Monday, 10 Aug 2026 | 07:48 PM

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Bangladesh BNP Welcomes BJP Win in West Bengal; Teesta Deal Hopes Rise

Bangladesh BNP Welcomes BJP Win in West Bengal; Teesta Deal Hopes Rise

ढाका2 मिनट पहले कॉपी लिंक बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी BNP ने पश्चिम बंगाल में BJP की जीत पर खुशी जताई है। न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए BNP के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने BJP को जीत की बधाई दी और कहा कि इससे भारत-बांग्लादेश संबंध मजबूत हो सकते हैं। उन्होंने ममता बनर्जी सरकार पर तीस्ता जल बंटवारे समझौते में देरी करने का आरोप लगाया और कहा कि वह इसमें सबसे बड़ी रुकावट थी। उन्होंने दावा किया कि यह समझौता बांग्लादेश सरकार और मोदी सरकार दोनों ही चाहते थे। हेलाल ने उम्मीद जताई कि सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बनी सरकार भारत और बांग्लादेश के रिश्तों को बेहतर बनाएगी और तीस्ता समझौते को आगे बढ़ाने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि भारत के राज्यों में बांग्लादेश के साथ सबसे लंबी सीमा पश्चिम बंगाल की ही लगती है। इसलिए वहां की राजनीति का असर सीधे दोनों के संबंधों पर पड़ता है। वहां सत्ता बदलना दोनों देशों के लिए अच्छा है। इससे दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दों पर भी सुधार हो सकता है। तीस्ता नदी का 50% पानी चाहता है बांग्लादेश तीस्ता नदी हिमालय के पाहुनरी ग्लेशियर से निकलती है। यह सिक्किम से पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश जाती है और बाद में ब्रह्मपुत्र में मिल जाती है। यह नदी कुल 414 किलोमीटर का रास्ता तय करती है। इस नदी से बांग्लादेश की 2 करोड़ और भारत की 1 करोड़ की आबादी का जीवन-यापन जुड़ा है। इस लंबी यात्रा के दौरान तीस्ता नदी की 83% यात्रा भारत में और 17% यात्रा बांग्लादेश में होती है। भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे को लेकर कई सालों से विवाद है। बांग्लादेश तीस्ता का 50 फीसदी पानी पर अधिकार चाहता है। जबकि भारत खुद 55 फीसदी पानी चाहता है। जानकारों के मुताबिक अगर तीस्ता नदी जल समझौता होता है तो पश्चिम बंगाल नदी के पानी का मनमुताबिक इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। यही वजह है कि ममता बनर्जी इसे टालती रही। लंबे समय से अटका है जल बंटवारा समझौता 1815 में नेपाल के राजा और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच तीस्ता नदी के पानी को लेकर समझौता हुआ था। तब राजा ने नदी के बड़े हिस्से पर नियंत्रण अंग्रेजों को सौंप दिया। बांग्लादेश के आजाद होने के 12 साल बाद 1983 में दोनों देशों के बीच अंतरिम समझौता हुआ। इससमें बांग्लादेश को 36% और भारत को 39% पानी देने की बात थी, जबकि 25% हिस्से पर बाद में फैसला होना था। लेकिन यह समझौता भी पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। बाद में बांग्लादेश ने कहना शुरू किया कि उसे जितना पानी मिल रहा है, वो उसकी जरूरत के हिसाब से कम है। सूखे में उसका इतने पानी से गुजारा नहीं हो पाता है। साल 2008 में शेख हसीना के पीएम बनने के बाद से बांग्लादेश की मांग तेज होने लगी। 2011 में जब कांग्रेस की सरकार थी तब भारत, तीस्ता नदी जल समझौता पर दस्तखत करने को तैयार हो गया था। इसमें बांग्लादेश को 37.5% और भारत को 42.5% पानी देने की बात थी। बाकी 20% किसी देश को देने के लिए तय नहीं था। इसे ‘अनएलोकेटेड’ या रिजर्व पानी माना गया था। ये हिस्सा नदी के प्राकृतिक बहाव, पर्यावरण और जरूरत के हिसाब से छोड़ा जाता है, ताकि नदी सूख न जाए और इकोसिस्टम बना रहे। हालांकि तब ममता बनर्जी की नाराजगी की वजह से मनमोहन सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़े थे। साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी PM बने। एक साल बाद वो बंगाल की CM ममता बनर्जी के साथ बांग्लादेश गए। इस दौरान दोनों नेताओं ने बांग्लादेश को तीस्ता के बंटवारे पर एक सहमति का यकीन दिलाया था। लेकिन 11 साल बीतने के बावजूद अब तक तीस्ता नदी जल समझौते का समाधान नहीं निकल पाया है। ममता सरकार इस समझौते का विरोध क्यों करती रही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार तीस्ता और फरक्का जल बंटवारे के समझौतों का विरोध करती रही हैं। उनके मुताबिक इसका सीधा असर राज्य के लोगों की आजीविका पर पड़ेगा। उनका तर्क है कि पहले ही तीस्ता नदी में पानी का प्रवाह कम हो चुका है, ऐसे में अगर बांग्लादेश के साथ अतिरिक्त पानी साझा किया गया तो उत्तर बंगाल में सिंचाई और पीने के पानी का संकट गहरा सकता है। साथ ही फरक्का बैराज से पानी मोड़ना कोलकाता पोर्ट की नौवहन क्षमता बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है। ममता सरकार का यह भी कहना रहा है कि इस तरह के संवेदनशील फैसलों में राज्य सरकार को भरोसे में लिए बिना कोई समझौता नहीं होना चाहिए, क्योंकि सबसे ज्यादा असर स्थानीय लोगों पर ही पड़ता है। प्रधानमंत्री मोदी, बांग्लादेशी पीएम शेख हसीना और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ये तस्वीर 2016 की है। तीनों शांति निकेतन में एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। भारत-बांग्लादेश में सिर्फ 2 नदियों पर समझौते हुए भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 54 साझा नदियां हैं। लेकिन अब तक सिर्फ दो बड़ी नदियों पर ही औपचारिक समझौते हो पाए हैं। पहला गंगा नदी पर 1996 में हुआ समझौता और दूसरा कुशियारा नदी पर हाल का समझौता। गंगा जल संधि 1996 30 साल के लिए किया गया था, जिसकी अवधि 2026 में पूरी हो रही है। यानी अब इस पर दोबारा बातचीत की जरूरत पड़ेगी। तीस्ता नदी पर अब तक कोई स्थायी समझौता नहीं हो पाया है और यह सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है। वहीं फेनी नदी के मामले में पूरी तरह बड़ा समझौता नहीं हुआ, लेकिन 2019 में सीमित स्तर पर पानी देने को लेकर सहमति बनी थी। जब भारत किसी नदी पर समझौता नहीं कर पाता, तो बांग्लादेश में यह धारणा बनती है कि भारत अपनी घरेलू राजनीति, खासकर राज्यों के दबाव की वजह से फैसले टाल रहा है। दूसरी तरफ भारत के लिए यह संतुलन का मामला है, क्योंकि उसे एक तरफ पड़ोसी देश के साथ रिश्ते संभालने होते हैं और दूसरी तरफ अपने राज्यों, जैसे पश्चिम बंगाल की जरूरतों का भी ध्यान रखना पड़ता है। ——————————– यह खबर भी पढ़ें… कर्ज से परेशान पाकिस्तान ने शराब एक्सपोर्ट शुरू किया:गैर मुस्लिम देशों को सप्लाई, 50 साल पहले इस्लाम का हवाला देकर बैन किया था कर्ज

