बेंगलुरु के कैफे ने बिल में 5% गैस-संकट चार्ज जोड़ा:₹358 का नींबू पानी मंगाने पर ₹17 एक्स्ट्रा पैसे वसूले; सोशल मीडिया पर वायरल हुई रसीद

देशभर में जारी LPG संकट का असर अब लोगों की जेब पर सीधे तौर पर दिख रहा है। बेंगलुरु के एक कैफे ने अपने ग्राहक को नींबू पानी के बिल पर 5% ‘गैस क्राइसिस चार्ज’ (गैस संकट शुल्क) लगा दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कैफे की रसीद की फोटो वायरल होने के बाद लोग इस पर तरह-तरह की रिएक्शन दे रहे हैं। ₹358 के ऑर्डर पर ₹17 का एक्स्ट्रा चार्ज बेंगलुरु के ‘थियो कैफे’ की इस वायरल रसीद के मुताबिक, एक ग्राहक ने दो मिंट लेमोनेड (नींबू पानी) ऑर्डर किए थे। एक लेमोनेड की कीमत ₹179 थी, यानी दो के लिए ₹358 हुए। कैफे ने पहले ₹17.90 का 5% डिस्काउंट दिया, लेकिन फिर स्टैंडर्ड GST (CGST और SGST) के साथ ‘गैस क्राइसिस चार्ज’ के नाम पर 5% यानी ₹17.01 अलग से जोड़ दिए। इस तरह ग्राहक का कुल बिल ₹374 हो गया। सोशल मीडिया पोस्ट वायरल, लोग बोले- ‘बिना गैस का क्या चार्ज?’ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बिल की फोटो शेयर होते ही यूजर्स ने कैफे की आलोचना की। लोगों ने सवाल पूछा कि नींबू पानी बनाने में आखिर कौन सी गैस इस्तेमाल होती है, जो इसके लिए ‘क्राइसिस शुल्क’ वसूला जा रहा है? कुछ यूजर्स ने इसे ग्राहकों को लूटने का नया बहाना बताया, तो कुछ ने इसे ‘महंगाई का डिजिटल अवतार’ बताया। दिल्ली-NCR से लेकर बिहार तक एजेंसियों पर लंबी कतारें गैस की कमी सिर्फ बेंगलुरु तक सीमित नहीं है। दिल्ली-NCR, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में भी एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर्स के बाहर सुबह से ही लंबी लाइनें लग रही हैं। घरेलू सिलेंडरों की बुकिंग में भी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर होर्डिंग (जमाखोरी) की खबरें आने के बाद प्रशासन ने छापेमारी भी तेज कर दी है। कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई शुरू सरकार ने 5 दिन बाद कमर्शियल LPG सिलेंडर पर लगी रोक हटा दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कमर्शियल सिलेंडर का वितरण शुरू कर दिया गया है। सरकार ने 9 मार्च को कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पर रोक लगाई थी। होर्मुज से निकले 2 जहाज, 92 हजार टन गैस लेकर आ रहे भारत मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर है। दो भारतीय LPG कैरियर (माल वाहक जहाज), ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’, होर्मुज रूट को पार कर चुके हैं। बंदरगाह और जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि ये जहाज करीब 92,700 मीट्रिक टन LPG लेकर आ रहे हैं। इनके 16 और 17 मार्च तक मुंद्रा और कांडला बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद है। सिलेंडर के लिए राजस्थान-बिहार में कई जगह जाम लगा अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देश में LPG संकट बढ़ गया है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब-चंडीगढ़, हरियाणा और राजस्थान सहित अन्य राज्यों में सिलेंडर के लिए सुबह से ही गैस एजेंसियों और गोदामों पर लाइनें लग गई हैं। LPG संकट के कारण गैस सिलेंडर की कालाबाजारी भी बढ़ गई है। 950 रुपए में आने वाला घरेलू गैस सिलेंडर 3500 रुपए और 2 हजार रुपए के कॉमर्शियल सिलेंडर ब्लैक में 5 हजार रुपए में बेचा जा रहा है। PNG कनेक्शन वालों को नहीं मिलेगा LPG सिलेंडर अगर आपके घर में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन है, तो अब आपको अपना LPG सिलेंडर को सरेंडर करना होगा। देश में गहराते गैस संकट के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने सप्लाई के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए आदेश के मुताबिक, PNG यूजर्स को न तो नया LPG कनेक्शन मिलेगा और न ही पुराना सिलेंडर रिफिल होगा। सरकार इससे पहले सप्लाई को लेकर 9 दिन में 3 बार नए नियम जारी कर चुकी है। रसोई गैस की सप्लाई के 4 नए नियम LPG सिलेंडर बुकिंग के नियम तीन बार बदले 6 मार्च: घरेलू LPG बुकिंग के लिए लॉक-इन पीरियड 21 दिन किया गया। 9 मार्च: डिमांड बढ़ने से शहरों में लॉक-इन पीरियड बढ़ाकर 25 दिन किया। 12 मार्च: ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर बुक करने का गैप 45 दिन किया गया। कनेक्शन सरेंडर न करने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। सरकार चाहती है कि जिनके पास पीएनजी का विकल्प है, वे सिलेंडर छोड़ दें ताकि सिलेंडर उन लोगों तक पहुंच सके जिनके पास और कोई ऑप्शन नहीं है। शनिवार को नोटिफिकेशन जारी में कहा गया कि जिनके पास दोनों कनेक्शन हैं, वे तुरंत नजदीकी LPG डिस्ट्रीब्यूटर या कंपनी के पोर्टल पर जाकर कनेक्शन सरेंडर करें। सरेंडर करने पर जुर्माना नहीं लगेगा, लेकिन नियम तोड़ने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गावस्कर बोले- पाकिस्तानी खिलाड़ी खरीदना भारतीयों की जान से खिलवाड़:भारतीय मालिकों को इससे बचना चाहिए, द हंड्रेड में सनराइजर्स ने अबरार को खरीदा था

