सिद्दू: टूर की याद ताजा कर पिज्जा में देसी घी का सिद्दू, घर पर ऐसे जानें; दिल छूना स्वाद

सिड्डू रेसिपी: हिमाचल के वैज्ञानिक वैज्ञानिकों ने कहा कि आपने भी गर्म मसाले से निकला सिद्दू का स्वाद चखा ही होगा, जिसे एक बार खाने के बाद उसका स्वाद दिल में बस जाता है। वहीं, अगर आपने सिद्दू नहीं खाया है तो भी कोई बात नहीं हम आज ऐसी ही हिमाचली डिश की रेसिपी लेकर आए हैं, जिसे आप घर पर भी बना सकते हैं। वहीं अगर आपने सिद्दू खाया है तो आप अपने हिस्से वाली यादों को घर की रसोई तक ला सकते हैं। इस रेसिपी से आप बिना रुके मनाली गए, घर पर ही बना सकते हैं हिमाचल का फेमस सिद्दू। सिद्दू दिखने में गुजिया जैसा लगता है, लेकिन स्वाद बिल्कुल अलग होता है। ये पूरी तरह से स्टीम में पकता है, इसलिए तेल कम लगता है और स्वास्थ्य के लिए भी ये काफी अच्छा रहता है। मीट के अवशेषों का प्राकृतिक आवरण और अंदर मेवों-मसालों की भरपूर स्टफिंग। यह व्युत्पत्ति ही मुख में हिमाचल की सुगंध भर जाती है। सिद्दू बनाना क्या है? डीजल के आटे का आटा 1 छोटा नमक, चीनी और इंस्टेंट यीस्ट 1 छोटा मसाला तेल गुनगुना पानी तरबूज/खरबूज के बीज, 10-15 बादाम, आधा कप मूंगफली, 2 बड़े पोस्ता दाना (6 घंटे) 1 छोटी पिसी काली मिर्च, 2 छोटी पिसी साबुत धनिया, 1 छोटी पिसी जीरा 2 इंच अदरक, 2-3 हरी मिर्च, आधा प्याज, 10-12 लहसुन की काली, 2 पिसी हुई लाल मिर्च पुदीना पत्ता, धनिया धनिया, सफेद-काला नमक, हल्दी, अनारदाना या आमचूर सबसे पहले आटा गूंथ लें। नमक, चीनी, यिस्ट और तेल नमक नरम आटा तैयार करें। 2 घंटे गर्म जगह पर फर्मेंटिंग हो रही है। स्टफिंग के लिए सारे अकेले मेवे और मिक्सी में बिना पानी डाले पीस लें। फर्मेंट एसोसिएट्स से मोटिवेशनल सामान बेलें, स्टफिंग फिल और गुजिया जैसा बंद कर दिया गया। 5-10 मिनट ढपकर मिनट। स्टीमर की प्लेट ग्रीस द्वारा सिद्दू स्थान, ऊपर छोटा घी फर्नीचर। 15 मिनट पर स्टाप में प्रवेश शुरू। बचे हुए अखरोट, खसखस, लहसुन, अदरक, हरी मिर्च, जीरा, नमक, प्याज, पुदीना, काला नमक, 3 बड़े टुकड़े दही और लेमिनेटेड चिप्स लें। सिद्दू तैयार होते ही गर्म-गर्मी में घी बनाने वाले कारीगरों के साथ सर्व करें। सुबह का नाश्ता या चाय के साथ भी सिद्धू पूरे परिवार को खुश कर देंगे। एक बार टिकट खरीद लिया तो फिर बार-बार बनाने का मन हो गया। (टैग्सटूट्रांसलेट)सिद्दू रेसिपी(टी)हिमाचल स्पेशल डिश(टी)स्टीम्ड सिद्दू(टी)पारंपरिक हिमाचल नाश्ता(टी)घर पर आसान सिद्दू रेसिपी(टी)सिद्दू
गर्मियों में त्वचा के लिए मुलेठी ज्यादा अच्छी या एलोवेरा जेल? आप भी नहीं जानते होंगे ये वाली ट्रिक

Last Updated:March 31, 2026, 23:37 IST Skin Care in Summer : गर्मियों का मौसम शुरू हो चुका है. धूप तीखी होती जा रही है. तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी के कारण इन दिनों टैनिंग, पिंपल्स और रूखापन होना आम है. इनसे निजात पाने के लिए आयुष चिकित्सक प्राकृतिक और ठंडक देने वाले उपाय बताते हैं, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के त्वचा को स्वस्थ बनाए रखते हैं. लोकल 18 से अंबाला की आयुष चिकित्सक डॉ. शेफाली गोयल बताती हैं कि गर्मी के मौसम में स्किन से जुड़ी हुई समस्या से बचने के लिए चंदन, मुलेठी और एलोवेरा जेल काफी फायदेमंद हैं. अंबाला. गर्मियों का मौसम आते ही त्वचा से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती हैं. तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी के कारण टैनिंग, पिंपल्स और रूखापन आम हो जाता है. अक्सर लोग महंगे फेस पैक का इस्तेमाल करते हैं, फिर भी कई बार राहत नहीं मिलती. इन समस्याओं से निजात दिलवाने के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक प्राकृतिक और ठंडक देने वाले उपाय अपनाने की सलाह देते हैं, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के त्वचा को स्वस्थ बनाए रखते हैं. लोकल 18 से अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल की आयुष चिकित्सक डॉ. शेफाली गोयल बताती हैं