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Iran Missile Arsenal Intact: US Intel Report Reveals

Iran Missile Arsenal Intact: US Intel Report Reveals

वॉशिंगटन डीसी58 मिनट पहले कॉपी लिंक फाइल। लगातार पांच हफ्तों से जारी अमेरिका और इजराइल के हमलों के बावजूद ईरान की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अमेरिकी खुफिया आकलन, जिसका हवाला CNN ने तीन सूत्रों के जरिए दिया, बताता है कि ईरान के करीब आधे मिसाइल लॉन्चर अब भी सुरक्षित हैं और उसके पास हजारों आत्मघाती ड्रोन मौजूद हैं। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लॉन्चर ऐसे हैं जो हमलों के बाद जमीन के नीचे दब गए हैं या पहुंच से बाहर हो गए हैं, लेकिन नष्ट नहीं हुए। एक सूत्र का कहना है कि ईरान अब भी पूरे क्षेत्र में गंभीर नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है। ड्रोन ताकत भी काफी हद तक बची हुई है। अनुमान है कि ईरान की लगभग आधी ड्रोन क्षमता अब भी सक्रिय है। इसके अलावा तटीय रक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाली क्रूज मिसाइलें भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं, जो होर्मुज में जहाजों के लिए खतरा बनी हुई हैं। यह तस्वीर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और उनके प्रशासन के दावों से अलग है। ट्रम्प कई बार कह चुके हैं कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता काफी हद तक खत्म कर दी गई है और उसके हथियार उत्पादन ठिकाने तबाह कर दिए गए हैं। 9 मार्च 2026 को जारी एक वीडियो का स्क्रीनशॉट है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि यह ईरान का मिसाइल लॉन्चर था और इसी जगह पर अमेरिका ने हमला किया था। अमेरिकी मंत्री बोले- ट्रम्प की छवि खराब कर रहे गुमनाम सूत्र व्हाइट हाउस ने इन खुफिया आकलनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि गुमनाम सूत्र ट्रम्प की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार का दावा है कि ईरान की नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है, दो-तिहाई सैन्य उत्पादन क्षमता नष्ट हो गई है और अमेरिका तथा इजराइल को हवाई बढ़त हासिल है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कहा है कि ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों में करीब 90 प्रतिशत की कमी आई है। हालांकि जमीनी स्थिति इससे अलग संकेत देती है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार 12,300 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद ईरान की क्षमताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुईं। इजराइल का अनुमान है कि केवल 20 से 25 प्रतिशत लॉन्चर सक्रिय हैं, हालांकि इसमें वे सिस्टम शामिल नहीं हैं जो सुरंगों और गुफाओं में छिपे हुए हैं। ईरान की रणनीति का अहम हिस्सा उसके भूमिगत ठिकाने हैं। उसने मिसाइल और लॉन्च सिस्टम को सुरंगों और गुफाओं में छिपाकर रखा है, जिससे उन्हें ढूंढना और नष्ट करना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा मोबाइल लॉन्चर तेजी से जगह बदलते हैं, जिससे उन पर निशाना साधना और भी कठिन हो जाता है। ईरान ने शुक्रवार रात इजराइल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल अटैक किए। जमीन और सुरंगों के नीचे छिपे ईरानी हथियार अमेरिका और इजराइल अब इन ठिकानों के एंट्री पॉइंट और उन्हें फिर से चालू करने वाले उपकरणों को निशाना बना रहे हैं। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी एजेंसियां अब तक यह तय नहीं कर पाई हैं कि ईरान की मिसाइल क्षमता को कितना नुकसान पहुंचाया जा चुका है और कितने लॉन्चर अब भी बचे हैं। अधिकारियों का मानना है कि ईरान के पास अभी भी इतनी बैलिस्टिक मिसाइलें और लॉन्च सिस्टम मौजूद हैं कि वह इजराइल और क्षेत्र के अन्य ठिकानों पर हमला कर सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित करना भी चुनौती बना हुआ है, क्योंकि तटीय मिसाइल क्षमता खत्म नहीं हुई है और संभव है कि यह भी भूमिगत ठिकानों में छिपी हो। जहां ईरान की नियमित नौसेना को नुकसान हुआ है, वहीं रिवोल्यूशनरी गार्ड की समुद्री ताकत अब भी काफी हद तक बची हुई है। उसके पास सैकड़ों छोटी नावें और बिना चालक वाली नौकाएं हैं, जिनका इस्तेमाल समुद्री रास्तों को बाधित करने में किया जा सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। उसके पास अभी भी ड्रोन, मिसाइल और सहयोगी नेटवर्क जैसी क्षमताएं मौजूद हैं, जिससे वह जवाबी कार्रवाई जारी रख सकता है। ——————————————————— ईरान जंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… 23 साल बाद दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट:ट्रम्प का ईरानी आसमान पर कब्जे का दावा गलत; अब तक अमेरिका के 7 विमान तबाह ईरान जंग के एक महीने बाद ट्रम्प ने 2 अप्रैल को अमेरिकी जनता को संबोधित किया। 19 मिनट के भाषण में उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की हवाई सेना को तबाह कर दिया है और उनके पास जवाब देने की क्षमता नहीं बची है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर कब्जा हो चुका है। उनके विमान तेहरान के ऊपर उड़ रहे हैं और ईरान कुछ नहीं कर पा रहा है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी ऐसे ही दावे किए। लेकिन हालात अब अलग कहानी बता रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

क्या तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना हर किसी के लिए होता है फायदेमंद? ये बीमारियां हैं तो बिल्कुल ना पिएं ताम्रजल

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Last Updated:April 04, 2026, 16:08 IST Tamra jal benefits in hindi: कोई शीशे के बॉटल में पानी पीता है तो कोई प्लास्टिक के बोतल में पानी रखता है. घर पर होते हैं तो लोग स्टील के ग्लास, कांच के गिलास में पानी अधिक पीते हैं, लेकिन काफी लोग ऐसे भी होते हैं, जो तांबे के बर्तन में रखकर पानी पीना हेल्दी मानते हैं. तो क्या ताम्रजल हर किसी के लिए फायदा पहुंचाता है? जानिए यहां ताम्रजल किसके लिए होता है फायदेमंद और किसे पहुंचा सकता है नुकसान. क्या ताम्रजल पीना सभी के लिए है हेल्दी? Tamra jal benefits in hindi: पानी, एक ऐसा पेय पदार्थ है, जिसके सेवन से आधी से ज्यादा बीमारियां खुद-ब-खुद कम हो जाती हैं. आयुर्वेद से लेकर विज्ञान तक में 2 लीटर पानी पीने की सलाह दी जाती है, हालांकि पानी तभी पीना लाभकारी है जब शरीर को प्राकृतिक तरीके से प्यास लगती है. पानी को स्वास्थ्यवर्धक बनाने के लिए तांबे के जल के सेवन को शरीर के लिए लाभकारी बताया गया है, लेकिन क्या सबके लिए तांबे के जल का सेवन लाभकारी है? ताम्रजल भारतीय परंपरा का हिस्सा है, लेकिन आयुर्वेद कभी भी किसी चीज को बिना शरीर की प्रवृत्ति को पहचाने थोपता नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि हर द्रव्य का प्रभाव व्यक्ति की प्रकृति, अवस्था, और समय पर निर्भर करता है. आधुनिक विज्ञान भी यही संकेत देता है कि कुछ स्थितियों में अधिक कॉपर शरीर के संतुलन को प्रभावित कर सकता है. तांबे का जल उष्ण और तीक्ष्ण स्वभाव वाला होता है और पाचन को बढ़ाने में सहायक है, लेकिन पित्त की वृद्धि भी शरीर में करता है. इसलिए, जरूरी नहीं है कि तांबे का जल हर किसी के लिए लाभकारी हो. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. अब सवाल है कि किन लोगों को तांबे का जल नहीं पीना चाहिए. तांबे का जल मधुमेह से पीड़ित लोगों को नहीं पीना चाहिए. इन लोगों के शरीर की प्रवृत्ति पित्त है; उन्हें भी तांबे के जल से परहेज करना चाहिए. पित्त की प्रवृत्ति बढ़ने से शरीर में गर्मी बढ़ती है और कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. अगर आप लिवर और किडनी से जुड़ी परेशानियों से जूझ रहे हैं, तब भी तांबे के जल का सेवन करना लाभकारी नहीं रहेगा. तांबे का जल लिवर और किडनी के काम को प्रभावित करता है, जिससे फिल्टर करने की प्रक्रिया भी बाधित हो सकती है. इसके अलावा, छोटे बच्चों को भी तांबे का पानी नहीं पीना चाहिए. सुबह खाली पेट तांबे के पानी को पचाने में बहुत मेहनत लगती है और बच्चों की पाचन अग्नि इतनी तेज नहीं होती. विज्ञान और आयुर्वेद दोनों मानते हैं कि शरीर में कॉपर की अधिकता से रक्त में शर्करा की मात्रा असंतुलित हो जाती है और रक्त वाहिकाओं पर भी अत्याधिक जोर पड़ता है. About the Author Anshumala अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें First Published : April 04, 2026, 16:08 IST

यौन उत्पीड़न मामले में मलयालम फिल्म निर्देशक हिरासत में:एक्ट्रेस ने रंजीत बालकृष्णन पर आरोप लगाए, पुलिस जांच में जुटी

यौन उत्पीड़न मामले में मलयालम फिल्म निर्देशक हिरासत में:एक्ट्रेस ने रंजीत बालकृष्णन पर आरोप लगाए, पुलिस जांच में जुटी

मशहूर मलयालम फिल्म निर्देशक रंजीत बालकृष्णन को यौन उत्पीड़न के आरोपों में तीन दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। यह आदेश शनिवार को कोच्चि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पुलिस की याचिका मानते हुए जारी किया। पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) अब मामले की और गहन जांच करेगी। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला तब उजागर हुआ जब एक अभिनेत्री ने आरोप लगाया कि रंजीत ने फिल्म शूट के दौरान एक कैरवैन (वैन) के अंदर उनके साथ यौन उत्पीड़न का प्रयास किया। शिकायत के आधार पर 28 मार्च को FIR दर्ज की गई और कोच्चि पुलिस ने उस पर गंभीर आरोपों का मामला बनाया। पुलिस ने दावा किया कि शुरुआती जांच में आरोप और साक्ष्य पर्याप्त पाए गए, जिसके बाद ही रंजीत को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। कोर्ट ने पुलिस की दलीलों को ध्यान में रखते हुए उन्हें सोमवार शाम तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है, ताकि पूछताछ और सबूत एकत्रण का काम जारी रखा जा सके। रंजीत का स्वास्थ्य भी अब चर्चा का विषय बन गया है। उनकी वकील टीम ने कोर्ट में दलील दी कि गिरफ्तार करते समय उचित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ और उनके गंभीर स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों (जैसे लीवर ट्रांसप्लांट और पिछले स्पाइनल सर्जरी) के कारण हिरासत में स्वास्थ्य जोखिम हो सकता है। हालांकि, कोर्ट ने पुलिस हिरासत की अनुमति दी, साथ ही निर्देश दिए कि हर 24 घंटे में उनकी मेडिकल जांच की जाए। रंजीत पहले ही एर्नाकुलम सब जेल में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में हैं और उनका बेल आवेदन अगली सुनवाई के लिए सोमवार/मंगलवार को पेश किया जाएगा। उनके वकील का कहना है कि वे इस मामले में निर्दोष हैं और आरोपों को झूठा और साजिश बताया है। पुलिस की SIT अब सेट पर मौजूद कर्मियों, गवाहों और उपकरणों के सबूतों की पड़ताल कर रही है, ताकि स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके। इसके अलावा फिल्म जगत के संगठनों ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है और उद्योग में सुरक्षा तथा शिकायत तंत्र के कार्यान्वयन पर जोर दिया जा रहा है।

यौन उत्पीड़न मामले में मलयालम फिल्म निर्देशक हिरासत में:एक्ट्रेस ने रंजीत बालकृष्णन पर आरोप लगाए, पुलिस जांच में जुटी

यौन उत्पीड़न मामले में मलयालम फिल्म निर्देशक हिरासत में:एक्ट्रेस ने रंजीत बालकृष्णन पर आरोप लगाए, पुलिस जांच में जुटी

मशहूर मलयालम फिल्म निर्देशक रंजीत बालकृष्णन को यौन उत्पीड़न के आरोपों में तीन दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। यह आदेश शनिवार को कोच्चि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पुलिस की याचिका मानते हुए जारी किया। पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) अब मामले की और गहन जांच करेगी। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला तब उजागर हुआ जब एक अभिनेत्री ने आरोप लगाया कि रंजीत ने फिल्म शूट के दौरान एक कैरवैन (वैन) के अंदर उनके साथ यौन उत्पीड़न का प्रयास किया। शिकायत के आधार पर 28 मार्च को FIR दर्ज की गई और कोच्चि पुलिस ने उस पर गंभीर आरोपों का मामला बनाया। पुलिस ने दावा किया कि शुरुआती जांच में आरोप और साक्ष्य पर्याप्त पाए गए, जिसके बाद ही रंजीत को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। कोर्ट ने पुलिस की दलीलों को ध्यान में रखते हुए उन्हें सोमवार शाम तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है, ताकि पूछताछ और सबूत एकत्रण का काम जारी रखा जा सके। रंजीत का स्वास्थ्य भी अब चर्चा का विषय बन गया है। उनकी वकील टीम ने कोर्ट में दलील दी कि गिरफ्तार करते समय उचित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ और उनके गंभीर स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों (जैसे लीवर ट्रांसप्लांट और पिछले स्पाइनल सर्जरी) के कारण हिरासत में स्वास्थ्य जोखिम हो सकता है। हालांकि, कोर्ट ने पुलिस हिरासत की अनुमति दी, साथ ही निर्देश दिए कि हर 24 घंटे में उनकी मेडिकल जांच की जाए। रंजीत पहले ही एर्नाकुलम सब जेल में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में हैं और उनका बेल आवेदन अगली सुनवाई के लिए सोमवार/मंगलवार को पेश किया जाएगा। उनके वकील का कहना है कि वे इस मामले में निर्दोष हैं और आरोपों को झूठा और साजिश बताया है। पुलिस की SIT अब सेट पर मौजूद कर्मियों, गवाहों और उपकरणों के सबूतों की पड़ताल कर रही है, ताकि स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके। इसके अलावा फिल्म जगत के संगठनों ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है और उद्योग में सुरक्षा तथा शिकायत तंत्र के कार्यान्वयन पर जोर दिया जा रहा है।

कहीं और कहीं कहीं स्थानीय पहचान…बंगाल, असम से लेकर तमिल तक, इन आम लोगों पर चुनाव होगा

कहीं और कहीं कहीं स्थानीय पहचान...बंगाल, असम से लेकर तमिल तक, इन आम लोगों पर चुनाव होगा

पांच राज्यों में चुनाव प्रचार तेजी से चल रहा है। सभी राजनीतिक दल अलग-अलग पार्टियों को लेकर नामांकित मैदानों में हैं, लेकिन इस बार के चुनाव में विकास के मुद्दों से लेकर स्थानीय अस्मिता का मुद्दा प्रमुख है। असम हो या पश्चिम बंगाल, केरल हो या तमिल सभी राजनीतिक दल स्थानीय अस्मिता का तेजी से चुनाव में उठान कर रहे हैं। चुनावी प्रचार में विकास के मुद्दे गायब हैं। न सड़क, न रोजगार, न विकास। इस बार चुनाव में एंट्री हुई है अस्मिता और संस्कृति की। पश्चिम बंगाल से असम और तमिल तक, हर जगह की स्क्रिप्ट अलग, लेकिन कहानी एक पहचान की राजनीति। अब सवाल ये उठ रहा है कि वोट किसे मिलेगा. जो काम करेगा या जो इमोशन जगाएगा। बंगाल में कौन-सा सबसे बड़ा उछाल? पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की बात करें तो इस बार चुनाव में सबसे बड़ा विकास विकास नहीं बल्कि पहचान बनाम पहचान बन गया है। 15 साल की सरकार का काम बैकस्टेज चल रहा है और इसमें राष्ट्रवाद, धर्म और अस्मिता की सुपरहिट फिल्में शामिल हैं। बीजेपी की स्क्रिप्ट साफ है, अगर बहुसंख्यक कलाकारों के साथ आ गए तो दर्शन भी साथ आ गए। इसलिए अब भाषणों में सड़क की चर्चा कम और सीमा की अधिकांश। नौकरी की कम और घुसपैठिए की बहुमत. विकास की कम और धार्मिक संतुलन की मात्रा अधिक हो रही है। सभी बड़े नेताओं के भाषणों में पश्चिम बंगाल की अस्मिता का ज़िक्र है। भाजपा नेता जहां एक तरफा डेमोग्राफिक बदलावों का लाभ उठा कर बंगाल अस्मिता को खतरा बता रहे हैं। जहां पर इक्विटीज का फोकस सीमा सुरक्षा और घुसपैठियों का जमावड़ा है, जिसे वो लोग इक्विटीज सभाओं में उठा रहे हैं। असम में घुसपैठिये और यू.सी.सी. की बर्बादी ममता बनर्जी बीजेपी की सरकार में आने के बाद मछली अंडा ना खाने का आरोप लगाया जा रहा है और बंगाल की संस्कृति और स्वभाव पर हमले की बात कर रही हैं। अब चुनाव सिर्फ धर्म नहीं भाषा, खान-पान और रीजनल प्राइड का फुल पैक बन चुका है और ये कहानी सिर्फ बंगाल की नहीं असम में भी यूसीसी और पहचान का मुद्दा जैसे तेजी से मजबूत हो रहे हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा घुसपैठियों और यूसीसी के मलबे असमिया अस्मिता को बचाने की बात कर रहे हैं और मियांओं को बाहर निकलने की बात करके डेमोग्राफिक बदलावों का खजाना भी उठा रहे हैं। हालांकि हिमंता का कहना है कि उनके मियां मतलब बांग्लादेशी घुसपैठियों से हैं। कांग्रेस भी मुख्यमंत्री के इस बयान में विस्थापित असम की अस्मिता और संस्कृति पर हमला बता रही है। तमिल और केरल में किस मुद्दे का बोलबाला? तमिल में भी कहानी लगभग यही दिख रही है। तमिलनाडु में यूक्रेनी बनाम द्रविड़ पहचान की लड़ाई चुनाव में है। जहां हमारी भाषा, हमारी संस्कृति का लाभ उठा रही है वहीं उद्योगपतियों का नैरेटिव लेकर चुनाव में चल रही है। केरल में भी धर्म और संस्कृति की सॉफ्ट पॉलिटिक्स चल रही है। बीजेपी हो या कांग्रेस या लेफ्ट सभी सबरीमाला मंदिर में सोना चोरी का सामान उठा रहे हैं। यहां भी सभी दल केरल की संस्कृति का अध्ययन जोर शोर से चुनाव में उठा रहे हैं। कुल मिलाकर राज्य बदल रहे हैं, पात्र बदले जा रहे हैं, लेकिन आश्रम की अचल संपत्तियां हैं-पहचान और अस्मिता की राजनीति। अब जन संस्कृति और अस्मिता के मुद्दे पर किस दल की विश्वसनीयता तय होती है वो तो 4 मई के नतीजों से पता चलता है, लेकिन इस बार की चुनौती को इन विचारधारा ने दिलचस्प बना दिया है।

कीमती लकड़ी ही नहीं, संजीवनी भी हैं सागवान के पत्ते, एक्जिमा से लेकर बवासीर तक में रामबाण!

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Last Updated:April 04, 2026, 15:45 IST Teak Leaves Health Benefits: अक्सर हम सागवान को केवल फर्नीचर के लिए इस्तेमाल होने वाली मजबूत लकड़ी के रूप में जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद में इसके पत्ते किसी ‘सुपरफूड’ या औषधि से कम नहीं हैं? त्वचा की गंभीर बीमारियों जैसे एक्जिमा और एलर्जी से लेकर, बवासीर और पाचन संबंधी विकारों तक, सागवान के पत्ते सेहत का एक बड़ा खजाना समेटे हुए हैं. एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुणों से भरपूर ये पत्ते न केवल घाव भरने में सक्षम हैं, बल्कि शरीर के भीतर छिपे टॉक्सिंस को बाहर निकालकर आपको एक सेहतमंद जीवन प्रदान कर सकते हैं. सागवान के पत्ते त्वचा रोगों (एक्जिमा, एलर्जी), सूजन, घाव भरने, दस्त, बवासीर और बुखार जैसी समस्याओं में औषधीय रूप से बहुत फायदेमंद होते हैं. इनमें प्राकृतिक रूप से एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण पाए जाते हैं. इसके पत्तों का उपयोग आयुर्वेद में मुख्य रूप से घाव सुखाने, त्वचा में निखार लाने और शरीर में मौजूद टॉक्सिंस को कम करने के लिए सदियों से किया जाता रहा है. विशेषज्ञ डॉक्टर विनीत शर्मा के अनुसार, सागवान के पत्ते त्वचा के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होते हैं. इनमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाले) गुण मुँहासे, खुजली, एलर्जी और घावों को तेजी से ठीक करने में मदद करते हैं. यह न केवल त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करते हैं, बल्कि प्राकृतिक चमक लाने में भी सहायक होते हैं. सागवान के पत्ते घाव भरने और त्वचा संबंधी विभिन्न समस्याओं के लिए बहुत फायदेमंद माने जाते हैं. इनमें सूजन को कम करने और घाव को जल्दी भरने के प्राकृतिक गुण होते हैं. यदि आपको छोटे घाव, जलन, खुजली या त्वचा का कोई संक्रमण है, तो सागवान के पत्तों का अर्क या लेप इन समस्याओं को कम करने में जादुई भूमिका निभा सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google सागवान के पत्ते पाचन में सहायक होते हैं और पेट संबंधी समस्याओं जैसे दस्त, पेचिश और कब्ज के लिए पारंपरिक रूप से फायदेमंद माने जाते हैं. इसमें विशेष कसैले गुण होते हैं जो मल को बांधने में मदद करते हैं, जिससे दस्त जैसी समस्या में तुरंत आराम मिलता है. इसके अतिरिक्त, इनका उपयोग आंतरिक रक्तस्राव को रोकने में भी किया जाता है. सागवान के पत्ते सूजन और दर्द में कमी लाने के लिए बहुत प्रभावी हैं. इनके पत्तों का लेप मांसपेशियों के दर्द और जोड़ों की सूजन में राहत देता है. पुराने घावों या एलर्जी के कारण होने वाली परेशानी में इनके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण राहत प्रदान करते हैं. यह शरीर के किसी भी हिस्से में होने वाली पुरानी चोटों के दर्द को कम करने के लिए एक सटीक घरेलू उपचार है. सागवान के पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं और त्वचा संबंधी समस्याओं, घाव भरने, सूजन कम करने, और पाचन विकारों (दस्त/पेचिश) के उपचार में बहुत फायदेमंद हैं. इनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं. और इनके अर्क का उपयोग बाहरी रक्तस्राव को रोकने व एलर्जी कम करने के लिए किया जा सकता है. सागवान के पत्ते दाग-धब्बे और मुंहासे के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. इनमें एंटी-बैक्टीरियल और सूजनरोधी गुण होते हैं. जो मुंहासों को कम करने और त्वचा की सूजन को शांत करने में मदद करते हैं. इन्हें पीसकर लेप लगाने से त्वचा संबंधी समस्याओं (जैसे खुजली, घाव) में आराम मिलता है. First Published : April 04, 2026, 15:45 IST

Machar Bhagane Ka Tarika: मच्छरों से परेशान? घर में लगाएं ये पौधा, दूर-दूर तक नहीं भटकेंगे

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Last Updated:April 04, 2026, 15:28 IST गर्मियों में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से लोग काफी परेशान रहते हैं और उनसे बचने के लिए केमिकल वाले उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन अब आप मरुआ के पौधे की मदद से इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं. यह पौधा न सिर्फ मच्छरों को दूर रखता है, बल्कि औषधीय गुणों के कारण सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है. इसे आप आसानी से अपने किचन गार्डन या गमले में उगा सकते हैं. गर्मियों की शुरुआत होते ही जहां लोग तेज धूप और गर्मी से परेशान रहते हैं, वहीं मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ जाता है. दिन में चिलचिलाती धूप और गर्म हवाएं परेशान करती हैं, तो शाम होते ही मच्छरों का आतंक बढ़ जाता है. ग्रामीण हो या शहरी क्षेत्र, हर जगह लोग मच्छरों से काफी परेशान हैं. अप्रैल में गर्म हवाओं के कारण घरों के आसपास जमा पानी सूख जाता है, लेकिन नालियों और कूलरों में मच्छरों का लार्वा तेजी से पनपता है. यही मच्छर मौका मिलते ही घरों में घुसकर लोगों की परेशानी बढ़ा देते हैं. मच्छरों से बचने के लिए लोग अक्सर केमिकल वाली अगरबत्ती या कॉइल का इस्तेमाल करते हैं, जिससे कई बार सांस से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे में मच्छरों को भगाने के देसी उपाय ज्यादा फायदेमंद होते हैं. एक ऐसा पौधा है जिसे गमले में लगाकर आसानी से मच्छरों से छुटकारा पाया जा सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google दरअसल, मरुआ का पौधा एक प्राकृतिक मॉस्किटो रिपेलेंट है. तुलसी जैसा दिखने वाला यह पौधा औषधीय गुणों से भरपूर होता है और इसे किचन गार्डन में आसानी से उगाया जा सकता है. एसबीवीपी इंटर कॉलेज, रायबरेली के गृह विज्ञान प्रवक्ता अरुण कुमार सिंह के अनुसार, मरुआ पुदीना और तुलसी की प्रजाति का पौधा है, जो बच्चों के लिए लाभकारी है, लेकिन मच्छरों और कीट-पतंगों को दूर रखता है. इसकी तेज खुशबू के कारण मच्छर और अन्य कीड़े आसपास नहीं आते. अरुण कुमार सिंह के अनुसार, मरुआ की तेज खुशबू मच्छरों को भले ही दूर रखती हो, लेकिन यह बच्चों के लिए फायदेमंद होता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं. इसके पत्तों को चाय में उबालकर पीने से नजला, जुकाम और खांसी जैसी समस्याओं में राहत मिलती है. मरुआ मुंह की दुर्गंध दूर करने में कारगर है और मसूड़ों की बीमारियों में भी राहत देता है. यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और पेट के कीड़ों को खत्म करने में मदद करता है. इसके अलावा, यह माइग्रेन के दर्द में भी राहत देने में उपयोगी माना जाता है. अरुण कुमार सिंह के अनुसार, मरुआ को किचन गार्डन या गमले में आसानी से उगाया जा सकता है. इसकी पत्तियों का उपयोग चटनी, सलाद और सब्जी में किया जा सकता है. हालांकि, इसका सेवन हमेशा उचित मात्रा में ही करना चाहिए, वरना इसका स्वाद कड़वा लग सकता है. First Published : April 04, 2026, 15:28 IST

खरगोन से 1000 महिलाओं का दल अंबाजी धाम पहुंचा:गरबा किया; संकीर्तन के 50 साल पूरे होने पर 5 दिवसीय धार्मिक यात्रा पर

खरगोन से 1000 महिलाओं का दल अंबाजी धाम पहुंचा:गरबा किया; संकीर्तन के 50 साल पूरे होने पर 5 दिवसीय धार्मिक यात्रा पर

खरगोन के टेमला से 1000 महिला श्रद्धालुओं का एक दल शनिवार सुबह अंबाजी धाम पहुंचा। यहां पहुंचने पर महिलाओं ने देवी दर्शन किए और मंदिर परिसर में गरबा किया। समाजसेवी नितिन पाटीदार ने बताया कि महिला श्रद्धालु वाहनों में भजन-कीर्तन करते हुए और जयकारे लगाते हुए अंबाजी धाम पहुंचे। यह यात्रा टेमला में पूर्व कृषिमंत्री बालकृष्ण पाटीदार के नेतृत्व में मनाए जा रहे ‘हरे रामा हरे कृष्णा संकीर्तन’ के 50 वर्ष पूरे होने के स्वर्ण जयंती वर्ष का हिस्सा है। 10 से अधिक बसों में सवार यह दल पावागढ़, अंबिकाधाम और सांवरिया सेठ के दर्शन के लिए 5 दिवसीय धार्मिक यात्रा पर है। स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में वैशाख माह में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया था। इसके बाद 1000 से अधिक श्रद्धालुओं का एक दल अयोध्या धाम में श्रीरामलला के दर्शन कर चुका है। महिलाओं का यह दल इस आयोजन के तीसरे चरण की धार्मिक यात्रा पर है।

रहमान डकैत का रोल 3 स्टार्स ने किया था रिजेक्ट:कास्टिंग डायरेक्टर बोले- मल्टीस्टारर फिल्म बताकर किया इनकार, फिर अक्षय खन्ना हुए फाइनल

रहमान डकैत का रोल 3 स्टार्स ने किया था रिजेक्ट:कास्टिंग डायरेक्टर बोले- मल्टीस्टारर फिल्म बताकर किया इनकार, फिर अक्षय खन्ना हुए फाइनल

फिल्म ‘धुरंधर’ की कास्टिंग को लेकर कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने बताया कि रहमान डकैत के किरदार के लिए 2-3 बड़े एक्टर्स ने इनकार कर दिया था। आखिर में यह रोल अक्षय खन्ना को मिला। हाल ही में बॉलीवुड हंगामा को दिए इंटरव्यू में मुकेश छाबड़ा ने बताया कि फिल्म की कास्टिंग आसान नहीं थी। उन्होंने कहा कि उन्हें करीब 4 घंटे तक फिल्म की कहानी सुनाई गई, जिसे सुनने के बाद वे सदमे में थे और समय का एहसास ही नहीं हुआ। कास्टिंग प्रोसेस करीब दो साल चली मुकेश के मुताबिक, फिल्म के दोनों हिस्सों को मिलाकर करीब 400 कलाकारों की कास्टिंग करनी थी। इसके लिए उन्होंने छह लोगों की टीम बनाई और हर रोल के लिए अलग-अलग तलाश शुरू की। उन्होंने कहा कि डायरेक्टर आदित्य धर ने उन्हें पूरी स्वतंत्रता दी थी और बड़े लेवल पर सोचने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि फिल्म की कास्टिंग प्रोजेस 2024 से करीब दो साल चली। कास्टिंग के दौरान कई कलाकारों ने अलग-अलग भूमिकाओं के लिए मना कर दिया। हालांकि, मुकेश के अनुसार, डायरेक्टर पूरे समय शांत रहे और उन्होंने नए विकल्प तलाशने को कहा। फिल्म में रणवीर सिंह को हमजा के रोल के लिए शुरुआत में ही फाइनल कर लिया गया था और उन्होंने तुरंत हामी भर दी थी। मल्टीस्टारर फिल्म बताकर एक्टर्स ने रोल छोड़ा मुकेश छाबड़ा ने यह भी बताया कि रहमान डकैत का किरदार शुरू में अक्षय खन्ना को ऑफर नहीं किया गया था। इस रोल को 2-3 एक्टर्स ने ठुकरा दिया था, जिनमें एक साउथ सिनेमा का एक्टर और दो बॉलीवुड एक्टर्स शामिल थे। उनके अनुसार, इन कलाकारों ने यह तर्क दिया था कि फिल्म मल्टीस्टारर है और यह मुख्य रूप से रणवीर सिंह की फिल्म है। हालांकि, मुकेश ने नाम बताने से इनकार किया और कहा कि फिल्म रिलीज होने के बाद उन्हें अपने फैसले पर पछतावा हो रहा होगा। अंत में यह रोल अक्षय खन्ना को मिला, जिसे दर्शकों से सराहना मिली और फिल्म ने वैश्विक स्तर पर सफलता हासिल की।

सोना इस हफ्ते ₹3,666 सस्ता, ₹1.47 लाख पहुंचा:ईरान जंग के बाद ₹12,489 की गिरावट, चांदी ₹6,166 बढ़कर ₹2.28 लाख हुई

सोना इस हफ्ते ₹3,666 सस्ता, ₹1.47 लाख पहुंचा:ईरान जंग के बाद ₹12,489 की गिरावट, चांदी ₹6,166 बढ़कर ₹2.28 लाख हुई

इस हफ्ते सोने-चांदी के दाम में तेजी रही। सोना हफ्तेभर में 3,666 रुपए बढ़कर 1.47 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पहले ये बीते हफ्ते यानी 27 मार्च को 1.43 लाख रुपए पर था। वहीं, चांदी 2.22 लाख किलो से बढ़कर 2.28 लाख रुपए पर पहुंच गई है। यानी इसकी कीमत 6,166 रुपए की बढ़ोतरी हुई। अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग की वजह से सोना-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल है। इस दौरान 36 दिन में सोना 12,489 और चांदी 38,887 सस्ती हुई है। इस हफ्ते सोना ₹3,666 और चांदी ₹6,166 हजार सस्ती देश के अलग-अलग शहरों में सोने की वर्तमान कीमतें मैप में देखें… अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 वजहें सोना ऑल टाइम हाई से ₹30 हजार सस्ता हुआ साल की शुरुआत में सोने में तेजी थी, लेकिन हाल के हफ्तों में मुनाफावसूली और ईरान जंग से गिरावट आई है। चांदी में क्रैश: ₹3.86 लाख से ₹2.28 लाख तक चांदी में सोने के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव रहा और यह ऑल टाइम हाई से तेजी से नीचे आई है। गिरावट के मुख्य कारण: कैश पर भरोसा बढ़ा आमतौर पर जंग के माहौल में सोने-चांदी के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार स्थिति अलग है: कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक, सोना-चांदी के दाम में आगे भी ये गिरावट जारी रह सकती है। ऐसे में निवेशकों को अभी सोने-चांदी में निवेश से बचना चाहिए। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके ————————————– ये खबर भी पढ़ें… भारतीय घरों में देश की GDP से ज्यादा का सोना: 34,600 टन गोल्ड की कीमत ₹450 लाख करोड़, देश की GDP ₹370 लाख करोड़ भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने की वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर (₹450 लाख करोड़) के पार निकल गई है। यह आंकड़ा देश की कुल 4.1 ट्रिलियन डॉलर यानी, 370 लाख करोड़ रुपए की GDP से भी ज्यादा है। सोने की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के कारण ऐसा हुआ है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है। अभी सोने की वैल्यू 1.38 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब चल रही है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) के पार ट्रेड कर रहा है। रुपए में इसे बदलें तो इसकी वैल्यू 1.30 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब होती है। पूरी खबर पढ़ें…