मामूली नहीं है यह फल! आंखों की रोशनी और शुगर के लिए है रामबाण; सिर्फ इतने दिन ही रहेगा उपलब्ध – News18 हिंदी

X मामूली नहीं है यह फल! आंखों की रोशनी और शुगर के लिए है रामबाण Cape Gooseberry Benefits: लौहनगरी के बाजारों में इन दिनों पीले रंग के नन्हे रसभरी (Cape Gooseberry) फल ने धूम मचा रखी है. बिष्टुपुर और साकची जैसे प्रमुख फल बाजारों में इसकी डिमांड इतनी ज्यादा है कि ₹200 प्रति किलो होने के बावजूद यह हाथों-हाथ बिक रहा है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह साल में केवल 40 से 45 दिनों के लिए ही बाजार में नजर आता है. फल विक्रेताओं के अनुसार इस खास फल की खेप विशेष रूप से बिहार से मंगवाई जा रही है. खट्टे-मीठे स्वाद वाली रसभरी में विटामिन A और C की प्रचुर मात्रा होती है. जो आंखों की रोशनी बढ़ाने और इम्यूनिटी को लोहे जैसा मजबूत बनाने में कारगर है. यह फल केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि दवा के रूप में भी पसंद किया जा रहा है. डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए यह रामबाण माना जाता है. साथ ही भीषण गर्मी में यह शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाकर त्वचा पर प्राकृतिक निखार लाता है. अगर आप भी इसका स्वाद चखना चाहते हैं, तो जल्दी करें, क्योंकि इसका सीजन जल्द ही खत्म होने वाला है.
किचन से लौंग-लहसुन आउट, सौंफ-इलायची इन! बुजुर्गों को लू से बचाएंगे आयुर्वेद के ये नुस्खे, जानिए – News18 हिंदी

X किचन से लौंग-लहसुन आउट, सौंफ-इलायची इन! बुजुर्गों को लू से बचाएंगे ये नुस्खे Ayurvedic Summer Health Tips For Elderly: भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच बुजुर्गों की सेहत को लेकर आयुर्वेद विशेषज्ञों ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है. आयुर्वेद के जानकार शिव कुमार पांडे के अनुसार बढ़ती उम्र में पाचन और सहनशक्ति कमजोर होने के कारण बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन, चक्कर और बीपी की समस्या तेजी से बढ़ती है. गर्मी से बचाव के लिए खान-पान में बड़े बदलाव की आवश्यकता है. विशेषज्ञों ने रसोई से गर्म तासीर वाले मसालों (लौंग, लहसुन, जायफल) को हटाकर जीरा, सौंफ और छोटी इलायची के प्रयोग पर जोर दिया है. साथ ही, बिना तेल या कम तेल में बनी सुपाच्य सब्जियों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है. बुजुर्गों को हाइड्रेटेड रखने के लिए तरबूज, खीरा और ककड़ी जैसे फलों के साथ सुबह चने और जौ का सत्तू देना संजीवनी समान है. दोपहर 12 से 3 बजे के बीच बाहर निकलने से परहेज, सूती कपड़ों का चयन और नियमित अंतराल पर नींबू पानी या छाछ का सेवन उन्हें लू के गंभीर दुष्प्रभावों से बचा सकता है.
सुबह खाली पेट खाएं ये 3 चीजें, दिनभर रहेंगे फिट और एनर्जेटिक – News18 हिंदी

X Health Tips: सुबह खाली पेट खाएं ये 3 चीजें, दिनभर रहेंगे फिट और एनर्जेटिक Benefits of Eating Moong, Peanuts, and Raisins: “आरोग्यं परमं भाग्यं” की परंपरा को ध्यान में रखते हुए आज भी कुछ प्राकृतिक चीजें सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती हैं. सुल्तानपुर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एसबी सिंह के अनुसार सुबह खाली पेट मूंग, मूंगफली और किशमिश का सेवन शरीर के लिए बहुत लाभकारी है. अंकुरित मूंग पाचन तंत्र मजबूत करती है, ऊर्जा देती है और ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में मदद करती है. वहीं किशमिश आयरन से भरपूर होती है, जो खून की कमी दूर कर हीमोग्लोबिन बढ़ाती है और कब्ज से राहत देती है. मूंगफली प्रोटीन और हेल्दी फैट का अच्छा स्रोत है. जो मांसपेशियों को मजबूत बनाकर लंबे समय तक ऊर्जा देता है. इन तीनों का नियमित सेवन शरीर को एक्टिव, स्वस्थ और फिट रखने का आसान व सस्ता उपाय है.
गर्मियों में दिल के मरीज जरूर खाएं ये 5 फल, हेल्दी रहेगा हार्ट, जानें क्या-क्या होंगे फायदे

