Wednesday, 06 May 2026 | 03:48 PM

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डार्क या लाइट ग्रीन कौन सी सब्जियां हैं सेहत के लिये ज्यादा फायदेमंद? जानिये

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सब्जियों का रंग सिर्फ देखने में सुंदर नहीं होता, बल्कि वह उनके पोषण मूल्य (Nutrition) का भी संकेत देता है. अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि डार्क ग्रीन (गहरे हरे रंग की) सब्जियां ज्यादा फायदेमंद होती हैं या लाइट ग्रीन (हल्के हरे रंग की). एक्सपर्ट्स के अनुसार, दोनों ही प्रकार की सब्जियां जरूरी हैं, लेकिन उनके पोषक तत्वों में फर्क होता है. आइए इसे आसान उदाहरणों से समझने की कोशिश करते हैं. डार्क ग्रीन सब्जियां क्या होती हैं?डार्क ग्रीन सब्जियां वे होती हैं जिनका रंग गहरा हरा होता है, क्योंकि उनमें क्लोरोफिल, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा ज्यादा होती है. उदाहरण:पालकमेथीसरसों का सागब्रोकलीहरी पत्तेदार सब्जियां डार्क ग्रीन सब्जियों के फायदेआयरन से भरपूर, खून की कमी में लाभकारी.कैल्शियम और विटामिन K ज्यादा, हड्डियों के लिए अच्छे.मजबूत एंटीऑक्सीडेंट, इम्युनिटी बढ़ाते हैं.दिल की बीमारियों और कैंसर के खतरे को कम करते हैं.डिटॉक्स में मददगार. निष्कर्ष: डार्क ग्रीन सब्जियां “पावरहाउस ऑफ न्यूट्रिशन” मानी जाती हैं. लाइट ग्रीन सब्जियां क्या होती हैं?लाइट ग्रीन सब्जियां हल्के हरे रंग की होती हैं और आमतौर पर पानी और फाइबर से भरपूर होती हैं. उदाहरण:लौकीतोरईटिंडाखीरापत्ता गोभी लाइट ग्रीन सब्जियों के फायदेशरीर को ठंडक देती हैं.पाचन तंत्र सुधारती हैं.वजन घटाने में सहायक.डिहाइड्रेशन से बचाती हैं.पेट हल्का रखती हैं. निष्कर्ष: लाइट ग्रीन सब्जियां शरीर को क्लींज और हाइड्रेट करती हैं. डार्क vs लाइट ग्रीन: मुख्य अंतरपोषण घनत्व:डार्क ग्रीन > लाइट ग्रीन फाइबर और पानी:लाइट ग्रीन ज्यादा आयरन और कैल्शियम:डार्क ग्रीन ज्यादा डाइटिंग / गर्मी में:लाइट ग्रीन बेहतर कौन‑सी ज्यादा फायदेमंद है?सच यह है कि कोई एक ज्यादा और दूसरी कम फायदेमंद नहीं. अगर आप एनीमिया, कमजोरी या इम्युनिटी पर ध्यान दे रहे हैं → डार्क ग्रीन सब्जियां.अगर आप वजन घटाना, पाचन या गर्मी में हल्का खाना चाहते हैं → लाइट ग्रीन सब्जियां. एक्सपर्ट की सलाहसबसे अच्छा तरीका है “रंगीन थाली”, जहां डार्क और लाइट दोनों तरह की सब्जियां शामिल हों. निष्कर्षडार्क ग्रीन सब्जियां पोषण में भारी होती हैं, जबकि लाइट ग्रीन सब्जियां शरीर को हल्का और संतुलित रखती हैं. सेहतमंद रहने के लिए किसी एक को चुनने की बजाय दोनों का संतुलित सेवन करना ही सबसे सही और फायदेमंद तरीका है.

महिलाओं की समस्याओं को ना करें नजरअंदाज, इस खामोश बीमारी का बढ़ रहा खतरा, डॉक्टरों ने जारी की चेतावनी

