सुनील पांडे ने कहा- जुनैद की परफॉर्मेंस प्रभावशाली लगी:राम संपत बोले- आमिर खान के साथ काम करने के लिए सच्चाई और मेहनत सबसे जरूरी है

फिल्म ‘एक दिन’ को लेकर डायरेक्टर सुनील पांडे और म्यूजिक कंपोजर राम संपत ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। दोनों ने बताया कि यह फिल्म उनके लिए सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक भावनात्मक सफर है। सुनील के मुताबिक, उन्होंने ट्रेंड्स की बजाय कहानी की सच्चाई पर भरोसा किया, वहीं राम संपत ने इसे अपने करियर का माइलस्टोन बताया। उन्होंने कहा कि आमिर खान के साथ काम करने के लिए सच्चाई और मेहनत सबसे जरूरी है। फिल्म को आमिर खान प्रोड्यूस की है, जबकि जुनैद खान और साईं पल्लवी इसमें लीड रोल में हैं। सवाल: सुनील, आपके लिए फिल्म ‘एक दिन’ क्या है? जवाब/ सुनील पांडे: ‘एक दिन’ मेरे लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि एक एहसास है। यह एक ऐसी भावना है जिसे शब्दों में पूरी तरह बयां करना मुश्किल है। जब मैंने इस कहानी को पहली बार पढ़ा, तभी से यह मेरे अंदर बस गई। यह फिल्म मेरे दिल के बहुत करीब है और मेरे लिए एक बहुत बड़ी चीज है। मैं इसे सिर्फ कहानी या प्रोजेक्ट की तरह नहीं देखता, बल्कि एक अनुभव की तरह महसूस करता हूं। सवाल: राम, आपके लिए ‘एक दिन’ क्या मायने रखती है? जवाब/ राम संपत: मेरे लिए ‘एक दिन’ एक खास सफर और एक महत्वपूर्ण मुकाम है। मैंने अपने करियर में पहली बार किसी लव स्टोरी पर काम किया है, इसलिए इसका महत्व और बढ़ जाता है। सवाल: इस फिल्म से आपको एक कंपोजर के तौर पर क्या हासिल हुआ? जवाब/ राम संपत: हर संगीतकार का सपना होता है कि उसे एक खूबसूरत प्रेम कहानी पर काम करने का मौका मिले। इस फिल्म में मुझे वो मौका मिला और मैंने अपनी कई इच्छाएं पूरी कीं। हमारे देश के महान संगीतकार जैसे पंचम दा, मदन मोहन या नौशाद साहब की पहचान उनकी लव स्टोरीज के संगीत से बनी है। उसी तरह, ‘एक दिन’ मेरे लिए एक माइलस्टोन की तरह है, जहां मैंने अपने अंदर के कई संगीत भावों को खुलकर व्यक्त किया। सवाल: सुनील, आज के एक्शन और मसाला दौर में इतना सॉफ्ट और मासूम किरदार दिखाना रिस्क नहीं था? जवाब/ सुनील पांडे: देखिए, मेरे लिए सबसे जरूरी चीज कहानी की सच्चाई है। जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी, तो मुझे यह कहानी बहुत ईमानदार और खूबसूरत लगी। उस समय मैंने यह नहीं सोचा कि आजकल क्या ट्रेंड चल रहा है या दर्शक क्या ज्यादा देखना पसंद कर रहे हैं। सवाल: क्या आपने मार्केट ट्रेंड को बिल्कुल नजरअंदाज किया? जवाब/ सुनील पांडे: हां, बिल्कुल। फिल्म बनाते समय मेरा पूरा फोकस इस बात पर था कि जो कहानी मुझे कागज पर पसंद आई, क्या मैं उसे उसी ईमानदारी से स्क्रीन पर ला पा रहा हूं या नहीं। ट्रेंड्स बदलते रहते हैं, लेकिन अच्छी कहानी हमेशा असर छोड़ती है। सवाल: जुनैद को इस किरदार के लिए क्यों चुना? जवाब/ सुनील पांडे: जुनैद इस किरदार में बिल्कुल फिट बैठे। उनके अंदर वही सादगी और मासूमियत है, जो इस किरदार की जरूरत थी। उन्होंने जिस तरह से परफॉर्म किया, उसमें एक सच्चाई और ईमानदारी दिखती है, और मेरे लिए वही सबसे अहम था। सवाल: राम, फिल्म का संगीत इतना इमोशनल और साइलेंस में भी असरदार कैसे बना? जवाब/ राम संपत: हम जब भी संगीत बनाते हैं, तो सबसे पहले स्क्रिप्ट को समझते हैं। हमारा मकसद होता है कि संगीत कहानी के साथ जुड़ा हुआ लगे, अलग से नहीं। अगर म्यूजिक स्क्रीनप्ले के साथ मिलकर चलता है, तभी