Sunday, 31 May 2026 | 05:42 AM

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इंदौर के डेली कॉलेज में फिर 'घमासान':संविधान संशोधन के खिलाफ ओल्ड डेलियन्स ने खोला मोर्चा, मुख्यमंत्री तक गुहार

इंदौर के डेली कॉलेज में फिर 'घमासान':संविधान संशोधन के खिलाफ ओल्ड डेलियन्स ने खोला मोर्चा, मुख्यमंत्री तक गुहार

डेली कॉलेज में आंतरिक विवाद एक बार फिर गहरा गया है। गुरुवार को बड़ी संख्या में पूर्व छात्र (ओल्ड डेलियन्स) कॉलेज के मुख्य द्वार पर एकत्र हुए और बायलॉज (संविधान) में प्रस्तावित बदलावों के विरोध में प्रदर्शन किया। उन्होंने वर्तमान प्रबंधन पर नियमों की अनदेखी और पद के दुरुपयोग के आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि संस्था की वर्तमान प्रबंधन समिति का कार्यकाल दिसंबर 2025 में समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद अब तक नए चुनाव नहीं कराए गए हैं। उनका कहना है कि कुछ लोग अपनी कुर्सी बचाने के लिए नियमों में मनमाने संशोधन कर रहे हैं, जो कॉलेज की परंपराओं और स्थापित प्रक्रियाओं के खिलाफ है। प्राचार्य से मुलाकात को लेकर तनाव प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब पूर्व छात्रों को प्राचार्य डॉ. बिंद्रा से मिलने से रोक दिया गया। इस पर काफी देर तक बहस और विरोध हुआ। बाद में प्रबंधन ने उन्हें परिसर में प्रवेश की अनुमति दी। मुलाकात के दौरान प्राचार्य ने उनकी बात सुनी और मुद्दों को प्रबंधन के समक्ष रखने का आश्वासन दिया। वित्तीय पारदर्शिता पर भी सवाल पूर्व छात्रों ने केवल संविधान संशोधन ही नहीं, बल्कि संस्थान की गवर्नेंस और वित्तीय पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि बिना वार्षिक साधारण सभा (AGM) बुलाए महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं और पूर्व छात्रों की भागीदारी लगातार कम की जा रही है। साथ ही, अनावश्यक शिकायतों और एफआईआर से कॉलेज की राष्ट्रीय स्तर पर छवि प्रभावित हो रही है। आंदोलन तेज करने की चेतावनी प्रदर्शन में मधुकांत गर्ग, डॉ. सुमित शुक्ला, देवाशीष मजूमदार, कमलेश कासलीवाल, विक्रम खंडेलवाल और नीरज देसाई सहित कई पूर्व छात्र शामिल हुए। ज्ञापन सौंपने के बाद उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं हुई और प्रस्तावित बदलावों पर रोक नहीं लगी, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

Liver Detox: किचन में रखी इन 5 चीजों से करें लिवर की सफाई, नहीं जमने देंगे फैट, फैटी लिवर से बचने का आसान तरीका

