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पार्किंसंस डिजीज से महिलाओं की जिंदगी हो जाती है ज्यादा मुश्किल, नई स्टडी में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

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Last Updated:April 15, 2026, 12:02 IST Parkinson’s Disease and Women: पार्किंसन एक न्यूरोलॉजिकल डिजीज है, जो बुजुर्गों को बुरी तरह प्रभावित करती है. एक रिसर्च में पता चला है कि पार्किंसंस डिजीज से महिलाओं की जिंदगी पुरुषों की तुलना में ज्यादा मुश्किल हो जाती है. इस बीमारी के कारण महिलाओं को रोज के कामकाज, रिश्तों और आत्मनिर्भरता में ज्यादा परेशानियां महसूस होती हैं. पार्किंसंस डिजीज के कारण लोगों की जिंदगी बहुत मुश्किल हो जाती है. Parkinson’s Impact on Women: पार्किंसंस डिजीज धीरे-धीरे बढ़ने वाली न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो मुख्य रूप से शरीर की गति, संतुलन और मांसपेशियों के कंट्रोल को प्रभावित करती है. आमतौर पर 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को इसका खतरा ज्यादा होता है. इस बीमारी की वजह से लोगों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित होती है और वे अपने रोज के कामकाज भी नहीं कर पाते हैं. यह एक ऐसी बीमारी है, जो समय के साथ बिगड़ती जाती है. इस बीमारी का असर सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहता है, बल्कि मरीज के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक जीवन पर भी गहरा असर होता है. पुरुषों को पार्किंसंस डिजीज का खतरा ज्यादा होता है, लेकिन महिलाएं भी इसका शिकार होती हैं. अब एक रिसर्च में इसे लेकर चौंकाने वाली बात सामने आई है. TOI की रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज की एक स्टडी में पाया गया कि महिलाओं पर पार्किंसंस डिजीज का सामाजिक और मनोवैज्ञानिक बोझ पुरुषों की तुलना में अधिक होता है. इस स्टडी में बताया गया कि पार्किंसंस के इलाज को केवल शारीरिक लक्षणों तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है. इस अध्ययन में 484 मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें 330 पुरुष और 154 महिलाएं थीं. सभी प्रतिभागियों का मूल्यांकन SCOPA-PS स्केल के माध्यम से किया गया, जो रोजमर्रा की गतिविधियों, रिश्तों, भावनात्मक स्थिति और आत्मनिर्भरता जैसे पहलुओं को मापता है. इस स्टडी के रिजल्ट से पता चला कि समान उम्र और सेम बीमारी के बावजूद महिलाओं को दैनिक जीवन में ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. महिलाएं घरेलू काम, शौक, मनोरंजन और सामाजिक संबंधों को निभाने में अधिक परेशानी महसूस करती हैं. वे खुद को अधिक निर्भर मानती हैं और अकेलेपन की भावना भी उनमें ज्यादा पाई गई. विशेषज्ञों का मानना है कि इसका कारण केवल बीमारी की गंभीरता नहीं, बल्कि सामाजिक भूमिकाएं और पारिवारिक अपेक्षाएं भी हैं, जो महिलाओं पर अधिक जिम्मेदारी डालती हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. कुछ मानसिक और भावनात्मक चुनौतियां महिला और पुरुष दोनों में समान रूप से पाई गईं. भविष्य को लेकर चिंता, बातचीत में कठिनाई और शर्म की भावना दोनों में एक जैसी होती है. यह दर्शाता है कि पार्किंसंस केवल एक शारीरिक बीमारी नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित करती है. शोधकर्ताओं से सुझाव दिया है कि पार्किंसंस के इलाज में जेंडर-सेंसिटिव दृष्टिकोण अपनाना चाहिए. मरीजों को दवाओं के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक सहायता, काउंसलिंग और सामाजिक समर्थन की भी आवश्यकता होती है. इससे उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है और वे बीमारी के साथ बेहतर तरीके से जीवन जी सकते हैं. इस बीच एक केस स्टडी में यह भी सामने आया कि एक महिला मरीज AI चैटबॉट पर अत्यधिक निर्भर हो गई थी, जिसे बाद में मानसिक स्थिति और दवाओं के प्रभाव से जोड़ा गया. इलाज और दवा में बदलाव के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ. यह घटना यह भी दर्शाती है कि तकनीक का उपयोग सावधानी और सीमाओं के साथ करना जरूरी है. यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि पार्किंसंस रोग का प्रभाव सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक भी होता है और महिलाओं पर इसका असर अधिक गहरा देखा गया है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 15, 2026, 12:02 IST

Randeep Hooda Farmer Look | Sampla Mandi Viral Video

Randeep Hooda Farmer Look | Sampla Mandi Viral Video

सांपला की अनाज मंडी में बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्‌डा। बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा रोहतक में देसी अंदाज में नजर आए। उनका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह सांपला अनाज मंडी में पजामा-कुर्ता पहने दिखे। उन्होंने सिर पर परना (गमछा) भी बांधा हुआ था। वह गेहूं की ढेरी के पास से गुजर रहे हैं। रणदीप का लुक बिल्कुल . रणदीप अपनी अपकमिंग मूवी ‘लाल रंग 2’ की शूटिंग के लिए सोमवार को रोहतक पहुंचे थे। उन्होंने गांधरा, नोनंद और सांपला अनाज मंडी में फिल्म के अलग-अलग सीन शूट किए। अनाज मंडी में वह सिर्फ 7 से 8 मिनट ही रुके। इसके बाद वह अपनी टीम के साथ वहां से निकल गए। इसका वीडियो अब सामने आया है। रणदीप हुड्‌डा के आगे और पीछे काले कपड़ों में दाे युवक भी चल रहे थे। ऐसा माना जा रहा है ये उनके बाउंसर थे। पिछले महीने बेटी के पिता बने रणदीप की पत्नी लिन ने 10 मार्च को एक बेटी को जन्म दिया। बेटी के जन्म का एक महीना पूरा होने पर रणदीप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से बेटी की पहली तस्वीर शेयर की। साथ ही खुलासा किया कि बेटी का नाम “न्योमिका” रखा है। पोती की पहली सार्वजनिक तस्वीर पर दादी आशा हुड्डा ने भी हार्ट इमोजी भी दी। एक्टर रणदीप हुड्‌डा के बारे में जानिए…. पिता सर्जन, मां सामाजिक कार्यकर्ता: रणदीप हुड्डा का जन्म 20 अगस्त 1976 को रोहतक के जसिया गांव में एक हरियाणवी जाट परिवार में हुआ। पिता डॉ. रणबीर सिंह हुड्डा एक मेडिकल सर्जन हैं, और माता आशा हुड्डा सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उनकी बड़ी बहन अंजलि हुड्डा सांगवान डॉक्टर हैं। छोटे भाई संदीप हुड्डा सिंगापुर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। तैराकी, घुड़सवारी में मेडल जीत चुके: रणदीप ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सोनीपत के राई स्थित मोतीलाल नेहरू स्कूल ऑफ स्पोर्ट्स (MNSS) से पूरी की। यहां उन्होंने तैराकी और घुड़सवारी में राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीते। स्कूल में उन्होंने थिएटर में भी रुचि दिखाई और कई नाटकों में भाग लिया, जिनमें से एक का निर्देशन भी किया। बाद में उनका तबादला दिल्ली पब्लिक स्कूल, आरके पुरम में हो गया। ऑस्ट्रेलिया में टैक्सी ड्राइवर बने: 1995 में हुड्डा ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न चले गए, जहां उन्होंने मार्केटिंग में ग्रेजुएशन और व्यवसाय प्रबंधन एवं मानव संसाधन प्रबंधन में मास्टर डिग्री प्राप्त की। वहां रहते हुए उन्होंने चीनी रेस्टोरेंट, कार वॉश, वेटर और टैक्सी ड्राइवर जैसे काम किए। 2000 में भारत लौटने के बाद उन्होंने एक एयरलाइन के मार्केटिंग विभाग में काम किया, और साथ ही दिल्ली में मॉडलिंग और थिएटर में भी हाथ आजमाया। 2023 में मणिपुर की एक्ट्रेस से शादी की: ‘टू टीच हिज ओन’ नाटक की रिहर्सल के दौरान निर्देशक मीरा नायर की नजर उन पर पड़ी और उन्हें फिल्म में काम का प्रस्ताव मिला। रणदीप हुड्डा ने नवंबर 2023 में मणिपुरी एक्ट्रेस और मॉडल लिन लैशराम से शादी की। —————————— ये खबर भी पढ़ें :- एक्टर रणदीप हुड्डा की मां की फिल्मों में एंट्री:पहली मूवी में निभाया दादी का किरदार; बेटे ने मजाकिया अंदाज में दी बधाई बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा की मां आशा हुड्डा भी अब फिल्मों में नजर आई है। अपनी पहली ही फिल्म में उन्होंने दादी का किरदार निभाया है। एक्टर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मां और पूरी टीम को फिल्म के लिए बधाई दी। पढ़ें पूरी खबर…

MP Board 10th 12th Result Declared

MP Board 10th 12th Result Declared

उज्जैन7 मिनट पहले कॉपी लिंक उज्जैन में 12वीं कक्षा के आर्ट्स संकाय में ज्योति यादव ने 97% अंक हासिल किए है। मध्यप्रदेश में एमपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम बुधवार को घोषित कर दिए गए। सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रिजल्ट जारी किया। इस साल प्रदेशभर से करीब 16 लाख छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए थे। उज्जैन में 12वीं कक्षा के आर्ट्स संकाय में ज्योति यादव ने 97% अंक हासिल किए है। रिजल्ट देखने के लिए छात्र घर बैठे आधिकारिक वेबसाइट https://mpbse.mponline.gov.in और https://www.digilocker.gov.in/web/dashboard/issuers पर जाकर अपना परिणाम देख सकते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

मशीन से कटकर अलग हुआ बच्चे का अंगूठा, डॉक्टरों ने लगाया ऐसा जोड़, अब पकड़ सकेगा पैन-पैंसिल

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Last Updated:April 15, 2026, 11:46 IST अब शरीर का कोई अंग कटकर अलग हो जाए तो उसे भी जोड़ा जा सकता है. गुरुग्राम के आर्टेमिस हॉस्पिटल्स में 13 साल के बच्चे का चारा काटने वाली मशीन से दाहिना अंगूठा कट गया, ज‍िसे डॉक्‍टरों ने माइक्रोसर्जरी से सफलतापूर्वक जोड़ा द‍िया, अब बच्चा आसानी से पेन पेंसिल पकड़ सकेगा. आर्टेम‍िस अस्‍पताल के डॉक्‍टरों ने जोड़ा 13 साल के बच्‍चे का कटा अंगूठा. Gurgaon news: आज मेडिकल साइंस इस स्तर पर पहुंच गया है कि अगर शरीर का कोई अंग कटकर अलग भी हो जाए तो उसे सर्जरी के माध्यम से न केवल जोड़ा जा सकता है बल्कि वह पहले की तरह काम भी कर सकता है. हाल ही में एक 13 साल के बच्चे का अंगूठा कटकर अलग हो गया, जिसे डॉक्टरों ने इस तरह जोड़ा है कि अब वह पहले की तरह एक्टिवली काम कर सकता है. गुरुग्राम के आर्टेमिस हॉस्पिटल्स के डॉक्टरों ने पूरी तरह से कट गए दाएं हाथ के अंगूठे को फिर से जोड़ने में सफलता पाई है. दरअसल चारा काटने की मशीन में गलती से हाथ आने से बच्चे का अंगूठा लगभग पूरी तरह से कट गया था. बच्चे को जिस समय अस्पताल लाया गया, उसकी स्थिति गंभीर थी. जरा सी भी देरी होने पर कटे हुए अंगूठे को जोड़ना मुश्किल हो जाता. ऐसे में बच्चे को उम्रभर बिना अंगूठे के ही रहना पड़ता. हाथ में अंगूठे का महत्व इससे समझा जा सकता है कि हाथों का लगभग 40 प्रतिशत काम अंगूठे की मदद से ही होता है. स्थिति की गंभीरता को समझते हुए डॉक्टरों की टीम ने इमरजेंसी रीप्लांटेशन का फैसला लिया. इस मामले में एक जटिल माइक्रोसर्जरी को अंजाम दिया गया. इसमें हड्डी को जोड़ना, आर्टरी एवं नर्व रिपेयर करना और टेंडन का रीकंस्ट्रक्शन शामिल था. सर्जरी का उद्देश्य था कि न केवल अंगूठे का स्ट्रक्चर सही रहे, बल्कि उसकी फंक्शनिंग भी सही बनी रहे. फिलहाल सर्जरी और पोस्ट-ऑपरेटिव केयर के बाद मरीज की अच्छी रिकवरी हुई है. डिस्चार्ज के समय तक अंगूठा अच्छी तरह से जुड़ गया था. यह एक चुनौतीपूर्ण मामले में बेहतर नतीजा दिखाता है. आर्टेमिस हॉस्पिटल्स के कॉस्मेटिक एंड प्लास्टिक सर्जरी हेड डॉ. प्रदीप कुमार सिंह, ने कहा, ‘इस तरह के मामलों में जल्द कदम उठाना बहुत महत्वपूर्ण होता है. जरा सी देरी से रीप्लांट की संभावना खत्म हो सकती है. इस बच्चे के मामले में तेज ट्रांसपोर्टेशन और इमरजेंसी सर्जरी से अंगूठे को बचाने में बहुत मदद मिली. इस तरह का रीप्लांटेशन बहुत चुनौतीपूर्ण होता है, जिसमें हड्डियों, वेसल्स, नर्व और टेंडन को सटीक तरीके से रिपेयर करना पड़ता है. हमें इस सर्जरी के नतीजों से बहुत खुशी हुई है. हमें उम्मीद है कि बच्चा जल्द ही आसानी से अपने अंगूठे का प्रयोग करने में सक्षम हो सकेगा.’ यह मामला किसी अंग के चोटिल होने की स्थिति में, विशेषरूप से बच्चों में तुरंत इलाज और एडवांस्ड सर्जिकल केयर के महत्व को दिखाने वाला है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Gurgaon,Gurgaon,Haryana First Published : April 15, 2026, 11:46 IST

भूत बंगला की एडवांस बुकिंग स्लो:पहले दिन महज 14 लाख के टिकट बिके, धुरंधर-2 से हो सकता है नुकसान, पहले भी क्लैश के डर से पोस्टपोन हुई थी

भूत बंगला की एडवांस बुकिंग स्लो:पहले दिन महज 14 लाख के टिकट बिके, धुरंधर-2 से हो सकता है नुकसान, पहले भी क्लैश के डर से पोस्टपोन हुई थी

अक्षय कुमार की मल्टीस्टारर हॉरर कॉमेडी फिल्म भूत बंगला 17 अप्रैल को रिलीज होने वाली है। इस फिल्म से भूल भुलैया, हेरा फेरी बना चुकी अक्षय कुमार और डायरेक्टर प्रियदर्शन की आइकॉनिक जोड़ी वापसी कर रही है, जिससे दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन ट्रेलर को मिले फीके रिस्पॉन्स और स्लो एडवांस बुकिंग से उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। रिपोर्ट्स की मानें तो डायरेक्टर प्रियदर्शन ने रिलीज के 2 दिन पहले तक फिल्म में बदलाव किए हैं और इसकी लेंथ भी कम की है। इंडस्ट्री ट्रैकर वेबसाइट सैकनिल्क के अनुसार, फिल्म भूत बंगला ने अब तक 14.3 लाख का ही एडवांस बुकिंग कलेक्शन किया है। ये फिल्म अक्षय कुमार की पिछले साल रिलीज हुईं फिल्मों जॉली एलएलबी 3, हाउसफुल 5 और केसरी चैप्टर 2 के एडवांस कलेक्शन से फिलहाल काफी पीछे है। 2025 में आईं अक्षय की फिल्मों की फर्स्ट डे एडवांस बुकिंग फिलहाल फिल्म को रिलीज होने में 2 दिन बाकी हैं, तो फिल्म का एडवांस कलेक्शन बढ़ने के अनुमान हैं। देखना होगा कि ये पिछली फिल्मों का रिकॉर्ड तोड़ पाती है या नहीं। सेंसर ने कई सीन पर चलाई कैंची 2 अप्रैल को फिल्म को सेंसर बोर्ड की तरफ से UA 16+ सर्टिफिकेट मिला है। इसके लिए मेकर्स को फिल्म में कई बड़े बदलाव करने का सुझाव दिया गया था। इन सीन पर चली सेंसर की कैंची आखिरी समय तक बदलाव करते रहे डायरेक्टर प्रियदर्शन सेंसर बोर्ड द्वारा सुझाव के कट लगने के बाद फिल्म का रनटाइम 174.57 मिनट (2 घंटे 54 मिनट) था। हालांकि बाद में फिल्म के डायरेक्टर प्रियदर्शन ने फिल्म के कुछ हिस्सों से नाखुश होकर स्वेच्छा से उनमें कट लगा दिया है। बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने फिल्म सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिलने के 10 दिन बाद फिल्म में एक-दो नहीं बल्कि पूरे 63 कट्स लगाए हैं। उन्होंने फिल्म के गानों ओ सुंदरी, ओ रे ओ सावरिया में भी बदलाव किया और 27 सेकंड के शॉट हटा दिए। इन सभी बदलाव के बाद फिल्म से 10 मिनट 5 सेकंड कम कर दिए गए हैं। ट्रेलर को भी नहीं मिला पॉजिटिव रिस्पॉन्स फिल्म भूत बंगला का ट्रेलर 6 अप्रैल को रिलीज हुआ है। फिल्म के ट्रेलर से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन मेकर्स ने इसमें कोई नयापन नहीं दिखाया। अक्षय कुमार हेरा-फेरी और भूल भुलैया जैसे किरदार में ही नजर आए। वहीं सेट भव्य, लेकिन पुरानी फिल्मों से काफी मिलता-जुलता लगता है। फिल्म के डायलॉग और गाने भी कोई खास कमाल नहीं कर पाए हैं। धुरंधर 2 के चलते बार-बार बदली गई रिलीज डेट फिल्म भूत बंगला 2 अप्रैल को रिलीज होने के लिए शेड्यूल थी, हालांकि धुरंधर 2 की सक्सेस के बाद क्लैश से बचने के लिए इसे 15 मई को रिलीज करने के लिए पोस्टपोन कर दिया गया था। इसके बाद इसे प्री-पोन कर 10 अप्रैल के लिए शेड्यूल किया गया, लेकिन फिर फाइनल तारीख 17 अप्रैल तय हुई।

भूत बंगला की एडवांस बुकिंग स्लो:पहले दिन महज 14 लाख के टिकट बिके, धुरंधर-2 से हो सकता है नुकसान, पहले भी क्लैश के डर से पोस्टपोन हुई थी

भूत बंगला की एडवांस बुकिंग स्लो:पहले दिन महज 14 लाख के टिकट बिके, धुरंधर-2 से हो सकता है नुकसान, पहले भी क्लैश के डर से पोस्टपोन हुई थी

