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टाटा चैरिटेबल ट्रस्ट विवाद, मेहली मिस्त्री चैरिटी-कमिश्नर पहुंचे:दो बोर्ड मेंबर्स की नियुक्ति को अवैध बताया; कहा- ट्रस्टी होने के लिए पारसी होना जरूरी

टाटा चैरिटेबल ट्रस्ट विवाद, मेहली मिस्त्री चैरिटी-कमिश्नर पहुंचे:दो बोर्ड मेंबर्स की नियुक्ति को अवैध बताया; कहा- ट्रस्टी होने के लिए पारसी होना जरूरी

रतन टाटा के करीबी सहयोगी रहे मेहली मिस्त्री ने टाटा ग्रुप से जुड़े चैरिटेबल ट्रस्ट के बोर्ड कंपोजिशन को लेकर चैरिटी कमिश्नर का दरवाजा खटखटाया है। मिस्त्री ने ‘बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन’ के ट्रस्टी के रूप में अपना कार्यकाल रिन्यू न होने के फैसले को चुनौती दी है। उन्होंने अपनी याचिका में दावा किया है कि बोर्ड के कुछ सदस्य ट्रस्ट डीड के नियमों के अनुसार पात्रता नहीं रखते हैं, इसलिए उनके द्वारा लिए गए फैसले कानूनी रूप से वैध नहीं हैं। क्या है पूरा मामला? मेहली मिस्त्री को 29 अक्टूबर 2022 से तीन साल के कार्यकाल के लिए ट्रस्टी नियुक्त किया गया था। अक्टूबर 2025 में उनके कार्यकाल के रिन्यूअल का प्रस्ताव आया, जिसे ट्रस्ट के बोर्ड ने नामंजूर कर दिया। मिस्त्री का तर्क है कि उनके खिलाफ वोट देने वाले ट्रस्टियों में से कुछ खुद ही उस पद पर बैठने के हकदार नहीं हैं। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, मिस्त्री ने ‘चेंज रिपोर्ट’ के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई है। 1923 की ट्रस्ट डीड का दिया हवाला मिस्त्री की याचिका में 7 दिसंबर 1923 की मूल ट्रस्ट डीड का जिक्र किया गया है। याचिका के अनुसार, इस डीड में ट्रस्टी बनने के लिए दो अनिवार्य शर्तें तय की गई हैं… वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की नियुक्ति पर सवाल याचिका में सीधे तौर पर कहा गया है कि वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह कभी भी पारसी जोरोस्ट्रियन धर्म के नहीं रहे हैं और न ही हो सकते हैं। इसके अलावा मिस्त्री ने आरोप लगाया कि ये दोनों मुंबई के स्थायी निवासी भी नहीं हैं। मिस्त्री का दावा है कि उनकी नियुक्तियां शुरू से ही सही नहीं थीं, इसलिए उनके द्वारा किया गया कोई भी कार्य कानूनन मान्य नहीं है। वोटिंग में किसने क्या किया? अक्टूबर 2025 के सर्कुलर रेजोल्यूशन में मिस्त्री के कार्यकाल को लेकर हुई वोटिंग की डिटेल्स इस प्रकार है… मिस्त्री का कहना है कि यदि अयोग्य ट्रस्टियों के वोटों को हटा दिया जाए, तो उनके कार्यकाल को न बढ़ाने वाला रेजोल्यूशन अपने आप गिर जाएगा। पिछले 2 साल से कोई मीटिंग नहीं हुई मिस्त्री ने ट्रस्ट के कामकाज पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने चैरिटी कमिश्नर को बताया कि उनकी जानकारी के अनुसार, पिछले दो सालों से ट्रस्ट की कोई ऑफिशियल मीटिंग नहीं हुई है। उन्होंने इसे पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी बताया। याचिका में मांग की गई है कि चैरिटी कमिश्नर ट्रस्ट के रिकॉर्ड और मिनट बुक की जांच करें और सभी ट्रस्टियों से हलफनामा लें कि वे योग्यता की शर्तों को पूरा करते हैं या नहीं। ट्रस्ट के अस्तित्व पर संकट याचिका में एक अहम कानूनी पेंच यह भी फंसाया गया है कि यदि अयोग्य ट्रस्टियों को हटा दिया जाता है, तो ट्रस्ट में न्यूनतम 5 सदस्यों की अनिवार्य संख्या कम हो जाएगी। ऐसी स्थिति में मिस्त्री ने वर्तमान बोर्ड की जगह एक एडमिनिस्ट्रेटर (प्रशासक) नियुक्त करने की मांग की है। हालांकि, मिस्त्री ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद खुद की बहाली नहीं, बल्कि ट्रस्ट के मूल उद्देश्य और पारसी समुदाय के हितों की रक्षा करना है। क्या है हीराबाई चैरिटेबल ट्रस्ट? यह एक पुराना चैरिटेबल ट्रस्ट है जिसे खास तौर पर नवसारी (गुजरात) के पारसी समुदाय के कल्याण और धार्मिक कार्यों के लिए बनाया गया था। टाटा परिवार के शुरुआती दौर में स्थापित इस ट्रस्ट की डीड बहुत सख्त है, जो केवल समुदाय के लोगों को ही इसके प्रबंधन का अधिकार देती है। ये खबर भी पढ़ें… पोस्ट ऑफिस RD पर 6.7% ब्याज: 100 रुपए से कर सकते हैं निवेश की शुरुआत, जानें इसकी खास बातें सरकार ने अक्टूबर-दिसंबर (Q1FY27) के लिए स्मॉल सेविंग स्कीम्स की ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया है। यानी आपको पहले जितना ही ब्याज मिलता रहेगा। ऐसे में अगर आप रिकरिंग डिपॉजिट (RD) कराने का प्लान बना रहे हैं तो पोस्ट ऑफिस RD आपके लिए सही रह सकती है। पूरी खबर पढ़ें…

सरसो का तेल और बादाम से घर पर बनाए केमिकल फ्री आर्गेनिक काजल, 15 मिनट में होगा तैयार, आंखों के सेहत के लिए वरदान

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Last Updated:April 04, 2026, 15:00 IST घर पर ऑर्गेनिक काजल बनाना आसान और सुरक्षित है. एक दीये में घी या सरसों का तेल डालकर बाती जलाएं और ऊपर प्लेट रख दें. 10–15 मिनट में कालिख जमा हो जाएगी. इसे निकालकर थोड़ा नारियल या बादाम तेल मिलाएं. यह काजल आंखों को ठंडक देता है, केमिकल-फ्री होता है और रोज़ाना इस्तेमाल के लिए अच्छा माना जाता है. आजकल बाजार में मिलने वाले काजल में कई तरह के केमिकल्स मिलाए जाते हैं, जो आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. ऐसे में पुराने घरेलू नुस्खों से बना ऑर्गेनिक काजल एक सुरक्षित और असरदार विकल्प है. खास बात यह है कि इसे बनाना बहुत आसान है और इसके लिए ज्यादा चीजों की भी जरूरत नहीं पड़ती. घर पर ऑर्गेनिक काजल बनाने के लिए आपको कुछ सामान्य चीजों की जरूरत होती है. एक छोटा दीया, सरसों का तेल या देसी घी रूई की बाती, 1 बादाम एक साफ स्टील या पीतल की प्लेट और थोड़ा सा नारियल तेल या बादाम तेल. ये सारी चीजें आमतौर पर हर घर में आसानी से मिल जाती हैं. सबसे पहले दीये में सरसों का तेल या घी डालें और उसमें रूई की बाती लगाएं. अब उस बाती में एक बादाम भी डाल दें. बादाम डालने से काजल और भी पोषक बनता है. अब दीये को जलाएं और उसके ऊपर एक साफ प्लेट उल्टी करके रख दें. ध्यान रखें कि प्लेट दीये के ऊपर इस तरह रखें कि दीये की लौ सीधे प्लेट को छूती रहे. इससे धीरे-धीरे प्लेट के नीचे कालिख (काजल) जमा होने लगेगी. लगभग 10 से 15 मिनट तक दीया जलने दें. जब पर्याप्त कालिख जमा हो जाए, तो प्लेट को धीरे से हटाएं. Add News18 as Preferred Source on Google अब प्लेट पर जमा हुई कालिख को एक साफ चम्मच या उंगली की मदद से निकाल लें. इसमें थोड़ा सा नारियल तेल या बादाम तेल मिलाएं. इसे अच्छे से मिलाकर एक स्मूद पेस्ट बना लें. बस आपका केमिकल-फ्री, ऑर्गेनिक काजल तैयार है. इसे आप एक छोटे डिब्बे में स्टोर करके रख सकते हैं. घर पर बना यह काजल कई तरह से फायदेमंद होता है. यह पूरी तरह केमिकल-फ्री होता है आंखों को ठंडक देता है, आंखों में जलन या एलर्जी नहीं करता, नियमित इस्तेमाल से आंखों की सफाई में मदद करता है, और बच्चों से लेकर बड़े तक सभी इस्तेमाल कर सकते हैं. 65 साल की नंदी देवी, जो पिछले कई सालों से खुद घर पर काजल बनाकर इस्तेमाल कर रही हैं, वो लोकल 18 से बात करते हुए बताती हैं कि मैं बचपन से अपनी मां को ऐसे ही काजल बनाते हुए देखती आई हूं. आज भी मैं यही तरीका अपनाती हूं. इस काजल से आंखों में ठंडक मिलती है और कभी कोई जलन नहीं होती. मैंने अपने बच्चों और अब पोते-पोतियों को भी यही काजल लगाया है. बाजार के काजल से अच्छा तो अपना घर का बना काजल ही होता है. काजल लगाने से पहले हाथ साफ रखें, काजल को हमेशा साफ डिब्बे में रखें, अगर आंखों में कोई समस्या हो तो इस्तेमाल से पहले डॉक्टर की सलाह लें और बहुत ज्यादा मात्रा में न लगाएं. First Published : April 04, 2026, 15:00 IST

‘घायल हूं इसलिए घातक हूं’: 3 सूत्री खंडन के साथ राघव चड्ढा का ‘धुरंधर’ AAP पर तंज | राजनीति समाचार

Ramayana teaser features Ranbir Kapoor, Sai Pallavi, Yash and others.

आखरी अपडेट:04 अप्रैल, 2026, 14:55 IST नेता ने आप नेतृत्व द्वारा उन पर लगाए गए तीन प्रमुख आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की आम आदमी पार्टी सांसद राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद शनिवार को पलटवार करते हुए आप नेतृत्व द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए तीन प्रमुख आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। राघव चड्ढा ने एक्स पर एक वीडियो में कहा, “कल से मेरे खिलाफ एक स्क्रिप्टेड अभियान चलाया जा रहा है। यह कोई संयोग नहीं बल्कि एक समन्वित हमला है। पहले तो मैंने सोचा कि मुझे ऐसे आरोपों का जवाब नहीं देना चाहिए। लेकिन फिर मैंने सोचा कि हजारों बार बोले गए झूठ को कुछ लोग सच मान सकते हैं।” मैं नहीं चाहता था, मगर चुप रहना तो बार-बार अस्तित्व में आना सच लगता है। तीन आरोप। शून्य सत्य. मेरी प्रतिक्रिया: pic.twitter.com/tPdjp04TLt – राघव चड्ढा (@raghav_chadha) 4 अप्रैल 2026 आप पर निशाना साधते हुए चड्ढा ने कहा कि पार्टी ने उनके खिलाफ तीन आरोप लगाए हैं। “उन्होंने कहा कि उन्होंने मुझे मेरी तीन गलतियों के कारण संसद में बोलने से रोका। आज मैं उन तीनों को जवाब देना चाहता हूं।” यह भी पढ़ें | AAP के राघव चड्ढा संसदीय अधर में: क्या होता है जब एक सांसद को अपनी ही पार्टी द्वारा चुप करा दिया जाता है? “पहला आरोप यह है कि जब भी विपक्ष संसद से बाहर चला गया, मैं बैठा रहा और उनके साथ शामिल नहीं हुआ। यह एक सफेद झूठ है। मैं किसी को भी चुनौती देता हूं कि वह मुझे एक उदाहरण दिखाए जहां मैं विपक्ष में शामिल नहीं हुआ था। पूरे संसद में सीसीटीवी कैमरे हैं, कोई भी फुटेज की जांच कर सकता है। सच्चाई सामने आ जाएगी।” “दूसरा आरोप यह था कि मैंने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) पर महाभियोग चलाने की याचिका पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। यह भी झूठ है। आप में से किसी ने भी मुझसे औपचारिक या अनौपचारिक रूप से याचिका पर हस्ताक्षर करने के लिए नहीं कहा। पार्टी के राज्यसभा में 10 सांसद हैं, जिनमें से 6-7 ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए। तो मैं अकेला दोषी कैसे हूं? इसके अलावा, इसे पारित करने के लिए विपक्ष के कुल 50 हस्ताक्षरों की आवश्यकता थी। तो मेरी कथित अनुपस्थिति पर हंगामा क्यों?” यह भी पढ़ें | क्या कोई पार्टी अपने राज्यसभा सांसद को हटा सकती है? AAP के बागी राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल के क्या मामले हैं, हमें बताएं तीसरे आरोप के बारे में विस्तार से बताते हुए चड्ढा ने कहा कि उन पर डरे हुए होने और ऐसे मुद्दे उठाने का आरोप लगाया गया है जिनका कोई मतलब नहीं है। “मैं स्पष्ट कर दूं कि मैं हंगामा करने, चिल्लाने, माइक तोड़ने या गाली देने के लिए संसद में नहीं हूं। मैं वहां लोगों के मुद्दे उठाने के लिए हूं। मैंने कौन सा मुद्दा नहीं उठाया? जीएसटी से लेकर आयकर, पंजाब के पानी से लेकर दिल्ली की प्रदूषित हवा, शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य सेवा, रेल यात्रियों की समस्याओं से लेकर मासिक धर्म के स्वास्थ्य तक – मैंने सभी महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। आप पिछले चार वर्षों से मेरा संसद रिकॉर्ड देख सकते हैं। मैं संसद में प्रभाव पैदा करने के लिए गया हूं, हंगामा करने के लिए नहीं। मैं उन करदाताओं के मुद्दों को उठाने आया हूं जो हमारे लिए फंडिंग करते हैं। संसद।” चड्ढा ने यह कहते हुए अपना हमला समाप्त किया कि सभी झूठ उजागर हो जाएंगे और सभी सवालों के जवाब दिए जाएंगे। उन्होंने ब्लॉकबस्टर धुरंधर के लोकप्रिय संवाद को दोहराते हुए कहा, “क्योंकी मैं घायल हूं, इसलिए घातक हूं।” विवाद आम आदमी पार्टी द्वारा राज्यसभा में अपने उपनेता पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा को लेकर विवाद शुरू हो गया, जिससे आंतरिक असंतोष की अटकलें शुरू हो गईं। पार्टी के युवा राष्ट्रीय चेहरों में से एक चड्ढा की प्रमुखता और अतीत में नेतृत्व के साथ उनके करीबी संबंधों को देखते हुए इस कदम को महत्वपूर्ण माना गया। पार्टी के फैसले के बाद चड्ढा की तीखी आलोचना हुई, आप के अंदरूनी सूत्रों ने संगठनात्मक जिम्मेदारियों से कथित तौर पर अलग होने से लेकर उनकी राजनीतिक स्थिति के बारे में सवाल उठाए। हालाँकि, चड्ढा ने अपने रिकॉर्ड का बचाव करते हुए जोरदार वापसी की और संकेत दिया कि वह पार्टी के व्यापक दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्ध हैं, भले ही इस प्रकरण ने उस समय AAP के भीतर संभावित दोषों को उजागर किया जब वह दिल्ली और पंजाब से परे विस्तार कर रही है। पहले प्रकाशित: 04 अप्रैल, 2026, 14:24 IST समाचार राजनीति ‘घायल हूं इसलिए घातक हूं’: राघव चड्ढा का ‘धुरंधर’ ने 3 सूत्रीय खंडन के साथ AAP पर तंज कसा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राघव चड्ढा आप विवाद(टी)राघव चड्ढा(टी)आम आदमी पार्टी(टी)आप नेतृत्व(टी)राज्यसभा उपनेता(टी)राजनीतिक विवाद(टी)पार्टी अंदरूनी कलह(टी)भारतीय राजनीति

Glowing Skin Tips: दाग-धब्बे और टैनिंग से छुटकारा पाएं, घर पर ही बनेगा ग्लोइंग चेहरा, जानिए आसान टिप्स

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Last Updated:April 04, 2026, 14:48 IST दाग-धब्बे, टैनिंग और डार्क सर्कल्स अक्सर हमारी स्किन की खूबसूरती को प्रभावित करते हैं. लेकिन इसके लिए महंगे प्रोडक्ट्स या टोनर की जरूरत नहीं है. हल्दी-दही, एलोवेरा जेल, बेसन-दूध पैक और खीरे के रस जैसे सरल और प्राकृतिक उपाय अपनाकर आप अपना चेहरा साफ, चमकदार और ग्लोइंग बना सकते हैं. अगर आप दाग-धब्बे और चेहरे की टैनिंग से बचना चाहते हैं, तो इसका उपाय आपके घर पर मौजूद है. इसके लिए बस हल्दी और दही की जरूरत होती है. इन दोनों को मिलाकर पेस्ट बना लें और हल्के हाथों से चेहरे पर 10-15 मिनट तक लगाएं. फिर चेहरे को धो लें. देखते ही देखते दाग-धब्बे और टैनिंग कम हो जाएंगे और चेहरा साफ, चमकदार और सुंदर नजर आएगा. चेहरे के लिए एलोवेरा जेल किसी वरदान से कम नहीं है. बाजार में कई कंपनियां इसके प्रोडक्ट बनाकर खूब कमा रही हैं, लेकिन आप घर पर ही इसका उपयोग करके अपनी त्वचा को नेचुरल बना सकते हैं. रात को सोने से पहले चेहरे पर एलोवेरा जेल लगाएं और सुबह उठकर धो लें. इससे आपका चेहरा साफ, ताज़ा और ग्लो करता हुआ दिखाई देगा. फ्रेश और टाइट स्किन की कामना हर कोई करता है, लेकिन कई लोग मार्केट में मिलने वाले टोनर का इस्तेमाल करके अपनी त्वचा को और खराब कर लेते हैं. ऐसे में टोनर से बचें और हर रोज चेहरे पर गुलाब जल का स्प्रे करें. इससे आपकी स्किन फ्रेश, टाइट और स्वस्थ बनी रहेगी. Add News18 as Preferred Source on Google शादी या पार्टी के लिए महिलाएं तरह-तरह का मेकअप करती हैं, लेकिन कभी-कभी चेहरे का निखार नहीं आता. इसके लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है. बेसन और दूध का पैक बनाकर चेहरे पर लगाएं. इससे तुरंत ब्राइटनेस आती है और धीरे-धीरे डेड स्किन भी हटने लगती है. आंखों और चेहरे के डार्क सर्कल से कई लोग परेशान रहते हैं, लेकिन इसके लिए चिंता करने की जरूरत नहीं है. खीरे का रस इन डार्क सर्कल्स को धीरे-धीरे कम करने में मदद करता है. नियमित इस्तेमाल से आंखों के नीचे का कालापन गायब होता है और चेहरा ग्लो करने लगता है. इन आसान उपायों को अपनाकर आप अपना चेहरा सुंदर और चमकदार बना सकते हैं. First Published : April 04, 2026, 14:48 IST

सुनेत्रा पवार ने बारामती उपचुनाव के लिए उद्धव ठाकरे से मांगा समर्थन | भारत समाचार

DC Vs MI Live Score: Follow latest updates from IPL 2026 match today. (PTI Photo)

आखरी अपडेट:04 अप्रैल, 2026, 14:41 IST सुनेत्रा, जो वर्तमान में डीसीएम हैं, को डीसीएम के रूप में पद संभालने के छह महीने के भीतर विधायिका के किसी भी सदन में निर्वाचित होना होगा। महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार. (फाइल फोटो) महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने 6 अप्रैल को बारामती उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करने से पहले समर्थन मांगने के लिए शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे से संपर्क किया है। सूत्रों के अनुसार, सुनेत्रा पवार ने फोन पर ठाकरे से बात की और आगामी चुनाव के लिए समर्थन मांगा। यह घटनाक्रम उन अटकलों के बीच आया है कि कांग्रेस उपचुनाव में उनके खिलाफ उम्मीदवार उतार सकती है। इस आउटरीच ने 6 अप्रैल को नामांकन दाखिल करने के साथ बारामती प्रतियोगिता के लिए राजनीतिक रुचि बढ़ा दी है। जनवरी में एक दुखद हवाई दुर्घटना में उनके पति और पूर्व डिप्टी सीएम अजीत पवार के निधन के कारण सीट खाली होने के बाद वह बारामती से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। सुनेत्राजो वर्तमान में डीसीएम हैं, उन्हें डीसीएम के रूप में पदभार ग्रहण करने के छह महीने के भीतर विधायिका के किसी भी सदन में निर्वाचित होना होगा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने शनिवार को सभी राजनीतिक दलों से सुनेत्रा पवार का समर्थन करने का आग्रह करते हुए कहा कि राज्य में पहले भी कई बार निर्विरोध चुनाव हुए हैं। उन्होंने कहा, “मेरा मानना ​​है कि सभी पार्टियों को सुनेत्रा पवार का समर्थन करना चाहिए। मैं सभी से अनुरोध करूंगा कि अगर यह चुनाव निर्विरोध होता है, तो यह महाराष्ट्र के लिए उचित होगा। इससे पहले भी राज्य में कई बार निर्विरोध चुनाव हुए हैं।” नागपुर, महाराष्ट्र: सीएम देवेंद्र फड़णवीस का कहना है, “मेरा मानना ​​है कि सभी पार्टियों को सुनेत्रा पवार का समर्थन करना चाहिए। मैं सभी से अनुरोध करूंगा कि अगर यह चुनाव निर्विरोध होता है, तो यह महाराष्ट्र के लिए उचित होगा। इससे पहले भी राज्य में कई बार निर्विरोध चुनाव हुए हैं…” pic.twitter.com/DqWnDRpBil– आईएएनएस (@ians_india) 4 अप्रैल 2026 एनसीपी ने बारामती में अपनी तैयारी तेज कर दी है, जो लंबे समय से पवार परिवार का गढ़ माना जाता है। क्षेत्र में पहले ही दो बड़ी बैठकें हो चुकी हैं, जबकि सुनेत्रा पवार के बेटे जय पवार से चुनाव के दौरान अधिक सक्रिय राजनीतिक भूमिका निभाने की उम्मीद है। उनका शनिवार (4 अप्रैल, 2026) को बारामती में समीक्षा बैठक करने का कार्यक्रम है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (सपा) पहले ही घोषणा कर चुकी है कि वह परिवार के किसी सदस्य के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेगी। विधानसभा सीट परंपरागत रूप से लगातार आठ बार अजित पवार के पास रही। इस बीच, महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्द्धन सपकाल ने कहा है कि अगर एनसीपी (एसपी) बारामती उपचुनाव नहीं लड़ती है, तो कांग्रेस अपना उम्मीदवार खड़ा करेगी। पार्टी ने इस सीट के लिए संभावित उम्मीदवारों की तलाश भी शुरू कर दी है। शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत ने कहा, “दो उपचुनाव होने वाले हैं। राहुरी और बारामती में। हम कोशिश करेंगे कि फैसला गठबंधन के तौर पर लिया जाए। राहुरी में एनसीपी एसपी ने पहले चुनाव लड़ा था। वहां उसका दावा है। एमवीए का मूल सिद्धांत है कि जो पार्टी किसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र में ताकत रखती है उसे वहां चुनाव लड़ना चाहिए। बारामती में, अजीत पवार की मृत्यु के बाद, पवार परिवार पारिवारिक धर्म के रूप में चुनाव नहीं लड़ सकता है। लेकिन उन्हें दूसरों का विरोध नहीं करना चाहिए जो लड़ना चाहते हैं। वहां चुनाव। यह एक लोकतंत्र है हम एक साथ बैठेंगे और फैसला करेंगे।” जगह : महाराष्ट्र, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 04 अप्रैल, 2026, 11:41 IST न्यूज़ इंडिया सुनेत्रा पवार ने बारामती उपचुनाव के लिए उद्धव ठाकरे से समर्थन मांगा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)सुनेत्रा पवार बारामती उपचुनाव(टी)सुनेत्रा पवार(टी)बारामती उपचुनाव(टी)बारामती लोकसभा सीट(टी)उद्धव ठाकरे समर्थन(टी)महाराष्ट्र राजनीति(टी)अजित पवार की मृत्यु(टी)एनसीपी नेतृत्व परिवर्तन

खरबूजा ख़रीदने के टिप्स: खरबूजा मीठा है या नहीं? बिना काटे एक मिनट में पता लगाने के लिए काम आएंगे ये आसान टिप्स