कि गर्मी के मौसम में स्किन से जुड़ी हुई समस्या से बचने के लिए आयुर्वेद में कुछ औषधियां बताई गई हैं जिसका लेप लगाने से समस्या ठीक हो जाती. चंदन, मुलेठी और एलोवेरा जेल काफी फायदेमंद हैं, लेकिन व्यक्ति के स्किन की प्रकृति पर निर्भर करता है कि किसे पॉलीहर्बल तकनीक से फायदा होगा या मोनो-हर्बल से. डॉ. शेफाली कहती हैं कि गर्मी में सबसे पहले अपने शरीर के हाइड्रेशन को स्थिर रखें, जिसके लिए 7 से 8 गिलास पानी रोज पीना चाहिए. पसीना निकलने के साथ नमक की मात्रा भी शरीर में कम होने लगती है. इसे पर्याप्त मात्रा में बनाए रखने के लिए साल्टेड लस्सी और आम पन्ना ड्रिंक का सेवन करें. आयुर्वेद में जितना प्रभावशाली ऋतुचर्या को माना गया है उतना ही दिनचर्या को भी माना गया है. इसलिए सुबह समय ब्रह्म मुहूर्त में उठें. जितनी जल्दी सुबह उठाएंगे उतना ही फायदा शरीर को होगा. आयुर्वेद में ब्रह्म मुहूर्त का समापन सूर्य उदय से 48 मिनट पहले माना गया है. इसकी शुरुआत रात्रि के अंतिम दो चरण में होती है. तीनों के फायदे अलग डॉ. शेफाली के मुताबिक, चंदन (Sandalwood) त्वचा को ठंडक प्रदान करता है. इसके एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण दाग-धब्बे को दूर करने में मदद करते हैं. चंदन का पेस्ट लगाने से त्वचा की रंगत में सुधार आता है और मुंहासे कम होते हैं. मुलेठी (Liquorice) त्वचा को प्राकृतिक रूप से हल्का और चमकदार बनाती है. मुलेठी के पेस्ट में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाते हैं. यह त्वचा को ठंडक प्रदान करता है और काले धब्बों को भी हल्का करता है. एलोवेरा (Aloe Vera) के हाइड्रेटिंग गुण त्वचा को न केवल मॉइस्चराइज करते हैं, बल्कि यह सनबर्न और मुंहासों से राहत दिलाते हैं. एलोवेरा का जूस या पेस्ट त्वचा पर लगाने से गहरी नमी मिलती है और यह जलन को भी शांत करता है. डॉ. शेफाली कहती हैं कि इन तीनों औषधियों को मिलाकर पेस्ट तैयार करें. चंदन, मुलेठी और एलोवेरा को समान मात्रा में मिलाएं. इस पेस्ट को चेहरे पर 15-20 मिनट तक लगाकर छोड़ दें और फिर ठंडे पानी से धो लें. इस पेस्ट के नियमित उपयोग से त्वचा में निखार आएगा. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें First Published : March 31, 2026, 23:37 IST
DIY रोज़ लिप बाम: मुलायम और गुलाबी होठों को निखारने के लिए यह होममेड रोज़ लिप बाम, बनाने का तरीका है बेहद आसान

31 मार्च 2026 को 23:29 IST पर अपडेट किया गया DIY रोज़ लिप बाम: मुलायम और गुलाबी रंग के लिए घर पर तैयार किया गया DIY रोज़ लिप बाम न केवल खोजा जाता है, बल्कि यह गहराई से भी गहरा होता है। आइये आपको इस लेख में होममेड रोज़ बाम बनाने के बारे में विस्तार से बताते हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)घर का बना लिप बाम(टी)गुलाब लिप बाम(टी)प्राकृतिक होंठ देखभाल(टी)मुलायम होंठ(टी)नमीयुक्त होंठ(टी)DIY लिप बाम(टी)प्राकृतिक सौंदर्य उत्पाद(टी)रसायन मुक्त लिप बाम(टी)गुलाब की पंखुड़ियों वाला लिप बाम(टी)विटामिन ई लिप बाम
Sattu ke fayde: भीषण गर्मी में लू, हीट स्ट्रोक से बचाए सत्तू, शरीर के लिए अमृत से कम नहीं, जानें अद्भुत फायदे

Garmi me Sattu ke fayde: भीषण गर्मी में शरीर को ठंडक और ऊर्जा देने वाली कई देशी ड्रिंक्स लोकप्रिय हैं, लेकिन इनमें से एक सबसे फायदेमंद और पौष्टिक पेय है सत्तू का शरबत. गर्मियों में सत्तू को वरदान माना जाता है, क्योंकि यह न सिर्फ शरीर को हाइड्रेट रखता है, बल्कि पोषण से भी भरपूर होता है. सत्तू एक पारंपरिक भारतीय आहार है जो गर्मी के मौसम में ताजगी और स्वास्थ्य का खजाना साबित होता है. यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए बेहद लाभकारी है. सत्तू शरीर को ठंडक, ऊर्जा और जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है, जो हर उम्र और वर्ग के लोगों के लिए उपयुक्त है. आयुर्वेद के अनुसार, रोजाना सत्तू का सेवन शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है और गर्मी से होने वाली थकान को