विदिशा में बेतवा मैराथन आज:21 किमी दौड़ में विजेता को मिलेंगे 21 हजार रुपए; पर्यटन को बढ़ावा देने आयोजन

विदिशा जिले में 21 फरवरी शनिवार को बेतवा मैराथन का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जिले के ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों का प्रचार-प्रसार करना तथा खेल भावना को बढ़ावा देना है। जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद द्वारा मध्य प्रदेश टूरिज्म के सहयोग से आयोजित इस मैराथन को लेकर युवाओं और खेल प्रेमियों में खासा उत्साह है। यह मैराथन दौड़ तीन श्रेणियों में आयोजित की जा रही है। 21 किलोमीटर हाफ मैराथन, 10 किलोमीटर ओपन रन और 5 किलोमीटर रन फॉर फन। तीनों श्रेणियों में पुरुष और महिला वर्ग के लिए अलग-अलग नकद पुरस्कार घोषित किए गए हैं। 21 किलोमीटर हाफ मैराथन में प्रथम विजेता को 21 हजार रुपए, द्वितीय को 10 हजार और तृतीय को 5 हजार रुपए दिए जाएंगे। 10 किलोमीटर ओपन रन में प्रथम पुरस्कार 10 हजार, द्वितीय 5 हजार और तृतीय 3 हजार रुपए है। वहीं, 5 किलोमीटर रन फॉर फन के लिए प्रथम विजेता को 5 हजार, द्वितीय को 3 हजार और तृतीय को 2 हजार रुपए मिलेंगे। इसके अतिरिक्त, 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के वरिष्ठ नागरिकों के लिए 5 किलोमीटर की एक विशेष दौड़ भी आयोजित की जाएगी। मैराथन का शुभारंभ रवीन्द्रनाथ टैगोर सांस्कृतिक भवन ऑडिटोरियम से होगा। 5, 10 और 21 किलोमीटर के प्रतिभागी स्वामी विवेकानंद चौराहा, चरणतीर्थ और उदयगिरि तक दौड़ेंगे और वहीं से वापसी कर ऑडिटोरियम पर समापन करेंगे। 21 किलोमीटर की दौड़ सुबह 6 बजे, 10 किलोमीटर की दौड़ सुबह 6:30 बजे और 5 किलोमीटर की दौड़ सुबह 7 बजे से शुरू होगी। आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन खेल, स्वास्थ्य और पर्यटन को एक मंच पर लाने का प्रयास है, जिससे विदिशा की ऐतिहासिक धरोहरों को व्यापक पहचान मिल सके। नागरिकों से इस आयोजन में बड़ी संख्या में भागीदारी करने की अपील की गई है।
जबलपुर में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद बैठक में हंगामा:ऑनलाइन सेंटर प्रभारी और सदस्य में नोकझोंक, सदस्यों ने वॉकआउट भी किया

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (रादुविवि) की कार्यपरिषद बैठक शुक्रवार को हंगामे की भेंट चढ़ गई। इस दौरान ऑनलाइन सेंटर प्रभारी आरके गुप्ता और कार्यपरिषद सदस्य वेदप्रकाश तिवारी के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद कुछ सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार कर वॉकआउट कर दिया। बैठक में यूआईसीएसए विभाग की विभागाध्यक्ष ने कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और अन्य संसाधनों की कमी पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रशासन को कई बार अवगत कराने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे छात्रों और अभिभावकों के सवालों का जवाब देना मुश्किल हो रहा है। विरोध के बीच चल रही बैठक में तीखी बहस और आंतरिक असंतोष की स्थिति बन गई। स्थिति तनावपूर्ण होने पर कुछ कार्यपरिषद सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट कर दिया। कुलगुरु ने सदस्यों को मनाने का प्रयास किया, लेकिन उनका आक्रोश शांत नहीं हुआ और वे परिसर से बाहर निकल गए। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। एबीवीपी के केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य माखन शर्मा ने बताया कि कृषि, बीसीए और एमसीए सहित कई पाठ्यक्रमों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने प्रयोगशालाओं और संसाधनों की कमी को छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय बताया। महानगर मंत्री आर्यन पुंज ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों के प्रति असंवेदनशील है और उनकी मांगों पर स्पष्ट जवाब देने में असमर्थ है। इस प्रदर्शन के दौरान माखन शर्मा, आर्यन पुंज, अनमोल सोनकर, ऐश्वर्य सोनकर, शोभित मिश्रा, अक्षत ताम्रकार, भास्कर पटेल, प्रफुल तिवारी, दिव्यांक पचौरी, लखन मांझी, आशुतोष पटेल, आयुष बारी, कृष्ण ग्वालवंश, यश पटेल, आयुष पटेल, अंकित सिंह, पुष्कर शुक्ला, सोम यादव, आदि पावर, प्रक्ष सिसोदिया, अनिकेत श्रीवास्तव, राज नेमा और आभास दुबे सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
गलत सिलेबस का पेपर मिला, परीक्षा प्रभावित:ग्वालियर के स्कूल में छात्रों का भविष्य अधर में, परिजनों का हंगामा

