Wife Holi Celebration Vs Husband; Suppress Desires – Silent Stress

Hindi News Lifestyle Wife Holi Celebration Vs Husband; Suppress Desires Silent Stress | Relationship 12 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक सवाल- होली मेरा सबसे फेवरेट त्योहार है। बचपन में हम सबसे ज्यादा खुशी और उत्साह से होली का इंतजार करते थे। पूरा परिवार और मोहल्ला इकट्ठा होकर होली खेलता था। मेरे दिल में होली की बहुत सुंदर यादें हैं। लेकिन जब से मेरी शादी हुई है, होली खेलना बिल्कुल बंद हो गया है। मेरे पति बहुत कंजरवेटिव इंसान हैं। उन्हें मेरा होली खेलना बिल्कुल पसंद नहीं है। मेरे ससुराल में कोई भी होली को लेकर एक्साइटेड नहीं रहता। होली खेलने का बहुत मन करता है, लेकिन हसबैंड के कारण मन मारकर रह जाती हूं। क्या करूं? पति से झगड़ा करूं या मन मारकर बैठी रहूं? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- सबसे पहले तो आपका शुक्रिया, क्योंकि आपका सवाल पढ़कर मेरी अपने बचपन की होली की सुंदर यादें ताजा हो गईं। अब आपकी बात। आपकी परेशानी सिर्फ एक त्योहार तक सीमित नहीं है, यह आपकी ‘खुशी के अधिकार’ का भी मामला है। होली कई लोगों के लिए यादों, रिश्तों और खुलकर जीने का एहसास है। आपके सवाल में जो सबसे खूबसूरत बात है, वह है आपका उस खुशी से जुड़ाव, बचपन की वो हंसी, रंगों में भीगा अपनापन और बिना किसी झिझक के जीने का मौका। यही वजह है कि आज जब वो सब नहीं मिल पा रहा, तो भीतर एक खालीपन महसूस हो रहा है। सबसे पहले मैं आपको यह बताना चाहूंगी कि आपकी भावना पूरी तरह जायज है। आप सिर्फ होली खेलना मिस नहीं कर रही हैं, बल्कि उस माहौल को मिस कर रही हैं जिसमें आप खुलकर जी पाती थीं। चलिए समझते हैं कि इस स्थिति को बिना झगड़े के कैसे संभाला जाए। इच्छाओं को दबाने से बनता है ‘साइलेंट स्ट्रेस’ शादी के बाद अक्सर महिलाएं अपने मन की इच्छाओं को ‘एडजस्टमेंट’ के नाम पर दबा देती हैं। शुरू में यह छोटा सा समझौता लगता है, लेकिन लंबे समय में यही दबाव अंदर-ही-अंदर फ्रस्ट्रेशन, उदासी और कभी-कभी गुस्से का रूप ले लेता है। जब आप बार-बार अपने मन को दबाती, रोकती हैं कि “चलो, इस बार नहीं खेलते, पति को पसंद नहीं है,” तो धीरे-धीरे आप खुद से दूर होने लगती हैं। साइकोलॉजी की भाषा में इसे ‘सेल्फ-सप्रेशन’ कहते हैं, जो मेंटल स्ट्रेस की मुख्य वजह बन सकता है। इसके क्या असर होते हैं, ग्राफिक में देखिए- आप मिस कर रही हैं ‘खुलकर जीने का एहसास’ आपको लग रहा होगा कि ये फ्रस्ट्रेशन होली में ‘रंग’ न खेल पाने की वजह से है, लेकिन असल में आप रंग नहीं, वो ‘आजादी का एहसास’ मिस कर रही हैं। जब आप अपनों के साथ मिलकर होली खेलती थीं, तो वो एक ऐसा माहौल होता था, जिसमें कोई जजमेंट नहीं था। सब हंसते थे, गले मिलते थे और बेफिक्र रहते थे। इस असली बात को समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि समाधान भी यहीं से निकलेगा। जब आप जान जाएंगी कि आपकी असली जरूरत क्या है, तो उसे पूरा करने के रास्ते भी साफ दिखने लगेंगे। ससुराल का माहौल अलग होना गलत नहीं आपके ससुराल में अगर कोई होली नहीं खेलता है, तो हो सकता है कि उनके घर में कभी ऐसा माहौल ही नहीं रहा हो। हर परिवार का ‘सेलिब्रेशन’ का तरीका अलग होता है। कुछ परिवारों के लिए त्योहार का मतलब सिर्फ अच्छा खाना और आराम करना होता है। हमें यह समझना होगा कि आपके पति या ससुराल वाले ‘बुरे’ नहीं हैं। बस उनका नजरिया अलग है। हो सकता है कि उनके पीछे कुछ वाजिब कारण हों। मायके जाने से हल हो सकती है समस्या आपने अपने सवाल में ही समाधान का संकेत दिया है कि आपके मायके में होली आज भी वैसी ही धूमधाम से खेली जाती है। यही सबसे सरल संतुलित रास्ता है। प्लानिंग करें: आप हर साल या हर दूसरे साल होली पर अपने मायके जाने का प्लान बना सकती हैं। वही पुराना माहौल: वहां आपको वही यादें और वही बेफिक्री दोबारा मिलेगी। बिना डर के खुशी: वहां आपको पति की नाराजगी या ससुराल के नियमों का डर नहीं रहेगा। रिश्ते में बैलेंस: इससे न तो आपको अपनी इच्छा दबानी पड़ेगी और न ही पति से सीधा टकराव होगा। पति से बात कैसे करें? झगड़ा करना या मन मारकर बैठना, दोनों ही एक्सट्रीम फैसले हैं। आपको बीच का रास्ता निकालना होगा। पति को यह न कहें कि “आप गलत हैं”, बल्कि यह कहें कि “होली मेरे लिए कितनी जरूरी है।” ऐसे बोलें, “मुझे पता है, आपको रंगों से परेशानी है और मैं उसका सम्मान करती हूं। लेकिन होली मेरे बचपन का सबसे प्यारा हिस्सा है। जब मैं नहीं खेलती, तो मुझे बहुत उदासी महसूस होती है। क्या इस बार मैं दो दिन के लिए मम्मी के घर जाकर होली खेल आऊं? इससे आपकी शांति भी बनी रहेगी और मेरी खुशी भी।” खुद को खोने मत दीजिए शादी के बाद अक्सर महिलाएं अपनी पहचान धीरे-धीरे खोने लगती हैं। वे भूल जाती हैं कि उनकी भी कुछ पसंद थी। याद रखिए, एक खुशहाल रिश्ता वही होता है, जहां दोनों पार्टनर अपनी व्यक्तिगत खुशियों को भी जगह दें। आपकी खुशियां, आपकी पसंद, आपकी छोटी-छोटी इच्छाएं उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, जितना आपका रिश्ता। अगर आप अंदर से खुश नहीं रहेंगी, तो आप एक अच्छी पत्नी या बहू की भूमिका भी लंबे समय तक नहीं निभा पाएंगी। झगड़ा नहीं, समझदारी से मिलता है समाधान आपकी समस्या का समाधान झगड़े में नहीं, बल्कि समझदारी में है। अपनी इच्छाओं को दबाइए मत, बल्कि उन्हें जीने का नया तरीका ढूंढिए। होली रंगों का त्योहार है, लेकिन उससे भी ज्यादा यह ‘दिल के रंगों’ का त्योहार है। इन रंगों को अपने जीवन से गायब मत होने दीजिए। इस बार होली पर अपने मायके जाने का प्लान बनाइए या पति को प्यार से अपनी भावनाओं का हिस्सा बनाइए। यकीन मानिए, जब आप अपनी खुशी की जिम्मेदारी खुद लेंगी, तो आपके चेहरे की मुस्कान ही आपके हर सवाल का सबसे सुंदर जवाब होगी। हेल्दी रिश्ते की 3 सीख एक-दूसरे की आदतों को स्वीकार करें। पार्टनर को अपनी पसंद की चीजें करने की आजादी दें। अपनी खुशी के लिए पार्टनर पर 100% निर्भर न
Former Union Minister Unnikrishnan Passes Away at 89

Hindi News Career Former Union Minister Unnikrishnan Passes Away At 89 | March 4 Current Affairs 11 घंटे पहले कॉपी लिंक जानते हैं आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं… नेशनल (NATIONAL) 1. भारत एडवांस्ड लाइट वेट हेलीकॉप्टर (ALH) MK-II खरीदेगा 3 मार्च को रक्षा मंत्रालय ने 6 एडवांस्ड लाइट वेट हेलीकॉप्टर (ALH) MK-II खरीद के लिए HAL के साथ MoU साइन किया। इसके साथ ही रक्षा मंत्रालय ने सतह से हवा में मार करने वाले वर्टिकल लॉन्च-मिसाइलों के अधिग्रहण के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ 5,083 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया। नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इन अनुबंधों पर साइन किए गए। ALH Mk-II हेलीकॉप्टर भारतीय तटरक्षक बल के लिए खरीदा जाएगा और Shtil मिसाइलों को भारतीय नौसेना के युद्धपोतों पर तैनात किया जाएगा। ALH Mk-II का उपयोग समुद्री निगरानी, खोज-बचाव (SAR), मेडिकल इवैक्युएशन (MEDEVAC), तटरक्षक ऑपरेशंस और रेस्क्यू ऑपरेशंस के लिए किया जाएगा। इसके अलावा ALH Mk-III हेलीकॉप्टर का कॉन्ट्रैक्ट HAL के साथ 2,901 करोड़ रुपए में किया गया है। इस कॉन्ट्रैक्ट में ऑपरेशनल इक्विपमेंट, इंजीनियरिंग सपोर्ट, पैकेज और परफॉरमेंस बेस्ड सपोर्ट भी शामिल है। ALH Mk-II और III डबल इंजन वाले एडवांस्ड लाइट वेट हेलीकॉप्टर हैं। 2. पूर्व केंद्रीय मंत्री के.पी. उन्नीकृष्णन का निधन 3 मार्च को पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता के.पी. उन्नीकृष्णन का निधन हो गया। वे 89 साल के थे। उन्नीकृष्णन केरल के राजनीतिक इतिहास में सबसे लंबे समय तक एक ही लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता रहे हैं। उन्नीकृष्णन ने 1960 में कांग्रेस पार्टी जॉइन की और पहली बार 1971 में कांग्रेस के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे। 1971 से 1996 तक उन्नीकृष्णन कोझिकोड में वडकारा से सांसद रहे और तीन अलग-अलग राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व किया। उन्नीकृष्णन ने 1977, 1980, 1984, 1989 और 1991 के चुनावों में भी अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा। वे 1977 के बाद कांग्रेस (यू) और कांग्रेस (एस) का हिस्सा रहे और 1995 में दोबारा कांग्रेस पार्टी जॉइन की। वीपी सिंह की कैबिनेट में उन्नीकृष्णन केंद्रीय दूरसंचार, जहाजरानी और भूतल परिवहन मंत्री रहे। उन्नीकृष्णन ने खाड़ी युद्ध के दौरान 1.5 लाख से ज्यादा भारतीयों को वापस लाने की कमान भी संभाली। उन्नीकृष्णन ईराक के तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन (1979- 2003) के छिपने पर उनसे मिलने भी पहुंचे थे। उन्नीकृष्णन कांग्रेस में समाजवादी विचारधारा का हिस्सा रहे और शुरुआती सालों में इंदिरा गांधी के कट्टर समर्थक भी थे। 1975 में लगाई गई इमरजेंसी के बाद उन्नीकृष्णन के संजय गांधी के साथ मतभेद हो गए और वे उनसे अलग हो गए। उन्नीकृष्णन 1936 में कोझिकोड के कोयिलैंडी में स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार में जन्मे थे। 3. जापान के ग्राफिक डिजाइनर काजुमासा नागाई का निधन 23 फरवरी को जापान के सबसे चर्चित ग्राफिक डिजाइनर और विजुअल आर्टिस्ट काजुमासा नागाई का निधन हो गया। उनकी एजेंसी ने 2 मार्च को इसकी जानकारी साझा की है। नागाई 96 साल के थे। उन्होंने आधुनिक जापानी विजुअल कल्चर को ग्राफिक डिजाइन के जरिए 70 सालों तक लोगों तक पहुंचाया। नागाई ने WWII के बाद और समकालीन युग में जापान की स्थिति को विजुअल आर्ट के जरिए लोगों तक पहुंचाया। साप्पोरो में 1972 के विंटर ओलिंपिक के लिए नागाई ने ऑफिशियल ग्राफिक डिजाइन किया था। इसे जापान के डिजाइन इतिहास की आधुनिक पहचान माना जाता है। नागाई ने प्रमुख जापानी ब्रांडों और संस्थानों जैसे असाही ब्रुअरीज, मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप, जापान रेलवे, टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर और अन्य के लिए लोगो बनाए। नागाई 1960 में निप्पॉन डिजाइन सेंटर (NDC) के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे। नागाई, निप्पॉन डिजाइन सेंटर के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहे और जापान में ग्राफिक डिजाइन को प्रोफेशनल आर्ट बनाने और उन्नत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। माना जाता है कि नगाई ने ही जापानी एडवर्टाइजमेंट इंडस्ट्री में स्वर्ण युग की शुरुआत की और लोगों तक ये मैसेज पहुंचाया कि कमर्शियल आर्ट में भी गहराई हो सकती है। अपने लंबे करियर के दौरान नागाई की उत्कृष्टता को देश के सर्वोच्च सम्मानों से सम्मानित किया गया। नागाई को 1989 में पर्पल रिबन के साथ मेडल और 1999 में रोसेट के साथ ऑर्डर ऑफ द राइजिंग सन, गोल्ड रेज मेडल मिला। 1990 के बाद नागई ने ‘लाइफ’ पोस्टर सीरीज को शुरू की और हाथ से बनाए गए जानवरों और पौधों का एक संग्रह शुरू किया। 4. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने खिलाड़ियों पर 50-50 लाख का जुर्माना लगाया 1 मार्च को T-20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खराब प्रदर्शन के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने खिलाड़ियों से जुर्माना वसूलने का फैसला किया है। पाकिस्तान टीम के हर खिलाड़ी पर 50 लाख पाकिस्तानी रुपए यानी 16.28 लाख भारतीय रुपए का जुर्माना लगाया गया है। PCB ने कहा कि अगर अच्छे प्रदर्शन पर इनाम मिलता है, तो खराब प्रदर्शन पर सजा भी मिलेगी। भारत से हार के तुरंत बाद टीम को ये फैसला बता दिया गया था। श्रीलंका पर करीबी जीत के बावजूद पाकिस्तान का रन रेट खराब रहा। इस कारण पाकिस्तान मौजूद वर्ल्ड कप से बाहर हो गया। पाकिस्तान टीम के प्लेयर्स को 4 कैटेगरी में सैलरी मिलती है। A कैटगरी में करीब 65 लाख, B कैटेगरी में 45 लाख, C कैटेगरी में 20 लाख और D कैटेगरी में 12.50 लाख रुपए हर महीने मिलते हैं। जुर्माने के बाद B कैटेगरी प्लेयर्स की करीब एक महीने की सैलरी कट जाएगी। वहीं, C और D कैटेगरी के प्लेयर्स को 2 से 3 महीने की सैलरी जुर्माने में देनी पड़ेगी। जुलाई 2025 से जून 2026 के पिछले कॉन्ट्रैक्ट में PCB ने किसी भी खिलाड़ी को A कैटेगरी में नहीं रखा है। 5. भारत रूस से S-400 ‘सुदर्शन’ एयर डिफेंस सिस्टम खरीदेगा 2 मार्च को रक्षा मंत्रालय ने कहा कि भारत रूस से 5 नए S-400 ‘सुदर्शन’ एयर डिफेंस सिस्टम खरीदेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 सिस्टम के प्रदर्शन के बाद S-400 सिस्टम खरीदने का फैसला लिया गया है। नए सिस्टम को पूर्वी और पश्चिमी दोनों सीमाओं पर तैनात किया जाएगा। इससे चीन और पाकिस्तान, दोनों मोर्चों पर भारत की हवाई सुरक्षा क्षमता मजबूत की जा सकेगी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 सिस्टम ने अहम भूमिका निभाई थी और
विजय-रश्मिका का हैदराबाद में रिसेप्शन:ट्रेडिशनल लुक में दिखीं पुष्पा फिल्म की हीरोइन; कर्नाटक डिप्टी CM समेत कई सेलेब्स पहुंचे

विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना का रिसेप्शन हैदराबाद के होटल ताज कृष्णा में हो रहा है। कपल ने 26 फरवरी को उदयपुर में इंटिमेट वेडिंग की थी। अब कपल हैदराबाद में ग्रैंड रिसेप्शन दिया है, जिसमें हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयाली और कन्नड़ इंडस्ट्री की कई बड़ी हस्तियों के अलावा कई राजनेता शामिल हो रहे हैं। बॉलीवुड से करण जौहर, कृति सेनन समेत कई लोग रिसेप्शन में पहुंचें वहीं साउथ से चिरंजीवी, नागार्जुन, रामचरण जैसे की स्टार्स पहुंच रहे हैं। कर्नाटक के डिप्टी सीएम डी.के.शिवकुमार ने भी रिसेप्शन में पहुंचकर न्यूलीवेड को गुलदस्ता दिया है। 26 फरवरी को उदयपुर में हुई शादी विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की शादी 26 फरवरी को राजस्थान के उदयपुर के ममेंटोज एकाया रिसोर्ट में हुई। इस इंटिमेट वेडिंग में महज 250 करीबी ही शामिल हुए थे। कपल ने शादी में नो फोन पॉलिसी रखी थी। शादी दो अलग परंपराओं से संपन्न हुई। सुबह तेलुगु रीति-रिवाजों से विवाह हुआ, जबकि शाम को रश्मिका की कोडवा परंपरा के अनुसार रस्में निभाई गईं। रश्मिका ने लाल साड़ी और सोने के आभूषण पहने, जबकि विजय ने आइवरी धोती और लाल अंगवस्त्रम धारण किया। विजय-रश्मिका के रिसेप्शन के लाइव अपडेट के लिए व्लॉग देखें-
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17 घंटे पहलेलेखक: ईफत कुरैशी और वर्षा राय कॉपी लिंक बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के मोनिका बेदी केस के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि कैसे 2002 में 1993 सीरियल बम ब्लास्ट के आरोपी और अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम को गिरफ्तार किया गया। जब पुलिस उनके घर पहुंची, तो वहां मोनिका बेदी की भी गिरफ्तारी हुई। मोनिका बेदी पुर्तगाल में सना मलिक नाम से रह रही थीं। इस पहचान के लिए उन्होंने नकली पासपोर्ट बनवाए थे। गिरफ्तारी के बाद अबू सलेम और मोनिका बेदी को पुर्तगाल की एक ही जेल में अलग-अलग सेल में रखा गया। दोनों के बीच अक्सर खतों के जरिए प्यार मोहब्बत की बातें होती थीं। दोनों जल्द ही जेल से निकलकर आम जिंदगी जीने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन फिर अचानक मोनिका बेदी ने उन्हें खत भेजना बंद कर दिया और उनसे रिश्ता खत्म कर लिया। जब दोनों को 1 साल बाद भारत डिपोर्ट किया गया तो चार्टर्ड प्लेन में मोनिका से नजरें तक नहीं मिलाईं। अब पार्ट-2 में जानिए कहानी आगे- 11 नवंबर 2005 को मोनिका बेदी और अबू सलेम को भारत लाया गया। मोनिका बेदी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120-B (आपराधिक साजिश), 419 (छल से प्रतिरूपण) और 420 (धोखाधड़ी) और पासपोर्ट अधिनियम, 1967, सेक्शन 12 के तहत मामला दर्ज हुआ था। पुर्तगाल में पहले ही सजा काट चुकीं मोनिका बेदी पर भारत में नया केस हुआ। 29 सितंबर 2006 में इंडियन कोर्ट पासपोर्ट एक्ट की धारा के अलावा अन्य धाराओं पर दोषी मानते हुए 5 साल की सजा सुनाई। उन्हें हैदराबाद और भोपाल की जेल में रखा गया था। मोनिका बेदी ने कहा था, मुझे अबू सलेम से प्यार करने की कीमत चुकानी पड़ी फिल्मफेयर को दिए एक पुराने इंटरव्यू में मोनिका बेदी ने कहा था, ‘पुर्तगाल की जेल में साफ कमरे और ठीक-ठाक बिस्तर थे, लेकिन यहां मुझे खुले टॉयलेट के सामने फर्श पर सोना पड़ा। मुझे जमानत नहीं मिली, जबकि हत्या के मामलों में आरोपी महिलाओं को मिल गई थी। मुझे अबू सलेम से प्यार करने की कीमत चुकानी पड़ी।’ ‘आखिरकार 2007 में मुझे जमानत मिल गई। 2010 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मेरी दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए सजा को उतनी अवधि तक सीमित कर दिया, जितनी मैं पहले ही जेल में काट चुकी थी। लेकिन तब तक खुशी की अहमियत ही खत्म हो चुकी थी। सजा तो मैंने काट ही ली थी, क्या वे साल मुझे वापस मिल सकते हैं?’ अबू सलेम के दूसरे आरोपों में शामिल नहीं थीं मोनिका बेदी जांच एजेंसियों को शक था कि मोनिका बेदी अबू सलेम की अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में भी शामिल हो सकती हैं। क्राइम जर्नलिस्ट विवेक अग्रवाल कहते हैं, ‘मेरे इन्फॉर्मर से मुझे ये जानकारी मिली कि जिस समय डायरेक्टर मुकेश दुग्गल की हत्या हुई, उस जगह मोनिका बेदी का मोबाइल फोन मिला था, जिसे हटवाने के लिए अबू सलेम ने 18 लाख रुपए की रिश्वत दी थी। लेकिन जांच में ये कन्फर्म नहीं हुआ।’ मोनिका के खिलाफ पुलिस को फर्जी पासपोर्ट केस के अलावा कोई सबूत नहीं मिले, जिसके चलते उन पर सिर्फ एक केस ही चला। वाकई में मोनिका जिस समय अबू सलेम के साथ भारत से भागीं, तब वो नहीं जानती थीं कि अबू सलेम पर कई हत्याओं और 1993 के सीरियल बम ब्लास्ट के भी आरोप हैं। शुरुआती समय में वो ये तक नहीं जानती थीं कि जिस शख्स से उनकी बातचीत होती है, वो इवेंट ऑर्गेनाइजर नहीं बल्कि अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम है। चार्जशीट देखकर मोनिका बेदी ने किया रिश्ता खत्म करने का फैसला जिस समय मोनिका बेदी को पुर्तगाल जेल में रखा गया था, तब उन्हें अबू सलेम की चार्जशीट दिखाई गई। चार्जशीट देखने के बाद मोनिका बेदी को एहसास हुआ कि जिस शख्स को वो बड़ा बिजनेसमैन समझती थीं, वो असल में एक अंडरवर्ल्ड डॉन है। यही वजह रही कि उन्होंने रिश्ता अचानक खत्म कर लिया। मोनिका के दूर जाने से नाखुश था अबू सलेम, रिश्ता बनाए रखना चाहता था भारत लाए जाने के बाद मोनिका बेदी और अबू सलेम को अलग-अलग जेल में रखा गया। इस समय अबू सलेम, मोनिका बेदी के लिए अक्सर हैदराबाद जेल में फूल और महंगे तोहफे भिजवाता था। वो बार-बार उनसे संपर्क करने की कोशिश करता था, लेकिन मोनिका ने अपने रास्ते अलग कर लिए थे। अबू सलेम ने दावा किया था कि वो और मोनिका बेदी साल 2000 में लॉस एंजिलिस की एक मस्जिद में निकाह कर चुके हैं और मोनिका उनकी कानूनी तौर पर पत्नी हैं। हालांकि मोनिका इन सभी दावों को खारिज करती रहीं। इस समय अबू सलेम के वकील अरविंद शुक्ला ने दावा किया कि उनके पास मोनिका और अबू सलेम का निकाहनामा भी है। जानिए कैसे हुई डॉन से मोनिका बेदी की पहली मुलाकात 18 जनवरी 1975 पंजाब के होशियारपुर जिले के चाबेवल गांव में मोनिका बेदी का जन्म हुआ। वो महज 1 साल की थीं, जब उनका परिवार नॉर्वे शिफ्ट हो गया। वहां पिता ने कपड़ों का बिजनेस शुरू किया था। मोनिका विदेश में रहीं और पढ़ाई भी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से की। देखने में बेहद खूबसूरत मोनिका के लुक्स की तुलना टीनएज में मशहूर एक्ट्रेस सायरा बानो से होती थी। डांस में रुचि थी तो वो भी घंटों कमरे बंद कर गाने सुनकर थिरका करती थीं। भाई उन्हें कमरा साफ करने के बदले श्रीदेवी के डांस के वीसीडी दिलवाया करता था। मोनिका सालाना भारत आया करती थीं। साल 1995 में जब वो भारत आईं तो उन्होंने यहीं रहकर गोपी कृष्ण डांस क्लासेस जॉइन कर कथक सीखने का फैसला किया। वहीं उनकी एक रोज मनोज कुमार से मुलाकात हुई, जिन्होंने उनकी खूबसूरती देखकर उन्हें अपने बेटे कुणाल के साथ लॉन्च करने का ऑफर दिया। मोनिका ने एक्टिंग क्लासेस भी शुरू कर दीं, लेकिन मनोज कुमार की वो फिल्म बनी ही नहीं। इसी बीच उन्हें दूसरी फिल्में मिलने लगीं। उनकी पहली फिल्म साउथ की ताजमहल रही। जिसके बाद उन्होंने सैफ अली खान के साथ सुरक्षा, सलमान खान के साथ जानम समझा करो और संजय दत्त के साथ जोड़ी नंबर वन जैसी कई फिल्में कीं। मोनिका बेदी, जो सलमान खान, संजय दत्त, गोविंदा जैसे कई बड़े स्टार्स की करीब 20-25 फिल्मों में नजर आई थीं। फिर आया साल 1998… करियर बुलंदियों पर था। कई
जीवन में लिया संकल्प, मृत्यु के बाद परिवार ने निभाया:इंदौर में 83 वर्षीय महिला की देह दान; नेत्र, त्वचा भी दान कर दी मानवता की सीख

इंदौर में 83 वर्षीय वृद्धा के निधन के बाद उनके लिए गए संकल्प को पूरा करते हुए परिजन ने उनकी देह दान की है। इसी कड़ी में उनकी आंखें और त्वचा भी दान की है जिससे दूसरे लोगों की अंधियारी जिंदगी में उजियारा होगा। मंगला सहाने (83) निवासी टेलीफोन नगर के निधन बाद परिवार ने यह फर्ज अदा किया। वह धार्मिक प्रवृत्ति की थी और कुछ दिनों से बीमार थी। दुख की इस घड़ी में परिजनों ने अंग और देहदान कर समाज के समक्ष परोपकार का अनुकरणीय संदेश दिया है। उनके दामाद डॉ. प्रमोद बंसोड़ ने बताया कि स्व. मंगला ने जीवित रहते हुए जनवरी 2023 में एमजीएम मेडिकल कॉलेज में देहदान का संकल्प पत्र भरकर रजिस्ट्रेशन कराया था। उनके निधन के बाद बेटी जयश्री और दामाद डॉ. प्रमोद बंसोड़ (संयोजक, भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ, वीर सावरकर मंडल) ने उनके संकल्प को जिम्मेदारीपूर्वक पूर्ण किया। नेत्र दान एमके इंटरनेशनल आई बैंक में, त्वचा दान चोइथराम स्किन बैंक में और देह दान की प्रक्रिया एमजीएम मेडिकल कॉलेज में हुई। उनके निवास पर आयोजित अंतिम विदाई के दौरान मध्य प्रदेश शासन की ओर से सम्मान स्वरूप पुलिस द्वारा “गार्ड ऑफ ऑनर”दिया गया। इस अवसर पर भोपाल के सरकारी मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. सलिल भार्गव और मुस्कान ग्रुप के सेवादार संदीपन आर्य और जीतू बगानी ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अंग और देहदान की प्रक्रिया की जानकारी साझा की। तकनीकी सेवाएं गोपाल सिरोके और जयवंत निकम की टीम द्वारा प्रदान की गईं। परिजनों ने बताया कि दिवंगत के नेत्रों से दृष्टिहीनों को नई रोशनी मिलेगी, त्वचा जले हुए मरीजों के उपचार में सहायक होगी और उनका शरीर मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स के लिए एनाटॉमी के अध्ययन में अमूल्य योगदान देगा।








