शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने की भोपाल उत्तर के विधायक की तारीफ:कहा- गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने का संकल्प लाए, यह हिंदू विधायकों को करना चाहिए था

मध्य प्रदेश की सियासत में ‘गौमाता’ को लेकर एक नया और दिलचस्प मोड़ आ गया है। भोपाल उत्तर से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील द्वारा विधानसभा में गौमाता को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने के लिए पेश किए गए ‘अशासकीय संकल्प’ ने संतों के गलियारों में हलचल मचा दी है। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एक वीडियो संदेश जारी कर आतिफ अकील की जमकर तारीफ की है। उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि जो काम खुद को हिंदू कहने वाले विधायकों को करना चाहिए था, वह एक मुस्लिम विधायक ने कर दिखाया है। शंकराचार्य ने ‘हिंदू विधायकों के माथे पर बताया कलंक’ शंकराचार्य ने अपने संदेश में एमपी विधानसभा के हिंदू विधायकों को आइना दिखाते हुए तीन बड़ी बातें कहीं हैं। आतिफ अकील के संकल्प में यह है खास मुस्लिम जनप्रतिनिधि आगे, हिंदू क्यों देरी कर रहे शंकराचार्य ने केवल आतिफ ही नहीं, बल्कि अन्य मुस्लिम नेताओं का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि संसद में अफजाल अंसारी और गुजरात की कांग्रेस सांसद गनी बेन ठाकुर ने भी गौमाता के लिए आवाज उठाई है। प्रयागराज के सांसद उज्जवल रमण सिंह का भी उदाहरण दिया है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में विधायक बालमुकुंद ने अपनी ही सरकार से इस पर जवाब मांगा है, लेकिन सरकारें अभी भी देरी कर रही हैं। हर हिंदू गौमाता के पक्ष में खड़ा हो और खुद को असली हिंदू घोषित करे, वरना जनता की नजर में आप ‘नकली हिंदू’ कहलाएंगे। यह खबर भी पढ़ें… गोहत्या पर सियासी-गर्मी के बाद विधानसभा में प्रस्ताव की तैयारी दिसंबर में नगर निगम के स्लॉटर हाउस से निकले ट्रक में गोमांस मिलने के बाद मचे हंगामे के बाद अब कांग्रेस के विधायक आतिफ अकील ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कराने की मांग की है। वह विधानसभा में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कराने का संकल्प लेकर आएंगे। मंगलवार को इस संबंध में उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा। पूरी खबर यहां पढ़ें…
Trump Tariffs Cancelled by Supreme Court; 10% Hike Announced

वॉशिंगटन डीसी1 घंटे पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्लोबल टैरिफ 10% से बढ़ाकर 15% करने का ऐलान किया है। उन्होंने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। इससे पहले ट्रम्प ने शुक्रवार रात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी देशों पर 10% टैरिफ लगाने की बात कही थी। दरअसल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ट्रम्प के दुनियाभर के देशों पर लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रम्प को IEEPA कानून का इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, सिर्फ संसद को है। इससे नाराज होकर ट्रम्प ने दुनियाभर के देशों पर नए कानून (सेक्शन-122) का इस्तेमाल कर 10% टैरिफ लगा दिया था। इस कानून के तहत अधिकतम 15% टैरिफ ही लगाया जा सकता है।हालांकि यह टैरिफ सिर्फ 150 दिन के लिए ही लागू रहेगा। अगर इन्हें आगे बढ़ाना है तो कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी। 24 फरवरी से लागू होगा 15% टैरिफ ट्रम्प ने एक आदेश पर हस्ताक्षर कर दुनियाभर के देशों पर नया टैरिफ लगाया है। यह 15% टैरिफ 24 फरवरी से लागू हो जाएगा। इससे पहले उन्होंने कल टैरिफ को अवैध बताने वाले जजों की भी आलोचना की। ट्रम्प ने कहा- मुझे कोर्ट के कुछ जजों पर शर्म आ रही है। वे देश के लिए कलंक हैं, उनमें हमारे देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है। भारत के साथ ट्रेड डील पर ट्रम्प ने कहा कि, इस डील में कोई बदलाव नहीं होगा। पीएम मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं। ट्रम्प ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के फैसले के 3 घंटे बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की। ट्रम्प के प्रेस कॉन्फ्रेंस की 5 अहम बातें… सुप्रीम कोर्ट के रद्द किए गए टैरिफ लागू करने के लिए मुझे संसद की जरूरत नहीं है। मैं इन्हें