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केरल में कौन होगा नया सीएम? सामने आया नाम, मुकुल वासनिक के हाथ से बेंचमार्क वाली चिट्ठी की फोटो वायरल

केरल में कौन होगा नया सीएम? सामने आया नाम, मुकुल वासनिक के हाथ से बेंचमार्क वाली चिट्ठी की फोटो वायरल

केरल में कांग्रेस के पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक के हाथ से बातचीत के समर्थन वाली पत्रिका की फोटो सामने आई है, जिसमें बातचीत ने कल (07 मई, 2026) सीएम पद के लिए अपनी पसंद की घोषणा की थी। इस लेबल में नाम के आगे उनकी पसंद के सीएम फेस का नाम भी लिखा है। कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के लिए वीडियो देखें श्रीशंन और केसी वेणुगोपाल दो नाम बहुत आगे चल रहे थे। ऐसे में ये लेबल सामने आया है. इसमें जो भी नेता सिद्धार्थन के समर्थन का दावा कर रहे थे, उन्होंने भी केसी वेणुगोपाल को समर्थन दिया है। प्रदेश अध्यक्ष सनी जोसेफ भी श्रीशेषन के समर्थन की बात कर रहे थे, लेकिन लिस्ट के मुताबिक उन्होंने भी केसी को समर्थन दिया है, जिसे आज उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में रद्द कर दिया है. बिश्नाई कांग्रेस ने बताई अपनी पसंद एआईसीसी के केंद्रीय पर्यवेक्षकों के साथ आए खुलासे- मंत्रिमंडल की बैठक में कांग्रेस के 63 प्रतिभागियों में से 47 ने कहा- जिसमें केपीसीसी अध्यक्ष सन्नी जोसेफ भी शामिल हैं- केरल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में वेणुगोपाल का नाम प्रस्तावित किया गया है. पार्टी अलकमान इस हफ्ते के आखिरी तक मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा कर सकती है. ये भी पढ़ें- ‘हमारी पीठ पर छुरा कहाँ था?’ तमिल में विजय की टीवीके के समर्थन को लेकर पीएलआई डीएमके-कांग्रेस! सन्नी के अलावा, संदीप जी। वेरियर, सजीव जोसेफ, टी.ओ. मोहन और उषा विजयन भी शामिल थे, जिसमें वेणुगोपाल के नाम का प्रस्ताव रखा गया था। शीर्ष पद के लिए एक अन्य नामांकित राकेश चेन्निथला के लिए यह एक बड़ा झटका था, क्योंकि उनके करीबी सहयोगी आई.सी. बालकृष्णन ने वेणुगोपाल और चेन्निथला, दोनों का ही समर्थन किया। केरल में सीएम रेस में किसका नाम? नामांकन ने बताया कि नामांकन के पूर्व नेताओं को आठ शेयरों का समर्थन मिला। सूची के अंतिम नेता वीडी शिरेशनन, जिसमें इस पद के लिए पसंदीदा पसंद के तौर पर देखा जा रहा है, उनमें से छह विश्लेषकों का समर्थन प्राप्त है। श्रीशन और चेन्निथला, दोनों ने भी पर्यवेक्षकों से मुलाकात की और इस पद के लिए अपनी नामांकित पेशगी की। वेणुगोपाल इस बैठक में शामिल नहीं हुए. ये भी पढ़ें- ‘चोर-चोर, टीएमसी चोर’, बंगाल चुनाव के बाद पुराने मोइत्रा को दिखा लोगों ने नारा 63 के अलावा, माकन और वासनिक ने कांग्रेस और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ भी अलग-अलग बैठकें कीं ताकि उनकी पसंद जान जा सके। जहां केपीसीसी के तीन पूर्व अध्यक्षों ने श्रीशन का समर्थन किया, वहीं कई वरिष्ठ नेताओं ने वेणुगोपाल का समर्थन किया. पर्यवेक्षक, जो नई दिल्ली लौटे हैं, अपनी रिपोर्ट पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को कहेंगे। सूत्रों ने बताया कि यदि आवश्यक हुआ, तो केपीसीसी के तीन कार्यकारी अध्यक्षों, अलाकमान सन्नी, और श्रीशेन और चेन्निथला को बातचीत के लिए बुलाया गया। इस बीच, कांग्रेस विधायक दल की बैठक में संविधान से खड़गे को अगले मुख्यमंत्री का नाम तय करने का अधिकार दिया गया. बताया गया कि किश्तो को पूरा करने के बाद शनिवार या रविवार तक अगले मुख्यमंत्री की घोषणा कर दी जाएगी; और नए मुख्यमंत्री, दो वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं और यूडीएफ के अन्य घटक दलों के नेताओं ने मिलकर दो दिन की शपथ लेने की घोषणा की। (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्रेकिंग न्यूज(टी)एबीपी न्यूज(टी)केरल कांग्रेस(टी)केरल सीएम(टी)केरल विधानसभा चुनाव(टी)केरल कांग्रेस सीएम(टी)रमेश चेन्निथला(टी)केसी वेणुगोपाल(टी)वीडी सतीशन(टी)शशि थरूर(टी)मुकुल वासनिक(टी)केरल में नया सीएम कौन होगा? सामने आया नाम मुकुल वासनिक के हाथ से बिश्राम के समर्थन वाली चिट्ठी की फोटो वायरल

