Monday, 13 Apr 2026 | 02:35 AM

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राशन वितरण को लेकर पूर्व सरपंच-कोटेदार के बेटे में मारपीट:शहडोल में कम राशन देने और हाथ से लिखी पर्ची बांटने का आरोप

राशन वितरण को लेकर पूर्व सरपंच-कोटेदार के बेटे में मारपीट:शहडोल में कम राशन देने और हाथ से लिखी पर्ची बांटने का आरोप

शहडोल के ग्राम हिरवार में शासकीय उचित मूल्य दुकान पर राशन वितरण को लेकर विवाद के बाद पूर्व सरपंच और कोटेदार के पुत्र के मारपीट हाे गई।हितग्राहियों ने राशन कम देने का आरोप लगाया है।घटना का वीडियो भी सामने आया है। राशन में कटौती और फर्जीवाड़े का आरोप ग्रामीणों का आरोप है कि उचित मूल्य दुकान संचालक द्वारा हर राशन कार्ड धारक के हिस्से में 5 से 10 किलोग्राम तक गेहूं और चावल की कटौती की जा रही है। इसके अलावा, पारदर्शिता को ताक पर रखकर कंप्यूटराइज्ड पर्ची के बजाय हाथ से लिखी पर्चियां थमाई जा रही हैं, जिससे अनाज के वास्तविक वितरण का मिलान करना मुश्किल हो रहा है। जनपद सदस्य बोले- शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई जनपद सदस्य भारत सिंह अंकू ने बताया कि कोटेदार की मनमानी और खाद्यान्न वितरण में अनियमितताओं की शिकायत कई बार अधिकारियों से की गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की उदासीनता के कारण गरीब हितग्राहियों का हक मारा जा रहा है। इस हंगामे के बावजूद, फिलहाल किसी भी पक्ष ने थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है। पुलिस का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में है और लिखित शिकायत मिलते ही वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, ग्रामीण अब जिला प्रशासन से कोटेदार के खिलाफ निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

उत्तराखंड के बाद गुजरात में UCC की तैयारी:समिति ने CM भूपेंद्र पटेल को रिपोर्ट सौंपी, 24 मार्च को सदन में पेश हो सकता है विधेयक

उत्तराखंड के बाद गुजरात में UCC की तैयारी:समिति ने CM भूपेंद्र पटेल को रिपोर्ट सौंपी, 24 मार्च को सदन में पेश हो सकता है विधेयक

उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में भी जल्द यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू हो सकता है। यूसीसी के लिए गठित समिति ने मंगलवार को मुख्यमंत्री को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। समिति ने विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत अध्ययन के बाद इसने अंतिम सिफारिशों सहित अपनी रिपोर्ट पेश की है। गुजरात सरकार आज शाम को इस रिपोर्ट पर मंत्रियों और अधिकारियों के साथ चर्चा करेगी। यूसीसी से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा मौजूदा विधानसभा सत्र में ही की जाएगी। रिपोर्ट 23 मार्च को सदन में रखी जा सकती है, जबकि 24 मार्च को बिल पेश किए जाने की संभावना है, जो इस बजट सत्र का अंतिम दिन भी है। अगर यह बिल पास हो जाता है, उत्तराखंड के बाद यूसीसी लागू करने वाला गुजरात देश का दूसरा राज्य बन जाएगा। महिलाओं के समान अधिकारों को प्राथमिकता मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने X पर लिखा- गुजरात में समान नागरिक संहिता (UCC) के क्रियान्वयन के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति ने अपनी विस्तृत और अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज हैं रंजना प्रकाश देसाई पांच सदस्यीय इस समिति का गठन 4 फरवरी 2025 को किया गया था, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना देसाई कर रही हैं। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज हैं। वे 13 सितम्बर 2011 से 29 अक्टूबर 2014 तक सर्वोच्च न्यायालय में जज रहीं। जस्टिस रंजना देसाई जम्मू-कश्मीर पर परिसीमन आयोग की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। देसाई सुप्रीम कोर्ट में आने से पहले बॉम्बे हाईकोर्ट की जज भी रह चुकी हैं। भारत में केवल उत्तराखंड में UCC लागू भारत में अभी केवल उत्तराखंड में UCC लागू है। वहां 28 जनवरी 2025 को UCC लागू किया गया। मुख्यमंत्री आवास में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इसका ऐलान किया था। यूसीसी लागू होने से राजय में 5 नियम सख्ती से लागू हुए- ——————— UCC से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- UCC लागू करने का समय आ गया:संसद फैसला करें; शरियत कानून में सुधार की जल्दबाजी न करें, इससे नुकसान की आशंका सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का समय आ गया है। इस पर फैसला करना कोर्ट के बजाय संसद का काम है। कोर्ट शरियत कानून 1937 की कुछ धाराओं को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। पूरी खबर पढ़ें…

कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने पर ओडिशा के 3 विधायकों को निलंबित कर दिया | राजनीति समाचार

New Zealand vs South Africa Live Cricket Score, 2nd T20I: Stay updated with NZ vs SA Ball by Ball Match Updates and Live Scorecard from Hamilton. (Picture Credit: X@ICC)

