Tuesday, 14 Apr 2026 | 04:01 PM

Trending :

अगर नूडल्स के साथ पनीर मिक्स करके खाएंगे, तो क्या इससे कम नुकसान होगा? डाइटिशियन ने बताया सच जबलपुर में डॉ.अंबेडकर की 135वीं जयंती मनाई गई:धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक हस्तियों ने मंच साझा किया श्योपुर में डॉ. अंबेडकर की भव्य शोभायात्रा:भाजपा-कांग्रेस ने अलग-अलग कार्यक्रमों में किया बाबा साहेब को नमन चना दाल हलवा रेसिपी: मिनटों में घर पर ही तैयार करें चना दाल हलवा, नोट कर लें रेसिपी पाकिस्तान में अस्पताल की लापरवाही से 331 बच्चे HIV पॉजिटिव:8 साल के बच्चे की मौत के बाद खुलासा, सिरिंज के दोबारा इस्तेमाल से फैला संक्रमण जनवरी-मार्च में गोल्ड ETF में 31,561 करोड़ का निवेश:इसमें बीते 1 साल में 64% तक का रिटर्न मिला, जानें इससे जुड़ी खास बातें
EXCLUSIVE

सिवनी में फ्लाई ऐश से भरा डंपर पलटा:नेशनल हाईवे पर हादसा; चालक-परिचालक सुरक्षित बचे

सिवनी में फ्लाई ऐश से भरा डंपर पलटा:नेशनल हाईवे पर हादसा; चालक-परिचालक सुरक्षित बचे

सिवनी जिले के लखनादौन थाना क्षेत्र में सोमवार दोपहर एक बड़ा सड़क हादसा टल गया। नेशनल हाईवे-34 पर बंजर गांव के पास फ्लाई ऐश (राख) से भरा एक डंपर अनियंत्रित होकर पलट गया। इस घटना में डंपर चालक और परिचालक सुरक्षित बच गए, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। यह घटना सोमवार दोपहर करीब 12 बजे हुई। फ्लाई ऐश से लदा डंपर हाईवे-34 से गुजर रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वाहन तेज गति में था। बंजर गांव के पास पहुंचते ही चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया, जिसके परिणामस्वरूप डंपर सड़क किनारे पलट गया। डंपर पलटने की तेज आवाज सुनकर ग्रामीण और राहगीर तुरंत मौके पर पहुंचे। ये थे ट्रक में सवार हादसे के बाद घटनास्थल पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी मच गई। शुरुआत में चालक और परिचालक के घायल होने की आशंका थी, लेकिन वे दोनों सुरक्षित बाहर निकल आए। चालक की पहचान सुखदेव मर्सकोले (38 वर्ष) और परिचालक की पहचान अमन यादव (29 वर्ष) के रूप में हुई है। स्थानीय लोगों ने राहत कार्यों में सहयोग किया। दुर्घटना की सूचना मिलने पर लखनादौन पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात व्यवस्था को नियंत्रित किया। डंपर के सड़क किनारे पलटने से हाईवे पर कुछ देर के लिए आवागमन बाधित हुआ। बाद में क्रेन की मदद से डंपर को हटाया गया और यातायात सामान्य कर दिया गया। दुर्घटना के कारणों का पता लगा रहे हैं लखनादौन थाना प्रभारी केपी धुर्वे ने बताया कि डंपर पलटने की सूचना मिली थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय डंपर के आसपास कोई अन्य वाहन या राहगीर मौजूद नहीं था। यदि ऐसा होता तो दुर्घटना अधिक गंभीर हो सकती थी।

सूजी पनीर रोल: शाम के बाजार में घर पर तैयार सूजी वाले पनीर रोल, बच्चों से लेकर तक बड़े भूल जाएंगे का स्वाद; नोट करें रेसिपी

सूजी पनीर रोल: शाम के बाजार में घर पर तैयार सूजी वाले पनीर रोल, बच्चों से लेकर तक बड़े भूल जाएंगे का स्वाद; नोट करें रेसिपी

30 मार्च 2026 को 15:07 IST पर अपडेट किया गया सूजी रोल रेसिपी: सूजी पनीर रोल एक अनोखा स्वाद है, जो घर पर आसानी से बन जाता है और स्वाद में बिल्कुल बाजार जैसा लगता है। आप इसे एक बार खुद ही बना लेंगे, तो अगली बार आप इसे आसानी से बना लेंगे। (टैग अनुवाद करने के लिए)सूजी पनीर रोल रेसिपी(टी)पनीर रोल(टी)सूजी पनीर रोल(टी)रोल रेसिपी(टी)सूजी पनीर(टी)सूजी रोल(टी)सूजी रोल

महंगाई, किल्लत पर कांग्रेस का प्रदर्शन:पन्ना के अजयगढ़ चौराहे पर धरना; केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी

महंगाई, किल्लत पर कांग्रेस का प्रदर्शन:पन्ना के अजयगढ़ चौराहे पर धरना; केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी

पन्ना में बढ़ती महंगाई, गैस सिलेंडर के दामों में वृद्धि और बिजली-ईंधन की किल्लत के विरोध में कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। सोमवार को जिला कांग्रेस कमेटी और ब्लॉक कांग्रेस पन्ना ने अजयगढ़ चौराहे पर यह प्रदर्शन आयोजित किया। इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की गई। कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनीस खान ने बताया कि प्रदर्शन के मुख्य मुद्दे रसोई गैस की बढ़ती कीमतें, बिजली के बिलों में वृद्धि और अघोषित कटौती थे। उन्होंने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और उनकी अपर्याप्त उपलब्धता पर भी चिंता व्यक्त की। कांग्रेस ने सरकार पर बुनियादी सुविधाओं की कमी और महंगाई को नियंत्रित करने में विफल रहने का आरोप लगाया। सरकार जनता की समस्याओं पर गंभीर नहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनीस खान ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार आम जनता की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने बताया कि यह विरोध प्रदर्शन केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के सभी 10 ब्लॉकों में भी व्यापक स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक शामिल हुए, जिन्होंने महंगाई कम करने और आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने खाली गैस सिलेंडरों को सामने रखकर उन्हें माला पहनाई। इस प्रतीकात्मक विरोध के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि रसोई गैस की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि आम आदमी के लिए गैस का उपयोग करना मुश्किल हो गया है। प्रदर्शन की अन्य तस्वीरें…

बाल विकास: तेजी से बढ़ते बाल और बन रहे पैच? गंजेपन दूर करने के लिए अपनाएं ये घरेलू रामबाण उपाय, वापस लाएंगी जुल्फें

बाल विकास: तेजी से बढ़ते बाल और बन रहे पैच? गंजेपन दूर करने के लिए अपनाएं ये घरेलू रामबाण उपाय, वापस लाएंगी जुल्फें

बाल विकास: आज के समय में लोगों की जीवनशैली इतनी खराब हो गई है कि इसका असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या तो बाल रूखेपन की है, लेकिन जब सिर पर अचानक गोल-गोल पैच नजर आने लगें, तो यह एलोपेसिया एरीटा के होने का संकेत हो सकता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें बॉडी का इम्यून सिस्टम खुद ही हेयर फॉलिकल्स पर हमला करने लगता है। हालाँकि इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही देखभाल और उपायों से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए कुछ घरेलू उपाय हैं, मददगार हैं रैना। एलोपेसिया एरीटा एक ऑटोइम्यून कंडीशन है, जिसमें बाल स्कैकर सिर पर छोटे-छोटे पैच बने होते हैं। यह समस्या अचानक भी हो सकती है और धीरे-धीरे बढ़ भी सकती है। विद्यार्थियों की रेटिंग तो समय पर सही देखभाल और बाले की क्वालिटी को फिर से स्केल किया जा सकता है। इसके लिए लाइफस्टाइल, टेक्नोलॉजी को सही करना जरूरी है। प्याज का रस एक पुराना और भरोसेमंद घरेलू उपाय माना जाता है। इसमें मौजूद रोलर स्कैल्प में ब्लड सर्कोस्टॉल को बेहतर बनाने का काम किया गया है, जिससे हेयर फॉलिकल्स को पोषण मिलता है। इसके लिए पेज को पीसकर उसके रस को 15 से 20 मिनट तक के हिस्सों पर डाला और प्रभावित किया जा रहा है। इसे रोजाना इस्तेमाल करने से धीरे-धीरे-धीरे-धीरे बाल उगने लग सकते हैं। लहसुन भी बालों के लिए काफी मनमोहक माना जाता है। इसमें मौजूद पोषक तत्त्व किसी भी प्रकार के प्रभाव को रोकने के साथ-साथ कोयला उत्पादन को बढ़ाने में मदद करते हैं। लहसुन की कलियों को पिसेकर में नारियल का तेल और फ़्लोरिडा गर्म करके स्कैल्प पर मसाज करें। इससे बालों की जड़ें मजबूत होती हैं। नारियल के तेल में जब नारियल का तेल मिलाया जाता है तो यह बालों के लिए एक असरदार टॉनिक बन जाता है। कैरी पत्ते में एंटीऑक्सीडेंट और अमीनो एसिड मौजूद होता है, जो बालों के झड़ने की मदद को कम करने में करते हैं। हफ्ते में दो बार इस तेल से मसाज करने से स्कैल्प पर रहते हैं और नए बाल उगने लगते हैं। एलोवेरा स्कैल्प के लिए बेहद जादुई माना जाता है। जो एंजाइम्स मौजूद होते हैं, वो स्कैल्प की डेड स्किन को ठीक करते हैं और इनमें लेवल को सैमुअल बनाए रखा जाता है। इसे सीधे स्कैल्प पर लगाने से बालों के छिद्र खुल जाते हैं और सूजन कम हो जाती है, जिससे बालों की रिकवरी में सुधार होता है। मेथी के बीज में प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं। उदाहरण के तौर पर रात भर के लिए सुबह पेस्ट बनाएं लें और बालों के पैच पर लगाएं। यह उपाय बालों को घना बनाने और गंजेपन की समस्या को कम करने में मदद करता है। (टैग्सटूट्रांसलेट)एलोपेसिया एरीटा उपचार(टी)बालों के झड़ने के घरेलू उपचार(टी)बालों के विकास के लिए प्याज का रस(टी)सिर की त्वचा के स्वास्थ्य के लिए लहसुन(टी)नारियल तेल करी पत्ते के फायदे(टी)बालों के विकास के लिए एलोवेरा(टी)मेथी के बीज का हेयर मास्क(टी)प्राकृतिक बाल पुनर्विकास युक्तियाँ(टी)गंजे पैच का उपचार(टी)आयुर्वेदिक बालों की देखभाल

