Sunday, 23 Aug 2026 | 10:19 AM

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खंडवा में गुड़ी पड़वा पर भगवा यात्रा आज:सकल हिंदू समाज निकालेगा वाहन रैली, भवानी माता मंदिर से होगी शुरू; बिजली कंपनी ने मेंटेनेंस स्थगित किया

खंडवा में गुड़ी पड़वा पर भगवा यात्रा आज:सकल हिंदू समाज निकालेगा वाहन रैली, भवानी माता मंदिर से होगी शुरू; बिजली कंपनी ने मेंटेनेंस स्थगित किया

गुड़ी पड़वा और हिंदू नववर्ष के अवसर पर आज (गुरुवार) सकल हिंदू समाज द्वारा एक विशाल भगवा वाहन रैली निकाली जाएगी। यह रैली शाम 4 बजे भवानी माता मंदिर प्रांगण से शुरू होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए इंदिरा चौक के पास समाप्त होगी। आयोजन को देखते हुए पुलिस ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है, वहीं नववर्ष के आयोजनों के चलते बिजली कंपनी ने भी आज का अपना प्रस्तावित मेंटेनेंस कार्य स्थगित कर दिया है। हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक माधव झा और आयोजन की अध्यक्षता कर रहे राकेश बंसल ने बताया कि हिंदू नववर्ष के उपलक्ष्य में यह वाहन रैली निकाली जा रही है। इस रैली में हजारों लोग अपने हाथों में भगवा झंडा थामे वाहनों से शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरेंगे। इन प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगी रैली वाहन रैली गौशाला, अंजनी टॉकीज होते हुए दुबे कॉलोनी और जीडीसी कॉलेज से पड़ावा पहुंचेगी। यहां से रैली मेडिकल चौराहा, शिवाजी चौक, मोघट थाना, शक्कर तालाब, मरी माता मंदिर से रामेश्वर पुलिस चौकी जाएगी। इसके बाद बड़ाबम के रास्ते तीन पुलिया, रेलवे स्टेशन, बॉम्बे बाजार, घंटाघर, नगर निगम, जलेबी चौक, बजरंग चौक, मछली बाजार, टपालचाल और बस स्टैंड से ओवरब्रिज क्रॉस करके इंदिरा चौक माता मंदिर पर समाप्त होगी। बिजली कंपनी ने स्थगित किया मेंटेनेंस गुड़ी पड़वा पर बाजार क्षेत्र में बिजली कंपनी ने मेंटेनेंस शेड्यूल तय किया था। जिसे आयोजनों और नववर्ष को देखते हुए कैंसिल कर दिया गया है। सहायक यंत्री (मेंटेनेंस) महेश कुमार सोलंकी ने बताया कि, “आज सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक बिजली कंपनी की ओर से मेंटेनेंस कार्य किया जाना था, जिसे कि स्थगित कर दिया गया हैं।” इस मेंटेनेंस कार्य के तहत शहर के बॉम्बे बाजार, बुधवारा बाजार और घंटाघर क्षेत्र की बिजली प्रभावित होने वाली थी।

मूवी रिव्यू – ‘धुरंधर: द रिवेंज’:रणवीर सिंह की दमदार परफॉर्मेंस, नोटबंदी और राजनीतिक कड़ियों से जुड़ी कहानी, जानिए कैसी है फिल्म

मूवी रिव्यू – ‘धुरंधर: द रिवेंज’:रणवीर सिंह की दमदार परफॉर्मेंस, नोटबंदी और राजनीतिक कड़ियों से जुड़ी कहानी, जानिए कैसी है फिल्म

रणवीर सिंह की ‘धुरंधर: द रिवेंज’ यानी धुरंधर 2 पहले पार्ट की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद बड़े स्केल पर लौटी है। इस बार फिल्म सिर्फ गैंगवार या बदले की कहानी नहीं रहती, बल्कि नोटबंदी से लेकर देश की कई बड़ी घटनाओं को जोड़ते हुए एक बड़ा नैरेटिव पेश करती है। उम्मीदें जितनी ऊंची थीं, फिल्म कई जगह उन्हें पूरा करती है, तो कुछ जगह थोड़ा चूक भी जाती है। फिल्म की कहानी कहानी जसकीरत सिंह रांगी के अतीत से शुरू होती है, जो अपने परिवार के साथ हुए अन्याय के बाद अपराध की दुनिया में कदम रखता है। जेल से निकलकर वह भारत के लिए काम करने का मौका पाता है और पाकिस्तान में हमजा अली मजारी बनकर अंडरकवर मिशन पर जाता है। पहले पार्ट के बाद अब कहानी ल्यारी की सत्ता और गैंगवार के इर्द-गिर्द घूमती है। रहमान डकैत की मौत के बाद खाली हुई गद्दी पर कब्जा, दुश्मनों का सफाया और अपने असली मिशन तक पहुंचना यही फिल्म का मूल है। इस बार कहानी में नोटबंदी, अतीक अहमद जैसे मुद्दों के संदर्भ और देश-विदेश की राजनीतिक कड़ियों को जोड़ा गया है। सबसे बड़ा सस्पेंस “बड़े साहब” का है, जिसके इर्द-गिर्द पूरी कहानी घूमती है। हालांकि यह खुलासा जितना बड़ा बनाया गया, उतना प्रभाव छोड़ नहीं पाता। फिल्म का फर्स्ट हाफ थोड़ा धीमा और खिंचा हुआ लगता है, लेकिन इंटरवल के बाद कहानी पकड़ बनाती है और क्लाइमैक्स तक आते-आते असर छोड़ती है। फिल्म में एक्टिंग रणवीर सिंह पूरी फिल्म की जान हैं। जसकीरत और हमजा—दोनों किरदारों में उन्होंने अलग-अलग बॉडी लैंग्वेज और एटीट्यूड दिखाया है। एक्शन, गुस्सा और इमोशन, हर जगह वो स्क्रीन पर छाए रहते हैं। राकेश बेदी इस बार भी सरप्राइज पैकेज हैं। आर. माधवन जब भी स्क्रीन पर आते हैं, फिल्म को मजबूती देते हैं। संजय दत्त का प्रेजेंस अच्छा है, लेकिन सीमित है। अर्जुन रामपाल का किरदार इस बार उतना खतरनाक नहीं बन पाया। सारा अर्जुन को स्क्रीन टाइम कम मिला है, लेकिन अपने हिस्से में वो असर छोड़ती हैं। उनका किरदार और गहराई पा सकता था। फिल्म में डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष आदित्य धर ने फिल्म का स्केल और बड़ा किया है। रिसर्च और डिटेलिंग में मेहनत दिखती है, खासकर जब फिल्म असली घटनाओं को छूती है। लेकिन यही कोशिश कई जगह फिल्म को भारी और थोड़ी डॉक्यूमेंट्री जैसी भी बना देती है। पहले पार्ट की टाइट कहानी यहां थोड़ी ढीली पड़ती है। कई सीन लंबे लगते हैं और कुछ ट्विस्ट पहले से अंदाजा हो जाते हैं। हालांकि सेकंड हाफ में डायरेक्शन संभलता है और क्लाइमैक्स मजबूत बनता है। सिनेमैटोग्राफी और एक्शन सीक्वेंस शानदार हैं। बैकग्राउंड स्कोर खासकर क्लाइमैक्स में प्रभावशाली है, लेकिन एडिटिंग और टाइट हो सकती थी। फिल्म का म्यूजिक म्यूजिक इस बार फिल्म की कमजोर कड़ी है। पहले पार्ट जैसा असर नहीं बन पाता। कुछ जगह पुराने गानों का इस्तेमाल किया गया है, जबकि ‘आरी आरी’ और ‘जान से गुजरते’ जैसे एक-दो गाने ही याद रह जाते हैं। बैकग्राउंड स्कोर जरूर माहौल बनाने में सफल रहता है। फिल्म पर फाइनल वर्डिक्ट धुरंधर 2 एक बड़ी और महत्वाकांक्षी फिल्म है, जो एक्शन, पॉलिटिक्स और रियल इवेंट्स को जोड़कर अलग तरह का सिनेमाई अनुभव देने की कोशिश करती है। हालांकि इसकी लंबाई, ढीली पटकथा और कुछ अधूरे किरदार इसे पहले पार्ट जितना दमदार नहीं बनने देते। फिर भी, रणवीर सिंह की शानदार परफॉर्मेंस, मजबूत सेकंड हाफ और असरदार क्लाइमैक्स इसे एक अच्छा थिएटर एक्सपीरियंस बनाते हैं। अगर आपने पहला पार्ट पसंद किया था, तो यह फिल्म जरूर देखें, बस उम्मीदें थोड़ी संतुलित रखकर।

मूवी रिव्यू – ‘धुरंधर: द रिवेंज’:रणवीर सिंह की दमदार परफॉर्मेंस, नोटबंदी और राजनीतिक कड़ियों से जुड़ी कहानी, जानिए कैसी है फिल्म

मूवी रिव्यू – ‘धुरंधर: द रिवेंज’:रणवीर सिंह की दमदार परफॉर्मेंस, नोटबंदी और राजनीतिक कड़ियों से जुड़ी कहानी, जानिए कैसी है फिल्म

रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ यानी धुरंधर 2 पहले पार्ट की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद बड़े स्केल पर लौटी है। इस बार फिल्म सिर्फ गैंगवार या बदले की कहानी नहीं रहती, बल्कि नोटबंदी से लेकर देश की कई बड़ी घटनाओं को जोड़ते हुए एक बड़ा नैरेटिव पेश करती है। उम्मीदें जितनी ऊंची थीं, फिल्म कई जगह उन्हें पूरा करती है, तो कुछ जगह थोड़ा चूक भी जाती है। फिल्म की कहानी कहानी जसकीरत सिंह रांगी के अतीत से शुरू होती है, जो अपने परिवार के साथ हुए अन्याय के बाद अपराध की दुनिया में कदम रखता है। जेल से निकलकर वह भारत के लिए काम करने का मौका पाता है और पाकिस्तान में हमजा अली मजारी बनकर अंडरकवर मिशन पर जाता है। पहले पार्ट के बाद अब कहानी ल्यारी की सत्ता और गैंगवार के इर्द-गिर्द घूमती है। रहमान डकैत की मौत के बाद खाली हुई गद्दी पर कब्जा, दुश्मनों का सफाया और अपने असली मिशन तक पहुंचना यही फिल्म का मूल है। इस बार कहानी में नोटबंदी, अतीक अहमद जैसे मुद्दों के संदर्भ और देश-विदेश की राजनीतिक कड़ियों को जोड़ा गया है। सबसे बड़ा सस्पेंस “बड़े साहब” का है, जिसके इर्द-गिर्द पूरी कहानी घूमती है। हालांकि यह खुलासा जितना बड़ा बनाया गया, उतना प्रभाव छोड़ नहीं पाता। फिल्म का फर्स्ट हाफ थोड़ा धीमा और खिंचा हुआ लगता है, लेकिन इंटरवल के बाद कहानी पकड़ बनाती है और क्लाइमैक्स तक आते-आते असर छोड़ती है। फिल्म में एक्टिंग रणवीर सिंह पूरी फिल्म की जान हैं। जसकीरत और हमजा—दोनों किरदारों में उन्होंने अलग-अलग बॉडी लैंग्वेज और एटीट्यूड दिखाया है। एक्शन, गुस्सा और इमोशन, हर जगह वो स्क्रीन पर छाए रहते हैं। राकेश बेदी इस बार भी सरप्राइज पैकेज हैं। आर. माधवन जब भी स्क्रीन पर आते हैं, फिल्म को मजबूती देते हैं। संजय दत्त का प्रेजेंस अच्छा है, लेकिन सीमित है। अर्जुन रामपाल का किरदार इस बार उतना खतरनाक नहीं बन पाया। सारा अर्जुन को स्क्रीन टाइम कम मिला है, लेकिन अपने हिस्से में वो असर छोड़ती हैं। उनका किरदार और गहराई पा सकता था। फिल्म में डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष आदित्य धर ने फिल्म का स्केल और बड़ा किया है। रिसर्च और डिटेलिंग में मेहनत दिखती है, खासकर जब फिल्म असली घटनाओं को छूती है। लेकिन यही कोशिश कई जगह फिल्म को भारी और थोड़ी डॉक्यूमेंट्री जैसी भी बना देती है। पहले पार्ट की टाइट कहानी यहां थोड़ी ढीली पड़ती है। कई सीन लंबे लगते हैं और कुछ ट्विस्ट पहले से अंदाजा हो जाते हैं। हालांकि सेकंड हाफ में डायरेक्शन संभलता है और क्लाइमैक्स मजबूत बनता है। सिनेमैटोग्राफी और एक्शन सीक्वेंस शानदार हैं। बैकग्राउंड स्कोर खासकर क्लाइमैक्स में प्रभावशाली है, लेकिन एडिटिंग और टाइट हो सकती थी। फिल्म का म्यूजिक म्यूजिक इस बार फिल्म की कमजोर कड़ी है। पहले पार्ट जैसा असर नहीं बन पाता। कुछ जगह पुराने गानों का इस्तेमाल किया गया है, जबकि ‘आरी आरी’ और ‘जान से गुजरते’ जैसे एक-दो गाने ही याद रह जाते हैं। बैकग्राउंड स्कोर जरूर माहौल बनाने में सफल रहता है। फिल्म पर फाइनल वर्डिक्ट धुरंधर 2 एक बड़ी और महत्वाकांक्षी फिल्म है, जो एक्शन, पॉलिटिक्स और रियल इवेंट्स को जोड़कर अलग तरह का सिनेमाई अनुभव देने की कोशिश करती है। हालांकि इसकी लंबाई, ढीली पटकथा और कुछ अधूरे किरदार इसे पहले पार्ट जितना दमदार नहीं बनने देते। फिर भी, रणवीर सिंह की शानदार परफॉर्मेंस, मजबूत सेकंड हाफ और असरदार क्लाइमैक्स इसे एक अच्छा थिएटर एक्सपीरियंस बनाते हैं। अगर आपने पहला पार्ट पसंद किया था, तो यह फिल्म जरूर देखें, बस उम्मीदें थोड़ी संतुलित रखकर।

‘पिछले दरवाजे की राजनीति काम नहीं करेगी’: टीएमसी के कुणाल घोष का कहना है कि बंगाल ममता के साथ खड़ा है विशेष | चुनाव समाचार

Eid ul-Fitr 2026 Moon Sighting Date, Timing LIVE: Saudi Arabia, UAE To Celebrate Festival On March 20

आखरी अपडेट:मार्च 19, 2026, 08:53 IST पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि भबनीपुर में मुख्यमंत्री “50,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीतेंगे” बुधवार को कुणाल घोष ने बेलेघाटा में दीवार लेखन और निर्वाचन क्षेत्र में घर-घर जाकर अभियान चलाकर अपना अभियान शुरू किया। (न्यूज़18) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता, जाने-माने पत्रकार और पार्टी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर अभ्यास को भाजपा द्वारा “पिछले दरवाजे की राजनीति” का सहारा लेने का प्रयास बताया है, यह देखते हुए कि “साजिशों” के बावजूद, लोग मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को वोट देंगे। News18 के साथ एक साक्षात्कार में, टीएमसी के लंबे समय से सहयोगी घोष, जो संगठनात्मक और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर पार्टी की गतिविधियों में निकटता से शामिल रहे हैं, ने आगामी चुनावों में अपने गृह क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी के साथ उन पर भरोसा करने के लिए शीर्ष अधिकारियों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “मैं बेहद खुश और आभारी हूं। मैं लंबे समय से पार्टी से जुड़ा हुआ हूं। मैंने पहले राज्यसभा सांसद के रूप में कार्य किया है, और अन्य समय में, मैंने संगठन के एक साधारण सैनिक के रूप में काम किया है। मुझे यह जिम्मेदारी देने के लिए मैं दीदी, अभिषेक बनर्जी और पार्टी नेतृत्व को दिल से धन्यवाद देता हूं। बेलेघाटा मेरा गृह निर्वाचन क्षेत्र है – मेरा जन्म यहीं हुआ था। हमारी पार्टी में, हम सभी सैनिक हैं; हर कोई समान रूप से महत्वपूर्ण है। हम सभी ममता बनर्जी के सैनिक हैं, और हम भारी बहुमत से जीतेंगे।” उन रिपोर्टों को खारिज करते हुए कि एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) ने पार्टी के लिए तनाव पैदा कर दिया है, उन्होंने कहा: “उन्हें (भाजपा) बंगाल में विश्वास नहीं है। वे दबाव बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग करके पिछले दरवाजे की राजनीति का सहारा लेते हैं – कभी सीबीआई के माध्यम से, कभी ईडी के माध्यम से। लेकिन हमारे पास एक कहावत है: ‘हर मौसम में, हमारा भरोसा ममता बनर्जी पर रहता है।’ तमाम साजिशों के बावजूद बंगाल की जनता उन्हें वोट देगी. यह निश्चित है।” घोष ने ब्रिगेड ग्राउंड में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की रैली का भी मजाक उड़ाया, उन्होंने कहा कि मतदाताओं की तुलना में अधिक बांस के खंभे थे और कहा कि “अकेले भीड़ परिवर्तन में तब्दील नहीं होती है”। “कोई “परिवर्तन” या “प्रत्यावर्तन” नहीं होगा। हमने पहले भी ऐसी सभाएँ देखी हैं। एसयूसीआई की ब्रिगेड रैलियों ने महत्वपूर्ण भीड़ खींची है। अंततः, यह लोगों का जनादेश है जो मायने रखता है।” उन्होंने कहा कि भवानीपुर में, “ममता बनर्जी 50,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल करेंगी”। बुधवार को घोष ने बेलेघाटा में दीवार लेखन और निर्वाचन क्षेत्र में घर-घर जाकर अभियान चलाकर अपना अभियान शुरू किया। पहले प्रकाशित: मार्च 19, 2026, 08:47 IST समाचार चुनाव ‘पिछले दरवाजे की राजनीति काम नहीं करेगी’: टीएमसी के कुणाल घोष का कहना है कि बंगाल ममता के साथ खड़ा है अनन्य अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कुणाल घोष(टी)तृणमूल कांग्रेस(टी)टीएमसी नेता(टी)ममता बनर्जी(टी)बीजेपी पिछले दरवाजे की राजनीति(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)बेलेघाटा निर्वाचन क्षेत्र(टी)एसआईआर अभ्यास

बीजेपी के केरलम पोल प्ले के अंदर: ईसाइयों को लुभाना, यूडीएफ आधार को तोड़ना | चुनाव समाचार

Eid ul-Fitr 2026 Moon Sighting Date, Timing LIVE: Saudi Arabia, UAE To Celebrate Festival On March 20

आखरी अपडेट:मार्च 19, 2026, 08:51 IST मध्य केरल में चर्च-प्रभावित निर्वाचन क्षेत्रों से लेकर जिलों में व्यापक सामाजिक पहुंच तक, पार्टी धीमी राजनीतिक परिवर्तन में निवेश करती दिख रही है इसलिए, भाजपा की केरलम रणनीति तात्कालिकता के इर्द-गिर्द नहीं बल्कि धैर्य के इर्द-गिर्द बनी है। (पीटीआई) भाजपा की ईसाई पहुंच, जो लंबे समय से केरलम में चर्चा का विषय रही है, अब स्पष्ट चुनावी आकार ले रही है। पार्टी इस बार विधानसभा चुनावों में ईसाई मतदाताओं के बीच बढ़त की उम्मीद कर रही है क्योंकि शुरुआती गति सिरो-मालाबार समुदाय के वर्गों द्वारा संचालित होती दिख रही है। कुछ क्षेत्रों में ईसाइयों के भाजपा के साथ जुड़ने से पार्टी को यूडीएफ के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगने की संभावना है। मध्य केरल में, विशेष रूप से कोट्टायम और पाला के सिरो-मालाबार बेल्ट में, पार्टी ने एक सुव्यवस्थित पहुंच बढ़ा दी है, समुदाय के नेताओं को शामिल किया है, उन्हें प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलवाया है, स्थानीय वार्ताकारों का भी समर्थन किया है, और अपने राजनीतिक संदेश को फिर से तैयार किया है। यह दृष्टिकोण अन्यत्र अपनी पारंपरिक प्लेबुक से उल्लेखनीय रूप से भिन्न है। केरल में, दृष्टिकोण शांत, अधिक संवादात्मक और स्थानीय चिंताओं पर आधारित है। न्यूज 18 से बात करते हुए बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा, “हमारी पहुंच हर किसी, हर समुदाय तक है. ईसाइयों ने अब मुद्दों को देखना शुरू कर दिया है. लेकिन, एक विकसित केरलम के लिए, हम सभी को बता रहे हैं कि हम एक मेहनती पार्टी हैं और हम केरलम को महान ऊंचाइयों पर ले जाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.” पार्टी का कहना है कि उसे समर्थन में बढ़ोतरी दिख रही है, खासकर प्रभावशाली सिरो-मालाबार ईसाई समुदाय के बीच। पार्टी के ईसाई आउटरीच के प्रभारी उपाध्यक्ष शोन जॉर्ज के अनुसार, राज्य भर में हाल के नागरिक चुनावों में, भाजपा ने लगभग 900 ईसाई उम्मीदवारों को मैदान में उतारा। उन्होंने कहा कि सामुदायिक उत्थान, “लव जिहाद”, प्रवासन और वक्फ भूमि विवाद जैसे मुद्दे ईसाई मतदाताओं के वर्गों के बीच गूंज रहे हैं। पिच को फिर से तैयार करना केरल के ईसाई गढ़ में, राजनीति लंबे समय से संस्थागत प्रभाव, स्थानीय नेतृत्व और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के साथ एक स्थिर गठबंधन द्वारा आकार लेती रही है। इसलिए, इस क्षेत्र में भाजपा का प्रवेश टकरावपूर्ण नहीं बल्कि वृद्धिशील है। केरल कांग्रेस, ईसाई समुदाय, मुख्य रूप से सिरो-मालाबार ईसाइयों के प्रभुत्व वाली पार्टी, ने पारंपरिक रूप से कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन-यूडीएफ का समर्थन किया है। हालाँकि, पार्टी में अब गुटीय कलह देखने को मिल रही है, जिससे बीजेपी को मदद मिल सकती है। शॉन जॉर्ज ने कहा, “केरल कांग्रेस अब नौ गुटों में विभाजित हो गई है। हम सभी से विकसित केरल के लिए हमारे साथ जुड़ने का अनुरोध कर रहे हैं।” पार्टी अब अपने कथानक पर ध्यान केंद्रित कर रही है और भूमि अधिकार, आर्थिक चिंताओं और मध्य पूर्व में युवाओं के लगातार प्रवासन जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। यहां तक ​​कि ‘लव जिहाद’ जैसे विवादास्पद विषयों को भी इस तरह से प्रस्तुत किया जा रहा है कि ईसाई समुदाय के वर्गों के बीच इसकी प्रतिध्वनि हो। महत्वपूर्ण रूप से, इस आउटरीच का नेतृत्व समुदाय से जुड़े लोगों और स्थानीय नेटवर्क द्वारा किया जा रहा है, जो इस समझ का संकेत देता है कि केरल में राजनीतिक वैधता भीतर से निर्मित होनी चाहिए, न कि बाहर से थोपी जानी चाहिए। एक संकीर्ण खिड़की, लहर नहीं इस नए सिरे से जुड़ाव के बावजूद, बड़े पैमाने पर राजनीतिक बदलाव के अभी तक बहुत कम सबूत हैं। ज़मीनी बातचीत में जिज्ञासा के साथ-साथ सावधानी भी झलकती है। केरलम का ईसाई समुदाय वैचारिक स्थिति और ऐतिहासिक संरेखण की मजबूत स्मृति के साथ, राजनीतिक रूप से जागरूक और संस्थागत रूप से जुड़ा हुआ है। भाजपा को उसी चश्मे से देखा जा रहा है, भले ही वह धारणाओं को नरम करने का प्रयास कर रही हो। मुनंबम भूमि विवाद में ईसाई परिवारों का समर्थन करना, जहां वक्फ बोर्ड ने समुदाय द्वारा बसाई गई संपत्ति पर दावा किया है, एक महत्वपूर्ण मोड़ रहा है। दावे के ख़िलाफ़ लगभग 600 परिवारों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी। वक्फ बोर्ड के दावे के बाद इलाके का एक प्रमुख ईसाई चेहरा फिलिप जोसेफ भाजपा में शामिल हो गए। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व जोसेफ कर रहे हैं. न्यूज़ 18 से बात करते हुए, जोसेफ ने कहा, “हमने सरकार और यहां की हर पार्टी और यहां तक ​​कि चर्च से भी इन परिवारों की मदद करने की अपील की है। लेकिन हमारे अनुरोध अनसुने रहे और हमारे मुद्दों का समाधान नहीं हुआ। इस स्थिति ने हमें बीजेपी में शामिल कर लिया, जिसने हमारे मुद्दों को समझा।” जोसेफ बीजेपी में शामिल हो गए और उन्हें पार्टी का अल्पसंख्यक मोर्चा का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है. इस बीच, पीएम मोदी ने शीर्ष बिशप और चर्च नेताओं के साथ कई बैठकें की हैं, जिसमें कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) द्वारा आयोजित क्रिसमस समारोह में एक हाई-प्रोफाइल भागीदारी भी शामिल है। हालाँकि, जो उभर रहा है वह एक सीमित लेकिन महत्वपूर्ण शुरुआत है, कुछ लोगों के बीच चुनावी प्रतिबद्धता के बिना विशिष्ट मुद्दों पर शामिल होने की इच्छा। कड़े द्विध्रुवीय मुकाबलों से परिभाषित राज्य में, वोट शेयर में मामूली बदलाव भी करीबी मुकाबले वाली सीटों पर नतीजे बदल सकता है। इसलिए, भाजपा की केरलम रणनीति तात्कालिकता के इर्द-गिर्द नहीं बल्कि धैर्य के इर्द-गिर्द बनी है। मध्य केरल में चर्च-प्रभावित निर्वाचन क्षेत्रों से लेकर जिलों में व्यापक सामाजिक पहुंच तक, पार्टी एक धीमी राजनीतिक परिवर्तन में निवेश कर रही है, जो हाशिए से प्रासंगिकता की ओर बढ़ना चाहती है। जगह : तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम), भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 19, 2026, 08:51 IST समाचार चुनाव बीजेपी के केरलम पोल प्ले के अंदर: ईसाइयों को लुभाना, यूडीएफ आधार को तोड़ना अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी ईसाई आउटरीच(टी)बीजेपी केरलम चुनाव(टी)सिरो-मालाबार

Liverpool Beat Galatasaray | Mohamed Salah 50 Goals Champions League Quarter-final

Liverpool Beat Galatasaray | Mohamed Salah 50 Goals Champions League Quarter-final

Hindi News Sports Liverpool Beat Galatasaray | Mohamed Salah 50 Goals Champions League Quarter final 32 मिनट पहले कॉपी लिंक मोहम्मद सलाह ने मैच की शुरुआत में एक पेनल्टी मिस कर दी थी, लेकिन बाद में शानदार वापसी करते हुए उन्होंने एक गोल किया और एक असिस्ट भी दिया। लिवरपूल ने 2022 के बाद पहली बार चैंपियंस लीग क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली है। बुधवार को एनफील्ड के मैदान पर खेले गए प्री क्वार्टर फाइनल में तुर्की क्लब गैलेटसाराय को 4-0 से हराया। इससे कुल मिलाकर 4-1 से लिवरपूल आगे बढ़ गया। पहले लेग में गैलेटसाराय ने 1-0 से जीता था। डोमिनिक स्ज़ोबोस्लाई ने पहला गोल कर लिवरपूल को मैच में बढ़त दिलाई और कुल स्कोर (एग्रीगेट) बराबर कर दिया। मोहम्मद सलाह चैंपियंस लीग में 50 गोल करने वाले पहले अफ्रीकी बने मैच के हीरो एक बार फिर मोहम्मद सलाह रहे। उन्होंने शुरुआत में एक पेनल्टी मिस कर दी थी, लेकिन बाद में शानदार वापसी करते हुए एक गोल किया और एक असिस्ट भी दिया। इस प्रदर्शन के साथ वह चैंपियंस लीग में 50 गोल करने वाले पहले अफ्रीकी खिलाड़ी बन गए। इसके अलावा, वह एंफील्ड में लिवरपूल के लिए 201 गोल में योगदान देने वाले खिलाड़ी भी बन गए हैं। एंफील्ड लिवरपूल का घरेलू मैदान है। यहां सलाह ने 211 मैच खेले हैं, जिनमें उन्होंने 140 गोल किए और 61 असिस्ट दिए हैं। टीम मैनेजर ने सलाह की तारीफ की हाफ-टाइम तक चर्चा सलाह की उस पेनल्टी को लेकर थी,जिसे वे गोल में नहीं बदल सके। सलाह जैसे खिलाड़ी के लिए यह एक कमजोर प्रयास था। हालांकि, मैनेजर अर्ने स्लॉट ने उनकी मानसिक मजबूती की तारीफ करते हुए कहा,’पेनल्टी चूकना एक कठिन पल था, लेकिन दूसरे हाफ में उन्होंने जिस तरह से वापसी की, एक शानदार असिस्ट दिया और फिर अपना ट्रेडमार्क गोल किया, वह उनकी मेंटल स्ट्रेंथ को दर्शाता है।’ सलाह ने मैच के 74वें मिनट में चोट की आशंका के चलते खुद को सब्स्टीट्यूट करने को कहा, जिससे फैंस थोड़ी चिंता में दिखे। 32 अटेम्प्ट किए लिवरपूल ने मैच की शुरुआत से ही गैलेटसाराय को संभलने का कोई मौका नहीं दिया। पूरी टीम ने शानदार खेल दिखाया और पूरे मैच में 32 शॉट लगाए, जिनमें से 16 सीधे गोल पर थे। इससे पहले पिछले हफ्ते टॉटेनहम के खिलाफ लिवरपूल का प्रदर्शन फीका रहा था। वहीं, गैलेटसाराय के खिलाफ इस्तांबुल में खेले गए मुकाबले में भी टीम पूरे 90 मिनट तक गोल नहीं कर पाई थी। पूर्व इंग्लैंड गोलकीपर पॉल रॉबिन्सन ने कहा,’लिवरपूल आज बहुत शार्प और क्विक दिखी। दूसरे हाफ का प्रदर्शन इस सीजन के बेहतरीन पलों में से एक था।’ अब क्वार्टर फाइनल में पीएसजी से मुकाबला लिवरपूल का अगला सफर और भी चुनौतीपूर्ण होने वाला है। चैंपियंस लीग के क्वार्टर फाइनल में उनका मुकाबला डिफेंडिंग चैंपियन पेरिस सेंट-जर्मेन (PSG) से होगा। लिवरपूल को पता है कि अगर वे पेरिस में होने वाले पहले लेग में खुद को बचाए रखते हैं, तो एनफील्ड के घरेलू मैदान पर वापसी के दौरान लुइस एनरिक की टीम के खिलाफ कुछ भी संभव है। इसके अलावा, टीम को एफए कप के क्वार्टर फाइनल में मैनचेस्टर सिटी का भी सामना करना है। ————————————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… बाबर-फखर चोट के बावजूद टी-20 वर्ल्डकप में चुने गए थे:PCB मेडिकल पैनल ने बताया- सिलेक्शन के समय पूरी तरह फिट नहीं थे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के मेडिकल पैनल ने खुलासा किया है कि बाबर आजम और फखर जमान को टी-20 वर्ल्ड कप टीम में शामिल किए जाने के समय उनकी फिटनेस पूरी तरह ठीक नहीं थी। पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने चाकू से रेता अपना गला, देखें VIDEO:मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने खून से लथपथ शव देखा

सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने चाकू से रेता अपना गला, देखें VIDEO:मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने खून से लथपथ शव देखा

धार शहर के आनंद चौपाटी क्षेत्र में खून से लथपथ शव मिला। मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज चेक किया तो पता चला कि युवक ने खुद पर हमला किया था, जिससे अत्यधिक खून बहने से उसकी मौत हो गई। घटना गुरुवार सुबह 5.30 बजे की बताई जा रही है। लोगों ने 6 बजे के करीब शव देखा था। कोतवाली थाना प्रभारी दीपक सिंह चौहान के मुताबिक, मृतक की पहचान आनंद चौपाटी के पास रहने वाले 35 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर कुणाल जोशी के रूप में हुई है। मौके पर सीएसपी सुजावल जग्गा और फॉरेंसिक टीम भी पहुंची है। शराब का आदी और मानसिक रूप से था परेशान सीएसपी सुजावल जग्गा ने बताया कि आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए हैं। फुटेज में युवक खुद अपने आप का चाकू से गला काटते हुए दिखाई दे रहा है। इसके बाद उसने अपने शरीर को भी गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया। सीएसपी ने बताया कि आसपास के लोगों से पूछताछ में पता चला है कि मृतक शराब पीने का आदी था। कुछ समय से परेशान था। देखिए तस्वीरें लकवाग्रस्त पिता की देखभाल के लिए छोड़ दी थी जॉब कुणाल जोशी पहले इंदौर की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर था। दो साल पहले उसके पिता सूर्यनारायण जोशी को पैरालिसिस हो गया था, जिससे वह बेड पर रहते हैं। उनकी देखभाल करने के लिए कुणाल ने करीब दो साल पहले अपनी जॉब छोड़ दी थी और धार में रहने लगा था। उसका छोटा भाई इंदौर में रहता है।

इंदौर EV हादसा, पड़ोसी को आवाज लगाई- बचाओ-बचाओ:जो जिस हालत में था, जल गया; 30 साल पहले राजस्थान से इंदौर आए थे मनोज पुगलिया

इंदौर EV हादसा, पड़ोसी को आवाज लगाई- बचाओ-बचाओ:जो जिस हालत में था, जल गया; 30 साल पहले राजस्थान से इंदौर आए थे मनोज पुगलिया

इंदौर के तिलक नगर क्षेत्र की ग्रेटर बृजेश्वरी कॉलोनी में हुए भीषण अग्निकांड ने एक परिवार की सारी खुशियां छीन लीं। रबर कारोबारी मनोज पुगलिया के घर में लगी आग में 8 लोगों की मौत हो गई। बुधवार शाम को सभी का अंतिम संस्कार किया गया। सबसे ज्यादा दिल को झकझोर देने वाली तस्वीर तब सामने आई, जब हादसे में जान गंवा चुके विजय सेठिया की छोटी बेटी ने अपने ही परिजन को मुखाग्नि दी। इस दौरान वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक पड़ीं। हादसे से बचकर निकले मनोज पुगलिया के बेटे सौमिल अब भी उस खौफनाक मंजर को याद कर सहम जाते हैं। उन्होंने बताया कि आग लगते ही पूरे घर में तेजी से धुआं भर गया था। चारों तरफ अंधेरा और घुटन थी, कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। ऐसे हालात में बड़े भाई सौरभ ने हिम्मत दिखाते हुए सभी को आवाज देकर जगाया। किसी तरह सौरभ, मां सुनीता, छोटा भाई हर्षित और सौमिल बालकनी तक पहुंचे। वहां से उन्होंने पड़ोसियों को मदद के लिए बचाओ-बचाओ पुकारा। पड़ोसियों ने जालियां तोड़कर सीढ़ी लगाईं, जिसके सहारे चारों किसी तरह बाहर निकल पाए। लेकिन बाहर आने के बाद भी उनका संघर्ष खत्म नहीं हुआ। उन्होंने अंदर फंसे अपने लोगों को बचाने की कोशिश की, लेकिन आग की लपटें और घना धुआं उन्हें वापस अंदर जाने नहीं दे सका। एक पल में सब कुछ बदल गया…और पीछे रह गईं सिर्फ यादें और अपनों को खोने का दर्द। जब बचाने की कोशिश भी नाकाम हो गई… मनोज के बड़े बेटे सौरभ ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि जैसे ही इलेक्ट्रिक कार में आग लगी, कुछ ही पलों में मुख्य गेट आग की चपेट में आ गया। बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका था। ऐसे हालात में सौरभ ने हिम्मत दिखाई और किसी तरह अपनी मां और दोनों भाइयों को बाहर निकाल लिया। लेकिन अंदर बाकी लोग फंसे हुए थे… और उन्हें बचाने की उम्मीद अभी बाकी थी। सौरभ दोबारा घर के अंदर गए, लेकिन तब तक पूरा घर घने धुएं से भर चुका था। सांस लेना मुश्किल हो रहा था, कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। हालात इतने खराब थे कि अंदर फंसे लोग आवाज तक नहीं लगा पा रहे थे। पत्नी सिमरन, मामा, उनके बच्चे और पिता—सब अंदर ही फंस गए। कोई भाग नहीं सका, कोई मदद के लिए पुकार नहीं सका। जो जहां था, वहीं ठहर गया। सबसे दर्दनाक तस्वीर सिमरन की थी…वह बैठी हुई अवस्था में ही रह गईं, जैसे आखिरी पल तक इंतजार कर रही हों कि कोई उन्हें बचा लेगा। एक बेटे और पति के सामने उसका पूरा परिवार उसकी आंखों के सामने ही छिन गया… और वह कुछ नहीं कर सका। यही बेबसी इस हादसे की सबसे बड़ी त्रासदी बन गई। रेस्क्यू के दौरान सीढ़ियों पर तीन लोगों के शव मिले हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, एफएसएल और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। रेस्क्यू के दौरान दूसरी मंजिल की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर तीन लोगों के शव मिले। इससे अंदाजा लगाया गया कि ये लोग जान बचाने के लिए छत की तरफ भाग रहे थे। लेकिन रास्ते में लगा चैनल गेट बंद था, जिससे वे बाहर नहीं निकल सके। इसी बीच पूरे घर में धुआं भर गया और दम घुटने से उनकी मौत हो गई। यह दृश्य देखकर रेस्क्यू टीम भी भावुक हो गई, क्योंकि साफ था कि ये लोग आखिरी पल तक बचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन एक बंद दरवाजे ने उनकी जिंदगी छीन ली। प्लायवुड के कारण तेजी से आग घर में फैल गई पुलिस जांच में सामने आया है कि मनोज पुगलिया का घर पूरी तरह फर्निश्ड था। खासतौर पर फर्स्ट फ्लोर पर प्लायवुड और लकड़ी के फर्नीचर से इंटीरियर किया गया था। जब फर्स्ट फ्लोर पर आग लगी, तो इन ज्वलनशील चीजों की वजह से आग बहुत तेजी से फैल गई और देखते ही देखते पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया। जांच में पोर्च में शॉर्ट सर्किट के निशान भी मिले हैं। यहीं पर घर में खड़ी बुलेट, करीब 17 लाख रुपए की हायाबुसा बाइक और एक स्कूटर जलकर खाक हो गए। घर में कुछ केमिकल भी रखे हुए थे, जिससे आग और ज्यादा भड़क गई। इन सभी कारणों ने मिलकर आग को बेहद खतरनाक बना दिया, जिससे बचाव का मौका भी बहुत कम मिल पाया। मेहनत से खड़ा किया था सब कुछ… एक पल में सब खत्म मनोज पुगलिया मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले थे। करीब 30 साल पहले वह बेहतर जिंदगी और सपनों को पूरा करने के लिए इंदौर आए थे। शुरुआत आसान नहीं थी…। सियागंज में एक छोटी सी दुकान से उन्होंने इंडस्ट्रियल सप्लाई का काम शुरू किया। दिन-रात मेहनत करके धीरे-धीरे अपने कारोबार को बढ़ाया और एक मजबूत पहचान बनाई। सालों की मेहनत से उन्होंने न सिर्फ व्यापार खड़ा किया, बल्कि अपने परिवार के लिए एक बेहतर भविष्य भी तैयार किया। उनकी कंपनी का एक ऑफिस सियागंज में था, जिसे बड़ा बेटा सौरभ संभालता था। वहीं पीथमपुर में दूसरा ऑफिस था, जहां मंझला बेटा सौमिल और छोटा बेटा हर्षित काम देखते थे। पूरा परिवार मिलकर इस कारोबार को आगे बढ़ा रहा था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर। जिस घर और कारोबार को मनोज ने अपनी पूरी जिंदगी लगाकर खड़ा किया, वह एक ही हादसे में बिखर गया। आज पीछे रह गई हैं तो सिर्फ उनकी मेहनत की कहानियां…और अपनों को खोने का गहरा दर्द। हादसे में सबसे ज्यादा विजय के परिवार को नुकसान इस हादसे में मनोज पुगलिया और उनकी बहू सिमरन के साथ-साथ मनोज के साले विजय सेठिया और उनके परिवार के लोगों की भी जान चली गई। घर में अभी हाल ही में खुशियों का माहौल था। 23 जनवरी को मनोज के बेटे सौमिल की शादी हुई थी। शादी के बाद घर में छोटे-छोटे कार्यक्रम चल रहे थे, इसी वजह से रिश्तेदारों का आना-जाना लगा हुआ था। इन्हीं खुशियों के बीच विजय सेठिया भी अपने परिवार के साथ इंदौर आए थे। उन्हें जबड़े का कैंसर था और इलाज के लिए वे यहां ठहरे हुए थे। शादी के समय से ही

मंदसौर में जानलेवा हमले के दोषियों को 6-6 साल कारावास:परिवार की मर्जी के खिलाफ निकाह से हुआ था विवाद, आरोपियों ने की था फायरिंग

मंदसौर में जानलेवा हमले के दोषियों को 6-6 साल कारावास:परिवार की मर्जी के खिलाफ निकाह से हुआ था विवाद, आरोपियों ने की था फायरिंग

मंदसौर में निकाह को लेकर उपजी रंजिश में जानलेवा हमला करने के मामले में न्यायालय ने तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 6-6 वर्ष के कठोर कारावास एवं जुर्माने की सजा सुनाई है। यह निर्णय प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश आसिफ अब्दुल्लाह की अदालत ने सुनाया। परिवार की मर्जी के खिलाफ निकाह बना विवाद की वजह अभियोजन के अनुसार, 22 जुलाई 2024 को फरियादी इसराईल ने परिवार की इच्छा के विरुद्ध सन्नो से निकाह किया था। इस निकाह से नाराज होकर सन्नो के भाई आफताब और शाहरुख इसराईल से रंजिश रखने लगे। निकाह के बाद इसराईल रतलाम में रहने लगा था, लेकिन घटना से तीन दिन पहले वह अपने दादा के कार्यक्रम में शामिल होने मुल्तानपुरा आया हुआ था। दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या का प्रयास घटना के दिन दोपहर करीब 3:15 बजे इसराईल अपने चाचा के घर के बाहर बैठा हुआ था। इसी दौरान सोहेल टांडिया मोटरसाइकिल से वहां पहुंचा। मौके पर मौजूद शाहरुख ने उसे इसराईल पर गोली चलाने के लिए उकसाया। जान बचाने के लिए इसराईल घर के अंदर भागा, लेकिन आफताब ने उसका पीछा कर पिस्टल से फायर कर दिया। गोली लगने से इसराईल मौके पर गिर पड़ा। शोर सुनकर लोग इकट्ठा हुए, तब तक तीनों आरोपी मौके से फरार हो चुके थे। पुलिस की कार्रवाई और मजबूत साक्ष्य घटना के बाद थाना वाय.डी. नगर पुलिस ने अपराध क्रमांक 256/2024 दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की विवेचना उप निरीक्षक कपिल सौराष्ट्रीय द्वारा की गई, जिन्होंने साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान 12 साक्षियों के बयान और 31 दस्तावेज न्यायालय के समक्ष पेश किए। न्यायालय ने सुनाया सख्त फैसला प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने सोहेल टांडिया, शाहरुख और आफताब को दोषी ठहराया। अदालत ने तीनों को 6-6 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। इस प्रकरण में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक भगवतीलाल शर्मा एवं भगवान सिंह चौहान ने प्रभावी पैरवी करते हुए आरोपियों को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लड्‌डू गोपाल की मूर्ति खोई, थाने पहुंची महिला:पुलिस से कहा- मां की धरोहर थी, ढूंढकर ला दो; पता बताने वाले को इनाम देने तैयार

लड्‌डू गोपाल की मूर्ति खोई, थाने पहुंची महिला:पुलिस से कहा- मां की धरोहर थी, ढूंढकर ला दो; पता बताने वाले को इनाम देने तैयार

ग्वालियर में लड्‌डू गोपाल की मूर्ति खो गई तो महिला थाने जा पहुंची। पुलिस से मूर्ति को ढूंढने की गुहार लगाई। कहा- लिखित शिकायत दर्ज मत कीजिए क्योंकि अगर कानूनी कार्रवाई होगी तो हमारे भगवान को थाने या कोर्ट में पेश होना पड़ेगा। मैं नहीं चाहती कि भगवान को इस तरह का कोई भी कष्ट हो। मामला ग्वालियर के अलकापुरी में 29 जनवरी का है। करीब दो महीने तक तलाश करने के बावजूद मूर्ति नहीं मिली तो महिला ने 18 मार्च को इसे ढूंढकर लाने वाले को इनाम देने की घोषणा की है। हालांकि, इनाम की राशि का खुलासा नहीं किया है। फरियादी विजया शर्मा ने बताया कि वे 29 जनवरी को अपनी बहन के साथ खरीदारी करने बाजार गई थीं। लड्‌डू गोपाल को साथ ले गई थीं। बाजार में घूमने के दौरान मूर्ति कहीं गिरकर खो गई। 30 साल पहले मां ने दी थी मूर्ति विजया ने कहा- यह मूर्ति मेरे लिए सिर्फ धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि मां की यादों से जुड़ी अनमोल धरोहर है। करीब 30 साल पहले मां ने लड्डू गोपाल की यह मूर्ति दी थी। 5 साल पहले मां का निधन हो गया। जिसके बाद यह मूर्ति ही उनकी सबसे खास निशानी बन गई थी। मुझे इस बात का गहरा दुख है कि मां की आखिरी निशानी को संभाल नहीं पाई। कई दिनों तक अपने स्तर पर बाजार और आसपास के क्षेत्रों में तलाश की, लेकिन जब कोई सफलता नहीं मिली तो मैंने कोतवाली जाकर मदद मांगी है। देखिए, चार तस्वीरें… ढूंढने में मदद कर रही पुलिस विजया ने बताया कि एक नंबर साइज की इस मूर्ति को वे छोटी डोली में रखती थीं। फिलहाल, इलाके में उसे ढूंढने की कोशिश में जुटी है। वे फोटो दिखाकर लोगों से अपील करती हैं कि किसी को यह लड्डू गोपाल की मूर्ति मिले या उसके बारे में कोई जानकारी हासिल हो तो उसे लौटाने में मदद करें। वहीं, सीएसपी मनीष यादव ने कहा- इस तरह के मामलों में मूर्ति का पता लगाना चुनौतीपूर्ण है। फिर भी आसपास के क्षेत्र में जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है। ये खबर भी पढ़ें… स्कूल बैग गुमा तो पुलिस अंकल के पास पहुंची मासूम शुजालपुर में तीसरी क्लास की बच्ची की मासूमियत और पढ़ाई के प्रति लगन ने पुलिस का दिल जीत लिया। उसका गुमा हुआ बैग ढूंढने के लिए खास टीम बनाई गई। पुलिसकर्मियों ने पूरी मुस्तैदी से ड्यूटी निभाई और उसका बैग ढूंढ़ निकाला। पूरी खबर पढ़ें…