मूंग दाल खिचड़ी: वजन और ऊर्जा बढ़ाने के लिए उपयोगी मूंग दाल की खिचड़ी, नोट कर लें रेसिपी

मूंग दाल खिचड़ी रेसिपी: भारतीय आश्रम में मूंग दाल की दाल को बार-बार बीमारी के वक्त आरामदायक भोजन के रूप में देखा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सिर्फ पाचन के लिए ही नहीं, बल्कि वजन घटाने, ऊर्जा बढ़ाने और समग्र स्वास्थ्य के लिए भी बेहतरीन पदनाम है। क्योंकि मूंग दाल में भरपूर प्रोटीन और कड़वापन होता है, जो इसे शाकाहारी लोगों के लिए आदर्श बनाता है। अगर आप लॉस जननी पर हैं या रोज़ाना एनर्जी की कमी महसूस करते हैं, तो यह रेसिपी आपके लिए रामबाण साबित हो सकती है। मूंग की दाल न सिर्फ आसानी से पचती है, बल्कि सेहत के लिए काफी अच्छी होती है। मूंग दाल और चावल का कॉम्बिनेशन पेट पर असर डालता है। यह गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत देता है। मूंग दाल का आटा घर पर आसानी से बनाया जा सकता है। इसे बनाने में ज्यादा समय भी नहीं लगता। इसके लिए क्या-क्या करना चाहिए? 1 कप चावल के लिएएक सिद्धांत कप ढोली मूंग दालनमक छोटा हल्दी पाउडरहाँ हींग4 कप पानी टेस्टी तड़का लगाने का तरीका 2 बड़े घी1 छोटा चम्मच जीराहींग2-3 साबूत सूखी लाल मिर्च (टूटी हुई)6-8 कैरी पत्ते2 इलेक्ट्रॉनिक कटा लहसुन1 मोनोक्रोम कैटागरी2-3 हरी मिर्च (कटी हुई)2 प्याज (बारीक कटे हुए)2 छोटे टमाटर (बारीक कटे हुए)आधा मोटा लाल मिर्च पाउडरआधा मीठा अमचूर पाउडरहरा धनिया (गार्निश के लिए) वेट लॉस के लिए घी की मात्रा कम रखी जा सकती है या ऑलिव ऑयल का उपयोग किया जा सकता है। असल में जैसे गाजर या मैटर वैशेषिक वास्तुशिल्प। यह रेसिपी भारतीय घरों में काफी पसंद की जाती है। प्रशिक्षण लें और अपनी सेहत को बेहतर बनाएं।
बजट सत्र युद्धक्षेत्र: सरकार के अप्रभावित रहने पर विपक्षी एकता को परीक्षा का सामना करना पड़ा | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:19 फरवरी, 2026, 22:16 IST सिर्फ गैर-कांग्रेसी पार्टियाँ ही नहीं; कांग्रेस के कुछ निलंबित सांसद भी असहयोग की रणनीति से चिंतित हैं दोनों पक्ष इस बात पर अड़े हैं कि वे सही रास्ते पर हैं और उन्हें लोगों का समर्थन प्राप्त है। फ़ाइल छवि बजट सत्र का पहला भाग समाप्त हुए लगभग एक सप्ताह हो गया है, जो हाल के दिनों के सबसे विवादास्पद सत्रों में से एक है। आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया, अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया और विपक्ष के नेता राहुल गांधी की सदस्यता छीनने के लिए एक ठोस प्रस्ताव पेश किया गया। सत्र में एक अभूतपूर्व स्थिति भी देखी गई जहां महिला सांसदों पर भारत के प्रधान मंत्री को नुकसान पहुंचाने की योजना बनाने का आरोप लगाया गया। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार और विपक्ष के बीच शिष्टाचार और संवाद का टूटना लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है। चूंकि यह आम तौर पर स्वीकार किया जाता है कि सदन चलाने की जिम्मेदारी सरकार की होती है, विश्लेषकों ने सुझाव दिया है कि दूसरी छमाही में, सरकारी प्रबंधकों को विपक्ष के साथ पुल बनाने के लिए काम करना चाहिए। हालाँकि, राजनीतिक नेताओं के साथ बातचीत से दूसरी छमाही में रुख और सख्त होने का संकेत मिलता है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में सीएनएन-न्यूज18 को बताया, “हमने काफी कुछ किया है। जो कुछ हो रहा है उसके लिए एक व्यक्ति का जिद्दी व्यवहार जिम्मेदार है।” विपक्ष की एक मांग सांसदों का निलंबन रद्द करने की थी. लेकिन सरकारी सदन प्रबंधकों का सुझाव है कि, निलंबन रद्द करना तो दूर, दूसरी छमाही में और अधिक सांसदों को निलंबित किया जा सकता है, खासकर वे जो अध्यक्ष के कक्ष में गए और फिर लोकसभा में प्रधान मंत्री को रोकने का प्रयास किया। आगे के निलंबन से विभाजन और गहरा हो सकता है, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार चिंतित नहीं है। सत्ता पक्ष का आकलन यह है कि गैर-कांग्रेसी विपक्षी दल जैसे द्रमुक, टीएमसी और यहां तक कि वामपंथी भी चाहेंगे कि सदन चले, क्योंकि बंगाल, तमिलनाडु और केरल में चुनावों से पहले, राज्य-विशिष्ट मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए संसदीय मंच का उपयोग करने का यह उनका आखिरी मौका होगा। स्पीकर के खिलाफ अविश्वास के नोटिस पर हस्ताक्षर न करके टीएमसी पहले ही रैंक तोड़ चुकी है। अखिलेश यादव ने भी हस्ताक्षर नहीं किए, हालांकि उनकी पार्टी के सहयोगियों ने हस्ताक्षर किए. अविश्वास प्रस्ताव पर पहले दिन ही चर्चा हो सकती है, क्योंकि सरकार विपक्ष के अंदर फूट को उजागर करना चाहती है। सिर्फ गैर-कांग्रेसी पार्टियाँ ही नहीं; कांग्रेस के कुछ निलंबित सांसद भी असहयोग की रणनीति से चिंतित हैं. निरंतर निलंबन का मतलब है तारांकित या अतारांकित प्रश्न पूछने का कोई मौका नहीं, उपस्थिति का कोई रिकॉर्ड नहीं, और अपने चुनाव क्षेत्र के मुद्दों को उठाने का कोई अवसर नहीं। हालाँकि, वरिष्ठ कांग्रेस नेतृत्व को लगता है कि वे 1) चीनी आक्रामकता के सामने आत्मसमर्पण और 2) ट्रम्प प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण की धारणा को उजागर करके सरकार को रक्षात्मक स्थिति में लाने में कामयाब रहे हैं। दोनों पक्ष इस बात पर अड़े हैं कि वे सही रास्ते पर हैं और उन्हें लोगों का समर्थन प्राप्त है। लेकिन जैसे-जैसे संसदीय चर्चाएँ, वाद-विवाद और बुनियादी सभ्यता प्रभावित होती है, “हम लोग” केवल यह देख सकते हैं कि संसद की लोकतांत्रिक परंपराएँ किसी अखाड़े में कुश्ती मैच जैसी किसी चीज़ को रास्ता देती हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 19 फरवरी, 2026, 22:16 IST समाचार राजनीति बजट सत्र युद्धक्षेत्र: सरकार के अप्रभावित रहने पर विपक्षी एकता को परीक्षा का सामना करना पड़ेगा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
Pakistan India War Vs Donald Trump Tariff Threat; Fighter Jets

वॉशिंगटन डीसी12 घंटे पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को वॉशिंगटन में फिर से भारत-पाकिस्तान संघर्ष रुकवाने का दावा किया। उन्होंने कहा कि मैंने दोनों देशों पर 200% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद वे संघर्ष रोकने के लिए माने। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये बात ‘बोर्ड ऑफ पीस’ कार्यक्रम में कही। ट्रम्प ने कहा कि उस समय दोनों देशों के बीच हालात बहुत खराब थे, लड़ाई तेज हो गई थी और विमान गिराए जा रहे थे। मैंने दोनों नेताओं (मोदी और शहबाज शरीफ) को फोन किया। मैंने दोनों से साफ कह दिया था कि अगर वे झगड़ा खत्म नहीं करेंगे तो मैं उनके साथ कोई ट्रेड डील नहीं करूंगा। ट्रम्प के मुताबिक दोनों देश लड़ना चाहते थे, लेकिन जब पैसे का मामला आया और नुकसान की बात सामने आई तो वे मान गए। ट्रम्प ने दावा किया कि इस संघर्ष के दौरान 11 महंगे फाइटर जेट्स गिराए गए थे। हालांकि, उन्होंने ये नहीं बताया कि ये फाइटर जेट्स किस देश के थे। ट्रम्प करीब 100 बार भारत-पाकिस्तान के बीच जंग रुकवाने का दावा कर चुके हैं। वहीं, भारत लगातार यह कहता रहा है कि भारत-पाकिस्तान के मुद्दों में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जाएगी। शरीफ ने ट्रम्प को ‘दक्षिण एशिया का रक्षक’ बताया ट्रम्प ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उनके चीफ ऑफ स्टाफ के सामने यह बात मानी थी कि उनकी पहल से भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध टल गया। ट्रम्प के मुताबिक, अगर यह टकराव नहीं रुकता तो करीब 2.5 करोड़ लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी। उन्होंने दावा किया कि उनकी वजह से दोनों देशों के बीच हालात काबू में आए और बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान टल गया। इस दौरान ट्रम्प ने शहबाज शरीफ से खड़े होने के लिए कहा वो खड़े हो गए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस दौरान शहबाज शरीफ ने ट्रम्प को दक्षिण एशिया की हिफाजत करने वाला बताया। ट्रम्प बोले- अप्रैल में चीन दौरे पर जाऊंगा चीन को लेकर ट्रम्प ने कहा कि उनका राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बहुत अच्छा रिश्ता है। उन्होंने बताया कि वह अप्रैल में चीन जाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि पिछली बार जब वे चीन गए थे तो राष्ट्रपति शी ने उनका शानदार स्वागत किया था। ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने इतने सारे सैनिक एक साथ कभी नहीं देखे थे, जो बिल्कुल एक ही कद के थे। उन्होंने मजाक में कहा कि अगर वे हेलमेट उतार देते तो उनके सिर पर बिलियर्ड खेला जा सकता था। भारत बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में शामिल हुआ ट्रम्प के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने गुरुवार को ऑब्जर्वर देश के तौर पर हिस्सा लिया। भारत की तरफ से भारतीय दूतावास में तैनात चार्ज द’अफेयर्स (सीनियर अधिकारी) नमग्या सी खम्पा ने हिस्सा लिया। भारत ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि वह बोर्ड का फुल टाइम मेंबर बनेगा या नहीं। भारत ने पिछले महीने दावोस में इसके लॉन्च कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया था। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की बैठक में गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया गया है। ट्रम्प ने कहा कि 9 सदस्य देश गाजा राहत पैकेज के लिए 63 हजार करोड़ रुपए (7 अरब डॉलर) देंगे। जबकि, अमेरिका खुद 90 हजार करोड़ रुपए (10 अरब डॉलर) देगा। पढ़ें पूरी खबर… बोर्ड ऑफ पीस की गुरुवार को हुई मीटिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ दुनियाभर के नेता एक मंच पर नजर आए। बोर्ड ऑफ पीस क्या है? ट्रम्प ने पहली बार सितंबर 2025 में गाजा युद्ध खत्म करने की योजना पेश करते हुए इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने करीब 60 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है। पिछले हफ्ते दुनिया के नेताओं को भेजे गए न्योते में बताया गया कि इस बोर्ड की भूमिका सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर संघर्षों को सुलझाने में भी काम करेगा। बोर्ड के मसौदे (चार्टर) में कहा गया है कि जो देश तीन साल से ज्यादा समय तक इस बोर्ड का सदस्य बनना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा। ट्रम्प खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं ट्रम्प खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं। वे चाहते हैं कि यह बोर्ड सिर्फ गाजा के युद्धविराम तक सीमित न रहे, बल्कि दूसरे मुद्दों पर भी काम करे। हालांकि, इससे कुछ देशों को चिंता है कि इससे ग्लोबल डिप्लोमेसी में UN की भूमिका कमजोर हो सकती है। ट्रम्प ने कहा कि जब यह बोर्ड पूरी तरह बन जाएगा, तब यह बड़े फैसले ले सकेगा और जो भी काम होगा, वह UN के सहयोग से किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि UN में बहुत क्षमता है, लेकिन उसका अब तक पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पांच स्थायी सदस्यों में से अमेरिका के अलावा किसी भी देश ने अभी तक इस बोर्ड में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है। —————- यह खबर भी पढ़ें… दावा- ईरान पर इस हफ्ते हमला कर सकता है अमेरिका:2003 के बाद सबसे बड़ी एयर फोर्स तैनात, कई हफ्ते चलेगा मिलिट्री ऑपरेशन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बहुत तेजी से बढ़ रहा है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक इस हफ्ते अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से इसे अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने 2003 के इराक युद्ध के बाद अपनी सबसे बड़ी एयर फोर्स तैनात की है। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
शिवाजी जयंती पर ‘राजा शिवाजी’ का पहला पोस्टर जारी:कंधों पर कवच और चेहरे पर दृढ़ संकल्प के साथ नजर आए रितेश देशमुख

छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती के मौके पर ऐतिहासिक सिनेमा प्रेमियों के लिए बड़ी घोषणा हुई है। जियो स्टूडियोज और मुंबई फिल्म कंपनी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘राजा शिवाजी’ का पहला पोस्टर गुरुवार को जारी कर दिया गया। फिल्म का निर्देशन और मुख्य भूमिका रितेश विलासराव देशमुख निभा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्टर शेयर करते हुए इसे शिवाजी जयंती को समर्पित बताया। पोस्टर में रितेश देशमुख छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रभावशाली अवतार में नजर आ रहे हैं। साइड प्रोफाइल में दिखाई दे रहे महाराज के हाथ में तलवार है, कंधों पर कवच और चेहरे पर दृढ़ संकल्प साफ झलकता है। मेकर्स ने विजुअल ट्रीटमेंट को भव्य और गंभीर रखा है, जो स्वराज्य की स्थापना से पहले के संघर्ष और शांति दोनों का संकेत देता है। ‘राजा शिवाजी’ को पैन-इंडिया स्तर पर बड़े पैमाने पर तैयार किया जा रहा है। यह फिल्म मराठी और हिंदी, दोनों भाषाओं में रिलीज होगी। संगीत की जिम्मेदारी मशहूर जोड़ी अजय-अतुल ने संभाली है, जबकि सिनेमैटोग्राफी अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संतोष सिवन कर रहे हैं। मेकर्स का दावा है कि फिल्म तकनीक और विजुअल स्केल के लिहाज से भव्य अनुभव देगी। कहानी सिर्फ एक योद्धा राजा की नहीं, बल्कि उस बेटे की है जिसने स्वराज्य का संकल्प लिया और बड़ी शक्तियों के सामने झुकने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना। फिल्म में शिवाजी महाराज के जीवन, उनके साहस, रणनीति और राष्ट्रगौरव की भावना को सिनेमाई अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा। फिल्म को ज्योति देशपांडे और जेनेलिया देशमुख ने प्रोड्यूस किया है। यह फिल्म 1 मई 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।मेकर्स का कहना है कि यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की कोशिश है। पोस्टर रिलीज के साथ ही दर्शकों में उत्साह बढ़ गया है और अब सभी को टीजर का इंतजार है।
