Friday, 15 May 2026 | 02:10 PM

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Supreme Court accidents lack of lane driving on roads vehicle location tracking devices

Supreme Court accidents lack of lane driving on roads vehicle location tracking devices

Hindi News National Supreme Court Accidents Lack Of Lane Driving On Roads Vehicle Location Tracking Devices 14 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देश में बढ़ते सड़क हादसों को लेकर कहा कि भारत में लेन ड्राइविंग का कोई कॉन्सेप्ट ही नहीं है। यही दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रहा है। कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को लेकर कई अहम निर्देश भी जारी किए। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट गाड़ियों में व्हीकल लोकेशन ट्रेकिंग डिवाइस (VLTD) और इमरजेंसी पैनिक बटन अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। कोर्ट ने कहा कि ये उपकरण खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। केंद्र सरकार ने 2018 में ही यह नियम लागू किया था, लेकिन अब तक केवल करीब 1% वाहनों में ही ये उपकरण लगाए गए हैं। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने 2012 में दायर सर्जन एस. राजशेखरन की जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में देशभर में सड़क सुरक्षा नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई थी। बिना उपकरण के नहीं मिलेगा फिटनेस सर्टिफिकेट सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि अब कोई भी सार्वजनिक परिवहन वाहन तब तक फिटनेस सर्टिफिकेट या परमिट नहीं पाएगा, जब तक उसमें VLTD और पैनिक बटन नहीं लगे होंगे। कोर्ट ने केंद्र सरकार को वाहन निर्माताओं के साथ बातचीत करने का निर्देश भी दिया, ताकि निर्माण के समय ही ये उपकरण लगाए जाएं। वाहनों की जानकारी वाहन (Vahan) पोर्टल से होगी लिंक बेंच ने कहा कि ट्रैकिंग डिवाइस और उनकी कार्यक्षमता को वाहन (Vahan) डेटाबेस से जोड़ा जाए, ताकि रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सके। पुराने वाहनों में भी यह सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाया जाएगा। स्पीड कंट्रोल डिवाइस पर भी कोर्ट सख्त सुप्रीम कोर्ट ने स्पीड लिमिटिंग डिवाइस (SLD) को लेकर राज्यों की ढिलाई पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि सभी सार्वजनिक परिवहन वाहनों में स्पीड गवर्नर होना जरूरी है। कोर्ट ने राज्यों को अगली सुनवाई तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। इसमें Vahan/Parivahan पोर्टल के आंकड़ों के साथ यह बताना होगा कि कितने वाहनों में स्पीड कंट्रोल डिवाइस लगाए गए हैं। रोड सेफ्टी बोर्ड नहीं बनने पर नाराजगी कोर्ट ने यह भी कहा कि पहले के आदेशों के बावजूद अब तक रोड सेफ्टी बोर्ड का गठन नहीं किया गया है। इस पर नाराजगी जताते हुए केंद्र सरकार को अंतिम मौका दिया गया और कहा गया कि तीन महीने के भीतर बोर्ड का गठन किया जाए। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Hindi News National Supreme Court Accidents Lack Of Lane Driving On Roads Vehicle Location Tracking Devices 7 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देश में बढ़ते सड़क हादसों को लेकर कहा कि भारत में लेन ड्राइविंग का कोई कॉन्सेप्ट ही नहीं है। यही दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रहा है। कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को लेकर कई अहम निर्देश भी जारी किए। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट गाड़ियों में व्हीकल लोकेशन ट्रेकिंग डिवाइस (VLTD) और इमरजेंसी पैनिक बटन अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। कोर्ट ने कहा कि ये उपकरण खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। केंद्र सरकार ने 2018 में ही यह नियम लागू किया था, लेकिन अब तक केवल करीब 1% वाहनों में ही ये उपकरण लगाए गए हैं। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने 2012 में दायर सर्जन एस. राजशेखरन की जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में देशभर में सड़क सुरक्षा नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई थी। बिना डिवाइस फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब कोई भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट गाड़ी तब तक फिटनेस सर्टिफिकेट या परमिट नहीं पाएगा, जब तक उसमें VLTD और पैनिक बटन नहीं लगे होंगे। कोर्ट ने केंद्र सरकार को गाड़ी निर्माताओं के साथ बातचीत करने का निर्देश भी दिया, ताकि प्रोडक्शन के समय ही ये डिवाइस लगाए जाएं। बेंच ने कहा कि ट्रैकिंग डिवाइस और उनकी कार्यक्षमता को वाहन (Vahan) डेटाबेस से जोड़ा जाए, ताकि रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सके। पुराने वाहनों में भी यह सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाया जाएगा। स्पीड कंट्रोल डिवाइस भी जरूरी सुप्रीम कोर्ट ने स्पीड लिमिटिंग डिवाइस (SLD) को लेकर राज्यों की ढिलाई पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर होना जरूरी है। कोर्ट ने राज्यों को अगली सुनवाई तक डिटेल रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। इसमें Vahan/Parivahan पोर्टल के आंकड़ों के साथ यह बताना होगा कि कितने वाहनों में स्पीड कंट्रोल डिवाइस लगाए गए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि पहले के आदेशों के बावजूद अब तक रोड सेफ्टी बोर्ड का गठन नहीं किया गया है। इस पर नाराजगी जताते हुए केंद्र सरकार को अंतिम मौका दिया गया और कहा गया कि तीन महीने के भीतर बोर्ड का गठन किया जाए। लेन ड्राइविंग के बारे में जानें… सड़क पर बनी सफेद या पीली लाइनों के बीच गाड़ी चलाना ही लेन ड्राइविंग है। हर वाहन को अपनी तय लेन में चलना चाहिए। बिना जरूरत लेन बदलना खतरनाक माना जाता है। लेन ड्राइविंग में गाड़ी चलाने का फायदा… अचानक कट मारने की घटनाएं कम होती हैं। ओवरटेक सुरक्षित तरीके से होता है। ट्रैफिक जाम कम लगता है। हाईवे पर गाड़ी पर कंट्रोल बेहतर रहता है। सड़क हादसों का खतरा कम होता है। सड़क पर लेन पहचानें… सफेद टूटी लाइन → लेन बदल सकते हैं। लगातार सफेद लाइन → लेन बदलना मना। पीली लाइन → दो तरफ के ट्रैफिक को अलग करती है। जेब्रा क्रॉसिंग → पैदल यात्रियों के लिए रास्ता। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट ने कहा- एक्सप्रेसवे खतरे का गलियारा नहीं बनने चाहिए, इन सड़कों पर भारी वाहन पार्किंग न हो सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए पूरे देश में कई गाइडलाइंस जारी की हैं। इन निर्देशों एक्सप्रेसवे जैसी सड़कों पर भारी वाहनों की पार्किंग पर रोक भी शामिल है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक सुस्ती या इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों के कारण एक्सप्रेसवे खतरे का गलियारा नहीं बनने चाहिए। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

