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11 महिलाएं, 40 साल से कम 36 और एक खिलाड़ी… बंगाल की 144 रेस पर बीजेपी की पहली लिस्ट का डिकोड

11 महिलाएं, 40 साल से कम 36 और एक खिलाड़ी... बंगाल की 144 रेस पर बीजेपी की पहली लिस्ट का डिकोड

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए सोमवार (16 मार्च 2026) को 144 जनवरी को पहली अपनी सूची जारी की। पार्टी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सीट कोलकाता के भवानीपुर से विरोधी नेता शुभेंदु अधिकारी को चुनाव मैदान में उतारा है। शुभेंदु अपनी स्थिर सीट नंदीग्राम से भी चुनाव लड़ेंगे। बीजेपी की ओर से की गई घोषणा में संकेत दिया गया है कि पश्चिम बंगाल की मुख्य पार्टी पार्टी ममता बनर्जी बनाम शुभेंदु अधिकारी के गुट- दिल्ली गिरीश विमर्श को गढ़ने का प्रयास किया जाएगा। 41 स्टैलिस्ट्स पर बीजेपी ने शौकीन भरोसेमंद बीजेपी चुनाव से पहले अपने स्टैबिलिस्ट बैस्ट को काफी हद तक मजबूत बनाए रख रही है और अपनी सामाजिक पहुंच को व्यापक बनाने के लिए विभिन्न बिजनेस बैकग्राउंड को शामिल कर रही है। पार्टी की ओर से 41 स्टैलिस्ट बैंच और थ्री ईस्ट बैंच को टिकट दिए जाने से संकेत मिलता है कि वह बड़े पैमाने पर वेस्ट इंडीज के बजाय स्टैंसिल पोलिटिकल नेटवर्क पर भरोसा कर रही है। आसनसोल साउथ से अग्निमित्र पॉल, साल्टोरा से चंदना बाउरी और डबग्राम-फुल बबीली से शिखा चटर्जी शामिल हैं। ममता बनर्जी बनाम शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम का यह राजनीतिक महत्व 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन का केंद्र था। इसी आंदोलन ने सीएम ममता बनर्जी की सत्ता में आने वाले समय में अहम भूमिका निभाई, लेकिन 2021 में यह सबसे बड़ी चुनावी रैली बन गई, जब शुभेंदु अधिकारी ने सीएम ममता बनर्जी को लगभग 1,900 सीटों से हरा दिया। भवानीपुर को ममता बनर्जी का राजनीतिक गढ़ माना जाता है। वह 2021 में इस सीट से 58000 से अधिक झील के अंतर से सोलो झील झील लौटी थी। महिलाओं और युवाओं पर बीजेपी ने भरोसा जताया बीजेपी ने 11 महिलाओं को भी टिकट दिया है और युवाओं पर दावा किया गया है कि 36 सीट पर 40 साल से कम उम्र के युवाओं को मैदान में उतारा गया है। इसी तरह 72 अभ्यर्थियों की उम्र 41 से 55 साल के बीच है जबकि 32 अभ्यर्थियों की उम्र 56 से 70 साल के बीच है. चार अभ्यर्थी 70 वर्ष से अधिक आयु के हैं। पार्टी के 144 क्षेत्र में 57 शिक्षण, वकील, डॉक्टर, सामाजिक कार्यकर्ता और सशस्त्र सेनाएं शामिल हैं। पार्टी ने सबसे ज्यादा 23 से ज्यादा पार्टिसिपेंट्स को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा पार्टी ने 8 सामाजिक कार्यकर्ता, 6 वकील, 5 डॉक्टर, 3 पत्रकार, 3 आध्यात्मिक नेता, 3 सैनिक, 1 सामाजिक कार्यकर्ता से जुड़े व्यक्ति, 1 क्रिकेटर, 1 सेवानिवृत्त नौकरी अधिकारी, 1 लोक गायक को उम्मीदवार बनाया है। वंदे मातरम के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार से जुड़े सौमित्र चट्टोपाध्याय को नैहाटी से भाजपा की दावेदार बनाया गया है। (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी(टी)पश्चिम बंगाल(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)शुभेंदु अधिकारी(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल

डॉक्टर की सलाह… रातभर भिगोकर खाएं ये 5 चीजें, शरीर को मिलेंगे चौंकाने वाले फायदे

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  अच्छी सेहत के लिए केवल महंगे फूड्स या सप्लीमेंट्स ही जरूरी नहीं होते, बल्कि कई बार साधारण और प्राकृतिक चीजें भी शरीर को बड़ा फायदा दे सकती हैं. डॉक्टर सलीम जैदी के अनुसार हमारी रसोई में मौजूद कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें अगर पानी में भिगोकर खाया जाए तो उनका पोषण और भी ज्यादा असरदार हो जाता है. भिगोने से इन खाद्य पदार्थों में मौजूद विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट शरीर में आसानी से अवशोषित हो पाते हैं, जिससे उनका पूरा लाभ मिलता है. डॉ. जैदी बताते हैं कि कुछ खास बीज को रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाने से पाचन बेहतर होता है, शरीर को अच्छी ऊर्जा मिलती है और इम्यून सिस्टम भी मजबूत बन सकता है. नियमित रूप से इन चीजों को डाइट में शामिल करने से शरीर को जरूरी पोषण मिलता है, जिससे कई सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव में भी मदद मिल सकती है. यही वजह है कि पुराने समय से ही भिगोकर खाने की परंपरा को हेल्दी आदत माना जाता रहा है.

शरीर में विटामिन-डी की कमी बढ़ा सकती है थायरॉइड कैंसर का खतरा? एक्सपर्ट ने बताया सच

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Last Updated:March 16, 2026, 23:26 IST आजकल Vitamin D की कमी एक आम समस्या बनती जा रही है. कई रिसर्च में यह सवाल उठाया गया है कि क्या कम Vitamin D का स्तर Thyroid Cancer के खतरे को बढ़ा सकता है. इस विषय पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि Vitamin D और Thyroid हेल्थ के बीच गहरा संबंध हो सकता है. Vitamin D की कमी Thyroid से जुड़ी. आज की तेज रफ्तार जिंदगी में विटामिन-डी की कमी एक बड़ी हेल्थ समस्या बनती जा रही है. ज्यादातर लोग दिनभर घर या ऑफिस के अंदर रहते हैं, जिससे शरीर को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती. विटामिन-डी को अक्सर “सनशाइन विटामिन” कहा जाता है क्योंकि यह मुख्य रूप से सूरज की रोशनी से शरीर में बनता है. लेकिन जब शरीर में इसका स्तर कम हो जाता है, तो यह कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ सकता है. हाल के वर्षों में यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या विटामिन-डी की कमी थायरॉइड से जुड़ी गंभीर बीमारियों, यहां तक कि थायरॉइड कैंसर के खतरे को भी बढ़ा सकती है. बोरीवली के एचसीजी कैंसर सेंटर के सीनियर डॉक्टर डॉ. यश माथुर का कहना है कि, थायरॉइड शरीर की एक महत्वपूर्ण ग्रंथि है, जो हार्मोन बनाकर मेटाबॉलिज्म, एनर्जी और शरीर के कई जरूरी कार्यों को नियंत्रित करती है. जब थायरॉइड ठीक से काम नहीं करता तो शरीर में कई तरह की परेशानियां शुरू हो सकती हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि विटामिन-डी का शरीर के इम्यून सिस्टम और हार्मोन संतुलन से गहरा संबंध होता है. यही कारण है कि इसकी कमी कई हार्मोनल समस्याओं से जुड़ सकती है. कुछ रिसर्च में यह पाया गया है कि जिन लोगों को थायरॉइड कैंसर होता है, उनमें अक्सर विटामिन-डी का स्तर कम पाया जाता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि विटामिन-डी शरीर की कोशिकाओं के विकास और इम्यून सिस्टम को नियंत्रित करने में भूमिका निभाता है. जब इसकी मात्रा कम होती है तो शरीर में सूजन और इम्यून असंतुलन बढ़ सकता है, जो कई बीमारियों के जोखिम को बढ़ाने में योगदान दे सकता है. हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि विटामिन-डी की कमी सीधे तौर पर थायरॉइड कैंसर का कारण नहीं मानी जाती. लेकिन यह कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा कर सकती है जो Thyroid से जुड़ी समस्याओं के जोखिम को बढ़ा दें. इसलिए डॉक्टर अक्सर थायरॉइड से जुड़ी परेशानी वाले मरीजों में Vitamin D के स्तर की जांच कराने की सलाह देते हैं. विटामिन-डी की कमी के कुछ सामान्य लक्षण भी होते हैं जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. जैसे लगातार थकान रहना, हड्डियों में दर्द, कमजोरी महसूस होना, मूड में बदलाव और बाल झड़ना. दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कई लक्षण थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं में भी दिखाई दे सकते हैं. यही वजह है कि कई बार दोनों स्थितियों की जांच साथ-साथ करने की जरूरत पड़ती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार विटामिन-डी के स्तर को बनाए रखने के लिए रोजाना थोड़ी देर धूप में समय बिताना जरूरी है. इसके अलावा डाइट में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए जिनमें विटामिन-डी अच्छी मात्रा में मिलता हो. जैसे फैटी फिश, अंडे, फोर्टिफाइड दूध और कुछ डेयरी प्रोडक्ट्स. अगर शरीर में विटामिन-डी का स्तर बहुत कम हो तो डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट भी लिया जा सकता है. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : March 16, 2026, 23:24 IST

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक की:तालिबान का आरोप- काबुल में अस्पताल पर बम गिराए, इलाज करा रहे कई लोग मारे गए

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक की:तालिबान का आरोप- काबुल में अस्पताल पर बम गिराए, इलाज करा रहे कई लोग मारे गए

पाकिस्तान ने सोमवार रात एक बार फिर अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक की है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक पाकिस्तानी एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों ने राजधानी काबुल के कई इलाकों को निशाना बनाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दारुलअमान, अरजान कीमत, खैरखाना और काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास कई जगहों पर धमाकों और गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना ने काबुल में एक नशा मुक्ति अस्पताल पर बम गिराए। उनके मुताबिक हमले के वक्त वहां इलाज करा रहे कई लोग मारे गए और घायल हुए हैं। तालिबान ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया है और कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की हवाई सीमा का उल्लंघन किया है। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इस हमले को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। PAK ने कल रात भी अफगानिस्तान में हमले किए पाकिस्तान ने रविवार रातभर कंधार प्रांत में एयर स्ट्राइक कर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। पाकिस्तान ने यह कार्रवाई ऑपरेशन गजब-लिल-हक के तहत की। इसके जवाब में अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के सैन्य कैंप पर हमला किया। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के मुताबिक, हमले में उन ठिकानों को निशाना बनाया गया जिनका इस्तेमाल तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे संगठन सीमा पार हमलों की तैयारी के लिए करते थे। पाकिस्तान ने यह भी आरोप लगाया है कि शुक्रवार रात अफगानिस्तान की ओर से ड्रोन हमला किया गया था, जिसका मलबा गिरने से क्वेटा में दो बच्चों समेत कुछ नागरिक घायल हो गए। पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच जंग जैसे हालात पाकिस्तान और अफगानिस्तान में संघर्ष की शुरुआत 22 फरवरी को हुई थी। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की थी। पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने दावा किया था कि सीमावर्ती इलाकों में TTP के ठिकानों पर कार्रवाई में कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह संख्या 80 तक पहुंचने का दावा किया था। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने 27 फरवरी को पाकिस्तान पर हमला किया। अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान को ‘सही समय पर कड़ा जवाब’ दिया जाएगा। मंत्रालय ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया था। पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर दबाव बनाता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से ऑपरेट हो रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है। 1 लाख लोग घर छोड़ने को मजबूर हुए पिछले कुछ हफ्तों में अफगान और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच सीमा पर कई बार झड़पें हो चुकी हैं। संयुक्त राष्ट्र के अफगानिस्तान मिशन (UNAMA) के अनुसार 26 फरवरी से 5 मार्च के बीच पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों में 56 नागरिक मारे गए हैं। इनमें 24 बच्चे भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के मुताबिक इन हमलों के कारण करीब 1.15 लाख लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाने को मजबूर हुए हैं। पाकिस्तान और TTP में लड़ाई क्यों? 2001 में अमेरिका के अफगानिस्तान पर हमले के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया। इससे TTP नाराज हो गया, वह इसे इस्लाम के खिलाफ मानता था। TTP का मानना है कि पाकिस्तान सरकार सच्चा इस्लाम नहीं मानती है, इसलिए वो उसके खिलाफ हमला करता है। TTP का अफगान तालिबान के साथ गहरा जुड़ाव है। दोनों समूह एक-दूसरे को समर्थन देते हैं। 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान ने TTP को निशाना बनाकर अफगानिस्तान में हमले किए। —————————– PAK-अफगान संघर्ष से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में 2 विस्फोटक ड्रोन मार गिराए:अफगानिस्तान ने सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया; पहले PAK ने काबुल पर एयरस्ट्राइक की पाकिस्तान में पिछले हफ्ते शुक्रवार को राजधानी इस्लामाबाद पर विस्फोटकों से भरे दो ड्रोन से हमला हुआ था, जिन्हें सुरक्षा एजेंसियों ने मार गिराया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक ड्रोन फैजाबाद इलाके के पास गिरा, जबकि दूसरा I-9 सेक्टर में गिराया गया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Iran War: बम से ज्यादा कहीं दवाई के बगैर मर न जाए खाड़ी देशों की जनता! सप्लाई चेन टूटने से त्राहिमाम