जिम में जाकर आपको भी लगता है डर? आखिर इसकी क्या है वजह, जिम एंजायटी से कैसे पाएं छुटकारा

authorimg

Last Updated:March 30, 2026, 14:50 IST Gym Anxiety Causes: जिम जॉइन करने वाले अधिकतर लोग शुरुआत में एंजायटी महसूस करते हैं. ऐसा अक्सर नए माहौल, मशीनों की जानकारी न होने या दूसरों के सामने असहज महसूस करने के कारण होता है. इससे निपटने के लिए वर्कआउट की पहले से योजना बनाना, ट्रेनर की मदद लेना और छोटे लक्ष्यों से शुरुआत करना प्रभावी साबित होता है. अगर जिम जाना बहुत मुश्किल लगे, तो घर पर वर्कआउट या आउटडोर एक्टिविटी जैसे विकल्प भी अपनाए जा सकते हैं. जिम में एंजायटी से बचने के लिए वर्कआउट के दौरान ट्रेनर की मदद लेनी चाहिए. Tips To Get Rid of Gym Anxiety: फिटनेस को लेकर लोगों में गजब का क्रेज देखने को मिल रहा है. बड़ी संख्या में लोग सुबह-शाम जिम में जाकर वर्कआउट कर रहे हैं. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट रहना हर किसी की जरूरत बन गया है. कई लोग जिम जॉइन कर लेते हैं, लेकिन वहां वर्कआउट करने में अनकंफर्टेबल महसूस करते हैं. तमाम लोग जिम में एंजायटी से जूझते हैं और उन्हें अजीब सा डर लगने लगता है. क्या आपने कभी जिम के दरवाजे पर खड़े होकर घबराहट महसूस की है या भारी मशीनों और वहां मौजूद फिट लोगों को देखकर खुद को कमतर आंका है? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं. यह एक कॉमन समस्या है और कुछ आसान तरीकों से इससे छुटकारा भी पाया जा सकता है. सेहत से जुड़ी प्रमाणिक जानकारी देने वाली वेबसाइट हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक एक्सरसाइज न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, बल्कि मानसिक सुकून के लिए भी जरूरी है. इसलिए जिम से जुड़े डर को पहचानना और उससे निपटने के तरीके सीखना बेहद जरूरी है. जिम में घबराहट होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. अगर आप पहली बार जिम जा रहे हैं, तो अनजान मशीनों और माहौल को देखकर घबराहट होना स्वाभाविक है. इसे सिचुएशनल एंजायटी कहते हैं. पुराने जिम को छोड़कर नए स्थान पर जाने पर वहां के रास्तों, लॉकर रूम और मशीनों की जगह का पता न होना तनाव पैदा कर सकता है. कई बार हम जिम में कोई मशीन इस्तेमाल करना चाहते हैं, लेकिन उसकी सेटिंग समझ नहीं आती. दूसरों के सामने मजाक बनने के डर से हम अक्सर उस मशीन का उपयोग ही छोड़ देते हैं. पब्लिक लॉकर रूम में भी असहजता महसूस होती है. कपड़ों को दूसरों के सामने बदलना कई लोगों के लिए काफी असहज और शर्मिंदगी भरा अनुभव हो सकता है. इसके अलावा वजन उठाना या कोई नया वर्कआउट शुरू करते समय यह डर सताता है कि क्या मैं सही तरीके से वर्कआउट कर रहा हूं. ये सभी बातें एंजायटी पैदा कर देती हैं. कई लोग एंजायटी के कारण जिम जाना छोड़ देते हैं और फिटनेस रूटीन बिगाड़ लेते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. जिम में एंजायटी और डर को दूर किया जा सकता है. इसके लिए जिम में जाकर चीजों से बारे में पूरी जानकारी जुटाएं. पहले जिम की वेबसाइट देखें, वहां का दौरा करें और स्टाफ से बात करें. माहौल से परिचित होने पर डर कम हो जाता है. पहले ही दिन भारी वर्कआउट का लक्ष्य न रखें. केवल 15 मिनट कार्डियो या स्ट्रेचिंग करें और घर लौट आएं. धीरे-धीरे अपना समय बढ़ाएं. कम से कम एक सेशन के लिए पर्सनल ट्रेनर हायर करें. वे आपको मशीनों का सही इस्तेमाल और सही पोस्चर सिखाएंगे, जिससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा. एक अनुभवी दोस्त या परिवार के सदस्य के साथ जिम जाना आपको मानसिक सहारा देता है और आप अकेलेपन या डर को भूलकर वर्कआउट पर ध्यान दे पाते हैं. अगर आप सामाजिक रूप से घबराते हैं, तो ग्रुप क्लास आपके लिए अच्छी हो सकती है. वहां इंस्ट्रक्टर को फॉलो करना आसान होता है और आप कम्यूनिटी का हिस्सा महसूस करते हैं. इसके अलावा आप जिम जाने से पहले ही तय कर लें कि आपको कौन सी एक्सरसाइज किस क्रम में करनी है. इससे आप वहां पहुंचकर भ्रमित नहीं होंगे. घबराहट होने पर गहरी सांस लें. अपनी नकारात्मक सोच को बदलें. यह सोचने के बजाय कि लोग मुझे देख रहे हैं, यह सोचें कि हर कोई अपनी एक्सरसाइज में व्यस्त है और मैं यहां अपनी सेहत के लिए आया हूं. अगर आपकी एंजायटी बहुत ज्यादा है और जिम जाने से डर लगता है, तो आप कुछ अन्य विकल्पों को चुन सकते हैं. यूट्यूब या फिटनेस ऐप्स की मदद से बिना किसी उपकरण के भी घर पर एक्सरसाइज की जा सकती है. पार्क में टहलना, दौड़ना, साइकिल चलाना या तैराकी करना भी बेहतरीन विकल्प हैं. बड़े और भीड़भाड़ वाले जिम के बजाय किसी छोटे और शांत जिम को चुनें. याद रखें जिम में मौजूद हर व्यक्ति कभी न कभी बिगिनर था. आपकी सेहत सबसे ऊपर है और आपको वहां होने का पूरा हक है. अगर इन सब कोशिशों के बाद भी आपकी घबराहट कम नहीं हो रही है और यह आपके रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित कर रही है, तो किसी थेरेपिस्ट या विशेषज्ञ से सलाह लेना एक बेहतर है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 30, 2026, 14:50 IST

