Tuesday, 14 Apr 2026 | 07:42 PM

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कॉन्स्टेबल की बेटी ने AI से सुलझाए सवाल:10वीं में किसान की बेटी के 99.83% नंबर आए; मजदूर मां के बेटे ने भी चौंकाया

कॉन्स्टेबल की बेटी ने AI से सुलझाए सवाल:10वीं में किसान की बेटी के 99.83% नंबर आए; मजदूर मां के बेटे ने भी चौंकाया

राजस्थान बोर्ड के 10वीं के रिजल्ट में कई स्टूडेंट्स ने चौंका दिया। सीकर में किसान की बेटी के 99.83% नंबर आए। अलवर में मजदूरी करने वाली मां के बेटे ने 96.67 प्रतिशत अंक हासिल किए। वहीं कॉन्स्टेबल की बेटी ने आधुनिक तकनीक(AI) का सहारा लेते हुए पढ़ाई में नया मुकाम हासिल किया। मिस्त्री की बेटी ने घर का काम करके भी 96.83 प्रतिशत नंबर हासिल किए। आइए जानते हैं उनमें से कुछ कहानी। सीकर के शेखावाटी स्कूल लोसल की छात्रा प्रियांशी सुंडा ने 99.83% अंक हासिल किए। अब तक के रिजल्ट के मुताबिक प्रियांशी सुंडा स्टेट के टॉप स्टूडेंट्स में शामिल है। प्रियांशी ने रेगुलर पढ़ाई करके यह सफलता हासिल की। उन्होंने एग्जाम के दौरान भी टीवी और मोबाइल देखना नहीं छोड़ा, हालांकि इसका टाइमिंग कम कर दिया था। आज रिजल्ट आने के बाद दैनिक भास्कर ने प्रियांशी से बातचीत की। तब उन्होंने अपनी जर्नी के बारे में बताया। प्रियांशी सुंडा का कहना है कि उन्होंने एग्जाम के लिए रेगुलर स्कूल में पढ़ाई की। प्रियांशी बताती है कि उसके पिता सीताराम सुंडा किसान हैं। प्रियांशी अपने नाना के पास रहती थी, जो आर्मी रिटायर्ड पर्सन है। उनकी गाइडेंस में रहकर ही पढ़ाई की। इसके अलावा फैमिली का भी काफी ज्यादा सपोर्ट रहा। प्रियांशी बताती है कि स्कूल में रोजाना करीब 7 से 8 घंटे पढ़ाई करने के बाद जब वह घर पर आती तो एक से डेढ़ घंटे पढ़ लेती। ऐसे में रूटीन में जो पढ़ाई होती थी, उसका दोबारा से रिवीजन भी हो जाता था। एग्जाम नजदीक थे तो पढ़ाई का लोड नहीं था, क्योंकि सब कुछ पहले ही क्लियर था। उसकी बदौलत ही आज उनका यह परिणाम आया है। प्रियांशी बताती है कि वह अब फ्यूचर में इंजीनियर बनना चाहती है। इसके लिए JEE की तैयारी करेगी। प्रियांशी का दूसरे स्टूडेंट्स को मैसेज है कि स्कूलिंग की पढ़ाई ज्यादा हार्ड नहीं होती। यदि रेगुलर पढ़ाई करके उसका सेम डे रिवीजन कर लिया जाए। पिता ने ध्यान नहीं दिया तो मामा के घर पहुंचा नवीन पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल मालाखेड़ा के छात्र आदेश कुमार ने 96.67 प्रतिशत नंबर प्राप्त किए। छात्र के पिता ने कभी उसकी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया। जब घर में पढ़ाई का माहौल नहीं बना तो मामा के घर चला गया। उसके बाद वहीं रहकर पढ़ाई की। पिछले कई सालों से वह मालाखेड़ा में मामा के घर पर रहता है, यहां उसने पढ़ाई पर फोकस किया। कभी मोबाइल यूज नहीं किया। मामा रूपसिंह ने बताया कि उसका भांजा आदेश कुमार पढ़ाई में होशियार है। जब लगा कि वह खुद के गांव में घर पर नहीं पढ़ पा रहा है। वहां पढ़ाई का माहौल नहीं है। पिता भी सहयोग कम कर रहे थे। इसके बाद उसे खुद के घर ले आया। अब उसका रिजल्ट देखकर सबको खुशी हुई है। वह आगे भी नाम रोशन करेगा। वह खुद ही पढ़ाई करता है। हमेशा मां की याद रहती है। मां ने मेहनत मजदूरी कर बेटे को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। AI से सवाल सॉल्व कर लिए अच्छे अंक अलवर में कालिका पेट्रोलिंग यूनिट में कार्यरत कॉन्स्टेबल मंजू देवी की बेटी सलोनी ने 10वीं में 98 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। खास बात ये है कि सलोनी ने मोबाइल का उपयोग बहुत बेहतरीन किया। जब उसे किसी सवाल में उलझन होती तो वह AI से उसके सटीक जवाब समझती। फिर उसे जो सटीक समझ आता उसे याद करती। ऐसा उसने बहुत बार कई विषय में किया। सलोनी ने बताया कि पहले तो मम्मी ने टोका कि पढ़ाई के समय फोन नहीं मिलेगा, लेकिन जब उनको समझाया कि केवल सवाल को सॉल्व करने के लिए AI का यूज करती हूं। इसके बाद मां को समझ आने पर उन्होंने एआई का यूज करने दिया। जिसके कारण कई बार अटकने के बाद सवाल सॉल्व हो गए। कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ी। अच्छे अंक आने में AI की मदद मिली है। मां खेत पर जाती तो बेटी पूरा काम करती अलवर के थानागाजी के दुहार चौगान निवासी छात्रा कनक प्रजापत ने 10वीं में 96.83 प्रतिशत नंबर हासिल किए। छात्रा के पिता कृष्ण कुमार टाइल्स मिस्त्री है। वही मां मनभरी देवी गृहिणी हैं और खेती बाड़ी करती हैं। पिता कृष्ण कुमार ने बताया कि बेटी अपनी मां के काम में पूरा हाथ बंटाती थी। जब मां को खेत से आने में देर हो जाती तो बेटी पहले ही घर में खाना बनाकर रखती थी। ताकि मां आकर परेशान नहीं हो। घर का छोटा मोटा काम भी कर लेती थी। इसके बाद पढ़ाई पर भी फोकस रखती। सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करती थी। पिता भी मजदूर होने के कारण सुबह जल्दी घर से निकल जाते थे। पिता ने बताया कि पिछले साल उसके बेटे गोविंद प्रजापत के भी 10वीं में अच्छे मार्क्स आए थे। दोनों बहन-भाई एक दूसरे का पूरा सहयोग करते हैं। बेटे ने अपनी बहन को अच्छे अंक लाने में सहयोग किया है। बड़े भाई ने पिछले साल 10th में गांव में टॉप किया था। उसी को देखते हुए उसने भी टॉप कर लिया। ———– ये खबर भी पढ़िए… 10वीं में जुड़वा बहनों के 98 % नंबर आए:सब्जी बेचने वाले की बेटी के 98.67 प्रतिशत; कोटा में परिणाम देख डांस करने लगे स्टूडेंट राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की ओर से मंगलवार को 10वीं का रिजल्ट जारी कर दिया गया। इस बार परिणाम 94.23 प्रतिशत रहा है। यह पिछले साल से 1.17 प्रतिशत ज्यादा है। पिछले साल 93.06 प्रतिशत परिणाम रहा था। लड़कों का 93.63 और लड़कियों का 94.90% रिजल्ट रहा है।(पूरी खबर पढ़ें)