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Last Updated:March 16, 2026, 23:04 IST Iran War Disrupt Drug Supply Chain: ईरान युद्ध ने बम, गोला-बारूद से जितनी तबाही मचा रही है, वह तो हम सबके सामने है लेकिन इस जंग की वजह से कहीं ऐसा न हो जाए कि खाड़ी देशों के लोग दवाई के बगैर मरने लगे. दरअसल, जब से अमेरिका-इजरायल का ईरान पर हमला हुआ है तब से खाड़ी देशों में हवाई और जल मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुई है. इस कारण जरूरी दवाइयां इन देशों तक नहीं पहुंच रही है. ईरान-इजरायल, अमेरिका युद्ध के बाद ड्रग सप्लाई चेन बाधित. सांकेतिक तस्वीर. Iran War impact: ईरान युद्ध को करीब दो सप्ताह होने को है. दनदनाती मिसाइलों की गर्जना और कलस्टर बमों के शोर से जन-जीवन तो अस्त-व्यस्त हो ही चुका लेकिन आम लोगों के जीवन की डोर हिचकोले खाने लगे हैं. ऐसे में इस युद्ध में बम-बारूद से लोग मरे या न मरें दवाइयों की किल्लत से शायद जरूर मर जाएंगे. युद्ध ने जिस तरह से हवाई सेवा को प्रभावित किया है, उसमें आवश्यक दवाइयों की खेप आनी बंद हो गई. इस कारण दवाइयों का सप्लाई चेन टूट गया है. यह सिर्फ एक देश की बात नहीं है बल्कि पूरे खाड़ी देशों में दवाइयों का सप्लाई चेन प्रभावित हो रहा है. कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज के लिए जरूरी ‘कोल्ड-चेन’ दवाओं की सप्लाई भी बाधित हुई है. मेडिकल उपकरण में देरी जानलेवारायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी ने बताया कि अगर किसी मरीज की तुरंत सर्जरी होनी है और वह इलाज का इंतजार कर रहा है, तो आपको मजबूरी में हवाई मार्ग ही चुनना पड़ता है. इमरजेंसी सामान जैसे दवाइयां या मेडिकल उपकरण के लिए देरी जानलेवा हो सकती है. इसलिए महंगा और लंबा होने के बावजूद हवाई रास्ता ही चुना जा रहा है. एक्सपर्ट के मुताबिक कैंसर जैसी संवेदनशील दवाओं का स्टॉक आमतौर पर केवल तीन महीने का होता है. काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के प्रशांत यादव कहते हैं कि कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज जैसी दवाओं पर सबसे बड़ा खतरा है. कुछ ग्राहकों ने चेतावनी दी है कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो अगले 4 से 6 हफ्तों में उनके पास दवाओं की भारी कमी हो जाएगी. मूडिस के डेविड वीक्स ने चिंता जताते हुए कहा है कि कभी-कभी दवा की कमी नहीं होती, बल्कि उसे पैक करने या इस्तेमाल करने वाली चीजों की कमी हो जाती है. जैसे दवा की शीशियों के ढक्कन, आईवी बैग के प्लास्टिक और पैकेजिंग का सामान. अगर ये छोटी चीजें भी कम पड़ीं, तो दवाओं की पूरी सप्लाई चेन रुक सकती है. कैंसर मरीजों के लिए मुसीबतखाड़ी देश दवाइयों के लिए मुख्य रूप पश्चिमी देशों पर निर्भर है. बहुत सारी ऐसी दवाइयां होती है जिसकी एक्सपायरी डेट बहुत कम होती है. ऐसी दवाइयां जीवन रक्षक कैटगरी में ज्यादा आती है. यानी अगर ये दवाइयां कम होगी तो जो इन दवाइयों पर निर्भर मरीज हैं, उनके लिए भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है. इंडस्टी के अधिकारियों का कहना है कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध की वजह से खाड़ी देशों तक जरूरी दवाओं की पहुंच में बाधा आ रही है. सबसे ज्यादा कैंसर के इलाज की दवाओं और अन्य ऐसी दवाओं के लिए खतरा पैदा हो गया है, जिन्हें फ्रीजिंग की जरूरत होती है. अधिकारियों का कहना है कि वे खाड़ी देशों तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाश रहे हैं. रास्ते बदलने पर विचारइस संकट के कारण कंपनियों को अपनी उड़ानों के रास्ते बदलने पड़ रहे हैं और क्षेत्र में सामान पहुंचाने के लिए जमीन के रास्ते तलाशने पड़ रहे हैं. वे सऊदी अरब के जेद्दा और रियाद जैसे हवाई अड्डों से ट्रकों के जरिए दवाएं भेज रहे हैं. खाड़ी देशों से सटी है तुर्की जो इस युद्ध में शामिल नहीं है. इसलिए अधिकारी इस्तांबुल और ओमान के विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं. हालांकि इससे केवल दवाएं ही नहीं, बल्कि भोजन और ईंधन की सप्लाई भी इस युद्ध की चपेट में है. कुछ अधिकारियों का कहना है कि हालांकि अभी तक दवाओं की कोई बड़ी किल्लत नहीं दिखी है, लेकिन अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है तो स्थिति बदल सकती है. खाड़ी देश आयात पर बहुत अधिक निर्भर हैं और कुछ दवाओं की ‘एक्सपायरी डेट’ बहुत कम होती है, साथ ही उन्हें सख्त ‘कोल्ड-चेन स्टोरेज’ (ठंडे तापमान) की जरूरत होती है. ऐसे में जमीन के लंबे रास्तों से शिपिंग करना व्यावहारिक नहीं रह जाता. 20 प्रतिशत सप्लाई चेन प्रभावितहमले के बाद दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे इस क्षेत्र के प्रमुख हवाई अड्डे बंद कर दिए गए हैं. दुबई और दोहा यूरोप को एशिया और अफ्रीका से जोड़ने वाले बड़े कार्गो हब हैं. एमिरेट्स, एतिहाद जैसी एयरलाइंस और डीएचएल जैसी कंपनियां उन दवाओं को लाने-ले जाने का काम करती हैं, जिन्हें सुरक्षित और असरदार बनाए रखने के लिए एक निश्चित तापमान के भीतर रखना अनिवार्य होता है. एंटवर्प मैनेजमेंट स्कूल के प्रोफेसर वाउटर ड्यूल्फ ने उद्योग के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि दुनिया के कुल हवाई माल ढुलाई का 20% से अधिक हिस्सा मध्य पूर्व के इस तनाव की वजह से प्रभावित हो रहा है. गौर करने वाली बात यह है कि जीवन रक्षक दवाओं और टीकों की सप्लाई के लिए हवाई मार्ग ही सबसे मुख्य रास्ता होता है. चीन, सिंगापुर रास्तों की तलाशएक अधिकारी ने रायटर्स से बात करते हुए चेतावनी दी कि संवेदनशील दवाओं के लिए कोल्ड-चेन कॉरिडोर को रातों-रात तैयार नहीं किए जा सकते और ये हर जगह उपलब्ध भी नहीं होते. एक दवा कंपनी के कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि उन्होंने कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं की सप्लाई को प्राथमिकता देने के लिए आंतरिक टीमें बनाई हैं. इसके साथ ही आगाह किया कि यदि सही स्टोरेज और हैंडलिंग सुनिश्चित नहीं की गई, तो तापमान-संवेदनशील दवाओं की खेप खराब हो सकती है. वहीं एक मेडिकल डिवाइस कंपनी के अधिकारी कहते हैं कि उनकी प्राथमिकता अभी उन शिपमेंट की पहचान करना है जो रास्ते में हैं या निकलने के लिए तैयार हैं. इसके बाद ही यह तय किया जाएगा कि किन दवाओं का रास्ता बदलना है और किनके लिए नई योजना बनानी है. एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त