दूर रखता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, सत्तू में ठंडक देने वाले गुण मौजूद हैं. इसमें फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है और ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम, जिससे पाचन क्रिया सुधरती है. फाइबर मल त्याग को नियमित रखता है, कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है और पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखता है. साथ ही सत्तू प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों से भरपूर होता है. यह भारत के कई राज्यों में खासा लोकप्रिय है. झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में सत्तू का रोजाना सेवन किया जाता है. इसे मुख्य रूप से चना, गेहूं, जौ जैसे अनाजों को भूनकर पीसकर तैयार किया जाता है. सत्तू में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिजों की भरपूर मात्रा पाई जाती है. सत्तू का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर को ठंडा रखता है. गर्मी में पसीना आने से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है, ऐसे में सत्तू का शरबत प्यास बुझाने के साथ-साथ ऊर्जा भी देता है. साथ ही यह पाचन को मजबूत बनाता है और वजन नियंत्रण में भी सहायक साबित होता है. सत्तू को कई रूपों में खाया और पीया जा सकता है. गर्मियों में इसका ठंडा शरबत सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. इसमें नमक, नींबू, जीरा पाउडर या गुड़ मिलाकर बनाया गया शरबत न सिर्फ स्वादिष्ट होता है बल्कि गर्मी से बचाव भी करता है. इसके अलावा सत्तू से लड्डू, पराठा और चपाती भी बनाई जा सकती है या फिर इसके घोल को भी काफी पसंद किया जाता है. सत्तू में फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है, जो आंतों को स्वस्थ रखता है और कब्ज, एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है. यह ब्लड शुगर को नियंत्रित रखता है और ब्लड प्रेशर को संतुलित करने में भी मदद करता है. कोलेस्ट्रॉल की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए भी सत्तू फायदेमंद साबित होता है.
साल में केवल एक बार खिलता है ये फूल, वात हो या चर्म रोग, कई बीमारियों का असली डॉक्टर

Last Updated:March 31, 2026, 22:43 IST Palash Flower Benefits : पलाश ऐसा फूल है, जो साल में केवल एक बार, बसंत से लेकर मार्च तक ही खिलता है. आयुर्वेद में इसके फूलों को औषधि माना गया है, जो हमारी सेहत के लिए रामबाण है. रायबरेली की आयुष चिकित्सक डॉ. आकांक्षा दीक्षित लोकल 18 से बताती हैं कि इसमें एस्ट्रिनजेंट और एंटीऑक्सीडेंट गुण भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो वात रोग से लड़ने में मददगार हैं. अगर किसी के पेट में कीड़े हो गए हों, तो इसके पाउडर को शहद के साथ खाली पेट सेवन करना चाहिए. बसंत पंचमी से पतझड़ शुरू हो जाता है. इसके बाद पेड़-पौधों पर नई पत्तियां और नए फूलों का आगमन होता है. कुछ ऐसे पौधे हैं, जिन पर साल के 12 महीने फूल आते हैं, लेकिन कई ऐसे पौधे हैं. जिनमें फूल साल में केवल एक बार, बसंत से लेकर मार्च तक ही आते हैं. उसके बाद पूरे साल के लिए फूल गायब हो जाते हैं. इन्हीं पौधों में पलाश भी शामिल है. पलाश के फूल चटकती धूप में बेहद खूबसूरत दिखाई देते हैं, जिन्हें आमतौर पर लोग टेसू का फूल कहते हैं. इसके फूल हमारी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं. आयुर्वेद में इसके फूलों को औषधि माना गया है, जो हमारी सेहत के लिए रामबाण है. रायबरेली जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवगढ़ की आयुष चिकित्सक डॉ. आकांक्षा दीक्षित (एमडी आयुर्वेद नेशनल इंस्टीट्यूट आफ आयुर्वेद जयपुर, राजस्थान) लोकल 18 से बताती हैं कि बसंत ऋतु के शुरू होते ही पलाश के पौधे में फूल आने शुरू हो जाते हैं. खासकर गर्मियों के मौसम में मिलने वाले यह गुलाबी रंग के फूल हमारी स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद हैं. Add News18 as Preferred Source