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एंजायटी और डिप्रेशन की दवाओं की लत क्यों लग जाती है? साइकेट्रिस्ट ने बताया इस बात में कितनी हकीकत

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Last Updated:February 26, 2026, 13:42 IST Truth About Antidepressants: एंजायटी और डिप्रेशन की अधिकतर दवाएं सुरक्षित होती हैं, लेकिन ये दवाएं सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए. कुछ एंटी एंजायटी दवाएं गलत तरीके से या लंबे समय तक लेने पर डिपेंडेंसी पैदा कर सकती हैं. डॉक्टर की निगरानी में सही तरीके से लेने पर ये दवाएं प्रभावी और सुरक्षित रहती हैं. इनसे कोई नुकसान नहीं होता है. अगर सही तरीके से एंजायटी और डिप्रेशन की दवाएं ली जाएं, तो कोई नुकसान नहीं होता है. Anxiety & Depression Treatment: आजकल मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. अधिकतर लोग इन परेशानियों को नजरअंदाज करते रहते हैं, लेकिन कुछ लोग मेंटल हेल्थ को लेकर सीरियस हो रहे हैं. जितना मेंटल हेल्थ को लेकर अवरेयरनेस बढ़ी है, उतनी ही इसकी दवाओं से जुड़ी भ्रांतियां बढ़ गई हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो इस वक्त एंजायटी और डिप्रेशन सबसे ज्यादा लोगों को प्रभावित कर रहे हैं. इनका इलाज दवाओं से किया जाता है. अक्सर माना जाता है कि एंजायटी और डिप्रेशन की दवाएं लेने से लोगों को इनकी लत लग जाती है या शरीर इन दवाओं पर डिपेंडेंट हो जाता है. हालांकि डॉक्टर्स इन सभी बातों को खारिज करते हैं और इन्हें मेंटल डिजीज के इलाज में असरदार और सुरक्षित बताते हैं. नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर और सीनियर साइकेट्रिस्ट डॉ. प्रेरणा कुकरेती ने News18 को बताया कि मेंटल डिजीज कई तरह की होती हैं और उनके इलाज में अलग-अलग दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है. डिप्रेशन और एंजायटी की दवाओं का असर होने में थोड़ा वक्त लगता है और लक्षणों से जल्द राहत दिलाने के लिए मरीजों को शुरुआत में बेंजोडायजेपाइन जैसी दवाएं दी जाती हैं. ये दवाएं जल्द असर दिखाती हैं और मरीजों को राहत मिलती है. हालांकि इन दवाओं को कम वक्त के लिए दिया जाता है और फिर ज्यादा सुरक्षित दवाएं लेने की सलाह दी जाती है. कई बार लोग अपनी मर्जी से बेंजोडायजेपाइन जैसी दवाएं लेते रहते हैं या गलत तरीके से यूज करते हैं, जिससे उनका ब्रेन इन पर डिपेंडेंट हो सकता है. अगर इन दवाओं का उपयोग सही तरीके और कम समय के लिए किया जाए, तो इनसे किसी तरह का नुकसान नहीं होता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर कुकरेती ने बताया कि एंजायटी और डिप्रेशन की दवाएं काफी सुरक्षित होती हैं और इनसे एडिक्शन जैसा कोई खतरा नहीं होता है. यह लोगों को सिर्फ भ्रम है कि ये दवाएं लेने से उन्हें आदत लग सकती है. जिस तरह डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए लोगों को दवा लेनी पड़ती है, वैसे ही कुछ मरीजों का इलाज लंबा चलता है और उन्हें ये दवाएं लंबे समय तक लेनी पड़ती हैं. इसे डिपेंडेंसी या एडिक्शन समझना गलत है. इन दवाओं को लेकर समस्या तब शुरू होती है, जब मरीज डॉक्टर की निगरानी के बिना खुद ही इन दवाओं की मात्रा बढ़ा देते हैं या इन्हें महीनों तक अपनी मर्जी से लेते रहते हैं. किसी भी दवा को गलत तरीके से लेंगे, तो उसके साइड इफेक्ट जरूर देखने को मिलेंगे. इसलिए दवाओं को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है. एक्सपर्ट की मानें तो कई बार मरीज अपनी मर्जी से अचानक दवाएं बंद कर देते हैं, जिसके बाद उन्हें घबराहट, पसीना आना या चक्कर आने जैसे लक्षण महसूस होते हैं. इसे एंटीडिप्रेसेंट डिस्कन्टिन्युएशन सिंड्रोम कहा जाता है. ये दवाएं ब्रेन फंक्शन में बदलाव लाती हैं, इसलिए इन्हें अचानक बंद नहीं करना चाहिए. जब इन्हें अचानक बंद किया जाता है, तो मस्तिष्क को सामंजस्य बिठाने में समय लगता है. इसे अक्सर लोग विड्रॉल मान लेते हैं और लत समझ बैठते हैं. साइकेट्रिस्ट हमेशा सलाह देते हैं कि दवाओं को कभी भी अचानक बंद न करें, बल्कि उनकी खुराक को धीरे-धीरे कम किया जाना चाहिए. अगर प्रॉपर ट्रीटमेंट लेंगे, तो किसी भी दवा की न तो लत लगेगी और न ही शरीर को किसी तरह का नुकसान होगा. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : February 26, 2026, 13:36 IST

राजस्थान के टोंक में पूर्व भाजपा सांसद द्वारा मुस्लिम महिलाओं को कंबल नहीं दिए जाने के विरोध में हिंदू पड़ोसियों ने रैली निकाली जयपुर समाचार

West Indies vs South Africa Live Cricket Score: Follow WI-SA T20 World Cup 2026 Super 8 match from Ahmedabad. (PTI Photo)