First euthanasia in India Ghaziabad Harish Rana case Delhi AIIMS

First euthanasia in India Ghaziabad Harish Rana case Delhi AIIMS

31 साल के हरीश 13 साल से कोमा में थे। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को इच्छामृत्यु की इजाजत दी थी। हरीश राणा ने मंगलवार को दिल्ली एम्स में अंतिम सांस ली। PTI ने सूत्रों के हवाले से इसकी पुष्टि की है। 31 साल के हरीश 13 साल से कोमा में थे। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को इच्छामृत्यु की इजाजत दी थी। . ये देश का पहला मामला है, जिसमें किसी को इच्छामृत्यु दी गई है। 14 मार्च को हरीश को दिल्ली एम्स में शिफ्ट किया गया था। एम्स प्रशासन ने 16 मार्च को हरीश राणा की फीडिंग ट्यूब हटा दी थी। एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया दिया गया। इसका मतलब होता है कि किसी गंभीर रूप से बीमार मरीज को जिंदा रखने के लिए जो बाहरी लाइफ सपोर्ट या इलाज दिया जा रहा है, उसे रोक दिया जाए या हटा लिया जाए, ताकि मरीज की प्राकृतिक रूप से मौत हो सके। हरीश राणा की ये तस्वीर उस दौरान की है जब उन्हें एम्स शिफ्ट नहीं किया गया था। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था फैसला सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को इच्छामृत्यु मामले में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने 13 साल से कोमा में रह रहे 31 साल के युवक हरीश राणा को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की मंजूरी दी थी। फैसले के बाद मां निर्मला देवी ने कहा था कि ‘बेटे के इलाज के लिए हर संभव प्रयास किए। बड़े-बड़े अस्पतालों में दिखाया और कई डॉक्टरों से इलाज भी कराया, लेकिन उम्मीदें लगभग खत्म हो गई हैं। अब तो बस भगवान से यही प्रार्थना है कि उसे इस पीड़ा से जल्द मुक्ति मिल जाए।’ हरीश हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरे थे, तब से बिस्तर पर दिल्ली में जन्मे हरीश राणा चंडीगढ़ की पंजाब यू्निवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे। 2013 में वह हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए। इसकी वजह से उनके पूरे शरीर में लकवा मार गया और वह कोमा में चले गए। वह न कुछ बोल सकते हैं और न ही महसूस कर सकते हैं। डॉक्टर्स ने हरीश को क्वाड्रिप्लेजिया बीमारी से पीड़ित करार दिया। इसमें मरीज पूरी तरह से फीडिंग ट्यूब यानी खाने-पीने की नली और वेंटिलेटर सपोर्ट पर निर्भर रहता है। इसमें रिकवरी की कोई गुंजाइश नहीं होती। 13 साल से बिस्तर पर पड़े होने की वजह से हरीश के शरीर पर बेडसोर्स यानी गहरे घाव बन गए हैं। उनकी हालत लगातार खराब होती जा रही है। यह स्थिति हरीश के लिए बहुत दर्दनाक है। परिवार के लिए उन्हें ऐसे देखना मानसिक रूप से बेहद कठिन हो गया है। वेंटिलेटर, दवाइयों, नर्सिंग और देखभाल पर कई साल से इतना खर्च हो चुका है कि परिवार आर्थिक रूप से टूट चुका है। इच्छामृत्यु के 2 तरीके होते हैं… पैसिव यूथेनेशिया: इसमें मरीज का इलाज या लाइफ सपोर्ट जैसे वेंटिलेटर, फीडिंग ट्यूब या दवाइयां रोक दी जाती हैं, ताकि उसकी मौत प्राकृतिक रूप से हो सके। इसमें डॉक्टर कोई नया काम नहीं करते, सिर्फ इलाज बंद कर देते हैं। मौत का कारण बीमारी ही रहती है। कोर्ट ने हरीश राणा के लिए पैशिव यूथेनेशिया देने के निर्देश दिए थे। एक्टिव यूथेनेशिया: इसमें मरीज को मौत देने के लिए डॉक्टर दवाई या इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं। भारत में यह गैर-कानूनी है। अगर कोई जान-बूझकर किसी मरीज को दवाई देकर मारता है, तो इसे BNS की धारा के तहत हत्या या के तहत आत्महत्या में मदद माना जाता है। भारत के संविधान में इच्छामृत्यु का क्या कानून है 2005 में कॉमन कॉज नाम की एक NGO ने पैसिव यूथेनेशिया यानी निष्क्रिय इच्छामृत्यु के अधिकार की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर 9 मार्च 2018 को CJI दीपक मिश्रा की अगुआई वाली 5 जजों की बेंच ने इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता दी। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, अगर किसी मरीज को लाइलाज बीमारी हो या वेजिटेटिव स्टेट में यानी लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर ही जिंदा हो, तो प्राकृतिक तरीके से मृत्यु के लिए उसका इलाज बंद किया जा सकता है। इसे इच्छामृत्यु नहीं, बल्कि सम्मान के साथ मृत्यु का अधिकार माना जाएगा। यह अधिकार संविधान के आर्टिकल 21 का हिस्सा है, जिसमें सम्मान से जीने के साथ सम्मान से मरने का अधिकार है। 13 साल से बिस्तर पर पड़े होने की वजह से हरीश के शरीर पर बेडसोर्स यानी गहरे घाव बन गए हैं। -फाइल फोटो इच्छामृत्यु को लेकर क्या नियम है 2018 में पैसिव यूथेनेशिया को वैधता देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए 2 तरह के नियम बनाए… 1. जब मरीज ने पहले ही ‘लिविंग विल’ लिख रखी हो: जब मरीज ने मेंटली फिट रहते हुए अपनी इच्छा से लिविंग विल लिखी हो। इस लिविंग विल में साफ तौर पर लिखा जाता है कि मरीज की बीमारी अगर लाइलाज हो जाए यानी अगर वह अब कभी ठीक होने लायक न बचे तो उसे लाइफ सपोर्ट सिस्टम से हटा दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए भी कुछ नियम बनाए हैं… 18 साल से ज्यादा उम्र और स्वस्थ व्यक्ति ही लिविंग विल लिख सकता है। मरीज ने 2 गवाहों के सामने लिविंग विल साइन की हो। डॉक्यूमेंट्स को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने वेरिफाई किया हो। इलाज करने वाले डॉक्टर, हॉस्पिटल के मेडिकल बोर्ड और जिला स्तर के एक बाहरी मेडिकल बोर्ड की मंजूरी ली गई हो। दोनों बोर्डों की मंजूरी मिलने के बाद वेंटिलेटर जैसे लाइफ सपोर्ट सिस्टम को बंद किया जा सकता हो। इस पूरी प्रक्रिया के बारे में परिवार को जानकारी दी जाती है। किसी भी तरह के विवाद की स्थिति में हाईकोर्ट में अपील की जा सकती है। 2. जब कोई लिविंग विल न हो: जब मरीज अपने होश में रहते हुए लिविंग विल नहीं बनाता तो उसका परिवार या करीबी ये फैसला ले सकते हैं। हालांकि, ये इतना आसान नहीं है। इसके लिए 2018 में सुप्रीम कोर्ट के बनाए गए इन नियमों का पालन करना होता है… अस्पताल के डॉक्टरों का एक बोर्ड मरीज की कंडीशन चेक कर रिपोर्ट बनाता है। कलेक्टर 3-5 एक्सपर्ट्स का दूसरा मेडिकल बोर्ड बनाते हैं, जो ये रिपोर्ट चेक करता है। दोनों बोर्ड के सहमत होने पर इस फैसले को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के पास

दृश्यम 3 की रिलीज टली:2 अप्रैल की जगह अब 21 मई को आएगी मूवी, इसी दिन एक्टर मोहनलाल का बर्थडे

दृश्यम 3 की रिलीज टली:2 अप्रैल की जगह अब 21 मई को आएगी मूवी, इसी दिन एक्टर मोहनलाल का बर्थडे