थांदला-तलावली मार्ग पर कार-बाइक भिड़ंत, दो युवक गंभीर:जिला अस्पताल रेफर; पुलिस ने कार सवारों को हिरासत में लिया

थांदला-तलावली मार्ग पर कार-बाइक भिड़ंत, दो युवक गंभीर:जिला अस्पताल रेफर; पुलिस ने कार सवारों को हिरासत में लिया

थांदला-तलावली मार्ग पर सोमवार देर शाम एक कार-बाइक की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। इस हादसे में बाइक सवार दो युवक गंभीर घायल हो गए हैं। घटना थांदला से करीब 2 किमी दूर हुई, जिसके बाद राहगीरों की सूचना पर डायल 112 की टीम ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। तेज रफ्तार कार ने बाइक को मारी टक्कर जानकारी के अनुसार, थांदला रोड निवासी आयुष पिता मनोहर राठौड़ और राहुल पिता मांगू मावी अपनी बाइक से तलावली मार्ग की ओर जा रहे थे। इसी दौरान सामने से आ रही कार (KL03AC7585) ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और दोनों युवक सड़क पर गिरकर लहूलुहान हो गए। दोनों गंभीर, जिला अस्पताल रेफर घायलों को तत्काल थांदला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां मौजूद डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों युवकों की स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया है। फिलहाल दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने कार सवारों को हिरासत में लिया हादसे के बाद आरोपी कार चालक और उसमें सवार अन्य व्यक्तियों को थांदला थाने ले जाया गया है। पुलिस ने कार को जब्त कर लिया है और मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस टीम घटनास्थल के आसपास के साक्ष्य भी जुटा रही है।

खरगोन में बड़वानी की छात्रा का शव मिला:पंखे से दुपट्टे का फंदा बनाया, कल ही घर से लौटी थी

खरगोन में बड़वानी की छात्रा का शव मिला:पंखे से दुपट्टे का फंदा बनाया, कल ही घर से लौटी थी

खरगोन शहर के कुंदा नगर स्थित निर्भया हॉस्टल में सोमवार रात छात्रा का शव कमरे में फंदे पर लटका हुआ मिला। छात्रा की पहचान 21 वर्षीय रोशनी सोलंकी के रूप में हुई है, छात्रा बड़वानी जिले की वरला तहसील के निरगुडिया गांव की रहने वाली थी। वह खरगोन में रहकर बीए सेकंड ईयर की पढ़ाई कर रही थी। रूम पार्टनर ने फंदे पर लटका देखा घटना का पता तब चला जब रात करीब 8 बजे उसकी रूम पार्टनर पूजा ठाकुर कॉलेज से वापस हॉस्टल लौटी। उसने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद पाया। दरवाजा खोलने पर रोशनी का शव पंखे से दुपट्टे के फंदे पर लटका हुआ मिला। घटना की जानकारी मिलते ही हॉस्टल में हड़कंप मच गया। इसके बाद तुरंत परिजनों और पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही परिजन और खरगोन कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने शव को उतार कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। रूम पार्टनर पूजा ठाकुर ने बताया कि रोशनी एक दिन पहले ही अपने घर से लौटी थी। वह काफी थकी हुई थी और आज कॉलेज भी नहीं गई थी। वहीं मृतक छात्रा के भाई विजय वास्कले ने बताया कि उन्हें अभी तक घटना के कारणों की जानकारी नहीं है। उन्हें शाम को सूचना मिली, जिसके बाद वे मौके पर पहुंचे। खरगोन कोतवाली थाना प्रभारी बीएल मंडलोई ने बताया कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। वह कल ही घर से लौटी थी। आरंभिक जांच में छात्रा ने सुसाइड किया है। मर्ग कायम कर जांच की जा रही है।