BJP Wins 128 Seats With Less Than 30k Margin in Bengal

BJP Wins 128 Seats With Less Than 30k Margin in Bengal

नई दिल्ली25 मिनट पहले कॉपी लिंक ममता बनर्जी से मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से से कुल 91 लाख वोट कटे यानी हर सीट पर औसतन 30 हजार वोट कटे। कुल 293 सीटों में से 176 पर जीत का अंतर 30 हजार से कम और 117 सीटों पर 30,000 से अधिक रहा। भाजपा के लिए इस बार 128 सीटें ऐसी रहीं, जहां जीत का अंतर 30 हजार से कम रहा और 79 पर 30 हजार से ज्यादा। 2021 में भाजपा ने 77 में से 72 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम था। प्रतिशत में देखें तो भाजपा ने इस बार 62% सीटें 30 हजार से कम मार्जिन पर जीतीं, जबकि 2021 में यह 93.5% था। TMC के लिए इस बार 44 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम था, जबकि 36 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा। 2021 में 121 सीटों पर टीएमसी की जीत का अंतर 30 हजार से कम था और 91 सीटों पर 30 हजार से ज्यादा। यानी बहुमत वाले दल के लिए ये आंकड़े ट्रेंड दिखाते हैं। भाजपा और टीएमसी की 25 सीटों पर जीत-हार का अंतर अधिक वोटों से था, यानी ऐसे नतीजों को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। भाजपा को तृणमूल के मुकाबले 32 लाख वोट ज्यादा भाजपा को बंगाल में कुल 2,92,24,804 और तृणमूल को 2,60,13,377 वोट मिले। दोनों दलों के बीच कुल वोट का अंतर 32,11,427 रहा। 293 सीटों के हिसाब से औसत निकालें तो प्रति सीट भाजपा को 10,960 वोटों की बढ़त मिली। एसआईआर पर दलों में भ्रम फैला, कहा गया कि यदि हटाए गए वोटों की संख्या जीत के अंतर से कम है, तो इसका असर चुनाव परिणाम पर हस्तक्षेप नहीं करता। क्योंकि 30 हजार वोटों के होने या नहीं होने से अंतिम परिणाम पर फर्क नहीं पड़ता। हस्तक्षेप तभी संभव है जब यह दिखाया जा सके कि हटाए गए वोट इतने अधिक थे कि वे जीत-हार के अंतर को बदल सकते थे। उदाहरण के लिए- यदि किसी विजेता को 1 लाख वोट मिले और निकटतम प्रतिद्वंदी को 95 हजार वोट, तो मार्जिन 5 हजार हुआ। अगर हटाए गए वोट 5 हजार से कम हैं, तो असर नहीं होगा, लेकिन ज्यादा होने पर नतीजों पर असर संभव है। देश की 78% आबादी और 72% भूभाग पर अब भाजपा+ का राज गंगासागर से कन्याकुमारी तक पांच राज्यों के चुनावी नतीजों ने भाजपा विरोधी राजनीति के बड़े ‘पॉवर सेंटर्स’ को बड़ा झटका दिया है। ममता बनर्जी और एमके स्टालिन भाजपा को चुनौती देने वाले प्रमुख चेहरे थे। बंगाल (42) और तमिलनाडु (39) लोकसभा की 81 सीटें तय करते हैं। इनके ढहने से इंडिया गठबंधन पिछड़ गया। केरल में कांग्रेस की जीत उसे राहत देती है, लेकिन यह बढ़त विपक्ष में नई खींचतान शुरू करेगी। अब विपक्ष की लड़ाई सत्ता की नहीं, प्रासंगिकता बचाने की हो गई है। …………………… पश्चिम बंगाल चुनाव से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ममता बोलीं- मैं आजाद पंछी, शेर की तरह लड़ूंगी: इस्तीफा नहीं दूंगी, हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे; कोलकाता में BJP कार्यकर्ता की हत्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा- मैं CM पद से इस्तीफा नहीं दूंगी। हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे हैं। इसलिए इस्तीफा देने राजभवन नहीं जाऊंगी।ममता ने आगे कहा- चुनाव आयोग असली विलेन है। उसने भाजपा के साथ मिलकर 100 सीटें लूटीं। अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं आजाद पंछी हूं। कहीं से भी चुनाव लड़ सकती हूं, सड़कों पर रहूंगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

