अगर ब्लड प्रेशर 200 के पार हो जाए तो क्या होगा, डॉक्टर बोले – यह मेडिकल इमरजेंसी, मौत का भी खतरा

Last Updated:April 15, 2026, 15:09 IST High Blood Pressure Crisis: अगर ब्लड प्रेशर 200 के पार चला जाए, तो यह एक खतरनाक मेडिकल इमरजेंसी होती है. इससे ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक आ सकता है. डॉक्टर ने बताया कि बीपी बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो इससे किडनी और आंखों को गंभीर नुकसान हो सकता है. ऐसे में तुरंत डॉक्टर की मदद लेना जरूरी होता है, क्योंकि लापरवाही जानलेवा हो सकती है. बीपी अगर 200 के पार हो जाए, तो हाइपरटेंसिव क्राइसिस हो सकता है. इसमें जान भी जा सकती है. Can BP Over 200 Be Fatal: हाई ब्लड प्रेशर की समस्या आजकल तेजी से बढ़ रही है और हर उम्र के लोग इसका शिकार हो रहे हैं. ब्लड प्रेशर का सामान्य स्तर 120/80 mmHg माना जाता है, लेकिन जब इससे ज्यादा हो जाता है, तब हाइपरटेंशन की कंडीशन पैदा हो जाती है. अगर बीपी अचानक 200 के पार पहुंच जाए, तो यह बेहद खतरनाक स्थिति बन जाती है. कई लोग इसे हल्के में लेते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि इतना ज्यादा ब्लड प्रेशर शरीर के कई जरूरी अंगों को तुरंत नुकसान पहुंचा सकता है. डॉक्टर इसे मेडिकल इमरजेंसी मानते हैं, जिसे नजरअंदाज करने से मौत हो सकती है. लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने News18 को बताया कि जब ब्लड प्रेशर 200 या उससे ऊपर चला जाता है, तो इसे हाइपरटेंसिव क्राइसिस कहा जाता है. इस स्थिति में दिल, दिमाग, किडनी और आंखों पर तुरंत दबाव बढ़ जाता है. इससे खून की नसें कमजोर हो सकती हैं और फटने का खतरा बढ़ जाता है. यही कारण है कि इस स्थिति में तुरंत इलाज जरूरी होता है. बीपी हाई होने का सबसे बड़ा खतरा दिमाग पर पड़ता है. बहुत ज्यादा बीपी के कारण ब्रेन में ब्लड वेसल्स फट सकती हैं, जिससे स्ट्रोक हो सकता है. इससे कई मरीजों को लकवा मार जाता है. मरीज को तेज सिरदर्द, चक्कर, धुंधला दिखना, उल्टी या बेहोशी जैसे लक्षण भी महसूस होते हैं. अगर समय पर इलाज न मिले, तो मौत हो सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर ने बताया कि हार्ट पर भी इसका गंभीर असर पड़ता है. हाई ब्लड प्रेशर के कारण दिल को खून पंप करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे हार्ट अटैक आ सकता है. लंबे समय तक ऐसा रहने पर हार्ट फेल होने का खतरा भी बढ़ सकता है. इसके अलावा किडनी और आंखों को भी नुकसान पहुंच सकता है. किडनी की छोटी-छोटी नसें खराब हो सकती हैं, जिससे किडनी फेलियर का खतरा रहता है. वहीं आंखों की नसों पर असर पड़ने से नजर कमजोर हो सकती है या अचानक विजन लॉस हो सकता है. सही समय पर इलाज से हार्ट अटैक, किडनी फेलियर, विजन लॉस और स्ट्रोक से बचा जा सकता है. अब सवाल है कि अगर किसी का बीपी 200 के पार हो जाए, तो क्या करें? डॉक्टर लोकेंद्र ने बताया कि किसी का बीपी 200 के आसपास या उससे ज्यादा हो जाए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या नजदीकी अस्पताल जाएं. घर पर खुद से दवा लेने या इंतजार करने की गलती बिल्कुल न करें. मरीज को शांत रखें, ज्यादा हिलने-डुलने से बचाएं और तुरंत मेडिकल सहायता लें. ब्लड प्रेशर का 200 के पार जाना शरीर के लिए अलार्म की तरह है. यह संकेत देता है कि तुरंत ध्यान देने की जरूरत है. सही समय पर इलाज से जान बच सकती है. अगर इस दौरान लापरवाही की, तो जान जा सकती है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 15, 2026, 15:09 IST
चलती ट्रेन में फायरिंग, 2 कर्मचारियों से 7 लाख लूटे:रामपुर में रफ्तार धीमी पड़ते ही कूदकर भागे; पीड़ित दिल्ली जा रहे थे

यूपी के रामपुर में बुधवार सुबह 10 बजे चलती संपर्क क्रांति एक्सप्रेस ट्रेन में दो बदमाशों ने तमंचा और पिस्टल दिखकर दो कर्मचारियों से 7 लाख रुपए लूट लिए। पीड़ित उत्तराखंड के रहने वाले हैं। वे कारोबारी की दुकान के लिए ऑटोमोबाइल का सामान खरीदने दिल्ली जा रहे थे। आरोप है कि बदमाश पहले से ही ट्रेन में सवार थे। ट्रेन जैसे ही बिलासपुर के नजदीक धीमी हुई, बदमाशों ने दोनों कर्मचारियों को घेर लिया। उन्होंने दोनों कर्मचारियों को गन प्वाइंट पर लिया और उनसे लगभग 7 लाख रुपए लूट लिए। आरोप है कि भागते समय बदमाशों ने हवाई फायरिंग भी की, जिससे यात्रियों में दहशत फैल गई। इसके बाद बदमाश चलती ट्रेन से कूदकर फरार हो गए। यह घटना बिलासपुर कोतवाली क्षेत्र में हुई। 2 फोटो देखिए… व्यापार मंडल बोला- आरपीएफ जल्दी कार्रवाई करें घटना की सूचना मिलते ही रुद्रपुर रेलवे स्टेशन पर व्यापारियों की भीड़ जमा हो गई। पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने पीड़ितों से मुलाकात की। व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा के नेतृत्व में व्यापारियों ने आरपीएफ से मिलकर आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बदमाशों की तलाश में आसपास के क्षेत्रों में लगातार दबिश दी जा रही है। अब सिलसिलेवार ढंग से पढ़िए पूरी खबर… सुबह दिल्ली के लिए रवाना हुए थे ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर की सिंह कॉलोनी स्थित जपनीत ऑटो के कर्मचारी रितिक मंडल और साहिब सिंह ऑटोमोबाइल का सामान खरीदने दिल्ली जा रहे थे। दोनों बुधवार सुबह रुद्रपुर रेलवे स्टेशन से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। उन्हें दिल्ली से ऑटोमोबाइल का सामान खरीदना था, जिसके लिए वे नकदी लेकर जा रहे थे। सुरक्षा के लिहाज से दोनों कर्मचारियों ने 7 लाख की नकदी अपनी कमर में बेल्ट के जरिए बांध रखी थी। आशंका जताई जा रही है कि बदमाशों को पहले से ही इस बड़ी रकम की भनक लग गई थी और वे रेकी करते हुए उसी ट्रेन में सवार हो गए। जैसे ही संपर्क क्रांति एक्सप्रेस उत्तर प्रदेश के बिलासपुर रोड स्टेशन के नजदीक पहुंची, ट्रेन की रफ्तार धीमी हो गई। इसी दौरान तीन बदमाशों ने रितिक और साहिब सिंह को घेर लिया। बदमाशों ने उनके सिर पर तमंचा और पिस्टल तान दी, जिससे कर्मचारी बुरी तरह दहशत में आ गए। चलती ट्रेन से छलांग लगाई मौत का डर दिखाकर बदमाशों ने कर्मचारियों की कमर से नोटों से भरी बेल्ट छीन ली। वारदात को अंजाम देने के बाद, बदमाशों ने दहशत फैलाने के लिए हवाई फायरिंग की और चलती ट्रेन से छलांग लगाकर भाग गए। घटना के बाद पूरी ट्रेन में अफरा-तफरी मच गई। लूट की खबर मिलते ही रुद्रपुर के व्यापारियों में भारी रोष फैल गया। व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा के नेतृत्व में दर्जनों व्यापारी रेलवे स्टेशन पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। व्यापारियों ने आरपीएफ चौकी प्रभारी संतोष कुमार मीणा से मुलाकात कर जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग की। घटना की सूचना पर रुद्रपुर और रामपुर की जीआरपी (राजकीय रेलवे पुलिस) और आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) की टीमें मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने पीड़ितों से पूछताछ की, घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के जंगलों में तलाशी अभियान चलाया, लेकिन बदमाशों का कोई सुराग नहीं मिला। जीआरपी प्रभारी ईश्वर चंद ने बताया, मामले की जांच की जा रही है। आरोपियों की तलाश में पुलिस टीमें जुटी हुई हैं। आरपीएफ अधिकारी शिखा मलिक ने भी मौके पर पहुंचकर जांच की है। पुलिस फिलहाल सीसीटीवी फुटेज और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। आरपीएफ चौकी प्रभारी के मुताबिक, पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है। बिलासपुर रोड रेलवे स्टेशन और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस को शक है कि यह किसी ‘इनसाइडर’ की टिप हो सकती है, क्योंकि बदमाशों को सटीक पता था कि पैसा कहां छिपाया गया है। —————— ये खबर भी पढ़ें… आशुतोष महाराज ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को अपशब्द कहे:लिखा- ब्राह्मणों का अपमान किया..बदला लूंगा, लखनऊ में तहरीर दी आशुतोष ब्रह्मचारी ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को लेकर फेसबुक पर अपशब्द लिखे। उन्होंने उपमुख्यमंत्री के खिलाफ लखनऊ पुलिस से शिकायत की है। शंकराचार्य पर बटुकों से यौन उत्पीड़न की FIR कराने वाले आशुतोष महाराज बुधवार को हजरतगंज कोतवाली पहुंचे। पढ़ें पूरी खबर…