Railway Recruitment 5349 Posts | Age Limit 40 Years; Fee ₹100

1 दिन पहले कॉपी लिंक रेलवे रिक्रूटमेंट सेल (RRC) ने पश्चिम रेलवे भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 21 फरवरी से शुरू होगी। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट https://www.rrc-wr.com पर जाकर आवेदन कर सकेंगे। यह ट्रेनिंग एक साल के लिए दी जाएगी। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : न्यूनतम 50% अंकों के साथ 10वीं पास NCVT के मान्यता प्राप्त संस्थान से आईटीआई सर्टिफिकेट प्राप्त किया हो। एज लिमिट : न्यूनतम : 15 साल अधिकतम : 24 साल एससी/एसटी : 5 साल की छूट ओबीसी : 3 साल की छूट पीडब्ल्यूडी : 10 साल की छूट फीस : जनरल,ओबीसी,ईडब्ल्यूएस : 100 रुपएएससी, एसटी,पीडब्ल्यूबीडी,महिला : नि:शुल्क सिलेक्शन प्रोसेस : मेरिट बेसिस पर शॉर्टलिस्टिंग डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन स्टाइपेंड : रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नियमों के अनुसार ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट www.rrc-wr.com पर जाएं। होमपेज पर अप्लाई ऑनलाइन के लिंक पर क्लिक करें। न्यू रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करके मांगी गई डिटेल्स दर्ज करें। रजिस्ट्रेशन होने के बाद लॉग इन करें। फीस (यदि लागू हो) जमा करें। फॉर्म का प्रिंटआउट निकाल कर रख लें। ऑफिशियल वेबसाइट लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक सरकारी नौकरी की ये खबरें भी पढ़ें पंजाब में एक्साइज इंस्पेक्टर के 197 पदों पर निकली भर्ती; ग्रेजुएट्स को मौका, सैलरी 1 लाख 12 हजार तक पंजाब अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (PSSSB) ने एक्साइज इंस्पेक्टर के पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट sssb.punjab.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Hritik Roshan, Mountain Dew Ad Fake News

फिल्म अभिनेता ऋतिक रोशन की फाइल फोटो। झालावाड़ उपभोक्ता न्यायालय ने भ्रामक विज्ञापन मामले में बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन, माउंटेन ड्यू कोल्ड ड्रिंक बनाने वाली कंपनी और डिस्ट्रीब्यूटर कंपनी को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने 1 महीने में नोटिस का जवाब मांगा है। . एडवोकेट गुरुचरण सिंह ने उपभोक्ता आयोग में परिवार पेश करते हुए आरोप लगाया कि कोल्ड ड्रिंक कंपनी और इसके ब्रांड एंबेसडर ऋतिक रोशन विज्ञापन में जो दिखाते हैं, वह पूरी तरह भ्रामक है। विज्ञापन में दावा किया जाता है कि इस कोल्ड ड्रिंक को पीने से शरीर में अत्यधिक स्फूर्ति और ऊर्जा आती है, जिससे व्यक्ति असंभव लगने वाले साहसी काम भी आसानी से कर लेता है। एडवोकेट सिंह ने बताया कि विज्ञापन से प्रभावित होकर कोल्ड ड्रिंक खरीदी और उसको पीया, लेकिन विज्ञापन में किए गए दावों जैसा कोई अनुभव नहीं हुआ। उपभोक्ताओं को गुमराह करने का आरोप एडवोकेट गुरुचरण सिंह ने कोर्ट को बताया- कंपनी और फिल्म स्टार मिलकर उपभोक्ताओं को गुमराह कर रहे हैं। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 2(28) के तहत कोई भी ऐसा विज्ञापन जो किसी उत्पाद की गुणवत्ता, प्रकृति या उससे मिलने वाले लाभ के बारे में गलत जानकारी देता है, वह ‘भ्रामक विज्ञापन’ की श्रेणी में आता है। उपभोक्ता न्यायालय ने प्रारंभिक तौर पर मामले को सही पाया और परिवाद स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया तथ्यों में सच्चाई पाई, जिसके बाद सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट अब इस बात की जांच करेगी कि क्या कंपनी द्वारा किए गए दावे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हैं या वे केवल ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए फैलाया गया एक भ्रम है। कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद कुछ अलग महसूस नहीं हुआ एडवोकेट गुरुचरण सिंह ने कहा- माउंटेन ड्यू कोल्ड ड्रिंक कंपनी का विज्ञापन ऋतिक रोशन करते हैं। उनके द्वारा यह बोला जाता है कि माउंटेन ड्यू जितना ज्यादा आप पीएंगे, आप में हिम्मत बढ़ेगी। आपका डर