गुरुग्राम लैंड स्कैम केस में रॉबर्ट वाड्रा को समन:राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई, सभी 9 आरोपियों को 16 मई को पेश होने का आदेश

हरियाणा के गुरुग्राम के शिकोहपुर लैंड स्कैम से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने रॉबर्ट वाड्रा समेत 9 आरोपियों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए सभी को समन जारी किया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि वाड्रा सहित सभी आरोपी 16 मई को अदालत में पेश हों। इस केस में वाड्रा के साथ हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी आरोपी हैं। उन पर आरोप है कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने वाड्रा की कंपनी को मुनाफा पहुंचाया। वाड्रा केस से जुड़ा पूरा मामला विस्तार से पढ़ें.. 2008 में हुआ जमीन का सौदा फरवरी 2008 में रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में 3.5 एकड़ जमीन 7.5 करोड़ रुपए में खरीदी थी। उसी साल, तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अगुआई वाली हरियाणा सरकार ने इस जमीन पर 2.7 एकड़ के लिए व्यवसायिक कॉलोनी विकसित करने का लाइसेंस दिया। इसके बाद कॉलोनी बनाने की जगह स्काईलाइट कंपनी ने इस जमीन को DLF को 58 करोड़ रुपए में बेच दिया, जिससे लगभग 50 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ। IAS अधिकारी ने म्यूटेशन रद्द किया 2012 में, तत्कालीन हरियाणा सरकार के भूमि रजिस्ट्रेशन निदेशक अशोक खेमका ने इस सौदे में अनियमितताओं का हवाला देते हुए जमीन के म्यूटेशन (स्वामित्व हस्तांतरण) को रद्द कर दिया। खेमका ने दावा किया था कि स्काईलाइट को लाइसेंस देने की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ, और सौदा संदिग्ध था। इसके बाद, उनका तबादला कर दिया गया, जिससे यह मामला और विवादास्पद हो गया। 2018 में दर्ज की गई FIR साल 2018 में हरियाणा पुलिस ने रॉबर्ट वाड्रा, भूपेंद्र हुड्डा, DLF, और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज के खिलाफ एक शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की थी। जिसमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप में IPC की धारा 420, 120, 467, 468 और 471 के तहत मामला दर्ज किया गया था। बाद में IPC की धारा 423 के तहत नए आरोप जोड़े गए थे। भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर ये आरोप जमीन की यह डील जब हुई, उस समय हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी और भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री थे। जमीन खरीदने के करीब एक महीने बाद हुड्डा सरकार ने वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी को इस जमीन पर आवासीय परियोजना विकसित करने की परमिशन दे दी। आवासीय परियोजना का लाइसेंस मिलने के बाद जमीन के दाम बढ़ जाते हैं। लाइसेंस मिलने के मुश्किल से 2 महीने बाद ही, जून 2008 में, डीएलएफ वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी से यह जमीन 58 करोड़ में खरीदने को तैयार हो जाती है। यानी मुश्किल से 4 महीने में 700 प्रतिशत से ज्यादा का मुनाफा वाड्रा की कंपनी को होता है। 2012 में हुड्डा सरकार कॉलोनी बनाने वाले लाइसेंस को DLF को ट्रांसफर कर देती है। ED ने FIR के आधार पर जांच शुरू की इसके बाद ईडी ने संदेह जताया कि इस सौदे में मनी लॉन्ड्रिंग हुई, क्योंकि जमीन की कीमत कुछ ही महीनों में असामान्य रूप से बढ़ गई। इसके अलावा यह भी संदेह जताया कि ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज एक फर्जी कंपनी थी। उसे सौदे में भुगतान के लिए इस्तेमाल किया गया। जमीन की खरीद से जुड़ा चेक कभी जमा नहीं किया गया। ईडी ने 2018 में हरियाणा पुलिस की FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। यह जांच स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी की वित्तीय गतिविधियों और सौदे से प्राप्त आय पर केंद्रित है। ED को संदेह, DLF को हुआ 5 हजार करोड़ का फायदा ईडी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी की वित्तीय लेनदेन, जमीन की खरीद-बिक्री, और DLF के साथ सौदे की जांच कर रही है। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस सौदे से प्राप्त आय का उपयोग अवैध गतिविधियों में किया गया। आरोप है कि DLF को इस सौदे में फायदा पहुंचाने के लिए हुड्डा सरकार ने नियमों का उल्लंघन किया। इसमें वजीराबाद में DLF को 350 एकड़ जमीन आवंटन का भी जिक्र है, जिससे डीएलएफ को कथित तौर पर 5,000 करोड़ रुपए का फायदा हुआ। हम इस खबर को लगातार अपडेट कर रहे हैं….
बार-बार क्यों होता है पेशाब में इंफेक्शन? डॉक्टर अमरेंद्र पाठक से जानें UTI के लक्षण और ट्रीटमेंट

Recurring UTI Causes and Symptoms: बार-बार होने वाला यूटीआई एक ऐसी स्थिति है जिसमें मूत्र मार्ग में बैक्टीरिया बार-बार संक्रमण पैदा करते हैं, जिससे पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना, बदबू और पेट के निचले हिस्से में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. इसका मुख्य कारण बैक्टीरिया का मूत्र मार्ग में पहुंचना होता है, जो अक्सर कम पानी पीने, पेशाब रोकने की आदत, साफ-सफाई की कमी, कमजोर इम्यूनिटी, डायबिटीज, हार्मोनल बदलाव या गलत जीवनशैली के कारण दोबारा सक्रिय हो जाता है, जबकि महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट छोटा होने की वजह से संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है. गंगाराम हॉस्पिटल के सीनियर यूरोलॉजिस्ट डॉ. अमरेंद्र पाठक ने अपने यूट्यूब वीडियो में इससे जुड़ी जरूरी जानकारी शेयर की है.
