Wednesday, 09 Sep 2026 | 10:30 AM

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डायरेक्टर सुदीप्तो सेन को मिली धमकियां:बताया क्यों नहीं हैं द केरल स्टोरी पार्ट 2 में शामिल, ‘चरक’ से लौटे, हाथरस कांड को लाएंगे सामने

डायरेक्टर सुदीप्तो सेन को मिली धमकियां:बताया क्यों नहीं हैं द केरल स्टोरी पार्ट 2 में शामिल, ‘चरक’ से लौटे, हाथरस कांड को लाएंगे सामने

‘द केरल स्टोरी’ के निर्देशक सुदीप्तो सेन एक बार फिर अपनी नई फिल्म ‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ को लेकर सुर्खियों में हैं। सामाजिक और संवेदनशील मुद्दों पर फिल्में बनाने के लिए पहचाने जाने वाले सेन इस बार आस्था और अंधविश्वास के टकराव को बड़े पर्दे पर पेश कर रहे हैं। ‘चरक’ केवल एक ऐतिहासिक उत्सव की कहानी नहीं है, बल्कि परंपरा, तर्क, समाज और अंधविश्वास के बीच के जटिल संबंधों को दिखाने की कोशिश है। फिल्म की रिसर्च प्रक्रिया, विवाद, सेंसर बोर्ड के मुद्दे, आलोचनाओं और उनके खिलाफ उठ रही आवाजों के बारे में सुदीप्तो ने खुलकर अपने विचार साझा किए हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में सुदीप्तो ने बताया कि उनके लिए सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज से सवाल पूछने और जागरूकता फैलाने का एक जरिया है। ‘द केरल स्टोरी’ के बाद आप फिर एक सामाजिक मुद्दे पर फिल्म लेकर आ रहे हैं। ‘चरक फेयर ऑफ फेथ’ के बारे में बताइए। कितनी रिसर्च की गई है? ‘चरक’ कोई नई परंपरा नहीं है। ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि यह उत्सव लगभग एक हजार साल से भी अधिक समय से पूर्वी भारत बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा और झारखंड साथ ही दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में मनाया जाता रहा है। चैत्र महीने (करीब 15 मार्च से 15 मई) के बीच यह उत्सव बड़े पैमाने पर आयोजित होता है। पश्चिम बंगाल में जैसे दुर्गा पूजा की लोकप्रियता है, उसी तरह ‘चरक’ भी अत्यंत लोकप्रिय है। इसे मां काली और भगवान शिव की आराधना से जोड़ा जाता है। लोकविश्वास है कि इस दौरान देवी-देवता धरती पर आकर भक्तों के बीच निवास करते हैं। बचपन में हम जेब खर्च बचाकर इस मेले का इंतजार करते थे। हजारों लोकगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम इससे जुड़े हैं। लेकिन इस उत्सव का एक दूसरा पक्ष भी है तांत्रिक साधनाएं और अघोरी प्रथाएं। इतिहास में कुछ स्थानों पर ऐसी प्रथाएं रही हैं, जिन्हें अब कानूनन प्रतिबंधित किया जा चुका है। हमारी फिल्म इसी ‘फेथ’ यानी आस्था और अंधविश्वास के बीच की रेखा को सवालों के कटघरे में खड़ा करती है। आपकी फिल्में अक्सर विवादों में घिर जाती हैं। क्या आपको लगता है लोग सच से डरते हैं? हमारे समाज में विज्ञान, तर्क और शिक्षा को हम सुविधा के अनुसार इस्तेमाल करते हैं। जहां हमें फायदा दिखता है, वहां लॉजिक अपनाते हैं, और जहां परंपरा टकराती है, वहां चुप हो जाते हैं। मैं एक उदाहरण देता हूं। कई घरों में लड़कियों को रात में खुले बाल लेकर बाहर न जाने या कुछ विशेष रंग के कपड़े न पहनने की सलाह दी जाती है। इन बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता, लेकिन वे पीढ़ियों से चली आ रही हैं। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब अंधविश्वास हिंसा में बदल जाता है। जैसे किसी दंपती को संतान न हो तो किसी मासूम की बलि देने की सोच, यह भयावह है। हाथरस की एक घटना ने मुझे झकझोर दिया, जहां कथित तौर पर स्कूल का रिजल्ट सुधारने के नाम पर एक बच्चे की बलि देने की बात सामने आई। जब तक समाज इन घटनाओं पर सवाल नहीं उठाएगा, तब तक बदलाव कैसे आएगा? ‘द केरल स्टोरी 2’ की रिलीज डेट टल गई है। आप इस प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा रहे हैं। इसे आप कैसे देखते हैं? लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है। आप किसी फिल्म से असहमत हो सकते हैं, आलोचना कर सकते हैं, बहस कर सकते हैं। लेकिन कला को रोक देना समाधान नहीं है। मेरे लिए आर्ट का काम है जो सच दबाया जा रहा है, उसे सामने लाना। सरकारें आएंगी-जाएंगी, राजनीतिक दल बदलेंगे, लेकिन समाज और आने वाली पीढ़ियां यहीं रहेंगी। इसलिए कलाकार की जिम्मेदारी है कि वह ईमानदारी से अपनी बात कहे। ‘द केरल स्टोरी 2’ में आप निर्देशक के तौर पर नजर नहीं आएंगे। इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। क्या प्रोडक्शन टीम के साथ किसी प्रकार का मतभेद हुआ था? ऐसी कोई अनबन नहीं है। शुरुआत में मुझे ही निर्देशन करना था, लेकिन कहानी का दायरा केरल से आगे बढ़ाया गया। मेरा रिसर्च मुख्यतः केरल पर आधारित था और मैंने उस पर लगभग दस साल काम किया। मैं अखबार की खबरों या सोशल मीडिया फॉरवर्ड के आधार पर फिल्म नहीं बना सकता। जिस विषय को छूता हूं, उस पर गहन अध्ययन करता हूं। इसलिए मैंने आगे बढ़ने का फैसला किया। ‘द केरल स्टोरी’ और ‘बस्तर’ के बाद आपको धमकियां भी मिलीं। क्या कभी डर लगा? सच कहूं तो हां, शुरुआत में डर लगा। ‘द केरला स्टोरी’ के बाद और खासकर ‘बस्तर’ के दौरान मेरे नाम पर बाकायदा “रेट कार्ड” चल रहा था किसी ने कहा आंख निकालने का इतना, हाथ काटने का इतना। ये सब सोशल मीडिया पर फैलाया गया। एक-दो दिन के लिए मन में डर आया, लेकिन फिर लगा कि अगर मैं डर गया तो फिल्म बनाना ही छोड़ दूं। मैं यह मानने को तैयार नहीं हूं कि कोई फिल्म सिर्फ प्रोपेगेंडा के दम पर इतनी बड़ी सफलता हासिल कर सकती है। अगर दर्शक जुड़ते हैं तो उसकी वजह कहानी होती है, इरादा होता है। फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के पार्ट 2 को लेकर कई फिल्मकारों ने भी प्रतिक्रिया दी है। अनुराग कश्यप ने इसे ‘बकवास’ कहा, वहीं प्रकाश राज ने भी फिल्म को बेकार बताया। आप इन आलोचनाओं को कैसे देखते हैं? देखिए, लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार है। अगर अनुराग कश्यप या प्रकाश राज को मेरी फिल्म पसंद नहीं आई, तो उन्हें यह कहने की पूरी स्वतंत्रता है। मैं उनके अधिकार का सम्मान करता हूं। लेकिन मेरा मानना है कि किसी भी फिल्म को ट्रेलर या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर जज नहीं करना चाहिए। पूरी फिल्म देखने के बाद असहमति हो तो खुलकर आलोचना कीजिए, बहस कीजिए। हमारा संविधान हमें सवाल करने और तर्क करने का अधिकार देता है। आप सोशल मीडिया पर लिखिए, लेख लिखिए, चर्चा कीजिए मुझे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन किसी फिल्म को रुकवाने या बैन करने की मांग करना सही परंपरा नहीं है। अगर आपको फिल्म खराब लगती है तो दर्शकों से कहिए कि मत देखिए। लेकिन कला को रोकना समाधान नहीं है। कला नदी की तरह है उसे

रील संस्कृति के समय में परिपक्व प्रेम पर खास चर्चा:सौरभ जैन और शीन दास ने कहा- सम्मान और धैर्य से ही रिश्ते चलते हैं

रील संस्कृति के समय में परिपक्व प्रेम पर खास चर्चा:सौरभ जैन और शीन दास ने कहा- सम्मान और धैर्य से ही रिश्ते चलते हैं

सौरभ राज जैन और शीन सविता दास इन दिनों वेब सीरीज संमरमर को लेकर चर्चा में हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में दोनों कलाकारों ने अपने किरदारों अमृता और आदित्य के जरिए बदलते दौर के प्रेम, धैर्य और रिश्तों की गहराई पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि सच्चा प्यार केवल साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि सम्मान, समझ और जिम्मेदारी निभाने का भी नाम है। आज के ‘रील संस्कृति’ और त्वरित फैसलों वाले समय में उनका मानना है कि रिश्तों की असली ताकत धैर्य और परस्पर सम्मान में छिपी है। दोनों ने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए यह भी बताया कि टीवी से आगे बढ़ने के सफर में उन्हें किन धारणाओं का सामना करना पड़ा। साथ ही, सूरज बड़जात्या के साथ काम करने के अनुभव को उन्होंने परिवार जैसा बताया। पेश है कुछ खास अंश.. सवाल: शीन, आपका किरदार आपके असली जीवन से कितना मिलता-जुलता है? जवाब/शीन:मुझे लगता है कि भावनात्मक रूप से मैं और अमृता (मेरा किरदार) थोड़े संवेदनशील हैं। फर्क इतना है कि अमृता पहले बात को समझती है, उसे अपने भीतर समेटती है और फिर प्रतिक्रिया देती है। लेकिन मैं तुरंत प्रतिक्रिया दे देती हूं। मैं खुद भी यही सीखना चाहती हूं कि पहले बात को समझूं और फिर जवाब दूं। सवाल: सौरभ, आपका किरदार आदित्य आपसे कितना मिलता है? जवाब/सौरभ: आदित्य मुझे बहुत अपने जैसा लगता है। रिश्तों को समझना और उन्हें सम्मान देना मेरे लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। बचपन में हम सब थोड़े आवेग में फैसले लेते हैं और फिर उनसे सीखते हैं। आदित्य की यात्रा भी कुछ ऐसी ही है। इसलिए यह किरदार मेरे लिए बहुत जुड़ा हुआ और अपना-सा है। सवाल: बदलते समय में प्यार के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे? और यह कहानी कितनी प्रासंगिक है? जवाब/शीन: एक पुरानी कहावत है कि प्यार करना आसान है, लेकिन निभाना कठिन है। जो लोग निभा लेते हैं, वही सच्चे मायने में जीतते हैं। अमृता और आदित्य ने अपने प्यार को निभाया है। उन्हें समाज के लिए शादी की जरूरत नहीं थी, क्योंकि उनका रिश्ता गहरा और सच्चा था। हालांकि परिस्थितियों के कारण अमृता को अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए अलग रास्ता चुनना पड़ा। लेकिन आदित्य ने उसका साथ नहीं छोड़ा। उसने उसे आगे बढ़ने की आज़ादी दी। यह कहानी सपनों और जिम्मेदारियों के बीच संतुलन की है। जीवन हमेशा सीधी रेखा में नहीं चलता। प्यार और जिम्मेदारियां हमेशा एक साथ नहीं चलतीं। यही इस कहानी की खूबसूरती है। सवाल: आज के ‘तुरंत सब कुछ पाने’ वाले दौर में इंतजार और धैर्य कितना मायने रखता है? जवाब/सौरभ: मेरे विचार से किसी भी दौर का प्यार हो, उसका आधार एक ही है, सम्मान। जहां सम्मान है, वहां धैर्य भी है। बिना धैर्य के सम्मान नहीं हो सकता। जो इस बात को समझता है, वही सच्चा प्रेम करता है। जो सिर्फ समय बिताना चाहता है, उसके लिए प्रेम का कोई अर्थ नहीं है। सवाल: आजकल ‘अल्फा मेल’ की बातें होती हैं। ऐसे में आदित्य जैसा सरल और संवेदनशील लड़का कितना प्रासंगिक है? जवाब/सौरभ: मुझे लगता है कि दस आक्रामक लोगों के बीच एक शांत और संतुलित व्यक्ति काफी होता है। सच्चे प्रेम में हिंसा नहीं, बल्कि मूल्य और जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होते हैं। सशक्त होना मतलब केवल अपने बारे में सोचना नहीं है। असली सशक्तिकरण तब है, जब आप अपने सपनों के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारियों को भी समझते हैं। आदित्य और अमृता की यात्रा यही सिखाती है। सवाल: टीवी से फिल्मों और अन्य मंचों पर आने वाले कलाकारों को ‘टीवी कलाकार’ का टैग झेलना पड़ता है। क्या आपके साथ ऐसा हुआ? जवाब/शीन: कभी-कभी लोग ऐसा कहते हैं। लेकिन मेरा मानना है कि मैं जिस लगन से टीवी करती हूं, उसी लगन से फिल्म भी करूंगी। टीवी कलाकारों को अनुशासन, संवाद याद रखने और समय की कद्र करने की अच्छी आदत होती है। इसलिए यह अनुभव हमें और मजबूत बनाता है। लोगों की सोच अलग हो सकती है, लेकिन इससे मुझे फर्क नहीं पड़ता। सौरभ: हां, ऐसी धारणाएं होती हैं। लेकिन मेरा मानना है कि जब आपका समय आता है, तो सब ठीक हो जाता है। अगर समय नहीं आया, तो हम कई कारण गिना सकते हैं। पर सही समय पर सब अपने आप ठीक हो जाता है। सवाल: राजश्री परिवार के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? और सूरज जी से क्या सीख मिली? जवाब/शीन: जब मैंने उनके साथ पहला शो किया था, तो उन्होंने मुझसे कहा था कि टीआरपी की चिंता मत करो, बस प्रक्रिया का आनंद लो। यह सुनकर मैं हैरान रह गई थी। इतने बड़े निर्माता का ऐसा कहना बहुत प्रेरणादायक था। आज भी जब उनका फोन आता है, तो ऐसा लगता है जैसे घर से फोन आया हो। सौरभ: पहले मैंने ‘यहां में घर घर खेली’ में एक छोटे किरदार में काम किया था, और इस बार बड़ा अवसर मिला। जब मैं पहली बार उनसे मिला, तो सोचा था कोई असिस्टेंट आकर किरदार समझाएगा। लेकिन वे खुद मेरे मेकअप कक्ष में आए और किरदार के संदर्भ लेकर समझाया। उनका काम के प्रति जुनून और सभी को सम्मान देने का तरीका बहुत प्रेरणादायक है। आज के समय में जहां सम्मान को दिखावा समझ लिया जाता है, वहां उनके साथ रहकर महसूस होता है कि सच्चा सम्मान कैसा होता है।

Israel-Iran War Jung | US Attack, Khamenei Death, Girls Funeral, Photos

Israel-Iran War Jung | US Attack, Khamenei Death, Girls Funeral, Photos

9 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल हमले का आज पांचवा दिन है। इजराइली और अमेरिकी सेनाओं ने बुधवार को भी ईरान के अहम ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। ईरान के इजराइल और गल्फ देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के साथ अन्य जगहों पर भी हमले जारी हैं। शनिवार को शुरू हुई इस जंग में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामनेई की मौत हो चुकी है। अमेरिका-इजराइल तीन दिन में 2000 से ज्यादा बम गिरा चुके हैं। इससे ईरान में 800 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 176 बच्चे शामिल हैं। 20 फोटोज में देखें, हमलों के बाद के हालात… न्याय की मांग UN के मानवाधिकार कार्यालय ने ईरान में एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले की जांच कराने की मांग की है। इस हमले में 150 छात्राओं की मौत हुई थी। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि इस हमले के लिए कौन जिम्मेदार है। हमला 28 फरवरी को हुआ था। 3 मार्च को अंतिम संस्कार किया गया। तेहरान में आज रात 11:30 बजे से ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामेनेई की याद में तीन दिनों का कार्यक्रम शुरू होगा। ईरान की तसनीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, लोग तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में इकट्ठा होकर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। खामेनेई के अंतिम संस्कार की तारीख और बाकी जानकारी जल्द ही बताई जाएगी। तेहरान समेत कई शहरों में उनके बड़े-बड़े बैनर और बिलबोर्ड लगाए गए हैं। इजराइल ने ईरानी मिसाइल गिराई इजराइल ने बुधवार को ईरानी मिसाइल गिराने का वीडियो जारी किया। हमलों के बीच पर्व, प्रार्थना इजराइल में यहूदी पर्व पुरिम ( Purim) मनाया जा रहा है। इस मौके पर तेल अवीव में मंगलवार को एक बम शेल्टर में स्थानीय लोगों ने बुक ऑफ ईथर का पाठ किया और तोराह स्क्रॉल उठाया। यह पर्व प्राचीन फारस में यहूदियों के नरसंहार से बचाए जाने की स्मृति में मनाया जाता है। हमलों के बीच संदेश संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान और दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हामदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम दुबई मॉल में खरीदारी कर रहे लोगों के बीच घूमते नजर आए। यह घटना ऐसे समय में हुई जब देश ने ईरान की तरफ से लॉन्च किए गए ड्रोन और हवाई हमलों को इंटरसेप्ट करने की पुष्टि की है। जंग के बीच मजबूरी लेबनान की राजधानी बेरूत में इजराइली हवाई हमलों के बीच पैसेंजर विमान को उड़ान भरते हुए देखा गया। यह पता नहीं चला कि वह कहां जा रहा था। कहा गया इस विमान से बेरूत में फंसे लोगों को निकाला गया। UN की शरणार्थी एजेंसी UNHCR के मुताबिक, इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद लेबनान में कम से कम 30,000 लोग अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शिफ्ट हो गए हैं। हमलों में विरासत खत्म इजराइल ने ईरान के 500 साल पुराने गोलिस्तान पैलेस पर हमला किया है। हमले में इसका कुछ हिस्सा डैमेज हो गया। वहां रखी गई कीमती और ऐतिहासिक चीजों को पहले ही सुरक्षित जगह पर रख दिया गया था, इसलिए वे बच गईं। साल 2013 में इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में भी शामिल किया गया था। अपनों के लिए मातम ईरान के मिनाब शहर में गर्ल्स स्कूल पर हमले में मारी गई 150 लड़कियों का सार्वजनिक अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान हजारों लोग मैदान में जमा हुए। 150 लड़कियों के अंतिम संस्कार के लिए एक साथ मिनाब शहर में कब्र खोदी गई थीं। ईरानी मीडिया ने हमले का आरोप इजराइल पर लगाया, लेकिन इजराइली सेना ने कहा कि उन्हें इस इलाके में किसी हमले की जानकारी नहीं है। जंग का विरोध ईरानी महिला टीम ने सोमवार रात एशियाई महिला फुटबॉल कप के उद्घाटन मैच में अपना राष्ट्रीय गान नहीं गाया। खिलाड़ी लाइन में खड़ी थीं, लेकिन गान के दौरान सिर्फ सामने देखा और चुप रहीं। टीम की कोच मारजियेह जाफरी भी अपनी खिलाड़ियों की चुप्पी देख मुस्कुरा रही थीं। यह कदम हाल के अमेरिका-इजराइल हमलों और ईरान के नेताओं की मौत के बीच एक विरोध का संदेश माना जा रहा है। मिसाइल अटैक ईरान की सरकारी मीडिया ने मंगलवार को मिसाइल लॉन्च का नया फुटेज जारी किया है। मिसाइल के बारे में जानकारी नहीं दी। इजराइली एयर डिफेंस सिस्टम का सोमवार रात ईरानी मिसाइल को गिराने का फुटेज। इजराइल में हमले की फोटोज ईरान ने मंगलवार को इजराइल के पेटाह टिकवा शहर पर मिसाइल अटैक किया। इजराइल के चैनल 12 के मुताबिक, मिसाइल के टुकड़े शहर में कई जगह गिरे, जिससे कुछ नुकसान हुआ है। ईरान पर हमले की तस्वीरें यह फोटो रॉयर्टस ने जारी की है। ईरान के परदिस इलाके में अमेरिकी हमलों के बाद धुएं के गुबार उठते दिख रहे हैं। यह तस्वीर 3 मार्च को सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो से ली गई। यह फोटो तेहरान में एक पुलिस हेडक्वार्टर की। अमेरिकी-इजराइली हमलों में यह जमींदोज हो गई। यह तस्वीर ईरानी एयरफील्ड की। इसे यूएस सेंट्रल कंमाड ने जारी किया है। अमेरिका के हमले में इसे बर्बाद कर दिया गया। इजरायल ने मंगलवार को लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में हिज्बुलाह के ठिकानों पर हमले किए। इस दौरान घना तेज धमाकों के साथ घना धुआं देखा गया। ईरान ने सोमवार को सऊदी अरब की बड़ी तेल रिफाइनरी रास तनूरा पर हमला किया। यह रिफाइनरी सऊदी की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको की है। इसकी उत्पादन क्षमता लगभग 5.5 से 6 लाख बैरल रोजाना है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक तेल टैंकर स्काईलाइट को निशाना बनाया। इससे उसके एक भाग में आग लग गई। इजराइली सेना IDF ने रविवार को तेहरान में हमले का एक और फुटेज जारी किया है। इसमें ईरान के रक्षा मुख्यालय समेत कई सरकारी इमारतों को निशाना बनाया गया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Iran Assembly Experts Voting | Khamenei Funeral Mashhad; New Leader Soon

Iran Assembly Experts Voting | Khamenei Funeral Mashhad; New Leader Soon

तेल अवीव/तेहरान5 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज पांचवां दिन है। श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी युद्धपोत पर पनडुब्बी से हमला हुआ है। श्रीलंका नेवी के मुताबिक जहाज से कई शव बरामद हुए हैं। हमले में 32 लोग घायल हैं, जबकि कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। घटना के बाद समुद्र में सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। नेवी प्रवक्ता के अनुसार घायलो को बचाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। शुरुआत में नेवी ने बताया था कि हमले के बाद 101 लोग लापता और 78 घायल हुए हैं, लेकिन बाद में प्रवक्ता ने साफ किया कि पहले जारी किए गए आंकड़े सही नहीं थे। दूसरी ओर ईरान ने पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुन लेने का दावा किया है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद होगी। वहीं, इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा है कि अगर अली खामेनेई के बाद ईरान में जो भी नया नेता बनेगा उसे भी खत्म कर दिया जाएगा। काट्ज ने यह भी कहा कि नाम या जगह से कोई फर्क नहीं पड़ता, इजराइल उसे ढूंढ लेगा। ईरान ने सऊदी अरब की बड़ी तेल रिफाइनरी रास तनूरा पर हमला किया है। यहां हमले के बाद धुंआ उठता नजर आया। जंग में अमेरिका के दावे… ईरान के 17 जहाज तबाह कर दिए गए, जिनमें एक पनडुब्बी भी शामिल है। इस ऑपरेशन में 50,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक शामिल हैं। करीब 200 फाइटर जेट, दो एयरक्राफ्ट कैरियर और बम गिराने वाले विमान शामिल हैं। ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइलें और ड्रोन को भारी नुकसान हुआ है। अमेरिका ने इस जंग को एपिक फ्यूरी नाम दिया है। इसका मतलब भयंकर गुस्सा होता है। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें… 150 लड़कियों के अंतिम संस्कार के लिए एक साथ मिनाब शहर में कब्र खोदी गई थीं। ईरान की राजधानी तेहरान में इजराइली हमले का फुटेज। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने ईरान के ड्रोन पर हमले का फुटेज जारी किया है। इजराइली एयर डिफेंस सिस्टम का सोमवार रात ईरानी मिसाइल को गिराने का फुटेज। इजराइल-ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… लाइव अपडेट्स 6 मिनट पहले कॉपी लिंक नाटो ने तुर्किये की तरफ बढ़ रही ईरानी मिसाइल मार गिराई तुर्किये ने कहा है कि नाटो के एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान से दागी गई एक मिसाइल को उसके एयरस्पेस में पहुंचने से पहले मार गिराया। तुर्किये के राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक मिसाइल इराक और सीरिया के ऊपर से गुजरते हुए हताय इलाके की दिशा में आ रही थी। बयान के अनुसार सुरक्षा खतरे को देखते हुए नाटो एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव किया गया और मिसाइल को तुर्किये के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया गया। 23 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका ने नागरिकों से कतर छोड़ने को कहा अमेरिका ने कतर में अपने नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की सलाह दी है। कतर स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि अगर सुरक्षित हो तो अमेरिकी नागरिक जल्द से जल्द कतर से निकल जाएं। अमेरिकी विदेश विभाग ने 3 मार्च को कतर में तैनात गैर-जरूरी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का आदेश दिया था। दूतावास के मुताबिक फिलहाल कतर का हवाई क्षेत्र और समुद्री मार्ग बंद हैं। हालांकि कतर और सऊदी अरब के बीच सलवा लैंड बॉर्डर क्रॉसिंग खुली हुई है, जहां से लोग देश से बाहर जा सकते हैं। 38 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,045 हुई  अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,045 हो गई है। यह जानकारी ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम न्यूज एजेंसी ने दी है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के अलग-अलग शहरों में हुए हमलों के बाद मृतकों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। 50 मिनट पहले कॉपी लिंक खामेनेई की अंतिम विदाई का समारोह टला ईरान की राजधानी तेहरान में अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई के लिए बुधवार रात होने वाला समारोह टाल दिया गया है। तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक आयोजन से जुड़ी लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण कार्यक्रम स्थगित किया गया। रिपोर्ट के अनुसार यह समारोह बुधवार रात 10 बजे शुरू होना था और इसमें देश के अलग-अलग प्रांतों से बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद थी। एक अधिकारी ने बताया कि कई प्रांतों से लोगों ने कार्यक्रम में शामिल होने का अनुरोध किया था, जिसके चलते आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर दिक्कतें सामने आईं। अधिकारियों के अनुसार समारोह की नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी। 11:19 AM4 मार्च 2026 कॉपी लिंक सर्च ऑपरेशन में ईरानी युद्धपोत से शव मिले श्रीलंका के तट के पास ईरानी युद्धपोत से सर्च ऑपरेशन के दौरान कुछ शव बरामद किए गए हैं। श्रीलंका नेवी के प्रवक्ता के मुताबिक जहाज से पहले डिस्टेस कॉल मिला था। युद्धपोत पर पनडुब्बी से हमला किया गया है। नेवी के अनुसार सर्च एंड रेस्क्यू अभियान के दौरान समुद्र से कुछ शव बरामद किए गए हैं। आशंका है कि ये जहाज के क्रू मेंबर के हो सकते हैं, हालांकि मृतकों की संख्या को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। 11:06 AM4 मार्च 2026 कॉपी लिंक श्रीलंका के पास ईरानी युद्धपोत पर पनडुब्बी से हमला श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी युद्धपोत पर पनडुब्बी से हमला हुआ है। श्रीलंका नेवी के मुताबिक इस हमले में 32 लोग घायल हुए हैं, जबकि कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। घटना के बाद समुद्र में सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। नेवी प्रवक्ता के अनुसार घायल लोगों को बचाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। शुरुआत में नेवी ने बताया था कि हमले के बाद 101 लोग लापता और 78 घायल हुए हैं, लेकिन बाद में प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि पहले जारी किए गए आंकड़े सही नहीं थे और स्थिति की जानकारी अपडेट की जा रही है। 10:58 AM4 मार्च 2026 कॉपी लिंक इजराइली हमलों से

ईरान-इजराइल युद्ध से बासमती चावल एक्सपोर्ट अटका:फाजिल्का से भेजा लाखों टन चावल फंसा, शिपिंग एजेंसियां $2000 डालर प्रति कंटेनर मांग रहीं

ईरान-इजराइल युद्ध से बासमती चावल एक्सपोर्ट अटका:फाजिल्का से भेजा लाखों टन चावल फंसा, शिपिंग एजेंसियां $2000 डालर प्रति कंटेनर मांग रहीं

खाड़ी देशों में हो रहे युद्ध के चलते इसका सीधा असर अब पंजाब के बासमती राइस एक्सपोर्टर पर पड़ा है। फाजिल्का जिले के जलालाबाद की बात करें तो यहां से एक्सपोर्ट किया गया लाखों टन बासमती चावल रास्ते में अटक गया है। मिलर्स का कहना है कि युद्ध के हालातों को देखते हुए शिपिंग के नाम पर अब शिपिंग एजेंसियां उनसे 2000 डॉलर प्रति कंटेनर की मांग रही हैं। जिसे वह अदा करने में असमर्थ हैं। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार से दखल देने की मांग करते हुए समस्या के समाधान की मांग की है। जलालाबाद से राइस एक्सपोर्टर कपिल देव गुंबर ने बताया कि फाजिल्का जिले में किसान बासमती चावल की खेती करते हैं। 1121 किस्म का बासमती चावल खाड़ी देशों में पसंद किया जाता है। वह पिछले 15 वर्षों से बासमती चावल एक्सपोर्ट का काम कर रहे हैं। लाखों टन चावल भारत से खाड़ी देशों को भेजा जा रहा है। युद्ध के चलते रास्ते में फंसा चावल उन्होंने बताया अब भी उनके द्वारा लाखों टन बासमती चावल दुबई, ईरान सहित गल्फ कंट्रियो में भेजा गया है, जो ईरान- इजराइल युद्ध के चलते रास्ते में फंस गया है। उन्होंने बताया कि उनके करीब 150 कंटेनर है जिसमें से कुछ शिप, समुंदर, बंदरगाह या फिर ट्रकों में है वो वहीं रुक गया है। सारा माल रास्ते में फंस गया है। हालांकि पहले से ही तय भाड़े के अनुसार उनके द्वारा चावल एक्सपोर्ट किया जा रहा है। अब हालात ये हो गए हैं कि युद्ध के चलते रास्ते में फंसे चावल के लिए उनसे शिपिंग एजेंसियों द्वारा वार चार्जेस के नाम पर 2000 डॉलर प्रति कंटेनर मांगा जा रहा है। जिससे चावल का भाव 800 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ जाएगा, लेकिन उन्हें इतना मार्जन नहीं है। एक-दो रुपए प्रति किलो का मार्जन : गुंबर वह एक- दो रुपए प्रति किलो मार्जन पर काम कर रहे हैं। ऐसे में उन्होंने केंद्र सरकार से इस मामले में दखल देने की मांग करते हुए समस्या के समाधान की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो राइस मिलर्स को भारी नुकसान होगा। जिसका सीधा असर पंजाब की किसानी पर भी पड़ेगा।

Sholay: Holis Bollywood Twist Revealed

Sholay: Holis Bollywood Twist Revealed

12 घंटे पहले कॉपी लिंक होली का त्योहार बॉलीवुड फिल्मों के गानों के बिना अधूरा है, क्योंकि त्योहार का जश्न इन्हीं गानों पर झूमकर मनाया जाता है। हालांकि, ये गाने और फिल्में सिर्फ जश्न तक सीमित नहीं रहे हैं। बॉलीवुड की कई फिल्मों में होली के मौके पर कहानी में मोड़ और ट्विस्ट सामने आया है। ‘सिलसिला’ में ‘रंग बरसे’ के दौरान रिश्तों का सच सामने आता है। ‘शोले’ में होली के जश्न के बाद तुरंत हमला होता है। चलिए, ऐसी कुछ फिल्मों के बारे में जानते हैं… सिलसिला साल 1981 में आई फिल्म सिलसिला का गाना रंग बरसे आज भी होली पर सबसे ज्यादा बजने वाले गानों में से एक है। वहीं, फिल्म में गाना रंग बरसे कहानी में बड़ा मोड़ लाता है। इस गाने में अमित, यानी अमिताभ बच्चन, और चांदनी, यानी रेखा, होली के जश्न में भांग के नशे में होते हैं। नशे में वे अपनी पुरानी यादों और दबे जज्बातों में खो जाते हैं। दोनों सबके सामने खुलकर गाते और नाचते हैं। उनके बीच की नजदीकी साफ दिखने लगती है। अमित की पत्नी शोभा (जया बच्चन) और चांदनी के पति डॉ. आनंद (संजीव कुमार) यह सब देख रहे होते हैं। उनके चेहरे पर असहजता साफ नजर आती है। उन्हें दोनों के पुराने रिश्ते का एहसास हो जाता है। शोले 1975 की फिल्म शोले में होली का सीन कहानी में ट्विस्ट लाता है। गाने ‘होली के दिन दिल खिल जाते हैं’ के बाद पूरा रामगढ़ जश्न मना रहा होता है। तभी गब्बर सिंह के डकैत अचानक गांव पर हमला कर देते हैं। फिल्म ‘शोले’ में होली के जश्न के बाद वाले सीन में गब्बर के गुंडों से मुकाबला करते हुए वीरू (धर्मेंद्र)। जय और वीरू बहादुरी से डकैतों से लड़ते हैं। एक समय वे घिर जाते हैं और ठाकुर से बंदूक फेंकने को कहते हैं। ठाकुर के पास बंदूक होती है, फिर भी वह कुछ नहीं करता। डकैत वहां से भाग निकलते हैं। इस बात से नाराज होकर जय और वीरू गांव छोड़ने का फैसला करते हैं। तभी ठाकुर अपनी शॉल हटाकर दिखाता है कि उसके हाथ नहीं हैं। वह बताता है कि गब्बर ने उसका परिवार मार दिया और उसके हाथ काट दिए। यह सच सुनकर जय और वीरू बदला लेने का फैसला पक्का कर लेते हैं। दामिनी फिल्म ‘दामिनी’ (1993) में होली का सीन कहानी का सबसे बड़ा मोड़ साबित होता है, जहां से फिल्म की कहानी एक पारिवारिक ड्रामे से बदलकर एक गंभीर लीगल थ्रिलर बन जाती है। होली के जश्न और गाने (‘गवाह है चाँद तारे’) के बीच दामिनी (मीनाक्षी शेषाद्री) अपने देवर राकेश और उसके दोस्तों को घर की नौकरानी उर्मी का बलात्कार करते हुए देख लेती है। फिल्म ‘दामिनी’ के एक सीन में वकील के रूप में सनी देओल और दामिनी के किरदार में मीनाक्षी शेषाद्री। दामिनी का पति शेखर (ऋषि कपूर) और उसके ससुराल वाले परिवार की ‘इज्जत’ बचाने के लिए उसे चुप रहने और पुलिस से झूठ बोलने के लिए मजबूर करते हैं। जब दामिनी सच बोलने का फैसला करती है, तो उसे मानसिक रूप से बीमार घोषित कर पागलखाने भेज दिया जाता है, ताकि उसकी गवाही को अमान्य किया जा सके। पागलखाने से भागने के बाद दामिनी की मुलाकात गोविंद (सनी देओल) से होती है, जो एक शराबी और असफल वकील है। यहीं से फिल्म का सबसे मशहूर हिस्सा शुरू होता है, जहाँ गोविंद दामिनी को इंसाफ दिलाने के लिए दिग्गज वकील इंद्रजीत चड्ढा (अमरीश पुरी) के खिलाफ कोर्ट में खड़ा होता है। जॉली एलएलबी 2 फिल्म ‘जॉली एलएलबी 2’ में होली का सीन कहानी का अहम मोड़ बनता है। गाने ‘गो पागल’ के बाद हिना (सयानी गुप्ता) को पता चलता है कि जॉली (अक्षय कुमार) ने उसके पति के फर्जी एनकाउंटर केस में मदद का वादा किया था, लेकिन सच में उससे दो लाख रुपये लेकर अपना चैंबर खरीदने की योजना बनाई। इस धोखे का अहसास हिना को तोड़ देता है। 2017 की फिल्म ‘जॉली एलएलबी 2’ में हुमा कुरैशी ने अक्षय कुमार के किरदार की पत्नी का रोल प्ले किया था। जश्न और रंगों के माहौल के तुरंत बाद हिना का आत्महत्या वाला सीन फिल्म की दिशा बदल देता है। यही घटना जॉली के भीतर गहरा अपराध बोध पैदा करती है। वह अपने लालच और स्वार्थ को छोड़कर सच में केस लड़ने का फैसला करता है। इसके बाद कहानी एक गंभीर कोर्टरूम ड्रामा बन जाती है, जहां जॉली सिस्टम के खिलाफ खड़ा होकर न्याय के लिए लड़ता है। पद्मावत फिल्म ‘पद्मावत’ में होली का सीन सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि एक चाल है। अलाउद्दीन खिलजी छह महीने की घेराबंदी के बाद नई रणनीति बनाता है। वह सफेद झंडा भेजकर शांति का संदेश देता है। राजपूतों को लगता है कि अब सुलह होगी। फिल्म ‘पद्मावत’ (2018) में सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की भूमिका रणवीर सिंह ने निभाई थी। किले के बाहर बैठा खिलजी अपने चेहरे पर केसरिया रंग लगाता है। राजपूतों के लिए यह वीरता का रंग है, लेकिन उसके लिए यह जुनून का प्रतीक है। होली के बहाने वह ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा का फायदा उठाकर किले में प्रवेश कर जाता है। वह भरोसा जीतता है ताकि रानी पद्मावती को देख सके। बाद में इसी शांति वार्ता के दौरान वह रतन सिंह को छल से बंदी बना लेता है। …………………………… होली से जुड़ी ये खबर पढ़ें… हरिवंशराय बच्चन ने होली का गाना ‘रंग बरसे’ लिखा था: अमिताभ बच्चन ने गाया था, फिल्म ‘सिलसिला’ में रेखा के साथ फिल्माया गया फिल्मों और होली का रिश्ता 94 सालों पुराना है। 1932 में पहली बार फिल्म गुलरू जरीना में होली थीम का ब्लैक एंड व्हाइट गाना ‘होरी मुझे खेलने को टेसू मंगा दे..’ दिखाया गया। हालांकि, इसे पॉपुलैरिटी नहीं मिली। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

बॉलीवुड की यादगार होली: कपूर, बच्चन से शाहरुख तक:आरके स्टूडियो से जलसा और मड आइलैंड तक सितारों की रंगीन होली के मशहूर किस्से

बॉलीवुड की यादगार होली: कपूर, बच्चन से शाहरुख तक:आरके स्टूडियो से जलसा और मड आइलैंड तक सितारों की रंगीन होली के मशहूर किस्से

बॉलीवुड और होली का बहुत पुराना रिश्ता है। पर्दे पर ही नहीं बल्कि रियल लाइफ में भी बॉलीवुड सेलेब्स होली मनाना खूब पसंद करते हैं। बच्चन, अख्तर और कपूर जैसे परिवारों की होली हमेशा से ही यादगार रही है। इन परिवारों ने होली के त्यौहार को एक नई परिभाषा दे दी और आज भी इनकी होली के चर्चे खूब होते हैं। रंगों के इस मौसम में जानते हैं इन सितारों की होली के मशहूर किस्से- शोमैन राज कपूर की होली बॉलीवुड की होली की बात हो तो राज कपूर का जिक्र जरूर होता है। राज कपूर की होली पार्टी हमेशा से खूब मशहूर थी। बड़े-बड़े स्टार्स पार्टी का हिस्सा बनना चाहते थे, न्यू कमर्स भी इस पार्टी में आने के लिए तरसा करते थे। बॉलीवुड में एक कहावत सबसे ज्यादा मशहूर है कि अगर आरके स्टूडियो में होली नहीं खेली तो क्या होली खेली? राज कपूर की होली को एक जमाने में ‘भांग एंड फूड’ फेस्टिवल भी कहा जाता था। इनकी पार्टी की एक खास बात यह भी थी कि यह एक पॉन्ड में ढेर सारा रंग मिलाकर अपने मेहमानों के लिए तैयार रखते थे। और जो भी इस पार्टी में आता था उसे उस पॉन्ड में डुबकी लगाकर ही एंट्री मिलती थी। हुड़दंग वाली होली की एक झलक, बजते बाजे और चेहरे पर लगे गुलाल इस होली के जश्न को दोगुना कर देते थे। आरके स्टूडियो की फेमस होली में नरगिस, वैजयंती माला, हेमा मालिनी, धर्मेद्र, मनोज कुमार, राजेंद्र कुमार, जितेंद्र, दारा सिंह, राकेश रोशन, मिथुन, राजेश खन्ना, अमिताभ, अनिल कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, राखी, रेखा, श्रीदेवी, जीनत अमान जैसे कलाकार होली का मजा उठा चुके हैं। हालांकि 1988 में राज कपूर के निधन के बाद आरके स्टूडियो की होली बंद हो गई। बच्चन परिवार की होली बॉलीवुड के महानायक अभिताभ बच्चन पर फिल्माया गाना रंग बरसे आज भी होली पार्टी की जान है। वहीं रियल लाइफ में भी बिग बी होली खेलने के शौकीन रहे है। बिग बी के बगले जलसा पर हर साल होली का जश्नन पूरे धूम-धाम के साथ मनाया जाता रहा है। साल 2004 में बिग बी की होली खूब चर्चे में थी क्योंकि इसी होली में शाहरुख खान और अमर सिंह ने अपने गिले शिकवे दूर किए थे। फिलहाल कुछ सालों से बच्चन परिवार होली पार्टी नहीं रख रहा है। जावेद अख्तर और शबाना की होली जावेद अख्तर उन सेलेब्स में से हैं जो आज भी होली पार्टी का उसी तरह आयोजन करते हैं जिस तरह सालों से करते आए हैं। जानकारी के मुताबिक, शबाना के पिता कैफी आजमी ने होली पार्टी का ट्रेडिशन शुरु किया था। जावेद अख्तर और शबाना होली को हमेशा से ही लैविश अंदाज में मनाते है। शाहरुख खान की होली शाहरुख खान के होली मनाने का अंदाज खूब निराला है। शाहरुख और गौरी की होली इसलिए फेमस होती है क्योंकि इनकी होली में हर्बल रंगों के कलर्स के साथ-साथ फूलों का भी इस्तेमाल होता है। शाहरुख खुलकर पत्नी गौरी खान होली का त्यौहार के साथ मनाते आए हैं। सुभाष घई की होली अपने मड आइलैंड वाले बंगले पर सुभाष घई लगभग हर बार ही होली पार्टी करते है। एक जमाना था जब सुभाष की होली के पार्टी की चर्चा कई महीनों तक होती थी।

Amitabh Bachchan & Rekhas Silsila Song Rang Barse

Amitabh Bachchan & Rekhas Silsila Song Rang Barse

13 घंटे पहले कॉपी लिंक फिल्मों और होली का रिश्ता 94 सालों पुराना है। 1932 में पहली बार फिल्म गुलरू जरीना में होली थीम का ब्लैक एंड व्हाइट गाना ‘होरी मुझे खेलने को टेसू मंगा दे..’ दिखाया गया। हालांकि, इसे पॉपुलैरिटी नहीं मिली। इसके बाद महबूब खान ने फिल्म औरत (1940) में होली की खूबसूरती दिखाते हुए दो गाने डाले। रंगों वाली होली दिखी तो जरूर लेकिन ब्लैक एंड व्हाइट एरा में रंग नहीं दिखे। पहली होली भले ही ब्लैक एंड व्हाइट थी, लेकिन जब रंगीन फिल्मों का दौर आया तब भी पर्दे पर रंगीन होली दिखाने का क्रेडिट भी महबूब खान की फिल्म आन (1952) को मिला। होली के गानों और सेलेब्स का होली मनाने का तरीका दोनों की कई कहानियां हैं। बॉलीवुड के शो-मैन कहे जाने वाले राज कपूर शानदार तरीके पैमाने पर होली मनाते थे। राज कपूर अपनी पार्टी में किन्नरों को बुलाते थे। उन्हें अपनी आने वाली फिल्म के गाने सुनाया करते थे। अगर किन्नरों को कोई गाना पसंद ना आए तो उसे फिल्म में नहीं रखते थे। अमिताभ बच्चन की होली पार्टी में मेहमानों के रंग से भरे पूल में फेंका जाता था। भांग पिलाई जाती थी और जमकर नाच-गाना होता था। एक समय जब अमिताभ का करियर कठिन दौर से गुजर रहा था तो एक होली गीत ने ही उन्हें फिल्म दिलाई थी। आज होली के खास मौके पर पढ़िए फिल्मों में दिखाई गई होली और स्टार्स के घर होली के जश्न से जुड़े कुछ खास किस्से- बड़े पर्दे की पहली होली तो दिखी, लेकिन रंग नहीं होली दिखाने वाली पहली फिल्म भले ही गुलरू जरीना है, लेकिन होली का ट्रेंड शुरू करने का क्रेडिट महबूब खान को दिया जाता है। डायरेक्टर महबूब खान ने 1940 की ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म औरत में होली के दो गाने थे। फिल्म में सुरेंद्र, सरदार अख्तर और याकूब अहम किरदारों में थे। पर्दे पर होली तो दिखाई गई, लेकिन ब्लैक एंड व्हाइट होने पर रंग नहीं दिखे। जब रंगीन फिल्मों का दौर आया तो महबूब खान ने इसी फिल्म को दोबारा मदर इंडिया टाइटल के साथ बनाया। ये फिल्म 1958 को रिलीज हुई थी। भारत की पहली फिल्म जिसे ऑस्कर नॉमिनेशन तक मिला। फिल्म में होली पर फिल्माया गया गाना “होली आई रे कन्हाई” जबरदस्त हिट हुआ, जिसे शमशाद बेगम ने आवाज दी थी। उस जमाने में मदर इंडिया हिंदी सिनेमा की सबसे महंगी फिल्म थी जो करीब 60 लाख रुपए में बनी थी। जिसने सबसे ज्यादा 8 करोड़ रुपए की कमाई भी की। किन्नरों के साथ होली खेलते थे राज कपूर राज कपूर अपनी हर होली पार्टी में किन्नरों को बुलाकर उनके साथ होली का जश्न मनाते थे। राज किन्नरों पर इतना भरोसा करते थे कि रंग- गुलाल लगाने के बाद वो उन्हें अपनी अपकमिंग फिल्म के गाने बिना झिझक सुना देते थे। जब उनकी तरफ से हरी झंडी मिलती थी, तब ही फिल्म में वो गाना लिया जाता था। जब राज कपूर ने एक होली पार्टी में किन्नरों को अपनी अपकमिंग फिल्म राम तेरी गंगा मैली के गाने सुनाए तो एक गाना किन्नरों को पसंद नहीं आया। आरके स्टूडियो की होली पार्टी में कत्थक क्वीन सितारा देवी के साथ डांस करते हुए राज कपूर। राज का उन पर ऐसा अटूट विश्वास था कि उन्होंने तुरंत कंपोजर रविंद्र जैन को बुलाकर इसे बदलने को कहा। इस गाने के रिप्लेसमेंट में ‘सुन साहिबा सुन’ गाना तैयार किया गया। जब फिर किन्नरों को ये गाना सुनाया गया तो जवाब मिला, ये गाना दशकों तक याद रखा जाएगा। हुआ भी ऐसा ही। सुन साहिबा सुन गाना चार्टबस्टर था, जो आज भी लोगों की जुबान पर है। कंपोजर रविंद्र जैन को इस फिल्म के लिए बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था। राज कपूर की पार्टी में होता था देखने लायक जश्न 60 के दशक में हिंदी सिनेमा में राज कपूर पहले ऐसे सेलिब्रिटी थे, जिन्होंने होली सेलिब्रेशन के लिए आरके स्टूडियो में पार्टी रखना शुरू किया। इनकी पार्टी में दो बड़े कंटेनर में पानी भरकर उनमें हर तरह के रंग मिलाए जाते थे। पार्टी में शामिल होने वाले गेस्ट को सबसे पहले इन कंटेनर में डाला जाता था और रंगने के बाद ही वो अंदर पार्टी में शामिल होते थे। इस पार्टी में उस दौर के हर छोटे-बड़े कलाकार को बुलाया जाता था। कई लोग तो इसे भांग एंड फूड फेस्टिवल तक कहते थे। 1988 में राज कपूर के निधन के बाद आरके स्टूडियो में होली पार्टी का जश्न फिर कभी नहीं मनाया गया। अमिताभ पर ही फिल्माए गए पिता के लिखे हुए दो होली सॉन्ग अमिताभ बच्चन पर फिल्माए गए दो होली के सदाबहार गाने ‘रंग बरसे’ और ‘होरी खेलें’ उनके पिता कवि हरिवंशराय बच्चन ने लिखे थे। ये दोनों गाने फिल्माए जाने से काफी सालों पहले से ही अमिताभ अपने पिता से सुनते आए थे। 1981 की फिल्म सिलसिला में रंग बरसे गाना भी एक इत्तेफाक का नतीजा है। यह गाना अमिताभ बच्चन, रेखा, जया बच्चन और संजीव कुमार पर फिल्माया गया था। दरअसल, ये गाना मीरा पर बने एक भजन से प्रेरित है, जिसके लिरिक्स “रंग बरसे ओ मीरन, भवन में रंग बरसे” से प्रेरित हैं। पिता से बचपन से ये भजन सुनते आए अमिताभ खुद भी इस भजन को अक्सर गुनगुनाते रहते थे। राज कपूर की होली पार्टी में जब यश चोपड़ा ने इसे सुना तो उन्हें ये इतना पसंद आया कि इसे फिल्म में लेने का फैसला किया। गाने ‘रंग बरसे’ के म्यूजिक डायरेक्टर शिव-हरि (पंडित शिवकुमार शर्मा और पंडित हरिप्रसाद चौरसिया) थे। ठीक ऐसा ही बागबान के गाने होरी खेले रघुबीरा के साथ हुआ। ये लोकगीत भी अक्सर हरिवंश राय बच्चन गुनगुनाते रहते थे, जो अमिताभ ने कई बार सुना था। जब बागबान फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर आदेश श्रीवास्तव ने अमिताभ से फिल्म के लिए एक होली के गाने का सुझाव मांगा तो उन्होंने यही गाना बताया। दोनों ने मिलकर इसे फाइनल किया और एक रात में इस गाने की रिकॉर्डिंग की। अमिताभ की होली पार्टी में मेहमानों को दी जाती थी भांग अमिताभ बच्चन भी अपने बंगले में होली की बड़ी पार्टी दिया करते थे। इनके बंगले में मेहमानों को भांग सर्व की जाती है। 2004 में बिग बी

खबर हटके- गधे पालने पर ₹50 लाख देगी सरकार:पत्नी ने घड़ी से पति का अफेयर पकड़ा; पिज्जा लेने निकली महिला करोड़पति बनी

खबर हटके- गधे पालने पर ₹50 लाख देगी सरकार:पत्नी ने घड़ी से पति का अफेयर पकड़ा; पिज्जा लेने निकली महिला करोड़पति बनी

केंद्र सरकार गधे पालने के लिए 50 लाख रुपए दे रही हैं। वहीं मलेसिया में एक महिला ने घड़ी की मदद से पति का पकड़ा है। उधर अमेरिका में एक महिला पिज्जा लेने के लिए निकली और रास्ते में कोड़पति बन गई। आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

Wife Holi Celebration Vs Husband; Suppress Desires – Silent Stress

Wife Holi Celebration Vs Husband; Suppress Desires - Silent Stress

Hindi News Lifestyle Wife Holi Celebration Vs Husband; Suppress Desires Silent Stress | Relationship 12 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक सवाल- होली मेरा सबसे फेवरेट त्योहार है। बचपन में हम सबसे ज्यादा खुशी और उत्साह से होली का इंतजार करते थे। पूरा परिवार और मोहल्ला इकट्ठा होकर होली खेलता था। मेरे दिल में होली की बहुत सुंदर यादें हैं। लेकिन जब से मेरी शादी हुई है, होली खेलना बिल्कुल बंद हो गया है। मेरे पति बहुत कंजरवेटिव इंसान हैं। उन्हें मेरा होली खेलना बिल्कुल पसंद नहीं है। मेरे ससुराल में कोई भी होली को लेकर एक्साइटेड नहीं रहता। होली खेलने का बहुत मन करता है, लेकिन हसबैंड के कारण मन मारकर रह जाती हूं। क्या करूं? पति से झगड़ा करूं या मन मारकर बैठी रहूं? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- सबसे पहले तो आपका शुक्रिया, क्योंकि आपका सवाल पढ़कर मेरी अपने बचपन की होली की सुंदर यादें ताजा हो गईं। अब आपकी बात। आपकी परेशानी सिर्फ एक त्योहार तक सीमित नहीं है, यह आपकी ‘खुशी के अधिकार’ का भी मामला है। होली कई लोगों के लिए यादों, रिश्तों और खुलकर जीने का एहसास है। आपके सवाल में जो सबसे खूबसूरत बात है, वह है आपका उस खुशी से जुड़ाव, बचपन की वो हंसी, रंगों में भीगा अपनापन और बिना किसी झिझक के जीने का मौका। यही वजह है कि आज जब वो सब नहीं मिल पा रहा, तो भीतर एक खालीपन महसूस हो रहा है। सबसे पहले मैं आपको यह बताना चाहूंगी कि आपकी भावना पूरी तरह जायज है। आप सिर्फ होली खेलना मिस नहीं कर रही हैं, बल्कि उस माहौल को मिस कर रही हैं जिसमें आप खुलकर जी पाती थीं। चलिए समझते हैं कि इस स्थिति को बिना झगड़े के कैसे संभाला जाए। इच्छाओं को दबाने से बनता है ‘साइलेंट स्ट्रेस’ शादी के बाद अक्सर महिलाएं अपने मन की इच्छाओं को ‘एडजस्टमेंट’ के नाम पर दबा देती हैं। शुरू में यह छोटा सा समझौता लगता है, लेकिन लंबे समय में यही दबाव अंदर-ही-अंदर फ्रस्ट्रेशन, उदासी और कभी-कभी गुस्से का रूप ले लेता है। जब आप बार-बार अपने मन को दबाती, रोकती हैं कि “चलो, इस बार नहीं खेलते, पति को पसंद नहीं है,” तो धीरे-धीरे आप खुद से दूर होने लगती हैं। साइकोलॉजी की भाषा में इसे ‘सेल्फ-सप्रेशन’ कहते हैं, जो मेंटल स्ट्रेस की मुख्य वजह बन सकता है। इसके क्या असर होते हैं, ग्राफिक में देखिए- आप मिस कर रही हैं ‘खुलकर जीने का एहसास’ आपको लग रहा होगा कि ये फ्रस्ट्रेशन होली में ‘रंग’ न खेल पाने की वजह से है, लेकिन असल में आप रंग नहीं, वो ‘आजादी का एहसास’ मिस कर रही हैं। जब आप अपनों के साथ मिलकर होली खेलती थीं, तो वो एक ऐसा माहौल होता था, जिसमें कोई जजमेंट नहीं था। सब हंसते थे, गले मिलते थे और बेफिक्र रहते थे। इस असली बात को समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि समाधान भी यहीं से निकलेगा। जब आप जान जाएंगी कि आपकी असली जरूरत क्या है, तो उसे पूरा करने के रास्ते भी साफ दिखने लगेंगे। ससुराल का माहौल अलग होना गलत नहीं आपके ससुराल में अगर कोई होली नहीं खेलता है, तो हो सकता है कि उनके घर में कभी ऐसा माहौल ही नहीं रहा हो। हर परिवार का ‘सेलिब्रेशन’ का तरीका अलग होता है। कुछ परिवारों के लिए त्योहार का मतलब सिर्फ अच्छा खाना और आराम करना होता है। हमें यह समझना होगा कि आपके पति या ससुराल वाले ‘बुरे’ नहीं हैं। बस उनका नजरिया अलग है। हो सकता है कि उनके पीछे कुछ वाजिब कारण हों। मायके जाने से हल हो सकती है समस्या आपने अपने सवाल में ही समाधान का संकेत दिया है कि आपके मायके में होली आज भी वैसी ही धूमधाम से खेली जाती है। यही सबसे सरल संतुलित रास्ता है। प्लानिंग करें: आप हर साल या हर दूसरे साल होली पर अपने मायके जाने का प्लान बना सकती हैं। वही पुराना माहौल: वहां आपको वही यादें और वही बेफिक्री दोबारा मिलेगी। बिना डर के खुशी: वहां आपको पति की नाराजगी या ससुराल के नियमों का डर नहीं रहेगा। रिश्ते में बैलेंस: इससे न तो आपको अपनी इच्छा दबानी पड़ेगी और न ही पति से सीधा टकराव होगा। पति से बात कैसे करें? झगड़ा करना या मन मारकर बैठना, दोनों ही एक्सट्रीम फैसले हैं। आपको बीच का रास्ता निकालना होगा। पति को यह न कहें कि “आप गलत हैं”, बल्कि यह कहें कि “होली मेरे लिए कितनी जरूरी है।” ऐसे बोलें, “मुझे पता है, आपको रंगों से परेशानी है और मैं उसका सम्मान करती हूं। लेकिन होली मेरे बचपन का सबसे प्यारा हिस्सा है। जब मैं नहीं खेलती, तो मुझे बहुत उदासी महसूस होती है। क्या इस बार मैं दो दिन के लिए मम्मी के घर जाकर होली खेल आऊं? इससे आपकी शांति भी बनी रहेगी और मेरी खुशी भी।” खुद को खोने मत दीजिए शादी के बाद अक्सर महिलाएं अपनी पहचान धीरे-धीरे खोने लगती हैं। वे भूल जाती हैं कि उनकी भी कुछ पसंद थी। याद रखिए, एक खुशहाल रिश्ता वही होता है, जहां दोनों पार्टनर अपनी व्यक्तिगत खुशियों को भी जगह दें। आपकी खुशियां, आपकी पसंद, आपकी छोटी-छोटी इच्छाएं उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, जितना आपका रिश्ता। अगर आप अंदर से खुश नहीं रहेंगी, तो आप एक अच्छी पत्नी या बहू की भूमिका भी लंबे समय तक नहीं निभा पाएंगी। झगड़ा नहीं, समझदारी से मिलता है समाधान आपकी समस्या का समाधान झगड़े में नहीं, बल्कि समझदारी में है। अपनी इच्छाओं को दबाइए मत, बल्कि उन्हें जीने का नया तरीका ढूंढिए। होली रंगों का त्योहार है, लेकिन उससे भी ज्यादा यह ‘दिल के रंगों’ का त्योहार है। इन रंगों को अपने जीवन से गायब मत होने दीजिए। इस बार होली पर अपने मायके जाने का प्लान बनाइए या पति को प्यार से अपनी भावनाओं का हिस्सा बनाइए। यकीन मानिए, जब आप अपनी खुशी की जिम्मेदारी खुद लेंगी, तो आपके चेहरे की मुस्कान ही आपके हर सवाल का सबसे सुंदर जवाब होगी। हेल्दी रिश्ते की 3 सीख एक-दूसरे की आदतों को स्वीकार करें। पार्टनर को अपनी पसंद की चीजें करने की आजादी दें। अपनी खुशी के लिए पार्टनर पर 100% निर्भर न