क्या आपको हमेशा अपने पैरों में महसूस होती है जलन? इन गंभीर स्वास्थ्य समस्या का हो सकता है संकेत!

Last Updated:March 10, 2026, 12:07 IST Health Tips : हम अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कई हेल्थ प्रॉब्लम का सामना करते हैं. ये शायद इतनी सीरियस न लगें कि इनके बारे में चिंता की जाए, इसलिए हम इनके लक्षणों को हल्के में लेते हैं. खासकर पैरों में दर्द या जलन जैसी दिक्कतों को हम पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर देते हैं, यह सोचकर कि ये फिजिकल मेहनत या किसी और वजह से हो रही हैं. हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं आती हैं. ये इतनी बड़ी नहीं लगतीं कि डरना पड़े, इसलिए हम इनके लक्षणों को हल्के में ले लेते हैं. खासकर पैरों में दर्द या जलन जैसी समस्याओं को तो हम बिल्कुल नजरअंदाज कर देते हैं. हमें लगता है कि ये शारीरिक मेहनत की वजह से हो रही हैं या कोई और वजह होगी. अगर पैरों में बार-बार जलन महसूस होती है तो देर नहीं करनी चाहिए, ऐसा विशेषज्ञों का कहना है. ये शरीर में किसी खतरनाक बीमारी का लक्षण हो सकता है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है. तो पैरों में जलन किस चीज की ओर इशारा करती है? इस समस्या को कम करने के लिए क्या करना चाहिए, आइए जानते हैं. कारण क्या है? पैरों में जलन महसूस होने का असली कारण शरीर में विटामिन B, फोलिक एसिड और कैल्शियम की कमी है. विटामिन B12, B6, B9 कम होने से पैरों में जलन या झनझनाहट होती है. ये सिर्फ कुछ उम्र के लोगों को ही नहीं, बल्कि लगभग हर किसी में देखने को मिलती है. Add News18 as Preferred Source on Google उम्र से कोई संबंध नहीं है, लेकिन जिन लोगों में जरूरी पोषक तत्वों की कमी होती है, उन्हें पैरों में जलन होती है. शराब का ज्यादा सेवन, जहरीले पदार्थ या कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट्स से नसें खराब हो जाती हैं. इससे नर्वस सिस्टम पर असर पड़ता है और पैरों में जलन महसूस होती है. खतरनाक बीमारियों का खतरा पैरों में सूजन या जलन होना विशेषज्ञों के मुताबिक गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है. जिन लोगों को किडनी की समस्या होती है, उनमें ये लक्षण आम तौर पर दिखते हैं. थायराइड हार्मोन का स्तर कम होना भी इसका कारण बन सकता है. इसके अलावा, फंगल इंफेक्शन भी पैरों में जलन पैदा कर सकता है. जिन लोगों की रक्त नलिकाओं में इंफेक्शन होता है, उनमें ये लक्षण अक्सर दिखते हैं. अगर ये लक्षण कई दिनों तक कम नहीं होते या बार-बार ज्यादा हो जाते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है. सही इलाज करवाकर और समय पर ट्रीटमेंट लेने से खतरे से बचा जा सकता है. इन्हें अपनाकर देखें. पैरों में जलन कम करने के लिए कई तरह की दवाएं उपलब्ध हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स कहते हैं कि घरेलू उपायों से भी इस समस्या को कम किया जा सकता है. जलन कम करने के लिए ठंडा पानी इस्तेमाल करना एक अच्छा तरीका है. रोज अपने पैरों को ठंडे पानी के टब में रखें. इससे पैरों की नसों को आराम मिलेगा और परेशानी कम होगी. इससे ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है. गर्म पानी में एप्सम सॉल्ट डालकर पैरों को रखने से मांसपेशियां रिलैक्स हो जाती हैं. दूसरी तरफ, शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सुधारने के लिए नारियल तेल से मसाज कर सकते हैं. हल्दी और एलोवेरा मिलाकर पेस्ट बनाकर पैरों पर लगाने से अच्छा असर होता है. हल्दी में मौजूद एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पैरों की जलन को कम कर सकते हैं. First Published : March 10, 2026, 12:07 IST