आखरी अपडेट:26 फरवरी, 2026, 13:29 IST राजस्थान के करेड़ा बुजुर्ग गांव में सुखबीर सिंह जौनापुरिया के कंबल अभियान के दौरान मुस्लिम महिलाओं को कंबल देने से इनकार करने पर आक्रोश फैल गया। 60 वर्षीय शकूरन बानो ने कहा कि धर्म के आधार पर पहचाने जाने के बाद उन्हें अपमानित महसूस हुआ और उन्होंने कंबल वापस करने को कहा। (न्यूज18 हिंदी) राजस्थान के टोंक जिले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया के कंबल वितरण अभियान के बाद करेड़ा बुजुर्ग गांव में आक्रोश फैल गया, जब एक 60 वर्षीय निवासी सहित कई मुस्लिम महिलाओं को कथित तौर पर कंबल देने से इनकार कर दिया गया और उन्हें पहले से दिए गए कंबल वापस करने के लिए कहा गया। यह घटना जौनापुरिया द्वारा आयोजित एक धर्मार्थ वितरण कार्यक्रम के दौरान हुई, जिन्होंने 2014 और 2019 में लोकसभा में टोंक-सवाई माधोपुर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। कार्यक्रम का एक वीडियो, जो तब से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें पूर्व सांसद महिलाओं से उनके नाम पूछते हैं और निर्देश देते हैं कि कुछ लाभार्थियों को मुस्लिम के रूप में पहचानने के बाद उनसे कंबल वापस ले लिए जाएं। फुटेज में, जौनापुरिया को यह कहते हुए सुना जाता है कि कंबल उन लोगों के लिए नहीं थे जो प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को “गाली” देते हैं, साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर किसी को उनके फैसले से ठेस पहुंची है तो इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। प्रभावित लोगों में 60 वर्षीय शकूरन बानो भी शामिल थीं, जिन्होंने कहा कि इनकार से उतना नुकसान नहीं हुआ जितना उनके साथ किए गए व्यवहार से हुआ। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर पहचाने जाने पर उन्हें अपमानित महसूस हुआ और उन्होंने कंबल वापस करने को कहा। उनके बेटे हनीफ, जो एक लोहार है, ने कहा कि भौतिक मदद की भरपाई की जा सकती है लेकिन सम्मान की हानि की भरपाई करना कठिन है। इस घटना से करेड़ा बुजुर्ग के निवासी नाराज हैं, हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि सांप्रदायिक संबंध शांतिपूर्ण बने हुए हैं। मुसलमानों की आबादी बमुश्किल 3% होने के कारण, निवासियों का कहना है कि दोनों समुदाय लंबे समय से सद्भाव में रहे हैं। एकजुटता दिखाने के लिए, हिंदू निवासियों ने शकूरन बानो के समर्थन में रैली की और घटना की निंदा की। गांव की सरपंच के पति हनुमान चौधरी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने अगले दिन विरोध प्रदर्शन किया और जौनापुरिया का पुतला जलाया। कई निवासियों ने आरोप लगाया कि पूर्व सांसद के कार्यों ने गांव की सांप्रदायिक सद्भाव की परंपरा को चोट पहुंचाई है। शकूरन बानो ने कहा कि घटना के बाद कई हिंदू युवक उनके घर आए और जो कुछ हुआ उस पर खेद व्यक्त किया और उन्हें बताया कि वे इस बात से व्यथित महसूस कर रहे हैं कि उनकी “चाची (चाची)” का अपमान किया गया था। इस विवाद ने राजनीतिक ध्यान आकर्षित किया है, राजस्थान कांग्रेस अल्पसंख्यक सेल के सदस्यों और स्थानीय नेताओं ने बानो के घर का दौरा किया और प्रतीकात्मक संकेत के रूप में कंबल प्रदान किए। टोंक जिला कांग्रेस अध्यक्ष सउद सईदी ने मांग की कि भाजपा जौनापुरिया के खिलाफ कार्रवाई करे और उन्हें पार्टी से बाहर निकाले. जौनापुरिया ने बाद में अपने कार्यों का बचाव करते हुए कहा कि कार्यक्रम एक व्यक्तिगत पहल थी और कंबल केवल लगभग 200 भाजपा महिला कार्यकर्ताओं के लिए थे जिनके नाम पहले से सूचीबद्ध थे। उनके अनुसार, उन्हें संदेह था कि उपस्थित महिलाओं में से कुछ पार्टी कार्यकर्ता नहीं थीं और उन्हें डर था कि अगर कंबल रखने की अनुमति दी गई तो वे बाद में “सांसद को बेवकूफ बनाने” का दावा कर सकती हैं। उन्होंने इस बात से इनकार किया कि उनकी हरकतें सांप्रदायिक प्रकृति की थीं और उन्होंने कहा कि चूंकि कार्यक्रम निजी तौर पर वित्त पोषित था, इसलिए लाभार्थियों का फैसला करने का अधिकार उनके पास था। जौनापुरिया, जो पहले अपनी परोपकारी गतिविधियों के लिए विख्यात रहे हैं, जिसमें वंचितों के लिए एक मुफ्त कैंटीन चलाना भी शामिल है, जिसकी पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में प्रशंसा की थी, उन्हें पहले भी आलोचना का सामना करना पड़ा है, जिसमें एक पुराना दावा भी शामिल है कि कीचड़ में स्नान करने से कोविड-19 को दूर रखने में मदद मिल सकती है। जगह : टोंक, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 26 फरवरी, 2026, 13:29 IST समाचार शहर जयपुर राजस्थान के टोंक में पूर्व भाजपा सांसद द्वारा मुस्लिम महिलाओं को कंबल नहीं दिए जाने के विरोध में हिंदू पड़ोसियों ने रैली निकाली अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

आधी रात को फोन कर बुलाया, युवक को मारी गोली:पन्ना में ककरहाई हत्याकांड का खुलासा, खाने-पीने पर हुए विवाद में किया मर्डर; आरोपी गिरफ्तार

आधी रात को फोन कर बुलाया, युवक को मारी गोली:पन्ना में ककरहाई हत्याकांड का खुलासा, खाने-पीने पर हुए विवाद में किया मर्डर; आरोपी गिरफ्तार