इंग्लैंड की टी-20 लीग द हंड्रेड में सनराइजर्स लीड्स द्वारा पाकिस्तान के स्पिनर अबरार अहमद को खरीदने पर विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय मालिकाना हक वाली इस फ्रेंचाइजी के फैसले पर पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। गावस्कर ने कहा कि भारतीय मालिकों द्वारा पाकिस्तानी खिलाड़ियों को खरीदना भारतीयों की जान से खिलवाड़ जैसा है और ऐसे फैसलों से बचना चाहिए। 13 मार्च को लंदन में हुए ऑक्शन में अबरार को ₹2.34 करोड़ में खरीदा गया था। सनराइजर्स के मालिकों के पास IPL की टीम सनराइजर्स हैदराबाद और साउथ अफ्रीका लीग (SA20) की टीम सनराइजर्स ईस्टर्न केप भी है। सनराइजर्स की CEO काव्या मारन हैं। सनराइजर्स लीड्स की पोस्ट देखिए… IPL में पाकिस्तान खिलाड़ियों पर प्रतिबंध पाकिस्तान के खिलाड़ी IPL में नहीं खेलते। उन्होंने केवल 2008 के पहले सीजन में हिस्सा लिया था। इसके बाद नवंबर 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमले के बाद IPL में पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर रोक लगा दी गई। आम तौर पर भारतीय फ्रेंचाइजी, जिनकी विदेशी लीगों में भी टीमें हैं, पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नहीं खरीदतीं। लेकिन सनराइजर्स ने इस परंपरा को नहीं अपनाया। पैसों से हथियार खरीदे जाते हैं- गावस्कर सुनील गावस्कर ने मिड-डे में लिखे अपने कॉलम में कहा, भारतीय मालिकों को पाकिस्तानी खिलाड़ियों को अपनी टीम में शामिल करने से बचना चाहिए। द हंड्रेड में किसी भारतीय मालिक वाली टीम द्वारा पाकिस्तानी खिलाड़ी को खरीदने पर जो विवाद हुआ है, वह बिल्कुल भी हैरान करने वाला नहीं है। नवंबर 2008 के मुंबई हमलों के बाद से भारतीय फ्रेंचाइजी मालिकों ने IPL में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नजरअंदाज किया है। अब जाकर यह समझ आया है कि जब वे किसी पाकिस्तानी खिलाड़ी को फीस देते हैं और वह अपने देश में टैक्स देता है, तो वह पैसा सरकार के पास जाता है, जिससे हथियार खरीदे जा सकते हैं। इस तरह यह पैसा अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय सैनिकों और नागरिकों की मौत में योगदान दे सकता है। इसी कारण भारतीय संस्थाएं पाकिस्तानी कलाकारों और खिलाड़ियों को शामिल करने से बचती रही हैं। विट्टोरी इसे शायद न समझें गावस्कर ने आगे कहा, सनराइजर्स लीड्स के कोच डेनियल विट्टोरी, जो न्यूजीलैंड से हैं, शायद इस स्थिति को न समझते हों और उन्होंने टीम में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को लेने की इच्छा जताई हो। लेकिन मालिक को इस स्थिति की समझ होनी चाहिए थी और इस खरीद को रोकना चाहिए था। क्या उस फॉर्मेट का टूर्नामेंट जीतना, जिसे दुनिया का कोई और देश नहीं खेलता, भारतीयों की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण है? बहिष्कार की चेतावनी गावस्कर ने यह भी कहा कि इस फैसले के कारण भारतीय फैंस टीम का बहिष्कार कर सकते हैं। उन्होंने कहा—कोई हैरानी की बात नहीं होगी कि जब भी यह टीम मैच खेलेगी, चाहे घर में या बाहर, भारतीय फैंस बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करें। यहां तक कि टीम में अच्छे बल्लेबाज होने के बावजूद दर्शक मैच देखने नहीं आएं और इस फैसले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएं। उन्होंने अंत में कहा कि अभी भी इस गलती को सुधारा जा सकता है और उम्मीद है कि समझदारी से फैसला लिया जाएगा। BCCI बोला- हम दखल नहीं दे सकते इस मामले पर BCCI के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा कि बोर्ड इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता, क्योंकि यह एक विदेशी लीग से जुड़ा मामला है। अंतिम फैसला फ्रेंचाइजी को ही लेना होगा। उस्मान तारिक 1.72 करोड़ रुपए में बिके इस नीलामी में बिकने वाले दूसरे पाकिस्तानी खिलाड़ी मिस्ट्री स्पिनर उस्मान तारिक रहे, जिन्हें बर्मिंघम फीनिक्स ने 1.40 लाख पाउंड (लगभग 1.72 करोड़ रुपए) में खरीदा। हालांकि, पाकिस्तान के तेज गेंदबाज हारिस रऊफ और ऑफ स्पिन ऑलराउंडर सैम अयूब