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खरबूजा कैसे खरीदें: फल हम सभी को खाना पसंद करते हैं। वहीं गर्मियों में खरबूजा खाना हर किसी को पसंद होता है। यह न सिर्फ स्वादिष्ट होता है, बल्कि शरीर को ठंडक भी देता है। लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि हम बाजार से खरबूजा तो ले आते हैं, पर वह मीठा नहीं होता। ऐसे में पैसा और मूड दोनों ख़राब हो जाते हैं। ऐसे में अगर आप भी बिना काटे मीठा खरबूजा पहचानना चाहते हैं तो ये आसान टिप्स आपके बहुत काम आएंगे। आख़िर से पहचानें पका और मीठा खरबूजा फल, मिठाइयाँ देता है। इसके लिए खरबूजे के विभिन्न भागों को सुंघें। अगर वहां से मित्रता आ रही है, तो समझिए खरबूजा अच्छा है। अगर कोई साबुत नहीं है या अजीब सी गंध है, तो उसे न लें। रंग पर ध्यान खरबूजे का रंग बहुत कुछ बताता है। इसके लिए पका हुआ खरबूजा पीला या फिर सुनहरा होता है। बहुत ज्यादा हरा रंग कच्चा होने का संकेत है। वहीं बहुत ज्यादा दाग-धब्बे या काले निशान खराब होने का संकेत भी हो सकता है। ख़ज़ाने की मजबूती देखें खरबूजे का छिलका जैसा जाल होता है और ध्यान रहे कि यह जाल साफ और आकर्षक होना चाहिए। पतला या बहुत मजबूत कठोर छिलका कच्चा फल का संकेत हो सकता है। वजन से पहचानें हमेशा वही खरबूजा चुनें जो आपके आकार के खाते से भारी लगे। भारी खरबूजा का अर्थ है पानी और रस का मिश्रण, अर्थात वह मीठा हो सकता है। थैला देखें खरबूजे के नीचे वाले भागों को चित्रित किया गया है। अगर वह थोड़ा सा दबता है, तो फल पका हुआ है। वहीं अगर बहुत सख्त है तो कच्चा है, और बहुत ज्यादा नंगा है तो ज्यादा पका या बुरा हो सकता है। आवाज से पहचानें खरबूजे को मंत्र से थपथपाएं। अगर हल्की “थप-थप” की गूंजती आवाज आती है, तो वह अच्छा है। भारी और आवाज का मतलब होता है फल ज्यादा पका हुआ या अंदर से बुरा हो सकता है। देखें अगर आसानी से अलग हो गया लुक, तो फल पका हुआ है। वहीं अगर जबरदस्ती फोर्सेज लागे, तो वह रॉ हो सकता है। मीठा और स्वादिष्ट खरबूजा बनाना मुश्किल नहीं है, बस थोड़ा सा ध्यान देने की जरूरत है। कुछ बातों पर ध्यान देने से आपको सही दाम में शानदार क्वालिटी का खरबूजा मिल सकता है। यह अवश्य पढ़ें: सत्तू पराठा रेसिपी: विशेष रूप से हाई प्रोटीन वाला सत्तू का पराठा, पति से लेकर बच्चों के टिफिन तक सभी के लिए परफेक्ट रेसिपी

राहुल गांधी पॉलिटिक्स: ‘एलडीएफ का बीजेपी-आरएसएस से संबंध…’, केरल चुनाव से पहले राहुल गांधी का तीखा हमला

राहुल गांधी पॉलिटिक्स: 'एलडीएफ का बीजेपी-आरएसएस से संबंध...', केरल चुनाव से पहले राहुल गांधी का तीखा हमला

समाजवादी पार्टी के नेता राहुल गांधी ने केरल के अलाप्पुझा में एक रैली के दौरान लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) पर हमला किया। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद एलडीएफ में कुछ भी नहीं बचा और पार्टी की असली सोच दूर हो गई है। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस और यूडीएफ कई सालों से एलडीएफ के खिलाफ आ गए हैं। पहले एलडीएफ के कुछ खास विचारों के लिए जाना जाता था, कांग्रेस की असहमति थी, लेकिन अब वह अपने ही विचारों से सहमति कर चुकी है। उन्होंने कहा कि एलडीएफ का नाम जरूर छूट गया है, लेकिन अब इसमें शामिल होना नहीं सोचा गया है। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि एलडीएफ सरकार एक छिपे हुए हाथ का काम कर रही है, जो लोगों को रोशनी देने वाला है और संविधान को नहीं दर्शाता है। राहुल गांधी ने कहा कि केरल में अब बीजेपी, आरएसएस और एलडीएफ के बीच एक तरह का रिश्ता बन रहा है. राहुल गांधी ने एलडीएफ के नेताओं पर माओवादी का फायदा उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ नेता सिर्फ सत्ता के लिए कुछ भी कर सकते हैं और उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि उन्हें कौन सा समर्थन मिल रहा है। वहीं, पार्टी के कुछ पुराने कार्यकर्ता इस स्थिति से दुखी और नाराज हैं। राहुल गांधी ने मोदी पर आधारित आधार तैयार किया राहुल गांधी ने कहा कि पीएम मोदी हर बार कांग्रेस पर हमले कर रहे हैं, लेकिन केरल में एलडीएफ सरकार या मुख्यमंत्री कुछ नहीं कर पाए। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसा क्यों हो रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री अपने भाषणों में अक्सर धर्म और मंदिर की बात करते हैं, लेकिन केरल आकर सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी के मुद्दे पर कुछ नहीं कहते. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी यहां इस मुद्दे पर चुप हैं क्योंकि वह एलडीएफ सरकार की मदद करना चाहते हैं और उनका मंच सिर्फ यूडीएफ है। राहुल गांधी ने अपने खिलाफ चल रहे मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि वह बीजेपी और आरएसएस की कॉन्स्टेबल बैटल गर्ल हैं। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ 38 केस हैं, उनकी लंबी पूछताछ हुई, लेकिन वे कभी भी हार नहीं माने। केरल की राजनीति एलडीएफ-यूडीएफ की भूमिका केरल में राजनीति लंबे समय से एलडीएफ और यूडीएफ के बीच ही रही है। हालांकि 2021 में एलडीएफ की मुख्यमंत्री सत्ता में आईं, जो पहले के ट्रेंड से अलग थीं. इस बार चुनाव में मुकाबला तीन तरफा माना जा रहा है, क्योंकि बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. केरल में 2026 विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को वोटिंग होगी और 4 मई को नतीजे आएंगे। ईस्ट विधान सभा का अधिवेशन 23 मई को समाप्त हो रहा है। ये भी पढ़ें: एमके स्टालिन ऑन हिंदी: ‘हिंदी को बढ़ावा देने के लिए शेष सीटों को छीना जा रहा है…’, सीबीएसई के नए सिलेबस पर भड़के स्टालिन

एक घर बंट गया? सुनेत्रा पवार के ईसीआई को लिखे पत्र से एनसीपी में फूट की अटकलें तेज | राजनीति समाचार

DC Vs MI Live Score: Follow latest updates from IPL 2026 match today. (PTI Photo)

आखरी अपडेट:04 अप्रैल, 2026, 14:37 IST हालांकि हाल के घटनाक्रमों ने राकांपा के भीतर दरार की चर्चा को हवा दे दी है, अजित पवार के बेटे पार्थ ने इस चर्चा को कम करने की कोशिश की है और जोर देकर कहा है कि पार्टी एकजुट रहेगी। महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार. (फाइल फोटो) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एपी) की ओर से सुनेत्रा पवार द्वारा सौंपा गया पत्र सार्वजनिक होने के बाद भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि पार्टी में शीर्ष नेता एक-दूसरे से सहमत नहीं हैं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राकांपा प्रमुख सुनेत्रा पवार द्वारा हस्ताक्षरित और भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) को भेजे गए पत्र में पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के पदनाम शामिल नहीं थे। इससे सुनेत्रा पवार, सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल के बीच दरार की अटकलें लगने लगी हैं। उधर, सुनेत्रा पवार के दिल्ली में रहने के दौरान प्रफुल्ल पटेल ने उनसे मुलाकात नहीं की. हालांकि, सुनेत्रा पवार और उनके बेटे ने पटेल से उनके दिल्ली स्थित आवास पर शिष्टाचार मुलाकात की। पत्र युद्ध किस बारे में है? महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की मृत्यु के बाद, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने चुनाव आयोग को एक पत्र भेजा, जिसमें कहा गया कि कार्यकारी अध्यक्ष के पास राष्ट्रपति के बराबर शक्तियां होती हैं और इसलिए, वह पार्टी की कमान संभालेंगे। यह पत्र अजित पवार की मृत्यु के 24 घंटे के भीतर भेजा गया था, जिसके बाद 26 फरवरी को सुनेत्रा पवार को पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। राष्ट्रपति पद संभालने पर, सुनेत्रा पवार ने पार्टी के संविधान में संशोधन करने और कार्यकारी अध्यक्ष-प्रफुल्ल पटेल को अतिरिक्त शक्तियां देने के प्रस्तावों को खारिज करने के निर्देश जारी किए। इससे प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे में नाराजगी फैल गई. बाद में सुनेत्रा पवार ने चुनाव आयोग को दूसरा पत्र भेजा, जिसमें उन्होंने खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ-साथ कोषाध्यक्ष पद पर भी बताया। हालाँकि इस पत्र में प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के नामों का उल्लेख था, लेकिन इसमें स्पष्ट रूप से पार्टी के भीतर उनके विशिष्ट पदों का कोई उल्लेख नहीं किया गया था। इन घटनाक्रमों के बीच, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत ने दावा किया कि अजीत पवार की पार्टी विभाजन के कगार पर है, और उसके 25 से 30 विधायक जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने आगे सुझाव दिया कि शिवसेना (शिंदे गुट) को भी इसी तरह के भाग्य का सामना करना पड़ सकता है। इस बीच, एनसीपी (शरद पवार गुट) की नेता विद्या चव्हाण ने कहा कि अजीत पवार की मृत्यु के बाद से पार्टी के भीतर चीजें सुचारू नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे पार्टी पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। इस बीच, अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार ने स्पष्टीकरण जारी करने के लिए एक्स, पूर्व में ट्विटर का सहारा लिया, और सभी को आश्वस्त किया कि पार्टी के भीतर सब कुछ वास्तव में ठीक है। प्रफुल्ल पटेल जी और सुनील तटकरे जी को निशाना बनाने वाली आधारहीन रिपोर्टें और काल्पनिक कथाएँ कल्पना के अलावा और कुछ नहीं हैं। उनकी दशकों की अटूट प्रतिबद्धता और नेतृत्व हम सभी का मार्गदर्शन करता रहता है। ऐसे वरिष्ठ नेताओं को मनगढ़ंत विवादों में घसीटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है… – पार्थ सुनेत्रा अजित पवार (@parthagitpawar) 2 अप्रैल 2026 उन्होंने कहा कि पार्टी सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर काम कर रही है और सभी अटकलें निराधार हैं। पहले प्रकाशित: 04 अप्रैल, 2026, 14:37 IST समाचार राजनीति एक घर बंट गया? सुनेत्रा पवार के ईसीआई को लिखे पत्र से एनसीपी में फूट की अटकलें तेज हो गई हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)सुनेत्रा पवार एनसीपी पत्र विवाद(टी)एनसीपी नेतृत्व दरार(टी)सुनेत्रा पवार प्रफुल्ल पटेल(टी)सुनील तटकरे भूमिका(टी)अजित पवार की मृत्यु प्रभाव(टी)एनसीपी चुनाव आयोग पत्र(टी)महाराष्ट्र राजनीतिक संकट(टी)एनसीपी विभाजन अटकलें

बैतूल में महिला का शव फंदे पर मिला:पानी पीने उठे पति ने देखा शव, 5 बच्चों की थी मां

बैतूल में महिला का शव फंदे पर मिला:पानी पीने उठे पति ने देखा शव, 5 बच्चों की थी मां

बैतूल जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत खेड़ी पुलिस चौकी के ग्राम कनारा में शुक्रवार देर रात 46 वर्षीय महिला ने घर के अंदर साड़ी का फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। महिला का शव रात करीब 11 से 12 बजे के बीच पानी पीने उठे पति ने फंदे से लटका देखा। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा कार्रवाई की। शनिवार को जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। फिलहाल महिला द्वारा यह आत्मघाती कदम उठाने के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है और पुलिस मर्ग कायम कर मामले की जांच कर रही है। रात में पानी पीने उठा था पति, बल्ली से लटक रहा था शव मृतक महिला की पहचान ग्राम कनारा निवासी मिटीया (46) पत्नी फतेह सिंह कवडे के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात करीब 11 से 12 बजे के बीच मृतका के पति फतेह सिंह पानी पीने के लिए उठे थे। जब वह घर के अंदर पहुंचे तो उन्होंने अपनी पत्नी को साड़ी के फंदे के सहारे बल्ली से लटका हुआ पाया। घटना के समय घर में अन्य परिजन सो रहे थे। परिजनों ने फंदे से उतारा, पुलिस ने कराया PM पत्नी का शव फंदे पर लटका देख पति ने तत्काल परिजनों को सूचित किया। परिजनों ने मौके पर पहुंचकर महिला को फंदे से नीचे उतारा और खेड़ी पुलिस चौकी को सूचना दी। सूचना मिलते ही चौकी प्रभारी राकेश सरेआम अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और पंचनामा कार्रवाई पूरी की। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल बैतूल भेजा गया। मजदूरी करती थी मृतका, 5 बच्चों की है मां शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। परिजनों ने बताया कि महिला मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करती थी। उसके पांच बच्चे हैं, जिनमें चार बेटे और एक बेटी शामिल हैं। बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि चारों बेटे बाहर मजदूरी करते हैं। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और आत्महत्या के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए सभी संभावित पहलुओं पर जांच कर रही है।

DMK-कांग्रेस ‘भ्रमित गठबंधन’, AINRC-भाजपा गठबंधन ‘थक गया’: पुडुचेरी रैली में विजय | राजनीति समाचार

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आखरी अपडेट:04 अप्रैल, 2026, 14:22 IST अभिनेता से नेता बने और तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) प्रमुख विजय, जो चुनावी शुरुआत करने जा रहे हैं, ने पुडुचेरी में एक सार्वजनिक रैली में अपने प्रतिद्वंद्वियों पर कटाक्ष किया। अभिनेता से नेता बने और टीवीके प्रमुख विजय की फाइल फोटो अभिनेता से नेता बने और तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) प्रमुख विजय, जो चुनावी शुरुआत करने जा रहे हैं, ने पुडुचेरी में एक सार्वजनिक रैली में अपने प्रतिद्वंद्वियों पर कटाक्ष किया। विजय, जिन्होंने पुडुचेरी विधानसभा चुनाव में अकेले लड़ने का फैसला किया है, ने DMK-कांग्रेस गठबंधन को “भ्रमित गठबंधन” और AINRC-भाजपा गठबंधन को “थका हुआ गठबंधन” करार दिया। उन्होंने मतदाताओं से पुदुचेरी में पार्टी के “सीटी” चिन्ह का समर्थन करने का आग्रह किया ताकि “एक-उंगली क्रांति” शुरू की जा सके, जो उनकी एक फिल्म के संवाद का स्पष्ट संदर्भ था। पीटीआई सूचना दी. इससे पहले टीवीके ने पुडुचेरी में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की घोषणा की थी और 30 उम्मीदवारों की सूची जारी की थी. पुडुचेरी में मतदान 9 अप्रैल को एक ही चरण में होंगे और वोटों की गिनती 4 मई को होगी। न्यूज़18 ने यह भी कवर किया: क्या कांग्रेस जीत सकती है? संख्याएँ, इतिहास और प्रमुख चुनौतियाँ पुडुचेरी 2021 चुनाव में क्या हुआ? मुख्यमंत्री और एआईएनआरसी के संस्थापक-अध्यक्ष एन रंगासामी के नेतृत्व वाला एनडीए लगातार दूसरे कार्यकाल पर नजर गड़ाए हुए है। कांग्रेस और द्रमुक केंद्र शासित प्रदेश में सत्ता हासिल करने के लिए लड़ने के लिए तैयार हैं। पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026: देखें कि कौन से उम्मीदवार कौन सी सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं 2021 पुडुचेरी विधानसभा चुनाव में AINRC 10 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। द्रमुक को छह सीटें मिलीं, जबकि भाजपा और कांग्रेस ने छह-छह सीटें जीतीं। पुडुचेरी की 33 सदस्यीय विधान सभा में 30 निर्वाचित सीटें शामिल हैं, जहां तीन सदस्यों को केंद्र सरकार द्वारा नामित किया जाता है। जगह : पुडुचेरी (पांडिचेरी), भारत, भारत पहले प्रकाशित: 04 अप्रैल, 2026, 14:21 IST समाचार राजनीति द्रमुक-कांग्रेस ‘भ्रमित गठबंधन’, एआईएनआरसी-भाजपा गठबंधन ‘खत्म’: पुडुचेरी रैली में विजय अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)विजय पुडुचेरी चुनाव(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)टीवीके विजय का राजनीतिक पदार्पण(टी)पुडुचेरी विधानसभा चुनाव(टी)डीएमके कांग्रेस गठबंधन(टी)एआईएनआरसी बीजेपी गठबंधन(टी)व्हिसल सिंबल पार्टी(टी)पुडुचेरी 2021 चुनाव परिणाम