अक्षय कुमार की मल्टीस्टारर हॉरर कॉमेडी फिल्म भूत बंगला 17 अप्रैल को रिलीज होने वाली है। इस फिल्म से भूल भुलैया, हेरा फेरी बना चुकी अक्षय कुमार और डायरेक्टर प्रियदर्शन की आइकॉनिक जोड़ी वापसी कर रही है, जिससे दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन ट्रेलर को मिले फीके रिस्पॉन्स और स्लो एडवांस बुकिंग से उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। रिपोर्ट्स की मानें तो डायरेक्टर प्रियदर्शन ने रिलीज के 2 दिन पहले तक फिल्म में बदलाव किए हैं और इसकी लेंथ भी कम की है। इंडस्ट्री ट्रैकर वेबसाइट सैकनिल्क के अनुसार, फिल्म भूत बंगला ने अब तक 14.3 लाख का ही एडवांस बुकिंग कलेक्शन किया है। ये फिल्म अक्षय कुमार की पिछले साल रिलीज हुईं फिल्मों जॉली एलएलबी 3, हाउसफुल 5 और केसरी चैप्टर 2 के एडवांस कलेक्शन से फिलहाल काफी पीछे है। 2025 में आईं अक्षय की फिल्मों की फर्स्ट डे एडवांस बुकिंग फिलहाल फिल्म को रिलीज होने में 2 दिन बाकी हैं, तो फिल्म का एडवांस कलेक्शन बढ़ने के अनुमान हैं। देखना होगा कि ये पिछली फिल्मों का रिकॉर्ड तोड़ पाती है या नहीं। सेंसर ने कई सीन पर चलाई कैंची 2 अप्रैल को फिल्म को सेंसर बोर्ड की तरफ से UA 16+ सर्टिफिकेट मिला है। इसके लिए मेकर्स को फिल्म में कई बड़े बदलाव करने का सुझाव दिया गया था। इन सीन पर चली सेंसर की कैंची आखिरी समय तक बदलाव करते रहे डायरेक्टर प्रियदर्शन सेंसर बोर्ड द्वारा सुझाव के कट लगने के बाद फिल्म का रनटाइम 174.57 मिनट (2 घंटे 54 मिनट) था। हालांकि बाद में फिल्म के डायरेक्टर प्रियदर्शन ने फिल्म के कुछ हिस्सों से नाखुश होकर स्वेच्छा से उनमें कट लगा दिया है। बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने फिल्म सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिलने के 10 दिन बाद फिल्म में एक-दो नहीं बल्कि पूरे 63 कट्स लगाए हैं। उन्होंने फिल्म के गानों ओ सुंदरी, ओ रे ओ सावरिया में भी बदलाव किया और 27 सेकंड के शॉट हटा दिए। इन सभी बदलाव के बाद फिल्म से 10 मिनट 5 सेकंड कम कर दिए गए हैं। ट्रेलर को भी नहीं मिला पॉजिटिव रिस्पॉन्स फिल्म भूत बंगला का ट्रेलर 6 अप्रैल को रिलीज हुआ है। फिल्म के ट्रेलर से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन मेकर्स ने इसमें कोई नयापन नहीं दिखाया। अक्षय कुमार हेरा-फेरी और भूल भुलैया जैसे किरदार में ही नजर आए। वहीं सेट भव्य, लेकिन पुरानी फिल्मों से काफी मिलता-जुलता लगता है। फिल्म के डायलॉग और गाने भी कोई खास कमाल नहीं कर पाए हैं। धुरंधर 2 के चलते बार-बार बदली गई रिलीज डेट फिल्म भूत बंगला 2 अप्रैल को रिलीज होने के लिए शेड्यूल थी, हालांकि धुरंधर 2 की सक्सेस के बाद क्लैश से बचने के लिए इसे 15 मई को रिलीज करने के लिए पोस्टपोन कर दिया गया था। इसके बाद इसे प्री-पोन कर 10 अप्रैल के लिए शेड्यूल किया गया, लेकिन फिर फाइनल तारीख 17 अप्रैल तय हुई।

खाना खाते ही फूलता है पेट, तो यहां जानिए गैस-ब्लोटिंग की असली वजह और इलाज

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Last Updated:April 15, 2026, 11:25 IST खाना खाते ही पेट फूलना और गैस बनना आम समस्या बनती जा रही है जो कमजोर पाचन का संकेत हो सकता है. आयुर्वेदिक डॉक्टर के अनुसार जीरा, काला नमक और नींबू का घरेलू नुस्खा, गुनगुना पानी, टहलना और वज्रासन अपनाकर इस परेशानी से राहत पाई जा सकती है. फरीदाबाद: अक्सर आपने देखा होगा कि कुछ लोगों का पेट खाना खाते ही फूल जाता है. चाहे वो हल्का खाना खाएं या थोड़ा भारी उन्हें गैस और ब्लोटिंग की समस्या हो ही जाती है. कई बार लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन बार-बार ऐसा होना इस बात का संकेत हो सकता है कि पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर रहा. आखिर ऐसा क्यों होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है यही सवाल हर किसी के मन में आता है. क्या है पेट फूलने की वजह Local18 से बातचीत में फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉक्टर चेतन शर्मा ने बताया खाना खाने के बाद पेट फूलने की सबसे बड़ी वजह गैस बनना है. यह समस्या उन लोगों में ज्यादा होती है जिनका मेटाबॉलिज्म स्लो होता है यानी जिनकी पाचन शक्ति कमजोर होती है. ऐसे लोग कुछ भी खा लें उनका पेट भारी और फूला हुआ महसूस होने लगता है. पेट फूलने की समस्या से राहत कैसे पाएं डॉक्टर चेतन शर्मा ने बताया इस समस्या से राहत पाने के लिए एक आसान घरेलू उपाय भी हैं खाना खाने के करीब 10 मिनट बाद आधा चम्मच भुना हुआ जीरा लें उसमें दो चुटकी काला नमक और चार बूंद नींबू का रस मिलाएं. इस मिश्रण को मुंह में रखकर धीरे-धीरे उसका रस बनने दें. इसे चबाना नहीं है बल्कि धीरे-धीरे रस को निगलना है. इससे पेट में बनी गैस कम होने लगती है और आराम मिलता है. शामिल करें ये दो आदतें डॉक्टर चेतन शर्मा ने बताया इसके अलावा दो और जरूरी बातें बताईं जो रोजमर्रा की आदत में शामिल करनी चाहिए. खाना खाने से 15 से 20 मिनट पहले आधा गिलास गुनगुना पानी पीना चाहिए. इससे पाचन तंत्र एक्टिव हो जाता है और खाना आसानी से पचने लगता है. दूसरी बात, खाना खाने के बाद कम से कम 100 कदम जरूर चलना चाहिए. इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और डाइजेशन में मदद मिलती है. डॉक्टर का कहना है कि अगर संभव हो तो रात में खाने के बाद 5 से 10 मिनट तक वज्रासन में बैठना चाहिए. यह योगासन पाचन के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है और गैस की समस्या को कम करता है. अगर आप आयुर्वेद और योग की इन आसान आदतों को अपनाते हैं, तो पेट फूलने और गैस की समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है. छोटी-छोटी सावधानियां ही आपको बड़ी परेशानी से दूर रख सकती हैं. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 15, 2026, 11:25 IST

Gwalior High Court Restores Petition with Social Responsibility Condition

Gwalior High Court Restores Petition with Social Responsibility Condition

ग्वालियर5 मिनट पहले कॉपी लिंक ग्वालियर हाईकोर्ट का फाइल फोटो मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक अहम फैसले में न्यायिक संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का अनोखा उदाहरण पेश किया है। कोर्ट ने साफ कहा कि वकील की गलती की सजा याचिकाकर्ता को नहीं दी जा सकती। मामला गोविंद स्वरूप श्रीवास्तव की याचिका से जुड़ा है, जो सुनवाई के दौरान उनके वकील के उपस्थित न रहने के कारण खारिज हो गई थी। बाद में बहाली के लिए दिया गया आवेदन भी सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया था। डिवीजन बेंच ने दिया राहत का फैसला इस आदेश को चुनौती देने पर डिवीजन बेंच ने पाया कि वकील दूसरी अदालत में व्यस्त होने के कारण पेश नहीं हो सके थे। ऐसे में याचिकाकर्ता के अधिकारों को प्रभावित करना न्यायसंगत नहीं है। कोर्ट ने पूर्व आदेशों को निरस्त करते हुए याचिका को पुनः बहाल करने के निर्देश दिए। ‘सजा’ नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी की शर्त हालांकि, अदालत ने याचिका बहाल करते हुए एक विशेष शर्त भी जोड़ी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता या उसका वकील माधव अंध आश्रम जाकर कम से कम 2 हजार रुपए की खाद्य सामग्री प्रदान करे और वहां के बच्चों व जरूरतमंदों के साथ कम से कम एक घंटा समय बिताए। ‘सोशल ऑडिट’ को बढ़ावा अदालत ने स्पष्ट किया कि यह शर्त दंड नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन है। कोर्ट ने ‘सोशल ऑडिट’ की अवधारणा को बढ़ावा देते हुए कहा कि समाज के जिम्मेदार लोगों को समय-समय पर ऐसे संस्थानों का निरीक्षण करना चाहिए, ताकि वहां रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो सके। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

ममता बनर्जी से लेकर सुवेंदु अधिकारी तक, शीर्ष 10 पावर प्लेयर्स से मिलें जो बंगाल चुनाव को आकार देंगे | चुनाव समाचार

The MP Board 10th and 12th results declared at mpbse.nic.in.

आखरी अपडेट:15 अप्रैल, 2026, 11:22 IST अपने क्षेत्र की रक्षा करने वाले विरासती राजनेताओं से लेकर अपनी पार्टियों की किस्मत को नया आकार देने की कोशिश कर रहे उभरते नेताओं तक, मुट्ठी भर नाम सामने आते हैं (बाएं से) ममता बनर्जी, सुवेंदु अधिकारी और अधीर रंजन चौधरी मैदान में हैं। 2026 का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव एक नियमित राज्य प्रतियोगिता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है – यह अब राष्ट्रीय निहितार्थों के साथ एक उच्च-स्तरीय राजनीतिक प्रदर्शन है। लगभग 15 वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद, ममता बनर्जी को शायद अब तक की सबसे कठिन लड़ाई का सामना करना पड़ रहा है: एक पुनर्जीवित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जो अपने स्थिर वोट-शेयर लाभ को सत्ता में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है, और एक वाम मोर्चा नए नेतृत्व और जमीनी स्तर पर लामबंदी के माध्यम से एक अप्रत्याशित पुनरुद्धार का प्रयास कर रहा है। इस चुनाव के केंद्र में एक स्तरित राजनीतिक आख्यान है- सत्ता विरोधी लहर बनाम कल्याणकारी राजनीति, क्षेत्रीय पहचान बनाम राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा, और नेतृत्व का करिश्मा बनाम संगठनात्मक विस्तार। मुकाबला सिर्फ सीटों का नहीं है; यह इस बारे में है कि बंगाल के राजनीतिक भविष्य को कौन परिभाषित करता है: एक नेता जो एक दशक से अधिक समय से राज्य की राजनीति पर हावी है, या चुनौती देने वाले इसके वैचारिक मानचित्र को फिर से तैयार करना चाहते हैं। अभियान ने पहले ही हाई-वोल्टेज फेस-ऑफ, पीढ़ीगत बदलाव और वैचारिक विरोधाभासों को जन्म दिया है। अपने क्षेत्र की रक्षा करने वाले विरासती राजनेताओं से लेकर अपनी पार्टियों की किस्मत को नया आकार देने की कोशिश कर रहे उभरते नेताओं तक, मुट्ठी भर नाम सामने आते हैं; न केवल उम्मीदवारों के रूप में, बल्कि राज्य भर में चल रही बड़ी राजनीतिक लड़ाई के प्रतीक के रूप में। यहां 10 प्रमुख आंकड़े हैं जो 2026 के बंगाल चुनावों को परिभाषित करेंगे: 1. ममता बनर्जी: मुख्यमंत्री, जो भबनीपुर सीट से लड़ेंगी, अपने लंबे कार्यकाल को बढ़ाने की मांग कर रही हैं। उनका अभियान कल्याणकारी योजनाओं और मजबूत व्यक्तिगत जुड़ाव पर आधारित है। चुनावी युद्ध के मैदान में तृणमूल कांग्रेस का नेतृत्व करते हुए, बनर्जी को प्रतिद्वंद्वियों के सत्ता विरोधी लहर और भ्रष्टाचार के हमलों का सामना करना पड़ रहा है। 2. फिरहाद हकीम: तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, जो वर्तमान में कोलकाता के मेयर और राज्य सरकार में प्रमुख मंत्री हैं, ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक हैं। वह कोलकाता के अल्पसंख्यक बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में प्रभाव रखते हैं और अपने संगठनात्मक नियंत्रण और शहरी बंगाल में जमीनी स्तर पर जुड़ाव के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने हाल ही में यह कहकर बहस छेड़ दी थी कि “एक दिन बंगाल के 50 प्रतिशत लोग उर्दू बोलेंगे”, जिसकी बंगाली संस्कृति के संरक्षण के संबंध में आलोचना हुई। 3. अरूप बिस्वास: टॉलीगंज सीट से लड़ने के लिए तैयार बिस्वास मजबूत स्थानीय आधार वाले एक अनुभवी नेता हैं जो टीएमसी के मजबूत शहरी नेटवर्क का प्रतिनिधित्व करते हैं। 4. शशि पांजा: वरिष्ठ मंत्री और मुखर टीएमसी प्रवक्ता शहरी और शिक्षित मतदाताओं के बीच पार्टी की पहुंच के लिए महत्वपूर्ण हैं। 5. सुवेंदु अधिकारी: ममता बनर्जी के लिए एक हाई-प्रोफाइल चुनौतीकर्ता, अधिकारी एक पूर्व टीएमसी अंदरूनी सूत्र थे, जो अब भाजपा का सबसे बड़ा राज्य चेहरा बन गए हैं, जो बंगाल में पार्टी के आक्रामक प्रयास का प्रतीक है। 6. दिलीप घोष: पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अपनी जमीनी स्तर की लामबंदी और कट्टरपंथी बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं। 7. रूपा गांगुली: मजबूत रिकॉल वैल्यू वाले सेलिब्रिटी राजनेता बीजेपी को शहरी मध्यम वर्ग के मतदाताओं से जुड़ने में मदद करते हैं। 8. प्रियंका टिबरेवाल: एक युवा, मीडिया-प्रेमी नेता, वह एक नया शहरी नेतृत्व आधार बनाने के भाजपा के प्रयास का प्रतिनिधित्व करती हैं। 9. हुमायूं कबीर: रेजीनगर से चुनाव लड़ रहे निलंबित टीएमसी नेता हाल ही में पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति बनाने को लेकर चर्चा में थे। वर्तमान में वे भरतपुर से विधायक हैं, उन्होंने 2025 में टीएमसी छोड़ दी और अपना खुद का राजनीतिक संगठन, आम जनता उन्नयन पार्टी बनाई। स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला करने से पहले उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के साथ गठबंधन किया था। 10. अधीर रंजन चौधरी: वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पश्चिम बंगाल में, विशेषकर मुर्शिदाबाद क्षेत्र में पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक, चौधरी भाजपा और टीएमसी दोनों के खिलाफ अपनी आक्रामक और अक्सर जुझारू शैली के लिए जाने जाते हैं। ममता के कट्टर आलोचक, उन्हें उनके खिलाफ अभियान के लिए अपनी ही पार्टी के भीतर से कुछ आलोचना का सामना करना पड़ा, खासकर जब कांग्रेस अखिल भारतीय गठबंधन के लिए टीएमसी प्रमुख को लुभाने की कोशिश कर रही थी। पहले लोकसभा में कांग्रेस के नेता के रूप में चौधरी की राष्ट्रीय स्तर पर ऊंची छवि थी। लेकिन समय के साथ, क्षेत्रीय मजबूरियाँ (जैसे संसद में टीएमसी के साथ काम करना) राज्य-स्तरीय प्रतिद्वंद्विता पर भारी पड़ने लगीं, जिससे उन्हें किनारे कर दिया गया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 05 अप्रैल, 2026, 10:54 IST समाचार चुनाव ममता बनर्जी से लेकर सुवेंदु अधिकारी तक, शीर्ष 10 पावर प्लेयर्स से मिलें जो बंगाल चुनाव को आकार देंगे अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)ममता बनर्जी(टी)तृणमूल कांग्रेस टीएमसी(टी)भारतीय जनता पार्टी बीजेपी(टी)सुवेंदु अधिकारी(टी)बंगाल राजनीतिक लड़ाई(टी)बंगाल में सत्ता विरोधी लहर

खजुराहो में युवक के जिंदा जलने का VIDEO:हेरिटेज रिसोर्ट से बंदर भगा रहा था, हाईटेंशन लाइन से टकराया पाइप

खजुराहो में युवक के जिंदा जलने का VIDEO:हेरिटेज रिसोर्ट से बंदर भगा रहा था, हाईटेंशन लाइन से टकराया पाइप

खजुराहो के रेलवे स्टेशन के पास स्थित ‘दि खजुराहो हेरिटेज रिसोर्ट’ में एक कर्मचारी की करंट लगने से मौत हो गई। यह घटना मंगलवार शाम 6 बजे रिसोर्ट की छत से बंदर भगाते समय हुई। पूरी घटना का वीडियो बुधवार सुबह सामने आया है। मृतक की पहचान खजुराहो निवासी रिंकू रैकवार के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि उसने अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए महज पांच दिन पहले ही इस होटल में काम शुरू किया था। क्या है पूरे वीडियो में वी़डियो में नजर आ रहा है कि होटल कर्मचारी रिंकू रैकवार रिसोर्ट से निकल आस-पास देखता है। उसे छत पर बंदर नजर आते हैं। वो दीवार के पास रखा करीब 15 फीट ऊंचा लौहे का पाइप उठाता है। दो बार पाइप को जमीन पर पटकता है। इसके बाद वो पाइप को सीधा खड़ा करके खड़ा हो जाता है। कुछ दूर खड़ा रहने के बाद वो पीछे की ओर चलने लगता है। इसी दौरान पाइप हाईटेंशन से टकरा जाता है। तेज धमाके के साथ रिंकू आग की लपटों में घिर जमीन पर गिर जाता है। धमाके की आवाज सुन एक महिला कर्मचारी बाहर आती है और चीखती हुई अंदर चली जाती है। वीडियो में नजर आ रहा है कि जिस जगह यानी पेट पर पाइप टिका हुआ था, वहां से छाती तक का हिस्सा पूरी तरह से जला हुआ है। छाती से लेकर पेट तक बड़ा सा छेद नजर आ रहा है। तस्वीरें देखिए… लापरवाही की होगी जांच हादसे की सूचना मिलते ही बमीठा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। बुधवार सुबह पीएम के बाद शव परिजन को सौंप दिया गया। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या होटल की छत के इतने करीब से हाईटेंशन लाइन का गुजरना नियमों के खिलाफ था या इसमें होटल प्रबंधन की ओर से कोई लापरवाही हुई है।