रात में बार-बार बिस्तर गीला करता है बच्चा, तो यहां डॉक्टर से जानिए बड़ी वजह और इसका इलाज

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Last Updated:May 08, 2026, 10:13 IST रात में बच्चों का बार-बार बिस्तर गीला करना सिर्फ आदत नहीं, कई बार शरीर में ADH हार्मोन की कमी, गहरी नींद, ब्लैडर की कमजोरी, कब्ज या इंफेक्शन की वजह भी हो सकती है. बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशील सिंगला के मुताबिक बच्चों को डांटने के बजाय प्यार और सही इलाज की जरूरत होती है. फरीदाबाद: रात के अंधेरे में जब पूरा घर गहरी नींद में सो रहा होता है तब कई घरों में एक चिंता हर रोज़ दोहराई जाती है. 8 से 10 साल के बच्चे नींद में बिस्तर गीला कर देते हैं. मां-बाप समझ नहीं पाते कि आखिर बच्चा बड़ा होने के बाद भी ऐसा क्यों कर रहा है. कई बार मां सोने से पहले बच्चे को पेशाब भी करवाती है, लेकिन इसके बावजूद बच्चा रात में बिस्तर पर पेशाब कर देता है. ऐसे में घर वाले डांटते हैं बच्चा शर्मिंदा होता है और उसका आत्मविश्वास भी कमजोर पड़ने लगता है. आखिर इसके पीछे वजह क्या है बीमारी है या फिर कोई सामान्य समस्या? क्या है वजह Local18 से बातचीत में सर्वोदय हॉस्पिटल के डायरेक्टर और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशील सिंगला ने बताते हैं सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि सामान्य स्थिति में रात के समय शरीर में एंटी डाययूरेटिक हार्मोन (ADH) बनता है जो नींद के दौरान पेशाब बनने की मात्रा को कम कर देता है. लेकिन जिन बच्चों को रात में बिस्तर गीला करने की समस्या होती है उनमें कई बार यह हार्मोन कम बनता है. इसकी वजह से शरीर में यूरिन ज्यादा बनने लगता है और बच्चा नींद में ही पेशाब कर देता है. डॉ. सुशील सिंगला ने बताते कुछ बच्चों में ADH हार्मोन बनता तो है लेकिन वह किडनी पर सही तरीके से असर नहीं कर पाता. ऐसे में भी रात में पेशाब निकल जाता है. इसके अलावा गहरी नींद भी इसका एक बड़ा कारण है. कई बच्चों की ब्लैडर कैपेसिटी कम होती है यानी थोड़ा सा यूरिन भरते ही ब्लैडर फुल हो जाता है और बच्चा पेशाब कर देता है. कुछ मामलों में ब्लैडर समय से पहले सिकुड़ जाता है जिससे पेशाब अपने आप निकल जाता है. डॉ. सुशील सिंगला बताते हैं कुछ बच्चों को नींद में सांस रोकने की आदत भी होती है. इससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और एक हार्मोन यूरिन बनने की मात्रा बढ़ा देता है. यही वजह है कि बच्चा रात में बिस्तर गीला कर देता है. इसके अलावा यूरिन इंफेक्शन और कब्ज भी इस समस्या की बड़ी वजह बन सकते हैं. कब्ज होने पर पेट में रुकी हुई पोट्टी ब्लैडर पर दबाव डालती है जिससे बच्चा दिन और रात दोनों समय पेशाब कंट्रोल नहीं कर पाता. क्या है इसका इलाज डॉ. सुशील सिंगला बताते हैं इसका इलाज कारण जानने के बाद ही शुरू किया जाता है. सबसे जरूरी है कि बच्चे को मानसिक रूप से मजबूत रखा जाए. बार-बार डांटने या मजाक उड़ाने से बच्चे का आत्मविश्वास टूटने लगता है और समस्या और बढ़ सकती है. कुछ दवाइयां ऐसी होती हैं जो रात में यूरिन बनने की मात्रा कम कर देती हैं. इसके अलावा बाजार में अलार्म डिवाइस भी उपलब्ध हैं जिन्हें बच्चे के नीचे लगाया जाता है. जैसे ही बिस्तर गीला होता है अलार्म बज जाता है. धीरे-धीरे बच्चा अलार्म बजने से पहले ही उठना सीख जाता है और यह ठीक होने का संकेत माना जाता है. माता-पिता को सलाह डॉ. सुशील सिंगला बताते हैं माता-पिता को सलाह दी कि अगर बच्चा बिस्तर गीला कर दे, तो उसे डांटना नहीं चाहिए. बच्चे को प्यार से समझाएं और उसका हौसला बढ़ाएं. जिस दिन बच्चा बिस्तर गीला न करे उस दिन उसे छोटी-छोटी चीजें देकर प्रोत्साहित किया जा सकता है. अगर बच्चा पेशाब कर दे तो उसके उठने से पहले चुपचाप कपड़े और बेडशीट बदल दें, ताकि उसे शर्मिंदगी महसूस न हो. डॉ. सुशील सिंगला बताते हैं ज्यादातर मामलों में यह समस्या 10 साल की उम्र के बाद अपने आप ठीक होने लगती है. डॉक्टर की सलाह लेकर इलाज कराना चाहिए. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Faridabad,Faridabad,Haryana

Breaking News Headlines Today, Pictures, Videos And More From Dainik Bhaskar

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Hindi News National Breaking News Headlines Today, Pictures, Videos And More From Dainik Bhaskar 4 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली सरकार ने पुरानी दिल्ली में यमुना के बाढ़ क्षेत्र के पास रहने वाले निवासियों को बेदखली के नोटिस जारी किए हैं। सरकार ने बाढ़ के जोखिम और सार्वजनिक सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए, आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत यह कदम उठाया है। पुरानी दिल्ली के एडीशनल DM के नोटिस के अनुसार, यमुना बाजार के पास लगभग 310 घरों को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के स्वामित्व वाली बाढ़ क्षेत्र की जमीन पर अवैध अतिक्रमण के रूप में चिह्नित किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि जब यमुना नदी में जलस्तर बढ़ता है, तो यह इलाका हर साल आने वाली बाढ़ की चपेट में आ जाता है, जिससे इंसानी जान, मवेशियों और संपत्ति को गंभीर खतरा पैदा होता है। प्रशासन ने निवासियों को नोटिस की तारीख से 15 दिनों के भीतर यह इलाका खाली करने का निर्देश दिया है। लोगों से यह भी कहा गया है कि वे अपनी चीजें और निर्माण बाढ़ क्षेत्र से अपनी मर्जी से हटा लें। आज की बाकी बड़ी खबरें… SIR ट्रिब्यूनल : जस्टिस शिवगणनम का इस्तीफा पश्चिम बंगाल में विस चुनाव के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस टीएस शिवगणनम ने एसआईआर से जुड़े अपीलीय ट्रिब्यूनल से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इस्तीफे के लिए व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। जस्टिस शिवगणनम ने चुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मोताब शेख का नाम मतदाता सूची में शामिल करने का रास्ता साफ किया था। शेख बाद में जीते भी। संजय कपूर संपत्ति विवाद में पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ मध्यस्थ सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की मां रानी कपूर और पत्नी प्रिया कपूर के बीच फैमिली ट्रस्ट विवाद में पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया। कोर्ट ने कहा, ये पारिवारिक मामला है। परिवार तक सीमित रखें। मनोरंजन न बनाएं। कोर्ट ने दोनों पक्षों को खुले मन से मध्यस्थता में शामिल होने और बयानबाजी से दूर रहने को कहा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Hindi News National Breaking News Headlines Today, Pictures, Videos And More From Dainik Bhaskar 59 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली सरकार ने पुरानी दिल्ली में यमुना के बाढ़ क्षेत्र के पास रहने वाले निवासियों को बेदखली के नोटिस जारी किए हैं। सरकार ने बाढ़ के जोखिम और सार्वजनिक सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए, आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत यह कदम उठाया है। पुरानी दिल्ली के एडीशनल DM के नोटिस के अनुसार, यमुना बाजार के पास लगभग 310 घरों को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के स्वामित्व वाली बाढ़ क्षेत्र की जमीन पर अवैध अतिक्रमण के रूप में चिह्नित किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि जब यमुना नदी में जलस्तर बढ़ता है, तो यह इलाका हर साल आने वाली बाढ़ की चपेट में आ जाता है, जिससे इंसानी जान, मवेशियों और संपत्ति को गंभीर खतरा पैदा होता है। प्रशासन ने निवासियों को नोटिस की तारीख से 15 दिनों के भीतर यह इलाका खाली करने का निर्देश दिया है। लोगों से यह भी कहा गया है कि वे अपनी चीजें और निर्माण बाढ़ क्षेत्र से अपनी मर्जी से हटा लें। आज की बाकी बड़ी खबरें… SIR ट्रिब्यूनल : जस्टिस शिवगणनम का इस्तीफा पश्चिम बंगाल में विस चुनाव के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस टीएस शिवगणनम ने एसआईआर से जुड़े अपीलीय ट्रिब्यूनल से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इस्तीफे के लिए व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। जस्टिस शिवगणनम ने चुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मोताब शेख का नाम मतदाता सूची में शामिल करने का रास्ता साफ किया था। शेख बाद में जीते भी। संजय कपूर संपत्ति विवाद में पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ मध्यस्थ सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की मां रानी कपूर और पत्नी प्रिया कपूर के बीच फैमिली ट्रस्ट विवाद में पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया। कोर्ट ने कहा, ये पारिवारिक मामला है। परिवार तक सीमित रखें। मनोरंजन न बनाएं। कोर्ट ने दोनों पक्षों को खुले मन से मध्यस्थता में शामिल होने और बयानबाजी से दूर रहने को कहा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Jhalawar Baby Gori Attacked by Stray Dogs

Jhalawar Baby Gori Attacked by Stray Dogs

राजस्थान के झालावाड़ में कुत्तों के हमले में 2 साल की बच्ची की मौत हो गई। घटना शुक्रवार सुबह करीब 5 बजे भाटिया वर्कशॉप के पास एक अस्थायी टेंट के बाहर हुई। . बच्ची पिता के साथ टेंट के बाहर सो रही थी। तभी 3-4 कुत्ते अचानक वहां पहुंचे और बच्ची को उठाकर करीब 50 मीटर दूर ले गए। आहट सुनकर पिता उठे तो बच्ची गायब थी। पिता बच्ची को ढूंढते हुए मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक कुत्तों ने बच्ची को बुरी तरह नोच डाला था। पिता ने किसी तरह कुत्तों को भगाकर बच्ची को छुड़ाया और तुरंत एसआरजी अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बेटी की मौत के बाद उसके शव को गोद में लेकर रोते हुए पिता। काम की तलाश में आया था परिवार बच्ची गोरी के पिता राजूलाल मूल रूप से बारां जिले के भंवरगढ़ के रहने वाले हैं। वे करीब डेढ़ महीने पहले काम की तलाश में झालावाड़ आए थे। वे भाटिया वर्कशॉप के पास टेंट लगाकर रह रहे थे। शादी-ब्याह में ढोल बजाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। इसी अस्थायी टेंट के बाहर 2 साल की बच्ची पिता के साथ सो रही थी। 5 दिन पहले मां ने दिया था बेटी को जन्म जानकारी के अनुसार, गोरी की मां मनीषा ने 5 दिन पहले एसआरजी अस्पताल में एक बेटी को जन्म दिया है। नवजात की हालत गंभीर होने पर आईसीयू में रखा गया है। वहीं मनीषा की भी हालत कुछ ठीक नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। दर्जनों कुत्ते झुंड बनाकर घूमते हैं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। एसआरजी अस्पताल में डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शहर में बालाजी की छतरी के पास बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया गया। … कुत्तों के हमले से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… कुत्तों ने डेढ़-महीने के बच्चे का पेट फाड़ डाला, मौत:आंतें आ गई थीं बाहर, ऑर्गन हुए डैमेज; 4 दिन से वेंटिलेटर पर था अजमेर जिले के पीसांगन में डेढ़ महीने के बच्चे को कुत्तों ने बुरी तरह से नोच लिया था। कुत्तों ने उसका पेट फाड़ डाला, जिससे उसकी आंतें बाहर आ गई थीं। 4 दिन बाद हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। (पढ़िए पूरी खबर) कुत्तों ने 12 साल की बच्ची को नोच-नोचकर मार डाला:पहले भी बच्चों पर किया हमला, लोग बोले-कई बार शिकायत की प्रशासन सुनता ही नहीं बूंदी जिले में कुत्तों ने 12 साल की बच्ची को नोच-नोचकर मार डाला। बच्ची घर से कुछ दूरी पर खेत में गई थी। मासूम की चीखने के आवाज सुनकर आसपास के लोग और परिजन मौके पर पहुंचे तो कुत्ते बच्ची को नोच रहे थे। (पढ़िए पूरी खबर)

केरल में मुख्यमंत्री पद की दौड़ तेज: वेणुगोपाल को 43 कांग्रेस विधायकों का समर्थन, आईयूएमएल ने सतीसन को समर्थन दिया | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:08 मई, 2026, 09:45 IST यूडीएफ में कांग्रेस की प्रमुख सहयोगी, आईयूएमएल, 22 विधायकों के साथ गठबंधन में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी, कथित तौर पर विपक्ष के नेता वीडी सतीसन का समर्थन कर रही है। वीडी सतीसन को कांग्रेस और यूडीएफ अभियान के मुख्य चेहरे के रूप में देखा गया था। केरल के मुख्यमंत्री की दौड़ गरमाई: केरल के अगले मुख्यमंत्री को चुनने का काम कांग्रेस आलाकमान के लिए एक मुश्किल संतुलन कार्य बन गया है, जिसमें यूडीएफ की सत्ता में जोरदार वापसी के बाद वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल और वीडी सतीसन सबसे आगे उभर रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, 63 नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायकों में से 43 गुरुवार को तिरुवनंतपुरम में एआईसीसी पर्यवेक्षकों अजय माकन और मुकुल वासनिक द्वारा आयोजित परामर्श के दौरान शीर्ष पद के लिए एआईसीसी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल का समर्थन कर रहे हैं। मुट्ठी भर विधायकों ने अपनी पसंद नहीं बताई और समझा जाता है कि उन्होंने पर्यवेक्षकों को बता दिया है कि वे आलाकमान की पसंद का पालन करेंगे। इस बीच, यूडीएफ में कांग्रेस की प्रमुख सहयोगी, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), 22 विधायकों के साथ गठबंधन में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी, कथित तौर पर मुख्यमंत्री पद के लिए विपक्ष के नेता वीडी सतीसन का समर्थन कर रही है। आईयूएमएल नेताओं ने पर्यवेक्षकों को यह भी बताया कि उपचुनाव की आवश्यकता से बचने के लिए एक मौजूदा विधायक को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। सतीसन को कांग्रेस और यूडीएफ अभियान के मुख्य चेहरे के रूप में देखा गया था। विपक्ष के नेता के रूप में, उन्होंने पिछले पांच वर्षों में पिनाराई विजयन सरकार के खिलाफ हमले का नेतृत्व किया। पार्टी में कई लोगों का मानना ​​है कि जनता के मन में वह मुख्यमंत्री पद के लिए स्वाभाविक पसंद हैं। सूत्रों ने आगे कहा कि सतीसन ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें मुख्यमंत्री के अलावा कोई अन्य पद लेने में दिलचस्पी नहीं होगी। उनके रुख को सौदेबाजी की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. वेणुगोपाल और सतीसन के अलावा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला विवाद में बने हुए हैं, जिससे नेतृत्व का मुद्दा पार्टी के भीतर तीव्र पैरवी द्वारा चिह्नित त्रिकोणीय प्रतियोगिता बन गया है। कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी), जो तिरुवनंतपुरम में केपीसीसी मुख्यालय में हुई, ने पारंपरिक एक-पंक्ति प्रस्ताव पारित किया जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को सीएलपी नेता पर अंतिम निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया गया, जो अगला मुख्यमंत्री बनेगा। बैठक के बाद, पर्यवेक्षकों माकन और वासनिक ने नवनिर्वाचित विधायकों के साथ एक-पर-एक परामर्श किया और बाद में नेतृत्व के सवाल पर उनके विचारों का आकलन करने के लिए आईयूएमएल, केरल कांग्रेस गुटों और आरएसपी सहित यूडीएफ सहयोगियों के नेताओं से मुलाकात की। सूत्रों ने कहा कि सतीसन और चेन्निथला दोनों खेमों ने पर्यवेक्षकों से अगले मुख्यमंत्री का फैसला करते समय केवल विधायक संख्या पर भरोसा नहीं करने का आग्रह किया। उनका तर्क था कि पार्टी कार्यकर्ताओं की राय और जनभावना को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए. आईयूएमएल नेता पीके कुन्हालीकुट्टी ने एआईसीसी टीम से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहा, “पर्यवेक्षकों ने धैर्यपूर्वक हमारी बात सुनी और कहा कि वे हमारे रुख से आलाकमान को अवगत कराएंगे।” वासनिक ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ की जीत को “उल्लेखनीय” और “ऐतिहासिक” बताया, जबकि माकन ने कहा कि नेतृत्व निर्णय लेने से पहले सभी विधायकों के साथ विस्तृत परामर्श चाहता था। उम्मीद है कि दोनों पर्यवेक्षक दिल्ली में खड़गे को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे, हालांकि बैठक का समय अभी तय नहीं हुआ है क्योंकि दोनों नेता गुरुवार रात को राष्ट्रीय राजधानी नहीं पहुंचे थे। नेतृत्व की लड़ाई सड़कों और सोशल मीडिया पर भी फैल गई है। वेणुगोपाल के समर्थकों ने केपीसीसी मुख्यालय के बाहर और राज्य के विभिन्न हिस्सों में बड़े होर्डिंग्स लगाए, जबकि सतीसन के समर्थकों ने उन्हें अगला मुख्यमंत्री चुने जाने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। यूडीएफ ने 9 अप्रैल के विधानसभा चुनावों में व्यापक जनादेश हासिल किया, विधानसभा की 140 सीटों में से 102 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को अकेले 63 सीटें मिलीं। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तिरुवनंतपुरम, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया केरल में मुख्यमंत्री पद की दौड़ तेज: वेणुगोपाल को 43 कांग्रेस विधायकों का समर्थन, आईयूएमएल ने सतीसन को समर्थन दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट) केरल के मुख्यमंत्री की दौड़(टी)केरल के मुख्यमंत्री(टी)केरल की राजनीति(टी)सीएम की दौड़ केरल(टी)केरल सरकार(टी)नेतृत्व प्रतियोगिता केरल(टी)राज्य की राजनीति केरल(टी)केरल समाचार

DMK और AIADMK एक साथ? भारत में 5 सबसे चौंकाने वाले राजनीतिक गठबंधन जिन्हें किसी ने होते नहीं देखा

DMK और AIADMK एक साथ? भारत में 5 सबसे चौंकाने वाले राजनीतिक गठबंधन जिन्हें किसी ने होते नहीं देखा

भारतीय राजनीति में कोई स्थायी शत्रु नहीं है – केवल स्थायी महत्वाकांक्षाएँ हैं। वही हाथ जो गलियारे के पार उंगलियां उठाते थे, अब उस पार पहुंच रहे हैं। सत्ता का खेल कभी नहीं बदलता; केवल खिलाड़ी पुनर्व्यवस्थित होते हैं। द्रमुक और अन्नाद्रमुक – दशकों की प्रतिद्वंद्विता, प्रतिस्पर्धी विरासत और दो कद्दावर नेताओं की लंबी छाया। फिर भी इतिहास कहता है कि जब कुर्सी दांव पर हो तो विचारधारा झुक जाती है। तमिलनाडु देखता है, और इंतजार करता है। महाराष्ट्र ने हमें सबसे पहले दिखाया. हिंदुत्व की आग से जन्मी शिवसेना 2019 में कांग्रेस के साथ एक ही कैबिनेट टेबल पर बैठी। यह तीन साल तक चला, लेकिन विरोधाभास के बोझ ने सब कुछ खत्म कर दिया। पाठ स्पष्ट रूप से लिखा गया था, फिर भी अन्य लोग इसे बहुत देर से पढ़ते रहे। महबूबा मुफ्ती और नरेंद्र मोदी ने एक मंच, एक हाथ मिलाना और एक सरकार साझा की – जबकि धारा 370 के विपरीत पक्षों पर खड़े थे। जब 2019 में कानून गिर गया, तो गठबंधन भी गिर गया। कश्मीर में विश्वास हमेशा सत्ता की पहली हानि रहा है। (टैग्सटूट्रांसलेट)एआईएडीएमके(टी)चेन्नई(टी)डीएमके(टी)तमिलनाडु चुनाव 2026

Aamir Khan at Dadi Ki Shaadi Screening; Sister Nikhat Khans Big Role

Aamir Khan at Dadi Ki Shaadi Screening; Sister Nikhat Khans Big Role

14 मिनट पहले कॉपी लिंक आमिर खान हाल ही में फिल्म ‘दादी की शादी’ की स्पेशल स्क्रीनिंग में पहुंचे। फिल्म देखने के बाद आमिर ने फिल्म की स्टारकास्ट की जमकर तारीफ की। उन्होंने मजाक-मजाक में यह भी कह दिया कि डेब्यू फिल्म में रिद्धिमा कपूर साहनी ने अपने भाई रणबीर कपूर से भी बेहतर काम किया है। आमिर की बहन निखत खान भी इस फिल्म में एक अहम भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने ही फिल्म की टीम के लिए अपने घर पर स्क्रीनिंग और डिनर का आयोजन किया था। इस खास मौके पर नीतू कपूर, कपिल शर्मा, सादिया खतीब, रिद्धिमा कपूर साहनी और डायरेक्टर आशीष आर मोहन समेत फिल्म की पूरी टीम मौजूद थी। स्क्रीनिंग के बाद सभी ने साथ में डिनर किया। आमिर बोले- रणबीर से बेहतर काम किया फिल्म देखने के बाद आमिर काफी खुश नजर आए। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “8 मई को ‘दादी की शादी’ लग रही है। यह बहुत ही खूबसूरत फैमिली फिल्म है। इसमें इमोशन और ह्यूमर का अच्छा मेल है। यह फिल्म आपको हंसाएगी भी और आपके दिल को छू लेगी।” आमिर ने खासतौर पर रिद्धिमा के काम को सराहा और रणबीर कपूर का जिक्र करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्होंने रणबीर से भी बेहतर काम किया है। आमिर ने कपिल शर्मा के काम को भी ‘लाजवाब’ बताया और नीतू कपूर व शरतकुमार की परफॉर्मेंस की भी तारीफ की। रिश्तों और ड्रामे की कहानी है फिल्म ‘दादी की शादी’ एक ऐसी फिल्म है जो घर के भीतर के रिश्तों, शोर-शराबे, सीक्रेट्स और प्यार को दिखाती है। फिल्म का निर्देशन आशीष आर मोहन ने किया है। यह फिल्म इमोशनल स्टोरीटेलिंग के साथ-साथ संगीत और कॉमेडी का एक पूरा पैकेज मानी जा रही है। मेकर्स का दावा है कि यह एक ‘होलसम फैमिली एंटरटेनर’ है जो हर उम्र के दर्शकों को पसंद आएगी। फिल्म में नीतू कपूर के साथ शरतकुमार भी अहम रोल में नजर आएंगे। ये फिल्म आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

ट्रम्प की टैरिफ पॉलिसी को अमेरिकी कोर्ट ने अवैध बताया:10% शुल्क लगाने का फैसला रद्द; अदालत बोली- राष्ट्रपति ने शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया

ट्रम्प की टैरिफ पॉलिसी को अमेरिकी कोर्ट ने अवैध बताया:10% शुल्क लगाने का फैसला रद्द; अदालत बोली- राष्ट्रपति ने शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया

अमेरिका की एक फेडरल ट्रेड कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लगाए गए 10% ग्लोबल टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है। कोर्ट ने गुरुवार को 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि यह टैरिफ 1974 के व्यापार कानून के तहत सही नहीं थे और प्रशासन के पास कांग्रेस की अनुमति के बिना इतने बड़े पैमाने पर आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने अपने फैसले में कहा कि इसी साल की शुरुआत में लगाए गए ये टैरिफ कानूनन अमान्य हैं। ट्रम्प ने फरवरी में एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए इन ग्लोबल टैरिफ को लागू करने की घोषणा की थी। कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन के तर्कों को नकारा प्रशासन ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि अमेरिका 1.2 ट्रिलियन डॉलर के व्यापार घाटे और GDP के 4% के बराबर करंट अकाउंट डेफिसिट का सामना कर रहा है। हालांकि, जजों ने इसे खारिज करते हुए कहा कि इस तरह का व्यापार घाटा कानून की अनिवार्य शर्तों को पूरा नहीं करता है। कोर्ट के फैसले के बाद लिया गया था एक्शन यह मामला इसलिए भी अहम है, क्योंकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही ट्रम्प प्रशासन के कुछ टैरिफ फैसलों को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि राष्ट्रपति की इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स असीमित नहीं हैं। छोटे व्यापारियों ने कोर्ट में दलील दी थी कि 10% टैरिफ वाला नया आदेश सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को दरकिनार करने के लिए लाया गया था। कोर्ट ने माना कि सरकार ने कांग्रेस की दी गई शक्तियों का उल्लंघन किया है। हालांकि, तीन सदस्यीय पैनल में से एक जज ने असहमति जताते हुए कहा कि व्यापारिक मामलों में राष्ट्रपति के पास पावर होना चाहिए। खिलौना निर्माता बोले- यह हमारी जीत है ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर छोटे व्यापारियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। बेसिक फन कंपनी के CEO जे मय फोरमैन ने कहा कि यह उन अमेरिकी कंपनियों के लिए एक बड़ी जीत है जो सस्ती और सुरक्षित चीजें बनाने के लिए ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग पर निर्भर हैं। उन्होंने आगे कहा कि गैर-कानूनी टैरिफ की वजह से कंपनियों के लिए बाजार में टिके रहना और आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा था। अब इस फैसले से सप्लाई चेन को मैनेज करने वाली कंपनियों को स्पष्टता मिलेगी। भारत के लिए कोर्ट के इस फैसले के क्या मायने हैं ट्रम्प हमेशा से भारत के साथ व्यापारिक समझौतों और टैरिफ को लेकर मुखर रहे हैं। अगर अमेरिका में ग्लोबल टैरिफ की नीति कमजोर पड़ती है, तो भारतीय निर्यातकों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत हो सकता है। इससे भारतीय सामानों की अमेरिकी बाजार में पहुंच आसान बनी रहेगी और लागत में अनएक्सपेक्टेड बढ़ोतरी का डर कम होगा। इस मामले में आगे क्या होगा? माना जा रहा है कि ट्रम्प प्रशासन इस फैसले के खिलाफ अपील करेगा। यह मामला सबसे पहले वॉशिंगटन की ‘यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट’ में जाएगा। अगर वहां भी समाधान नहीं निकला, तो यह मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंच सकता है। क्या है ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122? इसमें राष्ट्रपति को 150 दिनों के लिए अस्थायी टैरिफ लगाने का अधिकार मिलता है, लेकिन यह केवल गंभीर भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पैमेंट्स) संकट या मुद्रा स्थिरता के जोखिम के समय ही इस्तेमाल किया जा सकता है। अमेरिका का ट्रेड डेफिसिट: वर्तमान में अमेरिका का माल व्यापार घाटा (गुड्स ट्रेड डेफिसिट) 1.2 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच गया है।

ट्रम्प की टैरिफ पॉलिसी को अमेरिकी कोर्ट ने अवैध बताया:10% शुल्क लगाने का फैसला रद्द; अदालत बोली- राष्ट्रपति ने शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया

ट्रम्प की टैरिफ पॉलिसी को अमेरिकी कोर्ट ने अवैध बताया:10% शुल्क लगाने का फैसला रद्द; अदालत बोली- राष्ट्रपति ने शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया

अमेरिका के एक फेडरल ट्रेड कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लगाए गए 10% ग्लोबल टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है। कोर्ट ने गुरुवार को 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि यह टैरिफ 1974 के व्यापार कानून के तहत सही नहीं थे और प्रशासन के पास कांग्रेस की अनुमति के बिना इतने बड़े पैमाने पर आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने अपने फैसले में कहा कि इसी साल की शुरुआत में लगाए गए ये टैरिफ कानूनन अमान्य हैं। ट्रम्प ने फरवरी में एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए इन ग्लोबल टैरिफ को लागू करने की घोषणा की थी। कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन के तर्कों को नकारा प्रशासन ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि अमेरिका 1.2 ट्रिलियन डॉलर के व्यापार घाटे और GDP के 4% के बराबर करंट अकाउंट डेफिसिट का सामना कर रहा है। हालांकि, जजों ने इसे खारिज करते हुए कहा कि इस तरह का व्यापार घाटा कानून की अनिवार्य शर्तों को पूरा नहीं करता है। कोर्ट के फैसले के बाद लिया गया था एक्शन यह मामला इसलिए भी अहम है, क्योंकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही ट्रम्प प्रशासन के कुछ टैरिफ फैसलों को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि राष्ट्रपति की इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स असीमित नहीं हैं। छोटे व्यापारियों ने कोर्ट में दलील दी थी कि 10% टैरिफ वाला नया आदेश सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को दरकिनार करने के लिए लाया गया था। कोर्ट ने माना कि सरकार ने कांग्रेस की दी गई शक्तियों का उल्लंघन किया है। हालांकि, तीन सदस्यीय पैनल में से एक जज ने असहमति जताते हुए कहा कि व्यापारिक मामलों में राष्ट्रपति के पास पावर होना चाहिए। खिलौना निर्माता बोले- यह हमारी जीत है ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर छोटे व्यापारियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। बेसिक फन कंपनी के CEO जे मय फोरमैन ने कहा कि यह उन अमेरिकी कंपनियों के लिए एक बड़ी जीत है जो सस्ती और सुरक्षित चीजें बनाने के लिए ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग पर निर्भर हैं। उन्होंने आगे कहा कि गैर-कानूनी टैरिफ की वजह से कंपनियों के लिए बाजार में टिके रहना और आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा था। अब इस फैसले से सप्लाई चेन को मैनेज करने वाली कंपनियों को स्पष्टता मिलेगी। भारत के लिए कोर्ट के इस फैसले के क्या मायने हैं ट्रम्प हमेशा से भारत के साथ व्यापारिक समझौतों और टैरिफ को लेकर मुखर रहे हैं। अगर अमेरिका में ग्लोबल टैरिफ की नीति कमजोर पड़ती है, तो भारतीय निर्यातकों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत हो सकता है। इससे भारतीय सामानों की अमेरिकी बाजार में पहुंच आसान बनी रहेगी और लागत में अनएक्सपेक्टेड बढ़ोतरी का डर कम होगा। इस मामले में आगे क्या होगा? माना जा रहा है कि ट्रम्प प्रशासन इस फैसले के खिलाफ अपील करेगा। यह मामला सबसे पहले वॉशिंगटन की ‘यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट’ में जाएगा। अगर वहां भी समाधान नहीं निकला, तो यह मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंच सकता है। क्या है ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122? इसमें राष्ट्रपति को 150 दिनों के लिए अस्थायी टैरिफ लगाने का अधिकार मिलता है, लेकिन यह केवल गंभीर भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पैमेंट्स) संकट या मुद्रा स्थिरता के जोखिम के समय ही इस्तेमाल किया जा सकता है। अमेरिका का ट्रेड डेफिसिट: वर्तमान में अमेरिका का माल व्यापार घाटा (गुड्स ट्रेड डेफिसिट) 1.2 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच गया है। ट्रम्प ने 49 साल पुराने कानून का इस्तेमाल कर टैरिफ लगाया था