BJP Wins 128 Seats With Less Than 30k Margin in Bengal

BJP Wins 128 Seats With Less Than 30k Margin in Bengal

नई दिल्ली5 घंटे पहले कॉपी लिंक ममता बनर्जी से मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से से कुल 91 लाख वोट कटे यानी हर सीट पर औसतन 30 हजार वोट कटे। कुल 293 सीटों में से 176 पर जीत का अंतर 30 हजार से कम और 117 सीटों पर 30,000 से अधिक रहा। भाजपा के लिए इस बार 128 सीटें ऐसी रहीं, जहां जीत का अंतर 30 हजार से कम रहा और 79 पर 30 हजार से ज्यादा। 2021 में भाजपा ने 77 में से 72 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम था। प्रतिशत में देखें तो भाजपा ने इस बार 62% सीटें 30 हजार से कम मार्जिन पर जीतीं, जबकि 2021 में यह 93.5% था। TMC के लिए इस बार 44 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम था, जबकि 36 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा। 2021 में 121 सीटों पर टीएमसी की जीत का अंतर 30 हजार से कम था और 91 सीटों पर 30 हजार से ज्यादा। यानी बहुमत वाले दल के लिए ये आंकड़े ट्रेंड दिखाते हैं। भाजपा और टीएमसी की 25 सीटों पर जीत-हार का अंतर अधिक वोटों से था, यानी ऐसे नतीजों को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। भाजपा को तृणमूल के मुकाबले 32 लाख वोट ज्यादा भाजपा को बंगाल में कुल 2,92,24,804 और तृणमूल को 2,60,13,377 वोट मिले। दोनों दलों के बीच कुल वोट का अंतर 32,11,427 रहा। 293 सीटों के हिसाब से औसत निकालें तो प्रति सीट भाजपा को 10,960 वोटों की बढ़त मिली। एसआईआर पर दलों में भ्रम फैला, कहा गया कि यदि हटाए गए वोटों की संख्या जीत के अंतर से कम है, तो इसका असर चुनाव परिणाम पर हस्तक्षेप नहीं करता। क्योंकि 30 हजार वोटों के होने या नहीं होने से अंतिम परिणाम पर फर्क नहीं पड़ता। हस्तक्षेप तभी संभव है जब यह दिखाया जा सके कि हटाए गए वोट इतने अधिक थे कि वे जीत-हार के अंतर को बदल सकते थे। उदाहरण के लिए- यदि किसी विजेता को 1 लाख वोट मिले और निकटतम प्रतिद्वंदी को 95 हजार वोट, तो मार्जिन 5 हजार हुआ। अगर हटाए गए वोट 5 हजार से कम हैं, तो असर नहीं होगा, लेकिन ज्यादा होने पर नतीजों पर असर संभव है। देश की 78% आबादी और 72% भूभाग पर अब भाजपा+ का राज गंगासागर से कन्याकुमारी तक पांच राज्यों के चुनावी नतीजों ने भाजपा विरोधी राजनीति के बड़े ‘पॉवर सेंटर्स’ को बड़ा झटका दिया है। ममता बनर्जी और एमके स्टालिन भाजपा को चुनौती देने वाले प्रमुख चेहरे थे। बंगाल (42) और तमिलनाडु (39) लोकसभा की 81 सीटें तय करते हैं। इनके ढहने से इंडिया गठबंधन पिछड़ गया। केरल में कांग्रेस की जीत उसे राहत देती है, लेकिन यह बढ़त विपक्ष में नई खींचतान शुरू करेगी। अब विपक्ष की लड़ाई सत्ता की नहीं, प्रासंगिकता बचाने की हो गई है। …………………… पश्चिम बंगाल चुनाव से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ममता बोलीं- मैं आजाद पंछी, शेर की तरह लड़ूंगी: इस्तीफा नहीं दूंगी, हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे; कोलकाता में BJP कार्यकर्ता की हत्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा- मैं CM पद से इस्तीफा नहीं दूंगी। हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे हैं। इसलिए इस्तीफा देने राजभवन नहीं जाऊंगी।ममता ने आगे कहा- चुनाव आयोग असली विलेन है। उसने भाजपा के साथ मिलकर 100 सीटें लूटीं। अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं आजाद पंछी हूं। कहीं से भी चुनाव लड़ सकती हूं, सड़कों पर रहूंगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

असम-बंगाल में कांग्रेस के 21 में से 20 विधायक मुस्लिम:AIUDF बोली- कांग्रेस अब 'मुस्लिम लीग' बनी; भाजपा ने एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया था

असम-बंगाल में कांग्रेस के 21 में से 20 विधायक मुस्लिम:AIUDF बोली- कांग्रेस अब 'मुस्लिम लीग' बनी; भाजपा ने एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया था

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में मुस्लिम सीटों पर सबसे अलग ट्रेंड बंगाल में दिखा। यहां 142 मुस्लिम सीटों में से भाजपा ने 72, टीएमसी ने 64 सीटें और कांग्रेस को 2 सीटें मिलीं। वहीं, असम की 22 मुस्लिम बहुल सीटों पर कांग्रेस को 18, AIUDF को 2 सीटें मिलीं। केरलम की 44 मुस्लिम बहुल सीटों में IUML को 21 और कांग्रेस को 14 सीटें मिलीं। केरलम में कांग्रेस ने 114 सीटों पर चुनाव लड़ा, इसमें 63 सीटें मिलीं। यहां उसके 8 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीते हैं। कांग्रेस ने बंगाल और असम में कुल 390 सीटों पर चुनाव लड़ा। 21 सीटों पर जीत दर्ज की, इनमें से 20 मुस्लिम विधायक हैं। इधर भाजपा ने एक भी मुस्लिम उम्मीवार को टिकट नहीं दिया। AIUDF के नेता बदरुद्दीन अजमल ने तंज कसते हुए कहा- ‘असम में कांग्रेस अब मुस्लिम लीग बन चुकी है।’ पहले AIUDF का कांग्रेस के साथ गठबंधन था। असम में कांग्रेस के 20 में से 18 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीते बंगाल में कांग्रेस ने TMC से ज्यादा मुसलमानों को टिकट दिया पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने 63 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया। वहीं, 15 साल से शासन कर रही TMC ने 47 मुस्लिम कैंडिडेट्स उतारे। कांग्रेस ने 2021 में भी 94 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे। असम की कई सीटों पर कांग्रेस और उसके सहयोगियों के मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत की दर 80 प्रतिशत से भी ज्यादा रही है। कई सीटों पर तो कांग्रेस उम्मीदवारों ने 1 लाख से भी ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की है। पांचों राज्यों के रिजल्ट… ——————————————————– ये खबर भी पढ़ें… बंगाल- 10 साल में भाजपा 3 से 207 पर पहुंची:तमिलनाडु में विजय की 2 साल पुरानी पार्टी जीती; केरलम में कांग्रेस, असम में भाजपा सरकार पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के रिजल्ट सोमवार को आए। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरलम में सरकारें बदल गईं। असम और पुडुचेरी में एनडीए ने वापसी की। बंगाल में TMC को हराकर भाजपा पहली बार सत्ता में आई। पार्टी दस साल में 3 सीटों से 207 सीटों पर पहुंच गई है। पूरी खबर पढ़ें…

असम-बंगाल में कांग्रेस के 21 में से 20 विधायक मुस्लिम:AIUDF बोली- कांग्रेस 'मुस्लिम लीग' बनी; भाजपा ने किसी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया था

असम-बंगाल में कांग्रेस के 21 में से 20 विधायक मुस्लिम:AIUDF बोली- कांग्रेस अब 'मुस्लिम लीग' बनी; भाजपा ने एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया था