पन्ना के अमानगंज थाना क्षेत्र के ग्राम ककरहाई 22 फरवरी को गोली मारकर एक युवक की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए आरोपी दीपेंद्र सिंह बुन्देला को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने युवक बलीराम चौधरी (22) की हत्या के आरोप में आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उसके पास से हत्या में इस्तेमाल किया गया अवैध हथियार भी बरामद कर लिया गया है। तलाशी के दौरान लावारिश हालत में मिली बाइक पुलिस के अनुसार, मृतक बलीराम चौधरी 22 फरवरी की रात करीब 2 बजे एक फोन आने के बाद अपनी बाइक से घर से निकला था। सुबह तक वापस न लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। तलाश के दौरान बलीराम की बाइक ग्राम खिरवा हार में लावारिस मिली। दाहिनी आंख में गोली लगने के मिले निशान बाइक के पास ही अमान सिंह बुन्देला के खेत की झोपड़ी के बाहर बलीराम का शव बरामद हुआ। मृतक की दाहिनी आंख में गोली लगने के निशान थे। घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी उप निरीक्षक रवि सिंह जादौन के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। खाने-पीने को लेकर दोनों में हुआ विवाद, दोस्त ने मारी गोली जांच के दौरान पुलिस ने डॉग स्क्वॉड और फिंगर प्रिंट विशेषज्ञों की मदद ली। गहन छानबीन के बाद पुलिस ने आरोपी दीपेंद्र सिंह बुन्देला को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने बलीराम को आधी रात को फोन कर बुलाया था। खाने-पीने को लेकर हुए विवाद के बाद उसने बलीराम की आंख में गोली मार दी। परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए किया था चक्काजाम हत्या की जानकारी मिलने के बाद मृतक के परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने अमानगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर सैकड़ों की संख्या में एकत्र होकर चक्काजाम किया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए। उन्होंने मृतक की पत्नी के लिए जीवन निर्वाह भत्ते की भी मांग की, क्योंकि बलीराम चौधरी ही अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। करीब दो घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद पुलिस के आश्वासन पर मामला शांत हुआ। झाड़ियों में छिपाकर रखा गया देसी कट्टा भी जब्त पुलिस को सूचना मिली कि घटना के समय संदेही दीपेंद्र सिंह बुंदेला को घटनास्थल के आसपास देखा गया था। जब संदेही को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, तो उसने अपना जुर्म कुबूल कर लिया। ​आरोपी की निशानदेही पर झाड़ियों में छिपाकर रखा गया 12 बोर का देसी कट्टा और खाली खोखे बरामद किए गए। ​मृतक के अनुसूचित जाति वर्ग से होनी की वजह से पुलिस ने हत्या (धारा 103(1) BNS) के साथ-साथ SC/ST एक्ट और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है। ​एएसपी बोली खाने-गुस्से में आकर किया मर्डर जब इस पूरे मामले पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वंदना सिंह चौहान से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मृतक बलिराम चौधरी और आरोपी दीपेंद्र सिंह बुंदेला के बीच खाने-पीने की किसी बात को लेकर विवाद हुआ था जिसके बाद आरोपी ने आवेश में आ कर बलिराम की हत्या कर दी थी।

वॉकिंग क्रिकेट, खिलाड़ियों को मिल रहा ‘बैजबॉल’ का मजा:ब्रिटेन में 87 की उम्र तक के लोग खेल रहे; बैटर आउट होने के बाद भी खेलता रहता है, आधा रन लेने की छूट

वॉकिंग क्रिकेट, खिलाड़ियों को मिल रहा ‘बैजबॉल’ का मजा:ब्रिटेन में 87 की उम्र तक के लोग खेल रहे; बैटर आउट होने के बाद भी खेलता रहता है, आधा रन लेने की छूट

इंग्लैंड के दिग्गज तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन ने एक बार ‘बैजबॉल’ को परिभाषित करते हुए कहा था कि यह खेल को वैसे खेलने की कोशिश है, जैसा हमने बचपन में कल्पना की थी- रोमांचक, तेज और मजेदार। दिलचस्प बात यह है कि इस सोच की सबसे सजीव और भावुक झलक अब इंग्लैंड के लीजर सेंटरों और खेल के मैदानों पर दिख रही है, जहां 50 से 87 साल तक के लोग ‘वॉकिंग क्रिकेट’ के जरिए खेल का नया आनंद ले रहे हैं। वॉकिंग क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि अकेलेपन के खिलाफ प्रभावी हथियार है। केंट क्रिकेट कम्युनिटी ट्रस्ट की प्रोजेक्ट ऑफिसर एमी इलिज के अनुसार, हर काउंटी में इसकी टीमें फल-फूल रही हैं। लॉर्ड्स के इंडोर स्कूल में पहला इंटर-काउंटी वॉकिंग क्रिकेट फेस्टिवल आयोजित हुआ, जिसने इसकी बढ़ती लोकप्रियता पर मुहर लगा दी। केंट के फोकस्टोन स्थित थ्री हिल्स स्पोर्ट्स सेंटर में वॉकिंग क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, सामुदायिक जुड़ाव का मंच बन चुका है। यहां 87 वर्ष तक के खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। सुनने में दिक्कत, डिमेंशिया या गतिशीलता संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोग भी बिना झिझक मैदान में उतरते हैं। आधा रन लेने जैसी छूट इसे और रोचक बनाती है। इस खेल ने कई जिंदगियों को नई दिशा दी है। 62 वर्षीय कप्तान मार्क कहते हैं कि यहां प्रतिभा से ज्यादा भागीदारी और खुशी मायने रखती है। साल 2022 में दोनों घुटनों के ऑपरेशन के बाद ग्राहम दो स्टिक के सहारे चलते थे। वॉकिंग क्रिकेट से जुड़ने के महज 18 महीनों में उनका वजन एक-चौथाई कम हो गया और उन्होंने एक ओवर में छह छक्के जड़कर सबको हैरान कर दिया। सेना के दिनों में माल्टा के लिए खेल चुके जॉन कहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद इस खेल ने उन्हें नई जिंदगी दी है। कई बार खिलाड़ियों को यह भी याद नहीं रहता कि मैच कौन जीता क्योंकि यहां जीत से ज्यादा मायने मुस्कान के हैं। क्या है वॉकिंग क्रिकेट और नियम – जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस खेल में दौड़ने की सख्त मनाही है। यह क्रिकेट का एक धीमा, सुरक्षित और सरल प्रारूप है, जिसे विशेष रूप से बुजुर्गों और चलने-फिरने में परेशानी (मोबिलिटी इश्यूज) का सामना कर रहे लोगों के लिए डिजाइन किया गया है। – इसमें चोट के जोखिम को कम करने के लिए लेदर बॉल की जगह सॉफ्ट बॉल और अक्सर प्लास्टिक के उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। – गेंदबाज चलकर गेंद फेंकता है, फील्डर चलकर गेंद पकड़ते हैं और बल्लेबाज रन लेने के लिए दौड़ता नहीं, बल्कि चलता है। सबसे मजेदार नियम यह है कि बल्लेबाज आउट होने के बाद भी खेलता रहता है, बस गेंदबाज टीम को बोनस के रूप में पांच रन मिल जाते हैं।

