hantavirus organ failure| hantavirus symptoms| हंतावायरस से किडनी फेल का खतरा, डब्ल्यूएचओ ने जारी अलर्ट

Hantavirus Kidney Failure Warning: कोरोना के बाद अब हंता वायरस ने दुनिया भर में चिंता पैदा कर दी है. खुद डब्ल्यूएचओ ने भी इसे लेकर 12 देशों को अलर्ट जारी किया है और इसे लेकर गाइडलाइंस जारी की हैं. डच क्रूज जहाज MV Hondius पर फैले इस वायरस की वजह से 3 लोगों की मौत की खबर सामने आई है जबकि 149 लोग यहां फंसे हैं. डब्ल्यूएचओ का कहना है कि इस वायरस से किडनी सहित ऑर्गन फेल्योर भी हो सकता है. बता दें कि हंतावायरस एक जूनोटिक वायरस है जो प्राकृतिक रूप से चूहों को संक्रमित करता है और कभी-कभी इंसानों में फैल जाता है. यह संक्रमण गंभीर बीमारी और कई मामलों में मौत का कारण बन सकता है. वैसे तो यह वायरस आसानी से नहीं फैलता लेकिन अगर एक बार शरीर में घुस जाए तो काफी नुकसान पहुंचाता है. डब्ल्यूएचओ का कहना है कि हंतावायरस ब्लड वेसल्स और किडनी पर गंभीर असर डाल सकता है. इससे किडनी डैमेज का भी खतरा पैदा होता है.एशियाई देशों में हेमरेजिक फीवर विद किडनी सिन्ड्रोम हो सकता है. किडनी शरीर की प्राकृतिक फिल्टर प्रणाली है लेकिन हंतावायरस इस सिस्टम को तेजी से बिगाड़ सकता है. इससे मूत्र की मात्रा कम हो जाती है, सूजन आ जाती है, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन होता है और गंभीर मामलों में किडनी फेलियर हो सकता है, जिसके लिए डायलिसिस की जरूरत पड़ सकती है. हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS)यह वायरस फेफड़ों को भी गंभीर नुकसान पहुंचाता है. हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (Hantavirus Pulmonary Syndrome) में फेफड़ों में तरल पदार्थ भर जाता है, जिससे सांस लेना बेहद मुश्किल हो जाता है. शुरुआती बुखार और थकान के कुछ दिनों बाद अचानक सीने में जकड़न और सांस फूलने की शिकायत बढ़ जाती है. गंभीर स्थिति में वेटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है. एक साथ कई अंगों पर करता है हमलाहंतावायरस केवल किडनी या फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता. यह रक्त वाहिकाओं में सूजन पैदा करता है, जिससे तरल पदार्थ ऊतकों में रिसने लगता है. इससे हृदय पर दबाव पड़ता है, ब्लड प्रेशर गिरता है और लीवर भी प्रभावित हो सकता है. शरीर में सिस्टेमिक इंफ्लेमेटरी रिस्पॉन्स ट्रिगर होने से इम्यून सिस्टम खुद अंगों को नुकसान पहुंचाने लगता है. डब्ल्यूएचओ की मानें तो हंता वायरस अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तरह से प्रभाव दिखाता है. यह अमेरिका में कार्डियोपल्मोनरी सिंड्रोम (HCPS) पैदा करता है, जो फेफड़ों और हृदय पर तेजी से हमला करता है. वहीं यूरोप और एशिया में यह हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (HFRS) का रूप लेता है, जिससे ब्लड वेसल्स् प्रभावित होती हैं और हार्ट व किडनी फेल्योर जो मुख्य रूप से किडनी और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है. कैसे फैलता है ये वायरस डब्ल्यूएचओ ने बताया है कि हंतावायरस एक गंभीर वायरस है जो मुख्य रूप से चूहों के मूत्र, मल, लार या उनके संपर्क में आए क्षेत्र से फैलता है.ये लक्षण आमतौर पर फ्लू (इन्फ्लूएंजा) जैसे दिखते हैं और 3 से 5 दिन तक रह सकते हैं. ये हैं हंता वायरस के लक्षण तेज बुखार और ठंड लगना, बहुत ज्यादा थकान और मांसपेशियों में तेज दर्द खासकर शरीर के निचले हिस्सों और कंधों में दर्द सिरदर्द, चक्कर आना, मतली, उल्टी दस्त और पेट दर्द आंखें लाल हो जाती हैं और रैशेज भी होते हैं. 4-10 दिन बाद दिखाता है विकराल रूप डब्ल्यूएचओ के मुताबिक हंता वायरस के लक्षण शुरू होने के 4 से 10 दिन बाद अचानक स्थिति बिगड़ सकती है और फिर सांस लेने में तकलीफ होने लगती है. फेफड़ों में पानी भरने लगता है और दिल ठीक से काम नहीं करता. अगर समय पर इलाज न मिले तो किडनी फेल्योर तक हो सकता है 30-40 फीसदी केसेज में मौत हो जाती है. क्या इस वायरस का इलाज है? टीओआई में छपी खबर के मुताबिक इस वायरस का कोई विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है. डॉक्टरों के अनुसार, शुरुआती चरण में सपोर्टिव मेडिकल केयर ही सबसे महत्वपूर्ण है. इसमें सांस, हृदय और किडनी की जटिलताओं पर सतर्क निगरानी और उपचार शामिल है, जिससे मरीज के बचने की दर बढ़ सकती है.
क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज:रणदीप हुड्डा स्टारर ‘इंस्पेक्टर अविनाश 2’ का ट्रेलर रिलीज, उर्वशी रौतेला का भी लीड रोल

रणदीप हुड्डा के शो ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ के दूसरे सीजन का ट्रेलर रिलीज हो चुका है। नीरज पाठक निर्देशित इस शो में 1990 के दशक के उत्तर प्रदेश की वो झलक है जिसमें पुलिस, प्रशासन और गुंडाराज के साथ-साथ खून-खराबा है। इस नए सीजन में इंस्पेक्टर अविनाश मिश्रा के जीवन में जबरदस्त तूफान खड़ा हो जाता है। अविनाश को इस बार एक ऐसी लड़ाई लड़नी पड़ती है जो पुलिस की खाकी वर्दी से कहीं आगे तक जाती है। इस ट्रेलर में अपराध, राजनीति और भ्रष्टाचार के साथ-साथ कहानी का रोमांच भी जबरदस्त है। अपराध सरगना शेख और उसकी साथी रहस्यमयी देवी का एक घातक हथियार गिरोह है। यहां सिस्टम के अंदर धोखा खाकर निलंबित और गिरफ्तार होकर, इंस्पेक्टर अविनाश एक बहुत बड़े साजिश का शिकार हो जाता है। अविनाश के इर्द-गिर्द एक ऐसा खेल रचा गया है जो उसके सिद्धांतों को तबाह करने को तैयार है। इस बार इंस्पेक्टर केवल अपराध से नहीं लड़ रहा, बल्कि अपने परिवार, अपनी सच्चाई और अपने अस्तित्व के लिए लड़ाई लड़ता दिख रहा है। इस ट्रेलर में जबरदस्त एक्शन हैं और दुश्मन कहीं अधिक घातक हैं। यह सीरीज उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारी अविनाश मिश्रा की सच्ची घटनाओं और जीवन पर बेस्ड है, जिन्हें राज्य में अपराधों को रोकने का अधिकार दिया गया था। इस शो में उर्वशी रौतेला, अमित सियाल, अभिमन्यु सिंह, रजनीश दुग्गल, शालिन भनोट और फ्रेडी दारूवाला भी अहम भूमिकाओं में हैं।
Gold Silver Prices India | 16 April Gold Down, Silver Up

नई दिल्ली17 मिनट पहले कॉपी लिंक चांदी के दाम में आज 16 अप्रैल को मामूली तेजी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, एक किलो चांदी 402 रुपए गिरकर 2,55,200 रुपए पर पहुंच गई है। इससे पहले गुरुवार को इसकी कीमत 2,54,798 रुपए प्रति किलो थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 9 रुपए घटकर 1,51,140 रुपए पर पहुंच गया है। इससे पहले 7 मई को इसकी कीमत 1,51,149 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत शहर 10 ग्राम 24 कैरेट दिल्ली ₹1,52,880 मुंबई ₹1,52,680 कोलकाता ₹1,52,680 चेन्नई ₹1,53,840 जयपुर ₹1,52,880 भोपाल ₹1,52,730 पटना ₹1,52,780 लखनऊ ₹1,52,880 रायपुर ₹1,52,680 अहमदाबाद ₹1,52,780 अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 वजहें ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: एक शहर से दूसरे शहर सोना ले जाने में ईंधन और सुरक्षा खर्च जुड़ता है, जिससे दूरी बढ़ने पर दाम बढ़ते हैं। खरीदारी की मात्रा: दक्षिण भारत में ज्यादा खपत (करीब 40%) के कारण ज्वेलर्स बड़ी खरीद करते हैं, लेकिन छूट का फायदा सीमित रहता है। लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: राज्य और शहर के ज्वेलरी एसोसिएशन स्थानीय मांग-सप्लाई के आधार पर रेट तय करते हैं। पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स का खरीदी रेट तय करता है कि वे ग्राहकों को कितनी कीमत में बेचेंगे। सोना इस साल 18 हजार और चांदी 25 हजार महंगी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 17,941 रुपए और चांदी 24,780 रुपए महंगी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.52 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.55 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। इस साल अब तक सोने-चांदी की चाल तारीख सोना चांदी 31 दिसंबर 2025 ₹1,33,195 ₹2,30,420 29 जनवरी 2026 ₹1,76,121 ₹3,85,933 28 फरवरी 2026 ₹1,50,997 ₹2,66,700 31 मार्च 2026 ₹1,46,733 ₹2,30,135 30 अप्रैल 2026 ₹1,50,263 ₹2,40,331 8 मई 2026 ₹1,51,140 ₹2,55,200 ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है। आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ तेजी से पिघलती है। स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आती है। क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… भारतीय घरों में देश की GDP से ज्यादा का सोना: 34,600 टन गोल्ड की कीमत ₹450 लाख करोड़, देश की GDP ₹370 लाख करोड़ भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने की वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर (₹450 लाख करोड़) के पार निकल गई है। यह आंकड़ा देश की कुल 4.1 ट्रिलियन डॉलर यानी, 370 लाख करोड़ रुपए की GDP से भी ज्यादा है। सोने की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के कारण ऐसा हुआ है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है। अभी सोने की वैल्यू 1.38 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब चल रही है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) के पार ट्रेड कर रहा है। रुपए में इसे बदलें तो इसकी वैल्यू 1.30 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब होती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Gold Silver Prices India | 16 April Gold Down, Silver Up

नई दिल्ली25 मिनट पहले कॉपी लिंक चांदी के दाम में आज 16 अप्रैल को मामूली तेजी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, एक किलो चांदी 402 रुपए गिरकर 2,55,200 रुपए पर पहुंच गई है। इससे पहले गुरुवार को इसकी कीमत 2,54,798 रुपए प्रति किलो थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 9 रुपए घटकर 1,51,140 रुपए पर पहुंच गया है। इससे पहले 7 मई को इसकी कीमत 1,51,149 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 वजहें ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: एक शहर से दूसरे शहर सोना ले जाने में ईंधन और सुरक्षा खर्च जुड़ता है, जिससे दूरी बढ़ने पर दाम बढ़ते हैं। खरीदारी की मात्रा: दक्षिण भारत में ज्यादा खपत (करीब 40%) के कारण ज्वेलर्स बड़ी खरीद करते हैं, लेकिन छूट का फायदा सीमित रहता है। लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: राज्य और शहर के ज्वेलरी एसोसिएशन स्थानीय मांग-सप्लाई के आधार पर रेट तय करते हैं। पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स का खरीदी रेट तय करता है कि वे ग्राहकों को कितनी कीमत में बेचेंगे। सोना इस साल 18 हजार और चांदी 25 हजार महंगी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 17,941 रुपए और चांदी 24,780 रुपए महंगी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.52 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.55 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है। आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ तेजी से पिघलती है। स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आती है। क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… भारतीय घरों में देश की GDP से ज्यादा का सोना: 34,600 टन गोल्ड की कीमत ₹450 लाख करोड़, देश की GDP ₹370 लाख करोड़ भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने की वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर (₹450 लाख करोड़) के पार निकल गई है। यह आंकड़ा देश की कुल 4.1 ट्रिलियन डॉलर यानी, 370 लाख करोड़ रुपए की GDP से भी ज्यादा है। सोने की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के कारण ऐसा हुआ है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है। अभी सोने की वैल्यू 1.38 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब चल रही है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) के पार ट्रेड कर रहा है। रुपए में इसे बदलें तो इसकी वैल्यू 1.30 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब होती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Bihar BPSC Recruitment Lathicharge | 46K Jobs Missing; 2026 Exam Calendar Empty

Hindi News Career Bihar BPSC Recruitment Lathicharge | 46K Jobs Missing; 2026 Exam Calendar Empty 29 मिनट पहले कॉपी लिंक पटना में BPSC TRE-4 भर्ती के नोटिफिकेशन की मांग कर रहे कैंडिडेट्स पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। तस्वीरों में दिख रहा है कि कैंडिडेट्स को सड़कों पर दौड़ा-दौड़कर पीटा गया। इस दौरान कई के सिर भी फटे गए। एक महिला कैंडिडेट को पुलिस वालों ने पैरों से भी कुचला। #WATCH | Patna, Bihar | Police resort to lathicharge to disperse the aspirants of the Teacher Recruitment Examination (TRE) 4.0 demanding the release of the examination notification for the Bihar Public Service Commission. pic.twitter.com/SqLDAX9kd5— ANI (@ANI) May 8, 2026 कैंडिडेट्स आज सुबह पटना कॉलेज से निकल BPSC दफ्तर तक मार्च करने वाले थे। पुलिस ने बीच में ही उन्हें रोका और जमकर लाठियां बरसाईं। बिहार में नई सरकार के गठन के बाद ये छात्रों पर पहला लाठीचार्ज है। इससे पहले BPSC TRE-4 भर्ती के ही कैंडिडेट्स कई बार लाठीचार्ज का शिकार हो चुके हैं। 46 हजार भर्तियों के नोटिफिकेशन की मांग कर रहे कैंडिडेट्स राज्य में शिक्षक के रिक्त पदों के लिए 2024 में आखिरी TRE-3 भर्ती आयोजित हुई थी। इससे बाद से कैंडिडेट्स नए नोटिफिकेशन की मांग करने लगे। हालांकि, आयोग ने अभी तक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है। इस परीक्षा की मदद से राज्य में 27 हजार शिक्षकों की भर्ती की जानी है। पूर्व शिक्षामंत्री ने कहा था- इसी साल मिलेगा नोटिफिकेशन पिछले शिक्षामंत्री सुनील कुमार ने सितंबर 2025 में कहा था- TRE-4 में 26 हजार से ज्यादा पदों के लिए वैकेंसी निकाली जाएगी। अगले 4 से 5 दिन के भीतर रिक्तियां BPSC को भेज दी जाएंगी। फिर दिसंबर 2025 में उन्होंने कहा- हम अभ्यर्थियों को भरोसा दिलाते हैं कि जनवरी के बाद TRE की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। हालांकि, भर्ती प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हो पाई है। राज्य में नई सरकार का भी गठन हो गया। नए शिक्षामंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा है- हम सबको मिलकर बिहार को बदलना है। जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं उनकी समस्या का जल्द सामाधान किया जाएगा। एग्जाम कैंलेंडर से TRE-4 गायब, भड़के कैंडिडेट्स आयोग ने 2 फरवरी को BPSC की 2026 में होने वाली सभी प्रतियोगी परीक्षाओं का कैलेंडर जारी किया। इसमें TRE-4 का जिक्र तक नहीं है। इससे कैंडिडेट्स भड़क गए और प्रदर्शन एक बार फिर शुरू हो गया। बिहार लोक सेवा आयोग के सचिव सत्य प्रकाश शर्मा ने कहा, ‘अभी BPSC के पास बिहार सरकार की ओर से रिकमेंडेशन नहीं आई है। यही वजह है कि BPSC-2026 के कैलेंडर में इस परीक्षा की चर्चा नहीं की गई है। सरकार नोटिफिकेशन भेजती है तो इसे आयोग के परीक्षा कैलेंडर में शामिल किया जाएगा।’ पहली बार लागू होगी डोमिसाइल नीति TRE-4 में पहली बार व्यवस्था होगी कि बिहार के युवाओं के लिए लगभग 85 फीसदी सीटें रिजर्व रहेंगी। 15 फीसदी सीटों पर दूसरे राज्य के निवासी और बिहार के वैसे लोग जिनकी मैट्रिक और इंटर की डिग्री दूसरे राज्यों की है, की भर्ती होगी। डोमिसाइल लागू होने पर बिहार के अधिक युवाओं को शिक्षक बनने का अवसर मिल सकेगा। पहले की नियुक्तियों पर आरोप लगता रहा है कि बिहार से बाहर के युवाओं ने काफी सीटें ले लीं। —————- ये खबरें भी पढ़ें… ‘जॉनी-जॉनी, यस पापा’ बच्चों को झूठ बोलना सिखाती है: कानपुर में बोले यूपी के शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय; कहा- ‘पुरानी हिंदी कविताओं में गहरे मूल्य’ उत्तर प्रदेश के हायर एजुकेशन मिनिस्टर योगेंद्र उपाध्याय पॉपुलर इंग्लिश राइम्स पर अपने बयान की वजह से चर्चा में हैं। उन्होंने 5 मई को कानपुर में एक समारोह में कहा कि बच्चों की इंग्लिश राइम ‘जॉनी-जॉनी यस पापा’ भारतीय मूल्य और संस्कार नहीं सिखाती, बल्कि झूठ बोलना सिखाती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
अल्लू अर्जुन की पत्नी पीड़ित परिवार से मिलीं:पुष्पा 2 के प्रीमियर में भगदड़ में घायल बच्चे के इलाज और पढ़ाई में मदद का भरोसा दिया

फिल्म पुष्पा 2 के प्रीमियर के दौरान हुई भगदड़ में घायल हुए बच्चे के परिवार से हाल ही में अल्लू अर्जुन के पिता और पत्नी ने मुलाकात की। अल्लू अरविंद और स्नेहा रेड्डी घायल बच्चे श्रीतेज के घर पहुंचे। अल्लू अरविंद और स्नेहा ने श्रीतेज की हेल्थ को लेकर जानकारी ली, परिवार के साथ समय बिताया और इलाज के दौरान हर संभव मदद जारी रखने का भरोसा दिया। मुलाकात के दौरान अल्लू अरविंद ने श्रीतेज की छोटी बहन की पढ़ाई का खर्च उठाने का भी वादा किया। अल्लू परिवार और पुष्पा 2 से जुड़ा प्रोडक्शन बैनर हादसे के बाद से ही श्रीतेज के इलाज का खर्च उठा रहा है। रिहैबिलिटेशन और लंबे इलाज के दौरान यह सहायता अब भी जारी है। अल्लू अर्जुन और फिल्म की टीम ने 2 करोड़ रुपए की मदद की प्रोड्यूसर दिल राजू ने बताया था कि परिवार की मदद के लिए ₹2 करोड़ जमा किए गए थे। अल्लू अर्जुन ने ₹1 करोड़ दिए, जबकि डायरेक्टर सुकुमार और फिल्म के प्रोड्यूसर्स में से हर एक ने ₹50 लाख दिए थे। भगदड़ में मां की मौत, बेटा घायल 4 दिसंबर 2024 को हैदराबाद के संध्या थिएटर में फिल्म पुष्पा 2 के प्रीमियर के दौरान 9 साल के श्रीतेज गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनकी मां रेवती की मौत हो गई थी। श्रीतेज को गंभीर हालत में अस्पताल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट में भर्ती कराया गया था। लंबे समय तक वह बेहोश रहे और बाद में उन्हें सांस लेने में दिक्कत और गंभीर न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें हुईं, जिसके कारण कई हफ्तों तक वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ा। करीब पांच महीने तक आईसीयू में रहने के बाद अप्रैल 2025 में श्रीतेज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इसके बाद उन्हें आगे के न्यूरोलॉजिकल इलाज के लिए रामगोपालपेट के एक रिहैबिलिटेशन सेंटर में शिफ्ट किया गया। इससे पहले 2025 में उनके पिता मोगडमपल्ली भास्कर ने टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत में कहा था, ‘श्रीतेज की हेल्थ में अभी बहुत कम सुधार हुआ है। वह हमें पहचानने में भी दिक्कत महसूस करते हैं। ज्यादातर समय वह बिना किसी भाव के देखते रहते हैं। फिलहाल उनकी स्पीच और स्वैलोइंग थेरेपी चल रही है। हमें उनकी रिकवरी की उम्मीद है।’
सुप्रीम कोर्ट बोला- मंत्री शाह को ऐसे कमेंट्स की आदत:कर्नल सोफिया मामले में एमपी सरकार को फटकार, कहा- बहुत हुआ, आदेश का पालन करें

सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अभियोजन स्वीकृति देने में हो रही देरी पर राज्य सरकार को फटकार लगाई। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने कड़े शब्दों में कहा- “Enough is enough (बस बहुत हुआ), अब हमारे आदेश का पालन कीजिए।” कोर्ट ने कहा- यह सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था सुनवाई के दौरान जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मंत्री का बचाव करते हुए कहा कि शायद उनके बयान को गलत समझा गया और वे महिला अधिकारी की प्रशंसा करना चाहते थे तो सीजेआई सूर्यकांत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा- यह सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। एक राजनेता के तौर पर उन्हें अच्छी तरह पता है कि किसी महिला अधिकारी की प्रशंसा कैसे की जाती है। कोर्ट ने SIT की स्टेटस रिपोर्ट का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि मंत्री को इस तरह के कमेंट करने की आदत है। इंदौर के पास रायकुंडा गांव में दिया था विवाद बयान यह विवाद पिछले साल भारत की ओर से पाकिस्तान के खिलाफ की गई क्रॉस-बॉर्डर सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर के बाद शुरू हुआ था। कर्नल सोफिया कुरैशी ने इस ऑपरेशन की मीडिया ब्रीफिंग की थी। इसके बाद महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने कहा था, “जिन्होंने हमारी बेटियों को विधवा किया, हमने उन्हें सबक सिखाने के लिए उनकी ही एक बहन को भेजा।” इस बयान को कर्नल कुरैशी के धर्म से जोड़कर देखा गया, जिसकी हर तरफ निंदा हुई। जज ने कहा था- अदालत के आदेश को लागू कराने जरूरत पड़ी तो नर्क भी एक कर दूंगा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। उन्होंने यहां तक कहा था- “अदालत के आदेश को लागू कराने के लिए जरूरत पड़ी तो मैं नर्क भी एक कर दूंगा।” एसआईटी ने सरकार से केस चलाने की परमिशन मांगी, दो हफ्ते से लंबित सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर मंत्री के खिलाफ केस चलाने (अभियोजन) के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगी है, जो पिछले दो हफ्तों से लंबित है। मंत्री शाह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152, 196 (1) (b) और 197(1)(c) के तहत मामला दर्ज है, जो राष्ट्रीय संप्रभुता को खतरे में डालने और समूहों के बीच दुश्मनी बढ़ाने से संबंधित हैं। अगली सुनवाई 4 हफ्ते बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह परिस्थितियों की समग्रता को देखते हुए जल्द निर्णय ले। कोर्ट ने अब इस मामले की सुनवाई 4 सप्ताह बाद तय की है। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री को गिरफ्तारी से सुरक्षा दे रखी है, लेकिन एफआईआर रद्द करने या माफी स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। ……………………………. यह खबर भी पढ़ें MP के मंत्री विजय शाह बोले- जिन्होंने बहनों का सिंदूर उजाड़ा, उन्हीं की बहन को भेजकर ऐसी-तैसी कराई मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री विजय शाह ने भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक बयान दिया है। उन्होंने कहा- जिन लोगों ने हमारी बेटियों का सिंदूर उजाड़ा था, मोदी जी ने उन्हीं की बहन भेजकर उनकी ऐसी की तैसी करा दी। पढ़ें पूरी खबर
मिलिए ‘सम्राट’ कैबिनेट के सबसे पढ़े-लिखे मंत्री से, जिनके पिता तीन बार सीएम रहे

जब बिहार की राजनीति पर चर्चा होती है, तो बातचीत अक्सर जातिगत गतिशीलता, जमीनी स्तर के प्रभाव और मजबूत राजनीतिक नेटवर्क के आसपास घूमती है। फिर भी वर्तमान बिहार सरकार के नेताओं में एक मंत्री ऐसे हैं जिनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि राष्ट्रीय राजनीतिक हलकों में भी पहचान रखती है। वह नेता हैं झंझारपुर के भाजपा विधायक नीतीश मिश्रा, जिनकी शैक्षिक यात्रा पटना और दिल्ली से लेकर इंग्लैंड, नीदरलैंड और यहां तक कि संयुक्त राज्य अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय तक फैली हुई है। राजनीति को नीति-संचालित शासन के साथ मिश्रित करने के लिए जाने जाने वाले, नीतीश मिश्रा को अक्सर बिहार के सबसे अकादमिक रूप से निपुण मंत्रियों में से एक के रूप में वर्णित किया गया है। नीतीश मिश्रा ने अपनी शिक्षा सेंट माइकल हाई स्कूल से शुरू की, जो पटना के प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थानों में से एक है, जहाँ उन्होंने स्कूल कैप्टन के रूप में भी काम किया। स्कूल पूरा करने के बाद, वह उच्च अध्ययन के लिए नई दिल्ली चले गए और 1994 में जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज से इतिहास में कला स्नातक (ऑनर्स) की डिग्री के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की। अपने कॉलेज के वर्षों के दौरान, उन्होंने अकादमिक उत्कृष्टता के लिए मान्यता अर्जित की और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए संस्थान का ‘अकादमिक उत्कृष्टता’ क्रेस्ट पुरस्कार प्राप्त किया। उनकी शैक्षणिक गतिविधियाँ स्नातक स्तर की पढ़ाई के साथ समाप्त नहीं हुईं। नीतीश मिश्रा ने बाद में प्रबंधन की पढ़ाई की और मास्ट्रिच स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के साथ-साथ फोर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के माध्यम से एमबीए की उपाधि प्राप्त की। जब उन्हें एक प्रतिष्ठित ब्रिटिश शेवनिंग स्कॉलर के रूप में चुना गया तो उनका अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक प्रदर्शन और बढ़ गया। कार्यक्रम के तहत, उन्होंने हल विश्वविद्यालय से वैश्विक राजनीतिक अर्थव्यवस्था में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पूरा किया। 2016 में, नीतीश मिश्रा ने हार्वर्ड केनेडी स्कूल में ‘इमर्जिंग लीडर्स प्रोग्राम’ में भाग लिया, जिससे उनकी वैश्विक शैक्षणिक प्रोफ़ाइल और मजबूत हुई। राजनीतिक पर्यवेक्षक अक्सर बताते हैं कि बिहार में बहुत कम मंत्रियों के पास कई देशों और विषयों में फैली इतनी व्यापक अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक पृष्ठभूमि है। नीतीश मिश्रा भी बिहार के सबसे प्रमुख राजनीतिक परिवारों में से एक से आते हैं। वह तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके जगन्नाथ मिश्रा के बेटे हैं। उनके चाचा, ललित नारायण मिश्रा, एक वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता थे और भारत के रेल मंत्री के रूप में कार्यरत थे। एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से संबंधित होने के बावजूद, नीतीश मिश्रा ने केवल विरासत की राजनीति पर निर्भर रहने के बजाय एक नीति-उन्मुख और शिक्षित राजनीतिक व्यक्ति के रूप में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई है। अपने राजनीतिक करियर के अलावा, मिश्रा को युवा नेतृत्व और सार्वजनिक प्रभाव के लिए भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। 2008 में, उन्हें ‘एमटीवी यूथ आइकन’ के रूप में सम्मानित किया गया था और ब्रिटिश उच्चायोग द्वारा उन्हें भारत के 30 सबसे प्रभावशाली युवा नेताओं में भी सूचीबद्ध किया गया था। इन पहचानों ने एक आधुनिक और सुधार-उन्मुख राजनेता के रूप में उनकी छवि को और निखारा। पिछले कुछ वर्षों में, नीतीश मिश्रा ने अपने शैक्षणिक और प्रबंधन प्रशिक्षण को बिहार में शासन और नीति कार्यान्वयन में लागू करने का प्रयास किया है। उद्योग मंत्री के रूप में अपने पहले कार्यकाल के दौरान, उन्होंने बिहार की भूमि बैंक प्रणाली और राज्य की इथेनॉल नीति से संबंधित पहल में भूमिका निभाई, दोनों को महत्वपूर्ण प्रशासनिक और औद्योगिक सुधारों के रूप में देखा गया। समर्थक अक्सर इन परियोजनाओं को राजनीति के प्रति उनके तकनीकी और प्रबंधन-संचालित दृष्टिकोण के उदाहरण के रूप में उद्धृत करते हैं। नीतीश मिश्रा अब पांचवीं बार झंझारपुर से विधायक चुने गए हैं, जो इस क्षेत्र में उनकी मजबूत राजनीतिक उपस्थिति को दर्शाता है। लगभग तीन दशकों की राजनीतिक यात्रा में, वह अंततः भाजपा के साथ मजबूती से जुड़ने से पहले जेडी (यू) और एचएएम सहित पार्टियों से जुड़े रहे। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली वर्तमान बिहार सरकार में, मिश्रा को पर्यटन और औद्योगिक विकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों और समर्थकों का मानना है कि उनका अंतरराष्ट्रीय अनुभव और प्रशासनिक अनुभव बिहार को अधिक निवेश के अवसर आकर्षित करने और अपने पर्यटन क्षेत्र को मजबूत करने में मदद कर सकता है। मूल रूप से दरभंगा से ताल्लुक रखने वाले और बाद में सुपौल में बसने वाले नीतीश मिश्रा आज भी बिहार की राजनीति में हाई-प्रोफाइल चेहरों में से एक बने हुए हैं। राजनीतिक विरासत, अकादमिक साख और प्रशासनिक अनुभव के संयोजन के साथ, राज्य में कई लोग उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखते हैं जो शासन में अधिक नीति-केंद्रित और विश्व स्तर पर जागरूक दृष्टिकोण लाने में सक्षम है। (टैग्सटूट्रांसलेट)बिहार समाचार(टी)बिहार राजनीति(टी)बिहार राजनीति समाचार(टी)कैबिनेट मंत्री(टी)भारतीय राजनेता(टी)पटना समाचार(टी)राजनेता
सिर्फ पेट के लिए नहीं, कैंसर से लड़ने में भी कारगर हो सकता है बेल! रिसर्च में बड़ा खुलासा

Last Updated:May 08, 2026, 13:59 IST पटना के महावीर कैंसर संस्थान के वैज्ञानिकों ने बेल के गूदे को लेकर ऐसा दावा किया है, जिसने मेडिकल जगत का ध्यान खींच लिया है. रिसर्च में पाया गया कि बेल के पल्प में मौजूद कुछ तत्व ब्रेस्ट कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोकने में मददगार हो सकते हैं. चूहों पर हुए परीक्षण में ट्यूमर सिकुड़ने के पॉजिटिव रिजल्ट भी सामने आए हैं. पटना. देश में स्तन कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. बिहार भी इससे अछूता नहीं है. यह गंभीर बीमारी अब केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि पुरुषों को भी अपनी चपेट में ले रही है. इस चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक लगातार नए शोध में जुटे हुए हैं, ताकि सटीक इलाज खोजा जा सके. इसी दिशा में पटना स्थित महावीर कैंसर संस्थान के वैज्ञानिकों ने एक अहम खोज की है. शोध के दौरान गर्मियों में सुपर ड्रिंक माने जाने वाले बेल के गूदे में ऐसे तत्व पाए गए हैं, जो स्तन कैंसर को रोकने में सहायक हो सकते हैं. चूहों पर इसका परीक्षण भी किया गया. इससे पॉजिटिव रिजल्ट सामने आए हैं. इस महत्वपूर्ण शोध में संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार की प्रमुख भूमिका रही है. वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उनके शोध में यह सामने आया है कि बेल के पल्प में ऐसे तत्व मौजूद हैं, जो कैंसररोधी प्रभाव रखते हैं. इस दावे की पुष्टि के लिए टीम ने चूहों पर प्रयोग किया. रिसर्च के दौरान चूहों को एक विशेष केमिकल दिया गया, जिससे करीब छह महीने में उनके स्तन में ट्यूमर विकसित हो गया. Add News18 as Preferred Source on Google इसके बाद चूहों को मिश्रित मात्रा में बेल का पल्प दिया गया. कुछ समय बाद यह देखा गया कि ट्यूमर का आकार धीरे-धीरे सिकुड़ने लगा और कुछ दिनों बाद पूरी तरह समाप्त हो गया. इसके बाद चूहे पूरी तरह स्वस्थ हो गए. इस शोध के आधार पर वैज्ञानिकों का मानना है कि बेल में ऐसे तत्व मौजूद हो सकते हैं, जो कैंसर के इलाज में सहायक साबित हो सकते हैं. हालांकि, इस पर अभी और विस्तृत शोध और मानव परीक्षण की आवश्यकता है. उन्होंने आगे बताया कि अब उनकी टीम बेल के पल्प में मौजूद मॉलिक्यूल को अलग यानी आइसोलेट कर दोबारा चूहों पर परीक्षण करेगी. अगर इस चरण में भी पॉजिटिव परिणाम मिलते हैं, तो शोध को पेटेंट कराया जाएगा और प्रकाशित किया जाएगा. इसके बाद अगला चरण मानवों पर क्लीनिकल ट्रायल का होगा, ताकि इसके प्रभाव की विस्तृत जांच की जा सके. उन्होंने यह भी बताया कि इस पूरे शोध में करीब तीन से चार साल का समय लगा है और प्रक्रिया अभी भी जारी है. इस महत्वपूर्ण अध्ययन को इंग्लैंड की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका नेचर जर्नल में भी प्रकाशित किया गया है. उन्होंने जानकारी दी कि शोध के अनुसार बेल के गूदे में कई प्रकार के फाइटोकेमिकल यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें कैरोटेनॉइड, फिनोलिक यौगिक, टैनिन, एल्कलॉइड, टरपेनॉइड, कूमरिन, स्टेरॉयड सैपोनिन, इनुलिन, कार्डियक ग्लाइकोसाइड्स और लिग्निन शामिल हैं. अध्ययन में पाया गया कि ये तत्व कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने में सहायक हो सकते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में कैंसर की दवाएं काफी महंगी हैं. कुछ दवाएं हजारों रुपये की होती हैं, जबकि कई की कीमत लाखों तक पहुंच जाती है. ऐसे में अगर इस शोध से प्रभावी मॉलिक्यूल विकसित हो जाता है, तो ब्रेस्ट कैंसर के इलाज की लागत कम हो सकती है और मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
‘व्यक्तिगत रूप से मिलना चाहिए था’: वीसीके ने व्हाट्सएप पर समर्थन मांगने के लिए टीवीके की आलोचना की, विजय को गुमराह बताया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:08 मई, 2026, 13:57 IST सेलवन ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ टीवीके नेता डीएमके के साथ अपना राजनीतिक हिसाब-किताब तय करने के लिए विजय की लोकप्रियता और फिल्म स्टार छवि का इस्तेमाल कर रहे हैं। वीसीके महासचिव सिंथनाई सेलवन के अनुसार, टीवीके कार्यकर्ताओं ने विजय से व्यक्तिगत रूप से संपर्क करने के बजाय व्हाट्सएप पर संदेश भेजकर समर्थन मांगा। 234 सदस्यीय विधानसभा में खंडित फैसले के बाद तमिलनाडु में सरकार गठन पर लगातार गतिरोध के बीच, विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) ने शुक्रवार को तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) प्रमुख विजय पर कथित तौर पर बहुमत का समर्थन इकट्ठा करने के लिए अभिनेता-राजनेता द्वारा व्यक्तिगत रूप से राजनीतिक नेताओं से संपर्क करने के बजाय व्हाट्सएप संदेशों के माध्यम से समर्थन मांगने की कोशिश करने का आरोप लगाया। एक्स पर एक लंबी पोस्ट में, वीसीके महासचिव सिंथनाई सेलवन ने टीवीके और विजय द्वारा चुनाव के बाद के घटनाक्रम को संभालने की तीखी आलोचना की और कहा कि विजय को अत्यधिक सावधानी से काम करना चाहिए था। लाइव अपडेट का पालन करें “ऐसे परिदृश्य में जहां सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत सुरक्षित नहीं था, उन्हें अत्यधिक सावधानी से काम करना चाहिए था। क्या विजय को उन राजनीतिक दल के नेताओं से व्यक्तिगत रूप से नहीं मिलना चाहिए था, जिनसे वह तुरंत समर्थन लेना चाहते हैं?” उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा। தமிழகத்தில் கவர்னர்புறவழியாக यह एक अच्छा विकल्प है. தமிழக மக்கள் விழிப்பாக இருக்க उत्तर அசாதாரண சூழலை கையாளுவதில் @TVKVijayHQ தடுமாறிப்போய் இருக்கிறாரா அல்லது அவருடன் இருக்கும் இரண்டாம் கட்டத்தலைவர்கள்… pic.twitter.com/MNABVodFiE– सिंथनाई सेलवन (@sinthanaivck) 8 मई 2026 उन्होंने सवाल किया कि क्या विजय व्यक्तिगत रूप से चुनाव के बाद की “असामान्य” स्थिति को प्रबंधित करने में लड़खड़ा रहे हैं या क्या उनके आसपास के दूसरे दर्जे के नेता उन्हें गुमराह कर रहे हैं। “क्या टीवीके चुनाव के बाद की असाधारण स्थिति को संभालने में लड़खड़ा रहा है, या क्या उसके आसपास के दूसरे दर्जे के नेता उसे भटका रहे हैं। क्या उसे दूसरे दर्जे के नेताओं के जाल में नहीं फंसने और भाजपा को राज्यपाल के रास्ते तमिलनाडु में प्रवेश करने से रोकने की आवश्यकता पर खुलकर चर्चा नहीं करनी चाहिए? हम व्हाट्सएप के माध्यम से समर्थन मांगने के लिए एक पत्र भेजने और फिर “जवाब दें” कहने को कैसे समझ सकते हैं?” सेल्वन ने जोड़ा। वीसीके महासचिव ने टीवीके के कुछ नेताओं पर चुनाव परिणामों के बाद अहंकार प्रदर्शित करने का आरोप लगाया और गठबंधन निर्माण के लिए आवश्यक सौहार्दपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने के बजाय डीएमके पर हमला करने और “प्रतिशोधपूर्ण स्वर” में बोलने वाले बयानों की आलोचना की। उन्होंने आगे टीवीके की “वंशवादी राजनीति” की आलोचना का मज़ाक उड़ाया, जिसमें कांग्रेस के साथ सहयोगी दलों से समर्थन मांगने के विरोधाभास की ओर इशारा किया गया। “जीत के बाद, चुनाव पूर्व विरोधाभासों को तेज किए बिना, श्री विजय को सभी नेताओं की सद्भावना अर्जित करने के लिए बड़ी उदारता के साथ मामलों को संभालना चाहिए था। लेकिन क्या यह सही है कि जैसे ही जीत की खबर आई, उन्होंने इसे राजशाही का युग समाप्त होने का दिन घोषित करके अहंकार और प्रतिशोधपूर्ण मानसिकता का खुलासा किया?” उसने कहा। “क्या कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने से बड़ी कोई विडंबना है – जो मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, राहुल गांधी और इसी तरह पांचवीं पीढ़ी के माध्यम से वंशवादी राजनीति का बोझ उठाती है – और फिर वंशवादी राजनीति की बात कर रही है? डीएमके को एक समाप्त राजशाही के रूप में ब्रांड करने और फिर जीतने के लिए डीएमके के नेतृत्व में गठबंधन बनाने के बाद, बिना किसी हिचकिचाहट के वामपंथियों और वीसीके से समर्थन मांगने में क्या तर्क या औचित्य है?” उन्होंने जोड़ा. सेलवन ने आगे कहा कि विजय, जिन्हें अपने विधायकों को राजनीतिक समझ और व्यक्तिगत स्नेह के माध्यम से एकजुट रखना चाहिए था, ने इसके बजाय विधायकों को सीमित करके “रिसॉर्ट राजनीति” को पुनर्जीवित किया है – एक कदम जिसे उन्होंने “सराहनीय नहीं” बताया। वीसीके नेता ने कुछ टीवीके सदस्यों की कथित टिप्पणियों की भी कड़ी आलोचना की, जिन्होंने दावा किया कि पार्टी के अंदर वीसीके कार्यकर्ता “स्लीपर सेल” की तरह काम कर रहे थे। “थिरुमा सहित वीसीके में केवल लगभग 20 लोग ही वास्तव में पार्टी से हैं। बाकी सभी लोग हमारे हैं। तो उन्हें स्लीपर सेल कैसे कहा जा सकता है?” उसने कहा। सेलवन ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ टीवीके नेता विजय की लोकप्रियता और फिल्म स्टार छवि का इस्तेमाल द्रमुक के साथ अपने राजनीतिक हिसाब-किताब को निपटाने के लिए कर रहे थे, जबकि विजय खुद को राजनीतिक रूप से दूर रख रहे थे। उन्होंने चुनाव के बाद अपने विधायकों को रिसॉर्ट में ले जाने के लिए टीवीके की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी तमिलनाडु में “रिसॉर्ट राजनीति” वापस ले आई है। संभावित राजनीतिक संकट के बारे में चेतावनी देते हुए, सेलवन ने दावा किया कि भाजपा राज्य में राज्यपाल शासन की स्थिति बनाने की कोशिश कर रही है और तमिलनाडु के लोगों से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को दरकिनार करने के किसी भी प्रयास के प्रति सतर्क रहने की अपील की। “श्री विजय को तुरंत यह एहसास होना चाहिए कि उनके आस-पास के लोगों के गलत दृष्टिकोण और गुमराह सलाह ही वे चीजें हैं जो उन तक समर्थन के मार्ग को अवरुद्ध कर रही हैं। इस स्थिति में खतरे को भांपते हुए जहां बीजेपी @बीजेपी4तमिलनाडु सभी लोकतांत्रिक मानदंडों का उल्लंघन करके राज्यपाल शासन लागू करने का प्रयास कर रही है, और तमिलनाडु की रक्षा के लिए इसे रोक रही है – यही लोगों के सामने चुनौती है।” उन्होंने जोड़ा. तमिलनाडु में क्या हो रहा है? उनकी टिप्पणी 234 सदस्यीय विधानसभा में खंडित फैसले के बाद आई, जहां टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन 118 के बहुमत के निशान से कम हो गई। डीएमके ने 59 सीटें हासिल कीं, जबकि एआईएडीएमके ने 47 सीटें जीतीं। कांग्रेस, जिसने नतीजों के बाद टीवीके को समर्थन दे दिया, के पास पांच विधायक हैं। हालाँकि, विजय द्वारा लड़ी गई और जीती गई दो सीटों में से एक से इस्तीफा देने की कानूनी आवश्यकता के हिसाब से टीवीके की प्रभावी संख्या 112 है। हालाँकि, ऐसा कोई भी कदम वाम दलों और विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) द्वारा