IMF Predicts India GDP 2026 $4.15 Trillion, UK Regains 5th Spot

नई दिल्ली15 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत की दुनिया की छठी सबसे बड़ी इकोनॉमी के पायदान पर खिसक गया है। पिछले तीन साल से भारत 5वें स्थान पर बना हुआ था। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के ताजा डेटा के अनुसार अब ब्रिटेन (UK) एक बार फिर भारत से आगे निकल गया है। भारत की GDP में ये गिरावट डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने से आई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा कीमतों पर भारत की GDP 2025 में 3.92 ट्रिलियन डॉलर और 2026 में 4.15 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है। वहीं, ब्रिटेन की GDP 2025 में 4 ट्रिलियन डॉलर और 2026 में 4.26 ट्रिलियन डॉलर रहने की उम्मीद है। जापान भी भारत से आगे है, जिसकी इकोनॉमी 202 में 4.38 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया है। भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था देश GDP (₹ लाख करोड़) GDP (ट्रिलियन डॉलर) अमेरिका 3,023 32.38 चीन 1,947 20.85 जर्मनी 508 5.45 जापान 409 4.38 UK 397 4.26 भारत 387 4.15 सोर्स: इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) रैंकिंग में गिरावट की 2 मुख्य वजहें भारत की ग्लोबल रैंकिंग में इस बदलाव के पीछे 2 बड़े कारण माने जा रहे हैं: बेस ईयर में बदलाव: सरकार ने GDP के बेस ईयर को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। इस बदलाव और नए पेटर्न की वजह से इकोनॉमी के साइज में 2.8% से 3.8% तक की कमी आई है। रुपए की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत में आई गिरावट ने भी असर डाला है। FY26 में रुपए में करीब 10% की गिरावट देखी गई, जिससे डॉलर में आंकी जाने वाली GDP कम हो गई। इसके उलट ब्रिटिश पाउंड मजबूत हुआ है, जिससे उनकी इकोनॉमी का डॉलर वैल्यू बढ़ गया है। 2027 में बनेगा चौथी बड़ी इकोनॉमी, जापान को छोड़ेंगे पीछे यह गिरावट केवल अस्थायी साबित हो सकती है। IMF का अनुमान है कि भारत 2027 (FY28) तक एक लंबी छलांग लगाएगा और जापान-ब्रिटेन दोनों को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन जाएगा। नॉलेज पार्ट GDP क्या होती है? GDP का पूरा नाम ग्रोस डॉमेस्टिक प्रोडक्शन है, जिसे हिंदी में कुल घरेलू उत्पाद कहते हैं। सरल भाषा में: GDP = एक देश में एक साल में कुल कितना सामान और सेवाएँ बनाई गईं (उनकी कीमत के हिसाब से)। उदाहरण: कारखाने में बनी कारें किसान का गेहूँ-चावल डॉक्टर-इंजीनियर की सेवाएँ दुकानदार का सामान सरकारी सड़क-स्कूल का काम ये सब मिलाकर एक साल में जितनी श्कुल वैल्यू’ बनी, वही देश की GDP है। GDP बढ़ने के फायदे नौकरियाँ बढ़ती हैं सैलरी/मजदूरी बढ़ती है दुकान-बिजनेस अच्छा चलता है सरकार ज्यादा टैक्स पाती है इससे सड़क, स्कूल, अस्पताल बनते हैं शेयर मार्केट ऊपर जाता है (जो म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं उन्हें फायदा) GDP घटने के नुकसान नौकरियाँ कम होती हैं / छंटनी होती है। सैलरी नहीं बढ़ती या कटती है। दुकानदार का सामान नहीं बिकता। किसान का माल सस्ता हो जाता है। बेरोजगारी बढ़ती है।लोग खर्च कम कर देते हैं इससे मंदी की संभावना रहती है। बेस ईयर क्या होता है?: बेस ईयर वो साल होता है जिसकी कीमतों को आधार (बेस) माना जाता है। यानी, उसी साल की चीजों की औसत कीमत को 100 का मान देते हैं। फिर, दूसरे सालों की कीमतों की तुलना इसी बेस ईयर से की जाती है। इससे पता चलता है कि महंगाई कितनी बढ़ी या घटी है। उदाहरण: मान लीजिए 2020 बेस ईयर है। उस साल एक किलो टमाटर ₹50 का था। अब 2025 में वो ₹80 का हो गया। तो महंगाई = (80 – 50) / 50 × 100 = 60% बढ़ी। यही फॉर्मूला CPI में यूज होता है, लेकिन ये पूरे बाजार की चीजों पर लागू होता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
होर्मुज के बाद अब ट्रम्प की मलक्का स्ट्रेट पर नजर:इंडोनेशिया से रक्षा करार किया, अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशियाई इलाके में जाने की इजाजत

हॉर्मुज स्ट्रेट में इस समय हालात काफी तनाव भरे हैं। अमेरिका वहां ईरान से जुड़ी जहाजों की गतिविधियों पर सख्ती कर रहा है। इसी बीच अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच 13 अप्रैल को एक नया रक्षा समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत अब अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशिया के हवाई क्षेत्र में ज्यादा आसानी से आने-जाने की इजाजत मिल गई है। इसे आधिकारिक तौर पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का कदम बताया जा रहा है, लेकिन इसकी टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यह डील ऐसे समय हुई है जब US ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए होर्मुज में नाकाबंदी शुरू कर दी है। इसके बाद तेल सप्लाई लगभग ठहर गई और कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि अमेरिका ने मलक्का स्ट्रेट पर नजर रखने के लिए यह करार किया है। होर्मुज के बाद मलक्का पर फोकस मलक्का स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है। यह वही रास्ता है जो हिंद महासागर को पूर्वी एशिया से जोड़ता है और दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है। यहां से करीब 40% वैश्विक व्यापार और लगभग 30% तेल सप्लाई गुजरती है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे खास बनाती है। फिलिप चैनल पर इसकी चौड़ाई 3 किलोमीटर है, जो इसे बड़ा बॉटलनेक बनाती है। यह होर्मुज से करीब नौ गुना ज्यादा संकरा है। मलक्का स्ट्रेट पर इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर का कंट्रोल है। इस रास्ते से दुनिया का बहुत बड़ा व्यापार गुजरता है। यही वजह है कि इस इलाके में कोई भी हलचल सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकती है। US-इंडोनेशिया डील के बाद एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका इंडो-पैसिफिक में बड़े समुद्री रास्तों को सुरक्षित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। अमेरिकी एक्सपर्ट्स और पूर्व सैनिकों ने कहा है कि दुनिया के चोकपॉइंट्स पर US अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। चीन के लिए सबसे बड़ी कमजोरी अगर हॉर्मुज को तेल की सप्लाई का मुख्य रास्ता माना जाता है, तो मलक्का को पूरी दुनिया के ट्रेड की लाइफलाइन कहा जा सकता है। यहां से तेल के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनें और बाकी सामान भी बड़ी मात्रा में एक जगह से दूसरी जगह पहुंचते हैं। चीन के लिए तो मलक्का को सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरी माना जाता है। चीन के करीब 80% तेल आयात इसी रास्ते से आते हैं। ये इंडस्ट्रियल इकॉनमी और एक्सपोर्ट सिस्टम के लिए बेहद जरूरी है। इसी वजह से चीन लंबे समय से इस पर अपनी निर्भरता को एक कमजोरी मानता है। यही कारण है कि पूर्व चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ ने इसे ‘मलक्का डिलेमा’ कहा था। हाल में चीन ने इलाके के आसपास समुद्री मैपिंग और मॉनिटरिंग गतिविधियां बढ़ाई हैं। भारत के लिए क्यों अहम है मलक्का मलक्का स्ट्रेट भारत के लिए भी उतना ही अहम है। देश का करीब 55% व्यापार इसी रास्ते और सिंगापुर क्षेत्र से होकर गुजरता है। भारत की भौगोलिक स्थिति उसे इस इलाके में रणनीतिक बढ़त देती है। अंडमान और निकोबार आइलैंड्स इस स्ट्रेट के पश्चिमी मुहाने के पास हैं, जहां से पोर्ट ब्लेयर से 24 घंटे में पहुंचा जा सकता है। भारत का INS बाज एयर स्टेशन, जो कैंपबेल बे में है, इस इलाके की निगरानी में अहम भूमिका निभाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह भारत को समुद्री ट्रैफिक पर नजर रखने की ताकत देता है। क्या US-भारत सहयोग बढ़ सकता है एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अमेरिका मलक्का में अपनी भूमिका बढ़ाता है, तो भारत की भागीदारी अहम हो सकती है। सिंगापुर ने पहली बार मलक्का स्ट्रेट पेट्रोल में भारत की दिलचस्पी को औपचारिक तौर पर माना है। इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय सहयोग बढ़ सकता है। हालांकि, मलक्का स्ट्रेट में अमेरिका के लिए सब कुछ आसान नहीं होगा। इंडोनेशिया और मलेशिया इस इलाके को लेकर काफी संवेदनशील रहते हैं और अपनी संप्रभुता को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहते। सिंगापुर का हिस्सा छोटा जरूर है, लेकिन वैश्विक शिपिंग में उसकी भूमिका बहुत बड़ी है। उसका पोर्ट और समुद्री सेवाएं उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, इसलिए वह इस रास्ते में किसी भी तरह की अस्थिरता नहीं चाहता। हाल के समय में समुद्री टैक्स और नियमों को लेकर भी बहस तेज हुई है, जिससे दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों की चिंता बढ़ी है। ऐसे माहौल में अमेरिका की बढ़ती गतिविधियां यह दिखाती हैं कि वह अब एक साथ कई अहम समुद्री रास्तों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… होर्मुज पर अमेरिकी नेवी की नाकाबंदी शुरू:ट्रम्प की धमकी- इसके पास आए ईरानी जहाज तबाह करेंगे, ईरान बोला- भारत से कोई टोल नहीं लिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तरफ से होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री नाकाबंदी शुरू हो गई है। यह फैसला आज शाम 7:30 बजे (अमेरिकी समयानुसार सुबह 10 बजे) से लागू हुआ। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर कोई भी ईरानी जहाज अमेरिकी नाकाबंदी के पास आता है, तो उसे तुरंत खत्म कर दिया जाएगा। इसके लिए वही तरीका इस्तेमाल होगा, जिससे समुद्र में ड्रग तस्करों के जहाज रोके जाते हैं, यानी तेजी और सख्ती से। पूरी खबर पढ़ें…
होर्मुज के बाद अब ट्रम्प की मलक्का स्ट्रेट पर नजर:इंडोनेशिया से रक्षा करार किया, अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशियाई इलाके में जाने की इजाजत

हॉर्मुज स्ट्रेट में इस समय हालात काफी तनाव भरे हैं। अमेरिका वहां ईरान से जुड़ी जहाजों की गतिविधियों पर सख्ती कर रहा है। इसी बीच अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच 13 अप्रैल को एक नया रक्षा समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत अब अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशिया के हवाई क्षेत्र में ज्यादा आसानी से आने-जाने की इजाजत मिल गई है। इसे आधिकारिक तौर पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का कदम बताया जा रहा है, लेकिन इसकी टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यह डील ऐसे समय हुई है जब US ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए होर्मुज में नाकाबंदी शुरू कर दी है। इसके बाद तेल सप्लाई लगभग ठहर गई और कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि अमेरिका ने मलक्का स्ट्रेट पर नजर रखने के लिए यह करार किया है। होर्मुज के बाद मलक्का पर फोकस मलक्का स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है। यह वही रास्ता है जो हिंद महासागर को पूर्वी एशिया से जोड़ता है और दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है। यहां से करीब 40% वैश्विक व्यापार और लगभग 30% तेल सप्लाई गुजरती है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे खास बनाती है। फिलिप चैनल पर इसकी चौड़ाई 3 किलोमीटर है, जो इसे बड़ा बॉटलनेक बनाती है। यह होर्मुज से करीब नौ गुना ज्यादा संकरा है। मलक्का स्ट्रेट पर इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर का कंट्रोल है। इस रास्ते से दुनिया का बहुत बड़ा व्यापार गुजरता है। यही वजह है कि इस इलाके में कोई भी हलचल सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकती है। US-इंडोनेशिया डील के बाद एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका इंडो-पैसिफिक में बड़े समुद्री रास्तों को सुरक्षित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। अमेरिकी एक्सपर्ट्स और पूर्व सैनिकों ने कहा है कि दुनिया के चोकपॉइंट्स पर US अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। चीन के लिए सबसे बड़ी कमजोरी अगर हॉर्मुज को तेल की सप्लाई का मुख्य रास्ता माना जाता है, तो मलक्का को पूरी दुनिया के ट्रेड की लाइफलाइन कहा जा सकता है। यहां से तेल के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनें और बाकी सामान भी बड़ी मात्रा में एक जगह से दूसरी जगह पहुंचते हैं। चीन के लिए तो मलक्का को सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरी माना जाता है। चीन के करीब 80% तेल आयात इसी रास्ते से आते हैं। ये इंडस्ट्रियल इकॉनमी और एक्सपोर्ट सिस्टम के लिए बेहद जरूरी है। इसी वजह से चीन लंबे समय से इस पर अपनी निर्भरता को एक कमजोरी मानता है। यही कारण है कि पूर्व चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ ने इसे ‘मलक्का डिलेमा’ कहा था। हाल में चीन ने इलाके के आसपास समुद्री मैपिंग और मॉनिटरिंग गतिविधियां बढ़ाई हैं। भारत के लिए क्यों अहम है मलक्का मलक्का स्ट्रेट भारत के लिए भी उतना ही अहम है। देश का करीब 55% व्यापार इसी रास्ते और सिंगापुर क्षेत्र से होकर गुजरता है। भारत की भौगोलिक स्थिति उसे इस इलाके में रणनीतिक बढ़त देती है। अंडमान और निकोबार आइलैंड्स इस स्ट्रेट के पश्चिमी मुहाने के पास हैं, जहां से पोर्ट ब्लेयर से 24 घंटे में पहुंचा जा सकता है। भारत का INS बाज एयर स्टेशन, जो कैंपबेल बे में है, इस इलाके की निगरानी में अहम भूमिका निभाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह भारत को समुद्री ट्रैफिक पर नजर रखने की ताकत देता है। क्या US-भारत सहयोग बढ़ सकता है एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अमेरिका मलक्का में अपनी भूमिका बढ़ाता है, तो भारत की भागीदारी अहम हो सकती है। सिंगापुर ने पहली बार मलक्का स्ट्रेट पेट्रोल में भारत की दिलचस्पी को औपचारिक तौर पर माना है। इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय सहयोग बढ़ सकता है। हालांकि, मलक्का स्ट्रेट में अमेरिका के लिए सब कुछ आसान नहीं होगा। इंडोनेशिया और मलेशिया इस इलाके को लेकर काफी संवेदनशील रहते हैं और अपनी संप्रभुता को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहते। सिंगापुर का हिस्सा छोटा जरूर है, लेकिन वैश्विक शिपिंग में उसकी भूमिका बहुत बड़ी है। उसका पोर्ट और समुद्री सेवाएं उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, इसलिए वह इस रास्ते में किसी भी तरह की अस्थिरता नहीं चाहता। हाल के समय में समुद्री टैक्स और नियमों को लेकर भी बहस तेज हुई है, जिससे दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों की चिंता बढ़ी है। ऐसे माहौल में अमेरिका की बढ़ती गतिविधियां यह दिखाती हैं कि वह अब एक साथ कई अहम समुद्री रास्तों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… होर्मुज पर अमेरिकी नेवी की नाकाबंदी शुरू:ट्रम्प की धमकी- इसके पास आए ईरानी जहाज तबाह करेंगे, ईरान बोला- भारत से कोई टोल नहीं लिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तरफ से होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री नाकाबंदी शुरू हो गई है। यह फैसला आज शाम 7:30 बजे (अमेरिकी समयानुसार सुबह 10 बजे) से लागू हुआ। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर कोई भी ईरानी जहाज अमेरिकी नाकाबंदी के पास आता है, तो उसे तुरंत खत्म कर दिया जाएगा। इसके लिए वही तरीका इस्तेमाल होगा, जिससे समुद्र में ड्रग तस्करों के जहाज रोके जाते हैं, यानी तेजी और सख्ती से। पूरी खबर पढ़ें…
पुणे गई सास के घर का ताला तोड़ घुसी बहू:कब्जे की कोशिश का आरोप, इंदौर लौटने पर घर में घुसने नहीं दिया

इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र में पारिवारिक विवाद के बीच मकान पर कब्जा करने की कोशिश का मामला सामने आया है। एक बुजुर्ग महिला ने अपनी बहू, उसके पिता और अन्य साथियों पर घर का ताला तोड़कर जबरन घुसने का आरोप लगाया है। आरोप है कि बहू अब सास को ही घर में प्रवेश नहीं करने दे रही है। पुलिस के मुताबिक सिल्वर पार्क कॉलोनी निवासी 62 वर्षीय शीला शर्मा ने बताया कि उनका बेटा आशीष साल 2020 से बेंगलुरु में निजी नौकरी कर रहा है और वह इंदौर स्थित मकान में अकेली रहती थीं। हाल ही में उनकी छोटी बेटी दीपिका के यहां पुणे में बच्चा हुआ था, जिसके चलते वह कुछ दिनों के लिए पुणे गई हुई थीं। महिला का आरोप बिना जानकारी घर में घुसे इसी दौरान 22 मार्च 2026 को सुबह करीब 11:30 बजे उनकी बहू आरती शर्मा अपने पिता बादशाह बरुआ और दो अन्य लोगों के साथ घर पहुंची। आरोप है कि सभी ने मिलकर मकान का ताला तोड़ दिया और बिना अनुमति घर के अंदर घुस गए। महिला का कहना है कि आरोपियों का मकसद मकान पर कब्जा करना था। उन्होंने बताया कि उनके बेटे और बहू के बीच पहले से ही दहेज प्रताड़ना, भरण-पोषण और तलाक से जुड़े मामले कोर्ट में लंबित हैं। इसी पारिवारिक विवाद के चलते इस घटना को अंजाम दिया गया। दूसरे के घर में रहने को मजबूर घटना की जानकारी मिलने के बाद शीला शर्मा इंदौर लौटीं और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि अब बहू उन्हें घर में घुसने नहीं दे रही, जिसके कारण वह अपनी एक सहेली के यहां रह रही हैं। पुलिस ने आरती शर्मा, उसके पिता और अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष की मीटिंग:राहुल-खड़गे मौजूद, कल संसद में पेश होगा; लोकसभा सीटें 850 करने का प्रस्ताव

केंद्र सरकार के महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष ने बुधवार को मीटिंग की। यह मीटिंग दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर आयोजित की गई। जिसमें राहुल गांधी भी शामिल हुए। मीटिंग में शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद गुट) और AAP नेता भी शामिल हुए। सरकार ने 2029 के लोकसभा चुनावों से महिला आरक्षण अधिनियम लागू करने के लिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है। 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं। सरकार 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद के विशेष सत्र में 2029 से लोकसभा में 33% महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाने की योजना बना रही है। पीएम मोदी 17 अप्रैल को बहस का जवाब दे सकते हैं। इन बदलावों को 2029 के आम चुनाव से लागू करने की योजना है। हालांकि इस पर विरोध भी शुरू हो गया है। तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर कहा कि दक्षिणी राज्यों को सीटें बढ़ाना मंजूर नहीं। बिल पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं परिसीमन प्रक्रिया पर BRS पार्टी का रुख एकदम साफ और मजबूत है। हमारे कार्यकारी अध्यक्ष, KTR, 2022 से लगातार यह कहते आ रहे हैं कि इस पूरी प्रक्रिया में दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए। फिलहाल, संसद में दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व 24% है। TVK अध्यक्ष विजय ने कहा, “परिसीमन केंद्र सरकार की तरफ से उठाया गया एक पक्षपातपूर्ण कदम है। हमारी पार्टी विधेयक का स्वागत करती है जो महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान करता है। इसके अलावा ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ पारित हो जाता है तो दक्षिणी और उत्तरी राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व में आनुपातिक अंतर काफी बढ़ जाएगा। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल- सरकार यह सब 2029 के लोकसभा चुनाव में राजनीतिक फायदा लेने के उद्देश्य से कर रही है। अगर सरकार महिलाओं को 33% आरक्षण देना चाहती है, तो मौजूदा 543 सीटों में ही यह लागू किया जा सकता है। सीटों के पुनर्वितरण से उत्तर भारत को ज्यादा फायदा होगा। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी- संसद में जो 3 बिल लाए जाने हैं, उनको लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। कांग्रेस का रुख स्पष्ट है। वह महिला आरक्षण बिल का समर्थन करती है, लेकिन जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों को 850 तक बढ़ाने के प्रस्ताव दक्षिणी राज्यों के लिए स्वीकार्य नहीं है। यह देश के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। मल्लिकार्जुन खड़गे- कांग्रेस महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है। सरकार इसे राजनीतिक कारणों से आगे बढ़ा रही है। केसी वेणुगोपाल- महिला आरक्षण की आड़ में गलत डिलिमिटेशन लाया जा रहा है। यह संघीय ढांचे के खिलाफ है। शशि थरूर- डिलिमिटेशन से पहले सभी राज्यों और पार्टियों से चर्चा होनी चाहिए। जल्दबाजी देश के संघीय ढांचे के लिए ठीक नहीं है। किरण रिजिजू- किसी भी पार्टी ने महिला आरक्षण बिल का विरोध नहीं किया है। कुछ बयान सिर्फ राजनीतिक मकसद से दिए जा रहे हैं। महिला आरक्षण में अब और देरी नहीं होनी चाहिए। 40 साल इंतजार के बाद इसे जल्द लागू करना जरूरी है। एकनाथ शिंदे- शिवसेना महिला आरक्षण बिल का पूरा समर्थन करती है। इसे 2029 से पहले लागू किया जाना चाहिए। सवाल- जवाब में जानिए, इस बदलाव को 1. सीटें कितने बढ़ेंगी: लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 हो जाएंगी। राज्यों में 815 व केंद्र शासित क्षेत्रों के लिए 35 सीटें। इस बदलाव का असर राज्यसभा और देश की सभी विधानसभाओं पर भी होगा। यहां भी सीटें की संख्या बदल जाएंगी। 2. महिला आरक्षण कितने साल के लिए होगा : कुल सीटों में से 33% यानी 273 महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। महिलाओं के लिए यह आरक्षण 15 साल के लिए होगा। यानी 2029, 2034 और 2039 के लोकसभा चुनावों तक। इसके बाद इसे बढ़ाने का फैसला संसद करेगी। आरक्षित सीटें हर चुनाव में बदलती रहेंगी, ताकि महिलाओं का हर जगह प्रतिनिधित्व मिल सके। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए भी आरक्षण शामिल होगा। ये आरक्षित सीटें अलग-अलग क्षेत्रों में रोटेशन के आधार पर तय की जाएंगी। 3. आरक्षण कैसे होगा: परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर होगा। 4. संसद में महिलाओं की अभी क्या स्थिति है: 4. परिसीमन में क्या होगा: अभी तक सीटों का आधार 1971 की जनगणना थी, जो 2026 तक के लिए मान्य थी। परिसीमन कब होगा और किस जनगणना (जैसे 2011 या 2027) के आधार पर होगा, यह संविधान की जगह संसद एक साधारण कानून बनाकर तय कर सकेगी। सरकार इसमें बदलाव कर रही है। इसके लिए जनसंख्या (आबादी) की परिभाषा को बदला जाएगा है। इससे संसद को यह तय करने का अधिकार मिलता है कि सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए किस डेटा को आधार बनाया जाए। इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात कही गई है। संविधान में संशोधन कर सरकार परिसीमन आयोग बनाएगी। अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व जज होंगे। आयोग सभी निर्वाचन क्षेत्र (लोकसभा सीटें) दोबारा तय करेगा। आयोग का निर्णय अंतिम होगा। इसके फैसले को कोर्ट में चुनौती नहीं दे सकते। 5. क्या सरकार लोकसभा में बिल पास करा पाएगी: संविधान संशोधन पारित कराने के लिए सरकार को बैक-चैनल बातचीत करनी होगी। भारतीय संविधान के ऑर्टिकल 368 के तहत, संविधान में संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी होता है। कुल सदस्यों का बहुमत (50% से अधिक) और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत। लोकसभा की वर्तमान संख्या 540 (कुल 543 में से) है। 3 सीटें खाली हैं। यदि सभी सांसद उपस्थित होकर मतदान करते हैं, तो कम से कम 360 सांसदों (दो तिहाई) को इसके पक्ष में वोट देना होगा। वर्तमान में, भाजपा-नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के पास 292 सांसद हैं, जबकि INDIA (विपक्ष) के पास 233 सांसद हैं। 15 सांसद किसी गठबंधन के साथ नहीं हैं। यूपी में सबसे ज्यादा 40 सीटें बढ़ सकती है मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला आरक्षण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा 40 लोकसभा सीटें बढ़ सकती है। यहां 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी। महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए 24 सीटें
हीट स्ट्रोक क्या है और यह कितना खतरनाक, अगर इसका शिकार हो जाएं तो क्या करें? इमरजेंसी के डॉक्टर से समझें

Last Updated:April 15, 2026, 15:43 IST Heat Stroke in Summer: हीट स्ट्रोक एक खतरनाक कंडीशन है, जिसमें शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और पसीना आना बंद हो जाता है. इसके कारण दिमाग, दिल और किडनी को नुकसान हो सकता है. अगर सही समय पर इलाज न मिले, तो इससे मौत भी हो सकती है. हीट स्ट्रोक की कंडीशन में तुरंत ठंडी जगह पर ले जाना, शरीर को ठंडा करना और डॉक्टर की मदद लेना जरूरी होता है. इससे बचने के लिए धूप से बचाव और शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है. हीट स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जो जानलेवा हो सकती है. Heat Stroke Emergency: गर्मियों में तापमान जब 45 डिग्री के पार चला जाता है, तब यह सेहत के लिए खतरनाक हो जाता है. इतनी गर्मी में घर से लंबे समय तक बाहर रहना नुकसानदायक होता है. तेज धूप और लू के कारण कई बार लोगों के शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम फेल हो जाता है और इसकी वजह से हीट स्ट्रोक की कंडीशन पैदा हो सकती है. यह केवल सामान्य गर्मी लगना नहीं है, बल्कि एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें समय पर इलाज न मिलने पर जान का खतरा भी हो सकता है. जो लोग गर्मी में धूप में घंटों काम करते रहते हैं, उन्हें हीट स्ट्रोक का सबसे ज्यादा खतरा होता है. लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने News18 को बताया हमारा शरीर गर्मी में पसीने के जरिए खुद को ठंडा रखता है. इसे शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम माना जाता है. जब तापमान 45 डिग्री से ज्यादा होता है और कोई व्यक्ति लंबे समय तक धूप व लू में रहे, तो हमारे शरीर को ठंडा करने की प्रक्रिया फेल हो जाती है. इससे शरीर का तापमान 40°C या उससे ज्यादा पहुंच जाता है और शरीर के कई अंगों का कामकाज रुक जाता है. इसे मेडिकल की भाषा में हीट स्ट्रोक कहा जाता है और यह एक इमरजेंसी कंडीशन है. वक्त रहते शरीर को ठंडा न किया जाए, तो इससे मौत हो सकती है. डॉक्टर ने बताया कि हीट स्ट्रोक होने पर शुरुआत में तेज सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी और अत्यधिक प्यास लगना महसूस होता है. स्थिति गंभीर होने पर शरीर गर्म और सूखा हो जाता है, पसीना आना बंद हो सकता है, दिल की धड़कन तेज हो जाती है और व्यक्ति कन्फ्यूजन या बेहोशी की हालत में भी जा सकता है. कई मामलों में उल्टी, दौरे और मानसिक स्थिति में बदलाव भी देखने को मिलता है. हीट स्ट्रोक कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह शरीर के अंगों को तेजी से नुकसान पहुंचा सकता है. अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह ब्रेन डैमेज, किडनी फेलियर और मौत का कारण भी बन सकता है. इसलिए हीट स्ट्रोक को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. इमरजेंसी के डॉक्टर ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति हीट स्ट्रोक का शिकार हो जाए, तो तुरंत कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए. सबसे पहले उसे छांव या ठंडी जगह पर ले जाएं. उसके कपड़े ढीले करें और शरीर को ठंडा करने की कोशिश करें. ठंडे पानी की पट्टियां रखना, पंखा चलाना या ठंडे पानी से स्पंज करना बहुत जरूरी होता है. अगर व्यक्ति होश में है, तो उसे पानी या ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन दें. अगर वह बेहोश है, तो मुंह से कुछ भी न दें और तुरंत हॉस्पिटल ले जाएं. हीट स्ट्रोक से बचाव ही सबसे बेहतर उपाय है. इसके लिए तेज धूप में बाहर निकलने से बचें, खासकर दोपहर 12 से 4 बजे के बीच घर के अंदर रहें. हल्के और ढीले कपड़े पहनें, खूब पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें. बाहर जाते समय सिर को ढकें और जरूरत पड़ने पर छाता या टोपी का इस्तेमाल करें. हीट स्ट्रोक एक गंभीर और जानलेवा स्थिति हो सकती है, लेकिन सही जानकारी और समय पर कदम उठाकर इससे बचा जा सकता है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 15, 2026, 15:43 IST
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बातचीत फिर शुरू होगी:भारतीय-डेलिगेशन अगले हफ्ते वॉशिंगटन रवाना होगा; नए टैरिफ स्ट्रक्चर पर चर्चा होगी

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से रुकी हुई अंतरिम ट्रेड डील को लेकर अगले हफ्ते बातचीत फिर से शुरू होने वाली है। केंद्र सरकार का एक हाई-लेवल डेलिगेशन अगले सप्ताह वॉशिंगटन रवाना होगा। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका में टैरिफ नियमों और अदालती फैसलों की वजह से व्यापारिक समीकरण बदल गए हैं। PTI की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को सरकारी सूत्रों ने डेलिगेशन की इस यात्रा की पुष्टि की। पहले इस समझौते पर मार्च में हस्ताक्षर होने की उम्मीद थी, लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प शासन के दौरान लागू टैरिफ व्यवस्था और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले ने स्थितियों को कठिन बना दिया है। मार्च में होने वाला था समझौता दोनों देशों ने फरवरी में व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए रूपरेखा तैयार कर ली थी। इस फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका भारतीय सामानों पर आयात शुल्क यानी टैरिफ घटाकर 18% करने पर सहमत हो गया था। हालांकि, इसके तुरंत बाद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के लगाए गए कुछ पुराने टैरिफ नियमों को रद्द कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों से होने वाले आयात पर 10% टैरिफ लागू कर दिया है। इसी स्पष्टता की कमी के कारण पिछले महीने होने वाली बैठक टाल दी गई थी। भारत का रिलेटिव एडवांटेज कम हुआ जब फरवरी में फ्रेमवर्क तैयार हुआ था, तब भारत को अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर स्थिति मिल रही थी। अमेरिका के अन्य देशों पर लगाए गए ऊंचे टैरिफ के बीच भारत के लिए 18% की दर फायदेमंद थी। लेकिन अब अमेरिका ने सभी देशों के लिए 10% का फ्लैट टैरिफ लागू कर दिया है। इससे भारत का वह खास फायदा कम हो गया है, क्योंकि अब हर ट्रेडिंग पार्टनर को एक समान दर का लाभ मिल रहा है। धारा 301 के तहत दो जांच चल रहीं अगले हफ्ते होने वाली यह बातचीत केवल टैरिफ तक सीमित नहीं रहेगी। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने हाल ही में धारा 301 के तहत दो अलग-अलग जांच शुरू की हैं, जिनमें भारत भी शामिल है… चर्चा का मुख्य एजेंडा क्या होगा? वॉशिंगटन में होने वाली इस बैठक में भारतीय अधिकारी नए टैरिफ स्ट्रक्चर पर स्पष्टता मांगेंगे। भारत की कोशिश होगी कि बदले हुए हालातों में भी भारतीय निर्यातकों के हितों की रक्षा की जाए। साथ ही धारा 301 के तहत चल रही जांचों पर भारत अपना पक्ष मजबूती से रखेगा ताकि भविष्य में किसी भी तरह के प्रतिबंधों से बचा जा सके। क्या है धारा 301? यह अमेरिका के ‘ट्रेड एक्ट 1974’ का एक हिस्सा है। इसके तहत अमेरिकी सरकार को यह अधिकार मिलता है कि अगर उसे लगता है कि किसी दूसरे देश की व्यापार नीतियां अमेरिकी व्यापार के लिए अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं, तो वह उसकी जांच कर सकती है और उस पर जुर्माना या व्यापार प्रतिबंध लगा सकती है। भारत के लिए क्यों जरूरी है यह डील? ये खबर भी पढ़ें… थोक महंगाई 38 महीने में सबसे ज्यादा: मार्च में ये 3.88% पर पहुंची, रोजाना जरूरत का सामान और फ्यूल महंगा हुआ मार्च में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 3.88% पर पहुंच गई है। फरवरी के यह 2.13% पर थी। यानी इसमें एक महीने के अंदर 1.75% की बढ़ोतरी हुई है। थोक महंगाई ने 38 महीने का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। जनवरी 2023 में थोक महंगाई 4.73% पर पहुंच गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 15 अप्रैल को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। पूरी खबर पढ़ें…
Nashik TCS Sexual Abuse Conversion Scam

Hindi News National Nashik TCS Sexual Abuse Conversion Scam | Organized Network Targeting New Staff नासिक2 घंटे पहले कॉपी लिंक नासिक धर्मांतरण, यौन शोषण केस में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। महाराष्ट्र के नासिक स्थित TCS कंपनी ऑफिस में धर्म परिवर्तन, यौन शोषण केस की पुलिस जांच में सामने आया है कि एक संगठित नेटवर्क नए कर्मचारियों को निशाना बनाता था। इस केस में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी नई जॉइन करने वाली कर्मचारियों की निजी जानकारी के आधार पर ‘टारगेट’ चुनते थे। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर और पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहे कर्मचारियों को निशाना बनाया जाता था। अब तक की जांच के अनुसार गिरफ्तार HR मैनेजर अश्विनी चेनानी ने तौसीफ अत्तार से 38 बार, दानिश शेख से 1 बार, रजा मेमन से 22 बार और आपत्तिजनक चैट की थी। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने 10 अप्रैल को कंपनी कैंपस में घुसकर हंगामा किया। वित्तीय लेन-देन की जांच में सहयोग नहीं कर रही पीड़ित लड़कियों ने जब आरोपियों के खिलाफ शिकायत की तो अश्विनी ने शिकायत को जानबूझकर नजरअंदाज किया। उलटा उसने पीड़ित को ही फटकार लगाई। सोमवार को तीन दिन की हिरासत समाप्त होने के बाद उसे अदालत में पेश किया गया। वह वित्तीय लेन-देन की जांच में पुलिस का बिल्कुल भी सहयोग नहीं कर रही है। इसलिए उसकी पांच दिन की हिरासत मांगी गई थी। हालांकि, अदालत ने उसे दो दिनों के लिए हिरासत में भेज दिया। जांच में यह भी सामने आया है कि प्रशिक्षण के दौरान हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की जाती थी। जब पीड़ित परेशान होते थे, तब HR मैनेजर उनसे संपर्क कर भरोसा जीतती थी और धीरे-धीरे उनके रहन-सहन में बदलाव के लिए दबाव बनाया जाता था। 2022 से 2026 के बीच महिला कर्मचारियों को टारगेट बनाया इसी मामले में दर्ज FIR के अनुसार, 2022 से 2026 के बीच 18 से 25 साल की महिला कर्मचारियों को नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया गया, जबरन नॉन-वेज खाने को कहा गया और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया गया। FIR में यह भी दर्ज है कि कुछ आरोपियों ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए। ऑफिस के अंदर और बाहर महिलाओं के साथ छेड़छाड़, शरीर को घूरना, आपत्तिजनक टिप्पणियां करना और अश्लील इशारे करना जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। एक शिकायत में बताया गया कि आरोपी ऑफिस में ही महिला को पकड़कर शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करता था। वहीं दूसरी शिकायत में आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारी को शिकायत देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे आरोपियों का मनोबल बढ़ा। वॉट्सएप ग्रुप भी बनाया जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने एक वॉट्सएप ग्रुप भी बनाया हुआ था, जहां वे ‘टारगेट’ पर चर्चा करते थे और धार्मिक व कंपनी से जुड़े मुद्दों पर बात करते थे। पुलिस इस डिजिटल सबूत की भी जांच कर रही है। अब तक गिरफ्तार आरोपियों में आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, तौसीफ अत्तर और अन्य शामिल हैं। ऑपरेशन मैनेजर अश्विन चेनानी को भी गिरफ्तार किया गया है। SIT इस पूरे मामले की जांच कर रही है और 12 से ज्यादा संभावित पीड़ितों की पहचान की गई है। फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क के अन्य कनेक्शन और बाहरी लिंक की भी जांच कर रही है। मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। VHP ने कहा- राष्ट्रीय स्तर पर धर्मांतरण विरोधी कानून बने VHP के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने बुधवार को एक बयान में कहा- नाशिक की घटना एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है, जो ऐसा लगता है कि कई क्षेत्रों में सक्रिय है। मैं केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से अपील करता हूं कि वेराष्ट्रीय सुरक्षा, नागरिकों की सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द को ध्यान में रखते हुए निर्णायक कार्रवाई करें। सभी राज्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी धर्मांतरण विरोधी कड़े कानूनों की ज़रूरत है। —————————— ये खबर भी पढ़ें: टाटा सन्स चेयरमैन बोले- नासिक की घटना परेशान करने वाली:सीनियर अफसर से जांच करा रहे, TCS कैंपस में यौन उत्पीड़न, जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप हैं टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने TCS नासिक में लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को गंभीर और परेशान करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि मामले की जांच सीनियर अफसर से कराई जा रही है और दोषियों पर सख्त एक्शन लेंगे। रविवार को अपनी पहली प्रतिक्रिया में कंपनी ने कहा था कि कंपनी में किसी भी तरह के उत्पीड़न के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति है। जैसे ही उसे मामले की जानकारी मिली, उसने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…