आखरी अपडेट:मार्च 17, 2026, 13:41 IST पार्टी नेताओं ने कहा कि संगठन की विश्वसनीयता की रक्षा के लिए अनुशासनात्मक कदम जरूरी थे, खासकर राज्यसभा चुनाव के बाद। निलंबित विधायकों – रमेश जेना, सोफिया फिरदौस और दसरथी गमांग – पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने का आरोप था। (न्यूज़18) ओडिशा कांग्रेस ने पार्टी के भीतर अनुशासन लागू करने के उद्देश्य से हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने पर मंगलवार को अपने तीन विधायकों को निलंबित कर दिया। निलंबित विधायकों – रमेश जेना, सोफिया फिरदौस और दसरथी गमांग – पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने का आरोप लगाया गया था, जिस पर पार्टी नेतृत्व ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। निर्णय की घोषणा करते हुए, सुजीत पाढ़ी ने कहा कि यह कार्रवाई “अनुशासनहीनता” और पार्टी के निर्देशों के उल्लंघन पर की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के आचरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा क्योंकि यह पार्टी की सामूहिक रणनीति को कमजोर करता है। एक अलग कार्रवाई में, कटक शहर कांग्रेस अध्यक्ष गिरिबाला बेहरा को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। पार्टी नेताओं ने कहा कि संगठन की विश्वसनीयता की रक्षा के लिए अनुशासनात्मक कदम आवश्यक थे, खासकर राज्यसभा चुनावों में राज्य इकाई के भीतर आंतरिक विभाजन उजागर होने के बाद। कांग्रेस ने आगामी राजनीतिक चुनौतियों से पहले एकता के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि क्रॉस-वोटिंग ने ओडिशा में पार्टी की स्थिति कमजोर कर दी है और सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाया है। ओडिशा राज्यसभा चुनाव परिणाम सत्तारूढ़ भाजपा ने सोमवार को द्विवार्षिक चुनावों में ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों में से दो पर जीत हासिल की, जबकि विपक्षी बीजद और भगवा पार्टी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार ने एक-एक सीट हासिल की। भाजपा की ओडिशा इकाई के अध्यक्ष मनमोहन सामल और पार्टी के सांसद सुजीत कुमार ने चुनाव जीतने के लिए 35-35 वोट हासिल किए। बीजद के आधिकारिक उम्मीदवार संतरूप मिश्रा ने 31 वोट हासिल कर चुनाव जीत लिया। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे ने दूसरी वरीयता के वोटों के माध्यम से चौथी सीट जीती, उन्होंने विपक्ष समर्थित उम्मीदवार दत्तेश्वर होता को हराया, जिन्हें बीजद, कांग्रेस और सीपीआई (एम) का समर्थन प्राप्त था। रे और होता दोनों प्रथम वरीयता के 23-23 वोट हासिल कर बराबरी पर थे। अधिकारी ने बताया कि बाद में दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती के बाद रे को विजेता चुना गया। चुनाव में विधानसभा के सभी 147 सदस्यों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। चुनावों में क्रॉस-वोटिंग देखी गई, जिसमें कई विपक्षी विधायकों ने कथित तौर पर भाजपा उम्मीदवारों और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन किया। जबकि 147 सदस्यीय सदन में भाजपा और उसके समर्थित निर्दलीय विधायकों की संख्या 82 थी, भगवा पार्टी के उम्मीदवारों ने 93 प्रथम वरीयता वोट हासिल किए, जो विधानसभा में उसकी ताकत से 11 अधिक थे। अधिकारी ने कहा, ये 11 वोट बीजद (8) और कांग्रेस (3) विधायकों से आए। जगह : भुवनेश्वर, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 17, 2026, 12:55 IST समाचार राजनीति कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने पर ओडिशा के तीन विधायकों को निलंबित कर दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)ओडिशा कांग्रेस निलंबन(टी)राज्यसभा चुनाव(टी)क्रॉस वोटिंग(टी)पार्टी अनुशासन(टी)बीजेपी समर्थित उम्मीदवार(टी)आंतरिक विभाजन(टी)ओडिशा की राजनीति(टी)पार्टी से निष्कासित सदस्य

Dainik Bhaskar & Aditya Birla MF Workshop: Invest to Beat Inflation

Dainik Bhaskar & Aditya Birla MF Workshop: Invest to Beat Inflation

ग्वालियर11 घंटे पहले कॉपी लिंक आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी लिमिटेड के जोनल मैनेजर, इन्वेस्टर एजुकेशन एंड डिस्ट्रीब्यूटर डेवलपमेंट अभिजीत देशमाने ने वर्कशॉप को संबोधित किया। हर व्यक्ति बचत कर अपना फ्यूचर सुरक्षित करना चाहता है, क्योंकि महंगाई लगातार बढ़ रही है, जिसे बीट करना जरूरी है। इसके लिए एसआईपी को बेहतर माध्यम माना जा सकता है, लेकिन पूरी प्लानिंग के साथ। एसडब्ल्यूपी को भी रेगुलर आय का बेहतर विकल्प माना जा सकता है। यह कहना था आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी लिमिटेड के जोनल मैनेजर, इन्वेस्टर एजुकेशन एंड डिस्ट्रीब्यूटर डेवलपमेंट अभिजीत देशमाने का। वे शुक्रवार को होटल क्लार्सइन में दैनिक भास्कर और आदित्य बिड़ला म्यूचुअल फंड की शिक्षित निवेशक- विकसति भारत वषय पर रखी गई अवेयरनेस वर्कशॉप में शामिल शहरवासियों को संबोधित कर रहे थे। पैनल डिस्क्शन में कैपिटल वैंचर्स के अमित अग्रवाल, आदित्य बिरला सन लाइफ म्यूचुअल फंड के क्लस्टर हेड हसन नकवी और ब्रांच हेड दीपक माधवानी ने ऑडियंस के सवालों के जवाब दिए। निवेश में फ्यूचर का प्लान हो उन्होंने कहा कि आप अच्छे निवेशक तभी माने जाएंगे, जब उसमें अनुशासन हो और सतर्कता हो। निवेश से पहले अपना गोल सेट करें। इसमें फ्यूचर का प्लान हो। जैसे 3 साल बाद आपको व्हीकल लेना है, 10 साल बाद आपको घर लेना है आदि। कुछ निवेशक निरंतरता न रखने और अनुशासन में न रहने भटक जाते हैं। वे सोचते हैं उनकी वेल्थ को ग्रोथ नहीं मिल रही है। ग्राेथ मिलती है, लेकिन एक टाइम बाद। निवेशकों को 12 से 15 प्रतिशत की ग्रोथ पर न ध्यान देते हुए अपनी प्रोफाइल को समझना होगा और धैर्य रखना होगा। वर्कशॉप के अन्य वक्ता ग्वालियर रैंज के डीआईजी अमित सांघी और राज्य साइबर सेल ग्वालियर जोन प्रभारी संजीव नयन शर्मा थे। इस बीच पैनल डिस्कशन रखा गया, इसमें सवाल जवाब हुए। पैनल डिस्क्शन में कैपिटल वैंचर्स के अमित अग्रवाल, आदित्य बिरला सन लाइफ म्यूचुअल फंड के क्लस्टर हेड हसन नकवी और ब्रांच हेड दीपक माधवानी ने ऑडियंस की शंका का समाधान किया। निवेश करने से पहले मार्केट स्टडी करें: देशमाने अभिजीत देशमाने ने बताया कि निवेश करने से पहले निवेशक को मार्केट स्टडी करना जरूरी है। म्यूचुअल फंड को बेहतर ऑप्शन कहा जा सकता है। इसमें रिस्क की संभावनाएं घट जाती हैं। म्यूचुअल फंड एक ऐसा तरीका है, जिसमें आपको सेफ्टी मिलती है, क्योंकि इसे सेवी ने रेगुलेटिड किया है। लिक्विडिटी भी मिलती है और रिटंर्स भी। 30 पहले जाएंगे सेंसेक्स 100 पर था, जो आज 80 हजार पर आ गया है। यह सब एक झटके में नहीं हुआ है। 30 साल में मार्केट में कई उतार चढ़ाव आए। आगे भी उतार-चढ़ाव आता रहेगा, लेकिन इस बीच निवेशित रहना जरूरी है। अनुशासित ढंग से निवेश करना होगा, क्योंकि पता नहीं प्रॉब्लम कब आ जाए। सेल्फ फाइनेंस डिसिप्लिन सिर्फ एसआईपी से आ सकता है। उम्र के हिसाब इंवेस्टमेंट का फंडा पुरा हो चुका है। इसे गोल बेस्ड कीजिए। म्यूचुअल फंड के अलग-अलग प्लान हैं। निवेश लंबी अवधि के लिए हो। निवेश में सावधानी बरतना बेहद जरूरी ग्वालियर रैंज के डीआईजी अमित सांघी ने कहा कि साइबर क्राइम का दायरा बढ़ चुका है। अगर हम बात करें तो पिछले दो सालों में 400 प्रतिशत शिकायतें बढ़ गई हैं। अगर आप साइबर फ्राॅड के शिकार हुए हैं आपने एक या डेढ़ घंटे के भीतर साइबर क्राइम पोर्टल या 1930 पर शिकायत की तो मदद मिल सकती है। जो पैसा म्यूल अकाउंट में जा रहा है उसे रोका जा सकता है। बहुत केस हैं, जिनमें हमने सफलता पाई है। वॉट्सएप, टेलीग्राम और इंस्टा चलाते समय सावधनी बरतें। कोई निवेश करने की कहे तो लालच में न आएं। अगर लालच में आते हैं तो शुरू में आपको फायदा होगा। आप और इंवेस्ट करेंगे तो फंस जाएंगे। इसलिए ऐसे लोगों से बचें। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

रजनीकांत विवाद पर टीवीके नेता की टिप्पणी के बाद एनडीए-विजय गठबंधन की चर्चा पटरी से उतरी | राजनीति समाचार

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आखरी अपडेट:मार्च 17, 2026, 13:37 IST टीवीके नेता आधव अर्जुन की रजनीकांत के खिलाफ टिप्पणी के बाद तमिलनाडु चुनाव के लिए भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए और तमिलागा वेट्री कड़गम गठबंधन की अटकलें समाप्त हो गईं। पलानीस्वामी ने टीवीके नेता की रजनीकांत पर की गई टिप्पणी की आलोचना की है. (एक्स) सुपरस्टार रजनीकांत के खिलाफ एक टीवीके नेता की टिप्पणी पर विवाद के बाद आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए और अभिनेता से नेता बने विजय की तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) के बीच संभावित गठबंधन की अटकलें तेज हो गई हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब टीवीके महासचिव आधव अर्जुन ने रजनीकांत के खिलाफ बेबाक टिप्पणी की, अन्नाद्रमुक और भाजपा नेताओं ने खुलेआम टीवीके पदाधिकारियों की आलोचना की। पंक्ति क्या है? 12 मार्च को राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान पार्टी सदस्यों को संबोधित करते हुए, अर्जुन ने आरोप लगाया कि जब रजनीकांत ने राजनीति में प्रवेश करने की कोशिश की तो डीएमके ने उन्हें धमकी दी। अर्जुन ने कहा कि वह अभिनेता की आलोचना नहीं कर रहे थे बल्कि यह बताना चाहते थे कि टीवीके के संस्थापक विजय में इस तरह के दबाव को झेलने का साहस था। हालाँकि, उनकी टिप्पणियों की रजनी के प्रशंसकों, एनडीए नेताओं और डीएमके मंत्री सहित विभिन्न हलकों से सहज आलोचना हुई, जिन्होंने कहा कि टीवीके “सरासर झूठ” बोलकर राजनीतिक लाभ हासिल करने का प्रयास कर रहा था। एनडीए, डीएमके स्लैम टीवीके अन्नाद्रमुक प्रमुख एडप्पादी पलानीस्वामी ने टिप्पणियों को “राजनीतिक रूप से अशोभनीय” करार दिया और अभिनेता के राजनीति से दूर रहने के फैसले का बचाव किया और व्यक्तिगत पसंद के सम्मान का आह्वान किया। भाजपा नेता अन्नामलाई ने भी अर्जुन पर निशाना साधते हुए उनके दावों को ”भ्रम” बताया और रजनीकांत के दशकों लंबे करियर की प्रशंसा की। केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन ने अभिनेता की छवि खराब करने के प्रयास के लिए अर्जुन से माफी की मांग की। यह देखते हुए कि शीर्ष अभिनेता के राजनीति में प्रवेश नहीं करने के फैसले पर टीवीके महासचिव की टिप्पणी “अत्यधिक निंदनीय” थी, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु के लोग अर्जुन की अपने राजनीतिक एजेंडे की पूर्ति के लिए की गई टिप्पणियों को स्वीकार नहीं करेंगे। तमिलनाडु के मंत्री एस रेगुपति ने आरोप के लिए टीवीके पर हमला बोला और कहा कि विजय के नेतृत्व वाली पार्टी “झूठ” बोलकर राजनीतिक लाभ हासिल करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि रजनी द्रमुक के मित्र थे और उन्होंने पार्टी के लिए समर्थन जताया था। “रजनीकांत को धमकी नहीं दी जा सकती। हर कोई यह जानता है। यह कहना कि द्रमुक ने उन्हें धमकी दी है, सरासर झूठ है। विजय की पार्टी राजनीतिक लाभ लेने के लिए ऐसा कह रही है,” रेगुपति ने कहा और बताया कि 1996 के चुनाव में रजनी ने द्रमुक के समर्थन में आवाज उठाई थी। रजनीकांत की प्रतिक्रिया इसके अलावा, रजनीकांत ने मंगलवार को अर्जुन द्वारा उनके बारे में की गई ”अपमानजनक टिप्पणियों” की निंदा की और कहा कि ”समय इसका जवाब देगा।” एक्स पर एक संदेश में, अभिनेता ने अर्जुन की टिप्पणियों पर चिंता व्यक्त की और उन्हें “सच्चाई के विपरीत” कहा। उन्होंने उन राजनीतिक नेताओं, प्रशंसकों और मीडिया सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया जिन्होंने “अपमानजनक” टिप्पणियों की आलोचना की। “श्री आधव अर्जुन, जो टीवीके पार्टी (तमिलगा वेट्री कज़गम) में नेतृत्व की स्थिति रखते हैं, ने हाल ही में मेरे बारे में एक राय व्यक्त की जो सच्चाई के विपरीत थी। मैं तमिलनाडु विधानसभा के विपक्ष के माननीय नेता, श्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी, तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष श्री नैनार नागेंद्रन, केंद्रीय मंत्री श्री एल मुरुगन, तमिलनाडु के मंत्री श्री रघुपति, श्री थोल को हार्दिक धन्यवाद देना चाहता हूं। थिरुमावलवन, श्री एसपी वेलुमणि, मित्र श्री अन्नामलाई, श्री अर्जुनमूर्ति, श्री अंबुमणि रामदास, श्री जीके वासन, श्री जॉन पांडियन, श्री पुगलेंथी, और कई अन्य राजनीतिक नेता, श्री अमीर, श्री जी. धनंजयन, और फिल्म उद्योग के अन्य मित्र, श्री नक्खीरन गोपाल, चाणक्य श्री रंगराज पांडे, मीडिया के सदस्य, और मेरे प्रिय प्रशंसक (जिन्हें मैं भगवान मानता हूं) अभिनेता ने संदेश में लिखा, ”मैं जीवित हूं), उनकी अपमानजनक टिप्पणियों की निंदा करने और मेरे समर्थन में आवाज उठाने के लिए।” उन्होंने कहा, “समय बोलता नहीं, बल्कि इंतजार करता है और जवाब देता है।” क्या टीवीके एनडीए में शामिल होगा? यह विवाद उन खबरों के बीच आया है कि एनडीए आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए 80 सीटों और यहां तक ​​कि उपमुख्यमंत्री पद की पेशकश के साथ टीवीके के पास पहुंचा था। ऐसे भी दावे थे कि विजय ने बदले में मुख्यमंत्री का पद मांगा, हालांकि टीवीके नेताओं ने ऐसी किसी भी बातचीत से इनकार किया। टिप्पणियों पर तनाव बढ़ने के साथ, गठबंधन की चर्चा काफी हद तक कम हो गई है, कम से कम अभी के लिए। तमिलनाडु एक बहुकोणीय चुनावी मुकाबले की ओर बढ़ रहा है, जहां सत्तारूढ़ द्रमुक दूसरे कार्यकाल की तलाश में है, अन्नाद्रमुक-भाजपा गठबंधन वापसी का लक्ष्य बना रहा है, और विजय की टीवीके अपनी चुनावी शुरुआत की तैयारी कर रही है। अभिनेता-राजनेता सीमान के नाम तमिलर काची के भी दौड़ में प्रमुख खिलाड़ी होने की उम्मीद है। पहले प्रकाशित: मार्च 17, 2026, 13:37 IST समाचार राजनीति रजनीकांत विवाद पर टीवीके नेता की टिप्पणी के बाद एनडीए-विजय गठबंधन की चर्चा पटरी से उतर गई अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी-टीवीके गठबंधन(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)विजय की तमिलागा वेट्री कड़गम(टी)रजनीकांत विवाद(टी)एआईएडीएमके आलोचना(टी)डीएमके प्रतिक्रिया(टी)राजनीतिक लाभ(टी)रजनीकांत की प्रतिक्रिया

बहुत सारे रसोइये? डिनर पॉलिटिक्स ने कर्नाटक में सिद्धारमैया बनाम शिवकुमार सत्ता संघर्ष को बढ़ा दिया | राजनीति समाचार

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आखरी अपडेट:मार्च 17, 2026, 13:32 IST पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि समझा जाता है कि सिद्धारमैया ने बैठक का इस्तेमाल अपने पक्ष में ताकतों को एकजुट करने और एकता का संकेत देते हुए गतिशीलता को अधिक बारीकी से समझने के लिए किया है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि समानांतर रात्रिभोज की राजनीति कांग्रेस के भीतर की वास्तविकता को दर्शाती है – दो शक्ति केंद्र एक साथ काम कर रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि डिनर टेबल अब कर्नाटक में नया राजनीतिक युद्ध कक्ष बन गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सोमवार शाम को रात्रिभोज बैठकों की श्रृंखला की पहली शुरुआत की, जिससे कर्नाटक की सबसे पुरानी पार्टी के भीतर ताजा राजनीतिक हलचल शुरू हो गई। जब वह 14 मंत्रियों के एक चुनिंदा समूह के साथ बैठे, तो सिद्धारमैया ने कर्नाटक में आगामी उपचुनावों की तैयारियों, आंतरिक आरक्षण और आसन्न कैबिनेट फेरबदल के बारे में बात की। हालाँकि, जो नज़र आता है उससे कहीं अधिक है। बैठक में शामिल होने वालों में प्रियांक खड़गे, ईश्वर खंड्रे, बीजेड ज़मीर अहमद खान, बिरथी सुरेश, कृष्णा बायरे गौड़ा, दिनेश गुंडू राव, एमबी पाटिल, एचसी महादेवप्पा, केएच मुनियप्पा, रामलिंगा रेड्डी, एसएस मल्लिकार्जुन, सतीश जारकीहोली और चेलुवरयास्वामी शामिल थे। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि समझा जाता है कि सिद्धारमैया ने बैठक का इस्तेमाल अपने पक्ष में ताकतों को एकजुट करने और गतिशीलता को अधिक बारीकी से समझने के लिए किया, जबकि गुटीय बड़बड़ाहट, छाया मुक्केबाजी और उनके और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच सत्ता संघर्ष के बीच एकता का संकेत दिया। विधायकों पर लगाम लगाने और बार-बार दिल्ली दौरे को हतोत्साहित करने के लिए उपस्थित मंत्रियों को भी एक संदेश दिया गया। समय महत्वपूर्ण है. पिछले कुछ हफ्तों में, कांग्रेस के भीतर विभिन्न समूहों के बीच कई अनौपचारिक रात्रिभोज बैठकें आयोजित की गई हैं – एमबी पाटिल के नेतृत्व में लिंगायत नेता और जी परमेश्वर और सतीश जारकीहोली के नेतृत्व में दलित नेता। इन समानांतर सभाओं ने केवल सुलगते विभाजनों को रेखांकित किया है। यह सब मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच जारी सत्ता संघर्ष के साथ-साथ पार्टी के भीतर से कैबिनेट फेरबदल की बढ़ती मांगों की पृष्ठभूमि में हो रहा है। मंत्रियों की रात्रिभोज बैठक से पहले सिद्धारमैया ने शिवकुमार के साथ एक अलग बैठक भी की. डीके का समानांतर आउटरीच शिवकुमार भी अपने चैनल चला रहे हैं। हाल के सप्ताहों में, डिप्टी सीएम ने विधायकों और चुनिंदा मंत्रियों के साथ छोटी, बंद कमरे में बातचीत की मेजबानी की है और उनमें भाग लिया है, जिनमें से कई उनके समर्थन आधार से हैं। केपीसीसी प्रमुख के रूप में छह साल पूरे करने के बाद, यह तथ्य कि सीएम बदलने और डीके को सत्ता सौंपने की मांग करने वालों को केवल कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, यह दर्शाता है कि वह आलाकमान पर दबाव बनाए रखना चाहते हैं। कैबिनेट में फेरबदल के साथ, सभी क्षेत्रों और समुदायों, विशेषकर वोक्कालिगा नेताओं और पहली बार के विधायकों के बीच समर्थन को मजबूत करने का एक स्पष्ट प्रयास भी है। पहली बार के विधायकों या नए चेहरों के लिए मंत्री पद की मांग भी काफी हद तक शिवकुमार खेमे की मांग है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि समानांतर रात्रिभोज की राजनीति कांग्रेस के भीतर की वास्तविकता को दर्शाती है – दो शक्ति केंद्र एक साथ काम कर रहे हैं, प्रत्येक खुले टकराव को शुरू किए बिना अपनी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। इस बीच, कर्नाटक कांग्रेस आगामी उपचुनावों और स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी तेज कर रही है। पार्टी नेतृत्व ने दावणगेरे दक्षिण और बागलकोट में अभियान प्रयासों की निगरानी के लिए पहले ही मंत्रियों की टीमों को तैनात कर दिया है। पहले प्रकाशित: मार्च 17, 2026, 13:32 IST समाचार राजनीति बहुत सारे रसोइये? डिनर पॉलिटिक्स ने कर्नाटक में सिद्धारमैया बनाम शिवकुमार के बीच सत्ता संघर्ष को बढ़ा दिया है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