उधारी की राह पर भारतीय, 10 साल का रिकॉर्ड टूटा:जीवनशैली और एसेट्स के लिए बढ़ रहा पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड का चलन

बीते एक दशक में हमारी आर्थिक आदतें तेजी से बदल रही हैं। ईएमआई, क्रेडिट कार्ड और होम लोन अब जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। भारतीय परिवारों की वित्तीय देनदारियां बढ़कर जीडीपी के 6.2% पर पहुंच गई हैं, जो बीते एक दशक का उच्चतम स्तर है। क्लाइंट एसोसिएट्स के वाइट पेपर ‘द न्यू इंडियन हाउसहोल्ड बैलेंस शीट’ के अनुसार, भारतीयों की उधारी अब उनकी बचत की रफ्तार को पीछे छोड़ रही है। महामारी के बाद के दौर में घरेलू कर्ज में 44.6% सीएजीआर की बढ़त हुई है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि कर्ज का बढ़ना हमेशा नकारात्मक नहीं होता। यह बढ़ते आत्मविश्वास और भविष्य की बेहतर कमाई की उम्मीद का भी संकेत है। बड़ा बदलाव क्या है? – बचत घट रही है – महामारी से पहले शुद्ध वित्तीय बचत जीडीपी का 7.7% थी। वित्त वर्ष 2024 में यह घटकर 5.2% रह गई। यानी हर 100 रुपए में से निवेश के लिए कम पैसे बचते हैं। – कर्ज बढ़ रहा है – घरेलू वित्तीय देनदारियां जीडीपी का 4.1% (महामारी से पहले) से बढ़कर अब 6.2% हो गई हैं, यह एक दशक का सबसे ऊंचा स्तर है। – प्रॉपर्टी में निवेश बढ़ा- कुल बचत में भौतिक संपत्ति (मुख्यतः रियल एस्टेट) की हिस्सेदारी 58-60% से 70% हो गई है। – शेयर-म्यूचुअल फंड में उछाल- इक्विटी और म्यूचुअल फंड में निवेश वित्त वर्ष 2020 के 4% से तीन गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 15% हो गया है। 6.2% जीडीपी के अनुपात में घरेलू कर्ज; बीते एक दशक के उच्चतम स्तर पर। 44.6% महामारी के बाद उधारी की सालाना विकास दर; बचत से ज्यादा रफ्तार। 5.2% जीडीपी के मुकाबले शुद्ध वित्तीय बचत; दशक के निचले स्तर के करीब। (स्रोत: क्लाइंट एसोसिएट्स – द न्यू इंडियन हाउसहोल्ड बैलेंसशीट (2025) क्रेडिट कार्ड, पर्सनल – वाहन लोन का कर्ज बीते एक दशक में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ा क्रेडिट कार्ड का क्रेज – अब कर्ज सिर्फ जरूरत के लिए नहीं, बल्कि बेहतर लाइफस्टाइल के लिए भी लिया जा रहा है। यह सेगमेंट 25.2% की दर से सबसे तेजी से बढ़ रहा है। पर्सनल लोन – लाइफस्टाइल अपग्रेड और कंजम्पशन के लिए पर्सनल लोन में 20.1% की ग्रोथ देखी गई है। फिजिकल एसेट्स का मोह – कुल घरेलू बचत का 70% हिस्सा अब रियल एस्टेट जैसे फिजिकल एसेट्स में जा रहा है, जिससे हाथ में नकदी की कमी हो रही है। प्लानिंग चार अहम काम जो हमें बिना देर किए शुरू करने चाहिए 1: एसआईपी शुरू करें: इक्विटी और म्यूचुअल फंड में नियमित निवेश दीर्घकालिक संपत्ति बनाएगा। 2: कर्ज की समीक्षा करें: क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन की लागत सबसे ज़्यादा होती है, पहले इन्हें चुकाएं। 3: फंड बनाएं: 6 महीने का इमरजेंसी फंड बनाएं, लिक्विड एफडी या डेट फंड में रखें। 4: पोर्टफोलियो डायवर्सिफाई करें: सिर्फ रियल एस्टेट नहीं, इक्विटी, डेट और गोल्ड का संतुलन रखें।
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: | पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 चुनाव आयोग ने बरनोल-बोरोलीन बयान के साथ दंगाइयों को कड़ी चेतावनी जारी की

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने एक अलग ही तरीका बताया है। दक्षिण कोलकाता के जिला अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक खास संदेश जारी किया, जिसने लोगों का ध्यान खींचा। ऑफिसर ने 1990 की फिल्म दिल के मशहूर गाने हम प्यार करने वाले दुनिया से ना डरने वाले का वीडियो शेयर किया। इस गाने के जरिए उन्होंने यह बताया कि इस गाने में लोग किसी से नहीं, बल्कि चुनाव आयोग में भी बिना किसी दबाव या आलोचना के अपने काम में लगे हैं। उनके साफ़ा में कहा गया था कि आयोग का मकसद सिर्फ राज्य में शराब और वाणिज्यिक चुनाव कराना है। https://t.co/eve5fVogof – डीईओ कोल साउथ (@deokolsouth) 12 अप्रैल 2026 असामाजिक तत्वों की कड़ी चेतावनी इसके साथ ही उन्होंने असामाजिक तत्वों और मंदबुद्धि लोगों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने तंज कसते हुए अंदाज में कहा कि जो लोग चुनाव में हिंसा या