नीतीश कुमार के जाने के बाद बिहार में क्या बदलाव? 5 बड़े राजनीतिक बदलावों की व्याख्या | व्याख्याकार समाचार

RBSE 12th Result 2026 Date Live: Scorecards soon at rajeduboard.rajasthan.gov.in.

आखरी अपडेट:मार्च 30, 2026, 14:46 IST भाजपा के संभावित अधिग्रहण से लेकर जद (यू) के अनिश्चित भविष्य और जातिगत समीकरणों में मंथन तक, नीतीश कुमार के बाहर निकलने के बाद बिहार में बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार (फाइल तस्वीर/पीटीआई) बिहार एक निर्णायक राजनीतिक परिवर्तन में प्रवेश कर रहा है। दो दशकों से अधिक समय तक राज्य में एक प्रमुख शक्ति रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्य विधानमंडल से हटने और राज्यसभा में जाने के साथ, यह बदलाव सिर्फ एक नेता की भूमिका बदलने के बारे में नहीं है। यह उस युग के संभावित अंत का संकेत देता है जिसने बिहार की राजनीतिक संरचना, सामाजिक गठबंधन और शासन मॉडल को परिभाषित किया। कुमार का यह कदम, लंबे समय से चली आ रही संसदीय आकांक्षा की पूर्ति के रूप में माना जाता है, मुख्यमंत्री के रूप में रिकॉर्ड दसवीं बार शपथ लेने के चार महीने बाद आया है। एनडीए द्वारा समर्थित और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा समर्थित, राष्ट्रीय राजनीति में उनका परिवर्तन अपने पीछे एक शून्य छोड़ गया है जिससे बिहार के राजनीतिक और प्रशासनिक परिदृश्य में दूरगामी बदलाव आने की संभावना है। इसके बाद बिहार में पांच बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 1. बिहार नीतीश-केंद्रित गठबंधन की राजनीति से आगे बढ़कर सीधे भाजपा के प्रभुत्व की ओर बढ़ सकता है वर्षों से, बिहार की राजनीति एक अनोखी व्यवस्था के तहत काम करती रही है, जहां नीतीश कुमार केंद्रीय व्यक्ति बने रहे, तब भी जब उनकी पार्टी, जेडी (यू) अकेली सबसे बड़ी ताकत नहीं थी। वह संतुलन अब बदलने वाला प्रतीत होता है। कुमार के हटने से, भाजपा – जो मजबूत चुनावी प्रदर्शन के बावजूद बिहार में स्वतंत्र रूप से हावी होने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही है – अब बढ़त लेने की स्थिति में है। पार्टी, जिसके पास विधानसभा में 89 सीटें हैं, से उम्मीद की जाती है कि वह धीरे-धीरे सरकार पर अधिक नियंत्रण हासिल कर लेगी, संभावित रूप से अपने ही खेमे से एक मुख्यमंत्री भी स्थापित कर सकती है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में भी, भाजपा सीटों के मामले में मजबूत होकर उभरी थी, लेकिन शासन की धुरी के रूप में कुमार को विस्थापित नहीं कर सकी। उनके बाहर निकलने से अंततः हिंदी पट्टी में भाजपा के लिए “सीमांत” राज्य के रूप में बिहार की स्थिति समाप्त हो सकती है, जिससे उसे राजनीति और शासन दोनों को पहले की तुलना में अधिक सीधे आकार देने की अनुमति मिल जाएगी। 2. बिहार की त्रिकोणीय राजनीति और अधिक द्विध्रुवीय दिखने लग सकती है एक और तात्कालिक बदलाव यह हो सकता है कि बिहार की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को कैसे संरचित और समझा जाता है। वर्षों तक, राज्य की राजनीति तीन प्रमुख ध्रुवों – भाजपा, जद (यू) और राष्ट्रीय जनता दल – के इर्द-गिर्द घूमती रही, जहां किन्हीं दो के बीच गठबंधन प्रभावी रूप से तीसरे को घेर सकता था। नीतीश कुमार की उपस्थिति ने सुनिश्चित किया कि यह त्रिकोणीय संतुलन बरकरार रहे. उनके राज्य की सक्रिय राजनीति से बाहर जाने से वह ढांचा कमजोर होना शुरू हो सकता है। यह मुकाबला अब सीधे भाजपा बनाम राजद की लड़ाई के रूप में सामने आ सकता है। प्रकाशिकी में यह बदलाव बिहार में चुनावी प्रतियोगिताओं को फिर से परिभाषित कर सकता है। हालांकि राजद को अपने पारंपरिक मुस्लिम-यादव आधार से आगे विस्तार करने का अवसर मिल सकता है, लेकिन ऐसा करने की उसकी क्षमता अनिश्चित बनी हुई है। साथ ही, बीजेपी को शुरुआती बढ़त मिल सकती है, खासकर विपक्ष के हालिया चुनावी प्रदर्शन को देखते हुए। 3. जद(यू) अपने सबसे नाजुक दौर में प्रवेश कर सकती है शायद नीतीश कुमार के बाहर जाने का सबसे तात्कालिक प्रभाव उनकी अपनी पार्टी के भीतर महसूस किया जाएगा। 2003 में अपने गठन के बाद से कुमार के नेतृत्व में बनी और टिकी जद (यू) को अब एक संरचनात्मक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि विधानसभा में इसके 85 विधायक और लोकसभा में 12 सांसद हैं, लेकिन इसके पास संगठन को एकजुट रखने के लिए तुलनीय राज्यव्यापी अपील वाले नेता का अभाव है। इससे पार्टी के भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. एक केंद्रीय व्यक्ति के बिना, जो जाति समूहों और क्षेत्रों में वोट-प्राप्तकर्ता के रूप में कार्य कर सकता है, जद (यू) दल-बदल और विभाजन सहित आंतरिक अस्थिरता के प्रति संवेदनशील हो सकता है। भाजपा को अपने पदचिह्न का विस्तार करने की उम्मीद के साथ, कुमार के बाहर निकलने से पार्टी के भीतर राजनीतिक क्षरण की प्रक्रिया तेज हो सकती है। उस अर्थ में, यह परिवर्तन न केवल नेतृत्व परिवर्तन का प्रतीक हो सकता है, बल्कि उस पार्टी के लिए और अधिक नाजुक चरण की शुरुआत हो सकती है जो दो दशकों से अधिक समय से बिहार की राजनीति के केंद्र में रही है। 4. जातीय समीकरण और नीतीश का सामाजिक गठबंधन फिर से बन सकता है पार्टी संरचनाओं से परे, सबसे परिणामी परिवर्तनों में से एक बिहार के सामाजिक और चुनावी अंकगणित में सामने आ सकता है। नीतीश कुमार की राजनीतिक ताकत सावधानी से बनाए गए गठबंधन पर टिकी थी जिसमें अत्यंत पिछड़ा वर्ग (जनसंख्या का लगभग एक चौथाई), कुर्मी-कोइरी या लव-कुश मतदाता, अन्य पिछड़ा वर्ग के वर्ग और महिला मतदाताओं का एक बड़ा आधार शामिल था। इस संयोजन ने जद (यू) को राजनीतिक रूप से निर्णायक बने रहने की अनुमति दी, तब भी जब वह सबसे बड़ी पार्टी नहीं थी। महत्वपूर्ण रूप से, जबकि उत्तर और मध्य भारत के अधिकांश ईबीसी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के तहत भाजपा की ओर स्थानांतरित हो गए, बिहार एक अपवाद रहा जहां कुमार ने इन समूहों पर प्रभाव बनाए रखा। कुमार के पीछे हटने के साथ, यह सामाजिक गठबंधन अब मुकाबले के लिए तैयार है। भाजपा द्वारा इन क्षेत्रों में अपनी पहुंच बढ़ाने की संभावना है, जबकि राजद महिलाओं, महादलितों और ईबीसी सहित कुमार के मतदाता आधार के वर्गों को लक्षित करके मुसलमानों और यादवों के बीच अपने पारंपरिक समर्थन से परे अपना आधार बढ़ाने का प्रयास कर सकता है। इन समूहों का पुनर्गठन आने वाले वर्षों में बिहार के चुनावी गणित को महत्वपूर्ण रूप से बदल सकता है। 5. एक नई नेतृत्व प्रतियोगिता बिहार की राजनीति को नया

‘उनकी प्राथमिकता लोगों को लूटना है’: विजय ने तमिलनाडु चुनाव से पहले सुरक्षा, नशीली दवाओं के खतरे को लेकर द्रमुक की आलोचना की | चुनाव समाचार

Follow RR vs CSK Live.(Sportzpics Photo)

आखरी अपडेट:30 मार्च, 2026, 14:40 IST पेरम्बूर में विजय का मुकाबला डीएमके के मौजूदा विधायक आरडी शेखर से होगा और त्रिची पूर्व में उनका मुकाबला मौजूदा डीएमके विधायक इनिगो इरुदयाराज से भी होगा। तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) नेता और अभिनेता विजय ने पेरंबूर निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। (पीटीआई) तमिलनाडु विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही अभिनेता से नेता बने और तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) प्रमुख विजय ने सोमवार को सत्तारूढ़ द्रमुक पर तीखा हमला किया और उस पर सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और नशीली दवाओं के खतरे से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “तमिलनाडु में महिलाओं के लिए कोई सुरक्षा नहीं है, अराजकता है, नशीली दवाओं का खतरा है। आप सभी जानते हैं कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है। यह द्रमुक है।” उन्होंने कहा, “पिछले पांच सालों में उन्होंने क्या किया? महिलाएं रात में अपने घरों से बाहर नहीं निकल सकतीं। अगर आप महिलाओं को सुरक्षा नहीं दे सकते, तो आप सत्ता में क्यों हैं? स्टालिन सर को लोगों या उनकी सुरक्षा की कोई चिंता नहीं है। उनकी प्राथमिकता लोगों को लूटना है।” विजय, जिनकी टीवीके चुनावी शुरुआत कर रही है, अपना पहला विधानसभा चुनाव दो शहरी निर्वाचन क्षेत्रों – चेन्नई के पेरंबूर और तिरुचि पूर्व से लड़ रहे हैं। उन्होंने सोमवार को अपनी मां की जन्मस्थली पेरम्बूर और त्रिची ईस्ट से अपना नामांकन दाखिल किया। उन्होंने विशेष रूप से जनरल जेड मतदाताओं से पार्टी के ‘सीटी’ प्रतीक के लिए बड़ी संख्या में मतदान करने और अपने परिवारों को टीवीके उम्मीदवारों का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। “23 अप्रैल को तैयार हो जाओ, बूथ पर जाओ और सीटी चिन्ह के लिए अपना वोट डालो। क्या हम इस सरकार को बाहर फेंक देंगे?” उन्होंने आग्रह किया. मतदाताओं के विश्वास की अपील करते हुए, विजय ने कहा, “मैंने अपना करियर छोड़ दिया है और यहां केवल आपकी सेवा करने के लिए आया हूं। मैं आपको धोखा नहीं दूंगा। इस बार लड़ाई डीएमके और टीवीके के बीच है। कृपया अपने भाई/बेटे को एक मौका दें।” तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक ही चरण में राज्य के कुल 234 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान होगा। मतगणना 4 मई को होनी है. पेरम्बूर में विजय का मुकाबला डीएमके के मौजूदा विधायक आरडी शेखर से होगा और त्रिची पूर्व में उनका मुकाबला मौजूदा डीएमके विधायक इनिगो इरुदयाराज से भी होगा। जगह : तमिलनाडु, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 30 मार्च, 2026, 14:40 IST समाचार चुनाव ‘उनकी प्राथमिकता लोगों को लूटना है’: विजय ने तमिलनाडु चुनाव से पहले सुरक्षा, नशीली दवाओं के खतरे को लेकर द्रमुक की आलोचना की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)विजय टीवीके प्रमुख(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)डीएमके बनाम टीवीके(टी)तमिलनाडु नशीली दवाओं का खतरा(टी)तमिलनाडु में महिला सुरक्षा(टी)पेरंबूर निर्वाचन क्षेत्र चुनाव(टी)त्रिची पूर्व निर्वाचन क्षेत्र चुनाव

समझाया: बिहार आसान नहीं बंगाल जीतना, 5% वोट रिवर्स से पासा! बीजेपी ने 6 सांसदों-विधायकों को हराया पटखनी

समझाया: बिहार आसान नहीं बंगाल जीतना, 5% वोट रिवर्स से पासा! बीजेपी ने 6 सांसदों-विधायकों को हराया पटखनी

बिहार में किशोर जीत के बाद बीजेपी का जोश हाई है. बिहार की जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीधे तौर पर कहा कि अब बंगाल में ‘जंगल राज’ खत्म हो गया है। बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली की लगातार जीतों ने पार्टी को नया जोर दिया है। अब असमिया नजर 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पर है। बंगाल बीजेपी के लिए सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा और विस्तार का सबसे बड़ा टेस्ट बन गया है- ठीक वैसे ही जैसे बिहार था. अब तक बीजेपी का बंगाल में कैसा वोट पड़ रहा है? बंगाल के लिए बीजेपी जरूरी क्यों? बंगाल जीतना बिहार आसान क्यों नहीं? आइये एक्सप्लेनर में जानते हैं… सवाल 1: बीजेपी का बंगाल में सफर अब तक कैसा रहा? उत्तर उत्तर: आज़ादी के बाद 1952 में पश्चिम बंगाल में पहली बार विधानसभा का चुनाव हुआ। बीजेपी का गठन 1980 में हुआ, लेकिन 46 साल में एक बार भी बीजेपी सरकार नहीं बनी. हालाँकि, 2014 में मोदी लहर के बाद पार्टी के नतीजे में कुछ बदलाव ज़रूर हुए: 2015 में पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सिर्फ 2 सांसद थे और विधायक एक भी नहीं. 2019 के आम चुनाव में पार्टी ने 42 में से 18 सीटें जीत लीं। 2021 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 38% वोट शेयर के साथ रिकॉर्ड 77 इंच की बढ़त हासिल की। पार्टी कांग्रेस (TMC) को 48% वोट मिले और 215 वोट मिले। व्यवसाय में व्यवसाय. उनके बाद कुछ नाम के दलबदल से बीजेपी की ताकत थोड़ी कम हो गई, लेकिन पार्टी मन से हार नहीं पाई। आज बंगाल में साफा का मुकाबला दो मुख्य पार्टियों-बीजेपी और टीएमसी के बीच है. ममता बनर्जी 2011 में बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं थीं। तब से वह 2011, 2014, 2016, 2019, 2021 और 2024 यानि 6 विधानसभा और सीटों में बीजेपी को पटखनी दे चुके हैं। 2021 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 38% वोट शेयर के साथ रिकॉर्ड 77% बढ़त हासिल की। प्रश्न 2: 2026 में बीजेपी सरकार कितनी करीब है? उत्तर उत्तर: 2021 के चुनाव में बीजेपी ने 38 सीटें सिर्फ 5% के लिए जरूरी हैं और 75 सीटें 10% के लिए जरूरी हैं। मतलब, छोटा-सा वोट बैंक भी बड़ी हिस्सेदारी में शामिल हो सकता है। इलेक्शन सलाह में कहा गया है कि अगर बीजेपी टीएमसी को सिर्फ 5% वोट भी अपने पाले में कर ले, तो उसका कुल स्कोर 75+77 यानि करीब 152 हो का इरादा है। पश्चिम बंगाल में बहुमत के लिए 148 शामिल हैं, यानी बीजेपी की सबसे बड़ी पार्टी की सरकार बन सकती है। दूसरी ओर सत्ता विरोधी, बेरोजगारी, स्थानीय असन्तुलन और टीएमसी नेताओं में गुलामी के बंधन ने ममता बनर्जी की पार्टी को बाहर निकालना और मुश्किल कर दिया है। पश्चिम बंगाल के लोकल मुद्दे टीएमसी के लिए बने राह का रोडा प्रश्न 3: बीजेपी के लिए बंगाल जीतना बेहद ज़रूरी है क्यों? उत्तर उत्तर: पॉलीटिकल विशेषज्ञ रशीद किदवई का कहना है कि बीजेपी के लिए बंगाल जीतना करो या मरो वाली स्थिति बन गई है, इसके 5 बड़े कारण हैं… 1. ब्रांड मोदी अब और मजबूत: बिहार की जीत के बाद मोदी का कद और बढ़ा। पार्टी के अंदर और आरएसएस के साथ तालमेल भी बेहतर हुआ है. बंगाल में ‘जंगल राज’ खत्म करने का वादा अब सिर्फ नारे का नहीं, बल्कि ब्रांड मोदी के मूल का सवाल है। 2. पूर्वी भारत में बीजेपी का विस्तार: बंगाल की जीत से भाजपा पूर्व में अपनी पकड़ मजबूत कर एकजुटता। अभी तक उत्तर और पश्चिम में मजबूत बीजेपी पूर्व में टीएमसी जैसी मजबूत क्षेत्रीय पार्टी से वापसी कर रही है। बंगाल पर कब्ज़ा पूरे देश में बीजेपी की को छवि आयाम नया दायरा। 3. 2026 में सत्ता का सीधा मौका: 294 घरों वाली विधानसभाओं में 152 बहुमत से अधिक हैं। 5% वोट वोट से ही सरकार बन सकती है। इतना करीब निवेश हारना बीजेपी के लिए बड़ा झटका होगा, जबकि जीत ऐतिहासिक होगी। 4. टीएमसी का सीधा मुकाबला: बंगाल में कोई गठबंधन नहीं. बीजेपी अकेले टीएमसी से लड़ रही है. यहां जीत का मतलब सिर्फ श्रोता नहीं, बल्कि ममता बनर्जी की 14 साल पुरानी सत्ता का अंत है। ये बीजेपी के लिए ‘अकेले ही असली’ की ताकत साबित करना चाहती है. 5. कैडर का नैतिक और स्थापत्य स्थान: बिहार जीत ने जोश स्केल किया है। बंगाल में समीक भट्टाचार्य की तरह नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा भी इसी दिशा में कदम है. 2026 की ऑल ऑर्गनाइजेशन को नई एनर्जी देवी और 2024 की पूरी जीत को पूरी तरह से डॉज देवियां कहा जाएगा। सवाल 4: लेकिन बंगाल जीतना बिहार कितना आसान होगा? उत्तर उत्तर: नहीं. सीएसडीएस के प्रोफेसर और इलेक्शन एनालिस्ट हिलेल अहमद कहते हैं कि बंगाल बिहार आसान नहीं है। बैल की पहचान, संस्कृति, इतिहास और राजनीति की वजह से यहां ‘घुसपैठिए’ मुद्दे पर सावचेती दर्जी होगी क्योंकि ये मित्र हिंदू वोट बैंक दोनों प्रभावित हो रहे हैं। टीएमसी सांस्कृतिक भावनाओं को सबसे अच्छा से भिन्न है। फिर भी, एंटी-इंकंबेंसी और मोदी ब्रांड की ताकत की नजर बीजेपी आज बंगाल में सबसे मजबूत चुनौती की स्थिति में है। शेखलाल अहमद कहते हैं, ‘बिहार में बीजेपी के लिए जीतना आसान है क्योंकि वहां जेडीयू का गठबंधन था और नीतीश कुमार की पावरफुल इमेज बीजेपी के साथ थी।’ बंगाल में स्थिति अलग है. यहां ‘पॉलिटि पार्टी बीजेपी से हरस्टेप आयरन प्लॉट रही है।’ वहीं, पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई का कहना है, ‘बीजेपी ने 2021 के चुनाव में 77वें पायदान पर थीं। 10 मूल में बीजेपी 0 से 77 पर आधारित है। अगर बीजेपी ने टीएमसी के कुछ ही वोट प्रतिशत में कटौती की, तो सरकार बनाना आसान होगा। ‘सोसाइटी, पॉलिटिक्स ये है, घुँघरू किस करवट बैठागा, विश्वास के साथ नहीं कहा जा सकता।’ बंगाल में अब बीजेपी के लिए सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि एक बड़ा एग्जाम है। 2015 से शुरू हुआ सफर 2019-2021 में मजबूत हुआ। 2026 में 5% वोट से सरकार बनाने का मौका है। बिहार की जीत ने दिखाया रास्ता. अगर बीजेपी सांस्कृतिक सांस्कृतिक के साथ एंटी-इंकंबेंसी है, तो 2026 बंगाल उनकी सबसे बड़ी जीत हो सकती है। ये कहानी सिर्फ रीमेक की नहीं, बल्कि बीजेपी की पूर्वी भारत में खास जगह बनाने की है.