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होमताजा खबरlifestyle महिलाओं की समस्याओं को ना करें नजरअंदाज, इस खामोश बीमारी का बढ़ रहा खतरा Last Updated:May 05, 2026, 13:55 IST Ambala News: अक्सर ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की बीमारियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे उनमें गंभीर बीमारी बढ़ती जाती है. इसी कारण महिलाओं में एक शांत बीमारी तेजी से फैल रही है, जो लंबे समय तक शरीर में रहने के बाद कैंसर का रूप ले सकता है. शुरुआत में महिला को कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती, लेकिन समय बीतने के साथ असामान्य ब्लीडिंग, पीरियड्स के बीच खून आना या मेनोपॉज़ के बाद दोबारा रक्तस्राव जैसे संकेत सामने आने लगते हैं. आइए एक्सपर्ट से इसके बारे में सबकुछ जानते हैं. अंबाला: भारत में गांव हो या शहर, कई जगह पर आज भी महिलाओं की सेहत अक्सर नजरअंदाज हो जाती है. इसी लापरवाही का फायदा उठाकर Cervical Cancer जैसी खामोश बीमारी धीरे-धीरे अपनी जड़ें मजबूत कर लेती है. दरअसल डॉक्टरों के मुताबिक, भारत में यह कैंसर महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा है और चिंता की बात यह है कि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर नजर ही नहीं आते हैं. बता दें कि यह बीमारी ज्यादातर Human Papillomavirus (एचपीवी) नाम के वायरस के कारण होती है, जो लंबे समय तक शरीर में रहने के बाद कैंसर का रूप ले सकता है. शुरुआत में महिला को कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती, लेकिन समय बीतने के साथ असामान्य ब्लीडिंग, पीरियड्स के बीच खून आना या मेनोपॉज के बाद दोबारा रक्तस्राव जैसे संकेत सामने आने लगते हैं. महिलाओं की बीमारी को किया जाता है नजरअंदाजवहीं इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए अंबाला शहर नागरिक अस्पताल की आरएमओ डॉ. अदिति गौतम बताती हैं कि अक्सर महिलाएं इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जो आगे चलकर खतरनाक साबित हो सकता है. उनका कहना है कि जागरूकता की कमी के कारण कई मामलों में बीमारी आखिरी स्टेज में जाकर पकड़ में आती है. इसी बीच राहत की खबर यह है कि अब इस सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए देश में ही बनी HPV वैक्सीन उपलब्ध है. उन्होंने बताया कि यह वैक्सीन 14 साल की बच्चियों के लिए सबसे ज्यादा प्रभावी है, लेकिन 45 साल तक की महिलाएं भी इसे लगवा सकती हैं. उन्होंने कहा कि नागरिक अस्पताल अंबाला में 14 से 15 साल की बच्चियां कोई हैं, तो उन्हें HPV वैक्सीन बिल्कुल नि:शुल्क रूप से लगाई जा रही है और माता-पिता को भी इस वैक्सीन के फायदे के बारे में बताया जा रहा है, ताकि वह ये वैक्सीन अपनी बच्चियों को लगवाएं. सोशल मीडिया पर इस वैक्सीन को लेकर काफी ज्यादा भ्रामक खबरें फैलाई जा रही हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइंस के अनुसार यह वैक्सीन महिलाओं के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद है. इन बीमारियो का हो सकती हैं शिकारउन्होंने बताया कि अगर किसी भी महिलाओं को इस वैक्सीन के बारे में जानकारी लेनी है, तो वह नागरिक अस्पताल में आकर जानकारी ले सकते हैं. इसके साथ ही अभी तक नागरिक अस्पताल में कई बच्चियों ने यह वैक्सीन लगवाई है, जो बिल्कुल स्वस्थ है. उन्होंने बताया कि सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर होता है, जिसके शुरुआती चरणों में अक्सर कोई लक्षण नहीं दिखते हैं, लेकिन बढ़ने पर अनियमित ब्लीडिंग (दो पीरियड्स के बीच, संभोग के बाद या मेनोपॉज के बाद), असामान्य गंध वाला गाढ़ा या खूनी डिस्चार्ज, पेल्विक दर्द और यौन संबंध के दौरान दर्द जैसी गंभीर परेशानियां शुरू हो सकती हैं. टीकाकरण से होगा फायदाउन्होंने कहा कि यह टीकाकरण अंबाला जिले के नागरिक अस्पताल और सीएचसी, पीएचसी सभी जगह पर उपलब्ध हैं. वैसे निजी अस्पतालों में यह टीका लगभग 12000 रुपए में लगता है, जो काफी महंगा होता है. सरकारी कार्यक्रम के तहत यह सभी पात्र किशोरियों को निःशुल्क लगाया जा रहा है. अगले तीन महीनों तक चलने वाले इस अभियान में प्रत्येक पात्र किशोरी को टीके की केवल एक ही खुराक दी जाएगी. यह एक टीका जहां सर्वाइकल कैंसर से किशोरियों की रक्षा करेगा, तो वहीं इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है. वहीं मिली जानकारी के अनुसार, टीकाकरण के लिए OTP आधारित सहमति या अभिभावकों की लिखित सहमति अनिवार्य है. टीकाकरण के बाद लाभार्थी की जानकारी ऑनलाइन U-WIN पोर्टल पर दर्ज की जाएगी और पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक लिंक भेजा जाएगा, जिससे डिजिटल प्रमाण पत्र डाउनलोड किया जा सकेगा. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

IPL 2026 Final Venue Suspense

IPL 2026 Final Venue Suspense

3 मिनट पहले कॉपी लिंक IPL 2026 फाइनल वेन्यू को लेकर असमंजस बना हुआ है। बेंगलुरु में राजनीतिक विवाद के कारण वहां फाइनल की संभावना होना मुश्किल लग रहा है। कर्नाटक में विधायकों (MLAs) को IPL टिकट देने का मुद्दा गर्माया हुआ है, जिससे BCCI बैकफुट पर है। प्लेऑफ मुकाबले पंजाब और कर्नाटक के बीच बांटे जा सकते हैं। विधायकों को कम से कम 5 टिकट मिलने चाहिए’ कांग्रेस विधायक विजयानंद काशप्पनवर ने सुझाव दिया था कि हर विधायक को कम से कम 5 IPL टिकट मिलने चाहिए। उन्होंने तर्क दिया था कि चुने हुए प्रतिनिधि ‘VIP’ होते हैं और उन्हें लाइन में नहीं लगना चाहिए। इसके बाद कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने घोषणा की थी कि मौजूदा IPL में विधायकों और सांसदों को RCB के मैचों के लिए 3 टिकट दिए जाएंगे। डिफेंडिंग चैंपियन को फाइनल की मेजबानी दी जाती है IPL की परंपरा रही है कि पिछले सीजन की विजेता टीम के होम ग्राउंड पर फाइनल खेला जाता है। इस लिहाज से रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के गढ़ एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में फाइनल होना चाहिए। BCCI सूत्र ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया, ‘नियम के मुताबिक पिछले विजेता को फाइनल की मेजबानी मिलनी चाहिए, लेकिन बेंगलुरु में ‘MLA टिकट’ का मुद्दा दिक्कतें पैदा कर रहा है। अगर इसका समाधान नहीं निकला, तो BCCI फाइनल को किसी दूसरे शहर शिफ्ट कर सकता है। टिकट ‘नॉन-ट्रांसफरेबल’, दुरुपयोग नहीं हो रहा विधायकों के टिकटों के दुरुपयोग के आरोपों पर कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि टिकट ऑनलाइन बुक किए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चिन्नास्वामी स्टेडियम में होने वाले मैचों के लिए टिकट ‘नॉन-ट्रांसफरेबल’ हैं। इसका मतलब है कि विधायक या उनके परिवार के सदस्य ही मैच देख सकते हैं। अन्य व्यक्ति इन टिकटों का उपयोग नहीं कर सकता। पिछले साल चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर मची थी भगदड़ पिछले साल 3 जून को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने पंजाब किंग्स (PBKS) को IPL फाइनल में 6 रन से हराया। टीम ने 18 सीजन में पहली बार खिताब जीता, जिसकी खुशी में अगले दिन ही होमग्राउंड बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में विक्ट्री सेलिब्रेशन किया। RCB टीम के सभी सदस्य जब विधानसभा में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मुलाकात कर रहे थे, उसी दौरान स्टेडियम के बाहर भगदड़ मच गई। जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई, वहीं 33 से ज्यादा लोग घायल हुए। हादसे के बाद कर्नाटक हाईकोर्ट ने मुकदमे की जांच शुरू करवाई। जांच जारी है। बेंगलुरु में पिछले साल RCB के विक्ट्री सेलिब्रेशन के दौरान करीब 3 लाख सड़कों पर पहुंच गए थे। तस्वीर विधान सभा के बाहर की है, जहां CM सिद्धारमैया ने विनिंग टीम का सम्मान किया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

विजय ‘प्रतीक्षा कर रहा है’: टीवीके से पहले कौन पहुंचेगा – अन्नाद्रमुक या इंडिया ब्लॉक? | भारत समाचार

Nepal vs Oman Live Cricket Score: Follow latest updates from ICC Cricket World Cup League Two. (Picture Credit: X/CricketNep)

आखरी अपडेट:05 मई, 2026, 13:51 IST टीवीके के द्रमुक या भाजपा के साथ जाने की संभावना कम है क्योंकि विजय ने उन्हें क्रमशः “राजनीतिक” और “वैचारिक” दुश्मन करार दिया है। तमिलागा वेट्ट्री कड़गम (टीवीके) प्रमुख ने मंगलवार को पार्टी की कार्यकारी समिति और नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई। (फोटो: पीटीआई फाइल) तमिलनाडु सरकार गठन अपडेट: थलपति विजय तमिलनाडु में सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए तैयार हैं, भले ही उनकी पार्टी हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में स्पष्ट बहुमत से पीछे रह गई है। तमिलागा वेट्ट्री कड़गम (टीवीके) प्रमुख ने मंगलवार को पार्टी की कार्यकारी समिति और नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई। बैठक के दौरान, सभी टीवीके विधायकों ने सर्वसम्मति से विजय को अपना नेता और मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार चुनते हुए समर्थन पत्र सौंपा। उम्मीद है कि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर पार्टी को अपना दावा पेश करने के लिए आमंत्रित करेंगे और बाद में उसे सदन में बहुमत साबित करने के लिए कह सकते हैं। टीवीके औपचारिक रूप से राज्यपाल के पास अपना दावा पेश करने से पहले बहुमत के आंकड़े को पार करने के लिए अन्य दलों से समर्थन हासिल करने का विकल्प भी तलाश रहा है। हालाँकि, टीवीके के द्रमुक या भाजपा के साथ जाने की संभावना नहीं है क्योंकि विजय ने उन्हें क्रमशः “राजनीतिक” और “वैचारिक” दुश्मन करार दिया है। भारतीय गुट क्या सोच रहा है? तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष के और कांग्रेस नेता गिरीश चोडनकर ने चेन्नई में पार्टी कार्यालय में निर्वाचित विधायकों से मुलाकात की। टीवीके के साथ संभावित गठबंधन के बारे में पूछे जाने पर सेल्वापेरुन्थागई ने कहा कि आलाकमान तय करेगा कि विजय के साथ गठबंधन करना है या नहीं। उन्होंने कहा, “उन्होंने 108 सीटें जीतीं, उनके पास बहुमत नहीं है…मुझे नहीं पता कि वे इसे कैसे प्रबंधित करेंगे… टीवीके के साथ गठबंधन करना है या नहीं, इस पर आलाकमान फैसला करेगा।” 2021 के चुनाव में 18 सीटें जीतने वाली कांग्रेस केवल पांच निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल कर सकी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल सहित शीर्ष उच्च अधिकारी तमिलनाडु की स्थिति का आकलन करने और निर्णय लेने के लिए नई दिल्ली में बैठक करेंगे। द्रमुक के एक अन्य सहयोगी देसिया मुरपोक्कू द्रविड़ कड़गम (डीएमडीके) ने पुष्टि की कि उसे अब तक विजय की पार्टी से हाथ मिलाने का कोई निमंत्रण नहीं मिला है। डीएमडीके प्रमुख प्रेमलता विजयकांत ने कहा कि उनकी पार्टी डीएमके के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन में बनी रहेगी। प्रेमलता ने विजय को उनकी चुनावी जीत के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि वह “हमारे घर के बच्चे की तरह हैं।” विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके), जिसके दो विधायक हैं, ने कहा कि उसने अभी तक विजय का समर्थन करने का फैसला नहीं किया है। वीसीके प्रमुख थोल ने कहा, “हमने अभी तक फैसला नहीं किया है। वीसीके, सीपीआई और सीपीएम के नेता सुबह करीब 11 बजे एमके स्टालिन से मिलने जा रहे हैं और हम आपको सूचित करेंगे।” थिरुमावलवन. यह भी पढ़ें | तमिलनाडु ने अपने ‘जन नायकन’ का ताज पहनाया: कैसे विजय सरकार बना सके | 3 परिदृश्यों की व्याख्या एआईएडीएमके ने कैसे प्रतिक्रिया दी? सूत्रों के मुताबिक, एआईएडीएमके टीवीके सरकार को समर्थन देने पर विचार-विमर्श करेगी क्योंकि तमिलनाडु में जनादेश “डीएमके विरोधी” है। हालाँकि, अन्नाद्रमुक प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी ने अभी तक समर्थन देने पर फैसला नहीं किया है। इस निर्णय लेने में भाजपा को शामिल नहीं किया गया है। पलानीस्वामी ने बुधवार को पार्टी कार्यालय में विजयी उम्मीदवारों की बैठक बुलाई है. चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया विजय ‘प्रतीक्षा कर रहा है’: टीवीके से पहले कौन पहुंचेगा – अन्नाद्रमुक या इंडिया ब्लॉक? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु सरकार गठन(टी)थलपति विजय राजनीति(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)टीवीके बहुमत समर्थन(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)इंडिया ब्लॉक तमिलनाडु(टी)एआईएडीएमके समर्थन टीवीके(टी)डीएमके गठबंधन राजनीति

स्ट्रोक के बाद पूरी तरह ठीक क्‍यों नहीं होता मरीज, क्या होती है गोल्डन विंडो? डॉक्‍टर ने बताई बेहद जरूरी बात

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भीषण गर्मी में अक्सर हीट स्ट्रोक के मामले देखने को मिलते हैं, इसके अलावा ब्रेन स्ट्रोक के केसेज भी आए दिन सामने आ रहे हैं. हालांकि भारत में स्ट्रोक के इलाज में पिछले कुछ साल में जबर्दस्त सुधार हुआ है. बेहतर इमरजेंसी केयर, तेज डायग्नोसिस और बेहतरीन मेडिकल सुविधाओं की वजह से अब पहले से कहीं अधिक मरीज स्ट्रोक से बच रहे हैं लेकिन इसके बावजूद एक ऐसी दिक्कत सामने आ रही है जो काफी गंभीर है. डॉक्टरों की मानें तो स्ट्रोक के इलाज के बाद मरीज जिंदा तो बच जाते हैं, लेकिन वे पूरी तरह ठीक नहीं हो पाते और उन्हें लंबे समय तक विकलांगता के साथ जीवन जीना पड़ता है. सबसे बड़ा सवाल है कि क्या स्ट्रोक दो-चार दिन में ठीक हो जाता है? स्ट्रोक के बाद कौन सी बड़ी दिक्कतें मरीजों में देखने को मिलती हैं? स्ट्रोक में गोल्डन विंडो क्या होती है? आइए इन सभी सवालों पर एचसीएएच के को फाउंडर डॉक्टर गौरव ठुकराल से जानते हैं. डॉक्टर ठुकराल कहते हैं, ‘आज भारत में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हम सिर्फ इलाज कर रहे हैं, या सच में मरीजों को ठीक भी कर पा रहे हैं. अस्पतालों में स्ट्रोक का इलाज हो रहा है, जानें भी बच रही हैं लेकिन क्या रिकवरी उतनी ही मजबूत हो रही है? यही वह अंतर है जो भारत को अब समझना और भरना होगा.’ वे कहते हैं, ‘हमें स्ट्रोक के इलाज को सिर्फ जान बचाने तक सीमित नहीं रखना चाहिए. सबसे जरूरी है कि स्ट्रोक के बाद रिकवरी कितनी जल्दी, कितनी संरचित और कितनी प्रभावी तरीके से शुरू होती है?’ डॉक्टर ठुकराल आगे कहते हैं कि स्ट्रोक के इलाज के बावजूद कुछ ऐसी बीमारियां हैं जो शरीर में बहुत तेजी से बढ़ती हैं. यही वजह है कि स्ट्रोक आने के बाद मरीज 2-4 दिन में सही नहीं होता बल्कि उसे पूरी तरह रिकवर होने में पूरे 3 महीने लग सकते हैं. वे बताते हैं कि स्ट्रोक के बाद मरीजों को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और बैठकर रहने वाली जीवनशैली की समस्याएं सबसे ज्यादा होती हैं जो उनकी क्ववालिटी लाइफ को पूरी तरह खराब कर देती हैं. स्ट्रोक के बाद के हफ्ते बेहद अहम डॉक्टर ठुकराल कहते हैं कि स्ट्रोक के बाद शुरुआती कुछ हफ्ते बेहद अहम होते हैं.इस दौरान दिमाग न्यूरोप्लास्टिसिटी की अवस्था में होता है, जहां वह खुद को फिर से व्यवस्थित करने और नई क्षमताएं विकसित करने में सक्षम होता है. अगर इस समय सही और लगातार रिहेबिलिटेट किया जाए, तो मरीज दोबारा चलना, बोलना और अपनी स्वतंत्रता वापस पा सकता है.’ गोल्डन विंडो का केयरटेकर भी रखें ध्यान मरीज की रिकवरी का यह समय सीमित होता है. आमतौर पर यह अवधि कुछ हफ्तों से लेकर तीन महीने तक की होती है. अगर इस ‘गोल्डन विंडो’ को खो दिया जाए, तो रिकवरी की गति और प्रभाव दोनों ही काफी कम हो जाते हैं. जो सुधार कुछ हफ्तों में संभव था, वह महीनों में भी अधूरा रह सकता है या कभी पूरी तरह वापस नहीं आता.वे कहते हैं कि आज भारत में स्ट्रोक का इलाज मजबूत हो चुका है, लेकिन रिकवरी अभी भी कमजोर कड़ी बनी हुई है. देश को अब एक ऐसे हेल्थकेयर मॉडल की जरूरत है जहां रिकवरी को उतनी ही प्राथमिकता दी जाए जितनी इलाज को दी जाती है. रिकवरी कोई हल्की या कभी-कभार होने वाली प्रक्रिया नहीं है. यह एक गहन, अनुशासित और समयबद्ध उपचार है, जिसमें रोजाना कई बार थेरेपी की जरूरत होती है और यह कई हफ्तों तक लगातार चलती है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुरुआती चरण में गहन और बार-बार होने वाली थेरेपी को ही बेहतर परिणामों की कुंजी माना जाता है. इसका ध्यान स्ट्रोक के पेशेंट के साथ रहने वाले अटेंडेंट और केयरटेकर को भी रखना चाहिए. क्या कहते हैं आंकड़े आंकड़े बताते हैं कि भारत में 6.3 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी प्रकार की विकलांगता के साथ जीवन जी रहे हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस बोझ का बड़ा हिस्सा समय पर और सही पुनर्वास के जरिए कम किया जा सकता है. इसके बावजूद, देश में पुनर्वास सेवाओं का ढांचा बेहद सीमित है. पूरे देश में लगभग 1,251 स्ट्रोक रिहैबिलिटेशन सेंटर ही मौजूद हैं, जो आबादी के अनुपात में बेहद कम हैं. इसका सीधा असर यह होता है कि लाखों मरीज समय पर और सही और पूरे उपचार से वंचित रह जाते हैं. इस वजह से हो रहा नुकसान डॉ. ठुकराल आगे कहते हैं कि समस्या सिर्फ सुविधाओं की नहीं है, बल्कि सोच और सिस्टम दोनों की है. अस्पतालों में डिस्चार्ज के समय मरीजों को स्पष्ट रिकवरी रोडमैप नहीं दिया जाता. न ही यह बताया जाता है कि शुरुआती 6 से 8 हफ्तों में गहन और निरंतर थेरेपी कितनी जरूरी है. परिणामस्वरूप, परिवार अक्सर इसे वैकल्पिक मानकर टाल देते हैं. आर्थिक पहलू इस चुनौती को और जटिल बना देता है. पुनर्वास सेवाएं अभी भी बीमा कवरेज के दायरे में पूरी तरह शामिल नहीं हैं. ऐसे में परिवार इसे एक अतिरिक्त खर्च के रूप में देखते हैं, जबकि वास्तव में यह एक दीर्घकालिक निवेश है. जब मरीज पूरी तरह रिकवर नहीं कर पाता, तो इसका असर सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता. उसकी काम करने की क्षमता प्रभावित होती है, परिवार पर देखभाल का दबाव बढ़ता है और धीरे-धीरे यह एक सामाजिक और आर्थिक बोझ में बदल जाता है. कोविड-19 महामारी ने इन खामियों को और उजागर किया. इलाज में आई रुकावटों और सेवाओं की कमी ने कई मरीजों की रिकवरी को प्रभावित किया और विकलांगता का बोझ बढ़ा दिया. तेजी से रिकवरी है जरूरी डॉक्टर कहते हैं कि तेजी से रिकवरी कोई विकल्प नहीं है, बल्कि जरूरत है. अगर हमें देश में विकलांगता का बोझ कम करना है, तो पुनर्वास को इलाज की निरंतर और अनिवार्य कड़ी के रूप में देखना होगा.

IPL 2026 Final Venue Suspense

IPL 2026 Final Venue Suspense

36 मिनट पहले कॉपी लिंक परंपरा के अनुसार IPL 2026 के फाइनल की मेजबानी बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम को करनी है। IPL 2026 के फाइनल मैच के वेन्यू को लेकर असमंजस बना हुआ है। आम तौर पर फाइनल डिफेंडिंग चैंपियन के होम ग्राउंड पर होता है, लेकिन बेंगलुरु में राजनीतिक विवाद के कारण चिन्नास्वामी स्टेडियम में फाइनल की संभावना कम लग रही है। BCCI सूत्र ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया, ‘नियम के मुताबिक पिछले विजेता को फाइनल की मेजबानी मिलनी चाहिए, लेकिन बेंगलुरु में ‘MLA टिकट’ का मुद्दा दिक्कतें पैदा कर रहा है। अगर इसका समाधान नहीं निकला, तो BCCI फाइनल को किसी दूसरे शहर शिफ्ट कर सकता है।’ IPL के मौजूदा सीजन का फाइनल मैच 31 मई को खेला जाना है। हालांकि, अभी टीम वेन्यू का ऐलान नहीं किया गया है। प्लेऑफ मुकाबले पंजाब और कर्नाटक के बीच बांटे जा सकते हैं। बेंगलुरु ने पिछले साल पंजाब को हराकर IPL जीता था। डिप्टी CM का विधायकों को 3-3 टिकट देने का ऐलान कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने घोषणा की थी कि मौजूदा IPL में विधायकों और सांसदों को RCB के मैचों के लिए 3 टिकट दिए जाएंगे। कांग्रेस विधायक विजयानंद काशप्पनवर ने सुझाव दिया था कि हर विधायक को कम से कम 5 IPL टिकट मिलने चाहिए। उन्होंने तर्क दिया था कि चुने हुए प्रतिनिधि ‘VIP’ होते हैं और उन्हें लाइन में नहीं लगना चाहिए। टिकट ‘नॉन-ट्रांसफरेबल’, दुरुपयोग नहीं हो रहा विधायकों के टिकटों के दुरुपयोग के आरोपों पर कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि टिकट ऑनलाइन बुक किए जाते हैं। चिन्नास्वामी स्टेडियम में होने वाले मैचों के लिए टिकट ‘नॉन-ट्रांसफरेबल’ हैं। इसका मतलब है कि विधायक या उनके परिवार के सदस्य ही मैच देख सकते हैं। अन्य व्यक्ति इन टिकटों का इस्तेमाल नहीं कर सकता। पिछले साल चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर मची थी भगदड़ पिछले साल 3 जून को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने पंजाब किंग्स (PBKS) को IPL फाइनल में 6 रन से हराया। टीम ने 18 सीजन में पहली बार खिताब जीता, जिसकी खुशी में अगले दिन ही होमग्राउंड बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में विक्ट्री सेलिब्रेशन किया। RCB टीम के सभी सदस्य जब विधानसभा में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मुलाकात कर रहे थे, उसी दौरान स्टेडियम के बाहर भगदड़ मच गई। जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई, वहीं 33 से ज्यादा लोग घायल हुए। हादसे के बाद कर्नाटक हाईकोर्ट ने मुकदमे की जांच शुरू करवाई। जांच जारी है। बेंगलुरु में पिछले साल RCB के विक्ट्री सेलिब्रेशन के दौरान करीब 3 लाख सड़कों पर पहुंच गए थे। इस कारण स्टेडियम के बाहर भगदड़ मच गई। —————————————— IPL से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए मुंबई ने अपना सबसे बड़ा रनचेज किया, रोहित की छक्के से फिफ्टी मुंबई इंडियंस ने IPL 2026 के 47वें मैच में लखनऊ सुपर जायंट्स को 6 विकेट से हरा दिया। वानखेड़े में खेले गए इस मुकाबले मुंबई ने IPL में अपना सबसे बड़ा रनचेज किया, जबकि लखनऊ ने पावरप्ले में अपना सबसे बड़ा स्कोर बनाया। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Hindi News Business SBI Lakpati Scheme: ₹610 Monthly Deposit Earns ₹1 Lakh, 7.05% Interest नई दिल्ली3 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी-इजरादल और ईरान युद्ध के चलते इस समय शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में कई निवेशक म्यूचुअल फंड्स में इनवेस्ट करने से घबरा रहे हैं। अगर आप इन दिनों कोई ऐसा इनवेस्टमेंट प्लान देख रहे हैं जिसमें आपका पैसा भर सुरक्षित रहे और ठीक-ठाक रिटर्न भी मिलता रहे तो आपके लिए SBI एक खास रिकरिंग डिपॉजिट (RD) स्कीम ‘हर घर