राष्ट्रपति के मिले अधिकारों के जरिए लागू कर सकता हूं। सुप्रीम कोर्ट में रिफंड को लेकर कोई साफ बात नहीं कही गई है। इसलिए अमेरिकी सरकार किसी भी कंपनी को टैरिफ के रूप में वसूला गया पैसा वापस नहीं करेगी। जज ने बहुत ही घटिया फैसला सुनाया है। मुझे लगता है कि अब इस मामले पर अगले दो साल तक कोर्ट में मुकदमा चलेगा। हम अगले 5 साल तक कोर्ट में ही रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विदेशी ताकतों का असर पड़ा है। अगर टैरिफ नहीं लगाए गए, तो विदेशी देश कुछ उद्योगों में अमेरिका से आगे निकलते रहेंगे। टैरिफ लगाने का यह कदम कई साल पहले के राष्ट्रपतियों को उठा लेना चाहिए था। उन्होंने हमारे देश को कमजोर होने दिया और दूसरे देशों को फायदा उठाने दिया। सेक्शन 122 के जरिए नया टैरिफ लगाएंगे ट्रम्प सेक्शन 122 अमेरिका के एक कानून का हिस्सा है, जिसे ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 कहा जाता है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि अगर देश को अचानक व्यापार घाटे या आर्थिक संकट का खतरा हो, तो वे तुरंत आयात पर टैरिफ लगा सकते हैं। इसके तहत राष्ट्रपति बिना लंबी जांच प्रक्रिया के अस्थायी तौर पर टैरिफ लगा सकते हैं। आमतौर पर यह टैरिफ 150 दिनों तक लागू रह सकता है। इस दौरान सरकार स्थिति की समीक्षा करती है और आगे का फैसला लेती है। NBC न्यूज के मुताबिक दुनिया के सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर 15% का एक जैसा ग्लोबल टैरिफ लगाने का मतलब होगा कि जिन देशों पर ज्यादा टैरिफ लगा है वह खुद घट जाएगा। कुछ उत्पादों को छूट दी गई है, जैसे कुछ कृषि उत्पाद (बीफ, टमाटर, संतरा), महत्वपूर्ण खनिज, दवाइयां, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स और पैसेंजर वाहन। ट्रम्प प्रशासन ने कहा कि यह टैरिफ पुराने वाले की जगह लेगा और वे अधिक पैसा कमाने की कोशिश जारी रखेंगे। निक्सन ने 55 साल पहले लगाया था 10% ग्लोबल टैरिफ साल 1971 में अमेरिका और दुनिया के बीच व्यापार और भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट) में भारी असंतुलन हो गया था। अमेरिका लगातार ज्यादा आयात कर रहा था और निर्यात कम कर पा रहा था, जिससे डॉलर पर दबाव बढ़ रहा था। इसके बाद निक्सन ने दुनियाभर के देशों पर 10% का ग्लोबल टैरिफ लगा दिया था। इसके बाद यह महसूस किया गया कि भविष्य में अगर ऐसी आर्थिक आपात स्थिति आती है, तो राष्ट्रपति के पास ऐसी चीजों से निपटने के लिए कानूनी अधिकार होने चाहिए। इसी मकसद से 1974 में “ट्रेड एक्ट 1974” पारित किया गया था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सेक्शन 122 का पहले कभी इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसलिए यह भी साफ नहीं है कि अगर इसे अदालत में चुनौती दी गई, तो अदालतें इसकी व्याख्या किस तरह करेंगी। ट्रम्प ने पिछले साल अप्रैल में ग्लोबल टैरिफ का ऐलान किया था। (फाइल फोटो) कोर्ट की ट्रम्प को फटकार, कहा- हर देश से युद्ध की स्थिति में नहीं इससे पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को फटकारते हुए कहा था कि अमेरिका दुनिया के हर देश के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है। हालांकि फैसले को लेकर 3 जजों जस्टिस सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कैवनॉ ने इस फैसले से असहमति जताई। कैवनॉ ने अपने नोट में लिखा कि टैरिफ नीति समझदारी भरी है या नहीं, यह अलग सवाल है, लेकिन उनके मुताबिक यह कानूनी तौर पर वैध थी। कैवनॉ ने अपने नोट में भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर लगाए गए टैरिफ का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि ये टैरिफ विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों के तहत लगाए गए थे। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में कुल 9 जज हैं। इनमें से 6 जजों को रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किया है, जबकि 3 जज डेमोक्रेटिक राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किए। फैसले के खिलाफ वोट करने वाले तीनों जज रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किए थे। जस्टिस ब्रेट कैवनॉ को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल में 6 अक्टूबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया था। कोर्ट के फैसले से सभी टैरिफ खत्म नहीं हुए हैं कोर्ट के आदेश से ट्रम्प के सभी टैरिफ खत्म नहीं हुए हैं। स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए टैरिफ अलग कानूनों के तहत लगाए गए थे, इसलिए वे अभी भी लागू रहेंगे। हालांकि, दो बड़े कैटेगरी
Dilip Jaiswal Lowest, Hardia Highest Voters

मध्यप्रदेश में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की चार महीने चली प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है। प्रदेश में कुल 34 लाख 25 हजार 78 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। . सबसे ज्यादा असर भोपाल के गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में दिखा, जहां मंत्री कृष्णा गौर के क्षेत्र से 97 हजार से अधिक नाम काटे गए। वहीं इंदौर-5 विधानसभा सबसे ज्यादा मतदाताओं वाला क्षेत्र बन गया है, जबकि मंत्री दिलीप जायसवाल का कोतमा क्षेत्र सबसे कम मतदाताओं वाला है। एसआईआर की कार्यवाही शुरू होने से पहले प्रदेश में कुल मतदाता संख्या 5 करोड़ 74 लाख 6 हजार 143 थी। पूरी प्रक्रिया के बाद 34 लाख 25 हजार 78 नाम हटाए गए। ड्राफ्ट प्रकाशन के समय मतदाता संख्या 5 करोड़ 31 लाख 31 हजार 983 बताई गई थी। प्रदेश में अब 5 करोड़ 39 लाख 81 हजार 65 वोटर ड्राफ्ट के बाद दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया में 10 लाख 85 हजार 413 नए नाम जोड़े गए, जबकि 2 लाख 36 हजार 331 नाम और हटाए गए। इस तरह शुद्ध रूप से 8 लाख 49 हजार 82 मतदाता बढ़े और अब प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 5 करोड़ 39 लाख 81 हजार 65 हो गई है। यह ड्राफ्ट के मुकाबले 1.60 प्रतिशत की वृद्धि है। गोविंदपुरा में वोटर घटे, इंदौर-5 में सबसे ज्यादा मतदाता भोपाल के गोविंदपुरा में बड़े पैमाने पर नाम कटने से वहां कुल वोटर घट गए हैं। इसके उलट भोपाल के हुजूर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता संख्या बढ़ी है और यह अब गोविंदपुरा से आगे निकल गया है। नई सूची के अनुसार इंदौर-5 विधानसभा में 3 लाख 52 हजार 849 मतदाता दर्ज किए गए हैं, जो प्रदेश में सबसे अधिक हैं। वहीं कोतमा में 1 लाख 39 हजार 559 मतदाता हैं, जो सबसे कम हैं। सबसे अधिक वोटर इन विधानसभा में क्रमांक विधानसभा मतदाता संख्या 1 इंदौर-5 352849 2 राऊ 338544 3 हुजूर 336295 4 गोविन्दपुरा 320746 5 झाबुआ 317066 6 इंदौर -1 311268 7 बुरहानपुर 305813 8 जोबट 303666 9 सांवेर 300626 10 लखनादौन 296024 सबसे कम वोटर इन विधानसभा में क्रमांक विधानसभा मतदाता संख्या 1 कोतमा 139559 2 जबलपुर कैंट 160211 3 भोपाल दक्षिण पश्चिम 172610 4 बीना 177312 5 जावद 177610 6 भोपाल मध्य 181274 7 तेंदूखेड़ा 187503 8 टिमरनी 190432 9 सिंगरौली 190413 10 सेवढ़ा 191473 नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने का काम जारी रहेगा। बीएलओ के पास फॉर्म भरकर अब भी वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाया जा सकता है। इसके लिए फॉर्म 6 भरना होगा। वोटर पोर्टल https://voters.eci.gov.in पर जाकर ऑनलाइन भी नाम जुड़वा सकते हैं। SIR के बारे में जानें… यह चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। इसमें वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। इसमें 18 साल से ज्यादा के नए वोटर्स को जोड़ा जाता है। ऐसे लोग जिनकी मौत हो चुकी है। जो शिफ्ट हो चुके हैं उनके नाम हटाए जाते हैं। वोटर लिस्ट में नाम, पते में हुई गलतियों को भी ठीक किया जाता है। BLO घर-घर जाकर खुद फॉर्म भरवाते हैं। 1951 से लेकर 2004 तक का SIR हो गया है, लेकिन पिछले 21 साल से बाकी है। इस लंबे दौर में मतदाता सूची में कई परिवर्तन जरूरी हैं। जैसे लोगों का माइग्रेशन, दो जगह वोटर लिस्ट में नाम होना। डेथ के बाद भी नाम रहना। विदेशी नागरिकों का नाम सूची में आ जाने पर हटाना। कोई भी योग्य वोटर लिस्ट में न छूटे और कोई भी अयोग्य मतदाता सूची में शामिल न हो। ये खबर भी पढ़ें… 4 माह के विशेष पुनरीक्षण के बाद अंतिम सूची जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत नाम जोड़ने, हटाने के लिए बुलाए गए दावे-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शनिवार को मध्य प्रदेश में मतदाताओं की स्थिति साफ हो गई। 21 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है। 1 जनवरी 2026 की तिथि के आधार पर जारी इस सूची में कुल 5,39,81,065 मतदाता हैं।पूरी खबर पढ़ें