वॉकिंग क्रिकेट, खिलाड़ियों को मिल रहा ‘बैजबॉल’ का मजा:ब्रिटेन में 87 की उम्र तक के लोग खेल रहे; बैटर आउट होने के बाद भी खेलता रहता है, आधा रन लेने की छूट

वॉकिंग क्रिकेट, खिलाड़ियों को मिल रहा ‘बैजबॉल’ का मजा:ब्रिटेन में 87 की उम्र तक के लोग खेल रहे; बैटर आउट होने के बाद भी खेलता रहता है, आधा रन लेने की छूट

इंग्लैंड के दिग्गज तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन ने एक बार ‘बैजबॉल’ को परिभाषित करते हुए कहा था कि यह खेल को वैसे खेलने की कोशिश है, जैसा हमने बचपन में कल्पना की थी- रोमांचक, तेज और मजेदार। दिलचस्प बात यह है कि इस सोच की सबसे सजीव और भावुक झलक अब इंग्लैंड के लीजर सेंटरों और खेल के मैदानों पर दिख रही है, जहां 50 से 87 साल तक के लोग ‘वॉकिंग क्रिकेट’ के जरिए खेल का नया आनंद ले रहे हैं। वॉकिंग क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि अकेलेपन के खिलाफ प्रभावी हथियार है। केंट क्रिकेट कम्युनिटी ट्रस्ट की प्रोजेक्ट ऑफिसर एमी इलिज के अनुसार, हर काउंटी में इसकी टीमें फल-फूल रही हैं। लॉर्ड्स के इंडोर स्कूल में पहला इंटर-काउंटी वॉकिंग क्रिकेट फेस्टिवल आयोजित हुआ, जिसने इसकी बढ़ती लोकप्रियता पर मुहर लगा दी। केंट के फोकस्टोन स्थित थ्री हिल्स स्पोर्ट्स सेंटर में वॉकिंग क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, सामुदायिक जुड़ाव का मंच बन चुका है। यहां 87 वर्ष तक के खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। सुनने में दिक्कत, डिमेंशिया या गतिशीलता संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोग भी बिना झिझक मैदान में उतरते हैं। आधा रन लेने जैसी छूट इसे और रोचक बनाती है। इस खेल ने कई जिंदगियों को नई दिशा दी है। 62 वर्षीय कप्तान मार्क कहते हैं कि यहां प्रतिभा से ज्यादा भागीदारी और खुशी मायने रखती है। साल 2022 में दोनों घुटनों के ऑपरेशन के बाद ग्राहम दो स्टिक के सहारे चलते थे। वॉकिंग क्रिकेट से जुड़ने के महज 18 महीनों में उनका वजन एक-चौथाई कम हो गया और उन्होंने एक ओवर में छह छक्के जड़कर सबको हैरान कर दिया। सेना के दिनों में माल्टा के लिए खेल चुके जॉन कहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद इस खेल ने उन्हें नई जिंदगी दी है। कई बार खिलाड़ियों को यह भी याद नहीं रहता कि मैच कौन जीता क्योंकि यहां जीत से ज्यादा मायने मुस्कान के हैं। क्या है वॉकिंग क्रिकेट और नियम – जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस खेल में दौड़ने की सख्त मनाही है। यह क्रिकेट का एक धीमा, सुरक्षित और सरल प्रारूप है, जिसे विशेष रूप से बुजुर्गों और चलने-फिरने में परेशानी (मोबिलिटी इश्यूज) का सामना कर रहे लोगों के लिए डिजाइन किया गया है। – इसमें चोट के जोखिम को कम करने के लिए लेदर बॉल की जगह सॉफ्ट बॉल और अक्सर प्लास्टिक के उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। – गेंदबाज चलकर गेंद फेंकता है, फील्डर चलकर गेंद पकड़ते हैं और बल्लेबाज रन लेने के लिए दौड़ता नहीं, बल्कि चलता है। सबसे मजेदार नियम यह है कि बल्लेबाज आउट होने के बाद भी खेलता रहता है, बस गेंदबाज टीम को बोनस के रूप में पांच रन मिल जाते हैं।

Ranji Trophy 2026 Final Score Update; Karnataka Vs Jammu Kashmir

Ranji Trophy 2026 Final Score Update; Karnataka Vs Jammu Kashmir

स्पोर्ट्स डेस्क3 घंटे पहले कॉपी लिंक जम्मू-कश्मीर के लिए शुभम पुंदीर ने सबसे ज्यादा 121 रन बनाए। रणजी ट्रॉफी 2025-26 का फाइनल कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर के बीच हुबली क्रिकेट ग्राउंड पर खेला जा रहा है। जम्मू-कश्मीर ने मंगलवार को टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। टीम गुरुवार को मैच के तीसरे दिन पहले सेशन में 584 रन पर ऑलआउट हो गई। सुबह 527/6 के स्कोर से आगे खेलने उतरी जम्मू-कश्मीर ने 57 रन बनाने में आखिरी 4 विकेट जल्दी गंवा दिए। टीम के 6 बैटर्स ने 50+ स्कोर बनाए। शुभम पुंदीर ने 121, यावर हसन ने 88, साहिल लोत्रा ने 72, पारस डोगरा और कन्हैया वधावन ने 70-70 और अब्दुल समद ने 60 रन बनाए। कर्नाटक के लिए प्रसिद्ध कृष्णा ने सबसे ज्यादा 5 विकेट लिए। उनके अलावा विद्याधर पाटिल, विजयकुमार वैशाक, शिखर शेट्टी और श्रेयल गोपाल को 1-1 विकेट मिला। कर्नाटक के लिए प्रसिद्ध कृष्णा ने सबसे ज्यादा 5 विकेट लिए। दूसरे दिन जम्मू-कश्मीर का स्कोर 527/6 बुधवार को दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक जम्मू-कश्मीर ने 6 विकेट खोकर 527 रन बना लिए हैं। साहिल लोत्रा 57 रन और आबिद मुश्ताक 20 रन पर नाबाद हैं। कर्नाटक के लिए प्रसिद्ध कृष्णा ने सबसे ज्यादा 3 विकेट लिए हैं। पूरी खबर… पहले दिन शुभम पुंदीर ने शतक लगाया यावर हसन और शुभम पुंदीर (दाएं) के बीच दूसरे विकेट के लिए 139 रन की साझेदारी हुई। पहले दिन जम्मू-कश्मीर के लिए शुभम पुंदीर ने शतक लगाया था। उन्होंने 121 रन की पारी खेली। उनके अलावा ओपनर यावर हसन ने 88 रन बनाए थे। पहले दिन टीम ने 2 विकेट के नुकसान पर 284 रन बनाए थे। दोनों विकेट प्रसिद्ध ने झटके थे। पूरी खबर… पारस डोगरा और अनीश आपस में भिड़े दूसरे दिन जम्मू-कश्मीर की पारी के 101वें ओवर में बैटिंग कर रहे डोगरा और शॉर्ट लेग पर खड़े केवी अनीश आपस में भिड़ गए। दरअसल अनीश बैट्समैन पर दबाव बनाने के लिए लगातार कुछ बयानबाजी कर रहे थे। इसी बीच डोगरा ने अनीश के सिर पर सिर से टक्कर मारी। दोनों ने हेलमेट पहन रखा था। इसके अंपायर ने बीच-बचाव करते हुए दोनों को अलग किया। हालांकि अगले ओवर में डोगरा ने अनीश से माफी मांगने की भी कोशिश की, लेकिन अनीश से माफी लेने से मना कर दिया। दोनों टीमों की प्लेइंग-11 कर्नाटक: देवदत्त पडिकल (कप्तान), केएल राहुल, मयंक अग्रवाल, करुण नायर, स्मरण रविरचंद्रन, श्रेयस गोपाल, कृतिक कृष्णा, विद्याधर पाटिल, विजयकुमार वैशाक, शिखर शेट्टी, प्रसिद्ध कृष्णा। जम्मू-कश्मीर: पारस डोगरा (कप्तान), कमरान इकबाल, यावर हसन, शुभम पुंदीर, अब्दुल समद, कन्हैया वधावन, अबिद मुश्ताक, आकिब नबी डार, युद्धवीर सिंह चरक, साहिल लोत्रा, सुनील कुमार। ————————————— क्रिकेट का कीड़ा है तो सॉल्व कीजिए ये सुपर क्विज क्या आप खुद को क्रिकेट के सुपर फैन मानते हैं? पूरे T20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के दौरान दैनिक भास्कर के खास गेम ‘SUPER ओवर’ में रोज क्रिकेट से जुड़े 6 सवाल आपका क्रिकेट ज्ञान परखेंगे। जितनी जल्दी सही जवाब देंगे उतने ज्यादा रन बनेंगे। जितने ज्यादा रन बनेंगे, लीडरबोर्ड में उतना ही ऊपर आएंगे। तो रोज खेलिए और टूर्नामेंट का टॉप स्कोरर बनिए। अभी खेलें SUPER ओवर…क्लिक करें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

सेलिब्रिटी शेफ ने DM-SSP की पत्नी को खाना बनाना सिखाया:पहली नौकरी में होटल खाली रहता था; तभी से ट्रेनिंग देते हुए खाना-खजाना का सफर शुरू हुआ

सेलिब्रिटी शेफ ने DM-SSP की पत्नी को खाना बनाना सिखाया:पहली नौकरी में होटल खाली रहता था; तभी से ट्रेनिंग देते हुए खाना-खजाना का सफर शुरू हुआ

