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Europe Refuses to Support Hormuz Operation

Europe Refuses to Support Hormuz Operation

वॉशिंगटन डीसी23 मिनट पहले

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ईरान में खामेनेई समेत 40 से भी ज्यादा अधिकारियों के मारे जाने के बाद अमेरिका को यह जंग बड़ी कामयाबी नजर आ रही थी। लेकिन 17 दिन बाद हालात बदल चुके हैं। युद्ध का कोई साफ अंत नजर नहीं आ रहा है।

ईरान ने जवाब में होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल आपूर्ति रोक दी, जिससे दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बड़ी चोट पहुंची है। ट्रम्प अब अपने सहयोगी नाटो देशों से होर्मुज में रास्ता खुलवाने की अपील कर रहे हैं।

हालांकि इन देशों ने साफ कर दिया है कि वे होर्मुज स्ट्रेट में अपने वॉरशिप नहीं भेजेंगे। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर नाटो देश इस अहम समुद्री रास्ते को फिर से खोलने में मदद नहीं करते, तो नाटो का भविष्य खराब हो सकता है।

जर्मनी बोला- यह यूरोप की जंग नहीं

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक जर्मनी ने साफ कहा है कि वह किसी भी सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लेगा। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि इस मामले में कभी कोई फैसला नहीं हुआ, इसलिए जर्मनी के सैन्य योगदान का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की मौजूदा सरकार खत्म होनी चाहिए, लेकिन बमबारी करके उसे झुकाना सही तरीका नहीं है।

जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने भी अमेरिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह यूरोप का युद्ध नहीं है और जब अमेरिकी नौसेना खुद इतनी ताकतवर है, तो कुछ यूरोपीय जहाज क्या कर लेंगे।

दुबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सोमवार को ड्रोन हमले के बाद आग और धुआं उठता दिखा। इस वजह से उड़ानों पर असर पड़ा।

दुबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सोमवार को ड्रोन हमले के बाद आग और धुआं उठता दिखा। इस वजह से उड़ानों पर असर पड़ा।

ब्रिटेन बोला- हम इस युद्ध में नहीं फंसेंगे

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि उनका देश इस बड़े युद्ध में नहीं फंसेगा। उन्होंने माना कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना जरूरी है ताकि तेल बाजार स्थिर रहे, लेकिन यह आसान काम नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी कदम ज्यादा से ज्यादा देशों की सहमति से ही उठाया जाएगा।

यूरोपीय देशों ने सैन्य कार्रवाई की बजाय कूटनीति पर जोर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट बहुत अहम है क्योंकि यहां से दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस की सप्लाई होती है, जो फिलहाल ईरान के कारण प्रभावित हो रही है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर सोमवार को लंदन में मिडिल ईस्ट की स्थिति पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर सोमवार को लंदन में मिडिल ईस्ट की स्थिति पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए।

इटली बोला- जंग नहीं बातचीत से हल निकले

इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने कहा कि इस संकट का हल बातचीत से ही निकलना चाहिए और उनका देश किसी नौसैनिक मिशन को बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय यूनियन के मौजूदा मिशन सिर्फ समुद्री डकैती रोकने और रक्षा के लिए हैं, उन्हें युद्ध में नहीं बदला जा सकता।

ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और जापान ने भी साफ कर दिया है कि वे अपने युद्धपोत नहीं भेजेंगे।

यूरोपीय यूनियन ने भी ट्रम्प की अपील ठुकराई

दूसरी ओर, ट्रम्प लगातार अपने सहयोगियों पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन देशों को इस समुद्री रास्ते से फायदा होता है, उन्हें इसकी सुरक्षा में हिस्सा लेना चाहिए। ट्रम्प ने खासतौर पर ब्रिटेन से नाराजगी भी जताई, हालांकि उन्हें उम्मीद है कि वह इसमें शामिल होगा।

यूरोपीय यूनियन के विदेश मंत्रियों ने भी अपने रेड सी (लाल सागर) मिशन को होर्मुज तक बढ़ाने से इनकार कर दिया। यूरोपीय यूनियन की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलस ने कहा कि फिलहाल मिशन का दायरा बढ़ाने की कोई इच्छा नजर नहीं आती।

यूरोपीय देश अमेरिका और इजराइल के युद्ध के मकसद को लेकर भी स्पष्टता चाहते हैं। एस्टोनिया के विदेश मंत्री ने कहा कि उन्हें समझना है कि ट्रम्प की रणनीति क्या है और आगे की योजना क्या होगी।

इजराइल बोला- 3 सप्ताह के लिए जंग की प्लानिंग तैयार

इस बीच इजराइल ने ईरान के कई शहरों जैसे तेहरान, शिराज और तबरीज में बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। इजराइल का दावा है कि उसने ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई से जुड़ा एक विमान भी नष्ट कर दिया।

इजराइली सेना का कहना है कि ईरान के साथ अगले 3 सप्ताह तक लड़ने के लिए उनकी प्लानिंग तैयार है। सेना के प्रवक्ता नदाव शोशानी ने सोमवार को कहा है कि सेना ने इससे आगे के समय के लिए भी अलग योजनाएं बना रखी है।

इजराइली सेना का कहना है कि इस अभियान का मकसद सीमित है। वे ईरान की उन क्षमताओं को कमजोर करना चाहते हैं जिनसे वह इजराइल के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इसके तहत ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल ढांचे, परमाणु ठिकानों और सुरक्षा तंत्र को निशाना बनाया जा रहा है।

इजराइली सेना का कहना है कि ईरान के अंदर अब भी हजारों ऐसे ठिकाने हैं जिन्हें निशाना बनाया जा सकता है। हालांकि पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि ईरान में अब “लगभग कुछ भी निशाना बनाने के लिए नहीं बचा है।”

ईरान बोला- अमेरिकी सेना आई तो अंजाम भुगतना होगा

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर युद्ध खत्म होगा तो इस तरह खत्म होना चाहिए कि दुश्मन दोबारा हमला करने की हिम्मत न करे।

ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिकी सेना जमीन पर उतरी, तो उसे वियतनाम जैसा अंजाम भुगतना पड़ सकता है।

अमेरिका ने बताया कि इस युद्ध में उसके करीब 200 सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें से ज्यादातर वापस ड्यूटी पर लौट आए हैं, जबकि 13 सैनिकों की मौत हो चुकी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में अब तक 1,800 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या में आम नागरिक हैं।

लेबनान में जमीनी हमले कर रहा इजराइल

इजराइल ने लेबनान के दक्षिणी हिस्से में जमीनी कार्रवाई भी बढ़ा दी है, जहां हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान चल रहा है। इस संघर्ष में लेबनान में अब तक 850 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 100 से अधिक बच्चे शामिल हैं।

जर्मनी ने इजराइल को चेतावनी दी है कि लेबनान में जमीनी हमला करना गलती होगी और इससे वहां की मानवीय स्थिति और खराब हो जाएगी।

————————————-

रिपोर्ट- ईरान में अभी सरकार नहीं गिरा पाएगा अमेरिका:मौजूदा लीडरशिप का जनता पर पूरा कंट्रोल; ट्रम्प जल्द ऑपरेशन खत्म कर सकते हैं

अमेरिका और इजराइल लगातार दो हफ्ते से ईरान में एयरस्ट्राइक कर रहे हैं, इसके बावजूद ईरान की सत्ता अभी भी काफी मजबूत है और उसके जल्द गिरने का कोई खतरा नहीं है।

यह बात अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में सामने आई है। इस मामले से जुड़े तीन सूत्रों ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को इसकी जानकारी दी है।

एक सूत्र के मुताबिक कई खुफिया रिपोर्टों में एक जैसा आकलन किया गया है कि ईरान की सरकार गिरने की स्थिति में नहीं है और वह अभी भी देश की जनता पर कंट्रोल बनाए हुए है।

वहीं, तेल की कीमतों में इजाफे की वजह से राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिया है कि अमेरिका जल्द जंग खत्म कर सकता है। हालांकि अगर ईरान के कट्टरपंथी नेता सत्ता में बने रहते हैं तो युद्ध खत्म करने का रास्ता निकालना आसान नहीं होगा। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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ईरान में खामेनेई समेत 40 से भी ज्यादा अधिकारियों के मारे जाने के बाद अमेरिका को यह जंग बड़ी कामयाबी नजर आ रही थी। लेकिन 17 दिन बाद हालात बदल चुके हैं। युद्ध का कोई साफ अंत नजर नहीं आ रहा है।

ईरान ने जवाब में होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल आपूर्ति रोक दी, जिससे दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बड़ी चोट पहुंची है। ट्रम्प अब अपने सहयोगी नाटो देशों से होर्मुज में रास्ता खुलवाने की अपील कर रहे हैं।

हालांकि इन देशों ने साफ कर दिया है कि वे होर्मुज स्ट्रेट में अपने वॉरशिप नहीं भेजेंगे। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर नाटो देश इस अहम समुद्री रास्ते को फिर से खोलने में मदद नहीं करते, तो नाटो का भविष्य खराब हो सकता है।

जर्मनी बोला- यह यूरोप की जंग नहीं

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक जर्मनी ने साफ कहा है कि वह किसी भी सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लेगा। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि इस मामले में कभी कोई फैसला नहीं हुआ, इसलिए जर्मनी के सैन्य योगदान का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की मौजूदा सरकार खत्म होनी चाहिए, लेकिन बमबारी करके उसे झुकाना सही तरीका नहीं है।

जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने भी अमेरिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह यूरोप का युद्ध नहीं है और जब अमेरिकी नौसेना खुद इतनी ताकतवर है, तो कुछ यूरोपीय जहाज क्या कर लेंगे।

दुबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सोमवार को ड्रोन हमले के बाद आग और धुआं उठता दिखा। इस वजह से उड़ानों पर असर पड़ा।

दुबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सोमवार को ड्रोन हमले के बाद आग और धुआं उठता दिखा। इस वजह से उड़ानों पर असर पड़ा।

ब्रिटेन बोला- हम इस युद्ध में नहीं फंसेंगे

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि उनका देश इस बड़े युद्ध में नहीं फंसेगा। उन्होंने माना कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना जरूरी है ताकि तेल बाजार स्थिर रहे, लेकिन यह आसान काम नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी कदम ज्यादा से ज्यादा देशों की सहमति से ही उठाया जाएगा।

यूरोपीय देशों ने सैन्य कार्रवाई की बजाय कूटनीति पर जोर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट बहुत अहम है क्योंकि यहां से दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस की सप्लाई होती है, जो फिलहाल ईरान के कारण प्रभावित हो रही है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर सोमवार को लंदन में मिडिल ईस्ट की स्थिति पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर सोमवार को लंदन में मिडिल ईस्ट की स्थिति पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए।

इटली बोला- जंग नहीं बातचीत से हल निकले

इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने कहा कि इस संकट का हल बातचीत से ही निकलना चाहिए और उनका देश किसी नौसैनिक मिशन को बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय यूनियन के मौजूदा मिशन सिर्फ समुद्री डकैती रोकने और रक्षा के लिए हैं, उन्हें युद्ध में नहीं बदला जा सकता।

ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और जापान ने भी साफ कर दिया है कि वे अपने युद्धपोत नहीं भेजेंगे।

यूरोपीय यूनियन ने भी ट्रम्प की अपील ठुकराई

दूसरी ओर, ट्रम्प लगातार अपने सहयोगियों पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन देशों को इस समुद्री रास्ते से फायदा होता है, उन्हें इसकी सुरक्षा में हिस्सा लेना चाहिए। ट्रम्प ने खासतौर पर ब्रिटेन से नाराजगी भी जताई, हालांकि उन्हें उम्मीद है कि वह इसमें शामिल होगा।

यूरोपीय यूनियन के विदेश मंत्रियों ने भी अपने रेड सी (लाल सागर) मिशन को होर्मुज तक बढ़ाने से इनकार कर दिया। यूरोपीय यूनियन की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलस ने कहा कि फिलहाल मिशन का दायरा बढ़ाने की कोई इच्छा नजर नहीं आती।

यूरोपीय देश अमेरिका और इजराइल के युद्ध के मकसद को लेकर भी स्पष्टता चाहते हैं। एस्टोनिया के विदेश मंत्री ने कहा कि उन्हें समझना है कि ट्रम्प की रणनीति क्या है और आगे की योजना क्या होगी।

इजराइल बोला- 3 सप्ताह के लिए जंग की प्लानिंग तैयार

इस बीच इजराइल ने ईरान के कई शहरों जैसे तेहरान, शिराज और तबरीज में बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। इजराइल का दावा है कि उसने ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई से जुड़ा एक विमान भी नष्ट कर दिया।

इजराइली सेना का कहना है कि ईरान के साथ अगले 3 सप्ताह तक लड़ने के लिए उनकी प्लानिंग तैयार है। सेना के प्रवक्ता नदाव शोशानी ने सोमवार को कहा है कि सेना ने इससे आगे के समय के लिए भी अलग योजनाएं बना रखी है।

इजराइली सेना का कहना है कि इस अभियान का मकसद सीमित है। वे ईरान की उन क्षमताओं को कमजोर करना चाहते हैं जिनसे वह इजराइल के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इसके तहत ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल ढांचे, परमाणु ठिकानों और सुरक्षा तंत्र को निशाना बनाया जा रहा है।

इजराइली सेना का कहना है कि ईरान के अंदर अब भी हजारों ऐसे ठिकाने हैं जिन्हें निशाना बनाया जा सकता है। हालांकि पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि ईरान में अब “लगभग कुछ भी निशाना बनाने के लिए नहीं बचा है।”

ईरान बोला- अमेरिकी सेना आई तो अंजाम भुगतना होगा

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर युद्ध खत्म होगा तो इस तरह खत्म होना चाहिए कि दुश्मन दोबारा हमला करने की हिम्मत न करे।

ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिकी सेना जमीन पर उतरी, तो उसे वियतनाम जैसा अंजाम भुगतना पड़ सकता है।

अमेरिका ने बताया कि इस युद्ध में उसके करीब 200 सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें से ज्यादातर वापस ड्यूटी पर लौट आए हैं, जबकि 13 सैनिकों की मौत हो चुकी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में अब तक 1,800 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या में आम नागरिक हैं।

लेबनान में जमीनी हमले कर रहा इजराइल

इजराइल ने लेबनान के दक्षिणी हिस्से में जमीनी कार्रवाई भी बढ़ा दी है, जहां हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान चल रहा है। इस संघर्ष में लेबनान में अब तक 850 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 100 से अधिक बच्चे शामिल हैं।

जर्मनी ने इजराइल को चेतावनी दी है कि लेबनान में जमीनी हमला करना गलती होगी और इससे वहां की मानवीय स्थिति और खराब हो जाएगी।

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रिपोर्ट- ईरान में अभी सरकार नहीं गिरा पाएगा अमेरिका:मौजूदा लीडरशिप का जनता पर पूरा कंट्रोल; ट्रम्प जल्द ऑपरेशन खत्म कर सकते हैं

अमेरिका और इजराइल लगातार दो हफ्ते से ईरान में एयरस्ट्राइक कर रहे हैं, इसके बावजूद ईरान की सत्ता अभी भी काफी मजबूत है और उसके जल्द गिरने का कोई खतरा नहीं है।

यह बात अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में सामने आई है। इस मामले से जुड़े तीन सूत्रों ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को इसकी जानकारी दी है।

एक सूत्र के मुताबिक कई खुफिया रिपोर्टों में एक जैसा आकलन किया गया है कि ईरान की सरकार गिरने की स्थिति में नहीं है और वह अभी भी देश की जनता पर कंट्रोल बनाए हुए है।

वहीं, तेल की कीमतों में इजाफे की वजह से राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिया है कि अमेरिका जल्द जंग खत्म कर सकता है। हालांकि अगर ईरान के कट्टरपंथी नेता सत्ता में बने रहते हैं तो युद्ध खत्म करने का रास्ता निकालना आसान नहीं होगा। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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