Bengal Election ED Arrests I-PAC Director Vinesh Chandel 10 Days Before Polls

Hindi News National Bengal Election ED Arrests I PAC Director Vinesh Chandel 10 Days Before Polls | TMC नई दिल्ली/कोलकाता3 मिनट पहले कॉपी लिंक ED ने गिरफ्तारी के बाद विनेश चंदेल को दिल्ली में जज के सामने पेश कर कस्टडी मांगी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से 10 दिन पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने I-PAC के डायरेक्टर और को-फाउंडर विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया है। उन्हें कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में सोमवार शाम दिल्ली में पकड़ा गया। ED की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं। राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए चुनावी रणनीति बनाती है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर कहा कि चुनाव से 10 दिन पहले हुई यह कार्रवाई निष्पक्ष चुनाव पर सवाल उठाती है। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग और ED, NIA, CBI जैसी एजेंसियों की चुनाव जैसे संवेदनशील समय पर कार्रवाई से डर का माहौल बनता है, निष्पक्षता का नहीं। बनर्जी ने कहा- अमित शाह और BJP, ज्ञानेश कुमार और अपनी हर एजेंसी के साथ 4-5 मई को बंगाल आएं। बंगाल न डरेगा, न चुप रहेगा और न झुकेगा। यहां दबाव का जवाब विरोध से दिया जाता है। 2 अप्रैल: ED ने चंदेल के ठिकानों पर छापेमारी की जांच एजेंसी ने दिल्ली में विनेश चंदेल के ठिकानों के अलावा बेंगलुरु में I-PAC के दूसरे को-फाउंडर और डायरेक्टर ऋषि राज सिंह, मुंबई में आम आदमी पार्टी के पूर्व कम्युनिकेशन इंचार्ज विजय नायर के ठिकानों पर भी छापे मारे गए थे। विनेश चंदेल I-PAC के प्रमुख चेहरों में से एक हैं और इस राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म के संस्थापकों में शामिल हैं। उन्होंने प्रशांत किशोर, प्रतीक जैन और ऋषिराज सिंह के साथ मिलकर इस कंपनी की नींव रखी थी। अब पूरे मामले को समझिए 8 जनवरी को ED की टीम ने प्रतीक जैन के कोलकाता के गुलाउडन स्ट्रीट स्थित घर और दूसरी टीम सॉल्टलेक स्थित दफ्तर पर छापा मारा था। प्रतीक जैन ही ममता बनर्जी के लिए पॉलिटिकल स्ट्रैटजी तैयार करते हैं। कार्रवाई सुबह 6 बजे से शुरू हुई थी, लेकिन करीब 11:30 बजे के बाद मामला बढ़ा। सबसे पहले कोलकाता पुलिस कमिश्नर, प्रतीक के आवास पर पहुंचे। कुछ समय बाद सीएम ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित उनके घर पहुंच गईं। ममता वहां कुछ देर रुकीं। जब बाहर निकलीं, तो उनके हाथ में एक हरी फाइल दिखाई दी। इसके बाद वे I-PAC के ऑफिस भी गईं। उन्होंने कहा था- गृहमंत्री मेरी पार्टी के दस्तावेज उठवा रहे हैं। ED ने कहा कि पश्चिम बंगाल में 6 और दिल्ली में 4 ठिकानों पर छापेमारी की गई। ममता 8 जनवरी की दोपहर 12 बजे I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पहुंची थीं। रेड के दौरान फाइलें लेकर चली गईं थी CM ममता सर्च ऑपरेशन के दौरान, CM ममता बनर्जी अन्य TMC नेताओं के साथ I-PAC ऑफिस पहुंचीं। इसके बाद काफी हंगामा हुआ। ममता ऑफिस से कई फाइलें लेकर बाहर निकलीं और मीडिया से बात की। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय एजेंसी पर हद से ज्यादा दखलंदाजी का आरोप लगाया। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया है कि I-PAC पार्टी के चुनाव रणनीतिकार के रूप में काम करता है और विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ED ने गोपनीय चुनाव रणनीति से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए रेड डाली। तस्वीर 8 जनवरी की है, जब बंगाल CM ममता ने कोलकाता में ED की छापेमारी के बीच मीडिया को संबोधित किया था। I-PAC रेड मामला : 2,742 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग केस I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी है। यह राजनीतिक दलों के लिए बड़े स्तर पर चुनावी अभियानों का काम करती है। कंपनी और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन पर करोड़ों रुपए के कोयला चोरी घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। CBI ने इस मामले में 27 नवंबर 2020 को FIR दर्ज की थी। पूरा मामला ₹2,742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। आरोप है कि ₹20 करोड़ हवाला के जरिए I-PAC तक ट्रांसफर हुए। ED ने 28 नवंबर 2020 को इसकी जांच शुरू की थी। 8 जनवरी 2026 को ED ने कोलकाता में I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापा मारा था। ED के अफसरों ने प्रतीक के घर और ऑफिस से कई डॉक्यूमेंट्स जब्त किए। ED ने शक्ति के दुरुपयोग की CBI जांच की मांग की ED ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाते हुए मुख्यमंत्री द्वारा कथित शक्ति के दुरुपयोग की CBI जांच की मांग भी की है। यह मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। ED ने आरोप लगाया था कि जांच से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण राज्य प्रशासन की मौजूदगी में वहां से ले जाए गए, जिससे एजेंसी की कार्रवाई में बाधा पहुंची। वहीं TMC और राज्य सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ED चुनाव से पहले I-PAC की चुनावी रणनीति से जुड़े दस्तावेज हासिल करने की कोशिश कर रही थी। ——————————— ये खबर भी पढ़ें… I-PAC रेड में दखल, सुप्रीम कोर्ट ने ममता से पूछा:केंद्र में आपकी सरकार होती तो क्या करते सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में I-PAC के ऑफिस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड के मामले में सुनवाई की। कोर्ट ने ममता बनर्जी की बंगाल सरकार से पूछा कि अगर केंद्र में आपकी सरकार होती और कोई राज्य ऐसी कार्रवाई करता तो आपका रुख क्या होता। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
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Hindi News National Bengal Election ED Arrests I PAC Director Vinesh Chandel 10 Days Before Polls | TMC नई दिल्ली/कोलकाता7 घंटे पहले कॉपी लिंक ED ने गिरफ्तारी के बाद विनेश चंदेल को दिल्ली में जज के सामने पेश कर कस्टडी मांगी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से 10 दिन पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने I-PAC के डायरेक्टर और को-फाउंडर विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया है। उन्हें कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में सोमवार शाम दिल्ली में पकड़ा गया। ED की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं। राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए चुनावी रणनीति बनाती है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर कहा कि चुनाव से 10 दिन पहले हुई यह कार्रवाई निष्पक्ष चुनाव पर सवाल उठाती है। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग और ED, NIA, CBI जैसी एजेंसियों की चुनाव जैसे संवेदनशील समय पर कार्रवाई से डर का माहौल बनता है, निष्पक्षता का नहीं। बनर्जी ने कहा- अमित शाह और BJP, ज्ञानेश कुमार और अपनी हर एजेंसी के साथ 4-5 मई को बंगाल आएं। बंगाल न डरेगा, न चुप रहेगा और न झुकेगा। यहां दबाव का जवाब विरोध से दिया जाता है। 2 अप्रैल: ED ने चंदेल के ठिकानों पर छापेमारी की जांच एजेंसी ने दिल्ली में विनेश चंदेल के ठिकानों के अलावा बेंगलुरु में I-PAC के दूसरे को-फाउंडर और डायरेक्टर ऋषि राज सिंह, मुंबई में आम आदमी पार्टी के पूर्व कम्युनिकेशन इंचार्ज विजय नायर के ठिकानों पर भी छापे मारे गए थे। विनेश चंदेल I-PAC के प्रमुख चेहरों में से एक हैं और इस राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म के संस्थापकों में शामिल हैं। उन्होंने प्रशांत किशोर, प्रतीक जैन और ऋषिराज सिंह के साथ मिलकर इस कंपनी की नींव रखी थी। अब पूरे मामले को समझिए 8 जनवरी को ED की टीम ने प्रतीक जैन के कोलकाता के गुलाउडन स्ट्रीट स्थित घर और दूसरी टीम सॉल्टलेक स्थित दफ्तर पर छापा मारा था। प्रतीक जैन ही ममता बनर्जी के लिए पॉलिटिकल स्ट्रैटजी तैयार करते हैं। कार्रवाई सुबह 6 बजे से शुरू हुई थी, लेकिन करीब 11:30 बजे के बाद मामला बढ़ा। सबसे पहले कोलकाता पुलिस कमिश्नर, प्रतीक के आवास पर पहुंचे। कुछ समय बाद सीएम ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित उनके घर पहुंच गईं। ममता वहां कुछ देर रुकीं। जब बाहर निकलीं, तो उनके हाथ में एक हरी फाइल दिखाई दी। इसके बाद वे I-PAC के ऑफिस भी गईं। उन्होंने कहा था- गृहमंत्री मेरी पार्टी के दस्तावेज उठवा रहे हैं। ED ने कहा कि पश्चिम बंगाल में 6 और दिल्ली में 4 ठिकानों पर छापेमारी की गई। ममता 8 जनवरी की दोपहर 12 बजे I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पहुंची थीं। रेड के दौरान फाइलें लेकर चली गईं थी CM ममता सर्च ऑपरेशन के दौरान, CM ममता बनर्जी अन्य TMC नेताओं के साथ I-PAC ऑफिस पहुंचीं। इसके बाद काफी हंगामा हुआ। ममता ऑफिस से कई फाइलें लेकर बाहर निकलीं और मीडिया से बात की। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय एजेंसी पर हद से ज्यादा दखलंदाजी का आरोप लगाया। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया है कि I-PAC पार्टी के चुनाव रणनीतिकार के रूप में काम करता है और विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ED ने गोपनीय चुनाव रणनीति से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए रेड डाली। तस्वीर 8 जनवरी की है, जब बंगाल CM ममता ने कोलकाता में ED की छापेमारी के बीच मीडिया को संबोधित किया था। I-PAC रेड मामला : 2,742 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग केस I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी है। यह राजनीतिक दलों के लिए बड़े स्तर पर चुनावी अभियानों का काम करती है। कंपनी और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन पर करोड़ों रुपए के कोयला चोरी घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। CBI ने इस मामले में 27 नवंबर 2020 को FIR दर्ज की थी। पूरा मामला ₹2,742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। आरोप है कि ₹20 करोड़ हवाला के जरिए I-PAC तक ट्रांसफर हुए। ED ने 28 नवंबर 2020 को इसकी जांच शुरू की थी। 8 जनवरी 2026 को ED ने कोलकाता में I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापा मारा था। ED के अफसरों ने प्रतीक के घर और ऑफिस से कई डॉक्यूमेंट्स जब्त किए। ED ने शक्ति के दुरुपयोग की CBI जांच की मांग की ED ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाते हुए मुख्यमंत्री द्वारा कथित शक्ति के दुरुपयोग की CBI जांच की मांग भी की है। यह मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। ED ने आरोप लगाया था कि जांच से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण राज्य प्रशासन की मौजूदगी में वहां से ले जाए गए, जिससे एजेंसी की कार्रवाई में बाधा पहुंची। वहीं TMC और राज्य सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ED चुनाव से पहले I-PAC की चुनावी रणनीति से जुड़े दस्तावेज हासिल करने की कोशिश कर रही थी। ——————————— ये खबर भी पढ़ें… I-PAC रेड में दखल, सुप्रीम कोर्ट ने ममता से पूछा:केंद्र में आपकी सरकार होती तो क्या करते सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में I-PAC के ऑफिस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड के मामले में सुनवाई की। कोर्ट ने ममता बनर्जी की बंगाल सरकार से पूछा कि अगर केंद्र में आपकी सरकार होती और कोई राज्य ऐसी कार्रवाई करता तो आपका रुख क्या होता। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