इंडियन सेलिब्रिटी शेफ संजीव कपूर ने बताया कि जब बनारस के एक होटल में उनकी पहली नौकरी लगी थी, तब वहां के डीएम और एसएसपी की पत्नियों को खाना बनाना सिखाया। कपूर ने बताया कि डीएम और एसएसपी अपनी पत्नियों के साथ होटल में खाना खाने आए थे। उनकी पत्नियों ने खाना सिखाने की गुजारिश की। तब मैंने जीवन में पहली बार किसी को खाना बनाना सिखाया था। तभी लगा कि आगे भी लोगों को ट्रेनिंग देनी चाहिए। वहीं से करियर ने नया मोड़ लिया और आज वे दुनिया भर में मशहूर हैं। दरअसल, संजीव कपूर एक निजी कार्यक्रम को लेकर मंगलवार को उदयपुर आए थे, इस दौरान भास्कर ने उनसे बातचीत की। उन्होंने खाने के बदलते ट्रेंड्स और हेल्दी फूड पर अपने अनुभव साझा किए। सवाल: आपका उदयपुर कैसे आना हुआ? संजीव कपूर: पिछले कुछ सालों में उदयपुर में डेस्टिनेशन वेडिंग का ट्रेंड काफी बढ़ा है। हमें पता चलता रहता है कि कभी इसकी शादी है, उसकी शादी है। सारी बड़ी शादियां उदयपुर में हो रही हैं। इस समय भी एक शादी हो रही है, लेकिन मैं यहां आराम करने आया हूं। उदयपुर में वर्ल्ड क्लास होटल्स हैं, लोग भी बहुत अच्छे हैं। हर कोई यहां आने का बहाना ढूंढ़ता है। मेरा मानना है कि लोगों को विदेश घूमने से बेहतर इंडिया घूमना चाहिए। भारत का टूरिज्म हर स्तर पर बढ़ना चाहिए। दुनिया भर से यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या कम हो गई है, लेकिन घरेलू टूरिज्म बढ़ा है। सवाल: आपने एक शेफ के तौर पर अपनी पहचान बनाई, फिर टीवी, किताबों और उद्योग की दुनिया में कदम रखा। इस सफर के पीछे क्या प्रेरणा रही? संजीव कपूर: खाना ऐसा फील्ड है जो मेरा बिजनेस है। जिसे मैं और आगे बढ़ाउंगा। जब मैंने होटल में शेफ के तौर पर काम शुरू किया, तो सीढ़ियां चढ़ता गया और धीरे-धीरे टॉप पर पहुंच गया। 28 साल की उम्र में मुझे बेस्ट एग्जीक्यूटिव शेफ ऑफ द कंट्री का अवॉर्ड मिला। समय के साथ कुछ न कुछ नया होता गया, पहले टीवी, फिर इंटरनेट, किताबें, प्रोडक्ट्स और रेस्टोरेंट। जीवन में आप कुछ भी करें, तो उसे अच्छे से करने की कोशिश करें। मैंने भी वही किया। सवाल: बीते कुछ सालों में इंडियन फूड का ट्रेंड बदला है। जेन जी की नई-नई पसंद है। हमारा किचन भी बदला है। इसको आप किस तरह से देखते हैं? संजीव कपूर: समय के साथ बदलाव जरूरी है और होगा भी, चाहे हम कितना भी विरोध करें। चेंज हमेशा होता है। लोग कितना भी कहें कि ये सही है या गलत, लेकिन हमें जजमेंटल नहीं होना चाहिए। ढाई अरब साल पहले डार्विन थ्योरी की बात करें, तो आज हम इंसान हैं, पहले बंदर थे। समय के साथ बदलाव आएगा। जिस समय में आप हैं, वही सबसे अच्छा समय है। सवाल: आपने बनारस में एक होटल से अपना कॅरियर शुरू किया। जहां से आप अपने खाना खजाना और ट्रेनिंग देने, सिखाने की शुरुआत कैसे मानते हैं? संजीव कपूर: जब बनारस में मेरी पहली जॉब लगी, तब गर्मियों में होटल की ऑक्यूपेंसी कम होती थी। हमारे होटल में उस वक्त के डीएम और एसएसपी अपनी पत्नियों के साथ खाना खाने आए थे। पत्नियों ने कहा कि हमारी नई शादी हुई है, हमें खाना बनाना नहीं आता। आप सिखा सकते हैं? मैंने सोचा होटल खाली है, तो कोई दिक्कत नहीं। वहां पहली बार किसी को खाना बनाना सिखाया। तभी सिखाने की ललक जागी। फिर धीरे-धीरे ट्रेनिंग देते हुए खाना खजाना का सफर शुरू हुआ। लोगों को खाना बनाना सिखाने की शुरुआत वहीं से हुई। बीज वहीं से पड़ा। सवाल: आपके अनुभव के अनुसार आज के दौर में एक सफल शेफ बनने के लिए कौन सी तीन बातें सबसे जरूरी है? संजीव कपूर: किसी भी फील्ड की स्किल सीखनी पड़ती हैं। चाहे म्यूजिक हो, क्रिकेट हो या कोई और। उसमें नियमित रियाज या ट्रेनिंग जरूरी है। दूसरा, उस फील्ड की गहरी जानकारी होनी चाहिए, ताकि और बेहतर कर सकें। तीसरा, सबसे जरूरी वैल्यू सिस्टम, जो घर में माता-पिता, स्कूल में टीचर या दोस्त सिखाते हैं: हार्ड वर्क करो, ईमानदारी से काम करो। ये तीन चीजें अगर करें, तो दुनिया का बेस्ट बनने से कोई नहीं रोक सकता। सवाल: पीएम मोदी भी ज्यादा ऑयल का सेवन नहीं करने का आह्वान कर चुके। आज की लाइफस्टाइल में कम तेल और मसालों के कैसे हेल्दी खाना बनाया जा सकता है? संजीव कपूर: हम नमक और चीनी बहुत ज्यादा खाते हैं। मसालों के साथ तेल भी कम करना चाहिए। घर का खाना सब्जी में ज्यादा तेल डालने से स्वादिष्ट नहीं बनता। गोल गप्पे के पानी में तेल कहां है, लेकिन स्वाद आता है। कभी-कभी ये चीजें ठीक हैं, लेकिन हमेशा कचौड़ी-समौसा या फ्रेंच फ्राइज खाना गलत है। अति कभी न करें। जंक फूड खाना है तो घर में बनाकर खाएं, बाजार से बेहतर होगा। घर में कम तेल में खाना बनाएं। आजकल ऐसे बर्तन हैं जिनमें तेल की जरूरत ही नहीं। सवाल: कई तरह की नई-नई डिशेज मार्केट में आती है जो लोगों को पसंद भी आती है। इनके डिजाइन और क्रिएशन के पीछे क्या विशेष होमवर्क होता है? संजीव कपूर: खाने में क्रिएटिविटी से पहले आप उसे विजुअलाइज करते हैं। आंख बंद करके सोचते हैं कि कैसा होगा। खाने में सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि दिखता कैसे है, खुशबू कैसी है, आवाज में क्रंची है या नहीं, सारे सेंस काम करते हैं। मैं एक शाम होटल के बाहर बैठा सूर्यास्त देख रहा था। उसके रंगों को सोचा कि प्लेट में कितने अच्छे लगेंगे। वो रंग टमाटर से नहीं आएंगे। लाल शिमला मिर्च भूनकर ग्रेवी बनाऊं तो वैसा रंग आएगा। ये विजुअलाइजेशन है। आप पेंटर है तो उसे ये स्किल आनी चाहिए कि पीला और नीला रंग मिलाएंगे तो हरा हो जाएगा। नमक डालो तो नमकीन, मीठी चीज में जरा सा नमक तो मिठास बढ़ जाती है। ये खाने का साइंस है। सवाल: भारतीय कुकिंग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने के लिए आप आने वाले वर्षों में किस दिशा में काम करना चाहेंगे? संजीव कपूर: मैं काफी सालों से इंडियन फूड का प्रचार कर रहा हूं। इसमें नई नई चीजें जोड़ी। इसमें मिलिट्स की बात शुरू हुई तो वर्ष 2017 में मिलिट्स की खिचड़ी

गंदा और कांटेदार दिखता है ऐलोवेरा, लेकिन इसके फायदे जानकर आप हो जाएंगे हैरान

सीमांचल से घुसपैठियों को चुन-चुनकर बाहर निकालेंगे, गृह मंत्री का बड़ा ऐलान

ऐलोवेरा जेल पारदर्शी और गाढ़ा होता है, जो पत्तियों के अंदर पाया जाता है. इसमें विटामिन A, C, E, B12, फोलिक एसिड, एंज़ाइम, मिनरल और अमीनो एसिड पाए जाते हैं. यही वजह है कि यह त्वचा, बालों, पाचन और समग्र स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है. 1. त्वचा के लिए लाभदायकनेचुरल मॉइश्चराइज़र: ऐलोवेरा जेल त्वचा को बिना चिपचिपाहट के नरम और हाइड्रेटेड रखता है.सनबर्न में राहत: इसकी ठंडी तासीर जली–झुलसी या धूप से तपी त्वचा को तुरंत आराम देती है.मुहांसे कम करता है: इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण पिंपल्स और दाग-धब्बों को कम करते हैं.एजिंग स्लो करता है: ऐलोवेरा में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा की झुर्रियों को कम करते हैं और ग्लो बढ़ाते हैं. 2. बालों के लिए फायदेमंदडैंड्रफ दूर करे: ऐलोवेरा की नमी और एंटीफंगल गुण सिर की खुजली और डैंड्रफ कम करते हैं.बालों को मजबूत बनाए: यह स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाकर बालों की जड़ों को मजबूत करता है.कंडीशनर का काम: बालों को मुलायम और स्मूद करता है. 3. पाचन में सुधारकब्ज में राहत: ऐलोवेरा जूस कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं में मदद करता है.पेट को शांत करता है: गैस, एसिडिटी और अपच में राहत देता है. 4. इम्यूनिटी बढ़ाता हैऐलोवेरा में मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति को मजबूत करते हैं, जिससे संक्रमणों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है. 5. घाव भरने में सहायककटने, जलने और चोट लगने पर ऐलोवेरा जेल लगाने से घाव जल्दी भरते हैं. यह जलन कम करता है और त्वचा को पुनः स्वस्थ बनाता है. 6. वजन नियंत्रित करने में सहायकऐलोवेरा जूस शरीर में जमा टॉक्सिन को कम करता है और मेटाबॉलिज्म सुधारता है, जिससे वजन नियंत्रण में मदद मिलती है. 7. शुगर और कोलेस्ट्रॉल में लाभकुछ शोधों के अनुसार, नियंत्रित मात्रा में ऐलोवेरा जूस शुगर लेवल और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद कर सकता है. ऐलोवेरा एक बहुउपयोगी प्राकृतिक औषधि है जो त्वचा, बाल, पाचन, वजन और प्रतिरक्षा यानी शरीर के लगभग हर हिस्से को लाभ पहुंचाती है.लेकिन इसे हमेशा सही मात्रा में और साफ-सुथरा जेल करके ही उपयोग करें.

‘भूत बंगला’ का पहला गाना ‘रामजी आके भला करेंगे’ रिलीज:अक्षय कुमार क्लासिक कॉमिक अंदाज में नजर आए; गाने में हाई-एनर्जी विजुअल्स, भूतिया माहौल दिखा

‘भूत बंगला’ का पहला गाना ‘रामजी आके भला करेंगे’ रिलीज:अक्षय कुमार क्लासिक कॉमिक अंदाज में नजर आए; गाने में हाई-एनर्जी विजुअल्स, भूतिया माहौल दिखा

फिल्म ‘भूत बंगला’ के पहले गाने ‘राम जी आके भला करेंगे’ को मेकर्स ने रिलीज कर दिया है। गाने में अक्षय कुमार अपने क्लासिक कॉमिक अंदाज में नजर आ रहे हैं। वीडियो में हाई-एनर्जी विजुअल्स, भूतिया माहौल और तेज बीट्स देखने को मिलती हैं। बता दें कि गाने ‘राम जी आके भला करेंगे’ को प्रीतम ने कंपोज किया है, जबकि इसके लिरिक्स कुमार ने लिखे हैं। गाने को अरमान मलिक और आरवन (देव अरिजीत) ने आवाज दी है। वहीं, मेलो डी द्वारा लिखा और परफॉर्म किया गया रैप सेगमेंट ट्रैक में कंटेम्परेरी टच जोड़ता है। देखें गाने ‘राम जी आके भला करेंगे’ की झलक गाने को दर्शकों से पॉजिटिव रिएक्शन मिल रहा गाने ‘रामजी आके भला करेंगे’ को लेकर सोशल मीडिया पर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। फैंस अक्षय कुमार की क्लासिक कॉमिक एनर्जी और स्क्रीन प्रेजेंस की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कुछ ने इसे “OG खिलाडी एनर्जी” कहा, तो कई दर्शकों ने गाने को “चार्टबस्टर” करार दिया। यूट्यूब पर कमेंट्स में नॉस्टैल्जिया भी साफ झलक रहा है, जहां लोग प्रियदर्शन-अक्षय की पुरानी कॉमेडी फिल्मों को याद कर रहे हैं। हाई-एनर्जी बीट्स, फनी विजुअल्स और एंटरटेनमेंट फैक्टर को दर्शकों ने खूब पसंद किया है। कुल मिलाकर, गाने को पॉजिटिव और एंगेजिंग रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म 10 अप्रैल को रिलीज होगी गौरतलब है कि फिल्म ‘भूत बंगला’ को 2026 की बहुप्रतीक्षित फिल्मों में गिना जा रहा है। 14 साल बाद अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की हिट जोड़ी बड़े पर्दे पर साथ लौट रही है। दोनों ने पहले ‘हेरा फेरी’, ‘भागम भाग’ और ‘गरम मसाला’ जैसी सुपरहिट कॉमेडी फिल्में दी हैं, जिससे दर्शकों में खास उत्साह है। फिल्म 10 अप्रैल को रिलीज होगी। फिल्म को बालाजी मोशन पिक्चर्स और केप ऑफ गुड फिल्म्स मिलकर प्रेजेंट कर रहे हैं। फिल्म में अक्षय कुमार के साथ वामिका गब्बी, परेश रावल, तब्बू और राजपाल यादव नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन प्रियदर्शन ने किया है। इसे अक्षय कुमार, शोभा कपूर और एकता आर कपूर ने प्रोड्यूस किया है।

तेजी से झड़ रहे हैं बाल और गंजे होने का लगता है डर, दवाई भी नहीं कर रहा असर, क्या करें, डॉक्टर ने दी A-Z जानकारी

