Rajasthan Royals Auction Controversy | Somani Group Alleges Bias

नई दिल्ली11 मिनट पहले कॉपी लिंक IPL फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स की नीलामी प्रक्रिया में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इसमें शामिल अमेरिकी कारोबारी काल सोमानी के नेतृत्व वाले सोमानी ग्रुप ने नीलामी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रुप ने मंगलवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपनी गहरी निराशा व्यक्त की है। उनका आरोप है कि अंतिम फैसला निष्पक्ष नहीं था और उन्हें समान अवसर (Level playing field) नहीं दिया गया। सोमानी ग्रुप का कहना है कि वे पिछले छह महीनों से इस रेस में सबसे आगे थे और उन्होंने कभी भी अपनी बोली वापस नहीं ली थी। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि सोमानी ग्रुप ने नाम वापस ले लिया है। हाल ही में दिग्गज उद्योगपति लक्ष्मी निवास मित्तल और उनके बेटे आदित्य मित्तल ने अदार पूनावाला के साथ मिलकर राजस्थान रॉयल्स की 93% हिस्सेदारी करीब 15,600 करोड़ रुपये ($1.65 बिलियन) में खरीद ली है। नई डील के अनुसार लक्ष्मी मित्तल का परिवार RR में लगभग 75% हिस्सेदारी रखेगा, जबकि अदार पूनावाला के पास 18% हिस्सा होगा। शेष 7% हिस्सेदारी पुराने निवेशक मनोज बडाले और अन्य के पास रहेगी। टीम के नए बोर्ड में लक्ष्मी मित्तल, आदित्य मित्तल, वनीषा मित्तल-भाटिया, अदार पूनावाला और मनोज बडाले शामिल होंगे। इस बड़े बदलाव के साथ राजस्थान रॉयल्स अब IPL की सबसे महंगी टीमों में से एक बन गई है। सोमानी ग्रुप का आरोप- प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी सोमानी ग्रुप (जिसमें वॉलमार्ट और फोर्ड ग्रुप के दिग्गज शामिल थे) का कहना है कि उनकी बोली $1.63 बिलियन की थी और वे डील क्लोज करने के लिए पूरी तरह तैयार थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पास पर्याप्त फंडिंग थी, फिर भी आखिरी वक्त पर उनकी बोली को दरकिनार कर दिया गया। ग्रुप के मुताबिक, इस तरह की बड़ी नीलामी में पारदर्शिता और ईमानदारी की कमी होना चिंताजनक है। सोमानी ग्रुप का स्टेटमेंट देखिए मौजूदा मालिकों ने डॉक्यूमेंटेशन में बताई कमी सूत्रों के मुताबिक, राजस्थान रॉयल्स के मौजूदा मालिकों (मनोज बडाले और अन्य) ने सोमानी ग्रुप की बोली में कुछ तकनीकी और दस्तावेजी कमियां पाई थीं। जांच के दौरान सोमानी ग्रुप के पेपर्स तय मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिसके कारण मित्तल ग्रुप की बोली को मंजूरी दी गई। हालांकि, सोमानी ग्रुप ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे छवि खराब करने की कोशिश बताया है। 2008 में चैंपियन बनी थी राजस्थान शेन वॉर्न की कप्तानी में राजस्थान रॉयल्स ने IPL का पहला सीजन 2008 में जीता था। उसके बाद से टीम सिर्फ एक बार 2022 में फाइनल में पहुंची है। तब गुजरात टाइटंस के खिलाफ फाइनल मुकाबले में उसे हार मिली। साल 2008 में पहली बार में ही राजस्थान रॉयल्स IPL चैंपियन बनी थी। उस समय शेन वार्न टीम के कप्तान थे। 2 साल के लिए बैन हुई थी RR राजस्थान रॉयल्स को 2015 में सामने आए स्पॉट-फिक्सिंग मामले की वजह से 2 साल के लिए बैन कर दिया गया था। जांच के बाद लोढ़ा समिति ने टीम के सह-मालिक राज कुंद्रा को सट्टेबाजी का दोषी पाया था। इसके कारण राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर किंग्स दोनों को 2016 और 2017 के आईपीएल सीजन से बाहर कर दिया गया। बाद में 2018 में राजस्थान रॉयल्स ने फिर से आईपीएल में वापसी की। ———————————————- राजस्थान रॉयल्स से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… RR ₹15,660 करोड़ में बिकी; मित्तल फैमिली ने पूनावाला के साथ मिलकर IPL की फ्रेंचाइजी खरीदी IPL फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स को दुनिया के नंबर वन स्टील कारोबारी लक्ष्मी निवास मित्तल और आदित्य मित्तल ने खरीद लिया है। सीरम इंस्टीट्यूट के मालिक अदार पूनावाला भी इसमें पार्टनर हैं। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
अनूठी परंपरा; मियाओ सिस्टर्स फेस्टिवल:रंग-बिरंगे चावलों से बयां होता है दिल का हाल, 'सिस्टर्स राइस' देकर युवतियों ने चुना हमसफर