Summer Fruits for healthy heart: गर्मियों के मौसम में शरीर को अंदर से हाइड्रेटेड, शीतल रखना जरूरी है. आग बरसाने वाली धूप, लू के थपेड़े न सिर्फ आपकी स्किन और बालों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि शरीर के अंदर के अंगों को भी हानि पहुंचाते हैं. अगर आप गर्मियों के सीजन में पर्याप्त लिक्विड डाइट नहीं लेते तो डिहाइड्रेशन हो सकता है. शरीर में पानी की कमी से आंतें, लिवर, किडनी सभी प्रभावित होते हैं. गर्मियों में कुछ खास अंगों की बीमारी से जूझ रहे लोगों को भी अपनी डाइट पर ध्यान देना जरूरी होता है. बात करें हार्ट पेशेंट की तो उन्हें गर्मियों में कुछ फ्रू्ट्स जरूर खाएं. आप बेरीज खाएं जैसे स्ट्ऱॉबेरी, ब्लैक बेरी, ब्लू बेरी खाएं, क्योंकि ये सभी ब्लड प्रेशर, इंफ्लेमेशन को गर्मियों में कम करते हैं. इसके साथ ही खरबूज, तरबूजा, खीरा, ककड़ी, संतरा आदि पानी, विटामिन सी के साथ ही कई पोषक तत्वों से भरपूर फल खाएं. Dr Navin Agrawal नाम के यू्ट्यूब चैनल पर डॉ. नवीन बता रहे हैं कि गर्मियों में दिल के मरीजों को कौन-कौन से फल खाने चाहिए, इनके फायदे क्या हैं और इन्हें किस तरीके से डाइट में शामिल करें.
मोबाइल-लैपटॉप के कारण बढ़ रहा गर्दन-कमर दर्द; डॉ. हेमंत जैन की सलाह, ऐसे पाएं दर्द से छुटकारा – News18 हिंदी

X मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल दे रहा है उम्र भर का दर्द; जानें बचाव Neck and Back Pain Tips by Dr. Hemant Jain: जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल के डॉ. हेमंत जैन ने मोबाइल और लैपटॉप के बढ़ते उपयोग से होने वाले गर्दन और कमर दर्द के प्रति चेतावनी दी है. उन्होंने बताया कि गलत पॉस्चर और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं. डॉ. जैन ने सलाह दी है कि काम के दौरान नियमित ब्रेक लें, सही पॉस्चर बनाए रखें और सुबह-शाम हल्का व्यायाम जरूर करें. उनके अनुसार, तकनीक के युग में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित एक्सरसाइज और सही तरीके से बैठने की आदत डालना बहुत जरूरी है.
Health Tips: औषधिय गुणों का खजाना है ये पेड़, जड़ से पत्ती तक सभी उपयोगी, जानें फायदे

Last Updated:April 10, 2026, 22:31 IST Neem ke Fayde: बिहार में छपरा जिले के एक अनोखा गांव है. यहां गांव में कई प्रकार के औषधीय पेड़ पौधे आसानी से मिल जाता है. जो आयुर्वेदिक नजरिया से कई मायने में लाभदायक माना जाता है. जिसका उपयोग करने से कई बीमारी से राहत मिलती है. ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे पेड़ के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे औषधीय गुणों का भंडार माना जाता है. इसके जड़ से लेकर पत्ता तक को औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है. इसे ग्रामीण क्षेत्र के लोग जो जानते हैं, उसका उपयोग बीमारी के शिकार होने पर करते हैं. जिस बीमारी के लिए लोग हजारों रुपए फूंक देते हैं. उस बीमारी को गांव में मिलने वाले इस मामूली पेड़ पौधे के जड़ी बूटी से खत्म किया जा सकता है. इसी तरह अमरूद के दतुवन से मुंह धोने से दांत का हिलना ठीक हो जाता है. जबकि जामुन के दतुवन से मुंह धोने पर शुगर लेवल सामान्य रहता है. यह पेड़ पौधा आपके घर के आसपास आसानी से मिल जाएगा. आज हम बात कर रहे हैं प्रत्येक गांव में मिलने वाले औषधिय गुणों के खजाने नाम से मशहूर नीम के पेड़ के बारे में. इसके जड़ से लेकर पत्ती तक को औषधी के रूप में उपयोग किया जाता है. नीम के जड़ के छिलका का काढ़ा बनाकर पीने से घाव फुंसी नहीं होता है. इसके साथ ही इसका दातुन करने से मुंह का बदबू खत्म हो जाता है. यही नहीं, दांत का हिलना और ब्लड आना भी खत्म हो जाता है. दांत में कीड़ा नहीं लगता है. इसके दातुन करने से दांत भी साफ रहता है. चांदी की तरह चमक दांत से आता है. दांत का लाइफ बढ़ जाता है. यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्र के लोग जो नीम का दातुवन करते हैं. वैसे लोगों का दांत बुढ़ापे के समय तक पूरी तरह से सुरक्षित रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google छपरा के एक्सपर्ट वीरू कुमार ने बताया कि वह बचपन से ही नीम का दतुवन करते आ रहे हैं. आज तक उनके मुंह से कभी बदबू नहीं आया है. उनका दांत चांदी की तरह हमेशा चमकता रहता है. उनके दांत से कभी ब्लड नहीं आता है. नीम के दातुवन करने से पूरे दिन मुंह अच्छा रहता है. किसी प्रकार के घाव फुंसी नहीं होती है. किसी कारणवश अगर घाव हो भी जाता है तो बहुत जल्द ठीक हो जाता है. उन्होंने बताया कि गांव में नीम के पेड़ को औषधिय गुणों का खजाना कहा जाता है. जो लोग जानते हैं. वैसे व्यक्ति कई रोग में नीम के जड़ से लेकर पत्ती तक उपयोग करते हैं, जिससे जटिल से जटिल बीमारी ठीक हो जाती है. उनके ग्रामीण क्षेत्र में आसानी से नीम का पेड़ पौधा मिल जाता है. जिसकी वजह से गांव के लोग भरपूर इसका उपयोग करते हैं. यही वजह है कि कई बीमारी से सुरक्षित रहते हैं. First Published : April 10, 2026, 22:31 IST
अचानक बढ़ा दी हैं फल, सब्जियां और दालें? वजन घटाने के लिए आप भी तो नहीं कर ये गलतियां, खराब हो जाएगी किडनी

Last Updated:April 10, 2026, 21:46 IST Weight Loss Ayurvedic Tips : फाइबर मैक्सिंग (डाइट में फाइबर बढ़ाना) का ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. इसमें लोग अपनी डाइट में अचानक फाइबर की मात्रा बढ़ा देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये एक खतरनाक प्रवृत्ति है. लोग फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज को डाइट में शामिल करके वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बिना सही जानकारी और संतुलन के यह प्रयास नुकसान पहुंचा सकता है. अंबाला आयुर्वेदिक चिकित्सक जितेंद्र वर्मा बताते हैं कि हर महीने 15 से 20 ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें लोगों को अचानक डाइट बदलने के कारण गैस, पेट दर्द, सूजन और अपच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. अंबाला. तेजी से बदलती जीवनशैली और फिट रहने की बढ़ती चाहत के बीच आजकल लोग वजन घटाने या बढ़ाने के लिए शॉर्टकट तरीकों की ओर आकर्षित हो रहे हैं. पहले जहां लोग केवल प्रोटीन पर फोकस कर रहे थे. अब “फाइबर मैक्सिंग” यानी डाइट में फाइबर बढ़ाने का ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. इसमें लोग अपनी डाइट में अचानक फाइबर की मात्रा बढ़ा देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि विशेषज्ञ इसे एक खतरनाक प्रवृत्ति मान रहे हैं, जो सेहत पर गंभीर असर डाल सकती है. लोग फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज को डाइट में शामिल करके वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बिना सही जानकारी और संतुलन के यह प्रयास नुकसान पहुंचा सकता है. लोकल 18 से अंबाला सरकारी अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. जितेंद्र वर्मा कहते हैं कि वजन बढ़ाने या घटाने के लिए अगर कोई फाइबर डायट नहीं भी ले रहा है तो उसकी इतनी ज्यादा जरूरत नहीं है, लेकिन शरीर की अग्नि को नियंत्रित (बैलेंस) रखना बहुत ज्यादा जरूरी है. अगर किसी को वजन घटाना है तो उसे गर्म पानी का सेवन करना होगा, क्योंकि वह व्यक्ति के शरीर में अग्नि को बढ़ाएगा और उसकी ऊर्जा बढ़ने से वजन घटेगा. आयुर्वेद में दूसरा फार्मूला है कि अगर किसी व्यक्ति को वजन बढ़ाना है तो उसे खाना खाने से पहले पानी का सेवन करना होगा. शरीर को मेंटेन रखने के लिए खाना खाने के कुछ देर बाद पानी का सेवन कर लेना चाहिए. डॉ. जितेंद्र कहते हैं कि वजन को घटाने के लिए खाना खाने के बाद ही पानी पी लेना चाहिए. यह तरीका शरीर को मेंटेन रखने के लिए कारगर है. वजन घटाने के लिए अजवाइन, सौंफ, सौंठ और धनिया का उपयोग भी सकते हैं. सौंठ 10 ग्राम लेनी है बाकी तीनों चीज 50-50 ग्राम मिलाकर चूर्ण बना लें. खाना खाने के बाद दिन में तीन बार इस चूर्ण का सेवन आधा-आधा चम्मच पानी के साथ करना है. लोग वजन बढ़ाने के लिए चीनी का उपयोग ज्यादा करने लगते हैं, लेकिन वह बिल्कुल भी सही नहीं है. गुड़ का उपयोग कर सकते हैं. हर महीने 15 से 20 ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें लोगों को अचानक डाइट बदलने के कारण गैस, पेट दर्द, सूजन और अपच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. कई लोग सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से प्रभावित होकर बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के अपनी डाइट में बड़े बदलाव कर लेते हैं, जो उनके लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है, इसलिए किसी विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही अपने खान-पान में बदलाव करें. फाइबर शरीर के लिए आवश्यक जरूर है, लेकिन इसकी मात्रा और सेवन का तरीका सही होना चाहिए. अचानक अधिक फाइबर लेने से पेट में ऐंठन, भारीपन और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं. गलत डाइट किडनी और ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याओं को भी बढ़ा सकती है, जो लंबे समय में गंभीर रूप ले सकती हैं. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 10, 2026, 21:46 IST
क्या है औषधीय गुणों वाला ‘वासा’ का पौधा? गले से लेकर सांस जैसी समस्या से दिलाता निजात, जानिए आयुर्वेदिक फायदे

Last Updated:April 09, 2026, 18:06 IST Health News: अक्सर लोग सिरदर्द, आंखों की समस्या से परेशान रहते हैं. इसके लिए आयुर्वेद में कई इलाज बताए गए हैं. आज आपको ऐसे ही एक पौधे के बारे में बताने वाले हैं, जिसे सेहत का खजाना माना जाता है. आइए इसके आयुर्वेदिक फायदे आपको बताते हैं. लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में कई ऐसे पौधे पाए जाते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं. लेकिन कई बार लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती है. जानकारी के अभाव के कारण पौधों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन प्राकृतिक जड़ी-बूटियां में हर मर्ज की दवा छिपी होती है. ऐसा ही एक औषधि पौधा है वासा, जिसे कुछ लोग अडूसा के नाम से भी जानते हैं. वासा कई बीमारियों के लिए रामबाण होता है. हम बात कर रहे हैं वासा पौधे की, जिसे वैज्ञानिक नाम जस्टिसिया अधाटोडा है. इंग्लिश में इसे मालाबार नट के नाम से जाना जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में इस पौधे को लोग रूस भी कहते हैं. इसकी पत्तियां जड़, फूल और फल कई बीमारियों के लिए रामबाण होते हैं. वासा में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. इन समस्याओं से मिलता निजातलोकल 18 से बातचीत करते हुए राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की डॉक्टर ऋचा श्रीवास्तव ने बताया कि वासा का इस्तेमाल खांसी-जुकाम के इलाज के लिए किया जाता है. कई बार गले में खराश के कारण गले में दर्द होने लगता है, जिसके साथ-साथ सिर दर्द, आंखों की बीमारियों, पाइल्स और कई बीमारियों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी वासा का प्रयोग करते हैं. दांतों के दर्द की समस्या से भी छुटकारा मिल सकता है. अगर आपके दांतों में दर्द होता है, तो वासा की लकड़ी का दातुन करने के साथ ही पत्तों का काढ़े से कुल्ला करने से दांतों के दर्द से राहत मिल सकती है. सूजन जैसी समस्या से छुटकाराश्वास संबंधी बीमारियों में भी वासा बहुत उपयोगी है. इसके पत्तों का रस शहद के साथ लेने से सूखी खांसी और सांस फूलने की समस्या दूर होती है. वासा के सूखे फूलों का चूर्ण गुड़ के साथ खाने से सिर दर्द गायब हो जाता है. इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण जोड़ों के दर्द को कम करने में सहायक हैं. अगर आपके शरीर में सूजन की समस्या आ गई है और सूजन की समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो वासा की पत्तियों का सुबह खाली पेट काढ़ा बनाकर पीने से धीरे-धीरे सूजन जैसी समस्या से भी आपको छुटकारा मिल जाएगा. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Lakhimpur,Kheri,Uttar Pradesh First Published : April 09, 2026, 18:06 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
तोरई की सब्जी का जबरदस्त फायदा! कब्ज, शुगर और वजन पर असरदार, जानिए फायदे और आसान रेसिपी

X तोरई की सब्जी का कमाल! कब्ज, शुगर और वजन कम पर जबरदस्त असरदार Benefits Of Ridge Gourd Vegetable : नागौर में इन दिनों तोरई सब्जी को लेकर खास चर्चा हो रही है. भले ही यह सब्जी देखने में साधारण लगती हो, लेकिन इसके अंदर सेहत का खजाना छिपा होता है. आयुर्वेदिक चिकित्सकों के अनुसार तोरई में विटामिन-A, विटामिन-C, आयरन, कैल्शियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं. यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने, कब्ज दूर करने और शरीर को ठंडक देने में बेहद फायदेमंद मानी जाती है. गर्मी के मौसम में इसका सेवन खास लाभ पहुंचाता है. इतना ही नहीं, यह वजन कम करने और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में भी सहायक बताई जाती है. यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे रोजाना आहार में शामिल करने की सलाह देते हैं. आसान रेसिपी के साथ यह स्वाद और सेहत का बेहतरीन मेल बन जाती है.
काला या लाला… गर्मियों में किस मटके का पानी होता है ज्यादा ठंडा? जानिए आपके सवाल का जवाब

X काला या लाला… गर्मियों में किस मटके का पानी होता है ज्यादा ठंडा? जानिए लाल मटका Vs काला मटका: भीषण गर्मी के बीच देसी मटकों की मांग तेजी से बढ़ गई है. ऐसे में लोग बाजार में काले और लाल मटकों को लेकर लोग कंफ्यूज हैं. सीधी के कुम्हार रोमी प्रजापति ने बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ ही मटकों की डिमांड अचानक बढ़ जाती है. लोग खासतौर पर काले रंग के मटकों को ज्यादा पसंद करते हैं. ये मटके पूरी तरह हाथों से तैयार किए जाते हैं और इन्हें बनाने में सोन नदी की मिट्टी और पीली मिट्टी का उपयोग होता है. पारंपरिक चाक पर इन्हें आकार देने के बाद भट्टी में पकाया जाता है. इस प्रक्रिया के कारण मटके में हल्की झरझराहट रहती है, जिससे पानी धीरे-धीरे बाहर की ओर नमी छोड़ता है और प्राकृतिक रूप से ठंडा बना रहता है. वहीं इसके विपरीत लाल रंग के मटके ज्यादातर मशीनों से बनाए जाते हैं. इनमें काले मटकों जैसी झरझराहट कम होती है, इसलिए ये पानी को उतना ठंडा नहीं रख पाते. हालांकि आजकल कुछ लाल मटकों में भी झरने की क्षमता विकसित की जा रही है लेकिन वे काले मटकों जितने प्रभावी नहीं माने जाते.