अनिल-अंबानी की रिलायंस पावर के ठिकानों पर ED का छापा:सुबह होने से पहले ही पहुंची 15 टीमें; बैंक कर्ज और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है मामला

ED ने आज यानी 6 मार्च को उद्योगपति अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस पावर से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई मुंबई और हैदराबाद में 10 से 12 लोकेशन्स पर एक साथ की गई। मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों को लेकर ED की 15 टीमों ने ये छापेमारी की है। द हिंदू और इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक सुबह होने से पहले ही ED की टीम इन ठिकानों पर पहुंच गई थी। टीम ने संबंधित व्यक्तियों और कंपनियों के परिसरों की तलाशी ली। अंबानी से मनी लॉन्ड्रिग मामले में पूछताछ हुई थी इससे पहले 26 फरवरी को अनिल अंबानी रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के दूसरे दौर के लिए दिल्ली में ED दफ्तर पहुंचे थे। आरोप है कि उनकी कंपनियों ने बैंकों से लिए लोन का डायवर्जन किया और विदेशी मुद्रा नियमों का उल्लंघन किया। अंबानी सुबह करीब 11 बजे जांच एजेंसी के दफ्तर पहुंचे थे। यहां उनसे विदेशी मुद्रा नियमों के उल्लंघन और फंड के डायवर्जन को लेकर करीब 9 घंटे सवाल-जवाब किए गए थे। ED के मुताबिक, रिलायंस कम्युनिकेशंस और उसकी ग्रुप कंपनियों ने देशी और विदेशी बैंकों से भारी कर्ज लिया था। वर्तमान में इन कंपनियों पर कुल बकाया ₹40,185 करोड़ है। ED ने अंबानी रा 17 मंजिला घर ‘अबोड’ कुर्क किया था मामला सरकारी बैंकों से उनकी कंपनियों को मिले लोन में कथित गड़बड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। CBI की 2019 की FIR के आधार पर ED इस मामले की जांच कर रही है। इससे पहले जांच एजेंसी ने मुंबई के उनके 17 मंजिला घर ‘अबोड’ को कुर्क किया था। अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले ग्रुप का हिस्सा है रिलायंस पावर रिलायंस पावर बिजली उत्पादन और वितरण क्षेत्र में एक प्रमुख कंपनी है। ये अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप का हिस्सा है। इसके पोर्टफोलियो में थर्मल (कोयला और गैस), रिन्यूएबल (सौर, पवन और हाइड्रो) और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) शामिल हैं।
मनी-लॉन्ड्रिंग केस में ED के सामने पेश हुए अनिल अंबानी:₹40 हजार करोड़ का बैंक कर्ज; ₹3,716 करोड़ का बंगला 'अबोड' कुर्क

रिलायंस ग्रुप के पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी आज 26 फरवरी को दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश हुए। अंबानी सुबह करीब 11 बजे जांच एजेंसी के दफ्तर पहुंचे, जहां उनसे विदेशी मुद्रा नियमों के उल्लंघन और फंड के डायवर्जन को लेकर सवाल-जवाब किए जा रहे हैं। मामला सरकारी बैंकों से उनकी कंपनियों को मिले लोन में कथित गड़बड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। सीबीआई की 2019 की FIR के आधार पर ED इस मामले की जांच कर रही है। एक दिन पहले ही जांच एजेंसी ने मुंबई के उनके 17 मंजिला घर ‘अबोड’ को कुर्क कर दिया था। सवालों के जवाब में समझें पूरा मामला… 1. अनिल अंबानी आज ED दफ्तर क्यों गए थे? अनिल अंबानी रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के दूसरे दौर के लिए पहुंचे हैं। आरोप है कि उनकी कंपनियों ने बैंकों से लिए लोन का डायवर्जन किया और विदेशी मुद्रा नियमों का उल्लंघन किया। इससे पहले अगस्त 2025 में उनसे पूछताछ हुई थी। 2. RCOM और उनकी कंपनियों पर कुल कितना कर्ज है? ED के मुताबिक, रिलायंस कम्युनिकेशंस और उसकी ग्रुप कंपनियों ने देशी और विदेशी बैंकों से भारी कर्ज लिया था। वर्तमान में इन कंपनियों पर कुल बकाया ₹40,185 करोड़ है। 3. उनके मुंबई वाले घर ‘अबोड’ को कुर्क क्यों किया गया है? बैंकों से लिए गए कर्ज की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी जांच के कारण इस बंगले को अस्थाई तौर पर कुर्क किया गया है। ये घर मुंबई के पॉश पाली हिल इलाके में स्थित है। अनिल अंबानी के इस 17 मंजिला घर की कीमत ₹3,716 करोड़ बताई गई है। 4. ‘प्रोविजनल अटैचमेंट’ का क्या मतलब होता है? प्रोविजनल अटैचमेंट का मतलब है कि प्रॉपर्टी को कानूनी रूप से ‘फ्रीज’ कर दिया गया है ताकि आरोपी उसे बेचकर भाग न सके। जांच पूरी होने तक वे इस घर को किसी को ट्रांसफर भी नही कर सकते हैं। अगर कोर्ट में आरोप साबित हो जाते हैं, तब प्रॉपर्टी कब्जे में ले ली जा सकती है। 5. क्या इस घर का कुछ हिस्सा पहले भी कुर्क हुआ था? हां, नवंबर 2025 में इसी केस में ED ने इसी प्रॉपर्टी का एक हिस्सा कुर्क किया था, जिसकी कीमत ₹473.17 करोड़ थी। अब पूरी इमारत को इस कार्रवाई के दायरे में ले लिया गया है। 6. अब तक इस केस में कुल कितनी संपत्ति कुर्क की जा चुकी है? इस केस में कुर्क की गई कुल संपत्तियों की वैल्यू लगभग ₹15,700 करोड़ तक पहुंच गई है। ED प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत यह कार्रवाई कर रही है। 7. अनिल अंबानी की मुश्किलें अचानक इतनी क्यों बढ़ गईं? सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद, जांच एजेंसी ने अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) के खिलाफ बैंक धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं के कई मामलों की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया है। इसी वजह से जांच में अब तेजी आई है। 8. क्या मुकेश अंबानी का इस केस से कोई संबंध है? नहीं। अनिल अंबानी एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी के छोटे भाई हैं, लेकिन दोनों का बिजनेस साम्राज्य 20 साल पहले अलग हो चुका है। यह केस पूरी तरह से अनिल अंबानी के ग्रुप और उनकी कंपनियों के मैनेजमेंट से जुड़ा है। मुकेश अंबानी इसमें शामिल नहीं है। 9. आगे क्या हो सकता है? अनिल अंबानी के बयानों और कंपनी के दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। अगर गड़बड़ी के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो आने वाले समय में गिरफ्तारी या नई चार्जशीट दाखिल हो सकती है।
Anil Ambanis Mumbai Property Seized

मुंबई3 मिनट पहले कॉपी लिंक यह कार्रवाई RCOM और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ चल रही जांच का हिस्सा है। (फाइल फोटो) प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी के मुंबई स्थित बंगले ‘एबोड’ को कुर्क कर लिया है। PTI के अनुसार इसकी कीमत करीब 3,716 करोड़ रुपए आंकी गई है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA) के तहत की गई है। मामला उनकी ग्रुप कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) द्वारा किए गए कथित बैंक फ्रॉड से जुड़ा है। अनित अंबानी पर 40 हजार करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड मामले में जांच चल रही है। पाली हिल में स्थित है 17 मंजिला यह घर अनिल अंबानी का यह बंगला मुंबई के सबसे पॉश इलाके पाली हिल में स्थित है। 