Pak Punjabi Womans Controversial Statement on Sikhs with Muslim Husband| Viral Video

लाइव वीडियो में बोलती सरबजीत कौर और साथ में उसका पाकिस्तानी पति नासिर हुसैन। सिख श्रद्धालुओं की आड़ में पाकिस्तान जाकर मुस्लिम व्यक्ति से निकाह करने वाली पंजाबी महिला सरबजीत का नया VIDEO सामने आया है। यह वीडियो टिकटॉक पर बनाया गया है, जिसमें सरबजीत के साथ उसका मुस्लिम पति नासिर हुसैन भी नजर आ रहा है। इस वीडियो में सरबजीत सिखों . वह सिखों के पाकिस्तान आने पर सवाल उठाने के साथ कह रही है कि अगर पाकिस्तान वाले एक हो जाएं तो इनकी रोजी-रोटी बंद हो जाए। इससे पहले सरबजीत को खालिस्तानियों का सपोर्ट का वीडियो सामने आया था। जिसमें उन्होंने सरबजीत को बुआ और उसके मुस्लिम पति नासिर को अपना फुफ्फड़ बताते हुए मदद का भरोसा दिया था। वहीं सरबजीत के पहले पंजाबी NRI पति करनैल सिंह ने भी लाहौर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। जिसमें उसने दावा किया कि पाकिस्तानी नासिर हुसैन ने ब्लैकमेल कर सरबजीत को पाकिस्तान बुलाया। फिर उसके साथ जबरदस्ती शादी की। उसने हाईकोर्ट में नासिर पर रेप केस दर्ज कर सरबजीत को भारत लौटाने की मांग की है। इस पर कोर्ट ने उससे जुड़े सारे डॉक्यूमेंट्स तलब किए हैं। टिकटॉक के लाइव वीडियो में बोलती सरबजीत कौर, इस दौरान उसका पाकिस्तानी पति भी पीछे बैठा हुआ है। पहले जानिए, वीडियो में सरबजीत क्या कह रही सरबजीत अपने पाकिस्तानी पति नासिर हुसैन के साथ टिकटॉक पर लाइव आई, उस समय दोनों को 200 से ज्यादा लोग लाइव देख रहे थे। इस दौरान सरबजीत कहती है- अगर इस्लाम वाले एक हो जाएं ना, तो इनका रोटी-पानी बंद हो जाएगा। हमने इनसे कुछ लेकर खाना है क्या? अगर सरदार होंगे तो अपने घर में होंगे। ये तो मेरी @$%# के बराबर हैं — मेरी टूटी @$%# , जिसे मैंने कूड़े में फेंक दिया है। इसके बाद वह आगे कहती है- ये लोग पाकिस्तान क्यों आते हैं? पाकिस्तान तो हमारा है, मुसलमानों का है। मैं यहां अपना घर बसाने के लिए आई हूं ऐश करने के लिए नहीं। इस दौरान लाइव में एक व्यक्ति कमेंट करता है- स्वाद लेते-लेते लाहौर पहुंच गई। इतने में सरबजीत का पाकिस्तानी पति तंज भरे लहजे में बोलता है, अगर कोई और भी है, तो उसे भी इधर भेज देना। इसके बाद उनके लाइव में जुड़ा एक व्यक्ति कहता है- यहां 200 लोग देख रहे हैं, नीचे कमेंट कर दो कि इसने सही किया या गलत, लोग जवाब देंगे। दूसरा व्यक्ति सरबजीत के पक्ष में कहता है- इसमें गलत क्या है? यह उसकी निजी जिंदगी है। क्या वह लोगों से पूछकर अपनी जिंदगी गुजारेगी?। फिर पहले वाला व्यक्ति पूछता है- जो इसके भारत में बच्चे हैं, उनका क्या? इस पर सरबजीत भड़क जाती है, वह कहती है- तू कौन होता है मुझे बोलने वाला? इस दौरान उसका पाकिस्तानी पति नासिर उसे चुप कराने की कोशिश करता है, लेकिन सरबजीत इतनी गुस्से में आ जाती है कि उस व्यक्ति को मां-बहन की गालियां देने लगती है। इसके बाद सरबजीत गुस्से में कहती हैं, आप लोग लाहौर, पाकिस्तान क्यों आते हो? ननकाना साहिब गुरुद्वारा में क्या करने आते हो? तब तो मिन्नतें करते हो कि हमारा वीजा लगवा दो। आखिर में वह धमकी देते हुए कहती है कि अब अगर पाकिस्तान आए ना, तो इनकी लाशें ही भारत जाएंगी। हालांकि दैनिक भास्कर इस वीडियो में कही बातों की पुष्टि नहीं करता। मुस्लिम पति नासिर हुसैन के साथ खुश नजर आती सरबजीत कौर। सरबजीत पाकिस्तान कैसे पहुंची, 3 पॉइंट में जानिए सिख श्रद्धालुओं के साथ गई, वापस नहीं आई: सरबजीत कौर 4 नवंबर 2025 को श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर 1932 श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ अटारी बॉर्डर के जरिए पाकिस्तान गई थी। जत्था 10 दिनों तक विभिन्न गुरुधामों के दर्शन करने के बाद भारत लौट आया। लेकिन वापसी के समय 1922 श्रद्धालु ही लौटे। सरबजीत कौर जत्थे में शामिल नहीं मिलीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित भारतीय एजेंसियों ने सरबजीत कौर की तलाश शुरू की। निकाहनामा वायरल होने से खुलासा हुआ: भारतीय दूतावास और पाकिस्तान स्थित अधिकारियों से भी संपर्क साधा गया ताकि महिला