इंदौर में साकेतधाम में होंगे प्रभू राम के दर्शन:पंचामृत से होगा अभिषेक, दोपहर 12 बजे होगी जन्मोत्सव आरती

प्राचीन रणजीत हनुमान मंदिर में रामनवमी का पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इसे लेकर पूरी तैयारी भी की जा चुकी है। रामनवमी पर मंदिर में साकेतधाम सजाया गया है। जहां प्रभू राम के दर्शन होंगे। गुरुवार से ही मंदिर में सजावट शुरू कर दी गई थी। भक्तों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि गर्मी में उन्हें परेशानी का सामना ना करना पड़े। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित दीपेश व्यास ने बताया कि रामनवमी के पर्व पर मंदिर में साकेतधाम सजाया गया है। ये अयोध्या का ही प्राचीन नाम है साकेत। रणजीत हनुमान मंदिर में साकेतधाम का स्वरूप दिया है। मंदिर में फूलों से सजावट भी की गई है। जिक-जैक पैटर्न में भक्त लाइन से भगवान के दर्शन कर सकेंगे। गर्मी को देखते हुए भक्तों को दिक्कत ना हो इसके लिए यहां 24 कूलर भी लगाए है। अखंड रामायण की होगी स्थापना, पंचामृत से होगा अभिषेक उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में रामनवमी पर सुबह 6 बजे सात दिवसीय अखंड रामायणजी की स्थापना की जाएगी। 3 अप्रैल को हनुमान जयंती के अगले दिन काकड़ आरती के बाद अखंड रामायणजी का समापन होगा। शुक्रवार सुबह 8 बजे रामजी का पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद रामजी का शृंगार होगा। 12 बजे रामजी की जन्मोत्सव आरती होगी। भक्तों को प्रसाद वितरत किया जाएगा और शाम को भजन संध्या का आयोजन होगा। रणजीत लोक का चल रहा काम रणजीत हनुमान मंदिर में रणजीत लोक का काम भी चल रहा है। जिसके मंदिर का मुख्य गेट बंद है। बड़े पार्किंग से ही भक्तों की एंट्री हो रही है। रामनवमी पर भी यहीं से ही भक्तों की एंट्री होगी और यहीं से बाहर जा सकेंगे। इसके अलावा शहर के अन्य मंदिरों में भी रामनवमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। कई मंदिरों में सुंदर सजावट करने के साथ ही आकर्षक लाइटिंग भी की गई है। मंदिरों को फूलों से भी सजाया जा रहा है।
ओरछा में रामनवमी पर 5 दिवसीय महोत्सव 27 से:बुंदेली गीतकार गाएंगे बधाई, शाम को होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम

निवाड़ी जिले की ओरछा तहसील इस बार रामनवमी पर भव्य और ऐतिहासिक आयोजन की साक्षी बनने जा रही है। रामराजा मंदिर में 27 मार्च से पांच दिवसीय रामजन्म महोत्सव की शुरुआत होगी, जहां धार्मिक अनुष्ठान, शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार श्रृंखला देखने को मिलेगी। महोत्सव को लेकर पूरे मंदिर परिसर की आकर्षक साज-सज्जा की जा रही है और तैयारियां अंतिम चरण में हैं। महोत्सव की शुरुआत 27 मार्च को प्राकट्य पर्व के रूप में होगी। पहले दिन सुबह 8:30 बजे कुश नगर से रामराजा परिषद एवं मित्र मंडल द्वारा एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। प्रकटोत्सव के गाई जाएंगी बधाई दोपहर 12:30 बजे रामराजा मंदिर प्रांगण में रामराजा परिषद बुंदेली लोकगीतों के साथ बधाई गीत प्रस्तुत करेगा। इसमें ख्याति प्राप्त कलाकार उर्मिला पांडे, राष्ट्रीय भजन गायक पवन तिवारी और बबलू तिवारी बधाई गीत की प्रस्तुति देंगे। भगवान के ओरछा आगमन की वर्षगांठ भी रामनवमी पर ही होती है, जिसे रामराजा परिषद पिछले कई वर्षों से शोभायात्रा और बधाई कार्यक्रम के साथ मनाता आ रहा है। यह यहां की सालों पुरानी परंपरा है। मंदिर के अंदर दोपहर 12 बजे पूजन-आरती के बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा। रात 8 बजे रामराजा सरकार दालान में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे, जो इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहेगा। शाम को होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम शाम 7 बजे मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन निवाड़ी के संयुक्त तत्वावधान में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसमें छतरपुर की लोक कलाकार मुस्कान प्रजापति अपने साथियों के साथ बुंदेली लोक गायन प्रस्तुत करेंगी। इसके बाद “मर्यादा पुरुषोत्तम” विषय पर भव्य नृत्य नाटिका का मंचन होगा, जिसकी प्रस्तुति भोपाल की कलाकार माण्डवी अजय अरोणकर और उनकी टीम द्वारा दी जाएगी। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए विदिशा की सौम्या और उनके साथी भक्ति गायन की प्रस्तुति देंगे, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाएगा। प्रशासन ने की चाक चौबंद व्यवस्था 28 मार्च को सुबह 5 बजे मंगला आरती के साथ दिन की शुरुआत होगी और इसके बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा। 29 और 30 मार्च को विशेष रूप से पालना और झांकी दर्शन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप के दर्शन कर भक्त भावविभोर होंगे। रामजन्म महोत्सव को लेकर मंदिर प्रबंधन और जिला प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली है। लाखों की संख्या में भक्तों के आने की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने दर्शन के लिये उचित व्यवस्था कर रखी है। गर्मी को देखते हुए भक्तों के लिये व्यवस्थाएं की हुई है और पार्किंग के लिय स्थान तय कर दिये गये है। लोगों को परेशानी ना हो इसके लिये भी यातायात पुलिस और मंदिर प्रबंधन ने पूरा समन्वय बैठा रखा है। भारी वाहनों को नगर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा और तय किये स्थानों पर ही वाहनों की पार्किंग की जा सकेगी। कुल मिलाकर यह पूरा आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि बुंदेली संस्कृति और लोक परंपराओं का भी अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा।
बालाघाट में मनाया भगवान झूलेलाल का 1076वां जन्मोत्सव:सिंधु भवन से निकली शोभायात्रा; सजीव झांकियां और 'आयोलाल-झूलेलाल' के जयघोष से गूंजा शहर