मलयालम एक्टर मोहनलाल की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘दृश्यम 3’ की रिलीज डेट बदल गई है। जीतू जोसेफ के निर्देशन में बनी यह फिल्म अब 2 अप्रैल की जगह 21 मई, 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। सोमवार शाम खुद मोहनलाल ने सोशल मीडिया पर इस खबर की पुष्टि की। खास बात यह है कि 21 मई को मोहनलाल का 66वां जन्मदिन भी है, ऐसे में मेकर्स ने इस दिन को फिल्म की रिलीज के लिए चुना है। हिंदी में दृश्यम फिल्म को अजय देवगन के साथ इसी नाम से रीमेक किया गया है, हालांकि इस बार मोहनलाल की फिल्म को ही हिंदी में रिलीज किया जाएगा। जन्मदिन पर ‘जॉर्जकुट्टी’ की वापसी मोहनलाल ने X (पहले ट्विटर) पर फिल्म का एक नया पोस्टर शेयर किया है। पोस्टर के साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा, ‘अतीत कभी चुप नहीं रहता… वह बस इंतजार करता है। जॉर्जकुट्टी आ रहा है, 21 मई, 2026 को।’ दरअसल, फिल्म की रिलीज में देरी की चर्चा पिछले कुछ समय से चल रही थी। हालांकि फिल्म की शूटिंग पिछले साल दिसंबर में ही पूरी हो चुकी थी, लेकिन अब इसे सुपरस्टार के बर्थडे पर रिलीज कर यादगार बनाने की तैयारी है। खाड़ी में तनाव और अन्य फिल्मों का असर मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म की रिलीज टलने के पीछे खाड़ी देशों में चल रहा युद्ध और तनाव भी एक बड़ा कारण हो सकता है। मेकर्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। इसके अलावा, हाल के दिनों में यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ की रिलीज भी जून तक के लिए टल चुकी है। 5 भाषाओं में पैन-इंडिया रिलीज होगी फिल्म ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइज की शुरुआत साल 2013 में हुई थी, जो मलयालम सिनेमा के लिए मील का पत्थर साबित हुई। इसका दूसरा पार्ट 2021 में आया था। हिंदी में इस फिल्म को अजय देवगन के साथ इसी नाम से रीमेक किया गया है, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। हालांकि, इस बार ‘दृश्यम 3’ में एक बड़ा ट्विस्ट है। डायरेक्टर जीतू जोसेफ ने साफ किया है कि वे इस बार फिल्म को सीधे 5 भाषाओं में पैन-इंडिया रिलीज करेंगे, यानी मोहनलाल वाली ‘दृश्यम 3’ हिंदी में भी रिलीज होगी।

तुलसी के पास रखा ये छोटा सा उपाय, घर की हवा को बनाता है ‘नेचुरल AC’! जानिए आसान तरीका

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Last Updated:March 24, 2026, 16:49 IST गर्मी के मौसम में तुलसी का पौधा घर में नेचुरल ठंडक देने का आसान और कारगर तरीका है. इसके पत्तों से निकलने वाले तत्व हवा को शुद्ध करते हैं और पानी के हल्के छिड़काव से कमरे में ठंडी और ताजी हवा महसूस होती है. यह तरीका पूरी तरह प्राकृतिक, केमिकल फ्री और बिजली बचत करने वाला है. गर्मी आते ही लोग AC और कूलर की तरफ भागते हैं, लेकिन क्या हो अगर आपके घर में ही एक नेचुरल तरीका मौजूद हो जो बिना ज्यादा खर्च के ठंडक दे सके. हम बात कर रहे हैं तुलसी के पौधे की, जो सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं रखता बल्कि आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को भी आसान बना सकता है. पुराने समय में लोग इसी छोटे से पौधे की मदद से अपने घर का माहौल ठंडा और ताजा रखते थे. तुलसी के पौधे में प्राकृतिक रूप से ऐसे गुण होते हैं जो आसपास की हवा को शुद्ध और हल्का ठंडा बनाने में मदद करते हैं. इसके पत्तों से निकलने वाले तत्व हवा में मौजूद बैक्टीरिया को कम करते हैं. यही कारण है कि जहां तुलसी होती है, वहां की हवा ज्यादा फ्रेश महसूस होती है. लेकिन असली कमाल तब होता है जब आप इसके साथ एक छोटी सी ट्रिक अपनाते हैं. डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि इस ट्रिक में आपको ज्यादा कुछ नहीं करना है. बस शाम के समय तुलसी के पौधे के आसपास हल्का सा पानी छिड़कना है. इसके साथ ही पास में एक मिट्टी का बर्तन या कटोरा रख देना है जिसमें थोड़ा पानी भरा हो. यह तरीका सुनने में बेहद साधारण लगता है, लेकिन इसका असर आपको कुछ ही समय में महसूस होने लगता है. Add News18 as Preferred Source on Google जब पानी की नमी और तुलसी के पत्तों से निकलने वाले तत्व मिलते हैं, तो आसपास की हवा में एक ठंडक घुलने लगती है. यह बिल्कुल वैसा ही प्रभाव देता है जैसा पुराने समय के मिट्टी के घरों में महसूस होता था. हवा ज्यादा भारी नहीं लगती और कमरे का तापमान हल्का सा कम महसूस होने लगता है. सबसे खास बात यह है कि यह तरीका पूरी तरह नेचुरल है और इसमें किसी तरह का बिजली खर्च नहीं होता. आज के समय में जब बिजली के बिल लगातार बढ़ रहे हैं, ऐसे में छोटे-छोटे उपाय काफी राहत दे सकते हैं. साथ ही, यह आपके घर के वातावरण को केमिकल फ्री और हेल्दी भी बनाए रखता है. कई लोग इस ट्रिक को अपने बालकनी या खिड़की के पास भी इस्तेमाल करते हैं, जहां से हवा अंदर आती है. तुलसी के पास से गुजरती हवा ज्यादा ठंडी और साफ होकर कमरे में प्रवेश करती है. इससे पूरे घर में एक अलग ही ताजगी महसूस होती है, जो किसी भी मशीन से नहीं मिलती. यह तरीका सिर्फ ठंडक ही नहीं देता, बल्कि आपके मूड पर भी असर डालता है. फ्रेश और ठंडी हवा मन को शांत करती है और दिनभर की थकान को कम करने में मदद करती है. शायद यही वजह है कि पुराने समय में लोग प्रकृति के करीब रहकर ज्यादा सुकून महसूस करते थे. First Published : March 24, 2026, 16:49 IST

रायसेन की अंजलि ने राज्य स्तरीय ओलंपियाड में दूसरा स्थानप्राप्तकिया:ग्वालियर में आयोजित प्रतियोगिता में जिले के चार बच्चों ने लिया था भाग