का पता लगाया जा सके। इसी बीच सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के शेखुपुरा की मस्जिद में हुआ निकाहनामा वायरल हुआ। जिसके बाद दावा किया गया कि सरबजीत कौर ने इस्लाम स्वीकार कर नाम बदलकर ‘नूर हुसैन’ रख लिया है। उसने नासिर हुसैन नाम के पाकिस्तानी नागरिक से निकाह कर लिया। पाकिस्तान पुलिस ने कस्टडी में लिया, फिर छोड़ दिया: पाकिस्तान में भी सरबजीत को लेकर सवाल उठे क्योंकि उसके पास पाकिस्तान में रहने की परमिशन नहीं थी। जिसको लेकर मामला कोर्ट तक पहुंच गया। इसके बाद पुलिस ने उसे ननकाना साहिब से अरेस्ट किया। फिर कुछ दिन लाहौर के शेल्टर होम में रखा। इसके कुछ दिन बाद वह रिहा हो गई। पुलिस के हिरासत में लेने के बाद सरबजीत इस तरह से नजर आई थी। सरबजीत ने बताई लव स्टोरी, 2 पॉइंट में जानिए मुंह में दांत न भी रहते तो पाकिस्तान जाती: सरबजीत कौर की रिहाई के बाद पहली बार उसकी बातचीत का वीडियो सामने आया। इसमें पाकिस्तानी मीडिया से बात करते हुए सरबजीत ने कहा कि अगर सच्चा प्यार होता है, तो दिल में यह एहसास जरूर रहता है कि हम एक-दूसरे से मिलेंगे। हमारा प्यार आज का नहीं, बल्कि पिछले 8 साल से है। अगर मुंह में दांत भी न रहते, तब भी मैं पाकिस्तान जरूर आती। फेसबुक पर दोस्ती, फिर प्यार हुआ, पति UK रहता: इसके बाद पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल को इंटरव्यू में सरबजीत ने अपनी लव स्टोरी भी बताई थी। सरबजीत ने कहा था- नासिर हुसैन से बातचीत 2016 में फेसबुक के जरिए शुरू हुई थी, जो बाद में दोस्ती से प्यार में बदल गई और 2025 के अंत तक शादी कर ली। सरबजीत ने बताया कि उसका पति 22 साल से यूके में है और वह मोबाइल अपने बच्चों से छिपाकर रखती थी। पाकिस्तान के यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में सरबजीत लव स्टोरी बताते हुए खुश नजर आई थी। पहला पति लाहौर हाईकोर्ट पहुंचा, बोला- ब्लैकमेल-रेप किया इस मामले में सरबजीत के पहले पति करनैल सिंह की भी एंट्री हो चुकी है। करनैल ने लाहौर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा
Chhindwara Girl Rape Death Threat Case; Muslim Pathan

ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आने के बाद हिंदूवादी संगठनों में आक्रोश फैल गया। देर रात करीब कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव किया। छिंदवाड़ा में एक युवती को हिंदूवादी संगठन के समर्थन के कारण जान से मारने की धमकी दी गई। युवकों ने फोन कॉल पर आपत्तिजनक और धमकी भरी बातें कीं। युवकों ने खुद को पठान बताते हुए कहा- तेरे समाज की चार लड़कियों को चलाता हूं। वो मेरे लिए जहर खाने को तैयार ह . कॉल की ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आने के बाद हिंदूवादी संगठनों में आक्रोश फैल गया। देर रात करीब 1000 कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और थाने का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी थी कि आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो छिंदवाड़ा बंद कर दिया जाएगा। कोतवाली निरीक्षक आशीष कुमार ने बताया कि पुलिस ने कार्रवाई करते हुए धमकी देने वाले तीनों युवकों बिलाल, दिलावर और सलमान को पकड़ लिया है। इस पर हिंदूवादी संगठन के नेता अरविंद राजपूत ने कहा कि पुलिस ने हमारी शिकायत पर तीन युवकों को हिरासत में ले लिया है। हमने आंदोलन की चेतावनी गिरफ्तारी नहीं होने पर दी थी। मांग पूरी हो गई है। मंगलवार रात को हिंदू संगठन के लोग बड़ी संख्या में थाने पहुंचे थे। पढ़िए युवती और धमकाने वालों के बीच की बातचीत… युवक: हमको पठान बोलते हैं। छिंदवाड़ा में जब वह (T राजा) 16 तारीख को आया था तो हमने 15 तारीख को नरेंद्र पटेल (हिंदू गर्जना रैली के आयोजक) को रात में बैठाया और उसको यह भी समझाए थे कि छिंदवाड़ा में गाली-गलौज नहीं करना। लेकिन उसके बाद भी आखिरी-आखिरी में उसने बोल ही दिया। आदिवासी कमेटी के लोग हमसे मिले। उन्होंने हमें बताया, जिसके कारण हमने रैली निकाली। युवक: अपनी स्टोरी डिलीट करो। युवती: डिलीट तो नहीं होगी स्टोरी। युवक: डिलीट नहीं होगी ना, तो ठीक है हम %#@₹₹%%# उसकी टकला (अरविंद राजपूत) जो भी है छोटी बाजार का, उसकी #₹%&*@ का दम रखते हैं हम लोग। जो तुम लोग बोलते न हम रेप कर रहे लड़कियों का, सही में कर रहे। पीछे से दूसरा युवक- मेरे पास चार गर्लफ्रेंड हैं तेरे समाज की…चार। और चारों जहर खाती हैं मेरे लिए। युवती: इसको समझा दो कि समाज में न जाए। नहीं तो मैं उकसी न तो घर में घुस कर…. (इस बीच अलग दो लड़के पीछे से लगातार गाली देते सुनाई देते हैं) युवती: भैया ये गाली दे रहे हैं। मुझे बताओ क्या करना है। युवक: तू स्टोरी डिलीट कर। युवती: नहीं, वो तो नहीं होंगी। 