बालाघाट जिले में शुक्रवार को सिंधी समाज ने इष्टदेव भगवान झूलेलाल का 1076वां जन्मोत्सव ‘चेटीचंड’ के रूप में अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया। पूज्य सिंधी पंचायत के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव के दौरान देर शाम सिंधु भवन से विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन और नगरवासी शामिल हुए। सजीव झांकियां रहीं आकर्षण का केंद्र शोभायात्रा में भगवान झूलेलाल की मनमोहक प्रतिमा के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक प्रसंगों पर आधारित सजीव झांकियां आकर्षण का मुख्य केंद्र रहीं। इनमें भगवान शंकर का शिवलिंग, राधा-कृष्ण की रासलीला और भोलेनाथ की लीलाओं के दृश्यों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से भ्रमण करती हुई रात को मोती तालाब पहुंची, जहां विशेष पूजन-अर्चन और भजन-कीर्तन के पश्चात बहराणा साहिब का विसर्जन किया गया। 17 मार्च से जारी थे कार्यक्रम सिंधी समाज के जिलाध्यक्ष अमर मंगलानी ने बताया कि जन्मोत्सव की तैयारियां 17 मार्च से ही शुरू हो गई थीं। उत्सव की कड़ी में गुरुवार सुबह सिंधु भवन से एक विशाल स्कूटर रैली निकाली गई थी, जिसने पूरे नगर का भ्रमण कर एकता का संदेश दिया। शुक्रवार सुबह सिंधी मोहल्ला और सिंधु भवन स्थित मंदिर में भगवान झूलेलाल का दूध से अभिषेक और विधिवत हवन-पूजन संपन्न हुआ, जिसके बाद दोपहर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। दूध अभिषेक और विसर्जन के साथ पूर्णाहुति धार्मिक अनुष्ठानों के क्रम में सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। शाम को निकली शोभायात्रा के मार्ग में जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। अंत में मोती तालाब के तट पर ज्योत प्रज्वलित कर और आरती के साथ महोत्सव की गरिमापूर्ण पूर्णाहुति हुई। सेवादारों ने दिन भर चले आयोजनों में व्यवस्थाएं संभालीं और सभी आगंतुकों को प्रसादी वितरित की। देखें तस्वीरें…
9-Day Event & 5-Day Garba in March 2026

देवास में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर पहली बार माता की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। शहर में नौ दिवसीय आराधना महोत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बुधवार शाम को माता की प्रतिमा को जुलूस के रूप में शहर के प्रमुख मार्गों से लेकर विकास नगर स्थित आयोजन स्थल . पांच दिन गरबा का भी आयोजन शहर में महोत्सव 19 मार्च से 28 मार्च 2026 तक चलेगा। 19 मार्च को घट स्थापना के साथ इसका शुभारंभ होगा। इस दौरान धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। महोत्सव के दौरान 19 से 23 मार्च तक रात 7 बजे से पांच दिवसीय गरबा महोत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इसके बाद 24 से 26 मार्च तक भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। 27 मार्च को महाप्रसादी, 28 को निकलेगा चल समारोह 27 मार्च को शाम 6 बजे महोत्सव में महाभोजन प्रसादी का आयोजन होगा, जिसमें आमजन को प्रसादी वितरित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, प्रतिदिन आरती के बाद भी महाप्रसादी बांटी जाएगी। महोत्सव का समापन 28 मार्च को शाम 4 बजे होगा। समापन के अवसर पर भव्य झांकी और गरबा के साथ विसर्जन चल समारोह आयोजित किया जाएगा। यह चल समारोह सयाजी गेट से शुरू होकर मीठा तालाब तक जाएगा। आयोजन स्थल के रूप में वीर सावरकर चौराहा, विकास नगर, देवास तय किया गया है।
आगर में महिलाओं ने निकाली गणगौर यात्रा:अग्रवाल और ब्राह्मण समाज की महिलाओं ने सिर पर प्रतिमा रख की पूजा

आगर मालवा में रविवार शाम गणगौर पर्व के मौके पर महिलाओं ने शहर में पारंपरिक चल समारोह निकाले। इस दौरान महिलाएं सिर पर गणगौर माता की प्रतिमाएं रखकर और लोक गीतों पर नाचती हुई नजर आईं। अग्रवाल समाज महिला मंडल की ओर से गांधी उपवन से यात्रा शुरू की गई। पारंपरिक कपड़ों में सजी महिलाएं माता की प्रतिमाएं लेकर छावनी क्षेत्र के मुख्य रास्तों से होती हुई अग्रवाल धर्मशाला पहुंचीं। यहां विधि-विधान से पूजा के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने यात्रा का स्वागत किया। ब्राह्मण समाज का आयोजन इसी तरह ब्राह्मण समाज की महिलाओं ने भी विश्वेश्वर महादेव मंदिर से चल समारोह निकाला। यह यात्रा विवेकानंद कॉलोनी के रास्तों से होते हुए पशुपतिनाथ महादेव मंदिर पहुंची। पूरी यात्रा के दौरान महिलाएं गणगौर के गीत गाती और नृत्य करती रहीं। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। गणगौर उत्सव को लेकर शहर में काफी उत्साह और भक्ति का माहौल रहा।
देवास में शीतला सप्तमी पर मंदिरों में भीड़:महिलाओं ने एक दिन पहले बनाकर रखा भोजन, बासी प्रसाद के रूप में करेंगे ग्रहण

देवास शीतला सप्तमी के अवसर पर मंगलवार को शहर के शीतला माता मंदिरों में महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाओं ने सुबह मंदिर पहुंचकर माता शीतला की पूजा-अर्चना की और ठंडे भोजन का भोग अर्पित किया। शहर के गोया स्थित शीतला माता मंदिर में भी बड़ी संख्या में महिलाएं दर्शन और पूजा के लिए पहुंचीं। महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा की और आरती उतारी। इस पर्व पर एक दिन पहले बनाया गया भोजन माता को अर्पित करने की परंपरा होती है। एक रात पहले बनाकर रखती हैं खाना, अगले दिन खाती हैं पूजा करने पहुंची श्वेता चौधरी ने बताया कि शीतला सप्तमी के दिन महिलाएं एक रात पहले ही भोजन बनाकर रखती हैं और अगले दिन ठंडा होने पर माता शीतला को भोग लगाती हैं। इसके बाद परिवार के लोग वही प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। मान्यता है कि शीतला सप्तमी का व्रत रखने और पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है। महिलाएं अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं।
निमाड़ में गणगौर पर्व की तैयारियां अंतिम चरण में:14 मार्च से जवारे बोए जाएंगे, 22 को माता की होगी विदाई

बड़वानी जिले के अंजड़ नगर सहित समूचे निमाड़ अंचल में प्रमुख आस्था पर्व गणगौर को लेकर श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। पर्व के आगमन से पहले ही श्रद्धालु माता के स्वागत की प्रतीक्षा कर रहे हैं। गणगौर माता और ईश्वर राजा के रथ तैयार करने का काम भी अंतिम चरण में पहुंच गया है। अंजड़ के कारीगर हिमांशु चौहान पिछले दो-तीन वर्षों से गणगौर माता और ईश्वर राजा के रथ तैयार कर रहे हैं। वे पीओपी और लकड़ी की सहायता से आकर्षक रथ बनाते हैं और उन्हें पारंपरिक ढंग से सजाते हैं। उनके द्वारा बनाए गए रथों की मांग निमाड़ के कई कस्बों और शहरों में रहती है। बड़वानी और खरगोन जिले के ठीकरी, खरगोन, सनावद सहित अन्य स्थानों से भी श्रद्धालु रथ लेने पहुंचते हैं। हिमांशु चौहान ने बताया कि एक रथ की कीमत करीब 7 हजार रुपये रखी गई है। यदि कोई श्रद्धालु गणगौर माता और ईश्वर राजा के दोनों रथ एक साथ लेता है, तो उन्हें 13 हजार रुपये में उपलब्ध कराए जाते हैं। पर्व के नजदीक आते ही रथों की मांग बढ़ जाती है और कारीगर इन्हें समय पर तैयार करने में जुटे रहते हैं। गणगौर पर्व निमाड़ क्षेत्र की आस्था और परंपरा से जुड़ा एक प्रमुख त्योहार है। पूरे निमाड़ अंचल में सैकड़ों स्थानों पर गणगौर माता की मूठ स्थापित की जाती है, जहां श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। इस वर्ष पर्व की परंपराओं के अनुसार 14 मार्च को जवारे बोए जाएंगे। इसके बाद सात दिनों तक पंडितों द्वारा माता की सेवा की जाएगी और जवारों को सींचा जाएगा। इस अवधि में प्रतिदिन सुबह और शाम श्रद्धालु सामूहिक रूप से माता की पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद 21 मार्च को बाड़ी के पट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। इस दिन भक्त रथ लेकर माता के दर्शन करने पहुंचेंगे और विधि-विधान से पूजा कर माता को अपने घर ले जाएंगे। इसी दिन रथ बौड़ाने की परंपरा भी निभाई जाएगी। श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर माता की पूजा कर जोड़े जिमाने की परंपरा का पालन करेंगे। पर्व का समापन 22 मार्च को गणगौर घाट पर माता के विसर्जन के साथ होगा।
झाबुआ में धधकते अंगारों पर चले मन्नतधारी:गल चूल उत्सव में उमड़ा सैलाब; खाटू श्याम की पालकी भी निकली

झाबुआ जिले के ग्रामीण अंचलों में धुलेंडी का पर्व पारंपरिक ‘गल चूल’ उत्सव के रूप में मनाया गया। रायपुरिया, बिलिडोज, बावड़ी, करवड़ और टेमरिया सहित कई स्थानों पर आयोजित इस उत्सव में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े। यहां मन्नतधारियों ने नंगे पैर दहकते अंगारों पर चलकर और ऊंचे ‘गल’ पर झूलकर अपनी अटूट श्रद्धा प्रकट की। 20 फीट ऊंचे ‘गल’ पर उल्टा लटके मन्नतधारी रायपुरिया में यह परंपरा पिछले 50 वर्षों से निरंतर चली आ रही है। यहां चार खंभों पर स्थापित 20 फीट ऊंचे ‘गल’ पर मन्नतधारियों को उल्टा लटकाकर घुमाया गया। इस कठिन अनुष्ठान को पूरा करने के लिए श्रद्धालु एक सप्ताह पूर्व से ही सात्विक जीवन शैली अपनाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से क्षेत्र पर दैवीय कृपा बनी रहती है। अंगारों पर बच्चों को लेकर चले श्रद्धालु चूल उत्सव के दौरान रोमांच तब बढ़ गया जब श्रद्धालु नंगे पैर धधकते अंगारों के बीच से निकले। कुछ मन्नतधारियों ने तो अपने मासूम बच्चों को गोद में लेकर अंगारों का रास्ता पार किया। ग्रामीणों की मान्यता है कि माता की कृपा से उन्हें आंच तक नहीं आती। करवड़ के अम्बे माता मंदिर में भी इसी तरह का आयोजन हुआ, जहाँ भारी भीड़ जमा रही। रानापुर में खाटू श्याम की पालकी और ‘मिनी भगोरिया’ सा नजारा रानापुर नगर में बाबा खाटू श्याम की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई। बैंड-बाजों और भजनों की धुन पर भक्त झूमते नजर आए। यहाँ चूल उत्सव के साथ-साथ मेलों जैसा माहौल भी देखने को मिला। झूलों और चकरी के कारण यहाँ का वातावरण ‘मिनी भगोरिया’ जैसा नजर आ रहा था, जिसका ग्रामीणों ने भरपूर आनंद लिया।। प्रशासन रहा अलर्ट भीड़ और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तहसीलदार अनिल बघेल और टीआई निर्भयसिंह भूरिया के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात रहा। रायपुरिया से लेकर रानापुर तक प्रशासन और ग्राम पंचायतों ने पेयजल और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे, जिसके चलते सभी धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए









