सेंसेक्स 900 अंक गिरकर 75,100 पर आया:निफ्टी में 300 अंकों की गिरावट, मेटल और बैंकिंग शेयर्स में सबसे ज्यादा बिकवाली

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के बीच शेयर बाजार में आज यानी 12 मार्च को लगातार तीसरे दिन भी गिरावट है। सेंसेक्स 900 अंक (1.20%) की गिरावट के साथ 75,100 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं निफ्टी में भी 300 अंक (1.40%) की गिरावट है, ये 23,300 पर आ गया है। आज मेटल और बैंकिंग शेयर्स में सबसे ज्यादा गिरावट है। FMCG शेयर्स में तेजी दिख रही है। बाजार गिरने की 3 मुख्य वजहें एशियाई बाजार अपडेट अमेरिकी बाजार में 12 मार्च को गिरावट रही कच्चा तेल 100 डॉलर के पार ट्रेड कर रहा ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आज तेजी है। ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है। इससे पहले 9 मार्च को ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर पर पहुंच गया था। कल सेंसेक्स 829 अंक गिरकर बंद हुआ था शेयर बाजार में में यानी 12 मार्च को लगातार दूसरे गिरावट रही थी। सेंसेक्स 829 अंक (1.08%) की गिरावट के साथ 76,034 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी में भी 228 अंक की गिरावट रही।
सभी देशों को रूसी तेल खरीदने की इजाजत:अमेरिका ने 30 दिन की छूट दी; ईरान ने क्रूड ऑयल 200 डॉलर पहुंचने की चेतावनी दी थी

अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग की वजह से दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर के पार चली गई हैं। इसे काबू में करने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने दूसरे देशों को भी रूस से तेल खरीदने की अस्थाई मंजूरी दे दी है। रूस के कई ऑयल टैंकर समुद्र में फंसे हैं। इससे पहले अमेरिका ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए प्रतिबंधों में ढील देने की बात कही थी। हालांकि, इस पर भारतीय अधिकारी कह चुके हैं कि भारत तेल खरीदने के लिए किसी भी देश की इजाजत पर निर्भर नहीं है। वहीं, ईरान चेतावनी दे चुका है कि कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर के पार पहुंच सकती हैं। सिर्फ समुद्र में फंसे जहाजों से तेल खरीदने की मंजूरी अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (वित्त मंत्रालय) ने गुरुवार को एक लाइसेंस जारी किया। इसके तहत उन रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की डिलीवरी और बिक्री की जा सकती है, जो 12 मार्च की रात 12:01 बजे से पहले जहाजों पर लोड हो चुके थे। यह छूट सिर्फ 11 अप्रैल तक के लिए दी गई है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बताया कि इसका मकसद दुनियाभर में तेल की सप्लाई बढ़ाना है, ताकि बढ़ती कीमतों पर लगाम लग सके। अमेरिका ने कहा- रूस को ज्यादा फायदा नहीं होगा अमेरिका के ट्रेजरी मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि राष्ट्रपति ट्रम्प वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह एक शॉर्ट-टर्म फैसला है और इससे रूस को कोई बहुत बड़ा आर्थिक फायदा नहीं होगा। बेसेंट के मुताबिक रूस की कमाई का बड़ा हिस्सा तेल निकालने के वक्त लगने वाले टैक्स से आता है, जबकि यह छूट सिर्फ उस तेल के लिए है, जो पहले से ही ट्रांजिट (रास्ते) में है। क्यों बदला अमेरिका का मन? 2 मुख्य वजहें 1. होर्मुज रूट से सप्लाई ठप: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जंग से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में सप्लाई ठप हो गई है। यहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। भारत जैसे देश अपनी जरूरत का करीब आधा तेल इसी रास्ते से मंगाते हैं। 2. 200 डॉलर पहुंच सकता है कच्चा तेल: पिछले कुछ दिनों में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं। ईरान ने चेतावनी दी है कि कीमतें 200 डॉलर तक पहुंच सकती है। ऐसे में रूसी तेल बाजार में आने से सप्लाई बढ़ेगी, जिससे कीमतों में गिरावट आएगी। 2022 में अमेरिका ने लगाई थी रूसी तेल पर रोक जब फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, तो पश्चिमी देशों का मानना था कि युद्ध के लिए पैसा रूस को तेल और गैस बेचकर मिल रहा है। इसी ‘फंडिंग’ को रोकने के लिए अमेरिका और यूरोप ने रूस से तेल खरीदने पर पाबंदी लगानी शुरू की थी। कच्चा तेल 101 डॉलर प्रति बैरल पार मिडिल ईस्ट में एनर्जी सप्लाई और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हाल ही में हुए हमलों के बाद फिर से कच्चे तेल की कीमतों में 9% से ज्यादा की तेजी आई है। इस उछाल के साथ ही तेल का दाम एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया है। बाजारों को सामान्य रखने के लिए स्ट्रैटजिक रिजर्व यानी आपातकालीन भंडार से रिकॉर्ड मात्रा में तेल निकालने का फैसला किया गया है, लेकिन इस फैसले पर भी सप्लाई रुकने का डर भारी पड़ गया है। 167 किमी लंबा जलमार्ग है होर्मुज ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है। ————————— ये खबर भी पढ़ें… गांवों में 45 दिन बाद मिलेगा दूसरा घरेलू LPG सिलेंडर: जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने 20 दिन समय बढ़ाया; MP में ऑनलाइन बुकिंग ठप अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत हो गई है। गैस एजेंसियों के बाहर लम्बी लाइनें हैं। गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी भी हो रही है, जिसे रोकने के लिए सरकार ने बुकिंग के नियमों में फिर से बदलाव किया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर लेने के बाद अगला सिलेंडर 45 दिन बाद बुक किया जा सकेगा। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में बताया कि यह फैसला सप्लाई को बेहतर तरीके से मैनेज करने और बेवजह होने वाली ‘पैनिक बुकिंग’ को रोकने के लिए किया है। पूरी खबर पढ़ें…