Health Tips: मौसम बदलते ही बढ़ा जुकाम-बुखार का खतरा, एक्सपर्ट से जानें कैसे रखें खुद का ख्याल

Last Updated:March 10, 2026, 11:34 IST Health Tips: मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव बताते है कि अगर आपको वसंत के इस मौसम में जुकाम और बुखार हो रहा है तो काली मिर्च, सोंठ और पिपल को मिक्सर में अच्छी तरह पीसकर पाउडर तैयार कर लें. इस पाउडर को चाय या काढ़े के माध्यम से सुबह और शाम कम से कम 5 से 6 दिन तक पिएं. इससे आपका इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होगा और जुकाम और बुखार से राहत मिलेगी. सर्दी का मौसम विदा ले रहा है और गर्मी का मौसम दस्तक देने लगा है. दिन में तेज धूप और रात में ठंड का अनुभव हो रहा है. ऐसे में रात में बाइक से यात्रा करने वालों को ठंडी हवा से परेशानी हो रही है. सुबह और शाम की ठंड और दिन की गर्मी की वजह से लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है, जिससे उन्हें जुकाम और बुखार तेजी से हो रहा है. यदि आप भी इस बदलते मौसम का शिकार हो गए है और आपको जुकाम और बुखार हो गया है तो हम आयुर्वेदिक चिकित्सक से जानेंगे कि इसे ठीक करने के क्या घरेलू उपाय है और इस तरह के मौसम में खुद को कैसे बचाएं. मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव बताते है कि अगर आपको वसंत के इस मौसम में जुकाम और बुखार हो रहा है तो काली मिर्च, सोंठ और पिपल को मिक्सर में अच्छी तरह पीसकर पाउडर तैयार कर लें. इस पाउडर को चाय या काढ़े के माध्यम से सुबह और शाम कम से कम 5 से 6 दिन तक पिएं. इससे आपका इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होगा और जुकाम और बुखार से राहत मिलेगी. अगर आप इसे शहद के साथ लेते है तो यह और जल्दी फायदा करेगा. इस वजह से हो रहा जुकाम बुखार इस समय सर्दी का मौसम समाप्त हो रहा है. लेकिन दिन में तेज धूप से तापमान बढ़ गया है. जिससे लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है. दिन में गर्मी और सुबह-शाम की ठंड की वजह से जुकाम और बुखार की समस्या बढ़ रही है. सुबह शाम पहनें गर्म कपड़ा अगर आप सुबह और शाम बाहर टहल रहे है या बाइक चला रहे है तो अपने कपड़ों का ध्यान रखें. थोड़ी सी धूप के बाद लोग गर्म कपड़े कम कर देते है और गर्मियों के कपड़े पहन लेते है. जब तक लगातार कुछ दिनों तक धूप न निकलने लगे, तब तक सर्दी के कपड़े पहनते रहें. यह भी है महत्वपूर्ण इन उपायों के अलावा, अगर आप गिलोय का रस हल्के गुनगुने पानी के साथ सेवन करते है तो इससे भी जुकाम और बुखार से राहत मिलेगी. अदरक का रस भी सर्दी और जुकाम से राहत देता है. ये उपाय शरीर को किसी साइड इफेक्ट से बचाते है और सर्दी में फायदा देते है. About the Author Manish Rai काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें Location : Sultanpur,Uttar Pradesh First Published : March 10, 2026, 11:34 IST
कमजोरी और खून की कमी होगी दूर, नई माताओं के लिए वरदान है ये जंगली जड़ – News18 हिंदी

X कमजोरी और खून की कमी होगी दूर, नई माताओं के लिए वरदान है ये जंगली जड़ Natural Health Tips: आधुनिक चिकित्सा के दौर में भी झारखंड का आदिवासी समाज अपने पारंपरिक ज्ञान और औषधीय पौधों पर अटूट विश्वास रखता है. इसी कड़ी में जंगलों में मिलने वाला सतावर (शतावरी) का पौधा आज भी महिलाओं और शारीरिक रूप से कमजोर लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है. स्थानीय आदिवासी महिला नीलम देवी बताती हैं कि सतावर की जड़ें औषधीय गुणों से भरपूर हैं. प्रसव के बाद जिन माताओं में पर्याप्त दूध न बनने की समस्या होती है. उनके लिए यह औषधि चमत्कारिक है. इसके नियमित सेवन से मात्र 2-3 दिनों में सकारात्मक परिणाम दिखने लगते हैं. इसके अलावा यह खून की कमी पुरानी थकान और शारीरिक कमजोरी को दूर कर शरीर में नई ऊर्जा भरता है. सतावर का पाउडर बनाने के लिए इसकी जड़ों को खोदकर निकाला जाता है. फिर दो-तीन दिनों तक छांव में सुखाया जाता है. पूरी तरह सूखने के बाद इसे कूटकर बारीक चूर्ण तैयार किया जाता है. प्रतिदिन एक चम्मच पाउडर सादे पानी के साथ लेने से एक सप्ताह के भीतर शरीर में ताकत का अहसास होने लगता है. आदिवासी समाज का यह समृद्ध ज्ञान आज भी शहर से दूर रहने वाले परिवारों के लिए एक सुलभ और सुरक्षित स्वास्थ्य विकल्प बना हुआ है.
टूथब्रश और जीभ क्लीनर: पुराने टूथब्रश और जीभ क्लीनर को कब छोटा किया गया? यहां जानें सही समय और कुछ जरूरी टिप्स

टूथब्रश और जीभ क्लीनर: हम अपने दांतों को चमकाने के लिए महंगे टूथपेस्ट और माउथवॉश पर तो खूब खर्च करते हैं, लेकिन अक्सर उस फ्रैंच चीज को जरूरी कर देते हैं जिससे दिन की शुरुआत होती है टूथब्रश और टैंग फ्रेंड्स से। क्या आप जानते हैं कि एक पुराने और खराब हो चुके टूथब्रश से आपके दांतों की सफाई ठीक नहीं होती, बल्कि यह का घर भी बन सकता है? आइये इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि आपको अपना टूथब्रश और टंग इम्पैक्ट कब बदलना चाहिए और ओरल हाईजीन को बेहतर बनाए रखना चाहिए, इसके लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। टैंग इनऑपरेशन का सही समय क्या है? यदि आप प्लास्टिक का टोंग उपकरण इस्तेमाल करते हैं, तो इसे हर 2-3 महीने में बदल देना चाहिए। प्लास्टिक पर बैचलर जल्दी तैयार होते हैं और इसमें समय के साथ लिखावट आ सकती है।बर्चसन या स्टील के टैंग प्लांट लंबे समय तक बने रहते हैं। लेकिन अगर वे जंग लग जाएं, उनकी धार तेज हो जाए या वे ब्लैक डैमेज लगें, तो उन्हें तुरंत बदल दें। आमतौर पर 6 महीने से 1 साल में बदलाव लेना बेहतर होता है। ओरल हाईजीन के लिए कुछ जरूरी टिप्स (टैग्सटूट्रांसलेट)टूथब्रश(टी)जीभ क्लीनर(टी)स्वास्थ्य युक्तियाँ(टी)स्वास्थ्य देखभाल(टी)मौखिक स्वास्थ्य(टी)टूथब्रश प्रतिस्थापन समय(टी)जीभ क्लीनर प्रतिस्थापन समय(टी)टूथब्रश कितनी बार बदलना है(टी)कितनी बार जीभ क्लीनर बदलना है
एक चम्मच से ज्यादा नमक सेहत पर भारी, डाइटिसिशियन ने दी चेतावनी, जानें कितना और कौन सा नमक करें सेवन

X एक चम्मच से ज्यादा नमक सेहत पर भारी, जानें कितना और कौन सा नमक करें सेवन Health Tips: अगर आप रोज एक चम्मच से ज्यादा नमक खा रहे है तो सावधान हो जाएं. मंडलीय अस्पताल की डाइटिसिशियन डॉ. ज्योति सिंह के अनुसार भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की रिपोर्ट बताती है कि प्रतिदिन केवल एक चम्मच नमक का सेवन पर्याप्त है, ज्यादा नमक से हाई ब्लड प्रेशर और हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ता है. उन्होंने सलाह दी कि सलाद या फलों पर ऊपर से नमक न छिड़कें और मठरी, नमकीन व पैक्ड फूड से परहेज करें, क्योंकि इनमें नमक अधिक होता है. दैनिक उपयोग में केवल आयोडीन युक्त नमक लें. सेंधा या काला नमक नियमित रूप से उपयोग करना फायदेमंद नहीं है और इससे थायराइड व घेंघा जैसी समस्याएं बढ़ सकती है.
भगवान भी खुश, भक्त भी हेल्दी…ये पत्ता इतना चमत्कारी, शरीर के तीनों दोषों का दुश्मन, चबाते ही तुरंत राहत – Uttar Pradesh News

Last Updated:February 24, 2026, 20:48 IST बेलपत्र भोलेनाथ का प्रिय है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि बेलपत्र हमारे शरीर के लिए भी जादुई है, खासकर पाचन, मधुमेह और इम्युनिटी के लिए. लोकल 18 से बात करते हुए सुल्तानपुर के आयुष चिकित्सक डॉ. हर्ष बताते हैं कि सुबह खाली पेट 2-3 ताजी पत्तियां चबाने से कब्ज, पेट के कीड़े, दस्त और एसिडिटी दूर होती है, क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. यह ब्लड शुगर, उच्च रक्तचाप (BP) और हृदय स्वास्थ्य को भी नियंत्रित करता है. डॉ. हर्ष कहते हैं कि बेलपत्र शरीर के तीन दोषों वात, पित्त और कफ तीनों को शांत करता है. सहारनपुर. बेलपत्र भगवान शिव का प्रिया माना जाता है. इसे शिवलिंग के ऊपर जलाभिषेक के दौरान चढ़ाया जाता है. बेलपत्र मानव शरीर के लिए भी चमत्कारी है. बेल के पौधे पर आने वाला फल भी हमारे पेट के लिए रामबाण हैं. ये शरीर को ठंडक पहुंचाते हैं. बेल के पत्ते भी रामबाण से कम नहीं हैं. बेलपत्र से कई आयुर्वेदिक दवाइयां भी बनाई जाती हैं. अगर आपको बेल का फल नहीं मिल रहा तो बेलपत्र से भी शरीर को ठंडक पहुंचा सकते हैं. इससे पेट की समस्या से तुरंत छुटकारा मिलता है. बेलपत्र मधुमेह नियंत्रण और इम्युनिटी बढ़ाने में भी काम आता है. लोकल 18 से बात करते हुए सुल्तानपुर के आयास आयुर्वेदिक चिकित्सालय से बीएएमएस/ एमडी डॉ. हर्ष बताते हैं कि बेलपत्र ब्लड शुगर, उच्च रक्तचाप (BP) और हृदय स्वास्थ्य को भी ठीक रखता है. बेलपत्र से बनी हुई कई आयुर्वेदिक दवाइयां मार्केट में उपलब्ध हैं. घर पर भी इससे दवा बना सकते हैं. सुबह खाली पेट 2-3 ताजी पत्तियां चबाने से कब्ज, पेट के कीड़े, दस्त और एसिडिटी दूर होती है. इसके पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. इसमें भी फायदा डॉ. हर्ष के मुताबिक, बेलपत्र शरीर के तीन दोषों वात, पित्त और कफ तीनों का शमन करता है. गर्मी में डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा होता है, बेलपत्र इससे बचाता है. हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए भी बेलपत्र का सेवन लाभदायक है. जिनका लिपिड प्रोफाइल गड़बड़ हो जाता है, कोलेस्ट्रॉल लेवल मेंटेन नहीं रहता, उनके लिए भी बेलपत्र रामबाण है. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Saharanpur,Uttar Pradesh First Published : February 24, 2026, 20:48 IST
चिंता खत्म, डाइजेशन बेहतर…सिर्फ ताली बजाने से दूर होंगी बीमारियां, क्या होता फ्लावर क्लैप, डॉक्टर से जानें