केदारनाथ में खराब मौसम के चलते उड़ानों पर असर:4000 बुकिंग कैंसिल, DGCA बोला- कोई चांस नहीं ले; IRCTC के जरिए टिकट

केदारनाथ में खराब मौसम के चलते उड़ानों पर असर:4000 बुकिंग कैंसिल, DGCA बोला- कोई चांस नहीं ले; IRCTC के जरिए टिकट

केदारनाथ जाने के लिए हेली सेवाओं पर खराब मौसम के चलते बार-बार असर पड़ रहा है। अब तक 4 हजार से ज्यादा हेलिकॉप्टर बुकिंग रद्द कर दी गई। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UCADA) को सख्त निर्देश दिए हैं कि खराब मौसम में कोई भी उड़ान पहाड़ों पर ना जाए। DGCA ने केदारनाथ यात्रा शुरू होने से दो महीने पहले ही हेली यात्रा संबंधित गाइडलाइन पर सख्ती से अमल करने के निर्देश दिए थे। 2025 में चारधाम यात्रा में 5 हेली हादसों में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद यात्रा मानकों पर सवाल उठे थे। इस बार DGCA ने UCADA को कोई भी रिस्क लेने से मना किया है। मई में बारिश, बर्फबारी और तेजी से बदलते मौसम के कारण लगभग 40% उड़ानें प्रभावित हुई हैं। अभी केदारनाथ यात्रा में आठ हेली कंपनियां अपनी सेवाएं दे रही हैं, जिसकी बुकिंग IRCTC कर रही है। केदारनाथ में दोपहर बाद लगातार मौसम खराब हो रहा है, जिससे हेली सेवाओं को रोक दिया जा रहा है। ‘मौसम खराब होते ही हेली सेवा रोक देते’ UCADA के सीईओ आशीष चौहान ने बताया कि इस बार सुरक्षा को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि रुद्रप्रयाग की मंदाकिनी वैली में कुछ ऐसी जगहें हैं जहां बादल ऊपर से नीचे नहीं, बल्कि नीचे से ऊपर की तरफ आते हैं। हम कैमरों के जरिए लगातार निगरानी कर रहे हैं। जैसे ही मौसम खराब होने का पहला इंडिकेशन मिलता है, हम तुरंत फ्लाइंग बंद कर देते हैं। पिछले अनुभवों में देखा गया है कि बादलों के बीच से निकलने का चांस लेने पर अनहोनी हुई है। इस बार हम ऐसा कोई चांस नहीं ले रहे हैं। यात्रियों के फंसने पर अतिरिक्त उड़ानें भारी संख्या में टिकट कैंसिलेशन और रिफंड के सवाल पर चौहान ने बताया कि टिकट और रिफंड की प्रक्रिया हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों के स्तर पर होती है, लेकिन नियमों के तहत रिफंड सुनिश्चित किया जा रहा है। मौसम के कारण जो यात्री खरसाली या अन्य जगहों पर फंस जाते हैं, उनका बैकलॉग क्लियर करने के लिए UCADA ऑपरेटरों को अतिरिक्त उड़ानें भरने की परमिशन दे रहा है, ताकि दर्शन में कोई बाधा न आए। DGCA के मानकों पर पायलटों की विशेष ट्रेनिंग सीतापुर के संकरे हवाई मार्ग (बॉटलनेक) और 10,000 फीट से ऊपर की ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए पायलटों की ट्रेनिंग सख्त की गई है। सीईओ ने बताया, DGCA ने यहां उड़ान भरने के लिए 8 टेकऑफ और लैंडिंग का मानक तय किया है, लेकिन UCADA ने सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसे बढ़ाकर 10 टेकऑफ-लैंडिंग और 10 घंटे की अनिवार्य फ्लाइंग कर दिया है। इसके बाद ही पायलटों को यहां उड़ान की अनुमति मिल रही है। पायलट भटके या स्पीड तोड़ी तो खैर नहीं इस बार यात्रा में सुरक्षा के लिहाज से तीन बड़े तकनीकी बदलाव किए गए हैं। साफ और खराब मौसम के लिए अलग-अलग रूट (किलो रूट्स) बनाए गए हैं। सभी पायलटों को इन्हीं तय रास्तों से जाना होता है, जिससे उड़ान और लैंडिंग का समय बिल्कुल सटीक रहता है। सभी चॉपर में विशेष ट्रैकिंग डिवाइस लगाए गए हैं। यदि कोई पायलट तय रूट से थोड़ा भी लेफ्ट या राइट होता है, या स्पीड लिमिट क्रॉस करता है, तो तुरंत चेतावनी दी जाती है। यह डिवाइस एक महीने तक का पूरा डेटा (टेकऑफ का समय, रूट, स्पीड) स्टोर रखता है। केदारनाथ और बद्रीनाथ में परमानेंट एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के निर्माण के लिए एनओसी मिल गई है और काम शुरू हो गया है। फिलहाल टेंपरेरी एटीसी काम कर रहे हैं। ऑपरेटरों की मनमानी और नियमों के उल्लंघन पर आशीष चौहान ने सख्त लहजे में कहा, सभी 8 ऑपरेटर 100% एसओपी का पालन कर रहे हैं। जो भी इधर-उधर करने की कोशिश करता है, उसे तुरंत ग्राउंडेड कर दिया जाता है और उसकी फ्लाइंग रोक दी जाती है। अब तक फाइन लगाने की नौबत नहीं आई है क्योंकि फ्लाइंग बंद करने की कार्रवाई ही असरदार साबित हो रही है। धामों पर बनेंगे 2 से 3 नए हेलीपैड यात्रियों की बढ़ती संख्या और हेलिकॉप्टर की लैंडिंग में आ रही दिक्कतों पर UCADA ने बड़ा प्लान तैयार किया है। चौहान ने बताया कि जब तक यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ (एंड पॉइंट्स) पर जमीन नहीं बढ़ेगी, तब तक उड़ानें बढ़ाने का फायदा नहीं है। इसलिए, हर धाम के लिए 2 से 3 नए हेलिपैड बनाने के सर्वे पूरे कर लिए गए हैं। जैसे-जैसे ये हेलीपैड तैयार होते जाएंगे, उन्हें परमिशन दी जाती रहेगी। वहीं रुद्रप्रयाग के जिला पर्यटन अधिकारी एवं हेली नोडल अधिकारी राहुल चौबे ने बताया कि इस बार हेली सेवाओं के जरिए लगभग 12,100 यात्री बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं।