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Kuldeep Yadavs Fiancee, Australia Educated, Not Seeking Limelight

Kuldeep Yadavs Fiancee, Australia Educated, Not Seeking Limelight

कुलदीप को बचपन से ही जानती थीं वंशिका। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार स्पिनर कुलदीप यादव उर्फ ‘चाइनामैन’ 14 मार्च को मसूरी में वंशिका सिंह चड्ढा के साथ सात फेरे लेने वाले हैं। मसूरी के ऐतिहासिक ITC Savoy होटल में चल रहे तीन दिन के शादी समारोहों की शुरुआत 12 मार्च को मेहंदी की रस्म के साथ हो . इन शादी समारोहों के बीच जिस नाम को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है, वह है- वंशिका सिंह चड्ढा। क्रिकेटर की पत्नी बनने जा रहीं वंशिका किसी फिल्मी या ग्लैमरस सोशल मीडिया दुनिया से नहीं आतीं, बल्कि एक शिक्षित और पेशेवर पृष्ठभूमि से जुड़ी युवा महिला हैं। आधुनिक क्रिकेट में जहां खिलाड़ियों की लाइफ पार्टनर अक्सर सोशल मीडिया और ब्रांड एंडोर्समेंट के जरिए अपनी सार्वजनिक पहचान बनाती हैं, वहीं वंशिका इस ट्रेंड से बिल्कुल अलग हैं। वे लाइमलाइट से दूर रहने वाली और अपने करियर पर फोकस रखने वाली महिला के रूप में जानी जाती हैं। ये तस्वीर तब की है जब कुलदीप ने सगाई के बाद फोटो शूट करवाया था। अब पढ़िए कौन हैं वंशिका और कैसे मुश्किल वक्त में दिया कुलदीप का साथ… कानपुर की गलियों से शुरू हुई दोस्ती कुलदीप यादव और वंशिका सिंह का रिश्ता किसी अचानक बनी प्रेम कहानी का नहीं, बल्कि बचपन की दोस्ती का है। दोनों का परिवार उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में रहता है और यहीं से उनकी पहचान की शुरुआत हुई। कुलदीप यादव का पैतृक घर कानपुर के लाल बंगला इलाके में है, जबकि वंशिका सिंह का परिवार वहां से लगभग तीन किलोमीटर दूर श्याम नगर इलाके में रहता है। सेंट मैरी स्कूल से शुरू हुई पढ़ाई वंशिका की शुरुआती पढ़ाई कानपुर के प्रतिष्ठित सेंट मैरी स्कूल से हुई। उन्होंने यहीं से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और 2017 में 12वीं की परीक्षा पास की। दिलचस्प बात यह है कि 2017 वही साल था जब कुलदीप यादव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान बना रहे थे। उसी समय वंशिका अपने जीवन के अगले पड़ाव की तैयारी कर रही थीं। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने का फैसला किया और अपनी मां के पास ऑस्ट्रेलिया चली गईं। वंशिका ऑस्ट्रेलिया जरूर चलीं गई लेकिन कुलदीप से उनकी दूरियां बढ़ीं नहीं। कानपुर से ऑस्ट्रेलिया तक की पढ़ाई ऑस्ट्रेलिया पहुंचने के बाद वंशिका ने वहां के मॉर्डन एजुकेशन सिस्टम और इंटरनेशनल माहौल में अपनी पढ़ाई जारी रखी। विदेश में पढ़ाई और वहां का माहौल उनके व्यक्तित्व को नई दिशा देने वाला साबित हुआ। ऑस्ट्रेलिया में बिताए समय ने उनमें आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें दुनिया को समझने का नया नजरिया दिया। यही अनुभव आगे चलकर उनके पेशेवर जीवन की मजबूत नींव बना। वंशिका की मां वंदना सिंह भी ऑस्ट्रेलिया में एक अंतरराष्ट्रीय कॉर्पोरेट प्रोफाइल से जुड़ी हैं। मां के साथ रहते हुए वंशिका को भी इंटरनेशनल माहौल में काम करने और सीखने का मौका मिला। माता-पिता से मिला अलग-अलग जीवन दर्शन वंशिका के व्यक्तित्व में उनके माता-पिता के पेशेवर अनुभवों का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। उनकी मां वंदना सिंह ऑस्ट्रेलिया में कॉर्पोरेट सेक्टर से जुड़ी हैं। मां से उन्हें सीमाओं से बाहर सोचने और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा मिली। वहीं उनके पिता अवनिंद्र सिंह भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में कानपुर के जोनल कार्यालय में कार्यरत हैं। पिता से उन्हें अनुशासन, स्थिरता और वित्तीय समझदारी जैसे संस्कार मिले। दोनों के पेशेवर अनुभवों का यह मिश्रण वंशिका के व्यक्तित्व को संतुलित बनाता है। कुलदीप यादव ने यह तस्वीर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर की थी। लाइमलाइट से दूर रहती हैं वंशिका आज के डिजिटल दौर में जहां अधिकांश सेलिब्रिटी परिवार सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं, वहीं वंशिका इस दुनिया से दूरी बनाए रखना पसंद करती हैं। उनका कोई सार्वजनिक सोशल मीडिया अकाउंट नहीं है और वे निजी जिंदगी को सार्वजनिक मंचों पर लाने से बचती हैं। यही वजह है कि कुलदीप यादव के साथ रिश्ते में आने के बाद भी वे मीडिया और सोशल मीडिया की चकाचौंध से दूर रही हैं। मुश्किल दौर में बनीं मजबूत सहारा कुलदीप यादव के करियर में 2019 से 2021 के बीच का दौर काफी चुनौतीपूर्ण रहा था। इस दौरान उनका प्रदर्शन गिरा और टीम में जगह भी प्रभावित हुई। ऐसे समय में वंशिका उनके लिए एक मजबूत भावनात्मक सहारा बनीं। बचपन की दोस्त होने के कारण वे कुलदीप के संघर्ष और मानसिक दबाव को समझती थीं। परिवार और करीबी लोगों के मुताबिक वंशिका ने इस कठिन दौर में कुलदीप का आत्मविश्वास बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। कुलदीव यादव की फाइल फोटो। वर्ल्ड कप के लिए टाल दी थी शादी कुलदीप और वंशिका की सगाई 4 जून 2025 को लखनऊ में हुई थी। शुरुआत में उनकी शादी नवंबर 2025 या जनवरी 2026 में होने की योजना थी। लेकिन इसी दौरान टी20 विश्व कप 2026 का शेड्यूल सामने आया। कुलदीप चाहते थे कि उनका पूरा ध्यान टूर्नामेंट पर रहे और वे देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें। ऐसे में वंशिका और कुलदीप ने आपसी सहमति से अपनी शादी को आगे बढ़ाने का फैसला किया। इस फैसले को दोनों ने ‘राष्ट्र-प्रथम’ सोच के साथ लिया। बाद में यह फैसला सही साबित हुआ जब भारत ने न्यूजीलैंड को फाइनल में 96 रन से हराकर टी20 विश्व कप का खिताब जीता। वर्ल्ड कप की ट्रॉफी पकड़े कुलदीप यादव। मसूरी में चल रहे हैं शादी के समारोह मसूरी के ITC Savoy होटल में कुलदीप और वंशिका की शादी के तीन दिन के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 12 मार्च को मेहंदी की रस्म के साथ समारोह की शुरुआत हो चुकी है। आज 13 मार्च को हल्दी और संगीत का कार्यक्रम रखा गया है। कल 14 मार्च को शाम 5 बजे बारात निकलेगी, शाम 6 बजे वरमाला होगी और रात 8 बजे दोनों सात फेरे लेंगे। क्रिकेट जगत की बड़ी हस्तियां भी आ सकती हैं शादी समारोह में परिवार और करीबी मेहमानों को ही आमंत्रित किया गया है। हालांकि क्रिकेट जगत की कुछ बड़ी हस्तियों के भी इसमें शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय टीम के खिलाड़ी सूर्यकुमार यादव, कप्तान रोहित शर्मा और टीम इंडिया के कोच गौतम गंभीर भी 14 मार्च को समारोह में पहुंच सकते

Snowfall in Uttarakhand, Himachal, J&K

Snowfall in Uttarakhand, Himachal, J&K

Hindi News National Snowfall In Uttarakhand, Himachal, J&K | Rain Alert & Rajasthan Heatwave 2026 नई दिल्ली/श्रीनगर/देहरादून/जयपुर7 मिनट पहले कॉपी लिंक जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग में गुरुवार को बर्फबारी हुई। इससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई। हिमाचल प्रदेश के लहौल स्पीती और मनाली में ताजा बर्फबारी दर्ज की गई। भारतीय मौसम विभाग ने पहाड़ी क्षेत्रों के लिए पहले ही अगले कुछ दिनों के लिए चेतावनी जारी की थी। उत्तराखंड में आज भी मैदानी इलाकों में बारिश और बर्फबारी की चेतावनी जारी की गई है। यहां आंधी चलने के भी आसार हैं। आज और अगले दो दिनों के लिए ये चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान हवा की रफ्तार 30-50 किमी प्रति घंटा रहने की संभावना है। राजस्थान में मार्च में ही लू चलने लगी है। बुधवार को जैसलमेर, बाड़मेर और बालोतरा के इलाकों में इसका असर रहा। यहां अधिकतम तापमान 39 से 41°C दर्ज हुआ। आगामी दिनों में तेज गर्मी को देखते हुए हेल्थ डिपार्टमेंट ने हीटवेव से बचाव के लिए गाइडलाइन जारी की है। हालांकि, गुरुवार को हीटवेव का असर नहीं रहेगा। यहां 14 मार्च को 8 जिलों में आंधी और बारिश का यलो अलर्ट भी जारी किया है। मौसम की तस्वीरें… अटल टनल रोहतांग के नोर्थ पोर्टल पर ताजा हिमपात। हिमाचल प्रदेश के मनाली में अटल टनल के पास बर्फबारी हुई। जयपुर में बढ़ती गर्मी का असर पर्यटन स्थलों पर दिख रहा है। अल्बर्ट हॉल संग्रहालय के बाहर आम दिनों में पर्यटकों की भीड़ रहती थी, लेकिन तेज धूप और गर्मी के कारण आज वहां कोई टूरिस्ट नजर नहीं आया। हिमाचल के लाहौल स्पीति में गुरुवार सुबह से बर्फबारी हो रही है। यूपी के देवरिया में सुबह धुंध छाई। यहां विजिबिलिटी 50 मीटर से कम रही। अगले 2 दिन मौसम का हाल… 14 मार्च- दिल्ली और उत्तर प्रदेश में मौसम शुष्क और गर्म मौसम रहेगा। बंगाल और नॉर्थ ईस्ट में बारिश या गरज की संभावना है। 15 मार्च- दिल्ली में ज्यादातर जगहों पर तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी और पूर्वोत्तर के राज्यों में बारिश की चेतावनी। राज्यों से जुड़ी मौसम की खबरें… मध्य प्रदेश: दिन का तापमान 40.2°C पहुंचा, 10 शहरों में 38°C से ज्यादा मध्य प्रदेश में मार्च के दूसरे हफ्ते में ही हीटवेव चलने लगी है। गुरुवार को नर्मदापुरम, रतलाम और धार में लू चली। यहां आज भी लू का अलर्ट है। राज्य के नर्मदापुरम में दिन का अधिकतम तापमान 40.2°C, 10 शहरों में तापमान 38°C से ज्यादा रहा। 15 और 16 मार्च को प्रदेश में बारिश की संभावना है। पूरी खबर पढ़ें… उत्तर प्रदेश: 15 मार्च से बारिश का अलर्ट, 5 जिलों में तेज धुंध छाई उत्तर प्रदेश में 10 से ज्यादा जिलों में कोहरा। अब 15 मार्च से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जिसके प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार यह इस सीजन की पहली बारिश होगी, जिससे पिछले कई दिनों से सामान्य से ऊपर चल रहे तापमान में गिरावट आएगी। पूरी खबर पढ़ें… राजस्थान: बादल छाने से हीटवेव से राहत मिली, अगले 2 हफ्ते गर्मी कम रहने की संभावना राजस्थान में गुरुवार से मौसम बदला है। बादल छाने से लू और तेज गर्मी से राहत मिली। जयपुर, अजमेर, भरतपुर, बीकानेर-जोधपुर संभाग के जिलों में बादल छाए हैं। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 2 हफ्ते तेज गर्मी से राहत मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें… उत्तराखंड: राज्य के पिथौरागढ़-चमोली में बर्फबारी, 5 जिलों में बारिश की संभावना उत्तराखंड के चमोली और पिथौरागढ़ में बर्फबारी हुई है। आज 5 जिलों बारिश और बर्फबारी की संभावना है। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में बारिश होने की संभावना है। पिछले 24 घंटों के दौरान उत्तराखंड के पहाडी और मैदानी क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से ज्यादा दर्ज किया गया। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Bathinda couple haryana scorpio notes flying punjab jeep viral video

Bathinda couple haryana scorpio notes flying punjab jeep viral video

सड़क पर डोली वाली कार पर नोटों की बारिश। बठिंडा में दूल्हा-दुल्हन की चलती स्कॉर्पियो पर रिश्तेदारों ने बीच रोड पर नोट बरसा दिए। दूल्हा-दुल्हन जिस गाड़ी में बैठे थे, वह हरियाणा नंबर की है। जिस चलती ओपन जीप से नोट उड़ाए गए, वह पंजाब नंबर की थी। नोट उड़ाने के दौरान जीप पर बैठे युवक हुल्लड़बाजी भी . दूल्हा-दुल्हन की गाड़ी पर बरसाए नोट वहीं उड़कर सड़क पर गिरते रहे और बारातियों की गाड़ियां बढ़ती रहीं। दूल्हा-दुल्हन की स्कॉर्पियो का नंबर HR26DR-8787 गुरुग्राम ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी का है। वहीं ओपन जीप पर विंटेज नंबर PCV-2436 है, जिसकी रजिस्ट्रेशन का ऑनलाइन डेटा तो नहीं है लेकिन यह पंजाब नंबर माना जा रहा है। दूल्हा-दुल्हन पर नोट उड़ाने के PHOTOS… बठिंडा की गोनियाना रोड पर हवा में उड़ते हुए नोट। सड़क पर चलती जीप से डोली वाली स्कॉर्पियों पर नोट बरसाते हुए दूल्हे के दोस्त। खुली जीप में डांस करते हुए दूल्हे के दोस्त सबसे पहले जानिए, वीडियो में क्या दिखाई दे रहा 51 सेकेंड के वायरल वीडियो में दिख रहा है कि दूल्हा-दुल्हन सफेद रंग की स्कॉर्पियो में बैठे हैं। उसके आगे एक ओपन जीप जा रही है। जिसमें 5-6 युवक नाच रहे हैं। गोनियाना मंडी के पास वह जेब से 10-10 रुपए के नोटों की गडि्डयां निकालते हैं। फिर नाचते हुए ठीक उनके पीछे चल रही दूल्हा-दुल्हन की गाड़ी के ऊपर उड़ाने लगते हैं। इस दौरान दोनों गाड़ियां स्पीड से जा रही हैं। ऐसे में नोट उड़ाने वालों को हादसे का भी खतरा बना हुआ दिख रहा है। पीछे चलते व्यक्ति ने बनाई वीडियो इसी दौरान पीछे से गाड़ी में चल रहे एक अन्य व्यक्ति ने उनका वीडियो बना लिया। उसने वीडियो में कहा- देखो, नोटों की बरसात हो रही है। यह बारात जा रही है। इसमें युवक पैसे लुटा रहे हैं। इसी दौरान स्कॉर्पियो से हॉर्न बजता है। जिसके बाद युवक ओपन जीप में नीचे बैठ जाते हैं। वीडियो बनाने वाले ने इसे फिर सोशल मीडिया पर डाल दिया। स्कॉर्पियो में बैठे दूल्हा-दुल्हन, इस दौरान दूल्हा खुद गाड़ी चला रहा है। सोशल मीडिया पर मिक्स रिएक्शन चलती गाड़ी में दूल्हा-दुल्हन पर नोट उड़ाने की इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर मिक्स रिएक्शन हैं। कुछ लोग इसे जानलेवा बताते हुए कह रहे हैं कि एक्सीडेंट को न्योता दे रहे हैं। हालांकि कुछ लोग इसे पंजाब और हरियाणा के लोगों के जश्न मनाने के अंदाज से जोड़ रहे हैं। NRI दूल्हे की शादी में हुई थी नोटों की बारिश दूल्हा-दुल्हन पर नोटों की बारिश का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले तरनतारन के पट्‌टी में NRI दूल्हे की शादी में भी इसी तरह नोट उड़ाए गए थे। फ्लोर पर डांस करते हुए मेहमानों ने दूल्हा-दुल्हन पर नोट उड़ाए। जिसमें डॉलर भी शामिल थे। इस दौरान दूल्हा भी बैग भरकर नोट लाया और दुल्हन पर उड़ाने लगा। तरनतारन की शादी में दूल्हा भी बैग से नोट निकालकर उड़ाता नजर आया था। इस दौरान फ्लोर पर नोटों का ढेर लग गया। तब दावा किया गया कि यहां 8 से 9 करोड़ रुपए उड़ाए गए लेकिन DJ वाले ने कहा था कि डॉलर समेत उन्हें 3 लाख रुपए ही मिले। उसमें 10-10 रुपए के नोट ज्यादा थे। यह शादी तरनतारन के गांव मानोचाल में हुई थी। दुल्हन इसी गांव की रहने वाली है, जबकि शादी के लिए लड़के का परिवार ऑस्ट्रेलिया से आया था। दूल्हे के दोस्त भी ऑस्ट्रेलिया और कनाडा से आए थे, जिन्होंने दूल्हा और दुल्हन पर डॉलर उड़ाए (पढ़ें पूरी खबर)

जरूरत की खबर- ‘मच्छर अगरबत्तियों’ में खतरनाक केमिकल्स:खरीदने से पहले चेक करें ये 7 चीजें, नेचुरल तरीकों से मच्छर भगाने के 11 टिप्स

जरूरत की खबर- 'मच्छर अगरबत्तियों' में खतरनाक केमिकल्स:खरीदने से पहले चेक करें ये 7 चीजें, नेचुरल तरीकों से मच्छर भगाने के 11 टिप्स

बीते महीने महाराष्ट्र सरकार ने मच्छर भगाने वाली दो बड़ी अगरबत्ती कंपनियों को प्रतिबंधित कर दिया। हम अक्सर मच्छर अगरबत्ती या मच्छर भगाने वाले प्रोडक्ट्स जलाकर चैन की नींद सो जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनका धुआं हमारी सेहत पर भारी पड़ सकता है? महाराष्ट्र सरकार ने ‘मच्छर अगरबत्तियों’ की जांच में पाया कि इनमें डाइमेफ्लुथ्रिन (Dimefluthrin) जैसे खतरनाक केमिकल्स का इस्तेमाल हो रहा है। ये सांस के जरिए शरीर में जाकर हमारे फेफड़ों और नर्वस सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। सेंट्रल इंसेक्टिसाइड्स बोर्ड एंड रजिस्ट्रेशन कमेटी (CIBRC) की मंजूरी के बिना बाजार में बिकने वाले ऐसे प्रोडक्ट्स बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों के लिए किसी ‘साइलेंट किलर’ से कम नहीं हैं। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में बात मच्छर भगाने वाली अगरबत्तियों की। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. संदीप कटियार, सीनियर कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर सवाल- ‘मच्छर अगरबत्तियों’ पर बैन क्यों लगाया गया? जवाब- इसके पीछे कई कारण हैं- सवाल- इन अवैध ‘मच्छर अगरबत्तियों’ में कौन से केमिकल्स मिले थे? ये केमिकल्स कितने खतरनाक हैं? जवाब- इसका जवाब पॉइंटर्स में समझिए- सवाल- इन केमिकल्स का धुआं लंग्स और ओवरऑल सेहत को कैसे प्रभावित करता है? जवाब- मच्छर अगरबत्तियों के केमिकल्स का धुआं हमारी सेहत को इस तरह प्रभावित करता है- सवाल- इससे किन लोगों को ज्यादा जोखिम हो सकता है? जवाब- मच्छर अगरबत्ती के धुएं से कुछ लोगों को ज्यादा रिस्क होता है। इसे ग्राफिक में देखिए- इसे विस्तार से समझिए बच्चे- उनके लंग्स डेवलपिंग स्टेज में होते हैं, तो धुआं ज्यादा नुकसान करता है। बुजुर्ग- कमजोर इम्यूनिटी और पहले से मौजूद बीमारियों के कारण रिस्क ज्यादा होता है। अस्थमा या COPD मरीज- जिन्हें क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और अस्थमा जैसी सांस संबंधी बीमारियां हैं, उनके लिए अगरबत्ती का धुआं ज्यादा नुकसानदायक है। एलर्जेटिक लोग- केमिकल्स से एलर्जिक रिएक्शन बढ़ सकता है। गर्भवती महिलाएं- धुआं प्रेग्नेंट महिला और गर्भस्थ शिशु, दोनों की सेहत को प्रभावित कर सकता है। हार्ट पेशेंट्स- प्रदूषित हवा हार्ट पर अतिरिक्त दबाव डालती है। इनडोर रहने वाले लोग- बंद कमरों में धुआं ज्यादा जमा होता है, जिससे एक्सपोजर बढ़ता है। सवाल- मच्छर भगाने वाले प्रोडक्ट्स खरीदते समय क्या-क्या चेक करना जरूरी है? जवाब- मच्छर भगाने वाले प्रोडक्ट्स खरीदते समय कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए। इन्हें ग्राफिक में देखिए- अब ये सभी पॉइंट्स विस्तार से समझिए- CIBRC रजिस्ट्रेशन नंबर: केवल वही प्रोडक्ट लें, जिन्हें सरकार से स्वीकृति मिली हुई है। एक्टिव केमिकल्स: लेबल पर लिखे केमिकल्स (जैसे एल्थ्रिन आदि) की जानकारी देखें। निर्माता की जानकारी: कंपनी का नाम, पता और लाइसेंस नंबर स्पष्ट होना चाहिए। एक्सपायरी डेट: प्रोडक्ट की एक्सपायरी डेट जरूर चेक करें। इस्तेमाल के इंस्ट्रक्शन: सही और सुरक्षित इस्तेमाल के निर्देश पढ़ें। सेफ्टी इंस्ट्रक्शन: बच्चों और पालतू जानवरों के लिए सावधानियां देखें। सील और पैकेजिंग: नकली या खुले पैक न खरीदें। सवाल- इन प्रोडक्ट्स पर सेंट्रल इंसेक्टिसाइड्स बोर्ड एंड रजिस्ट्रेशन कमेटी (CIBRC) का रजिस्ट्रेशन नंबर चेक करना क्यों जरूरी है? जवाब- CIBRC नंबर उपभोक्ता सुरक्षा की गारंटी है। इसलिए इसे चेक करना जरूरी है- सवाल- अवैध या संदिग्ध प्रोडक्ट की शिकायत कहां कर सकते हैं? जवाब- इसकी शिकायत इन जगहों पर लिखित या ऑनलाइन कर सकते हैं – सवाल- नेचुरल तरीके से मच्छर भगाने के कुछ घरेलू नुस्खे बताएं? जवाब- केमिकल कॉइल्स और मॉस्किटो वेपोराइजर सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। ऐसे में मच्छरों से बचाव के लिए कुछ सुरक्षित और प्राकृतिक तरीके नीचे ग्राफिक में देखें- इन पॉइंट्स को विस्तार से समझिए- कपूर: कमरे की खिड़कियां बंद करके 20 मिनट के लिए कपूर जलाएं या खुले बर्तन में कपूर की टिकिया रखें। इसकी गंध मच्छरों को दूर भगाती है। नीम का तेल: नीम का तेल केमिकल वेपोराइजर से अधिक प्रभावी और सुरक्षित है। इसे नारियल तेल में मिलाकर शरीर पर लगाने से मच्छर नहीं काटते हैं। नींबू और लौंग: आधे कटे नींबू में लौंग गाड़कर कमरे के कोनों में रखें। इन दोनों की मिक्स स्मेल मच्छरों को नापसंद होती है। लहसुन का स्प्रे: लहसुन की कलियों को पानी में उबालकर स्प्रे बोतल में भर लें। इसे घर में छिड़कने से मच्छर नहीं आते हैं। पुदीना (मिंट) ऑयल: पुदीने के तेल का छिड़काव करें या इसके पौधे को कमरे में रखें। इसकी तेज गंध मच्छरों को भगाने में कारगर है। एसेंशियल ऑयल्स: लैवेंडर, टी-ट्री और सिट्रोनेला तेल को पानी में मिलाकर नेचुरल स्प्रे की तरह इस्तेमाल करें। नीलगिरी तेल: नीलगिरी के तेल में एंटी-मॉस्किटो गुण होते हैं। इसे डिफ्यूजर में या पानी में मिलाकर छिड़कें। तुलसी का पौधा: घर की बालकनी या आंगन में तुलसी लगाएं। इसके औषधीय गुण और सुगंध मच्छरों को रोकने में मदद करते हैं। लेमनग्रास: इसमें सिट्रोनेला (एसेंशियल ऑयल) होता है, जो मच्छर भगाने वाले प्रोडक्ट्स का मुख्य बेस है। इसे बालकनी या बगीचे में लगाने से मच्छर अंदर नहीं आते हैं। ……………… ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- आंखों की रोशनी कैसे बढ़ाएं: रेगुलर करें ये 8 आई एक्सरसाइज, डाइट में शामिल करें ये हेल्दी चीजें, न करें 8 गलतियां मौजूदा वक्त में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा हैं। ये चीजें जिंदगी में इस कदर हावी हो गई हैं कि हम अपनी नींद भी पूरी नहीं कर पाते हैं। इसका सीधा असर आंखों पर पड़ता है। नतीजतन आंखों की रोशनी कम हो रही है। आगे पढ़िए…

Open Relationship Marriage Stress; Psychiatrist Advice

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Hindi News Lifestyle Open Relationship Marriage Stress; Psychiatrist Advice | Consent Power Balance 17 घंटे पहले कॉपी लिंक सवाल– मेरी उम्र 35 साल है। मैं बेंगलुरू में रहती हूं। मेरी शादी को तीन साल हो चुके हैं और पिछले दो साल से हम ओपन रिलेशनशिप में हैं। हमारी लव मैरिज थी, लेकिन हसबैंड इस बात को लेकर हमेशा ओपन थे कि उसे मेरे अलावा दूसरी महिलाएं भी अच्छी लग सकती हैं। पहले ये बात मुझे मजाक लगती थी, लेकिन फिर एक दिन उसने शादी को ओपन रिलेशनशिप की तरह ट्रीट करने की डिमांड कर दी। उसकी पर्सनैलिटी और चार्म ही ऐसा है कि वो हमेशा अपनी बातों से कन्विंस कर लेता है। मैं राजी तो हो गई, लेकिन वो सब कभी कर नहीं पाई, जो वो कर रहा है। ये उसका ही एकतरफा डिसिजन था, जो मुझ पर थोप दिया गया। अब मैं एक अजीब सी घुटन महसूस करती हूं। हमेशा स्ट्रेस में रहती हूं। मैं क्या करूं? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सवाल पूछने के लिए आपका शुक्रिया। भारत में अधिकांश विवाह कमिटेड मोनोगैमी (एकनिष्ठ संबंध) ही समझे और माने जाते हैं। अगर शादी के बाद एक साथी ओपन रिलेशनशिप की डिमांड करे, तो यह केवल लाइफस्टाइल का मुद्दा नहीं रहता। यहां सहमति, पावर–बैलेंस और मेंटल हेल्थ जैसे बहुत से जरूरी और बुनियादी सवाल भी मौजूं हो जाते हैं। किसी भी स्वस्थ रिश्ते की बुनियाद आपसी सम्मान, अपनी स्वायत्तता और इच्छा से दी गई सहमति और फैसलों में बराबरी पर टिकी होती है। यदि इन चीजों में से कोई एक भी अनुपस्थित हो, तो रिश्तों में तनाव और असंतुलन पैदा हो सकता है। सहमति के पीछे का मनोविज्ञान ऐसी परिस्थितियों की शुरुआत अक्सर हल्के–फुल्के मजाक के साथ होती है। एक पार्टनर मजाक में यह कह सकता है कि ‘मुझे दूसरे लोग भी आकर्षक लगते हैं’ या ‘ओपन रिलेशनशिप का आइडिया भी कितना इंटरेस्टिंग हो सकता है।’ साइकोलॉजी में इसे ‘चेकिंग बाउंड्रीज’ (सीमा चेक करना) कहा जाता है। मनोविज्ञान में ‘बाउंड्रीज चेक करने’ का मतलब है, अपनी या दूसरे व्यक्ति की सीमाएं देखना, समझना, तय करना, उसे डिफाइन करना। कोई व्यक्ति पहले हंसी–मजाक में अपने विचार रखता है और दूसरे की प्रतिक्रिया देखता है। अगर दूसरा साथी इसे गंभीरता से नहीं लेता, तो धीरे-धीरे यही बात रीअल प्रपोजल में बदल सकती है। कई लोग बाद में सोचते हैं कि उन्होंने उस समय इस बात को गंभीरता से क्यों नहीं लिया। इसके पीछे कुछ सामान्य मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं। जैसेकि– कभी-कभी व्यक्ति रिश्ते को खोने से डरता है। कभी वह संघर्ष से बचना चाहता है। कभी उसे लगता है कि साथी को खुश रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है। कई समाजों में यह भी सिखाया जाता है कि रिश्ते को बनाए रखने के लिए एडजस्टमेंट करना जरूरी होता है। परसुएशन या मैनिपुलेशन: एक बारीक रेखा इसी तरह कई बार एक पार्टनर कहता है कि दूसरा पार्टनर हमेशा अपनी बातें मनवा लेता है। जैसाकि आपने भी अपने पार्टनर के लिए लिखा है, “उसकी पर्सनैलिटी और चार्म ही ऐसा है कि वो हमेशा अपनी बातों से कन्विंस कर लेता है।” लेकिन यहां इस बात के गहरे निहितार्थ को समझना जरूरी है। इसका एक अर्थ यह हो सकता है कि पार्टनर का व्यक्तित्व बहुत प्रभावी है। लेकिन दूसरी संभावना यह भी हो सकती है कि वह इनडायरेक्ट तरीके से भावनात्मक दबाव बना रहा हो। या लगातार ‘परसुएशन’ कर रहा हो। परसुएशन का अर्थ है कि एक बात को अनेकों बार कहना, अनुनय–विनय, याचना करना और आखिरकार अपनी बात मनवा ही लेना। कई बार परसुएशन और मैनिपुलेशन के बीच की रेखा बहुत धुंधली होती है। व्यक्ति को बाद में यह महसूस होता है कि उसने सहमति तो दी थी, लेकिन यह सहमति वास्तव में उसकी अपनी मर्जी, खुशी और इच्छा से नहीं दी गई थी। रिश्तों में पावर इंबैलेंस जब कोई व्यक्ति कहता है कि निर्णय उस पर थोपा गया तो यह रिश्ते में पावर इंबैलेंस (शक्ति के असंतुलन) का संकेत हो सकता है। हेल्दी रिश्तों में महत्वपूर्ण फैसले बातचीत और आपसी सहमति से लिए जाते हैं। यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके पास सहमत होने के अलावा वास्तव में कोई दूसरा विकल्प नहीं है तो वह कई कारणों से पार्टनर के फैसलेे में हामी भर सकता है। जैसेकि– हो सकता है कि उसे रिश्ते के टूट जाने का डर हो। हो सकता है कि वह पार्टनर पर इमोशनली पूरी तरह डिपेंडेंट हों। हो सकता है कि उसमें आत्मविश्वास की कमी हो। हो सकता है कि वो खुद को बहुत कमजोर और वलनरेबल महसूस करता हो। ऐसी परिस्थितियों में लगातार घुटन और तनाव महसूस होना बहुत स्वाभाविक इमोशनल रिएक्शन है। अगर संबंधों में लंबे समय तक तनाव रहे तो इससे नींद की समस्या, एंग्जाइटी, इमोशनल फटीग, आत्मसम्मान में कमी जैसे अनुभव हो सकते हैं। ये सारे संकेत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि व्यक्ति की भावनात्मक जरूरतें पूरी नहीं हो रही हैं। सबसे पहले जरूरी है खुद को समझना आपके सवाल ने बहुत से तथ्य साफ कर दिए हैं, लेकिन फिर भी आपकी स्थिति का मूल्यांकन आपसे बेहतर कोई नहीं कर सकता। आपको खुद से कुछ सवाल पूछने और अपना सेल्फ इवैल्यूएशन करने की जरूरत है। ये पहला कदम है। जब जमीनी स्थिति साफ समझ में आएगी तभी आप ये तय कर पाएंगी कि आगे आपको कौन–सा रास्ता चुनना चाहिए, कौन से फैसले करने चाहिए। तो आइए शुरू करते हैं। सेल्फ इवैल्यूएशन टेस्ट 1 मैंने ओपन रिलेशनशिप के लिए सहमति क्यों दी? यहां पहला और सबसे जरूरी सवाल ये है कि आप अपनी मर्जी के खिलाफ जाकर ओपन रिलेशनशिप के लिए राजी क्यों हुईं। आपने हामी क्यों भरी। यह सवाल किसी तरह का आरोप नहीं है। यह अपने आत्म–मूल्यांकन का पहला सबसे जरूरी कदम है। मैंने सहमति दिए जाने के पीछे कुछ संभावित कारणों का ऊपर जिक्र किया है। लेकिन आपको अपना इवैल्यूएशन करके यह समझना है कि आपके फैसले के पीछे सबसे बड़ा और ठोस कारण क्या था। नीचे ग्राफिक में कुछ 6 सवाल दिए हैं। आपको इन सवालों को 1 से 10 के स्केल पर रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल के लिए अगर आपको लगता है कि

Watchman to Vegetable Seller to Bollywood Actor

Watchman to Vegetable Seller to Bollywood Actor

2 घंटे पहलेलेखक: आशीष तिवारी/वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक छोटे से कस्बे बुधाना और संघर्ष की गलियों से निकलकर अभिनय का बादशाह बने नवाजुद्दीन सिद्दीकी। छोटे से कस्बे बुधाना से निकलकर बॉलीवुड तक का सफर तय करने वाले नवाजुद्दीन सिद्दीकी की कहानी संघर्ष, धैर्य और जुनून की मिसाल है। किसान परिवार में जन्मे नवाज ने बचपन सादगी और सीमित संसाधनों के बीच बिताया। केमिस्ट की नौकरी से लेकर दिल्ली में थिएटर और फिर मुंबई में छोटे-छोटे रोल करने तक, उनका सफर आसान नहीं रहा। कई फिल्मों में 1-2 मिनट की झलक से शुरुआत करने वाले नवाज ने कभी हार नहीं मानी। धीरे-धीरे उनके अभिनय की सच्चाई ने दर्शकों और फिल्ममेकरों का ध्यान खींचा। ब्लैक फ्राइडे, पीपली लाइव और न्यूयॉर्क जैसी फिल्मों ने उनके टैलेंट की झलक दी, लेकिन असली पहचान गैंग्स ऑफ वासेपुर से मिली। इसके बाद कहानी, द लंचबॉक्स और मांझी: द माउंटेन मैन जैसी फिल्मों में दमदार अभिनय ने उन्हें इंडस्ट्री के सबसे भरोसेमंद अभिनेताओं में शामिल कर दिया। आज की सक्सेस स्टोरी में आइए जानते हैं नवाजुद्दीन सिद्दीकी के करियर और निजी जीवन से जुड़ी कुछ और बातें.. बुधाना के किसान परिवार में जन्म और बचपन की सादगी भरी जिंदगी नवाजुद्दीन सिद्दीकी का जन्म 19 मई 1974 को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के छोटे से कस्बे बुधाना में एक किसान परिवार में हुआ था। गांव का माहौल बेहद साधारण था और वहां मनोरंजन के साधन भी बहुत कम थे। बचपन में वे स्थानीय रामलीला और छोटे-मोटे मंचीय कार्यक्रमों को देखकर अभिनय से प्रभावित होते थे। गांव की सादगी और जमीन से जुड़ा जीवन उनके व्यक्तित्व का अहम हिस्सा बना। यही वजह है कि आगे चलकर उनके अभिनय में आम आदमी की सच्चाई झलकती है। छोटे कस्बे में पले-बढ़े नवाज ने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वह बॉलीवुड के सबसे प्रभावशाली अभिनेताओं में गिने जाएंगे। नौ भाई-बहनों के बीच पले-बढ़े, छोटे कस्बे से बड़े सपनों की शुरुआत नवाजुद्दीन सिद्दीकी नौ भाई-बहनों वाले बड़े परिवार में पले-बढ़े। इतने बड़े परिवार में जिम्मेदारियां भी जल्दी आ जाती हैं। घर में अनुशासन और मेहनत का माहौल था, जिसने उनके स्वभाव को मजबूत बनाया। छोटे कस्बे से होने के बावजूद नवाज के अंदर कुछ अलग करने की चाह थी। परिवार की साधारण जिंदगी और सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने बड़े सपने देखे। यही सपना बाद में उन्हें गांव से बाहर निकलकर अभिनय की दुनिया की ओर ले गया। उनके लिए यह सफर आसान नहीं था, लेकिन बचपन की परिस्थितियों ने उन्हें संघर्ष के लिए तैयार कर दिया। केमिस्ट की नौकरी करते हुए एक्टिंग का सपना जागा कॉलेज से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन करने के बाद नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने वडोदरा में केमिस्ट की नौकरी की। यही वह समय था जब पहली बार उन्होंने थिएटर का नाटक देखा और अभिनय का सपना उनके भीतर जन्मा। एक नाटक देखने के बाद उन्हें लगा कि यही वह दुनिया है जिसमें वह खुद को देखना चाहते हैं। उस रात उन्होंने तय किया कि जीवन में कुछ भी हो जाए, लेकिन अभिनय जरूर करेंगे। यह फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ और उन्होंने स्थिर नौकरी छोड़कर अभिनय के अनिश्चित रास्ते पर चलने का जोखिम उठाया। दिल्ली आकर थिएटर जॉइन करने का फैसला नौकरी छोड़ने के बाद नवाजुद्दीन दिल्ली पहुंचे और थिएटर से जुड़ने का फैसला किया। यह कदम बेहद जोखिम भरा था क्योंकि उनके पास स्थायी आय का कोई साधन नहीं था। लेकिन अभिनय के प्रति जुनून इतना मजबूत था कि उन्होंने हर मुश्किल को स्वीकार किया। दिल्ली के थिएटर ग्रुप्स में काम करते हुए उन्होंने मंच की बारीकियां सीखीं और अभिनय की समझ विकसित की। थिएटर ने उन्हें आत्मविश्वास दिया और यही अनुभव आगे चलकर फिल्मों में उनके अभिनय की मजबूत नींव बना। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला और अभिनय की असली ट्रेनिंग थिएटर में रुचि बढ़ने के बाद नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने दिल्ली के प्रतिष्ठित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में दाखिला लिया। यहां उन्हें अभिनय की पेशेवर ट्रेनिंग मिली और अभिनय के तकनीकी पहलुओं को समझने का मौका मिला। NSD के दिनों में उन्होंने कई नाटकों में काम किया और अपने हुनर को निखारा। यह संस्थान उनके लिए जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ क्योंकि यहीं से उन्हें अभिनय में आत्मविश्वास मिला और उन्होंने बड़े सपने देखने शुरू किए।नवाज कहते हैं- NSD ने मुझे वह आत्मविश्वास दिया जो बॉलीवुड के कई लोगों के पास नहीं होता। थिएटर के दिनों में पैसों की तंगी और दोस्तों के सहारे गुजारा दिल्ली में थिएटर करते समय नवाजुद्दीन को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई बार उनके पास किराया देने या रोजमर्रा के खर्च के लिए भी पैसे नहीं होते थे। ऐसे समय में दोस्तों और साथी कलाकारों ने उनका साथ दिया। वे कई-कई लोगों के साथ कमरों में रहते थे और बेहद साधारण जीवन बिताते थे। संघर्ष के ये साल उनके लिए सीखने और खुद को मजबूत बनाने का समय थे। इन्हीं अनुभवों ने उन्हें जमीन से जुड़े किरदार निभाने की क्षमता दी। मुंबई पहुंचकर वाचमैन की नौकरी और ऑडिशन का लंबा संघर्ष NSD से पढ़ाई पूरी करने के बाद नवाजुद्दीन मुंबई पहुंचे। यहां शुरुआत बेहद कठिन रही। फिल्मों में काम मिलने से पहले उन्होंने गुजारा चलाने के लिए वाचमैन की नौकरी भी की। दिन में ऑडिशन और रात में नौकरी, यही उनकी दिनचर्या बन गई थी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास करते रहे। यह संघर्ष उनके करियर का अहम हिस्सा रहा जिसने उन्हें मजबूत बनाया। फिल्मों में 1-2 मिनट के छोटे रोल, लेकिन हार नहीं मानी मुंबई में शुरुआती दौर में नवाजुद्दीन को फिल्मों में बहुत छोटे-छोटे रोल मिले। कई बार उनका स्क्रीन टाइम सिर्फ एक-दो मिनट का होता था। बावजूद इसके उन्होंने हर किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाया। उन्हें विश्वास था कि एक दिन उनका अभिनय जरूर पहचाना जाएगा। छोटे रोल करते हुए भी उन्होंने अभिनय का अभ्यास जारी रखा और खुद को बेहतर बनाते रहे। यही जिद आगे चलकर उनके करियर की सबसे बड़ी ताकत बनी। नवाज कहते हैं- मैंने हर छोटा-बड़ा रोल किया, जो भी मिला उसे स्वीकार किया। ‘सरफरोश’ और अन्य फिल्मों में छोटी झलक से शुरुआत नवाजुद्दीन सिद्दीकी को शुरुआती पहचान फिल्म ‘सरफरोश में छोटे से रोल से मिली। इस फिल्म

President Murmu Agri-Food Global | National Current Affairs For Govt Job Students

President Murmu Agri-Food Global | National Current Affairs For Govt Job Students

Hindi News Career President Murmu Agri Food Global | National Current Affairs For Govt Job Students 2 घंटे पहले कॉपी लिंक जानते हैं आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं… नेशनल (NATIONAL) 1. राष्ट्रपति मुर्मू ने एग्री फूड ग्लोबल कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया 12 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली में एग्री फूड सिस्टम ग्लोबल कॉन्फ्रेंस 2026 का उद्घाटन किया। इस ग्लोबल कॉन्फ्रेंस की थीम ‘प्रगति बढ़ाना, नई ऊंचाइयां छूना’ है। ये कॉन्फ्रेंस भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) कन्वेंशन सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित हुई। इस मौके पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद रहे। ये कॉन्फ्रेंस तीन दिनों तक चलेगी। कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी शामिल होंगी। इस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य महिला किसानों को प्रोत्साहित करना और नए इनोवेशन की जानकारी साझा करना है। कॉन्फ्रेंस में भारत और दुनिया भर के वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, उद्यमियों, विकास पेशेवरों, महिला किसानों, स्टार्ट-अप और छात्रों सहित 700 से ज्यादा प्रतिनिधी भाग लेंगे। ICAR के डायरेक्टर जनरल डॉ. एम. एल. जाट हैं। कॉन्फ्रेंस के उद्देश्य -महिला किसानों के लिए अनुकूल कृषि नीतियों को बढ़ावा देना।कृषि में महिला आंत्रेप्रेन्‍योर्स को प्रोत्साहित करना।महिला किसानों के लिए वैश्विक सहयोग को मजबूत करना। इस कॉन्फ्रेंस में डिजिटली, क्लाइमेट फ्रेंडली खेती पर बातचीत की। 2. INS त्रिकंद मॉरीशस के 58वें राष्ट्रीय दिवस समारोह में शामिल होगा 13 मार्च को भारतीय नौसेना का जहाज INS त्रिकंद मॉरीशस के 58वें राष्ट्रीय दिवस समारोह में हिस्सा लेगा। 11 मार्च को INS त्रिकंद साउथ वेस्ट इंडियन ओशियन रीजन के पोर्ट लुईस पहुंचा। INS त्रिकंद का एक मार्चिंग कंटिजेंट, नेवल बैंड और एक हेलीकॉप्टर ‘चैंप डे मार्स नेशनल डे परेड’ में हिस्सा लेगा। नेशनल परेड डे के मौके पर कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी मॉरीशस सरकार और मॉरीशस कोस्ट गार्ड के सीनियर ऑफिसर्स से भी मुलाकात करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य समुद्री सहयोग को मजबूत करना, ऑपरेशनल कैपिसिटी को बढ़ाना और भारत -मॉरीशस के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना है। INS त्रिकंद (F51) भारतीय नौसेना में तलवार कैटेगरी का एक स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट है। INS त्रिकंद हवा, सतह और पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए डिजाइन किया गया है। ये उन्नत युद्धपोतों में से एक है। INS त्रिकंद को 29 जून 2013 में इंडियन नेवी में शामिल किया गया था। INS त्रिकंद को कलिनिनग्राद रूस में इंडियन नेवी के नौसेना स्टाफ के उपाध्यक्ष वाइस एडमिरल आर. के. धवन ने नौसेना में शामिल किया था। INS त्रिकंद को भारत- रूस पार्ट्नर्शिप के तहत रूस ने बनाया है। इस कैटेगरी के अन्य जहाज, INS तेग और INS तरकश पिछले साल कमीशन किए गए थे, जो पश्चिमी बेड़े मे शामिल हैं। INS त्रिकंद में एक अत्याधुनिक लड़ाकू सूट है जो एक साथ कई खतरों से निपटने में सक्षम है। त्रिकंद नाम 3 सिरों वाले एक पौराणिक तीर से लिया गया है। INS त्रिकंद में रडार, चुंबकीय और ध्वनिक संकेतों को कम करने के फीचर भी शामिल हैं, इसलिए जहाजों के इस वर्ग को ‘स्टील्थ’ फ्रिगेट्स का उपनाम दिया है। INS त्रिकंद एक साथ कई सतह, उप-सतह और हवाई खतरों को बेअसर करता है। 3. केंद्र सरकार ने टेलीग्राम एप को पाइरेटेड सामग्री हटाने का नोटिस दिया 12 मार्च को सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने टेलीग्राम एप को एक नोटिस जारी किया है। नोटिस में मंत्रालय ने टेलीग्राम चैनल से सभी पाइरेटेड कंटेंट हटाने का आदेश दिया है। मंत्रालय ने इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 के तहत, टेलीग्राम को अपनी एप्लिकेशन से पायरेटेड कंटेन्ट हटाने का नोटिस दिया है। मंत्रालय ने प्लेटफॉर्म को ऐसे 3,142 टेलीग्राम चैनलों को हटाने का आदेश दिया है, जिनमें पाइरेटेड कंटेंट है। ये चैनल फिल्म, वेब सीरीज, ओटीटी टाइटल और ऑडियोबुक के अन-ऑथराइज्‍ड कंटेंट बेच या शेयर कर रहे थे। प्लेटफॉर्म को नोटिस मिलने के 3 घंटे के भीतर ही टेलीग्राम को पाइरेटेड कंटेंट हटाना होगा। ये कार्रवाई अमेजन प्राइम वीडियो और जियो सिनेमा जैसे OTT प्‍लेटफॉर्म्‍स से बड़े पैमाने पर पाइरेसी की शिकायतों के बाद की गई है। इससे पहले, 24 फरवरी को केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट दिखाने वाले 5 ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म (OTT) को ब्लॉक किया था। इन प्लेटफॉर्म में मूडएक्सवीआईपी, कोयल प्लेप्रो, डिजी मूवीप्लेक्स, फील और जुगनू शामिल थे। जुलाई 2025 में Ullu-ALTT समेत 25 OTT प्लेटफॉर्म बैन किए गए थे। ALTT ऐप अप्रैल 2017 में फिल्म और टीवी प्रोड्यूसर एकता कपूर ने लॉन्च किया था। ये कार्रवाई अमेजन प्राइम वीडियो और जियो सिनेमा जैसे OTT प्‍लेटफॉर्म्‍स से बड़े पैमाने पर पाइरेसी की शिकायतों के बाद की गई है। 4. BCCI शुभमन गिल को क्रिकेटर ऑफ द ईयर अवॉर्ड देगा 12 मार्च को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने एनुअल अवॉर्ड प्रोग्राम का ऐलान किया। टेस्ट और वनडे कप्तान शुभमन गिल को क्रिकेटर ऑफ द ईयर अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। पूर्व भारतीय खिलाड़ी और हेड कोच राहुल द्रविड़ को कर्नल सीके नायडू लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया जाएगा। आयुष म्हात्रे को लाला अमरनाथ अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। म्हात्रे अंडर 19 वनडे वर्ल्ड कप टीम के कैप्टन हैं। भारतीय महिला टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज को भी लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा घरेलू क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए मुंबई एसोसिएशन को बेस्ट क्रिकेट एसोसिएशन का पुरस्कार दिया जाएगा। BCCI अवार्ड सेरेमरी का आयोजन 15 मार्च को किया जाएगा। 5. यूएस स्पेस रॉकेट सेंटर की पूर्व CEO डेबोरा बार्नहार्ट का निधन 11 मार्च को यूएस स्पेस रॉकेट सेंटर की पूर्व CEO डेबोरा बार्नहार्ट का 73 साल की उम्र में निधन हो गया। बार्नहार्ट ने 2019 में पद छोड़ने से पहले 9 साल तक US SRC को लीड किया। बार्नहार्ट 1986 से 1990 तक स्पेस कैंप की डायरेक्टर रहीं। शुरुआती करियर में उन्होंने मीडिया, मार्केटिंग, कॉर्पोरेट फंडरेजर के तौर पर काम किया। डॉ. बार्नहार्ट 2010 में रॉकेट सेंटर की CEO और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रहीं। अपोलो 11 मून लैंडिंग के 50 साल होने के मौके पर बार्नहार्ट दिसंबर 2019 में रिटायर हुईं। डॉ. बार्नहार्ट एक रिटायर्ड अमेरिकी नेवी कैप्टन भी थीं। वे जहाजों पर ड्यूटी करने वाली पहली 10 महिलाओं में से एक थीं। डॉ. बार्नहार्ट

मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना का शुभारंभ

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खरगोन| मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना के तहत जिले में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने और गोपालन व डेयरी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में पहल शुरू की गई है। कलेक्टर भव्या मित्तल ने बताया कि जिले में 2000 से अधिक आबादी और 500 से अधिक गोवंश वाले 6 ग्रामों का चयन किया गया है। इसी क्रम में गुरुवार को चयनित ग्राम टेमला में ग्राम भ्रमण कर महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के समूहों के साथ चर्चा कर गांव की प्रमुख आवश्यकताओं का आकलन किया गया। कार्यक्रम में कलेक्टर, जिपं सीईओ मिलिंद कुमार नागदेवे, अतिरिक्त सीईओ राजेश शाक्य सहित अधिकारी व जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। योजना के तहत कार्यों के माध्यम से समग्र ग्राम विकास किया जाएगा।

अमेरिका ने एच-1बी वीजा देने की प्रक्रिया में बदलाव किया:अब सैलरी के आधार पर होगा चयन; 1 अप्रैल से नया फार्म I-129 लागू होगा

अमेरिका ने एच-1बी वीजा देने की प्रक्रिया में बदलाव किया:अब सैलरी के आधार पर होगा चयन; 1 अप्रैल से नया फार्म I-129 लागू होगा

