Saturday, 29 Aug 2026 | 08:41 PM

Trending :

EXCLUSIVE

Gwalior High Court Restores Petition with Social Responsibility Condition

Gwalior High Court Restores Petition with Social Responsibility Condition

ग्वालियर5 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

ग्वालियर हाईकोर्ट का फाइल फोटो

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक अहम फैसले में न्यायिक संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का अनोखा उदाहरण पेश किया है। कोर्ट ने साफ कहा कि वकील की गलती की सजा याचिकाकर्ता को नहीं दी जा सकती।

मामला गोविंद स्वरूप श्रीवास्तव की याचिका से जुड़ा है, जो सुनवाई के दौरान उनके वकील के उपस्थित न रहने के कारण खारिज हो गई थी। बाद में बहाली के लिए दिया गया आवेदन भी सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया था।

डिवीजन बेंच ने दिया राहत का फैसला

इस आदेश को चुनौती देने पर डिवीजन बेंच ने पाया कि वकील दूसरी अदालत में व्यस्त होने के कारण पेश नहीं हो सके थे। ऐसे में याचिकाकर्ता के अधिकारों को प्रभावित करना न्यायसंगत नहीं है। कोर्ट ने पूर्व आदेशों को निरस्त करते हुए याचिका को पुनः बहाल करने के निर्देश दिए।

‘सजा’ नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी की शर्त

हालांकि, अदालत ने याचिका बहाल करते हुए एक विशेष शर्त भी जोड़ी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता या उसका वकील माधव अंध आश्रम जाकर कम से कम 2 हजार रुपए की खाद्य सामग्री प्रदान करे और वहां के बच्चों व जरूरतमंदों के साथ कम से कम एक घंटा समय बिताए।

‘सोशल ऑडिट’ को बढ़ावा

अदालत ने स्पष्ट किया कि यह शर्त दंड नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन है। कोर्ट ने ‘सोशल ऑडिट’ की अवधारणा को बढ़ावा देते हुए कहा कि समाज के जिम्मेदार लोगों को समय-समय पर ऐसे संस्थानों का निरीक्षण करना चाहिए, ताकि वहां रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो सके।

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
World News Updates; Trump Pakistan China

May 17, 2026/
7:42 am

13 मिनट पहले कॉपी लिंक मालदीव में इटली के 5 गोताखोरों की मौत के बाद चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन...

Super Chess Classic Longest Match

May 23, 2026/
10:36 am

Hindi News Sports Super Chess Classic Longest Match | Praggnanandhaa Vs Lagrave; 5 Contenders For Title बुखारेस्ट (रोमानिया)3 मिनट पहले...

जनपद सीईओ से अभद्रता कर गालियां दीं, FIR:राजगढ़ में विधायक को भी अपशब्द कहे; अवैध खनन शिकायत करने पहुंचा था

February 20, 2026/
10:15 pm

खिलचीपुर जनपद पंचायत कार्यालय में अवैध खनन की शिकायत लेकर पहुंचे एक युवक ने गुरुवार को हंगामा कर दिया। घटना...

ट्रम्प ने यूरोपीय यूनियन की कार-ट्रकों पर 25% टैरिफ लगाया:कहा- व्यापार समझौते का पालन नहीं कर रहे, छूट चाहिए तो अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग करो

May 1, 2026/
10:13 pm

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की है कि अगले हफ्ते से यूरोपीय संघ (EU) से आने वाली कारों...

Iran Football Players Refugee Decision Changes

March 15, 2026/
10:52 am

17 मिनट पहले कॉपी लिंक ऑस्ट्रेलिया में शरण लेने का फैसला करने वाली सात ईरानी महिला फुटबॉल टीम की तीन...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

Gwalior High Court Restores Petition with Social Responsibility Condition

Gwalior High Court Restores Petition with Social Responsibility Condition

ग्वालियर5 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

ग्वालियर हाईकोर्ट का फाइल फोटो

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक अहम फैसले में न्यायिक संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का अनोखा उदाहरण पेश किया है। कोर्ट ने साफ कहा कि वकील की गलती की सजा याचिकाकर्ता को नहीं दी जा सकती।

मामला गोविंद स्वरूप श्रीवास्तव की याचिका से जुड़ा है, जो सुनवाई के दौरान उनके वकील के उपस्थित न रहने के कारण खारिज हो गई थी। बाद में बहाली के लिए दिया गया आवेदन भी सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया था।

डिवीजन बेंच ने दिया राहत का फैसला

इस आदेश को चुनौती देने पर डिवीजन बेंच ने पाया कि वकील दूसरी अदालत में व्यस्त होने के कारण पेश नहीं हो सके थे। ऐसे में याचिकाकर्ता के अधिकारों को प्रभावित करना न्यायसंगत नहीं है। कोर्ट ने पूर्व आदेशों को निरस्त करते हुए याचिका को पुनः बहाल करने के निर्देश दिए।

‘सजा’ नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी की शर्त

हालांकि, अदालत ने याचिका बहाल करते हुए एक विशेष शर्त भी जोड़ी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता या उसका वकील माधव अंध आश्रम जाकर कम से कम 2 हजार रुपए की खाद्य सामग्री प्रदान करे और वहां के बच्चों व जरूरतमंदों के साथ कम से कम एक घंटा समय बिताए।

‘सोशल ऑडिट’ को बढ़ावा

अदालत ने स्पष्ट किया कि यह शर्त दंड नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन है। कोर्ट ने ‘सोशल ऑडिट’ की अवधारणा को बढ़ावा देते हुए कहा कि समाज के जिम्मेदार लोगों को समय-समय पर ऐसे संस्थानों का निरीक्षण करना चाहिए, ताकि वहां रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो सके।

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.