इम्यूनिटी बढ़ानी है? खीरे के पत्तों का ये आसान तरीका कर सकता है कमाल, ऐसे करें इस्तेमाल

ask search icon

Last Updated:March 30, 2026, 14:37 IST अक्सर लोग खीरे के पत्तों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ये पत्ते भी किसी औषधि से कम नहीं हैं. पोषक तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर खीरे के पत्ते शरीर को डिटॉक्स करने से लेकर पाचन सुधारने, इम्यूनिटी बढ़ाने और त्वचा को स्वस्थ रखने तक कई तरह से फायदेमंद साबित हो सकते हैं. खीरे के पत्ते पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं. ये शरीर को डिटॉक्स करने के साथ मूत्रवर्धक के रूप में काम करते हैं और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं. गले की खराश और पित्त को शांत करने के लिए इनका उपयोग काढ़े या रस के रूप में किया जा सकता है. एक्सपर्ट डॉ विनीता शर्मा ने बताया कि खीरे के पत्ते और फल पाचन और कब्ज में राहत देते हैं क्योंकि इनमें 95-96% पानी और प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है. ये पेट की गर्मी को कम करते हैं, मल को नरम बनाते हैं और पेट फूलना, एसिडिटी व कब्ज से राहत दिलाते हैं. इसे सलाद या जूस के रूप में सेवन किया जा सकता है. खीरे के पत्ते गले के रोगों के लिए उपयोगी होते हैं. इसके लिए पत्तों का काढ़ा (10-20 मिली) बनाकर उसमें आधा ग्राम जीरा चूर्ण मिलाकर सेवन करने से गले के संक्रमण, सूजन और खराश में लाभ मिलता है. ये शरीर को हाइड्रेट रखते हैं, सूजन कम करते हैं और एंटीऑक्सीडेंट का काम करते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google खीरे के पत्ते में ट्राइटरपेनोइड्स और कुकुरबिटासिन जैसे महत्वपूर्ण यौगिक होते हैं, जो इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में काम कर सकते हैं. ये यौगिक सूजन को कम करने और शरीर की रक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं, जिससे पुरानी बीमारियों से बचाव में मदद मिलती है. खीरे के पत्ते और फल दोनों ही प्राकृतिक मूत्रवर्धक होते हैं, जो शरीर से अतिरिक्त पानी और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं. ये किडनी को यूरिक एसिड निकालने के लिए उत्तेजित करते हैं, मूत्र में जलन या रुकावट को कम करते हैं और किडनी के स्वास्थ्य में सुधार करते हैं. खीरे के पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजनरोधी) गुण होते हैं, जो त्वचा की सूजन, लालिमा और जलन को कम करने में मदद करते हैं. ये पत्ते कुकुरबिटासिन और फेनोलिक्स से भरपूर होते हैं, जो सूजन पैदा करने वाली कोशिकाओं को रोकते हैं. इन्हें पीसकर पेस्ट बनाकर या अर्क के रूप में त्वचा पर लगाने से शीतलता मिलती है. खीरे के पत्ते और फल पेट की सूजन, एसिडिटी और गैस में राहत के लिए फायदेमंद होते हैं, क्योंकि इनमें सूजन-रोधी गुण और उच्च पानी की मात्रा होती है. ये शरीर को हाइड्रेट कर पेट की जलन कम करते हैं और पाचन में सुधार करते हैं. इन्हें जूस, सलाद या पानी के साथ सेवन किया जा सकता है. First Published : March 30, 2026, 14:37 IST

39 डिग्री में तपा रायसेन, सांची स्तूप पर सन्नाटा:तेज गर्मी से पर्यटकों की संख्या घटी; दोपहर में परिसर लगभग खाली, कारोबार पर असर

39 डिग्री में तपा रायसेन, सांची स्तूप पर सन्नाटा:तेज गर्मी से पर्यटकों की संख्या घटी; दोपहर में परिसर लगभग खाली, कारोबार पर असर

रायसेन जिले में इस सीजन में पहली बार दिन का अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। भीषण गर्मी के कारण लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई है। दोपहर के समय शहर की सड़कें सूनी नजर आईं, वहीं विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सांची स्तूप पर भी सन्नाटा पसरा रहा। तापमान 39 डिग्री के पार पहुंचते ही सांची स्तूप पर पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कुछ दिन पहले तक जहां हजारों की संख्या में सैलानी पहुंच रहे थे, वहीं अब यह संख्या बेहद कम रह गई है। खासतौर पर दोपहर के समय स्तूप परिसर लगभग खाली नजर आता है। छाते और छांव का सहारा ले रहे पर्यटक जो इक्का-दुक्का पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं, वे तेज धूप और गर्म हवाओं से बचने के लिए छाते का उपयोग कर रहे हैं। पर्यटक छांव तलाशते हुए और खुद को पूरी तरह ढंककर गर्मी से बचाव करते दिखाई दे रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, सर्दियों में सांची में रोजाना 3 से 4 हजार पर्यटक पहुंचते थे, जबकि सामान्य दिनों में यह संख्या करीब 2 हजार रहती है। जनवरी में 30,162 भारतीय और 415 विदेशी पर्यटक आए थे। फरवरी में यह संख्या घटकर 24,436 भारतीय और 541 विदेशी पर्यटक रह गई। पर्यटन कारोबार पर भी असर तेज गर्मी और चिलचिलाती धूप ने सांची घूमने के उत्साह को कम कर दिया है। इसका सीधा असर स्थानीय पर्यटन उद्योग और छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है। होटल, गाइड और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों की आमदनी प्रभावित हो रही है।