तस्वीर थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक की है, जहां मियाओ समुदाय का प्रसिद्ध ‘मियाओ सिस्टर्स फेस्टिवल’ मनाया गया। इस दौरान आयोजित परेड में युवतियों ने अपनी सांस्कृतिक वेशभूषा और जटिल नक्काशी वाले भारी चांदी के आभूषण पहनकर हिस्सा लिया। यह मुख्य रूप से चीन का त्योहार है, जहां मियाओ समुदाय की सबसे अधिक आबादी है। इसके अलावा थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में भी यह त्योहार मनाया जाता है। इस दिन युवा लड़के-लड़कियां पारंपरिक गीत गाकर, वाद्ययंत्र बजाकर और नृत्य के जरिए एक-दूसरे से मिलते हैं और अपना जीवनसाथी चुनते हैं। इस त्योहार की सबसे खास परंपरा ‘सिस्टर्स राइस’ है। इस अवसर पर पेड़ों की पत्तियों और फूलों का उपयोग करके रंग-बिरंगे चावल पकाते हैं। युवतियां इन खास चावलों को रूमालों या टोकरियों में रखकर युवकों को भेंट करती हैं। चावलों के साथ दिए गए अन्य छोटे प्रतीक युवाओं के बीच प्यार, इनकार या दोस्ती के संदेश को दर्शाते हैं। मियाओ बहनों के भोजन उत्सव का इतिहास और किंवदंती लोककथाओं के अनुसार, एक समय की बात है, एक बूढ़े व्यक्ति और उसकी पत्नी की तीन सुंदर बेटियाँ थीं। एक दिन, जब वे नदी किनारे खेल रही थीं, तो लड़कियों को अकेलापन और प्रेम की पीड़ा महसूस हुई। दाढ़ी वाले देवता, झांग गुओलाओ, ने लड़कियों की आत्मा में प्रवेश किया और उन्हें झींगा, मछली और अन्य विशेष सामग्रियों से भरे हुए पाँच रंगों के चिपचिपे चावल के रोल बनाने के लिए कहा। जब युवक पहाड़ से नीचे आए, तो सुंदर लड़कियों ने उन्हें चावल भेंट किए और वे उनसे प्रेम करने लगे। चीन का सिस्टर्स मील फेस्टिवल मियाओ संस्कृति में गहराई से जुड़ा हुआ है, जो सैकड़ों साल पुराना है। मूल रूप से यह एक प्रेम-प्रसंग की रस्म के रूप में शुरू हुआ था, जिसमें युवा मियाओ लड़कियां विशेष भोजन तैयार करती थीं और शादी के इच्छुक दूल्हों को भेंट करती थीं। रंगीन रेशम में लिपटे और प्रतीकात्मक सजावट से सजे ये भोजन, एक महिला की अपने प्रेमी के प्रति भावनाओं के बारे में गुप्त संदेश देते थे। चावल के पैकेट के अंदर अलग-अलग वस्तुएं अलग-अलग भावनाओं को दर्शाती थीं,दो चॉपस्टिक रुचि का संकेत देती थीं, जबकि एक मिर्च अस्वीकृति का प्रतीक थी।
शाहरुख-दीपिका बीच पर रोमांटिक डांस करते दिखे:साउथ अफ्रीका में फिल्म ‘किंग’ की शूटिंग जारी; अकेले शूट करते दिखे शाहरुख

शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण की जोड़ी अपनी अगली फिल्म ‘किंग’ की शूटिंग के लिए साउथ अफ्रीका में हैं। केप टाउन के एक बीच से शाहरुख और दीपिका का एक डांस सीक्वेंस शूट करते हुए वीडियो सामने आया है। वीडियो में दोनों सनसेट के समय समुद्र किनारे रोमांटिक अंदाज में नजर आ रहे हैं। वीडियो में शाहरुख और दीपिका हल्के रंग के ब्रीजी आउटफिट्स पहने हुए हैं। वे एक-दूसरे की तरफ बढ़ते हुए अपनी कोरियोग्राफी पूरी कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों ने इस डांस स्टेप को परफेक्ट बनाने के लिए दो-तीन बार टेक लिए। हालांकि बीच का वह हिस्सा आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया था, लेकिन फिर भी वहां शाहरुख को देखने के लिए भीड़ मौजूद रही। एड शीरन के गाने पर डांस की चर्चा शाहरुख और दीपिका पिछले हफ्ते ही शूटिंग शुरू करने के लिए साउथ अफ्रीका पहुंचे थे। उन्होंने इस शेड्यूल की शुरुआत एक गाने की शूटिंग के साथ की है। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक यह गाना इंटरनेशनल सिंगर एड शीरन का हो सकता है। शाहरुख को वहां अकेले कार चलाते हुए भी एक सीन शूट करते देखा गया है। बताया जा रहा है कि फिल्म का एक बड़ा क्लाइमैक्स हिस्सा भी केप टाउन में ही शूट किया जाना है। बॉक्स ऑफिस पर हॉलीवुड से मुकाबला फिल्म ‘किंग’ 24 दिसंबर, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। यह साल 2026 की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक मानी जा रही है। इसकी रिलीज के ठीक एक हफ्ते पहले हॉलीवुड की बड़ी फिल्में ‘एवेंजर्स: डूम्सडे’ (Avengers: Doomsday) और ‘ड्यून: पार्ट थ्री’ (Dune: Part Three) रिलीज हो रही हैं। साथ ही ‘जुमांजी 3’ भी इसी दौरान आने वाली है। ऐसे में बॉक्स ऑफिस पर एक बहुत बड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
sunil pal react on huiliation claims on kapil sharma show, after samay raina jokes about his bad breath

3 मिनट पहले कॉपी लिंक इंडियाज गॉट लेटेंट कंट्रोवर्सी के बाद समय रैना और शो की जमकर निंदा करने के बाद कॉमेडियन सुनील पाल हाल ही में द ग्रेट इंडियन कपिल शो में पहुंचे, जहां समय रैना बतौर गेस्ट पहुंचे थे। शो में समय रैना ने सुनील पाल पर कई जोक्स किए और एक बार तो ये तक कह दिया कि आप ब्रश क्यों नहीं करते। इसके अलावा समय ने ये भी कहा कि उन्होंने सुनील पाल के सोशल मीडिया में कमेंट में पड़ने वाली गालियों से ही गाली सीखी है। शो के क्लिप्स सामने आने के बाद कई फैंस ने भी इसे सीनियर कॉमेडियन की बेइज्जती कहा। हालांकि अब सुनील पाल ने कहा है कि उन्हें इस पर कोई नाराजगी नहीं है। बेइज्जती होने के दावे को खारिज करते हुए सुनील पाल ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा है, ‘मैं उसको बेइज्जती नहीं मानता हूं क्योंकि वो कॉमेडी शओ है और कमेडी शो में टांग खिंचाई होती रहती है। अगर सामने आ जाए कोई तो ऐसे मारने काटने तो नहीं दोड़ेंगे, ऐसा तो कोई मन मुटाव नहीं है।’ आगे सुनील पाल ने कहा, ‘लोग एक-दूसरे पर जोक्स बनाते हैं। मैंने उस पर पंचलाइन बनाई और उसने भी वही किया। अगर कोई सीरियस सब्जेक्ट होता या ये कोई सीरियस शो होता, हमें शिकायत करने का हक भी होता। यहां तक कि शाहरुख खान जैसे भी ऐसे शोज में मजाक का मुद्दा बन जाते हैं। तो मुझे कोई शिकायत नहीं है।’ बता दें कि हाल ही में समय रैना और रणवीर अलाहाबादिया, द ग्रेट इंडियन कपिल शो में पहुंचे थे। शो के एक सेगमेंट में सुनील पाल को भी बुलाया गया था। सुनील के आते ही कपिल शर्मा ने कहा, ये जब भी आते हैं तो कहते हैं, मैं सुनील पाल, कॉमेडी का लाल और यह समय को कॉमेडी का आतंकवादी कहते हैं। ऐसा कौन सा आपने इनको मुंह से ग्रेनेड फेंकते देखा लिया है? कुछ विचार व्यक्त करें। इस पर सुनील पाल ने कहा, ‘कपिल भाई, अगर ये मुंह से ग्रेनेड मार देते तो अच्छा था, लेकिन जो ये मारते हैं वो सहा नहीं जाता। जो समझ में नहीं आता वो समाज में नहीं आता और जो समाज में नहीं आता, वो तो आतंकवादी ही होता है ना?’ जवाब देते हुए समय ने कहा, ‘इनको मुझसे इतनी ही दिक्कत है कि मैं क्या कहूं, मुंह से ग्रेनेड मारता हूं, मैं क्या बोलूं, बताइए जो भी दिक्कत है।’ समय ने आगे कहा, ‘मैं मेले में परफॉर्म नहीं करता हूं, मैं उल्टी-सीधी बातें करता हूं। मुझे आपसे कोई दिक्कत नहीं सर, बस एक ही है, आप ब्रश क्यों नहीं करते हो यार?’ इसके बाद सुनील ने भी उसी लहजे में जवाब देते हुए कहा कि ब्रश करने का जमाना चला गया, मैं पॉलिश करके आया हूं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
sunil pal react on huiliation claims on kapil sharma show, after samay raina jokes about his bad breath

25 मिनट पहले कॉपी लिंक इंडियाज गॉट लेटेंट कंट्रोवर्सी के बाद समय रैना और शो की जमकर निंदा करने के बाद कॉमेडियन सुनील पाल हाल ही में द ग्रेट इंडियन कपिल शो में पहुंचे, जहां समय रैना बतौर गेस्ट पहुंचे थे। शो में समय रैना ने सुनील पाल पर कई जोक्स किए और एक बार तो ये तक कह दिया कि आप ब्रश क्यों नहीं करते। इसके अलावा समय ने ये भी कहा कि उन्होंने सुनील पाल के सोशल मीडिया में कमेंट में पड़ने वाली गालियों से ही गाली सीखी है। शो के क्लिप्स सामने आने के बाद कई फैंस ने भी इसे सीनियर कॉमेडियन की बेइज्जती कहा। हालांकि अब सुनील पाल ने कहा है कि उन्हें इस पर कोई नाराजगी नहीं है। बेइज्जती होने के दावे को खारिज करते हुए सुनील पाल ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा है, ‘मैं उसको बेइज्जती नहीं मानता हूं क्योंकि वो कॉमेडी शओ है और कमेडी शो में टांग खिंचाई होती रहती है। अगर सामने आ जाए कोई तो ऐसे मारने काटने तो नहीं दोड़ेंगे, ऐसा तो कोई मन मुटाव नहीं है।’ आगे सुनील पाल ने कहा, ‘लोग एक-दूसरे पर जोक्स बनाते हैं। मैंने उस पर पंचलाइन बनाई और उसने भी वही किया। अगर कोई सीरियस सब्जेक्ट होता या ये कोई सीरियस शो होता, हमें शिकायत करने का हक भी होता। यहां तक कि शाहरुख खान जैसे भी ऐसे शोज में मजाक का मुद्दा बन जाते हैं। तो मुझे कोई शिकायत नहीं है।’ बता दें कि हाल ही में समय रैना और रणवीर अलाहाबादिया, द ग्रेट इंडियन कपिल शो में पहुंचे थे। शो के एक सेगमेंट में सुनील पाल को भी बुलाया गया था। सुनील के आते ही कपिल शर्मा ने कहा, ये जब भी आते हैं तो कहते हैं, मैं सुनील पाल, कॉमेडी का लाल और यह समय को कॉमेडी का आतंकवादी कहते हैं। ऐसा कौन सा आपने इनको मुंह से ग्रेनेड फेंकते देखा लिया है? कुछ विचार व्यक्त करें। इस पर सुनील पाल ने कहा, ‘कपिल भाई, अगर ये मुंह से ग्रेनेड मार देते तो अच्छा था, लेकिन जो ये मारते हैं वो सहा नहीं जाता। जो समझ में नहीं आता वो समाज में नहीं आता और जो समाज में नहीं आता, वो तो आतंकवादी ही होता है ना?’ जवाब देते हुए समय ने कहा, ‘इनको मुझसे इतनी ही दिक्कत है कि मैं क्या कहूं, मुंह से ग्रेनेड मारता हूं, मैं क्या बोलूं, बताइए जो भी दिक्कत है।’ समय ने आगे कहा, ‘मैं मेले में परफॉर्म नहीं करता हूं, मैं उल्टी-सीधी बातें करता हूं। मुझे आपसे कोई दिक्कत नहीं सर, बस एक ही है, आप ब्रश क्यों नहीं करते हो यार?’ इसके बाद सुनील ने भी उसी लहजे में जवाब देते हुए कहा कि ब्रश करने का जमाना चला गया, मैं पॉलिश करके आया हूं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
अप्रैल में रसोई गैस की डिमांड 16% घटी:जेट फ्यूल की मांग भी कम हुई, अमेरिकी-इजराइल और ईरान जंग का असर

भारत में कुकिंग गैस (LPG) की मांग में अप्रैल में गिरावट आई है। अमेरिकी-इजराइल और ईरान में जारी संघर्ष और तनाव के कारण सप्लाई बाधित हुई है, जिसका सीधा असर भारतीय रसोई और कमर्शियल सेक्टर पर पड़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में LPG की खपत 16.16% कम होकर 2.2 मिलियन टन रह गई है, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 2.62 मिलियन टन थी। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के डेटा के अनुसार, मार्च महीने (2.379 मिलियन टन) के मुकाबले भी अप्रैल में गैस की बिक्री में कमी आई है। सप्लाई कम होने के चलते सरकार को होटलों और इंडस्ट्रीज के लिए दी जाने वाली कमर्शियल सप्लाई में कटौती करनी पड़ी है ताकि घरों में रसोई गैस की कमी न हो। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से सप्लाई रुकी भारत अपनी जरूरत का करीब 60% LPG आयात करता है। इसका बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते भारत आता है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और अमेरिकी हमलों के बाद यह समुद्री रास्ता लगभग बंद हो गया है। घरों में दो रिफिल के बीच समय बढ़ाया गया इससे पहले सरकार ने घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के लिए 25 दिन का लॉक-इन पीरियड किया था (यानी एक सिलेंडर मिलने के 21 दिन बाद ही दूसरा बुक होगा)। वहीं ग्रामीण इलाकों के लिए सिलेंडर बुकिंग का गैप बढ़ाकर 45 दिन किया गया। 1 मई को कॉमर्शियल सिलेंडर 994 रुपए तक महंगा किया इससे पहले 1 मई को कॉमर्शियल सिलेंडर 994 रुपए तक महंगा हो गया था। दिल्ली में ये 3071.50 रुपए में मिल रहा है। 5 किलो वाले फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) सिलेंडर की कीमतों में 261 रुपए का इजाफा किया गया था। इस बढ़ोतरी के बाद अब ‘छोटू’ सिलेंडर की रिफिल कीमत 813.50 रुपए हो गई है। हवाई ईंधन (ATF) की मांग में भी गिरावट खाड़ी देशों में युद्ध जैसे हालात के कारण कई देशों ने अपना एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) बंद कर दिया था। इसकी वजह से कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हुईं या उनके रूट बदले गए। इसका सीधा असर एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट फ्यूल की खपत पर पड़ा। अप्रैल में जेट फ्यूल की मांग 1.37% गिरकर 761,000 टन रह गई, जो मार्च में 807,000 टन थी। डीजल-पेट्रोल मांग भी बढ़ी अप्रैल में डीजल की बिक्री में मामूली 0.25% की ही बढ़त हुई और यह 8.282 मिलियन टन रही। मार्च में डीजल की डिमांड 8.1% की रफ्तार से बढ़ी थी। वहीं, पेट्रोल की बिक्री में अप्रैल में 6.36% की ग्रोथ देखी गई, जो मार्च की 7.6% ग्रोथ से कम है।
Sabarimala Reference Women Entry LIVE Update; Muslim Dawoodi Bohra Parsi – Supreme Court

Hindi News National Sabarimala Reference Women Entry LIVE Update; Muslim Dawoodi Bohra Parsi Supreme Court | CJI Surya Kant नई दिल्ली11 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (जनहित याचिका) अब प्राइवेट इंटरेस्ट और पब्लिसिटी इंटरेस्ट, पैसा इंटरेस्ट लिटिगेशन और पॉलिटिकल इंटरेस्ट लिटिगेशन बन गई हैं। यह कमेंट नौ जजों की संविधान बेंच ने केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान किया। कोर्ट ने इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन के 2006 के PIL के मकसद पर सवाल उठाया, जिसमें केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर रोक को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि PIL कानून की प्रोसेस का गलत इस्तेमाल है और एसोसिएशन को ऐसी PIL फाइल करने के बजाय बार और अपने युवा सदस्यों की भलाई के लिए काम करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में धार्मिक जगहों पर महिलाओं के साथ भेदभाव और अलग-अलग धर्मों में धार्मिक आजादी के दायरे से जुड़ी याचिकाओं पर 11वें दिन की सुनवाई चल रही है। सितंबर 2018 में 5 जजों की संविधान बेंच ने 4:1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए सबरीमाला अयप्पा मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक हटा दी थी। तब कोर्ट ने कहा था कि सदियों पुरानी हिंदू धार्मिक प्रथा गैर-कानूनी और असंवैधानिक है। जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के कमेंट एसोसिएशन के वकील ने दलील दी कि PIL जून 2006 में छपे चार अखबारों के आर्टिकल पर आधारित थी। इस पर CJI ने कहा- इसे सीधे खारिज कर देना चाहिए था। यह आर्टिकल जनहित याचिका फाइल करने का कारण कैसे बताता है। PIL फाइल करने के लिए आर्टिकल लिखवाना आसान है। पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन अब प्राइवेट इंटरेस्ट लिटिगेशन, पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन, पैसा इंटरेस्ट लिटिगेशन और पॉलिटिकल इंटरेस्ट लिटिगेशन बन गई हैं। सभी को PIL कहा जाता है, लेकिन हम सिर्फ असली PIL पर ही सुनवाई करते हैं। CJI को रोज सैकड़ों चिट्ठियां मिलती हैं, जिनमें सवाल किया जाता है कि क्या उन सभी को PIL में बदला जा सकता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Sabarimala Reference Women Entry LIVE Update; Muslim Dawoodi Bohra Parsi – Supreme Court

Hindi News National Sabarimala Reference Women Entry LIVE Update; Muslim Dawoodi Bohra Parsi Supreme Court | CJI Surya Kant नई दिल्ली32 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (जनहित याचिका) अब प्राइवेट इंटरेस्ट और पब्लिसिटी इंटरेस्ट, पैसा इंटरेस्ट लिटिगेशन और पॉलिटिकल इंटरेस्ट लिटिगेशन बन गई हैं। यह कमेंट नौ जजों की संविधान बेंच ने केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान किया। कोर्ट ने इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन के 2006 के PIL के मकसद पर सवाल उठाया, जिसमें केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर रोक को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि PIL कानून की प्रोसेस का गलत इस्तेमाल है और एसोसिएशन को ऐसी PIL फाइल करने के बजाय बार और अपने युवा सदस्यों की भलाई के लिए काम करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में धार्मिक जगहों पर महिलाओं के साथ भेदभाव और अलग-अलग धर्मों में धार्मिक आजादी के दायरे से जुड़ी याचिकाओं पर 11वें दिन की सुनवाई चल रही है। सितंबर 2018 में 5 जजों की संविधान बेंच ने 4:1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए सबरीमाला अयप्पा मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक हटा दी थी। तब कोर्ट ने कहा था कि सदियों पुरानी हिंदू धार्मिक प्रथा गैर-कानूनी और असंवैधानिक है। जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के कमेंट एसोसिएशन के वकील ने दलील दी कि PIL जून 2006 में छपे चार अखबारों के आर्टिकल पर आधारित थी। इस पर CJI ने कहा- इसे सीधे खारिज कर देना चाहिए था। यह आर्टिकल जनहित याचिका फाइल करने का कारण कैसे बताता है। PIL फाइल करने के लिए आर्टिकल लिखवाना आसान है। पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन अब प्राइवेट इंटरेस्ट लिटिगेशन, पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन, पैसा इंटरेस्ट लिटिगेशन और पॉलिटिकल इंटरेस्ट लिटिगेशन बन गई हैं। सभी को PIL कहा जाता है, लेकिन हम सिर्फ असली PIL पर ही सुनवाई करते हैं। CJI को रोज सैकड़ों चिट्ठियां मिलती हैं, जिनमें सवाल किया जाता है कि क्या उन सभी को PIL में बदला जा सकता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Donald Trump Presidency Plan Video; White House Speech

वॉशिंगटन डीसी8 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर से राष्ट्रपति बनने की इच्छा जताई है। व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प ने कहा कि वे 8-9 साल बाद पद छोड़ेंगे। यह सुनकर वहां मौजूद लोग हंसने लगे तो ट्रम्प ने कहा कि वह मजाक नहीं कर रहे। उन्हें काम करना पसंद है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अभी उनके कार्यकाल की शुरुआत ही है और बहुत काम बाकी है। ट्रम्प अगले महीने 80 साल के हो जाएंगे। उन्होंने अपनी उम्र को लेकर भी मजाक किया। उन्होंने कहा, “मैं बुजुर्ग नहीं हूं; मैं बुजुर्ग से कहीं ज्यादा जवान हूं। मुझे आज भी वैसा ही महसूस होता है जैसा 50 साल पहले होता था।” इससे पहले भी ट्रम्प कई बार तीसरे टर्म का संकेत दे चुके हैं। ट्रम्प को तीसरी बार राष्ट्रपति बनाने का बिल पेश, फिर आगे नहीं बढ़ पाया इससे पहले एंडी ओगल्स ने 23 जनवरी 2025 को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में एक बिल पेश किया था। इस बिल का मकसद अमेरिकी संविधान में बदलाव करके डोनाल्ड ट्रम्प के लिए तीसरी बार राष्ट्रपति बनने का रास्ता खोलना था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि जो व्यक्ति लगातार दो बार राष्ट्रपति नहीं रहा है, वह तीसरी बार चुनाव लड़ सके। चूंकि ट्रम्प 2020 में चुनाव हार गए थे, इसलिए इस बदलाव के बाद वे फिर से राष्ट्रपति बनने के लिए योग्य हो सकते थे। हालांकि यह बिल आगे नहीं बढ़ पाया और हाउस में वोटिंग तक भी नहीं पहुंच सका। दरअसल, अमेरिका में संविधान बदलना बहुत मुश्किल होता है। इसके लिए हाउस और सीनेट दोनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए होता है। मौजूदा हालात में रिपब्लिकन पार्टी के पास इतना बहुमत नहीं है। इसके अलावा, ऐसे बदलाव को लागू करने के लिए 50 में से कम से कम 38 राज्यों की मंजूरी भी जरूरी होती है। अभी कई राज्यों में विपक्षी डेमोक्रेट पार्टी की सरकार है, इसलिए इस तरह का प्रस्ताव पास होना बहुत मुश्किल माना जाता है। 73 साल पहले 2 बार राष्ट्रपति बनने का नियम बना अमेरिका में पहले किसी व्यक्ति के सिर्फ 2 ही बार राष्ट्रपति बनने को लेकर कोई प्रावधान नहीं था। 1951 में संविधान में 22 संशोधन किया गया। इसके तहत ये नियम बनाया गया कि अमेरिका में कोई शख्स सिर्फ 2 बार ही राष्ट्रपति बन सकता है। दरअसल, अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन ने दो टर्म के बाद रिटायरमेंट ले लिया था। उसके बाद से राष्ट्रपति के दो टर्म से ज्यादा सेवाएं न देने का अनौपचारिक नियम ही बन गया। इसके बाद अमेरिका में यह प्रथा बन गई। 31 अमेरिकी राष्ट्रपतियों में से किसी भी राष्ट्रपति ने इस प्रथा को नहीं तोड़ा, लेकिन फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट के दौर में यह नियम टूट गया। वे 1933 से 1945 चार बार राष्ट्रपति चुनकर आए। क्या ट्रम्प संविधान बदल सकते हैं? ट्रम्प को तीसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव के लिए उतरना है तो उन्हें अमेरिकी संविधान में बदलाव करना होगा, जो इतना आसान नहीं है। ट्रम्प को इसके लिए अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव दोनों में दो-तिहाई बहुमत से एक बिल पास कराना होगा। ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के पास दोनों सदनों में इतने सदस्य नहीं हैं। सीनेट में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के पास 100 में से 52 सीनेटर है। वहीं, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में 435 में से 220 सदस्य हैं। ये संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो तिहाई यानी 67% बहुमत से काफी कम है। अगर ट्रम्प ये बहुमत हासिल कर लेते हैं तब भी उनके लिए संविधान में संशोधन करना इतना आसान नहीं होगा। अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों से बिल पास होने के बाद इस संशोधन के लिए राज्यों से मंजूरी लेनी होती है। इसके लिए तीन चौथाई राज्यों का बहुमत मिलन के बाद ही संविधान में संशोधन हो सकता है। यानी 50 अमेरिकी राज्यों में से अगर 38 संविधान में बदलाव के लिए राजी हो जाए तो ही नियम बदल सकते हैं। पुतिन की स्ट्रैटजी अपना सकते हैं ट्रम्प ट्रम्प खुद भी कई बार कह चुके हैं कि वो दो कार्यकाल के बाद भी सत्ता में बने रहना चाहते हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ट्रम्प को तीसरा कार्यकाल नहीं मिलता तो वे सत्ता में बने रहने के लिए दूसरे तरीके अपना सकते हैं। हैमिल्टन कॉलेज के प्रोफेसर फिलिप क्लिंकनर ने मुताबिक ट्रम्प 2028 में उपराष्ट्रपति बन सकते हैं और जेडी वेंस या किसी और को नाममात्र का राष्ट्रपति बना सकते हैं। ऐसा ही कुछ पुतिन ने रूस में किया था। इसके अलावा वो अपने परिवार के किसी सदस्य को राष्ट्रपति बना सकते हैं, ताकि पर्दे के पीछे से सरकार पर उनका कंट्रोल बना रहे। पुतिन 2000 से 2008 तक लगातार 2 बार रूस के राष्ट्रपति रह चुके थे। रूस के संविधान के मुताबिक वे लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते थे। ऐसे में उन्होंने अपने खास दिमित्री मेदवेदेव को राष्ट्रपति बना दिया था। इस दौरान पुतिन उपराष्ट्रपति के पद पर रहे थे। ———————— यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प के बाद कौन संभालेगा अमेरिका: पहले उपराष्ट्रपति वेंस आगे थे, वेनेजुएला पर हमले के बाद विदेश मंत्री रूबियो का रुतबा बढ़ा अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो के अगले अमेरिकी राष्ट्रपति बनने की संभावनाएं अचानक काफी बढ़ गई हैं। ब्रिटिश अखबार द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक इसकी वजह वेनेजुएला पर की गई अमेरिकी कार्रवाई है। अमेरिकी सेना ने 3 जनवरी की रात वेनेजुएला पर हमला किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अगवा कर अमेरिका लेकर आ गए। यह मिलिट्री एक्शन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मंजूरी से हुआ। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
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वॉशिंगटन डीसी1 घंटे पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर से राष्ट्रपति बनने की इच्छा जताई है। व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प ने कहा कि वे 8-9 साल बाद पद छोड़ेंगे। यह सुनकर वहां मौजूद लोग हंसने लगे तो ट्रम्प ने कहा कि वह मजाक नहीं कर रहे। उन्हें काम करना पसंद है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अभी उनके कार्यकाल की शुरुआत ही है और बहुत काम बाकी है। ट्रम्प अगले महीने 80 साल के हो जाएंगे। उन्होंने अपनी उम्र को लेकर भी मजाक किया। उन्होंने कहा, “मैं बुजुर्ग नहीं हूं; मैं बुजुर्ग से कहीं ज्यादा जवान हूं। मुझे आज भी वैसा ही महसूस होता है जैसा 50 साल पहले होता था।” इससे पहले भी ट्रम्प कई बार तीसरे टर्म का संकेत दे चुके हैं। ट्रम्प को तीसरी बार राष्ट्रपति बनाने का बिल पेश, फिर आगे नहीं बढ़ पाया इससे पहले एंडी ओगल्स ने 23 जनवरी 2025 को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में एक बिल पेश किया था। इस बिल का मकसद अमेरिकी संविधान में बदलाव करके डोनाल्ड ट्रम्प के लिए तीसरी बार राष्ट्रपति बनने का रास्ता खोलना था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि जो व्यक्ति लगातार दो बार राष्ट्रपति नहीं रहा है, वह तीसरी बार चुनाव लड़ सके। चूंकि ट्रम्प 2020 में चुनाव हार गए थे, इसलिए इस बदलाव के बाद वे फिर से राष्ट्रपति बनने के लिए योग्य हो सकते थे। हालांकि यह बिल आगे नहीं बढ़ पाया और हाउस में वोटिंग तक भी नहीं पहुंच सका। दरअसल, अमेरिका में संविधान बदलना बहुत मुश्किल होता है। इसके लिए हाउस और सीनेट दोनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए होता है। मौजूदा हालात में रिपब्लिकन पार्टी के पास इतना बहुमत नहीं है। इसके अलावा, ऐसे बदलाव को लागू करने के लिए 50 में से कम से कम 38 राज्यों की मंजूरी भी जरूरी होती है। अभी कई राज्यों में विपक्षी डेमोक्रेट पार्टी की सरकार है, इसलिए इस तरह का प्रस्ताव पास होना बहुत मुश्किल माना जाता है। 73 साल पहले 2 बार राष्ट्रपति बनने का नियम बना अमेरिका में पहले किसी व्यक्ति के सिर्फ 2 ही बार राष्ट्रपति बनने को लेकर कोई प्रावधान नहीं था। 1951 में संविधान में 22 संशोधन किया गया। इसके तहत ये नियम बनाया गया कि अमेरिका में कोई शख्स सिर्फ 2 बार ही राष्ट्रपति बन सकता है। दरअसल, अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन ने दो टर्म के बाद रिटायरमेंट ले लिया था। उसके बाद से राष्ट्रपति के दो टर्म से ज्यादा सेवाएं न देने का अनौपचारिक नियम ही बन गया। इसके बाद अमेरिका में यह प्रथा बन गई। 31 अमेरिकी राष्ट्रपतियों में से किसी भी राष्ट्रपति ने इस प्रथा को नहीं तोड़ा, लेकिन फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट के दौर में यह नियम टूट गया। वे 1933 से 1945 चार बार राष्ट्रपति चुनकर आए। क्या ट्रम्प संविधान बदल सकते हैं? ट्रम्प को तीसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव के लिए उतरना है तो उन्हें अमेरिकी संविधान में बदलाव करना होगा, जो इतना आसान नहीं है। ट्रम्प को इसके लिए अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव दोनों में दो-तिहाई बहुमत से एक बिल पास कराना होगा। ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के पास दोनों सदनों में इतने सदस्य नहीं हैं। सीनेट में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के पास 100 में से 52 सीनेटर है। वहीं, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में 435 में से 220 सदस्य हैं। ये संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो तिहाई यानी 67% बहुमत से काफी कम है। अगर ट्रम्प ये बहुमत हासिल कर लेते हैं तब भी उनके लिए संविधान में संशोधन करना इतना आसान नहीं होगा। अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों से बिल पास होने के बाद इस संशोधन के लिए राज्यों से मंजूरी लेनी होती है। इसके लिए तीन चौथाई राज्यों का बहुमत मिलन के बाद ही संविधान में संशोधन हो सकता है। यानी 50 अमेरिकी राज्यों में से अगर 38 संविधान में बदलाव के लिए राजी हो जाए तो ही नियम बदल सकते हैं। पुतिन की स्ट्रैटजी अपना सकते हैं ट्रम्प ट्रम्प खुद भी कई बार कह चुके हैं कि वो दो कार्यकाल के बाद भी सत्ता में बने रहना चाहते हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ट्रम्प को तीसरा कार्यकाल नहीं मिलता तो वे सत्ता में बने रहने के लिए दूसरे तरीके अपना सकते हैं। हैमिल्टन कॉलेज के प्रोफेसर फिलिप क्लिंकनर ने मुताबिक ट्रम्प 2028 में उपराष्ट्रपति बन सकते हैं और जेडी वेंस या किसी और को नाममात्र का राष्ट्रपति बना सकते हैं। ऐसा ही कुछ पुतिन ने रूस में किया था। इसके अलावा वो अपने परिवार के किसी सदस्य को राष्ट्रपति बना सकते हैं, ताकि पर्दे के पीछे से सरकार पर उनका कंट्रोल बना रहे। पुतिन 2000 से 2008 तक लगातार 2 बार रूस के राष्ट्रपति रह चुके थे। रूस के संविधान के मुताबिक वे लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते थे। ऐसे में उन्होंने अपने खास दिमित्री मेदवेदेव को राष्ट्रपति बना दिया था। इस दौरान पुतिन उपराष्ट्रपति के पद पर रहे थे। ———————— यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प के बाद कौन संभालेगा अमेरिका: पहले उपराष्ट्रपति वेंस आगे थे, वेनेजुएला पर हमले के बाद विदेश मंत्री रूबियो का रुतबा बढ़ा अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो के अगले अमेरिकी राष्ट्रपति बनने की संभावनाएं अचानक काफी बढ़ गई हैं। ब्रिटिश अखबार द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक इसकी वजह वेनेजुएला पर की गई अमेरिकी कार्रवाई है। अमेरिकी सेना ने 3 जनवरी की रात वेनेजुएला पर हमला किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अगवा कर अमेरिका लेकर आ गए। यह मिलिट्री एक्शन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मंजूरी से हुआ। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…