Nawazuddin Siddiqui Visits Ancestral Village Buledhana, Buys Land

मुजफ्फरनगर15 घंटे पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने मुजफ्फरनगर के तहसील ऑफिस पहुंचकर रजिस्ट्री कराई। बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने यूपी के मुजफ्फरनगर में अपने पैतृक गांव में 55 बीघा कृषि भूमि की रजिस्ट्री कराई है। इसकी कीमत करीब छह करोड़ रुपए बताई जा रही है। नवाजुद्दीन ने सात व्यक्तियों से यह जमीन खरीदी है। नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने तीन साल पहले अपनी जमीन अपने भाइयों के नाम कर दी थी। तब कयास लगाए गए थे कि वह अब मुंबई में ही रहेंगे। गुरुवार को नवाजुद्दीन अपने फिल्म प्रोड्यूसर भाई फैजुद्दीन सिद्दीकी के साथ तहसील पहुंचे थे। सब-रजिस्ट्रार पंकज कुमार ने अभिनेता से कागजों पर हस्ताक्षर कराकर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कराई। जमीन बुढ़ाना बांगर क्षेत्र में है। नवाजुद्दीन के तहसील पहुंचने की जानकारी मिलते ही प्रशंसकों की भीड़ जुट गई। उन्होंने प्रशंसकों से मुलाकात की और तस्वीरें भी खिंचवाईं। सूत्रों के अनुसार, नवाजुद्दीन ईद तक अपने पैतृक गांव में ही रुक सकते हैं। नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा- जमीन का मामला था। सबकुछ अच्छे से हो गया। नवाजुद्दीन बोले- तीन साल बाद गांव आकर अच्छा लगा नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा- जमीन का मामला था। सबकुछ अच्छे से हो गया। फिल्म केरला स्टोरी-2 को लेकर उन्होंने कहा, मैनें तो नहीं देखी, लेकिन देखेंगे। करीब तीन साल बाद गांव वापस आया हूं। गांव में आना हमेशा ही अच्छा लगता है। कुछ दोस्त जो अब बड़े हो गए हैं। उन्हें पहचानने में मुश्किल होती है। लेकिन जब पहचान लेता हूं तो उनके साथ कुछ समय बिताने में मजा आता है। उन्होंने अपनी आने वाली फिल्मों के बारे में जानकारी दी। कुछ ही समय में 4-5 फिल्में रिलीज होनी हैं। हालांकि, नाम और रिलीज डेट को लेकर कोई बात नहीं की। नवाजुद्दीन सिद्दीकी सब-रजिस्ट्रार ऑफिस पहुंचे और कागजों पर सिग्नेचर किए। भाई बोले- नवाज को मिट्टी से प्यार नवाजुद्दीन के भाई फिल्म प्रोड्यूसर फैजुद्दीन ने बताया कि पहले की एक पुरानी जमीन थी, जिसे खरीदने के लिए आए थे। इसे हमने बहुत पहले अपने मित्र और पारिवारिक संबंधों वाले व्यक्ति से ले लिया था और पेमेंट भी कर दिया था, लेकिन उस समय बैनामा नहीं हो सका क्योंकि काम में व्यस्त थे। अब सोचा कि एक-दो दिन में जाकर अपना काम निपटा लें। नवाज भाई भी जमीन से जुड़े हैं और खेती में रुचि रखते हैं। यह उनकी आदत है, क्योंकि पहले जब पिता के पास जमीनें थीं, तब भी उन्होंने खेती की थी। उन्हें मिट्टी से प्यार है और इसमें काम करना पसंद है। नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने तीन साल पहले अपनी जमीन अपने भाइयों के नाम कर दी थी। नवाजुद्दीन के भाई फैजुद्दीन ने बताया कि पहले की एक पुरानी जमीन थी, जिसे खरीदने के लिए आए थे। नवाजुद्दीन सिद्दीकी के अभिनेता बनने की कहानी पढ़िए नवाजुद्दीन सिद्दीकी का जन्म 19 मई 1974 को मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना कस्बे में एक किसान परिवार में हुआ। वह नौ भाई-बहनों वाले बड़े परिवार में पले-बढ़े। उनके गांव का माहौल बेहद साधारण था। वहां मनोरंजन के साधन भी बहुत कम थे। नवाजुद्दीन बचपन में रामलीला और छोटे-मोटे मंचीय कार्यक्रम देखकर अभिनय से प्रभावित हुए। कॉलेज से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन करने के बाद नवाजुद्दीन ने वडोदरा में केमिस्ट की नौकरी की। यहां उन्होंने पहली बार थिएटर का नाटक देखा और अभिनय करने का विचार आया। इसके बाद नौकरी छोड़कर दिल्ली पहुंचे और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में दाखिला लिया। NSD से पढ़ाई पूरी करने के बाद नवाजुद्दीन मुंबई पहुंचे। फिल्मों में काम मिलने से पहले उन्होंने गुजारा चलाने के लिए वॉचमैन की नौकरी भी की। मुंबई में शुरुआती दौर में नवाजुद्दीन को फिल्मों में बहुत छोटे-छोटे रोल मिले। नवाजुद्दीन को शुरुआती पहचान फिल्म सरफरोश में छोटे से रोल से मिली। इस फिल्म में उन्होंने एक छोटे क्रिमिनल/इन्फॉर्मर का किरदार निभाया था। इसके बाद अनुराग कश्यप की फिल्म ब्लैक फ्राइडे नवाजुद्दीन सिद्दीकी के करियर का अहम मोड़ साबित हुई। इस फिल्म में उनका किरदार छोटा था, लेकिन उनके अभिनय ने दर्शकों और फिल्म समीक्षकों का ध्यान खींचा। इसके बाद इंडस्ट्री में उनके काम की चर्चा शुरू हुई और उन्हें बेहतर भूमिकाएं मिलने लगीं। नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने 55 बीघा कृषि भूमि की रजिस्ट्री कराई है। पत्नी पर कराया था 100 करोड़ का मानहानि केस नवाजुद्दीन सिद्दीकी अपनी पूर्व पत्नी आलिया सिद्दीकी से जुड़े विवादों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। उन्होंने अपने भाई और पूर्व पत्नी आलिया सिद्दीकी पर 100 करोड़ रुपए का मानहानि केस किया था। इसके तहत नवाजुद्दीन ने हर्जाने और लिखित माफी की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि मेरे भाई और आलिया ने सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो के जरिए उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया। मेरे भाई ने मैनेजर के तौर पर मेरे बैंक खातों और फंड का दुरुपयोग कर 21 करोड़ रुपए की हेराफेरी की और संपत्तियां अपने नाम कर लीं। इसके अलावा नवाजुद्दीन ने आलिया