वह दिल तक पहुंचता है। सवाल: गानों को तैयार करने की प्रक्रिया कैसी रही? जवाब/ राम संपत: हमने हर गाने पर बहुत मेहनत की। एक-एक गाने के कई वर्जन बनाए, अलग-अलग धुनें और आइडियाज ट्राई किए। उसके बाद बैठकर यह तय किया कि कौन सा गाना सबसे सही लग रहा है। यह एक लंबी लेकिन बहुत संतोष देने वाली प्रक्रिया थी। सवाल: इरशाद कामिल के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब/ राम संपत: इरशाद कामिल जैसे लिरिसिस्ट के साथ काम करना बहुत खास होता है। वो उन भावनाओं को शब्द देते हैं, जिन्हें हम सीधे कह नहीं पाते। उनकी लिखी लाइनों में गहराई और सादगी दोनों होती है, जो इस फिल्म के म्यूजिक को और मजबूत बनाती है। सवाल: आज के दौर में 90 के दशक जैसा यादगार और दिल में बसने वाला संगीत बनाना कितना चुनौतीपूर्ण है? जवाब/ राम संपत: सच कहूं तो हम ट्रेंड्स के बारे में ज्यादा नहीं सोचते। आजकल बहुत सारा म्यूजिक ट्रेंड और स्टाइल के हिसाब से बनता है, लेकिन हम ईमानदारी और आत्मा वाले संगीत में विश्वास रखते हैं। सवाल: फिल्म के संगीत में सादगी क्यों रखी गई? जवाब/ राम संपत: हमने जानबूझकर संगीत को सरल रखा, ताकि कहानी और भावनाएं साफ-साफ सामने आएं। कई बार ऐसा हुआ कि मैं कुछ म्यूजिकल एलिमेंट जोड़ता था और सुनील उसे हटा देते थे। आखिर में जो बना, वह बहुत ही सादा लेकिन गहराई से भरा हुआ संगीत है, जैसे सिर्फ पियानो या गिटार के साथ। सवाल: सुनील, राम के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब/ सुनील पांडे: राम सिर्फ एक बेहतरीन म्यूजिशियन ही नहीं, बल्कि एक शानदार स्टोरीटेलर भी हैं। मैंने उन्हें कभी यह नहीं बताया कि मुझे कैसा म्यूजिक चाहिए। मैंने सिर्फ कहानी, किरदार और सिचुएशन के बारे में बात की, और उन्होंने उसे अपने तरीके से संगीत में ढाल दिया। उनकी यही समझ इस फिल्म के म्यूजिक को खास बनाती है। सवाल: आप दोनों के बीच काम करते समय तालमेल कैसे बनता है? जवाब/ राम संपत: हम एक-दूसरे की पसंद और काम करने के तरीके को समझते हैं। जैसे सुनील अलग-अलग समय पर अलग तरह का संगीत सुनते हैं। कुछ गाने वो रात में सुनना पसंद करते हैं, कुछ दिन में। इन छोटी-छोटी बातों को समझकर हम म्यूजिक को और बेहतर बना पाते हैं। सवाल: आमिर खान के साथ काम करना कितना आसान या मुश्किल है? जवाब/ सुनील पांडे: वो बहुत समझदार और सहयोगी हैं। अगर आप अपनी बात सही तरीके से रखते हैं और उसमें दम होता है, तो वो जरूर सुनते हैं और मान भी जाते हैं। सवाल: राम, आप का आमिर के साथ काम करने का असली अनुभव क्या रहा? जवाब/ राम संपत: अगर आप मेहनती हैं और ईमानदारी से काम करते हैं, तो उनके
भारत का गलत नक्शा दिखाने पर नेपाली एयरलाइन का माफीनामा:खेसारी लाल ने ली फिरकी, कहा- अंग्रेजी समझ नहीं आई; पहले आलोचना की थी

हाल ही में नेपाल के एयरलाइन्स द्वारा भारत का गलत नक्शा दिखाया गया था, जिसके बाद एक्टर और राजनेता खेसारी लाल यादव ने एयरलाइन्स की आलोचना की थी। अब एयरलाइन द्वारा इस गलती पर माफी मांग ली है, जिसमें एक्टर ने फिरकी ली है। खेसारी लाल यादव ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एयरलाइन के माफीनामे को री-पोस्ट कर लिखा है, ‘अंग्रेजी तो नहीं समझ पाए इतना भारी, लेकिन लगा की माफी मांग लिया गया है। हमार भाई।’ गलत नक्शा दिखाने पर एक्टर ने की एयरलाइन की आलोचना गुरुवार को नेपाल के एयरलाइन्स ने एक पोस्ट में भारत का गलत नक्शा दिखाया था। इसके बाद खेसारी लाल यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘कोई बता पाएगा कि क्या सोच कर नेपाल एयरलाइंस ने भारत के नक्शे में ऐसी छेड़छाड़ की है और वो भी जम्मू कश्मीर को लेकर? ये मामूली बात नहीं है, जानबूझकर किया हुआ काम लगता हैं। इसको चिढ़ाना बोलते हैं।’ कुछ देर बाद एयरलाइन्स द्वारा पोस्ट डिलीट कर दी गई। इस पर एक्टर ने आगे लिखा, ‘माय डियर नेपाल एयरलाइन्स, पोस्ट डिलीट करके भाग जाने से काम नहीं चलेगा। जवाब देना पड़ेगा। माफी मांगिए या फिर मंशा बताइए की क्यों ऐसा किए? इतना शांत और अच्छा पड़ोसी आखिर किस मजबूरी में ऐसा गलती करने लगा?’ नेपाल एयरलाइन्स ने मांगी माफी कश्मीर की बॉर्डर को गलत तरह से दर्शाने के बाद नेपाल एयरलाइन्स ने पोस्ट डिलीट की और फिर माफी मांगते हुए लिखा, हम हाल ही में अपने सोशल मीडिया चैनलों पर साझा किए गए नेटवर्क मैप में हुई गलती के लिए ईमानदारी से क्षमा प्रार्थी हैं। उस मानचित्र में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से संबंधित गंभीर मानचित्रण त्रुटियां थीं, जो नेपाल या नेपाल एयरलाइंस की आधिकारिक स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करती हैं।
शाही टोस्ट रेसिपी: अब सस्ती नहीं होगी बिकी हुई ब्रेड, ऐसी निकली मुगलई ‘शाही टोस्ट’, दूल्हा बनाए गए मेहमान पूछेंगे रेसिपी

30 अप्रैल 2026 को 13:18 IST पर अपडेट किया गया शाही टोस्ट रेसिपी: हमारे घर में बार-बार ब्रेड बेक किया जाता है, जिसे हम समझकर बनाते हैं। लेकिन आप इन बेडरे को कुछ आसान टिप्स फॉलो करके हलवाई से भी शानदार मिठाई बना सकते हैं। रॉयल स्लाइस या रॉयल टोस्ट एक मुगलई डेजर्ट है, जो अपने कुरकुरे स्वाद और मलाईदार रबड़ी के साथ खाया जाता है। आइए आपको बताते हैं इसे बनाने की रेसिपी के बारे में… अनुसरण करना : रॉयल टोस्ट बनाने के लिए कुछ सामग्री की आवश्यकता है- 5- 7 लाभ 800 मिली फुल क्रीम दूध 3/4 कप चीनी 4 से 6 देशी घी दो चुटकी इलायची पाउडर 10 से 15 केसर के दृश्य तुरंत कटे हुए बादाम, काजू, पिस्ता छवि: एआई सबसे पहले एक पाइथन में दूध को शौकीन और उसे लगातार भूखा रहना, जब तक वह फ्लोट न हो जाए। इसके बाद इसमें चीनी, केसर पाउडर और केसर प्लास्टर को मिलाया जाता है। छवि: एआई चाइनीज और केसर के अच्छे से मिक्स होने के बाद आपकी गाढ़ी रबड़ी तैयार होगी। इसके बाद अब चाशनी तैयार करना होगा। छवि: एआई चीनी और पानी के टुकड़ों में से एक अलग तालाब के लिए चाशनी। चाशनी को ज्यादा से ज्यादा गाढ़ी न होने दें, बस इसे डिस्प्ले करना चाहिए। छवि: एआई अब बॅन्डर के फ़्लोरिडा को डिज़ाइन किया गया, उसे ट्रायंगल के आकार में कट कर लें। तवे पर देसी घी मॅबेल ब्रेडर को दोनों तरफ से सोना और कुरकुरा होने तक सेकें। आप बेड पर डीडीपी भी मुफ्त में लगवा सकते हैं। छवि: एआई तली हुई बेडरे को चाशनी में डब्बेकर प्लेट पर रख दें। इसके बाद ऊपर से तैयार की गई रबरी को पेश किया गया। आखिरी स्टेप में खिलौने के खिलौने से बेड को गार्निश करें। आपका टेस्टी और हलवाई रॉयल टोस्ट बनकर तैयार है। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित : कीर्ति सोनी प्रकाशित 30 अप्रैल 2026 13:18 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)शाही टोस्ट रेसिपी(टी)शाही टुकड़ा रेसिपी(टी)ब्रेड डेज़र्ट रेसिपी(टी)आसान भारतीय मिठाइयाँ(टी)मुग़लई डेज़र्ट रेसिपी(टी)बची हुई ब्रेड रेसिपी(टी)रबड़ी मिठाई भारत(टी)त्वरित मिठाई डिश(टी)घर का बना डेज़र्ट रेसिपी(टी)भारतीय त्योहार मिठाई