Last Updated:February 23, 2026, 23:34 IST क्या आप जानते हैं कि ताली बजाना एक संपूर्ण व्यायाम है? ‘फ्लावर क्लैप’ या पुष्प ताली एक ऐसी योग क्रिया है, जो शरीर के 340 एक्यूप्रेशर पॉइंट्स को एक्टिव कर हृदय, फेफड़ों और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है. लोकल 18 ने इस बारे में चंदौली की चिकित्सक डॉ. रिद्धि पांडे से बात की. डॉ. रिद्धि बताती हैं कि ताली बजाने के कई फायदे हैं. यह कही गई बात नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक आधार है. जब आप ताली बजाते हैं, तो हथेलियों पर पड़ने वाला प्रेशर ब्लड सर्कुलेशन को तेज करता है. इससे धमनियों में जमी गंदगी साफ होने लगती है. मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी ताली बजाना वरदान है. चंदौली. अपनी सेहत को बेहतर रखने के लिए लोग योग, एक्सरसाइज और डाइट का सहारा लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ताली बजाना भी कई बीमारियों से बचाव में मददगार हो सकता है? इस विषय पर चंदौली की चिकित्सक डॉ. रिद्धि पांडे ने Local 18 से बातचीत में ताली बजाने के कई वैज्ञानिक फायदे बताए. डॉ. पांडे के मुताबिक, ताली बजाने के कई फायदे हैं. यह ऐसे ही कही गई बात नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक आधार है. हमारे हाथों में 340 से भी अधिक एक्यूप्रेशर पॉइंट्स होते हैं. जब हम ताली बजाते हैं, तो इनमें से 30 से ज्यादा प्रेशर पॉइंट्स एक साथ सक्रिय हो जाते हैं. इन प्रेशर पॉइंट्स का सीधा संबंध शरीर के महत्त्वपूर्ण अंगों जैसे हार्ट, लंग्स और किडनी से होता है. जब आप ताली बजाते हैं, तो हथेलियों पर पड़ने वाला प्रेशर ब्लड सर्कुलेशन को तेज करता है. इससे धमनियों में जमी गंदगी धीरे-धीरे साफ होने लगती है और हार्ट को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है. तनाव और चिंता दूर डॉ. पांडे बताती हैं कि ताली बजाने से ब्लड प्रेशर संतुलित रखने में भी मदद मिलती है. नियमित रूप से 15 से 20 मिनट ताली बजाने से हृदय संबंधी समस्याओं के खतरे को कम किया जा सकता है, सिर्फ शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी ताली बजाना लाभकारी है. ताली बजाने से डोपामिन जैसे ‘हैप्पी हार्मोन’ रिलीज होते हैं, जो तनाव और चिंता को कम करते हैं. इससे मानसिक स्थिति स्थिर होती है और व्यक्ति खुद को ज्यादा सकारात्मक महसूस करता है. ये आदत जरूरी डॉ. रिद्धि पांडे बताती हैं कि ताली बजाने से पाचन क्रिया में भी सुधार होता है. हथेलियों के प्रेशर पॉइंट्स सक्रिय होने से डाइजेशन बेहतर होता है. शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ता है. अगर लोग दिन में किसी भी समय 15–20 मिनट ताली बजाने की आदत डाल लें, तो हार्ट हेल्थ, स्ट्रेस मैनेजमेंट और पाचन से जुड़े कई फायदे मिल सकते हैं. बिना किसी खर्च और खास उपकरण के, ताली बजाना एक आसान और प्रभावी स्वास्थ्य अभ्यास है. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Chandauli,Uttar Pradesh First Published : February 23, 2026, 23:34 IST
मशरूम है सेहत का सुपरफूड! दिल, डायबिटीज और वजन कंट्रोल में फायदेमंद, जानें एक्सपर्ट की राय – Uttar Pradesh News

रायबरेली. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग सेहतमंद रहने के लिए अपने खानपान पर विशेष ध्यान दे रहे हैं. ऐसे में मशरूम एक ऐसा सुपरफूड बनकर उभरा है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी ख्याल रखता है. पोषक तत्वों से भरपूर मशरूम का नियमित सेवन शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाने में मददगार साबित हो सकता है. रायबरेली के आयुष चिकित्सा विशेषज्ञ गौरव कुमार ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि मशरूम में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन बी, विटामिन डी, आयरन, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. खास बात यह है कि इसमें कैलोरी और फैट बहुत कम होता है, जिससे यह वजन नियंत्रित रखने वालों के लिए बेहतरीन विकल्प माना जाता है. मशरूम मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है. हृदय रोगों से बचाव में कारगरगौरव कुमार के मुताबिक, मशरूम हृदय संबंधी बीमारियों से बचाव में अहम भूमिका निभाता है. इसमें मौजूद फाइबर और पोटैशियम रक्तचाप को संतुलित रखने में मदद करते हैं, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. इसके अलावा, मशरूम में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होते हैं. डायबिटीज और हड्डियों के लिए फायदेमंदमशरूम डायबिटीज के मरीजों के लिए भी लाभकारी माना जाता है. इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम और फाइबर अधिक होता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रखने में मदद मिलती है. साथ ही, विटामिन डी की मौजूदगी हड्डियों को मजबूत बनाती है और जोड़ों के दर्द में राहत दिलाने में सहायक हो सकती है. त्वचा और बालों के लिए भी लाभकारीमशरूम में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और समय से पहले बूढ़ा होने के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं. इसके पोषक तत्व बालों को मजबूत और चमकदार बनाने में भी सहायक हैं. ऐसे करें सेवनविशेषज्ञों के अनुसार, मशरूम को सब्जी, सूप, सलाद या स्नैक्स के रूप में डाइट में शामिल किया जा सकता है. हालांकि, इसे हमेशा ताजा और साफ-सुथरे तरीके से पकाकर ही सेवन करना चाहिए, ताकि इसके पोषक तत्वों का पूरा लाभ मिल सके.
पेट और ब्रेन के तनाव को दूर करता है त्रिफला चूर्ण! आयुर्वेदिक डॉक्टर ने बताए फायदे, घर पर बनाने का तरीका – Madhya Pradesh News

Last Updated:February 22, 2026, 16:48 IST Triphala Powder Making Mehtod: कब्ज दूर करने के अलावा, आयुर्वेद में कई रोगों को दूर करने के लिए सबसे अधिक त्रिफला चूर्ण का प्रयोग होता है. इसे घर पर बनाना भी आसान है. तो आइए मध्य प्रदेश रीवा में स्थित आयुर्वेदिक हॉस्पिटल के डॉक्टर से जानते हैं त्रिफला के फायदे और इसे तैयार करने की विधि… Health Tips: आयुर्वेद में सबसे अधिक जिस हर्बल का प्रयोग होता है, वह है त्रिफला चूर्ण. यह मुख्य रूप से तीन प्रकार की जड़ी-बूटियों से मिल कर तैयार होता है. यह कई प्रकार के रोगों को दूर कर शरीर को स्वस्थ बनाता है, इसलिए आयुर्वेद में सबसे अधिक त्रिफला चूर्ण का ही प्रयोग होता है. रीवा आयुर्वेद हॉस्पिटल के चिकित्सक डाॅ. अरविंद त्रिपाठी ने बताया कि इस चूर्ण पर सबसे अधिक रिसर्च हुए हैं. इसे घर पर भी बनाया जा सकता है. आइए जानते हैं कि त्रिफला चूर्ण के फायदे और घर पर तैयार करने की विधि… त्रिफला चूर्ण के तत्वत्रिफला चूर्ण को पॉली हर्बल भी कहा जाता है. इसमें आंवला, बहेड़ा और हडरा (हरितकी) को शामिल किया जाता है. इसमें कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, मिनरल्स, सोडियम, आहार फाइबर के अलावा शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट गैलिक एसिड, चेबुलजिक एसिड भी पाए जाते हैं. बायोएक्टिव फ्लेवोनोइड्स जैसे कि क्वेरसेटिन और ल्यूटोलिन, सैपोनिन्स, एंथ्राक्विनोन, अमीनो एसिड, फैटी एसिड भी पाए जाते हैं. इसमें एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी, गैस्ट्रिक हाइपरएसिडिटी में कमी, एंटीपायरेटिक, एनाल्जेसिक, एंटी बैक्टीरियल, एंटीमुटाजेनिक गुण पाए जाते हैं. इसमें हाइपोग्लाइसेमिक, एंटीकैंसर, हेपेटोप्रोटेक्टिव, केमोप्रोटेक्टिव, रेडियोप्रोटेक्टिव भी पाए जाते हैं. कितना फायदेमंद त्रिफला चूर्णडॉक्टर के अनुसार, त्रिफला भोजन के उचित पाचन और अवशोषण को भी बढ़ावा दे सकता है. सीरम कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर सकता है. परिसंचरण में सुधार कर सकता है. पित्त नलिकाओं को शिथिल कर सकता है. यह होमियोस्टैसिस को बनाए रख सकता है. त्रिफला गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्वास्थ्य में उपयोग के लिए सबसे प्रसिद्ध है. त्रिफला के जलीय और अल्कोहल-आधारित दोनों अर्क दस्त को रोकते हैं. तनाव कम करता है पशु अध्ययनों से पता चला है कि त्रिफला ठंड से प्रेरित तनाव से बचाता है. तनाव से प्रेरित व्यवहार परिवर्तन और जैव रासायनिक परिवर्तन जैसे कि लिपिड पेरोक्सीडेशन और कॉर्टिकोस्टेरोन के स्तर में वृद्धि करता है. इसके एंटीऑक्सिडेंट गुण तनाव को कम करने में सक्षम हैं. डायबिटीज में भी फायदेमंदएक पशु अध्ययन में त्रिफला को 10 सप्ताह के लिए मोटापे से ग्रस्त चूहों को दिया गया. इससे शरीर में वसा का संचयन, वजन कम हुआ. इससे कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स और कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल को भी कम किया गया. शुगर की दवा के साथ त्रिफला का सेवन फास्टिंग ब्लड शुगर और फास्टिंग सीरम इंसुलिन का लेवल भी कम हो गया. इस विधि से तैयार करें त्रिफला चूर्ण आयुर्वेद विशेषज्ञ के अनुसार, त्रिफला चूर्ण बनाने के लिए तीन तरह की जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है. ये हैं हरड़, बहेड़ा और आंवला. इसे बनाने के लिए 1 भाग हरड़, 2 भाग बहेड़ा और 3 भाग आंवला लें. चूर्ण बनाने के लिए यह जरूरी है कि इन तीनों को खूब सुखाया जाए. सूखने के बाद आप आसानी से इनमें मौजूद गुठली को निकाल कर अलग कर सकती हैं. अब ये तीनों सामग्री चूर्ण बनने के लिए तैयार हैं. अब इन तीनों को खूब बारीक पीसकर उसका चूर्ण बना लें. लीजिए आपका त्रिफला चूर्ण तैयार हो गया है. इस चूर्ण को एयर टाइट कंटेनर में रख लें. रोज रात में सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण लें. सुबह इसका सेवन कर रहे हैं तो शहद के साथ ले सकते हैं. About the Author Rishi mishra एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें Location : Rewa,Madhya Pradesh First Published : February 22, 2026, 16:48 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
सिर्फ आड़ू ही नहीं, इसके पत्ते भी संजीवनी, पहाड़ों पर कई रोगों में इस्तेमाल, जानें तरीका

Last Updated:February 22, 2026, 15:37 IST आपने आडू का फल तो खूब खाया होगा लेकिन क्या आप इसके पत्तों के फायदे के बारे में जानते है. पहाड़ों में लंबे समय से आडू के पत्तों का दवा के रूप में इस्तेमाल होता आया है. इसे जानवरों के लिए भी उपयोग किया जाता है. इसे पीसकर जानवरों को बुखार में पिलाया जाता है. लोकल 18 से बात करते हुए अल्मोड़ा के बुजुर्ग रमेश लाल बताते हैं कि यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है. आड़ू के पत्तों में सूजन कम करने वाले गुण पाए जाते हैं. आपने आडू के फायदे सुने होंगे लेकिन पहाड़ों में इसके पत्ते भी इस्तेमाल किए जाते है. पहाड़ी बुजुर्ग रमेश लाल आड़ू के पत्ते के कई फायदे बताते हैं. उनका कहना है कि जिस तरह आड़ू का फल स्वादिष्ट और सेहतमंद होता है, उसी तरह उसके पत्ते भी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. पहाड़ों में पुराने समय से ही आड़ू के पत्तों का घरेलू उपचार के रूप में उपयोग किया जाता रहा है. यह एक ऐसी प्राकृतिक देन है, जिसका सही इस्तेमाल शरीर को कई समस्याओं से बचा सकता है. रमेश लाल बताते हैं कि आड़ू के पत्ते पेट की समस्याओं में बहुत फायदेमंद होते हैं. इन पत्तों को उबालकर उसका पानी पीने से गैस, अपच और हल्के पेट दर्द में राहत मिलती है. पहाड़ों में लोग इसे प्राकृतिक दवा के रूप में इस्तेमाल करते हैं. यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है. आड़ू के पत्तों में सूजन कम करने वाले गुण पाए जाते हैं. यदि शरीर में कहीं सूजन या हल्का दर्द हो, तो पत्तों को पीसकर उसका लेप लगाया जाता है. इससे जोड़ों के दर्द और मोच में आराम मिलता है. यह एक आसान और घरेलू उपाय माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google त्वचा संबंधी समस्याओं में भी आड़ू के पत्ते उपयोगी होते हैं. फोड़े-फुंसी, खुजली या हल्की एलर्जी होने पर पत्तों का लेप लगाने से आराम मिलता है. इनमें मौजूद प्राकृतिक तत्व त्वचा को साफ और स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. पहाड़ों में आड़ू के पत्तों का उपयोग पशुओं के इलाज में भी किया जाता है. जब गाय, बकरी या अन्य पशु बीमार हो जाते हैं, तो पत्तों को पीसकर या उबालकर उन्हें पिलाया जाता है. माना जाता है कि इससे उनके पेट की समस्या दूर होती है और वे जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं. इस तरह आड़ू के पत्ते इंसानों के साथ-साथ जानवरों के लिए भी बेहद उपयोगी माने जाते हैं. रमेश लाल के अनुसार, आड़ू के पत्ते खून को साफ करने में भी सहायक हैं. पारंपरिक मान्यता है कि इनका सेवन शरीर के विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है. इससे शरीर में ताजगी और ऊर्जा बनी रहती है. पहाड़ों में यह लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में सर्दी-जुकाम होने पर आड़ू के पत्तों का काढ़ा पिया जाता है. माना जाता है कि यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है. नियमित रूप से सीमित मात्रा में सेवन करने से शरीर अंदर से मजबूत होता है. First Published : February 22, 2026, 15:37 IST









