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Hyderabad Ginger Garlic Paste Adulteration Scam Exposed

Hyderabad Ginger Garlic Paste Adulteration Scam Exposed

Hindi News Lifestyle Hyderabad Ginger Garlic Paste Adulteration Scam Exposed | Fake Vs Real Testing Methods 48 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक हाल ही में ‘हैदराबाद फूड एडल्टरेशन सर्विलांस टीम’ (H-FAST) ने 4,032 किलो जिंजर-गार्लिक (अदरक-लहसुन) पेस्ट जब्त किया। साथ ही 6,210 किलो घटिया कच्चा माल भी सीज किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसे अनहाइजीनिक तरीके से बनाया जा रहा था। अमूमन हर भारतीय किचन में हर रोज जिंजर-गार्लिक पेस्ट का इस्तेमाल होता है। ऐसे में फूड सेफ्टी मानकों के विपरीत तैयार पेस्ट सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। इसलिए ‘जरूरत की खबर‘ में आज जिंजर-गार्लिक पेस्ट पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे- अनहाइजीनिक पेस्ट से क्या हेल्थ रिस्क हो सकते हैं? शुद्ध और मिलावटी पेस्ट में अंतर कैसे पहचानें? एक्सपर्ट: -डॉ. उमेश कुमार, फूड एनालिस्ट, फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, उत्तर प्रदेश -डॉ. नरेंद्र कुमार सिंगला, प्रिंसिपल कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- जिंजर-गार्लिक पेस्ट में किस तरह की मिलावट की जाती है? जवाब- मिलावटखोर ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए इसमें कई तरह की मिलावट करते हैं। जैसेकि- खराब क्वालिटी के अदरक-लहसुन इस्तेमाल करते हैं। मात्रा बढ़ाने के लिए आलू, कद्दू, आटा और स्टार्च जैसे सस्ते फिलर्स मिलाते हैं। स्वाद बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल फ्लेवर मिलाते हैं। शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए प्रिजर्वेटिव्स मिलाते हैं। पेस्ट को ताजा/आकर्षक दिखाने के लिए आर्टिफिशियल कलर मिलाते हैं। गाढ़ेपन के लिए थिकनर एजेंट्स मिलाते हैं। सवाल- क्या इसमें सड़े-गले अदरक-लहसुन का इस्तेमाल होता है? जवाब- हां, कुछ मामलों में सड़े-गले या खराब क्वालिटी के अदरक-लहसुन का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी खराब स्मेल दबाने के लिए ज्यादा नमक, प्रिजर्वेटिव्स मिलाए जाते हैं। सड़े माल से कलर बदलने पर आर्टिफिशियल कलर मिलाया जाता है। खराब क्वालिटी छिपाने के लिए ज्यादा तेल या स्टार्च मिलाया जाता है। ऐसे पेस्ट में बैक्टीरिया या फंगस पनप सकते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग, पेट दर्द, उल्टी-दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सवाल- इसमें आर्टिफिशियल कलर, फ्लेवर और प्रिजर्वेटिव्स क्यों मिलाए जाते हैं? जवाब- ये चीजें इसलिए मिलाई जाती हैं, ताकि- पेस्ट ज्यादा दिन तक खराब न हो। फ्रेश और नेचुरल दिखे। खुशबू, स्वाद बना रहे। खराब क्वालिटी का पता न चले। लागत कम हो। सवाल- पेस्ट की मात्रा बढ़ाने के लिए कौन-से सस्ते फिलर्स मिलाए जाते हैं? जवाब- मात्रा बढ़ाने और लागत कम करने के लिए जिंजर गार्लिक पेस्ट में सस्ते फिलर्स मिलाए जाते हैं। ये दिखने और टेक्सचर में असली पेस्ट जैसे लगते हैं, लेकिन न्यूट्रिशन और क्वालिटी घटा देते हैं। जैसेकि- कॉर्न या अन्य स्टार्च। आलू का पेस्ट। कद्दू या लौकी का पल्प। मैदा, आटा। सवाल- जिंजर-गार्लिक पेस्ट में अमूमन कौन से इंग्रीडिएंट्स होते हैं? जवाब- इसमें बेसिक और एडेड इंग्रीडिएंट्स होते हैं, जो ब्रांड और क्वालिटी के हिसाब से बदल सकते हैं। नीचे ग्राफिक में देखिए– सवाल- शुद्ध और मिलावटी जिंजर-गार्लिक पेस्ट में अंतर कैसे पहचानें? जवाब- इसकी पहचान आसान संकेतों से की जा सकती है। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- अनहाइजीनिक तरीके से तैयार पेस्ट से क्या हेल्थ रिस्क हो सकते हैं? जवाब- अनहाइजीनिक जिंजर-गार्लिक पेस्ट में बैक्टीरिया, फंगस और हानिकारक टॉक्सिन्स हो सकते हैं, जिससे कई तरह के हेल्थ रिस्क हो सकते हैं। सभी रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- अगर गलती से मिलावटी पेस्ट खा लिया तो क्या करें? जवाब- ऐसी स्थिति में घबराने की बजाय तुरंत सही कदम उठाएं। जैसेकि- साफ पानी से कुल्ला करें। खूब पानी पिएं। स्वाद बहुत खराब है तो गुनगुना पिएं। नींबू पानी या ORS लें। खिचड़ी, दही-चावल, केला जैसे सुपाच्य फूड लें। इन लक्षणों पर नजर रखें पेट दर्द, मरोड़ उल्टी, मतली दस्त (डायरिया) एसिडिटी या सीने में जलन सिर दर्द या कमजोरी तेज पेट दर्द बुखार डिहाइड्रेशन (मुंह सूखना, चक्कर आना) ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर को दिखाएं। बिना डॉक्टरी सलाह के अपने मन से कोई दवाई न लें। सवाल- पैक्ड पेस्ट खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- पैक्ड जिंजर-गार्लिक पेस्ट खरीदते समय इन बातों का ख्याल रखें- इंग्रीडिएंट्स लिस्ट देखें। केमिकल्स या एडिटिव्स ज्यादा हों तो न लें। मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट चेक करें। एक्सपायरी डेट नजदीक हो तो न लें। सील चेक करें। लीक पैकेट न लें। FSSAI लाइसेंस नंबर जरूर देखें। विश्वसनीय ब्रांड का पेस्ट खरीदें। बहुत सस्ता न खरीदें। खरीदने के बाद फ्रिज में स्टोर करें। सवाल- जिंजर-गार्लिक पेस्ट घर पर कैसे बना सकते हैं? जवाब- जिंजर-गार्लिक पेस्ट घर पर बनाना आसान, सस्ता और हेल्दी होता है। तरीका ग्राफिक में देखिए- सवाल- घर पर बना जिंजर-गार्लिक पेस्ट कितने दिन सेफ रहता है? जवाब- होममेड पेस्ट आमतौर पर फ्रिज में 5–7 दिन तक सुरक्षित रहता है, बशर्ते इसे साफ एयरटाइट कंटेनर में रखा जाए। तेल या नमक मिलाने से शेल्फ लाइफ थोड़ी बढ़ सकती है। सवाल- होममेड पेस्ट को स्टोर करने का सही तरीका क्या है? जवाब- होममेड जिंजर-गार्लिक पेस्ट को सही तरीके से स्टोर करना जरूरी है, वरना यह जल्दी खराब हो सकता है और हेल्थ रिस्क बढ़ा सकता है। ऊपर से हल्का तेल डालें। एयरटाइट कंटेनर में फ्रिज में स्टोर करें। सूखा और साफ चम्मच यूज करें। स्मेल, कलर या टेक्सचर बदलने पर यूज न करें। सवाल- कैसे पहचानें कि अब पेस्ट खराब हो गया है? जवाब- जिंजर-गार्लिक पेस्ट खराब होने पर ये संकेत दिखते हैं- खट्टी, सड़ी या अजीब गंध आना। असामान्य या धब्बेदार रंग दिखना। सफेद, हरे या काले धब्बे दिखना। ऊपर फफूंदी की परत बनना। बहुत पतला या चिपचिपा हो जाना। ऊपर पानी जमा होना। बहुत खट्टा, कड़वा या अजीब स्वाद लगना। सवाल- पेस्ट में मिलावट का शक हो तो कहां शिकायत करें? जवाब- अदरक-लहसुन पेस्ट में मिलावट का शक हो तो संबंधित फूड अथॉरिटी में शिकायत कर सकते हैं। FSSAI के ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ एप से शिकायत दर्ज करें। FSSAI की वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत करें। राज्य के फूड सेफ्टी विभाग से संपर्क करें। नजदीकी नगर निगम या फूड इंस्पेक्टर को जानकारी दें। शिकायत के समय प्रोडक्ट की फोटो, पैकेजिंग और बिल जरूर शेयर करें। ………………….. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- केमिकल से पके 200 किलो आम सीज: 5 तरीकों से पहचानें नेचुरल आम, खाने से पहले ऐसे करें साफ, घर पर पकाने के 6 तरीके हाल ही में ‘हैदराबाद फूड एडल्टरेशन सर्विलांस टीम’ (H-FAST) ने केमिकल से पके फलों की बिक्री

garlic health benefits| natural medicine for heart| lahsun sahad ke fayde: शहद में भिगोकर खाएं लहसुन, मिलेगा डबल फायदा, दिल के लिए दवा से कम नहीं

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Last Updated:March 14, 2026, 22:44 IST Honey Soaked Garlic Benefits: लहसुन दिल के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है. लेकिन जब आप इसे शहद के साथ खाते हैं तो इसके गुण और भी बढ़ जाते हैं. ऐसे में इसके सेवन से सिर्फ हार्ट डिजीज ही नहीं बल्कि इंफेक्शन का भी खतरा कम होता है. ख़बरें फटाफट आयुर्वेद में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से सदियों से कई बीमारियों का इलाज किया जाता रहा है. हमारी रसोई में भी ऐसी कई चीजें मौजूद होती हैं, जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती हैं. इन्हीं में से दो चीजें हैं लहसुन और शहद. ये दोनों लगभग हर घर में आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन जब इन्हें एक साथ लिया जाता है तो इनके फायदे और भी बढ़ जाते हैं. लहसुन का इस्तेमाल सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि कई स्वास्थ्य समस्याओं में भी किया जाता है. आयुर्वेद में बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों को कच्चा लहसुन खाने की सलाह दी जाती है. लहसुन में एलिसिन नाम का तत्व पाया जाता है, जो एंटीबायोटिक और एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है. खून को गाढ़ा होने से रोकता हैशहद वाला लहसुन शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाता है और खून को गाढ़ा होने से रोकने में मदद करता है. दरअसल ऐसा लहसुन में सल्फर जैसे तत्वों की मौजूदगी के कारण होता है, जो इसे जीवाणुरोधी और रोगों से लड़ने वाला बनाते हैं. वहीं शहद एक प्राकृतिक मीठा पदार्थ है, जो सेहत के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है. इसमें फ्लेवोनोइड्स और पॉलीफेनोल्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं. लहसुन शहद के फायदेशहद में जीवाणुरोधी, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण भी होते हैं, जो कई तरह के संक्रमण से बचाने में सहायक हैं. जब लहसुन और शहद को मिलाकर रखा जाता है, तो इनके गुण और भी बढ़ जाते हैं. कुछ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इस मिश्रण को शरीर के लिए बहुत फायदेमंद माना गया है. यह मिश्रण सर्दी-जुकाम और खांसी के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है. साथ ही यह पाचन सुधारने, हृदय को स्वस्थ रखने और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है. कैसे करें तैयारलहसुन और शहद का मिश्रण बनाने के लिए एक साफ कांच की बोतल या बरनी लें. इसमें छिली हुई ताजा लहसुन की कलियां डालें और ऊपर से शुद्ध शहद भर दें. इसे 5 से 7 दिन तक बंद करके रखें. इसके बाद रोज सुबह खाली पेट इसकी थोड़ी मात्रा का सेवन किया जा सकता है. हालांकि बच्चों और गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें First Published : March 14, 2026, 22:44 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