हर महीने ज्यादा ब्लीडिंग बन सकती है बड़ी मुसीबत, शरीर में होने लगती है ये कमी

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Last Updated:March 16, 2026, 22:40 IST पीरियड्स महिलाओं के शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन कई बार इस दौरान ब्लीडिंग जरूरत से ज्यादा हो जाती है. ऐसी स्थिति में शरीर में आयरन की कमी तेजी से बढ़ सकती है, जिससे कमजोरी और थकान महसूस होने लगती है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक सही खान-पान और समय पर इलाज से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. पीरियड्स 3 से 7 दिनों तक चलते हैं. महिलाओं के जीवन में पीरियड्स यानी मासिक धर्म एक प्राकृतिक और नियमित प्रक्रिया है. हर महीने शरीर गर्भधारण की संभावना के लिए खुद को तैयार करता है. अगर गर्भधारण नहीं होता तो गर्भाशय की अंदरूनी परत टूटकर शरीर से बाहर निकलती है, जिसे पीरियड्स कहा जाता है. यह प्रक्रिया आमतौर पर कुछ दिनों तक चलती है और इस दौरान ब्लीडिंग होना सामान्य माना जाता है. हालांकि कई महिलाओं को इस दौरान सामान्य से ज्यादा रक्तस्राव का सामना करना पड़ता है, जो स्वास्थ्य के लिए चिंता का कारण बन सकता है. आमतौर पर पीरियड्स 3 से 7 दिनों तक चलते हैं. इस दौरान शरीर से एक निश्चित मात्रा में रक्त बाहर निकलता है. लेकिन जब ब्लीडिंग जरूरत से ज्यादा होने लगे तो इसे हैवी मेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग कहा जाता है. इस स्थिति में शरीर से ज्यादा मात्रा में खून निकलने की वजह से आयरन की कमी होने लगती है. क्योंकि खून में आयरन की मात्रा काफी होती है, इसलिए लगातार ज्यादा ब्लीडिंग होने से शरीर में आयरन का स्तर तेजी से गिर सकता है. आयरन शरीर के लिए एक बेहद जरूरी पोषक तत्व है. यह शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है, जो खून के जरिए ऑक्सीजन को शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाता है. जब शरीर में आयरन की कमी हो जाती है तो हीमोग्लोबिन का स्तर भी कम होने लगता है. इस स्थिति को एनीमिया कहा जाता है. एनीमिया होने पर शरीर में कई तरह के लक्षण दिखाई देने लगते हैं, जैसे लगातार थकान महसूस होना, कमजोरी, चक्कर आना, सांस फूलना, बालों का झड़ना और चेहरे का रंग फीका पड़ना. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पीरियड्स के दौरान अगर बहुत ज्यादा थकान, चक्कर या कमजोरी महसूस हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह शरीर में आयरन की कमी का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में खान-पान पर खास ध्यान देना जरूरी हो जाता है. आयरन से भरपूर भोजन को डाइट में शामिल करना इस समस्या को कम करने में मदद कर सकता है. आयरन की कमी को पूरा करने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां काफी फायदेमंद मानी जाती हैं. पालक, चुकंदर, दालें, राजमा और चना जैसे खाद्य पदार्थ शरीर को आयरन देने में मदद करते हैं. इसके अलावा गुड़, अनार और सूखे मेवे जैसे किशमिश, खजूर और बादाम भी आयरन का अच्छा स्रोत माने जाते हैं. इन चीजों को नियमित रूप से खाने से शरीर में आयरन की कमी को दूर करने में मदद मिल सकती है. साथ ही यह भी जरूरी है कि आयरन के साथ विटामिन सी का सेवन भी किया जाए. विटामिन सी शरीर में आयरन के अवशोषण को बेहतर बनाने में मदद करता है. इसलिए भोजन के साथ नींबू, आंवला, संतरा, टमाटर, अमरूद या स्ट्रॉबेरी जैसे फल और खाद्य पदार्थ शामिल करना फायदेमंद माना जाता है. इससे शरीर को आयरन का पूरा लाभ मिल पाता है. अगर किसी महिला को पीरियड्स के दौरान लगातार ज्यादा ब्लीडिंग हो रही हो या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही हो तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है. कई बार डॉक्टर आयरन-फोलिक एसिड की टैबलेट लेने की सलाह देते हैं, जिससे शरीर में आयरन का स्तर बढ़ाने में मदद मिलती है. सही समय पर इलाज और संतुलित आहार से एनीमिया जैसी समस्या से बचा जा सकता है और शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : March 16, 2026, 22:40 IST