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Doctor Advice For Hair Fall : झड़ते हुए बालों को रोकने के लिए आजकल सोशल मीडिया पर खूब प्रचार किया जाता है. तरह-तरह की गोलिया, स्प्रे, तेल और न जाने कितनी चीजों का प्रचार किया जाता है. हमेशा दावा किया जाता है कि इन चीजों से एक महीने में दोबारा बाल उग आएंगे. लोग इस झांसे में आकर कुछ इलाज आजमाते भी हैं लेकिन इससे कुछ होता नहीं है. हाथ में सिर्फ निराशा लगती है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब बाल तेजी से झड़ रहे हों, दवा का कोई असर न हो, तो क्या करना चाहिए. इसी सवालों का जबाव जानने के लिए न्यूज 18 ने हेयर ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट डॉ. अभिषेक पिलानी से बात की. क्या दवा काम करती हैहेयर ट्रांसप्लांट और स्किन एक्सपर्ट डॉ. अभिषेक पिलानी ने बताया कि अधिकांश बाल बढ़ाने वाली दवाएं दो तरीकों से काम करती हैं. कुछ दवाएं शरीर में हार्मोन की गतिविधि को प्रभावित करती हैं, जबकि कुछ बालों की जड़ों तक रक्त प्रवाह बढ़ाती हैं. इससे बालों की बढ़ने वाली अवस्था (ग्रोथ फेज) लंबी हो सकती है, जिससे बाल थोड़े घने होते हैं और जल्दी नहीं झड़ते. लेकिन ये दवाएं बाल झड़ने की असली वजह को ठीक नहीं करतीं. जैसे कि आनुवंशिक कारण (जेनेटिक्स), तनाव, पोषण की कमी, हार्मोन में बदलाव, बीमारी या गलत जीवनशैली. ये कारण अक्सर वैसे ही बने रहते हैं. दवा के साइड इफेक्ट्स क्या हैंइसी वजह से, जब दवा बंद कर दी जाती है, तो आमतौर पर बालों का झड़ना फिर से शुरू हो जाता है. दवाओं के दुष्प्रभाव भी एक अहम सच्चाई हैं. कई लोगों को बालों पर लगाने वाली दवाओं से सिर की त्वचा में जलन, खुजली, लालिमा, पपड़ी या सूखापन महसूस होता है. वहीं, खाने वाली दवाओं से कुछ लोगों को सिरदर्द, थकान, चक्कर आना, मूड में बदलाव या पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है. हर किसी को ये समस्याएं नहीं होतीं, लेकिन डॉक्टर मानते हैं कि साइड इफेक्ट्स सच में हो सकते हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. लंबे समय तक इन दवाओं का इस्तेमाल भी चिंता का कारण बन सकता है. कुछ बाल उगाने वाली दवाएं शरीर के हार्मोन संतुलन को प्रभावित करती हैं. हार्मोन हमारे मेटाबॉलिज्म, मूड, हृदय स्वास्थ्य और प्रजनन स्वास्थ्य जैसी कई जरूरी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं. क्योंकि कई लोग इन दवाओं का सालों तक उपयोग करते हैं, इसलिए शोधकर्ता अब भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि लंबे समय तक इनके इस्तेमाल का शरीर पर क्या असर पड़ता है. सच यह है कि इसके दीर्घकालिक प्रभाव अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं. मानसिक परेशानी बढ़ना लाजिमीएक और महत्वपूर्ण बात यह है कि हर व्यक्ति में इसका असर अलग-अलग होता है. कुछ लोगों को कुछ महीनों बाद बाल झड़ना कम होता दिखाई देता है, जबकि कुछ को बहुत कम या कोई खास फर्क नहीं दिखता. बाल धीरे-धीरे बढ़ते हैं और स्पष्ट बदलाव दिखने में छह महीने से एक साल तक लग सकता है. इससे लोगों में निराशा, मानसिक तनाव और अवास्तविक उम्मीदें पैदा हो सकती हैं. इसका एक मानसिक पक्ष भी होता है, जिसके बारे में लोग कम बात करते हैं. बार-बार नए बाल उग रहे हैं या नहीं, यह जांचना, दवा की खुराक छूट जाने की चिंता करना या फिर से बाल झड़ने का डर रखना चिंता बढ़ा सकता है. विडंबना यह है कि तनाव खुद बालों के झड़ने को और बढ़ा सकता है. इस तरह एक ऐसा कुचक्र बन जाता है, जिससे बाहर निकलना मुश्किल लगता है. फिर कैसे झड़ते बालों को रोकेंडॉक्टर अक्सर सलाह देते हैं कि दवा शुरू करने से पहले बुनियादी सेहत पर ध्यान देना चाहिए. बाल झड़ने के कई कारण है. अगर जीन और कुछ बीमारियां इसकी वजह नहीं हो तो तनाव और पोषक तत्वों की कमी सबसे बड़ी दो वजहें हैं. पोषण में सिर्फ किसी एक की जरूरत नहीं होती बल्कि संतुलित पोषण की जरूरत होती है. जैसे विटामिन, प्रोटीन, मिनिरल्स सबका संतुलन होना चाहिए. मुख्य तौर पर विटामिन बी 12, मैग्नीशियम और जिंक की ज्यादा जरूरत होती है. तो फिर क्या करना चाहिए, थोड़ी सी बातों से समझ लीजिए. पर्याप्त पोषण लें-पर्याप्त प्रोटीन, आयरन, जिंक, बायोटिन, विटामिन ई, ओमेगा 3 फैटी एसिड वाले फूड का सेवन करें. इसके लिए हरी पत्तीदार सब्जियां, बादाम, ड्राई फ्रूट्स, अलसी के बीज, तिल के लड्डू, पालक का साग, अंडा, तेल वाली मछली, संतरा, नींबू, चकोतरा, अंगूर आदि का खूब सेवन करें. तनाव को कम करें-बाल झड़ने का बड़ा कारण है तनाव. तनाव हर किसी के जीवन में होता है लेकिन जो इसका प्रबंधन सही से कर लेगा वही विजेता है. इसके लिए आप रोज वॉक कीजिए. कम से कम 3-4 किलोमीटर रोज चलिए. फिर योग तनाव भगाने का बड़ा साधन है. योग और मेडिटेशन से तनाव दूर होगा. घूमने से तनाव दूर होता है. दोस्तों और परिवार के साथ टूर पर जाते रहिए. समाज के साथ अच्छा रिश्ता भी तनाव से दूर रखता है. इसके लिए समाज में सबके साथ घुलमिल कर रहिए. उनके साथ बातें कीजिए. दोस्तों और परिवार के साथ खूब गप्पें कीजिए. सबसे अहम बात कभी मत सोचिए कि बाल झड़ जाएंगे तो हम गंजे हो जाएंगे. इससे तनाव और बढ़ेगा. जितना खुश रहेंगे बालों की तंदुरुस्ती उतनी हो होगी. पर्याप्त नींद-हमारे शरीर के पूर्जे-पूर्जे की मरम्मत नींद में होती है. पर्याप्त नींद नहीं लेंगे तो बालों को झड़ना नहीं रुकेगा. इसलिए 7-8 घंटे की सुकून भरी नींद लीजिए. कम से कम 6 घंटे की ऐसी नींद होनी चाहिए जिसमें नींद बीच में न खुले. यानी गहरी नींद की जरूरत होती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp,आपके सवालों का हम देंगे जवाब.