोसिस्टम बेहतर बनता है, अन्य पौधों के विकास में भी मदद मिलती है. जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए ऐसे पौधों को लगाना फायदेमंद माना जाता है. घरों और गांवों में ऐसे पौधों की संख्या बढ़ने से प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है. पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलता है. पारंपरिक रूप से इस पौधे का उपयोग कई घरेलू उपचारों में किया जाता रहा है, लेकिन किसी भी जड़ी-बूटी का सेवन करने से पहले सावधानी बरतना बेहद जरूरी है. हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है, इसलिए बिना विशेषज्ञ सलाह के इसका अधिक उपयोग नुकसान भी पहुंचा सकता है. गर्भवती महिलाओं, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सतर्कता रखनी चाहिए. सही जानकारी और संतुलित उपयोग से ही प्राकृतिक पौधों का लाभ लिया जा सकता है. जागरूकता बढ़ने के साथ अब लोग भी सुरक्षित तरीके से औषधीय पौधों को अपनाने पर ध्यान दे ये बेहद जरूरी है. First Published : March 16, 2026, 19:35 IST

Selenium Mineral Benefits; Anti Aging Health Tips

Selenium Mineral Benefits; Anti Aging Health Tips

26 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक हर शख्स की चाहत होती है कि वह हमेशा सुंदर और जवान दिखे। चमकदार स्किन और लंबे-काले बाल भला किसे नहीं पसंद हैं? इसके लिए सेलेनियम बेहद जरूरी मिनरल है। यह एक एंटी-एजिंग तत्व है, जो हॉर्मोन संतुलन, मजबूत इम्यून सिस्टम और हेल्दी कोशिकाओं को लिए भी बेहद जरूरी है। यह डीएनए को भी सुरक्षित रखता है। इसकी कमी से शरीर में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस, इंफ्लेमेशन और कई गंभीर बीमारियों का रिस्क बढ़ सकता है। शरीर कोई भी मिनरल स्वयं नहीं बनाता है, यह सिर्फ कैल्शियम, आयरन जैसे कुछ मिनरल्स को छोड़कर बाकी को बहुत दिन तक स्टोर भी नहीं कर सकता है। इसलिए इसे डेली डाइट में शामिल करना जरूरी होता है। संतुलित और तरह-तरह के फूड्स से भरपूर डाइट से इसकी पूर्ति हो सकती है। इसलिए फिजिकल हेल्थ में आज जानेंगे कि सेलेनियम क्या है। साथ ही जानेंगे कि- शरीर के किन बुनियादी कामों के लिए सेलेनियम जरूरी है? इसकी कमी से क्या नुकसान हो सकते हैं? सेलेनियम की पूर्ति के लिए क्या खाना चाहिए? सवाल- सेलेनियम क्या है? जवाब- सेलेनियम एक ट्रेस मिनरल है। इसका मतलब ऐसा मिनरल, जिसकी शरीर को बहुत थोड़ी सी मात्रा में जरूरत होती है। हालांकि, यह स्वस्थ रहने के लिए जरूरी मिनरल है। सवाल- सेलेनियम शरीर के लिए कितना जरूरी है? जवाब- शरीर के संतुलित तरीके से काम करने के लिए सेलेनियम बेहद जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट है। यह कोशिकाओं को ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस (कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के लिए जिम्मेदार) से बचाता है। यह इम्यून सिस्टम मजबूत करता है। हॉर्मोन्स को बैलेंस रखने में मदद करता है। खासतौर पर थायरॉइड हॉर्मोन बनाता और उसे एक्टिव रखता है। यह शरीर में इंफ्लेमेशन कम करता है। कोशिकाओं की रिपेयर और संतुलित ग्रोथ में भी मदद करता है। सवाल- सेलेनियम शरीर में किन बुनियादी कामों के लिए जरूरी है? जवाब- सेलेनियम शरीर के कई बुनियादी कामों के लिए महत्वपूर्ण मिनरल है। यह थायरॉइड हॉर्मोन को संतुलित रखने में मदद करता है, जिससे शरीर एनर्जेटिक बना रहता है। यह डीएनए (DNA) बनाने में और कोशिकाओं की सही ग्रोथ में मदद करता है। फर्टिलिटी हेल्थ के लिए बेहद जरूरी मिनरल है। इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने में मदद करता है। जरूरी बॉडी प्रोटीन बनाने में मदद करता है। खराब प्रोटीन को शरीर से निकालने में मदद करता है। इससे कोशिकाएं स्वस्थ रहती हैं और शरीर बेहतर तरीके से काम करता है। सवाल- सेलेनियम की कमी से क्या समस्याएं हो सकती हैं? जवाब- इसकी कमी होने पर समय से पहले बुढ़ापा नजर आने लगता है। इससे स्किन रूखी हो जाती है और झुर्रियां पड़ जाती हैं। बाल समय से पहले रूखे, बेजान और सफेद होने