गड़बड़ी करने की सोच रहे हैं, वे पहले ‘बर्नोल’ और ‘बोरोलीन’ का स्टॉक रख लेते हैं। उनका मतलब साफ था कि अगर किसी को मानसिक विकार है, तो सुरक्षा बल पर्याप्त संकेत देगा कि उन्हें चोट भी लग सकती है और फिर मरहम की जरूरत मंद हो सकती है। अधिकारी ने यह भी कहा कि सभी मतदाताओं को बिना डर के मतदान करने का अधिकार है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे फ्रैंक वोट करें और किसी भी तरह के दबाव या डर से प्रभावित न हों। साथ ही उन्होंने यह भी विश्वास दिलाया कि चुनाव आयोग पूरी तरह से इन बातों पर ध्यान दे रहा है। न कोई हिंसा होगी, न ख़तरनाक, न लालच दिया जाएगा और न ही ज़मीन पर कब्ज़ा किया जाएगा। बर्नोल और बोरलीन का मतलब बयान में ‘बर्नोल’ शब्द का इस्तेमाल विशेष रूप से ध्यान रेस्तरां में किया गया है। सोशल मीडिया में इसका इस्तेमाल मजाक के तौर पर किया जाता है, जब किसी को किसी भी बात से बहुत जलन होती है। वहीं ‘बोरोलीन’ का नाम इसलिए खास है क्योंकि यह बंगाल में बहुत लोकप्रिय है और लगभग हर घर में इस्तेमाल किया जाता है। इन शब्दों के जरिए अधिकारी ने एक ऐसा संदेश दिया, जो सीधे लोगों को समझ में आ जाए और असर करे. बिहार, पश्चिम बंगाल में पिछले चुनावों के दौरान हिंसा, बूथों पर कब्ज़ा और खतरनाक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। इसी वजह से इस बार चुनाव आयोग ने सबसे पहले सबसे बड़ा स्टाल लगाने का फैसला लिया है. राज्य में बड़ी संख्या में केंद्रीय बल शामिल थे, ताकि मतदान के दौरान कोई गड़बड़ी न हो। चुनाव आयोग का संकेत राजनीतिक तौर पर भी बयान को काफी अहम माना जा रहा है. भले ही किसी पार्टी का नाम नहीं लिया, लेकिन रेस्टॉरेंट का मानना है कि यह संदेश उन लोगों के लिए है जो चुनाव में गड़बड़ी करने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही, एक सरकारी अधिकारी द्वारा इस तरह की सीधी और अधूरी अनाड़ी भाषा का प्रयोग भी चर्चा का विषय बन गया है। चुनाव आयोग इस बार यह साफ संकेत देना चाहता है कि किसी भी हाल में चुनाव हो। अगर कोई नियम तोड़ने की कोशिश की जाएगी, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ये भी पढ़ें: जनसंख्या वृद्धि के आधार पर जनसंख्या वृद्धि की मांग, बढ़ाए सीएम स्टालिन (टैग्सटूट्रांसलेट)डब्ल्यूबी चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)ईसीआई चेतावनी(टी)बर्नोल और बोरोलिन ट्वीट(टी)भारत का चुनाव आयोग(टी)बंगाल राजनीतिक हिंसा(टी)चप्पा वोटिंग(टी)दक्षिण कोलकाता डीईओ(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)चुनाव आयोग की चेतावनी(टी)बर्नोल बोरोलिन बयान(टी)ईसीआई सख्ती(टी)बंगाल चुनाव हिंसा(टी)डीईओ कोलकाता बयान(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)चुनाव आयोग की चेतावनी(टी)बर्नोल और बोरलाइन ट्वीट का(टी)भारतीय चुनाव आयोग(टी)बंगाल में राजनीतिक हिंसा(टी)छप्पा में हिंसा(टी)दक्षिण कोलकाता के चुनाव आयोग के प्रमुख(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)चुनाव आयोग की चेतावनी(टी)बर्नोलबोरोलाइन का बयान(टी)चुनाव आयोग की चेतावनी(टी)बंगाल चुनाव हिंसा(टी)कोलकाता के चुनाव आयोग का बयान
धर्मेंद्र के निधन पर भावुक हुए बॉबी देओल:पापा के साथ और वक्त बिताने का पछतावा; कहा- दुख ने ईशा और अहाना के करीब लाया

बॉलीवुड एक्टर धर्मेंद्र के निधन को करीब 140 दिन बीत चुके हैं। उनके छोटे बेटे बॉबी देओल ने पिता के जाने के बाद अपना पहला इंटरव्यू दिया है। बॉबी ने बताया कि उनके पापा की मौत ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है। इस दौरान उन्होंने अपने पछतावे और सौतेली बहनों ईशा और अहाना देओल के साथ बदलते रिश्तों पर भी खुलकर बात की। पापा के साथ और वक्त बिताने का है पछतावा बॉबी देओल ने एस्क्वायर इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा कि वे अपने पापा के साथ और भी क्वालिटी टाइम बिताना चाहते थे। बॉबी ने भावुक होते हुए कहा,कई ऐसे दिन होते हैं जब मुझे लगता है कि काश मैं पापा के साथ और बैठता। काश मैंने उनसे और सवाल पूछे होते। अब मैं अपने बेटों, पत्नी और परिवार के साथ रहने को लेकर ज्यादा सजग रहता हूं। बॉक्स ऑफिस, रिव्यूज और रोल्स… ये सब आखिर में मायने नहीं रखते। इंस्टाग्राम पर आज भी देखते हैं धर्मेंद्र की रील्स सफलता के मायने बताते हुए बॉबी ने कहा कि कामयाबी इस बात से मापी जाती है कि आप अपने प्रियजनों के साथ कितना वक्त बिता पाते हैं। उन्होंने कहा, बिना किसी अपने के शोहरत और दौलत का क्या फायदा? मैं आज भी इंस्टाग्राम पर उनकी (धर्मेंद्र) रील्स देखता रहता हूं। वे बहुत ही सादगी भरे और गर्मजोशी से भरे इंसान थे। कभी-कभी लगता है कि वे रील के जरिए सीधे मुझसे ही बात कर रहे हैं। दुख ने ईशा और अहाना के करीब लाया धर्मेंद्र के निधन के बाद देओल परिवार में एक सकारात्मक बदलाव आया है। बॉबी ने बताया कि इस दुख ने उन्हें अपनी सौतेली बहनों ईशा और अहाना देओल के करीब ला दिया है। बॉबी ने कहा, हम सभी अपने-अपने तरीके से इस दुख से निपट रहे हैं। कभी-कभी दुख की वजह से लोग एक-दूसरे को गलत समझ लेते हैं, लेकिन वक्त के साथ सब ठीक हो जाता है। किसी अपने को खोना परिवार को करीब लाने का अपना तरीका जानता है। धर्मेंद्र को भी था अपने पिता के लिए मलाल बॉबी ने एक पुरानी याद साझा करते हुए बताया कि उनके पिता अक्सर कविताएं और छंद सुनाते थे। उन कविताओं में धर्मेंद्र का अपने पिता के साथ ज्यादा वक्त न बिता पाने का दर्द और पछतावा झलकता था। बॉबी ने कहा, उनकी बातों ने मुझे बहुत प्रभावित किया। मुझे लगता है कि यह जीवन का एक चक्र है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलता है। 24 नवंबर को हुआ था निधन बता दें कि धर्मेंद्र का निधन 24 नवंबर को मुंबई में 89 साल की उम्र में हुआ था। ब्रीच कैंडी अस्पताल से डिस्चार्ज होने के 12 दिन बाद उन्होंने आखिरी सांस ली थी। उनके अंतिम संस्कार में अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान और सलमान खान समेत बॉलीवुड के कई बड़े सितारे पहुंचे थे।
बड़वानी की महक गोले को प्रदेश में छठवीं रैंक:10वीं में 98.8 प्रतिशत अंक किए हासिल; पिता बनाते हैं मटके, अब IAS बनना लक्ष्य

मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल के बुधवार को घोषित 10वीं कक्षा के परिणाम में अंजड़ की छात्रा महक गोले ने जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। छात्रा महक ने 500 में से 494 अंक हासिल कर प्रदेश की मेरिट सूची में छठवीं रैंक बनाई है। जिले के लिए यह इस सत्र की सबसे बड़ी शैक्षणिक उपलब्धि है। मटके बनाने वाले की बेटी ने किया कमाल महक के पिता बलिराम गोले कुम्हार समाज से हैं और मटके बनाने का कार्य करते हैं। महक ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के कड़े संघर्ष और शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया है। बलिराम की तीन बेटियां हैं, जिनमें महक और उसकी जुड़वां बहन पल्लवी दोनों ने इस वर्ष 10वीं की परीक्षा दी है। यूपीएससी पास कर आईएएस बनने का लक्ष्य परीक्षा परिणाम के बाद महक गोले ने भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए बताया कि वह संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण करना चाहती हैं। उनका लक्ष्य एक आईएएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करना है। उन्होंने बताया कि पिता को दिन-रात मेहनत करते देख उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। स्कूल स्टाफ ने मिठाई खिलाकर दी बधाई सफलता की सूचना मिलते ही स्कूल के स्टाफ ने महक को मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं। बड़वानी जिले से प्रदेश की टॉप-10 सूची में नाम आने पर स्कूल प्रबंधन और स्थानीय नागरिकों ने हर्ष व्यक्त किया है। पिता बलिराम गोले ने अपनी बेटियों की शिक्षा के लिए निरंतर सहयोग जारी रखने की बात कही है।
तमिलनाडु: जनसंख्या वृद्धि के आधार पर जनसंख्या की संख्या बढ़ाने की मांग…भड़के सीएम स्टालिन

विधानसभा चुनाव 2026: तमिलनाडु के प्रमुख राजनीतिक दलों के विधायकों ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन अभ्यास के विरोध में स्वर मुखर कर रखा है। परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि के आधार पर जनसंख्या की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे दक्षिणी राज्यों में चिंताएं बढ़ी हैं। 1971 की वास्तविकता के अनुसार, जब भारत की जनसंख्या लगभग 550 मिलियन थी, तब मुसलमानों की वर्तमान संख्या 543 सदस्य थी। अब जब जनसंख्या 1.4 अरब से अधिक हो गई है, तो केंद्र सरकार एक नई परिसीमन प्रक्रिया के माध्यम से संसदीय प्रतिनिधित्व का विस्तार करने की योजना बना रही है। बौद्धों के अनुसार, प्रस्तावित परिसिमन संशोधन का उद्देश्य मोटरसाइकिलों की संख्या 543 से लगभग 850 करना है, जबकि केंद्रशासित प्रयोगशाला से प्रतिनिधित्व 20 से 35 करना है। आने वाले तीन दिनों में वाले संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में पेश होने की उम्मीद है। तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक सहित दक्षिणी राज्यों ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है, उनका तर्क है कि इससे उन क्षेत्रों को नुकसान होगा, जहां जनसंख्या वृद्धि दर अधिक हो रही है। खबरों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने 2002 के परिसीमन संशोधन अधिनियम के तहत अनिवार्य रूप से 2026 के बजाय 2011 के सिद्धांतों या उसके पहले के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन संशोधन अधिनियम पर विचार किया है, जिससे विवाद और भी बढ़ रहा है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि इससे संसद में राज्य का प्रतिनिधित्व कम होगा और संघीय ढांचे को नुकसान होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार इस योजना पर आगे बढ़ती है, तो उनकी पार्टी एक बड़ा आंदोलन फिर से पुराने और पुराने शिक्षकों को देखना शुरू कर देगी। दूसरी ओर, एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने कैंसर को कम करने के लिए कहा कि परीक्षा प्रक्रिया से तमिल पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ा। अनुमानों के अनुसार, तमिलनाडु का निचला हिस्सा वर्तमान में 39 से 50 के बीच हो सकता है, जबकि प्रदेश का प्रतिनिधित्व 80 से 80 तक, उत्तर में 143 के करीब हो सकता है, जिससे संसद में सत्ता का संतुलन काफी हद तक बदल जाएगा। इसी बीच, केंद्र सरकार परीसीमन प्रस्ताव के साथ-साथ महिला नाचीज़ पेशावर की भी योजना बनाई जा रही है, जिसका उद्देश्य 2029 के आम चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत नॉमिनेट पेशिंग लागू करना है। यह भी पढ़ें- ‘तमिलनाडु नहीं रहेगा चुप’, स्टालिन की मोदी सरकार को खुली चेतावनी, कहा- सड़क पर उतरेगा हर परिवार (टैग्सटूट्रांसलेट)इलेक्शन(टी)विधानसभा चुनाव(टी)स्टालिन(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव(टी)स्टालिन(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव 2026
मूवी रिव्यूः टोस्टर:कंजूसी का मजेदार आइडिया, लेकिन कमजोर कहानी और बिखरा स्क्रीनप्ले फिल्म को बना देता है बोझिल

रेटिंग: 2/5 कास्टः राजकुमार राव, सान्या मल्होत्रा डायरेक्टरः विवेक दास चौधरी टोस्टर का कॉन्सेप्ट सुनने में दिलचस्प है और फिल्म की शुरुआत भी उम्मीद जगाती है। पहले कुछ मिनटों में एक अलग तरह का टोन दिखता है, जिसमें हल्की कॉमेडी के साथ एक अजीब सा सस्पेंस भी है। लेकिन यह इंटरेस्ट ज्यादा देर टिक नहीं पाता। फिल्म जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, अपनी पकड़ खोती चली जाती है और जो शुरुआत में ताजगी लगती है, वही बाद में बोझ बन जाती है। कैसी है फिल्म की कहानी? कहानी रमाकांत (राजकुमार राव) की है, जो बेहद कंजूस इंसान है और अपनी दी हुई चीजें भी वापस लेने से नहीं हिचकता। शादी में दिया हुआ एक टोस्टर जब वह वापस मांगता है, तो वही टोस्टर एक मर्डर केस से जुड़ जाता है। इसके बाद रामाकांत उसे छुपाने और वापस पाने की कोशिश में उलझता जाता है। कहानी में मर्डर, ब्लैकमेल और सीक्रेट्स जैसे कई एलिमेंट्स आते हैं, लेकिन ये सब बार-बार रिपीट होते रहते हैं, जिससे कहानी आगे बढ़ने के बजाय वहीं घूमती नजर आती है। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? एक्टिंग की बात करें तो राजकुमार राव पूरी फिल्म को संभालने की कोशिश करते हैं और कई जगहों पर सफल भी होते हैं। उनका किरदार इरिटेटिंग होते हुए भी रिलेटेबल लगता है और कुछ सीन में वे हंसाने में कामयाब रहते हैं। सान्या मल्होत्रा का रोल सीमित है और उन्हें ज्यादा कुछ करने का मौका नहीं मिलता। अभिषेक बनर्जी, सीमा पाहवा और अर्चना पूरन सिंह जैसे कलाकार भी कमजोर लेखन की वजह से असर नहीं छोड़ पाते। कैसा है फिल्म का डायरेक्शन? डायरेक्शन की बात करें तो विवेक दास चौधरी का आइडिया नया जरूर था, लेकिन उसे पर्दे पर सही तरह से उतारने में कमी रह गई। फिल्म का सेकेंड हाफ खिंचा हुआ लगता है और स्क्रीनप्ले बिखरा हुआ नजर आता है। क्लाइमैक्स में बहुत ज्यादा कन्फ्यूजन है, जिससे कहानी का असर खत्म हो जाता है। तकनीकी तौर पर सिनेमैटोग्राफी ठीक है, लेकिन एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म को सपोर्ट नहीं कर पाते। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? संगीत और बैकग्राउंड स्कोर दोनों ही कमजोर हैं और फिल्म के इमोशनल या कॉमिक मोमेंट्स को उभार नहीं पाते। फाइनल वर्डिक्टः फिल्म देखें या नहीं? कुल मिलाकर, टोस्टर एक अच्छा आइडिया लेकर आती है, लेकिन कमजोर लेखन और ढीले निर्देशन की वजह से असर नहीं छोड़ पाती। फिल्म के कुछ हिस्से मनोरंजन करते हैं, लेकिन फिल्म पूरे समय बांधे रखने में नाकाम रहती है। यह एक ऐसी फिल्म है जिसे बेहतर बनाया जा सकता था, लेकिन वह मौका गंवा दिया गया।
मूवी रिव्यूः टोस्टर:कंजूसी का मजेदार आइडिया, लेकिन कमजोर कहानी और बिखरा स्क्रीनप्ले फिल्म को बना देता है बोझिल

रेटिंग: 2/5 कास्टः राजकुमार राव, सान्या मल्होत्रा डायरेक्टरः विवेक दास चौधरी टोस्टर का कॉन्सेप्ट सुनने में दिलचस्प है और फिल्म की शुरुआत भी उम्मीद जगाती है। पहले कुछ मिनटों में एक अलग तरह का टोन दिखता है, जिसमें हल्की कॉमेडी के साथ एक अजीब सा सस्पेंस भी है। लेकिन यह इंटरेस्ट ज्यादा देर टिक नहीं पाता। फिल्म जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, अपनी पकड़ खोती चली जाती है और जो शुरुआत में ताजगी लगती है, वही बाद में बोझ बन जाती है। कैसी है फिल्म की कहानी? कहानी रमाकांत (राजकुमार राव) की है, जो बेहद कंजूस इंसान है और अपनी दी हुई चीजें भी वापस लेने से नहीं हिचकता। शादी में दिया हुआ एक टोस्टर जब वह वापस मांगता है, तो वही टोस्टर एक मर्डर केस से जुड़ जाता है। इसके बाद रामाकांत उसे छुपाने और वापस पाने की कोशिश में उलझता जाता है। कहानी में मर्डर, ब्लैकमेल और सीक्रेट्स जैसे कई एलिमेंट्स आते हैं, लेकिन ये सब बार-बार रिपीट होते रहते हैं, जिससे कहानी आगे बढ़ने के बजाय वहीं घूमती नजर आती है। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? एक्टिंग की बात करें तो राजकुमार राव पूरी फिल्म को संभालने की कोशिश करते हैं और कई जगहों पर सफल भी होते हैं। उनका किरदार इरिटेटिंग होते हुए भी रिलेटेबल लगता है और कुछ सीन में वे हंसाने में कामयाब रहते हैं। सान्या मल्होत्रा का रोल सीमित है और उन्हें ज्यादा कुछ करने का मौका नहीं मिलता। अभिषेक बनर्जी, सीमा पाहवा और अर्चना पूरन सिंह जैसे कलाकार भी कमजोर लेखन की वजह से असर नहीं छोड़ पाते। कैसा है फिल्म का डायरेक्शन? डायरेक्शन की बात करें तो विवेक दास चौधरी का आइडिया नया जरूर था, लेकिन उसे पर्दे पर सही तरह से उतारने में कमी रह गई। फिल्म का सेकेंड हाफ खिंचा हुआ लगता है और स्क्रीनप्ले बिखरा हुआ नजर आता है। क्लाइमैक्स में बहुत ज्यादा कन्फ्यूजन है, जिससे कहानी का असर खत्म हो जाता है। तकनीकी तौर पर सिनेमैटोग्राफी ठीक है, लेकिन एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म को सपोर्ट नहीं कर पाते। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? संगीत और बैकग्राउंड स्कोर दोनों ही कमजोर हैं और फिल्म के इमोशनल या कॉमिक मोमेंट्स को उभार नहीं पाते। फाइनल वर्डिक्टः फिल्म देखें या नहीं? कुल मिलाकर, टोस्टर एक अच्छा आइडिया लेकर आती है, लेकिन कमजोर लेखन और ढीले निर्देशन की वजह से असर नहीं छोड़ पाती। फिल्म के कुछ हिस्से मनोरंजन करते हैं, लेकिन फिल्म पूरे समय बांधे रखने में नाकाम रहती है। यह एक ऐसी फिल्म है जिसे बेहतर बनाया जा सकता था, लेकिन वह मौका गंवा दिया गया।
