Eye Care: गर्म हवाओं ने बढ़ाई आंखों की जलन! आजमाएं डॉक्टर के बताए 5 आसान उपाय, तुरंत मिलेगी राहत

Last Updated:May 12, 2026, 18:37 IST Eye Infection in Summer: हरियाणा के अंबाला में बढ़ती गर्मी, तेज धूप और धूल भरी हवाओं का असर अब लोगों की आंखों पर भी दिखाई देने लगा है. आंखों में जलन, खुजली, लालिमा और पानी आने की शिकायतों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल में पिछले कुछ दिनों में आंखों के मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है. डॉक्टरों के मुताबिक गर्म हवा और धूल के महीन कण आंखों में एलर्जी और संक्रमण पैदा कर रहे हैं. खासकर दोपहिया वाहन चालकों, मजदूरों और बुजुर्गों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है. अंबाला: लगातार बढ़ रही गर्मी और धूल भरी हवाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. इसका असर अब लोगों की आंखों की सेहत पर भी साफ दिखाई देने लगा है. तेज धूप, गर्म हवाओं और हवा में उड़ रही धूल-मिट्टी की वजह से आंखों में जलन, खुजली, लालिमा, पानी आना और संक्रमण जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. इसका असर अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल में भी देखने को मिल रहा है. अस्पताल की नेत्र रोग ओपीडी में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. जानकारी के मुताबिक करीब 10 दिन पहले तक रोजाना लगभग 120 मरीज आंखों के इलाज के लिए पहुंच रहे थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 200 से ज्यादा हो गई है. इनमें 25 से 30 मरीज ऐसे हैं, जो आंखों में संक्रमण, जलन और लगातार पानी आने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं. दोपहिया चालक और मजदूर ज्यादा प्रभावितडॉक्टरों का कहना है कि तेज गर्म हवाओं के साथ उड़ने वाले धूल के छोटे कण आंखों में जाकर एलर्जी और संक्रमण पैदा कर रहे हैं. यह समस्या सबसे ज्यादा दोपहिया वाहन चलाने वाले लोगों, खुले में काम करने वाले मजदूरों और बुजुर्गों में देखने को मिल रही है. अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदिक डॉक्टर डॉ. मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि मौसम में बदलाव और बढ़ते तापमान का असर शरीर के साथ-साथ आंखों पर भी पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी है कि लोग अपनी आंखों को धूल और तेज धूप से बचाएं. घर से बाहर निकलते समय पहनें चश्मा डॉ. मीनाक्षी शर्मा ने सलाह दी कि घर से बाहर निकलते समय धूप का चश्मा जरूर पहनना चाहिए. इससे आंखों को गर्म हवा और धूल से काफी हद तक बचाया जा सकता है. उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में गुलाब जल को आंखों के लिए काफी फायदेमंद माना गया है. आंखों में एक-दो बूंद गुलाब जल डालकर कुछ देर आराम करने से जलन में राहत मिल सकती है. इसके अलावा आंवला के पानी का इस्तेमाल भी आंखों के लिए लाभकारी माना जाता है. यह भी पढ़ें: दादी-नानी का अचूक नुस्खा! भीषण गर्मी में अमृत है ये शरबत, कब्ज और लू से दिलाएगा राहत त्रिफला जल से मिल सकती है राहतडॉ. मीनाक्षी शर्मा के अनुसार त्रिफला जल आंखों की थकान, लालिमा, खुजली और जलन कम करने में मददगार हो सकता है. इसके लिए रातभर त्रिफला को पानी में भिगो दें और सुबह उस पानी को अच्छी तरह छानकर आंखों को धोएं. उन्होंने बताया कि आई कप में यह पानी भरकर कुछ देर आंखों को उसमें रखने से भी राहत मिल सकती है. हल्दी वाला दूध और खीरा भी फायदेमंदउन्होंने बताया कि दूध में हल्दी मिलाकर पीने से आंखों की एलर्जी में फायदा मिलता है. वहीं आंखों के आसपास एलोवेरा जेल लगाने और खीरा या ककड़ी के पतले टुकड़े रखने से भी ठंडक मिलती है और जलन कम होती है. उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि अगर आंखों में लगातार लालिमा, ज्यादा जलन या धुंधला दिखाई देने जैसी परेशानी हो रही हो तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से जांच जरूर कराएं. बाहर से आते ही तुरंत ठंडा पानी न डालेंडॉ. मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद में पीपल, जामुन, आम और बरगद के पत्तों का काढ़ा भी आंखों के लिए लाभकारी माना गया है. हालांकि इसका उपयोग करने से पहले उसे कपड़े से अच्छी तरह छानना जरूरी होता है. उन्होंने यह भी कहा कि बाहर से घर आने के तुरंत बाद आंखों पर ठंडे पानी के छींटे नहीं मारने चाहिए. पहले शरीर का तापमान सामान्य होने दें, उसके बाद ही आंखों को पानी से धोएं. अचानक ठंडा पानी डालने से आंखें लाल होने का खतरा बढ़ सकता है. About the Author Seema Nath सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
अब छत्तीसगढ़ में तरबूज का मौत कनेक्शन ! क्या वाकई जहरीला था यह फल, कहां से आ रहा है यह जहर?

Last Updated:May 12, 2026, 18:33 IST Watermelon Tragedy in Chhattisgarh: तरबूज खाने के बाद तबीयत बिगड़ने की घटनाओं ने फलों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. एक्सपर्ट्स के अनुसार कीटनाशकों, गंदगी, गलत स्टोरेज और बैक्टीरिया की वजह से फल दूषित हो सकते हैं. फलों को अच्छी तरह धोकर और सावधानी से खरीदना चाहिए, ताकि फूड पॉइजनिंग समेत अन्य समस्याओं से बचा जा सके. तरबूज में आजकल केमिकल्स की मिलावट हो रही है, जिससे फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ गया है. Why Fruits Become Poisonous in Summer: तरबूज गर्मियों में सबसे ज्यादा खाया जाने वाला फल है. तरबूज में पानी की अच्छी मात्रा होती है और इसे सेहत के लिए बेहद फायदेमंद फ्रूट माना जाता है. हालांकि आजकल तरबूज में खतरनाक केमिकल्स की मिलावट के मामले भी बढ़ गए हैं. पिछले महीने मुंबई में तरबूज खाने के बाद एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत का मामला सामने आया था. हालांकि फॉरेंसिक जांच में पता चला कि तरबूज में चूहे मारने की दवा मिलाई गई थी. अब छत्तीसगढ़ में तरबूज खाने से एक लड़के की मौत हो गई और उसी परिवार के 3 अन्य बच्चे बीमार हो गए, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है. डॉक्टर्स के मुताबिक बच्चे की मौत की शुरुआती वजह फूड पॉइजनिंग हो सकती है, लेकिन अभी इस मामले की जांच की जा रही है और तरबूज के सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए हैं. जानकारी के मुताबिक बच्चों ने जो तरबूज खाया, वह कई घंटे पहले काटकर रखा हुआ था. डॉक्टर्स को अंदेशा है कि इस वजह से तरबूज कंटामिनेटेड हो सकता है और इसी से फूड पॉइजनिंग की नौबत आ सकती है. हालांकि कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि फूड पॉइजनिंग की वजह से तुरंत मौत सीवियर मामलों में ही होती है. फिलहाल जांच चल रही है और जांच के बाद ही पता चलेगा कि तरबूज में ऐसा क्या था, जिसकी वजह से एक लड़के की मौत हो गई और 3 बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं. तरबूज को लेकर हुई इन घटनाओं के बाद लोगों में तरबूज को लेकर डर बैठ गया है. अब सवाल है कि तरबूज कब सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है और फूड पॉइजनिंग से बचने के लिए तरबूज खाने से पहले किन बातों का ध्यान रखें. इस बारे में क्या है डॉक्टर की राय? लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने News18 को बताया कि आमतौर पर तरबूज सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन अगर तरबूज कंटामिनेटेड हो जाए, तो उसे खाने से फूड पॉइजनिंग हो सकती है. इसके अलावा तरबूज में मौजूद हानिकारक केमिकल्स, कीटनाशक, मिलावट या बैक्टीरिया स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं. गर्मियों में खुले में कटे हुए फल, गंदे पानी से धोए गए फल या लंबे समय तक खराब तरीके से स्टोर किए गए फल जल्दी कंटामिनेटेड हो सकते हैं. खेती के दौरान कई बार फलों पर अत्यधिक मात्रा में कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है. अगर इन केमिकल्स को सही तरीके से साफ न किया जाए, तो इनके अवशेष फल की सतह पर बने रह सकते हैं. कुछ मामलों में फलों को जल्दी पकाने या ज्यादा लाल और आकर्षक दिखाने के लिए भी हानिकारक केमिकल्स का इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं. हालांकि हर फल में ऐसा हो, यह जरूरी नहीं है. गर्मी में कटे हुए फल बिल्कुल न खाएं डॉक्टर के मुताबिक तरबूज और दूसरे कटे हुए फलों में बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा भी काफी बढ़ जाता है. अगर फल को काटने वाला चाकू, पानी या रखने की जगह साफ न हो, तो उसमें बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं. गर्म मौसम में यह खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है. दूषित फल खाने से फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है. खासकर बच्चों में यह परेशानी घातक हो सकती है. सभी लोगों को फल खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए. बहुत ज्यादा चमकदार, असामान्य रूप से बड़े या जरूरत से ज्यादा लाल दिखने वाले फलों को सावधानी से खरीदना चाहिए. खाने से पहले फलों को साफ पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी माना जाता है. तरबूज और अन्य फलों को साफ करने के लिए नमक या बेकिंग सोडा वाले पानी से फलों को धोना चाहिए, ताकि सतह पर मौजूद गंदगी और कुछ केमिकल्स कम हो सकें. बच्चों को फूड पॉइजनिंग का ज्यादा खतरा एक्सपर्ट ने बताया कि कटे हुए फल लंबे समय तक खुले में नहीं रखने चाहिए. सड़क किनारे खुले में बिक रहे कटे फलों को खाने से बचना बेहतर माना जाता है, क्योंकि उनमें धूल, मक्खियां और बैक्टीरिया आसानी से लग सकते हैं. अगर फल काटने के बाद उसका स्वाद, गंध या रंग असामान्य लगे, तो उसे तुरंत फेंक देना चाहिए. बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में फूड पॉइजनिंग का खतरा ज्यादा हो सकता है. इसलिए अगर फल खाने के बाद उल्टी, तेज पेट दर्द, चक्कर, बुखार या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. फल सेहत के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं, लेकिन उनकी सफाई और गुणवत्ता को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. सही तरीके से खरीदे और साफ किए गए फल आमतौर पर सुरक्षित होते हैं. जागरुकता और सावधानी अपनाकर फलों से जुड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
मेरे दुश्मन का दुश्मन: ‘पार्टी को स्टालिन से बचाने’ के लिए अन्नाद्रमुक के विद्रोही विजय का समर्थन क्यों कर रहे हैं? भारत समाचार

आखरी अपडेट:12 मई, 2026, 18:05 IST एआईएडीएमके विद्रोह का तात्कालिक उत्प्रेरक एडप्पादी के पलानीस्वामी (ईपीएस) के नेतृत्व में विश्वास का संकट है। विजय का समर्थन करके, विद्रोही एक नए ‘धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक न्याय’ मॉडल पर दांव लगा रहे हैं, जिसके बारे में उनका मानना है कि लंबे समय में डीएमके को सत्ता से बाहर रखने का बेहतर मौका है। फ़ाइल छवि 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य को मौलिक रूप से नया आकार दिया गया है। मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व में तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) की ऐतिहासिक जीत के बाद, एआईएडीएमके के भीतर एक नाटकीय विभाजन ने सत्ता के एक साधारण परिवर्तन से विपक्ष के पूर्ण पुनर्गठन पर ध्यान केंद्रित कर दिया है। मंगलवार को, वरिष्ठ अन्नाद्रमुक नेता एसपी वेलुमणि और सीवी शनमुगम ने बुधवार को होने वाले महत्वपूर्ण फ्लोर टेस्ट से ठीक 24 घंटे पहले टीवीके सरकार के लिए अपने समर्थन को औपचारिक रूप देने के लिए लगभग 30 विधायकों के एक गुट का नेतृत्व किया। विद्रोही एडप्पादी के पलानीस्वामी के खिलाफ क्यों हो गए हैं? विद्रोह का तात्कालिक उत्प्रेरक एडप्पादी के पलानीस्वामी (ईपीएस) के नेतृत्व में विश्वास का संकट है। 234 सदस्यीय सदन में एआईएडीएमके की सीटों की संख्या घटकर 47 रह जाने के बाद, जिससे पार्टी को प्रमुख विपक्ष के रूप में अपना दर्जा खोना पड़ा, वरिष्ठ क्षत्रपों ने पार्टी के चुनावी “अपमान” के लिए ईपीएस को दोषी ठहराया है। हालाँकि, सबसे विस्फोटक आरोप पूर्व कानून मंत्री सी. विजय के लिए अपने समर्थन को “डीएमके-एआईएडीएमके गठजोड़” के खिलाफ एक पूर्वव्यापी हमले के रूप में बताकर, विद्रोही खुद को पार्टी की संस्थापक विरोधी डीएमके विचारधारा के सच्चे संरक्षक के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। यह ‘द्रमुक विरोधी’ विरोधाभास कैसे काम करता है? विरोधाभास इस तथ्य में निहित है कि DMK से लड़ने के लिए, इन AIADMK नेताओं का मानना है कि उन्हें एक नए प्रतिद्वंद्वी-TVK का समर्थन करना होगा। दशकों से, अन्नाद्रमुक का अस्तित्व द्रमुक के प्राथमिक विकल्प के रूप में उसकी भूमिका पर आधारित रहा है। विद्रोहियों का तर्क है कि ईपीएस के तहत, पार्टी चुनावी रूप से स्थिर हो गई है। विजय का समर्थन करके, वे एक नए “धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक न्याय” मॉडल पर दांव लगा रहे हैं, जिसके बारे में उनका मानना है कि लंबे समय में द्रमुक को सत्ता से बाहर रखने का बेहतर मौका है। उनके लिए, विजय जैसे नवागंतुक का समर्थन करना द्रमुक को कमजोर अन्नाद्रमुक द्वारा छोड़े गए राजनीतिक शून्य को पुनः प्राप्त करने से रोकने के लिए एक “परिकलित बलिदान” है। कोंगु-उत्तरी गठजोड़ का क्या महत्व है? विद्रोह का भूगोल विशेष रूप से आधिकारिक अन्नाद्रमुक खेमे के लिए हानिकारक है। एसपी वेलुमणि कोंगु (पश्चिमी) बेल्ट के निर्विवाद ताकतवर नेता हैं, जबकि सीवी शनमुगम उत्तरी जिलों में महत्वपूर्ण प्रभाव रखते हैं। ये दोनों क्षेत्र पारंपरिक रूप से अन्नाद्रमुक की चुनावी ताकत का आधार रहे हैं। संभावित रूप से इन क्षेत्रों से 30 विधायकों को टीवीके खेमे में लाकर, विद्रोहियों ने पार्टी के क्षेत्रीय गढ़ों को प्रभावी ढंग से नष्ट कर दिया है। विद्रोहियों का यह “सुपर-बहुमत” – यदि कुछ और शामिल होते हैं तो दल-बदल विरोधी कानून से बचने के लिए 32 की दो-तिहाई आवश्यकता से कहीं अधिक – यह दर्शाता है कि 2017 में जयललिता के विभाजन के बाद से अन्नाद्रमुक अपने सबसे महत्वपूर्ण अस्तित्व संबंधी खतरे का सामना कर रही है। 13 मई को फ्लोर टेस्ट के दौरान क्या होगा? 30 एआईएडीएमके विद्रोहियों के समर्थन और कांग्रेस, वाम और वीसीके के मौजूदा समर्थन के साथ, मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार अब 150 वोटों से अधिक “सुपर-बहुमत” के साथ फ्लोर टेस्ट पास कर सकती है। यह उनके शुरुआती बहुमत 121 से एक बड़ी छलांग होगी। एकमात्र शेष बाधा कानूनी है: मद्रास उच्च न्यायालय ने तिरुपत्तूर में एक वोट से जीत के विवाद के कारण टीवीके के एक विधायक को मतदान करने से रोक दिया है। हालाँकि, अन्नाद्रमुक के विद्रोही गुट के आने से विश्वास मत के नतीजे पर अब कोई संदेह नहीं रहेगा। बुधवार का सत्र एक नए राजनीतिक युग के औपचारिक राज्याभिषेक के रूप में काम करेगा, जहां पारंपरिक द्रविड़ एकाधिकार को अपने पूर्ववर्तियों के खंडहरों पर बने टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया मेरे दुश्मन का दुश्मन: ‘पार्टी को स्टालिन से बचाने’ के लिए अन्नाद्रमुक के विद्रोही विजय का समर्थन क्यों कर रहे हैं? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)टीवीके(टी)विजय(टी)डीएमके(टी)एआईएडीएमके(टी)तमिलनाडु(टी)एमके स्टालिन
बैठकर या खड़े होकर पानी? जानिए शरीर पर इसके असर और कौन सा तरीका है सेहत के लिए सही

Water Drinking Tips: भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर ऐसी छोटी-छोटी आदतें अपना लेते हैं, जिन पर ध्यान ही नहीं जाता. ऑफिस में जल्दी-जल्दी काम करते हुए, सफर के दौरान या घर में ही जल्दबाजी में खड़े होकर पानी पी लेना अब आम बात बन चुकी है. उस वक्त हमें लगता है कि प्यास बुझ गई, बस काम खत्म. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पानी पीने का तरीका भी आपकी सेहत पर असर डाल सकता है? पुराने समय से ही घर के बड़े-बुजुर्ग इस बात पर जोर देते आए हैं कि पानी हमेशा बैठकर और आराम से पीना चाहिए. आज के समय में भले ही ये बातें पुरानी लगें, लेकिन कई लोग अब भी मानते हैं कि इसका सीधा संबंध हमारी हेल्थ से है. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि खड़े होकर पानी पीने की आदत आखिर कितना असर डालती है और क्या हमें इसे बदलने की जरूरत है. डाइजेशन पर पड़ सकता है असरखड़े होकर पानी पीने की आदत का सबसे पहला असर आपके पाचन तंत्र पर पड़ता है. माना जाता है कि जब आप खड़े होकर पानी पीते हैं, तो वह तेजी से पेट तक पहुंच जाता है. इस वजह से शरीर उसे सही तरीके से प्रोसेस नहीं कर पाता. क्या हो सकती हैं दिक्कतेंऐसी आदत लंबे समय तक बनी रहे तो गैस, एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. कई लोगों ने यह भी महसूस किया है कि जल्दी-जल्दी पानी पीने से खाना ठीक से पच नहीं पाता. वहीं, जब आप बैठकर धीरे-धीरे पानी पीते हैं, तो शरीर उसे बेहतर तरीके से एब्जॉर्ब करता है. जोड़ों में दर्द की शिकायतपुराने अनुभवों के आधार पर यह भी कहा जाता है कि खड़े होकर पानी पीने से जोड़ों पर असर पड़ सकता है. बढ़ती उम्र में बढ़ सकती है परेशानीअगर यह आदत लंबे समय तक जारी रहती है, तो घुटनों में दर्द, जोड़ों में अकड़न और कमजोरी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. हालांकि, इसके पीछे कोई मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन सावधानी रखना हमेशा बेहतर रहता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. किडनी पर असर की चर्चाहमारी किडनी शरीर से गंदगी बाहर निकालने का अहम काम करती है. क्यों कहा जाता है नुकसानदायकमान्यता है कि खड़े होकर पानी पीने से पानी तेजी से शरीर में पहुंचता है, जिससे किडनी को उसे फिल्टर करने का पर्याप्त समय नहीं मिलता. इसका असर शरीर की सफाई प्रक्रिया पर पड़ सकता है. हालांकि, इस दावे को लेकर मेडिकल रिसर्च अभी साफ नहीं है. शरीर को नहीं मिलती पूरी हाइड्रेशनकई लोगों का कहना है कि खड़े होकर पानी पीने से शरीर को पूरी तरह हाइड्रेट होने का फायदा नहीं मिलता. बार-बार प्यास लगने की वजहपानी तेजी से नीचे की ओर बह जाता है, जिससे शरीर के सभी हिस्सों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाता. यही वजह है कि कुछ लोगों को बार-बार प्यास लगती रहती है, भले ही उन्होंने पर्याप्त पानी पिया हो. हार्ट और लंग्स पर भी असर?कुछ मान्यताओं के अनुसार, जब पानी तेजी से शरीर में जाता है, तो इससे शरीर के अंदर लिक्विड बैलेंस पर हल्का असर पड़ सकता है. हर किसी में नहीं दिखता असरकुछ लोगों को सीने में भारीपन या हल्की असहजता महसूस हो सकती है, लेकिन यह समस्या हर व्यक्ति में नहीं होती. क्या है सही तरीका?अगर आप अपनी सेहत को लेकर सजग हैं, तो पानी पीने का तरीका बदलना मुश्किल नहीं है. अपनाएं ये आसान आदतेंहमेशा बैठकर और आराम से पानी पीने की कोशिश करें. छोटे-छोटे घूंट में पानी पीना ज्यादा बेहतर माना जाता है. बहुत ठंडा पानी पीने से बचें, क्योंकि इससे पाचन पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा, खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीने की बजाय थोड़ा समय देना बेहतर रहता है.
No Electricity, Water & Just One Teacher; Teachers Shortage Worse

Hindi News Career Bihar Schools: No Electricity, Water & Just One Teacher; Teachers Shortage Worse 6 मिनट पहले कॉपी लिंक नीति आयोग की जारी हालिया रिपोर्ट बताती है कि राज्य में शिक्षकों की कमी में बिहार पहले नंबर पर है। रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में 2.08 लाख एलिमेंट्री, 36,035 सेकेंडरी और 33,035 सीनियर सेकेंडरी शिक्षक पद खाली पड़े हैं। यानी लगभग 2,77,070 पद खाली हैं। ये रिपोर्ट उस वक्त जारी हुई जब बिहार में शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर प्रोटेस्ट हो रहे हैं। 8 मई को BPSC TRE-4 नोटिफिकेशन की मांग को लेकर प्रोटेस्ट कर रहे कैंडिडेट्स पर लाठीचार्ज हुआ, करीब 500 प्रोटेस्टर्स डिटेन किए गए और 4 की गिरफ्तारी हुई। पटना में BPSC TRE-4 भर्ती के नोटिफिकेशन की मांग कर रहे कैंडिडेट्स पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। बिहार के अलावा झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी एलिमेंट्री, सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी टीचर्स के पद खाली हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट से 11 जरूरी इनसाइट्स: नीति आयोग ने 7 मई को ‘स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया’ नाम की रिपोर्ट जारी की। यह रिपोर्ट पिछले 10 सालों में भारत की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की पूरी तस्वीर दिखाती है। 1. हर 10 में से 4 स्टूडेंट हाइयर सेकेंडरी एजुकेशन से ड्रॉप आउट हो रहा मौजूदा स्कूल एजुकेशन सिस्टम एक सीधे पिरामिड की तरह है। इसमें प्राइमरी स्कूल्स तो काफी हैं, लेकिन जैसे-जैसे क्लास बढ़ती जाती है, स्कूलों की संख्या घटती चली जाती है। देश में प्राइमरी लेवल पर ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) 90.9% है, यानी ज्यादातर बच्चे शुरुआती कक्षाओं में तो स्कूल पहुंच रहे हैं, लेकिन सेकेंडरी लेवल तक आते-आते यह आंकड़ा घटकर 78.7% रह जाता है। वहीं हायर सेकेंडरी लेवल पर ये और गिरकर सिर्फ 58.4% रह जाता है। इसका मतलब है कि हर 10 में से करीब 4 बच्चे हायर सेकेंडरी तक पहुंचने से पहले ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 5.4% स्कूल ही ऐसे हैं जहां बच्चे पहली से 12वीं तक लगातार पढ़ाई कर सकते हैं। बाकी ज्यादातर छात्रों को बीच-बीच में स्कूल बदलने पड़ते हैं। बच्चों के पढ़ाई छोड़ने की ये भी एक बड़ी वजह है। प्राइमरी लेवल पर ये ड्रॉपआउट रेट 0.3% है, अपर प्राइमरी में ये रेट 3.5% तो सेकेंडरी लेवल पर 11.5% है। रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा ड्रॉपआउट रेट पश्चिम बंगाल में 20% दर्ज की गई है। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश और कर्नाटक में 18.3-18.3%, जबकि असम में 17.5% बच्चे सेकेंडरी स्तर पर पढ़ाई छोड़ रहे हैं। 2. 1.19 लाख स्कूलों में बिजली, 14,505 स्कूलों में पीने का पानी नहीं रिपोर्ट के मुताबिक, UDISE+ 2024-25 के आंकड़े बताते हैं कि देश के 1.19 लाख स्कूलों में आज भी बिजली की सुविधा ठीक से उपलब्ध नहीं है। पानी और साफ-सफाई से जुड़ी सुविधाओं की हालत भी हर जगह एक जैसी नहीं है। हालांकि, 2014 में जहां 96.5% स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा थी, वह 2025 तक बढ़कर 99% हो गई है। इसके बावजूद अब भी 14,505 स्कूल ऐसे हैं जहां पीने के पानी का ठीक इंतजाम नहीं है। वहीं करीब 59,829 स्कूलों में हाथ धोने की सुविधा तक नहीं है, जिससे बच्चों की सेहत और साफ-सफाई पर असर पड़ता है। रिपोर्ट बताती है कि करीब 50% सरकारी सेकेंडरी स्कूल बिना साइंस लैब के चल रहे हैं। स्कूलों में इंटरनेट पहुंच पिछले कुछ सालों में आठ गुना बढ़कर 63.5% तक पहुंच गई है। इसके बावजूद अब भी एक-तिहाई स्कूलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं है। निजी स्कूलों की मांग लगातार बढ़ रही रिपोर्ट के मुताबिक, प्राइवेट अनएडेड स्कूलों की संख्या भले कम हो, लेकिन उनमें पढ़ने वाले बच्चों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है। 2014-15 में जहां 31.7% स्टूडेंट ही प्राइवेट स्कूलों में थे, वहीं 2024-25 में ये आंकड़ा बढ़कर 38.8% पहुंच गया। इसके उलट, पिछले दस साल में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की हिस्सेदारी घटी है। 2014-15 में कुल एनरोलमेंट में सरकारी स्कूलों की हिस्सेदारी 54.3% थी, जो 2024-25 में घटकर 49.25% रह गई। गवर्नमेंट-एडेड स्कूलों में करीब 10% बच्चे पढ़ते हैं, और इस दौरान उनकी हिस्सेदारी में भी हल्की गिरावट दर्ज हुई है। रिपोर्ट की मानें तो ये इस बात का संकेत है कि परिवारों के बीच निजी स्कूलों की मांग लगातार बढ़ रही है। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की क्वॉलिटी गिरी रिपोर्ट के मुताबिक, प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों में बच्चों का दाखिला तो बढ़ा है, लेकिन पढ़ने-लिखने और समझने की क्षमता में गिरावट आई है। 2014 में 8वीं के 74.7% स्टूडेंट्स सेकेंड ग्रेड की टेक्स्टबुक्स पढ़ सकते थे, लेकिन 2024 तक ये आंकड़ा घटकर 71.1% रह गया। यानी बच्चे स्कूल में तो पहुंच रहे हैं, मगर बुनियादी पढ़ाई की पकड़ कमजोर हो रही है। रिपोर्ट कहती है कि 8वीं के सिर्फ 45.8% स्टूडेंट्स ही डिवीजन का आसान सवाल हल कर पाते हैं। रिपोर्ट में PARAKH 2024 का हवाला देते हुए कहा गया है कि बच्चे रटकर पैटर्न समझ तो लेते हैं, लेकिन उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में उस ज्ञान का इस्तेमाल करने में दिक्कत होती है। परिवारों पर सेकेंडरी एजुकेशन का आर्थिक बोझ बढ़ रहा रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी स्कूलों में शुरुआती पढ़ाई ज्यादातर मुफ्त होती है, लेकिन सेकेंडरी स्तर पर किताबें, यूनिफॉर्म, आने-जाने का खर्च, एग्जाम फीस और प्राइवेट ट्यूशन जैसी चीजों पर जेब से काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। रिपोर्ट में अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक, सरकारी सेकेंडरी स्कूलों में एक बच्चे की पढ़ाई पर होने वाला खर्च प्राइमरी लेवल की तुलना में तीन से पांच गुना तक बढ़ जाता है। आर्थिक मजबूरियों की वजह से कई बच्चों ने स्कूल छोड़ा और घर की जिम्मेदारियां उठाने के लिए काम करना शुरू किया। रिपोर्ट में कोटेड PLFS 2020-21 के मुताबिक, स्कूल से बाहर 14 से 17 साल के 31% किशोर किसी न किसी काम में लगे हुए थे, जबकि 25% घर के कामकाज के लिए। कई लड़कियों को कम उम्र में ही घर और देखभाल की जिम्मेदारियां उठाने के लिए स्कूल छोड़ना पड़ता है। SC/ST/OBCs पढ़ाई में अपने साथियों से पिछड़ रहे सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित समूहों (SEDGs) जैसे SC/ST/OBCs के लिए एनरोलमेंट के साथ ही पढ़ाई के नतीजों में भी बड़ा फर्क है। PARAKH 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, SEDGs के स्टूडेंट लगभग हर मेजर सब्जेक्ट में अपने साथ
Punjab-Chandigarh top news; CBI Raid Vigilance HQ; Psycho Killer Encounter; Kirpan Exam Ban

. पंजाब में आज की सबसे बड़ी खबर विजिलेंस हेडक्वार्टर पर CBI की रेड से जुड़ी रही। टीम ने 20 लाख रुपए रिश्वत केस में तीन लोगों को गिरफ्तार किया। 9 लाख रुपए कैश मिला। दिनभर की 10 चुनिंदा बड़ी खबरों को VIDEO में देखने के लिए ऊपर क्लिक करें… इन 10 बड़ी खबरों को विस्तार से यहां पढ़ भी सकते हैं। तो आइए जानते हैं, पंजाब-चंडीगढ़ में दिनभर में क्या कुछ खास रहा… 1. पंजाब विजिलेंस हेडक्वार्टर पर CBI रेड, होटल में ₹20 लाख की डील पकड़ी पंजाब विजिलेंस हेडक्वार्टर पर सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की टीम ने रेड की। सोमवार देर रात छापा मारने के बाद टीम मंगलवार सुबह दोबारा पंजाब विजिलेंस चीफ के दफ्तर पहुंची। बताया जा रहा है कि टीम एक रिश्वत केस में जांच कर रही है। इससे पहले CBI ने चंडीगढ़ के पांच सितारा होटल में छापा मारा था, जहां ₹20 लाख की डील को पकड़ा था। यहां से पुलिस ने डीजी विजिलेंस के रीडर ओ.पी. राणा के बिचौलिए को गिरफ्तार किया, लेकिन गनमैन से मिली सूचना के बाद बाकी के लोग भाग निकले थे। इसके बाद CBI ने पीछा कर दो आरोपियों को पंजाब-हरियाणा सीमा पर अंबाला के पास से पकड़ लिया। पंजाब विजिलेंस के अधिकरी शरद सत्यम चौहान ने कहा कि प्राइवेट लोगों की गिरफ्तारी हुई है, सीबीआई जांच कर रही है। विजिलेंस पूरा सहयोगी करेगी, जब विजिलेंस चीफ से रीडर OP राणा के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब नहीं दिया। (पढ़ें पूरी खबर) 2. पंजाब का साइको किलर यूपी में मारा गया, 26 घंटे में 3 कत्ल किए थे पंजाब के तरनतारन का रहने वाला साइको किलर यूपी पुलिस के एनकाउंटर में मारा गया। उसने चलती ट्रेन और अस्पताल में 3 हत्याएं की थीं। चंदौली के SP आकाश पटेल ने बताया- पुलिस आरोपी को क्राइम सीन रीक्रिएट कराने के लिए लेकर गई थी। इसी दौरान उसने पुलिस अफसर की पिस्टल छीन ली और फायरिंग करते हुए भागने की कोशिश की। पुलिस की जवाबी फायरिंग में उसे सिर और सीने में गोली लग गई। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। 45 साल के गुरप्रीत सिंह ने चंदौली में 26 घंटे के भीतर बेवजह 3 हत्याएं की थीं। तीनों वारदातों का पैटर्न एक जैसा था-गोली सीधे कनपटी पर मारी गई थी। पहली हत्या-रविवार सुबह करीब 7 बजे पैसेंजर ट्रेन में एक युवक को गोली मार दी। दूसरी हत्या- रविवार रात 2 बजे जम्मूतवी एक्सप्रेस ट्रेन में बाथरूम गए युवक को गोली मार दी। तीसरी हत्या-सोमवार सुबह साढ़े 8 बजे प्राइवेट अस्पताल में घुसकर बेड पर लेटी महिला की कनपटी पर पिस्टल सटाकर गोली मार दी थी। आरोपी जवाब में उसने कहा- मैं मन का राजा हूं। शराब पीने के बाद मैं होश में नहीं रहता। घूम-घूमकर जो मन में आता है, करता हूं। एक नहीं, दो-तीन को मारकर आया हूं। (पढ़ें पूरी खबर) 3. पत्नी बोली- तू मर क्यों नहीं जाता, पति ने नहर में लगाई छलांग पठानकोट में पत्नी के अवैध संबंधों से परेशान एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली। परिवार का आरोप है कि पत्नी उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित करती थी और ताने मारते हुए कहती थी कि तू मर क्यों नहीं जाता। इससे वह काफी परेशान रहने लगा था। उसका प्रेमी भी धमकियां दे रहा था। परिजनों के अनुसार, मानसिक तनाव के चलते वह 6 मई की आधी रात को घर से बिना बताए निकल गया। इसके बाद परिवार ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लगा। करीब चार दिन बाद 10 मई को गांव वालों ने नहर में एक शव बहता देखा और इसकी सूचना परिवार को दी। परिजन मौके पर पहुंचे। मृतक की पहचान रमेश पाल (46) के रूप में हुई है, जो हलवाई का काम करता था। मामले में पुलिस ने मृतक की मां की शिकायत पर पत्नी जसवंती उर्फ ललिता को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, उसका कथित प्रेमी शिवा, निवासी गांव मराड़ा बहिरामपुर (गुरदासपुर), अभी फरार है। परिवार का आरोप है कि शिवा अक्सर सोशल मीडिया के जरिए जसवंती के संपर्क में रहता था। (पढ़ें पूरी खबर) 4, खेतों पर ठहर सकेंगे देशी-विदेशी मेहमान, किसान कमाई करेंगे पंजाब के खेत फसल उगाने के अलावा भी किसानों की आय का मुख्य जरिया बन सकेंगे। पंजाब सरकार ने फार्म स्टेट पॉलिसी-2026 लॉन्च कर दी। किसान खेतों में पर्यटकों को होमस्टे उपलब्ध करवाकर पैसे कमा सकेंगे।किसान अपनी कृषि भूमि पर पर्यटकों के लिए ठहरने, खाने और ग्रामीण अनुभव देने की सुविधा शुरू कर सकेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि फार्म स्टे के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाए, महिलाओं-युवाओं को रोजगार मिले और किसानों की आय में बढ़ोतरी हो। यह नीति उन किसानों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है जो परंपरागत खेती के साथ-साथ नई आय के स्रोत ढूंढ रहे हैं। फार्म स्टे के लिए कम से कम 2 कमरे और अधिक से अधिक 9 कमरे बनाए जा सकेंगे। मकान दो मंजिल और 9 मीटर से ज्यादा ऊंचा नहीं बनाया जा सकता है। फार्म स्टे में एक बार में 18 से ज्यादा लोगों को स्टे नहीं करवाया जा सकेगा। वहीं मालिक या उसके परिवार को भी वहां पर रहना जरूरी होगा। (पढ़ें पूरी खबर) 5. मोहाली में युवती से गैंगरेप, नौकरी का झांसा देकर फ्लैट पर ले गया मोहाली के खरड़ में एक युवती से 2 युवकों ने गैंगरेप किया। युवक ने पुलिस को बताया कि उसे नौकरी और किराए के फ्लैट का झांसा देकर एक फ्लैट में ले जाया गया, जहां उसके साथ गैंगरेप हुआ। पीड़िता राजस्थान की रहने वाली है और ब्यूटी पार्लर का काम करती है। उसके पिता बीमार रहते हैं। साल 2024 में वह चंडीगढ़ आई थी, जहां उसकी पहचान मोहाली की एक युवती से हुई थी। 4 मई को वह अपनी बड़ी बहन के साथ काम की तलाश में मोहाली दोस्त के पास आई थी। जिसने बताया कि खरड़ में किराए के मकान सस्ते हैं और नौकरी आसानी से मिल सकती है। 6 मई को दोपहर करीब 2 बजे पीड़िता खरड़ में नौकरी और किराए के मकान की तलाश में पहुंची। शाम करीब 6 बजे वह सेक्टर 124 में खड़ी थी, तभी एक बाइक सवार युवक
एआईएडीएमके में फिर दरार! क्यों 30 बागी विधायक विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार के पीछे रैली कर रहे हैं | भारत समाचार

आखरी अपडेट:12 मई, 2026, 17:54 IST अन्नाद्रमुक का नवीनतम संकट अपमानजनक चुनावी नतीजे के बाद आया है जिसमें पार्टी 167 सीटों पर चुनाव लड़कर केवल 47 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई। शनमुगम, जिन्होंने सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन दिया है, को अब “असली” अन्नाद्रमुक की स्थिति का दावा करने के लिए लगभग 32 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है – अन्नाद्रमुक की 47 विधायकों की कुल ताकत का दो-तिहाई। (पीटीआई फाइल फोटो) विपक्षी अन्नाद्रमुक एक और बड़ी आंतरिक टूट का सामना कर रही है, जिसमें लगभग 30 विद्रोही विधायक अलग हो गए हैं और विजय के नेतृत्व वाली तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) सरकार को अपना समर्थन दे रहे हैं। यह कदम 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन और महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) द्वारा लिए गए नेतृत्व निर्णयों पर बढ़ते गुस्से के मद्देनजर उठाया गया है। मतदान के बाद के झटके ने खुले विद्रोह को जन्म दिया अन्नाद्रमुक का ताजा संकट एक अपमानजनक चुनावी नतीजे के बाद आया है, जिसमें राज्य भर में बड़े पैमाने पर प्रचार अभियान के बावजूद, पार्टी 167 सीटों में से केवल 47 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई। इस हार ने वरिष्ठ नेताओं एसपी वेलुमणि और सी.वी. के नेतृत्व वाले एक गुट के साथ आंतरिक विभाजन को और बढ़ा दिया है। शनमुगम अब खुलेआम ईपीएस के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। विद्रोही समूह का दावा है कि पार्टी के 47 विधायकों में से 30 उसे समर्थन दे रहे हैं और उसने अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली नवगठित टीवीके सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है। यह भी पढ़ें: अन्नाद्रमुक में ताजा विद्रोह: 1972 में स्थापना के बाद से पार्टी के तीसरे बड़े विभाजन के पीछे क्या है? उनके अनुसार, यह निर्णय 2019, 2021, 2024 और 2026 में ईपीएस के नेतृत्व में लगातार चार चुनावी हार से प्रेरित है। उनका यह भी आरोप है कि ईपीएस ने सरकार बनाने के लिए प्रतिद्वंद्वी डीएमके के साथ बैकचैनल चर्चा का प्रयास किया, उनका कहना है कि यह कदम एआईएडीएमके की लंबे समय से चली आ रही डीएमके विरोधी विचारधारा का उल्लंघन है। विद्रोही विजय की टीवीके का समर्थन क्यों कर रहे हैं? पत्रकारों से बात करते हुए, विद्रोही नेताओं ने तर्क दिया कि बार-बार हार और मतदाताओं के विश्वास में गिरावट के बाद पार्टी को “नई राजनीतिक दिशा” की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विजय के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन करना “अम्मा (जयललिता) की विरासत को पुनर्जीवित करने” और प्रासंगिकता बहाल करने की दिशा में एक कदम था। उनसे औपचारिक रूप से टीवीके नेतृत्व से मिलने और महत्वपूर्ण शक्ति परीक्षण से पहले समर्थन पत्र सौंपने की भी उम्मीद है। विद्रोहियों का कहना है कि मौजूदा नेतृत्व संरचना कैडर की भावना और चुनावी वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने में विफल रही है। हालाँकि, ईपीएस ने महासचिव का पद बरकरार रखा है और पार्टी के एक छोटे लेकिन वफादार वर्ग से समर्थन बरकरार रखा है। अन्नाद्रमुक नेतृत्व ने विद्रोह को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है और असंतुष्टों पर अपने निर्वाचन क्षेत्रों में असफल होने के बाद झूठे दावे फैलाने का आरोप लगाया है। पिछले विभाजन हॉन्ट पार्टी में लौट आए मौजूदा उथल-पुथल ने अन्नाद्रमुक के गुटीय विभाजन के अशांत इतिहास की यादें ताजा कर दी हैं। पार्टी पहली बार 1987 में संस्थापक एमजी रामचंद्रन की मृत्यु के बाद टूटी, 1989 में पुनर्मिलन से पहले वीएन जानकी और जे. जयललिता के बीच विभाजित हो गई। 2016 में जयललिता की मृत्यु के बाद दूसरा बड़ा विभाजन सामने आया, जिससे ओ. पन्नीरसेल्वम, वीके शशिकला और ईपीएस के बीच सत्ता संघर्ष शुरू हो गया। हालाँकि ईपीएस ने अंततः 2017 तक नियंत्रण मजबूत कर लिया और बाद में 2022 में ओपीएस को निष्कासित कर दिया, आंतरिक घर्षण बना हुआ है। (पीटीआई से इनपुट्स के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तमिलनाडु, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया एआईएडीएमके में फिर दरार! क्यों 30 बागी विधायक विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार के पीछे रैली कर रहे हैं? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
केरल के सीएम पर जल्द ही ऐलान, राहुल गांधी के कांग्रेस नेताओं के साथ हंगामा, जानिए रेस में कौन-कौन से नाम

केरल के नए मुख्यमंत्री: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने केरल के अगले मुख्यमंत्री के चयन को लेकर पार्टी की राज्य इकाई के पूर्व अध्यक्षों समेत कई नेताओं के साथ मंत्रणा की और जल्द ही नाम की घोषणा की जा सकती है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के. मुरलीधरन का कहना है कि मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा मंगलवार देर शाम या बुधवार को की जा सकती है. कांग्रेस संसदीय दल के प्रमुख सोनिया गांधी के आवास ’10 जनपथ’ में हुई बैठक में राहुल गांधी ने प्रदेश कांग्रेस समिति के वरिष्ठ नेता और कद्दावर नेता से लेकर नोबल सदस्य के. सुधाकरन के अलावा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन हसन और के. मुरलीधरन और प्रदेश कांग्रेस समिति के तीन कार्यकारी अध्यक्ष पी.सी. विष्णुनाथ, शफी परम्बिल और ए.पी. अनिल कुमार के साथ अलग-अलग मंतव्य. मुरलीधरन का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे मंगलवार शाम बेंगलुरु से दिल्ली पहुंच रहे हैं और फिर वह केरल के नेताओं के साथ बैठक करेंगे और इसके बाद सोनिया गांधी से भी विचार-विमर्श कर सकते हैं। कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल, पिछली विधानसभा में प्रतिद्वंद्वी नेता वीडी श्रीशेषन और वरिष्ठ नेता राकेश चेन्निथला मुख्यमंत्री पद के प्रमुख उम्मीदवार माने जा रहे हैं। और पढ़ें: केरल विधानसभा चुनाव 2026 केसी वेणुगोपाल सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे, कांग्रेस आज रात या कल नाम तय कर सकती है केरल में मुख्यमंत्री चयन को लेकर कांग्रेस नेताओं की बैठक, जल्द हो सकती है घोषणा आठ मई को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने केरल के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक की थी। इस बैठक में वेणुगोपाल, चेन्निथला और शेरशेन के अलावा केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के प्रमुख सनी जोसेफ और पार्टी की राज्य प्रभारी दीपा दासमुंशी भी शामिल हुए। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूएन समर्थकों के प्रमुख घटक संघ इंडियन मुस्लिम लीग (आइयू क्लास) ने सोमवार को मुख्यमंत्री के चयन में दी गई अंतिम घोषणा में कहा था कि लंबे समय तक अस्थिरता के राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। केरल में हाल ही में रॉयल्स इलेक्शन चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक मोर्चा (यू एफईसी) ने राज्य में कुल 140 सीटों से 102 पर जीत दर्ज की। और पढ़ें: केरलम सीएम: केरलम का मुख्यमंत्री कौन होगा? खड़गे-राहुल के हाथों में आखिरी फैसला, 3 घंटे तक दिल्ली में चली बात | (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल(टी)राहुल गांधी(टी)केरल अगला सीएम(टी)सोनिया गांधी(टी)केरल ने(टी)केरल न्यूज(टी)केरल चुनाव(टी)राहुल गांधी(टी)केरल चुनाव(टी)अगला मुख्यमंत्री(टी)सोनिया गांधी(टी)केरल समाचार
केरल का नया मुख्यमंत्री कौन होगा? राहुल गांधी की अहम बातचीत के बाद केसी वेणुगोपाल को मिला बहुमत का समर्थन | भारत समाचार

आखरी अपडेट:12 मई, 2026, 17:39 IST राहुल गांधी ने केरल के कई पार्टी नेताओं से मुलाकात की, जिनमें पूर्व राज्य इकाई प्रमुख, कार्यकारी अध्यक्ष और अन्य प्रमुख नेता शामिल थे। इनमें से ज्यादातर ने केसी वेणुगोपाल को अगला सीएम चुना. कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल. (छवि: एएनआई) केरल के मुख्यमंत्री पद की दौड़ अब केवल तीन नेताओं तक सिमट कर रह गई है। हालाँकि, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा पार्टी के कई नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करने के बाद केसी वेणुगोपाल की संभावनाओं को बड़ा बढ़ावा मिला। गांधी ने सोनिया गांधी के 10, जनपथ आवास पर पूर्व राज्य इकाई प्रमुखों, कार्यकारी अध्यक्षों और अन्य प्रमुख नेताओं सहित केरल के कई पार्टी नेताओं से मुलाकात की। बैठक में केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रमुख एमएम हसन, के सुधाकरन और मुरलीधरन, केरल कांग्रेस अनुशासन समिति के प्रमुख तिरुवंचूर राधाकृष्णन, साथ ही कार्यकारी अध्यक्ष शफी परम्बिल, एपी अनिल कुमार और पीसी विष्णुनाथ शामिल हुए। केरल कांग्रेस के पांच पूर्व अध्यक्षों और तीन केपीसीसी कार्यकारी अध्यक्षों में से सात ने केरल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में वेणुगोपाल का समर्थन किया है। हिंदुस्तान टाइम्स. यह भी पढ़ें: केरल के मुख्यमंत्री के रूप में केसी वेणुगोपाल की पदोन्नति से दो उपचुनाव क्यों हो सकते हैं? एक अन्य दावेदार, वीडी सतीसन को दो नेताओं का समर्थन मिला, जबकि एक ने तटस्थ रहना पसंद किया। ऐसा लगता है कि समर्थन नहीं मिलने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला का नाम विवाद से बाहर हो गया है। मुख्यमंत्री के चयन में देरी से केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के भीतर तीव्र राजनीतिक हलचल शुरू हो गई, शीर्ष तीन दावेदारों के समर्थकों ने राष्ट्रीय राजधानी में विरोध, पोस्टर और प्रदर्शनों के माध्यम से अपने पसंदीदा नेताओं के लिए समर्थन व्यक्त किया। बैठक के दौरान, राहुल गांधी ने कथित तौर पर केरल कांग्रेस के भीतर युद्धरत गुटों द्वारा रोड शो और शक्ति प्रदर्शन के बारे में चिंता व्यक्त की। कब होगा सीएम का ऐलान? बैठक के बाद, केरल कांग्रेस के पूर्व प्रमुख के मुरलीधरन ने कहा कि उम्मीदवार की घोषणा मंगलवार रात या बुधवार सुबह तक की जाएगी। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “(कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन) खड़गे जी शाम को ही बेंगलुरु से वापस आ रहे हैं। इसलिए उनके वापस आने के बाद एक और चर्चा होगी और वे मैडम (सोनिया गांधी) से भी बात करेंगे। फिर फैसला आज रात या कल सुबह आएगा।” पार्टी पर्यवेक्षकों अजय माकन और मुकुल वासनिक ने कांग्रेस विधायकों से मुलाकात की और उनके विचार जानने के बाद भी अनिश्चितता जारी रहने के कारण पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व व्यापक विचार-विमर्श कर रहा है, जिसके बाद नेतृत्व ने पद के तीन मुख्य दावेदारों और केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ के साथ चर्चा की। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने एक दशक के बाद ऐतिहासिक वापसी करते हुए 140 विधानसभा सीटों में से 102 सीटें हासिल कीं। दूसरी ओर, लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट को सिर्फ 35 सीटें हासिल हुईं। देरी के बाद, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल में मुख्यमंत्री के नाम में देरी के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकारें शासन के बजाय आंतरिक विवादों और सत्ता संघर्ष में व्यस्त रहती हैं। कांग्रेस ने इस टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कहा कि पार्टी लोकतांत्रिक परामर्श प्रक्रिया का पालन करती है। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तिरुवनंतपुरम, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया केरल का नया मुख्यमंत्री कौन होगा? राहुल गांधी की अहम बातचीत के बाद केसी वेणुगोपाल को बहुमत का समर्थन मिला अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल के मुख्यमंत्री की दौड़(टी)केसी वेणुगोपाल(टी)राहुल गांधी की बैठक(टी)केरल कांग्रेस नेतृत्व(टी)यूडीएफ सरकार केरल(टी)वीडी सतीसन(टी)रमेश चेन्निथला(टी)मल्लिकार्जुन खड़गे
उत्तराखंड के पहले खेल विश्वविद्यालय का रास्ता साफ:हल्द्वानी में 12.317 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण को मिली अंतिम मंजूरी, नहीं कटेगा एक भी पेड़
उत्तराखंड के पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल विश्वविद्यालय के निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया। भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने नैनीताल जिले के हल्द्वानी वन प्रभाग के अंतर्गत गोलापार क्षेत्र में प्रस्तावित इस प्रोजेक्ट के लिए 12.317 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि के हस्तांतरण को अपनी अंतिम स्वीकृति दे दी है। इस महत्वपूर्ण मंजूरी के बाद अब गोलापार में खेल विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य में तेजी आएगी। सबसे खास बात यह है कि इस पूरी परियोजना के क्रियान्वयन में जंगल के पेड़ों की कटाई नहीं की जाएगी। उत्तराखंड के खेल भविष्य के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि वन भूमि हस्तांतरण को अंतिम मंजूरी मिलने पर प्रदेश की खेल मंत्री रेखा आर्या ने खुशी जाहिर की। उन्होंने इसे उत्तराखंड के खेल जगत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। खेल मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रही है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री धामी और केंद्र सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा, “यह विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं होगा, बल्कि प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए आधुनिक प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, अनुसंधान और उच्च स्तरीय कोचिंग का प्रमुख केंद्र बनेगा। हमारा लक्ष्य उत्तराखंड को ‘देवभूमि’ के साथ-साथ ‘खेलभूमि’ के रूप में स्थापित करना है।” इन सख्त शर्तों के साथ मिली है वन भूमि की अंतिम मंजूरी केंद्रीय मंत्रालय द्वारा जारी 8 मई के अंतिम स्वीकृति पत्र में कई सख्त पर्यावरण और मानक शर्तें लगाई गई हैं, जिनका राज्य सरकार और कार्यदायी संस्था को कड़ाई से पालन करना होगा। मंत्रालय की विशिष्ट शर्त के अनुसार, राज्य वन विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि खेल विश्वविद्यालय के निर्माण में पेड़ों की कटाई शामिल न हो। निर्माण क्षेत्र प्रस्तावित लेआउट से अधिक नहीं होगा। आवासीय क्षेत्र केवल 0.253 हेक्टेयर तक सीमित रहेगा और शेष क्षेत्र को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अलावा, बाढ़ और भूस्खलन से बचाव के लिए गोला नदी के किनारे एक रिटेनिंग वॉल बनाई जाएगी। यहां होगा क्षतिपूर्ति वनीकरण वन भूमि के बदले वन विभाग द्वारा ग्राम- खेरनी बेतालघाट में 24.364 हेक्टेयर सिविल सोयम भूमि और दक्षिण जसपुर में 49.268 हेक्टेयर भूमि पर प्रतिपूरक वनीकरण किया जाएगा। कार्य शुरू होने से पहले इस भूमि की तारबाड़ की जाएगी। मजदूरों को मिलेगा एलपीजी जंगल पर दबाव कम करने के लिए साइट पर काम करने वाले मजदूरों और कर्मचारियों को कार्यदायी संस्था द्वारा मुफ्त एलपीजी ईंधन उपलब्ध कराया जाएगा। वन क्षेत्र के अंदर कोई लेबर कैंप नहीं लगेगा। कैम्पा फंड में जमा हुए करोड़ों रुपए वन भूमि डायवर्जन के एवज में राष्ट्रीय कैम्पा प्राधिकरण के खाते में भारी-भरकम राशि जमा कराई गई है। इसमें क्षतिपूर्ति वनीकरण के लिए 3.85 करोड़ रुपए, शुद्ध वर्तमान मूल्य के रूप में 1.17 करोड़ रुपए, मृदा एवं जल संरक्षण के लिए 90.72 लाख और वन्यजीव प्रबंधन योजना के लिए 3.62 करोड़ रुपए जमा किए गए हैं। इस मंजूरी के साथ ही अब कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं के विकास का सपना जल्द ही जमीन पर उतरता दिखाई देगा।