खत्म होगा। यह सब चीजें उसमें बताई गई है। यह विज्ञापन देखकर मैंने भरोसा किया और माउंटेन ड्यू खरीद कर पी। उन्होंने बताया- कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद मुझे जो चीज महसूस हुई, वो ये है कि उसमें ऐसा कुछ भी नहीं था कि जिससे कोई हिम्मत बढ़ती हो या डर खत्म होता हो। न उसमें कोई ऐसी सामग्री (इंग्रेडिएंट) है और न कोई ऐसी साइंटिफिक रिपोर्ट है कि इससे डर खत्म होता है या कोई हिम्मत बढ़ती हो। यह एक भ्रामक विज्ञापन है। इस कारण मैंने कंज्यूमर कोर्ट में परिवार दायर किया है। कोर्ट से जारी नोटिस में एक महीने का समय एडवोकेट गुरचरण सिंह ने बताया- 20 जनवरी को परिवाद पेश किया गया था। कोर्ट में तथ्यों की जांच के बाद 12 फरवरी को कोर्ट ने कंपनी के ब्रांड एंबेसडर अभिनेता ऋतिक रोशन, कोल्ड ड्रिंक कंपनी पेप्सिको और डिस्ट्रीब्यूटर कंपनी वरुण बेवरेज लिमिटेड को डाक के माध्यम से नोटिस भेजे हैं और 1 महीने में जवाब मांगा है। ये खबरें भी पढ़ें सलमान खान, पान मसाला कंपनी कोटा कंज्यूमर कोर्ट में तलब:आरोप- भ्रामक विज्ञापन, केसर 4 लाख रुपए किलो; 5 रुपए में कैसे दे सकते शाहरुख खान, अजय देवगन, टाइगर श्रॉफ कोटा कंज्यूमर-कोर्ट में तलब:आरोप- पान मसाला में केसर होने का दावा, विज्ञापन से युवाओं को कर रहे भ्रमित
टेक्सास में हनुमान जी की मूर्ति से ट्रम्प समर्थक नाराज:कहा- ये दिल्ली नहीं, पिछड़े देशों के लोग अमेरिका पर कब्जा कर रहे

अमेरिका के टेक्सास राज्य में हनुमान जी की मूर्ति पर ट्रम्प समर्थक नेता कार्लोस टुर्सियोस ने नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया X पर लिखा कि यह इस्लामाबाद या नई दिल्ली नहीं है। यह शुगर लैंड, टेक्सास है। टुर्सियोस ने कहा कि पिछड़े देशों के प्रावासी धीरे-धीरे टेक्सास और अमेरिका पर कब्जा कर रहे हैं। यह अमेरिका की तीसरी सबसे बड़ी मूर्ति क्यों है? हमला रोकिए। बता दें कि हनुमान की 90 फीट ऊंची मूर्ति टेक्सास राज्य के ‘श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर’ में लगी है और इसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ कहा जाता है। टुर्सियोस पर नस्लभेदी सोच फैलाने का आरोप कई लोग सोशल मीडिया पर टुर्सियोस के इस बयान का विरोध कर रहे हैं। कुछने उन पर नस्लभेदी सोच फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि प्रवासी समुदाय और अलग-अलग धर्मों के लोगों ने अमेरिकी समाज को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है। कार्तिक गडा नाम के एक यूजर ने अमेरिका में बोली जाने वाली भाषाओं का चार्ट शेयर किया। उन्होंने लिखा कि अमेरिका में 4.1 करोड़ घरों में स्पेनिश बोली जाती है, जबकि भारतीय भाषाएं टॉप 10 में भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि घर में बोली जाने वाली भाषा समाज में घुलने-मिलने का बड़ा संकेत है और भारतीय-अमेरिकी समुदाय काफी हद तक मुख्यधारा में शामिल हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि जब किसी भारतीय भाषा के बोलने वालों की संख्या स्पेनिश से ज्यादा हो जाएगी, तब यह देखा जाएगा कि कौन कितना घुला-मिला है। नूरी सुन्नाह नाम के एक यूजर ने लिखा कि यह मूर्ति करीब डेढ़ साल से वहीं है। मंदिर में आने वाले हिंदुओं को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है। अगर किसी को यह पसंद नहीं है, तो वह इसे नजरअंदाज कर सकता है। टेक्सास में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची मूर्ति अमेरिका के टेक्सास राज्य के शुगर लैंड में मौजूद श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची कांसे की मूर्ति है। इसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ कहा जाता है। यह भारत के बाहर हनुमानजी की सबसे ऊंची मूर्ति है। मूर्ति का वजन 90 टन है और इसे पांच धातुओं के मिश्रण से बनाया गया है। हनुमानजी को अभय मुद्रा में हाथ आगे करके और गदा के साथ दिखाया गया है। यह कमल के तख्त पर खड़ी है, जिसे हाथी की मूर्तियों से सजाया गया है। अमेरिका में यह तीसरी सबसे ऊंची मूर्ति है, जो स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी (151 फीट) और फ्लोरिडा की पेगासस एंड ड्रैगन (110 फीट) के बाद आती है। मूर्ति की स्थापना के लिए 15 से 18 अगस्त 2024 को तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा समारोह हुआ था जिसमें हजारों लोग शामिल हुए थे। ट्रम्प समर्थक नेता ने पिछले साल भी विवादित बयान दिया था यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प समर्थक नेता ने हनुमान जी की मूर्ति