दिखने में एक जैसे संतरा और किन्नू, लेकिन सेहत पर असर बिल्कुल अलग! जानें कौन है ज्यादा फायदेमंद

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Last Updated:March 16, 2026, 22:20 IST बाजार में अक्सर संतरा और किन्नू साथ-साथ नजर आते हैं और कई लोग इन्हें एक जैसा समझ लेते हैं. हालांकि दोनों फल दिखने में भले ही मिलते-जुलते हों, लेकिन इनके स्वाद, गुण और पोषण में फर्क होता है. जानिए सेहत के लिए संतरा बेहतर है या किन्नू और दोनों में असली अंतर क्या है. सिट्रस फलों में संतरा और किन्नू एक जैसे लगते है दिखने में. बाजार में मिलने वाले सिट्रस फलों में संतरा और किन्नू काफी लोकप्रिय माने जाते हैं. देखने में दोनों का रंग और आकार लगभग एक जैसा होता है, इसलिए लोग अक्सर इन्हें एक ही समझ लेते हैं. लेकिन असल में ये दोनों अलग-अलग किस्म के फल हैं. इनके स्वाद, बनावट और पोषण में थोड़ा अंतर होता है. दोनों ही फल विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होते हैं और शरीर को कई तरह के फायदे देने के लिए जाने जाते हैं. संतरा क्या होता है?संतरा एक क्लासिक सिट्रस फल माना जाता है, जिसे लोग लंबे समय से खाते आ रहे हैं. इसका स्वाद हल्का मीठा और थोड़ा खट्टा होता है, जो इसे काफी ताजगी भरा बनाता है. संतरे में विटामिन-सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर की इम्यूनिटी मजबूत करने में मदद करता है. इसके अलावा इसमें फाइबर, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं. ये तत्व शरीर को कई तरह के संक्रमण से बचाने और त्वचा को हेल्दी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. किन्नू क्या होता है?किन्नू भी सिट्रस परिवार का ही फल है, लेकिन यह एक हाइब्रिड किस्म माना जाता है. यानी इसे दो अलग-अलग किस्मों को मिलाकर तैयार किया गया है. किन्नू आकार में थोड़ा बड़ा और ज्यादा जूसी माना जाता है. इसका स्वाद मीठा होने के साथ हल्की खटास लिए होता है. यही वजह है कि बहुत से लोगों को इसका रस काफी पसंद आता है. किन्नू में भी विटामिन-सी, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. पोषण के मामले में कौन बेहतर?पोषण के लिहाज से देखा जाए तो संतरा और किन्नू दोनों ही काफी फायदेमंद माने जाते हैं. दोनों में विटामिन-सी अच्छी मात्रा में मौजूद होता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करता है. इसके अलावा दोनों में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद कर सकते हैं. फाइबर की मौजूदगी पाचन को बेहतर बनाने में भी सहायक मानी जाती है. स्वाद और बनावट में अंतरसंतरे और किन्नू के स्वाद में थोड़ा फर्क महसूस किया जा सकता है. संतरा आमतौर पर हल्का मीठा और संतुलित स्वाद वाला होता है. वहीं किन्नू का स्वाद थोड़ा ज्यादा रसदार और हल्की खटास लिए होता है. किन्नू का छिलका अक्सर थोड़ा मोटा और फल से चिपका हुआ होता है, जबकि संतरे को छीलना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है. किसे चुनना ज्यादा सही?अगर सेहत की बात करें तो दोनों ही फल पोषण से भरपूर होते हैं. संतरा और किन्नू दोनों शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल्स देने में मदद कर सकते हैं. इसलिए इनमें से किसी एक को बेहतर या कमतर कहना पूरी तरह सही नहीं होगा. बेहतर यही है कि इन दोनों फलों को संतुलित मात्रा में अपनी डाइट का हिस्सा बनाया जाए. इससे शरीर को जरूरी पोषण मिल सकता है और स्वास्थ्य भी बेहतर बना रह सकता है. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : March 16, 2026, 22:20 IST

राज्यसभा चुनाव: बिहार में एनडीए की जीत से नीतीश कुमार विजयी; ओडिशा में बीजेपी और सहयोगी दल ने जीती 3 सीटें | चुनाव समाचार

US President Donald Trump (AFP)

आखरी अपडेट:मार्च 16, 2026, 21:58 IST ओडिशा में, भाजपा समर्थित 3 उम्मीदवारों – मनमोहन सामल, सुजीत कुमार और भाजपा समर्थित निर्दलीय दिलीप रे – ने चार में से तीन सीटें जीतीं। 16 मार्च को पटना में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और अन्य के साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। ओडिशा और बिहार में राज्यसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को घोषित किए गए, जिसमें भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। ओडिशा में, भाजपा समर्थित तीन उम्मीदवारों – मनमोहन सामल, सुजीत कुमार और भाजपा समर्थित निर्दलीय दिलीप रे ने चार में से तीन सीटें जीतीं। शेष सीट बीजू जनता दल (बीजद) के उम्मीदवार संतरूप मिश्रा के खाते में गई। 12 साल के अंतराल के बाद चुनाव हुआ क्योंकि 2 अप्रैल को आने वाली चार रिक्तियों के लिए पांच उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे। बीजद के सदस्य निरंजन बिशी और मुन्ना खान और भाजपा के सुजीत कुमार और ममता मोहंता का कार्यकाल उस तारीख को समाप्त हो रहा है। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने परिणाम को राज्य के लिए “यादगार दिन” बताया। उन्होंने कहा, “हमारे द्वारा मैदान में उतारे गए तीन उम्मीदवार आज राज्यसभा चुनाव में जीत गए… सभी विधायकों ने, चाहे वह कांग्रेस पार्टी के हों या बीजद के, ओडिशा के विकास को आगे बढ़ाने के लिए तीनों उम्मीदवारों को भारी मतों से वोट दिया।” हालाँकि, मतदान के दिन विधानसभा में तनाव देखा गया क्योंकि बीजद और भाजपा विधायकों के बीच झड़प हो गई। बीजद प्रमुख और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने भाजपा पर “खरीद-फरोख्त” का आरोप लगाया और मतदान प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया, उन्होंने दावा किया कि एक विधायक को मानदंडों का उल्लंघन करके दूसरा मतपत्र जारी किया गया था। बिहार: एनडीए ने सभी पांच सीटों पर जीत हासिल की बिहार में, नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए ने सभी पांच राज्यसभा सीटों पर कब्जा कर लिया। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री जद (यू) के रामनाथ ठाकुर, भाजपा नेता शिवेश कुमार और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को विजेता घोषित किया गया। बिहार विधानसभा की सचिव और राज्यसभा चुनाव की रिटर्निंग ऑफिसर ख्याति सिंह ने नतीजों की पुष्टि की। 243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए को 202 सीटों के साथ अच्छा बहुमत प्राप्त है। बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने नतीजों की सराहना करते हुए कहा, “एनडीए के सभी पांच उम्मीदवार जीत गए हैं और मैं सभी को बधाई देता हूं… जिस तरह से एनडीए अब तक जीतता रहा है, वह भविष्य में भी इसी तरह जीतता रहेगा।” वरिष्ठ भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने नतीजों को गठबंधन की “चट्टान जैसी एकता” का प्रमाण बताया। हालाँकि, राजद नेता तेजस्वी यादव ने विपक्षी खेमे के भीतर विश्वासघात का आरोप लगाया और भाजपा पर चुनाव के दौरान “धन बल और प्रशासन के दुरुपयोग” का आरोप लगाया। यादव ने आरोप लगाया, “धोखाधड़ी, धोखाधड़ी, धनबल और प्रशासन का दुरुपयोग भाजपा की आदत है। सिर्फ बिहार राज्य में ही नहीं। हमने सुना है कि कई राज्यों में जहां आज चुनाव हुए, ऐसी ही चीजें सामने आई हैं।” हरियाणा में मतगणना में देरी इस बीच, भाजपा और कांग्रेस द्वारा मतदान की गोपनीयता के उल्लंघन का आरोप लगाने की शिकायतों के बाद हरियाणा में दो राज्यसभा सीटों के लिए वोटों की गिनती में देरी हुई। शाम 5 बजे शुरू होने वाली मतगणना स्थगित कर दी गई क्योंकि चुनाव आयोग ने दावों की जांच की। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के दो विधायकों ने अपने मतपत्र ठीक से नहीं मोड़े, जबकि कांग्रेस ने वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल विज पर वोट गोपनीयता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर चुनाव की अखंडता की रक्षा के लिए हस्तक्षेप की मांग की और परिणाम घोषित होने से पहले एक प्रतिनिधिमंडल से मिलने का अनुरोध किया। इससे पहले दिन में मतदान हुआ, जिसमें इंडियन नेशनल लोकदल ने मतदान में भाग नहीं लिया। मतदान से पहले हिमाचल प्रदेश चले गए कांग्रेस विधायक वोट डालने के लिए चंडीगढ़ लौट आए। भाजपा विधायकों द्वारा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल और पार्टी उम्मीदवार संजय भाटिया (भाजपा) और करमवीर सिंह बौद्ध (कांग्रेस) मैदान में हैं। आयोग से अनुमति मिलते ही परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) पहले प्रकाशित: मार्च 16, 2026, 21:43 IST समाचार चुनाव राज्यसभा चुनाव: बिहार में एनडीए की जीत से नीतीश कुमार विजयी; ओडिशा में बीजेपी और सहयोगी दलों ने जीती 3 सीटें अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें