बंगाल चुनाव से ठीक पहले सर्वे ने चौंकाया, तीन प्रतिशत लोग चाहते हैं कि ममता बनर्जी फिर से सीएम बनें

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अब एक महीने से भी कम समय बचा है। 294 विधानसभा के लिए 23 और 29 अप्रैल 2026 को मतदान हो रहा है लेकिन ठीक पहले कई ओपिनियन पोल सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में वोटवाइब का ओपिनियन पोल सामने आया है। ओपिनियन पोल सीएनएन-न्यूज18 जारी किया गया है। फिर सरकार बनाएगी रोबोटइस पोल के मुताबिक बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक बार फिर सरकार बन सकती है, लेकिन इस बार उनका योगदान कम हो सकता है। 294 मेगासिटी में 174 से 184 लाॅकडाउन मिल हो सकते हैं, जबकि राज्य में 148 लाेगाें का लाेकांश मिल सकता है। साथ ही बीजेपी की स्थिति पहले से मजबूत होती दिख रही है और उसे 108 से 118 गंतव्य मिलने का अनुमान है। सर्वे में 48.8 प्रतिशत लोगों ने ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री चुना है तो कहीं और और 33.4 प्रतिशत लोगों ने बीजेपी के शुभेंदु पदाधिकारी को चुना है. ताज़ा में सर्वे भव्य भाजपा की सजावटओपिनियन पोल के अनुसार कांग्रेस और सीपीएम जैसे अन्य उपकरण इस बार बड़ी चुनौती नहीं देंगे और उन्हें सिर्फ 0 से 4 दर्शक मिलने का अनुमान है। वोटवाइब के 23 मार्च को जारी पिछले ओपिनियन पोल में मोशन पिक्चर्स को 184-194 और बीजेपी के लिए 98-108 के रिव्यू का अनुमान लगाया गया था, लेकिन सर्वे में बीजेपी के रिव्यूज का अनुमान लगाया गया था, जबकि रिव्यूज का अनुमान थोड़ा कम किया गया है। 2021 के पश्चिम बंगाल क्षेत्र के चुनाव में 215 इंच की बढ़त हासिल की गई, जबकि बीजेपी को 77 सीटें मिलीं. हालांकि उस समय बीजेपी ने ममता बनर्जी की जीत पर ज्यादा असर नहीं डाला लेकिन इस बार के चुनाव में बीजेपी के लिए अहम साबित हुई। इससे पहले राज्य में उसकी स्थिति काफी सीमित थी, लेकिन इस चुनाव के बाद उसकी स्थिति मजबूत हो गई। कहां-कहां की टक्करऐसे में अगर ताजा अनुमान सही साबित होता है तो बंगाल में एक बार फिर से सरकार बन सकती है। हालाँकि इस बार बीजेपी के रूप में सबसे मजबूत ताकत का सामना करना पड़ सकता है। वार डेटा की बात करें तो मेदिनीपुर में लेवल 22-24 और बीजेपी 32-34 पर पहुंच सकती है। वहीं मालदा में लेवल पर 31-33, बीजेपी को 15-17 और अन्य को 0-2 पर बढ़त मिल सकती है। ये इलाका ऐसे माने जा रहे हैं, जहां मुकाबला बेहद कड़ा होगा। ये भी पढ़ें मौसम पूर्वानुमान: ‘दिल्ली-यूपी में होगी बारिश, 6 अप्रैल तक….’ IMD की चेतावनी, जानें देश में इस सप्ताह कैसा रहेगा मौसम
अटारी-वाघा सीमा पर रिट्रीट का समय बदला:अब शाम 5:30 से 6 बजे तक होगी सेरेमनी, आज से नई टाइमिंग लागू

अमृतसर स्थित भारत-पाकिस्तान अटारी सीमा पर होने वाली प्रसिद्ध रिट्रीट सेरेमनी के समय में बदलाव किया गया है। अटारी-वाघा बॉर्डर पर हर रोज होने वाली इस देशभक्ति से भरपूर सेरेमनी को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। नए निर्णय के अनुसार अब रिट्रीट सेरेमनी शाम 5:30 बजे से शुरू होकर 6:00 बजे तक चलेगी। इससे पहले रिट्रीट सेरेमनी 5 बजे शुरू होकर साढ़े 5 बजे खत्म हो रही थी। मौसम और दिन की घटती-बढ़ती रोशनी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह फैसला लिया है। अधिकारियों का कहना है कि दर्शकों को बेहतर अनुभव देने और सुरक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए समय में यह बदलाव जरूरी था। यह नया समय आज यानी 1 अप्रैल से लागू कर दिया गया है। यानी अब जो भी पर्यटक या स्थानीय लोग इस सेरेमनी को देखने की योजना बना रहे हैं, उन्हें नए समय के अनुसार ही पहुंचना होगा। बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी भारत और पाकिस्तान के सैनिकों द्वारा की जाने वाली एक विशेष परंपरा है, जिसमें जोश, अनुशासन और देशभक्ति की झलक देखने को मिलती है। हजारों लोग बनते हैं आयोजन का हिस्सा हर दिन हजारों लोग इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं और भारत माता की जय तथा वंदे मातरम जैसे नारों से माहौल देशभक्ति से गूंज उठता है। इस बदलाव के बाद उम्मीद है कि लोग समय से पहुंचकर इस अद्भुत दृश्य का आनंद ले पाएंगे। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे समय का विशेष ध्यान रखें और निर्धारित समय से पहले ही पहुंचकर अपनी सीट सुनिश्चित करें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।
डेगरहट जंगल में दिखा बाघ, मुख्य मार्ग 45 मिनट बंद:वन विभाग ने सुरक्षित पार कराया, ग्रामीण डरे

सतना जिले के मझगवां वन परिक्षेत्र के डेगरहट जंगल में मंगलवार शाम एक बाघ दिखा। बाघ के मूवमेंट के कारण मुख्य मार्ग को लगभग 45 मिनट तक बंद रखना पड़ा। वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों की मदद से बाघ को सुरक्षित जंगल के दूसरी ओर पहुंचाया। जानकारी के अनुसार, बाघ पुलिया के पास से निकलकर सड़क पार कर जंगल के दूसरे हिस्से में जाने का प्रयास कर रहा था। हालांकि, सड़क पर लगातार वाहनों की आवाजाही के कारण वह झाड़ियों के पास ही बैठा रहा। ग्रामीणों ने बाघ को देखकर तत्काल वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। डीएफओ मयंक चांदीवाल ने बताया कि यह लगभग 4 से 5 वर्ष का नर बाघ है। उसने हाल ही में क्षेत्र में एक बैल का शिकार किया था और अपने निर्धारित क्षेत्र की ओर लौट रहा था। लोगों की आवाजाही से असहज महसूस करने के कारण वह सड़क पार नहीं कर पा रहा था। स्थिति को देखते हुए, डीएफओ के निर्देश पर मुख्य मार्ग को लगभग 45 मिनट तक बंद कराया गया। रास्ता खाली होते ही बाघ सुरक्षित रूप से सड़क पार कर जंगल के दूसरी ओर चला गया। बाघ की मौजूदगी से आसपास के ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है। वन विभाग लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रहा है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। मझगवां रेंज में वर्तमान में लगभग 30 बाघ और 4 बाघिनों की मौजूदगी बताई जा रही है। वर्ष 2016 से इस क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण अब तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। यह इलाका पन्ना नेशनल पार्क और उत्तर प्रदेश के रानीपुर अभयारण्य को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण वन्यजीव कॉरिडोर है, जिससे इसकी पारिस्थितिकीय अहमियत बढ़ जाती है।
जेल में हर कैदी पर CCTV से निगरानी:15 मार्च को शाजापुर जेल से कैदी हुआ था फरार; लापरवाही से जेल प्रहरी सस्पेंड

शाजापुर जिला जेल से 15 मार्च को एक कैदी फरार हो गया था। इसके बाद से प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। फरारी के बाद अब जेल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती इतनी बढ़ा दी गई है कि हर कैदी की हर हरकत पर पैनी नजर रखी जा रही है। जेल प्रशासन अब ‘नो रिस्क’ मोड में आ गया है। कैदियों पर नजर रखने के लिए CCTV कैमरों की मॉनिटरिंग के लिए तीन जेल प्रहरियों की अलग से ड्यूटी लगाई गई है। ये प्रहरी 24 घंटे स्क्रीन पर नजर गड़ाए बैठे हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ा जा सके। 20 फीट दीवार फान कर भागे कैदी सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 20 फीट ऊंची दीवार के बावजूद कैदी जेल से भाग कैसे गया। जांच में सामने आया कि फरार कैदी ने जेल की कैंटीन में काम करते हुए पानी के पाइप और तार का जुगाड़ कर दीवार फांद दी। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। हालांकि पुलिस ने तेजी दिखाते हुए फरार कैदी को 18 मार्च को छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार कर लिया था और 19 मार्च को शाजापुर लाकर उससे पूछताछ की गई। परिवार की मजबूरी बनी फरारी की वजह पूछताछ में कैदी ने बताया कि वह पिछले पांच महीनों से जमानत नहीं होने के कारण मानसिक तनाव में था। साथ ही उसकी पत्नी और दो छोटे बच्चे आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। परिवार से मिलने की बेचैनी ही उसे इस खतरनाक कदम तक ले गई। कैदी ने पहले किया ‘रेकी’, फिर बनाया प्लान जिला जेल अधीक्षक दुष्यंत परागे के अनुसार, कैदी ने पहले जेल प्रहरियों की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखी और फिर पूरी योजना बनाकर फरार हुआ। यानी यह घटना अचानक नहीं,बल्कि सोची-समझी साजिश का नतीजा थी। घटना के बाद जेल में लगे पुराने हैलोजन सिस्टम की अंडरग्राउंड वायरिंग को बंद कर दिया गया है, ताकि किसी भी तरह के दुरुपयोग की संभावना खत्म हो सके। साथ ही जेल प्रशासन ने मुख्यालय से अतिरिक्त स्टाफ की मांग भी की है, क्योंकि वर्तमान में करीब 10 जेल प्रहरियों की कमी बनी हुई है। लापरवाही से जेल प्रहरी सस्पेंड इस पूरे मामले में लापरवाही सामने आने पर जेल प्रहरी प्रदीप वर्मा को सस्पेंड कर दिया गया है। प्रशासन अब किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। फिलहाल जिला जेल में सुरक्षा का ऐसा घेरा तैयार किया गया है, जिसमें बिना नजर आए कोई हलचल करना लगभग नामुमकिन हो गया है। CCTV, अतिरिक्त निगरानी और सख्त अनुशासन के बीच अब जेल प्रशासन हर हाल में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने में जुटा है। कुल मिलाकर, एक फरारी ने जहां सिस्टम की कमजोरी उजागर की, वहीं अब उसी ने सुरक्षा को ‘टाइट’ भी कर दिया है।
World News Updates: Iran War | Russia Plane Crash

11 मिनट पहले कॉपी लिंक रूस का मिलिट्री ट्रांसपोर्ट प्लेन An-26 मंगलवार को क्रीमिया में क्रैश हो गया। इसमें 23 यात्री और 6 क्रू सदस्य सवार थे। सभी की मौके पर ही मौत हो गई। रूसी न्यूज एजेंसी तास के मुताबिक, पहले विमान से संपर्क टूट गया था। बाद में यह चट्टान से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। शुरुआती जांच में हादसे की वजह तकनीकी खराबी मानी जा रही है। इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की जांच जारी है। An-26 प्लेन सोवियत दौर का सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान है। इसे एंटोनोव कंपनी ने बनाया था। इसकी पहली उड़ान 1969 में हुई थी। इसका इस्तेमाल सैनिकों, हथियारों और सैन्य सामान को ले जाने के लिए किया जाता है। इसमें एक साथ दर्जनों सैनिक या भारी कार्गो ले जाया जा सकता है। इस विमान की खासियत है कि यह छोटे और खराब रनवे से भी उड़ान भर सकता है। इससे इसे दुर्गम और युद्ध क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जाता है। इसके पीछे बड़े कार्गो दरवाजे से एयरड्रॉप ऑपरेशन भी किए जा सकते हैं। 50 साल से ज्यादा पुराने डिजाइन के कारण इसकी सुरक्षा पर सवाल उठते रहे हैं। समय-समय पर इसके हादसे भी सामने आए हैं। आज भी कई देशों में यह विमान इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन धीरे-धीरे इसे आधुनिक ट्रांसपोर्ट विमानों से बदला जा रहा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
World News Updates: Iran War | Russia Plane Crash

41 मिनट पहले कॉपी लिंक रूस का मिलिट्री ट्रांसपोर्ट प्लेन An-26 मंगलवार को क्रीमिया में क्रैश हो गया। इसमें 23 यात्री और 6 क्रू सदस्य सवार थे। सभी की मौके पर ही मौत हो गई। रूसी न्यूज एजेंसी तास के मुताबिक, पहले विमान से संपर्क टूट गया था। बाद में यह चट्टान से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। शुरुआती जांच में हादसे की वजह तकनीकी खराबी मानी जा रही है। इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की जांच जारी है। An-26 प्लेन सोवियत दौर का सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान है। इसे एंटोनोव कंपनी ने बनाया था। इसकी पहली उड़ान 1969 में हुई थी। इसका इस्तेमाल सैनिकों, हथियारों और सैन्य सामान को ले जाने के लिए किया जाता है। इसमें एक साथ दर्जनों सैनिक या भारी कार्गो ले जाया जा सकता है। इस विमान की खासियत है कि यह छोटे और खराब रनवे से भी उड़ान भर सकता है। इससे इसे दुर्गम और युद्ध क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जाता है। इसके पीछे बड़े कार्गो दरवाजे से एयरड्रॉप ऑपरेशन भी किए जा सकते हैं। 50 साल से ज्यादा पुराने डिजाइन के कारण इसकी सुरक्षा पर सवाल उठते रहे हैं। समय-समय पर इसके हादसे भी सामने आए हैं। आज भी कई देशों में यह विमान इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन धीरे-धीरे इसे आधुनिक ट्रांसपोर्ट विमानों से बदला जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… चीन- खाली फ्लैट खरीद परिजनों की अस्थियां रखने पर बैन:कब्रिस्तान महंगा होने पर लोग प्रॉपर्टी खरीद रहे थे, उसमें अस्थियां रखते थे चीन की सरकार एक नया कानून लाने जा रही है, जिसके तहत लोग अपने परिजनों की राख को खाली अपार्टमेंट में नहीं रख पाएंगे। इसे ‘बोन ऐश अपार्टमेंट’ कानून कहा जा रहा है। इसके साथ ही सार्वजनिक कब्रिस्तानों के अलावा कहीं और शव दफनाने या मकबरे बनाने पर भी रोक होगी बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में कब्रिस्तान लगातार महंगा होता जा रहा है। ऐसे में ‘गुहुई फांग’ यानी ऐसे फ्लैट्स का चलन बढ़ गया है, जहां लोग अपने परिजनों की अस्थियां रखते हैं। तेजी से शहरीकरण और बुजुर्ग आबादी बढ़ने के कारण शहरों में कब्रिस्तान की जमीन कम होती जा रही है और उनकी कीमत बहुत ज्यादा बढ़ गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
‘महिलाओं के लिए कोई सुरक्षा नहीं’: तमिलनाडु चुनाव रैली में अन्नाद्रमुक के पलानीस्वामी ने द्रमुक पर निशाना साधा | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:01 अप्रैल, 2026, 07:38 IST तमिलनाडु के शिवकाशी में एक रैली को संबोधित करते हुए पलानीस्वामी ने आरोप लगाया कि राज्य में महिलाओं के लिए कोई सुरक्षा नहीं है और मारिजुआना खुलेआम बेचा जा रहा है। एआईएडीएमके सुप्रीमो एडप्पादी के पलानीस्वामी। (पीटीआई/फ़ाइल) ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी ने मंगलवार को एक चुनावी रैली के दौरान राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर डीएमके सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि तमिलनाडु में महिलाओं या पुलिस के लिए कोई सुरक्षा नहीं है। 23 अप्रैल को राज्य विधानसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु के शिवकाशी में एक रैली को संबोधित करते हुए, पलानीस्वामी ने आश्वासन दिया कि अगर पार्टी सत्ता में आती है, तो वह तीन महीने के भीतर गांजा तस्करी को खत्म कर देगी। उन्होंने शिवकाशी में आतिशबाजी और माचिस उद्योगों के लिए समर्थन का भी आश्वासन दिया। हिंदुस्तान टाइम्स ने उनके हवाले से कहा, “जब मेरे मुख्यमंत्री रहते हुए आतिशबाजी उद्योग को संकट का सामना करना पड़ा, तो मैंने 20 सांसदों की एक समिति का नेतृत्व करते हुए केंद्रीय मंत्री से मुलाकात की और मांग की कि आतिशबाजी की बिक्री पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए।” “अगर अन्नाद्रमुक सरकार दोबारा बनी तो इन उद्योगों की रक्षा की जाएगी।” पलानीस्वामी ने डीएमके पर निशाना साधा अन्नाद्रमुक सुप्रीमो ने कावेरी-गुंडर नदी जोड़ परियोजना को रोकने के लिए द्रमुक सरकार की भी आलोचना की और कहा कि तमिलनाडु में सरकार बनने के बाद उनकी पार्टी इसे लागू करेगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य मेट्टूर बांध के अधिशेष पानी से नहरों, झीलों और तालाबों को भरना है। उन्होंने द्रमुक पर पिछली अन्नाद्रमुक सरकार के दौरान विरुधुनगर जिले में 400 करोड़ रुपये की लागत से एक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की स्थापना का श्रेय लेने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “इसके लिए 14,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे और मैंने व्यक्तिगत रूप से इसकी आधारशिला रखी थी। इससे पहले कि यह पूरा हो पाता, सरकार बदल गई।” उन्होंने यह भी कहा कि द्रमुक सरकार में महिलाओं या बुजुर्गों के लिए कोई सुरक्षा नहीं है। उन्होंने तर्क दिया, “क्या आप चाहते हैं कि ऐसी सरकार बनी रहे? एक ‘कठपुतली सीएम’ जो एक स्थायी डीजीपी भी नियुक्त नहीं कर सकता? एक राज्य तभी समृद्ध होगा जब कानून और व्यवस्था अच्छी होगी। डीएमके का एकमात्र विचार कमीशन, वसूली, भ्रष्टाचार है।” और पढ़ें: तमिलनाडु सीएम फेस 2026: DMK, AIADMK और बीजेपी का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार कौन होगा? रैली में पहुंचने पर बच्चों द्वारा प्रदर्शित एक बैनर की ओर इशारा करते हुए, पलानीस्वामी ने कहा, “देखें उस पर क्या लिखा है – केवल अन्नाद्रमुक सरकार महिलाओं के लिए सुरक्षित है। हम डीएमके को और नहीं चाहते।” उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य में खुलेआम मारिजुआना बेचा जा रहा है, जिसका बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। पलानीस्वामी की टिप्पणी तब आई जब तमिलनाडु 23 अप्रैल, 2026 को विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहा है, जहां वह अन्नाद्रमुक के मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। चुनावों में एआईएडीएमके के नेतृत्व वाला एनडीए डीएमके और कांग्रेस गठबंधन से भिड़ेगा, जिसके नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। (पीटीआई से इनपुट्स के साथ) जगह : शिवकाशी, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 01 अप्रैल, 2026, 07:38 IST समाचार राजनीति ‘महिलाओं के लिए कोई सुरक्षा नहीं’: तमिलनाडु की चुनावी रैली में अन्नाद्रमुक के पलानीस्वामी ने द्रमुक पर निशाना साधा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026(टी)एआईएडीएमके चुनाव रैली(टी)एडप्पादी के पलानीस्वामी(टी)डीएमके सरकार की आलोचना(टी)कानून और व्यवस्था तमिलनाडु(टी)महिला सुरक्षा तमिलनाडु
महाकाल के दरबार में अक्षय-टाइगर:नंदी के कान में कही मनोकामना, बोले- देश की तरक्की की कामना की; डिंपल कपाड़िया भी साथ थीं

उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के बॉलीवुड सितारों की आस्था देखने को मिली। प्रसिद्ध अभिनेता अक्षय कुमार, टाइगर श्रॉफ और वरिष्ठ अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया बाबा महाकाल के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे। नंदी हाल में बैठकर किया जाप, जल अर्पित कर लिया आशीर्वाद तीनों कलाकार सुबह करीब 6 बजे मंदिर पहुंचे। यहां नंदी हाल में बैठकर भगवान महाकाल के दर्शन किए और जाप करते नजर आए। अक्षय कुमार और टाइगर श्रॉफ ने नंदी जी का पूजन कर उनके कान में अपनी मनोकामना भी कही। इसके बाद तीनों ने गर्भगृह की देहरी से दर्शन कर भगवान को जल अर्पित किया। मंदिर से बाहर निकलते ही लगी फैंस की भीड़ दर्शन के बाद जैसे ही तीनों मंदिर से बाहर निकले, प्रशंसकों ने उन्हें घेर लिया। बड़ी संख्या में लोग सेल्फी और फोटो लेने के लिए उमड़ पड़े। मंदिर समिति ने किया सम्मान दर्शन के बाद मंदिर प्रबंध समिति की ओर से उप प्रशासक एसएन सोनी ने अक्षय कुमार, टाइगर श्रॉफ और डिंपल कपाड़िया का स्वागत और सत्कार किया।
फूल है या चमत्कार? पी लें एक गिलास शरबत, पूरे दिन रहें कूल-कूल, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर में भी फायदेमंद

Last Updated:April 01, 2026, 07:21 IST Palash Flower Benefits: पाचन तंत्र के लिए भी पलाश के फूलों का शरबत बेहद लाभकारी माना जाता है. यह गैस, कब्ज, दस्त और पेट में जलन जैसी दिक्कतों में राहत देता है. जिन लोगों को पेट में ज्यादा गर्मी की शिकायत रहती है, उनके लिए यह प्राकृतिक उपाय काफी लाभकारी साबित हो सकता है. सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में इन दिनों टेसू यानी पलाश के फूलों की बहार छाई है. लाल-नारंगी रंग के ये फूल जहां प्रकृति की खूबसूरती बढ़ाते हैं, वहीं आयुर्वेद में भी बेहद उपयोगी माने जाते हैं. खासकर गर्मियों में इनसे बना शरबत शरीर को ठंडक देने के साथ कई स्वास्थ्य समस्याओं में राहत पहुंचाता है. सीधी के आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए कहा कि पलाश के फूलों का शरबत शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद करता है. तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच यह शरबत लू से बचाव में सहायक होता है. इसके सेवन से थकान, सिरदर्द और बेचैनी जैसी समस्याएं भी कम होती हैं. गर्मी के मौसम में इसे नियमित रूप से पीने से शरीर को तरावट मिलती है और ऊर्जा बनी रहती है. उन्होंने कहा कि पाचन तंत्र के लिए भी पलाश का शरबत बेहद लाभकारी माना जाता है. यह गैस, कब्ज, दस्त और पेट में जलन जैसी समस्याओं में राहत देता है. जिन लोगों को पेट में अधिक गर्मी की शिकायत रहती है, उनके लिए यह प्राकृतिक उपाय काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. इसके अलावा यह शरीर में पित्त दोष को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे हाथ-पैरों में जलन और शरीर की अधिक गर्मी से राहत मिलती है. ब्लड शुगर नियंत्रित करने में सहायकडॉक्टर के अनुसार, पलाश के फूलों में एंटी-फंगल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-डायबिटिक गुण पाए जाते हैं. यह शरबत ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक होता है, बवासीर के लक्षणों में राहत देता है, त्वचा रोगों में लाभकारी है और लिवर को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है. साथ ही यह शरीर के वात और कफ दोष को संतुलित करने में भी सहायक माना जाता है. शरबत बनाने की आसान विधिपलाश का शरबत बनाने की विधि भी बेहद आसान है. सूखे फूलों को रातभर पानी में भिगो दें. वहीं ताजे फूलों को 2-3 घंटे तक भिगोना पर्याप्त होता है. इसके बाद उसी पानी को 5-10 मिनट तक हल्का उबाल लें. फिर इसे छानकर ठंडा कर लें और स्वाद के लिए इसमें मिश्री, नींबू का रस और थोड़ा भुना हुआ जीरा मिलाकर सेवन करें. सीमित मात्रा में करें सेवनहालांकि इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. अधिक मात्रा में पीने से पेट दर्द या दस्त की समस्या हो सकती है. यदि कोई व्यक्ति पहले से किसी बीमारी से ग्रसित है या दवा ले रहा है, तो सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. टेसू के फूलों को छाया में सुखाकर एयरटाइट डिब्बे में स्टोर किया जा सकता है, जिससे इन्हें सालभर तक सुरक्षित रखा जा सकता है. इन सूखे फूलों का उपयोग प्राकृतिक रंग, काढ़ा या शरबत बनाने में किया जा सकता है. गर्मी के मौसम में यह देसी और असरदार नुस्खा लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. Location : Sidhi,Madhya Pradesh First Published : April 01, 2026, 07:21 IST
हनुमान जन्मोत्सव भंडारों में सिंगल यूज प्लास्टिक बैन:बुरहानपुर निगम आयुक्त ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर दिए निर्देश, शहर में आज कई जगह कार्यक्रम

बुरहानपुर नगर पालिक निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव ने हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर सार्वजनिक भंडारों में सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। आयुक्त श्रीवास्तव ने बताया कि हर साल की तरह इस साल भी शहर में हनुमान जन्मोत्सव श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। इस दौरान विभिन्न मंदिरों और स्थानों पर भंडारों का आयोजन होगा। उन्होंने भंडारे आयोजित करने वाली सभी समितियों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि इन आयोजनों में प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक सामग्री, जैसे गिलास, प्लेट और दोने का उपयोग बिल्कुल न करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति या समिति इसका उपयोग करते हुए पाई जाती है, तो नगर निगम द्वारा नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह प्रतिबंध सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। वर्तनों और पत्तों वाले विकल्प का उपयोग करने के सलाह पर्यावरण अनुकूल विकल्पों के रूप में भंडारों में पानी पीने के लिए स्टील या तांबे के लोटे और ग्लास का उपयोग करने की सलाह दी गई है। प्रसादी वितरण के लिए केले के पत्तल, अन्य वृक्षों के पत्तल या पुनः उपयोग में आने वाले बर्तनों का प्रयोग करने को प्राथमिकता देने को कहा गया है। नगर निगम ने सार्वजनिक भंडारों, धार्मिक आयोजनों और सड़क किनारे लगने वाले लंगरों में सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लागू किया है। उल्लंघन की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों या समितियों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।