24 घंटे बाद अपने आप होगी। युवक : ठीक है…तू बता, तू कहां है…तेरा घर कहां है? युवती: आप जाओ, थाने में मिलती हूं। युवक: हां, जा थाने। अब जानिए इस पूरे विवाद की जड़ क्या है…? टी राजा ने हिंदू गर्जना रैली में दिया था बयान तेलंगाना के भाजपा विधायक टी राजा सिंह 16 फरवरी को छिंदवाड़ा पहुंचे थे। वे यहां आयोजित हिंदू गर्जना रैली में शामिल हुए थे। रैली के दौरान उन्होंने एक वर्ग विशेष को लेकर विवादित बयान दिया था। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का विरोध प्रदर्शन टी राजा के बयान के विरोध में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने 23 फरवरी को रैली निकाली। पार्टी ने टी राजा और आयोजन समिति के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की थी। हिंदूवादी संगठनों ने विरोध रैली पर सवाल उठाते हुए कहा था कि टी राजा का बयान आतंकवादियों को लेकर था। ऐसे में विरोध करना आतंकवादियों का समर्थन करने जैसा है। हिंदूवादी संगठन के नेता और रामलीला मंडल के अध्यक्ष अरविंद राजपूत ने कहा था- अगर इसी तरह हालात रहे, तो ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा। सोशल मीडिया स्टेटस के बाद युवती को धमकी अरविंद राजपूत के इसी बयान को 22 साल की एक युवती ने मंगलवार सुबह अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर स्टेटस के रूप में शेयर किया। स्टेटस लगाने के कुछ घंटों बाद, करीब दो बजे युवती के पास इंस्टाग्राम कॉल आया। अलग-अलग आवाजों में बात करते हुए धमकाने लगे युवती ने कॉल उठाई तो उधर से तीन से चार युवक अलग-अलग आवाजों में बात करते हुए उसे धमकाने लगे। उन्होंने स्टोरी हटाने का दबाव बनाया। युवती के मना करने पर गाली-गलौज शुरू कर दी गई और जान से मारने की धमकी दी गई। जब युवती ने गाली देने से मना किया तो आरोपियों ने उसका पता पूछना शुरू कर दिया। युवती ने कहा कि वह थाने में मिलेगी। इस पर युवकों ने धमकाते हुए कहा कि तू थाने ही आ जा। युवती ने दोस्तों को बात बताई और थाने पहुंची घटना के बाद युवती ने पूरी बात अपने दोस्तों को बताई। जानकारी हिंदूवादी संगठन के नेता अरविंद राजपूत तक पहुंची। रात करीब साढ़े 10 बजे युवती अपने दोस्तों और परिजन के साथ थाने पहुंची। थोड़ी देर बाद राजपूत भी कार्यकर्ताओं के साथ थाने आ गए और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। रात एक बजे थाने का घेराव, गिरफ्तारी की मांग धीरे-धीरे भीड़ बढ़ती गई और रात करीब 1 बजे थाने के सामने करीब एक हजार लोग जमा हो गए। प्रदर्शनकारियों ने थाने का घेराव कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। मौके पर सीएसपी अजय राणा पहुंचे और जल्द गिरफ्तारी का आश्वासन दिया। रात करीब 2 बजे प्रदर्शन इस शर्त पर खत्म हुआ कि अगर बुधवार सुबह 11 बजे तक आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए, तो छिंदवाड़ा जाम किया जाएगा। बुधवार सुबह पुलिस ने तीनों युवकों को पकड़ लिया है। CSP और कोतवाली निरीक्षक से बात करते अरविंद राजपूत। कोतवाली निरीक्षक आशीष कुमार ने बताया कि युवती की शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। कॉल डिटेल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जानकारी खंगाली जा रही है। इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… भाजपा विधायक बोले- ‘10-10 बांग्लादेशियों के सिर काटेंगे टी. राजा सिंह छिंदवाड़ा में 16 फरवरी को आयोजित हिंदू गर्जना रैली में शामिल हुए थे। तेलंगाना के भाजपा विधायक टी. राजा सिंह छिंदवाड़ा में 16 फरवरी को आयोजित हिंदू गर्जना रैली में कहा था- अगर सरकार उनकी मांगें मानती है तो उनके बजरंगी 10-10 बांग्लादेशियों का सिर काटेंगे। उनका कभी राज आया तो वह एक आतंकी का सिर काटने वाले को 50 हजार रुपए का इनाम देंगे। पढ़ें पूरी खबर…
Sambhal Honor Killing| Love Affair Crime Story| Muslim Girl Hindu Boy Love Story

संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले के मतावली पट्टी जग्गू गांव की गलियों में आज सन्नाटा है, लेकिन हवाओं में एक बेबस चीख और एक पिता के पत्थर दिल बयानों की गूंज है. यह कहानी 18 साल की रूपजहां और शिवम सैनी के उस अधूरे इश्क की है, जिसका अंत निकाह के मंडप में नहीं, बल्कि श्मशान और कब्रिस्तान के बीच नफरत की भेंट चढ़ गया. एक तरफ वो प्रेमी था जिसके साथ रूपजहां ने सात जन्मों के वादे किए थे, और दूसरी तरफ वो सगा भाई था जिसके हाथों में बहन की सुरक्षा की डोर होनी चाहिए थी, लेकिन उसने उसी दुपट्टे से रूपजहां का दम घोंट दिया जिसे वह अपनी शान समझती थी. दरअसल, भाई ने अपनी सगी बहन का गला महज इसलिए घोंट दिया क्योंकि वह एक दूसरे मजहब के लड़के से मोहब्बत करने की ‘खता’ कर बैठी थी. चारपाई पर बिछी लाश और पिता की बेखौफ बातें गुरुवार की रात करीब 11 बजे जब संभल के एसएसपी कुलदीप सिंह मतावली पट्टी गांव पहुंचे, तो मंजर रूह कंपा देने वाला था. घर के आंगन में बिछी एक चारपाई पर 18 साल की रूपजहां का बेजान शरीर पड़ा था. उसी घर के एक कोने में खड़ा उसका भाई जाने आलम और पिता नौशे आलम पुलिस को देख जरा भी विचलित नहीं थे. जाने आलम ने खुद पुलिस को फोन कर कहा था, साहब, मैंने अपनी बहन को मार डाला है, आकर मुझे ले जाओ. हैरानी की बात पुलिस के लिए यह नहीं थी कि हत्या हुई है, बल्कि हैरानी इस बात पर थी कि पिता नौशे के चेहरे पर न तो बेटी को खोने का गम था और न ही बेटे के जेल जाने का डर. नौशे ने कैमरे के सामने खड़े होकर जो कहा, वह समाज के उस काले चेहरे को उजागर करता है जिसे ‘ऑनर किलिंग’ कहा जाता है. पिता का कबूलनामा, ‘वो जिद पर अड़ी थी, मारना ही सही था’नौशे आलम की बातों में नफरत और कट्टरता का मिला-जुला स्वर था. उसने दोटूक शब्दों में कहा, मेरी बेटी शिवम सैनी नाम के लड़के से प्यार करती थी. वह उससे शादी करना चाहती थी और वह उसके साथ भाग गई थी. गांववाले मेरा मजाक उड़ा रहे थे, गलियों से गुजरना मुश्किल हो गया था. मैं परेशान था. दो दिन पहले वह शिवम के साथ भाग गई थी. हमने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी. नौशे आगे कहता है, हम मुसलमान हैं. बेटी का प्रेमी सैनी (हिंदू) है. हम ऐसी शादी कैसे कर देते? अगर हमारी बिरादरी में शादी की बात होती, तो हम करा देते. जब वह घर आई और फिर से उसी के पास जाने की जिद करने लगी, तो मेरे बेटे ने दुपट्टे से उसका गला घोंट दिया. मुझे कोई पछतावा नहीं है. ऐसी लड़की को मारना ही सही है, इससे घर की इज्जत बच गई. ‘प्रधान ने मांगी घूस, पुलिस कराना चाहती थी फेरे’: चाचा का आरोपइस पूरी साजिश में एक और सनसनीखेज पहलू सामने आया है रुपयों का लेनदेन. रूपजहां के चाचा दुलारे हुसैन ने ऑन-कैमरा बताया कि इस पूरी वारदात के पीछे गांव के प्रधान और पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है. दुलारे के मुताबिक, जब रूपजहां और शिवम थाने पहुंचे थे, तो वहां पंचायत हुई. चाचा दुलारे ने बताया, थाने के एसओ साहब दोनों के फेरे कराने को तैयार थे. उन्होंने कहा था कि लड़की बालिग है. उन्होंने हमसे अंगूठा लगवाने को कहा, तो हम वहां से भाग आए. इसके बाद प्रधान लेखराज ने बीच-बचाव किया और बेटी को वापस लाने के बदले 3 लाख रुपये मांगे. प्रधान ने कहा कि पुलिस और मामले को रफा-दफा करने के लिए पैसे लगेंगे. हमने किसी तरह 1.5 लाख रुपये दिए. परिजनों का आरोप है कि पैसे देने के बाद वे बेटी को घर तो ले आए, लेकिन उसकी ‘आजादी’ छीनने के लिए. जब घर के भीतर बंद रूपजहां ने फिर से शिवम का नाम लिया, तो भाई जाने आलम का खून खौल उठा. एक साल का इश्क और दो महीने पहले की गुप्त शादीरूपजहां और शिवम सैनी का घर एक-दूसरे से महज 400 मीटर की दूरी पर है. पिछले एक साल से दोनों के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था. शिवम के परिवार को इस रिश्ते से ऐतराज नहीं था, लेकिन रूपजहां का परिवार इसे मजहबी चश्मे से देख रहा था. इधर, शिवम की मां हरप्यारी का रो-रोकर बुरा हाल है. उन्होंने पुलिस को एक ऐसा सच बताया जिसने इस केस की दिशा बदल दी. हरप्यारी के मुताबिक, मेरे बेटे और रूपजहां ने दो महीने पहले ही चोरी-छिपे शादी कर ली थी. वे एक-दूसरे के हो चुके थे. रूपजहां हमारी बहू थी. बुधवार को जब वे घर से भागे थे, तो वे अपनी सुरक्षा की गुहार लगाने थाने गए थे. हरप्यारी ने ही अपनी ‘बहू’ की हत्या के आरोप में रूपजहां के भाई जाने आलम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है. अब पुलिस इस मामले को एक पत्नी की हत्या के नजरिए से भी देख रही है. साजिश के तहत बुलाई गई मौत, अमरोहा से घर तक का सफरबुधवार को जब रूपजहां और शिवम थाने पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें बालिग होने के नाते साथ रहने की अनुमति दे दी थी. शिवम सुरक्षा के लिहाज से रूपजहां को लेकर अमरोहा में अपनी एक रिश्तेदारी में चला गया था. उसे लगा था कि वह सुरक्षित है. लेकिन घर पर पिता और भाई ने उसे वापस लाने का जाल बुना. प्रधान की मदद से उसे ‘सब ठीक हो जाएगा’ का झांसा देकर घर बुलाया गया. गुरुवार की शाम जब रूपजहां अपने घर की दहलीज पर कदम रखी, उसे नहीं पता था कि यह उसका आखिरी सफर है. रात करीब 10:30 बजे, जब परिवार के अन्य सदस्य एक शादी में गए हुए थे (जैसा कि कुछ रिपोर्ट में दावा है), घर में सिर्फ जाने आलम और रूपजहां थे. इसी दौरान विवाद हुआ और जाने आलम ने दुपट्टे का फंदा बनाकर अपनी बहन की जीवनलीला समाप्त कर दी. इस घटना ने खड़े किए कई कड़वे सवालइस हत्या के मामले में केस दर्ज हो चुका है. लेकिन इस घटना ने समाज के सामने कई कड़वे सवाल खड़े कर दिए हैं.
Shivaji Jayanti Violence Photos; Hyderabad Hindu Muslim

Hindi News National Shivaji Jayanti Violence Photos; Hyderabad Hindu Muslim | Karnataka Stone Pelting बागलकोट/हैदराबाद1 दिन पहले कॉपी लिंक देशभर में 19 फरवरी को छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाई गई। इस दौरान कुछ राज्यों से हंगामे की खबर भी आई। कर्नाटक के बागलकोट में शिवाजी जयंती पर निकाले जा रहे जुलूस के दौरान पथराव हुआ। इसके बाद तनाव की स्थिति बन गई। यहां भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 के लागू की गई। हैदराबाद में गुरुवार रात मस्जिद के सामने से जुलूस निकालने पर दो समुदाय के बीच विवाद की स्थिति बनी। यहां पहले एक यूट्यूबर से मस्जिद की रिकॉर्डिंग को लेकर विवाद हुआ। इसी दौरान मस्जिद के सामने से जुलूस निकालने पर दोनों समुदाय आमने-सामने आ गए। पुलिस ने किसी तरह स्थिति संभाली और लोगों को मौके से हटाया। बागलकोट में शिवाजी जयंती के दौरान हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों में विवाद हुआ। 1. कर्नाटक का पूरा मामला बागलकोट में गुरुवार रात करीब 10 बजे शिवाजी जयंती का जुलूस निकाला जा रहा था। जब वह पानका मस्जिद इलाके से गुजरा, तभी उस पर पत्थर और चप्पल फेंके गए। बागलकोट एसपी सिद्धार्थ गोयल ने कहा कि पथराव में पुलिसकर्मी घायल हुआ। एसपी ने कहा कि पुलिस सीसीटीवी खंगाल रही है। फुटेज की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। इलाके में 24 फरवरी की आधीरात तक BNS की धारा 163 लागू रहेगी। इलाके में स्थिति कंट्रोल में है। घटना के चश्मदीद उमेश के मुताबिक जुलूस के दौरान मस्जिद के पास घटना हुई। करीब 8-10 लोगों ने वहां पत्थर और चप्पल फेंके। अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। हैदराबाद के अंबरपेट में शिवाजी जयंती जुलूस को रोकते लोग। 2. हैदराबाद में विवाद हैदराबाद के अंबरपेट में गुरुवार रात एक यूट्यूबर जामा मस्जिद के पास वीडियो बना रहा था। इसी दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने आपत्ति जताई। दावा है कि यूट्यूबर से मारपीट हुई। इसी दौरान घटना मस्जिद के सामने से छत्रपति शिवाजी महाराज की शोभायात्रा भी गुजर रही थी। इस कारण दोनों समुदाय के बीच और हंगामा हो गया। दोनों समुदाय ने जमकर नारेबाजी की। स्थिति बिगड़ने लगी तो ज्यादा पुलिसफोर्स मौके पर बुलाया गया। भीड़ को मौके से हटाया गया। इस दौरान आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। ………………………… यह खबर भी पढ़ें… शिवाजी जयंती- पुणे के शिवनेरी किले में भगदड़, 3 घायल: रास्ता संकरा होने से भीड़ जमा, महिलाएं और बच्चे फंस गए थे पुणे के जुन्नर इलाके में 18 फरवरी की रात शिवनेरी किले पर भगदड़ मचने से 3 लोग घायल हो गए थे। ये सभी छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर किला पहुंचे थे। लोग हाथी दरवाजा और गणेश दरवाजा से किले के अंदर जा रहे थे। रास्ता संकरा होने से भीड़ जमा हो गई। फिर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
सद्भाव और कठोर रेखाएँ: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की लखनऊ यात्रा के संकेतों को समझना | भारत समाचार

आखरी अपडेट:19 फरवरी, 2026, 07:00 IST हिंदुओं से कम से कम तीन बच्चे पैदा करने की भागवत की अपील ने जनसांख्यिकी को अपने संदेश के केंद्र में रखा लोगों को हिंदू धर्म में वापस लाने के लिए ‘घर वापसी’ के प्रयासों में तेजी लाने का भागवत का आह्वान संगठन की वैचारिक पहुंच में निरंतरता का संकेत देता है। फ़ाइल चित्र/पीटीआई हिंदुओं से कम से कम तीन बच्चे पैदा करने का आग्रह करके और इस बात पर जोर देकर कि भारत में मुसलमानों की सभ्यता की जड़ें समान हैं, मोहन भागवत की लखनऊ यात्रा ने राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया। लेकिन मुख्य टिप्पणियों से परे, उत्तर प्रदेश की राजधानी में आरएसएस प्रमुख की दो दिवसीय व्यस्तता गहरे सामाजिक, वैचारिक और राजनीतिक संकेत देती है। अपनी 17-18 फरवरी की यात्रा के दौरान, भागवत ने निराला नगर के सरस्वती शिशु मंदिर में लगभग ढाई घंटे की सामाजिक सद्भाव बैठक में भाग लिया और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। यह आउटरीच आरएसएस के सामाजिक एकजुटता के दीर्घकालिक आख्यान को सुदृढ़ करने के साथ-साथ प्रमुख वैचारिक पदों को पुनः स्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया प्रतीत होता है। सभ्यतागत पहचान और घर वापसी यात्रा के सबसे चर्चित बयानों में से एक भागवत का यह बयान था कि भारत में रहने वाले मुसलमान बाहरी नहीं हैं और अरब से नहीं आए हैं, बल्कि उनकी पैतृक और सभ्यतागत जड़ें समान हैं। साथ ही, लोगों को हिंदू धर्म में वापस लाने के लिए “घर वापसी” के प्रयासों में तेजी लाने का उनका आह्वान संगठन की वैचारिक पहुंच में निरंतरता का संकेत देता है। सांस्कृतिक रणनीति के रूप में जनसांख्यिकीय चिंता हिंदुओं से कम से कम तीन बच्चे पैदा करने की भागवत की अपील ने जनसांख्यिकी को अपने संदेश के केंद्र में रखा। वर्तमान प्रजनन प्रतिस्थापन दर 2.1 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिन समाजों में औसतन तीन से कम बच्चे हैं उनमें दीर्घकालिक गिरावट का जोखिम है। परिवार के आकार को सांस्कृतिक निरंतरता से जोड़कर, आरएसएस प्रमुख ने इस धारणा को मजबूत किया कि जनसांख्यिकीय संतुलन समाज के भविष्य से जुड़ा हुआ है। घुसपैठ पर सख्त रुख अवैध आप्रवासन पर, भागवत के “पता लगाएं, हटाएं और निर्वासित करें” सूत्रीकरण ने एक दृढ़ स्थिति को उजागर किया। उन्होंने अपनी टिप्पणी को सीमा सुरक्षा और नागरिकता पर व्यापक राष्ट्रीय बहस के साथ जोड़ते हुए कहा कि घुसपैठियों को रोजगार नहीं दिया जाना चाहिए। जाति, कानून और सामाजिक सुधार पहचान और जनसांख्यिकी पर मजबूत संदेश के बावजूद, भागवत ने बार-बार सामाजिक सद्भाव पर जोर दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि जाति विभाजन समाज को खंडित कर रहा है और कहा कि जाति-आधारित भेदभाव को खत्म करना हर व्यक्ति और समुदाय की जिम्मेदारी है। यूजीसी दिशानिर्देशों के विवाद पर, उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों का पालन किया जाना चाहिए और यदि त्रुटिपूर्ण है, तो संवैधानिक तरीकों से बदला जाना चाहिए। उन्होंने टकराव के बजाय समन्वय को प्राथमिकता देते हुए नीतिगत असहमति को सामाजिक टकराव में बदलने के प्रति आगाह किया। रोजमर्रा की जिंदगी में सांस्कृतिक अभिकथन भागवत ने परिवारों को पारंपरिक प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया – हिंदी में हस्ताक्षर करना, स्वदेशी पोशाक पहनना, घरों के बाहर तुलसी का पौधा लगाना और “स्वागतम” के बजाय “स्वागतम” को प्राथमिकता देना। ये सुझाव केवल राजनीतिक लामबंदी, दैनिक जीवन में विचारधारा को शामिल करने के बजाय रोजमर्रा की सांस्कृतिक दावेदारी की ओर इशारा करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यूपी में रणनीतिक संदेश राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस यात्रा को उत्तर प्रदेश के उभरते राजनीतिक परिदृश्य के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. शशिकांत पांडे ने कहा कि भागवत की टिप्पणियां वैचारिक एकीकरण और सामाजिक पहुंच के एक संतुलित मिश्रण को दर्शाती हैं। डॉ. पांडे ने कहा, “ऊपरी तौर पर, यात्रा सामाजिक सद्भाव के बारे में थी। लेकिन उन्होंने जिन विषयों को छुआ – जनसांख्यिकी, घुसपैठ, जाति एकता और सभ्यतागत आत्मविश्वास – वे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। वे सार्वजनिक चर्चा को आकार देते हैं और दीर्घकालिक चुनावी कथाओं को प्रभावित करते हैं, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में।” उन्होंने कहा कि एकता के आह्वान को मजबूत पहचान-आधारित संदेश के साथ जोड़कर, आरएसएस प्रमुख ने दोहरे स्वर में प्रहार किया। उन्होंने बताया, “यह रणनीति सामाजिक सामंजस्य पर समावेशी भाषा के साथ मुखर सांस्कृतिक स्थिति को संतुलित करती हुई प्रतीत होती है। इससे आउटरीच को व्यापक बनाते हुए वैचारिक स्पष्टता बनाए रखने में मदद मिलती है।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 19 फरवरी, 2026, 07:00 IST न्यूज़ इंडिया सद्भाव और कठोर रेखाएँ: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की लखनऊ यात्रा के संकेतों को समझना अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)आरएसएस(टी)मोहन भागवत(टी)मुस्लिम(टी)हिंदू
Hindu girls in Pakistan: abduction forced marriage | conversion punishment | how muslim ppc law difference bns act | पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के अपहरण और जबरन शादी की सच्चाई

Pakistan Hindu Girl Story: पाकिस्तान में बालिग या नाबालिग हिंदू या मुस्लिम लड़कियों का अपहरण करके बलात्कार करना, जबरन शादी करना और फिर तलाक दे देना या मार देना कितना बड़ा अपराध है? क्या पाकिस्तान में भी भारत की तरह ही कानून है या फिर अलग? क्या पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों को घर से उठाकर शादी करना या बलात्कार करने की सजा, मुस्लिमों के साथ होने वाली इस तरह की घटनाओं जैसी ही है? क्या पाकिस्तान में भी भारतीय न्याय संहिता या फिर आईपीसी और सीआरपीसी की तरह कानून है? पाकिस्तान पेनल कोड (PPC) की धारा 498B के तहत जबरन शादी को अपराध माना जाता है, इसके बाद भी हिंदू लड़कियों के साथ इस तरह की घटनाएं क्यों ज्यादा हो रही हैं? जानिए जमीनी हकीकत. पाकिस्तान में जबरन शादी करने पर कितने साल की सजा होती है? पाकिस्तान पेनल कोड की धारा 498B के तहत जबरन शादी को अपराध माना जाता है. इसमें 3 से 7 साल की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है. इसी तरह धारा 375 बलात्कार को परिभाषित करती है और धारा 365 अपहरण को. हालांकि, अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर हिंदू और ईसाई लड़कियों के मामलों में यह पाकिस्तानी कानून कमजोर है. अक्सर धर्म परिवर्तन का दावा करके अपराध को जायज ठहरा दिया जाता है. इसी तरह अदालतें शरिया कानून का हवाला देकर पीड़िता को अपहरणकर्ता के साथ रखने का फैसला सुना देती है. पाकिस्तानी कानून भारतीय कानून से कितना अलग है? भारत में कानून ज्यादा सेकुलर हैं और अल्पसंख्यक अधिकारों की सुरक्षा बेहतर है. संविधान की धारा 15, 25 है, लेकिन दोनों देशों में सामाजिक पूर्वाग्रह और राजनीतिक दबाव से न्याय प्रभावित होता है. पाकिस्तान में धार्मिक अदालतें और राजनीतिक प्रभाव ज्यादा हैं, जबकि भारत में हाल के एंटी-कन्वर्जन लॉज को ‘लव जिहाद’ के नाम पर विवादास्पद माना जाता है. पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के साथ क्या होता है? एक कहानी से समझें- यह स्टोरी साल 2012 में पाकिस्तानी हिंदू रिंकल कुमारी पर आधारित है, जो पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के अपहरण और जबरन रूपांतरण का एक प्रमुख उदाहरण है. न्यूज 18 हिंदी ने इसे एक काल्पनिक कथा के रूप में प्रस्तुत किया है, लेकिन तथ्यों पर आधारित और भारत के कानून से तुलना की है. सिंध प्रांत के छोटे से शहर मीरपुर मथेलो में रहने वाली 19 साल की रिंकल कुमारी एक साधारण हिंदू परिवार की बेटी थी. उसके पिता एक स्कूल टीचर थे और रिंकल कॉलेज जाना चाहती थी. एक रात फरवरी 2012 में कुछ लोग उसके घर में घुसे. उन्होंने रिंकल को क्लोरोफॉर्म से बेहोश किया और अपहरण कर लिया. अगले दिन, उसके परिवार को पता चला कि रिंकल को पड़ोसी नवेद शाह ने अपहरण किया है, जो मुस्लिम था. अपहरण के बाद नवेद ने कोर्ट में क्या दावा किया था? नवेद ने दावा किया कि रिंकल ने अपनी इच्छा से इस्लाम कबूल किया और उससे शादी की. लेकिन रिंकल के परिवार ने कहा कि यह जबरन था. रिंकल के पिता ने पुलिस में शिकायत की, लेकिन स्थानीय प्रभावशाली नेता मियां मिथु ने नवेद का साथ दिया. पाकिस्तान में ऐसे मामलों में पीपीसी की धारा 498B के बावजूद, अगर रूपांतरण का दावा हो तो कोर्ट्स शरिया का हवाला देकर पीड़िता को अपहरणकर्ता के साथ रख सकती हैं. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? रिंकल का केस करांची हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. सुनवाई के दौरान रिंकल ने रोते हुए कहा, ‘मैं हिंदू हूं, मुझे जबरन कन्वर्ट किया गया.’ लेकिन दबाव में उसने कोर्ट में नवेद के साथ रहने का बयान दिया. सुप्रीम कोर्ट ने उसे तीन हफ्ते प्रोटेक्टिव कस्टडी में रखा, लेकिन आखिर में उसे नवेद के साथ जाने दिया. यह मामला भारत में होता तो क्या होता? जबकि, परिवार का कहना था कि रिंकल को धमकी दी गई थी. अगर वह वापस आई तो परिवार का कत्ल कर दिया जाएगा. अब भारत से तुलना करें. अगर यह मामला भारत में होता तो उस समय आईपीसी की धारा 366 के तहत अपहरण और शादी के लिए दंड 10 साल तक का होता. अगर रिंकल नाबालिग होती हालांकि वह 19 की है. लेकिन मान लीजिए 17 की होती भारत में नवेद पर POCSO एक्ट लागू होता, जिसमें स्टेट्यूटरी रेप की सजा आजीवन कारावास तक है. भारत में अल्पसंख्यक अधिकारों की सुरक्षा संविधान की किसा धारा के तहत होती है? भारत में अल्पसंख्यक अधिकारों की सुरक्षा संविधान की धारा 25 से होती और एनजीओ या हाई कोर्ट ज्यादा सक्रिय होते. पाकिस्तान में धार्मिक दबाव ज्यादा था, जबकि भारत में सेकुलर फ्रेमवर्क से न्याय की उम्मीद ज्यादा होती. रिंकल की स्टोरी हजारों हिंदू लड़कियों की तरह खत्म हुई. वह कभी घर नहीं लौटी. उसके परिवार ने पाकिस्तान छोड़ दिया और मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठा, लेकिन न्याय नहीं मिला. यह दिखाता है कि कानून होने के बावजूद, सामाजिक और राजनीतिक दबाव कैसे अल्पसंख्यकों को प्रभावित करते हैं. पाकिस्तान की तरह अगर नाबालिग लड़कियों का भारत में अपहरण होता तो कितनी होती सजा? भारत की तरह पाकिस्तान में भी नाबालिग लड़की को अपहरण करके जबरन शादी करना अपराध है. पाकिस्तान में चाइल्ड मैरिज रेस्ट्रेंट एक्ट 1929 के तहत महिलाओं की शादी की न्यूनतम उम्र 16 साल है. वहीं पुरुषों के लिए 18, लेकिन सिंध प्रांत में 2013 के एक्ट और इस्लामाबाद में 2025 के नए कानून के तहत दोनों लिंगों के लिए 18 साल है. पाकिस्तान में लगभग हर साल 1,000 से अधिक अल्पसंख्यक लड़कियां अपहरण, धर्म परिवर्तन और मुस्लिम लड़के के साथ जबरन शादी का शिकार होती हैं. पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों और महिलाओं को सबसे ज्यादा अपराधों का सामना जैसे अपहरण, इस्लाम धर्म अपनाने का मजबूर करना, जबरन शादी, घरेलू दासता और यौन हिंसा से सामना करना पड़ता है. ये अपराध मुख्य रूप से सिंध प्रांत में होते हैं, जहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं.