को लेकर इस तरह का बयान दिया हो। पिछले साल ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के नेता अलेक्जेंडर डंकन ने भगवान हनुमान की प्रतिमा पर विवादित बयान दिया था। उन्होंने इसे झूठे भगवान की झूठी प्रतिमा कहा था। डंकन ने X पर लिखा था- हम टेक्सास में एक झूठे हिंदू भगवान की झूठी मूर्ति क्यों लगने दे रहे हैं? हम एक ईसाई राष्ट्र हैं। कई अन्य संगठनों ने भी इसे धार्मिक आस्था पर हमला बताते हुए माफी की मांग की थी। अमेरिकी नागरिकों ने भी इसकी घोर निंदा की थी। भारतवंशियों के खिलाफ हेट क्राइम बढ़ा ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में भारतवंशियों के खिलाफ हेट क्राइम के मामले बढ़े हैं। बाइडेन कार्यकाल में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों के खिलाफ ऑनलाइन नफरत व हिंसा सीमित रही। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2024 तक 46,000 ट्रोलिंग और 884 धमकियां दर्ज हुईं। लेकिन ट्रम्प के लौटते ही हालात बिगड़ गए। अक्टूबर 2025 तक ट्रोलिंग बढ़कर 88,000 तक पहुंची, यानी इसमें 91% की वृद्धि दर्ज की गई। दिसंबर में वीजा और माइग्रेंट मामले में ट्रम्प-मस्क-रामास्वामी बहस के बाद 76% धमकियां ‘नौकरियां छीनने’ से जुड़ी रहीं। ट्रम्प सरकार के H-1B वीजा फीस बढ़ाने और 104 भारतीयों को डिपोर्ट करने के फैसले ने माहौल भड़काया। कई शहरों में निशाने पर भारतीय समुदाय के लोग नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच अमेरिका के शहरों में भारतीय समुदाय को निशाना बनाते हुए हिंसक वारदातों की एक शृंखला सामने आई। फरवरी 2025 में वर्जीनिया में एक भारतीय-अमेरिकी कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मार्च 2025 में एक किराना स्टोर पर हुए हमले में पिता-पुत्री की जान चली गई। सितंबर 2025 में टेक्सास के डलास में दो छात्रों और श्रमिकों की हत्या कर दी गई। इसी महीने चंद्रमौली नागमल्लैया की सिर काटकर हत्या ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। अक्टूबर 2025 में पेंसिल्वेनिया के पिट्सबर्ग में एक मोटेल पर गोलीबारी में भारतीय मूल के मालिक और कर्मचारियों को निशाना बनाया गया। वहीं ओहायो, इलिनॉय और इंडियाना राज्यों में छात्रों से हेट क्राइम के मामले सामने आए। ‘भारतीयों को देश से निकालो’ जैसे नारे बढ़ें रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ते नस्लभेद का यह ट्रेंड सिर्फ भारतीयों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई समुदाय को निशाना बना रहा है। इसमें धर्म, नागरिकता या जातीय पहचान का कोई फर्क नहीं किया जा रहा। रिपोर्ट में इसके चार प्रमुख कारण बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में प्रवासियों के खिलाफ जो वैश्विक नाराजगी बढ़ी है, वह इस नस्लभेदी ट्रेंड का पहला बड़ा कारण है। यह भावना दुनियाभर में उभर रही दक्षिणपंथी राजनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है। ट्रम्प की नीतियों से भारतीयों पर नस्लभेदी पोस्ट बढ़े H-1B पर अमेरिकी हैं गुस्सा अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर गुस्सा भी इस ट्रेंड को बढ़ा रहा है। दक्षिणपंथी समूहों का आरोप है कि भारतीय ‘कम योग्य’ होते हुए भी अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छीन रहे हैं। इससे सोशल मीडिया पर ‘भारतीयों को देश से निकालो’ जैसे नारों में इजाफा हुआ। श्वेत वर्चस्ववाद अपने चरम पर भारतीयों के खिलाफ नस्लभेद एशियाई समुदायों के खिलाफ व्यापक भेदभाव का हिस्सा है। ट्रम्प की जीत के बाद श्वेत वर्चस्ववादी गतिविधियां चरम पर पहुंच जाती हैं। जबकि, चुनावी दौर में हेट क्राइम में करीब 80% की बढ़ोतरी देखी जाती है। ट्रेड डील पर तनाव का भी असर भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर तनाव से नफरत को हवा
फिल्ममेकर एम. एम. बेग घर में मृत पाए गए:लंबे समय से बीमार थे एक्ट्रेस बेबी गुड्डू के पिता, फिल्म छोटी बहू का किया था निर्देशन

