Tuesday, 14 Apr 2026 | 04:01 PM

Trending :

अगर नूडल्स के साथ पनीर मिक्स करके खाएंगे, तो क्या इससे कम नुकसान होगा? डाइटिशियन ने बताया सच जबलपुर में डॉ.अंबेडकर की 135वीं जयंती मनाई गई:धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक हस्तियों ने मंच साझा किया श्योपुर में डॉ. अंबेडकर की भव्य शोभायात्रा:भाजपा-कांग्रेस ने अलग-अलग कार्यक्रमों में किया बाबा साहेब को नमन चना दाल हलवा रेसिपी: मिनटों में घर पर ही तैयार करें चना दाल हलवा, नोट कर लें रेसिपी पाकिस्तान में अस्पताल की लापरवाही से 331 बच्चे HIV पॉजिटिव:8 साल के बच्चे की मौत के बाद खुलासा, सिरिंज के दोबारा इस्तेमाल से फैला संक्रमण जनवरी-मार्च में गोल्ड ETF में 31,561 करोड़ का निवेश:इसमें बीते 1 साल में 64% तक का रिटर्न मिला, जानें इससे जुड़ी खास बातें
EXCLUSIVE

Kurja Plant Benefits : नवजात बच्चों के लिए दादी-नानी से कम नहीं ये पौधा, इसकी कोमल गर्माहट के कहने ही क्या, जानें उपयोग

ask search icon

Last Updated:March 24, 2026, 17:48 IST Kurja plant ke fayde : पहाड़ों में नवजात बच्चों की देखभाल के लिए कुरजा पौधा पारंपरिक नुस्खे में शामिल है. इसकी पत्तियों को हल्का गर्म कर कपड़े में लपेटकर छाती, पीठ या पैरों पर सेकाई दी जाती है. इससे शरीर को गर्माहट, बेहतर रक्त संचार और आराम मिलता है. पिथौरागढ़ की बुजुर्ग नंदी देवी लोकल 18 से बताती हैं कि यह तरीका आज भी फायदेमंद है, बस सावधानी जरूरी है. कुरजा एक जंगली पौधा है. इसकी पत्तियों में प्राकृतिक रूप से गर्म तासीर (हीट) होती है. पहाड़ों की जिंदगी हमेशा से प्रकृति के बेहद करीब रही है. यहां के लोग आज भी कई मामलों में पुराने पारंपरिक नुस्खों पर भरोसा करते हैं, खासकर जब बात नवजात बच्चों की देखभाल की हो. पहाड़ों में एक ऐसा ही खास और अनोखा नुस्खा है– कुरजा पौधा, जिसे नवजात बच्चों को हल्की गर्माहट देने यानी सेकाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है. कुरजा एक जंगली पौधा होता है, जो पहाड़ी इलाकों में आसानी से मिल जाता है. इसकी पत्तियों में प्राकृतिक रूप से गर्म तासीर (हीट) होती है. यही वजह है कि पुराने समय से इसे छोटे बच्चों की देखभाल में इस्तेमाल किया जाता रहा है. खासतौर पर ठंडे इलाकों में, जहां मौसम ज्यादातर ठंडा रहता है, वहां यह पौधा काफी उपयोगी माना जाता है. कुरजा पौधे की पत्तियों का इस्तेमाल बहुत ही सरल तरीके से किया जाता है. सबसे पहले इसकी ताजी पत्तियां और तेहनिया तोड़ी जाती हैं. फिर इन्हें हल्का सा गर्म किया जाता है (ध्यान रहे, ज्यादा गर्म नहीं करना है), इसके बाद पत्तियों को एक साफ कपड़े में लपेटा जाता है  और फिर बच्चे की छाती, पीठ या पैरों पर हल्की-हल्की सेकाई दी जाती है. यह प्रक्रिया बहुत सावधानी से की जाती है, ताकि बच्चे की नाजुक त्वचा को कोई नुकसान न पहुंचे. Add News18 as Preferred Source on Google कुरजा पौधे की सेकाई के कई फायदे बताए जाते हैं. पहाड़ों में ठंड ज्यादा होती है, ऐसे में नवजात बच्चों को ठंड से बचाना बहुत जरूरी होता है. कुरजा की पत्तियां शरीर को प्राकृतिक गर्माहट देती हैं. हल्की सेकाई से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है, जिससे बच्चे का शरीर स्वस्थ रहता है. नवजात बच्चे जल्दी सर्दी-जुकाम की चपेट में आ जाते हैं. कुरजा की गर्म तासीर उन्हें इस समस्या से बचाने में मदद करती है. सेकाई से बच्चे की मांसपेशियों को आराम मिलता है और शरीर में जकड़न नहीं होती. जब बच्चा आराम महसूस करता है, तो उसे अच्छी और गहरी नींद आती है, जो उसके विकास के लिए बहुत जरूरी है. पहाड़ों में आज भी बुजुर्गों के पास ऐसे कई पारंपरिक ज्ञान होते हैं, जो पीढ़ियों से चले आ रहे हैं. बुजुर्ग नंदी देवी बताती हैं, “हमारे जमाने में तो यही सब उपाय होते थे. कुरजा की पत्तियों से बच्चों को हल्की सेकाई देते थे, इससे बच्चा जल्दी ठीक रहता था और ठंड भी नहीं लगती थी. आज भी अगर सही तरीके से किया जाए तो यह बहुत फायदेमंद है.” उनकी बातों से पता चलता है कि यह नुस्खा केवल परंपरा नहीं, बल्कि अनुभव पर आधारित है. हालांकि यह एक प्राकृतिक और सुरक्षित तरीका माना जाता है, फिर भी कुछ सावधानियां बहुत जरूरी हैं. पत्तियों को ज्यादा गर्म न करें, वरना बच्चे की त्वचा जल सकती है. हमेशा साफ कपड़े का इस्तेमाल करें. सेकाई बहुत हल्की और थोड़े समय के लिए ही करें, अगर बच्चे की त्वचा पर कोई रिएक्शन या लालपन दिखे तो तुरंत बंद करें. किसी भी समस्या में डॉक्टर की सलाह जरूर लें. आजकल जहां लोग छोटी-छोटी बातों के लिए दवाइयों पर निर्भर हो गए हैं, ऐसे पारंपरिक नुस्खे हमें प्रकृति के करीब ले जाते हैं. हालांकि आधुनिक चिकित्सा बहुत जरूरी है, लेकिन अगर सही जानकारी और सावधानी के साथ इन पुराने तरीकों को अपनाया जाए, तो यह भी काफी लाभदायक हो सकते हैं. First Published : March 24, 2026, 17:48 IST

