यात्री सुविधा सर्वे में इंदौर एयरपोर्ट की बड़ी छलांग:10वें से तीसरे स्थान पर पहुंचा; पुणे पहले और गोवा दूसरे स्थान पर रहा

इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट ने वर्ष 2025 में शानदार उड़ान भरते यात्री सुविधाओं के मामले में देश में बड़ी छलांग लगाई है। यात्री सुविधा सर्वे में इंदौर एयरपोर्ट 10वें स्थान से सीधे तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। एयरपोर्ट्स काउंसिल इंटरनेशनल (एसीआई) द्वारा कराए गए एयरपोर्ट सर्विस क्वालिटी (एएसक्यू) सर्वे में इंदौर एयरपोर्ट को 5 में से 4.92 अंक मिले हैं, जबकि वर्ष 2024 में यह स्कोर 4.82 था और रैंक 10वीं थी। इस तरह एयरपोर्ट ने 0.10 अंकों की बढ़त के साथ 7 पायदान ऊपर चढ़ते हुए टॉप-3 में जगह बनाई है। यह सर्वे भारत के 16 और एशिया-पेसिफिक के 18 देशों के 98 एयरपोर्ट पर किया जाता है, जहां सालाना 18 लाख से ज्यादा यात्री आते हैं। सर्वे में एयरपोर्ट पर आने-जाने वाले यात्रियों से 31 अलग-अलग मानकों पर फीडबैक लिया जाता है। इनमें साफ-सफाई, पार्किंग, स्टाफ व्यवहार, शॉपिंग और खान-पान जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इंदौर एयरपोर्ट ने इस बार 31 में से 30 बिंदुओं पर पिछले साल से बेहतर प्रदर्शन किया, सिर्फ पासपोर्ट स्टाफ व्यवहार में थोड़ी गिरावट दर्ज हुई। एयरपोर्ट डायरेक्टर बोले- इस बार पहले स्थान का लक्ष्य एयरपोर्ट डायरेक्टर सुनील मग्गीरवार ने कहा कि यह उपलब्धि सही दिशा में किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है और हमारा लक्ष्य है कि वर्ष 2026 में इंदौर एयरपोर्ट देश ही नहीं, दुनिया में भी पहला स्थान हासिल करे। वहीं, एयरपोर्ट के प्रवक्ता रामस्वरूप यादव के अनुसार यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। टॉप-3 एयरपोर्ट और उन्हें मिले अंक
नागपुर-मुंबई एक्सप्रेसवे पर ट्रक-टेम्पो में टक्कर, 8 महिलाओं की मौत:शव सड़क पर बिखरे; तीन लोग घायल, ट्रक चालक गिरफ्तार

महाराष्ट्र के जालना जिले में नागपुर-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बुधवार शाम तेज रफ्तार ट्रक ने एक टेम्पो को पीछे से टक्कर मार दी। हादसे में 8 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि 3 लोग घायल हैं। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है। सभी पीड़ित मजदूर हैं। हादसा कडवांची गांव के पास तब हुआ जब महिला मजदूर एक्सप्रेसवे पर सफाई का काम खत्म कर टेम्पो से घर लौट रही थीं। टेम्पो स्टार्ट होने ही वाला था कि मुंबई की ओर जा रहे ट्रक ने पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर से टेम्पो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और शव सड़क पर बिखर गए। टेम्पो में कुल 11 लोग सवार थे, जिनमें से 7 महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। एक मृतक की पहचान अभी नहीं हुई मृतकों की पहचान अलकाबाई आडमने (45), लक्ष्मीबाई मदन (35), मीना आडमने (45), कंचन आडमने (50), ताराबाई चौधरी (60), कडूबाई मदन (55) और सुमन आडमने (70) के रूप में हुई है। एक मृतक की पहचान अभी नहीं हो सकी है। पुलिस ने ट्रक चालक को गिरफ्तार कर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं में मामला दर्ज किया है। महाराष्ट्र की पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों और घायलों को आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि आठ लोगों की मौत अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
बड़वानी में हनुमान प्रकटोत्सव पर पालकी यात्रा:शहर में भक्त भजनों पर झूमे, कल कई जगह भंडारे, बजरंगबली का पूजन

बड़वानी में हनुमान जन्मोत्सव की धूम है और पूरा शहर भक्ति के रंग में डूबा नजर आ रहा है। बुधवार शाम को शहर में पालकी यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु झूमते-गाते शामिल हुए। वहीं, कल यानी 2 अप्रैल को शहर में कई जगहों पर पूजन और भंडारों का आयोजन होगा। संकट मोचन तीर्थ हनुमान टेकड़ी से शुरू हुई यह पालकी यात्रा झंडा चौक के श्रीराम कृष्ण मंदिर से आगे बढ़ रही है। ढोल-नगाड़ों और भजनों के बीच ‘जय श्री राम’ और ‘जय बजरंगबली’ के नारों से पूरा माहौल गूंज उठा है। शहर के अलग-अलग रास्तों से गुजर रही इस यात्रा का लोग फूलों से स्वागत कर रहे हैं। इससे पहले सुंदरकांड और अखंड रामायण पाठ जैसे धार्मिक कार्यक्रम भी पूरे हो चुके हैं। कल होगा भंडारा, उमड़ेगी भीड़ हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर गुरुवार को शहर में कई जगहों पर प्रसादी बांटी जाएगी। नवलपुरा के श्री बजरंग सेवा समिति सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक भंडारा कराएगी। इसके अलावा सेगांव हनुमान टेकड़ी पर भी शाम से प्रभु की इच्छा तक प्रसादी वितरण चलता रहेगा। इन आयोजनों में हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। सेवा समितियों ने पूरी की तैयारियां मंदिर समितियों और सेवादारों ने भंडारे के लिए सभी इंतजाम पूरे कर लिए हैं। समितियों ने लोगों से अपील की है कि वे परिवार के साथ इन कार्यक्रमों में पहुंचें और धर्म का लाभ उठाएं। शहर में सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी खास ध्यान रखा जा रहा है ताकि श्रद्धालु आराम से दर्शन और भोजन कर सकें।
रायता रेसिपी: सिर्फ 5 मिनट में बोरिंग दाल-रोटी को बनाएं लाजवाब, साथ में बनाएं ये मिक्स वेज रायता; बनाना बेहद आसान और टेटे-स्टार्टमात है बे-इमारत

मिक्स वेज रायता रेसिपी: अगर आप भी रोजाना एक ही तरह का खाना बोर हो गए हैं तो एक छोटा सा बदलाव आपकी थाली का स्वाद बदल सकता है। जी हां हम बात कर रहे हैं चॉकलेट वाले मिक्स वेज रायते के बारे में, ये ना सिर्फ डेस्टिनेशन खाने को मजेदार बनाता है बल्कि समर में पेट को ठंडक भी पहुंचाता है। यह रायता बनाना बहुत ही आसान है और इसे मिनटों में बनाया जा सकता है। दही के साथ ताजी कार्डबोर्ड और एक चटनीदार क्रिसमस का कम्बिनेशन इसे घरेलू ग्राहकों का स्टार बना देता है। रायता बनाने के लिए क्या करना चाहिए? सबसे पहले एक बड़ा बाउल दही में अच्छी तरह से फेंट लें। अगर दही गाढ़ी लगे तो थोड़ा पानी मिला सकते हैं। फिर कटी हुई सामग्री डाली गई, प्याज, टमाटर, खीरा, गाजर और हरी मिर्च डाली गई। कुल मिला कर जीरा पाउडर, नमक और धनिया दोनों अच्छे से मिला लें। अब तड़का तैयार करें। छोटे पैन में तेल या घी गर्म करें। इसमें जीरा, राई, हींग और कढ़ी पत्ते शामिल हैं। जब राय चटकने लगे और अच्छा लगे तो गैस बंद कर दे। तड़का रयते पर नॉमिनल स्टैण्डर्ड हाथों से मिला लें। 15-20 मिनट तक रुकने से पहले फ़रिश्ता में रुकें। क्योंकि ठंडा-ठंडा ग्लास वाला रायता खाने में और भी स्वादिष्ट लगता है। यह रायता पुलाव, बिरयानी, स्टफ्ड पराठे या साधारण दाल-चावल के साथ बहुत अच्छा लगता है। गर्मियों में यह प्रोबायोटिक्स दही और ताजी के कारण पाचन में भी मदद करता है और शरीर को ठंडक देता है। ध्यान रखें: बुनियादी ढांचे ताकि स्वाद अच्छी तरह से मिले। तड़का डायनासोर समसामयिक न जीव जंतु। ताजा दही का प्रयोग करें तो स्वाद बेहतर आता है। (टैग्सटूट्रांसलेट) तड़का मिक्स्ड वेज रायता रेसिपी(टी)मिक्स्ड वेज रायता(टी)आसान रायता रेसिपी(टी)गर्मी में ठंडक देने वाला रायता(टी)घर का बना भारतीय रायता(टी)दही साइड डिश रेसिपी(टी)सब्जी रायता(टी)भारतीय शाकाहारी रेसिपी(टी)मिक्स वेज रायता(टी)तड़का रायता रेसिपी
भवानीपुर के मुख्यमंत्री पर दांव: फुट सोल्जर्स के नारे ने ममता बनर्जी-सुवेंदु अधिकारी के बंगाल रीमैच को फिर से परिभाषित किया | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:01 अप्रैल, 2026, 22:15 IST अधिकारी की राजनीतिक स्थिति पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान नंदीग्राम में बनर्जी पर उनकी जीत से बनी है पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (दाएं) दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर से भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी (बाएं) से भिड़ेंगी। (फ़ाइल छवि: पीटीआई) भबनीपुर में घर-घर अभियान के दौरान उठाए गए एक नारे ने पश्चिम बंगाल निर्वाचन क्षेत्र के आसपास के राजनीतिक संदेश की ओर ध्यान आकर्षित किया है। बुधवार शाम को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं के एक समूह को यह नारा लगाते हुए सुना गया, “जो भबनीपुर जीतेगा वह बंगाल का मुख्यमंत्री बनेगा।” मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा के सुवेंदु अधिकारी के बीच हाई-प्रोफाइल मुकाबले को देखते हुए यह नारा महत्वपूर्ण हो गया है। टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर, अधिकारी ने इसके महत्व को कम करते हुए कहा कि इस तरह के नारे पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा “भावना में” लगाए गए होंगे। उन्होंने कहा कि नेतृत्व का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी आलाकमान पर निर्भर है और दोहराया कि तात्कालिक उद्देश्य मौजूदा मुख्यमंत्री को हराना है। अधिकारी की राजनीतिक स्थिति पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान नंदीग्राम में बनर्जी पर उनकी जीत से बनी है। इस जीत को व्यापक रूप से उनके राजनीतिक करियर में एक निर्णायक क्षण माना जाता है और इससे उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में नियुक्त किया गया। विपक्ष के नेता का पद संसदीय लोकतंत्र में संस्थागत महत्व रखता है, जिसे अक्सर सत्तारूढ़ सरकार के लिए एक प्रमुख प्रतिकार के रूप में देखा जाता है। वर्तमान में, अधिकारी LoP के पद पर बने हुए हैं। भाजपा ने उन्हें दो निर्वाचन क्षेत्रों-नंदीग्राम और भवानीपुर से मैदान में उतारा है, जो राजनीतिक रूप से संवेदनशील सीटों पर रणनीतिक तैनाती का संकेत देता है। यह अधिकारी और बनर्जी के बीच दूसरा सीधा चुनावी मुकाबला है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों और पार्टी के भीतर के वर्गों से संकेत मिलता है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व राज्य में अधिकारी की भूमिका पर काफी जोर दे रहा है। यह नामांकन प्रक्रिया के दौरान वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति और अपेक्षित भागीदारी से परिलक्षित होता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भवानीपुर में अधिकारी के नामांकन दाखिल करने में शामिल होने की उम्मीद है, जबकि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नंदीग्राम में उनके नामांकन के दौरान मौजूद थे। भाजपा के सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व अधिकारी को पश्चिम बंगाल में अपनी चुनावी रणनीति में एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में देखता है। बनर्जी पर उनकी पिछली जीत ने उन्हें एक केंद्रीय चुनौती के रूप में स्थापित किया है, और उन्हें फिर से मुख्यमंत्री के खिलाफ मैदान में उतारने का निर्णय – इस बार उनके राजनीतिक गढ़ में – प्रतियोगिता से जुड़े महत्व को रेखांकित करता है। भबनीपुर के घटनाक्रम पर कड़ी नजर रहने की संभावना है, क्योंकि दोनों पार्टियां अपने अभियान के प्रयासों को तेज कर रही हैं, जो राज्य में सबसे करीबी चुनावी लड़ाइयों में से एक के रूप में उभर रहा है। पहले प्रकाशित: 01 अप्रैल, 2026, 22:14 IST समाचार चुनाव भवानीपुर के मुख्यमंत्री पर दांव: फुट सोल्जर्स के नारे ने ममता बनर्जी-सुवेंदु अधिकारी के बंगाल रीमैच को फिर से परिभाषित किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)बीजेपी(टी)टीएमसी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)सुवेंदु अधिकारी(टी)बंगाल
बाल झड़ने से हैं परेशान? रोजाना डाइट में शामिल करें ये सस्ती हरी पत्ती, जड़ों को बना देगी स्टील जैसा मजबूत

Last Updated:April 01, 2026, 22:13 IST आजकल बालों का झड़ना एक आम समस्या बन गई है, जिससे हर उम्र के लोग परेशान हैं. ऐसे में लोग महंगे प्रोडक्ट्स की बजाय अब नेचुरल उपायों की ओर रुख कर रहे हैं. शेपू यानी डिल लीव्स एक ऐसा ही सुपरफूड है, जो पोषण से भरपूर होने के साथ बालों की जड़ों को मजबूत बनाने और हेयर फॉल कम करने में मददगार माना जाता है. ख़बरें फटाफट शेपू यानी डिल लीव्स एक ऐसी हरी सब्जी है जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसके फायदे बेहद चौंकाने वाले हो सकते हैं. पोषक तत्वों से भरपूर यह पत्तेदार सब्जी शरीर को अंदर से मजबूत बनाने के साथ-साथ बालों की सेहत सुधारने में भी अहम भूमिका निभाती है. इसमें विटामिन A, C, आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो स्कैल्प को पोषण देकर बालों की जड़ों को मजबूत बनाते हैं. यही कारण है कि इसे नियमित डाइट में शामिल करने से बालों का झड़ना धीरे-धीरे कम हो सकता है और बाल पहले से ज्यादा हेल्दी नजर आने लगते हैं. आज के समय में हेयर फॉल एक आम समस्या बन चुकी है, जिसका मुख्य कारण खराब खान-पान, तनाव और पोषण की कमी है. ऐसे में शेपू का सेवन इन समस्याओं को काफी हद तक कम करने में मदद कर सकता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स स्कैल्प को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं, जिससे बालों की जड़ें कमजोर नहीं पड़तीं. साथ ही, इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण स्कैल्प की सूजन और इरिटेशन को कम करते हैं, जिससे बालों के गिरने की समस्या कंट्रोल में आती है. यह बालों को अंदर से पोषण देकर उन्हें घना और मजबूत बनाने में सहायक होता है. सिर्फ बालों के लिए ही नहीं, शेपू पाचन तंत्र के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है. यह डाइजेशन को बेहतर बनाता है और शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाता है. जब शरीर को सही पोषण मिलता है, तो उसका असर सीधे बालों और त्वचा पर दिखाई देता है. इसके अलावा, शेपू में मौजूद तत्व शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं, जिससे अंदर की गंदगी बाहर निकलती है और ओवरऑल हेल्थ बेहतर होती है. इसका सीधा फायदा बालों की ग्रोथ और उनकी क्वालिटी पर भी पड़ता है. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 01, 2026, 22:13 IST
असम में ‘घुसपैठिए’ बनाम ‘लुटेरे’: विधानसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी, प्रियंका गांधी पर तीखी बयानबाज़ी | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:01 अप्रैल, 2026, 21:50 IST प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार करने के लिए असम में थे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्वनाथ में एक सार्वजनिक बैठक को संबोधित किया; (दाएं) कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी 1 अप्रैल, 2026 को असम के डिब्रूगढ़ जिले में एक सार्वजनिक रैली को संबोधित करती हैं। (छवि: (PMO/@INCIndia/X /PTI) प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने विधानसभा चुनावों से पहले “असम की आत्मा” के लिए लड़ाई लड़ी, विकास, पहचान और “एक-परिवार” शासन पर एक-दूसरे पर कटाक्ष किया। असम में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा, जिसमें सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच कड़ा चुनावी मुकाबला है। प्रधान मंत्री मोदी और प्रियंका गांधी बुधवार को भाजपा और कांग्रेस के लिए प्रचार करने के लिए असम में थे, जहां उन्होंने “घुसपैठिया” बनाम “माफिया” कथा पर एक-दूसरे के खिलाफ आरोप लगाए। मोदी ने डिब्रूगढ़ जिले में मनोहारी चाय एस्टेट का दौरा किया, जहां उन्होंने महिला श्रमिकों के साथ सीधे बातचीत करके और चाय की पत्तियां तोड़कर 2014 से भाजपा के प्रति देखे गए “महत्वपूर्ण झुकाव” को मजबूत करने की कोशिश की। चाय बागान कार्यबल, जिसमें 850 से अधिक बागानों के मतदाता शामिल हैं, ऐतिहासिक रूप से असमिया राजनीति में एक निर्णायक कारक रहे हैं। भाजपा को श्रम शक्ति का सच्चा हितैषी बताते हुए उन्होंने दावा किया कि जहां कांग्रेस ने श्रमिकों को 60 वर्षों तक “अपने बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष” करने की अनुमति दी, वहीं उनके प्रशासन ने महत्वपूर्ण भूमि अधिकार देना शुरू कर दिया है। मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “चाय असम की आत्मा है! यहां की चाय ने दुनिया भर में अपनी जगह बनाई है। यह एक बहुत ही यादगार अनुभव था।” इस बीच, गांधी ने तिंगखोंग और नाज़िरा में अपनी रैलियों का इस्तेमाल अपनी कहानी को ख़त्म करने के लिए किया, और भाजपा पर चाय श्रमिकों के लिए दैनिक वेतन बढ़ाने के अपने विशिष्ट वादे को पूरा करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि असम की अपार प्राकृतिक संपदा के बावजूद, कार्यबल गरीब बना हुआ है जबकि “केवल एक परिवार समृद्ध हो रहा है”। मोदी ने छह दशकों में कांग्रेस द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाए गए “तीन पुलों” और उनकी सरकार द्वारा केवल 10 वर्षों में बनाए गए “पांच पुलों” के बीच एक तीव्र अंतर दिखाते हुए “डबल-इंजन” सरकार का कार्ड खेला। उन्होंने कहा कि जगीरोड पर सेमीकंडक्टर सुविधा जैसी भविष्य की ओर देखने वाली परियोजनाएं जल्द ही प्रौद्योगिकी के लिए विश्व स्तर पर जानी जाएंगी। हालाँकि, गांधी ने कहा कि ये भव्य परियोजनाएँ जनता के दैनिक संघर्षों की प्रणालीगत उपेक्षा का मुखौटा थीं। उन्होंने विफल आर्थिक नीति के प्रमाण के रूप में “चरम” मुद्रास्फीति और आवश्यक वस्तुओं की अनुपलब्धता की ओर इशारा किया। गांधी ने कहा, “असम में पिछले पांच वर्षों में लोगों की समस्याएं और खतरे बढ़े हैं। महंगाई चरम पर है और हर आवश्यक वस्तु पहुंच से बाहर है। रोजगार के लिए राज्य से बाहर जाने वाले युवाओं के लिए कोई नौकरी नहीं है।” उन्होंने कहा कि भाजपा के विकास के संस्करण ने युवा पीढ़ी को दरकिनार कर दिया है और व्यापक विकास के बजाय, खदानों और जमीन जैसी राज्य की संपत्तियों को “बड़े उद्योगपतियों को सौंप दिया जा रहा है”। उन्होंने आरोप लगाया, “एक परिवार असम में सब कुछ लूट रहा है। और जब वे लूट नहीं रहे हैं, तो खदानें, जमीनें और हर दूसरी संपत्ति बड़े उद्योगपतियों को सौंपी जा रही है।” प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उस पर वोट बैंक बनाने के लिए ”घुसपैठियों को बचाने के लिए कानून लाने” की योजना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने पहले अवैध आप्रवासियों को पवित्र “सत्रों, नामघरों और मंदिर की भूमि” पर बसने के लिए प्रोत्साहित किया था। चुनाव असम की रक्षा के लिए एक विकल्प है”शान“(गर्व) और”सुरक्षाउन्होंने कहा, ”(सुरक्षा) जनजातीय पहचान की रक्षा के लिए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और छठी अनुसूची जैसे उपायों के माध्यम से।” गांधी ने खतरे को दोबारा परिभाषित करते हुए इसका प्रतिकार किया और इस बात पर जोर दिया कि “असम की संस्कृति और सभ्यता” को वास्तविक खतरा एक सत्तावादी नेतृत्व से है जो “भय और धमकियों” के माध्यम से शासन करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार “कायरों” द्वारा चलाई जाती है जो महिलाओं को ‘ओरुनोदोई’ जैसी सरकारी योजनाओं से हटाने की धमकी देकर रैलियों में भाग लेने के लिए मजबूर करते हैं। उन्होंने पिछले वादों के बावजूद, मांग करने वाले समुदायों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने में भाजपा की विफलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “विभिन्न आदिवासी समुदाय वर्षों से एसटी का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। भाजपा ने उन्हें एसटी का दर्जा देने का वादा किया था, लेकिन वे इसे देने में विफल रहे।” प्रधानमंत्री ने लगातार कांग्रेस के “दो परिवारों” – दिल्ली में गांधी परिवार और असम में गोगोई – पर हमला किया और उन पर जनता की भलाई पर वंशवादी हितों को प्राथमिकता देने और पार्टी को “भ्रष्टाचार की जननी” करार देने का आरोप लगाया। “कांग्रेस के लिए, दो परिवार हैं – एक दिल्ली में और दूसरा असम में, और उनकी प्राथमिकता उनके परिवारों का हित है, न कि लोगों का… उन्होंने (कांग्रेस) असम के साथ समझौता किया है आत्मा (आत्मा), शान (गर्व), Pehchan (पहचान) और सुरक्षा (सुरक्षा),” उन्होंने कहा। बदले में, गांधी ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य में “केवल एक परिवार सब कुछ लूट रहा है”। उन्होंने सारदा और स्मार्ट सिटी घोटालों सहित ऐतिहासिक भ्रष्टाचार के आरोपों को उठाया और प्रशासन को “डबल-ग़ुलामी (गुलामी)” सरकार ने आरोप लगाया कि सरमा मोदी के गुलाम हैं, जो बदले में ”अमेरिका के गुलाम” हैं। उन्होंने कहा, “भाजपा ने कहा कि उन्होंने डबल इंजन सरकार दी है। वास्तव में, यह डबल गुलामी सरकार है। पीएम मोदी अमेरिका की गुलामी में लगे हुए हैं और हिमंत बिस्वा सरमा मोदी की गुलामी में लगे हुए हैं।” (एजेंसी इनपुट के साथ) जगह : गुवाहाटी (गौहाटी), भारत, भारत पहले प्रकाशित: 01 अप्रैल, 2026, 21:50 IST समाचार चुनाव असम में ‘घुसपैठिए’ बनाम ‘लुटेरे’: विधानसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी, प्रियंका गांधी
गर्मी में अचानक नाक से खून आता है? जानें कारण, तुरंत राहत के आसान उपाय

Last Updated:April 01, 2026, 21:48 IST गर्मी के मौसम में सूखी हवा और कम नमी का असर सीधे हमारी नाक पर पड़ता है, जिससे कई बार अचानक खून आने की समस्या हो जाती है. यह परेशानी खासकर बच्चों और बुजुर्गों में ज्यादा देखने को मिलती है. हालांकि सही समय पर प्राथमिक उपचार और कुछ आसान उपाय अपनाकर इसे कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन अगर यह बार-बार होने लगे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है. नाक से खून बहना. गर्मी का मौसम अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं लेकर आता है, जिनका असर सीधे हमारे शरीर पर पड़ता है. तेज धूप, गर्म हवाएं और शरीर में पानी की कमी कई परेशानियों को जन्म देती हैं. इन्हीं में से एक आम समस्या है अचानक नाक से खून आना, जिसे मेडिकल भाषा में Epistaxis कहा जाता है. यह परेशानी खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों में ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि उनका शरीर मौसम के बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील होता है. डॉक्टरों के अनुसार, गर्मियों में हवा में नमी कम हो जाती है, जिससे नाक के अंदर की परत सूखने लगती है. नाक के भीतर की त्वचा बहुत पतली और नाजुक होती है, जिसमें छोटी-छोटी रक्त नलिकाएं मौजूद होती हैं. जब यह परत सूख जाती है, तो ये नलिकाएं कमजोर होकर आसानी से फट सकती हैं और खून बहने लगता है. गर्म हवा और कम ह्यूमिडिटी इस समस्या को और बढ़ा देते हैं. इसके अलावा, अगर कोई व्यक्ति जोर से नाक साफ करता है या बार-बार छींकता है, तो भी ये नसें टूट सकती हैं. एलर्जी, साइनस, इंफेक्शन या नाक में चोट लगने जैसे कारण भी नाक से खून आने की वजह बन सकते हैं. कुछ मामलों में यह समस्या केवल मौसम की वजह से नहीं होती, बल्कि अन्य स्वास्थ्य स्थितियों से भी जुड़ी हो सकती है. जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर रहता है या जो खून को पतला करने वाली दवाइयां लेते हैं, उनमें भी नाक से खून आने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए अगर यह समस्या बार-बार हो रही हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है. अगर अचानक नाक से खून आने लगे, तो घबराने के बजाय सही तरीके से प्राथमिक उपचार करना चाहिए. सबसे पहले व्यक्ति को सीधे बैठना चाहिए और सिर को थोड़ा आगे की ओर झुकाना चाहिए, ताकि खून गले में जाने की बजाय बाहर निकले. इसके बाद नाक के नरम हिस्से को अंगूठे और उंगली से कुछ मिनटों तक दबाकर रखना चाहिए. इस दौरान मुंह से सांस लेना बेहतर होता है. साथ ही माथे या नाक पर ठंडी पट्टी या बर्फ लगाने से खून का बहाव कम होता है और जल्दी रुकने में मदद मिलती है. आमतौर पर ये उपाय कुछ ही मिनटों में असर दिखा देते हैं. अगर किसी को बार-बार नाक से खून आने की समस्या होती है, तो कुछ आसान सावधानियां अपनाकर इसे काफी हद तक रोका जा सकता है. नाक के अंदर हल्का सा नारियल तेल या पेट्रोलियम जेली लगाने से नमी बनी रहती है और सूखापन कम होता है. गर्मियों में शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए. कमरे में नमी बनाए रखने के लिए ह्यूमिडिफायर का उपयोग भी फायदेमंद होता है. इसके अलावा, भाप लेने से भी नाक के अंदर की सूखापन कम होती है और यह समस्या नियंत्रित रहती है. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 01, 2026, 21:48 IST
अमरूद का हलवा रेसिपी: मेहमान मेहमान तो झटपट खास अमरूद का हलवा, विटामिन सी का भंडार; बनाना बेहद आसान है

अमरूद का हलवा रेसिपी:जब मीठा की बात आती है तो हम बार-बार गाजर, सूजी या मूंग की दाल के हलवे के बारे में बात करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी अमरूद का हलवा चित्रित किया है? यह न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि पोषक तत्व से भी भरपूर है। क्योंकि यह विटामिन-सी, स्ट्रॉबेरी और एंटीऑक्सीडेंट का खजाना है। घर में अक्सर मेहमान आते रहते हैं, लेकिन इस बार आप उन्हें कुछ हटकर खिला सकते हैं। आइए जानते हैं कि आप कैसे घर पर झटपट और आसान तरीके से हलवाई बना सकते हैं। आइए जानते हैं। अमरूद का हलवा बनाने की सामग्री के लिए अमरुदचीनीमावा देसी घीदूधइलायची पाउडरसुन्दरी केट मेवेपिता का रंग सबसे पहले अमरूद को अच्छी तरह धो लें। अब स्पष्टकर छोटी कक्षा में काट लें। ध्यान दें कि यदि बीज मुख्य रूप से सख्त हैं, तो उन्हें हटा दें। अब प्रयास को तुरंत से पानी के साथ लें ताकि वे नग्न हो जाएं। ठंडा होने पर मिक्सी में पीसकर एक स्मूथ पेस्ट बना लें।अमरूद में छोटे-छोटे बीज होते हैं जो दांतों में फंस सकते हैं। इसलिए, प्यूरी को एक छलनी से अच्छी तरह से तैयार करें ताकि आपको एक रेशमी और आकर्षक पल्प मिले।एक भारी लकड़ी की कड़ही में देसी घी गरम करें। अब अमरुद का पैल्प और मीडियम एक्च पर स्थिर स्टाम्प का प्रयोग हुआ। इसे तब तक भुनाना है जब तक कि इसका रॉपन दूर न हो जाए और प्रतिभागियों से अलग न लगे।जब पल्प मैसाचुसेट्स लागे, तो इसमें चीनी और दूध मिला। इसे तब तक जब तक चीनी पूरी तरह से न जाए। अब इसमें कद्दूकस किया हुआ मावा निकाला गया। मावा से बने हलवे का स्वाद दोगुना हो जाता है और यह बिल्कुल शादी वाले हलवे जैसा लगता है।अंत में, इसमें इलायची पाउडर और कटा हुआ मेवे मिलाया जाता है। अगर आप इसे आकर्षक बनाना चाहते हैं, तो एक चुटकी चारकोल कलर डाल सकते हैं। जब हलवा पकाने लगें और एक जगह इकट्ठा होने लगें, तो समझ लें कि आपका अमरूद का हलवा तैयार है। सेहत के लिए बेहद शानदार है अमारूद अमरूद आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अमरूद में मौजूद पाचन तंत्र को शामिल किया गया है। इसे बनाने में गाजर के हलवे की तुलना बहुत कम समय में होती है। अगर आप पर विचार किया जा रहा है, तो चीनी की जगह गुड़ या देसी खांड का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
रेलवे ने जेसीबी से मंदिर तोड़ा, मूर्ति को फेंका:खंडवा में 500 से ज्यादा मकान तोड़े; कांग्रेस बोलीं- कहा गए हिंदुत्व पर वोट मांगने वाले?

खंडवा में रेलवे प्रशासन ने अतिक्रमण के नाम पर अब तक 500 से ज्यादा मकान तोड़ दिए हैं। हजारों लोग बेघर हो गए हैं, इसी बीच नौवें दिन मंदिर तोड़े जाने के मामले ने विवाद खड़ा कर दिया। रेलवे की जेसीबी ने एक भीलटदेव के मंदिर को तोड़ दिया। इससे पहले मूर्ति को पानी की टंकी में फेंक दिया। घटनाक्रम के वीडियो भी सामने आए हैं। इसे लेकर कांग्रेस ने हिंदुत्व की पहरेदारी करने वाली भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। सूरजकुंड क्षेत्र में मंदिर तोड़ने का मामला सामने आया तो मौके पर हिंदू जागरण मंच के संयोजक माधव झा सहित कई लोग पहुंचे और विरोध जताया। माधव झा ने कहा कि रेलवे की जमीन में मंदिर से पहले चर्च और दरगाह हैं, लेकिन उन्हें तोड़ने की हिमाकत तक नहीं की जा रही। मंदिर को तोड़ा गया और मूर्तियों सहित मलबे को पानी के टैंक में बहा दिया। इधर, रेलवे अधिकारियों से कहासुनी के बीच तय किया गया कि अब पहले चर्च और दरगाह टूटेगी, उसके बाद बाकी का अतिक्रमण तोड़ जाएगा। इसके अलावा हिंदूवादी नेता डॉ. अनीस अरझरे ने सोशल मीडिया पर लिखा कि खंडवा को पाकिस्तान बना दिया गया हैं। नेता प्रतिपक्ष बोले- कहां है? बीजेपी नेता खंडवा में बुधवार को मंदिर तोड़ने के दो घटनाक्रम हुए हैं। सुबह नागचून रोड़ पर भी भीलटदेव का मंदिर तोड़ा गया। इस घटना को कारोबारी श्याम हेमवानी द्वारा एक मुस्लिम कॉलोनाइजर को जमीन बेचने के लिए अंजाम दिया गया। वहीं शाम को रेलवे ने भीलटदेव मंदिर तोड़ दिया। मामले में नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष मुल्लु राठौर ने कहा कि, यह घटनाएं भाजपा की सरकार में हो रही हैं। जो हिंदूत्व के नाम पर वोट मांगती हैं। अब भाजपा के नेता कहां छिप गए हैं।