on Google इसमें एस्ट्रिनजेंट और एंटीऑक्सीडेंट गुण भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो वात रोग से लड़ने में मददगार हैं. ये चर्म रोग, पेट में कीड़ा, डायबिटीज, घाव भरने और त्वचा रोग के साथ महिलाओं को होने वाली कई गंभीर बीमारियों से बचाते हैं. डॉ. आकांक्षा दीक्षित बताती हैं कि अगर किसी के पेट में कीड़े हो गए हों, तो इसके पाउडर को शहद के साथ खाली पेट सेवन करना चाहिए. शरीर पर घाव हो जाए, तो इसके पत्ते और छाल को पीसकर लेप बनाकर लगाने से घाव ठीक हो जाता है. डायबिटीज के मरीजों को इसके पत्ते के सेवन से राहत मिलता है. अगर आप त्वचा की समस्या से परेशान हैं, तो इसके फूलों का लेप बनाकर त्वचा पर लगाने से खुजली और रूखेपन की समस्या दूर हो जाती है. इसमें एस्ट्रिनजेंट गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा के लिए फायदेमंद हैं. First Published : March 31, 2026, 22:43 IST
Paneer khane ke nuksan: पनीर किन लोगों को नहीं खाना चाहिए? जानें नुकसान, सेवन का तरीका

Paneer side effects: प्रोटीन के लिए मांसाहारी लोग नॉनवेज खाते हैं, जिसमें अंडा, चिकन, मछली आदि शामिल है, वहीं शाकाहारियों को लगता है कि प्रोटीन सिर्फ पनीर में पाया जाता है. ऐसे में वे इसका ही अधिक सेवन करने लगते हैं, लेकिन किसी भी चीज को अधिक खाना सेहत को फायदा नहीं, बल्कि नुकसान पहुंचाता है. प्रोटीन में शाकाहारी लोगों के लिए पनीर और सोयाबीन एक सबसे बड़ा फूड सोर्स है. पनीर बड़ों से बच्चों, बुजुर्गों तक को पसंद होता है. लेकिन, यदि आपको कुछ बीमारियां हैं तो पनीर का सेवन करने से परहेज करें. पनीर कब खाने से परहेज करना चाहिए -कुछ लोगों को पनीर खाने से परहेज करना चाहिए. यदि आपको गैस, खट्टी डकार, पाचन संबंधित समस्याएं पहले से ही हैं तो पनीर न खाएं. इसे खाकर आपको पेट में भारीपन, गैस बन सकता है. कई बार गलत समय और सेवन के तरीके से भी ये समस्याएं होती हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. -आयुर्वेद के अनुसार, पनीर का सेवन यदि गलत तरीके से किया जाए तो ये जहर समान भी साबित हो सकता है. जब सही तरीके से इसका सेवन किया जाए तो ये अमृत समान है. ऐसे में इसे सही तरीके से खाना बहुत महत्वपूर्ण है. -पनीर को हेल्दी मानकर सभी प्रवृत्ति के लोग इसका सेवन करते हैं, लेकिन कुछ लोगों को पनीर खाने में सावधानी बरतनी चाहिए. -जिन लोगों का यूरिक एसिड अधिक बढ़ा हुआ होता है, उन्हें पनीर बिल्कुल नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इसमें मौजूद प्रोटीन शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा को बढ़ा देता है. फिर जोड़ों में दर्द की समस्या बढ़ सकती है. -जिनका पाचन कमजोर होता है, उन्हें भी पनीर कम ही खाना चाहिए. पनीर स्वभाव में भारी खाद्य पदार्थ है, जो जल्दी नहीं पचता है. कमजोर पाचन वाले लोगों को पनीर को पकाकर खाना चाहिए, न कि कच्चा. कच्चा पनीर खाने से पेट में दर्द हो सकता है. -अगर कफ और सांस लेने की परेशानी से जूझ रहे हैं, तब भी पनीर का सेवन कम करना चाहिए. यह साइनस की समस्या को और अधिक खराब कर सकता है. जुकाम और कफ बढ़ा सकता है. -यदि आपका वजन लगातार बढ़ रहा है, आप पहले से मोटापे से ग्रस्त हैं, कोलोस्ट्रॉल लेवल हाई है तो भी आप पनीर बिल्कुल न खाएं. पनीर में वसा होती है, जो मोटापे और कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मददगार होती है. पनीर खाने का सही तरीका क्या है? आखिर पनीर खाने का सही तरीका क्या है? आयुर्वेद कहता है कि पनीर हमेशा ताजा खाएं. घर का बना खाते हैं तो बेस्ट है. बाजार में मिलने वाले पनीर मिलावटी भी होते हैं. इसके साथ ही, पनीर को हमेशा पकाकर खाए, कच्चा खाने से बचें. पनीर को अच्छी तरह से फ्राई करके, मसाले डालकर और पका कर ही खाना चाहिए. इसे अदरक, काली मिर्च और हल्दी के साथ मिलाकर खाएं. पनीर रात में खाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह स्वभाव में भारी होता है. ऐसे में रात में इसे खाकर सो जाते हैं तो ये जल्दी पचता नहीं है. रात के समय में पाचन शक्ति मंद हो जाती है. आपको पेट में भारीपन महसूस हो सकता है. पनीर का सेवन हमेशा दिन के भोजन में करना बेस्ट माना जाता है.