अनसोल्ड रहे। बांग्लादेश के मुस्तफिजुर रहमान पर विवाद हुआ था IPL की फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स (IPL) ने 16 दिसंबर 2025 को अबू धाबी में IPL 2026 के मिनी ऑक्शन में बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को 9.20 करोड़ रुपए में खरीदा था। इसके बाद बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्याओं के कारण भारत में इसका विरोध होने लगा। इस पर BCCI के कहने पर KKR ने रहमान को रिलीज कर दिया है। इससे नाराज बांग्लादेशी सरकार ने अपने देश में IPL के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। इतना ही नहीं, बांग्लादेश ने भारत में टी-20 वर्ल्ड कप खेलने से इनकार कर दिया था। ऐसे में ICC ने बांग्लादेश को टी-20 वर्ल्ड कप से ही बाहर कर दिया गया था। बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को टी-20 वर्ल्ड कप में शामिल किया गया था। पाकिस्तान ने भारत से मैच का बॉयकॉट किया था पाकिस्तानी सरकार ने टी-20 वर्ल्ड कप में भारत से मैच का बॉयकॉट कर दिया था। हालांकि, श्रीलंकाई राष्ट्रपति के हस्तक्षेप के बाद पाकिस्तानी सरकार ने भारत से मैच के लिए मंजूरी दी थी। कोलंबो में 15 फरवरी को खेले गए इस मैच में भारतीय टीम ने 61 रनों के अंतर से जीता था। पाकिस्तान के खिलाफ ईशान किशन ने फिफ्टी लगाई थी।
बीमार महिला से धोखे से 12 विश्वा जमीन की रजिस्ट्री:ढाई विश्वा बेचने का सौदा था, अशिक्षित होने का फायदा उठाया, 50 हजार देकर जमीन हड़पी

शिवपुरी जिले में एक बीमार और अशिक्षित महिला से जमीन धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि ढाई विश्वा जमीन बेचने के नाम पर उससे करीब 12 विश्वा जमीन हड़प ली गई। पीड़िता ने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है। कोलारस क्षेत्र के ग्राम नेतवास निवासी 30 वर्षीय रेवती जाटव ने सोमवार को बताया कि वह अशिक्षित है और अंगूठा लगाती है। लंबे समय से बीमार होने के कारण उन्हें इलाज के लिए पैसों की आवश्यकता थी। इसी वजह से उन्होंने ग्राम चिटोरा स्थित अपनी कृषि भूमि सर्वे नंबर 438 में से लगभग 0.01428 हेक्टेयर (करीब ढाई विश्वा) जमीन 83 हजार रुपए में बेचने का सौदा किया था। महिला का आरोप है कि कामता प्रसाद जाटव ने रजिस्ट्री के समय उन्हें केवल 50 हजार रुपए दिए और शेष 33 हजार रुपए अगले दिन देने का वादा किया। इसके बाद 14 मार्च को जमीन की रजिस्ट्री करवा ली गई। रजिस्ट्री निकलवाने पर मामले का खुलासा रेवती जाटव के अनुसार, रजिस्ट्री के दौरान कामता प्रसाद के साथ मौजूद एक महिला, मिस्सो रावत, को गवाह बताया गया था। बाद में उन्हें पता चला कि उसी महिला मिस्सो रावत के नाम पर उनकी दूसरी जमीन सर्वे नंबर 241 में से 0.0975 हेक्टेयर (लगभग 12 विश्वा) जमीन की भी रजिस्ट्री करवा ली गई है। पीड़िता ने बताया कि उन्हें इस दूसरी जमीन की रजिस्ट्री के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उनकी बीमारी और अशिक्षा का फायदा उठाकर कागजों पर उनके अंगूठे के निशान लगवा लिए गए। अगले दिन जब वह अपने पति के साथ बकाया पैसे लेने कोर्ट पहुंचीं, तो आरोपी कामता प्रसाद नहीं आया। इसके बाद रजिस्ट्री निकलवाने पर पूरे मामले का खुलासा हुआ। धोखाधड़ी पर कानूनी कार्रवाई की मांग महिला ने आरोप लगाया है कि कामता प्रसाद जाटव, मिस्सो रावत, बबलेश रावत और धर्मेंद्र जाटव ने मिलकर षड्यंत्रपूर्वक धोखाधड़ी और ठगी की है। पीड़िता ने एसपी से मांग की कि सर्वे नंबर 438 की जमीन का बकाया 33 हजार रुपए दिलवाया जाए और सर्वे नंबर 241 की रजिस्ट्री निरस्त कर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। कोतवाली थाना प्रभारी कृपाल सिंह राठौड़ का कहना है कि आवेदन आया है, मामले की जांच की जा रही है।
वायरल बनाम बैक्टीरियल बुखार: वायरल और बैक्टीरियल बुखार में क्या अंतर है? जानिए लक्षण घरेलू और इलाज

वायरल बनाम बैक्टीरियल बुखार | छवि: फ्रीपिक वायरल बनाम बैक्टीरियल बुखार: जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के कारण आजकल बुखार एक आम समस्या बन गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर बुखार वैसा नहीं होता? सामान्य रूप से दिखने वाले बुखार मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं पहला वायरल बुखार और दूसरा बैक्टीरियल बुखार। इन दोनों के बीच का अंतर संतुलन जरूरी है क्योंकि इनका इलाज बिल्कुल अलग होता है। आइये जानते हैं वायरल बुखार के लक्षण क्या हैं और घरेलू उपचार क्या कर सकते हैं? वायरल और साइंटिस्ट बुक में मुख्य अंतर क्या है? वायरल बुखार वायरस के कारण होता है, जो हवा, कोल्ड वॉटर या डायट व्यक्ति के संपर्क में आता है। वहीं, गले का संक्रमण या यूरिनरी इंजेक्शन का संक्रमण भी बैक्टीरियल बुखार बुखार के संक्रमण से होता है। वायरल और संदिग्ध बुखार कितने दिन तक रहेगा? वायरल बुखार आमतौर पर 3 से 7 दिनों में आपको ठीक लगता है। जबकि बैक्टिरियल संक्रमण तब तक ठीक नहीं होता जब तक उसका इलाज नहीं हो जाता। एंटीबायोटिक्स का असर क्या होता है? एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरिया पर काम करता है, वायरस पर नहीं। वायरल बुखार में एंटीबायोटिक्स लेना केवल जरूरी नहीं है, बल्कि बिकवाली भी हो सकती है। वायरल बुखार के लक्षण क्या हैं? तेज बुखार के साथ शरीर और जोड़ों में तेज दर्द। नाक बहना, गले में खराश और सूखी खांसी। आँखों में जलन त्वचा पर वाइज़ रैशेज़ होना। अत्यधिक कमज़ोरी और थकान महसूस होना। बैक्टीरियल बुखार के लक्षण क्या हैं? बुखार का अचानक आना और तेजी से आना। शरीर के किसी खास हिस्से में दर्द (जैसे टॉन्सिल में सूजन या कान में दर्द)। बुखार का लंबे समय तक बने रहना और दवाओं के बाद भी बार-बार आना। बलगम वाली खांसी या सांस लेने की जगह। ये भी पढ़ें – ईरान ने युद्ध में पहली बार दागी ‘सेजिल’ मिसाइल! जानें- कितनी घातक है ये ‘डांसिंग मिसाइल’? घरेलू उपचार क्या कर सकते हैं? तुलसी के अवशेषों में एंटी-वायरल गुण होते हैं और अदरक संक्रमण से लड़ने में मदद मिलती है। इनमें काढ़ा पीने से शरीर की रोग क्षमता बहुत अधिक होती है। बुखार में बॉडी डिलाईटेड हो जाता है। इसलिए पानी, नारियल का पानी, नारियल के पत्तों का रस और सूप का सेवन अधिक करें। हल्दी में मौजूद ‘करक्यूमिन’ एक शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व है। रात में गर्म हल्दी वाला दूध पीने से शरीर का दर्द कम होता है। लहसुन में ‘एलिसिन’ नामक तत्व पाया जाता है जो कि लहसुन से लड़ने में सहायक होता है। इसे कच्चा या खाने में शामिल करके उपयोग करें। शरीर को स्वस्थ बनाने से लड़ने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो पर्याप्त नींद और आराम से संभव है। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें। (टैग्सटूट्रांसलेट)वायरल बनाम बैक्टीरियल संक्रमण के लक्षण(टी)वायरल बनाम बैक्टीरियल बुखार सीबीसी(टी)बैक्टीरियल बुखार के लक्षण(टी)बैक्टीरियल बुखार की अवधि(टी)बैक्टीरियल बुखार के कारण(टी)बैक्टीरियल बुखार के नाम(टी)बैक्टीरियल बुखार का इलाज(टी)बैक्टीरियल बुखार एंटीबायोटिक्स(टी)24 घंटे में बुखार से कैसे छुटकारा पाएं(टी)घर पर वायरल बुखार का इलाज
यूक्रेन चुनाव: कांग्रेस के 3 और राजद के एक नेता के वोट पर क्या बोले चिराग पासवान? जानें

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान सोमवार (16 मार्च, 2026) को दिल्ली से पटना पहुंचे। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि बिहार के पांचवे मछुआरों की जीत होगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह से धीरे-धीरे मतदान के दौरान मतदान हुआ, एक-दूसरे के विरोध में मतदान हुआ, यह सब शामिल है कि प्रतिद्वंद्वी की जीत सुनिश्चित है। वे पटना एयरपोर्ट पर सुपरस्टार से बात कर रहे थे। अपने अज़ाब की झलकियाँ कर रहे थे चिराग़ एक सवाल पर कि कांग्रेस के तीन और समझदारों के एक नेता ने वोट नहीं दिया. इसमें कहा गया है कि आसिफ के एक नेता का अस्तित्व नहीं है, कांग्रेस के सबसे बड़े नाम का गायब होना, यह स्पष्ट संकेत है कि नामांकन का हिस्सा है। ऐसे में नामांकनी करना असंभव बात है. उन्होंने कहा कि कल (15 मार्च, 2026) से हम अपने सभी बेंचमार्क की झलकियां कर रहे थे। इफ्तार पार्टी में दक्षिणी-पटनाटन शामिल हो रहे हैं आज (सोमवार) एलजेपी स्टेडियम की ओर से पार्टी कार्यालय में इफ्तार पार्टी है। इसी में शामिल होने के लिए न्यूमेरिकल चिराग पासवान पटना जिले के हैं। उन्होंने कहा कि हमारे नेता स्व. ईसा मसीह के साथ ईसा मसीह का आगमन हुआ, इसलिए आज इफ्तार पार्टी शुरू हो गई है। यह भी पढ़ें- समुद्र तट चुनाव: ‘गायब’ के नाम पर विवाद, तेजस्वी यादव की पहली प्रतिक्रिया, ‘अभी तक…’ ममता बनर्जी पर चिराग पासवान ने किया हमला वहीं कई राज्यों में चुनाव होने वाले लेकर चिराग पासवान ने कहा, “मैं असमंजस में था..वहां से फिर से सरकार वापस आ रही है. बंगाल में बहुत अच्छे तरीके से सरकार बनाने जा रही है…जिस तरह से ममता ने केंद्र के हर फैसले का विरोध किया है, इन सहयोगियों को लेकर जनता में सहमति बनी है.” यह भी पढ़ें- समुद्र तट चुनाव: मस्जिद के दो चर्चों ने कर दी क्रॉस वोटिंग? बुजुर्गों से मुलाकात के बाद पार्टी का बड़ा बयान