कांग्रेस ने ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ पर अब्दुल जब्बार को निलंबित किया; उन्होंने कहा, ‘पार्टी ने जल्दबाजी में काम किया’ | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:15 अप्रैल, 2026, 14:05 IST दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव में कथित पार्टी विरोधी गतिविधि के लिए कांग्रेस एमएलसी अब्दुल जब्बार को प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है। कांग्रेस ने ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ पर अब्दुल जब्बार को निलंबित किया; उन्होंने कहा, ‘आदेश की समीक्षा के बाद जवाब देंगे’ हाल ही में दावणगेरे दक्षिण विधानसभा उपचुनाव के दौरान कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर अब्दुल जब्बार को कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कार्रवाई तत्काल प्रभाव से की गई। जब्बार, जिन्होंने पहले केपीसीसी अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था, दावणगेरे से कांग्रेस के टिकट के दावेदार भी थे। उन पर उपचुनाव के दौरान पार्टी के चुने हुए उम्मीदवार शमनूर समर्थ के खिलाफ काम करने का आरोप है। ऐसे भी आरोप थे कि उन्होंने निर्वाचन क्षेत्र में एक एसडीपीआई उम्मीदवार का समर्थन किया, जिससे पार्टी के भीतर चिंताएं बढ़ गईं। केपीसीसी द्वारा आधिकारिक बयान एक प्रेस विज्ञप्ति में, कर्नाटक के डिप्टी सीएम और केपीसीसी अध्यक्ष डीके शिवकुमार के कार्यालय ने कहा कि विधान परिषद के सदस्य अब्दुल जब्बार को दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव में उनकी पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निलंबित कर दिया गया है। बयान में पुष्टि की गई कि निर्णय तुरंत प्रभावी होगा। जब्बार के निलंबन के साथ-साथ डीके शिवकुमार ने उनके नेतृत्व में गठित सभी अल्पसंख्यक समितियों को भी भंग कर दिया है। यह कदम केपीसीसी अल्पसंख्यक विंग प्रमुख के पद से उनके हालिया इस्तीफे के बाद उठाया गया है। राजनीतिक नतीजा उपचुनाव के दौरान पार्टी के भीतर आंतरिक असहमति के मद्देनजर यह घटनाक्रम सामने आया है। आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ काम करने और प्रतिद्वंद्वी का समर्थन करने के आरोपों के कारण सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। जब्बार के बाहर निकलने के बाद पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे को सुलझाने और अल्पसंख्यक विंग संरचना को पुनर्गठित करने के लिए तेजी से आगे बढ़ा है। जब्बार की प्रतिक्रिया निलंबन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, अब्दुल जब्बार ने कहा कि वह कोई भी विस्तृत प्रतिक्रिया देने से पहले आदेश की समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उन्हें निलंबित किया है, उन्होंने कारण बताए होंगे और वह पार्टी और मीडिया दोनों को जवाब देने से पहले उनकी जांच करेंगे। उन्होंने किसी भी चुनावी झटके के सुझाव को खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि कांग्रेस के हारने का कोई सवाल ही नहीं है और विश्वास व्यक्त किया कि पार्टी जीतेगी। उम्मीदवार चयन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसे एक नाम तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए और याद दिलाया कि मुख्यमंत्री के साथ बैठक के दौरान एक परिवार को तरजीह देने के बजाय कुरुबा समुदाय को टिकट देने की मांग की गई थी. जब्बार ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि पार्टी ने जल्दबाजी क्यों की. उन्होंने कहा कि वह इस पर टिप्पणी नहीं करेंगे कि इस फैसले के पीछे कौन हो सकता है, यह देखते हुए कि पार्टी ने उन्हें पद और सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि आधिकारिक पत्र मिलने के बाद वह इसका पूरा जवाब देंगे। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 15 अप्रैल, 2026, 14:02 IST समाचार राजनीति कांग्रेस ने ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ पर अब्दुल जब्बार को निलंबित किया; उन्होंने कहा, ‘पार्टी ने जल्दबाजी में काम किया’ अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)अब्दुल जब्बार निलंबन(टी)अब्दुल जब्बार कांग्रेस(टी)केपीसीसी अनुशासनात्मक कार्रवाई(टी)दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव(टी)डीके शिवकुमार केपीसीसी(टी)कांग्रेस आंतरिक संघर्ष(टी)अल्पसंख्यक विंग विघटन(टी)एसडीपीआई समर्थन आरोप