वरिष्ठ फिल्मकार एम. एम. बेग का उनके घर पर निधन हो गया। वह लगभग 70 वर्ष के थे। उनके निधन की पुष्टि उनके पब्लिसिस्ट हनीफ जावेरी ने की है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक एम. एम. बेग पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। चार-पांच दिनों तक घर से बाहर नहीं निकलने और घर से दुर्गंध आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दरवाजा खोलकर अंदर देखा तो बैग साहब मृत अवस्था में पाए गए। इसके बाद पुलिस ने उनकी बेटी को सूचना दी और रात करीब 1:30 से 2:00 बजे के बीच उनका शव पोस्टमार्टम के लिए कूपर अस्पताल भेज दिया गया। एम. एम. बेग हिंदी सिनेमा के जाने-माने फिल्मकार थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दिग्गज फिल्मकार जे. ओम प्रकाश, विमल कुमार और राकेश रोशन के सहायक के रूप में की। उन्होंने आदमी खिलौना है, जैसी करनी वैसी भरनी, कर्ज चुकाना है, काला बाजार और किशन कन्हैया जैसी फिल्मों में काम किया। स्वतंत्र निर्देशक के तौर पर उन्होंने दो फिल्मों का निर्देशन किया, जिनमें मासूम गवाह (जो अब तक रिलीज नहीं हो पाई) और छोटी बहू शामिल हैं। हनीफ जावेरी के अनुसार, बेग साहब का राकेश रोशन के साथ बेहद करीबी संबंध था। उन्होंने ऋतिक रोशन को उनकी पहली फिल्म कहो ना… प्यार है से पहले डिक्शन, वॉयस मॉड्यूलेशन और संवाद अदायगी की ट्रेनिंग भी दी थी। एम. एम. बेग की बेटी बेबी गुड्डू, जिनका असली नाम शाहिंदा बेग है, 1980 के दशक की लोकप्रिय बाल कलाकार रही हैं। उन्होंने आखिर क्यों?, नगीना, प्यार किया है प्यार करेंगे और औलाद जैसी कई चर्चित फिल्मों में काम किया।
India IT Rules 2026 | Deepfake Video-Photo 3 Hr Removal & AI Content Labeling

Hindi News Tech auto India IT Rules 2026 | Deepfake Video Photo 3 Hr Removal & AI Content Labeling नई दिल्ली1 दिन पहले कॉपी लिंक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे X (ट्विटर), यू-ट्यूब, स्नैपचैट और फेसबुक को कल 20 जनवरी से अपने प्लेटफॉर्म पर शेयर किए जाने वाले AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) कंटेंट पर लेबल लगाना होगा। इसके साथ ही अगर कोई डीपफेक वीडियो-फोटो अपलोड करता है, तो उसे 3 में हटाने होगा। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इसके लिए IT रूल्स 2021 में बदलाव किया है। इसका ड्राफ्ट 22 अक्टूबर 2025 को जारी किया गया था। मंत्रालय ने 10 फरवरी को नोटिफिकेशन जारी कर प्लेटफॉर्म्स को नए नियम का पालन करने का आदेश जारी किया था। नए नियम डीपफेक और AI से बने कंटेंट को लेबल और ट्रेस करने के लिए हैं। अब AI कंटेंट में साफ लिखना होगा कि यह असली नहीं, AI की मदद से बनाया गया है। इससे मिस इनफॉर्मेशन और चुनावी धांधली जैसी समस्याओं पर लगाम लगेगी। पीएम बोले- कंटेंट पर ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ की जरूरत पीएम ने आज AI समिट के दौरान सुझाव दिया कि जैसे खाने के सामान पर ‘न्यूट्रिशन लेबल’ होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी स्पष्ट लेबल होना चाहिए। इससे लोगों को पता चल सकेगा कि क्या असली है और क्या एआई द्वारा बनाया गया (फैब्रिकेटेड) है। सभी AI ऑडियो-वीडियो में लेबल लगाना होगा नए रूल 3 (3) के तहत, जो भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म AI कंटेंट जैसी ‘सिंथेटिकली जेनरेटेड इंफॉर्मेशन’ क्रिएट करेगा, उसे हर ऐसे कंटेंट पर प्रॉमिनेंट लेबल लगाना होगा। परमानेंट यूनिक मेटाडेटा/आइडेंटिफायर एम्बेड भी करना पड़ेगा। ये लेबल विजुअल में कम से कम 10% एरिया कवर करेगा या ऑडियो में पहले 10% टाइम में सुनाई देगा। मेटाडेटा को कोई चेंज, हाइड या डिलीट नहीं कर पाएगा। प्लेटफॉर्म्स को टेक्निकल तरीके अपनाने पड़ेंगे ताकि अपलोड होने से पहले ही चेक हो जाए कि ये AI वाला है या नहीं। नवंबर में रश्मिका मंदाना का डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था। सचिन तेंदुलकर का डीपफेक वीडियो, जिसमें वे गेमिंग ऐप को प्रमोट करते दिखे थे। नए IT नियमों में ये 3 बदलाव भी लेबल हटाना या छिपाना अब मुमकिन नहीं : सोशल मीडिया कंपनियां अब AI लेबल या उसके मेटाडेटा (पहचान की जानकारी) को हटाने या छिपाने की इजाजत नहीं दे सकतीं। एक बार लेबल लग गया, तो उसे वैसे ही रखना होगा। गंदे और भ्रामक कंटेंट पर लगाम : सरकार ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे ऑटोमेटेड टूल्स (सॉफ्टवेयर) इस्तेमाल करें, जो AI के जरिए बनाए गए गैर-कानूनी, अश्लील या धोखाधड़ी वाले कंटेंट को रोक सकें। हर 3 महीने में चेतावनी देना अनिवार्य : कंपनियों को हर 3 महीने में कम से कम एक बार अपने यूजर्स को वॉर्निंग देनी होगी। उन्हें बताना होगा कि अगर उन्होंने AI का गलत इस्तेमाल किया या नियम तोड़े, तो उन्हें सजा या जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। यूजर्स और इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा? यूजर्स अब फेक कंटेंट आसानी से पहचान सकेंगे। मिसइनफॉर्मेशन कम होगी। लेकिन क्रिएटर्स को एक्स्ट्रा स्टेप्स लेने पड़ेंगे, जैसे लेबल लगाना। इंडस्ट्री के लिए चैलेंज ये होगा कि उन्हें मेटाडेटा और वेरिफिकेशन के लिए टेक इन्वेस्टमेंट करना होगा, जो ऑपरेशंस को थोड़ा महंगा कर सकता है। ओवरऑल, ये AI मिसयूज रोकने में मददगार साबित होगा। मंत्रालय ने इन नियमों पर क्या कहा? सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने साफ कहा कि ये स्टेप ‘ओपन, सेफ, ट्रस्टेड और अकाउंटेबल इंटरनेट’ बनाने के लिए है। यह जनरेटिव AI से आने वाली मिसइनफॉर्मेशन, इम्पर्सनेशन और इलेक्शन मैनिपुलेशन जैसी रिस्क्स को हैंडल करेगा। इससे इंटरनेट ज्यादा भरोसेमंद बनेगा। क्या है डीपफेक? डीपफेक एक तरह की फेक वीडियो होती है, जिसमें किसी शख्स के चेहरे, आवाज और एक्सप्रेशन बदले जाते हैं। AI टूल्स के जरिए एडिटिंग इतनी सफाई से होती है कि सही और फेक वीडियो में पहचान कर पाना काफी मुश्किल होता है। ————————— ये खबर भी पढ़ें… X ने अश्लील AI कंटेंट पर सरकार को जवाब सौंपा:आईटी मंत्रालय जांच कर रहा, महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीरें क्रिएट कर शेयर करने का आरोप दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क के AI चैटबॉट ग्रोक (Grok) के जरिए महिलाओं और बच्चों की अश्लील तस्वीरें बनाने के मामले में भारत सरकार को अपना जवाब सौंप दिया है। आईटी मंत्रालय ने 2 दिसंबर को मस्क की कंपनी को बुधवार शाम 5 बजे तक का समय दिया था। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कंपनी ने एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल कर दी है, जिसकी मंत्रालय जांच कर रहा है। सरकार ने चेतावनी दी थी कि अगर AI टूल्स के गलत इस्तेमाल पर कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो X को भारतीय कानूनों के तहत मिल रही कानूनी सुरक्षा खत्म कर दी जाएगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
रोहित शेट्टी हाउस फायरिंग केस:आरोपी दीपक शर्मा को ₹15 लाख का लालच दिया गया, पूछताछ में बताया-घर के बाहर गोलियां चलाने था काम

फिल्ममेकर रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग के मामले में जानकारी सामने आई है कि आरोपी दीपक शर्मा को फरार आरोपी शुभम लोंकर की ओर से 15 लाख रुपए देने का वादा किया गया था। सीएनएन न्यूज18 की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि दीपक को सिर्फ रोहित शेट्टी के घर के बाहर गोलियां चलाने के लिए कहा गया था। इसके लिए उसे 50 हजार रुपये एडवांस दिए गए थे, जबकि बाकी 14.50 लाख रुपए बाद में देने की बात थी। पैसों के लिए फायरिंग करने की हामी भरी थी पूछताछ में दीपक शर्मा ने यह भी कबूल किया कि उसने पैसों के लिए फायरिंग करने की हामी भरी थी। उसने बताया कि उस पर 8 लाख रुपये का कर्ज था और उसे पैसों की सख्त जरूरत थी। बता दें कि 31 जनवरी देर रात रोहित शेट्टी की बिल्डिंग पर फायरिंग की गई थी। हमलावरों ने मुंबई के जुहू इलाके में स्थित नौ मंजिला इमारत की पहली मंजिल पर रात करीब 12:45 बजे फायरिंग की थी। कम से कम पांच राउंड गोलियां चलाई गईं, जिनमें से एक गोली इमारत में बने जिम के शीशे से टकराई थी। घटना की सूचना मिलते ही मुंबई पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई। मामले में 12 से अधिक आरोपी हिरासत में मामले में पुलिस ने गोली चलाने के आरोपी दीपक शर्मा समेत कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया। अब तक 12 से अधिक आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है। क्राइम ब्रांच की जांच में फायरिंग में इस्तेमाल किया गया हथियार बरामद कर लिया गया, जिसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस ने आरोपी दीपक शर्मा की निशानदेही पर यह हथियार बरामद किया। मामले में आरोपियों पर महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) लगाया गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि घटना के तार लॉरेंस गैंग से जुड़े हो सकते हैं। बता दें कि सबसे पहले 5 आरोपियों को पुणे से पकड़ा गया। इन पर शूटर को स्कूटर और हथियार उपलब्ध कराने का आरोप है। गिरफ्तार लोगों में आदित्य गायकवाड़, सिद्धार्थ येनपुरे, समर्थ पोमाजी, स्वप्निल साकट और आसाराम फासले उर्फ बाबू शामिल हैं। इसके बाद मुंबई पुलिस और STF के संयुक्त ऑपरेशन में हरियाणा और राजस्थान से अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें मुख्य शूटर दीपक शर्मा शामिल है, जिसे हरियाणा के बहादुरगढ़ से पकड़ा गया। साथ ही मामले में सनी ठाकुर, सोनू ठाकुर, ऋतिक यादव, विष्णु कुशवाहा, जतिन भारद्वाज और विशाल ठाकुर को भी गिरफ्तार किया गया।