अमेरिका ने एच-1बी वीजा प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब लाभार्थियों का चयन रैंडम लॉटरी के बजाय वेतन के आधार पर होगा। इसके लिए अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी ने फॉर्म I-129 का नया सिस्टम बनाया है, जिसे 1 अप्रैल 2026 से अनिवार्य कर दिया जाएगा। कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए दाखिल याचिका में नौकरी से जुड़ी जानकारी देनी होगी। इससे पहले की तुलना में ज्यादा अनुभवी और हाई सैलरी पाने वाले प्रोफेशनल्स को वीजा मिलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। नए सिस्टम में आवेदकों को चार वेतन स्तरों में बांटा जाएगा। जिस पद का वेतन स्तर जितना ऊंचा होगा, चयन प्रक्रिया में उसे उतने अधिक मौके मिलेंगे। मसलन, लेवल-4 के उम्मीदवार को चार मौके मिलेंगे, जबकि लेवल-1 को सिर्फ एक मौका मिलेगा। फॉर्म I-129 का उपयोग अस्थायी कामगारों को अमेरिका बुलाने के लिए किया जाता है। अमेरिका का श्रम विभाग हर पेशे और शहर के लिए एक मानक वेतन तय करता है। उसी के आधार पर नौकरी को लेवल-1 से लेवल-4 में रखा जाता है। 70% एच-1 बी वीजा भारतीयों को मिलता है एच-1 बी पर ट्रम्प की कभी हां, कभी ना ट्रम्प का एच-1 बी वीजा पर 9 साल में कभी हां, कभी ना वाला रवैया रहा है। पहले कार्यकाल में 2016 में ट्रम्प ने इस वीजा को अमेरिकी हितों के खिलाफ कहा था। 2019 में इस वीजा का एक्सटेंशन सस्पेंड किया। पिछले महीने ही यू-टर्न लेते हुए कहा- हमें टैलेंट की जरूरत है। गोल्ड कार्ड में हमेशा रहने का अधिकार मिलेगा ट्रम्प ने H-1B में बदलाव के अलावा 3 नए तरह के वीजा कार्ड लॉन्च किए थे। ‘ट्रम्प गोल्ड कार्ड’, ‘ट्रम्प प्लेटिनम कार्ड’ और ‘कॉर्पोरेट​​​​​ गोल्ड कार्ड’ जैसी सुविधाएं भी शुरू की गई हैं। ट्रम्प गोल्ड कार्ड (8.8 करोड़ कीमत) व्यक्ति को अमेरिका में अनलिमिटेड रेसीडेंसी (हमेशा रहने) का अधिकार देगा। टेक कंपनियां सबसे ज्यादा H-1B स्पॉन्सर करती हैं भारत हर साल लाखों इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस के ग्रेजुएट तैयार करता है, जो अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इंफोसिस, TCS, विप्रो, कॉग्निजेंट और HCL जैसी कंपनियां सबसे ज्यादा अपने कर्मचारियों को H-1B वीजा स्पॉन्सर करती हैं। कहा जाता है कि भारत अमेरिका को सामान से ज्यादा लोग यानी इंजीनियर, कोडर और छात्र एक्सपोर्ट करता है। अब फीस महंगी होने से भारतीय टैलेंट यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, मिडिल ईस्ट के देशों की ओर रुख करेगा।

US H1B Visa Selection: Salary-Based From April 1

US H1B Visa Selection: Salary-Based From April 1

नई दिल्ली1 दिन पहले कॉपी लिंक अमेरिका ने एच-1बी वीजा प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब लाभार्थियों का चयन रैंडम लॉटरी के बजाय वेतन के आधार पर होगा। इसके लिए अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी ने फॉर्म I-129 का नया सिस्टम बनाया है, जिसे 1 अप्रैल 2026 से अनिवार्य कर दिया जाएगा। कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए दाखिल याचिका में नौकरी से जुड़ी जानकारी देनी होगी। इससे पहले की तुलना में ज्यादा अनुभवी और हाई सैलरी पाने वाले प्रोफेशनल्स को वीजा मिलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। नए सिस्टम में आवेदकों को चार वेतन स्तरों में बांटा जाएगा। जिस पद का वेतन स्तर जितना ऊंचा होगा, चयन प्रक्रिया में उसे उतने अधिक मौके मिलेंगे। मसलन, लेवल-4 के उम्मीदवार को चार मौके मिलेंगे, जबकि लेवल-1 को सिर्फ एक मौका मिलेगा। फॉर्म I-129 का उपयोग अस्थायी कामगारों को अमेरिका बुलाने के लिए किया जाता है। अमेरिका का श्रम विभाग हर पेशे और शहर के लिए एक मानक वेतन तय करता है। उसी के आधार पर नौकरी को लेवल-1 से लेवल-4 में रखा जाता है। 70% एच-1 बी वीजा भारतीयों को मिलता है ट्रम्प के आदेश का क्या असर- भारतीयों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, क्योंकि हर साल कुल जारी किए जाने वाले एच-1बी वीजा में से 70% भारतीय प्रोफेशनल्स को जारी किए जाते हैं। एच-1 बी वीजा की फीस कितनी- पहले फीस लगभग 9 हजार डॉलर यानी करीब 8 लाख 30 हजार रुपए थी, लेकिन सितंबर 2025 में ट्रम्प ने इसे बढ़ाकर 1 लाथ डॉलर यानी लगभग 90 लाख रुपए कर दिया। इस वीजा की अवधि कितनी है- 3-3 साल के लिए दो बार जारी होता है। कुल अवधि 6 साल के बाद आवेदक चाहे तो ग्रीन कार्ड यानी नागरिकता से पहले की स्टेज के लिए आवेदन कर सकता है। एच-1 बी पर ट्रम्प की कभी हां, कभी ना ट्रम्प का एच-1 बी वीजा पर 9 साल में कभी हां, कभी ना वाला रवैया रहा है। पहले कार्यकाल में 2016 में ट्रम्प ने इस वीजा को अमेरिकी हितों के खिलाफ कहा था। 2019 में इस वीजा का एक्सटेंशन सस्पेंड किया। पिछले महीने ही यू-टर्न लेते हुए कहा- हमें टैलेंट की जरूरत है। गोल्ड कार्ड में हमेशा रहने का अधिकार मिलेगा ट्रम्प ने H-1B में बदलाव के अलावा 3 नए तरह के वीजा कार्ड लॉन्च किए थे। ‘ट्रम्प गोल्ड कार्ड’, ‘ट्रम्प प्लेटिनम कार्ड’ और ‘कॉर्पोरेट​​​​​ गोल्ड कार्ड’ जैसी सुविधाएं भी शुरू की गई हैं। ट्रम्प गोल्ड कार्ड (8.8 करोड़ कीमत) व्यक्ति को अमेरिका में अनलिमिटेड रेसीडेंसी (हमेशा रहने) का अधिकार देगा। टेक कंपनियां सबसे ज्यादा H-1B स्पॉन्सर करती हैं भारत हर साल लाखों इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस के ग्रेजुएट तैयार करता है, जो अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इंफोसिस, TCS, विप्रो, कॉग्निजेंट और HCL जैसी कंपनियां सबसे ज्यादा अपने कर्मचारियों को H-1B वीजा स्पॉन्सर करती हैं। कहा जाता है कि भारत अमेरिका को सामान से ज्यादा लोग यानी इंजीनियर, कोडर और छात्र एक्सपोर्ट करता है। अब फीस महंगी होने से भारतीय टैलेंट यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, मिडिल ईस्ट के देशों की ओर रुख करेगा। ————————————— ये खबर भी पढ़ें… अमेरिकी संसद में H-1B वीजा खत्म करने वाला बिल पेश:2027 तक बंद करने का टारगेट; भारतीयों पर सबसे ज्यादा असर होगा अमेरिकी संसद में H-1B वीजा प्रोग्राम को पूरी तरह खत्म करने के लिए एक बिल लाया गया है। फ्लोरिडा से रिपब्लिकन सांसद ग्रेग स्ट्यूबे ने इसे स्थानीय समयानुसार सोमवार को पेश किया। इस बिल को ‘एंडिंग एक्सप्लॉइटेटिव इम्पोर्टेड लेबर एग्जेम्प्शंस एक्ट’ यानी EXILE एक्ट नाम दिया गया है। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…