पर प्रोडक्शन हाउस के लिए दिए गए पैसों का निजी इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया था। नवाजुद्दीन सिद्दीकी मुजफ्फरनगर में अपने प्रशंसकों से भी मिले और हाथ मिलाया। हालांकि, 10 अक्टूबर 2025 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले को ‘नॉन-प्रोसीक्यूशन’ के आधार पर खारिज कर दिया, क्योंकि नवाजुद्दीन और उनके वकील कई बार बुलाए जाने के बावजूद कोर्ट में पेश नहीं हुए थे। इस पर विपक्ष के वकील ने तर्क दिया कि यह मुकदमा केवल दबाव बनाने की रणनीति था। नवाजुद्दीन इसे वास्तविक रूप से आगे बढ़ाने में रुचि नहीं रखते थे। नवाजुद्दीन सिद्दीकी की पत्नी आलिया ने उन पर बलात्कार और घरेलू हिंसा के आरोप लगाए थे। उन्होंने बच्चों की अनदेखी का भी आरोप लगाया था। आलिया ने नवाजुद्दीन पर बलात्कार, घरेलू हिंसा और बच्चों की अनदेखी जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। साल 2023 में आलिया ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर दावा किया था कि नवाजुद्दीन ने उन्हें और बच्चों को आधी रात घर से बाहर निकाल दिया। हालांकि, मार्च 2024 में आलिया ने सोशल मीडिया पर बताया कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए उन्होंने और नवाजुद्दीन ने आपसी मतभेद खत्म कर सुलह कर ली है। ———————————————– ये खबर भी पढ़ेंः- वॉचमैन की नौकरी की, कभी धनिया बेची:फिल्मों में 1-2 मिनट के छोटे रोल किए; आज बॉलीवुड के सबसे दमदार अभिनेता बन गए नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी छोटे से कस्बे बुधाना
ज्वेरेव पहली बार इंडियन वेल्स के सेमीफाइनल में:ATP मास्टर्स के सभी 9 इवेंट्स में आखिरी-4 खेलने वाले पांचवें खिलाड़ी बने

जर्मनी के टेनिस खिलाड़ी एलेक्जेंडर ज्वेरेव ने गुरुवार को इंडियन वेल्स मास्टर्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए पहली बार सेमीफाइनल में जगह बना ली। उन्होंने क्वार्टर फाइनल में आर्थर फिल्स को 6-2, 6-3 से हराया। इस जीत के साथ ज्वेरेव ATP मास्टर्स-1000 के सभी नौ टूर्नामेंट में सेमीफाइनल खेलने वाले सिर्फ पांचवें खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले राफेल नडाल, नोवाक जोकोविच, रोजर फेडरर और एंडी मरे यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। बिग फोर के क्लब में शामिल इस उपलब्धि के साथ ज्वेरेव ‘बिग फोर’ यानी रोजर फेडरर, राफेल नडाल, नोवाक जोकोविच और एंडी मरे के चुनिंदा खिलाड़ी क्लब में शामिल हो गए हैं। ज्वेरेव ने कहा,’इतिहास में ऐसा करने वाले सिर्फ पांच खिलाड़ियों में शामिल होना मेरे लिए बहुत खास है। यह ऐसी उपलब्धि है जिस पर मुझे गर्व है।’ मास्टर्स खिताब जीत चुके हैं ज्वेरेव अब तक नौ में से पांच मास्टर्स 1000 टूर्नामेंट जीत चुके हैं। हालांकि, वह अभी तक कोई ग्रैंड स्लैम खिताब नहीं जीत पाए हैं, जबकि तीन बार फाइनल तक पहुंच चुके हैं। सेमीफाइनल में सिनर से मुकाबला सेमीफाइनल में ज्वेरेव का मुकाबला इटली के वर्ल्ड नंबर-2 जेनिक सिनर से होगा। सिनर के खिलाफ ज्वेरेव का रिकॉर्ड थोड़ा कमजोर रहा है और वह लगातार पांच मैच हार चुके हैं। सिनर ने क्वार्टरफाइनल में अमेरिकी खिलाड़ी लर्नर टिएन को सिर्फ 66 मिनट में 6-1, 6-2 से हराया। सिनर अभी तक इंडियन वेल्स का खिताब नहीं जीत पाए हैं और इस साल अपना पहला खिताब जीतने की कोशिश में हैं। इससे पहले वह ऑस्ट्रेलियन ओपन के सेमीफाइनल और कतर ओपन के क्वार्टरफाइनल में हारकर बाहर हो गए थे। क्या है एटीपी मास्टर्स 1000 का ‘सेट’? टेनिस में ग्रैंड स्लैम के बाद मास्टर्स 1000 टूर्नामेंट सबसे प्रतिष्ठित माने जाते हैं। एक साल में कुल 9 ऐसे टूर्नामेंट होते हैं-इंडियन वेल्स, मियामी, मोंटे कार्लो, मैड्रिड, रोम, कनाडा, सिनसिनाटी, शंघाई और पेरिस। इन सभी टूर्नामेंट के सेमीफाइनल तक पहुंचना किसी खिलाड़ी की निरंतरता और उच्च स्तर के प्रदर्शन को दर्शाता है। ज्वेरेव ने इंडियन वेल्स के सेमीफाइनल में पहुंचकर अपना यह ‘सेट’ पूरा कर लिया है। ———————————————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… भारतीय फ्रेंचाइजी सनराइजर्स लीड्स ने पाकिस्तानी क्रिकेटर को खरीदा:अबरार अहमद पर काव्या मारन ने ₹2.34 करोड़ की बोली लगाई; द हंड्रेड लीग में खेलेंगे भारतीय मालिकाना हक वाली फ्रेंचाइजी सनराइजर्स लीड्स ने गुरुवार को पाकिस्तान के मिस्ट्री स्पिनर अबरार अहमद पर बोली लगाई। सनराइजर्स की CEO काव्या मारन ने खुद उन्हें 1.90 लाख पाउंड (करीब 2.34 करोड़ रुपए) में खरीदा। इसी के साथ अबरार 21 जुलाई से शुरू हो रही द हंड्रेड लीग में किसी भारतीय मालिकाना हक वाली फ्रेंचाइजी से जुड़ने वाले पहले पाकिस्तानी खिलाड़ी बन गए। पूरी खबर
रिकॉर्ड्स और अनुस्मारक के बीच: कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद के लिए शांत लड़ाई | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 13, 2026, 08:00 IST मई 2023 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद से, व्यापक अटकलें बनी हुई हैं कि सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच सत्ता-साझाकरण की व्यवस्था मौजूद है। फिलहाल, दोनों नेता नाजुक संतुलन का काम कर रहे हैं। सिद्धारमैया शासन और निरंतरता पर जोर देते हैं, जबकि शिवकुमार संगठनात्मक निष्ठा और धैर्य पर जोर देते हैं। (फ़ाइल छवि) राजनीति में रिकॉर्ड शायद ही कभी सिर्फ रिकॉर्ड बनकर रह जाते हैं। वे संकेत हैं. वे संदेश हैं. और कभी-कभी उन्हें चेतावनी के रूप में भी समझा जाता है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इसे अन्य लोगों से बेहतर जानते हैं। अपना रिकॉर्ड 17वां राज्य बजट पेश करने के बाद, सिद्धारमैया ने चुपचाप अपना नाम कर्नाटक के राजनीतिक इतिहास में गहराई से दर्ज करा दिया – वह राज्य में सबसे ज्यादा बजट पेश करने वाले नेता बन गए। यह महज़ एक आँकड़ा नहीं है. यह एक राजनीतिक व्यवस्था में दीर्घायु, अनुभव और अधिकार की याद दिलाता है जहां जीवित रहना ही एक उपलब्धि है। लेकिन जैसे ही अनुभवी मुख्यमंत्री इस क्षण का आनंद ले रहे थे, बेंगलुरु में एक और राजनीतिक मील का पत्थर सामने आ रहा था। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष के रूप में छह साल पूरे कर लिए हैं – एक ऐसा कार्यकाल जो उन्हें सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले राज्य कांग्रेस प्रमुखों में से एक बनाता है, गृह मंत्री डॉ जी परमेश्वर के बाद दूसरे स्थान पर हैं, जिन्होंने आठ साल तक इस पद पर रहे। दो मील के पत्थर. दो नेता. दो राजनीतिक संदेश. और दोनों के ऊपर वह अनसुलझा सवाल मंडरा रहा है जो 2023 में सत्ता में आने के दिन से ही कांग्रेस सरकार पर छाया हुआ है: आख़िरकार शेष कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा? सबटेक्स्ट के साथ एक बधाई संदेश शिवकुमार को बधाई देने वाला सिद्धारमैया का सार्वजनिक संदेश भले ही सूक्ष्म रूप में देखा गया हो, लेकिन राजनीतिक रूप से सही किया गया था। मुख्यमंत्री ने एक्स पर लिखा, “केपीसीसी अध्यक्ष के रूप में छह साल पूरे करने पर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को बधाई।” उन्होंने राज्य में कांग्रेस पार्टी के पुनर्निर्माण में शिवकुमार के संगठनात्मक कौशल, वैचारिक प्रतिबद्धता और अथक परिश्रम की प्रशंसा की। सिद्धारमैया ने कहा, “झूठे मामलों के माध्यम से विपक्षी भाजपा द्वारा परेशान किए जाने के बावजूद, शिवकुमार पार्टी के प्रति वफादार रहे।” उन्होंने कहा कि ऐसी वफादारी पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा है। दोनों नेताओं की शारीरिक भाषा की तुलना में प्रशंसा उदार और बहुत अलग थी। लेकिन यह वह पंक्ति थी जो गहरे राजनीतिक अर्थ रखती है: “शिवकुमार, जो मुझसे छोटे हैं, का राजनीतिक भविष्य उज्ज्वल है।” राजनीतिक भाषा में कहें तो यह वाक्य एक साथ कई बातें कह गया. इसमें शिवकुमार के कद को स्वीकार किया गया और उनके योगदान की सराहना की गई, लेकिन यह भी सार्वजनिक रूप से सार्वजनिक डोमेन में रखा गया कि उन्होंने शिवकुमार के अंतिम राजनीतिक गंतव्य को कैसे देखा – समय से कहीं आगे, जरूरी नहीं कि तत्काल वर्तमान में। मैसेजिंग से भरपूर एक उत्सवपूर्ण रात्रिभोज केपीसीसी प्रमुख के रूप में छह साल पूरे होने के अवसर पर विधायकों और पार्टी नेताओं के लिए शिवकुमार द्वारा आयोजित रात्रिभोज आधिकारिक तौर पर संगठनात्मक नेतृत्व का उत्सव था। हालाँकि, राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने इस उप-पाठ को कर्नाटक की राजनीति में कुछ अधिक परिचित चीज़ के रूप में पढ़ा – शक्ति का प्रदर्शन। केपीसीसी अध्यक्ष के रूप में शिवकुमार की यात्रा कठिन परिस्थितियों में शुरू हुई। जब उन्होंने 2020 में पार्टी संगठन की कमान संभाली, तो कर्नाटक में कांग्रेस आंतरिक विभाजन, दलबदल और चुनावी असफलताओं से जूझ रही थी। उनके सामने कार्य एक हतोत्साहित संगठन का पुनर्निर्माण करना था, जिसे उन्होंने जिम्मेदारी, समर्पण और कार्रवाई योग्य निर्णयों के साथ किया। अगले तीन वर्षों में, शिवकुमार ने पार्टी की जमीनी स्तर की मशीनरी को पुनर्जीवित करने में भारी ऊर्जा लगाई। एक बिंदु पर, उन्होंने इस संवाददाता से कहा कि वह आरएसएस की संगठनात्मक क्षमताओं से प्रेरित हैं और कर्नाटक कांग्रेस के भीतर ताकतों को मजबूत करने के लिए उनके मंत्र का उपयोग करेंगे। जब कांग्रेस 2023 के विधानसभा चुनावों में सत्ता में लौटी, तो जीत का श्रेय सिद्धारमैया की AHINDA पकड़ और लोकप्रियता के साथ-साथ शिवकुमार के संगठनात्मक कार्यों को एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में दिया गया। 136 विधायकों के साथ कांग्रेस की यह प्रचंड जीत थी जिसने पार्टी के कुछ वर्गों के भीतर एक कहानी को मजबूत किया: शिवकुमार के समर्थकों ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए अपना दावा अर्जित कर लिया है। उत्तराधिकार का अनसुलझा प्रश्न मई 2023 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद से, व्यापक अटकलें बनी हुई हैं कि सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच सत्ता-साझाकरण की व्यवस्था मौजूद है। क्या इसका अस्तित्व था? शिवकुमार के समर्थकों को छोड़कर किसी भी कांग्रेसी ने किसी भी सार्वजनिक मंच पर इसकी पुष्टि नहीं की है। उस बैठक में केवल पाँच व्यक्ति शामिल हुए थे, और केवल वे ही जानते थे कि भीतर क्या हुआ। इस कथा के अनुसार, शिवकुमार को सत्ता सौंपने से पहले सिद्धारमैया सरकार के कार्यकाल के पहले भाग के दौरान मुख्यमंत्री के रूप में काम करेंगे – लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने कभी भी सार्वजनिक रूप से इस तरह के समझौते की पुष्टि नहीं की है। सिद्धारमैया ने बार-बार इसके अस्तित्व से इनकार किया है और कहते हैं कि वह आलाकमान के निर्देश के अनुसार काम करेंगे। इस बीच, देश भर में राजनीतिक घटनाक्रम और तमिलनाडु और केरल में महत्वपूर्ण चुनावों को ध्यान में रखते हुए आलाकमान कोई निर्णय लेने के मूड में नहीं है। फिर भी अटकलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इसका कारण पार्टी के भीतर ही शक्ति संतुलन है। सिद्धारमैया कर्नाटक में कांग्रेस के सबसे अनुभवी और चुनावी तौर पर परखे हुए नेता हैं। पिछड़े वर्गों और ग्रामीण मतदाताओं के बीच उनका जनाधार जबरदस्त बना हुआ है। दूसरी ओर, शिवकुमार संगठनात्मक नियंत्रण, वित्तीय संसाधनों और पार्टी संरचना के भीतर गहरे प्रभाव का प्रतिनिधित्व करते हैं। परिणाम एक नाजुक व्यवस्था थी: सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने, जबकि शिवकुमार को उप मुख्यमंत्री और केपीसीसी अध्यक्ष नियुक्त किया गया। लेकिन ऐसी व्यवस्थाएँ शायद ही कभी महत्वाकांक्षा को ख़त्म करती हैं; वे बस इसे स्थगित
मेरी हालत भी राजपाल यादव जैसी होगी:मोनालिसा के फिल्म डायरेक्टर बोले- फिल्म रिलीज कैसे करूं, मेरी हीरोइन का ही धर्मांतरण हो गया

मोनालिसा- उसे नहीं पता उसकी जिंदगी में तूफान आने वाला है। कुंभ गर्ल के नाम से मशहूर हुई मोनालिसा पर ही ये डायलॉग फिल्माया गया है।’ द डायरी ऑफ मणिपुर’ फिल्म के इस टीजर डायलॉग की तरह ही मोनालिसा की जिंदगी में अब तूफान आ गया है। ये तूफान उसी की मर्जी से आया है। दरअसल, मोनालिसा ने फरमान खान नाम के युवक से केरलम प्रदेश में दो दिन पहले शादी कर ली है। इससे न सिर्फ महेश्वर निवासी उनके पिता जय सिंह भोंसले नाराज हैं, बल्कि द डायरी ऑफ मणिपुर फिल्म के डायरेक्टर सनोज मिश्रा तो यहां तक कह रहे कि अब उनकी हालत राजपाल यादव जैसी हो जाएगी, क्योंकि फिल्म के लिए उन्होंने बाजार से 10 करोड़ का लोन लिया है। मिश्रा के मुताबिक, फिल्म धर्मांतरण के खिलाफ थी और मोनालिसा ने मुस्लिम युवक से शादी कर खुद धर्मांतरण जैसा ही कर लिया है। भास्कर से बातचीत में सनोज ने कहा कि अब समझ में नहीं आ रहा कि फिल्म कैसे रिलीज करूं। भास्कर से सनोज की एक्सक्लूसिव बातचीत… आपको पहली बार कब पता चला कि उन्होंने शादी कर ली है? सनोज: कल दोपहर किसी ने मुझे एक खबर भेजकर पूछा कि क्या यह सच है। पहले मुझे लगा कि वह फिल्म की शूटिंग के लिए गई है, इसलिए शायद यह कोई मीडिया स्टंट होगा। जब माहौल बिगड़ने लगा तो मैंने उसके पिता से बात की। उस समय वह केरलम के एक पुलिस स्टेशन के बाहर खड़े थे और मोनालिसा अंदर थी। मैंने कहा कि मेरी बात करा दीजिए, ताकि मैं उसे समझा सकूं, लेकिन पुलिस ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। बाद में पता चला कि पुलिस उसे पीछे के दरवाजे से कहीं और ले गई, तभी मुझे लगा कि मामला गंभीर है। क्या आपको उनके केरलम जाने के बारे में पहले से पता था? सनोज: करीब एक हफ्ते पहले उसने बताया था कि उसे केरलम जाना है। पूछने पर कहा कि वहां एक फिल्म साइन की है, जिसमें वह कैप्टन का रोल करेगी। उसके पिता को भी फिल्म में पिता का रोल देने का लालच दिया गया था। 10 दिन की ट्रेनिंग और फिर शूटिंग का झांसा देकर उसे वहां बुलाया गया। मैंने समझाया भी था कि जब तुम्हें हिंदी ठीक से नहीं आती तो मलयालम या तमिल कैसे बोलोगी। वहां हमारा कोई सर्कल भी नहीं है। उसके पिता को भी किसी साजिश का अंदेशा नहीं था। फिल्म डायरेक्टर सनोज मिश्रा के साथ मोनालिसा मोनालिसा का कहना है कि उनके पिता उनकी शादी बुआ के लड़के से कराना चाहते थे, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया? सनोज: मुझसे कभी ऐसी कोई बात नहीं हुई। दो महीने पहले तक हम शूटिंग कर रहे थे। मैं उसके लिए परिवार जैसा था, अगर ऐसी कोई बात होती तो जरूर बताती। मान भी लें कि ऐसी स्थिति थी तो भी इस तरह का कदम उठाने की क्या जरूरत थी? इससे मेरा बहुत नुकसान हुआ है। दो साल की मेहनत, 10 करोड़ का कर्ज और दो महीने जो जेल में रहा- वो सब दांव पर लग गया। अब इस माहौल में मेरी फिल्म कौन देखेगा? मेरी फिल्म धर्मांतरण के खिलाफ थी। अब हीरोइन ने ही धर्मांतरण कर लिया। किस मुंह से फिल्म रिलीज करूंगा? क्या आप उस लड़के को जानते हैं? क्या वह कभी शूटिंग पर आया था? सनोज: मैं उससे कभी नहीं मिला। किसी ने उसे शूटिंग पर नहीं देखा। मुझे लगता है कि यह सब एक सोची-समझी प्रक्रिया के तहत हुआ है, जिसमें लड़की को ब्रेनवॉश कर अपने ही घरवालों को गलत साबित कर दिया जाता है। आपकी फिल्म तो लगभग तैयार है। अब फिल्म को लेकर क्या योजना है? सनोज: अभी कुछ कहना मुश्किल है। कल तक मुझे गर्व था कि मैंने एक गरीब लड़की को मौका दिया, लेकिन अब वह भावना खत्म हो गई है। 10 करोड़ का कर्ज है और बदनामी अलग हो गई है। मोनालिसा का कहना है कि उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज से शादी की है, धर्म परिवर्तन नहीं किया, आप क्या कहेंगे इस बारे में? सनोज: मुझे यह बात समझ नहीं आती, अगर किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति से शादी की है तो आगे क्या होगा? फिलहाल, जो बातें सामने आ रही हैं, उससे विवाद और बढ़ गया है। बॉलीवुड में हिंदू-मुस्लिम कपल होना आम बात है। क्या आप इसे उसी नजरिए से नहीं देखते? सनोज: वह बॉलीवुड का हिस्सा नहीं थी। वह गांव के माहौल से आई थी। कभी मुंबई भी नहीं गई। इसलिए बॉलीवुड की जीवन शैली या माहौल की तुलना यहां लागू नहीं होती। आपके सामने आगे की सबसे बड़ी चुनौती क्या है? सनोज: सबसे बड़ी समस्या 10 करोड़ का कर्ज है। मैंने यह पैसा आठ महीने के लिए लिया था, जिसमें से अब सिर्फ तीन महीने बचे हैं, अगर समय पर पैसा नहीं चुका पाया तो कानूनी कार्रवाई हो सकती है। दोनों कह रहे हैं कि वे शूटिंग के दौरान मिले थे, क्या यह सच है? सनोज: मेरी जानकारी में शूटिंग के दौरान ऐसा कुछ नहीं हुआ, जो बातें कही जा रही हैं, वह मुझे सही नहीं लगतीं। आपने एक्टिंग सिखाने में कितनी मेहनत की? सनोज: जितनी मेहनत मुझे अपने 35 साल के करियर में कभी नहीं करना पड़ी, उतनी मेहनत इस फिल्म में लगी। उसे अभिनय सिखाने के लिए मुझे खुद कई चीजें करके दिखाना पड़ती थीं। मुझे उम्मीद नहीं थी कि हालात इस तरह बदल जाएंगे। मैंने उसकी ट्रेनिंग में सवा साल में 42 लाख रुपए लगाए हैं। उसे घर से दूर न रहना पड़े, इसलिए पूरे परिवार सहित उज्जैन में ठहराया। मुंबई से ट्रेनर बुलाए थे। अगर वह वापस आए तो क्या आप उसे स्वीकार करेंगे? सनोज: अब चीजें बहुत आगे निकल चुकी हैं। मेरे लिए सबसे बड़ी चिंता फिलहाल कर्ज और भविष्य की है, जिस लड़की को मैं घर से बेटी की तरह लेकर लाया, उसे फर्श से अर्श तक पहुंचाने के लिए अपनी पूरी जमा पूंजी दांव पर लगा दी, उसी ने मेरा भरोसा और भविष्य दोनों मटियामेट कर दिया। मोनालिसा के पिता ने मीडिया को बताया केरलम में क्या हुआ… फिल्म के लिए बुलाया, बाद में प्रोजेक्ट रद्द मोनालिसा के पिता जय सिंह ने बताया कि वे पहले फरमान से मिले थे। उस समय
सभी देशों को रूसी तेल खरीदने की छूट:अमेरिका ने जंग की वजह से 30 दिन की रियायत दी; कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर पार

अमेरिका ने दुनिया भर के देशों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दे दी है। यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि ईरान जंग की वजह से दुनिया में ऑयल सप्लाई पर असर पड़ रहा है। इस छूट के तहत देश सीमित मात्रा में रूसी तेल खरीद सकेंगे। अमेरिका का कहना है कि इससे बाजार में ऑयल सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों को कंट्रोल रखने में मदद मिलेगी। जंग की वजह से कच्चे तेल की कीमत भी 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो अगस्त 2022 के बाद पहली बार हुआ है। युद्ध की वजह से ग्लोबल ऑयल मार्केट में चिंता बढ़ गई है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह इजाजत सिर्फ उस रूसी तेल के लिए है जो पहले से जहाजों में लोड होकर समुद्र में फंसा हुआ है। इसका मकसद बाजार में सप्लाई बढ़ाना है। इराक में अमेरिकी प्लेन क्रैश, शिया गुट ने जिम्मेदारी ली इराक में अमेरिकी सेना का एक KC-135 सैन्य विमान क्रैश हो गया है। इसके बाद इराक के एक विद्रोही गुट ने दावा किया है कि विमान को उसी ने मार गिराया। इससे पहले 2 मार्च को कुवैत में फ्रेंडली फायरिंग में भी तीन अमेरिका विमान क्रैश हो गए थे। ‘इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक’ नाम के संगठन ने कहा कि उसके लड़ाकों ने पश्चिमी इराक में अमेरिकी विमान पर एयर डिफेंस सिस्टम से हमला किया, जिससे वह गिर गया। यह संगठन ईरान समर्थित कई गुटों का गठबंधन है। हालांकि अमेरिकी सेना ने इस दावे को गलत बताया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक दो अमेरिकी विमानों से जुड़ी एक घटना हुई थी। इसमें एक विमान पश्चिमी इराक में क्रैश हो गया, जबकि दूसरा विमान सुरक्षित रूप से इजराइल में उतर गया। अमेरिकी सेना का कहना है कि विमान किसी हमले या गोलीबारी की वजह से नहीं गिरा। सेना के मुताबिक हादसा ऐसे इलाके में हुआ जिसे वह फ्रेंडली एयरस्पेस कहती है। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी 3 तस्वीरें… अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
Neemuch BJP Appoints New Media & IT Team

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नीमच जिला इकाई ने गुरुवार शाम को अपनी नई टीम का ऐलान कर दिया है। जिलाध्यक्ष वंदना खंडेलवाल ने संगठन के कामकाज में तेजी लाने के लिए मीडिया, आईटी और सोशल मीडिया विभागों में नई नियुक्तियां की हैं। . पार्टी ने संचार और डिजिटल मोर्चे को मजबूत करने के लिए अनुभवी कार्यकर्ताओं को कमान सौंपी है- मीडिया विभाग मनोज महेश्वरी को जिला मीडिया प्रभारी बनाया गया है, जबकि शुभम शर्मा सह प्रभारी की जिम्मेदारी संभालेंगे। आईटी सेल विकास नामदेव को जिला आईटी सेल का प्रभारी नियुक्त किया गया है। उनके साथ निशांत अंब और केतन खंडेलवाल सह प्रभारी होंगे। सोशल मीडिया आदित्य लसोड को जिला प्रभारी बनाया गया है, वहीं अमन दीवान और नितिन श्रीमाल को सह प्रभारी बनाया गया है। बड़े नेताओं की सहमति से हुआ चयन ये नियुक्तियां प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, संभाग प्रभारी सुरेश आर्य और जिला प्रभारी सुभाष पटेल के मार्गदर्शन में की गई हैं। पार्टी का मकसद सरकार की योजनाओं और अपनी विचारधारा को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए हर घर तक पहुंचाना है। नई सूची जारी होते ही कार्यकर्ताओं ने पदाधिकारियों को बधाई देना शुरू कर दिया है। भाजपा नेताओं को भरोसा है कि इस नई और ऊर्जावान टीम से जिले में पार्टी का प्रचार-प्रसार और ज्यादा मजबूत होगा।
गांवों में 45 दिन बाद मिलेगा दूसरा घरेलू LPG सिलेंडर:जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने 20 दिन समय बढ़ाया; MP में ऑनलाइन बुकिंग ठप

अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत हो गई है। गैस एजेंसियों के बाहर लम्बी लाइनें हैं। गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी भी हो रही है, जिसे रोकने के लिए सरकार ने बुकिंग के नियमों में फिर से बदलाव किया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर लेने के बाद अगला सिलेंडर 45 दिन बाद बुक किया जा सकेगा। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में बताया कि यह फैसला सप्लाई को बेहतर तरीके से मैनेज करने और बेवजह होने वाली ‘पैनिक बुकिंग’ को रोकने के लिए किया है। LPG सिलेंडर बुकिंग के नियम 6 दिन में तीन बार बदले 55 दिन की बजाय 15 दिन में बुक करा रहे लोग गांवों में औसतन एक परिवार सालभर में करीब 5 सिलेंडर ही इस्तेमाल करता है। ऐसे में जल्दी दोबारा बुकिंग की जरूरत नहीं पड़ती थी। हाल ही में देखा गया कि लोग अफवाहों की वजह से जरूरत न होने पर भी जल्दी-जल्दी सिलेंडर बुक करके स्टॉक कर रहे थे। मंत्रालय की ओर से बताया गया कि जो लोग पहले औसतन 55 दिनों में सिलेंडर बुक कराते थे, उन्होंने अचानक 15-15 दिनों के अंतर पर बुकिंग शुरू कर दी थी। इस तरह की एडवांस और जल्दबाजी में की जा रही बुकिंग से सिस्टम पर दबाव बढ़ रहा था। अब अलग-अलग राज्यों की रिपोर्ट पढ़ें… मध्य प्रदेश: LPG की ऑनलाइन बुकिंग ठप…वेटिंग 7-8 दिन बढ़ी मध्य प्रदेश में LPG सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग ठप जैसी है। सर्वर डाउन होने से भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर समेत पूरे प्रदेश में लोग सिलेंडर की बुकिंग नहीं कर पा रहे हैं। वेटिंग 7 से 8 दिन तक पहुंच गई है। गैस एजेंसियों में सुबह से शाम तक लोगों की भीड़ लगी हुई है। इधर गैस की किल्लत के बीच इंडक्शन की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। भोपाल में इसकी बिक्री 7 गुना तक बढ़ गई है। वहीं 50 हजार होटल-रेस्टॉरेंट में गैस खत्म होने के कगार पर है। होटल, रेस्टॉरेंट को 4 दिन से कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिले हैं। भोपाल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली के मुताबिक, भोपाल के करीब 2 हजार होटल-रेस्टोरेंट को 4 दिन में एक भी सिलेंडर नहीं मिला। पूरी खबर पढ़ें… राजस्थान: रेस्टोरेंट बंद कर कर्मचारियों को घर भेजा जा रहा होटल-रेस्टोरेंट में गैस का स्टॉक खत्म होने से बिजनेस ठप होने लगे हैं। चित्तौड़गढ़ में रेस्टोरेंट बंद कर कर्मचारियों को घर भेज दिया है। सवाई माधोपुर में भी रेस्टोरेंट बंद होने लगे हैं। जैसलमेर के सम में 150 रिसॉर्ट को बंद करने की तैयारी है। जयपुर में चाय की थड़ी, मिठाई की दुकानों और ढाबों पर कॉमर्शियल की जगह घरेलू सिलेंडर का उपयोग करने लगे हैं। कोटा में गैस सिलेंडर की कमी के चलते लकड़ी और कोयले की भट्ठी की मांग बढ़ गई है। मेस और हॉस्टलों के लिए 35 से 40 किलो वजन की भट्ठियां बनाई जा रही हैं। पूरी खबर पढ़ें… उत्तर प्रदेश: ब्लैक में 1600 रुपए देने पर तुरंत मिल रहा सिलेंडर लखनऊ में दिन-दिनभर लाइन में खड़े रहने पर भी लोगों को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। लोगों का दावा है कि इन सबके बावजूद 950 रुपए वाला सिलेंडर 1600 रुपए देने पर तुरंत मिल रहा है। कॉमर्शियल सिलेंडर भी 3500 रुपए में आसानी से उपलब्ध है। पूरी खबर पढ़ें… फूड डिलीवरी के ऑर्डर 50 से 60% तक कम हुए गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन’ ने कहा कि LPG की किल्लत के कारण जोमैटो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म्स पर फूड डिलीवरी के ऑर्डर 50 से 60% तक कम हो गए हैं। इससे डिलीवरी पार्टनर्स और इस सेक्टर से जुड़े दूसरे वर्कर्स की कमाई पर संकट खड़ा हो गया है। यूनियन ने केंद्रीय श्रम मंत्री को पत्र लिखकर तुरंत दखल देने की मांग की है। यूनियन की मांग है कि जोमैटो, स्विगी और दूसरे प्लेटफॉर्म्स प्रभावित होने वाले हर वर्कर को तुरंत 10,000 रुपए की राहत राशि दें। वर्कर्स की ID बंद करने पर 3 महीने की रोक लगे। सरकार ने तैयारियों का लेखा-जोखा पेश किया सरकार रोजाना 50 लाख सिलेंडर बांट रही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा, “हम अपनी जरूरत की लगभग 60% LPG बाहर से मंगवाते हैं और इसका करीब 90% हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आता है। स्थिति थोड़ी मुश्किल है, लेकिन सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है।” उन्होंने कहा, “हम हर दिन लगभग 50 लाख सिलेंडर डिलीवर करते हैं। डिस्ट्रीब्यूशन के स्तर पर फिलहाल कहीं भी किल्लत की कोई खबर नहीं है। लेकिन घबराहट की वजह से बुकिंग कई गुना बढ़ गई है। राज्य सरकारों से लाभार्थियों की लिस्ट तैयार करने को कहा है ताकि सिलेंडर की डिलीवरी प्राथमिकता के आधार पर की जा सके।” सरकार ने अब तक 5 जरूरी कदम उठाए 1. हाई-लेवल कमेटी बनाई: संकट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो सप्लाई की समीक्षा करेगी। 2. एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू: गैस की सप्लाई को कंट्रोल करने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ लागू कर दिया है। 3. 25 दिन बाद होगी LPG बुकिंग: घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में बदलाव किया है। उपभोक्ता एक सिलेंडर डिलीवर होने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक कर सकेंगे। 4. OTP और बायोमेट्रिक अनिवार्य: गैस की जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी एजेंट OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का सख्ती से इस्तेमाल कर रहे हैं। 5. LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश: सरकार ने सभी ऑयल रिफाइनरीज को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया था। अब उत्पादन 28% बढ़ गया है। सप्लाई संकट की 2 वजह 1. होर्मुज स्ट्रेट का लगभग बंद होना भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी
Kuldeep Yadavs Fiancee, Australia Educated, Not Seeking Limelight