रायसेन की अंजलि ने राज्य स्तरीय ओलंपियाड में दूसरा स्थानप्राप्तकिया:ग्वालियर में आयोजित प्रतियोगिता में जिले के चार बच्चों ने लिया था भाग

एमपी के ग्वालियर में आयोजित राज्य स्तरीय ओलंपियाड प्रतियोगिता 2025-26 में रायसेन जिले की छात्रा अंजलि मेहरा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान प्राप्त किया है। अंजलि सिलवानी विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला सिंहपुर की कक्षा 4 की छात्रा हैं। इस प्रतियोगिता में रायसेन जिले से कुल चार विद्यार्थियों ने भाग लिया था। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए आयोजित सम्मान समारोह में अंजलि मेहरा को राज्य शिक्षा केंद्र के अधिकारियों और ग्वालियर जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रावत द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में अन्य प्रतिभागी विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। इनमें कक्षा 2 की तेजीबा कुरैशी, कक्षा 3 की खुशबू कुशवाहा, कक्षा 4 की अंजलि मेहरा और कक्षा 5 की निर्मल लोधी शामिल रहीं। शिक्षकों को भी दिया गया सम्मान दूसरे स्थान प्राप्त करने पर अंजलि मेहरा को ट्रॉफी, साइकिल, सिल्वर मेडल, स्टडी टेबल, बैग, बोतल, कॉपी, कंपास और घड़ी सहित अन्य उपहार प्रदान किए गए। वहीं, मार्गदर्शक शिक्षकों का भी सम्मान किया गया। सरोज रघुवंशी को सिल्वर मेडल, प्रमाण पत्र और टिफिन बॉक्स देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा गैरतगंज विकासखंड के संदीपनी विद्यालय की शिक्षिका मीरा व्यास को भी प्रमाण पत्र और टिफिन बॉक्स प्रदान किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों के अभिभावक अनीता मेहरा, औसाफ कुरैशी और भगवान सिंह लोधी भी मौजूद रहे। जिले का प्रतिनिधित्व एपीसी विनीत दीक्षित ने किया, जिन्हें राज्य स्तर पर प्रमाण पत्र और उपहार देकर सम्मानित किया गया।

Jatara Oxygen Plant Shut | CMHO Denies Patient Death Link

Jatara Oxygen Plant Shut | CMHO Denies Patient Death Link

स्वास्थ्य विभाग ने टीकमगढ़ जिले के जतारा सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट बंद होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। मंगलवार को CMHO डॉ. ओपी अनुरागी ने इस विवाद पर विभाग का पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्लांट तकनीकी खराबी नह . चार महीने पहले चोरी हुई थी सप्लाई पाइपलाइन डॉ. अनुरागी ने बताया कि लगभग चार महीने पहले ऑक्सीजन प्लांट की मुख्य सप्लाई पाइपलाइन चोरी हो गई थी। इस चोरी के कारण वार्डों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप है। सीएमएचओ ने बताया कि इस संबंध में जतारा थाने में औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई जा चुकी है। वर्तमान में अस्पताल में ऑक्सीजन की वैकल्पिक व्यवस्था सिलेंडरों के माध्यम से की जा रही है। एक सप्ताह पहले हुई मरीज की मौत एक सप्ताह पहले 60 वर्षीय मरीज लंपू कुशवाहा की मौत के मामले में विभाग ने ऑक्सीजन की कमी के आरोपों को खारिज कर दिया है। मृतक के बेटे काशीराम कुशवाहा ने आरोप लगाया था कि ऑक्सीजन न मिलने से उनके पिता की जान गई। हालांकि, डॉ. अनुरागी ने मामले में बताया कि अस्पताल में पर्याप्त सिलेंडर उपलब्ध थे और मरीज की माैत अन्य गंभीर बीमारियों के चलते हुई है। लाखों की लागत से बना प्लांट बंद पड़ा कोविड-19 महामारी के दौरान जतारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लाखों रुपए की लागत से इस ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना की गई थी। विधायक हरिशंकर खटीक ने इसका लोकार्पण किया था। उद्घाटन के कुछ महीनों बाद ही स्टाफ की कमी और रखरखाव के अभाव में यह प्लांट निष्क्रिय हो गया, जिससे सरकारी धन के सदुपयोग पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय प्रशासन करेगा जांच भोपाल मुख्यालय से मिले निर्देशों के बाद अब स्थानीय प्रशासन यह जांच करेगा कि पाइपलाइन चोरी होने के बाद उसे बहाल करने में देरी क्यों हुई। साथ ही, स्टाफ की कमी के दावों और बंद पड़े प्लांट की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

राजस्थान रॉयल्स 15,289 करोड़ में बिकी:काल सोमानी कंसोर्टियम ने खरीदी टीम, 2008 के मुकाबले 24 गुना बढ़ी वैल्यू

राजस्थान रॉयल्स 15,289 करोड़ में बिकी:काल सोमानी कंसोर्टियम ने खरीदी टीम, 2008 के मुकाबले 24 गुना बढ़ी वैल्यू

Hindi News Sports Cricket Rajasthan Royals, Kal Somani, IPL 2026, Rajasthan Royals Owner, IPL Team Sale, RR Ownership, IPL News Hindi, Cricket News, Rajasthan Royals Deal, IPL Franchise News स्पोर्ट्स डेस्क2 मिनट पहले कॉपी लिंक IPL की पहली चैंपियन राजस्थान रॉयल्स को नए मालिक मिल गए हैं। पिछले कुछ महीनों से चली आ रही प्रक्रिया के बाद आखिरकार 1.63 बिलियन डॉलर यानि करीब 15,289 करोड़ रुपए की रिकॉर्ड बोली के साथ राजस्थान रॉयल्स की बिक्री फाइनल हो गई है। अमेरिका के बिजनेसमैन काल सोमानी और उनके कॉन्सोर्टियम ने फ्रेंचाइजी के लिए ये सबसे बड़ी बोली लगाई है, जिसे मंजूर कर लिया गया है। काल सोमानी टेक्नोलॉजी और निवेश जगत का बड़ा नाम हैं और उन्होंने एड-टेक, डेटा प्राइवेसी, AI गवर्नेंस और स्पोर्ट्स टेक जैसे क्षेत्रों में कई वैश्विक कंपनियां खड़ी की हैं। इस डील के साथ उनका खेल जगत में निवेश और मजबूत हो गया है। राजस्थान रॉयल्स IPL की शुरुआती टीमों में से एक है, जिसने 2008 में पहला खिताब जीता था। RR 24 गुना ज्यादा में बिकी 2008 में जब राजस्थान रॉयल्स को खरीदा गया था, तब इसकी कीमत सिर्फ 67 मिलियन डॉलर थी, जो उस समय लगभग ₹260-270 करोड़ के आसपास बैठती थी। अगर उसी 67 मिलियन डॉलर को आज की वैल्यू में देखा जाए, तो यह करीब ₹628 करोड़ बनता है। अब 2026 में यही फ्रेंचाइजी करीब 1.63 बिलियन डॉलर (लगभग ₹15,289 करोड़) में बिकी है। यानी, मौजूदा वैल्यू की तुलना 2008 की आज की कीमत (₹628 करोड़) से करें, तो राजस्थान रॉयल्स की कीमत में करीब 24 गुना का उछाल आया है। सोमानी 2021 से फ्रेंचाइजी में इन्वेस्टर हैं काल सोमानी पहले से ही राजस्थान रॉयल्स में इन्वेस्टर थे। 2021 में उन्होंने फ्रेंचाइजी में एंट्री ली थी। सोमानी ने तब कहा था- हमें इस निवेश में बहुत बड़ी संभावना दिख रही है और हम IPL के भविष्य को लेकर उत्साहित हैं। दो साल के लिए बैन हुई थी RR शेन वॉर्न की कप्तानी में राजस्थान रॉयल्स ने IPL का पहला सीजन 2008 में जीता था। लेकिन उसके बाद टीम का प्रदर्शन नीचे जाने लगा। उसके बाद से टीम सिर्फ एक बार 2022 में फाइनल में पहुंची है। तब गुजरात टाइटंस के खिलाफ फाइनल मुकाबले में उसे हार मिली। फ्रेंचाइजी को 2016 और 2017 में बैन भी होना पड़ा था। ———————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… बेंगलुरु भगदड़ के मृतकों को अनूठी श्रद्धांजलि:चिन्नास्वामी स्टेडियम में 11 सीटें हमेशा खाली रखी जाएंगी बेंगलुरु के एम चिन्नस्वामी स्टेडियम में खेले जाने वाले IPL और इंटरनेशनल मैचों में 11 सीटें हमेशा खाली रखी जाएंगी। वहीं, स्टेडियम के एंट्री गेट पर स्मारक पट्टिका (मेमोरियल प्लाक) और हर मैच से पहले एक मिनट का मौन भी रखा जाएगा, जिसमें दोनों टीमें हिस्सा लेंगी। पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

India Develops Ethanol Cooking Stoves to Cut LPG Dependence

India Develops Ethanol Cooking Stoves to Cut LPG Dependence

नई दिल्ली7 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत में अब रसोई गैस (LPG) की निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल का इस्तेमाल करने की तैयारी चल रही है। सरकार एथेनॉल बेस्ड कुकिंग स्टोव (चूल्हे) बनाने पर काम रही है। मंगलवार को फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सेक्रेटरी संजीव चोपड़ा ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एथेनॉल न केवल गाड़ियों के लिए, बल्कि अब घरों की रसोई के लिए भी एक सुरक्षित और सस्ता विकल्प बन सकता है। पश्चिम एशिया में तनाव से LPG की किल्लत बढ़ी संजीव चोपड़ा ने बताया कि हाल के दिनों में पश्चिम एशियाई देशों में चल रहे संघर्ष की वजह से भारत में गैस की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के जरिए होने वाले शिपमेंट्स रुकने से जमीनी स्तर पर एलपीजी की कमी महसूस की जा रही है, जिससे कीमतें भी बढ़ी हैं। इसी संकट को देखते हुए सरकार अब घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले एथेनॉल को कुकिंग फ्यूल (खाना पकाने के ईंधन) के रूप में प्रमोट कर रही है। शुरुआती दौर में है एथेनॉल चूल्हे का प्रोजेक्ट सचिव ने बताया कि एथेनॉल आधारित चूल्हों के कुछ शुरुआती मॉडल तैयार कर लिए गए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि यह प्रोजेक्ट अभी बेहद शुरुआती चरण में है। उन्होंने कहा, ‘अगर हम इसे बड़े पैमाने पर लागू करते हैं, तो हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह पूरी तरह सुरक्षित हो और इसकी उपलब्धता भी बनी रहे।’ कैसे काम करेगा एथेनॉल चूल्हा? ईंधन: इसमें तरल एथेनॉल का इस्तेमाल होता है। फायदा: यह LPG के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाता है और इसे स्टोर करना आसान होता है। सुरक्षा: एथेनॉल अत्यधिक ज्वलनशील होता है, इसलिए इसके चूल्हों में खास तरह के सेफ्टी वॉल्व और बर्नर डिजाइन किए जा रहे हैं। मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में ही पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा सरकार इसकी सप्लाई चैन को परखने के लिए एक प्रयोग करने जा रही है। इसके तहत देश के एथेनॉल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में ही एथेनॉल कुकिंग का टेस्ट किया जाएगा। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि बिना किसी रूकावट के ईंधन को घरों तक कैसे पहुंचाया जा सकता है। 30% ब्लेंडिंग का लक्ष्य पूरा, अब डिमांड बढ़ाने पर जोर देश में एथेनॉल प्रोग्राम को लेकर चोपड़ा ने बताया कि सप्लाई के मामले में हमने अच्छा काम किया है। अब तक 30% एथेनॉल ब्लेंडिंग (मिश्रण) का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। अब सप्लाई की कोई कमी नहीं है, इसलिए सरकार का फोकस डिमांड बढ़ाने पर है। उन्होंने कहा, ‘हम डीजल के साथ एथेनॉल की ब्लेंडिंग और टेक्सटाइल बाई-प्रोडक्ट्स जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।’ सरकार बेहतर चावल देगी, टूटे हुए चावल से एथेनॉल बनेगा सरकार पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के जरिए दिए जाने वाले चावल की क्वालिटी में भी सुधार कर रही है। 