Europe Refuses to Support Hormuz Operation

Europe Refuses to Support Hormuz Operation

वॉशिंगटन डीसी23 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान में खामेनेई समेत 40 से भी ज्यादा अधिकारियों के मारे जाने के बाद अमेरिका को यह जंग बड़ी कामयाबी नजर आ रही थी। लेकिन 17 दिन बाद हालात बदल चुके हैं। युद्ध का कोई साफ अंत नजर नहीं आ रहा है। ईरान ने जवाब में होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल आपूर्ति रोक दी, जिससे दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बड़ी चोट पहुंची है। ट्रम्प अब अपने सहयोगी नाटो देशों से होर्मुज में रास्ता खुलवाने की अपील कर रहे हैं। हालांकि इन देशों ने साफ कर दिया है कि वे होर्मुज स्ट्रेट में अपने वॉरशिप नहीं भेजेंगे। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर नाटो देश इस अहम समुद्री रास्ते को फिर से खोलने में मदद नहीं करते, तो नाटो का भविष्य खराब हो सकता है। जर्मनी बोला- यह यूरोप की जंग नहीं द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक जर्मनी ने साफ कहा है कि वह किसी भी सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लेगा। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि इस मामले में कभी कोई फैसला नहीं हुआ, इसलिए जर्मनी के सैन्य योगदान का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की मौजूदा सरकार खत्म होनी चाहिए, लेकिन बमबारी करके उसे झुकाना सही तरीका नहीं है। जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने भी अमेरिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह यूरोप का युद्ध नहीं है और जब अमेरिकी नौसेना खुद इतनी ताकतवर है, तो कुछ यूरोपीय जहाज क्या कर लेंगे। दुबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सोमवार को ड्रोन हमले के बाद आग और धुआं उठता दिखा। इस वजह से उड़ानों पर असर पड़ा। ब्रिटेन बोला- हम इस युद्ध में नहीं फंसेंगे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि उनका देश इस बड़े युद्ध में नहीं फंसेगा। उन्होंने माना कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना जरूरी है ताकि तेल बाजार स्थिर रहे, लेकिन यह आसान काम नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी कदम ज्यादा से ज्यादा देशों की सहमति से ही उठाया जाएगा। यूरोपीय देशों ने सैन्य कार्रवाई की बजाय कूटनीति पर जोर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट बहुत अहम है क्योंकि यहां से दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस की सप्लाई होती है, जो फिलहाल ईरान के कारण प्रभावित हो रही है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर सोमवार को लंदन में मिडिल ईस्ट की स्थिति पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए। इटली बोला- जंग नहीं बातचीत से हल निकले इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने कहा कि इस संकट का हल बातचीत से ही निकलना चाहिए और उनका देश किसी नौसैनिक मिशन को बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय यूनियन के मौजूदा मिशन सिर्फ समुद्री डकैती रोकने और रक्षा के लिए हैं, उन्हें युद्ध में नहीं बदला जा सकता। ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और जापान ने भी साफ कर दिया है कि वे अपने युद्धपोत नहीं भेजेंगे। यूरोपीय यूनियन ने भी ट्रम्प की अपील ठुकराई दूसरी ओर, ट्रम्प लगातार अपने सहयोगियों पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन देशों को इस समुद्री रास्ते से फायदा होता है, उन्हें इसकी सुरक्षा में हिस्सा लेना चाहिए। ट्रम्प ने खासतौर पर ब्रिटेन से नाराजगी भी जताई, हालांकि उन्हें उम्मीद है कि वह इसमें शामिल होगा। यूरोपीय यूनियन के विदेश मंत्रियों ने भी अपने रेड सी (लाल सागर) मिशन को होर्मुज तक बढ़ाने से इनकार कर दिया। यूरोपीय यूनियन की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलस ने कहा कि फिलहाल मिशन का दायरा बढ़ाने की कोई इच्छा नजर नहीं आती। यूरोपीय देश अमेरिका और इजराइल के युद्ध के मकसद को लेकर भी स्पष्टता चाहते हैं। एस्टोनिया के विदेश मंत्री ने कहा कि उन्हें समझना है कि ट्रम्प की रणनीति क्या है और आगे की योजना क्या होगी। इजराइल बोला- 3 सप्ताह के लिए जंग की प्लानिंग तैयार इस बीच इजराइल ने ईरान के कई शहरों जैसे तेहरान, शिराज और तबरीज में बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। इजराइल का दावा है कि उसने ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई से जुड़ा एक विमान भी नष्ट कर दिया। इजराइली सेना का कहना है कि ईरान के साथ अगले 3 सप्ताह तक लड़ने के लिए उनकी प्लानिंग तैयार है। सेना के प्रवक्ता नदाव शोशानी ने सोमवार को कहा है कि सेना ने इससे आगे के समय के लिए भी अलग योजनाएं बना रखी है। इजराइली सेना का कहना है कि इस अभियान का मकसद सीमित है। वे ईरान की उन क्षमताओं को कमजोर करना चाहते हैं जिनसे वह इजराइल के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इसके तहत ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल ढांचे, परमाणु ठिकानों और सुरक्षा तंत्र को निशाना बनाया जा रहा है। इजराइली सेना का कहना है कि ईरान के अंदर अब भी हजारों ऐसे ठिकाने हैं जिन्हें निशाना बनाया जा सकता है। हालांकि पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि ईरान में अब “लगभग कुछ भी निशाना बनाने के लिए नहीं बचा है।” ईरान बोला- अमेरिकी सेना आई तो अंजाम भुगतना होगा ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर युद्ध खत्म होगा तो इस तरह खत्म होना चाहिए कि दुश्मन दोबारा हमला करने की हिम्मत न करे। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिकी सेना जमीन पर उतरी, तो उसे वियतनाम जैसा अंजाम भुगतना पड़ सकता है। अमेरिका ने बताया कि इस युद्ध में उसके करीब 200 सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें से ज्यादातर वापस ड्यूटी पर लौट आए हैं, जबकि 13 सैनिकों की मौत हो चुकी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में अब तक 1,800 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या में आम नागरिक हैं। लेबनान में जमीनी हमले कर रहा इजराइल इजराइल ने लेबनान के दक्षिणी हिस्से में जमीनी कार्रवाई भी बढ़ा दी है, जहां हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान चल रहा है। इस संघर्ष में लेबनान में अब तक 850 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 100 से अधिक बच्चे शामिल हैं। जर्मनी ने इजराइल को चेतावनी दी है कि लेबनान में जमीनी हमला करना गलती

गर्मी आते ही बच्चों में बढ़ जाता है डिहाइड्रेशन का खतरा, ये 7 लक्षण दिखें तो तुरंत हो जाएं अलर्ट

