Monday, 06 Apr 2026 | 11:19 AM

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14KG के सिलेंडर में 10KG घरेलू गैस देने की तैयारी:दाम भी घटेंगे, ईरान युद्ध के चलते तेल कंपनियों का स्टॉक बचाने का प्लान

14KG के सिलेंडर में 10KG घरेलू गैस देने की तैयारी:दाम भी घटेंगे, ईरान युद्ध के चलते तेल कंपनियों का स्टॉक बचाने का प्लान

सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) अब घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो के LPG गैस सिलेंडर में 10 किलो गैस भरकर देने की तैयारी कर रही है। इसका मकसद लिमिटेड स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा परिवारों तक पहुंचाना है। इसके साथ ही सिलेंडर के दाम भी कम किए जा सकते हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, तेल कंपनियों का मानना है कि 14.2 किलो का सिलेंडर औसतन 35 से 40 दिन चलता है। अगर इसमें सिर्फ 10 किलो गैस भरी जाए, तो एक परिवार का काम लगभग एक महीने तक चल जाएगा। इससे जो गैस बचेगी, उसे उन घरों तक पहुंचाया जा सकेगा जहां किल्लत है। मिडिल-ईस्ट जंग से LPG गैस की किल्लत बढ़ सकती है तेल कंपनियों के पास अब ज्यादा रास्ते नहीं बचे हैं, क्योंकि खाड़ी देशों (मिडिल-ईस्ट) से गैस की नई खेप भारत नहीं आ पा रही है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग के कारण हालात बिगड़ गए हैं। हाल ही में ईरान ने वहां के एनर्जी प्लांट्स पर मिसाइल हमले किए, जिससे गैस उत्पादन को नुकसान हुआ है। इसके अलावा, होर्मुज रूट भी बंद है, जहां से गैस के जहाज भारत आते हैं। इससे आने वाले दिनों में भारत में LPG की किल्लत और ज्यादा बढ़ सकती है। इसी संकट को देखते हुए तेल कंपनियों ने सिलेंडर में गैस कम करने का फैसला लेने का प्लान बना रही है। सिलेंडर के दाम भी घटेंगे, पहचान के लिए स्टिकर लगेगा अगर यह योजना लागू होती है, तो सिलेंडर की कीमतें भी उसी अनुपात में कम की जाएंगी। अभी दिल्ली में 14.2 किलो के सिलेंडर की कीमत ₹913 और मुंबई में ₹912.50 है। 10 किलो गैस मिलने पर ग्राहकों को कम पैसे चुकाने होंगे। पहचान के लिए इन सिलेंडरों पर एक नया स्टिकर लगाया जाएगा, जिस पर गैस की सही मात्रा लिखी होगी। बॉटलिंग प्लांट्स में होगा बदलाव: सिस्टम रीकैलिब्रेट करने की जरूरत इस बदलाव को लागू करना इतना आसान भी नहीं है। बॉटलिंग प्लांट्स को अपने वजन करने वाले सिस्टम को फिर से सेट करना होगा। साथ ही इसके लिए कई रेगुलेटरी मंजूरियों की भी जरूरत पड़ेगी। अधिकारियों को डर है कि अचानक इस बदलाव से लोगों में भ्रम और विरोध की स्थिति पैदा हो सकती है, खासकर तब जब कुछ राज्यों में चुनाव नजदीक हैं। सप्लाई की स्थिति चिंताजनक: 6 टैंकर फारस की खाड़ी में फंसे पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने पिछले हफ्ते कई बार कहा कि LPG की सप्लाई ‘चिंताजनक’ है और इसे बचाना जरूरी है। भारत अपनी जरूरत की 60% एलपीजी इम्पोर्ट करता है, जिसमें से 90% हिस्सा खाड़ी देशों से आता था। पिछले हफ्ते होर्मुज रूट से दो जहाज भारत आए, जिनमें सिर्फ एक दिन की खपत जितनी गैस थी। फिलहाल भारत के 6 गैस टैंकर फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं। क्रूड और गैस के दाम बढ़ने की 2 वजहें 1. कतर का रास लफ्फान प्लांट बंद ईरान के ड्रोन हमलों में कतर के रास लफ्फान को काफी नुकसान पहुंचा है। यह दुनिया का सबसे बड़ा LNG हब है और ग्लोबल सप्लाई का करीब पांचवां हिस्सा (20%) यहीं से आता है। हमले के बाद इस प्लांट को फिलहाल बंद कर दिया गया है। इससे सप्लाई रुक गई है। 2. ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद होना भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है। LPG संकट को लेकर अब सरकार ने ये कदम उठाए ———————– ये खबर भी पढ़ें… लोकलसर्किल्स का दावा- 20% लोग सिलेंडर ब्लैक में खरीद रहे: ₹4,000 तक ज्यादा देना पड़ रहा, 68% घरों में समय पर नहीं पहुंच रही गैस रसोई गैस की कमी के कारण देश में सिलेंडर की कालाबाजारी बढ़ गई है। गैस की कमी और डिलीवरी में देरी की वजह से देश के करीब 20% परिवारों को ब्लैक में सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। इसके लिए लोगों को एक घरेलू सिलेंडर के 4000 रुपए तक देने पड़ रहे हैं। यह दावा इंडियन सर्वे और रिसर्च फर्म लोकलसर्किल्स की ओर से जारी सर्वे रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लैक में सिलेंडर लेने वालों की संख्या पिछले हफ्ते के मुकाबले 6% बढ़ गई है। सर्वे में सामने आया कि इस हफ्ते 68% भारतीय घरों को गैस डिलीवरी में देरी का सामना करना पड़ा, जबकि पिछले हफ्ते यह आंकड़ा 57% था। पूरी खबर पढ़ें…

रेलवे ट्रैक पर मिला 70 वर्षीय एथलीट का शव:3 मेडल जीतकर भिवानी में घर जा रहा था; शताब्दी एक्सप्रेस में सवार था इंटरनेशनल खिलाड़ी

रेलवे ट्रैक पर मिला 70 वर्षीय एथलीट का शव:3 मेडल जीतकर भिवानी में घर जा रहा था; शताब्दी एक्सप्रेस में सवार था इंटरनेशनल खिलाड़ी

हरियाणा के भिवानी जिले के 70 वर्षीय अंतरराष्ट्रीय एथलीट की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत है। उम्र के इस पड़ाव पर भी खेल के मैदान में सक्रिय रहकर देश का नाम रोशन करने वाले व्यक्ति 3 मेडल जीतकर लौट रहे थे, लेकिन उनका यह सफर अधूरा रह गया। कालका नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस में सफर के दौरान उनकी लाश सोनीपत के राठधाना और नरेला के बीच रेलवे ट्रैक पर मिलने से मामला रहस्यमय बन गया है। परिवार और खेल जगत के लिए यह घटना गहरे सदमे से कम नहीं है। प़ुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम करवा परिजनों को सौंप दिया है। सोनीपत जीआरपी पुलिस मामले में जांच कर रही है। कैसे हुआ हादसा, क्या है पूरा घटनाक्रम जानकारी के अनुसार फूल कुंवार चंडीगढ़ से दिल्ली होते हुए अपने घर भिवानी लौट रहे थे। वे कालका-नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस में सवार थे। बताया जा रहा है कि जब ट्रेन सोनीपत पार कर राठधाना स्टेशन के नजदीक पहुंची, तभी उनकी डेड बॉडी रेलवे ट्रैक पर मिली। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि या तो ट्रेन के दरवाजे से गिरने के कारण यह हादसा हुआ या फिर किसी ने धक्का दिया। हालांकि, अभी तक किसी भी संभावना की पुष्टि नहीं हुई है, जिससे मामला पूरी तरह संदिग्ध बना हुआ है। जीत की खुशी मातम में बदली फूल कुंवार 21 और 22 मार्च को चंडीगढ़ में आयोजित खेलो इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा लेने गए थे। यहां उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए हाई जंप और हैमर थ्रो में गोल्ड मेडल जीता, जबकि शॉट पुट में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। तीन मेडल जीतकर वे बेहद खुश थे और रविवार शाम को घर लौट रहे थे, लेकिन यह खुशी कुछ ही घंटों में परिवार के लिए गहरे गम में बदल गई। एथलेटिक्स में चमकदार करियर फूल कुंवार का खेल जीवन बेहद शानदार रहा है। उन्होंने 1978 से 1986 के बीच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैकड़ों मेडल जीते। शॉट पुट, बांस कूद (पोल वॉल्ट) और हैमर थ्रो उनके मुख्य इवेंट रहे। 1982 में उन्होंने बांस कूद में नेशनल रिकॉर्ड भी बनाया था। जर्मनी, मलेशिया, चीन और जापान जैसे देशों में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल हासिल किए। पुलिस और रेलवे में भी निभाई अहम भूमिका खेल के साथ-साथ फूल कुंवार ने सरकारी सेवाओं में भी अपनी पहचान बनाई। 1978 में वे हरियाणा पुलिस में सीधे एएसआई के पद पर भर्ती हुए और करीब 7 वर्षों तक सेवा दी। इसके बाद 1982 में वे रेलवे दिल्ली में चीफ टिकट इंस्पेक्टर बने और वहीं से सेवानिवृत्त हुए। उनकी नौकरी भी खेल कोटे के आधार पर लगी थी, जो उनकी प्रतिभा का प्रमाण है। 70 की उम्र में भी फिटनेस का जुनून फूल कुंवार ने रिटायरमेंट के बाद भी खेल को कभी नहीं छोड़ा। वे मास्टर एथलेटिक्स कैटेगरी में लगातार हिस्सा लेते रहे। 70 साल की उम्र में भी वे रोज सुबह और शाम दो-दो घंटे प्रेक्टिस करते थे। इतना ही नहीं, वे युवा खिलाड़ियों को भी मैदान में टिप्स देते और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे। उनकी फिटनेस और ऊर्जा को देखकर हर कोई हैरान रह जाता था। परिजनों के सवाल, बढ़ा संदेह परिजनों के अनुसार फूल कुंवार के साथ भिवानी के 2 अन्य साथी भी ट्रेन में सफर कर रहे थे। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर यह घटना कैसे हुई। परिवार का कहना है कि वे पूरी तरह स्वस्थ और खुश थे, ऐसे में अचानक इस तरह की घटना समझ से परे है। परिजनों ने ट्रेन के सीसीटीवी फुटेज खंगालने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ फूल कुंवार अपने पीछे पत्नी और एक शादीशुदा बेटी को छोड़ गए हैं। तीन मेडल जीतकर लौटने की खुशी का इंतजार कर रहा परिवार अब गहरे सदमे में है। घर में जश्न की जगह मातम पसरा हुआ है। जांच में जुटी जीआरपी जीआरपी पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सोनीपत सिविल अस्पताल भेजा, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट व अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए दुखद है, बल्कि हरियाणा के खेल जगत के लिए भी एक बड़ी क्षति मानी जा रही है, जिसने एक समर्पित और प्रेरणादायक खिलाड़ी को खो दिया।

Anuppur District Hospital Drain Cleared

Anuppur District Hospital Drain Cleared

जिला अस्पताल में सफाई काम शुरू। अनूपपुर जिला अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग के आंगन में पिछले 15 दिनों से जमा बदबूदार पानी को सोमवार को निकाल दिया गया। इससे अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को दुर्गंध से राहत मिली है। . नाली जाम होने के कारण दोबारा पानी जमा होने की समस्या न हो, इसके लिए अस्पताल प्रबंधन ने ब्लॉक नाले को तुड़वाकर नई पाइपलाइन डालने की योजना बनाई है। इस काम के लिए मजदूर ने काम शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि अगले 2-3 दिनों में फर्श की तुड़ाई कर पाइपलाइन डाल दी जाएगी। फर्श को तोड़कर नई पाइपलाइन डालने का काम शुरू। पानी की निकासी के बाद सोमवार को वार्डों में झाड़ू-पोछा भी लगाया गया। इससे वार्डों में भी सफाई दिखी। हालांकि, लाखों की लागत से बने बायो इको शौचालय की सफाई अभी तक नहीं हो पाई है। पान के पीक के छींटे सीढ़ियों और दीवारों के कोनों में गंदगी फैला रहे हैं। एक दिन पहले ही मीडिया में आया मामला दरअसल, दैनिक भास्कर ने 21 मार्च को इस अव्यवस्था को उजागर किया था। खबर में 15 दिनों से जिला अस्पताल परिसर में जमा गंदे पानी, काई जमने, वाटर कूलर और वार्डों की सफाई की कमी के साथ शौचालय की दुर्गंध की तस्वीरें साझा की गई थीं। खबर के प्रकाशन के बाद कलेक्टर की फटकार पर अस्पताल प्रबंधन ने सुध ली और सबसे पहले गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था में जुट गया। नई पाइपलाइन के लिए फर्श को तोड़ते मजदूर। पाइपलाइन डालकर पानी निकासी कराएंगे जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. एसआर परस्ते ने बताया कि पानी की निकासी करा दी गई है। फर्श तुड़वाया जा रहा है और जल्द ही नई पाइपलाइन डालकर पानी की नियमित निकासी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने अन्य अव्यवस्थाओं पर सफाई कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं और शौचालय भी साफ कराने की बात कही है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020 में कायाकल्प योजना के तहत 60 लाख रुपए खर्च कर जिला अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग का स्वरूप संवारा गया था, जिसके लिए इसे प्रदेश स्तर पर सम्मानित भी किया गया था। लेकिन नई बिल्डिंग बनने के बाद पुरानी बिल्डिंग और वहां भर्ती मरीजों की अनदेखी की जा रही है। ये भी देखें… अनूपपुर अस्पताल में 15 दिन से गंदा पानी:जल निकासी नाला ब्लॉक, अव्यवस्था के बीच मरीजों का इलाज अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में 15 दिनों से जमा गंदा। अनूपपुर जिला अस्पताल एक बार फिर अपनी बदइंतजामी और लापरवाही के कारण सुर्खियों में है। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के बजाय, अस्पताल प्रशासन की उदासीनता के कारण यहां की व्यवस्थाएं दशकों बाद भी नहीं सुधर पाई हैं। अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में पिछले 15 दिनों से गंदा पानी भरा हुआ है। इसकी निकासी के लिए अब तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे पानी सड़ रहा है और मच्छर पनप रहे हैं। जनरेटर शेड के लिए लगाई गई टीन की चादरें भी सड़-गलकर खतरनाक स्थिति में लटक रही हैं, जिससे किसी भी समय दुर्घटना हो सकती है।पूरी खबर पढ़ें

साहिबजादा फरहान ICC प्लेयर ऑफ द मंथ बने:जैक्स और शल्कविक को पीछे छोड़ा, विमेंस कैटेगरी में भारतीय बॉलर अरुंधति को मिला अवॉर्ड

साहिबजादा फरहान ICC प्लेयर ऑफ द मंथ बने:जैक्स और शल्कविक को पीछे छोड़ा, विमेंस कैटेगरी में भारतीय बॉलर अरुंधति को मिला अवॉर्ड

पाकिस्तानी ओपनर साहिबजादा फरहान को ICC ने फरवरी महीने का प्लेयर ऑफ द मंथ चुना है। उन्होंने इस रेस इंग्लैंड के विल जैक्स और अमेरिका के शैडली वैन शल्कविक को पीछे छोड़ा। वहीं, विमेंस कैटेगरी में यह अवार्ड भारत की सीम बॉलर अरुंधति रेड्डी को मिला। उन्होंने पाकिस्तान की फातिमा सना और श्रीलंका की हर्षिता समरविक्रमा को पीछे छोड़ा। साहिबजादा ने 7 मैचों में 383 रन बनाए टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में साहिबजादा फरहान ने शानदार प्रदर्शन किया, जिसके चलते उन्हें फरवरी के लिए प्लेयर ऑफ द मंथ का अवॉर्ड मिला। उन्होंने 7 मैचों में 2 शतक के चलते 383 रन ठोके। वह एक एडिशन में टी-20 वर्ल्ड कप में 2 शतक लगाने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। इसके अलावा साहिबजादा ने विराट कोहली का एक टी-20 वर्ल्ड कप के एडिशन में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड भी तोड़ा। अरुंधति सीरीज की टॉप विकेट टेकर भारतीय विमेंस क्रिकेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया में जाकर ऑस्ट्रेलिया विमेंस टीम को टी-20 सीरीज में 2-1 से जीत दर्ज की। उस सीरीज में अरुंधति रेड्डी ने अच्छी गेंदबाजी की। वह सीरीज में लीडिंग विकेट टेकर रहीं। उन्होंने 7.25 की इकॉनमी से गेंदबाजी करते हुए 8 विकेट लिए। मैं इसे हमेशा संजोकर रखूंगा- साहिबजादा साहिबजादा फरहान ने कहा, ICC अवॉर्ड जीतना मेरे लिए एक शानदार एहसास है, खासकर वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर किए गए प्रदर्शन के लिए। यह टूर्नामेंट मेरे लिए यादगार रहा और मैं इसे हमेशा संजोकर रखूंगा। आगे आने वाली सीरीज और टूर्नामेंट में भी मैं अपनी इसी फॉर्म को बनाए रखना चाहता हूं। मैं अपने साथियों का उनके लगातार समर्थन और मुझ पर भरोसा जताने के लिए दिल से शुक्रगुजार हूं, क्योंकि उनके बिना यह संभव नहीं था। यह अवॉर्ड मेरे लिए और भी खास- अरुंधति अरुंधति रेड्डी ने कहा, ICC प्लेयर ऑफ द मंथ चुना जाना मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है। मुझे खुशी है कि मैं ऑस्ट्रेलिया में टी-20 सीरीज जीतने में अपनी टीम के लिए योगदान दे पाई। ऑस्ट्रेलिया को उसके घर में हराना आसान नहीं होता, इसलिए यह अवॉर्ड मेरे लिए और भी खास है। उन्होंने आगे कहा, इस जीत से हमारी टीम का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। अब हम इंग्लैंड और वेल्स में होने वाले ICC विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप की तैयारी कर रहे हैं। हमारी टीम संतुलित है और मुझे भरोसा है कि हम इस टूर्नामेंट में मजबूत प्रदर्शन करेंगे।

SC Building National Symbol Demand Rejected

SC Building National Symbol Demand Rejected

Hindi News National SC Building National Symbol Demand Rejected | CJI Says Administrative Matter नई दिल्ली3 मिनट पहले कॉपी लिंक तस्वीर- फाइल फोटो सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की बिल्डिंग के गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि यह मामला न्यायिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर विचार का विषय है। यह याचिका बदरवाड़ा वेणुगोपाल उर्फ बरा खतरनाक की तरफ से दायर की गई थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने याचिका पर सुनवाई की। CJI ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नई बिल्डिंग बन रही है और इस मुद्दे पर उस समय विचार किया जा सकता है। याचिकाकर्ता ने मौजूदा भवन पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने की मांग की। इस पर कोर्ट ने आश्वासन दिया कि इसके बारे में सोचा जाएगा, लेकिन ऐसे मामलों को याचिका के जरिए नहीं उठाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक प्रतीक में अशोक चक्र के नीचे अशोक स्तंभ का सिंह बना है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे इस मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लिखित अनुरोध करें। याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने मई 2025 में इस मुद्दे पर लेटर लिखा था, जिस पर नवंबर 2025 में जवाब मिला था कि सुप्रीम कोर्ट अपना अलग प्रतीक इस्तेमाल करता है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि वह जवाब उनके कार्यकाल से पहले का है और अब इस पर विचार किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सचिव जनरल को निर्देश दिया कि इस मामले पर एक नोट तैयार कर सक्षम प्राधिकारी के सामने रखा जाए। याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि अगर गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने के लिए कोई वास्तु या संरचनात्मक व्यवस्था नहीं है, तो जरूरी संस्थागत और तकनीकी कदम उठाए जाएं। यह सब संविधान और राज्य प्रतीक के उपयोग से जुड़े कानूनों के अनुसार किया जाए। याचिका में यह भी मांग की गई थी कि इस प्रक्रिया को तय समय सीमा में लागू किया जाए। इसके लिए करीब 8 सप्ताह का समय सुझाया गया था। यह मांग State Emblem of India (Prohibition of Improper Use) Act, 2005 और State Emblem of India (Regulation of Use) Rules, 2007 के अनुरूप की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के प्रतीक में अशोक चक्र और संस्कृत श्लोक सुप्रीम कोर्ट का आधिकारिक प्रतीक अशोक चक्र के नीचे स्थित अशोक स्तंभ के सिंह को दर्शाता है। इसके नीचे संस्कृत में “यतो धर्मस्ततो जयः” (जहां धर्म है, वहां विजय है) लिखा है। यह प्रतीक 26 जनवरी 1950 को अपनाया गया था, जिस दिन सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई थी। यह सारनाथ के सिंह स्तंभ से प्रेरित है, जो न्याय, धर्म और देश की सर्वोच्च अदालत की अधिकारिता का प्रतीक है। वहीं भारत का राष्ट्रीय प्रतीक सारनाथ स्थित सम्राट अशोक के लायन कैपिटल (सिंह स्तंभ) से लिया गया है। इसमें चार एशियाई शेर पीठ से पीठ मिलाकर खड़े हैं। सामने से केवल तीन शेर दिखाई देते हैं, चौथा पीछे होता है। नीचे एक गोलाकार आधार होता है, जिस पर सिंह, बैल, घोड़े और हाथी की आकृतियां उकेरे गए हैं। इसके बीच में अशोक चक्र होता है और नीचे “सत्यमेव जयते” (सत्य की ही जीत होती है) लिखा होता है। राष्ट्रीय प्रतीक देश की करेंसी और सरकारी दस्तावेजों पर इस्तेमाल होता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Anurag Dobhal Accident | Fans Didnt Let Me Be Orphan; Shared Video

Anurag Dobhal Accident | Fans Didnt Let Me Be Orphan; Shared Video

27 मिनट पहले कॉपी लिंक यूट्यूबर अनुराग डोभाल (UK07 राइडर) की सेहत में अब सुधार हो रहा है। हाल ही में इंस्टाग्राम लाइव के दौरान सुसाइड की कोशिश में हुए भयानक एक्सीडेंट के बाद वे अस्पताल में भर्ती थे। अब अनुराग ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर अपने फैंस को शुक्रिया कहा है। उन्होंने इमोशनल होकर बताया कि कैसे अनजान लोगों ने उन्हें इस मुश्किल वक्त में टूटने से बचा लिया। फैंस के परिवार से मिला साथ अनुराग ने रविवार (22 मार्च) को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो मैसेज पोस्ट किया। इसमें उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों में उन्हें हजारों लोगों के कॉल और मैसेज आए। अनुराग ने कहा, “कई ऐसे लोग जिनसे मेरा खून का रिश्ता नहीं है, उन्होंने मुझे वीडियो कॉल किए और डांट लगाई कि तूने खुद को अनाथ कैसे बोल दिया। बहनों और भाइयों ने कहा कि वे हर चीज के लिए मेरे साथ खड़े हैं। कभी नहीं सोचा था कि ऐसा दिन भी आएगा।” सगे माता-पिता पर फिर छलका दर्द वीडियो में अनुराग का दर्द भी साफ नजर आया। उन्होंने अपनी पारिवारिक स्थिति पर बात करते हुए कहा कि उन्हें अपने सगे माता-पिता से वो प्यार और साथ नहीं मिला, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। उन्होंने कहा, “सगे मां-बाप से वैसा प्यार नहीं मिला, पर जो दूसरों के पेरेंट्स से मिल रहा है, वो भावना मैं शब्दों में बता नहीं सकता।जो लोग भी मुझे इस डिप्रेशन और सिचुएशन से बाहर निकलने में मदद कर रहे हैं, उनका शुक्रिया।” जिंदगी फैंस के नाम की अनुराग ने अपनी पोस्ट में लिखा कि फैंस का हर एक टेक्स्ट और कॉल उन्हें मेंटली मजबूत बना रहा है। उन्होंने लिखा, “मैं किसी को नहीं जानता, कभी नहीं मिला, फिर भी सब परिवार की तरह साथ हैं। पूरी तरह ठीक होने में थोड़ा वक्त लगेगा, लेकिन मैं रिकवर हो जाऊंगा। अब यह जिंदगी आप लोगों के नाम है।” इंस्टाग्राम लाइव के दौरान उनकी कार की रफ्तार 140-150 किलोमीटर प्रति घंटा थी। इसी दौरान उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया था। इंटर-कास्ट मैरिज बनी विवाद का कारण विवाद मार्च के पहले हफ्ते में शुरू हुआ था जब अनुराग ने अपने माता-पिता और भाई कलम इंक (अतुल डोभाल) पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि उनकी इंटर-कास्ट मैरिज की वजह से परिवार रीतिका को घर में घुसने नहीं दे रहा है। इसी तनाव के बीच, 7 मार्च को अनुराग दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर इंस्टाग्राम लाइव आए। लाइव के दौरान उनकी कार की रफ्तार 140-150 किलोमीटर प्रति घंटा थी। इसी दौरान उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया था। दूसरी तरफ, उनके भाई कलम इंक ने इन आरोपों को गलत बताया और दावा किया कि अनुराग के दावों की वजह से उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

2029 तक महिला कोटा: केंद्र तेजी से आरक्षण की ओर बढ़ा, विस्तारित लोकसभा में 273 सीटों पर नजर | भारत समाचार

Several people are feared to have been injured after an incoming Air Canada Express CRJ-900 flight and a fire engine collided on runway 4 of the airport.

आखरी अपडेट:मार्च 23, 2026, 15:18 IST सूत्रों ने कहा कि सरकार मौजूदा संसद सत्र में संशोधित कानून लाने की इच्छुक है और आम सहमति बनाने के लिए विपक्षी दलों के साथ परामर्श शुरू कर चुकी है। 2023 में राज्यसभा द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) पारित होने के बाद महिला सांसदों के साथ प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी। (पीटीआई) सूत्रों ने कहा कि केंद्र 2029 के आम चुनावों से पहले इसके कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए महिला आरक्षण कानून में महत्वपूर्ण संशोधन लाने की तैयारी कर रहा है, साथ ही लोकसभा सीटों के महत्वपूर्ण विस्तार पर भी विचार किया जा रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, 2023 में संसद द्वारा पारित नारी शक्ति अभिनंदन अधिनियम में प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने के लंबे समय से लंबित प्रावधान को क्रियान्वित करना है। योजना के एक महत्वपूर्ण हिस्से में कार्यान्वयन को 2011 की जनगणना के आधार पर नए सिरे से परिसीमन अभ्यास से जोड़ना शामिल है। अधिकारियों ने संकेत दिया कि इससे लोकसभा की ताकत मौजूदा 543 सीटों से बढ़कर लगभग 816 सीटों तक पहुंच सकती है। इनमें से, कानून के तहत परिकल्पित एक तिहाई कोटा के अनुरूप, लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं। सूत्रों ने कहा कि सरकार संसद के चालू सत्र में संशोधित कानून लाने की इच्छुक है और आम सहमति बनाने के लिए विपक्षी दलों के साथ परामर्श शुरू कर चुकी है। समझा जाता है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई विपक्षी नेताओं को प्रस्तावित रोडमैप के बारे में जानकारी दी है। परिसीमन प्रक्रिया में अद्यतन जनसंख्या डेटा के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों के संशोधन को सक्षम करने के लिए परिसीमन अधिनियम सहित मौजूदा कानूनों में संशोधन की आवश्यकता होगी। अधिकारियों ने कहा कि आरक्षित सीटों का आवंटन ड्रॉ के माध्यम से किए जाने की संभावना है, एक तंत्र जिसका उद्देश्य रोटेशन और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। हालाँकि, सिक्किम सहित कुछ छोटे राज्यों में प्रस्तावित ढांचे के तहत बदलाव नहीं देखा जा सकता है। संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति की हालिया बैठक के बाद इस प्रयास में तेजी आई, जहां प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 2029 तक महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। जबकि मूल कानून में अगली जनगणना और परिसीमन अभ्यास के बाद कार्यान्वयन की परिकल्पना की गई थी, नए संशोधनों का उद्देश्य समयसीमा को आगे बढ़ाना और निष्पादन पर स्पष्टता प्रदान करना है। यदि इसे आगे बढ़ाया जाता है, तो यह कदम दशकों में भारत की संसदीय प्रणाली में सबसे महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तनों में से एक होगा, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में महिलाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करते हुए प्रतिनिधित्व का विस्तार होगा। पहले प्रकाशित: मार्च 23, 2026, 15:18 IST न्यूज़ इंडिया 2029 तक महिला कोटा: केंद्र तेजी से आरक्षण की ओर बढ़ा, विस्तारित लोकसभा में 273 सीटों पर नजर अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)महिला आरक्षण कानून भारत(टी)नारी शक्ति अभिनंदन अधिनियम(टी)महिला आरक्षण लोकसभा(टी)महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण(टी)लोकसभा सीट विस्तार(टी)2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन(टी)महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व भारत(टी)महिला कोटा के लिए संवैधानिक संशोधन

पेट साफ न होने की समस्या से जूझ रहे हैं? इन 8 फलों का शुरू कर दें सेवन, सालों से जमी गंदगी होगी क्लीन

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Last Updated:March 23, 2026, 15:18 IST Best Fruits to Relieve Constipation: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लाइफस्टाइल और खानपान बिगड़ गया है. इससे लोगों को पेट साफ न होने की समस्या हो रही है. डॉक्टर्स की मानें तो पेट साफ न होना कब्ज (Constipation) की समस्या है. जब पाचन तंत्र सुस्त हो जाता है, तो शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं. ये टॉक्सिन्स न केवल पेट में भारीपन और गैस का कारण बनते हैं, बल्कि स्किन प्रॉब्लम्स भी पैदा कर सकते हैं. अगर आप भी सुबह पेट साफ न होने की परेशानी से जूझ रहे हैं, तो अपनी डाइट में फाइबर से भरपूर फलों को जरूर शामिल करें. ये फल आपके पेट में जमी गंदगी को साफ कर सकते हैं. पपीता : वेबएमडी की रिपोर्ट के मुताबिक पेट की सफाई के लिए पपीता सबसे भरोसेमंद फल माना जाता है. इसमें पपेन नामक शक्तिशाली एंजाइम होता है, जो प्रोटीन को तोड़ने और पाचन को तेज करने में मदद करता है. पपीते में फाइबर और पानी की मात्रा अधिक होती है, जो मल को नरम बनाती है और आंतों की गति को सुचारू करती है. नियमित रूप से सुबह खाली पेट पपीता खाने से सालों पुरानी कब्ज में भी राहत मिलती है. अमरूद : अमरूद फाइबर का एक अच्छा सोर्स है. एक मीडियम साइज के अमरूद में आपकी दैनिक फाइबर की आवश्यकता का एक बड़ा हिस्सा होता है. यह आंतों की सफाई करने वाले झाड़ू की तरह काम करता है, जो जमा हुई गंदगी को बाहर धकेलता है. अमरूद खाने से न केवल पेट साफ होता है, बल्कि यह मेटाबॉलिज्म को भी दुरुस्त रखता है. सेब : पेट की सेहत के लिए सेब किसी दवा से कम नहीं है. सेब में पेक्टिन नामक घुलनशील फाइबर होता है. जब यह पेट में जाता है, तो जेल जैसा पदार्थ बनाता है, जो आंतों के अनुकूल बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है और मल त्याग को आसान बनाता है. बेहतर परिणाम के लिए सेब को छिलके सहित खाना चाहिए, क्योंकि ज्यादा फाइबर छिलके में ही होता है. Add News18 as Preferred Source on Google केला : अक्सर लोग कंफ्यूज रहते हैं कि कब्ज के मरीजों को केला खाना चाहिए या नहीं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो पका हुआ केला कब्ज के लिए रामबाण है. इसमें मौजूद पोटेशियम और फाइबर आंतों की मांसपेशियों को सक्रिय करते हैं. यह प्राकृतिक रूप से लैक्सेटिव की तरह काम करता है, जो मल को भारी बनाकर शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है. ध्यान रखें कि केला हमेशा अच्छी तरह पका हुआ ही खाएं. संतरा : संतरा विटामिन C और फाइबर से भरपूर होता है. संतरे में नारिनजेनिन नामक एक फ्लेवोनोइड होता है, जो एक लैक्जेटिव के रूप में काम करता है. इसका जूस पीने के बजाय इसे सीधे खाना अधिक फायदेमंद है, क्योंकि इसके रेशे आंतों में फंसे अपशिष्ट पदार्थों को साफ करने में मदद करते हैं और शरीर को हाइड्रेटेड रखते हैं. कीवी : कीवी एक ऐसा फल है, जो पाचन संबंधी समस्याओं से छुटकारा दिला सकता है. इसमें एक्टिनिडिन नामक एंजाइम होता है, जो गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में गतिशीलता सुधारता है. कई रिसर्च में पता चला है कि रोजाना दो कीवी खाने से पेट साफ होने की प्रक्रिया नियमित हो जाती है और पेट फूलने की समस्या कम होती है. नाशपाती : नाशपाती में सेब की तुलना में ज्यादा फाइबर होता है. इसमें फ्रुक्टोज और सोर्बिटोल की अच्छी मात्रा होती है, जो आंतों में पानी खींचने का काम करती है. यह प्रक्रिया मल को बहुत नरम बना देती है, जिससे पुरानी से पुरानी कब्ज भी आसानी से दूर हो जाती है. यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है, जिन्हें सख्त मल आने की समस्या है. अंजीर : चाहे ताजी हो या सूखी अंजीर फाइबर का पावरहाउस है. इसमें मौजूद सूक्ष्म बीज आंतों की दीवारों की हल्की मालिश करते हैं और वहां जमा गंदगी को ढीला करते हैं. रात भर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट दो-तीन सूखी अंजीर खाने से पाचन तंत्र पूरी तरह से रीसेट हो जाता है. यह शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का सबसे असरदार तरीका है. First Published : March 23, 2026, 15:18 IST

दतिया में 200 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचते हैं श्रद्धालु:तारा माता मंदिर में रात में होती है तांत्रिक साधना

दतिया में 200 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचते हैं श्रद्धालु:तारा माता मंदिर में रात में होती है तांत्रिक साधना

चैत्र नवरात्र के अवसर पर देशभर में मां दुर्गा की आराधना हो रही है। लेकिन दतिया में स्थित पंचम कवि की टोरिया इन दिनों खास चर्चा में है। पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच स्थित देवी तारा माता का यह प्राचीन मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र है,बल्कि तांत्रिक साधना के लिए भी प्रसिद्ध माना जाता है। करीब 200 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचने वाले इस धाम का वातावरण दिन में भक्ति से सराबोर रहता है, लेकिन रात होते ही यहां का माहौल रहस्यमयी हो जाता है। मान्यता है कि रात्रिकाल में साधक यहां तंत्रोक्त विधि से साधना करते हैं और मां तारा अपने उपासकों को सिद्धि व मनोकामना पूर्ण करने का आशीर्वाद देती हैं। भैरव साधना से तारा साधना तक का सफर इतिहास के अनुसार, पंचम कवि की टोरिया पहले भैरव साधना के लिए प्रसिद्ध स्थल था। बाद में संवत 1997 में पीतांबरा पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी जी महाराज ने यहां देवी तारा माता की स्थापना कर इसे तारा साधना का प्रमुख केंद्र बना दिया। तभी से यह स्थान साधकों के लिए विशेष महत्व रखता है। दस महाविद्याओं में दूसरी महाविद्या हैं मां तारा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी तारा दस महाविद्याओं में दूसरी महाविद्या हैं, जिन्हें नील सरस्वती भी कहा जाता है। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि ऋषि वशिष्ठ ने भी तारा साधना कर अद्वितीय ज्ञान और शक्ति प्राप्त की थी। दतिया में भी वर्षों से साधक विशेष रूप से मंगलवार और रात्रि के समय साधना करते आ रहे हैं। आस्था के साथ रहस्य का संगम मंदिर परिसर में शिवालय, काली मंदिर, हनुमान और गणेश जी के प्राचीन विग्रह भी मौजूद हैं। दिन में यहां भक्तों की भीड़ रहती है, लेकिन रात में एकांत साधना के चलते यह स्थान रहस्यमय बन जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह धाम जागृत है और सच्चे मन से साधना करने वालों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। चैत्र नवरात्र के चलते इन दिनों तारा माता धाम में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। आस्था,रहस्य और तंत्र साधना के अनूठे संगम के कारण दतिया का यह धाम प्रदेश ही नहीं,बल्कि देशभर में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।

हरियाणा में बेकाबू कैंटर ने 7 लोगों को रौंदा:3 की मौत, सड़क पर बिखरीं लाशें; फ्लाईओवर के 2 पिलर के बीच फंसकर रुका

हरियाणा में बेकाबू कैंटर ने 7 लोगों को रौंदा:3 की मौत, सड़क पर बिखरीं लाशें; फ्लाईओवर के 2 पिलर के बीच फंसकर रुका

हरियाणा के झज्जर में सोमवार की दोपहर एक कैंटर ने सात लोगों को कुचल दिया। इस हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि एक महिला सहित चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा तेज रफ्तार की वजह से हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पहले टैंकर ड्राइवर ने सड़क पार कर रहे दो युवकों को कुचला। इसके बाद भी ड्राइवर नहीं रुका और तेज गति से कैंटर दौड़ा दिया। इसी भागमभागम में कई और लोगों को भी चपेट में ले लिया। इनमें एक और बाइक सवार युवक की मौत हो गई, जबकि चपेट में आकर ऑटो सवार महिला समेत चार घायल हो गए। इसके बाद बेकाबू कैंटर फ्लाईओवर के दो पिलर के बीच फंस कर रुक गया तो ड्राइवर कूदकर कर फरार हो गया। हादसे के बाद सड़क पर अफरातफरी मच गई। पुलिस के आने तक शव सड़क पर ही पड़े रहे। इसके बाद सूचना पर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में लिया और लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। बहादुरगढ़ में हुए हादसे के कुछ PHOTOS…. यहां सिलसिलेवार ढंग से जानिए कैसे हुआ हादसा… मामा चौक पर हुआ हादसा, पहले 2 युवकों को मारी टक्कर जानकारी अनुसार, हादसा बहादुरगढ़ में दिल्ली-रोहतक रोड पर स्थित आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र (MIE) के मामा चौक पर सोमवार की दोपहर हुआ। चौक की तरफ से आ रहे तेज रफ्तार कैंटर (HR-63E-4325) ने सड़क पार कर रहे दो युवकों को सीधी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। युवकों को टक्कर मारने के बाद बाइक सवार को रौंदा पहले हादसे के बाद ड्राइवर रुका नहीं, बल्कि पकड़े जाने के डर से कैंटर को और तेज भगाते हुए बाईपास की ओर ले गया। बाईपास पर कैंटर ने एक मोटरसाइकिल को रौंद दिया। इस हादसे में कानोंदा निवासी योगेंद्र (30) की मौत हो गई, जबकि उसका साथी प्रवीण गंभीर रूप से घायल हो गया। ऑटो को मारी टक्कर, महिला सहित 3 चपेट में आए इसके बाद बेकाबू कैंटर ने एक ऑटो को जोरदार टक्कर मारी। ऑटो में सवार लाइनपार निवासी प्रेम (महिला), उनके पति कृष्ण और ड्राइवर जयवीर घायल हो गए। कई लोगों ने इधर-उधर भाग कर अपनी जान बचाई। हादसे के बाद सड़क पर अफरा तफरी मच गई। पुलिस ने लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया इसके बाद सूचना पर पहुंची पुलिस ने आसपास के लोगों की मदद से घायल लोगों को उठाकार बहादुरगढ़ सिविल अस्पताल में पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने अशोक (32) निवासी छपरा (बिहार) और शंभू (22) निवासी छपरा (बिहार) और हरियाणा के कानोंदा निवासी योगेंद्र (30 वर्ष) को मृत घोषित कर दिया। महिला प्रेम को पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया। पिलर के बीच में फंसकर रुका कैंटर, ड्राइवर फरार उधर, ऑटो में टक्कर मारने के बाद भी ड्राइवर कैंटर को दौड़ाता रहा। ड्राइवर तेज रफ्तार से नजफगढ़ फ्लाईओवर की ओर बढ़ा, लेकिन कैंटर अनियंत्रित होकर फ्लाईओवर के नीचे दो पिलर के बीच फंस गया। इसके बाद ड्राइवर कैंटर को मौके पर ही छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने कैंटर को कब्जे में लेकर उसके नंबर के आधार पर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। ——————- ये खबर भी पढ़ें… मुरथल ढाबे पर परांठे खाने गए 2 दोस्तों की मौत:सोनीपत में कार डिवाइडर से टकराई, 5 घायल; एक की होने वाली थी शादी सोनीपत में नेशनल हाईवे (GT रोड) पर रात को एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। इस हादसे में कार सवार 2 युवकों की मौत हो गई। जबकि इनके पांच अन्य साथी गंभीर रूप से घायल हैं। सभी दिल्ली से परांठे खाने के लिए मुरथल के ढ़ाबे पर आए थे। (पूरी खबर पढ़ें)