लहसुन की तासीर कैसी होती है? जानिए लहसुन गर्म है या ठंडा, कब खाना सही है और किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए

Lahsun ki Taseer Kaisi Hoti Hai: रसोई में इस्तेमाल होने वाली छोटी सी चीज लहसुन सिर्फ स्वाद ही नहीं बढ़ाती बल्कि सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद मानी जाती है. लगभग हर भारतीय किचन में लहसुन का इस्तेमाल होता है, चाहे वह तड़का हो, चटनी हो या सब्जी. लेकिन अक्सर लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है कि लहसुन की तासीर आखिर कैसी होती है, क्या यह गरम होती है या ठंडी. कुछ लोग सर्दियों में ज्यादा लहसुन खाते हैं, जबकि गर्मियों में इससे बचने की सलाह दी जाती है. ऐसे में सही जानकारी होना बहुत जरूरी है ताकि आप इसे सही तरीके से अपने खानपान में शामिल कर सकें. आयुर्वेद और घरेलू अनुभव दोनों ही इस बात पर जोर देते हैं कि लहसुन शरीर में गर्मी पैदा करता है, लेकिन इसका सही उपयोग करने पर यह कई समस्याओं से राहत भी दिलाता है. आइए अब समझते हैं कि लहसुन की तासीर कैसी होती है और इसे कब और कैसे खाना चाहिए. लहसुन की तासीर कैसी होती हैलहसुन की तासीर सामान्य तौर पर गरम मानी जाती है. इसका मतलब यह है कि यह शरीर में गर्मी बढ़ाने का काम करता है. आयुर्वेद के अनुसार लहसुन शरीर के अंदर की ठंडक को कम करता है और खून के संचार को बेहतर बनाता है. यही कारण है कि सर्दियों में लहसुन का सेवन ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. यह शरीर को अंदर से गर्म रखता है और ठंड से होने वाली परेशानियों से बचाने में मदद करता है. लहसुन गरम होता है या ठंडाअगर सीधे शब्दों में कहा जाए तो लहसुन गरम प्रकृति का होता है. यह पाचन को तेज करता है और शरीर में ऊर्जा बढ़ाता है. यही वजह है कि जिन लोगों को बार बार सर्दी, खांसी या जुकाम होता है, उन्हें लहसुन खाने की सलाह दी जाती है. हालांकि इसका ज्यादा सेवन करने से शरीर में अधिक गर्मी भी हो सकती है, इसलिए संतुलन बहुत जरूरी है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. गर्मियों में लहसुन खाना सही है या नहींगर्मियों में लहसुन खाया जा सकता है, लेकिन कम मात्रा में. क्योंकि इसकी तासीर गरम होती है, ज्यादा खाने से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है, जिससे मुंह में छाले, एसिडिटी या जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अगर आप गर्मियों में लहसुन खा रहे हैं तो इसे दही, छाछ या हरी सब्जियों के साथ लेना बेहतर रहता है ताकि इसकी गर्म तासीर संतुलित हो सके. सर्दियों में लहसुन के फायदेसर्दियों में लहसुन खाना बहुत फायदेमंद माना जाता है. यह शरीर को गर्म रखता है और इम्युनिटी को मजबूत करता है. साथ ही यह जोड़ों के दर्द और सर्दी जुकाम में राहत देता है. कई लोग सर्दियों में सुबह खाली पेट लहसुन की कली खाते हैं, जिससे शरीर को ताकत मिलती है और पाचन भी बेहतर होता है. किन लोगों को लहसुन कम खाना चाहिएहर चीज हर किसी के लिए सही नहीं होती, ठीक उसी तरह लहसुन भी कुछ लोगों को कम मात्रा में ही खाना चाहिए. जिन लोगों को ज्यादा गर्मी की समस्या होती है, पेट में जलन रहती है या जिन्हें एसिडिटी की परेशानी होती है, उन्हें लहसुन का सेवन सीमित रखना चाहिए. इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी डॉक्टर की सलाह लेकर ही लहसुन का सेवन करना चाहिए. लहसुन खाने का सही तरीकालहसुन को कच्चा या पकाकर दोनों तरह से खाया जा सकता है, लेकिन कच्चा लहसुन ज्यादा असरदार माना जाता है. सुबह खाली पेट एक या दो कली लहसुन खाने से शरीर को कई फायदे मिल सकते हैं. हालांकि अगर आपको इसका स्वाद या असर तेज लगता है तो इसे हल्का भूनकर या खाने में मिलाकर भी खा सकते हैं. लहसुन से जुड़े कुछ जरूरी टिप्सलहसुन का ज्यादा सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे शरीर में गर्मी बढ़ सकती है. हमेशा संतुलित मात्रा में ही इसका सेवन करें. अगर आपको कोई खास स्वास्थ्य समस्या है तो लहसुन को नियमित खाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहेगा. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
नंदीग्राम से भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी के पास ना गाड़ी ना गहना, जानिए कितनी है संपत्ति

सुवेंदु अधिकारी के पास कितनी संपत्ति: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी 26वें विधानसभा चुनाव में दो प्राथमिक नंदीग्राम और भवानीपुर से चुनावी मैदान में हैं। उन्होंने नंदीग्राम से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल किया है। सुवेंदु अधिकारी ने अपने नामांकन पत्र में अपनी चल और अचल संपत्ति के बारे में क्या बताया? और विधानसभा के सुपरमार्केट नेताओं के नाम पर कोई कार नहीं है? यहां हमने आपको बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने फिडेविट में बताया है कितने आइटम की घोषणा की है. सुवेंदु अधिकारी ने 30 मार्च को अपना फिडेविट जमा किया था नंदीग्राम के उम्मीदवार के तौर पर सुवेंदु अधिकारी ने 30 मार्च को अपना फिडेविट दौरा किया था। उन्होंने इस फिडेविट में पिछले 5 वित्तीय वर्ष में हुई अपनी आय के बारे में बताया है। नंदीग्राम से उम्मीदवार सुवेंदु ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में उनकी आय 8 लाख 13 हजार 170 रुपये थी, जबकि वित्तीय वर्ष 2021-22 में उनकी आय 8 लाख 8 हजार 461 रुपये थी। कितनी संपत्ति के मालिक हैं सुवेंदु अधिकारी? साल 2022-23 के वित्तीय वर्ष में सुवेंदु अधिकारी की आय 8 लाख 78 हजार 400 रुपये थी, तो वित्तीय वर्ष 2023-24 में उनकी आय कम रही। उस वित्तीय वर्ष में उनकी आय 10 लाख 37 हजार 160 रुपये थी। हालाँकि, वित्तीय वर्ष 2024-25 में पश्चिम बंगाल क्षेत्र के स्थिर कर्मचारी नेताओं की आय में काफी वृद्धि हुई और उनकी आय 17 लाख 38 हजार 590 रुपये हो गई। सुवेंदु अधिकारी ने अपनी चल और अचल संपत्ति की संपत्ति की भी जानकारी दी। उन्होंने शेल्फ़ डॉक्यूमेंट्री और फ़्रांसीसी फ़ंड के साथ कई फ़ील्ड में जांच का भी ज़िक्र किया, जिसमें कुल मिलाकर, सुवेंदु की चल संपत्ति 2457600.01 रुपये है, यानी उनके पास 24 लाख 57 हज़ार 600 रुपये की चल संपत्ति है। व्यापारिक नेताओं के पास ना गाड़ी है और ना गहना सुवेंदु अधिकारी ने अपने एफिडेविट में बताया कि उनके पास कोई कार नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी कोई नजदीकी या कीमती संपत्ति नहीं है। उन्होंने अचल संपत्ति का दस्तावेजीकरण करते हुए बताया कि आगरा में खेती की जमीन में उनका हिस्सा है और उनके पास नंदीग्राम में 1.98 एकड़ जमीन भी है। कुल मिलाकर, उनका नाम 2.46 पर है। आगरा में खेती की जमीन परिवार से विरासत में मिली थी और नंदीग्राम में खेती की जमीन उन्हें दान में मिली थी। उन्होंने बताया कि आगरा में खेती की जमीन की अधिकतम कीमत 1 लाख 5 हजार रुपये है और नंदीग्राम में उनके नाम पर खेती की जमीन की कीमत 8 लाख रुपये है। (टैग्सटूट्रांसलेट)राजनीतिक समाचार(टी)सुवेंदु अधिकारी(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव की तारीख जिलेवार 2026(टी)कोलकाता चुनाव की तारीख 2026(टी)2026 पश्चिम बंगाल में वोट तारीख और समय(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 भाजपा उम्मीदवार(टी)पश्चिम बंगाल सीएम चुनाव अगली तारीख(टी) समाचार(टी)सुवेंदु अधिकारी(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव की तारीख (जिलावार) 2026(टी)कोलकाता चुनाव की तारीख 2026(टी)पश्चिम बंगाल में मतदान की तारीख और समय 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 बीजेपी उम्मीदवार(टी)पश्चिम बंगाल सीएम चुनाव की अगली तारीख
चूहा भगाने के टिप्स: चूहा भगाने के टिप्स: चूहे की धमाचौकड़ी से हैं परेशान तो अपनाएं ये देसी तरीका, होश से ही रातों-रात हो जाएं गायब

चूहा हटाने के उपाय: घर में आतंक का आतंक एक बड़ी समस्या बन गई है। ये सिर्फ घर के नाम में ही गंदगी नहीं फैलाते, इसके साथ ही कीमती सामान को भी कुतरकर भारी नुकसान पहुंचाते हैं। घर पे पड़े बुनियादी सुविधाओं को छोड़ देते हैं, फ़्लोरिडा के अंदर अपना घर बना लेते हैं। इस प्रकार के प्रतिबिंबों के अंदर के भाग और खाली होते हैं, जो कि चहारदीवारी को छिपाने और अन्य आकृतियों को बनाने के लिए सबसे सुरक्षिक स्थान होते हैं। अगर समय रहते ही नियंत्रण नियंत्रण न पाया जाए, तो ये धीरे-धीरे पूरा फर्नीचर खोखला कर सकते हैं। प्रशिक्षुओं के लिए कुछ देसी उपाय, रैना अंधेरी से पता लगाया जा सकता है। चहुँओर को भागने के लिए कुछ सिलाई की चीज़ें हैं, जो काफी मात्रा में विकसित हो सकती हैं। चॉथ को पुदीने की पसन्द बिल्कुल पसंद नहीं आती है। इसलिए रुई के फाहों में पुदीने का तेल शामिल रहता है, जिसे बनाए रखने से वे तुरंत भाग जाते हैं। चहरे को लहसुन की गंध भी रास नहीं आती। लहसुन की कुछ कलियों को नीचे या अंदर से देखना मुश्किल हो जाता है। वह तेजी से भाग जाती हैं और एएस-पास भी नहीं भटकती हैं। लाल मिर्च पाउडर को भी दूर रखने का एक बेहतरीन तरीका माना जाता है। इसके खण्डित गंध के पास से भी वह संपर्क में हैं, क्योंकि काली मिर्च की जलन से बचना चाहते हैं। इसके साथ ही फिनाइल की गोली या नेफथलीन बॉल्स का भी उपयोग किया जा सकता है। विभिन्न गंधों के लिए अवलोकन के बाहर मौजूद है। अगर आप अपने मोती के नीचे या उसके नाजायज में इन शौकीनों को रखते हैं, तो चूहा कभी उसके पास नहीं भटकेगा। केवल देखभाल पर ध्यान देना बहुत जरूरी नहीं है, बल्कि घर की साफ-सफाई पर भी ध्यान देना बहुत जरूरी है। ऑक्सफोर्ड के आस-पास-पीने की चीजें न दें क्योंकि खाने वालों की तलाश में ही वहां तक पहुंच है। प्रतिदिन अपने घर के फर्नीचर की जांच करें और घर के फर्नीचर को बंद रखें। सही समय पर दी गई सावधानी और इन घरेलू उपायों की मदद से आप अपने घर और संपत्ति को खतरे के निशान से सुरक्षित रख सकते हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)चूहे हटाने के टिप्स(टी)चूहों से कैसे छुटकारा पाएं(टी)चूहों के लिए घरेलू उपचार(टी)चूहों के लिए पेपरमिंट ऑयल(टी)सोफे को चूहों से बचाएं(टी)प्राकृतिक कीट नियंत्रण(टी)घर में चूहों से बचाव(टी)हिंदी घरेलू टिप्स(टी)घर पर कृंतक नियंत्रण
AAPs Raghav Chadha Removed as Rajya Sabha Deputy Leader

नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक राघव चड्ढा 2022 से पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) ने गुरुवार को सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटा दिया। राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल को उनकी जगह दे दी। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर जानकारी दी। लेटर में कहा कि सदन में पार्टी की तरफ से बोलने का समय न दिया जाए। राघव 2022 से पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं। उनका कार्यकाल 2028 तक है। पार्टी ने इस फैसले की वजह नहीं बताई है। हालांकि, उन्होंने लंबे समय से पार्टी से दूरी बना ली थी और AAP को लेकर कोई बयान नहीं दे रहे हैं। 27 फरवरी को जब सीबीई की अदालत से अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब नीति मामले में राहत मिली, तब भी उन्होंने कोई बयान नहीं दिया था। राज्यसभा में वे लोगों से जुड़े गिग वर्कर्स और स्कूल फीस जैसे मुद्दे उठा रहे थे। AAP के फैसले के बाद राघव ने शेयर किया वीडियो इस घोषणा के बाद शाम 6.56 बजे राघव ने अपने X अकाउंट पर खुद का वीडियो पोस्ट किया। इसमें कई वीडियो के क्लिप्स हैं। वीडियो में राघव संसद में उठाए उनके जनहित के मुद्दों को सदन में रखने सुनाई दे रहे हैं। वहीं न्यूज एजेंसी एएनआई के सूत्रों के मुताबिक राज्यसभा सचिवालय ने गुरुवार को आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद राघव चड्ढा की जन विश्वास संशोधन विधेयक पर सदन में बोलने की मांग को अस्वीकार कर दिया। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि पार्टी की ओर से उनके लिए बोलने का समय निर्धारित नहीं किया गया था। संसद के पिछले दो सत्रों में राघव ने आम लोगों से जुड़े मुद्दे उठाए शीतकालीन सत्र 2025 गिग वर्कर्स का मुद्दा: ब्लिंकिट, जोमैटो और स्विगी जैसे डिलीवरी पार्टनर्स के कम वेतन, 10-मिनट डिलीवरी मॉडल और सामाजिक सुरक्षा की कमी। डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स: कॉपीराइट एक्ट 1957 में संशोधन की मांग की, ताकि शिक्षकों और इन्फ्लुएंसर्स को एल्गोरिदम और गलत ‘टेकडाउन’ से बचाया जा सके। स्वास्थ्य क्षेत्र: ‘एक देश, एक स्वास्थ्य उपचार’ (One Nation, One Health Treatment) की वकालत की और सरकारी अस्पतालों की बदहाली पर चिंता जताई। बजट सत्र 2026 खाद्य मिलावट: राज्यसभा में यूरिया और अन्य मिलावटों का मुद्दा उठाया। एयरपोर्ट पर सस्ता खाना: यात्रियों को सस्ता खाना मिले, इसके लिए सभी 150+ एयरपोर्ट्स के डिपार्चर एरिया में किफायती कैफे की मांग की। 28-दिन का रीचार्ज: मोबाइल रीचार्ज 28 दिन के बजाय पूरे कैलेंडर महीने (30 ये 31) का हो, बचा हुआ डेटा अगले महीने जुड़ जाए। बैंक पेनल्टी: मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगने वाले जुर्माने को पूरी तरह खत्म करने का प्रस्ताव दिया। संयुक्त इनकम टैक्स फाइलिंग: विवाहित जोड़ों के लिए एक साथ इनकम टैक्स फाइलिंग का विकल्प दिया जाए। पितृत्व अवकाशः भारत में पितृत्व अवकाश (paternity leave) को एक कानूनी अधिकार बनाया जाना चाहिए। अशोक मित्तल भी पंजाब से सांसद, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के फाउंडर अशोक मित्तल भी पंजाब से AAP के राज्यसभा सांसद हैं। पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के फाउंडर और चांसलर हैं। 2022 में राज्यसभा सांसद बने थे। राजनीति में आने से पहले वह कामयाब बिजनेसमैन रहे हैं। उनका परिवार ‘लवली ग्रुप’ का मालिक है, जो ऑटोमोबाइल और मिठाई (लवली स्वीट्स) के व्यवसाय से जुड़ा है। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के फाउंडर और चांसलर अशोक मित्तल पंजाब से AAP के राज्यसभा सांसद हैं। ————————————– ये खबर भी पढें… पंजाब सांसद राघव चड्ढा बने डिलीवरी बॉय,VIDEO:ठंड में लोगों के घर पहुंचाया सामान पंजाब से राज्यसभा सांसद और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता राघव चड्ढा डिलीवरी बॉय बने। वह खुद सामान लेकर लोगों के घर पहुंचे पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
AAPs Raghav Chadha Removed as Rajya Sabha Deputy Leader

2 मिनट पहले कॉपी लिंक राघव चड्डा 2022 से पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) ने गुरुवार को सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटा दिया है। उनकी जगह यह पोस्ट राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल दे दी है। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यह जानकारी दी। लेटर में कहा कि सदन में पार्टी की तरफ से बोलने का समय न दिया जाए। राघव 2022 से पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं। उनका कार्यकाल 2028 तक है। पार्टी ने इस फैसले की वजह नहीं बताई है। हालांकि उन्होंने लंबे समय से पार्टी से दूरी बना ली थी और AAP को लेकर कोई बयान नहीं दे रहे हैं। 27 फरवरी को जब एक निचली अदालत से अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब नीति मामले में राहत मिली, तब भी उन्होंने कोई बयान नहीं दिया था। राज्यसभा में भी वे गिग वर्कर्स और स्कूल की फीस जैसे उठा रहे थे। पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं अशोक मित्तल अशोक मित्तल भी पंजाब से AAP के राज्यसभा सांसद हैं। वे जालंधर के रहने वाले हैं। पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के फाउंडर और चांसलर हैं। 2022 में राज्यसभा सांसद बने थे। राजनीति में आने से पहले वह एक सफल उद्यमी रहे हैं। उनका परिवार ‘लवली ग्रुप’ का मालिक है, जो ऑटोमोबाइल और मिठाई (लवली स्वीट्स) के व्यवसाय से जुड़ा है। खबर अपडेट हो रही है… ————————————– ये खबर भी पढें… पंजाब सांसद राघव चड्ढा बने डिलीवरी बॉय,VIDEO:ठंड में लोगों के घर पहुंचाया सामान पंजाब से राज्यसभा सांसद और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता राघव चड्ढा डिलीवरी बॉय बने। वह खुद सामान लेकर लोगों के घर पहुंचे पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड पर गंभीर आरोप:डिसेबिलिटी प्रीमियर लीग के मैचों में दिव्यांग खिलाड़ी तो पानी पिला रहे, जो दिव्यांग नहीं वे खेलने उतरे

इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) पर आरोप है कि वह अपनी शीर्ष घरेलू प्रतियोगिता ‘डिसेबिलिटी प्रीमियर लीग’ में ऐसे खिलाड़ियों को खेलने की अनुमति दे रहा है, जो तय मानकों के अनुसार दिव्यांग नहीं हैं। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का सपना देखने वाले असली दिव्यांग क्रिकेटरों का रास्ता बंद हो रहा है। जय चरण और एलेक्स जर्विस जैसे इंग्लैंड के पूर्व इंटरनेशनल खिलाड़ियों के माता-पिता ने यह मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि लीग में उनके बेटों की जगह ऐसे खिलाड़ियों ने ले ली है, जो ईसीबी की लर्निंग डिसेबिलिटी (एलडी) यानी ‘सीखने की अक्षमता’ के मेडिकल मानदंड को पूरा ही नहीं करते हैं। एक अभिभावक का अनुमान है कि हालिया ड्राफ्ट में चुने गए 64 में से 12 खिलाड़ी बिना किसी दिव्यांगता के हैं। नियमों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस श्रेणी में खेलने के लिए खिलाड़ी का आईक्यू 75 या उससे कम होना चाहिए। लेकिन आरोप है कि ईसीबी ने लीग में ऐसे कई खिलाड़ियों को शामिल कर लिया है, जो इस सख्त पैमाने पर खरे नहीं उतरते। इनमें से कई तो मुख्यधारा का पेशेवर क्रिकेट खेलते हैं। उदाहरण के तौर पर इंग्लैंड की गेंदबाज एम्म अर्लोट, जिन्हें 2023 में ऑटिज्म और एडीएचडी डायग्नोज हुआ था, वो सामान्य क्रिकेट खेलती हैं। इस गड़बड़ी का सीधा असर होनहार खिलाड़ियों पर पड़ रहा है। लीग इतिहास में सर्वश्रेष्ठ बॉलिंग एवरेज और स्ट्राइक रेट वाले जय चरण और एक दशक से खेल रहे एलेक्स जर्विस को सिर्फ ‘ड्रिंक्स कैरियर’ (पानी पिलाने वाले) की भूमिका तक सीमित कर दिया गया। हताश होकर जय ने टूर्नामेंट ही छोड़ दिया। यॉर्कशायर डिसेबिलिटी टीम के मैनेजर ओवेन जर्विस का कहना है कि गलत तरीके से एलडी श्रेणी में रखे गए नए खिलाड़ी ही सारी बैटिंग और बॉलिंग कर रहे हैं। असली खिलाड़ियों को सिर्फ फील्डिंग करने के लिए छोड़ दिया गया है, जिससे उनका मनोबल टूट रहा है। ईसीबी के डिसेबिलिटी क्रिकेट मैनेजर रिचर्ड हिल ने भी एक ईमेल में माना था कि ‘हाई-फंक्शनिंग’ (बेहतर क्षमता वाले) खिलाड़ियों के लीग में आने से चुनौतियां बढ़ रही हैं। हालांकि, ईसीबी के एक प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान में कहा है कि लीग में सिर्फ 60 जगहें हैं, जिसके लिए कड़ा मुकाबला होता है। बोर्ड ने माना है कि पात्रता नियमों को लेकर बहस चल रही है और वे 2027 के सीजन तक इन पैमानों की समीक्षा करेंगे।
Baking Soda Used To Make Tourists Sick for Rescue Fraud

काठमांडू48 मिनट पहले कॉपी लिंक नेपाल में माउंट एवरेस्ट से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ शेरपा और ट्रेकिंग से जुड़े लोग मिलकर खाने में बेकिंग सोडा या एक खास दवा मिलाकर पर्यटकों को बीमार बनाकर महंगे हेलिकॉप्टर रेस्क्यू के जरिए करोड़ों का बीमा घोटाला कर रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल पुलिस ने इस मामले में 32 लोगों पर केस दर्ज किया है। इनमें ट्रेकिंग कंपनी के मालिक, हेलिकॉप्टर ऑपरेटर और अस्पताल से जुड़े लोग शामिल हैं। इन पर संगठित अपराध और धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में हेलिकॉप्टर रेस्क्यू बहुत महंगा होता है। इसमें 2.5 लाख से 6 लाख भारतीय रुपए लगते हैं। इंटरनेशनल बीमा कंपनियों से पैसा वसूली नेपाल के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू करना कई बार लोगों की जान बचाने का जरूरी तरीका होता है। वहां ऑक्सीजन कम होती है और मौसम अचानक खराब हो सकता है, इसलिए बीमार या फंसे ट्रेकर को जल्दी काठमांडू पहुंचाना जरूरी होता है। लेकिन इसी सिस्टम का गलत फायदा भी उठाया जा रहा है। जल्दीबाजी, साफ जानकारी की कमी और सही निगरानी न होने के कारण यहां एक बड़ा बीमा घोटाला भी चल रहा है। जांच में सामने आया कि कुछ शेरपा, ट्रेकिंग एजेंसियों के साथ मिलकर पर्यटकों के खाने में बेकिंग सोडा मिला देते हैं। इससे पर्यटकों को तेज पेट दर्द, उल्टी और अन्य दिक्कतें होती थीं, जो ऊंचाई पर होने वाली बीमारी (एल्टीट्यूड सिकनेस) जैसी लगती हैं। कुछ मामलों में लोगों को डायमॉक्स (एक दवा जो ऊंचाई की बीमारी के लिए दी जाती है) के साथ ज्यादा पानी पिलाकर ऐसे लक्षण पैदा किए गए, जिससे लगे कि हालत गंभीर है। जब पर्यटक बीमार पड़ जाते हैं, तो उन्हें महंगे हेलिकॉप्टरसे रेस्क्यू कराने के लिए दबाव बनाया जाता है। इसके बाद फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और फ्लाइट दस्तावेज बनाकर इंटरनेशनल बीमा कंपनियों से पैसे वसूले जाते हैं। नेपाल चार्टर सर्विस, एवरेस्ट एक्सपीरियंस एंड असिस्टेंस और माउंटेन रेस्क्यू जैसी कंपनियां इस घोटाले में मुख्य रूप से शामिल बताई जा रही हैं। अगर कोई व्यक्ति ऊंचाई पर बीमार हो जाए या घायल हो जाए, तो हेलीकॉप्टर उसे जल्दी अस्पताल तक पहुंचा सकता है। पहाड़ों में यही सबसे बड़ा सहारा होता है। बीमा कंपनियों के लिए सच का पता लगाना मुश्किल रिपोर्ट के मुताबिक रेस्क्यू के दौरान एक ही हेलिकॉप्टर में कई लोगों को बैठाया जाता है, लेकिन हर व्यक्ति के नाम से अलग-अलग पूरा बिल बीमा कंपनी को भेजा जाता है, जैसे हर किसी के लिए अलग उड़ान हुई हो। जैसे 4000 डॉलर की उड़ान को 12000 डॉलर का क्लेम बना दिया जाता है। इसके लिए फर्जी फ्लाइट रिकॉर्ड बनाए जाते हैं। अस्पताल में भी नकली कागज तैयार होते हैं। सीनियर डॉक्टर के डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल करके रिपोर्ट बनाई जाती है, जबकि वे डॉक्टर उस केस में शामिल ही नहीं होते। कई बार तो डॉक्टरों को खुद पता नहीं होता कि उनके नाम से कागज बनाए गए हैं। कुछ मामलों में फर्जी रिकॉर्ड बनाकर पर्यटकों को अस्पताल में भर्ती दिखाया गया, जबकि सच में वे उसी समय अस्पताल की कैंटीन में बैठकर बीयर पी रहे थे। विदेश में बैठी बीमा कंपनियों के लिए यह जांच करना बहुत मुश्किल होता है कि दूर पहाड़ों में असल में क्या हुआ। 3 बड़ी कंपनियो के 6 अफसर गिरफ्तार इस पूरे खेल में शेरपा, हेलिकॉप्टरकंपनियां, ट्रेकिंग एजेंसियां और अस्पताल मिलकर पैसा बांट लेते थे। जांच जनवरी में शुरू हुई थी, जब तीन बड़ी रेस्क्यू कंपनियों के 6 अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था। इस घोटाले के जरिए करीब 19.69 मिलियन डॉलर (लगभग 188 करोड़ रुपए) की धोखाधड़ी की गई। एक कंपनी पर आरोप है कि उसने 1,248 रेस्क्यू में से 171 फर्जी दिखाए और 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा का पैसा लिया। दूसरी कंपनी ने 471 में से 75 फर्जी रेस्क्यू दिखाकर करीब 8 मिलियन डॉलर कमाए। तीसरी कंपनी पर 71 फर्जी दावों के जरिए 1 मिलियन डॉलर से ज्यादा लेने का आरोप है। सरकारी पक्ष ने कुल 11.3 मिलियन डॉलर (करीब 107 करोड़ रुपए) के जुर्माने की मांग की है। कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए इसे प्राथमिकता दी है। पहली बार 2018 में मामला उजागर यह फर्जी रेस्क्यू घोटाला नया नहीं है। पहली बार 2018 में यह उजागर हुआ था। इसके बाद सरकार ने जांच कराई, 700 पेज की रिपोर्ट बनाई और सुधारों का ऐलान किया। 2019 में इस पर एक लंबी जांच रिपोर्ट भी प्रकाशित हुई। इसके बाद सरकार ने नियम बदलकर बिचौलियों को हटाया था और टूर ऑपरेटर को जिम्मेदार बनाया था, लेकिन पिछले साल जब नेपाल पुलिस की सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (CIB) ने फिर से जांच शुरू की, तो पता चला कि घोटाला रुका नहीं, बल्कि और बढ़ गया है। नेपाल पुलिस के अधिकारी मनोज कुमार केसी ने कहा कि जब अपराध पर कार्रवाई नहीं होती, तो वह बढ़ता जाता है, और यही वजह है कि यह बीमा घोटाला भी फैलता गया। नेपाल में पर्यटन से 10 लाख से ज्यादा लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है। हाल के समय में बढ़ते घोटालों के कारण कई अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियों ने नेपाल में ट्रेकिंग करने वाले पर्यटकों का बीमा कवर करना बंद कर दिया है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
पूंजी स्पष्टता, राजनीतिक लाभ: क्यों अमरावती चंद्रबाबू नायडू के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है | व्याख्याकार समाचार

आखरी अपडेट:02 अप्रैल, 2026, 13:17 IST मुख्यमंत्री अब अमरावती को फिर से एक स्थिर निवेश गंतव्य के रूप में पेश कर सकते हैं, जिससे उनके शासन की कहानी मजबूत होगी यह कदम चंद्रबाबू नायडू की मूल पूंजी दृष्टि को मान्य करता है और उनके पूर्ववर्ती की प्रमुख नीति को उलट देता है, जिससे उन्हें स्पष्ट वैचारिक जीत मिलती है। (एक्स @एनसीबीएन) राज्य के प्रशासनिक भविष्य पर वर्षों की अनिश्चितता के बाद, आखिरकार अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी घोषित कर दिया गया है। यह कदम पहले के तीन-पूंजी मॉडल को पलट देता है और मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के लिए एक बड़ी राजनीतिक और नीतिगत जीत है। एक विधायी कदम से अधिक, यह कदम अमरावती के लिए नायडू की दीर्घकालिक दृष्टि को मजबूत करता है और राज्य और केंद्र दोनों में उनकी राजनीतिक स्थिति को मजबूत करता है। आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026, पूर्वव्यापी प्रभाव से स्पष्ट रूप से अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी के रूप में नामित करने के लिए 2014 के पुनर्गठन कानून में संशोधन करता है। यह आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव का अनुसरण करता है और इसका उद्देश्य राजधानी मुद्दे पर “अस्पष्टता” को दूर करना है। वर्षों की अनिश्चितता समाप्त होती है लगभग पाँच वर्षों तक आंध्र प्रदेश की राजधानी का प्रश्न अनसुलझा रहा। पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने तीन-राजधानी मॉडल का प्रस्ताव रखा था, जिसका मतलब था कि अमरावती का भविष्य कानूनी और राजनीतिक रूप से विवादित रहेगा। नया कानून अमरावती को एकमात्र राजधानी के रूप में पुनर्स्थापित करता है और नायडू की नीति दिशा को वैधानिक स्पष्टता प्रदान करता है। इससे नायडू को मदद मिलती है क्योंकि यह उनकी मूल पूंजी दृष्टि को मान्य करता है और उनके पूर्ववर्ती की प्रमुख नीति को उलट देता है, जिससे उन्हें स्पष्ट वैचारिक जीत मिलती है। दिल्ली के समर्थन से बड़ी राजनीतिक जीत विधेयक का संसद में पारित होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नायडू की स्थिति के केंद्रीय समर्थन को दर्शाता है। तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) एनडीए सरकार में एक प्रमुख सहयोगी है और विधेयक लोकसभा में व्यापक समर्थन के साथ पारित किया गया था। यह राष्ट्रीय राजनीति में नायडू के निरंतर प्रभाव को दर्शाता है और भाजपा के नेतृत्व वाले केंद्र के सहयोगी के रूप में उनके प्रभाव को मजबूत करता है। वास्तव में, दिल्ली ने अपने राज्य-स्तरीय प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले नायडू का समर्थन किया है। नायडू के “ड्रीम कैपिटल” प्रोजेक्ट को पुनर्जीवित किया अमरावती लंबे समय से किसानों को शामिल करते हुए बड़े पैमाने पर भूमि पूलिंग मॉडल के माध्यम से निर्मित एक योजनाबद्ध, विश्व स्तरीय राजधानी शहर के नायडू के विकास दृष्टिकोण का केंद्र रहा है। कानूनी समर्थन अब सुरक्षित होने के बाद, इस परियोजना को कई वर्षों तक लटके रहने के बाद एक नया प्रोत्साहन मिला है। नायडू ने कहा है कि यह कदम अनिश्चितता को स्थायी रूप से समाप्त करता है और पूर्ण पैमाने पर विकास की अनुमति देता है। इससे पता चलता है कि यह नायडू के लिए उनकी विरासत से जुड़ी निजी राजनीतिक पूंजी है। निवेशकों के विश्वास को बढ़ावा इस विधेयक का सबसे बड़ा परिणाम आर्थिक है। सरकार और नीतिगत आवाजों के अनुसार, इस कदम से निवेशकों का विश्वास बहाल होने की उम्मीद है और बुनियादी ढांचे के लिए बड़े पैमाने पर फंडिंग खुल सकती है। वर्षों की नीतिगत उतार-चढ़ाव ने निवेश को धीमा कर दिया था और व्यवसायों के लिए अनिश्चितता पैदा कर दी थी। हालाँकि, मुख्यमंत्री अब अमरावती को फिर से एक स्थिर निवेश गंतव्य के रूप में पेश कर सकते हैं, जिससे उनकी शासन कथा मजबूत होगी। 5. विपक्ष से राजनीतिक जमीन वापस हासिल करना अमरावती मुद्दा एक प्रमुख राजनीतिक युद्ध का मैदान रहा है। वाईएसआरसीपी ने विधेयक का विरोध किया और अमरावती को आर्थिक रूप से अलाभकारी बताते हुए इसकी आलोचना करते हुए संसद से वाकआउट भी किया। संसद का समर्थन हासिल करके, नायडू ने पूंजीगत बहस में बढ़त हासिल कर ली और विपक्ष को एक “निश्चित” राष्ट्रीय निर्णय के खिलाफ खड़ा कर दिया। यह अमरावती को एक विवादास्पद मुद्दे से राजनीतिक लाभ में बदल देता है। 6. प्रतीकात्मक जीत नायडू ने अमरावती को तेलुगु गौरव और स्वाभिमान के प्रतीक के साथ-साथ किसानों के भूमि योगदान पर बनी परियोजना के रूप में स्थापित किया है। उनके समर्थकों के अनुसार, यह विधेयक केवल कानूनी मान्यता नहीं है, बल्कि उन बलिदानों की “नैतिक पुष्टि” है। यह मुख्यमंत्री को केवल प्रशासनिक तर्क ही नहीं, बल्कि भावनात्मक और क्षेत्रीय भावनाओं को संगठित करने की अनुमति देता है। जगह : आंध्र प्रदेश, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 02 अप्रैल, 2026, 13:17 IST समाचार समझाने वाले पूंजी स्पष्टता, राजनीतिक लाभ: क्यों अमरावती चंद्रबाबू नायडू के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती(टी)अमरावती एकमात्र राजधानी(टी)आंध्र प्रदेश राजधानी बिल(टी)एन चंद्रबाबू नायडू(टी)आंध्र प्रदेश पुनर्गठन संशोधन(टी)तीन-पूंजी मॉडल रिवर्सल(टी)अमरावती विकास परियोजना(टी)निवेशक विश्वास अमरावती
मुंबई के मेयर ने ‘चमत्कारी’ इलाज के लिए जैन गुरुदेव को श्रेय दिया, संजय राउत की प्रतिक्रिया ने बड़ा तूफान खड़ा कर दिया | मुंबई-न्यूज़ न्यूज़

आखरी अपडेट:02 अप्रैल, 2026, 13:08 IST तावड़े का ‘चमत्कार’ सबसे बुरे समय में आया – महाराष्ट्र पहले से ही अशोक खराट घोटाले से जूझ रहा है, जहां एक बाबा ने कथित तौर पर चमत्कार के नाम पर महिलाओं का शोषण किया था। तावड़े ने राउत पर पलटवार करते हुए कहा कि जो लोग क्षुद्र लाभ के लिए आलोचना करते हैं, उन्हें आत्मनिरीक्षण करना चाहिए – और केंद्रीय एजेंसियों के साथ अपने स्वयं के टकराव को याद करना चाहिए। मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने गले की पुरानी बीमारी को ठीक करने का श्रेय एक जैन गुरुदेव के आशीर्वाद को दिया, जिससे दो साल तक डॉक्टर परेशान रहे। एक शब्द – ‘चमत्कार’ (चमत्कार) – विश्वास के एक क्षण को पूर्ण राजनीतिक तूफान में बदलने के लिए संजय राउत को बस इतना ही करना पड़ा। मुंबई के मेयर ने असल में क्या कहा? मंगलवार शाम को बोरीवली में ‘भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव’ में बोलते हुए, मुंबई की मेयर रितु तावड़े – 2026 की शुरुआत में लंबे समय से विलंबित बीएमसी नागरिक चुनावों के बाद चुनी गई पहली मेयर और 44 वर्षों में इस पद को संभालने वाली केवल दूसरी भाजपा पार्षद – ने एक व्यक्तिगत खुलासा किया जिसकी कमरे में किसी को भी उम्मीद नहीं थी। उन्होंने बताया कि वह करीब दो साल से गले की पुरानी बीमारी से जूझ रही थीं। दवाइयाँ काम नहीं कर रही थीं। फिर वह राष्ट्रसंत परम गुरुदेव श्री नम्रमुनि महाराज, एक श्रद्धेय जैन भिक्षु, के पास पहुंचीं। “उसने मेरे लिए प्रार्थना की और मैं सचमुच उससे आश्चर्यचकित हूँ आशीर्वादमैं आप सभी के सामने इस तरह बोलने में सक्षम हूं,” उन्होंने सभा में कहा, अपने ठीक होने को एक ”बड़ा चमत्कार” बताया। विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा, जो वहां मौजूद थे, एक कदम आगे बढ़ गए – उन्होंने सुझाव दिया कि तावड़े का संपूर्ण राजनीतिक उत्थान, पार्षद से लेकर महापौर तक, नम्रमुनि के आशीर्वाद और “देवेंद्र जी और अमीत भाई” के समर्थन से जुड़ा हुआ था। के अनुसार द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया.मेयर केवल प्रमुख नेताओं की उपस्थिति वाले एक धार्मिक कार्यक्रम में व्यक्तिगत आस्था व्यक्त कर रहे थे। तो यह क्यों फटा? समय इससे अधिक ज्वलनशील नहीं हो सकता था। महाराष्ट्र इस समय अशोक खरात विवाद की चपेट में है – यह एक स्वयंभू बाबा से जुड़ा मामला है जिस पर चमत्कार और तांत्रिक प्रथाओं की आड़ में महिलाओं का यौन शोषण करने का आरोप है। राज्य में “चमत्कार” शब्द पहले से ही राजनीतिक रूप से प्रचलित था। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने मौके का फायदा उठाया। सीधे तौर पर खरात का नाम लिए बिना, उन्होंने संकेतात्मक टिप्पणियां कीं, जो तावड़े की “चमत्कारी” रिकवरी और आरोपी धर्मगुरु से जुड़े विवादित दावों के बीच समानता दर्शाती हैं। निहितार्थ स्पष्ट था – और गहरा उत्तेजक। मराठी समाचार आउटलेट TV9 मराठी उल्लेखनीय है कि अशोक खरात मामले ने पहले ही पूरे महाराष्ट्र को झकझोर कर रख दिया था, आरोपी ने कथित तौर पर महिलाओं पर हमला करने से पहले उन्हें चमत्कार और तांत्रिक शक्तियों के वादे के साथ लुभाया था। उस संदर्भ में, राउत की टिप्पणी जलती हुई माचिस की तरह सामने आई। तावड़े ने कैसे किया पलटवार? तीव्र रूप से, और व्यक्तिगत रूप से. अगले दिन अपनी टिप्पणी पर स्पष्टीकरण देते हुए तावड़े ने कहा कि मंगलवार रात उनके घर पहुंचने से पहले ही खबर को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया था। “यह गंदा और घृणित है। आप किसको किसके साथ जोड़ रहे हैं?” उन्होंने कवरेज को आपत्तिजनक और एकतरफा बताया। उन्होंने विश्वास और अंधविश्वास के बीच एक स्पष्ट रेखा खींची: “मैंने केवल अपना विश्वास व्यक्त किया – मैंने अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं दिया।” फिर उन्होंने सीधे तौर पर राउत पर निशाना साधा: “राउत समेत जो लोग छोटे फायदे के लिए इस तरह की आलोचना कर रहे हैं, उन्हें आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। कुछ राजनीतिक आवाजें कोई संयम नहीं दिखाती हैं, लेकिन जब केंद्रीय एजेंसियां उनके खिलाफ कार्रवाई करती हैं, तो वे अचानक गरिमा और सम्मान की बात करते हैं।” TV9 मराठी बताया गया कि इस प्रकरण के बाद से काफी ट्रोल हो रहे तावड़े ने भी स्पष्ट रूप से पूछा, “क्या उनके घर पर मां और बहनें नहीं हैं?” – उन लोगों के लिए एक तीखी फटकार, जिनके बारे में उन्हें लगता था कि उन्होंने बुनियादी शालीनता की सीमा पार कर ली है। क्या अन्य राजनेता ढेर हो गए? हाँ। मुंबई की पूर्व मेयर और शिवसेना (यूबीटी) नेता किशोरी पेडनेकर ने भी चमत्कारिक टिप्पणी पर तावड़े की आलोचना की और इसे व्यापक अशोक खरात विवाद से जोड़ा। पेडनेकर, जो नए मेयर के कार्यभार संभालने के बाद से तावड़े के लगातार आलोचक रहे हैं, पहले भी मेयर के आधिकारिक वाहन और बीएमसी स्थानांतरण विवाद से जुड़े फ्लैशिंग-लाइट विवाद पर तावड़े की आलोचना कर चुके हैं। यह विवाद राजनीति से परे क्यों मायने रखता है? अपने मूल में, यह व्यक्तिगत आस्था और सार्वजनिक जिम्मेदारी के बीच की पतली, विवादित रेखा के बारे में एक कहानी है। एक मेयर द्वारा किसी धार्मिक आयोजन में किसी आध्यात्मिक शख्सियत के प्रति समर्पण व्यक्त करना, अपने आप में असामान्य नहीं है – भारत का राजनीतिक जीवन आस्था के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। लेकिन मौजूदा माहौल में, जब एक धर्मगुरु घोटाला सुर्खियों में छाया हुआ है, एक सार्वजनिक पदधारक के लिए “चमत्कार” शब्द का एक पूरी तरह से अलग महत्व है। यह प्रकरण यह भी दर्शाता है कि महाराष्ट्र में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी कितनी तेजी से किसी भी क्षण को हथियार बनाने के लिए आगे बढ़ते हैं – और वे क्षण कितनी तेजी से किसी के नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं। हो सकता है कि तावड़े बस कुछ निजी बात साझा कर रहे हों। लेकिन मुंबई के राजनीतिक क्षेत्र में, व्यक्तिगत बयान शायद ही लंबे समय तक व्यक्तिगत रहते हैं। पहले प्रकाशित: 02 अप्रैल, 2026, 13:08 IST समाचार शहर मुंबई-समाचार मुंबई के मेयर ने ‘चमत्कारी’ इलाज के लिए जैन गुरुदेव को श्रेय दिया, संजय राउत के जवाब ने बड़ा तूफान खड़ा कर दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी
‘क्वीन 2’ में कंगना रनोट नजर आएंगी:अप्रैल के आखिर तक शुरू होगी शूटिंग, जानिए कैसी होगी कहानी

कंगना रनोट की फिल्म ‘क्वीन’ के सीक्वल की तैयारी शुरू हो गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि कंगना और डायरेक्टर विकास बहल ‘क्वीन 2’ की शूटिंग अप्रैल के अंत तक शुरू करेंगे। मिड डे की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि फिल्म की कहानी पहली फिल्म का सीधा सीक्वल नहीं होगी, बल्कि यह खुद को खोजने और आत्मनिर्भरता के विषयों को दिखाएगी। इस बार कंगना का किरदार रानी छोटे शहर की नहीं, बल्कि शहर में रहने वाली लड़की होगी। कहानी में रानी एक ऐसी स्थिति का सामना करेगी, जो उसे खुद को खोजने के सफर पर ले जाएगी। फिल्म में दिखाया जाएगा कि वह अपनी पहचान, समझ और हिम्मत से जिंदगी की मुश्किलों का सामना कैसे करती है। इस बार उसका सफर उसे भारत के अलग-अलग शहरों में ले जाएगा। पहली फिल्म के कलाकार इस बार नजर नहीं आएंगे फिल्म में कंगना के अलावा पहली फिल्म के कलाकार जैसे राजकुमार राव और लीजा हेडन नजर नहीं आएंगे। बताया जा रहा है कि सपोर्टिंग रोल्स के लिए थिएटर कलाकारों को चुना गया है। शूटिंग की शुरुआत मुंबई के एक स्टूडियो में होगी, जहां उत्तर भारतीय शहर और रानी के घर के सेट तैयार किए जाएंगे। इसके बाद टीम अन्य मेट्रो शहरों में शूटिंग करेगी। फिल्म की शूटिंग लगभग तीन महीने में पूरी की जाएगी। ‘क्वीन’ (2014) को फैंटम फिल्म्स और वायकॉम18 मोशन पिक्चर्स ने प्रोड्यूस किया था। फैंटम फिल्म्स के 2018 में बंद होने के बाद, ‘क्वीन 2’ को विकास बहल अपने बैनर तले बना रहे हैं। वे फिल्म के राइटर भी हैं। इस फिल्म के बाद कंगना रनौत ‘तनु वेड्स मनु 3’ की शूटिंग शुरू करेंगी, जिसका डायरेक्शन आनंद एल राय करेंगे।