लखपति’ सही साबित हो सकती है। यह एक खास रिकरिंग डिपॉजिट (RD) स्कीम है। इस स्कीम के तहत आप हर महीने छोटी-छोटी रकम जमा करके एक लाख या इससे ज्यादा रुपए इंतजाम कर सकते हैं। इसमें सामान्य नागरिकों को अधिकतम 6.55% और वरिष्ठ नागरिकों (सीनियर सिटीजन) को अधिकतम 7.05% सालाना ब्याज दिया जा रहा है। इससे 1 लाख या उससे ज्यादा रकम को होगा इंतजाम ‘हर घर लखपति’ एक खास रिकरिंग डिपॉजिट (RD) स्कीम है। इस स्कीम के तहत आप हर महीने छोटी-छोटी रकम जमा करके एक लाख या इससे ज्यादा रुपए इंतजाम कर सकते हैं। इसमें 10 साल तक हर महीने 610 रुपए जमा करने पर आपका 1 लाख रुपए का फंड तैयार हो जाएगा। समझें RD क्या है? रिकरिंग डिपॉजिट या RD बड़ी बचत में आपकी मदद कर सकती है। आप इसका इस्‍तेमाल गुल्लक की तरह कर सकते हैं। मतलब आप इसमें हर महीने सैलरी आने पर एक निश्चित रकम डालते रहें और इसके मैच्योर होने पर आपके हाथ में बड़ी रकम होगी। हर घर लखपति का मैच्योरिटी पीरियड 3 साल से 10 साल तक रहता है। यानी आप 3 साल से 10 साल तक के लिए निवेश कर सकते हैं। 1 लाख से ज्यादा के लिए भी कर सकते हैं निवेश हर घर लखपति योजना में आप 1 लाख रुपए से ज्यादा का टारगेट भी चुन सकते हैं। इसमें 2, 3 और 4 लाख आदि का टारगेट सेट करके भी निवेश कर सकते हैं। आप जितनी रकम का टारगेट रखते है, आपकी किस्त की राशि उसी हिसाब से तय होती है। कौन कर सकता है इसमें निवेश कोई भी भारतीय नागरिक इस स्कीम में निवेश कर सकता है। व्यक्ति इसमें अकेले या जॉइंट अकाउंट खोल सकते हैं। माता-पिता (अभिभावक) अपने बच्चे (10 साल से अधिक उम्र का और सही से हस्ताक्षर करने में सक्षम) के साथ खाता खोल सकते हैं। 10 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए माता-पिता या कानूनी अभिभावक के साथ जॉइंट अकाउंट खोला जा सकता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Hindi News Business SBI Lakpati Scheme: ₹610 Monthly Deposit Earns ₹1 Lakh, 7.05% Interest नई दिल्ली22 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी-इजराइल और ईरान युद्ध के चलते इस समय शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में कई निवेशक म्यूचुअल फंड्स में इनवेस्ट करने से घबरा रहे हैं। अगर आप इन दिनों कोई ऐसा इनवेस्टमेंट प्लान देख रहे हैं जिसमें आपका पैसा भी सुरक्षित रहे और ठीक-ठाक रिटर्न भी मिलता रहे तो आपके लिए SBI की ‘हर घर लखपति’ स्कीम सही साबित हो सकती है। यह एक खास रिकरिंग डिपॉजिट (RD) स्कीम है। इस स्कीम के तहत आप हर महीने छोटी-छोटी रकम जमा करके एक लाख या इससे ज्यादा रुपए का इंतजाम कर सकते हैं। इसमें सामान्य नागरिकों को अधिकतम 6.55% और वरिष्ठ नागरिकों (सीनियर सिटीजन) को अधिकतम 7.05% सालाना ब्याज दिया जा रहा है। समझें RD क्या है? रिकरिंग डिपॉजिट या RD बड़ी बचत में आपकी मदद कर सकती है। आप इसका इस्‍तेमाल गुल्लक की तरह कर सकते हैं। मतलब आप इसमें हर महीने सैलरी आने पर एक निश्चित रकम डालते रहें और इसके मैच्योर होने पर आपके हाथ में बड़ी रकम होगी। हर घर लखपति स्कीम का मैच्योरिटी पीरियड 3 साल से 10 साल तक रहता है। यानी आप 3 साल से 10 साल तक के लिए निवेश कर सकते हैं। 1 लाख से ज्यादा के लिए भी कर सकते हैं निवेश हर घर लखपति योजना में आप 1 लाख रुपए से ज्यादा का टारगेट भी चुन सकते हैं। इसमें 2, 3 और 4 लाख आदि का टारगेट सेट करके भी निवेश कर सकते हैं। आप जितनी रकम का टारगेट रखते है, आपकी किस्त की राशि उसी हिसाब से तय होती है। कौन कर सकता है इसमें निवेश कोई भी भारतीय नागरिक इस स्कीम में निवेश कर सकता है। व्यक्ति इसमें अकेले या जॉइंट अकाउंट खोल सकते हैं। माता-पिता (अभिभावक) अपने बच्चे (10 साल से अधिक उम्र का और सही से हस्ताक्षर करने में सक्षम) के साथ खाता खोल सकते हैं। 10 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए माता-पिता या कानूनी अभिभावक के साथ जॉइंट अकाउंट खोला जा सकता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