असम विधानसभा चुनाव 2026: ‘असम में जाएगी भाजपा सरकार’, महाराष्ट्र के सीएम अंतिम संस्कार ने जोर से कहा!

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता डीजे ने न्यूज़ल (31 मार्च, 2026) को असम के जोरहाट में तेज गति से ट्रक स्टैंड क्षेत्र में एक विशाल प्लाजा को खड़ा किया। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जोरहाट में आयोजित इस प्रतिष्ठान में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे। इस रैली में असम में बीजेपी के बढ़ते जनाधार और राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है, खासकर ऊपरी असम क्षेत्र में जहां राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में खटास आने की संभावना है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने असम में बीजेपी की जीत को लेकर पूरा विश्वास जताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में राज्य में सकारात्मक माहौल बन गया है। उन्होंने कहा, ‘इस बार असम में बीजेपी की सरकार ही बनेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के प्रयासों से राज्य में एक सकारात्मक लहर है। हमारा पूरा विश्वास है कि बीजेपी बहुत बड़ा बहुमत हासिल करेगी।’ कांग्रेस ने अपने वादे को मंजूरी दे दी है कांग्रेस पर डेमोक्रेट शेयरहोल्डर ने अपने घोषणा पत्र को अनपेक्षित तरीके से बताया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में कांग्रेस के वादे सफल नहीं हुए हैं और जनता अब इन पर भरोसा नहीं करती है। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस का घोषणापत्र अब कोई महत्वपूर्ण नहीं है। यह महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में काम नहीं आया। कांग्रेस सरकार नहीं बनाएगी और खुद कांग्रेस भी शामिल होगी। उनके वादे हकीकत से दूर हैं।’ बौद्धवाद की समस्या पर बोले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ईसाई धर्म के मुद्दे पर सीएम समर्थकों ने पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जैसे प्रभावित इलाकों में अब बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा, ‘मैं ऐसे राज्य से हूं, जहां छात्रावासवाद एक बड़ी समस्या थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के सख्त कदमों से अब छात्रावासवाद लगभग खत्म हो गया है. गढ़चिरौली, जो कभी बौद्ध प्रभावित क्षेत्र था, अब एक स्टील सिटी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।’ हमेशा गरीब और निवेशकों के लिए काम करते हैं उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी हमेशा गरीबों और जातियों के हित में काम कर रहे हैं और असम में विकास हो रहा है, इसका स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी सिर्फ ‘ए फॉर असम’ का नारा नहीं देते, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारकर दिखाते हैं।’ ‘असम तेजी से बदल रहा है और चाय बागान समुदाय सहित सभी ग्रेड का समर्थन भाजपा के साथ है।’ प्रस्तावना के अनुमान में उन्होंने किसी संख्या को नकारा, लेकिन कहा कि भारी बहुमत की संभावना है। उन्होंने कहा, ‘अगर जनता का विश्वास है, तो वे लोकप्रियता प्रदान करते हैं।’ ‘जनता कांग्रेस का भरोसेमंद दल में शामिल है।’ पश्चिम एशिया में जारी युद्ध पर बोले गए स्थान विश्व संकट और युद्ध की स्थिति का ज़िक्र करते हुए, लेकिन प्लेसमेंट ने कहा कि कई एशियाई और यूरोपीय देशों में स्थितियाँ ख़राब हैं, भारत ने इस चुनौती का सामना किया है। उन्होंने कहा, ‘दुनिया के कई देशों में संकट के कारण ओज जैसी स्थिति बनी हुई है, लेकिन भारत में पेट्रोल या घरेलू गैस की कोई कमी नहीं हुई है।’ यह प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व का परिणाम है।’ हालांकि, उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि उन्होंने इस पद पर भी राजनीति करने की कोशिश की और जनता को डराने का प्रयास किया. उन्होंने कहा, ‘यह संविधान है कि उस समय भी कांग्रेस ने राजनीति की और लोगों में भ्रम फैलाया, जिससे पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं।’ यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल में चुनावी रणनीति को धार दे रही बीजेपी, संकल्प पत्र में विकास का रोडमैप (टैग्सटूट्रांसलेट)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)देवेंद्र बजवा(टी)जोरहाट(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)पीएम मोदी(टी)पीएम नरेंद्र मोदी(टी)महाराष्ट्र(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)राक्षस पक्षी(टी)जोरहाट(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी) पीएम मोदी(टी) पीएम नरेंद्र मोदी(टी)महाराष्ट्र
केरल 2026 चुनाव कल्याण पेंशन सरकारी कर्मचारियों के वोट को प्रभावित कर सकती है | भारत समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 31, 2026, 21:16 IST केरल विधानसभा चुनाव 2026: बढ़ते राजकोषीय बोझ और कर्ज के स्तर पर चिंताओं के बीच पार्टियों ने पेंशन बढ़ोतरी के साथ सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को लुभाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। चुनावों से पहले, कल्याणकारी उपाय, विशेष रूप से सामाजिक सुरक्षा पेंशन, एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। (छवि: एपी/प्रतिनिधि) केरल विधानसभा चुनाव 2026: राजनीतिक रूप से जीवंत राज्य केरल में, चुनावों को अक्सर गहन अभियान, वैचारिक बहस और मजबूत पार्टी नेटवर्क द्वारा आकार दिया जाता है। फिर भी, दृश्यमान राजनीतिक लड़ाई से परे एक शांत लेकिन अत्यधिक प्रभावशाली मतदाता समूह, सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी हैं, जिनकी पसंद चुनावी परिणामों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती है। केरल में सार्वजनिक क्षेत्र का एक बड़ा कार्यबल और सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों का एक बड़ा समुदाय है। शिक्षक, क्लर्क, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, पुलिस कर्मी और अन्य अधिकारी, साथ ही शहरी और ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्रों में फैले पेंशनभोगी, मतदाताओं का एक बड़ा और राजनीतिक रूप से जागरूक वर्ग बनाते हैं। हालाँकि वे शायद ही कभी एक एकीकृत गुट के रूप में सार्वजनिक रूप से लामबंद होते हैं, लेकिन उनके मतदान पैटर्न अक्सर कड़े मुकाबले वाले चुनावों में मायने रखते हैं। एक महत्वपूर्ण लेकिन शांत प्रभाव राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी आमतौर पर उच्च मतदान प्रतिशत दर्ज करते हैं। उनकी भागीदारी और प्रभाव उनकी संख्या से परे है, क्योंकि कई लोग अपने समुदायों के भीतर सम्मानित व्यक्ति हैं और अक्सर परिवारों और पड़ोस के भीतर चर्चाओं को आकार देते हैं। ऐसे राज्य में जहां जीत का अंतर कम हो सकता है, इस समूह की प्राथमिकताओं में छोटे बदलाव भी नतीजों पर असर डाल सकते हैं। उनकी चिंताएँ सरकारी नीतियों से भी गहराई से जुड़ी हुई हैं – विशेष रूप से वेतन, पेंशन लाभ, सेवानिवृत्ति की आयु, स्वास्थ्य देखभाल पहुंच और नौकरी सुरक्षा। परिणामस्वरूप, राजनीतिक दल अक्सर इस समूह को ध्यान में रखते हुए अभियान के वादे तैयार करते हैं। कल्याण के वादे फोकस में 2026 के राज्य विधानसभा चुनावों से पहले, कल्याणकारी उपाय, विशेष रूप से सामाजिक सुरक्षा पेंशन, एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने 2021 के चुनाव अभियान के दौरान सामाजिक सुरक्षा पेंशन को धीरे-धीरे बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रति माह करने का वादा किया था। सत्ता में लौटने के बाद, सरकार ने अंततः अपने कार्यकाल के अंत में पेंशन को 1,600 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दिया। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले अक्टूबर 2025 में कई कल्याणकारी उपायों की घोषणा की, जबकि इसी तरह के प्रावधानों को 2026-27 के राज्य बजट में प्रमुखता से दिखाया गया था। पेंशन वृद्धि के साथ-साथ, सरकार ने आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कर्मचारियों, पूर्व-प्राथमिक शिक्षकों और दोपहर के भोजन श्रमिकों के लिए वेतन वृद्धि की घोषणा की। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने भी कल्याण को एक प्रमुख अभियान मुद्दा बनाया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केरल के लिए पांच गारंटी का वादा किया है, जिसमें कल्याण पेंशन को 3,000 रुपये तक बढ़ाना और स्वास्थ्य बीमा और राज्य संचालित बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा जैसे अतिरिक्त लाभ पेश करना शामिल है। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 31 मार्च को आगामी चुनावों के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया, जिसमें पार्टी प्रमुख नितिन नबीन ने राज्य के लिए कल्याणकारी वादों, बुनियादी ढांचे की पहल और मंदिर से संबंधित उपायों का मिश्रण पेश किया। प्रमुख घोषणाओं में, एनडीए ने जरूरतमंद महिलाओं, विधवाओं और 70 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रति माह 3,000 रुपये की कल्याण पेंशन का वादा किया। राजकोषीय चिंताएँ और राजनीतिक बहस जबकि ऐसे वादे मतदाताओं के बीच गूंजते हैं, अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों ने कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार के वित्तीय बोझ के बारे में चिंता जताई है। राज्य के वित्त मंत्री केएन बालगोपाल ने अनुमान लगाया था कि 2025 में घोषित कल्याणकारी उपायों से सरकारी खजाने पर कम से कम 10,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। अकेले बढ़ती पेंशन ने एक महत्वपूर्ण वार्षिक व्यय जोड़ दिया है। नीति आयोग जैसे संस्थानों की रिपोर्टों ने भी केरल की राजकोषीय चुनौतियों पर प्रकाश डाला है, जो बढ़ते ऋण स्तर और निरंतर घाटे की ओर इशारा करती हैं। विश्लेषकों का कहना है कि अगली बार जो भी सरकार सत्ता में आएगी, उसके लिए राजकोषीय स्थिरता के साथ कल्याण प्रतिबद्धताओं को संतुलित करना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी। निर्णायक कारक स्थिरता पर बहस के बावजूद, सामाजिक सुरक्षा लाभ कई पेंशनभोगियों और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है जो वित्तीय स्थिरता के लिए उन पर भरोसा करते हैं। इस समूह के लिए, राजनीतिक वादों की विश्वसनीयता अक्सर वादों जितनी ही मायने रखती है। जैसे-जैसे केरल 2026 के विधानसभा चुनाव के करीब आ रहा है, राजनीतिक लड़ाई जोर-शोर से और प्रचार अभियान में दिखाई दे सकती है, लेकिन मतदान केंद्रों में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों द्वारा की गई शांत पसंद एक बार फिर राज्य के राजनीतिक भविष्य को आकार देने में निर्णायक साबित हो सकती है। केरल में एक ही चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा। वोटों की गिनती 4 मई को होगी। जगह : कोच्चि (कोचीन), भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 31, 2026, 21:16 IST न्यूज़ इंडिया केरल चुनाव 2026: विधानसभा चुनावों के लिए सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों के वोट बैंक की व्याख्या अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल चुनाव 2026(टी)केरल विधानसभा चुनाव 2026(टी)सरकारी कर्मचारी केरल को वोट देते हैं(टी)पेंशनभोगी केरल को वोट देते हैं(टी)वोट बैंक केरल(टी)केरल विधानसभा चुनाव 2026(टी)केरल चुनाव(टी)सरकारी कर्मचारी वोट(टी)पेंशनभोगी प्रभाव(टी)कल्याण पेंशन केरल(टी)एलडीएफ कल्याण वादे(टी)यूडीएफ चुनाव गारंटी(टी)भाजपा केरल घोषणापत्र
मौसम के छिलके का उपयोग: कचरा समझकर न फंसे मौसम के छिलके, घर और त्वचा के लिए हैं बड़े काम की चीजें