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में मुस्लिम सीटों पर सबसे अलग ट्रेंड बंगाल में दिखा। यहां 142 मुस्लिम सीटों में से भाजपा ने 72, टीएमसी ने 64 सीटें और कांग्रेस को 2 सीटें मिलीं। वहीं, असम की 22 मुस्लिम बहुल सीटों पर कांग्रेस को 18, AIUDF को 2 सीटें मिलीं। केरलम की 44 मुस्लिम बहुल सीटों में IUML को 21 और कांग्रेस को 14 सीटें मिलीं। केरलम में कांग्रेस ने 114 सीटों पर चुनाव लड़ा, इसमें 63 सीटें मिलीं। यहां उसके 8 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीते हैं। कांग्रेस ने बंगाल और असम में कुल 390 सीटों पर चुनाव लड़ा। 21 सीटों पर जीत दर्ज की, इनमें से 20 मुस्लिम विधायक हैं। इधर भाजपा ने एक भी मुस्लिम उम्मीवार को टिकट नहीं दिया। AIUDF के नेता बदरुद्दीन अजमल ने तंज कसते हुए कहा- ‘असम में कांग्रेस अब मुस्लिम लीग बन चुकी है।’ पहले AIUDF का कांग्रेस के साथ गठबंधन था। असम में कांग्रेस के 20 में से 18 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीते बंगाल में कांग्रेस ने TMC से ज्यादा मुसलमानों को टिकट दिया पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने 63 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया। वहीं, 15 साल से शासन कर रही TMC ने 47 मुस्लिम कैंडिडेट्स उतारे। कांग्रेस ने 2021 में भी 94 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे। असम की कई सीटों पर कांग्रेस और उसके सहयोगियों के मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत की दर 80 प्रतिशत से भी ज्यादा रही है। कई सीटों पर तो कांग्रेस उम्मीदवारों ने 1 लाख से भी ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की है। पांचों राज्यों के रिजल्ट… ——————————————————– ये खबर भी पढ़ें… बंगाल- 10 साल में भाजपा 3 से 207 पर पहुंची:तमिलनाडु में विजय की 2 साल पुरानी पार्टी जीती; केरलम में कांग्रेस, असम में भाजपा सरकार पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के रिजल्ट सोमवार को आए। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरलम में सरकारें बदल गईं। असम और पुडुचेरी में एनडीए ने वापसी की। बंगाल में TMC को हराकर भाजपा पहली बार सत्ता में आई। पार्टी दस साल में 3 सीटों से 207 सीटों पर पहुंच गई है। पूरी खबर पढ़ें…

Bengal BJP First Time, Actor Vijays TVK Big in Tamil Nadu

Bengal BJP First Time, Actor Vijays TVK Big in Tamil Nadu

Hindi News National Election Results: Bengal BJP First Time, Actor Vijays TVK Big In Tamil Nadu गुवाहाटी/तिरुवनंतपुरम/पुडुचेरी/चेन्नईकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को आए। बंगाल के इतिहास में पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है। असम में लगातार तीसरी बार भाजपा ने कब्जा जमाया है। तमिलनाडु में सबसे बड़ा उलटफेर हुआ, यहां 2 साल पुरानी एक्टर विजय की पार्टी टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि टीवीके बहुमत के आंकड़े से पीछे है। इधर पुडुचेरी में एनडीए की ही सरकार सत्ता में बनी रहेगी। चेन्नई स्थित टीवीके के दफ्तर के बाहर भारी पुलिसबल तैनात किया गया है। वहीं, पार्टी थिरुप्पाथुर से टीवीके प्रत्याशी के श्रीनिवास सेतुपति ने डीएमके उम्मीदवार पेरियाकरुप्पन को एक वोट से हराया है। श्रीनिवास को 83,365 वोट मिले। इधर, पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी आज शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी। उन्होंने कल आरोप लगाया था कि ‘निर्वाचन आयोग और भाजपा गड़बड़ी कर रहे हैं। 100 से ज्यादा सीटें लूटी गईं हैं। मेरे एजेंटों को बूथ में घुसने नहीं दिया, मुझे रोका गया। पीटा गया। पश्चिम बंगाल की भवानीपुर सीट से भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी जीते। उन्होंने ममता बनर्जी को हराया है। तमिलनाडु में एक्टर विजय ने दोनों सीटों पर जीत हासिल की। उनकी पार्टी टीवीके ने 107 सीटें जीती हैं। असम के तीसरी बार भाजपा की सरकार बन रही है। चुनाव में जीत के बाद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ विक्ट्री साइन दिखाकर सीएम हिमंता ने फोटो क्लिक कराया। केरल विधानसभा में कांग्रेस ने जीत हासिल की है। पार्टी नेता वी.डी. सतीशन ने कांग्रेस समर्थकों के साथ जीत का जश्न मनाया। देश की 78% आबादी और 72% भूभाग पर अब भाजपा+ का राज गंगासागर से कन्याकुमारी तक पांच राज्यों के चुनावी नतीजों ने भाजपा विरोधी राजनीति के बड़े ‘पॉवर सेंटर्स’ को बड़ा झटका दिया है। ममता बनर्जी और एमके स्टालिन भाजपा को चुनौती देने वाले प्रमुख चेहरे थे। बंगाल (42) और तमिलनाडु (39) लोकसभा की 81 सीटें तय करते हैं। इनके ढहने से इंडिया गठबंधन पिछड़ गया। केरल में कांग्रेस की जीत उसे राहत देती है, लेकिन यह बढ़त विपक्ष में नई खींचतान शुरू करेगी। अब विपक्ष की लड़ाई सत्ता की नहीं, प्रासंगिकता बचाने की हो गई है। तमिलनाडु, पुदुचेरी में एक ​परिवार को 3 सीटें लॉटरी किंग मार्टिन की पत्नी, बेटा, दामाद तीन दलों से जीते चुनावी बांड के सबसे बड़े खरीदार बनकर देशभर में चर्चा में आए ‘लॉटरी किंग’ सैंटियागो मार्टिन के परिवार के तीन सदस्यों ने तमिलनाडु और पुदुचेरी में तीन सीटें जीती हैं। मार्टिन की पत्नी लीमा रोज ने एआईएडीएमके के टिकट पर तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के लालगुडी से 2,739 वोटों से जीत हासिल की। लीमा चुनाव में राज्य की सबसे अमीर उम्मीदवार (संपत्ति 1,050 करोड़ रुपए) थीं। मार्टिन की बेटी डेजी के पति और टीवीके की चुनाव विंग के सचिव आधव अर्जुन तमिलनाडु के विल्लीवाक्कम से जीते। ​वरिष्ठता के चलते वे मंत्री बन सकते हैं। मार्टिन के बेटे जोस चार्ल्स पुडुचेरी के कामराज नगर से जीते। उन्होंने खुद की पार्टी, लच्चिया जननायगा काची लॉन्च की थी और एनडीए से गठबंधन किया था। लॉटरी किंग ने ₹540 करोड़ तृणमूल कांग्रेस को, ₹500 करोड़ रुपए डीएमके को और ₹100 करोड़ भाजपा को दिए थे। 5 राज्यों के राजनीतिक अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाएं… लाइव अपडेट्स अभी कॉपी लिंक केरल: पिनाराई विजयन तिरुवनंतपुरम रवाना केरल के पूर्व सीएम मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन मंगलवार सुबह अपने आवास से तिरुवनंतपुरम के लिए कार से रवाना हुए। पिनाराई धर्मदम सीट से 19 हजार से ज्यादा वोटों के जीते हैं। हालांकि उनकी पार्टी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। कुल 140 सीटों में उन्हें केवल 26 सीटें ही मिलीं। 4 मिनट पहले कॉपी लिंक सुवेंदु बोले- नंदीग्राम में मुस्लिम वोट TMC को मिला पश्चिम बंगाल की भवानीपुर और नंदीग्राम सीट से जीतने वाले भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा- इस बार मैंने लगभग दस हजार वोटों से चुनाव जीता है। नंदीग्राम के हिंदू लोगों ने मुझे फिर से जिताया है। वहां, मुसलमानों के सारे वोट TMC को मिले, मैं नंदीग्राम के हिंदुओं के लिए काम करूंगा। TMC खत्म हो जाएगी। 24 घंटे के अंदर यह तबाह हो जाएगी, यह खत्म हो जाएगी। इस भ्रष्ट, परिवार-वादी पार्टी की कोई विचारधारा नहीं है। हम वही काम करेंगे, जिसका गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणापत्र में ऐलान किया था और प्रधानमंत्री मोदी ने बार-बार भरोसा दिलाया है। हम उसे पूरा करेंगे। 8 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु: टीवीके ने 108 सीटें जीतें चेन्नई में TVK प्रमुख और पेरम्बूर विधानसभा क्षेत्र से विजयी उम्मीदवार विजय के आवास के बाहर पुलिस की तैनाती की गई है। तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में TVK ने 234 में से 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया। 12 मिनट पहले कॉपी लिंक देश के 22 राज्यों में BJP-NDA की सरकार दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Bengal BJP First Time, Actor Vijays TVK Big in Tamil Nadu

Bengal BJP First Time, Actor Vijays TVK Big in Tamil Nadu

Hindi News National Election Results: Bengal BJP First Time, Actor Vijays TVK Big In Tamil Nadu गुवाहाटी/तिरुवनंतपुरम/पुडुचेरी/चेन्नई24 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को आए। बंगाल के इतिहास में पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है। असम में लगातार तीसरी बार भाजपा ने कब्जा जमाया है। तमिलनाडु में सबसे बड़ा उलटफेर हुआ, यहां 2 साल पुरानी एक्टर विजय की पार्टी टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि टीवीके बहुमत के आंकड़े से पीछे है। इधर पुडुचेरी में एनडीए की ही सरकार सत्ता में बनी रहेगी। चेन्नई स्थित टीवीके के दफ्तर के बाहर भारी पुलिसबल तैनात किया गया है। वहीं, पार्टी थिरुप्पाथुर से टीवीके प्रत्याशी के श्रीनिवास सेतुपति ने डीएमके उम्मीदवार पेरियाकरुप्पन को एक वोट से हराया है। श्रीनिवास को 83,365 वोट मिले। इधर, पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी आज शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी। उन्होंने कल आरोप लगाया था कि ‘निर्वाचन आयोग और भाजपा गड़बड़ी कर रहे हैं। 100 से ज्यादा सीटें लूटी गईं हैं। मेरे एजेंटों को बूथ में घुसने नहीं दिया, मुझे रोका गया। पीटा गया। पश्चिम बंगाल की भवानीपुर सीट से भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी जीते। उन्होंने ममता बनर्जी को हराया है। तमिलनाडु में एक्टर विजय ने दोनों सीटों पर जीत हासिल की। उनकी पार्टी टीवीके ने 107 सीटें जीती हैं। असम के तीसरी बार भाजपा की सरकार बन रही है। चुनाव में जीत के बाद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ विक्ट्री साइन दिखाकर सीएम हिमंता ने फोटो क्लिक कराया। केरल विधानसभा में कांग्रेस ने जीत हासिल की है। पार्टी नेता वी.डी. सतीशन ने कांग्रेस समर्थकों के साथ जीत का जश्न मनाया। देश की 78% आबादी और 72% भूभाग पर अब भाजपा+ का राज गंगासागर से कन्याकुमारी तक पांच राज्यों के चुनावी नतीजों ने भाजपा विरोधी राजनीति के बड़े ‘पॉवर सेंटर्स’ को बड़ा झटका दिया है। ममता बनर्जी और एमके स्टालिन भाजपा को चुनौती देने वाले प्रमुख चेहरे थे। बंगाल (42) और तमिलनाडु (39) लोकसभा की 81 सीटें तय करते हैं। इनके ढहने से इंडिया गठबंधन पिछड़ गया। केरल में कांग्रेस की जीत उसे राहत देती है, लेकिन यह बढ़त विपक्ष में नई खींचतान शुरू करेगी। अब विपक्ष की लड़ाई सत्ता की नहीं, प्रासंगिकता बचाने की हो गई है। तमिलनाडु, पुदुचेरी में एक ​परिवार को 3 सीटें लॉटरी किंग मार्टिन की पत्नी, बेटा, दामाद तीन दलों से जीते चुनावी बांड के सबसे बड़े खरीदार बनकर देशभर में चर्चा में आए ‘लॉटरी किंग’ सैंटियागो मार्टिन के परिवार के तीन सदस्यों ने तमिलनाडु और पुदुचेरी में तीन सीटें जीती हैं। मार्टिन की पत्नी लीमा रोज ने एआईएडीएमके के टिकट पर तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के लालगुडी से 2,739 वोटों से जीत हासिल की। लीमा चुनाव में राज्य की सबसे अमीर उम्मीदवार (संपत्ति 1,050 करोड़ रुपए) थीं। मार्टिन की बेटी डेजी के पति और टीवीके की चुनाव विंग के सचिव आधव अर्जुन तमिलनाडु के विल्लीवाक्कम से जीते। ​वरिष्ठता के चलते वे मंत्री बन सकते हैं। मार्टिन के बेटे जोस चार्ल्स पुडुचेरी के कामराज नगर से जीते। उन्होंने खुद की पार्टी, लच्चिया जननायगा काची लॉन्च की थी और एनडीए से गठबंधन किया था। लॉटरी किंग ने ₹540 करोड़ तृणमूल कांग्रेस को, ₹500 करोड़ रुपए डीएमके को और ₹100 करोड़ भाजपा को दिए थे। 5 राज्यों के राजनीतिक अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाएं… लाइव अपडेट्स 24 मिनट पहले कॉपी लिंक केरल: पिनाराई विजयन तिरुवनंतपुरम रवाना केरल के पूर्व सीएम मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन मंगलवार सुबह अपने आवास से तिरुवनंतपुरम के लिए कार से रवाना हुए। पिनाराई धर्मदम सीट से 19 हजार से ज्यादा वोटों के जीते हैं। हालांकि उनकी पार्टी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। कुल 140 सीटों में उन्हें केवल 26 सीटें ही मिलीं। 27 मिनट पहले कॉपी लिंक सुवेंदु बोले- नंदीग्राम में मुस्लिम वोट TMC को मिला पश्चिम बंगाल की भवानीपुर और नंदीग्राम सीट से जीतने वाले भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा- इस बार मैंने लगभग दस हजार वोटों से चुनाव जीता है। नंदीग्राम के हिंदू लोगों ने मुझे फिर से जिताया है। वहां, मुसलमानों के सारे वोट TMC को मिले, मैं नंदीग्राम के हिंदुओं के लिए काम करूंगा। TMC खत्म हो जाएगी। 24 घंटे के अंदर यह तबाह हो जाएगी, यह खत्म हो जाएगी। इस भ्रष्ट, परिवार-वादी पार्टी की कोई विचारधारा नहीं है। हम वही काम करेंगे, जिसका गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणापत्र में ऐलान किया था और प्रधानमंत्री मोदी ने बार-बार भरोसा दिलाया है। हम उसे पूरा करेंगे। 31 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु: टीवीके ने 108 सीटें जीतें चेन्नई में TVK प्रमुख और पेरम्बूर विधानसभा क्षेत्र से विजयी उम्मीदवार विजय के आवास के बाहर पुलिस की तैनाती की गई है। तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में TVK ने 234 में से 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया। 36 मिनट पहले कॉपी लिंक देश के 22 राज्यों में BJP-NDA की सरकार दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Amit Shah Bengal Election Strategy

Amit Shah Bengal Election Strategy

नई दिल्ली/कोलकाता27 मिनट पहले कॉपी लिंक भाजपा की बंगाल विजय ऐतिहासिक है। इस बदलाव के रणनीतिकार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रहे जो 15 दिन से ज्यादा बंगाल में डटे रहे। उन्होंने चुनाव अभियान को मिशन में बदल दिया। शाह दिन में रैली और रोड शो करते, रात में हर सीट की समीक्षा करते। इसी आधार पर माइक्रो मैनेजमेंट देखते थे। 50 से अधिक रैली और रोड शो किए। उनके साथ 5 और प्रमुख नेता कोर टीम की तरह हर मोर्चे पर डटी रही। 2021 की हिंसा के बाद घर-घर पहुंचा संघ भाजपा की जीत के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की करीब डेढ़ दशक लंबी तैयारी भी है। 2011 में राज्य में करीब 530 शाखाएं थीं, जो 2500 से ज्यादा हो चुकी हैं। पिछले साल में 583 नई शाखाएं खुलीं। चुनाव से पहले संघ ने पर्दे के पीछे रहकर एक लाख से ज्यादा छोटी बैठकों के जरिए परिवर्तन का नैरेटिव सेट कर दिया। जानते हैं संघ के 5 असरदार कदम क्या रहे… पीड़ितों का ‘कवच’: 2021 की हिंसा के बाद संघ सुरक्षा कवच की भूमिका में आया। पीड़ितों के घर जाकर आर्थिक और कानूनी मदद दी। शीर्ष नेतृत्व से संवाद कराया। संदेश गया कि संगठन साथ है। संदेशखाली से आवाज: संदेशखाली जैसे इलाकों में सीधे टकराव के बजाय भरोसे की रणनीति अपनाई। महिलाओं व पीड़ितों से संवाद के जरिए उन्हें बात उठाने को प्रेरित किया। बड़ी संख्या में लोग सामने आए। बाहरी नैरेटिव खत्म: सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर काम किया। स्थानीय त्योहारों, विवेकानंद और सुभाष चंद्र बोस जैसे महापुरुषों और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए भाजपा को स्थानीय विकल्प के रूप में पेश किया। डर तोड़ने का अभियान: गांव-मोहल्ले तक पहुंच वोटर्स-वर्कर्स में भरोसा बनाया कि निडर हो वोट दें। लोगों को बूथ तक लाने की तैयारी की। हर क्षेत्र-बूथ की जमीनी स्थिति भाजपा तक पहुंचाई। मुद्दे भविष्य से जोड़े: शिक्षक भर्ती घोटाला, आरजीकर व अन्य मामलों को परिवार और महिलाओं की सुरक्षा व भविष्य से जोड़ा। मुद्दे गांव और शहरी मध्यमवर्ग तक पहुंचाए। असंतोष को वोट में बदलने का माहौल बना। ………………… यह खबर भी पढ़ें… बंगाल में पहली बार भाजपा सरकार, असम में हैट्रिक: तमिलनाडु में एक्टर विजय बनेंगे CM; केरलम में कांग्रेस लौटी, लेफ्ट सरकार अब देश में कहीं नहीं पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के रिजल्ट सोमवार को आए। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरलम में सरकारें बदल गईं। असम और पुडुचेरी में एनडीए ने वापसी की। बंगाल में TMC को हराकर भाजपा पहली बार सत्ता में आई। पार्टी दस साल में 3 सीटों से 206 सीटों पर पहुंच गई है। तमिलनाडु में एक्टर थलपति विजय की पार्टी TVK ने सबसे ज्यादा सीटें लाकर चौंका दिया। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

west bengal tamil nadu keralam assam puducherry election results

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कोलकाता/चेन्नई/गुवाहाटीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के रिजल्ट सोमवार को आए। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में सरकारें बदल गईं। असम और पुडुचेरी में एनडीए ने वापसी की। बंगाल में TMC को हराकर भाजपा पहली बार सत्ता में आई। पार्टी दस साल में 3 सीटों से 206 सीटों पर पहुंच गई है। तमिलनाडु में एक्टर थलपति विजय की पार्टी TVK ने सबसे ज्यादा सीटें लाकर चौंका दिया। 59 साल में पहली बार राज्य में ऐसी सरकार बनने जा रही है, जिसमें DMK या AIADMK नहीं होगी। दो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और एम के स्टालिन चुनाव हार गए। बंगाल में 15 साल बाद ममता का राज खत्म भाजपा को वोट शेयर 7.50% बढ़ा, TMC का इतना ही घटा बंगाल में 12 मंत्री हारे, भाजपा का 70% स्ट्राइक रेट महिला को मिल सकती है कमान: बंगाल में भाजपा ने बिना चेहरे के चुनाव लड़ा, इसलिए अब बड़ा सवाल यह है कि कौन मुख्यमंत्री होगा। संभावित नामों में सुवेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार, दिलीप घोष और समिक भट्टाचार्य का नाम सबसे आगे है। पार्टी किसी महिला चेहरे को भी ला सकती है। भाजपा का 70% स्ट्राइक रेट: बंगाल में भाजपा ने 293 में से 206 सीटें जीतकर करीब 70% का स्ट्राइक रेट हासिल किया। वहीं, TMC 81 सीटों पर सिमट गई और उसका स्ट्राइक रेट करीब 27.6% रहा। ममता समेत 12 मंत्री हारे: सीएम ममता समेत 12 मंत्री चुनाव हार गए। ममता के पास होम मिनिस्ट्री समेत 7 महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी थी। महिला और बाल कल्याण मंत्री शशि पांजा, उदयन गुहा, ब्रत्य बसु, चंद्रिमा भट्टाचार्य, सुजीत बसु, सिद्दीकुल्लाह चौधरी, रथिन घोष, बेचाराम मन्ना, बिरबाहा हंसदा, मोलय घटक को हार का सामना करना पड़ा है। पहली बार राज्य और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार: 1972 के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में अब ऐसी पार्टी की सरकार होगी, जो केंद्र में भी सत्ता में है। 1972 में राज्य में कांग्रेस ने 216 सीटें जीतीं थीं और उस वक्त केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार थी। बांग्लादेश सीमा, घुसपैठ और प्रशासनिक नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी सख्ती हो सकती है। मोदी ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में इसका ऐलान भी किया। नॉर्थ से साउथ तक BJP: साउथ बंगाल पहले TMC का मजबूत गढ़ था, यहां BJP ने सबसे ज्यादा 33 सीटें जीतीं। नॉर्थ 24 परगना में BJP ने 18 सीटें जीत लीं। TMC को यहां 15 सीटें मिलीं। पूर्वी मेदिनीपुर में BJP ने 16 और हुगली में 15 सीटें जीतीं। नॉर्थ बंगाल की 54 सीटों में BJP ने 27 सीटें जीतीं। मालदा में BJP को 8 और TMC को 4 सीटें मिलीं। जंगलमहल में भाजपा ने पुरुलिया की 9, बांकुरा की 11 पश्चिम मेदिनीपुर 12 सीटें जीतीं। टीएमसी ने सबसे अधिक सीटें दक्षिणी बंगाल में जीतीं। सबसे छोटी और सबसे बड़ी जीत: बंगाल की सतगछिया सीट पर सबसे कम मार्जिन वाली जीत हुई। BJP के अग्निस्वर नास्कर ने TMC के सोमाश्री बेताल को 401 वोट से हराया है। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर जीत का मार्जिन सबसे बड़ा रहा। यहां BJP के आनंदमय बर्मन ने TMC के शंकर मलाकर को 1,04,265 वोट से हराया। मोदी का 242 सीट पर प्रचार, 184 में भाजपा जीती मोदी ने सोमवार शाम को भाजपा के दिल्ली मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। वे बंगाली कुर्ता-धोती पहनकर पहुंचे। मोदी ने अपनी जनसभाओं और रोड-शो के जरिए बंगाल की 294 में से 242 सीटें कवर कीं। इनमें से 184 सीटों पर भाजपा की जीत हुई। भाजपा ने राज्य में 208 सीटें जीतीं। जिन सीटों पर मोदी ने सभा या रोड-शो किया, वहां पार्टी का स्ट्राइक रेट 76% रहा। ममता भवानीपुर से चुनाव हारीं, सुवेंदु दोनों सीट पर जीते SIR से अनुपात में मुस्लिम वोटर्स के नाम ज्यादा कटे SIR के तहत बंगाल में वोटर लिस्ट से करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए। भाजपा को 2.89 और TMC को 2.57 करोड़ वोट मिले। दोनों पार्टियों के बीच 31 लाख 84 वोटों का अंतर रहा। SIR में 63% (लगभग 57.47 लाख) हिंदू और 34% (लगभग 31.1 लाख) मुस्लिमों के नाम कटे थे। सीधा मतलब है कि आबादी के अनुपात में मुस्लिम वोट ज्यादा कटे। जिन इलाकों में मुस्लिम वोटर निर्णायक हो सकते थे, वहां कमजोर हो गए। इसका फायदा भाजपा को हुआ। भाजपा की स्ट्रैटजी, शाह 15 दिन बंगाल में रहे शाह 15 दिन बंगाल में रहे। बंगाल में पहली बार ‘पन्ना प्रमुख’ स्ट्रैटजी पर काम किया। 44,000 से ज्यादा मतदान केंद्रों को ‘मजबूत’, ‘केंद्रित’ व ‘कमजोर’ श्रेणियों में बांटा। हर पन्ना प्रमुख को 30-60 मतदाताओं की सीधी जिम्मेदारी दी। उनका कार्य प्रचार करना और यह सुनिश्चित करना था कि उनके आवंटित वोटर मतदान केंद्र पहुंचें। टीएमसी की महिलाओं में ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी कल्याणकारी योजनाएं काफी लोकप्रिय हुईं। इसमें 1000-1200 रु. दिए जा रहे थे। भाजपा सबके लिए 3 हजार की योजना लाई। सुवेंदु अधिकारी और अमित शाह ने बार-बार मंचों से आश्वासन दिया कि भाजपा कोई मौजूदा योजना बंद नहीं करेगी, उनके लाभ और बढ़ाएगी। राज्य के कर्मियों के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग को तुरंत लागू करने और सभी बकाया वेतन विसंगतियों को दूर करने का प्रमुख वादा किया। तमिलनाडु में 2 साल पुरानी TVK ने 50+ साल पुरानी DMK-AIADMK को हराया एक्टर विजय की 2 साल पुरानी पार्टी TVK को 108 सीट पर जीत मिली है। ये DMK (59) और AIDMK (47) की कुल सीटों से ज्यादा है। TVK का उत्तर-मध्य में दबदबा, 46% स्ट्राइक रेट विजय की पार्टी TVK ने हर इलाके में सीटें जीतीं। सबसे अधिक दबदबा उत्तर और तटीय इलाकों में रहा। मध्य तमिलनाडु में भी उसे खूब सीटें मिलीं। DMK ने ज्यादातर सीटें दक्षिणी इलाकों में जीतीं। AIADMK को अधिकतर सीटें उत्तर-मध्य क्षेत्र में मिलीं। TVK ने 234 में से 108 सीटें जीतकर 46% के साथ सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट हासिल किया। DMK ने 164 में 59 सीटें जीतकर 36% और AIADMK ने 170 में 47 सीटों के साथ 27.6% स्ट्राइक रेट दर्ज किया। कांग्रेस 28 में 5 सीटें जीतकर 17.8% पर रही। BJP का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा। पार्टी 27 सीटों पर लड़कर सिर्फ 1 सीट जीत सकी और उसका स्ट्राइक रेट मात्र 3.4% रहा। सीएम स्टानिल 8795 वोट से हारे 59 साल बाद पहली बार गैर

India Election Results | West Bengal, Tamil Nadu, Kerala Govt Change; NDA Returns Assam, Puducherry

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Hindi News National India Election Results | West Bengal, Tamil Nadu, Kerala Govt Change; NDA Returns Assam, Puducherry 1 मिनट पहले कॉपी लिंक पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के रिजल्ट सोमवार को आए। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में सरकारें बदल गईं। असम और पुडुचेरी में एनडीए ने वापसी की। बंगाल में TMC को हराकर भाजपा पहली बार सत्ता में आई। पार्टी दस साल में 3 सीटों से 206 सीटों पर पहुंच गई है। तमिलनाडु में एक्टर थलपति विजय की पार्टी TVK ने सबसे ज्यादा सीटें लाकर चौंका दिया। 59 साल में पहली बार राज्य में ऐसी सरकार बनने जा रही है, जिसमें DMK या AIADMK नहीं होगी। दो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और एम के स्टालिन चुनाव हार गए। बंगाल में 15 साल बाद ममता का राज खत्म भाजपा को वोट शेयर 7.50% बढ़ा, TMC का इतना ही घटा बंगाल में 12 मंत्री हारे, भाजपा का 70% स्ट्राइक रेट 1. महिला को मिल सकती है कमान: बंगाल में भाजपा ने बिना चेहरे के चुनाव लड़ा, इसलिए अब बड़ा सवाल यह है कि कौन मुख्यमंत्री होगा। संभावित नामों में सुवेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार, दिलीप घोष और समिक भट्टाचार्य का नाम सबसे आगे है। पार्टी किसी महिला चेहरे को भी ला सकती है। 2. भाजपा का 70% स्ट्राइक रेट: बंगाल में भाजपा ने 293 में से 206 सीटें जीतकर करीब 70% का स्ट्राइक रेट हासिल किया। वहीं, TMC 81 सीटों पर सिमट गई और उसका स्ट्राइक रेट करीब 27.6% रहा। 3. ममता समेत 12 मंत्री हारे: सीएम ममता समेत 12 मंत्री चुनाव हार गए। ममता के पास होम मिनिस्ट्री समेत 7 महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी थी। महिला और बाल कल्याण मंत्री शशि पांजा, उदयन गुहा, ब्रत्य बसु, चंद्रिमा भट्टाचार्य, सुजीत बसु, सिद्दीकुल्लाह चौधरी, रथिन घोष, बेचाराम मन्ना, बिरबाहा हंसदा, मोलय घटक को हार का सामना करना पड़ा है। 4. पहली बार राज्य और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार: 1972 के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में अब ऐसी पार्टी की सरकार होगी, जो केंद्र में भी सत्ता में है। 1972 में राज्य में कांग्रेस ने 216 सीटें जीतीं थीं और उस वक्त केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार थी। बांग्लादेश सीमा, घुसपैठ और प्रशासनिक नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी सख्ती हो सकती है। मोदी ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में इसका ऐलान भी किया। 5. नॉर्थ से साउथ तक BJP: साउथ बंगाल पहले TMC का मजबूत गढ़ था, यहां BJP ने सबसे ज्यादा 33 सीटें जीतीं। नॉर्थ 24 परगना में BJP ने 18 सीटें जीत लीं। TMC को यहां 15 सीटें मिलीं। पूर्वी मेदिनीपुर में BJP ने 16 और हुगली में 15 सीटें जीतीं। नॉर्थ बंगाल की 54 सीटों में BJP ने 27 सीटें जीतीं। मालदा में BJP को 8 और TMC को 4 सीटें मिलीं। जंगलमहल में भाजपा ने पुरुलिया की 9, बांकुरा की 11 पश्चिम मेदिनीपुर 12 सीटें जीतीं। टीएमसी ने सबसे अधिक सीटें दक्षिणी बंगाल में जीतीं। 6. सबसे छोटी और सबसे बड़ी जीत: बंगाल की सतगछिया सीट पर सबसे कम मार्जिन वाली जीत हुई। BJP के अग्निस्वर नास्कर ने TMC के सोमाश्री बेताल को 401 वोट से हराया है। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर जीत का मार्जिन सबसे बड़ा रहा। यहां BJP के आनंदमय बर्मन ने TMC के शंकर मलाकर को 1,04,265 वोट से हराया। मोदी का 242 सीट पर प्रचार, 184 में भाजपा जीती मोदी ने सोमवार शाम को भाजपा के दिल्ली मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। वे बंगाली कुर्ता-धोती पहनकर पहुंचे। मोदी ने अपनी जनसभाओं और रोड-शो के जरिए बंगाल की 294 में से 242 सीटें कवर कीं। इनमें से 184 सीटों पर भाजपा की जीत हुई। भाजपा ने राज्य में 208 सीटें जीतीं। जिन सीटों पर मोदी ने सभा या रोड-शो किया, वहां पार्टी का स्ट्राइक रेट 76% रहा। ममता भवानीपुर से चुनाव हारीं, सुवेंदु दोनों सीट पर जीते SIR से अनुपात में मुस्लिम वोटर्स के नाम ज्यादा कटे SIR के तहत बंगाल में वोटर लिस्ट से करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए। भाजपा को 2.89 और TMC को 2.57 करोड़ वोट मिले। दोनों पार्टियों के बीच 31 लाख 84 वोटों का अंतर रहा। SIR में 63% (लगभग 57.47 लाख) हिंदू और 34% (लगभग 31.1 लाख) मुस्लिमों के नाम कटे थे। सीधा मतलब है कि आबादी के अनुपात में मुस्लिम वोट ज्यादा कटे। जिन इलाकों में मुस्लिम वोटर निर्णायक हो सकते थे, वहां कमजोर हो गए। इसका फायदा भाजपा को हुआ। भाजपा की स्ट्रैटजी, शाह 15 दिन बंगाल में रहे शाह 15 दिन बंगाल में रहे। बंगाल में पहली बार ‘पन्ना प्रमुख’ स्ट्रैटजी पर काम किया। 44,000 से ज्यादा मतदान केंद्रों को ‘मजबूत’, ‘केंद्रित’ व ‘कमजोर’ श्रेणियों में बांटा। हर पन्ना प्रमुख को 30-60 मतदाताओं की सीधी जिम्मेदारी दी। उनका कार्य प्रचार करना और यह सुनिश्चित करना था कि उनके आवंटित वोटर मतदान केंद्र पहुंचें। टीएमसी की महिलाओं में ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी कल्याणकारी योजनाएं काफी लोकप्रिय हुईं। इसमें 1000-1200 रु. दिए जा रहे थे। भाजपा सबके लिए 3 हजार की योजना लाई। सुवेंदु अधिकारी और अमित शाह ने बार-बार मंचों से आश्वासन दिया कि भाजपा कोई मौजूदा योजना बंद नहीं करेगी, उनके लाभ और बढ़ाएगी। राज्य के कर्मियों के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग को तुरंत लागू करने और सभी बकाया वेतन विसंगतियों को दूर करने का प्रमुख वादा किया। तमिलनाडु में 2 साल पुरानी TVK ने 50+ साल पुरानी DMK-AIADMK को हराया एक्टर विजय की 2 साल पुरानी पार्टी TVK को 108 सीट पर जीत मिली है। ये DMK (59) और AIDMK (47) की कुल सीटों से ज्यादा है। TVK का उत्तर-मध्य में दबदबा, 46% स्ट्राइक रेट विजय की पार्टी TVK ने हर इलाके में सीटें जीतीं। सबसे अधिक दबदबा उत्तर और तटीय इलाकों में रहा। मध्य तमिलनाडु में भी उसे खूब सीटें मिलीं। DMK ने ज्यादातर सीटें दक्षिणी इलाकों में जीतीं। AIADMK को अधिकतर सीटें उत्तर-मध्य क्षेत्र में मिलीं। TVK ने 234 में से 108 सीटें जीतकर 46% के साथ सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट हासिल किया। DMK ने 164 में 59 सीटें जीतकर 36% और AIADMK ने 170 में 47 सीटों के साथ 27.6% स्ट्राइक रेट दर्ज किया। कांग्रेस 28 में 5 सीटें जीतकर 17.8% पर रही। BJP का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा। पार्टी 27 सीटों पर लड़कर सिर्फ