ग्वालियर के डॉन बॉस्को पब्लिक स्कूल में शुक्रवार को पांचवीं और आठवीं बोर्ड कक्षा के छात्रों और उनके अभिभावकों ने हंगामा किया। उन्होंने स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया, जिसके कारण छात्रों को अंग्रेजी की परीक्षा में गलत सिलेबस का प्रश्नपत्र मिला। इससे उनकी परीक्षा प्रभावित हुई और साल बर्बाद होने की आशंका जताई जा रही है। घटना वायुनगर स्थित सनराइज पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल में हुई, जहां डॉन बॉस्को स्कूल के छात्रों का परीक्षा केंद्र था। शुक्रवार दोपहर 2 बजे जब छात्र अंग्रेजी की परीक्षा देने पहुंचे, तो उन्हें पहले एमपी बोर्ड इंग्लिश मीडियम का सामान्य प्रश्नपत्र दिया गया। कुछ देर बाद वह प्रश्नपत्र वापस ले लिया गया और एनसीईआरटी सिलेबस का अंग्रेजी पेपर दिया गया, जो छात्रों को पढ़ाए गए पाठ्यक्रम से भिन्न था। इस अचानक बदलाव से छात्र घबरा गए और उन्होंने परीक्षा नियंत्रक से आपत्ति दर्ज कराई। छात्रों ने बताया कि उन्हें पूरे साल एमपी बोर्ड का सामान्य सिलेबस पढ़ाया गया था। हालांकि, परीक्षा फॉर्म भरते समय स्कूल प्रबंधन ने इंग्लिश मीडियम के साथ एनसीईआरटी सिलेबस का विकल्प चुन लिया था। छात्रों के अनुसार, परीक्षा के अंतिम 15 मिनट में उन्हें फिर से एमपी बोर्ड का प्रश्नपत्र दिया गया, जिससे वे ठीक से उत्तर नहीं लिख पाए। कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें अतिरिक्त उत्तर पुस्तिकाएं नहीं दी गईं। परीक्षा के बाद बच्चे रोते हुए स्कूल पहुंचे और अभिभावकों को पूरी घटना बताई। इसके बाद अभिभावक स्कूल में जमा हो गए। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि प्राचार्य ने समस्या का समाधान करने के बजाय यह कह दिया कि सभी बच्चों को पास कर दिया जाएगा। इस बयान से अभिभावकों में और अधिक नाराजगी फैल गई, क्योंकि उनका मानना है कि मेहनती और कमजोर छात्रों को समान अंक देना उचित नहीं है। कुछ अभिभावकों ने आगामी परीक्षाओं को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। उनका आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को इंटरनेट से एनसीईआरटी सिलेबस पढ़कर अगली परीक्षा देने की सलाह दी है। इस मामले में जब प्राचार्य से बात करने का प्रयास किया गया, तो वे मुंह ढंककर निकल गईं। उप-प्राचार्य ने भी इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
हर नवजात की मौत का होगा ऑडिट:गर्भावस्था से प्रसव तक की पूरी जटिलताओं की फाइल तैयार करने के निर्देश जारी

नवजात शिशुओं की मौत को लेकर अब स्वास्थ्य विभाग और सख्त हो गया है। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में कलेक्टर ने साफ निर्देश दिए कि एसएनसीयू में होने वाली हर नवजात मृत्यु का विस्तृत ऑडिट किया जाए। सिर्फ अस्पताल में हुई घटना ही नहीं, बल्कि गर्भावस्था से लेकर प्रसव तक की सभी जटिलताओं को फाइल में शामिल करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही ऑपरेशन थिएटर और लेबर रूम में संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था को और मजबूत करने तथा एआई आधारित तकनीक अपनाने पर भी जोर दिया गया है। बैठक में स्वास्थ्य कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा की गई। कलेक्टर ने ली स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा बैठक 20 फरवरी को कलेक्टर कार्यालय में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा की। इस दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी सुनील सोलंकी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि नवजात मृत्यु दर कम करना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसके लिए हर स्तर पर गंभीरता से काम करना होगा। एसएनसीयू में हर मौत की होगी गहराई से जांच कलेक्टर ने निर्देश दिए कि विशेष नवजात देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में होने वाली हर शिशु मृत्यु का डेथ ऑडिट किया जाए। ऑडिट में यह देखा जाए कि मृत्यु के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और क्या उन्हें पहले पहचाना जा सकता था। उन्होंने कहा कि डेथ ऑडिट में गर्भावस्था के दौरान आई दिक्कतें, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी, समय पर जांच और प्रसव के दौरान आई जटिलताओं को भी शामिल किया जाए। इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा। ऑपरेशन थिएटर में एआई आधारित इन्फेक्शन कंट्रोल पर जोर बैठक में अस्पतालों के ऑपरेशन थिएटर और लेबर रूम में संक्रमण नियंत्रण की चेकलिस्ट का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने कहा कि संक्रमण रोकने के लिए एआई आधारित तकनीक को शामिल करने पर विचार किया जाए, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना कम हो। उन्होंने कहा कि संक्रमण नियंत्रण बेहतर होगा तो प्रसव और ऑपरेशन के दौरान होने वाली जटिलताओं में कमी आएगी। टीकाकरण, एएनसी पंजीयन और हाई रिस्क गर्भवती पर फोकस कलेक्टर ने टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लाभार्थियों से फीडबैक लेने के निर्देश दिए। साथ ही एएनसी पंजीयन बढ़ाने, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान करने और जरूरत पड़ने पर तुरंत रेफरल की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सुरक्षित प्रसव सेवाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया। बुजुर्गों के लिए होप कार्यक्रम की समीक्षा बैठक में जानकारी दी गई कि होप कार्यक्रम के तहत 902 वृद्धजन चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से 560 को नर्सिंग अधिकारियों द्वारा घर जाकर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा चुकी हैं। गंभीर बीमारियों से ग्रस्त बुजुर्गों को 7वें, 14वें और 21वें दिन स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा घर पर सेवाएं दी जाती हैं। पोषण सेवाओं में संयुक्त कार्य की जरूरत जिला पोषण समिति की बैठक में गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पोषण कार्यक्रमों की जानकारी दी गई। कलेक्टर ने स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग को मिलकर काम करने के निर्देश दिए, ताकि मातृ और शिशु स्वास्थ्य में समग्र सुधार हो सके।
राजस्थान में बोलेरो-बाइक टकराए, 4 की मौत:मृतकों में मंदसौर के तीन लोग; एमपी आते समय झालावाड़ में हादसा

राजस्थान के झालावाड़ में बोलेरो और बाइक की आमने-सामने की भिड़ंत में 4 लोगों की मौत हो गई। इनमें एमपी के मंदसौर के तीन लोग शामिल हैं। बाइक सवार चारों लोग राजस्थान से मध्य प्रदेश आ रहे थे। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को चौमहला अस्पताल में मॉर्च्युरी में रखवाया। बैग में मिले आधार कार्ड से 3 व्यक्तियों की पहचान हुई है, जो मंदसौर के रहने वाले थे। दस्तावेज नहीं मिलने के कारण एक अन्य मृतक की पहचान नहीं हो पाई है। हादसा शुक्रवार देर शाम करीब 7:30 बजे गंगधार थाना क्षेत्र में हुआ। हादसे की 3 तस्वीर देखिए… एक ही बाइक पर बैठे थे 4 लोग डीएसपी हेमंत गौतम ने बताया- डग-चौमहला रोड पर करनपुरा गांव के पास बोलेरो और बाइक में भिड़ंत हो गई। हादसे में 4 लोगों की मौत हो गई। बाइक डग से गंगधार की तरफ आ रही थी, जबकि बोलेरो गंगधार से डग की तरफ जा रही थी। इसी दौरान करनपुरा गांव के पास दोनों गाड़ियों की आमने-सामने की भिड़ंत हो गई। भिड़ंत में दोनों वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि मरने वाले चारों लोग एक ही बाइक पर सवार थे। बैग से 3 आधार कार्ड मिले, मध्यप्रदेश के निवासी डीएसपी ने बताया- मृतकों के बैग से 3 आधार कार्ड मिले हैं। इनकी पहचान मंदसौर निवासी राजपाल पुत्र परबत सिंह निवासी झांगरिया गांव, थाना सीतामऊ, जवाहरलाल पुत्र रामचंद्र निवासी झांगरिया गांव, थाना सीतामऊ और नरेश पुत्र कालूलाल निवासी उदयपुर गांव के रूप में हुई है। परिजन को दी हादसे की जानकारी हेमंत गौतम ने बताया- थाना अधिकारी अमरनाथ योगी ने आधार कार्ड में लिखे पते पर परिजन से संपर्क किया और हादसे की जानकारी दी। मृतकों के परिजन के चौमहला पहुंचने के बाद ही उनकी अधिकृत पहचान हो पाएगी। हादसे के कारणों की भी जांच की जा रही है।