मेटावर्स को ‘भविष्य’ बता रहे थे जुकरबर्ग, अब ‘अतीत’:अरबों डॉलर खर्च करने के बाद भी लोगों से दूर रही वर्चुअल दुनिया; 7.5 लाख करोड़ रु. गंवाए

मेटावर्स को ‘भविष्य’ बता रहे थे जुकरबर्ग, अब ‘अतीत’:अरबों डॉलर खर्च करने के बाद भी लोगों से दूर रही वर्चुअल दुनिया; 7.5 लाख करोड़ रु. गंवाए

फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने 2021 में जब कंपनी का नाम बदलकर ‘मेटा’ किया था, तब उन्होंने एक ऐसी आभासी दुनिया (मेटावर्स- वर्चुअल रियलिटी) का सपना दिखाया था, जहां लोग अवतार बनकर रहेंगे, काम करेंगे और खेलेंगे। आज वह विजन खत्म होने की कगार पर है। मेटा ने हाल ही में ‘मेटावर्स’ पर काम कर रहे 10 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी कर दी। कंपनी ने घोषणा की है कि 15 जून से लोग वीआर हेडसेट (आंखों पर पहनने वाला इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस) के जरिए होराइजन वर्ल्ड्स जैसे इमर्सिव प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं कर पाएंगे। जिस प्रोजेक्ट पर कंपनी ने करीब 80 बिलियन डॉलर (लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपए) गंवाए, वह अब सिमट रहा है। जुकरबर्ग की यह महत्वाकांक्षी योजना टेक दुनिया की सबसे महंगी विफलताओं में से एक मानी जा रही है, क्योंकि अब कंपनी का पूरा ध्यान एआई पर टिक गया है। जुकरबर्ग ने 2014 में कंपनी ‘ऑक्युलस’ को करीब 16,600 करोड़ रुपए में खरीदकर इस सफर की शुरुआत की थी। उन्हें भरोसा था कि वर्चुअल रियलिटी स्मार्टफोन की जगह ले लेगी। इसके लिए उन्होंने गेमिंग स्टूडियो खरीदे और डेवलपर्स पर करोड़ों लुटाए। कोविड लॉकडाउन के वक्त ये आइडिया क्रांतिकारी लगा, लेकिन बाद में वास्तविकता इससे अलग रही। मेटावर्स के शुरुआती वर्जन तकनीकी खामियों से भरे थे, जिसका सोशल मीडिया पर काफी मजाक उड़ा। करीब 7.4 लाख करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी आम जनता ने इसे पूरी तरह नकार दिया। एपल के महंगे हेडसेट और बाजार की बेरुखी ने बिगाड़ा मेटा का खेल मेटा ही नहीं, इस रेस में उतरी दिग्गज कंपनी ‘एपल’ को भी तगड़ा झटका लगा है। 2024 में लॉन्च हुए एपल विजन प्रो की कीमत लगभग करीब 3 लाख रुपए थी, जो एक आम आदमी के बजट से कोसों दूर थी। विश्लेषकों का मानना है कि वीआर तकनीक को एक स्वतंत्र प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित करना उम्मीद से कहीं ज्यादा कठिन और समय लेने वाला काम है। डिज्नी जैसी कंपनियों ने भी अपने ‘चीफ मेटावर्स ऑफिसर्स’ के पद खत्म कर दिए हैं। अब मेटा ने अपने फ्लैगशिप एप होराइजन वर्ल्ड्स का रुख वीआर से हटाकर मोबाइल फोन की ओर कर दिया है, जो इस प्रोजेक्ट की हार की औपचारिक स्वीकारोक्ति है। मेटा अपनी हार स्वीकार कर चुका है। पिछले साल एक कॉन्फ्रेंस में जुकरबर्ग ने ‘मेटावर्स’ शब्द का जिक्र सिर्फ दो बार किया, जबकि ‘एआई’ का नाम 23 बार लिया। कंपनी अब ‘सुपर इंटेलिजेंस’ एआई बनाने के लिए इस साल 10.81 लाख करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बना रही है। जुकरबर्ग का नया लक्ष्य ऐसा डिजिटल साथी बनाना है, जो इंसान जैसा बुद्धिमान हो। जिस भविष्य को जुकरबर्ग ने ‘मेटा’ नाम दिया था, वह अब एआई के डेटा सेंटर्स और कोडिंग की परतों के नीचे कहीं दब गया है।

Nashik Rape Accused Baba Found With ₹1500 Cr Assets & 100 Objectionable Videos

Nashik Rape Accused Baba Found With ₹1500 Cr Assets & 100 Objectionable Videos

Hindi News National Nashik Rape Accused Baba Found With ₹1500 Cr Assets & 100 Objectionable Videos नासिक/ मुंबई9 मिनट पहले कॉपी लिंक नासिक जिले के सिन्नर में मंदिर ट्रस्ट चलाने वाले खरात को 18 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। नासिक के स्वयंभू बाबा और रेप के आरोपी अशोक भोंदू खरात के खिलाफ जांच तेज हो गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को जांच के दौरान करीब 1,500 करोड़ रुपए की संपत्ति और 100 आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं। पुलिस ने खरात को मंगलवार को नासिक सेशन कोर्ट में पेश किया जहां से उसे फिर पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। कोर्ट में संक्षिप्त सुनवाई में पुलिस ने खरात पर 5 मानव बलि देने का संदेह जताया है। कोर्ट परिसर में मौजूद लोगों खरात की गाड़ी पर हमला करने की कोशिश की। जांच का दायरा बढ़ने के बाद नासिक पुलिस और आयकर विभाग को भी इस मामले में शामिल किया गया है। नासिक जिले के सिन्नर में मंदिर ट्रस्ट चलाने वाले खरात को 18 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। 35 वर्षीय महिला ने उस पर तीन साल तक बार-बार दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। खरात से मिलने कई राजनेता भी आते रहे हैं। वह खुद को कैप्टन कहता था। दो और केस दर्ज इस मामले में दो और केस भी दर्ज किए गए हैं। इनमें एक सात महीने की गर्भवती महिला के साथ यौन शोषण और दूसरी महिला को दोबारा शादी कराने का झांसा देकर शोषण करने के आरोप शामिल हैं। अधिकारी ने बताया कि साइबर पुलिस इन वीडियो की जांच कर रही है। खरात से मिलनें कई राजनेता भी आते रहे हैं। मामले की गंभीरता और व्यापकता को देखते हुए कई एजेंसियां मिलकर जांच कर रही हैं। इसमें डिजिटल सबूतों और पैसों के लेन-देन की भी जांच शामिल है। लोगों से जांच में मदद मांगी आईपीएस अधिकारी तेजस्विनी सातपुते के नेतृत्व में SIT इस समय खरात के खिलाफ दर्ज छह मामलों की जांच कर रही है। टीम ने लोगों से अपील की है कि अगर उनके पास इस मामले से जुड़ी कोई जानकारी है, तो वे आगे आकर साझा करें। SIT ने भरोसा दिलाया है कि जानकारी देने वालों और शिकायत करने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। जांच टीम में क्राइम ब्रांच के 5 से 10 अधिकारी शामिल हैं, जिनमें महिला पुलिसकर्मी भी हैं, ताकि पीड़ितों के बयान संवेदनशील तरीके से दर्ज किए जा सकें। महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (DGP) सदानंद दाते और राज्य सरकार इस जांच पर नजर रखे हुए हैं, ताकि जांच तेजी और पारदर्शिता के साथ पूरी हो सके। फार्महाउस से पिस्तौल, कारतूस मिले एसआईटी अधिकारी किरण कुमार सूर्यवंशी ने कोर्ट में बताया कि आरोपी अशोक महिलाओं को पत्थर और लाठी देता था। वह उन्हें नशीले पदार्थ मिला पानी पिलाता था। इसके बाद वह उनका यौन शोषण करता था। हमें संदेह है कि अशोक ने कुछ मानव बलि भी दी थी। पुलिस ने आरोपी के फार्महाउस से पिस्तौल, कारतूस, रॉड और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए हैं।अभियुक्तों के पास से कुछ कारतूस गायब हैं। अशोक नकली सांपों और बाघों का इस्तेमाल करके दहशत फैला रहा था। वह कस्तूरी जैसी चीजों का भी इस्तेमाल कर रहा था। इसलिए, उस पर वन्यजीव अधिनियम का उल्लंघन करने का भी संदेह है। कोर्ट में अशोक बोला- मुझे कुछ नहीं पता कोर्ट में बहस के दौरान अशोक खरात सिर झुकाए खड़ा रहा। उसे फिर, हिरासत में भेजने से पहले कोर्ट ने पूछा गया, ‘क्या आपको कुछ कहना है?’ इस पर खरात ने कहा, ‘मुझे सांपों और बाघों के बारे में कुछ नहीं पता। मैं यह पहली बार सुन रहा हूं। मैं कभी-कभी मंदिर जाता था। उस समय वहां करीब 100 लोग होते थे। ———————————— ये खबर भी पढ़ें: महाराष्ट्र ज्योतिषी रेप केस में महिला आयोग अध्यक्ष का इस्तीफा:विपक्ष का आरोपी से तांत्रिक क्रिया कराने का आरोप, दावा- अनुष्ठान में तीसरी उंगली काटी शिवसेना (UBT) की प्रवक्ता सुषमा अंधारे ने शुक्रवार को मीडिया को एक तस्वीर दिखाई। दावा किया कि महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने तांत्रिक अनुष्ठान के लिए तीसरी उंगली काट ली थी। महाराष्ट्र में रेप के आरोपी ज्योतिषी अशोक खरात मामले में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने शुक्रवार देर रात इस्तीफा दे दिया। विपक्ष ने चाकणकर पर आरोपी खरात से संबंध के आरोप लगाए थे। इसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष का इस्तीफा मांगा था। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

गुजरात विधानसभा में UCC बिल पेश:सभी पर समान नियम लागू होंगे, गृह मंत्री संघवी बोले- राज्य के लिए स्वर्णिम दिन

गुजरात विधानसभा में UCC बिल पेश:सभी पर समान नियम लागू होंगे, गृह मंत्री संघवी बोले- राज्य के लिए स्वर्णिम दिन

गुजरात विधानसभा में मंगलवार को यूसीसी विधेयक पेश किया गया। इस विधेयक में वसीयत न होने की स्थिति में माता-पिता, बच्चों और पति/पत्नी को संपत्ति में बराबर हिस्सा देने का प्रावधान है। आज का दिन स्वर्णिम रहेगा: हर्ष संघवी गुजरात के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि आज का दिन गुजरात के लिए ऐतिहासिक है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया, जो राज्य के लिए स्वर्णिम दिन है। देश को आजादी मिलने के बाद भी समाज और धर्म के आधार पर व्यक्तिगत कानून अलग-अलग रहे, जिसके कारण बहनों और बेटियों को सबसे ज्यादा कष्ट सहना पड़ा। सभी पर समान नियम लागू होंगे: हर्ष संघवी अब विवाह, उत्तराधिकार और अन्य नागरिक मामलों में सभी पर समान नियम लागू होंगे। उन्होंने आगे कहा कि महिलाएं वर्षों से इस दिन का इंतजार कर रही थीं और आज वे मुख्यमंत्री को बधाई दे रही हैं। यूसीसी एक ऐसा कानून है, जो किसी एक धर्म के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए समान न्याय प्रदान करता है। विवाह पंजीकरण न कराने वालों पर 10-25 हजार रुपए का जुर्माना यूसीसी के मसौदे में व्यक्तिगत कानूनों को अधिक पारदर्शी और एकरूप बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। नई प्रणाली के तहत, राज्य में प्रत्येक विवाह का पंजीकरण अनिवार्य होगा। हालांकि, पंजीकरण न कराने पर भी विवाह को अमान्य नहीं माना जाएगा, लेकिन पंजीकरण न कराने वालों को 10-25 हजार रुपए का जुर्माना भरना पड़ सकता है। यूसीसी के लागू होने से पहले हुए विवाहों के लिए एक विशिष्ट पंजीकरण प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। सामान्य कानून के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु वसीयत न करने के कारण हो जाती है, तो संपत्ति माता-पिता (एक हिस्सा), पति/पत्नी और बच्चों के बीच समान रूप से विभाजित की जाएगी। यदि उत्तराधिकार में कोई वसीयत नहीं है, तो माता-पिता, बच्चे और पति/पत्नी सभी को संपत्ति में बराबर हिस्सा मिलेगा। उत्तराखंड और गुजरात की समान नागरिक संहिता में कई समानताएं हैं… समान संपत्ति अधिकार उत्तराखंड: संपत्ति में पुत्र और पुत्री दोनों को समान अधिकार प्राप्त होंगे। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे किस वर्ग से संबंधित हैं। किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर, समान नागरिक संहिता के तहत उसकी संपत्ति को पत्नी और बच्चों के बीच समान रूप से विभाजित करने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा, मृतक के माता-पिता को भी संपत्ति में समान अधिकार प्राप्त होंगे। पूर्व कानून में यह अधिकार केवल मृतक की माता को ही प्राप्त था। गुजरात: वसीयत न करने की स्थिति में, संपत्ति माता-पिता (एक हिस्सा), पति/पत्नी और बच्चों के बीच समान रूप से विभाजित की जाएगी। लिव-इन रिलेशनशिप उत्तराखंड: पंजीकरण अनिवार्य है। उत्तराखंड में रहने वाले लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले दंपत्तियों को पंजीकरण कराना होगा। हालांकि यह स्व-घोषणा के समान होगा, अनुसूचित जनजातियों के लोगों को इस नियम से छूट दी जाएगी। बच्चे की जिम्मेदारी: यदि बच्चा लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुआ है, तो उसकी जिम्मेदारी लिव-इन कपल की होगी। दोनों को बच्चे को अपना नाम देना होगा। इससे राज्य में प्रत्येक बच्चे को पहचान मिलेगी। गुजरात: लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन करवाना आवश्यक है। यदि आयु 21 वर्ष से कम है, तो अभिभावक को सूचित करना अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन घोषणा के 30 दिनों के भीतर करवाना होगा और रजिस्ट्रार द्वारा रजिस्ट्रेशन करके प्रमाण पत्र जारी करना होगा, अन्यथा रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति बिना रजिस्ट्रेशन के 1 महीने से अधिक समय तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो उसे 3 महीने की कैद या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। बच्चे की जिम्मेदारी: लिव-इन रिलेशनशिप में जन्मे बच्चे वैध माने जाएंगे। यदि महिला को छोड़ दिया जाता है, तो वह भरण-पोषण की हकदार है। तलाक उत्तराखंड: तलाक केवल आपसी सहमति के आधार पर ही दिया जाएगा। पति-पत्नी को तलाक तभी दिया जाएगा जब दोनों के पास एक समान कारण और तर्क हों। यदि केवल एक पक्ष कारण बताता है, तो तलाक नहीं दिया जाएगा। गुजरात: प्रथागत या व्यक्तिगत कानून के तहत तलाक मान्य नहीं होगा। क्रूरता, धर्म परिवर्तन, असाध्य मानसिक बीमारी या सात साल तक लापता रहने जैसे आधारों पर तलाक मांगा जा सकता है। यदि पति-पत्नी एक वर्ष या उससे अधिक समय से अलग रह रहे हैं, तो वे आपसी सहमति से भी तलाक ले सकते हैं। अदालत द्वारा तलाक का आदेश जारी होने के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार के पास तलाक के आदेश को पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा। समान नागरिक संहिता का मुद्दा सर्वप्रथम कब उठा? सन् 1835 में, ब्रिटिश सरकार ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें आपराधिक साक्ष्य और अनुबंधों के संबंध में देश भर में एक समान कानून बनाने का आह्वान किया गया था। इसे सन् 1840 में लागू भी किया गया, लेकिन धर्म के आधार पर हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों को अलग रखा गया। यहीं से समान नागरिक संहिता की मांग शुरू हुई। 1941 में बीएन राव समिति का गठन किया गया था, जिसने हिंदुओं के लिए एक समान नागरिक संहिता बनाने की बात कही थी। आजादी के बाद, हिंदू संहिता विधेयक पहली बार 1948 में संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया था। इसका उद्देश्य हिंदू महिलाओं को बाल विवाह, सती प्रथा और बुर्का जैसी गलत प्रथाओं से मुक्त करना था। ———————– गुजरात से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… गुजरात में गैस की किल्लत, प्रवासी मजदूर गांव लौट रहे:लोग बोले- सिलेंडर ₹5 हजार में मिल रहा, फ्लैट में चूल्हा नहीं जला सकते देश में एलपीजी गैस कि कमी से चलते गुजरात से अब प्रवासी मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है। सूरत के रेलवे स्टेशनों पर बिहार और यूपी लौटने वाले लोगों की लाइनें लगी हैं। रसोई गैस की कमी के चलते राज्य में रेस्टोरेंट-ढाबा और दूसरे खाने-पीने के स्टॉल चलाने वालों का रोजगार ठप होने लगा है। पूरी खबर पढ़ें…

गुजरात विधानसभा में UCC बिल पेश:सभी पर समान नियम लागू होंगे, गृह मंत्री संघवी बोले- राज्य के लिए स्वर्णिम दिन

गुजरात विधानसभा में UCC बिल पेश:सभी पर समान नियम लागू होंगे, गृह मंत्री संघवी बोले- राज्य के लिए स्वर्णिम दिन

गुजरात विधानसभा में मंगलवार को यूसीसी विधेयक पेश किया गया। इस विधेयक में वसीयत न होने की स्थिति में माता-पिता, बच्चों और पति/पत्नी को संपत्ति में बराबर हिस्सा देने का प्रावधान है। आज का दिन स्वर्णिम रहेगा: हर्ष संघवी गुजरात के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि आज का दिन गुजरात के लिए ऐतिहासिक है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया, जो राज्य के लिए स्वर्णिम दिन है। देश को आजादी मिलने के बाद भी समाज और धर्म के आधार पर व्यक्तिगत कानून अलग-अलग रहे, जिसके कारण बहनों और बेटियों को सबसे ज्यादा कष्ट सहना पड़ा। सभी पर समान नियम लागू होंगे: हर्ष संघवी अब विवाह, उत्तराधिकार और अन्य नागरिक मामलों में सभी पर समान नियम लागू होंगे। उन्होंने आगे कहा कि महिलाएं वर्षों से इस दिन का इंतजार कर रही थीं और आज वे मुख्यमंत्री को बधाई दे रही हैं। यूसीसी एक ऐसा कानून है, जो किसी एक धर्म के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए समान न्याय प्रदान करता है। विवाह पंजीकरण न कराने वालों पर 10-25 हजार रुपए का जुर्माना यूसीसी के मसौदे में व्यक्तिगत कानूनों को अधिक पारदर्शी और एकरूप बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। नई प्रणाली के तहत, राज्य में प्रत्येक विवाह का पंजीकरण अनिवार्य होगा। हालांकि, पंजीकरण न कराने पर भी विवाह को अमान्य नहीं माना जाएगा, लेकिन पंजीकरण न कराने वालों को 10-25 हजार रुपए का जुर्माना भरना पड़ सकता है। यूसीसी के लागू होने से पहले हुए विवाहों के लिए एक विशिष्ट पंजीकरण प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। सामान्य कानून के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु वसीयत न करने के कारण हो जाती है, तो संपत्ति माता-पिता (एक हिस्सा), पति/पत्नी और बच्चों के बीच समान रूप से विभाजित की जाएगी। यदि उत्तराधिकार में कोई वसीयत नहीं है, तो माता-पिता, बच्चे और पति/पत्नी सभी को संपत्ति में बराबर हिस्सा मिलेगा। उत्तराखंड और गुजरात की समान नागरिक संहिता में कई समानताएं हैं… समान संपत्ति अधिकार उत्तराखंड: संपत्ति में पुत्र और पुत्री दोनों को समान अधिकार प्राप्त होंगे। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे किस वर्ग से संबंधित हैं। किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर, समान नागरिक संहिता के तहत उसकी संपत्ति को पत्नी और बच्चों के बीच समान रूप से विभाजित करने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा, मृतक के माता-पिता को भी संपत्ति में समान अधिकार प्राप्त होंगे। पूर्व कानून में यह अधिकार केवल मृतक की माता को ही प्राप्त था। गुजरात: वसीयत न करने की स्थिति में, संपत्ति माता-पिता (एक हिस्सा), पति/पत्नी और बच्चों के बीच समान रूप से विभाजित की जाएगी। लिव-इन रिलेशनशिप उत्तराखंड: पंजीकरण अनिवार्य है। उत्तराखंड में रहने वाले लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले दंपत्तियों को पंजीकरण कराना होगा। हालांकि यह स्व-घोषणा के समान होगा, अनुसूचित जनजातियों के लोगों को इस नियम से छूट दी जाएगी। बच्चे की जिम्मेदारी: यदि बच्चा लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुआ है, तो उसकी जिम्मेदारी लिव-इन कपल की होगी। दोनों को बच्चे को अपना नाम देना होगा। इससे राज्य में प्रत्येक बच्चे को पहचान मिलेगी। गुजरात: लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन करवाना आवश्यक है। यदि आयु 21 वर्ष से कम है, तो अभिभावक को सूचित करना अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन घोषणा के 30 दिनों के भीतर करवाना होगा और रजिस्ट्रार द्वारा रजिस्ट्रेशन करके प्रमाण पत्र जारी करना होगा, अन्यथा रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति बिना रजिस्ट्रेशन के 1 महीने से अधिक समय तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो उसे 3 महीने की कैद या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। बच्चे की जिम्मेदारी: लिव-इन रिलेशनशिप में जन्मे बच्चे वैध माने जाएंगे। यदि महिला को छोड़ दिया जाता है, तो वह भरण-पोषण की हकदार है। तलाक उत्तराखंड: तलाक केवल आपसी सहमति के आधार पर ही दिया जाएगा। पति-पत्नी को तलाक तभी दिया जाएगा जब दोनों के पास एक समान कारण और तर्क हों। यदि केवल एक पक्ष कारण बताता है, तो तलाक नहीं दिया जाएगा। गुजरात: प्रथागत या व्यक्तिगत कानून के तहत तलाक मान्य नहीं होगा। क्रूरता, धर्म परिवर्तन, असाध्य मानसिक बीमारी या सात साल तक लापता रहने जैसे आधारों पर तलाक मांगा जा सकता है। यदि पति-पत्नी एक वर्ष या उससे अधिक समय से अलग रह रहे हैं, तो वे आपसी सहमति से भी तलाक ले सकते हैं। अदालत द्वारा तलाक का आदेश जारी होने के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार के पास तलाक के आदेश को पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा। समान नागरिक संहिता का मुद्दा सर्वप्रथम कब उठा? सन् 1835 में, ब्रिटिश सरकार ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें आपराधिक साक्ष्य और अनुबंधों के संबंध में देश भर में एक समान कानून बनाने का आह्वान किया गया था। इसे सन् 1840 में लागू भी किया गया, लेकिन धर्म के आधार पर हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों को अलग रखा गया। यहीं से समान नागरिक संहिता की मांग शुरू हुई। 1941 में बीएन राव समिति का गठन किया गया था, जिसने हिंदुओं के लिए एक समान नागरिक संहिता बनाने की बात कही थी। आजादी के बाद, हिंदू संहिता विधेयक पहली बार 1948 में संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया था। इसका उद्देश्य हिंदू महिलाओं को बाल विवाह, सती प्रथा और बुर्का जैसी गलत प्रथाओं से मुक्त करना था। ———————– गुजरात से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… गुजरात में गैस की किल्लत, प्रवासी मजदूर गांव लौट रहे:लोग बोले- सिलेंडर ₹5 हजार में मिल रहा, फ्लैट में चूल्हा नहीं जला सकते देश में एलपीजी गैस कि कमी से चलते गुजरात से अब प्रवासी मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है। सूरत के रेलवे स्टेशनों पर बिहार और यूपी लौटने वाले लोगों की लाइनें लगी हैं। रसोई गैस की कमी के चलते राज्य में रेस्टोरेंट-ढाबा और दूसरे खाने-पीने के स्टॉल चलाने वालों का रोजगार ठप होने लगा है। पूरी खबर पढ़ें…

kolkata i-pac ed raid supreme court mamata banerjee tmc west bengal

kolkata i-pac ed raid supreme court mamata banerjee tmc west bengal

नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक तस्वीर 8 जनवरी की है, जब बंगाल CM ममता ने कोलकाता में ED की छापेमारी के बीच मीडिया को संबोधित किया था। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में I-PAC के ऑफिस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड के मामले में सुनवाई की। कोर्ट ने मंगलवार को ममता बनर्जी की बंगाल सरकार से पूछा कि अगर केंद्र में आपकी सरकार होती और कोई राज्य ऐसी कार्रवाई करता तो आपका रुख क्या होता। जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने पूछा कि क्या ड्यूटी पर मौजूद ED अधिकारी अपने अधिकार खो देते हैं। कोर्ट ने बताया कि ED के कुछ अधिकारियों ने निजी तौर पर भी याचिका दायर की है। राज्य की ओर से सीनीयर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि ED के पास अन्य कानूनी विकल्प हैं, इसलिए वह आर्टिकल 32 के तहत याचिका नहीं दे सकती। जांच करना अधिकारी का मौलिक अधिकार नहीं, सिर्फ कानूनी अधिकार है। इस पर कोर्ट ने कहा कि ED अधिकारियों के मौलिक अधिकार भी हैं। सिर्फ यह न कहें कि वे अधिकारी हैं, इसलिए नागरिक नहीं हैं। उनकी याचिकाओं को भी महत्व देना होगा। कोर्ट रूम लाइव : सिब्बल- ED आर्टिकल 32 के तहत याचिका दायर नहीं कर सकती क्योंकि उसके पास दूसरे कानूनी उपाय मौजूद हैं। किसी अधिकारी के पास जांच करने का मौलिक अधिकार नहीं होता। यह सिर्फ कानून से मिला अधिकार है, इसलिए इसमें दखल देने को मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं माना जाएगा। सिब्बल- अगर ऐसा माना गया तो हर पुलिस अधिकारी सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने लगेगा, जिससे आपराधिक कानून की मूल संरचना प्रभावित होगी। जस्टिस मिश्रा- ED अधिकारियों के मौलिक अधिकारों पर भी ध्यान दें। सिर्फ यह न कहें कि वे अधिकारी हैं, इसलिए नागरिक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग अधिकारियों की याचिकाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब पूरे मामले को समझिए 8 जनवरी को ED की टीम ने प्रतीक जैन के कोलकाता के गुलाउडन स्ट्रीट स्थित घर और दूसरी टीम सॉल्टलेक स्थित दफ्तर पर छापा मारा था। प्रतीक जैन ही ममता बनर्जी के लिए पॉलिटिकल स्ट्रैटजी तैयार करते हैं। कार्रवाई सुबह 6 बजे से शुरू हुई थी, लेकिन करीब 11:30 बजे के बाद मामला बढ़ा। सबसे पहले कोलकाता पुलिस कमिश्नर, प्रतीक के आवास पर पहुंचे। कुछ समय बाद सीएम ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित उनके घर पहुंच गईं। ममता वहां कुछ देर रुकीं। जब बाहर निकलीं, तो उनके हाथ में एक हरी फाइल दिखाई दी। इसके बाद वे I-PAC के ऑफिस भी गईं। उन्होंने कहा- गृहमंत्री मेरी पार्टी के दस्तावेज उठवा रहे हैं। ED ने कहा कि पश्चिम बंगाल में 6 और दिल्ली में 4 ठिकानों पर छापेमारी की गई। ममता 8 जनवरी की दोपहर 12 बजे I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पहुंची थीं। I-PAC रेड मामला : 2,742 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग केस I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी है। यह राजनीतिक दलों के लिए बड़े स्तर पर चुनावी अभियानों का काम करती है। कंपनी और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन पर करोड़ों रुपए के कोयला चोरी घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। CBI ने इस मामले में 27 नवंबर 2020 को FIR दर्ज की थी। पूरा मामला ₹2,742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। आरोप है कि ₹20 करोड़ हवाला के जरिए I-PAC तक ट्रांसफर हुए। ED ने 28 नवंबर 2020 को इसकी जांच शुरू की थी। 8 जनवरी 2026 को ED ने कोलकाता में I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापा मारा था। ED के अफसरों ने प्रतीक के घर और ऑफिस से कई डॉक्यूमेंट्स जब्त किए। रेड के दौरान फाइलें लेकर चली गईं थी CM ममता सर्च ऑपरेशन के दौरान, CM ममता बनर्जी अन्य TMC नेताओं के साथ I-PAC ऑफिस पहुंचीं। इसके बाद काफी हंगामा हुआ। ममता ऑफिस से कई फाइलें लेकर बाहर निकलीं और मीडिया से बात की। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय एजेंसी पर हद से ज्यादा दखलंदाजी का आरोप लगाया। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया है कि I-PAC पार्टी के चुनाव रणनीतिकार के रूप में काम करता है और विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ED ने गोपनीय चुनाव रणनीति से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए रेड डाली। पश्चिम बंगाल में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। TMC ने ED की कार्रवाई में बाधा डालने के आरोप का खंडन किया। वहीं पश्चिम बंगाल पुलिस ने ED अधिकारियों के खिलाफ FIR भी दर्ज की। —————————————- ये खबर भी पढ़ें… जहां चुनाव, वहां ED ने फाइलें खोलीं, बंगाल से पहले 3 राज्यों महाराष्ट्र-दिल्ली-झारखंड में यही पैटर्न पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बढ़ती सक्रियता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ED का काम आर्थिक अपराधों की जांच करना, काले धन और मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक लगाना है, लेकिन कई बार उसकी कार्रवाई की टाइमिंग सवालों के घेरे में आ जाती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

अनूपपुर में अवैध रेत उत्खनन करते ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त:तीन आरोपी गिरफ्तार, मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर पकड़ा

अनूपपुर में अवैध रेत उत्खनन करते ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त:तीन आरोपी गिरफ्तार, मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर पकड़ा

अनूपपुर कोतवाली पुलिस ने अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मंगलवार को ग्राम पंगना में की गई इस कार्रवाई में रेत से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली भी जब्त की गई। एसपी के निर्देश पर कार्रवाई थाना प्रभारी अरविंद जैन ने बताया कि पुलिस अधीक्षक मोतिउर रहमान के निर्देश पर अवैध रेत कारोबार के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने छापा मारकर कार्रवाई की। रंगे हाथों पकड़े गए आरोपी पुलिस टीम ने अवैध रूप से रेत का परिवहन कर रही ट्रैक्टर-ट्रॉली को पकड़ा। पूछताछ के बाद ट्रैक्टर चालक मोहन सिंह (25), मालिक कुमान सिंह और ट्रैक्टर उपलब्ध कराने वाले सुलोचन सिंह को गिरफ्तार किया गया। कई धाराओं में मामला दर्ज तीनों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस, खान-खनिज अधिनियम और मोटर व्हीकल एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जब्त रेत और ट्रैक्टर-ट्रॉली की कुल कीमत करीब 7.03 लाख रुपए आंकी गई है। पुलिस ने बताया कि इससे पहले भी रेत कारोबारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। लगातार हो रही कार्रवाई से रेत माफियाओं में भय का माहौल है और पुलिस आगे भी सख्ती जारी रखेगी।

Rajasthan Royals Owner Update; Kal Somani Consortium

Rajasthan Royals Owner Update; Kal Somani Consortium

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की पहली चैंपियन टीम राजस्थान रॉयल्स को अमेरिकी बिजनेसमैन काल सोमानी ने खरीद लिया है। पिछले कुछ महीनों से चल रही प्रक्रिया के बाद आखिरकार टीम की बिक्री फाइनल हो गई। बिजनेसमैन काल सोमानी और उनके कंसोर्टियम ने 1.63 बिलियन डॉलर . इस डील के साथ राजस्थान रॉयल्स IPL इतिहास की सबसे महंगी बिकने वाली फ्रेंचाइजी में शामिल हो गई है। इस सौदे ने दिखा दिया है कि पिछले डेढ़ दशक में IPL टीमों की वैल्यू में कितनी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। 2008 में इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत हुई थी, तब राजस्थान रॉयल्स को करीब 67 मिलियन डॉलर में खरीदा गया था। उस समय इसकी कीमत लगभग 260 से 270 करोड़ रुपए के आसपास थी। अगर उस राशि को आज की वैल्यू में देखा जाए तो यह करीब 628 करोड़ रुपए के बराबर बैठती है। अब 2026 में यही फ्रेंचाइजी 1.63 बिलियन डॉलर यानी लगभग 15,289 करोड़ रुपए में बिकी है। इस तरह 2008 के मुकाबले आज की टीम की वैल्यू में करीब 24 गुना की बढ़ोतरी हुई है दरअसल, काल सोमानी टेक्नोलॉजी और निवेश जगत के एक प्रमुख उद्यमी हैं। सोमानी पहले से ही राजस्थान रॉयल्स में निवेशक रहे हैं। उन्होंने 2021 में फ्रेंचाइजी में निवेश किया था। उस समय उन्होंने कहा था कि IPL और राजस्थान रॉयल्स में भविष्य की बड़ी संभावनाएं हैं और वे इस निवेश को लेकर काफी उत्साहित हैं। सोमानी ने टेक्नोलॉजी, एड-टेक, डेटा प्राइवेसी, AI गवर्नेंस और स्पोर्ट्स टेक जैसे क्षेत्रों में कई वैश्विक कंपनियां खड़ी की हैं। इस नई डील के साथ खेल जगत में उनका निवेश और मजबूत हो गया है। — ये खबर भी पढ़ें रियान पराग राजस्थान रॉयल्स के नए कप्तान होंगे:2019 से टीम के साथ हैं; संजू सैमसन ट्रेड होकर CSK चले गए थे IPL 2026 से पहले राजस्थान रॉयल्स (RR) की टीम ने ऑलराउंडर रियान पराग को टीम का अगला कप्तान नियुक्त किया है। यह फैसला संजू सैमसन के चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) में चले जाने के बाद लिया गया है। 2026 के लिए हुए IPL के मिनी ऑक्शन से पहले संजू सैमसन ट्रेड विंडो के जरिये सीएसके में चले गए थे। (पूरी खबर पढ़ें)

ओरछा में रामनवमी पर 5 दिवसीय महोत्सव 27 से:बुंदेली गीतकार गाएंगे बधाई, शाम को होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम

ओरछा में रामनवमी पर 5 दिवसीय महोत्सव 27 से:बुंदेली गीतकार गाएंगे बधाई, शाम को होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम

निवाड़ी जिले की ओरछा तहसील इस बार रामनवमी पर भव्य और ऐतिहासिक आयोजन की साक्षी बनने जा रही है। रामराजा मंदिर में 27 मार्च से पांच दिवसीय रामजन्म महोत्सव की शुरुआत होगी, जहां धार्मिक अनुष्ठान, शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार श्रृंखला देखने को मिलेगी। महोत्सव को लेकर पूरे मंदिर परिसर की आकर्षक साज-सज्जा की जा रही है और तैयारियां अंतिम चरण में हैं। महोत्सव की शुरुआत 27 मार्च को प्राकट्य पर्व के रूप में होगी। पहले दिन सुबह 8:30 बजे कुश नगर से रामराजा परिषद एवं मित्र मंडल द्वारा एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। प्रकटोत्सव के गाई जाएंगी बधाई दोपहर 12:30 बजे रामराजा मंदिर प्रांगण में रामराजा परिषद बुंदेली लोकगीतों के साथ बधाई गीत प्रस्तुत करेगा। इसमें ख्याति प्राप्त कलाकार उर्मिला पांडे, राष्ट्रीय भजन गायक पवन तिवारी और बबलू तिवारी बधाई गीत की प्रस्तुति देंगे। भगवान के ओरछा आगमन की वर्षगांठ भी रामनवमी पर ही होती है, जिसे रामराजा परिषद पिछले कई वर्षों से शोभायात्रा और बधाई कार्यक्रम के साथ मनाता आ रहा है। यह यहां की सालों पुरानी परंपरा है। मंदिर के अंदर दोपहर 12 बजे पूजन-आरती के बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा। रात 8 बजे रामराजा सरकार दालान में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे, जो इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहेगा। शाम को होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम शाम 7 बजे मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन निवाड़ी के संयुक्त तत्वावधान में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसमें छतरपुर की लोक कलाकार मुस्कान प्रजापति अपने साथियों के साथ बुंदेली लोक गायन प्रस्तुत करेंगी। इसके बाद “मर्यादा पुरुषोत्तम” विषय पर भव्य नृत्य नाटिका का मंचन होगा, जिसकी प्रस्तुति भोपाल की कलाकार माण्डवी अजय अरोणकर और उनकी टीम द्वारा दी जाएगी। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए विदिशा की सौम्या और उनके साथी भक्ति गायन की प्रस्तुति देंगे, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाएगा। प्रशासन ने की चाक चौबंद व्यवस्था 28 मार्च को सुबह 5 बजे मंगला आरती के साथ दिन की शुरुआत होगी और इसके बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा। 29 और 30 मार्च को विशेष रूप से पालना और झांकी दर्शन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप के दर्शन कर भक्त भावविभोर होंगे। रामजन्म महोत्सव को लेकर मंदिर प्रबंधन और जिला प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली है। लाखों की संख्या में भक्तों के आने की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने दर्शन के लिये उचित व्यवस्था कर रखी है। गर्मी को देखते हुए भक्तों के लिये व्यवस्थाएं की हुई है और पार्किंग के लिय स्थान तय कर दिये गये है। लोगों को परेशानी ना हो इसके लिये भी यातायात पुलिस और मंदिर प्रबंधन ने पूरा समन्वय बैठा रखा है। भारी वाहनों को नगर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा और तय किये स्थानों पर ही वाहनों की पार्किंग की जा सकेगी। कुल मिलाकर यह पूरा आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि बुंदेली संस्कृति और लोक परंपराओं का भी अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा।

छिपकली हटाने के टिप्स: सिर्फ 5 रुपए में घर से गायब हो जाए छिपकली, बस एक बार देखें यह घरेलू छिपकली

छिपकली हटाने के टिप्स: सिर्फ 5 रुपए में घर से गायब हो जाए छिपकली, बस एक बार देखें यह घरेलू छिपकली

छिपकली हटाने के उपाय: हॉटलाइन्स और अभिनेत्रियों में ही शामिल हैं घर में छिपकलियों का आतंक बढ़ता जा रहा है। कभी किचन की उभरी हुई पर, तो कभी ऑफिस की दीवारों पर रेंगती छिपकलियाँ न सिर्फ डर पैदा होती हैं, बल्कि हाईजीन के दावे तो काफी खतरनाक होते हैं। अगर आप भी सुपरमार्केट पेस्ट कंट्रोल और केमिकल शॉक से थक गए हैं, तो हम आपके लिए लाते हैं 5 रुपये वाली मैजिक इलेक्ट्रिक। इसका उपयोग करके आप इस सीज़न के लिए छिपकली से प्राप्त कर सकते हैं। घर की दीवारों पर चिपकी हुई छिपकलियों को तुरंत देखने के लिए सबसे बेहतरीन तरीका देखें तो झटका होता है। इसे बनाने के लिए एक रुपये वाला कोई भी प्राकृतिक प्राकृतिक लेकेर, प्याज सहित रस निकाला लें। इसमें आधा ग्लास पानी भी मिक्स कर लें। थ्री एनीले को अच्छे से मिक्स करके एक स्पाइडर बोतल में भर लें। यह अच्छी तरह से हिलाएं। अब जहां भी छिपकली के टुकड़े, वहां पर इस छिपकली का क्रीड़ा करें। पेज की ड्रैगन्स गंध और चट्टानों की स्टिकहैट छिपकलियों को वहां टिकने नहीं देवी। चिपकलिपीज़ को नष्ट कर दिया गया और अचानक से बदले गए टेंपरेचर को बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं किया गया। इसलिए ठंडे पानी में कुटी हुई काली मिर्च या फिर लाल मिर्च के पाउडर को मिला कर लें। जैसे ही आप यह पानी छिपकली पर स्पाइडर छोड़ेंगे, उसे सेंसेशन महसूस होगा और वह तुरंत घर ठीक हो जाएगा। अंडे के छिलके से बहुत डरती हैं। उन्हें लगता है कि यह कोई बड़ा शिकारी पक्षी है। इसी अंडों के खाली टुकड़ों को धोकर किचन के बचे हुए या फिर प्लास्टिक पर रख दें। हर 15 दिन में यहाँ रुकें। अगर आपके घर में भी किसी भी तरह की चिपचिपी रोटियां का नाम नहीं रखा जा रहा है, तो उनके लिए ये सबसे बेहतरीन तरीके हैं। पाउडर और मसाले को बराबर मात्रा में मिला लें। फिर थोड़ा-थोड़ा पानी मिक्स करके गोलियाँ बनाएं। उदाहरण माचिस की तिली या टूथपिक के ऊपर की अलमारी के पीछे या नेन में रख दें। इसके महज़ से छिपकलियों को दूर रखने में फ़ायदा होगा। नेफ्थलीन या फिर कपूर की गोलियाँ अगर आपको घर में ज्यादा मेहनत नहीं करनी है, तो नेफ्थलीन्स बॉल्स सबसे आसान उपाय हैं। सिंक के नीचे, स्टोर रूम और वार्डरोब के निवासियों में 1-2 गोलियाँ डाल दें। इसका तारामंडल गंधमंडल और अन्य कीड़ों को दूर रखा गया है। (टैग्सटूट्रांसलेट)छिपकली हटाने के टिप्स(टी)छिपकली भगाने के घरेलू उपाय(टी)चिपकली भगाने के घरेलु उपाय(टी)घर पर छिपकलियों से कैसे छुटकारा पाएं(टी)छिपकलियों के लिए शैम्पू स्प्रे(टी)छिपकली प्रतिरोधी स्प्रे(टी)घरेलू नुस्खे(टी)5 रुपये छिपकली उपाय(टी)रसोई सुरक्षा युक्तियाँ(टी)प्राकृतिक छिपकली प्रतिरोधी