जालंधर काउंटर इंटेलिजेंस ने पकड़ा ISI नेटवर्क:लाइव फुटेज जा रही थी पाकिस्तान, एक आरोपी गिरफ्तार; सिम, चीन में बना सोलर CCTV मिला

पंजाब पुलिस के जालंधर काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने ISI समर्थित जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस ऑपरेशन के दौरान फिरोजपुर निवासी सुखविंदर सिंह उर्फ सुखा को गिरफ्तार किया गया है, जिसे इस गिरोह का प्रमुख ऑपरेटिव बताया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि आरोपी और उसके सहयोगी सोलर पावर से चलने वाले सीसीटीवी कैमरे विभिन्न स्थानों पर लगा रहे थे। इन कैमरों के जरिए संवेदनशील स्थानों, खासकर सेना से जुड़े इलाकों की निगरानी की जा रही थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इन कैमरों में 4G कनेक्टिविटी लगी हुई थी, जिससे लाइव फुटेज मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स को भेजी जा रही थी। पुलिस ने कपूरथला से चीन निर्मित सोलर सीसीटीवी उपकरण भी बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल निगरानी के लिए किया जा रहा था। अमृतसर में किया गया केस दर्ज इस मामले में स्टेट स्पेशल आपरेशन सेल (SSOC), अमृतसर में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान और इसके पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए आगे की जांच कर रही है। पुलिस बोली-शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध पंजाब डीजीपी ने एक्स पर कहा कि वह जासूसी नेटवर्क को खत्म करने और राज्य में शांति व सुरक्षा बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। यह कार्रवाई राज्य की सुरक्षा के लिए एक अहम कदम मानी जा रही है, जिससे संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
नीमच में बड़े भाई ने छोटे भाई को मारा चाकू:युवक की मौत, आरोपी भी घायल; जमीनी विवाद में किया वार

नीमच जिले की जीरण तहसील के ग्राम पावड़ा खुर्द में जमीन विवाद को लेकर हुए झगड़े में एक बड़े भाई ने अपने छोटे भाई की चाकू मारकर हत्या कर दी। गंभीर रूप से घायल छोटे भाई ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। यह घटना चिंताखेड़ा चौकी क्षेत्र में सामने आई है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, पावड़ा खुर्द निवासी नरूलाल और उसके छोटे भाई भेरूलाल (30 वर्ष), पिता कचरूलाल मीणा के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। बुधवार रात करीब 10 बजे दोनों भाई घर पर थे। इसी दौरान किसी बात पर उनके बीच फिर से कहासुनी शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर बड़े भाई नरूलाल ने घर में रखा चाकू उठाकर भेरूलाल के पेट पर कई वार कर दिए। चाकू के गहरे घाव के कारण भेरूलाल मौके पर ही लहूलुहान होकर गिर पड़ा। परिजन उसे तुरंत जिला चिकित्सालय ले जाने लगे, लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। जिला चिकित्सालय पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना में आरोपी बड़ा भाई नरूलाल भी घायल हुआ है, जिसे उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की सूचना मिलते ही चिंताखेड़ा चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने मृतक के शव को पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में विवाद का कारण जमीन की पुरानी रंजिश सामने आई है। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
मुकेश खन्ना बोले- रणवीर सिंह के चेहरे पर नेगेटिविटी है:वो शक्तिमान के रोल के लिए सही नहीं; किलविश का रोल कर सकते हैं

एक्टर मुकेश खन्ना ने रणवीर सिंह को एक बार फिर ‘शक्तिमान’ के रोल के लिए सही नहीं बताया। उन्होंने कहा कि रणवीर के चेहरे पर “नेगेटिविटी” दिखती है, इसलिए वे उन्हें इस किरदार में नहीं देखना चाहते, हालांकि उनकी एक्टिंग की तारीफ की। ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ में रोल के लिए रणवीर सिंह को इन दिनों काफी सराहना मिल रही है। दोनों ही फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। वहीं हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में जब मुकेश खन्ना से पूछा गया कि ‘धुरंधर’ देखने के बाद रणवीर सिंह को लेकर क्या उनकी राय बदली है, तो उन्होंने कहा, “सब लोग मुझे मनाने में लगे हैं कि फिल्म चल गई, अब रणवीर बहुत बड़े एक्टर बन गए हैं, लेकिन मैं शक्तिमान के लिए बड़ा स्टार नहीं चाहता। मुझे उस रोल के लिए एक खास इमेज चाहिए, जो मुझे रणवीर में नहीं दिखती। इसलिए मैंने इसका विरोध किया। मैं उनकी एक्टिंग के खिलाफ नहीं हूं।” किलविश के रोल के लिए सही बताया अपने विरोध की वजह बताते हुए खन्ना ने कहा, “वो (रणवीर सिंह) अलाउद्दीन खिलजी जैसा किरदार कर सकता है, ‘गली बॉय’ कर चुका है, ‘धुरंधर’ भी बहुत अच्छा किया है, मैंने उसकी तारीफ भी की, लेकिन मेरे लिए शक्तिमान बनने के लिए सिर्फ अच्छा एक्टर होना काफी नहीं है, एक खास चेहरा भी चाहिए। वो चेहरा शक्तिमान पर सूट करना चाहिए। मेरा विरोध सिर्फ इतना है कि उसकी आंखों में शक्तिमान दिखना चाहिए। जब वो खड़ा हो, तो उसमें कोई चालाकी नहीं दिखनी चाहिए। मैं रणवीर को किलविश (विलेन) के रोल में साइन कर सकता हूं, लेकिन शक्तिमान के लिए नहीं। उसके चेहरे पर नेगेटिविटी दिखती है, पॉजिटिविटी नहीं।” वहीं शक्तिमान पर फिल्म बनने को लेकर उन्होंने कहा, “फिल्म आनी चाहिए, जरूर आनी चाहिए। रुकावट के लिए खेद है। सब जानते हैं कि दिक्कत क्या है और मेरा विरोध क्या है।”
पन्ना में दो बाइकों की भिड़ंत, अतिथि शिक्षक की मौत:स्कूल जाते समय हुआ हादसा, दो अन्य गंभीर रूप से घायल

पन्ना के मोहन्द्रा-सिमरिया मार्ग पर गुरुवार को एक सड़क दुर्घटना में एक अतिथि शिक्षक की मौत हो गई। इस हादसे में दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के अनुसार, ग्राम हथकुरी निवासी हरि प्रभात गर्ग (मोनू गर्ग) अपनी बाइक से सुनवानी स्कूल में अध्यापन कार्य के लिए जा रहे थे। पडरिया के पास मोहन्द्रा-सिमरिया मार्ग पर सिमरिया की ओर से आ रही एक तेज रफ्तार बाइक ने उन्हें सामने से टक्कर मार दी। दो बाइकों की भिड़ंत में शिक्षक की मौत टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों मोटरसाइकिलें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। हरि प्रभात गर्ग की मौके पर ही मौत हो गई। दूसरी बाइक पर सवार पुष्पेंद्र चौधरी और एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने पीएम के लिए भेजा शव स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तत्काल पवई स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। पवई के बीएमओ डॉ. विवेक तिवारी ने बताया कि प्राथमिक उपचार के बाद घायलों की नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। मृतक अतिथि शिक्षक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस ने घटना का संज्ञान लेते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।
आम खाने का सही तरीका क्या है? जानिए गर्मियों में आम खाते समय किन बातों का रखें ध्यान, वरना बढ़ सकती है परेशानी!

होमफोटोलाइफ़फूड आम खाने का सही तरीका क्या है? गर्मियों में आम खाते समय किन बातों का रखें ध्यान Last Updated:April 30, 2026, 12:40 IST How to eat mango properly: आम गर्मियों का सबसे पसंदीदा फल है, लेकिन इसे सही तरीके से खाना जरूरी है. आम को खाने से पहले पानी में भिगोना चाहिए ताकि इसकी गर्मी कम हो जाए. इसे भारी खाने के तुरंत बाद नहीं खाना चाहिए, इससे पाचन खराब हो सकता है. दही, छाछ या पुदीना के साथ खाने से आम का असर संतुलित रहता है. ज्यादा आम खाने से बचें और हमेशा संतुलित मात्रा में ही सेवन करें. How to eat mango properly: जैसे ही गर्मी शुरू होती है, बाजार में चारों तरफ पीले, रसीले और मीठे आम नजर आने लगते हैं. आम सिर्फ एक फल नहीं बल्कि गर्मियों की पहचान बन जाता है. बच्चे हों या बड़े, हर किसी को आम का इंतजार रहता है. कोई इसे सीधे काटकर खाना पसंद करता है, तो कोई आम का शेक, आइसक्रीम या मिठाई बनाकर इसका मजा लेता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आम खाने का भी एक सही तरीका होता है. अगर इसे गलत तरीके से खाया जाए, तो यह शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है और पेट से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकता है. इसलिए जरूरी है कि आम का स्वाद लेने के साथ साथ उसके सही सेवन के तरीके को भी समझा जाए, ताकि आप बिना किसी परेशानी के इसका पूरा मजा उठा सकें. आम की तासीर और शरीर पर असर: आम की तासीर गर्म मानी जाती है. यही वजह है कि ज्यादा मात्रा में या गलत समय पर आम खाने से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है. कई लोगों को आम खाने के बाद मुंह में छाले, पेट में जलन, एसिडिटी या त्वचा पर रिएक्शन भी हो सकता है. इसका मतलब यह नहीं है कि आम नुकसानदायक है, बल्कि इसका सही तरीके से सेवन करना जरूरी है. अगर आप कुछ आसान बातों का ध्यान रखें, तो आम से मिलने वाले फायदे आसानी से मिल सकते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google आम को खाने से पहले भिगोना क्यों जरूरी है: आम खाने का सबसे जरूरी और पारंपरिक तरीका है इसे पानी में भिगोना. बाजार से आम लाने के बाद उसे सीधे खाने की बजाय कम से कम 30 मिनट से लेकर 2 घंटे तक साफ पानी में भिगोकर रखना चाहिए. इससे आम की अतिरिक्त गर्मी कम हो जाती है. साथ ही आम की सतह पर लगे केमिकल या गंदगी भी साफ हो जाती है. भिगोने से आम ज्यादा सुरक्षित और पचने में आसान हो जाता है. आम खाने का सही समय और तरीका: आम खाने का सही समय भी बहुत मायने रखता है. इसे भारी खाने के तुरंत बाद नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इससे पाचन धीमा हो सकता है और पेट फूलने की समस्या हो सकती है. आम को मिड स्नैक या खाने के कुछ समय बाद खाना ज्यादा बेहतर होता है. इसके अलावा आम को दही, पुदीना या छाछ जैसे ठंडे पदार्थों के साथ खाने से इसकी गर्मी संतुलित हो जाती है और पाचन भी आसान हो जाता है. ज्यादा आम खाने से हो सकती है परेशानी: आम स्वाद में इतना अच्छा होता है कि लोग इसे ज्यादा मात्रा में खा लेते हैं, लेकिन यही गलती नुकसान पहुंचा सकती है. ज्यादा आम खाने से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है और पेट खराब हो सकता है. इसलिए हमेशा संतुलन बनाए रखना जरूरी है. दिन में एक या दो आम खाना सही माना जाता है. सही आम कैसे पहचानें: आजकल बाजार में कई बार केमिकल से पकाए गए आम भी मिलते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. ऐसे में कोशिश करें कि प्राकृतिक तरीके से पके हुए आम ही खरीदें. आम को पानी में डालकर भी जांच सकते हैं, प्राकृतिक आम आमतौर पर पानी में डूब जाते हैं, जबकि केमिकल से पके आम ऊपर तैर सकते हैं. इसके अलावा बहुत ज्यादा चमकदार या एकदम पीले रंग के आम से भी थोड़ा सावधान रहना चाहिए. आम के साथ क्या खाएं और क्या नहीं: आम को दूध के साथ मिलाकर शेक बनाना ठीक है, लेकिन ज्यादा भारी और मसालेदार खाने के साथ आम खाना सही नहीं माना जाता. इससे पाचन पर असर पड़ सकता है. वहीं अगर आप आम को हल्के खाने या स्नैक के तौर पर लेते हैं, तो यह ज्यादा फायदेमंद होता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : April 30, 2026, 12:40 IST
Schools will teach parents to recognize changing behavior in children

Hindi News Career Schools Will Teach Parents To Recognize Changing Behavior In Children नई दिल्ली9 मिनट पहले कॉपी लिंक स्कूलों में बच्चों के व्यवहार में बदलाव, एंग्जायटी को पहचानने के लिए पैरेंट्स को ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही सोशल मीडिया के जोखिम, गेमिंग एडिक्शन व स्क्रीन टाइम मैनेजमेंट पर गाइडेंस दी जाएगी। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने शिक्षा की पारंपरिक परिभाषा को बदलते हुए क्रांतिकारी कदम उठाया है। सत्र 2026-27 के लिए बोर्ड ने अपना नया ‘पैरेंटिंग कैलेंडर’ लॉन्च किया है, जिसका मकसद अभिभावकों को पीटीएम (पैरेंट-टीचर मीटिंग) के महज औपचारिक दर्शक से बदलकर बच्चे के विकास में एक ‘सक्रिय भागीदार’ बनाना है। यह पहल नई शिक्षा नीति के उस विजन का हिस्सा है, जहां पढ़ाई का मतलब सिर्फ रटना और बेहतर अंक लाना नहीं, बल्कि बच्चे का मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास भी है। जानिए महत्वपूर्ण पहलू… सपोर्ट ग्रुप बनाएंगे ताकि पैरेंट्स एक-दूसरे से सीख सकें, बच्चों के लिए इवेंट्स भी कैलेंडर में पहली बार उन मुद्दों को स्कूल सिस्टम का हिस्सा बनाया गया है, जिन्हें अब तक ‘घर का मुद्दा’ माना जाता था। बच्चों के व्यवहार में बदलाव, एंग्जायटी को पहचानने के लिए पैरेंट्स को ट्रेनिंग दी जाएगी। एनसीबी के साथ नशे के खिलाफ जागरूकता के लिए अध्याय जोड़ा गया है। सोशल मीडिया के जोखिम, गेमिंग एडिक्शन व स्क्रीन टाइम मैनेजमेंट पर गाइडेंस दी जाएगी। नर्सरी से 12वीं तक हर उम्र के लिए अलग नुस्खा ’सीबीएसई ने इस कैलेंडर को बच्चों की उम्र के हिसाब से अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है। बाल वाटिका(नर्सरी से छोटी क्लास) – यहां फोकस बच्चे की आदतों, भावनात्मक विकास और स्क्रीन टाइम पर होगा। मिडिल क्लास – दोस्ती के प्रति रुझान, डिजिटल व्यवहार पर चर्चा होगी। सीनियर क्लास – 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए कॅरिअर की चिंता, बोर्ड परीक्षा का तनाव और लाइफ स्किल्स को प्राथमिकता दी गई है। पैरेंट्स से व्यवस्थित संवाद – स्कूलों में सिर्फ पीटीएम नहीं बल्कि व्यवस्थित संवाद होगा। नियमित वर्कशॉप में पैरेंट्स बच्चों का व्यवहार व मानसिक स्थिति समझना सीखेंगे। अनुभव साझा करने के लिए सपोर्ट ग्रुप बनेंगे। प्रोजेक्ट्स, ओपन हाउस जैसे इवेंट्स से पैरेंट्स व बच्यों के बीच ‘ऑफलाइन जुड़ाव’ बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। समस्या सुलझाने पर जोर – बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया स्क्रीन एडिक्शन व कॅरिअर का दबाव बच्चों को अकेला कर रहा है। ऐसे में स्कूल, टीचर और पैरेंट्स के बीच तालमेल जरूरी है। कैलेंडर से यह संदेश देने की कोशिश है कि जरूरत पड़ने पर तुरंत पैरेंट्स टोचर मीटिंग बुलाई जाए, ताकि समस्या को गंभीर होने से पहले सुलझाया जा सके। ‘4 आर’ का सिद्धांत – नया कैलेंडर ‘4आर’ के सिद्धांत पर बनाया गया है, जो माता-पिता व बच्चों के रिश्ते को नई गहराई देगा। रिफ्लेक्शन – परवरिश के तरीकों पर विचार करना । रीइंफोर्समेंट – सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देना । रिलेशनशिप – पैरेंट्स व बच्चे के बीच भरोसे का रिश्ता मजबूत करना। रिजॉइसिंग – बच्चे की छोटी-छोटी उपलब्धियों और साथ बिताए पलों का जश्न मनाना। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Schools will teach parents to recognize changing behavior in children

Hindi News Career Schools Will Teach Parents To Recognize Changing Behavior In Children नई दिल्ली9 मिनट पहले कॉपी लिंक स्कूलों में बच्चों के व्यवहार में बदलाव, एंग्जायटी को पहचानने के लिए पैरेंट्स को ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही सोशल मीडिया के जोखिम, गेमिंग एडिक्शन व स्क्रीन टाइम मैनेजमेंट पर गाइडेंस दी जाएगी। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने शिक्षा की पारंपरिक परिभाषा को बदलते हुए क्रांतिकारी कदम उठाया है। सत्र 2026-27 के लिए बोर्ड ने अपना नया ‘पैरेंटिंग कैलेंडर’ लॉन्च किया है, जिसका मकसद अभिभावकों को पीटीएम (पैरेंट-टीचर मीटिंग) के महज औपचारिक दर्शक से बदलकर बच्चे के विकास में एक ‘सक्रिय भागीदार’ बनाना है। यह पहल नई शिक्षा नीति के उस विजन का हिस्सा है, जहां पढ़ाई का मतलब सिर्फ रटना और बेहतर अंक लाना नहीं, बल्कि बच्चे का मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास भी है। जानिए महत्वपूर्ण पहलू… सपोर्ट ग्रुप बनाएंगे ताकि पैरेंट्स एक-दूसरे से सीख सकें, बच्चों के लिए इवेंट्स भी कैलेंडर में पहली बार उन मुद्दों को स्कूल सिस्टम का हिस्सा बनाया गया है, जिन्हें अब तक ‘घर का मुद्दा’ माना जाता था। बच्चों के व्यवहार में बदलाव, एंग्जायटी को पहचानने के लिए पैरेंट्स को ट्रेनिंग दी जाएगी। एनसीबी के साथ नशे के खिलाफ जागरूकता के लिए अध्याय जोड़ा गया है। सोशल मीडिया के जोखिम, गेमिंग एडिक्शन व स्क्रीन टाइम मैनेजमेंट पर गाइडेंस दी जाएगी। नर्सरी से 12वीं तक हर उम्र के लिए अलग नुस्खा ’सीबीएसई ने इस कैलेंडर को बच्चों की उम्र के हिसाब से अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है। बाल वाटिका(नर्सरी से छोटी क्लास) – यहां फोकस बच्चे की आदतों, भावनात्मक विकास और स्क्रीन टाइम पर होगा। मिडिल क्लास – दोस्ती के प्रति रुझान, डिजिटल व्यवहार पर चर्चा होगी। सीनियर क्लास – 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए कॅरिअर की चिंता, बोर्ड परीक्षा का तनाव और लाइफ स्किल्स को प्राथमिकता दी गई है। पैरेंट्स से व्यवस्थित संवाद – स्कूलों में सिर्फ पीटीएम नहीं बल्कि व्यवस्थित संवाद होगा। नियमित वर्कशॉप में पैरेंट्स बच्चों का व्यवहार व मानसिक स्थिति समझना सीखेंगे। अनुभव साझा करने के लिए सपोर्ट ग्रुप बनेंगे। प्रोजेक्ट्स, ओपन हाउस जैसे इवेंट्स से पैरेंट्स व बच्यों के बीच ‘ऑफलाइन जुड़ाव’ बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। समस्या सुलझाने पर जोर – बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया स्क्रीन एडिक्शन व कॅरिअर का दबाव बच्चों को अकेला कर रहा है। ऐसे में स्कूल, टीचर और पैरेंट्स के बीच तालमेल जरूरी है। कैलेंडर से यह संदेश देने की कोशिश है कि जरूरत पड़ने पर तुरंत पैरेंट्स टोचर मीटिंग बुलाई जाए, ताकि समस्या को गंभीर होने से पहले सुलझाया जा सके। ‘4 आर’ का सिद्धांत – नया कैलेंडर ‘4आर’ के सिद्धांत पर बनाया गया है, जो माता-पिता व बच्चों के रिश्ते को नई गहराई देगा। रिफ्लेक्शन – परवरिश के तरीकों पर विचार करना । रीइंफोर्समेंट – सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देना । रिलेशनशिप – पैरेंट्स व बच्चे के बीच भरोसे का रिश्ता मजबूत करना। रिजॉइसिंग – बच्चे की छोटी-छोटी उपलब्धियों और साथ बिताए पलों का जश्न मनाना। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔









