अल-सल्वाडोर के तानाशाह का ‘ठोक दो’ मॉडल:हत्या दर 104 से घटकर 1.9 पर आई; अब 12 साल के बच्चों को भी उम्रकैद

कभी दुनिया की ‘मर्डर कैपिटल’ कहे जाने वाले लैटिन अमेरिकी देश अल सल्वाडोर की सड़कों पर आज बच्चे रात को बेखौफ फुटबॉल खेलते हैं। यह बदलाव मुमकिन हुआ 44 वर्षीय राष्ट्रपति नाएब बुकेले के कारण, जिन्हें उनके प्रशंसक ‘मसीहा’ और विरोधी ‘क्रूर तानाशाह’ कहते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी उनकी तारीफ करते रहे हैं और वाइट हाउस में बुला भी चुके हैं। बुकेले ने अपनी 92% लोकप्रियता के दम पर देश को अमेरिका से भी अधिक सुरक्षित बनाया है, लेकिन कीमत लोकतंत्र चुका रहा है। 64 लाख आबादी के साथ अल साल्वाडोर दुनिया का वह देश है, जहां 1.9% लोग (हर 50 में से 1 शख्स) जेलों में कैद हैं। लोकतंत्र को ताक पर रखने वाला दुनिया का अनोखा प्रयोग बुकेले ने खुद को एक्स पर ‘दुनिया का सबसे कूल तानाशाह’ घोषित किया था। उनके ‘ठोक दो’ मॉडल का नतीजा यह है कि देश में 2015 में हत्या दर 104 थी, जो 2026 में घटकर महज 1.9 (प्रति एक लाख) रह गई है। विशेषज्ञों का सवाल है कि क्या बिना निष्पक्ष जांच और मानवाधिकारों के मिली यह ‘शांति’ लंबे समय तक टिक पाएगी? फिलहाल, बुकेले की उल्टी टोपी और सख्त लहजा लैटिन अमेरिका की राजनीति का सबसे शक्तिशाली ‘ब्रांड’ बन चुका है। सुरक्षा की चमक के पीछे सिसकते परिवार 25 मार्च 2022 को शुक्रवार की सुबह अल-सल्वाडोर की सड़कों पर लाशें बिछी थीं। सिर्फ एक दिन में 62 लोगों की हत्या। 1980 के गृहयुद्ध के बाद सबसे खूनी दिन। यह एमएस-13 गैंग की करतूत थी। गैंग राष्ट्रपति बुकेले के सर्फ सिटी टूरिज्म प्रोजेक्ट को रोकना चाहता था। तीन दिन में 87 लोगों को मार दिया गया। तब राष्ट्रपति बुकेले ने आपातकाल लगाया। संवैधानिक अधिकार खत्म कर दिए। अगले दो हफ्ते में 10,000 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं। अब बुकेले ने ऐसे कानून को मंजूरी दी है, जिसमें 12 साल तक के बच्चों को भी आजीवन कैद की सजा का प्रावधान है। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि हजारों निर्दोष युवा सिर्फ शक के आधार पर जेल की कालकोठरियों में ठूंसे गए हैं, जहां न खिड़की है, न परिवार से मिलने की इजाजत। 30 की क्षमता वाली सेल में 100 कैदी हैं। लेकिन बुकेले इसकी परवाह नहीं करते हैं। बिटकॉइन प्रयोग बुकेले ने 2021 में बिटकॉइन को कानूनी मुद्रा बनाया। ऐसा करने वाला अल-सल्वाडोर दुनिया का पहला देश बना, लेकिन 2025 में आर्थिक अस्थिरता और लोगों के विरोध के चलते इसे वापस लेना पड़ा। ‘बिटकॉइन सिटी’ का सपना अब भी अधूरा है। विश्लेषकों का कहना है, ‘बुकेले ने दिखाया है कि अगर आप जनता को सुरक्षा का अहसास करा दें, तो वे अपने मौलिक अधिकार और प्रेस की आजादी तक कुर्बान करने को तैयार हो जाते हैं।’
साउथ एक्टर दिलीप राज का हार्ट अटैक से निधन:47 साल के एक्टर को गोवा ट्रिप में सीने में दर्द उठा, बैंग्लोर लौटकर टेस्ट करवाना था

साउथ के पॉपुलर एक्टर दिलीप राज का मंगलवार सुबह निधन हो गया है। 47 साल के एक्टर के निधन का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया जा रहा है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, एक्टर को बैंग्लोर स्थित घर में सुबह सीने में तेज दर्द उठा था। परिवार द्वारा उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ दिनों पहले ही दिलीप राज गोवा ट्रिप पर गए थे। ट्रिप में बार-बार एक्टर के सीने में दर्द उठा था। तब उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। वो घर लौटकर टेस्ट करवाने वाले थे। लेकिन इससे पहले ही एक्टर का निध हो गया। एक्टर के निधन की खबर मिलने के बाद उनके साथ फिल्म मॉकटेल 3 में नजर आ चुकीं एक्ट्रेस श्वेता प्रसाद ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने लिखा, “दिलीप राज के निधन की चौंकाने वाली खबर सुनकर नींद खुली। अब भी यकीन करना बहुत मुश्किल है। हमारी हर बातचीत उनकी पत्नी और दोनों के एक-दूसरे के लिए प्यार के बारे में ही होती थी।” बता दें कि दिलीप राज की दो बेटियां भी हैं। 2 सितंबर 1978 में दिलीप राज का जन्म बैंग्लोर में हुआ था। डांस में रुचि होने के चलते वो कॉलेज के दिनों में ही डांस ग्रुप का हिस्सा बन गए। आगे उन्होंने बतौर सपोर्टिंग एक्टर कन्नड़ सिनेमा में काम करना शुरू किया और फिर टीवी इंडस्ट्री से जुड़े। टीवी में सफलता हासिल करने के बाद दिलीप ने 2005 की फिल्म भाई फ्रेंड से फिल्मों में डेब्यू किया। उन्होंने करीब 24 फिल्मों में काम किया है, जिनमें मिलाना, यू टर्न, ट्रेडमिल शामिल हैं।
साउथ एक्टर दिलीप राज का हार्ट अटैक से निधन:47 साल के एक्टर को गोवा ट्रिप में सीने में दर्द उठा, बैंग्लोर लौटकर टेस्ट करवाना था

साउथ के पॉपुलर एक्टर दिलीप राज का मंगलवार सुबह निधन हो गया है। 47 साल के एक्टर के निधन का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया जा रहा है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, एक्टर को बैंग्लोर स्थित घर में सुबह सीने में तेज दर्द उठा था। परिवार द्वारा उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ दिनों पहले ही दिलीप राज गोवा ट्रिप पर गए थे। ट्रिप में बार-बार एक्टर के सीने में दर्द उठा था। तब उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। वो घर लौटकर टेस्ट करवाने वाले थे। लेकिन इससे पहले ही एक्टर का निध हो गया। एक्टर के निधन की खबर मिलने के बाद उनके साथ फिल्म मॉकटेल 3 में नजर आ चुकीं एक्ट्रेस श्वेता प्रसाद ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने लिखा, “दिलीप राज के निधन की चौंकाने वाली खबर सुनकर नींद खुली। अब भी यकीन करना बहुत मुश्किल है। हमारी हर बातचीत उनकी पत्नी और दोनों के एक-दूसरे के लिए प्यार के बारे में ही होती थी।” बता दें कि दिलीप राज की दो बेटियां भी हैं। 2 सितंबर 1978 में दिलीप राज का जन्म बैंग्लोर में हुआ था। डांस में रुचि होने के चलते वो कॉलेज के दिनों में ही डांस ग्रुप का हिस्सा बन गए। आगे उन्होंने बतौर सपोर्टिंग एक्टर कन्नड़ सिनेमा में काम करना शुरू किया और फिर टीवी इंडस्ट्री से जुड़े। टीवी में सफलता हासिल करने के बाद दिलीप ने 2005 की फिल्म भाई फ्रेंड से फिल्मों में डेब्यू किया। उन्होंने करीब 24 फिल्मों में काम किया है, जिनमें मिलाना, यू टर्न, ट्रेडमिल शामिल हैं।
‘विधायकों को नकदी और मंत्री पद का लालच दिया गया’: विश्वास मत के दौरान ईपीएस ने किया बम विस्फोट | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:13 मई, 2026, 12:51 IST आंतरिक कलह बाद में खुलकर सामने आ गई जब अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता एसपी वेलुमणि को सदन में बोलने की अनुमति दी। एआईएडीएमके नेता एडप्पादी के पलानीस्वामी (ईपीएस)। तमिलनाडु फ्लोर टेस्ट: तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को उच्च राजनीतिक नाटक सामने आया जब अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के शक्ति परीक्षण के दौरान उनकी पार्टी के विधायकों को नकदी और मंत्री पद का लालच देने का प्रयास किया गया था। नवनियुक्त टीवीके सरकार द्वारा लाए गए विश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान बोलते हुए, पलानीस्वामी ने दावा किया कि विजय के पक्ष में मतदान करने के लिए कई अन्नाद्रमुक विधायकों से संपर्क किया गया था। उन्होंने कहा कि पार्टी तक यह जानकारी पहुंची है कि सरकार को समर्थन देने के बदले कुछ सदस्यों को मंत्री पद और बोर्ड अध्यक्ष पद की पेशकश की जा रही है. अन्नाद्रमुक नेता ने विधानसभा में कहा, “अन्नाद्रमुक विधायकों को तोड़ने के लिए खरीद-फरोख्त की कोशिश की गई है। मुझे जानकारी मिली है कि कुछ को मंत्री पद मिल सकता है और वे सत्तारूढ़ सरकार में हिस्सा ले सकते हैं। आपने कहा था कि आप एक शुद्ध और पारदर्शी सरकार चलाना चाहते हैं और हमें ऐसी उम्मीद है। हम कोई दुश्मन पार्टी नहीं हैं; हम एक जिम्मेदार विपक्ष के रूप में काम करना चाहते हैं।” उन्होंने आंतरिक दरार की अटकलों को भी खारिज कर दिया और दोहराया कि सभी 47 एआईएडीएमके विधायक विश्वास प्रस्ताव का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने “दो पत्तियां” चुनाव चिह्न के तहत 47 सीटें जीती हैं और इस बात पर जोर दिया कि पार्टी ने तमिलनाडु को भारत के अग्रणी राज्यों में से एक बनाने में प्रमुख भूमिका निभाई है। हालाँकि, आंतरिक दरार बाद में खुलकर सामने आ गई जब अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने वरिष्ठ अन्नाद्रमुक नेता एसपी वेलुमणि को सदन में बोलने की अनुमति दी – इस कदम पर ईपीएस खेमे ने कड़ी आपत्ति जताई। यह तर्क देते हुए कि एक ही पार्टी के दो नेता अलग-अलग बहस में भाग नहीं ले सकते, ईपीएस समर्थकों ने अध्यक्ष के फैसले का विरोध किया। हालाँकि, प्रभाकर ने अपने कॉल का बचाव करते हुए कहा कि यह तय करना उनका विशेषाधिकार है कि कार्यवाही के दौरान कौन बोल सकता है। पलानीस्वामी द्वारा घोषित पार्टी लाइन को सीधी चुनौती देते हुए, वेलुमणि ने विजय के नेतृत्व वाली सरकार का खुले तौर पर समर्थन किया। वेलुमणि ने कहा, “लोगों की इच्छा का सम्मान करते हुए, अन्नाद्रमुक मुख्यमंत्री द्वारा लाए गए विश्वास प्रस्ताव का समर्थन करती है।” विजय ने फ्लोर टेस्ट जीता इस बीच, सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने तमिलनाडु विधानसभा में महत्वपूर्ण फ्लोर टेस्ट पास कर लिया क्योंकि 234 सदस्यीय विधानसभा में 144 विधायकों ने टीवीके सरकार का समर्थन किया। 22 विधायकों ने सरकार के खिलाफ वोट किया और पांच तटस्थ रहे. महासचिव पलानीस्वामी की चेतावनी के बावजूद अन्नाद्रमुक के बागी गुटों द्वारा उनके पक्ष में मतदान करने के बाद विजय के लिए बहुमत की संख्या में बड़ी वृद्धि हुई। राज्यपाल आरवी आर्लेकर के 13 मई या उससे पहले इसे आयोजित करने के निर्देशों के अनुरूप, सदन में विश्वास मत आयोजित किया गया था। सत्तारूढ़ टीवीके को 144 विधायकों का समर्थन मिला. टीवीके की कुल ताकत 107 है। सत्ता पक्ष को कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन मिला. सीपीआई, सीपीआई (एम), वीसीके और आईयूएमएल- ने भी दो-दो विधायकों के साथ अभिनेता से नेता बने अभिनेता की सरकार को समर्थन दिया। विशेष रूप से, वरिष्ठ नेता एसपी वेलुमणि और सी वे शनमुगम के नेतृत्व में और पार्टी प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी के विरोधी 25 अन्नाद्रमुक विधायकों ने भी सरकार का समर्थन किया। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना समाचार राजनीति ‘विधायकों को नकदी और मंत्री पद का लालच दिया गया’: विश्वास मत के दौरान ईपीएस ने बम विस्फोट किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु फ्लोर टेस्ट(टी)सी जोसेफ विजय सरकार(टी)एआईएडीएमके आंतरिक दरार(टी)एडप्पादी के पलानीस्वामी(टी)एसपी वेलुमणि समर्थन(टी)टीवीके विश्वास प्रस्ताव(टी)तमिलनाडु विधानसभा राजनीति(टी)एआईएडीएमके बागी विधायक
Prateek Yadav Depression : क्या डिप्रेशन सिर्फ उदासी या मौत का रास्ता? डॉक्टर से जानिए कितनी खतरनाक है यह बीमारी

Last Updated:May 13, 2026, 12:43 IST Prateek Yadav Depression : सपा मुखिया अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव की दुखद मृत्यु ने एक बार फिर मेंटल हेल्थ और डिप्रेशन जैसे गंभीर मुद्दों पर बहस छेड़ दी है. हमारे समाज में अक्सर डिप्रेशन जैसा मुद्दा चर्चा का विषय नहीं बनता. अधिकांश लोग सोचते हैं ये कोई बीमारी नहीं है. लेकिन जो लोग डिप्रेशन में होते हैं उन्हें पता है कि यह कितनी खतरनाक बीमारी है. ऐसा कहा जा रहा है कि प्रतीक यादव घोर डिप्रेशन के शिकार थे. इसकी वजह से मौत हुई या नहीं, इसकी रिपोर्ट तो बाद में आएगी लेकिन हमने इस मुद्दे पर डॉ. से जानना चाहा कि क्या डिप्रेशन सिर्फ उदासी है या मौत का रास्ता. डिप्रेशन से मौत का कितना कनेक्शन कितना. Prateek Yadav Depression : प्रतीक यादव फिटनेस फ्रीक थे. इस कारण वे सोशल मीडिया पर अक्सर इंफ्लुएंसर की तरह छाए रहते थे. उनकी बॉडी और फिटनेस को देखते हुए कोई यह नहीं कह सकता था कि उन्हें कोई बीमारी है. हालांकि शुरुआती चर्चाओं में ऐसा कहा जा रहा है कि प्रतीक यादव डिप्रेशन से जूझ रहे थे. सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा है कि कभी-कभी कारोबार में आर्थिक नुकसान होने पर लोग बहुत दुखी हो जाते हैं. तो क्या कारोबार में घाटा ही डिप्रेशन की वजह थी. या कुछ और. लेकिन असली सवाल यह है कि क्या डिप्रेशन इतनी शक्तिशाली हो सकती है कि वह इंसान की जान ले ले? इस विषय पर हमने फोर्टिस अस्पताल, गुरुग्राम में सीनियर साइकेट्रिस्ट डॉ. नेहा अग्रवाल से बात की. क्या कारोबार में नुकसान बनी डिप्रेशन की वजह डॉ. नेहा अग्रवाल ने बताया कि डिप्रेशन के कई कारण होते है. कारोबार में घाटा भी इसकी वजह हो सकती है लेकिन यह जरूरी नहीं. वास्तव में डिप्रेशन खतरनाक बीमारी है जो अगर गंभीर हो जाए तो उसमें इंसान अपना सुध-बुध खो बैठता है और उसके मन में बार-बार मरने के विचार आते हैं. उसे लगता है कि मौत ही उसके दुख को खत्म करने का आखिरी रास्ता है. इस केस में अक्सर डिप्रेशन से जूझ रहे लोग सुसाइड कर लेते हैं. लेकिन इससे पहले काफी लंबा समय वह डिप्रेशन में बिताता है. वह हमेशा उदास रहता है, निराश रहता है और धीरे-धीरे वह सबसे अलगाव महसूस करने लगता है. इस तरह देखा जाए तो डिप्रेशन से लोगों की मौत भी हो सकती है लेकिन इसमें अधिकांश केस सुसाइड के ही होते हैं. मतलब इंसान बहुत ज्यादा डिप्रेशन में हो और उसमें चीजों को समझने की क्षमता कम होने लगे तो एक्सट्रीम कंडीशन में वह सुसाइड कर सकता है लेकिन अगर किसी की मौत सुसाइड से नहीं होती है और मौत हो जाती है तो उसमें बहुत लंबा वक्त लगेगा. इससे पहले शरीर के अधिकांश महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचेगा. डिप्रेशन है क्या वैज्ञानिक भाषा में कहें तो डिप्रेशन केवल उदासी या निराशा भर नहीं है. यह एक न्यूरोलॉजिकल और मूड डिसऑर्डर है. डॉ. नेहा अग्रवाल बताती हैं कि इसका मतलब यह हुआ कि जब व्यक्ति गहरी उदासी में चला जाता है तो उसके ब्रेन में कई तरह की रासायनिक हलचलें घट-बढ़ जाती है. इसका मुख्य कारण मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमिटर्स का असंतुलन है. सेरोटोनिन, डोपामाइन और नोरपेनेफ्रिन जैसे हार्मोन न्यूरोट्रांसमीटर है. ये व्यक्ति की भावनाओं और ऊर्जा को नियंत्रित करते हैं. जब कोई व्यक्ति डिप्रेशन में होता है तो उसके ब्रेन की संरचना में हिप्पोकैम्पस और एमिग्डाला के बीच संचार तंत्र धीमा हो जाता है. ब्रेन का हिप्पोकैम्पस वाला हिस्सा हमारे याददाश्त का केंद्र है जबकि एमिग्डाला वाला हिस्सा डर और भावनाओं का केंद्र है. इसमें संतुलन होना आवश्यक है. इन सबके साथ ही शरीर में तनाव वाला हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है जो तंत्रिका कोशिकाओं के बीच संपर्क को बाधित करता है. इस अवस्था में व्यक्ति की सोच में गहराई कम हो जाती है, तार्किकता का अभाव होने लगता है, नींद में कमी या ज्यादा नींद आने लगती है, सामान्य शारीरिक गतिविधियां भी प्रभावित होने लगती है. इससे मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर- MDD कहा जाता है. डिप्रेशन का लक्षण क्या है डॉ. नेहा अग्रवाल कहती हैं कि जब व्यक्ति डिप्रेशन में होता है तो वह बहुत उदास रहने लगता है. वह होपलेसनेस होने लगता है. उसे लगता है कि उसका जीवन बेकार है. उसका तार्किकता वाला हिस्सा कम करने लगता है. इससे आत्महत्या केे ख्याल आते हैं. जब इसका इलाज न किया जाए तो यह सीवर हो जाता है. इसमें ब्रेन के अंदर ऑवऑल न्यूरोट्रांसमीटर का लेवल चेंज होने लगता है. कई बार इंसान डिसीजन मेकिंग नहीं कर पाते है. सीवर डिप्रेशन का भी इलाज नकिया जाए तो यह साइकोटिक डिप्रेशन में बदल जाता है. यह एक्सट्रीम कंडीशन है. इसमें डिसीजन लेने की क्षमता बहुत कम हो जाती है. इसमें व्यक्ति रिएलिटी से टच खो देता. वह सही-गलत से अवगत नहीं रह पाते, उसका जजमेंट खराब होने लगता है. उसे लगता है कि हर कोई हमारे बारे में गलत सोच रहा है या गलत करने वाला है. ऐसे में बार-बार अपना जीवन बेकार लगने लगता है और खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने लगता है. कई बार ऐसा लगता है कि मर जाउंगा तो सब ठीक हो जाएगा. कुछ मामलों में दूसरों को भी नुकसान पहुंचा सकता है. तो क्या डिप्रेशन में बिना सुसाइड भी मौत हो सकती है अब असली सवाल यही है कि अगर डिप्रेशन में इंसान सुसाइड नहीं करता है तो क्या अपने आप मौत हो सकती है. डॉ. नेहा अग्रवाल बताती हैं कि इस केस में आमतौर पर सुसाइड ही सबसे बड़ा कारण है लेकिन अगर सुसाइड कारण नहीं है तो डिप्रेशन से मौत होने में सालों समय लगता है और इससे पहले शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों का खराब होना इसके लिए जिम्मेदार हो सकता है. अगर आत्महत्या नहीं हो तो डिप्रेशन वाले व्यक्ति दो अन्य बड़े कारण होते हैं. पहला है कि इस उदासी भरे जीवन में वह खाना-पीना छोड़ दें. खाना-पीना छोड़ने से शरीर में कई तरह की प्रक्रियाएं होंगी जो अंततः मौत की ओर ले जाएंगी. दूसरा कारण है कि जब व्यक्ति डिप्रेशन में होता है तो उसमें कॉर्टिसोल हार्मोन बहुत बढ़ जाता है और इम्युनिटी बहुत कमजोर होने लगती है. इससे पूरे शरीर में इंफ्लामेशन बढ़
‘यह सरकार कितने समय तक चलेगी’: तमिलनाडु में फ्लोर टेस्ट के दौरान डीएमके ने विजय सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाए | भारत समाचार

आखरी अपडेट:13 मई, 2026, 12:18 IST पार्टी के फैसले की घोषणा करते हुए, उदयनिधि ने कहा कि डीएमके वॉकआउट करेगी और विश्वास मत में भाग नहीं लेगी। उदयनिधि स्टालिन विश्वास मत सत्र के दौरान बोलते हैं। तमिलनाडु फ्लोर टेस्ट: तमिलनाडु में नवनिर्वाचित तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) सरकार के लिए चल रहे फ्लोर टेस्ट के बीच, विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने बुधवार को घोषणा की कि डीएमके मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के विश्वास मत सत्र से बाहर निकल जाएगी। विश्वास मत सत्र के दौरान विधानसभा को संबोधित करते हुए, द्रमुक विधायक ने नवनिर्वाचित सरकार पर निशाना साधा और कहा कि राज्य के लोग पहले से ही सवाल कर रहे थे कि सरकार कितने समय तक चलेगी और उन्हें लगता है कि उन्होंने इसके लिए मतदान करके “गंभीर त्रुटि” की है। लाइव अपडेट का पालन करें उन्होंने आगे कहा कि तमिलनाडु में एक “धर्मनिरपेक्ष सरकार” होनी चाहिए और दावा किया कि राज्य के लगभग 65% मतदाताओं ने चुनाव में मुख्यमंत्री विजय और टीवीके को खारिज कर दिया है। उदयनिधि ने विधानसभा में कहा, “कम से कम, अब जब उन्होंने सफलता हासिल कर ली है, तो उन्हें अपना काम इस तरह से करना चाहिए जिससे लोगों का विश्वास हासिल हो सके। जिन लोगों ने आपको वोट दिया था, उन्हें लगने लगा है कि उन्होंने गंभीर गलती की है।” चरण 65 वर्ष ऋण समाधान योजना வெற்றிக் கழக அரசின் நம்பிக்கை கோரும் मोबाइल फोनों के लिए आवेदन पत्र मोबाइल फोन नंबर मोबाइल फोन नंबर சக்தி என்று சொல்லி மக்களை ஏமாற்றிய और भी बहुत कुछ… — उदय – தமிழ்நாட்டை தலைகுனிய விடமாட்டேன் (@Udhaystalin) 13 मई 2026 नई सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “यह सरकार कितने समय तक चलेगी, लोग इस बारे में सोच रहे हैं।” द्रमुक नेता ने सरकार से “लोगों को महीनों तक इंतजार न कराने” का भी आग्रह किया और कहा कि सत्तारूढ़ दल को चुनाव अभियान के दौरान किए गए वादों को पूरा करना चाहिए। पार्टी के फैसले की घोषणा करते हुए, उदयनिधि ने कहा कि डीएमके वॉकआउट करेगी और विश्वास मत में भाग नहीं लेगी। #घड़ी | चेन्नई | विपक्ष के नेता और द्रमुक विधायक उदयनिधि स्टालिन ने अपने विधायकों के साथ तमिलनाडु विधानसभा से बहिर्गमन किया क्योंकि टीवीके सरकार को आज शक्ति परीक्षण का सामना करना है। pic.twitter.com/uLQWaIAvO0– एएनआई (@ANI) 13 मई 2026 इसके अतिरिक्त, द्रमुक की सहयोगी एमएमके ने भी विश्वास मत का विरोध किया, इसके नेता जवाहिरुल्लाह ने राज्य मंत्रिमंडल में मुस्लिम प्रतिनिधित्व की कमी का मुद्दा उठाया। एक अन्य सहयोगी मनिथानेया जनानायगा काची (एमजेके) ने भी विश्वास मत के दौरान विजय और उनकी पार्टी के खिलाफ मतदान किया। विजय को इन पार्टियों का समर्थन मिल रहा है इस बीच, कांग्रेस, सीपीआई (एम) और वीसीके विधायकों ने टीवीके सरकार को समर्थन दिया है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), जिसके दो विधायक हैं, ने भी टीवीके सरकार को समर्थन दिया है। निष्कासित अम्मा मक्कल मुनेत्र कज़गम (एएमएमके) विधायक कामराज ने भी विधानसभा में टीवीके का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, “मैंने कल तमिलागा वेट्ट्री कज़गम सरकार का समर्थन किया था, मैं आज भी इसका समर्थन करता हूं, और मैं अगले पांच वर्षों तक इसका समर्थन करना जारी रखूंगा। सीएम विजय पूरे राज्य की रक्षा कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि वह मुझे भी नहीं छोड़ेंगे। मुझे यकीन है कि हमारा विजय मेरी रक्षा करेगा और मुझे भी बचाएगा।” तमिलनाडु सरकार का गठन कैसे हुआ? विजय की टीवीके हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन 234 सदस्यीय सदन में बहुमत के आंकड़े 118 से 10 सीटें कम रह गई। हालाँकि, चूंकि विजय ने दो सीटें जीतीं और उन्होंने उनमें से एक से इस्तीफा दे दिया, इसलिए कमी 11 हो गई। तब से, अभिनेता से नेता बने अभिनेता ने कांग्रेस (5), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (2), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (2), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (2) और विदुथलाई चिरुथिगल काची (2) से समर्थन प्राप्त कर लिया है, जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन की ताकत 120 हो गई है और पिछले सप्ताह सरकार बनाई है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘यह सरकार कब तक चलेगी’: डीएमके ने तमिलनाडु फ्लोर टेस्ट के दौरान विजय सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाए अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु फ्लोर टेस्ट(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)टीवीके सरकार तमिलनाडु(टी)उदयनिधि स्टालिन वॉकआउट(टी)जोसेफ विजय विश्वास मत(टी)डीएमके विपक्ष तमिलनाडु(टी)तमिलनाडु गठबंधन सरकार(टी)विश्वास मत समर्थन पार्टियां
केरल: ‘वायनाड अगला गठबंधन बनेगा…’ राहुल गांधी के विरोध में क्यों लगे पोस्टर

केरल के अगले मुख्यमंत्री का नाम बुधवार को सामने आने की संभावना है. ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस के आलाकमान दो से पहले इसे आधिकारिक तौर पर जारी कर सकते हैं। निर्णय में देरी के कारण मुख्यमंत्री पद के तीन प्रमुख प्रत्याशियों अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (मचा) के संगठन मखा सचिव के सी वेणुगोपाल, केरल विधानसभा में नामांकन के नेता वी डी शेरिशन और वरिष्ठ नेता राकेश चेन्निथला के खेमों में बढ़त बढ़ गई है। मुख्यमंत्री के चयन पर जारी विचार-विमर्श के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को दिल्ली में केरल प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) के पूर्व अध्यक्षों के साथ बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य वरिष्ठ नेताओं के विचार को लंबे समय से जारी अनिश्चितता को समाप्त करना था। गोदाम के अनुसार, दिल्ली में बुलाए गए नेताओं ने मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी राय साझा की। अलकमान की चर्चाओं में वेणुगोपाल, श्रीशेषन और चेन्निथला के नाम प्रमुखता से उभरे हैं। पूर्व केपीसीसी अध्यक्ष के बाद राहुल गांधी से मुलाकात. मुरलीधरन ने कहा कि पार्टी बुधवार तक मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा कर सकती है. एक अन्य पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वी एम इवान ने कहा कि राहुल के साथ वे केरल की राजनीतिक स्थिति और जनता के मूड पर विस्तार से चर्चा कर रहे हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि पार्टी जनभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए निर्णय लिया जाएगा। इस बीच, वायनाड में राहुल और प्रियंका गांधी की कम्युनिस्ट पार्टी के पोस्टर लगाए गए हैं, जिसके अंदर भारी तनाव की स्थिति आ गई है। वायनाड जिला कांग्रेस समिति (डीसीसी) कार्यालय के पास अंग्रेजी में लिखे इन पोस्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि के सी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री चुना जाता है, तो केरल की जनता अलकमान को माफ नहीं करेगी। एक पोस्टर में दावा किया गया है कि अगर ऐसा फैसला लिया गया तो वायनाड ‘अगला समझौता’ बन जाएगा। ये भी पढ़ें- तमिलनाडु के सीएम बने थलापति की विजय, तो आए इस देश के प्रधानमंत्री का बयान, कहा- एक उंगली की क्रांति… पोस्टर में वेणुगोपाल की आलोचना करते हुए उन्हें राहुल गांधी का ‘बैग ढोने वाला’ बताया गया है और चेतावनी दी गई है कि अगर उनका नेतृत्व समर्थन से मिला तो विरोध प्रदर्शन तेज होगा। कुछ पोस्टर्स में सीधे तौर पर राहुल और प्रियांक को ‘मूर्खतापूर्ण शेयर’ को माफ नहीं करने की बात कही गई है। पोस्टर में गांधी भाई-बहन को वायनाड भूल जाने की चेतावनी देते हुए कहा गया है कि वे इस क्षेत्र से जीत नहीं पाएंगे। पिछले महीने हुए विधान सभा चुनाव में कांग्रेस ने नीत युनाइटेड को 140 में से 102 में बढ़त दिलाई और दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। चार मई को नतीजे आने के बाद से ही मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला है। पार्टी के पर्यवेक्षक अजय माकन और मुकुल वासनिक द्वारा बेंचमार्क की राय राय और केंद्रीय नेतृत्व के समर्थकों और केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ के साथ चर्चा के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। 140 लोक सभा में कांग्रेस के 63 विधायक हैं। उनके सहयोगियों में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आइयू सैंपल) के 22, केरल कांग्रेस (केईसी) के आठ और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (रिजपी) के तीन पदाधिकारी शामिल हैं।
टीवीके की सबसे बड़ी ढाल? कैसे सीएम विजय के फ्लोर टेस्ट ने उन्हें मजबूत स्थिति में ला दिया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:13 मई, 2026, 12:10 IST अन्नाद्रमुक विद्रोहियों के एक बड़े समूह के समर्थन के साथ, विजय को अपनी सरकार गिरने के लगातार डर के बिना शासन करने के लिए राजनीतिक सांस लेने की जगह और अधिक स्वतंत्रता मिली है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने विश्वास मत जीत लिया। सी जोसेफ विजय ने बुधवार को तमिलनाडु विधानसभा में 144 वोटों के साथ विश्वास मत आसानी से जीत लिया, जिससे मुख्यमंत्री के रूप में उनकी स्थिति मजबूत हो गई और उनकी नवेली सरकार को कुछ हफ्ते पहले की अपेक्षा कहीं अधिक स्थिर स्थिति मिली। विजय की निर्णायक फ्लोर टेस्ट जीत के पीछे सबसे बड़ा कारक 25 बागी एआईएडीएमके विधायकों द्वारा दिया गया समर्थन था, जिनके समर्थन से तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) सरकार की संख्या में काफी वृद्धि हुई और इसकी स्थिरता पर चिंताएं कम हो गईं। अन्नाद्रमुक विद्रोहियों के साथ-साथ, विजय – जिन्होंने तमिलनाडु के द्रविड़ एकाधिकार को तोड़ा – ने कांग्रेस, आईयूएमएल, वीसीके, सीपीआई और सीपीआई (एम) का भी समर्थन हासिल किया, जिससे टीवीके प्रमुख को विधानसभा में अपने पहले बड़े परीक्षण में बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार करने में मदद मिली। यह भी पढ़ें | एआईएडीएमके में फिर दरार! क्यों 30 बागी विधायक विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार के पीछे रैली कर रहे हैं? सिर्फ एक प्रक्रियात्मक जीत से अधिक, विश्वास मत ने विजय को राजनीतिक रूप से मौलिक रूप से मजबूत किया है। अब तक, टीवीके सरकार को गठबंधन के अंकगणित पर निर्भर और सहयोगियों के दबाव के प्रति संवेदनशील माना जाता था। अन्नाद्रमुक विद्रोहियों के एक बड़े समूह के अब उनके समर्थन में होने से, विजय को अपनी सरकार गिरने के लगातार डर के बिना शासन करने के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक सांस लेने की जगह और अधिक स्वतंत्रता मिल गई है। सांस लेने के लिए जगह? उम्मीद है कि विद्रोहियों के समर्थन से विजय को सहयोगियों से निपटने में भी काफी मदद मिलेगी। एक नाजुक गठबंधन में, छोटी पार्टियां अक्सर समर्थन वापस लेने की धमकी देकर असंगत प्रभाव का इस्तेमाल करती हैं। लेकिन अन्नाद्रमुक विधायकों द्वारा बनाई गई अतिरिक्त गद्दी का मतलब है कि विजय अब अस्तित्व के लिए पूरी तरह से हर सहयोगी पर निर्भर नहीं हैं, जिससे उन्हें अपने राजनीतिक और प्रशासनिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अधिक जगह मिल गई है। यह भी पढ़ें | अनिश्चितता से सीएम-इन-वेटिंग तक: कैसे विजय ने 92 घंटों में 120 विधायकों को सुरक्षित कर लिया इस नतीजे से द्रमुक की तुलना में शक्ति संतुलन में भी बदलाव आने की संभावना है, जिसने शक्ति परीक्षण से दूर रहने का फैसला किया है। राजनीतिक रूप से सुरक्षित विजय सरकार सत्तारूढ़ खेमे के भीतर अस्थिरता पर भरोसा करने की विपक्ष की क्षमता को कम कर देती है और अभिनेता से नेता बने विजय को धीरे-धीरे खुद को तमिलनाडु की राजनीति में केंद्रीय ताकत के रूप में स्थापित करने की अनुमति दे सकती है। शक्ति परीक्षण से पहले, विजय ने सहयोगियों और प्रतिद्वंद्वियों के साथ दो दिनों में कई बैठकें कीं, जिनमें अन्नाद्रमुक और द्रमुक खेमों के नेताओं के अलावा नाम तमिलर काची के संस्थापक सीमान भी शामिल थे, जो उनके सबसे तीखे आलोचकों में से एक हैं। इस आउटरीच को महत्वपूर्ण वोट से पहले समर्थन को मजबूत करने और राजनीतिक परिपक्वता दिखाने के व्यापक प्रयास के हिस्से के रूप में देखा गया। अब विश्वास प्रस्ताव उनके पीछे है, विजय की तात्कालिक राजनीतिक चुनौती अस्तित्व से हटकर शासन की ओर बढ़ गई है और पदभार ग्रहण करने के बाद पहली बार, उनकी सरकार के पास एक संकट से दूसरे संकट में पड़े बिना काम करने के लिए संख्याबल मौजूद है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : चेन्नई (मद्रास), भारत, भारत न्यूज़ इंडिया टीवीके की सबसे बड़ी ढाल? कैसे सीएम विजय का फ्लोर टेस्ट टैली उन्हें मजबूत स्थिति में छोड़ देता है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)सी जोसेफ विजय विश्वास मत(टी)तमिलनाडु विधानसभा राजनीति(टी)विजय मुख्यमंत्री(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)एआईएडीएमके विद्रोही विधायक(टी)टीवीके सरकार स्थिरता(टी)विश्वास मत जीत(टी)द्रविड़ एकाधिकार टूटना
विजय ने तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत साबित किया, 144 विधायकों ने टीवीके सरकार का समर्थन किया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:13 मई, 2026, 11:57 IST राज्यपाल आरवी आर्लेकर के 13 मई या उससे पहले इसे आयोजित करने के निर्देशों के अनुरूप, सदन में विश्वास मत आयोजित किया गया था। तमिलनाडु विधानसभा में सीएम जोसेफ विजय. (एक्स) टीवीके फ़्लोर टेस्ट: सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने बुधवार को तमिलनाडु विधानसभा में महत्वपूर्ण फ्लोर टेस्ट पास कर लिया क्योंकि 234 सदस्यीय विधानसभा में 144 विधायकों ने टीवीके सरकार का समर्थन किया। 22 विधायकों ने सरकार के खिलाफ वोट किया और पांच तटस्थ रहे. महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी की चेतावनी के बावजूद अन्नाद्रमुक के बागी गुटों द्वारा उनके लिए मतदान करने के बाद विजय के लिए बहुमत की संख्या में बड़ी वृद्धि हुई। लाइव अपडेट का पालन करें राज्यपाल आरवी आर्लेकर के 13 मई या उससे पहले इसे आयोजित करने के निर्देशों के अनुरूप, सदन में विश्वास मत आयोजित किया गया था। मतदान से पहले, मुख्यमंत्री विजय ने सोमवार और मंगलवार को सहयोगियों, प्रतिद्वंद्वियों एआईएडीएमके और डीएमके और कटु आलोचक एनटीके संस्थापक सीमन के साथ बैक-टू-बैक बैठकें कीं। टीवीके सरकार का समर्थन किसने किया? सत्तारूढ़ टीवीके को 144 विधायकों का समर्थन मिला. टीवीके की कुल ताकत 107 है। सत्ता पक्ष को कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन मिला. सीपीआई, सीपीआई (एम), वीसीके और आईयूएमएल- ने भी दो-दो विधायकों के साथ अभिनेता से नेता बने अभिनेता की सरकार को समर्थन दिया। विशेष रूप से, वरिष्ठ नेता एसपी वेलुमणि और सी वे शनमुगम के नेतृत्व में और पार्टी प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी के विरोधी 26 एआईएडीएमके विधायकों ने भी सरकार का समर्थन किया। और पढ़ें: ‘यह सरकार कब तक चलेगी’: डीएमके ने तमिलनाडु फ्लोर टेस्ट के दौरान विजय सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाए कार्यवाही के दौरान बोलते हुए, वीसीके विधायक वन्नी अरासु ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष दलों ने सरकार को बिना शर्त समर्थन दिया है और विश्वास जताया है कि सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा करेगी। वन्नी अरासु ने कहा कि राज्यपाल शासन लाने के भाजपा के कथित अप्रत्यक्ष प्रयास को रोकने के लिए समर्थन दिया गया और राज्य के अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता पर बल दिया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री विजय के पदभार संभालने के बाद विपक्षी नेताओं से मिलने और उनका अभिनंदन करने की भी सराहना की और इसे राजनीतिक सभ्यता का सकारात्मक उदाहरण बताया. अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएएमके) के एकमात्र विधायक एस कामराज, जिन्हें एक दिन पहले पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था, ने भी सत्तारूढ़ टीवीके सरकार को अपना समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने कहा, “मैंने कल तमिलागा वेट्ट्री कज़गम सरकार का समर्थन किया था, मैं आज भी इसका समर्थन करता हूं, और मैं अगले पांच वर्षों तक इसका समर्थन करना जारी रखूंगा। सीएम विजय पूरे राज्य की रक्षा कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि वह मुझे भी नहीं छोड़ेंगे। मुझे यकीन है कि हमारा विजय मेरी रक्षा करेगा और मुझे भी बचाएगा।” डीएमके का वाकआउट; पीएमके, बीजेपी वोटिंग से दूर रहे इस बीच, एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) आज तमिलनाडु विधानसभा में शक्ति परीक्षण के दौरान मतदान से अनुपस्थित रही। सदन को संबोधित करते हुए, विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने नवनिर्वाचित सरकार पर निशाना साधा और कहा कि राज्य के लोग पहले से ही सवाल कर रहे थे कि सरकार कितने समय तक चलेगी और उन्हें लगता है कि उन्होंने इसके लिए मतदान करके “गंभीर त्रुटि” की है। और पढ़ें: ‘विज्ञान पर ध्यान दें’: निजी ज्योतिषी को ओएसडी नियुक्त किए जाने के बाद वीसीके, डीएमडीके ने सीएम विजय पर निशाना साधा पार्टी के फैसले की घोषणा करते हुए, उदयनिधि ने कहा कि डीएमके वॉकआउट करेगी और विश्वास मत में भाग नहीं लेगी। इस बीच, तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले राजग का हिस्सा भाजपा और पीएमके ने मतदान में भाग नहीं लिया। तमिलनाडु सरकार का गठन कैसे हुआ? विजय की टीवीके हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन 234 सदस्यीय सदन में बहुमत के आंकड़े 118 से 10 सीटें कम रह गई। हालाँकि, चूंकि विजय ने दो सीटें जीतीं और उन्होंने उनमें से एक से इस्तीफा दे दिया, इसलिए कमी 11 हो गई। तब से, अभिनेता से नेता बने अभिनेता ने कांग्रेस (5), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (2), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (2), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (2) और विदुथलाई चिरुथिगल काची (2) से समर्थन प्राप्त कर लिया है, जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन की ताकत 120 हो गई है और पिछले सप्ताह सरकार बनाई है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया विजय ने तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत साबित किया, 144 विधायकों ने टीवीके सरकार का समर्थन किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)टीवीके फ्लोर टेस्ट(टी)तमिलनाडु विधानसभा विश्वास मत(टी)सी जोसेफ विजय सरकार(टी)टीवीके सरकार बहुमत(टी)एआईएडीएमके विधायकों का समर्थन(टी)डीएमके वॉकआउट फ्लोर टेस्ट(टी)तमिलनाडु गठबंधन सरकार(टी)विश्वास मत तमिलनाडु
दिनभर तनाव से परेशान? अपनाएं ये 5 छोटी-छोटी आदतें और दिमाग को तुरंत हल्का करें!

Mental Health Tips: कभी ऐसा लगता है कि सब कुछ ठीक होते हुए भी मन बेचैन है? जैसे दिमाग बिना वजह भागता रहता है, छोटी-छोटी बातें भी भारी लगने लगती हैं और सुकून कहीं खो सा जाता है. सच कहें तो आज की तेज रफ्तार जिंदगी में ये फीलिंग अब आम हो गई है. काम का दबाव, घर की जिम्मेदारियां और भविष्य की चिंता-ये सब मिलकर हमारे दिमाग को थका देते हैं. ऐसे में सिर्फ शरीर का ख्याल रखना काफी नहीं होता, बल्कि दिमाग को भी थोड़ा आराम और सही दिशा देना जरूरी हो जाता है. अच्छी बात ये है कि इसके लिए आपको कोई बड़ा बदलाव नहीं करना, बस कुछ छोटी-छोटी आदतें अपनानी हैं. ये आदतें धीरे-धीरे आपके दिन को हल्का, दिमाग को शांत और जिंदगी को ज्यादा बैलेंस बना सकती हैं. मेंटल हेल्थ क्यों हो रही है सबसे बड़ी चिंताआजकल लोग बाहर से फिट दिखते हैं, लेकिन अंदर से थके हुए होते हैं. ऑफिस के लंबे घंटे, मोबाइल पर लगातार स्क्रॉलिंग और नींद की कमी-ये तीन चीजें सबसे ज्यादा असर डालती हैं. भोपाल के आईटी सेक्टर में काम करने वाले 28 साल के राहुल बताते हैं कि उन्हें बिना वजह एंग्जायटी होने लगी थी, जबकि सब कुछ ठीक चल रहा था. बाद में उन्होंने अपनी दिनचर्या में छोटे बदलाव किए और फर्क खुद महसूस किया. सुबह की शुरुआत तय करती है आपका मूडपॉजिटिव सोच से करें दिन की शुरुआतसुबह उठते ही अगर आप सीधे मोबाइल उठा लेते हैं, तो आपका दिमाग तुरंत बाहर की दुनिया में उलझ जाता है. इसके बजाय 5-10 मिनट खुद के साथ बैठें. गहरी सांस लें और दिन के लिए कोई अच्छी बात सोचें. ये छोटी सी आदत पूरे दिन को हल्का बना सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. नींद से मत करें समझौता7-8 घंटे की नींद है जरूरीनींद की कमी सिर्फ थकान नहीं देती, बल्कि आपका मूड भी खराब कर देती है. चिड़चिड़ापन, फोकस की कमी और बार-बार गुस्सा आना-ये सब नींद पूरी न होने के संकेत हैं. कोशिश करें कि सोने से पहले मोबाइल और लैपटॉप से दूरी बना लें. एक फिक्स टाइम पर सोना और उठना आपकी मेंटल हेल्थ को काफी बेहतर बना सकता है. एक्टिव बॉडी = शांत दिमागरोज थोड़ा चलना या योग करना शुरू करेंजरूरी नहीं कि आप जिम जाएं या भारी एक्सरसाइज करें. रोज 20-30 मिनट की वॉक या हल्का योग भी काफी है. जब आप चलते हैं या एक्सरसाइज करते हैं, तो शरीर में ऐसे हार्मोन बनते हैं जो आपको अंदर से खुश महसूस कराते हैं. यही वजह है कि कई लोग कहते हैं कि “वॉक के बाद दिमाग हल्का लगने लगता है.” दिल की बात दबाकर न रखेंकिसी भरोसेमंद इंसान से शेयर करेंहममें से कई लोग अपनी परेशानियां किसी से शेयर नहीं करते. बाहर से मजबूत दिखने की कोशिश करते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर टूटते रहते हैं, अगर कुछ परेशान कर रहा है, तो उसे किसी दोस्त, भाई-बहन या परिवार के सदस्य से जरूर शेयर करें. कई बार सिर्फ बोल देने से ही आधी टेंशन खत्म हो जाती है. खुद के लिए समय निकालना जरूरी है“मी टाइम” को इग्नोर न करेंदिनभर काम करने के बाद अगर आपके पास खुद के लिए समय नहीं बचता, तो धीरे-धीरे थकान बढ़ने लगती है. हर दिन कम से कम 20-30 मिनट सिर्फ अपने लिए रखें. इस समय में आप गाना सुन सकते हैं, किताब पढ़ सकते हैं या बस शांत बैठ सकते हैं. ये छोटा सा ब्रेक आपके दिमाग को रीसेट करने जैसा काम करता है. छोटे बदलाव, बड़ा असरमेंटल हेल्थ को ठीक रखने के लिए बड़े कदम नहीं, बल्कि छोटी आदतें ज्यादा काम आती हैं. जैसे सुबह की सही शुरुआत, पूरी नींद, थोड़ी एक्सरसाइज, खुलकर बात करना और खुद के लिए समय निकालना, अगर आप इन चीजों को धीरे-धीरे अपनी जिंदगी में शामिल करते हैं, तो कुछ ही दिनों में फर्क महसूस होने लगेगा. दिमाग को शांत रखना कोई मुश्किल काम नहीं है, बस आपको अपने रूटीन में थोड़ी समझदारी लानी होगी. याद रखें, खुश रहना भी एक आदत है-और ये आदत आप आज से शुरू कर सकते हैं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)