Black Garlic Health Benefits; Nutrition Value

Black Garlic Health Benefits; Nutrition Value

Hindi News Lifestyle Black Garlic Health Benefits; Nutrition Value | Antioxidants Food Expert Advice 35 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक लहसुन से तो आप परिचित ही होंगे। ये हमारी रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा है। इसके हेल्थ बेनिफिट्स भी किसी से छुपे नहीं हैं। लेकिन क्या आपने कभी ‘काले लहसुन’ के बारे में सुना है। यह नाम सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। साइंस जर्नल ‘इनटेक ओपन’ में पब्लिश एक स्टडी के अनुसार, नियमित एक्सरसाइज के साथ काला लहसुन खाने से विसरल फैट और लिवर इंफ्लेमेशन को कम करने में मदद मिल सकती है। इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि- काला लहसुन क्या होता है? यह रेगुलर लहसुन से कैसे अलग होता है? काले लहसुन के हेल्थ बेनिफिट्स क्या हैं? एक्सपर्ट- डॉ. अनु अग्रवाल, सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन, फाउंडर- ‘वनडाइडटुडे’ सवाल- काला लहसुन क्या है? जवाब- काला लहसुन असल में कच्चा लहसुन ही होता है। इसे कई हफ्तों तक हल्की गर्मी और ज्यादा नमी में रखा जाता है। इस प्रक्रिया को मेलार्ड रिएक्शन कहते हैं, जिसमें लहसुन की कलियां धीरे-धीरे काली हो जाती हैं। इस दौरान लहसुन का स्वाद बदल जाता है। इसके बाद इसका स्वाद तीखा नहीं रहता, बल्कि थोड़ा नरम और मीठा हो जाता है। कुल मिलाकर रेगुलर सफेद लहसुन मेलार्ड रिएक्शन के बाद काला लहसुन बन जाता है। सवाल- काले लहसुन और रेगुलर लहसुन में क्या अंतर है? जवाब- काला लहसुन और रेगुलर लहसुन दिखने में, स्वाद और प्रोसेसिंग के मामले में एक-दूसरे से अलग होता है। दोनों के गुण अलग हैं, इसलिए इनके फायदे और इस्तेमाल भी अलग-अलग हैं। ग्राफिक से दोनों के अंतर समझते हैं- सवाल- काले लहसुन की न्यूट्रिशनल वैल्यू क्या है? जवाब- सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन डॉ. अनु अग्रवाल बताती हैं कि 15 ग्राम छिले हुए काले लहसुन में करीब 20 कैलोरी होती है। इसमें विटामिन C और B-कॉम्प्लेक्स भी होते हैं। इसके अलावा काले लहसुन में फोलेट, कैल्शियम, मैंगनीज, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, जिंक और आयरन जैसे महत्वपूर्ण मिनरल्स भी होते हैं। कच्चे लहसुन की तरह इसमें भी अमीनो एसिड, फाइटोन्यूट्रिएंट्स और एंटीऑक्सिडेंट्स मौजूद होते हैं। बस फर्मेंटेशन की प्रक्रिया से उनकी मात्रा बदल जाती है। नीचे दिए ग्राफिक से 15 ग्राम छिले हुए काले लहसुन की न्यूट्रिशनल वैल्यू समझिए- सवाल- काले लहसुन के हेल्थ बेनिफिट्स क्या होते हैं? जवाब- काले लहसुन को एजिंग और फर्मेंटेशन की प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। इसी वजह से इसमें एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण ज्यादा मजबूत हो जाते हैं। काले लहसुन में रेगुलर लहसुन की तुलना में एस-एलिल सिस्टीन (SAC) जैसे आर्गेनोसल्फर कंपाउंड्स और एंटीऑक्सिडेंट्स की मात्रा ज्यादा होती है। इसकी एजिंग की प्रक्रिया लहसुन के गुणों को और असरदार बनाती है, जिससे यह ओवरऑल हेल्थ के लिए एक पावरफुल नेचुरल सप्लीमेंट बन जाता है। सवाल- क्या काला लहसुन रेगुलर लहसुन से ज्यादा फायदेमंद होता है? जवाब- कई मामलों में काला लहसुन रेगुलर लहसुन से ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। फर्मेंटेशन की वजह से काले लहसुन में एंटीऑक्सिडेंट्स की मात्रा बढ़ जाती है। इसका स्वाद हल्का होता है, यह पचने में आसान होता है और इसमें लहसुन वाली तेज गंध भी नहीं होती है। वहीं रेगुलर लहसुन में एलिसिन की मात्रा ज्यादा होती है, जो इंफेक्शन से लड़ने और इम्यूनिटी बढ़ाने में बहुत प्रभावी माना जाता है। सवाल- क्या काला लहसुन बाजार में आसानी से मिल जाता है? जवाब- हां, काला लहसुन आजकल बाजार में आसानी से मिल जाता है। कुछ सुपरमार्केट और हेल्थ फूड स्टोर से भी इसे आसानी से खरीदा जा सकता है। इसके अतिरिक्त ये ऑनलाइन पर भी उपलब्ध है। सवाल- काला लहसुन किन्हें नहीं खाना चाहिए? जवाब- काला लहसुन आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन कुछ लोगों को इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए। ग्राफिक में देखिए, किन्हें इसके सेवन से बचना चाहिए- सवाल- काला लहसुन घर पर कैसे बनाएं? जवाब- काला लहसुन घर पर आसानी से बनाया जा सकता है। पूरी प्रक्रिया समझिए- राइस कुकर में काला लहसुन बनाने का तरीका लहसुन की पूरी गांठ लें। उसका छिलका न उतारें। हर गांठ को सिल्वर फॉयल में लपेटें। अब इसे राइस कुकर या स्लो कुकर में डालकर ‘Keep Warm’ मोड ऑन कर दें। याद रखें, इसे पकाना नहीं है। सिर्फ वार्म मोड में रखना है। लहसुन को 10–15 दिनों तक ऐसे ही रहने दें। बीच में कुकर खोलें नहीं ताकि तापमान और नमी बनी रहे। 10–15 दिन बाद लहसुन की कलियां काली, नरम और जैम की तरह हो जाएंगी। काला लहसुन खाने के लिए तैयार है। सवाल- काला लहसुन का इस्तेमाल कैसे करें? जवाब- काले लहसुन का स्वाद अलग होता है। ये चबाने पर थोड़ा चिपचिपा लगता है, जो इसे रेगुलर लहसुन से अलग बनाता है। इसके इस्तेमाल के कुछ तरीके नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए- सूप में मिलाया जा सकता है। पिज्जा और पास्ता जैसी डिशेज के ऊपर टॉपिंग के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। ब्रेड पर डालकर इसे स्वादिष्ट सैंडविच स्प्रेड की तरह खाया जा सकता है। सॉस, ड्रेसिंग और मेरिनेड में ब्लेंड करके मिलाया जा सकता है। बटर और ऑलिव ऑयल में मिलाकर स्वादिष्ट स्प्रेड और डिप तैयार की जा सकती है। …………………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर– सुबह उठकर खाली पेट पहले पानी पिएं:जानें इसके 11 हेल्थ बेनिफिट्स, पीने का सही तरीका, पीते हुए न करें ये 7 गलतियां हम हमेशा से ये सुनते आए हैं कि सुबह खाली पेट पानी पीना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ये आदत बॉडी को रीस्टार्ट का मैसेज देती है। कुछ हेल्थ एक्सपर्ट्स इस आदत को ‘साइलेंट हीलर’ भी कहते हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…