5 राज्यों में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसमें मिलों से निकलने वाले चावल में टूटे हुए चावल की मात्रा 25% से घटाकर 10% की गई है। इससे राशन कार्ड धारकों को बेहतर क्वालिटी का चावल मिलेगा। इस प्रक्रिया के दौरान जो अतिरिक्त टूटा हुआ चावल निकलेगा, उसे एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को सप्लाई किया जाएगा। टूटे हुए चावल की सप्लाई बढ़ाने पर विचार कर रही सरकार एथेनॉल बनाने के लिए टूटे हुए चावल की कम मांग पर संजीव चोपड़ा ने कहा कि तेल कंपनियों (OMC) की ओर से आवंटन कम होने के कारण ऐसा हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जैसे ही तेल कंपनियां आवंटन बढ़ाएंगी, डिमांड की समस्या खत्म हो जाएगी। साथ ही FCI के चावल के बजाय सीधे ब्रोकन राइस के इस्तेमाल से एथेनॉल प्रोडक्शन को और मजबूती मिलेगी। यह खबर भी पढ़ें… गोल्डमैन सैक्स ने भारत का GDP ग्रोथ अनुमान घटाया: 2026 में 7% की जगह 5.9% रह सकती है; तेल सप्लाई रुकने से खतरा बढ़ा ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स ने साल 2026 के लिए भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ (GDP) का अनुमान घटा दिया है। बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की जीडीपी ग्रोथ अब 5.9% रहने की उम्मीद है। ईरान युद्ध से पहले इसके 7% रहने का अनुमान लगाया गया था। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि रुपए की कमजोरी और महंगाई को काबू करने के लिए रिजर्व बैंक ब्याज दरों में 0.50% की बढ़ोतरी कर सकता है। इससे पहले 13 मार्च को भी बैंक ने ग्रोथ अनुमान 7% से घटाकर 6.5% किया था, जिसे अब और कम कर दिया गया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

531 प्रेजेंटेशन में सुनाए गए 870 चुटकुलों पर आधारित रिपोर्ट:वैज्ञानिकों के 66% जोक्स फ्लॉप, सिर्फ 9% पर खुलकर हंसी: स्टडी

531 प्रेजेंटेशन में सुनाए गए 870 चुटकुलों पर आधारित रिपोर्ट:वैज्ञानिकों के 66% जोक्स फ्लॉप, सिर्फ 9% पर खुलकर हंसी: स्टडी

वैज्ञानिकों के रिसर्च पेपर जितने गंभीर होते हैं, कॉन्फ्रेंस टॉक्स में उनके जोक्स (चुटकुले) उतने ही कम असरदार निकल रहे हैं। प्रोसीडिंग्स ऑफ द रॉयल सोसाइटी बी में छपी एक स्टडी के मुताबिक 14 बायोलॉजी कॉन्फ्रेंस के 531 प्रेजेंटेशन में की गई हंसी-मजाक की 66% कोशिशें फ्लॉप रहीं। इन पर दर्शकों ने या तो हल्की-सी शिष्टाचार वाली मुस्कान दी या फिर कोई रिएक्शन नहीं दिया। स्टडी में कुल 870 जोक्स दर्ज किए गए। इनमें से सिर्फ 9% जोक्स पर पूरी ऑडियंस खुलकर हंसी। करीब 24% मौकों पर जोक्स को मध्यम सफलता मिली, यानी लगभग आधे लोग हंसे। स्टडी की सह-लेखिका विक्टोरिया स्टाउट के अनुसार वैज्ञानिक मजाक को जरूरी स्किल नहीं मानते। उनका कहना है कि ह्यूमर से लोग आपको ज्यादा याद रखते हैं और सहयोग की संभावना भी बढ़ती है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों ने अधिक जोक्स किए अध्ययन के अनुसार, महिला वैज्ञानिकों के मुकाबले पुरुषों ने मंच पर अधिक जोक्स सुनाए और मजाक करने का रिस्क लिया। कुल प्रेजेंटेशन में से लगभग 60% में कम से कम एक बार हंसी का माहौल बनाने की कोशिश की गई। वहीं, 40% वैज्ञानिकों ने अपनी बात पूरी तरह गंभीर रखी, ताकि जोक फेल होने का कोई खतरा न रहे। बोरियत से शुरू हुई नोटिंग, फिर बन गई स्टडी सह-लेखिका विक्टोरिया स्टाउट ने पीएचडी की बोरियत दूर करने के लिए वक्ताओं के जोक्स नोट किए, जो बाद में रिसर्च का आधार बने। उन्होंने इटली के स्टेफानो मैमोला के साथ 2022-24 के बीच 14 बायोलॉजी कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया। टीम ने यह भी रिकॉर्ड किया कि मजाक करने के बाद वक्ता दर्शकों की हंसी के लिए कितनी देर तक इंतजार करते हैं। खुद की गलतियों पर बने सबसे ज्यादा मजाक वैज्ञानिकों के जोक्स में सबसे ज्यादा चर्चा खुद की गलतियों और तकनीकी दिक्कतों की रही, जिसे शोधकर्ताओं ने मानवीय पहलू माना। रिसर्च टॉपिक व फील्ड वर्क के किस्से भी कॉमेडी का जरिया बने। साइंस राइटर टायलर सोडरबोर्ग ने कहा कि बायोलॉजिस्ट्स का जोक्स के प्रति यह उत्साह अच्छी बात है, भले ही वे हर बार दर्शकों को हंसाने में पूरी तरह सफल न हो पाए हों।