मुस्लिम सीटों पर बीजेपी की जीत: बंगाल में काबा-काली और बाबरी मस्जिद जैसी मुस्लिम सीटों पर गर्म रही बीजेपी! फिर 45% मुस्लिम कमल पर कैसे?

मुस्लिम सीटों पर बीजेपी की जीत: बंगाल में काबा-काली और बाबरी मस्जिद जैसी मुस्लिम सीटों पर गर्म रही बीजेपी! फिर 45% मुस्लिम कमल पर कैसे?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के सुझाव ने सभी राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है। बीजेपी ने 294 रिजर्व वाली विधानसभा में 206 रिजर्व पर कब्जा कर राज्य के 15 साल के राजनीतिक इतिहास को पलट दिया। लेकिन इसके अलावा भी बड़ा कॉर्पोरेट पार्टी ने वहां दिखाया, जिसे ममता का अभेद्य किला माना जाता था, बंगाल की 115 मुस्लिम बहुल आबादी। इन प्रस्तावों पर जहां मुस्लिम धर्मावलंबियों की आबादी 30 प्रतिशत या उससे भी अधिक है, बीजेपी ने अपना पोर्टफोलियो वोट बैंक न होने के बावजूद 39 पर कब्जा जमाया। आख़िरकार यह कैसे हुआ? टीएमसी के ‘अभेद’ मुस्लिम वोट बैंक का सबसे पहला और सबसे अहम कारण ममता बनर्जी की कैथोलिक कांग्रेस (टीएमसी) पिछले दशक से वोट बैंक पर एकाधिकार जमाए हुई थी। 2021 में टीएमसी ने 44 मुस्लिम रिवर्सल से 43 पर जीत हासिल की। लेकिन इस बार टीएमसी का यह वोट बैंक कांग्रेस, लेफ्ट और हुमायूं कबीर की नई पार्टी आम जनता पार्टी (एजेयूपी) के बीच बंटवारा हो गया है। मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तरी डायनाजपुर की 43 में से 2021 में बीजेपी को सिर्फ 8 सीटें मिलीं, जो 2026 में 19 में बनीं। इस रिवर्सफर की सबसे बड़ी वजह मुस्लिम सेक्टर का बिखराव है, न कि बीजेपी की ओर से उनका जमावड़ा। उदाहरण के लिए, मुर्शिदाबाद के रानीनगर में कांग्रेस 79,423 वोटर्स से वोट मिला, जबकि टीएमसी (76,722) और वाम दल (48,587) के बीच वोट बंटने से बीजेपी को बढ़त हासिल हुई। काबा-काली और बाबरी मस्जिद के ‘गर्म’ मस्जिद का डबल गेम भाजपा ने बंगाल की सांस्कृतिक पहचान के तहत अपने-अपने पक्ष में अपनी चुनावी रणनीति बनाई। टीएमसी सांसद सयानी घोष के एक वीडियो में ‘मेरे दिल में है काबा’ गाने के बाद बीजेपी नेताओं ने इसे ‘काली बनाम काबा’ की लड़ाई बना दिया। शाह अमित और योगी आदित्यनाथ ने नैरेटिव गढ़ा कि बंगाल की आत्मा में सिर्फ मां काली और दुर्गा बस्ती हैं। वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने ‘जय मां काली’ की जगह ‘जय श्री राम’ का नारा अपनाकर बंगाली अस्मिता से सीधा साधा बनाया। बाबरी मस्जिद विवाद ने मुस्लिम वोट बैंक में डकैती का काम किया। टीएमसी के सहायक विधायक हुमायूँ कबीर ने मुर्शिदाबाद के रेजीनगर में दूसरी बार बाबरी मस्जिद बनाने की घोषणा की और अपनी पार्टी एजेयूपी बना ली। बीजेपी ने इस मुद्दे को ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ को सही ठहराते हुए हिंदू धर्म को ध्रुवीकरण का हथियार बनाया. गृह मंत्री अमित शाह ने साफा से कहा, ‘बंगाल में बाबरी मस्जिद नहीं बनेंगे’ कबीर की पार्टी ने टीएमसी के मुस्लिम वोट बैंक को काटने का काम किया. नतीजा, कबीर ने खुद रेजिनगर और नोएडा विजिट लीं, जिससे टीएमसी को करारा झटका लगा। मुस्लिम वोट बीजेपी को नहीं मिले, लेकिन टीएमसी की जीत की राह में बँटने से बड़ी बाधा बन गई। साहब का ‘गुपचुप’ असर और 91 लाख का लाजवाब खेल चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत करीब 91 लाख लाख के नाम सूची को हटा दिया, जिससे कुल 7.66 करोड़ से अधिक की संख्या 6.75 करोड़ रह गई। इसका सबसे ज्यादा असर मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तरी 24 परगना जैसे अल्पसंख्यक बहुल पुर्तगाल में हुआ। समर्थकों का मानना ​​है कि एसआईआर ने मुस्लिम विचारधारा को एकजुट कर टीएमसी के पक्ष में वोट देने के बजाय अन्य पार्टियों में शामिल होने के लिए मजबूर कर दिया। ‘शून्य’ मुस्लिम मुद्दा, लेकिन हर जगह जीत का परचम बीजेपी ने 2021 में 8 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी नहीं जीत सका. इस बार पार्टी ने एक भी मुस्लिम मुस्लिम को टिकट नहीं दिया और पूरी तरह से हिंदू चर्च के ध्रुवीकरण पर दांव लगाया। यह अनुमान सिद्ध हुआ। जहां टीएमसी सिर्फ 30 मुस्लिम मुस्लिमों पर आगे रही और 12 पर बढ़त बनाई गई। बीजेपी ने यह संदेश दिया कि ‘वोट विकास से मिलें, विशेष समुदाय से नहीं।’ बीजेपी की यह ऐतिहासिक जीत का फॉर्मूला बेहद साफ है। 45% मुस्लिम वोट बहुमत भाजपा के पक्ष में खड़ा हो गया, क्योंकि मुस्लिम वोट तीन या चार आश्रमों में बंट गया, जबकि हिंदू वोट एकजुट भाजपा के पक्ष में खड़ा हो गया। जहां टीएमसी का वोट शेयर 40.80% रहा, वहीं बीजेपी का वोट शेयर सिर्फ 5% ज्यादा (45.64%) रहा, बाकी के अंतर में भारी बढ़त हुई।

मिलिए कपिल साहू से: तमिलनाडु में विजय की भूस्खलन जीत के सूत्रधार | भारत समाचार

Nepal vs Oman Live Cricket Score: Follow latest updates from ICC Cricket World Cup League Two. (Picture Credit: X/CricketNep)

आखरी अपडेट:05 मई, 2026, 13:06 IST कपिल साहू ने एक स्वतंत्र कंसल्टेंसी शुरू करने के लिए 12 सहयोगियों के साथ I-PAC छोड़ दिया। कपिल साहू ने प्रशांत किशोर की इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) में अपनी विशेषज्ञता को निखारा तमिलनाडु चुनाव 2026: तमिलनाडु में विजय की तमिलिगा वेट्री कज़घम (टीवीके) के ऐतिहासिक जनादेश ने राजनीतिक पंडितों और लोगों को चौंका दिया है। अपने पहले चुनाव में टीवीके की 108 सीटों की उपलब्धि ने राज्य के साथ-साथ देश भर में विजय के प्रशंसकों के बीच उन्माद पैदा कर दिया है। विजय ने अब राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को पत्र लिखकर सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए समय मांगा है। कथित तौर पर उन्होंने विधानसभा सदन में बहुमत साबित करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है। हालाँकि इस जीत का श्रेय काफी हद तक विजय की आभा को दिया जाता है, टीवीके के वास्तुकारों में से एक कपिल साहू थे। इससे पहले, प्रशांत किशोर ने बिहार चुनाव पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करने से पहले विजय को रणनीति बनाने में मदद की थी। कौन हैं कपिल साहू? 2026 की सफलता से पहले, कपिल साहू ने प्रशांत किशोर की इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के साथ काम किया, जहां उन्होंने राजनीतिक अभियान, डेटा विश्लेषण, कथा निर्माण और रणनीतिक परामर्श का नेतृत्व किया। अंततः साहू ने एक स्वतंत्र कंसल्टेंसी शुरू करने के लिए 12 सहयोगियों के साथ I-PAC छोड़ दिया, और अपने साथ आम आदमी पार्टी (AAP) और सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (SDF) जैसी पार्टियों के साथ काम करने का ट्रैक रिकॉर्ड भी लेकर आए। हालाँकि, साहू की निर्णायक उपलब्धि टीवीके की चमत्कारी शुरुआत के साथ आई। उनके रणनीतिक लचीलेपन की अंतिम परीक्षा तब हुई जब अभियान हाई-प्रोफाइल संकटों की एक श्रृंखला से प्रभावित हुआ, जिसमें दुखद करूर भगदड़ जिसमें 41 लोगों की जान चली गई, और विजय के तलाक और कथित विवाहेतर संबंधों को लेकर मीडिया में हंगामा शामिल था। इन संभावित पटरी से उतरने के बावजूद, साहू के संकट प्रबंधन और कथा नियंत्रण ने यह सुनिश्चित किया कि टीवीके अभियान केंद्रित और अक्षुण्ण रहे, अंततः पार्टी को अपनी ऐतिहासिक सीटों की संख्या तक ले जाने में मदद मिली। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया मिलिए कपिल साहू से: तमिलनाडु में विजय की भूस्खलन जीत के सूत्रधार अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु चुनाव 2026(टी)विजय टीवीके की जीत(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)टीवीके 108 सीटें(टी)कपिल साहू रणनीतिकार(टी)तमिलनाडु की राजनीति(टी)विजय तलाक विवाद(टी)करूर भगदड़ की घटना