31 मार्च 2026 को 21:14 IST पर अपडेट किया गया मौसम के छिलके का उपयोग: मौसंबी के अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न कचरा समझकर फ़ेक नीचे दिए गए हैं, लेकिन असल में ये मसालों का खजाना हैं। सेहत और स्वाद के साथ-साथ मुंबई के रेशम घर की सफाई और त्वचा की देखभाल में भी जादुई असर दिखता है। आइए जानते हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)मौसंबी के छिलके का उपयोग(टी)मौसंबी के छिलके के फायदे(टी)प्राकृतिक एयर फ्रेशनर DIY(टी)पौधों के लिए घरेलू मच्छर प्रतिरोधी उपकरण(टी)मौसंबी के छिलके से एयर फ्रेशनर कैसे बनाएं(टी)मौसंबी के छिलके के साथ DIY रसायन मुक्त रसोई क्लीनर(टी)पौधों के कीट नियंत्रण के लिए मौसम्बी के छिलके का उपयोग(टी)घर की सफाई के लिए मीठे नींबू के छिलके के फायदे
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल में चुनावी रणनीति को धार दे रही बीजेपी, संकल्प पत्र में साझी विकास का रोडमैप

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मिशन मोड में है। पिछले हफ्ते ममता सरकार के खिलाफ विपक्ष ने विपक्ष की हड़ताल और कानून व्यवस्था पर रोक लगाने की कोशिश की थी। अब भाजपा संकल्प पत्र के माध्यम से सरकार बनने के बाद पार्टी का राज्य के विकास के लिए क्या रोडमैप अस्तित्व में है, इसके लिए जनता सामने आ रही है। अगले सप्ताह पार्टी पश्चिम बंगाल को लेकर संकल्प पत्र जारी कर सकती है, जिसमें खास फोकस युवाओं और महिलाओं और राज्य सरकार के कर्मचारियों का रहना शामिल है। बंगाल को लेकर क्या होगी भाजपा की रणनीति? बीजेपी बंगाल में अपनी चुनावी रणनीति और धार नेतृत्व की तैयारी में है. पार्टी का फोकस राज्य के सरकारी कर्मचारियों पर है और लंबे समय से सेन्ट्रल सोसायटी (डीए) में रहने की संभावना है। दावे के मुताबिक, पार्टी सरकार बनने के 45 दिनों के भीतर 7वें वेतन आयोग को लागू करने और डीडीए का भुगतान करने का वादा करने की तैयारी है। राज्य में डीए का अंतर एक बड़ी आपूर्ति बन गया है, जहां केंद्र सरकार के कर्मचारियों को लगभग 56% डीए मिल रहा है, वहीं आंध्र सरकार के अधीन राज्य के कर्मचारियों को लगभग 22% डीए मिल रहा है। इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट ने भी पास कर दिया है. कोर्ट ने राज्य सरकार से बाकी भुगतान के लिए रोडमैप पेश करने के निर्देश दिए थे। हालाँकि, वैज्ञानिक को स्पष्टता की कमी के कारण कर्मचारियों में असंतोष पैदा हो गया है। सरकारी कर्मचारियों तक पहुंच बनाना भाजपा की बड़ी रणनीति बनी हुई है, क्योंकि राज्य में लगभग 20 लाख सरकारी कर्मचारियों के पद हैं, उनमें से 14 से 15 लाख अभी भी सरकारी कर्मचारी हैं। इस घोषणा से बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी पार्टी के साथ जुड़ सकते हैं। इसके साथ-साथ बचे हुए खाली प्लास्टिक को भी जल्दी डिफॉल्ट की घोषणा की जा सकती है, जिससे युवाओं को रोजगार देने का वादा करके अपने साथ जोड़ा जा सके। महिलाओं और युवाओं के लिए पार्टी कर सकती है कई वादे इसके अलावा बीजेपी की ओर से घोषित पत्र में कई किसान और विकास से जुड़े वादे भी शामिल होने की संभावना है. महिलाओं के लिए पार्टी का बड़ा ऐलान किया जा रहा है. उन्होंने लक्ष्मी भंडार योजना की तैयारी की घोषणा की है। लक्ष्मी भंडार योजना के तहत 3,000 रुपये से कम की मासिक वित्तीय सहायता शामिल हो सकती है। सिंगूर को औद्योगिक हब बनाने की योजना बनी रही बीजेपी खास बात यह है कि पार्टी सिंगूर को एक बड़े औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने की बात विशेष प्रोजेक्शन की योजना बना रही है। इसमें इंडस्ट्रीज़ जोन की स्थापना, क्लियर लिज़ल जर्नलिस्ट के साथ लैंड प्लॉट में तेजी और एमएसएमई बड़े उद्यमों को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन शामिल हो सकते हैं। विश्वसनीयता बहाल करने में, लॉजिस्टिक्स टीम और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर भी जोर रहेगा। सिंगुर, जो कभी औद्योगीकरण का प्रतीक था, अब नई औद्योगिक नीति के विकास के तहत केंद्र बन सकता है। यह भी पढ़ेंः फर्जीवाड़ा टैक्स क्रेडिट स्टॉक में ईडी का बड़ा एक्शन, 14.85 करोड़ की संपत्ति पर कब्जा