केरल चुनाव के लिए बीजेपी ने जारी की पहली लिस्ट, राजीव चंद्रशेखर और वी मुरलीधरन को इस सीट से उतारा गया

केरल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बीजेपी ने अपनी बढ़त की पहली सूची जारी की है (केरल भाजपा उम्मीदवारों की सूची 2026) जारी कर दिया गया है. पहली सूची में कुल 47 किले के किले का उद्घाटन किया गया है। नेमोम से पूर्व केंद्रीय मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर चुनाव लड़ेंगे। वहीं कज़ाकुट्टम से पूर्व विदेश मंत्री मुरलीधरन को हटा दिया गया है। बीजेपी ने मलयालम की जानी-मानी लेखिका आर श्रीलेखा को वट्टियूरकावु से शिया बनाया है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के सुंदरन को मंजेश्वर से और पी के कृष्णदास को कट्टकाडा से टिकट दिया गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन कझाकुट्टम विधानसभा क्षेत्र से, जबकि पी सी जॉर्ज पुंजर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बने हुए हैं। कम्बलर से सी.रघुनाथ, उदमा से मनुलाल मेलोथ, नंदापुरम से दीपक चंद्रन, पेरम्बा से एम मोहनन मास्टर को प्रतियोगी बनाया गया है। इसके अलावा पलक्कड़ से सोहरा सुंदरन, अज़ोकोड से के विनोद कुमार, कम्बलर से सी रघुनाथ, मनंतवाडी से पी श्याम राज, सुल्तानबथेरी से कविता ए। एस, वडकारा से एडवोकेट के दिलीप, कुट्टियाडी से रामदास मनालेरी, नादापुरम से सीपी मिर्जा चंद्रन, कोइलांडी से सीआर फुल कृष्णन को टिकट दिया गया है। इसके अलावा बालूसेरी से सीपी शृंखला, एलथुर से टी देवदास, कोझिकोड उत्तर से नव्या हरिदास, कोझिकोड दक्षिण से टी रनीश, बेपोर से केपी प्रकाश बाबू, कुन्नमंगलम से वीके संजीवन, शोरानूर शाइनी टी दास, ओट्टापलम से मेजर रवि, मालमपूजा से सी कृष्णकुमार के, चेल्ककारा से बालकृष्णन, त्रिशूर पद्माजा वेणुगोपाल, इरिंजलाकुडा से संतोष चेराकुलम, देवीकुलम के एस.आर.रबेंन, पाला से जॉर्ज सीन, वैकोम के अजित, कांजीरापल्ली से जॉर्ज कुरियन, पुंजूर से पीसी जॉर्ज को टिकट दिए गए हैं। अम्बलपुझा से अरुण अनिरुद्धन, हरिपद से संदीप वाचस्पति, चेंग वैलडर से एमवी गोपकुमार, कृवल्ला से ओप एंटनी जोसेफ, कुन्नथुर से कुंथुर प्रसाद, कोट्टाराक्कारा से आर रशीम, छठ बबीनर से बी.बी. गोपकुमार, अट्टंगल से पी. जं., कजाकुट्टम से वी. मुरीधरन, परसाला से बी नेय्यर, कत्थकड़ा से पीके हरिदास को मिलाया गया है। केरल में कब होगा चुनाव? केरल में एक मंच पर वोट डाला जाएगा. 16 मार्च को चुनाव अधिसूचना जारी होगी. अभ्यर्थी 23 मार्च 2026 तक नामांकन कर सकते हैं। 24 मार्च नामांकन की जांच की जाएगी। 26 मार्च तक अभ्यर्थी नाम वापस ले सकते हैं। 9 अप्रैल को केरल में मतदान होगा. वहीं, 4 मई को चुनाव के नतीजे घोषित किये जायेंगे. केरल 2021 के क्या परिणाम थे? साल 2021 में भी केरल में एक चरण में वोटिंग हुई थी. इस राज्य में छोड़े गए 140 खण्डों पर जीत दर्ज की गई थी। वहीं, कांग्रेस के 40वें स्थान पर पहुंची। बीजेपी केरल में सिर्फ एक सीट पर जीत हासिल कर पाई थी. डेमोक्रेटिक डेमोक्रेटिक मोर्चा (एलडीएफ) का नेतृत्व सीपीआई (एम) करती है जबकि डेमोक्रेटिक डेमोक्रेटिक मोर्चा (यूडीएफ) का नेतृत्व कांग्रेस करती है। यह देश इकलौता राज्य का है, जहां वामपंथ पर पूज्य है। (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्रेकिंग न्यूज(टी)एबीपी न्यूज(टी)केरल विधानसभा चुनाव 2026(टी)चुनाव 2026(टी)केरल चुनाव के लिए बीजेपी ने जारी की पहली लिस्ट(टी)राजीव चन्द्रशेखर और मुरली वीधरन को इस सीट से उतारा(टी)केरल बीजेपी बिजनेस लिस्ट
मैट्रिज़-आईएएनएस ओपिनियन पोल: ममता बनर्जी के लिए खतरे की घंटी बजा ओपिनियन पोल, चौंका रहे आंकड़े

पश्चिम बंगाल में चुनाव की तस्वीर साफ हो गई है। 15 मार्च को इलेक्शन कमीशन ने इलेक्शन शेड्यूल जारी किया है। जनता सत्ता किसे नतीजे तय करेगी, इसका पता तो आने के बाद ही चल सकता है लेकिन पहले ओपिनियन पोल के माध्यम से गुणांक का गणित जाना लगा है। मैट्रिज़-आईएएनएस ने जनता का मूड जानने के लिए सर्वेक्षण किया है, जिसमें डेटा वाले आंकड़े सामने आए हैं। औद्योगिक प्रमुखों और बंगाल के प्रमुखों की सीएम ममता बनर्जी के लिए भी यह कई मायनों में खास दिख रहे हैं। बंगाल की सत्ता कौन सी है? बंगाल में ममता बनर्जी लगातार चौथी बार सत्य पर हस्ताक्षर करने के लिए जोर लगा रही हैं तो बीजेपी ने भी राज्य में पहली बार कमल के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है. पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभाएं हैं, जिनमें बहुमत के 148 विधानसभाओं की जरूरत होगी। जनता को साधने के लिए साइंटिफिक साइंटिस्ट ने शुरू कर दिया है। अब देखिएगा कि बंगाल की जनता किससे सत्ता की चाबी मांगती है। साल 2011 से ममता बनर्जी बंगाल के मुख्यमंत्री हैं। ओपिनियन पोल के आंकड़े क्या कहते हैं? मैट्रिज-आईएएनएस ओपिनियन पोल के मुताबिक, नामांकन को चुनाव में 155 से 170 मिल सकते हैं। सर्वे के मुताबिक ममता बनर्जी को फिर से जनता से राज्य का दर्जा मिल सकता है लेकिन मिलने वाली पोस्ट की संख्या स्थिर दिख रही है। 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में ओल्ड कांग्रेस को 213 क्वार्टर पर जीत मिली थी। ओपिनियन पोल में उनकी सबसे ऊंची फसलें दिख रही हैं। ओपिनियन पोल में बीजेपी को फ़ायदा हो रहा है, 2021 में बीजेपी ने 77 रेसों पर परचम लहराया था। इस चुनाव में बीजेपी को 100 से 115 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं, AIMIM को 5-6 और अन्य को 0-1 सीट मिलने का अनुमान है। बंगाल में कब होगा चुनाव? पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव होगा। पहले चरण में मतदान 23 अप्रैल को होगा जबकि दूसरे चरण में मतदान 29 अप्रैल को होगा। चुनाव का परिणाम 4 मई को घोषित किया जाएगा। बंगाल में काफी समय बाद सिर्फ दो चरणों में चुनाव होने वाला है। इससे पहले 2021 में राज्य में 8 चरणों में वोटिंग हुई थी। पश्चिम बंगाल में कुल 294 अतिथि हैं। बहुमत हासिल करने के लिए 148 की जरूरत होगी। बंगाल से लेकर असम तक, पांच राज्यों में किसकी बनेगी सरकार? जानें क्या कहते हैं ओपिनियन पोल के आंकड़े” href=’https://www.abplive.com/elections/matrize-ians-opinion-poll-2026-west-bengal-assam-kerala-tamil-nadu-election-survey-2026-3101935#google_vignette’ target=”_self”>बंगाल से लेकर असम तक, पांच राज्यों में किसकी बनेगी सरकार? जानें क्या कहते हैं ओपिनियन पोल के आंकड़े
मंत्रियों के अनुपस्थित रहने पर कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष ने पद पर बने रहने से किया इनकार; सीएम के आश्वासन के बाद नाटक खत्म | बेंगलुरु-न्यूज़ न्यूज़

आखरी अपडेट:मार्च 16, 2026, 16:15 IST आर अशोक ने सरकार के कामकाज पर गहरा असंतोष व्यक्त किया और कहा कि सदन में घटनाक्रम एक अभूतपूर्व स्थिति को दर्शाता है कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया. (पीटीआई फ़ाइल) कर्नाटक विधानसभा में सोमवार को अभूतपूर्व दृश्य सामने आया जब अध्यक्ष यूटी खादर ने कार्यवाही के दौरान कांग्रेस के मंत्रियों और विधायकों की अनुपस्थिति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए सदन की अध्यक्षता जारी रखने से इनकार कर दिया। खादर ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि आखिरकार सीएम सिद्धारमैया के आश्वासन के बाद मामला सुलझ गया। क्या हुआ? नाराज खादर ने यह घोषणा किए बिना कि सदन फिर से कब बुलाएगा, सत्र अचानक स्थगित कर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक मंत्रियों और विधायकों दोनों की उपस्थिति के मुद्दे का समाधान नहीं हो जाता, तब तक वह कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं करेंगे। स्पीकर का गुस्सा कई मंत्रियों और अधिकारियों की अनुपस्थिति से उपजा, जिनसे विधायकों द्वारा उठाए गए लिखित सवालों का जवाब देने के लिए उपस्थित रहने की उम्मीद थी। मंत्रियों के सदन से गायब रहने पर कई सदस्यों ने कहा कि उनके प्रश्न अनुत्तरित रह गए, जिससे विपक्ष में भी आक्रोश फैल गया। यह घटना तब हुई जब सूचीबद्ध 230 प्रश्नों में से 84 के लिखित उत्तर सदन में रखे जा रहे थे। विपक्ष ने सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि मंत्री सत्र की शुरुआत से ही अपेक्षित जवाब देने में विफल रहे हैं। विपक्ष के नेता आर अशोक ने कहा कि विधानसभा में उपस्थिति बेहद कम थी, उन्होंने दावा किया कि सदन में बमुश्किल 15 प्रतिशत सदस्य मौजूद थे। उन्होंने बताया कि यह मुद्दा चौथी बार उठाया गया है, उन्होंने मंत्रियों और विधायकों द्वारा दिखाई गई गंभीरता की कमी पर निराशा व्यक्त की। स्पष्ट रूप से नाराज खादर ने सदन को याद दिलाया कि विधानसभा सत्र निर्वाचन क्षेत्रों की चिंताओं को दूर करने के लिए है और विधायकों के सवालों का जवाब देने के लिए मंत्रियों के उपस्थित रहने की उम्मीद की जाती है। “हम निर्वाचन क्षेत्रों की समस्याओं पर चर्चा करने के लिए इस सदन का आयोजन करते हैं। यह सत्र मंत्रियों के सवालों के जवाब देने के लिए है। अगर सवाल पूछे जाते हैं और कोई जवाब नहीं मिलता है, तो यह कैसे जारी रह सकता है?” स्पीकर ने सदन में कहा. उन्होंने यह भी बताया कि विधायकों से हर कुछ महीनों में आयोजित सत्र के दौरान मिलने की उम्मीद की जाती है और इस बात पर जोर दिया कि कार्यवाही को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। खादर ने यह कहते हुए सदन स्थगित कर दिया कि वह तब तक सत्र का संचालन नहीं करेंगे जब तक कि अनुपस्थिति के मामले पर ध्यान नहीं दिया जाता और सरकार उठाई गई चिंताओं का जवाब नहीं देती। विधानसभा में एक दुर्लभ क्षण में, अध्यक्ष निराशा में आसन से चले गए, और सदन को अगली बैठक के लिए समय निर्दिष्ट किए बिना स्थगित कर दिया। खादर ने News18 को क्या बताया “सीएम ने मुझे आश्वासन दिया है कि इसे दोबारा नहीं दोहराया जाएगा। उन सचिवों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी जिन्होंने सवालों के जवाब देने में देरी की है। मुख्य सचिव को मामले को देखने और कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। आश्वासन दिया गया है कि मंत्री सवालों का जवाब देने के लिए मौजूद रहेंगे।” खादर ने कहा, “पिछले 4-5 दिनों से, मैंने चेतावनी जारी की है। मैंने मुख्य सचिव, सरकार और विपक्ष के नेता के साथ बैठक की और यह बताया गया कि यदि कोई प्रश्न अनुत्तरित रहता है तो उत्तर के लिए एक निश्चित समय सीमा और देरी का कारण बताया जाना चाहिए।” आर अशोक ने उठाए सवाल स्थगन के बाद मीडिया से बात करते हुए, आर अशोक ने सरकार के कामकाज पर गहरा असंतोष व्यक्त किया और कहा कि सदन में घटनाक्रम एक अभूतपूर्व स्थिति को दर्शाता है। अशोक ने कहा, “आज हमने विधानसभा में जो देखा वह एक असहायता को दर्शाता है जो पहले कभी नहीं देखी गई। अध्यक्ष को खुद विधानसभा छोड़नी पड़ी।” उन्होंने बताया कि सत्र के दौरान लिखित रूप में उत्तर देने के लिए प्रतिदिन 200 से 250 प्रश्न सूचीबद्ध किए जाते हैं, लेकिन उनमें से केवल कुछ ही प्रश्नों को वास्तव में प्रतिक्रिया मिलती है। उन्होंने कहा, ”हर दिन, केवल 10 प्रतिशत, 20 प्रतिशत या अधिकतम 30 प्रतिशत प्रश्नों का उत्तर दिया जा रहा है।” अशोक ने कहा कि विधानसभा सत्र आयोजित किए जाते हैं ताकि विभिन्न तालुकों के विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित मुद्दे उठा सकें और सरकार से समाधान मांग सकें। उन्होंने कहा, “सत्र इसलिए आयोजित किया जाता है क्योंकि अपने संबंधित तालुकों के विधायक अपने तालुकों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रश्न पूछते हैं। विधानसभा इन सवालों के कारण चलती है।” अशोक ने सरकार की कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन में कोई दिशा-निर्देश नहीं है. उन्होंने कहा, “आज कोई दिशा ही नहीं है। शासन खत्म हो गया है। किसी भी सवाल का कोई जवाब नहीं है।” पहले प्रकाशित: मार्च 16, 2026, 16:11 IST समाचार शहर बेंगलुरु-समाचार मंत्रियों के अनुपस्थित रहने पर कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष ने पद पर बने रहने से किया इनकार; सीएम के आश्वासन के बाद नाटक खत्म अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक विधानसभा ड्रामा(टी)कर्नाटक विधानसभा(टी)स्पीकर यूटी खादर(टी)कांग्रेस मंत्रियों की अनुपस्थिति(टी)विधानसभा सत्र स्थगन(टी)विपक्ष की आलोचना(टी)आर अशोक(टी)सरकारी कामकाज
पूर्व PM देवगौड़ा ने राहुल के प्रदर्शन की आलोचना की:सोनिया को लेटर लिखकर कहा- संसद की सीढ़ियों पर चाय-नाश्ते करना उसकी गरिमा कम करता है

पूर्व प्रधानमंत्री और जेडी(एस) नेता एचडी देवगौड़ा ने संसद में विपक्ष के हंगामे के तरीके को लेकर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को लेटर लिखा है। उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी का नाम लिए बिना संसद उनके विरोध की आलोचना की। 92 साल के देवगौड़ा ने दो पेज के लेटर में राहुल के हाल के प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि संसद के बजट सत्र के दौरान लगातार नारेबाजी, पोस्टर दिखाने और धरना-प्रदर्शन से लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को नुकसान पहुंच रहा है। संसद परिसर में सीढ़ियों पर बैठकर चाय-नाश्ते के साथ प्रदर्शन करना संस्थान की गरिमा को कम करता है। देवगौड़ा ने संसद परिसर में बढ़ती अव्यवस्था और विरोध के तरीके पर चिंता जताते हुए इसे ‘कैजुअल प्रोटेस्ट की संस्कृति’ बताया। उन्होंने सोनिया गांधी से अपील करते हुए कहा- विपक्ष की वरिष्ठ नेता होने के नाते आप अपने सांसदों से बात करें और संसदीय मर्यादा बनाए रखने के लिए उन्हें समझाएं। देवगौड़ा ने आगे सोनिया से कहा- संसद के भीतर और उसके परिसर में पैदा हो रही अराजक स्थिति लोकतंत्र की बुनियाद को नुकसान पहुंचा सकती है। विपक्षी दलों को विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन विरोध का तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं को क्षति न पहुंचे। उन्होंने सोनिया गांधी से अपील की कि वह विपक्ष के सीनियर नेताओं से बात करें और अपने अनुभव और परिपक्वता के आधार पर उन्हें संयम बरतने की सलाह दें। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 75 वर्षों में देश ने मिलकर लोकतांत्रिक संस्थाओं का निर्माण किया है और विरोध का तरीका ऐसा होना चाहिए जो इस व्यवस्था को कमजोर न करे। लेटर के अंत में उन्होंने कहा कि विरोध लोकतंत्र का अहम हिस्सा है, लेकिन उसे संसदीय नियमों और परंपराओं के दायरे में ही होना चाहिए ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनी रहे।