कुलदीप को बचपन से ही जानती थीं वंशिका। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार स्पिनर कुलदीप यादव उर्फ ‘चाइनामैन’ 14 मार्च को मसूरी में वंशिका सिंह चड्ढा के साथ सात फेरे लेने वाले हैं। मसूरी के ऐतिहासिक ITC Savoy होटल में चल रहे तीन दिन के शादी समारोहों की शुरुआत 12 मार्च को मेहंदी की रस्म के साथ हो . इन शादी समारोहों के बीच जिस नाम को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है, वह है- वंशिका सिंह चड्ढा। क्रिकेटर की पत्नी बनने जा रहीं वंशिका किसी फिल्मी या ग्लैमरस सोशल मीडिया दुनिया से नहीं आतीं, बल्कि एक शिक्षित और पेशेवर पृष्ठभूमि से जुड़ी युवा महिला हैं। आधुनिक क्रिकेट में जहां खिलाड़ियों की लाइफ पार्टनर अक्सर सोशल मीडिया और ब्रांड एंडोर्समेंट के जरिए अपनी सार्वजनिक पहचान बनाती हैं, वहीं वंशिका इस ट्रेंड से बिल्कुल अलग हैं। वे लाइमलाइट से दूर रहने वाली और अपने करियर पर फोकस रखने वाली महिला के रूप में जानी जाती हैं। ये तस्वीर तब की है जब कुलदीप ने सगाई के बाद फोटो शूट करवाया था। अब पढ़िए कौन हैं वंशिका और कैसे मुश्किल वक्त में दिया कुलदीप का साथ… कानपुर की गलियों से शुरू हुई दोस्ती कुलदीप यादव और वंशिका सिंह का रिश्ता किसी अचानक बनी प्रेम कहानी का नहीं, बल्कि बचपन की दोस्ती का है। दोनों का परिवार उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में रहता है और यहीं से उनकी पहचान की शुरुआत हुई। कुलदीप यादव का पैतृक घर कानपुर के लाल बंगला इलाके में है, जबकि वंशिका सिंह का परिवार वहां से लगभग तीन किलोमीटर दूर श्याम नगर इलाके में रहता है। सेंट मैरी स्कूल से शुरू हुई पढ़ाई वंशिका की शुरुआती पढ़ाई कानपुर के प्रतिष्ठित सेंट मैरी स्कूल से हुई। उन्होंने यहीं से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और 2017 में 12वीं की परीक्षा पास की। दिलचस्प बात यह है कि 2017 वही साल था जब कुलदीप यादव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान बना रहे थे। उसी समय वंशिका अपने जीवन के अगले पड़ाव की तैयारी कर रही थीं। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने का फैसला किया और अपनी मां के पास ऑस्ट्रेलिया चली गईं। वंशिका ऑस्ट्रेलिया जरूर चलीं गई लेकिन कुलदीप से उनकी दूरियां बढ़ीं नहीं। कानपुर से ऑस्ट्रेलिया तक की पढ़ाई ऑस्ट्रेलिया पहुंचने के बाद वंशिका ने वहां के मॉर्डन एजुकेशन सिस्टम और इंटरनेशनल माहौल में अपनी पढ़ाई जारी रखी। विदेश में पढ़ाई और वहां का माहौल उनके व्यक्तित्व को नई दिशा देने वाला साबित हुआ। ऑस्ट्रेलिया में बिताए समय ने उनमें आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें दुनिया को समझने का नया नजरिया दिया। यही अनुभव आगे चलकर उनके पेशेवर जीवन की मजबूत नींव बना। वंशिका की मां वंदना सिंह भी ऑस्ट्रेलिया में एक अंतरराष्ट्रीय कॉर्पोरेट प्रोफाइल से जुड़ी हैं। मां के साथ रहते हुए वंशिका को भी इंटरनेशनल माहौल में काम करने और सीखने का मौका मिला। माता-पिता से मिला अलग-अलग जीवन दर्शन वंशिका के व्यक्तित्व में उनके माता-पिता के पेशेवर अनुभवों का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। उनकी मां वंदना सिंह ऑस्ट्रेलिया में कॉर्पोरेट सेक्टर से जुड़ी हैं। मां से उन्हें सीमाओं से बाहर सोचने और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा मिली। वहीं उनके पिता अवनिंद्र सिंह भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में कानपुर के जोनल कार्यालय में कार्यरत हैं। पिता से उन्हें अनुशासन, स्थिरता और वित्तीय समझदारी जैसे संस्कार मिले। दोनों के पेशेवर अनुभवों का यह मिश्रण वंशिका के व्यक्तित्व को संतुलित बनाता है। कुलदीप यादव ने यह तस्वीर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर की थी। लाइमलाइट से दूर रहती हैं वंशिका आज के डिजिटल दौर में जहां अधिकांश सेलिब्रिटी परिवार सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं, वहीं वंशिका इस दुनिया से दूरी बनाए रखना पसंद करती हैं। उनका कोई सार्वजनिक सोशल मीडिया अकाउंट नहीं है और वे निजी जिंदगी को सार्वजनिक मंचों पर लाने से बचती हैं। यही वजह है कि कुलदीप यादव के साथ रिश्ते में आने के बाद भी वे मीडिया और सोशल मीडिया की चकाचौंध से दूर रही हैं। मुश्किल दौर में बनीं मजबूत सहारा कुलदीप यादव के करियर में 2019 से 2021 के बीच का दौर काफी चुनौतीपूर्ण रहा था। इस दौरान उनका प्रदर्शन गिरा और टीम में जगह भी प्रभावित हुई। ऐसे समय में वंशिका उनके लिए एक मजबूत भावनात्मक सहारा बनीं। बचपन की दोस्त होने के कारण वे कुलदीप के संघर्ष और मानसिक दबाव को समझती थीं। परिवार और करीबी लोगों के मुताबिक वंशिका ने इस कठिन दौर में कुलदीप का आत्मविश्वास बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। कुलदीव यादव की फाइल फोटो। वर्ल्ड कप के लिए टाल दी थी शादी कुलदीप और वंशिका की सगाई 4 जून 2025 को लखनऊ में हुई थी। शुरुआत में उनकी शादी नवंबर 2025 या जनवरी 2026 में होने की योजना थी। लेकिन इसी दौरान टी20 विश्व कप 2026 का शेड्यूल सामने आया। कुलदीप चाहते थे कि उनका पूरा ध्यान टूर्नामेंट पर रहे और वे देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें। ऐसे में वंशिका और कुलदीप ने आपसी सहमति से अपनी शादी को आगे बढ़ाने का फैसला किया। इस फैसले को दोनों ने ‘राष्ट्र-प्रथम’ सोच के साथ लिया। बाद में यह फैसला सही साबित हुआ जब भारत ने न्यूजीलैंड को फाइनल में 96 रन से हराकर टी20 विश्व कप का खिताब जीता। वर्ल्ड कप की ट्रॉफी पकड़े कुलदीप यादव। मसूरी में चल रहे हैं शादी के समारोह मसूरी के ITC Savoy होटल में कुलदीप और वंशिका की शादी के तीन दिन के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 12 मार्च को मेहंदी की रस्म के साथ समारोह की शुरुआत हो चुकी है। आज 13 मार्च को हल्दी और संगीत का कार्यक्रम रखा गया है। कल 14 मार्च को शाम 5 बजे बारात निकलेगी, शाम 6 बजे वरमाला होगी और रात 8 बजे दोनों सात फेरे लेंगे। क्रिकेट जगत की बड़ी हस्तियां भी आ सकती हैं शादी समारोह में परिवार और करीबी मेहमानों को ही आमंत्रित किया गया है। हालांकि क्रिकेट जगत की कुछ बड़ी हस्तियों के भी इसमें शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय टीम के खिलाड़ी सूर्यकुमार यादव, कप्तान रोहित शर्मा और टीम इंडिया के कोच गौतम गंभीर भी 14 मार्च को समारोह में पहुंच सकते