Health Tips : ये गलतियां पथरी को बुलावा…लहरों की तरह उठेगा दर्द, झन्ना जाएगा दिमाग, डॉक्टर से जानें बचाव

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Last Updated:March 24, 2026, 15:55 IST Health tips for stones : पथरी की समस्या हर उम्र में देखने के मिल रही है. अक्सर लोग अपनी ही गलती से इस रोग को न्योता दे बैठते हैं. आगरा के चिकित्सक डॉ. आशीष मित्तल लोकल 18 से बताते हैं कि कम पानी पीने से शरीर में मिनरल और कैल्शियम एकत्र होने लगता है, पथरी का ये बड़ा कारण है. पेशाब रोकने से भी पथरी बनने का खतरा बढ़ जाता है. गुटका, पान, सुपारी खाने से भी पथरी जल्दी बनती है. डॉ. आशीष कहते हैं कि पथरी का दर्द आमतौर पर पसलियों के नीचे, पीठ के एक तरफ या पेट के निचले हिस्से में अचानक उठता है. पथरी मरीजों में उल्टी, जी मिचलाना, पेशाब में जलन, खून आना या बार-बार पेशाब आने जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं. आगरा. पथरी की समस्या महामारी की तरह फैल रही है. हालांकि कई मामलो में पथरी अपने आप शरीर से बाहर आ जाती है. पथरी की दिक्कत हर उम्र के लोगों में देखने को मिलती है. बदलती जीवनशैली और गलत खानपान इसका सबसे बड़ा कारण है. कई बार लोग पानी बेहद कम पीते हैं, जिस कारण पथरी बनने लगती है. आगरा के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आशीष मित्तल लोकल 18 से बताते हैं कि कम पानी पीने से शरीर में मिनरल और कैल्शियम एकत्र होने लगता है, दूसरा ओर पेशाब को रोकने से पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है. डॉ. आशीष के मुताबिक, जिन सब्जियों और फलों में बीज होता है, उसे खाने से भी कई बार पथरी बन जाती है. गुटका, पान, सुपारी खाने से भी पथरी जल्दी बनती है. गुटका, पान मसाला खाने से बचना चाहिए और जितना हो सके पानी अधिक पीना चाहिए और पेशाब को रोकना नहीं चाहिए. डॉ. आशीष कहते हैं कि पथरी वाले मरीजों को पहले दवा और पेय पदार्थों से ही पथरी बाहर निकालने की सलाह दी जाती है. पथरी 7mm से बड़ी है तो ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है. कई केस में बड़ी पथरी भी बिना ऑपरेशन के निकल जाती है. कितना पानी प्रतिदिन रोकेगा पथरी डॉ. आशीष मित्तल बताते हैं कि पथरी से बचने के लिए जितना ज्यादा हो सके, पानी पीना चाहिए. पथरी होने के बाद मरीज को बेहद खतरनाक दर्द का सामना करना पड़ता है. दर्द से छुटकारा पाने के लिए दवाई, इंजेक्शन आदि लेने पड़ते हैं और डॉक्टर के चक्कर काटने पड़ते हैं. इस बीमारी से यदि बचना है तो सामान्य बस प्रतिदिन कम से कम 4 लीटर पानी जरूर पिएं ताकि पथरी एकत्र ही न हो. टॉयलेट आने पर उसे ज्यादा देर तक रोकना नहीं है. इससे इन्फेक्शन और पथरी के चांस बढ़ जाते हैं. दर्द या पथरी का अहसास होने पर तत्काल नजदीकी चिकित्सक से परामर्श जरूर लें. लहरों की तरह आएगा दर्द डॉ. आशीष मित्तल कहते हैं कि पथरी होने का बाद मरीज को बहुत तेज दर्द होता है. पथरी का दर्द आमतौर पर पसलियों के नीचे, पीठ के एक तरफ या पेट के निचले हिस्से में अचानक उठता है. यह दर्द लहरों की तरह बढ़ता-घटता है. कई मामलो में यह दर्द जांघों और पेट के निचले हिस्से (Groin) तक फैलता है और इसके साथ ही उल्टी, जी मिचलाना, पेशाब में जलन, खून आना या बार-बार पेशाब आने जैसे लक्षण दिखाई देते है. ऐसे कोई भी लक्षण दिखें तो मरीज को तत्काल नजदीकी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Agra,Uttar Pradesh First Published : March 24, 2026, 15:55 IST