Leh Rally, Kargil Band After Sonam Wangchuk Release

लेह (लद्दाख)2 घंटे पहले कॉपी लिंक लेह में सोमवार को अगल राज्य की मांग को लेकर लोगों ने रैली निकाली। लद्दाख के लेह शहर में सोमवार को कड़ी सुरक्षा के बीच सैकड़ों लोगों ने रैली निकाली। वहीं कारगिल में बंद रखा गया। यह रैली पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई के दो दिन बाद हुई। सितंबर 2025 में लेह में हिंसक प्रदर्शन हुआ था। इसमें पुलिस फायरिंग में 4 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद यह पहली रैली है। यह बंद और रैली लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के आह्वान पर किया गया। इन संगठनों की मुख्य मांगें लद्दाख को राज्य का दर्जा देना और उसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना हैं। वांगचुक को करीब छह महीने तक राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में रखा गया था। केंद्र सरकार ने शनिवार को घोषणा की कि सभी पक्षों के साथ रचनात्मक और सार्थक बातचीत को आसान बनाने के लिए वांगचुक की हिरासत समाप्त की जा रही है। रैली में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं। पुलिस फायरिंग में मारे गए लोगों की तस्वीरे लेकर रैली में पहुंचे रैली का नेतृत्व LAB के सह-अध्यक्ष चेरिंग दोरजे ने किया। प्रदर्शनकारी सिंगे नामग्याल चौक से लेह के पोलो ग्राउंड तक मार्च करते हुए गए। रैली में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं और लोग राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग के समर्थन में नारे लगा रहे थे। कुछ लोग उन चार लोगों की तस्वीरें भी लेकर चल रहे थे, जिनकी पिछले साल सितंबर में पुलिस फायरिंग में मौत हो गई थी, जब LAB की रैली हिंसक हो गई थी। LAB और KDA के संयुक्त आह्वान पर कारगिल और द्रास में पूरी तरह बंद रहा। ये दोनों संगठन पिछले पांच वर्षों से राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे हैं। लद्दाख के पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह ने लेह के सिंगे नामग्याल चौक में रैली स्थल का दौरा किया और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस और सुरक्षा बल तैनात किए गए थे।अधिकारियों के अनुसार कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं मिली। रैली में शामिल हुए लोग राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे थे। सड़कें बंद, प्रतिबंध के बाद भी लोग रैली में पहुंचे लेह में पत्रकारों से बात करते हुए चेरिंग दोरजे ने कहा कि प्रशासन ने सड़कें बंद कर दी थीं, प्रतिबंध लगा दिए थे। फिर भी लोगों ने बड़ी संख्या में रैली में भाग लिया। उन्होंने लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने के लिए बधाई दी और रैली को बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि एपेक्स बॉडी को जनता का समर्थन नहीं है, लेकिन आज लद्दाख के लोगों ने दिखा दिया कि वे LAB और KDA के साथ हैं। सोनम वांगचुक, जो इस आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक हैं, को सितंबर में इस आरोप में NSA के तहत हिरासत में लिया गया था कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काई। ————————————— ये खबर भी पढ़ें: सरकार ने सोनम वांगचुक पर लगा NSA हटाया:170 दिन बाद जोधपुर जेल से रिहा; लेह हिंसा के बाद हिरासत में लिए गए थे लेह प्रदर्शन के दौरान सोनम वांगचुक 21 दिनों तक अनशन पर रहे थे। यह फोटो 24 सितंबर 2025 की है। केंद्र ने शनिवार को लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक पर लगा नेशनल सिक्युरिटी एक्ट (NSA) हटा दिया। सरकार ने कहा कि यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया। गृह मंत्रालय के अनुसार, सोनम ने NSA एक्ट के तहत अपनी हिरासत की अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर लिया है। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…