66 मीटर ऊंचे इस बंगले में कुल 17 फ्लोर हैं। यह देश के सबसे महंगे रिहायशी घरों में गिना जाता है। ED ने इस संपत्ति को कुर्क करने के लिए एक प्रोविजनल ऑर्डर जारी किया है। बैंक धोखाधड़ी के मामले में लंबे समय से चल रही जांच के बाद केंद्रीय एजेंसी ने यह बड़ा कदम उठाया है। RCOM से जुड़ा है पूरा मामला यह पूरी कार्रवाई रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ चल रही जांच का हिस्सा है। आरोप है कि बैंक से लिए गए लोन की राशि का गलत इस्तेमाल किया गया और उसे अन्य कार्यों में डायवर्ट किया गया। ED पिछले काफी समय से अनिल अंबानी और उनके ग्रुप की वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही थी। इससे पहले भी अंबानी से इस मामले में पूछताछ की जा चुकी है। कंपनी पर कर्ज और दिवालिया होने की प्रक्रिया RCOM पिछले कई सालों से वित्तीय संकट से जूझ रही है। भारी कर्ज के बोझ तले दबी यह कंपनी फिलहाल इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत दिवालिया होने की प्रक्रिया से गुजर रही है। क्या होता है प्रोविजनल अटैचमेंट का मतलब? ED द्वारा प्रॉपर्टी अटैच किए जाने का मतलब है कि अब इस संपत्ति को बेचा या ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। अगर अदालत में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप साबित हो जाते हैं, तो भविष्य में बैंकों के बकाया पैसे की वसूली के लिए इस बंगले की नीलामी भी की जा सकती है। हालांकि, अनिल अंबानी इस आदेश के खिलाफ ट्रिब्यूनल या हाई कोर्ट में अपील कर सकते हैं। अब तक कई प्रॉपर्टीज अटैच इससे पहले भी अनिल अंबानी बैंक फ्रॉड मामले में अनिल अंबानी की कई प्रॉपर्टी अटैच हो चुकी हैं। अटैच की गई प्रॉपर्टीज दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मुंबई, पुणे, ठाणे, हैदराबाद, चेन्नई, कांचीपुरम और ईस्ट गोदावरी जैसे शहरों में हैं। इनमें रेसिडेंशियल यूनिट्स, ऑफिस स्पेस और लैंड पार्सल शामिल हैं। खासकर अनिल अंबानी का पाली हिल रेसिडेंस सबसे हाई-प्रोफाइल है। अब तक करीब 15 हजार करोड़ की प्रॉपर्टी अटैच हो चुकी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
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मुंबई3 मिनट पहले कॉपी लिंक ED के खिलाफ यह कार्रवाई RCOM और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ चल रही जांच का हिस्सा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी के मुंबई स्थित बंगले ‘एबोड’ को अटैच यानी जब्त कर लिया है। PTI के अनुसार इसकी कीमत करीब 3,716 करोड़ रुपए आंकी गई है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA) के तहत की गई है। मामला उनकी ग्रुप कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) द्वारा किए गए कथित बैंक फ्रॉड से जुड़ा है। अनिल अंबानी पर 40 हजार करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड मामले में जांच चल रही है। अनिल अंबानी का यह बंगला मुंबई के सबसे पॉश इलाके पाली हिल में स्थित है। 66 मीटर ऊंचे इस बंगले में कुल 17 फ्लोर हैं। यह देश के सबसे महंगे रिहायशी घरों में गिना जाता है। ED ने इस संपत्ति को कुर्क करने के लिए एक प्रोविजनल ऑर्डर जारी किया है। बैंक धोखाधड़ी के मामले में लंबे समय से चल रही जांच के बाद केंद्रीय एजेंसी ने यह बड़ा कदम उठाया है। RCOM से जुड़ा है पूरा मामला यह पूरी कार्रवाई रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ चल रही जांच का हिस्सा है। आरोप है कि बैंक से लिए गए लोन की राशि का गलत इस्तेमाल किया गया और उसे अन्य कार्यों में डायवर्ट किया गया। ED पिछले काफी समय से अनिल अंबानी और उनके ग्रुप की वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही थी। इससे पहले भी अंबानी से इस मामले में पूछताछ की जा चुकी है। RCOM पिछले कई सालों से वित्तीय संकट से जूझ रही है। भारी कर्ज के बोझ तले दबी यह कंपनी फिलहाल इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत दिवालिया होने की प्रक्रिया से गुजर रही है। क्या होता है प्रोविजनल अटैचमेंट का मतलब? ED द्वारा प्रॉपर्टी अटैच किए जाने का मतलब है कि अब इस संपत्ति को बेचा या ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। अगर अदालत में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप साबित हो जाते हैं, तो भविष्य में बैंकों के बकाया पैसे की वसूली के लिए इस बंगले की नीलामी भी की जा सकती है। हालांकि, अनिल अंबानी इस आदेश के खिलाफ ट्रिब्यूनल या हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। अब तक कई प्रॉपर्टीज अटैच इससे पहले भी अनिल अंबानी बैंक फ्रॉड मामले में अनिल अंबानी की कई प्रॉपर्टी अटैच हो चुकी हैं। अटैच की गई प्रॉपर्टीज दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मुंबई, पुणे, ठाणे, हैदराबाद, चेन्नई, कांचीपुरम और ईस्ट गोदावरी जैसे शहरों में हैं। इनमें रेसिडेंशियल यूनिट्स, ऑफिस स्पेस और लैंड पार्सल शामिल हैं। खासकर अनिल अंबानी का पाली हिल रेसिडेंस सबसे हाई-प्रोफाइल है। अब तक करीब 15 हजार करोड़ की प्रॉपर्टी अटैच हो चुकी है। ———————– अनिल अंबानी से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… अनिल अंबानी को फ्रॉड घोषित कर सकेंगे बैंक:बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहत वापस ली, ₹40 हजार करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी को बैंक अब फ्रॉड घोषित कर सकेंगे। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 23 फरवरी को उन्हें मिली राहत का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने दिसंबर 2025 में 40 हजार करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड मामले में बैंकों को फ्रॉड घोषित करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा को बड़ी कानूनी राहत:150 करोड़ रुपए के बिटकॉइन मनी लॉन्ड्रिंग केस में मिली बेल, स्पेशल कोर्ट ने दी जमानत

बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के पति और बिजनेसमैन राज कुंद्रा को बिटकॉइन स्कैम मामले में न्यायिक जमानत मिल गई है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक मुंबई की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने कुंद्रा को 150 करोड़ रुपए के कथित क्रिप्टो पोंजी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बेल दे दी। यह मामला पिछले साल ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) द्वारा दर्ज किए गए चार्जशीट के आधार पर शुरू हुआ था, जिसमें बताया गया कि राज कुंद्रा के पास 285 बिटकॉइन थे, जिनकी मूल्यवृद्धि आज के हिसाब से लगभग 150.47 करोड़ रुपए बताई गई। यह बिटकॉइन कथित तौर पर स्कैम के मास्टरमाइंड अमित भारद्वाज की ओर से प्राप्त हुआ था। ईडी का तर्क है कि यह क्रिप्टो संपत्ति अपराध की कमाई है, जिसे कुंद्रा ने बिटकॉइन माइनिंग के नाम पर यूक्रेन में एक प्रोजेक्ट के लिए प्राप्त किया था, लेकिन वह प्रोजेक्ट कभी शुरू नहीं हो पाया। इसके बावजूद, आरोपियों में शामिल राज कुंद्रा ने इन बिटकॉइन को अपने पास रखा और उनका इस्तेमाल किया। ईडी की चार्जशीट में यह भी आरोप लगाया गया कि कुंद्रा ने बिटकॉइन लेन-देने में खुद को केवल मध्यस्थ बताने की कोशिश की, लेकिन उसे समर्थन देने के लिए कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सके। चार्जशीट के अनुसार, एक टर्म शीट नामक समझौता असल में उनके और अमित भारद्वाज के बीच हुआ था, जिससे यह साबित होता है कि वह मध्यस्थ नहीं बल्कि लाभार्थी थे। जमानत के दौरान कोर्ट ने कहा कि कुंद्रा ने जांच एजेंसी के साथ सहयोग किया है और चूंकि उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई थी, इसलिए अब उन्हें कस्टडी में रखने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि कोर्ट ने कुछ शर्तें भी लगाई हैं, जिनमें यह शामिल है कि उन्हें अगली सुनवाई के लिए कोर्ट में पेश होना होगा। कोर्ट परिसर से बाहर निकलते समय राज कुंद्रा को मीडिया के कैमरों के सामने मुस्कुराते हुए भी देखा गया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं और चर्चा का विषय बने हुए हैं। अब मामला आगे की सुनवाई के लिए ड्राफ्ट किया जाएगा, जहां आगे की कानूनी कार्रवाई और सबूतों की समीक्षा होगी।