लगते हैं। इससे होने वाली सभी समस्याएं ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या सेलेनियम वाकई एंटी एजिंग है। यह कैसे काम करता है? जवाब- हां, सेलेनियम एक एंटी-एजिंग न्यूट्रिएंट है। यह ऐसे काम करता है- यह शरीर में बने फ्री रेडिकल्स को कम करता है। अगर फ्री रेडकिल्स बढ़ जाएं तो सेल्स डैमेज हो सकती हैं और बुढ़ापा जल्दी नजर आने लगता है। यह कोशिकाओं को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी एंटीऑक्सीडेंट एंजाइम्स को एक्टिव करता है। यह इंफ्लेमेशन कम करने और स्किन को अल्ट्रा-वायलेट किरणों से हुए डैमेज से बचाता है। सवाल- सेलेनियम किन-किन बीमारियों का जोखिम कम करता है? जवाब- सेलेनियम शरीर को ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस और इंफ्लेमेशन से बचाकर कुछ बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। यह बीमारियों और संक्रमण से लड़ने की क्षमता को मजबूत करता है। यह थायरॉइड हॉर्मोन को संतुलित रखने और थायरॉइड इंफ्लेमेशन का जोखिम कम करता है। हार्ट मसल्स और ब्लड वेसल्स को ऑक्सिडेटिव डैमेज से बचाकर हार्ट डिजीज का खतरा कम कर सकता है। यह ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस और इंफ्लेमेशन घटाकर सेल्स डैमेज से बचाता है। सेलेनियम स्पर्म्स क्वालिटी और सक्रियता बेहतर रखने में मदद करता है। यह याददाश्त और को सुरक्षित रखने में मदद करता है। इंफ्लेमेशन कम करके हड्डियों और जोड़ों की हेल्थ को सपोर्ट करता है। यह स्किन को फ्री रेडिकल्स से बचाकर झुर्रियों और बालों की कमजोरी के जोखिम को कम करने में मदद करता है। सेलेनियम कोशिकाओं की रिपेयर प्रक्रिया को सपोर्ट करता है। सवाल- एक स्वस्थ वयस्क को रोज कितने सेलेनियम की जरूरत होती है? जवाब- एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति को रोजाना लगभग 55 माइक्रोग्राम सेलेनियम की जरूरत होती है। प्रेग्नेंसी के दौरान यह जरूरत बढ़कर करीब 60 माइक्रोग्राम हो जाती है, जबकि स्तनपान कराने वाली महिलाओं को लगभग 70 माइक्रोग्राम सेलेनियम लेना जरूरी होता है। यह मात्रा शरीर के सामान्य कार्य, इम्यूनिटी और हॉर्मोन संतुलन बनाए रखने के लिए पर्याप्त मानी जाती है। बहुत ज्यादा मात्रा में सेलेनियम लेना नुकसानदायक हो सकता है। डॉ. खाजी जावेद के अनुसार रोजाना 400 माइक्रोग्राम से ज्यादा सेलेनियम लेना स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है, इसलिए संतुलित मात्रा में ही इसका सेवन करना चाहिए। सवाल- किन लोगों में सेलेनियम की कमी का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- सेलेनियम की कमी का खतरा उन लोगों में ज्यादा होता है, जो जिन इलाकों की मिट्टी में सेलेनियम की मात्रा कम होती है। ऐसी जगह उगने वाली फसलों में भी सेलेनियम कम होता है। किडनी की गंभीर बीमारी वाले लोग, जिन्हें डायलिसिस की जरूरत होती है, उनमें भी इसकी कमी का जोखिम बढ़ सकता है। एचआईवी (HIV) से प्रभावित लोगों में भी सेलेनियम स्तर कम पाया गया है। जो लोग भोजन के लिए बहुत सीमित फूड्स पर निर्भर रहते हैं, उन्हें इसकी कमी की आशंका अधिक होती है। सवाल- सेलेनियम की पूर्ति के लिए डाइट में किन फूड्स को शामिल करना जरूरी है? जवाब- संतुलित डाइट से शरीर को जरूरी सेलेनियम मिल जाता है। समुद्री मछलियां जैसे टूना, सार्डिन और झींगा इसका सबसे अच्छा सोर्स हैं। यह अंडे और चिकन में भी मिलता है। शाकाहारी लोगों के लिए साबुत अनाज, ब्राउन राइस, दालें, बीन्स और दूध-दही अच्छे विकल्प हो सकते हैं। सेलेनियम के अच्छे सोर्स ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या सेलेनियम की पूर्ति भोजन से हो सकती है या सप्लीमेंट की भी जरूरत पड़ती है? जवाब- अगर संतुलित डाइट लें तो सेलेनियम की जरूरत पूरी हो सकती है। भोजन में नट्स, सीड्स, दालें, डेयरी प्रोडक्ट्स और हरे पत्ते वाली सब्जियां शामिल करना फायदेमंद है। सप्लीमेंट

garlic health benefits| natural medicine for heart| lahsun sahad ke fayde: शहद में भिगोकर खाएं लहसुन, मिलेगा डबल फायदा, दिल के लिए दवा से कम नहीं

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Last Updated:March 14, 2026, 22:44 IST Honey Soaked Garlic Benefits: लहसुन दिल के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है. लेकिन जब आप इसे शहद के साथ खाते हैं तो इसके गुण और भी बढ़ जाते हैं. ऐसे में इसके सेवन से सिर्फ हार्ट डिजीज ही नहीं बल्कि इंफेक्शन का भी खतरा कम होता है. ख़बरें फटाफट आयुर्वेद में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से सदियों से कई बीमारियों का इलाज किया जाता रहा है. हमारी रसोई में भी ऐसी कई चीजें मौजूद होती हैं, जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती हैं. इन्हीं में से दो चीजें हैं लहसुन और शहद. ये दोनों लगभग हर घर में आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन जब इन्हें एक साथ लिया जाता है तो इनके फायदे और भी बढ़ जाते हैं. लहसुन का इस्तेमाल सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि कई स्वास्थ्य समस्याओं में भी किया जाता है. आयुर्वेद में बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों को कच्चा लहसुन खाने की सलाह दी जाती है. लहसुन में एलिसिन नाम का तत्व पाया जाता है, जो एंटीबायोटिक और एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है. खून को गाढ़ा होने से रोकता हैशहद वाला लहसुन शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाता है और खून को गाढ़ा होने से रोकने में मदद करता है. दरअसल ऐसा लहसुन में सल्फर जैसे तत्वों की मौजूदगी के कारण होता है, जो इसे जीवाणुरोधी और रोगों से लड़ने वाला बनाते हैं. वहीं शहद एक प्राकृतिक मीठा पदार्थ है, जो सेहत के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है. इसमें फ्लेवोनोइड्स और पॉलीफेनोल्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं. लहसुन शहद के फायदेशहद में जीवाणुरोधी, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण भी होते हैं, जो कई तरह के संक्रमण से बचाने में सहायक हैं. जब लहसुन और शहद को मिलाकर रखा जाता है, तो इनके गुण और भी बढ़ जाते हैं. कुछ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इस मिश्रण को शरीर के लिए बहुत फायदेमंद माना गया है. यह मिश्रण सर्दी-जुकाम और खांसी के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है. साथ ही यह पाचन सुधारने, हृदय को स्वस्थ रखने और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है. कैसे करें तैयारलहसुन और शहद का मिश्रण बनाने के लिए एक साफ कांच की बोतल या बरनी लें. इसमें छिली हुई ताजा लहसुन की कलियां डालें और ऊपर से शुद्ध शहद भर दें. इसे 5 से 7 दिन तक बंद करके रखें. इसके बाद रोज सुबह खाली पेट इसकी थोड़ी मात्रा का सेवन किया जा सकता है. हालांकि बच्चों और गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें First Published : March 14, 2026, 22:44 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

Beans Health Benefits | Heart, Metabolic, Gut Health Study India

Beans Health Benefits | Heart, Metabolic, Gut Health Study India

8 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक क्या आप बीन्स खाते हैं? खाते तो होंगे, लेकिन क्या आपको पता है कि बीन्स एक सुपरफूड है यानी हेल्दी मील का ‘रॉकस्टार।’ यह प्रोटीन, फाइबर, आयरन और कई जरूरी मिनरल्स का अच्छा सोर्स है। इसमें जिंक और आयरन भी भरपूर मात्रा में होता है। बीन्स गट हेल्थ को बेहतर बनाती है। शुगर और कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने में भी मदद करती है। अमेरिकन सोसाइटी फॉर न्यूट्रिशन के समिट ‘न्यूट्रिशन 2025’ में पेश एक स्टडी में सामने आया कि रोज 1 कप बीन्स (काले बीन्स या छोले) खाने से कोलेस्ट्रॉल और इंफ्लेमेशन कम होता है, जो हार्ट और मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए फायदेमंद है। इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि- बीन्स के हेल्थ बेनिफिट्स क्या हैं? हार्ट हेल्थ के लिए यह कितना फायदेमंद है? इसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू क्या है? एक्सपर्ट: डॉ. अमृता मिश्रा, सीनियर डाइटीशियन, दिल्ली सवाल- बीन्स को लंबी उम्र का भोजन क्यों कहा जाता है? जवाब- ये पोषण से भरपूर, प्लांट-बेस्ड प्रोटीन का ऐसा सोर्स है, जो दुनिया के सभी पांच ‘ब्लू जोन’ (वो क्षेत्र जहां के लोगों की औसत उम्र 100 साल से ज्यादा होती है) की रोजमर्रा की डाइट का अहम हिस्सा है। कई स्टडीज के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति रोज कम-से-कम आधा कप बीन्स खाता है, तो उसकी उम्र औसतन चार साल तक बढ़ सकती है। साल 2023 में ‘एडवांस इन न्यूट्रिशन’ जर्नल में पब्लिश एक मेटा-एनालिसिस के मुताबिक, रोज 50 ग्राम बीन्स खाने से समय से पहले मौत का जोखिम लगभग 6% तक कम हो जाता है। इसमें 10 लाख से ज्यादा लोगों के डेटा की एनालिसिस की गई है। सवाल- बीन्स कितनी तरह की होती हैं? जवाब- बीन्स कई तरह की होती हैं। इन्हें उनके इस्तेमाल और पकाने के तरीके के आधार पर समझा जा सकता है। सूखी बीन्स सबसे आम होती हैं। इन्हें खाने से पहले भिगोकर अच्छी तरह पकाना जरूरी होता है, ताकि ये नरम हो जाएं और पचने में आसान रहें। फ्रोजन बीन्स पहले से पकी हुई होती हैं, जिन्हें सिर्फ गैस या माइक्रोवेव में हल्का गरम करके खाया जा सकता है। दुनियाभर में इस्तेमाल की जाने वाली कुछ लोकप्रिय बीन्स को ग्राफिक में देखिए- सवाल- बीन्स की न्यूट्रिशनल वैल्यू क्या होती है? जवाब- बीन्स प्लांट-बेस्ड प्रोटीन, आयरन, पोटेशियम और फोलेट का बेहतरीन सोर्स हैं। साथ ही इनमें सोडियम कम होता है और ये पूरी तरह कोलेस्ट्रॉल-फ्री होती हैं। हालांकि, बीन्स की न्यूट्रिशनल वैल्यू उसके प्रकार के अनुसार थोड़ी बदल सकती है। 100 ग्राम पकी हुई बीन्स में औसतन इतने पोषक तत्व होते हैं। सवाल- बीन्स के हेल्थ बेनिफिट्स क्या हैं? जवाब- बीन्स पोषण से भरपूर फूड है, जिसे रोजमर्रा की डाइट में शामिल कर सकते हैं। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स का अच्छा संतुलन होता है। इसलिए इसे सुपरफूड भी माना जाता है। ग्राफिक से इसके हेल्थ बेनिफिट्स समझते हैं- सवाल- बीन्स हार्ट को हेल्दी बनाए रखने में कैसे मददगार है? जवाब- इसमें सॉल्युबल फाइबर भरपूर होता है, जो शरीर के खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को घटाने में मदद करता है। इससे धमनियों में चर्बी (प्लाक) जमा होने का खतरा कम हो जाता है और हार्ट अटैक का खतरा घटता है। बीन्स में मैग्नीशियम, पोटैशियम और फोलेट जैसे जरूरी मिनरल्स भी होते हैं। ये ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायक हैं और शरीर में इंफ्लेमेशन को कम करते हैं। सवाल- क्या डायबिटिक लोग बीन्स खा सकते हैं? जवाब- हां, डायबिटिक लोग बीन्स खा सकते हैं और ये उनके लिए फायदेमंद भी होता है। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार, डायबिटिक लोगों को अपने भोजन में सूखी बीन्स जैसे राजमा या पिंटो बीन्स शामिल करनी चाहिए। सवाल- गहरे रंग की बीन्स हल्के रंग की बीन्स की तुलना में ज्यादा फायदेमंद क्यों मानी जाती हैं? जवाब- इनमें एंटीऑक्सिडेंट्स की मात्रा अधिक होती है। पॉइंटर्स से समझते हैं- हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, बीन्स का रंग जितना गहरा होता है, उसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स उतने ही ज्यादा होते हैं। मैक्सिको के रिसर्च जर्नल ‘मॉलिक्यूल्स’ में साल 2021 में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, गहरे रंग की बीन्स शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बेहतर तरीके से बचाती हैं, जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी पड़ती है और बीमारियों का खतरा कम होता है। जर्नल ऑफ एग्रीकल्चरल और फूड केमिस्ट्री में पब्लिश एक स्टडी के अनुसार, काली बीन्स के छिलके में पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट्स की मात्रा सफेद बीन्स के छिलकों की तुलना में लगभग 40 गुना ज्यादा होती है। सवाल- रोज कितनी मात्रा में बीन्स खानी चाहिए? जवाब- 2020–2025 की अमेरिकन डाइटरी गाइडलाइंस के अनुसार, हफ्ते में 1 से 3 कप बीन्स, मटर और दालें खाना सेहत के लिए फायदेमंद माना गया है। इसे अगर रोज की मात्रा में समझें, तो यह करीब आधा कप (½ कप) बीन्स प्रतिदिन के बराबर होता है। सवाल- बीन्स किन्हें नहीं खानी चाहिए? जवाब- जिन लोगों को गैस, पेट फूलने या एसिडिटी की शिकायत रहती है, उन्हें बीन्स खाने से परेशानी हो सकती है। इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) या कमजोर पाचन वाले लोगों में बीन्स से पेट दर्द, ऐंठन या दस्त की समस्या हो सकती है। जिन्हें किडनी स्टोन, खासकर यूरिक एसिड या ऑक्सलेट स्टोन की समस्या है, उन्हें भी बीन्स सीमित मात्रा में ही खानी चाहिए। इसके अलावा, कच्ची या अधपकी बीन्स कभी नहीं खानी चाहिए, क्योंकि इससे उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। सवाल- रोजमर्रा की डाइट में बीन्स को शामिल करने का सबसे आसान और उपयोगी तरीका क्या है? जवाब- पॉइंटर्स से समझते हैं- पकी हुई बीन्स को दाल या सब्जी की तरह पकाकर रोटी-चावल के साथ खाया जा सकता है। उबला हुआ काबुली चना, राजमा या लोबिया को सलाद में मिलाकर हल्का, फाइबर-रिच भोजन तैयार किया जा सकता है। सुबह या शाम के नाश्ते में इन्हें चाट या स्प्राउट्स की तरह इस्तेमाल करना भी आसान तरीका है। सूप, खिचड़ी या सब्जियों में थोड़ी-सी बीन्स मिलाने से पोषण बढ़ जाता है। ………………………….. जरूरत की ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- काला लहसुन है सेहत का खजाना:ज्यादा एंटीऑक्सिडेंट, पचने में आसान, जानें हेल्थ बेनिफिट्स, किन्हें नहीं खाना चाहिए लहसुन से तो आप परिचित ही होंगे। ये हमारी रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा है। इसके हेल्थ बेनिफिट्स भी

Not Stones but a Health Treasure The Secret Behind Jamshedpur rs80 kg Pink Rocks benefits

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Last Updated:March 11, 2026, 19:53 IST Jamshedpur Rock Salt News: जमशेदपुर की सड़कों पर इन दिनों गुलाबी चट्टानों से लदा एक ट्रैक्टर लोगों के बीच कौतूहल का विषय बना हुआ है. जिसे लोग साधारण पत्थर समझ रहे हैं, वह दरअसल सेहत का खजाना कहा जाने वाला शुद्ध सेंधा नमक है. हरियाणा के हनुमानगढ़ से आए व्यापारी साकची और बर्मामाइंस की सड़कों पर घूम-घूमकर पहाड़ों से निकला यह शुद्ध नमक बेच रहे हैं. जानें, क्या है इसकी कीमत और क्यों बढ़ रही है इसकी मांग. जमशेदपुरः लौहनगरी की सड़कों पर इन दिनों एक अजीबोगरीब नजारा लोगों के कौतूहल का केंद्र बना हुआ है. साकची और बर्मामाइंस जैसे इलाकों से गुजरते वक्त लोग एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को देखकर ठिठक जा रहे हैं. जिसमें विशालकाय गुलाबी पत्थर लदे हुए हैं. पहली नजर में किसी पहाड़ के टुकड़े जैसे दिखने वाले ये पत्थर दरअसल कोई साधारण चट्टान नहीं, बल्कि सेहत के लिए वरदान माने जाने वाला सेंधा नमक है. हनुमानगढ़ से जमशेदपुर तक का सफरहरियाणा के हनुमानगढ़ से आए शंकर और उनकी टीम इन दिनों शहर में घूम-घूमकर इस खास नमक की बिक्री कर रही है. ये लोग ट्रैक्टर पर ही नमक की बड़ी-बड़ी चट्टानें सजाकर लाते हैं. शंकर बताते हैं कि वे इन पत्थरों को पहाड़ों से तोड़कर लाते हैं. सीधे ग्राहकों तक शुद्ध रूप में पहुंचाते हैं. सेहत का खजाना, ₹80 से ₹100 में उपलब्धबाजार में मिलने वाले रिफाइंड नमक के मुकाबले लोग इस रॉक सॉल्ट की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं. जमशेदपुर में यह सेंधा नमक (गुलाबी पत्थर) ₹80 प्रति किलो और विशेष विधि से तैयार काला नमक ₹100 प्रति किलो की दर से बिक रहा है. बताया जाता है कि काला नमक को मिट्टी की हांडी में तपाकर तैयार किया जाता है. जो पाचन और गैस की समस्या में बेहद कारगर है. क्यों उमड़ रही है भीड़?आमतौर पर व्रत और उपवास में इस्तेमाल होने वाले इस नमक की मांग अब रोजाना के खान-पान में भी बढ़ रही है. लोग इसे शुद्धता की गारंटी मान रहे हैं क्योंकि यह सीधे पत्थर के रूप में उनके सामने मौजूद है. गुलाबी पत्थरों से लदे ट्रैक्टर को देखकर न केवल खरीदार बल्कि उत्सुक राहगीरों की भी भारी भीड़ जुट रही है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसे बेचने का तरीका भी थोड़ा अलग है. ट्रैक्टर पर नमक के बड़े-बड़े पत्थर सजाकर रखा गया है.  खास अंदाज में आवाज लगाकर लोगों को बुलाया जाता है. गुलाबी पत्थरों से भरी यह गाड़ी सड़क से गुजरती है तो लोग रुककर इसे जरूर देखते हैं. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand First Published : March 11, 2026, 19:53 IST

Purple Cabbage Health Benefits | purple cabbage for weight loss | पर्पल गोभी के फायदे | वजन घटाने में पर्पल गोभी का इस्तेमाल |

Antioxidant-rich vegetables

Last Updated:March 10, 2026, 17:36 IST Purple Cabbage Health Benefits: सब्जी मंडियों में दिखने वाली चमकदार बैंगनी गोभी सिर्फ सलाद की सजावट नहीं, बल्कि कैंसर से लड़ने वाले ‘एंथोसायनिन’ और दिल को फौलाद बनाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स का सबसे सस्ता और ताकतवर स्रोत है. इसलिए दुनिया भर के डायटीशियन इसे फैट बर्नर और बोन बूस्टर भी कहते है. घुटनों के दर्द से लेकर चेहरे की झुर्रियों तक और खराब कोलेस्ट्रॉल को जड़ से मिटाने से लेकर इम्यून सिस्टम को लोहे जैसा मजबूत बनाने तक जानिए पर्पल गोभी कैसे काम करती हैं. पर्पल गोभी में एंथोसायनिन नामक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो इसे खास रंग देता है. यह तत्व शरीर में बनने वाले फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करता है. फ्री रेडिकल्स कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं, इसलिए एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है. पर्पल गोभी का सेवन शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करता है. नियमित रूप से इसे खाने से शरीर को प्राकृतिक सुरक्षा मिल सकती है. यही वजह है कि पोषण विशेषज्ञ भी इसे स्वस्थ आहार का हिस्सा बनाने की सलाह देते हैं. पहाड़ी इलाकों में अब किसान भी इस खास गोभी की खेती करने लगे हैं, जिससे लोगों को पौष्टिक सब्जी आसानी से उपलब्ध हो रही है. जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए पर्पल गोभी एक अच्छा विकल्प मानी जाती है. इसमें कैलोरी कम और फाइबर अधिक होता है. फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती है. इससे अनावश्यक खाने की आदत कम हो सकती है. इसके अलावा यह सब्जी पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाती है, जिससे शरीर में पोषक तत्वों का सही अवशोषण होता है. अगर इसे सलाद, सब्जी या सूप के रूप में आहार में शामिल किया जाए तो वजन नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है. आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. ऐजल पटेल ने लोकल 18 को बताया कि पर्पल गोभी में मौजूद पोषक तत्व हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद कर सकते हैं. जब शरीर में कोलेस्ट्रॉल संतुलित रहता है, तो दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है. इसके अलावा यह रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखने में भी सहायक मानी जाती है. रोजाना पर्पल गोभी का सेवन करने से हृदय की कार्यप्रणाली बेहतर बनी रह सकती है. हरी सब्जियों के साथ इस रंगीन गोभी को भी भोजन में शामिल करना दिल की सेहत के लिए लाभदायक हो सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google पर्पल गोभी में विटामिन K और कैल्शियम अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो हड्डियों के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व हैं. विटामिन K हड्डियों के निर्माण और मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसके नियमित सेवन से हड्डियों की कमजोरी और उम्र के साथ होने वाली समस्याओं से बचाव में मदद मिल सकती है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह सब्जी फायदेमंद मानी जाती है. अगर इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जाए तो शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है. यही कारण है कि डॉक्टर भी हड्डियों को मजबूत रखने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर सब्जियों के सेवन की सलाह देते हैं. पर्पल गोभी में फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो पाचन तंत्र के लिए काफी लाभकारी माना जाता है. फाइबर भोजन को पचाने में मदद करता है और आंतों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाता है. इसके सेवन से कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है. साथ ही यह पेट को हल्का और स्वस्थ बनाए रखने में भी मदद करती है. नियमित रूप से फाइबर युक्त भोजन करने से पाचन तंत्र मजबूत रहता है, शरीर में ऊर्जा का स्तर भी बेहतर बना रहता है. इसलिए पोषण विशेषज्ञ संतुलित मात्रा में पर्पल गोभी को आहार में शामिल करने की सलाह देते हैं. पर्पल गोभी में मौजूद विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा और बालों की सेहत के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं. यह शरीर में मौजूद हानिकारक तत्वों को कम करने में मदद कर सकते हैं, जिससे त्वचा को प्राकृतिक चमक मिलती है. इसके अलावा इसमें मौजूद पोषक तत्व बालों को मजबूत बनाने में भी सहायक होते हैं. नियमित रूप से पोषक सब्जियों का सेवन करने से त्वचा स्वस्थ और बाल मजबूत बने रह सकते हैं. पर्पल गोभी का सेवन शरीर को अंदर से पोषण देता है, जिसका असर बाहरी रूप पर भी दिखाई देता है. पर्पल गोभी में कई तरह के विटामिन और खनिज तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. मजबूत इम्यून सिस्टम शरीर को संक्रमण और बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. मौसम बदलने के समय अक्सर लोगों को सर्दी-जुकाम जैसी समस्याएं हो जाती हैं, ऐसे में पोषक आहार का सेवन करना जरूरी होता है. पर्पल गोभी में मौजूद पोषक तत्व शरीर को ऊर्जा देने और उसे स्वस्थ बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं. इसलिए इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है. पर्पल गोभी का उपयोग कई तरह से किया जा सकता है. इसे सलाद, सब्जी, सूप या स्टर-फ्राई के रूप में आसानी से बनाया जा सकता है. कुछ लोग इसे हल्का उबालकर भी खाते हैं, जिससे इसके पोषक तत्व बरकरार रहते हैं. इसके अलावा इसे अन्य सब्जियों के साथ मिलाकर भी पकाया जा सकता है. स्वाद और पोषण दोनों के लिहाज से यह एक बेहतरीन विकल्प मानी जाती है. अगर इसे नियमित और संतुलित मात्रा में आहार में शामिल किया जाए, तो शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व मिल सकते हैं, स्वास्थ्य बेहतर बना रह सकता है. First Published : March 10, 2026, 17:36 IST

Black Garlic Health Benefits; Nutrition Value

Black Garlic Health Benefits; Nutrition Value

Hindi News Lifestyle Black Garlic Health Benefits; Nutrition Value | Antioxidants Food Expert Advice 35 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक लहसुन से तो आप परिचित ही होंगे। ये हमारी रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा है। इसके हेल्थ बेनिफिट्स भी किसी से छुपे नहीं हैं। लेकिन क्या आपने कभी ‘काले लहसुन’ के बारे में सुना है। यह नाम सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। साइंस जर्नल ‘इनटेक ओपन’ में पब्लिश एक स्टडी के अनुसार, नियमित एक्सरसाइज के साथ काला लहसुन खाने से विसरल फैट और लिवर इंफ्लेमेशन को कम करने में मदद मिल सकती है। इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि- काला लहसुन क्या होता है? यह रेगुलर लहसुन से कैसे अलग होता है? काले लहसुन के हेल्थ बेनिफिट्स क्या हैं? एक्सपर्ट- डॉ. अनु अग्रवाल, सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन, फाउंडर- ‘वनडाइडटुडे’ सवाल- काला लहसुन क्या है? जवाब- काला लहसुन असल में कच्चा लहसुन ही होता है। इसे कई हफ्तों तक हल्की गर्मी और ज्यादा नमी में रखा जाता है। इस प्रक्रिया को मेलार्ड रिएक्शन कहते हैं, जिसमें लहसुन की कलियां धीरे-धीरे काली हो जाती हैं। इस दौरान लहसुन का स्वाद बदल जाता है। इसके बाद इसका स्वाद तीखा नहीं रहता, बल्कि थोड़ा नरम और मीठा हो जाता है। कुल मिलाकर रेगुलर सफेद लहसुन मेलार्ड रिएक्शन के बाद काला लहसुन बन जाता है। सवाल- काले लहसुन और रेगुलर लहसुन में क्या अंतर है? जवाब- काला लहसुन और रेगुलर लहसुन दिखने में, स्वाद और प्रोसेसिंग के मामले में एक-दूसरे से अलग होता है। दोनों के गुण अलग हैं, इसलिए इनके फायदे और इस्तेमाल भी अलग-अलग हैं। ग्राफिक से दोनों के अंतर समझते हैं- सवाल- काले लहसुन की न्यूट्रिशनल वैल्यू क्या है? जवाब- सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन डॉ. अनु अग्रवाल बताती हैं कि 15 ग्राम छिले हुए काले लहसुन में करीब 20 कैलोरी होती है। इसमें विटामिन C और B-कॉम्प्लेक्स भी होते हैं। इसके अलावा काले लहसुन में फोलेट, कैल्शियम, मैंगनीज, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, जिंक और आयरन जैसे महत्वपूर्ण मिनरल्स भी होते हैं। कच्चे लहसुन की तरह इसमें भी अमीनो एसिड, फाइटोन्यूट्रिएंट्स और एंटीऑक्सिडेंट्स मौजूद होते हैं। बस फर्मेंटेशन की प्रक्रिया से उनकी मात्रा बदल जाती है। नीचे दिए ग्राफिक से 15 ग्राम छिले हुए काले लहसुन की न्यूट्रिशनल वैल्यू समझिए- सवाल- काले लहसुन के हेल्थ बेनिफिट्स क्या होते हैं? जवाब- काले लहसुन को एजिंग और फर्मेंटेशन की प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। इसी वजह से इसमें एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण ज्यादा मजबूत हो जाते हैं। काले लहसुन में रेगुलर लहसुन की तुलना में एस-एलिल सिस्टीन (SAC) जैसे आर्गेनोसल्फर कंपाउंड्स और एंटीऑक्सिडेंट्स की मात्रा ज्यादा होती है। इसकी एजिंग की प्रक्रिया लहसुन के गुणों को और असरदार बनाती है, जिससे यह ओवरऑल हेल्थ के लिए एक पावरफुल नेचुरल सप्लीमेंट बन जाता है। सवाल- क्या काला लहसुन रेगुलर लहसुन से ज्यादा फायदेमंद होता है? जवाब- कई मामलों में काला लहसुन रेगुलर लहसुन से ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। फर्मेंटेशन की वजह से काले लहसुन में एंटीऑक्सिडेंट्स की मात्रा बढ़ जाती है। इसका स्वाद हल्का होता है, यह पचने में आसान होता है और इसमें लहसुन वाली तेज गंध भी नहीं होती है। वहीं रेगुलर लहसुन में एलिसिन की मात्रा ज्यादा होती है, जो इंफेक्शन से लड़ने और इम्यूनिटी बढ़ाने में बहुत प्रभावी माना जाता है। सवाल- क्या काला लहसुन बाजार में आसानी से मिल जाता है? जवाब- हां, काला लहसुन आजकल बाजार में आसानी से मिल जाता है। कुछ सुपरमार्केट और हेल्थ फूड स्टोर से भी इसे आसानी से खरीदा जा सकता है। इसके अतिरिक्त ये ऑनलाइन पर भी उपलब्ध है। सवाल- काला लहसुन किन्हें नहीं खाना चाहिए? जवाब- काला लहसुन आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन कुछ लोगों को इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए। ग्राफिक में देखिए, किन्हें इसके सेवन से बचना चाहिए- सवाल- काला लहसुन घर पर कैसे बनाएं? जवाब- काला लहसुन घर पर आसानी से बनाया जा सकता है। पूरी प्रक्रिया समझिए- राइस कुकर में काला लहसुन बनाने का तरीका लहसुन की पूरी गांठ लें। उसका छिलका न उतारें। हर गांठ को सिल्वर फॉयल में लपेटें। अब इसे राइस कुकर या स्लो कुकर में डालकर ‘Keep Warm’ मोड ऑन कर दें। याद रखें, इसे पकाना नहीं है। सिर्फ वार्म मोड में रखना है। लहसुन को 10–15 दिनों तक ऐसे ही रहने दें। बीच में कुकर खोलें नहीं ताकि तापमान और नमी बनी रहे। 10–15 दिन बाद लहसुन की कलियां काली, नरम और जैम की तरह हो जाएंगी। काला लहसुन खाने के लिए तैयार है। सवाल- काला लहसुन का इस्तेमाल कैसे करें? जवाब- काले लहसुन का स्वाद अलग होता है। ये चबाने पर थोड़ा चिपचिपा लगता है, जो इसे रेगुलर लहसुन से अलग बनाता है। इसके इस्तेमाल के कुछ तरीके नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए- सूप में मिलाया जा सकता है। पिज्जा और पास्ता जैसी डिशेज के ऊपर टॉपिंग के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। ब्रेड पर डालकर इसे स्वादिष्ट सैंडविच स्प्रेड की तरह खाया जा सकता है। सॉस, ड्रेसिंग और मेरिनेड में ब्लेंड करके मिलाया जा सकता है। बटर और ऑलिव ऑयल में मिलाकर स्वादिष्ट स्प्रेड और डिप तैयार की जा सकती है। …………………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर– सुबह उठकर खाली पेट पहले पानी पिएं:जानें इसके 11 हेल्थ बेनिफिट्स, पीने का सही तरीका, पीते हुए न करें ये 7 गलतियां हम हमेशा से ये सुनते आए हैं कि सुबह खाली पेट पानी पीना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ये आदत बॉडी को रीस्टार्ट का मैसेज देती है। कुछ हेल्थ एक्सपर्ट्स इस आदत को ‘साइलेंट हीलर’ भी कहते हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…