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Last Updated:April 16, 2026, 22:55 IST Liver Detox Kaise Kare: खराब खानपान के कारण लिवर को डिटॉक्स करने की जरूरत होती है. वरना इससे फैटी लिवर जैसी प्रोग्रेसिव डिजीज होने का खतरा रहता है, जो जानलेवा भी बन सकती है. अच्छी बात ये है कि इसके लिए आपको किसी डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं है. किचन में रखी चीजों से ही आप लिवर की सफाई कर सकते हैं. ख़बरें फटाफट आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, बाहर का खाना और अनियमित दिनचर्या का सबसे ज्यादा असर हमारे लिवर पर पड़ता है. लिवर शरीर का बहुत जरूरी अंग है, जो खून को साफ करता है, पाचन में मदद करता है और शरीर से गंदगी बाहर निकालता है. वैसे तो ये अंग खुद की सफाई करने में सक्षम होता है, लेकिन यदि आपका लाइफस्टाइल बहुत खराब है, तो आपको इसे डिटॉक्स करने की जरूरत पड़ सकती है. ऐसे में अगर हम इसका ध्यान नहीं रखते, तो यह धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है. इससे फैटी लिवर का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है, जो कि सिरोसिस यानी लिवर सड़ने की स्थिति तक पहुंच सकता है. इस स्टेज पर लिवर ट्रांसप्लांट ही एक मात्र इलाज रह जाता है, जो न होने पर जान जाने का खतरा रहता है. ऐसे में नेचुरल तरीके से लिवर को कैसे साफ और हेल्दी रख सकते हैं, चलिए यहां जानते हैं. डाइट का लिवर पर असरमेडिकल रिसर्च के अनुसार, लिवर को स्वस्थ रखने में हमारी रोज की डाइट बहुत अहम भूमिका निभाती है. कुछ नेचुरल चीजें ऐसी होती हैं, जो लिवर को साफ करने और मजबूत बनाने में मदद करती हैं. अगर इन्हें रोजाना के खाने में शामिल किया जाए, तो लिवर लंबे समय तक सही तरीके से काम करता है. हरी सब्जियां हैं फायदेमंदपालक, मेथी, सरसों और ब्रोकली जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां लिवर के लिए बहुत अच्छी मानी जाती हैं. इनमें फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं, जो शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं. इनमें मौजूद क्लोरोफिल खून को साफ करता है और लिवर का काम आसान बनाता है. लहसुन से बढ़ती है लिवर की ताकतलहसुन में मौजूद सल्फर तत्व लिवर के एंजाइम्स को एक्टिव करता है. इससे शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकलने लगते हैं. साथ ही इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते हैं, जो लिवर को इंफेक्शन से बचाते हैं. नींबू का नियमित सेवन करेंनींबू में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो लिवर को साफ रखने में मदद करते हैं. यह शरीर में फैट को पचाने की प्रक्रिया को तेज करता है, जिससे लिवर में जमा चर्बी कम होती है. रोज सुबह गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीना एक अच्छा उपाय माना जाता है. हल्दी का करें इस्तेमालहल्दी में करक्यूमिन नाम का तत्व पाया जाता है, जो सूजन कम करता है और लिवर की कोशिकाओं को ठीक करने में मदद करता है. यह लिवर को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों से भी बचाती है और शरीर को अंदर से मजबूत बनाती है. ग्रीन टी भी है फायदेमंदग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन्स नाम के एंटीऑक्सीडेंट्स लिवर में जमा फैट को कम करने में मदद करते हैं. रोजाना ग्रीन टी पीने से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और फैटी लिवर का खतरा कम हो जाता है. ध्यान रखें ये बातेंइन घरेलू उपायों को अपनाने के साथ-साथ संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली भी जरूरी है. सही खानपान और अच्छी आदतों से आप अपने लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 16, 2026, 22:55 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

अमित शाह की 50% लोकसभा सीट बढ़ाने की योजना, दक्षिण का वादा, और विपक्ष अभी भी इसका विरोध क्यों कर रहा है | समझाया | व्याख्याकार समाचार

PBKS batter Prabhsimran Singh. (Picture Credit: X/@IPLT20)

आखरी अपडेट:16 अप्रैल, 2026, 22:42 IST जो चल रहा है वह सिर्फ एक संसदीय प्रतियोगिता नहीं है बल्कि एक स्तरित राजनीतिक रणनीति है – दक्षिण के लिए एक संदेश, प्रमुख चुनावी राज्यों के लिए दूसरा संसद में बोलते गृह मंत्री अमित शाह. (फ़ाइल छवि: पीटीआई) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को लोकसभा में एक महत्वपूर्ण बात कहने के लिए खड़े हुए – सरकार का स्पष्ट मानना ​​है कि यह बढ़ते राजनीतिक हमले को कुंद कर सकता है। उनका आश्वासन सरल था: जब सदन 850 सदस्यों तक विस्तारित हो जाएगा, तो प्रत्येक राज्य को लगभग 50% अधिक सीटें मिलेंगी, और दक्षिणी राज्यों सहित कोई भी अपनी वर्तमान हिस्सेदारी नहीं खोएगा। यह कोई नियमित हस्तक्षेप नहीं था. सरकार जानती है कि परिसीमन के मुद्दे ने विशेष रूप से दक्षिण में तीव्र राजनीतिक बढ़त हासिल कर ली है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन जैसे नेता यह तर्क देते रहे हैं कि कोई भी ताज़ा अभ्यास संतुलन को हिंदी पट्टी के पक्ष में झुका सकता है। शाह का प्रयास आंकड़ों को रिकॉर्ड पर रखना और उस आख्यान को तोड़ना था। कागज पर, तर्क सीधा है। तमिलनाडु को ही लीजिए- इसकी सीटें 39 से बढ़कर 59 हो जाएंगी और इसकी कुल हिस्सेदारी मोटे तौर पर बरकरार रहेगी। केंद्र का कहना है कि जब आप गणित को देखते हैं तो दक्षिण के “हारने” का डर बिल्कुल नहीं रहता। लेकिन राजनीति अकेले गणित पर कम ही चलती है. स्टालिन के लिए, परिसीमन पहले से ही एक नीतिगत मुद्दे से कहीं अधिक बन गया है – यह अब उनकी चुनावी पिच का हिस्सा है। तमिलनाडु चुनावों से पहले, यह एक रैली बिंदु प्रदान करता है, राज्य के हितों और केंद्र के निर्णयों के बीच मुकाबले को एक रूप देने का एक तरीका। संख्याएँ उस तर्क का समर्थन करती हैं या नहीं, यह ज़मीनी स्तर पर उतना मायने नहीं रखता। इसीलिए शाह की सफ़ाई के बावजूद विपक्ष के पीछे हटने के आसार कम ही दिख रहे हैं. कुछ भी हो, रेखाएँ अधिक स्पष्ट रूप से खींची हुई प्रतीत होती हैं। असली परीक्षा तब हो सकती है जब संवैधानिक संशोधन विधेयक को मतदान के लिए रखा जाएगा। इसे दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता है – हमेशा एक लंबा क्रम। यदि बिल विफल हो जाता है, तो विपक्ष निश्चित रूप से इसे अपनी जीत के रूप में दावा करेगा। विशेष रूप से, स्टालिन मतदाताओं के पास जाकर यह कह सकेंगे कि वह अपनी बात पर कायम हैं और उन्होंने तमिलनाडु की आवाज की रक्षा की है। हालाँकि, भाजपा एक व्यापक राजनीतिक कैनवास पर विचार कर रही है। हार में भी, एक अवसर या आशा की किरण हो सकती है। पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में, जहां महिला मतदाता महत्वपूर्ण हैं, पार्टी से महिला आरक्षण विधेयक के इर्द-गिर्द अपना संदेश तेज करने की उम्मीद है। पिच सीधी होने की संभावना है: विपक्ष ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए एक उपाय को अवरुद्ध या विलंबित किया। प्रधानमंत्री के अगले 10 दिनों में बड़े पैमाने पर प्रचार करने की तैयारी के साथ, यह एक केंद्रीय विषय बन सकता है। तो जो चल रहा है वह सिर्फ एक संसदीय प्रतियोगिता नहीं है बल्कि एक स्तरित राजनीतिक रणनीति है – दक्षिण के लिए एक संदेश, प्रमुख चुनावी राज्यों के लिए दूसरा। संसद के अंदर, संख्या बल मजबूत बना हुआ है। सरकार को अब भी उम्मीद हो सकती है कि कुछ विपक्षी दल वोट से बाहर बैठेंगे या बहिर्गमन करेंगे, जिससे सदन की प्रभावी ताकत कम हो जाएगी। लेकिन यह ऐसी चीज़ नहीं है जिस पर आप भरोसा कर सकें। अंत में, परिसीमन की बहस से पता चलता है कि एक तकनीकी मुद्दा कितनी जल्दी राजनीतिक रूप ले सकता है। सरकार का कहना है कि किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा। विपक्ष का कहना है कि जोखिम वास्तविक हैं। और उन स्थितियों के बीच कहीं न कहीं यह तथ्य छिपा है कि भारतीय राजनीति में, धारणा अक्सर तथ्यों की तुलना में तेजी से और आगे बढ़ती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 16 अप्रैल, 2026, 22:41 IST समाचार समझाने वाले अमित शाह की 50% लोकसभा सीट बढ़ाने की योजना, दक्षिण का वादा, और विपक्ष अभी भी इसका विरोध क्यों कर रहा है | व्याख्या की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

केमिकल से पकाए जा रहे फलों पर सख्ती, FSSAI का बड़ा कदम

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Last Updated:April 16, 2026, 21:58 IST FSSAI ने साफ कहा है कि कैल्शियम कार्बाइड जैसे खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल पूरी तरह बैन है. संस्था का कहना है कि फलों को पकाने के लिए केवल एथिलीन गैस का इस्तेमाल ही मान्य है, वो भी तय नियमों और सुरक्षित तरीके से. इसको नहीं मानने वालों पर तुरंत जांच और छापेमारी की जाएगी. ख़बरें फटाफट अगर आप रोजाना फल खाते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने फलों को केमिकल से पकाने के मामले पर सख्त रुख अपनाया है. अब ऐसे किसी भी तरीके को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जो लोगों की सेहत के लिए खतरा बन सकता है. 16 अप्रैल 2026 को जारी निर्देश में FSSAI ने साफ कहा है कि कैल्शियम कार्बाइड जैसे खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल पूरी तरह बैन है. कुछ व्यापारी आम, केला और पपीता जैसे फलों को जल्दी पकाने के लिए इस केमिकल का उपयोग करते हैं, लेकिन यह शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक है. इसके कारण उल्टी, त्वचा संबंधी समस्याएं और खाना निगलने में दिक्कत जैसी परेशानियां हो सकती हैं. इतना ही नहीं, कुछ जगहों पर एथिफॉन नाम के केमिकल घोल में फल डुबोकर उन्हें जल्दी पकाने की कोशिश की जा रही है. FSSAI ने इस पर भी सख्त रोक लगा दी है. संस्था का कहना है कि फलों को पकाने के लिए केवल एथिलीन गैस का इस्तेमाल ही मान्य है, वह भी तय नियमों और सुरक्षित तरीके से. FSSAI ने सभी राज्यों के फूड सेफ्टी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे मंडियों, गोदामों और थोक बाजारों में कड़ी निगरानी रखें. जहां भी शक हो, वहां तुरंत जांच और छापेमारी की जाए. अगर किसी के पास प्रतिबंधित केमिकल मिलता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. जांच प्रक्रिया को और मजबूत बनाने के लिए अब खास तरह के टेस्ट पेपर का इस्तेमाल किया जाएगा. इनकी मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि फल प्राकृतिक रूप से पके हैं या केमिकल का इस्तेमाल किया गया है. इस पूरे कदम का मुख्य उद्देश्य यही है कि बाजार में बिकने वाले फल सुरक्षित हों और लोगों की सेहत को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे. FSSAI का यह फैसला उपभोक्ताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि लोग बिना डर के स्वस्थ और ताजे फल खा सकें. इसलिए अगली बार जब आप फल खरीदें, तो उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा पर जरूर ध्यान दें. स्वस्थ रहने के लिए सुरक्षित भोजन चुनना बहुत जरूरी है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 16, 2026, 21:58 IST

टीकमगढ़ में अवैध मुरम खनन पर खनिज विभाग का छापा:कांटी खास गांव में सड़क पर मुरम फैलाकर भागे चालक; एक जेसीबी जब्त

टीकमगढ़ में अवैध मुरम खनन पर खनिज विभाग का छापा:कांटी खास गांव में सड़क पर मुरम फैलाकर भागे चालक; एक जेसीबी जब्त

टीकमगढ़ जिले के कांटी खास गांव में गुरुवार शाम खनिज विभाग ने अवैध मुरम खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। मुखबिर की सूचना पर पहुंची टीम ने मौके पर अवैध उत्खनन कर रही एक जेसीबी मशीन को जब्त कर लिया है। कार्रवाई के दौरान खनिज माफिया अपने डंपर और ट्रैक्टर लेकर भागने में सफल रहे, जिनका टीम ने काफी दूर तक पीछा भी किया। टीम को देख सड़क पर मुरम फैलाकर भागे चालक दोपहर करीब 3:30 बजे जब टीम मौके पर पहुंची, तब जेसीबी से ट्रैक्टरों और डंपरों में मुरम भरी जा रही थी। अधिकारियों को देखते ही चालक वाहनों को तेज रफ्तार में भगा ले गए और रास्ते में मुरम फैला दी ताकि पीछा न किया जा सके। जिला खनिज अधिकारी विपुल रावत के अनुसार, स्टाफ की कमी की वजह से भागते हुए वाहनों को रोकना संभव नहीं हो सका। 40 लोगों की भीड़ ने जेसीबी छुड़ाने का किया प्रयास कार्रवाई के दौरान करीब 30-40 ग्रामीण और खनन से जुड़े लोग जेसीबी मशीन को छुड़ाने के लिए मौके पर एकत्र हो गए। स्थिति बिगड़ती देख देहात थाने से पुलिस बल बुलाया गया। पुलिस की मौजूदगी में शाम करीब 6 बजे मशीन को जब्त कर थाने लाया गया। अधिकारियों के अनुसार, जब्त जेसीबी उत्तर प्रदेश के किसी व्यक्ति की है। अज्ञात आरोपियों पर केस खनिज विभाग ने अवैध उत्खनन और सरकारी कार्य में बाधा डालने की संभावनाओं को देखते हुए अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस और खनिज विभाग अब फरार डंपर और ट्रैक्टरों की पहचान कर आरोपियों की तलाश में जुट गए हैं। मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

‘अगर यह पारित हो गया तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा’: महिला कोटा विधेयक में ओबीसी के साथ ‘अन्याय’ पर प्रियंका गांधी | राजनीति समाचार

PBKS batter Prabhsimran Singh. (Picture Credit: X/@IPLT20)

आखरी अपडेट:16 अप्रैल, 2026, 21:47 IST इससे पहले महिला कोटा बिल पर पीएम नरेंद्र मोदी के संबोधन का जवाब देते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि वास्तव में इस कानून का महिलाओं से कोई लेना-देना नहीं है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा 16 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली में संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में बोलती हैं। (छवि: संसद टीवी/पीटीआई) कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी ने गुरुवार को कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि कांग्रेस महिला आरक्षण के साथ खड़ी है, लेकिन अगर मौजूदा विधेयक, जैसा कि अभी पेश किया गया है, पारित हो जाता है तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। का स्पष्ट रूप से उत्तर देना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन इससे पहले महिला आरक्षण बिल पर प्रियंका गांधी ने कहा था कि असल में इस कानून का महिलाओं से कोई लेना-देना नहीं है. इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि कांग्रेस महिला आरक्षण के साथ खड़ी है। गांधी ने संसद में विशेष सत्र के दौरान कहा, वास्तविकता यह है कि यह महिला विधेयक के बारे में नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र इन विधेयकों को लाकर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अधिकारों को छीनना चाहता है। उन्होंने कहा, “सरकार जाति जनगणना न कराकर और 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर अड़े रहकर ओबीसी के अधिकारों को छीनना चाहती है। अगर यह विधेयक पारित हो गया तो देश में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा।” केंद्रीय गृह मंत्री की ओर इशारा करते हुए अमित शाह का अपने भाषण पर प्रसन्नतापूर्वक प्रतिक्रिया देते हुए, गांधी ने अपनी बात कहने के लिए तीखा हमला किया कि कैसे केंद्र “परिसीमन का अनुचित लाभ” उठा रहा है। “अचानक चुनाव के दौरान, आप सर्वदलीय बैठक के बिना एक सत्र बुलाते हैं। वे (सत्ता पक्ष) एक कथा बनाएंगे और फिर विपक्ष को इसमें डाल देंगे। धर्म संकट (नैतिक दुविधा). हम पीएम (नरेंद्र मोदी) से ज्यादा उम्मीद नहीं कर सकते क्योंकि वह दुनिया के दबाव में हैं।’ काला टीका भी काम आ जाएगा,” उसने कहा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विपक्ष “आपके तीन विधेयकों का पुरजोर विरोध करता है”, और यदि प्रधान मंत्री मोदी वास्तव में महिलाओं की परवाह करते हैं, तो वह उनका राजनीतिक उपयोग नहीं करेंगे। महिला कोटा कानून में संशोधन और परिसीमन आयोग के गठन के लिए पेश किए गए तीन विधेयकों पर लोकसभा में बहस जारी है। ‘महिलाएं उन लोगों को आसानी से पहचान लेती हैं जो उन्हें गुमराह करने की कोशिश करते हैं’ गांधी ने पूछा कि केंद्र सरकार लोकसभा की 543 सीटों पर महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण क्यों नहीं दे सकती. उन्होंने कहा कि विधेयक लोकसभा सीटों की संख्या 850 तक बढ़ाने की बात करता है – जो 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन आयोग द्वारा किया जाएगा। बारीकी से पढ़ने पर पता चलता है कि परिसीमन आयोग के तीन सदस्य राज्यों के भाग्य और संसद में उनके प्रतिनिधित्व का फैसला करेंगे। कांग्रेस सांसद ने विधायी निकायों में महिला आरक्षण के मुद्दे की पृष्ठभूमि भी बताई। उन्होंने कहा, “यह मुद्दा हर महिला के दिल के करीब है। इस मुद्दे की एक पृष्ठभूमि है। प्रधान मंत्री ने कहा कि यह मुद्दा 30 वर्षों से अवरुद्ध था। इसे नेहरू नामक व्यक्ति ने शुरू किया था। वह नेहरू नहीं जिनसे वे इतना बचते हैं, बल्कि मोतीलाल नेहरू हैं, जिन्होंने एक समिति के अध्यक्ष के रूप में 19 अधिकारों की एक सूची तैयार की थी, जिन्हें कांग्रेस के कराची सत्र में एक प्रस्ताव के रूप में पारित किया गया और भारतीय राजनीति में महिलाओं को समान अधिकार देने का आधार बनाया गया।” उन्होंने कहा कि वह राजीव गांधी ही थे, जो प्रधानमंत्री के रूप में पंचायतों में महिलाओं के आरक्षण के लिए विधेयक लाए थे नगरपालिका और आखिरकार कांग्रेस की पीवी नरसिम्हा राव सरकार के दौरान इसके लिए बिल पास हो गया. उन्होंने कहा, “यूपीए के तहत, इसे राज्यसभा में पारित किया गया था लेकिन लोकसभा में आम सहमति नहीं बन सकी। 2018 में, राहुल गांधी ने महिला आरक्षण की मांग करते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा।” मोदी पर निशाना साधते हुए गांधी ने आगे कहा कि मोदी के संबोधन से ऐसा लगता है कि सत्तारूढ़ भाजपा महिला आरक्षण की चैंपियन है। “कोई भी महिला आपको बताएगी कि महिलाएं उन लोगों को आसानी से पहचान लेती हैं जो उन्हें गुमराह करने की कोशिश करते हैं,” उन्होंने कहा और भाजपा से सावधान रहने का आग्रह किया। महिला कोटा कानून में बदलाव के लिए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक मत विभाजन के बाद लोकसभा में पेश किया गया। केंद्र शासित प्रदेशों दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर में प्रस्तावित संशोधित महिला कोटा कानून को लागू करने के लिए दो सामान्य विधेयक – परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक भी सदन में पेश किए गए। (एजेंसी इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 16 अप्रैल, 2026, 18:24 IST समाचार राजनीति ‘अगर यह पारित हो गया तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा’: महिला कोटा विधेयक में ओबीसी के साथ ‘अन्याय’ पर प्रियंका गांधी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)महिला आरक्षण बिल(टी)प्रियंका गांधी(टी)कांग्रेस पार्टी(टी)नरेंद्र मोदी(टी)ओबीसी अधिकार(टी)जाति जनगणना भारत(टी)भारतीय संसद विशेष सत्र(टी)महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व

नाखून चबाने की आदत से सड़ने लगी उंगली, 21 साल की लड़की का छलका दर्द, जानें कितना खतरनाक नेल बाइटिंग

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Last Updated:April 16, 2026, 21:26 IST How Stop Nail Biting: क्या आप भी अक्सर दांतों से अपने नाखून को काटते हैं? यदि आपको नेल बाइटिंग की आदत है तो लेख आपके लिए अभी से संभल जाने की चेतावनी है. नाखून चबाना एक ऐसे इंफेक्शन का कारण बन सकता है, जिससे आपको अपनी उंगली ही गवानी पड़ सकती है. ऐसा ही कुछ 21 साल की गैबी के साथ हाल ही में हुआ है. ख़बरें फटाफट अगर आपको भी नाखून चबाने की आदत है, तो यह खबर आपके लिए एक जरूरी चेतावनी है. हाल ही में 21 साल की गैबी स्वेर्ज़ेव्स्की को इस आदत की वजह से इतना गंभीर इंफेक्शन हो गया कि उसकी उंगली तक खतरे में पड़ गई. हालांकि अब वो बिल्कुल ठीक हैं.लेकिन उन्होंने अमेरिकन मीडिया ऑर्गनाइजेशन People से बात करते हुए अपने एक्सपीरियंस को शेयर किया और लोगों से तुरंत नाखून चबाने की आदत को छोड़ने की अपील की है. क्योंकि वो नहीं चाहती कि कोई भी उस दर्द से गुजरे जिसका सामना पिछले कुछ दिनों में उन्हें करना पड़ा है. दरअसल, यह आदत जिसे मेडिकल भाषा में ‘ओनिकोफेजिया’ कहा जाता है. आमतौर पर लोग एंग्जायटी या स्ट्रेस में होने पर नाखून चबाते हैं.  ये आदत देखने में भले ही छोटी लगे, लेकिन इसके नुकसान बड़े हो सकते हैं. इस महिला के साथ भी ऐसा ही हुआ. नाखून के पास की थोड़ी सी फटी त्वचा धीरे-धीरे एक दर्दनाक इंफेक्शन में बदल गई, जिसका इलाज डॉक्टर को महीनों तक करना पड़ा. (फोटो- सांकेतिक) नाखून चबाने से इंफेक्शन कैसे होता है?जब नाखून के आसपास की त्वचा कट या फट जाती है, तो वहां से बैक्टीरिया शरीर के अंदर आसानी से प्रवेश कर सकते हैं. दरअसल,हमारे मुंह में सैकड़ों तरह के कीटाणु होते हैं. जब हम नाखून चबाते हैं, तो ये कीटाणु छोटे घावों के जरिए अंदर जाकर ‘पैरोनाइशिया’ नाम का बैक्टीरियल इंफेक्शन पैदा कर सकते हैं. इंफेक्शन के लक्षणइस तरह के इंफेक्शन की शुरुआत आमतौर पर हल्की लालिमा, सूजन और दर्द से होती है. लेकिन अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह बढ़कर गंभीर रूप ले सकता है. कई मामलों में पस बन जाता है, दर्द बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और इंफेक्शन उंगली के अंदर तक फैल सकता है. इलाजइलाज के लिए कभी-कभी एंटीबायोटिक दवाएं देनी पड़ती हैं. गंभीर स्थिति में डॉक्टरों को पस निकालने (इंसीजन और ड्रेनेज) की प्रक्रिया करनी पड़ सकती है, और कुछ मामलों में सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है. हालांकि हर नाखून चबाने वाले व्यक्ति को यह समस्या नहीं होती, लेकिन जोखिम हमेशा बना रहता है क्योंकि मुंह में मौजूद बैक्टीरिया आसानी से संक्रमण फैला सकते हैं. इसलिए इस आदत को हल्के में लेना सही नहीं है. कैसे छोटे नाखून चबाने की आदत– नाखून हमेशा छोटे और साफ रखें– तेज टेस्ट वाले नेल पॉलिश लगाकर रखें– नाखून या आसपास की त्वचा को काटने या चबाने से बचें– अगर त्वचा कट जाए, तो उसे तुरंत साफ करके एंटीसेप्टिक लगाएं About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 16, 2026, 21:26 IST

धुरंधर फ्रेंचाइजी ने फिल्म इंडस्ट्री को दी नई जान:कंगना बोलीं- बॉलीवुड देश से कट रहा था, रणवीर की मूवी ने जगाई उम्मीद

धुरंधर फ्रेंचाइजी ने फिल्म इंडस्ट्री को दी नई जान:कंगना बोलीं- बॉलीवुड देश से कट रहा था, रणवीर की मूवी ने जगाई उम्मीद

अभिनेत्री और सांसद कंगना रनोट ने ‘धुरंधर’ फ्रेंचाइजी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि इस फिल्म ने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में नई जान फूंकने का काम किया है। कंगना के मुताबिक, पिछले कुछ समय से बॉलीवुड दर्शकों से कट रहा था, लेकिन रणवीर सिंह स्टारर इस फिल्म ने लोगों को सिनेमाघरों तक वापस खींच लिया है। यह फ्रेंचाइजी अब 3,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने वाली पहली भारतीय फिल्म सीरीज बन गई है। बॉलीवुड और दर्शकों के बीच खत्म हो रही थी दूरी ANI से बातचीत में कंगना ने कहा कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री धीरे-धीरे देश की संस्कृति और कहानियों से दूर होती जा रही थी। उन्होंने बताया, “इंडस्ट्री एक तरह से देश से कट रही थी। दर्शकों की भागीदारी कम हो गई थी और लोग फिल्में देखना नहीं चाह रहे थे। इसी वजह से साउथ इंडियन फिल्मों को ज्यादा पहचान मिली, क्योंकि वे अपनी संस्कृति और स्थानीय कहानियों पर फोकस कर रहे थे।” कंगना का मानना है कि ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों ने दर्शकों को उनकी अपनी कहानियां दिखाई हैं। आर माधवन और अजीत डोभाल का जिक्र कंगना ने फिल्म में आर माधवन के काम की विशेष रूप से सराहना की। फिल्म में उनका किरदार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से प्रेरित बताया जा रहा है। कंगना ने कहा, माधवन ने शानदार काम किया है। मैं अजीत डोभाल जी से मिल चुकी हूं, उनका व्यक्तित्व बहुत बड़ा है। मुझे लगता है कि डोभाल जी पर एक पूरी अलग फिल्म बननी चाहिए, तभी उनके किरदार के साथ पूरा न्याय हो पाएगा। फिर भी माधवन उनके काफी करीब पहुंचे, वे बहुत अच्छे अभिनेता हैं। 3000 करोड़ का ऐतिहासिक रिकॉर्ड ‘धुरंधर’ फ्रेंचाइजी ने भारतीय सिनेमा में नया इतिहास रचा है। सीरीज की दोनों फिल्मों ने मिलकर वर्ल्डवाइड 3,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर ली है। ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ मार्च में रिलीज हुई थी और इसने अकेले ग्लोबल बॉक्स ऑफिस पर 1700 करोड़ रुपए से ज्यादा का बिजनेस किया है।

धुरंधर फ्रेंचाइजी ने फिल्म इंडस्ट्री को दी नई जान:कंगना बोलीं- बॉलीवुड देश से कट रहा था, रणवीर की मूवी ने जगाई उम्मीद

धुरंधर फ्रेंचाइजी ने फिल्म इंडस्ट्री को दी नई जान:कंगना बोलीं- बॉलीवुड देश से कट रहा था, रणवीर की मूवी ने जगाई उम्मीद

अभिनेत्री और सांसद कंगना रनोट ने ‘धुरंधर’ फ्रेंचाइजी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि इस फिल्म ने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में नई जान फूंकने का काम किया है। कंगना के मुताबिक, पिछले कुछ समय से बॉलीवुड दर्शकों से कट रहा था, लेकिन रणवीर सिंह स्टारर इस फिल्म ने लोगों को सिनेमाघरों तक वापस खींच लिया है। यह फ्रेंचाइजी अब 3,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने वाली पहली भारतीय फिल्म सीरीज बन गई है। बॉलीवुड और दर्शकों के बीच खत्म हो रही थी दूरी ANI से बातचीत में कंगना ने कहा कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री धीरे-धीरे देश की संस्कृति और कहानियों से दूर होती जा रही थी। उन्होंने बताया, “इंडस्ट्री एक तरह से देश से कट रही थी। दर्शकों की भागीदारी कम हो गई थी और लोग फिल्में देखना नहीं चाह रहे थे। इसी वजह से साउथ इंडियन फिल्मों को ज्यादा पहचान मिली, क्योंकि वे अपनी संस्कृति और स्थानीय कहानियों पर फोकस कर रहे थे।” कंगना का मानना है कि ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों ने दर्शकों को उनकी अपनी कहानियां दिखाई हैं। आर माधवन और अजीत डोभाल का जिक्र कंगना ने फिल्म में आर माधवन के काम की विशेष रूप से सराहना की। फिल्म में उनका किरदार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से प्रेरित बताया जा रहा है। कंगना ने कहा, माधवन ने शानदार काम किया है। मैं अजीत डोभाल जी से मिल चुकी हूं, उनका व्यक्तित्व बहुत बड़ा है। मुझे लगता है कि डोभाल जी पर एक पूरी अलग फिल्म बननी चाहिए, तभी उनके किरदार के साथ पूरा न्याय हो पाएगा। फिर भी माधवन उनके काफी करीब पहुंचे, वे बहुत अच्छे अभिनेता हैं। 3000 करोड़ का ऐतिहासिक रिकॉर्ड ‘धुरंधर’ फ्रेंचाइजी ने भारतीय सिनेमा में नया इतिहास रचा है। सीरीज की दोनों फिल्मों ने मिलकर वर्ल्डवाइड 3,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर ली है। ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ मार्च में रिलीज हुई थी और इसने अकेले ग्लोबल बॉक्स ऑफिस पर 1700 करोड़ रुपए से ज्यादा का बिजनेस किया है।

डॉ.अंबेडकर का स्टेटस लगाने पर पत्नी को घर से निकाला:डेढ़ माह के बच्चे के साथ थाने पहुंची महिला; पति ने तलाक देने की धमकी दी

डॉ.अंबेडकर का स्टेटस लगाने पर पत्नी को घर से निकाला:डेढ़ माह के बच्चे के साथ थाने पहुंची महिला; पति ने तलाक देने की धमकी दी

इंदौर के भोलनाथ कॉलोनी में रहने वाली एक पीड़िता गुरुवार को एरोड्रम थाने पहुंची। उसके परिवार के लोगों ने बताया कि पीड़िता पर उसकी दोनों ननदों ने 14 अप्रैल को बाबा साहब अंबेडकर का स्टेटस हटाने का दबाव बनाया था। स्टेटस नहीं हटाने पर पति ने डेढ़ माह के बच्चे सहित उसे घर से निकाल दिया। एरोड्रम थाने पर रीना पंवार अपने डेढ़ माह के बच्चे के साथ गुरुवार शाम पहुंची। परिवार के अनुसार, रीना की शादी डेढ़ साल पहले रितेश से हुई थी। रीना बिहार की रहने वाली है। दोनों का परिचय परिवार के माध्यम से हुआ था, जिसके बाद अंतरराज्यीय विवाह हुआ। उस समय परिवार को बौद्ध धर्म को लेकर कोई आपत्ति नहीं थी। लेकिन 14 अप्रैल को रीना द्वारा बाबा साहब अंबेडकर का स्टेटस लगाने पर एक ननद ने आपत्ति जताई और उसे हटाने को कहा। इस बात पर विवाद बढ़ गया। आरोप है कि पति रितेश पंवार ने अपशब्द कहे और तलाक देने की धमकी दी। शिकायत लेकर रीना अपने बच्चे के साथ थाने पहुंची। बताया गया कि ड्यूटी पर मौजूद हेड कॉन्स्टेबल मनोज ने उन्हें कोर्ट में केस करने की सलाह दी। बाद में टीआई तरुण बघेल ने परिवार की बातें सुनकर कारवाई का आश्वासन दिया।