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Summer Health Tips for Kids: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में जैसे ही गर्मी ने दस्तक दी, बच्चों में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का खतरा भी बढ़ने लगा है. खासकर दूषित पानी और तेज धूप इस समस्या को और बढ़ा देते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो बच्चों की हालत गंभीर हो सकती है. बच्चों में जल्दी होता है डिहाइड्रेशनविशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र गुप्ता बताते हैं कि छोटे बच्चों के शरीर का लगभग दो-तिहाई हिस्सा पानी से बना होता है, इसलिए उनमें पानी की कमी जल्दी हो जाती है. अगर शरीर में पानी की कमी हो जाए तो बच्चे जल्दी कमजोर पड़ जाते हैं और उनकी तबीयत अचानक बिगड़ सकती है. ये लक्षण दिखें तो तुरंत समझें खतराडॉक्टर के मुताबिक, डिहाइड्रेशन के कुछ साफ संकेत होते हैं त्वचा सूखी होना, आंखों के नीचे गड्ढे पड़ना,बच्चा चिड़चिड़ा होना, उल्टी या दस्त, अगर ये लक्षण दिखें तो इसे नजरअंदाज बिल्कुल न करें. धूप में ज्यादा रहने से बढ़ता है खतरातेज धूप में ज्यादा देर रहने से शरीर से पसीना ज्यादा निकलता है, जिससे पानी की कमी हो जाती है. इसलिए बच्चों को दोपहर में बाहर खेलने से रोकें और उन्हें बार-बार पानी या तरल पदार्थ देते रहें. पेशाब का रंग भी देता है संकेतअगर बच्चा कम या गाढ़ा पेशाब कर रहा है, तो यह भी डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में तुरंत बच्चे को पानी, जूस या ORS देना चाहिए. हालत गंभीर लगे तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें. ये सावधानियां रखें जरूरीदोपहर में बच्चों को बाहर न भेजें, सुबह 10 बजे से पहले या शाम 6 बजे के बाद ही खेलने दें, साफ और शुद्ध पानी ही पिलाएं, बार-बार तरल पदार्थ देते रहें कपड़ों का भी रखें ध्यानगर्मी में बच्चों को ढीले और हल्के रंग के कपड़े पहनाएं. गहरे रंग के कपड़े गर्मी ज्यादा सोखते हैं, जिससे शरीर जल्दी गर्म हो जाता है. हल्के और आरामदायक कपड़े बच्चों को ठंडा रखने में मदद करते हैं. थोड़ी सी लापरवाही बन सकती है बड़ी परेशानीडॉक्टरों का कहना है कि गर्मी के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती है. इसलिए समय पर ध्यान देना, सही खान-पान और पानी की पर्याप्त मात्रा देना ही सबसे बड़ा बचाव है.

बीसीजी रिपोर्ट-अंतिम: यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम:सत्ता से दूर, अमेरिका के निचले सदन में 1%, सीनेट में कोई भारतवंशी नहीं

बीसीजी रिपोर्ट-अंतिम: यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम:सत्ता से दूर, अमेरिका के निचले सदन में 1%, सीनेट में कोई भारतवंशी नहीं

जहां पैसे और नॉलेज की बात आती है तो भारतीय मूल के अमेरिकी अपनी जनसंख्या से कहीं आगे हैं, लेकिन जब सत्ता और प्रतिनिधित्व की बात होती है, तो वहां वे अपनी जनसंख्या के अनुपात तक भी नहीं पहुंचे हैं। यानी यह समुदाय अमेरिका को बनाने में तो बड़ी भूमिका निभा रहा है, लेकिन अमेरिका की दिशा तय करने में उसकी भूमिका अभी बहुत छोटी है। बीसीजी और इंडियास्पोरा द्वारा तैयार रिपोर्ट ‘अमेरिका में भारतवंशियों के दमखम की कहानी’ के आखिरी हिस्से में पढ़िए, अमेरिका की सत्ता में भारतवंशियों का कितना वजन है? अमेरिका में भारतवंशियों की राजनीतिक यात्रा 1955 में एक सांसद से शुरू होकर 6 सांसदों तक ही पहुंच पाई है। मतलब अमेरिकी संसद में अब भी भारतवंशियों का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। उच्च सदन सीनेट में तो एक भी भारतवंशी नहीं है। 2024 के चुनावों के बाद निचले सदन में भारतवंशियों की संख्या बढ़कर 6 हो गई। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने काश पटेल को एफबीआई डायरेक्टर बनाया है। डॉक्टर जय भट्टाचार्य को नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ के निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया है। श्रीराम कृष्णन को सरकार के लिए एआई नीति मार्गदर्शन के लिए अहम भूमिका सौंपी गई, जो भारतवंशियों की बढ़ती मौजूदगी दर्शाता है। संसद; 435 सीटों में 6 पर ही भारतवंशी – अमेरिकी संसद के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) की कुल 435 सीटों में से केवल 6 सीटों (1.4%) पर भारतवंशी। – 2012 से पहले केवल दो भारतवंशी पहुंचे थे। 1955 में दलीप सिंह सौंद और 2004 में बॉबी जिंदल। 2012 में अमी बेरा के बाद धीरे-धीरे यह संख्या अब आधा दर्जन हो पाई है। – उच्च सदन यानी सीनेट में इस वक्त एक भी भारतवंशी नहीं है। 100 सीनेटर होते हैं, 50 राज्यों से 2-2, निचले सदन से पास बिल में सीनेट की मुहर जरूरी। – कमला हैरिस 2016 में पहली भारतीय-अमेरिकी उच्च सदन की सदस्य बनीं। 2020 में उपराष्ट्रपति बनने के बाद उच्च सदन में कोई भारतवंशी नहीं है। शीर्ष सरकारी एजेंसियों में… सिर्फ 3% – हेल्थकेयर और साइंस के क्षेत्र में भारतवंशियों का बहुत बड़ा योगदान है, लेकिन ‘सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल’ (सीडीसी) और ‘नेशनल साइंस फाउंडेशन’ (एनएसएफ) जैसी अमेरिका की शीर्ष सरकारी एजेंसियों के उच्च पदों पर केवल 3% भारतवंशी। – मतलब ये कि काम करने की जगह पर तो भारतवंशियों की हिस्सेदारी 10% है, पर फैसले लेने वाली जगह पर 3% ही है। – किस शोध को पैसा मिले, किस विश्वविद्यालय को अनुदान मिले, किस तकनीक पर निवेश हो… ये सब यही संस्थान तय करते हैं। – इन पदों पर भारतीय-अमेरिकी कम होने से उनके समुदाय की जरूरतें, उनके शोध के विषय व प्राथमिकताएं पीछे रह जाती हैं। जबकि चुनाव में ये बड़े गेम चेंजर हैं – अमेरिका के कुल योग्य वोटर्स में भारतवंशियों की हिस्सेदारी भले ही 1% है, लेकिन वे ‘स्विंग स्टेट्स’ (चुनावों में निर्णायक माने जाने वाले राज्य) में अपना खासा प्रभाव रखते हैं। ये वोटर अब इमिग्रेशन रिफॉर्म, नागरिक अधिकारों और भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों जैसे मुद्दों पर मुखर होकर मतदान कर रहे हैं। – रिपोर्ट कहती है कि ये मतदाता करीबी मुकाबलों में परिणाम तय करने या पलटने में बहुत अहम। – 2024 के रिपब्लिकन प्राथमिक चुनाव में निक्की हेली और विवेक रामास्वामी, दोनों भारतीय मूल के उम्मीदवार थे। डेमोक्रेट में कमला हैरिस राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी थीं। ये इस समुदाय की राजनीतिक अहमियत बताता है। आईएमएफ, डब्ल्यूएचओ और वर्ल्ड बैंक में अपनी छाप छोड़ी भारतीय मूल के पेशेवर वैश्विक संस्थानों में महत्वपूर्ण नेतृत्व निभा रहे हैं। आईएमएफ में गीता गोपीनाथ ने कोविड में आर्थिक पुनरुद्धार और टीकाकरण रणनीतियों को दिशा दी। आईएमएफ के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने 2008 के वित्तीय संकट की पहले से चेतावनी देकर वैश्विक वित्तीय नीति को प्रभावित किया। विश्व बैंक में इंदरमीत गिल और ममता मूर्ति ने विकास नीतियों को नए विचारों के साथ मजबूत किया। 2023 से अध्यक्ष अजय बंगा जलवायु परियोजनाओं व गरीबी उन्मूलन पर ध्यान दे रहे हैं। डब्ल्यूएचओ में सौम्या स्वामीनाथन ने स्वास्थ्य क्षेत्र में वैश्विक सहयोग मजबूत किया।

Gold Surges ₹300 to ₹1.56 Lakh; Silver Jumps ₹5000 to ₹2.54 Lakh

Gold Surges ₹300 to ₹1.56 Lakh; Silver Jumps ₹5000 to ₹2.54 Lakh

Hindi News Business Gold Surges ₹300 To ₹1.56 Lakh; Silver Jumps ₹5000 To ₹2.54 Lakh नई दिल्ली7 घंटे पहले कॉपी लिंक सोने और चांदी में आज यानी 17 मार्च को मामूली बढ़त रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, एक किलो चांदी ₹4 हजार बढ़कर ₹2.52 लाख पर पहुंच गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹46 बढ़कर ₹1.56 लाख पर पहुंच गया है। सोना इस साल ₹23 हजार और चांदी ₹24 हजार महंगी इस साल सोने-चांदी की कीमत में तेजी देखने को मिली है। बीते साल के आखिर में सोना 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, जो अब 1.56 लाख रुपए पर है। यानी इसकी कीमत इस साल अब तक 22 हजार बढ़ चुकी है। वहीं चांदी भी इस दौरान 22 हजार रुपए महंगी हुई है। अमेरिका-ईरान तनाव पर निर्भर रहेगा बाजार जानकारों का मानना है कि सोने-चांदी की अगली चाल इन दो बातों पर निर्भर करेगी: मिडिल ईस्ट संकट: अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ता है या कच्चे तेल की कीमतें फिर से उछलती हैं तो सोने-चांदी में दोबारा तेजी आ सकती है। अमेरिकी डेटा: अगर अमेरिका के आर्थिक आंकड़े उम्मीद से बेहतर आते हैं तो डॉलर मजबूत होगा और इससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। ईरान जंग के बाद से सोना करीब 4 हजार, चांदी 14 हजार सस्ती तारीख सोना (प्रति 10 ग्राम) चांदी (प्रति 1 KG) 17-मार्च-26 ₹1,55,668 ₹2,52,340 16-मार्च-26 ₹1,55,714 ₹2,48,711 15-मार्च-26 रविवार (बंद) रविवार (बंद) 14-मार्च-26 शनिवार (बंद) शनिवार (बंद) 13-मार्च-26 ₹1,58,399 ₹2,60,488 12-मार्च-26 ₹1,60,303 ₹2,68,301 11-मार्च-26 ₹1,60,230 ₹2,66,010 10-मार्च-26 ₹1,60,188 ₹2,70,944 09-मार्च-26 ₹1,58,674 ₹2,60,056 08-मार्च-26 रविवार (बंद) रविवार (बंद) 07-मार्च-26 शनिवार (बंद) शनिवार (बंद) 06-मार्च-26 ₹1,58,751 ₹2,60,723 05-मार्च-26 ₹1,60,586 ₹2,64,212 04-मार्च-26 ₹1,62,548 ₹2,71,347 03-मार्च-26 मार्केट हॉलिडे मार्केट हॉलिडे 02-मार्च-26 ₹1,67,471 ₹2,89,848 01-मार्च-26 रविवार (बंद) रविवार (बंद) 28-फरवरी-26 शनिवार (बंद) शनिवार (बंद) 27-फरवरी-26 ₹1,59,097 ₹2,66,700 एक्सपर्ट की राय: क्या अभी सोना खरीदना सही है? एक्सपर्ट्स के इनुसार, रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोना फिलहाल ‘करेक्शन फेज’ (कीमतों में सुधार) में है। शॉर्ट टर्म में मोमेंटम थोड़ा कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन लॉन्ग टर्म में तेजी का रुझान बरकरार है। ऐसे में निवेशक सोने में थोड़ा-थोड़ा करके निवेश कर सकते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…