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आम की फसल पर मौसम की मार:30% घट सकती है पैदावार, सप्लाई घटने पर दाम बढ़ने की आशंका…

आम की फसल पर मौसम की मार:30% घट सकती है पैदावार, सप्लाई घटने पर दाम बढ़ने की आशंका...

मार्च-अप्रैल की बेमौसम बारिश और ओलों ने आम के बगीचों को नुकसान पहुंचाया है। ऑन इयर होने के बावजूद इस बार आम की पैदावार 30% तक घट सकती है। आम पर शोध करने वाले वैज्ञानिक डॉ. आरके जायसवाल के मुताबिक मौसम ने फलों के ‘क्रिटिकल फ्लावरिंग पीरियड’ को बिगाड़ दिया है। जायसवाल बताते हैं कि इस समय पेड़ों पर मंजरी (फूल) और शुरुआती फल बनने की प्रक्रिया चलती है, लेकिन नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव से फूल झड़ रहे हैं। फंगल संक्रमण और परागण में कमी की समस्या भी बढ़ी है। देशभर में मौसम सामान्य नहीं रहने से दक्षिण भारत से आने वाली अर्ली वैरायटी की आवक सबसे ज्यादा प्रभावित होगी। सप्लाई घटने से आम के दाम 10 से 25% तक बढ़ने की आशंका है। एक्सपर्ट बोले- दक्षिण से आने वाली अर्ली वैरायटी की आवक भी होगी प्रभावित दो से तीन बार बारिश भी फ्लावरिंग के लिए नुकसानदेह… डॉ. जायसवाल के अनुसार बारिश और नमी से एन्थ्रेक्नोज और पाउडरी मिल्ड्यू जैसे रोग बढ़ते हैं। तेज हवा से कच्चे फल गिर जाते हैं, जबकि कम धूप से शुगर फॉर्मेशन घटने से स्वाद प्रभावित होता है। परागण कम होने से फल बनने की दर भी घटती है। उन्होंने बताया कि नर्मदा वैली में हुए रिसर्च में पाया गया कि फ्लावरिंग के दौरान 2-3 बार अनियमित बारिश भी उत्पादन पर सीधा असर डालती है। इस बार बेमौसम बारिश और ओलों से कई इलाकों में फूल और कच्चे फल गिर चुके हैं।
अप्रैल अंत से जुलाई तक सीजन, हर महीने बदलती किस्में: शहर में आम का सीजन अप्रैल के आखिर से जुलाई तक रहता है। शुरुआत में तोतापरी, दशहरी और राजापुरी बाजार में आते हैं। मई-जून में लंगड़ा, चौसा और केसर की आवक रहती है, जबकि जून-जुलाई में आम्रपाली, मलिका और बंगनपल्ली मिलते हैं। खराब मौसम: ईटखेड़ी के आम 10 दिन देरी से आएंगे
ईटखेड़ी फल अनुसंधान केंद्र में 20-25 वैरायटी के करीब 250-300 पेड़ों पर रिसर्च हो रही है। यहां दशहरी, लंगड़ा, चौसा, आम्रपाली और मलिका जैसी किस्मों पर उत्पादन और रोग-प्रतिरोधक क्षमता का अध्ययन किया जाता है। डॉ. जायसवाल के मुताबिक यहां के आम आमतौर पर मई के आखिरी सप्ताह से बाजार में आते हैं, लेकिन इस बार मौसम खराब होने से करीब 10 दिन की देरी संभव है।

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